5ण्1 रेखा आप पहले से ही जानते हैं कि किसी दिए हुए आकार में विभ्िान्न रेखाएँ, रेखाखंडों एवं कोणोंकी पहचान कैसे की जाती है। क्या आप निम्नलिख्िात आकृतियों में विभ्िान्न रेखाखंडों एवं कोणों की पहचान कर सकते हैं? ;आकृति 5ण्1द्ध ;पद्ध ;पद्ध ;पद्ध ;पद्ध आकृति 5ण्1 क्या आप यह भी जान सकते हैं कि निमिर्त कोण, न्यून कोण अथवा अध्िक कोण अथवा सम कोण हैं? स्मरण कीजिए कि एक रेखाखंड के दो अंत ¯बदु होते हैं। यदि हम इन दो अंत ¯बदुओं को अपनी - अपनी दिशाओं में अपरिमित रूप मंे बढ़ाते हैं तो हमें एक रेखा प्राप्त होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि एक रेखा का कोइर् अंत ¯बदु नहीं होता है। दूसरी तरप़फ स्मरण कीजिए कि किरण का एक अंत ¯बदु ;नामतः प्रारंभ्िाक ¯बदुद्ध होता है। उदाहरणतः नीचे दी हुइर्आकृतियों को देख्िाएः ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध आकृति 5ण्2 यहाँ आकृति 5ण्2 ;पद्ध रेखाखंड, आकृति 5ण्2 ;पपद्ध रेखा एवं आकृति 5ण्2 ;पपपद्ध एक किरण, को ेननतदशार्ती है। सामान्यतः एक रेखाखंड च्फ को संकेत च्फ ए रेखा ।ठ को संकेत ।ठ एवं किरण व्च् नतनन को संकेत व्च् ए से निदिर्ष्ट किया जाता है। अपने दैनिक जीवन से रेखाखंडों एवं किरणों के वुफछ उदाहरण दीजिए और उनके बारे में अपने मित्रों से चचार् कीजिए। पुनः स्मरण कीजिए कि रेखाएँ अथवा रेखाखंडों के मिलने पर कोण निमिर्त होता है। उपयुर्क्तआकृतियों ;आकृति 5ण्1द्ध में कोनों ;बवतदमतेद्ध को प्रेक्ष्िात कीजिए। जब दो रेखाएँ अथवा रेखाखंड किसी ¯बदु पर प्रतिच्छेद करते हैं तो इन कोनों का निमार्ण होता है। उदाहरणतः नीचे दी हुइर्आकृतियों को देख्िाएः ;पद्ध ;पपद्ध आकृति 5ण्3 आकृति 5ण्3 ;पद्ध में रेखाखंड।ठ एवं ठब्ए कोण।ठब् का निमार्ण करने के लिए, एक दूसरे को ¯बदु ठ पर प्रतिच्छेद करते हैं और रेखाखंड ठब् एवं।ब्ए कोण ।ब्ठ का निमार्ण करने के लिए एक दूसरे को ब् पर प्रतिच्छेद करते हैं इत्यादि। जबकि आकृति 5ण्3 ;पपद्ध में रेखाएँच्फ एवं त्ै एक दूसरे को ¯बदु व् पर प्रतिच्छेद करती हैं जिससे कोण च्व्ैए ैव्फए फव्त् और त्व्च् निमिर्त होते हैं। कोण ।ठब् को संकेत ∠।ठब् द्वारा निरूपितकिया जाता है। इस प्रकार आकृति 5ण्3 ;पद्ध में निमिर्त तीन कोण ∠।ठब्ए ∠ठब्। एवं ∠ठ।ब् हैं और आकृति 5ण्3 ;पपद्ध में निमिर्त चार कोण ∠च्व्ैए ∠ैव्फए ∠फव्त् एवं ∠च्व्त् हैं। आप पहले से ही अध्ययन कर चुके हैं कि न्यून कोण, अध्िक कोण अथवा सम कोण के रूप में कोणों का वगीर्करण कैसे किया जाता है। टिप्पणी कोण।ठब् के माप के संदभर् में, उ∠।ठब् को साधरणतः∠।ठब् के रूप में लिखेंगे। प्रकरण से यह बात स्पष्ट हो जाएगी कि हम कोण के संदभर् में अथवा इसके माप के सदंभर् में बात कर रहे हैं। 