10ण्1 भूमिका आप अनेक प्रकार के आकारों से परिचित हैं। आप पिछली कक्षाओं में इनमें से वुफछ आकारों की रचना करना सीख चुके हैं। उदाहरणतः अब आप एक दी हुइर् लंबाइर् का रेखाखंड, एक रेखाखंड पर एक लंब रेखा, एक कोण, कोण का समद्विभाजक, एक वृत्त, इत्यादि की रचना कर सकते हैं। अब आप समांतर रेखाएँ तथा कुछ प्रकार के त्रिाभुजों को खींचना सीखेंगे। 10ण्2 एक दी हुइर् रेखा के समांतर उस ¯बदु से होकर रेखा खींचना जो उस रेखा पर स्िथत नहीं है आइए एक ियाकलाप से प्रारंभ करें। ;आकृति 10ण्1द्ध ;पद्ध एक कागश की शीट लीजिए और इसे ;पद्ध ;पपद्धमोड़कर एक निशान बनाइए। यह मोड़ का निशान एक रेखा स को निरूपित करता है। ;पपद्ध कागश को खोल लीजिए। इस कागश पर स के बाहर एक ¯बदु । अंकित कीजिए। ;पपपद्ध;पपपद्ध इस ¯बदु। से होकर जाता हुआ और रेखा स ;पअद्ध पर लंब एक मोड़ का निशान बनाइए। इस लंब का नाम ।छ रख्िाए। ;पअद्ध अब, ¯बदु । से होकर इस लंब के लंबवत एक मोड़ का निशान बनाइए। इस नयी ;अद्ध लंबवत रेखा का नाम उ रख्िाए। अब, स द्यद्य उ आकृति 10ण्1 है क्या आप देख सकते हैं कि ऐसा क्यों है? यहाँ समांतर रेखाओं का कौन - सा गुण या कौन - से गुण यह कहने मंे सहायता कर सकता है या कर सकते हैं कि रेखाएँ स और उ समांतर हैं? आप तियर्क रेखा और समांतर रेखाओं से संबंध्ित गुणों में से किसी भी गुण का प्रयोग करके इस रचना को केवल पैमाना ;रूलरद्ध और परकार का प्रयोग करके कर सकते हैं। चरण 1 एक रेखाष्सष्और उसके बाहर स्िथत कोइर् ¯बदुष्।ष्लीजिए ख्आकृति10ण्2 ;पद्ध, । चरण 2 चरण 3 ¯बदु ठ को वेंफद्र मान कर और कोइर् सुविधजनक त्रिाज्या लेकर, स को ब् पर और ठ। को क् पर प्रतिच्छेद करता ;काटताद्ध हुआ एक चाप खींचिए ख्आकृति 10ण्2;पपपद्ध,। चरण 4 अब, । ¯बदु को वेंफद्र मान कर और चरण 3 वाली ही त्रिाज्या लेकर, ।ठ को ळ पर काटता हुआ एक चाप म्थ् खींचिए ख्आकृति 10ण्2 ;पअद्ध,। चरण 5 परकार के नुकीले सिरे को ब् पर रख्िाए और इसे खोल कर इस प्रकार समायोजित कीजिए कि पेंसिल की नोक क् पर रहे ख्आकृति 10ण्2 ;अद्ध,। चरण 6 ळ को वेंफद्र मानकर और परकार का खुलाव ;वचमदपदहद्ध चरण 5 वाला ही रखते हुए, एक चाप खींचिए जो चाप म्थ् को भ् पर काटे ख्आकृति 10ण्2 ;अपद्ध, । चरण 7 अब।भ् को मिलाकर रेखा उ खींचिए ख्आकृति 10ण्2 ;अपपद्ध,। ध्यान दीजिए कि∠।ठब् और ∠ठ।भ् एकांतर अंतःकोण हैं, आकृति10ण्2 ;पद्ध.;अपपद्ध जो परस्पर बराबर हैं। इसलिए उ द्यद्य स है। 1ण् उपरोक्त रचना में, क्या आप । से होकर जाती हुइर् अन्य रेखा खींच सकते हैं जो स के समांतर हो? 2ण् क्या आप इस रचना मंे इस प्रकार का परिवतर्न कर सकते हैं कि बराबर एकांतर अंतःकोण बनाने के स्थान पर बराबर संगत कोण बनें? 1ण् एक रेखा, ;मान लीजिए ।