6 भगवान के डाकिए पक्षी और बादल, ये भगवान के डाकिए हैं, जो एक महादेश से दूसरे महादेश को जाते हैं। हम तो समझ नहीं पाते हैं मगर उनकी लाइर् चिऋियाँ पेड़, पौध्े, पानी और पहाड़ बाँचते हैं। हम तो केवल यह आँकते हैं कि एक देश की ध्रती दूसरे देश को सुगंध् भेजती है। और वह सौरभ हवा में तैरते हुए पक्ष्िायों की पाँखों पर तिरता है। और एक देश का भाप दूसरे देश में पानी बनकर गिरता है। μरामधरी सिंह ‘दिनकर’ वसंत भाग 3 कविता से 1.कवि ने पक्षी और बादल को भगवान के डाकिए क्यों बताया है? स्पष्ट कीजिए। 2.पक्षी और बादल द्वारा लाइ गइर् चिऋियों को कौन - कौन पढ़ पाते हैं? सोचकर लिख्िाए। 3.किन पंक्ितयों का भाव हैμ ;कद्ध पक्षी और बादल प्रेम, सद्भाव और एकता का संदेश एक देश से दूसरे देश को भेजते हैं। ;खद्ध प्रवृफति देश - देश में भेदभाव नहीं करती। एक देश से उठा बादल दूसरे देश में बरस जाता है। 4.पक्षी और बादल की चिऋियों में पेेड़ - पौध्े, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं? 5.फ्एक देश की ध्रती दूसरे देश को सुगंध् भेजती हैय्μकथन का भाव स्पष्ट कीजिए। पाठ से आगे 1.पक्षी और बादल की चिऋियों के आदान - प्रदान को आप किस दृष्िट से देख सकते हैं? 2.आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साध्न इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिऋियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए दस पंक्ितयाँ लिख्िाए। 3.‘हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका’ क्या है? इस विषय पर दस वाक्य लिख्िाए। अनुमान और कल्पना डाकिया, इंटरनेट के वल्डर् वाइड वेब ;डब्ल्यू. डब्ल्यू. डब्ल्यू. ॅॅॅण्द्ध तथा पक्षी और बादलμइन तीनों संवादवाहकों के विषय में अपनी कल्पना से भगवान के डाकिये एक लेख तैयार कीजिए। लेख लिखने के लिए आप ‘चिऋियों की अनूठी दुनिया’ पाठ का सहयोग ले सकते हैं।

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