5ण्2 संबंध्ित कोण 5ण्2ण्1 पूरक कोण जब दो कोणों के मापों का योग 90° होता है, तो ये कोण पूरक कोण ;बवउचसमउमदजंतल ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध क्या ये दो कोण पूरक कोण हैं? हाँ आकृति 5ण्4 क्या ये दो कोण पूरक कोण हैं? नहीं जब दो कोण पूरक होते हैं, तो इनमें से प्रत्येक कोण दूसरे कोण का पूरक कहलाता है। उपयुर्क्त आरेख ;आकृति 5ण्4द्ध में ‘‘30° का कोण’’, ‘‘60° के कोण’’ का पूरक है और विलोमतः 3ण् क्या दो सम कोण एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं? 5ण्2ण्2 संपूरक कोण आइए कोणों के निम्नलिख्िात युग्मों को देखते हैं ;आकृति 5ण्6द्धरू ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध ;पअद्ध आकृति 5ण्6 क्या आप देखते हैं कि उपयुर्क्त प्रत्येक युग्म में ;आकृति 5ण्6द्ध कोणों के मापों का योग 180ह् पाया जाता है ? कोणों के ऐसे युग्म संपूरक कोण ;ेनचचसमउमदजंतल ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। जब दो कोण संपूरक होते हैं तो उनमें से प्रत्येक कोण दूसरे कोण का संपूरक कहलाता है। 1ण् क्या दो अध्िक कोण संपूरक हो सकते हैं? 2ण् क्या दो न्यून कोण संपूरक हो सकते हैं? 3ण् क्या दो सम कोण संपूरक हो सकते हैं? 1ण् आकृति 5ण्7 में संपूरक कोणों के युग्म ज्ञात कीजिए: जब आप एक पुस्तक को खोलते हैं तो यह उपयुर्क्तआकृति की तरह दिखाइर् देती है। । और ठ में हम कोणों का एक ऐसा युग्म पाते हैं जिसमें एक कोण दूसरे के साथ संलग्न है। आकृति 5ण्8 दोनों शीषो±। और ठ पर, हम पाते हैं कि कोणों का एक युग्म एक दूसरे से संलग्न रखा गया है। ये कोण इस प्रकार हैं कि: ;पद्ध उनका एक उभयनिष्ठ शीषर् है ;पपद्ध उनमें एक उभयनिष्ठ भुजा है और ;पपपद्ध जो भुजाएँ उभयनिष्ठ नहीं हैं, वे उभयनिष्ठ भुजा के एक - एक तरप़फ हैं। कोणों के ऐसे युग्म आसन्न कोण ;।करंबमदज ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। आसन्न कोणों में उभयनिष्ठ शीषर् एवं उभयनिष्ठ भुजा होती है परंतु कोइर् भी अंतः ¯बदु उभयनिष्ठ नहीं होता है। एक रैख्िाक युग्म ;सपदमंत चंपतद्ध, ऐसे आसन्न कोणों का युग्म होता है जिनकी वे भुजाएँ जो उभयनिष्ठ नहीं हैं, विपरीत दिशा में किरणें होती हैं। क्या ∠1ए ∠2 एक रैख्िाक युग्म हैं? हाँ क्या ∠1ए ∠2 एक रैख्िाक युग्म है? नहीं ;क्यों?द्ध ;पद्ध आकृति 5ण्11 ;पपद्धउपयुर्क्त आकृति 5ण्11 ;पद्ध में देख्िाए कि सम्मुख किरणें ;जो ∠1 एवं ∠2 की उभयनिष्ठ भुजाएँ नहीं हैंद्ध एक रेखा का निमार्ण करती हैं। इस प्रकार ∠1 ़ ∠2 का मान 180व हो जाता है। रैख्िाक युग्म के कोण संपूरक होते हैं। क्या आपने अपने आसपास में रैख्िाक युग्म के माॅडलों पर ध्यान दिया है? सावधनीपूवर्क नोट कीजिए कि संपूरक कोणों का युग्म, रैख्िाम युग्म तभी बनाता है, जब प्रत्येक को दूसरे के आसन्न रखा जाए। क्या आप अपने दैनिक जीवन में रैख्िाक