ठद्ध खींचिए और इसके बाहर स्िथत कोइर् ¯बदु ब् लीजिए। केवल पैमाना ;रूलरद्ध और परकार का प्रयोग करते हुए, ब् से होकर ।ठ के समांतर एक रेखा खींचिए। 2ण् एक रेखा स खींचिए और स पर स्िथत किसी भी ¯बदु पर स पर लंब खींचिए। इस लंब रेखा पर एक ¯बदु ग् लीजिए जो स से 4 बउ की दूरी पर हो। ग् से होकर स के समांतर एक रेखा उ खींचिए। 3ण् मान लीजिए स एक रेखा है और च् एक ¯बदु है जो स पर स्िथत नहीं है। च् से होकर स के समंातर एक रेखा उ खींचिए। अब च् को स के किसी ¯बदु फ से जोडि़ए। उ पर कोइर् अन्य ¯बदु त् चुनिए। त् से होकर, च्फ के समांतर एक रेखा खींचिए। मान लीजिए यह रेखा, रेखा स से ¯बदु ै पर मिलती है। समांतर रेखाओं के इन दोनों युग्मों से क्या आकृति बनती है? 10ण्3 त्रिाभुजों की रचना इस अनुच्छेद को पढ़ने से पहले, यह अच्छा होगा कि आप त्रिाभुजों की अवधारणाओं, विशेष रूप से त्रिाभुजों के गुणों और त्रिाभुजों की सवा±गसमता वाले अध्यायों को याद करें।आप भुजाओं और कोणों के आधरों पर त्रिाभुजों को वगीर्कृत करना तथा त्रिाभुजों से संबंध्ित निम्नलिख्िात महत्वपूणर् गुणों के बारे में जानते हैं: ;पद्ध एक त्रिाभुज का बाह्यकोण उसके दोनों अभ्िामुख अंतःकोणों के योगपफल के बराबर होता है। ;पपद्ध त्रिाभुज के तीनों अन्तः कोणों का योग 180° होता है। ;पपपद्ध त्रिाभुज की किन्हीं भी दो भुजाओं की लंबाइयों का योग तीसरी भुजा की लंबाइर् से अध्िक होता है। ;पअद्ध एक समकोण त्रिाभुज में कणर् पर बना वगर् शेष दो भुजाओं के वगो± के योगपफल के बराबर होता है। ‘त्रिाभुजों की सवा±गसमता’ वाले अध्याय मंे हमने देखा था कि एक त्रिाभुज प्राप्त किया जा सकता है, यदि उसके निम्नलिख्िात माप समूहों में से कोइर् एक दिया हुआ हैः ;पद्ध तीन भुजाएँ ;पपद्ध दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण ;पपपद्ध दो कोण और उनके बीच की भुजा ;पअद्ध समकोण त्रिाभुज के लिए, कणर् और एक पाद ;समहद्ध अब, हम इन अवधरणाओं का त्रिाभुजों की रचनाओं में प्रयोग करेंगे। 10ण्4 एक त्रिाभुज की रचना जब उसकी तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ दी हों ;ैैै कसौटीद्ध इस अनुच्छेद मंे, हम त्रिाभुजों की रचना करेंगे जब उसकी तीनों भुजाएँ ज्ञात हों। पहले हम इसकी एक रप़फ ;तवनहीद्ध आकृति खींचते हैं, जिससे उसकी भुजाओं का कुछ अनुमान लग जाए और पिफर तीनों भुजाओं में से एक भुजा लेकर रचना प्रारंभ करते हैं। निम्नलिख्िात उदाहरण को समझिए: उदाहरण 1 एक त्रिाभुज ।ठब् की रचना कीजिए, जबकि ।ठ त्र 5 बउ, ठब् त्र 6 बउ और ।ब् त्र 7 बउ दिया है। हल चरण 1 पहले हम दी हुइर् मापों की एक रपफ आकृति खींचते हैं ;इससे हमें आगे बढ़ने में सहायता मिलेगीद्ध ख्आकृति 10ण्3;पद्ध,। ;पद्धचरण 2 6 बउ लंबाइर् का रेखा खंड ठब् खींचिए ख्आकृति10ण्3;पपद्ध,। ;पपद्ध चरण 3 ¯बदु ठ से, ¯बदु ।