4 दीवानों की हस्ती हम भ्िाखमंगों की दुनिया में, स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले, हम एक निसानी - सी उर पर, ले असपफलता का भार चले। अब अपना और पराया क्या? आबाद रहें रुकनेवाले! हम स्वयं बँँधे थे और स्वयं हम अपने बंधन तोड़ चले। μभगवतीचरण वमार् कविता से 1.कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है? 2.भ्िाखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटानेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असपफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है? 3.कविता में ऐसी कौन - सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी? कविता से आगे ऽ जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चचार् कीजिए। वसंत भाग 3 अनुमान और कल्पना ऽ एक पंक्ित में कवि ने यह कहकर अपने अस्ितत्व को नकारा है कि फ्हम दीवानों की क्या हस्ती, हंै आज यहाँ, कल वहाँ चले।य् दूसरी पंक्ित मंे उसनेयह कहकर अपने अस्ितत्व को महत्त्व दिया है कि फ्मस्ती का आलम साथ चला, हम ध्ूल उड़ाते जहाँ चले।य् यह पफाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना पफाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्ितयाँ भी हैं उन्हें ध्यानपूवर्क पढि़ए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोध्ी बातें क्यों की गइर् हैं? भाषा की बात ऽ संतुष्िट के लिए कवि ने ‘छककर’ ‘जी भरकर’ और ‘खुलकर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। इसी भाव को व्यक्त करनेवाले वुफछ और शब्द सोचकर लिख्िाए, जैसेμहँसकर, गाकर।

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Vasant Bhag 3 Chapter-4

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दीवानों की हस्ती

हम दीवानों की क्या हस्ती,

हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले,

मस्ती का आलम साथ चला,

हम धूल उड़ाते जहाँ चले।


आए बनकर उल्लास अभी,

आँसू बनकर बह चले अभी,

सब कहते ही रह गए, अरे,

तुम कैसे आए, कहाँ चले?


किस ओर चले? यह मत पूछो,

चलना है, बस इसलिए चले,

जग से उसका कुछ लिए चले,

जग को अपना कुछ दिए चले,


दो बात कही, दो बात सुनी;

कुछ हँसे और फिर कुछ रोए।

छककर सुख-दुख के घूँटों को

हम एक भाव से पिए चले।


हम भिखमंगों की दुनिया में,

स्वच्छंद लुटाकर प्यार चले,

हम एक निसानी-सी उर पर,

ले असफलता का भार चले।


अब अपना और पराया क्या?

आबाद रहें रुकनेवाले!

हम स्वयं बँँधे थे और स्वयं

हम अपने बंधन तोड़ चले।

–भगवतीचरण वर्मा

प्रश्न-अभ्यास


कविता से

1. कवि ने अपने आने को ‘उल्लास’ और जाने को ‘आँसू बनकर बह जाना’ क्यों कहा है?

2. भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटानेवाला कवि एेसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार की तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

3. कविता में एेसी कौन-सी बात है जो आपको सबसे अच्छी लगी?

कविता से आगे

 जीवन में मस्ती होनी चाहिए, लेकिन कब मस्ती हानिकारक हो सकती है? सहपाठियों के बीच चर्चा कीजिए।

अनुमान और कल्पना

 एक पंक्ति में कवि ने यह कहकर अपने अस्तित्व को नकारा है कि "हम दीवानों की क्या हस्ती, हैं आज यहाँ, कल वहाँ चले।" दूसरी पंक्ति में उसने यह कहकर अपने अस्तित्व को महत्त्व दिया है कि "मस्ती का आलम साथ चला, हम धूल उड़ाते जहाँ चले।" यह फाकामस्ती का उदाहरण है। अभाव में भी खुश रहना फाकामस्ती कही जाती है। कविता में इस प्रकार की अन्य पंक्तियाँ भी हैं उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और अनुमान लगाइए कि कविता में परस्पर विरोधी बातें क्यों की गई हैं?

भाषा की बात

 संतुष्टि के लिए कवि ने ‘छककर’ ‘जी भरकर’ और ‘खुलकर’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया है। इसी भाव को व्यक्त करनेवाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे–हँसकर, गाकर।

शब्दार्थ

हस्ती – अस्तित्व

आलम – दुनिया, माहौल

स्वच्छंद – अपनी इच्छा के अनुसार चलने वाला


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