युग्म के उदाहरण पाते हैं? सब्जी काटने वाले पटको प्रेक्ष्िात कीजिए ;आकृति 5ण्12द्ध। क्या आप कह सकते हैं कि काटने वाला ब्लेड पट के साथ एक सब्जी काटने वाला पट एक पेन स्टैंड काटने वाला ब्लेड, पट के साथ कोणों का पेन, स्टैंड के साथ कोणों का एक रैख्िाक युग्म बनाता है। आकृति 5ण्12 एक रैख्िाक युग्म बनाता है। पिफर से, पेन स्टैंड देख्िाए ;आकृति 5ण्12द्ध। क्या आप कह सकते हैं कि पेन, स्टैंड के साथ रैख्िाक युग्म बनाता है ? ;पपपद्ध ;पअद्धआकृति 5ण्13 5ण्2ण्5 उध्वार्ध्र सम्मुख कोण दो पेंसिल लीजिए और उन्हें मध्य मंे रबड़ बैंड की सहायता से एक - दूसरेके साथ बाँध् दीजिए, जैसा कि आकृति 5ण्14 में दशार्या गया है। इस प्रकार निमिर्त चार कोणों, ∠1ए ∠2ए ∠3 एवं ∠4 को देख्िाए आकृति 5ण्14 ∠1ए ∠3 के उध्वार्ध्र सम्मुख है और ∠4ए ∠2 के उध्वार्ध्र सम्मुख है। ∠1 एवं∠3 को हम उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों ;अमतजपबंससल वचचवेपजम ंदहसमेद्ध का एक युग्म कहते हैं। क्या आप उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों के अन्य युग्म का नाम दे सकते हैं? क्या ∠1ए ∠3 के बराबर दिखाइर् देता है? क्या ∠2ए ∠4 के बराबर दिखाइर् देता है? इसको सत्यापित करने से पहले आइए हम उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों के लिए वास्तविक जीवन से वुफछ उदाहरण देखते हैं ;आकृति 5ण्15द्ध। आप पाते हैं कि ∠1 एवं∠3 ने अपनी स्िथतियाँ परस्पर बदल ली हैं और इसी प्रकार ∠2 एवं∠4 ने भी अपनी स्िथतियाँ परस्पर बदल ली हैं । यह सब रेखाओं की स्िथति को बदले बिना किया गया है। इस प्रकार ∠1 त्र ∠3 एवं ∠2 त्र ∠4ण् हम इस निष्कषर् पर पहुंँचते हैं कि यदि दो रेखाएँ एक दूसरे को प्रतिच्छेद करती हैं तो इस प्रकार बने उध्वार्ध्र सम्मुख कोण समान होते हैं। आइए ज्यामिति का उपयोग करते हुए इसे सि( करने का प्रयास करते हैं। आइए दो रेखाएँ स और उ लेते हैं ;आकृति 5ण्17द्ध। हम इस परिणाम पर तकर्संगत युक्ित से निम्नलिख्िात प्रकार से पहँुच सकते हैं: मान लीजिए स एवं उ दो रेखाएँ हैं जो एक दूसरे को व् पर प्रतिच्छेद करती हैं और इस प्रकार ∠1ए ∠2ए ∠3 एवं ∠4 निमिर्त करती हैं।उ हम सि( करना चाहते हैं कि ∠1 त्र ∠3 एवं ∠2 त्र ∠4 आकृति 5ण्17 अब3∠1 त्र 180ह् दृ ∠2 ;∠1 एवं ∠2 रैख्िाक युग्म बनाते हैं इसलिए ∠1 ़ ∠2 त्र 180°द्ध ;पद्ध इसी प्रकार ∠3 त्र 180ह् दृ ∠2 ; ∠2ए ∠3 रैख्िाक युग्म बनाते हैं इसलिए ∠2 ़ ∠3 त्र 180°द्ध ;पपद्ध इसलिए ∠1 त्र ∠3 ख्;पद्ध और;पपद्ध से, इसी प्रकार हम सि( कर सकते हैं कि ∠2 त्र ∠4 ;प्रयास कीजिएद्ध।उदाहरण 1 आकृति 5ण्18 में निम्नलिख्िात की पहचान कीजिएः ;पद्ध आसन्न कोणों के पाँच युग्म ;पपद्ध तीन रैख्िाक युग्म ;पपपद्ध उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों के दो युग्म। हल ;पद्ध आसन्न कोणों के पाँच युग्म हैं: ;∠।