ए 5 बउ की दूरी पर है। अतः, ठ को वेंफद्र मान कर और 5 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींचिए। ;अब । इस चाप पर कहीं स्िथत एक ¯बदु है। यह ज्ञात करना हमारा काम है कि । बिल्वुफल ठीक इस चाप पर कहाँ हैद्ध ख्आकृति 10ण्3;पपपद्ध,। ;पपपद्ध चरण 4 ब् से, ¯बदु ।, 7 बउ की दूरी पर है। अतः, ब् को वेंफद्र मान कर और 7 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींचिए। ;। इस चाप पर कहीं स्िथत होगा। हमें इसका पता लगाना हैद्धख्आकृति10ण्3;पअद्ध,। ;पअद्ध चरण 5 । को खींचे गए इन दोनों चापों पर स्िथत होना चाहिए। अतः, यह इन दोनों चापों का प्रतिच्छेद ¯बदु है। इन चापों के प्रतिच्छेद ¯बदु को । से अंकित कीजिए। ।ठ और।ब् को जोडि़ए। अब Δ।ठब् तैयार है ख्आकृति 10ण्3;अद्ध,। ;अद्धआकृति 10ण्3 ;पद्ध . ;अद्ध हम देखते हैं कि Δक्म्थ्ए Δ।ठब् को पूणर्तया ढक लेता है, अथार्त्् उसके साथ संपाती हो जाता है। ;ध्यान दीजिए कि इन दोनों त्रिाभुजों की रचना दी हुइर् तीन भुजाओं से की गइर् है।द्ध इस प्रकार, यदि एक त्रिाभुज की तीन भुजाएँ दूसरे त्रिाभुज की संगत तीन भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। यह ैैै सवा±गसमता नियम ;या कसौटीद्ध कहलाता है, जिसे आप पिछले अध्याय मंे पढ़ चुके हैं। एक विद्याथीर् ने एक ऐसा त्रिाभुज खींचने का प्रयत्न किया, जिसकी रप़फच् आकृति यहाँ दी गइर् है। पहले उसने फत् खींचा। पिफर उसने फ को वंेफद्र मान कर और 3 बउ त्रिाज्या लेकर एक चाप खींची तथा त् को वेंफद्र मानत्फ 6बउ कर और 2 बउ त्रिाज्या लेकर एक अन्य चाप खींची। परंतु वह च् नहीं प्राप्त आकृति 10ण्4: सोचिए, क्या यह सही कर सका। इसका क्या कारण है? इस प्रश्न से संबंध्ित त्रिाभुज के किस है। सही है? गुण को आप जानते हैं? क्या ऐसे त्रिाभुज का अस्ितत्व है? ;त्रिाभुजों के इस गुण को याद कीजिएः किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं का योग सदैव तीसरी भुजा से बड़ा होता हैद्ध। 10ण्5 एक त्रिाभुज की रचना जब दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके बीच के कोण की माप दी हो ;ै।ै कसौटीद्ध यहाँ, हमें दो भुजाएँ और उनके बीच का कोण दिया हुआ है। पहले हम एक रप़फ आकृति खींचते हैं और पिफर दिए हुए रेखाखंडों में से एक रेखाखंड खींचते हैं। इसके बाद अन्य चरणों का अनुसरण किया जाता है। उदाहरण 2 देख्िाए। ;रप़फ आकृतिद्धउदाहरण 2 एक त्रिाभुज च्फत् की रचना कीजिए, जब दिया है कि च्फ त्र 3 बउ, फत् त्र 5ण्5 बउ और ∠च्फत् त्र 60° है। हल चरण 1 पहले हम दी हुइर् मापों के अनुसार, एक;पद्ध रप़फ आकृति खींचते हैं। ;इससे हमें रचना की प्रिया निधर्रित करने में सहायता मिलेगीद्ध ख्आकृति 10ण्5;पद्ध,। ;पपद्ध चरण 2 5ण्5 बउ लंबाइर् का एक रेखाखंड फत् खींचिएख्आकृति10ण्5;पपद्ध,। चरण 3 फ पर किरण फग् खींचिए, जो फत् के ;पपपद्ध साथ 60° का कोण बनाए। ;¯बदु च् कोण की इसी किरण पर कहीं स्िथत होगाद्ध ख्आकृति10ण्5;पपपद्ध,। चरण 4 ;च् को निश्िचत करने के लिए, दूरी फच् दी हुइर् है।द्ध फ को वेंफद्र मान कर 3 बउ त्रिाज्या वाली एक चाप खींचिए। यह फग् को ¯बदु च् पर काटता है। ख्आकृति10ण्5;पअद्ध,। ;पअद्ध चरण 5 च्त् को जोडि़ए। इस प्रकार, Δच्फत् प्राप्त हो जाता है ख्आकृति 10ण्5 ;अद्ध,। ;अद्धआकृति 10ण्5 ;पद्ध.;अद्ध रचना करने के लिए, दिए हुए आँकड़े पयार्प्त नहीं हैं। अब Δ।ठब् की रचना करने का प्रयत्न कीजिए, जब ।ठ त्र 3 बउ, ।ब् त्र 5 बउ और ∠ठ त्र 30° है। हम क्या प्रेक्ष्िात करते हैं? पुनः, Δ।ठब् की रचना अद्वितीय रूप से नहीं की जा सकती है। इस प्रकार, हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि एक अद्वितीय त्रिाभुज की रचना तभी की जा सकती है जब उसकी दो भुजाओं की लंबाइयाँ और उनके मध्य स्िथत ;बीच केद्ध कोण का माप दिया हुआ हो। 10ण्6 एक त्रिाभुज की रचना जब उसके दो कोणों के माप और इन कोणों के बीच की भुजा की लंबाइर् दी हो ;।ै। कसौटीद्ध जैसा पहले किया था, एक रप़फ आकृति खींिचए। अब, दिया हुआ रेखाखंड खींचिए। दोनों अंत ¯बदुओं पर कोण बनाइए। उदाहरण 3 देख्िाए। उदाहरण 3 Δग्ल्र् की रचना कीजिए, यदि, ग्ल् त्र 6 बउ, उ∠र्ग्ल् त्र 30° और उ∠ग्ल्र् त्र 100° है। हल ;रप़फ आकृतिद्ध चरण 1 वास्तविक रचना से पहले, हम इस पर अंकित मापों के अनुसार एक रप़फ आकृति खींचते हैं। ;इससे वुफछ अनुमान लग जाता है कि वैफसे रचना की जाएद्धख्आकृति10ण्6;पद्ध,। ;पद्धचरण 2 6 बउ लंबाइर् का रेखाखंड ग्ल् खींचिए ख्आकृति10ण्6;पपद्ध,। ;पपद्ध चरण 3 ग् पर एक किरण ग्च् खींचिए जो ग्ल् से 30° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध् के अनुसार ¯बदु र् किरण ग्च् पर कहीं स्िथत ;पपपद्धहोना चाहिए ख्आकृति10ण्6;पपपद्ध,। चरण 4 ल् पर एक किरणल्फ खींचिए, जो ल्ग् से 100° का कोण बनाए। दिए हुए प्रतिबंध् के अनुसार र् किरण ल्फ पर भी अवश्य स्िथत होना चाहिए ख्आकृति10ण्6;पअद्ध,। ;पअद्ध ;संकेत: त्रिाभुज के कोण योग गुण को याद कीजिएद्ध। 3ण् जाँच कीजिए कि आप Δक्म्थ् की रचना कर सकते हैं या नहीं, यदि म्थ् त्र 7ण्2 बउ, उ∠म् त्र 110° और उ∠थ् त्र 80° है। अपने उत्तर की पुष्िट कीजिए। 