व्म्ए ∠म्व्ब्द्धए ;∠म्व्ब्ए ∠ब्व्ठद्धए ;∠।व्ब्ए ∠ब्व्ठद्धए ;∠ब्व्ठए ∠ठव्क्द्धए ;∠म्व्ठए ∠ठव्क्द्ध;पपद्ध रैख्िाक युग्म हैं: ;∠।व्म्ए ∠म्व्ठद्धए ;∠।व्ब्ए ∠ब्व्ठद्धए ;∠ब्व्ठए ∠ठव्क्द्ध ;पपपद्ध उध्वार्ध्र सम्मुख कोण हैं: ;∠ब्व्ठए ∠।व्क्द्धए ;∠।व्ब्ए ∠ठव्क्द्ध 1ण् निम्नलिख्िात कोणों में से प्रत्येक का पूरक ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध 3ण् कोणों के निम्नलिख्िात युग्मों में से पूरक एवं संपूरक युग्मों की पृथव्फ - पृथव्फ पहचान कीजिए: ;पद्ध 65ह्ए 115ह् ;पपद्ध 63ह्ए27ह् ;पपपद्ध 112ह्ए68ह् ;पअद्ध 130ह्ए50ह् ;अद्ध 45ह्ए45ह् ;अपद्ध 80ह्ए10ह् 4ण् ऐसा कोण ज्ञात कीजिए जो अपने पूरक के समान हो। 5ण् ऐसा कोण ज्ञात कीजिए जो अपने संपूरक के समान हो। 6ण् दी हुइर् आकृति में ∠1 एवं ∠2 संपूरक कोण हैं। यदि ∠1 में कमी की जाती है, तो ∠2 में क्या परिवतर्न होगा ताकि दोनों कोण पिफर भी संपूरक ही रहें। 7ण् क्या दो ऐसे कोण संपूरक हो सकते हैं यदि उनमें से दोनों ;पद्ध न्यून कोण हैं? ;पपद्ध अध्िक कोण हैं? ;पपपद्ध सम कोण हैं? 8ण् एक कोण45ह् से बड़ा है। क्या इसका पूरक कोण45ह् से बड़ा है अथवा45ह् के बराबर है अथवा45ह् से छोटा है? 9ण् संलग्न आकृति में: ;पद्ध क्या ∠1ए ∠2 का आसन्न है? ;पपद्ध क्या ∠।व्ब्ए ∠।व्म् का आसन्न है? ;पपपद्ध क्या ∠ब्व्म् एवं ∠म्व्क् रैख्िाक युग्म बनाते हैं? ;पअद्ध क्या ∠ठव्क् एवं ∠क्व्। संपूरक है? ;अद्ध क्या ∠1 का उध्वार्ध्र सम्मुख कोण ∠4 है? ;अपद्ध ∠5 का उध्वार्ध्र सम्मुख कोण क्या हैं? 12ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक में कोण गए ल एवं ्र के मान ज्ञात कीजिए। 13ण् रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिए: ;पद्ध यदि दो कोण पूरक हैं, तो उनके मापों का योग ऋऋऋऋऋऋऋ है। ;पपद्ध यदि दो कोण संपूरक हैं तो उनके मापों का योग ऋऋऋऋऋऋ है। ;पपपद्ध रैख्िाक युग्म बनाने वाले दो कोण ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होते हैं। ;पअद्ध यदि दो आसन्न कोण संपूरक हैं, तो वे ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ बनाते हैं। ;अद्ध यदि दो रेखाएँ एक - दूसरे को एक ¯बदु पर प्रतिच्छेद करती हैं तो उध्वार्ध्र सम्मुख कोण हमेशा ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ होते हैं। ;अपद्ध यदि दो रेखाएँ एक - दूसरे को एक ¯बदु पर प्रतिच्छेद करती है और यदि उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों का एक युग्म न्यून कोण है, तो उध्वार्ध्र सम्मुख कोणों का दूसरा युग्म ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 14ण् संलग्न आकृति में निम्नलिख्िात कोण युग्मों को नाम दीजिए: ;पद्ध उध्वार्ध्र सम्मुख अध्िक कोण ;पपद्ध आसन्न पूरक कोण ;पपपद्ध समान संपूरक कोण ;पअद्ध असमान संपूरक कोण ;अद्ध आसन्न कोण जो रैख्िाक युग्म नहीं बनाते हैं। 