10ण्7 एक समकोण त्रिाभुज की रचना, जब उसके एक पाद ;भुजाद्ध और कणर् की लंबाइर्याँ दी हुइर् हों। ;त्भ्ै कसौटीद्ध यहाँ, रप़फ आकृति बनाना सरल है। अब दी हुइर् भुजा के अनुसार, एक रेखाखंड खींचिए। इसके एक अंत्य ¯बदु पर एक समकोण बनाइए। त्रिाभुज की दी हुइर् लंबाइयों की भुजा और कणर् खींचने के लिए परकार का प्रयोग कीजिए। त्रिाभुज को पूरा कीजिए। निम्नलिख्िात उदाहरण पर विचार कीजिए: उदाहरण 4 Δस्डछ की रचना कीजिए, जिसका ∠स्डछ समकोण है तथा दिया है कि स्छ त्र 5 बउ और डछ त्र 3 बउ । ;रप़फ आकृतिद्धहल चरण 1 एक रप़फ आकृति खींचिए और उस पर दिए हुए माप को अंकित कीजिए। समकोण अंकित करना याद रख्िाए ;आकृति 10ण्7;पद्धद्ध। ;पद्धचरण 2 3 बउ लंबाइर् का रेखाखंड डछ खींचिए। ख्आकृति10ण्7;पपद्ध, ;पपद्ध चरण 3 ड पर डग् ⊥ डछ खींचिए। ;स् इसी लंब पर कहीं स्िथत होना चाहिएद्ध ख्आकृति10ण्7;पपपद्ध,। चरण 4 छ को वेंफद्र मानकर, 5 बउ त्रिाज्या का एक चाप खींचिए।;स् इसी चाप पर स्िथत होना चाहिए, क्योंकि यह छ से 5 बउ की दूरी पर हैद्ध ख्आकृति10ण्7;पअद्ध,। चरण 5 स् को लंब रेखा डग् पर और वेंफद्रछ वाले चाप पर स्िथत होना चाहिए। अतः, स् इन दोनों का प्रतिच्छेद ¯बदु होगा। स्छ को जोडि़ए। अब Δस्डछ प्राप्त हो जाता है। ख्आकृति 10ण्7;अद्ध,। आकृति 10ण्7 ;पद्ध.;अद्ध ;अद्ध विविध् प्रश्न नीचे कुछ त्रिाभुजों की भुजाओं और कोणों के माप दिए गए हैं। इनमें से उनकी पहचान कीजिए, जिनकी रचना नहीं की जा सकती तथा यह भी बताइए कि आप इनकी रचना क्यों नहींकर सकते। शेष त्रिाभुजों की रचना कीजिए। त्रिाभुज दिए हुए माप 1ण् Δ।ठब् उ∠। त्र 85°ए उ∠ठ त्र115°ए ।ठत्र5बउ 2ण् Δच्फत् उ∠फ त्र 30°ए उ∠त् त्र60°ए फत्त्र4ण्7 बउ 3ण् Δ।ठब् उ∠। त्र 70°ए उ∠ठ त्र 50°ए ।ब् त्र 3बउ 4ण् Δस्डछ उ∠स् त्र 60°ए उ∠छ त्र 120°, स्ड त्र5 बउ 5ण् Δ।ठब् ठब् त्र2बउ, ।ठ त्र 4बउ, ।ब् त्र 2बउ 6ण् Δच्फत् च्फ त्र 3ण्5 बउ, फत् त्र 4बउ, च्त् त्र 3ण्5 बउ 7ण् Δग्ल्र् ग्ल् त्र 3बउ, ल्र् त्र 4बउ, ग्र् त्र 5बउ 8ण् Δक्म्थ् क्म् त्र 4ण्5 बउ, म्थ् त्र 5ण्5 बउ, क्थ् त्र 4बउ हमने क्या चचार् की? इस अध्याय में हमने पैमाना ;रूलरद्ध और परकार की वुफछ रचनाओं की विध्ियों का अध्ययनकिया है। 1ण् एक दी हुइर् रेखा और ऐसे ¯बदु के लिए जो इस रेखा पर स्िथत नहीं है, हमने तियर्क छेदीरेखा आकृति में, रेखा के समांतर एक रेखा खींचने के लिए समान एकांतर कोणों कीअवधरणा का उपयोग किया है। इस रचना के लिए हम समान संगत कोणों की अवधरणा का उपयोग भी कर सकते हैं। 2ण् त्रिाभुजों की सवा±गसमता की संकल्पना का अप्रत्यक्ष रूप से उपयोग करते हुए हमने त्रिाभुजकी रचना की विध्ि का अध्ययन किया है। इस अध्याय में निम्नलिख्िात उदाहरणों की चचार् की गइर् है। ;पद्ध ैैैरू त्रिाभुज की तीन भुजाओं की लंबाइर् दी हुइर् है। ;पपद्ध ै।ैरू किन्हीं दो भुजाओं की लंबाइर् और इन भुजाओं के मध्य स्िथत कोण का माप दिया हुआ है। ;पपपद्ध ।।ैरू दो कोणों के माप और इनके मध्य स्िथत भुजा की लंबाइर् दी हुइर् है। ;पअद्ध त्भ्ैरू समकोण त्रिाभुज के कणर् एवं एक पाद की लंबाइर् दी हुइर् है।

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