5ण्3 रेखा युग्म स्टैंड पर रखा हुआ श्यामपट्टð, रेखाखंडों द्वारा निमिर्त अक्षर ल् और एक ख्िाड़की का जालीदार दरवाशा, इन सभी में उभयनिष्ठ क्या हैं? ये प्रतिच्छेदी रेखाओं ;पदजमतेमबजपदह सपदमेद्ध के उदाहरण हैं ;आकृति 5ण्19द्ध। दो रेखाएँ स और उ प्रतिच्छेद करती हैं यदि उनमें एक ¯बदु उभयनिष्ठ है। यह उभयनिष्ठ ¯बदु उनका प्रतिच्छेद ¯बदु कहलाता है। आकृति 5.20 में, ।ब् और ठम्ए च् पर प्रतिच्छेद करती हैं। ।ब् और ठब्ए ब् पर प्रतिच्छेद करती हैं। ।ब् और म्ब्ए ब् पर प्रतिच्छेद करती हैं। प्रतिच्छेदी रेखाखंडों के दस अन्य युग्म ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। क्या दो रेखाएँ अथवा रेखाखंड आवश्यक रूप से प्रतिच्छेद करने चाहिए?क्या आप इस आकृति में दो रेखाखंडों के युग्म ज्ञात कर सकते हैं जो प्रतिच्छेदी नहीं है? क्या दो रेखाएँ एक से ज्यादा ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं। इसकेआकृति 5ण्20 बारे में विचार कीजिए। 5ण्3ण्2 तियर्क छेदी रेखा शायद, आपने दो अथवा अध्िक सड़कों को पार करते हुए एक सड़क देखी होगी अथवा कइर् अन्य रेल पटरियों को पार करते हुए एक रेल पटरी देखी होगी। इनसे तियर्क छेदी रेखा ;जतंदेअमतेंसद्ध का अनुभव प्राप्त होता है ;आकृति 5ण्21द्ध। ;पद्ध आकृति 5ण्21 ;पपद्ध एक ऐसी रेखा जो दो अथवा अध्िक रेखाओं को भ्िान्न ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करती है, तियर्क छेदी रेखा ;जतंदेअमतेंसद्ध कहलाती है। आकृति 5ण्22 में, चए रेखाएँ स औरउ की तियर्क छेदी रेखा है। आकृति 5ण्23 में, च एक तियर्क छेदी रेखा नहीं है तथापि यह रेखाएँ स और उ को काटती है। क्या आप बता सकते हैं ‘क्यों’? 5ण्3ण्3 तियर्क छेदी रेखा द्वारा निमिर्त कोण आकृति 5ण्24 में, आप देखते हैं कि रेखाएँ स एवं उ तियर्क छेदी रेखा च द्वारा काटी जा रही है। इस प्रकार बनने वाले 1 से 8 तक अंकित कोणों के विश्िाष्ट नाम हैंः अंतःकोण ∠3ए ∠4ए ∠5ए ∠6ए बाह्य कोण ∠1ए ∠2ए ∠7ए ∠8 संगत कोणों के युग्म ∠1 और ∠5ए ∠2 और ∠6ए ∠3 और ∠7ए ∠4 और ∠8ण् एकांतर अंतः कोणों के युग्म ∠3 और ∠6ए ∠4 और ∠5 एकांतर बाह्य कोणों के युग्म ∠1 और ∠8ए ∠2 और ∠7 तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरप़फ बने अंतःकोणों के युग्म ∠3 और ∠5ए ∠4 और ∠6 टिप्पणीः आकृति 5ण्25 में ;∠1 एवं ∠5 जैसेद्ध संगत कोणों में निम्नलिख्िात सम्िमलित होते हैं:;पद्ध विभ्िान्न शीषर् ;पपद्ध तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरपफ बने होते हैं। ;पपपद्ध दो रेखाओं के सापेक्ष संगत स्िथतियों ;ऊपर अथवा नीचे, बायाँ अथवा दायाँद्ध में होते हैं। आकृति 5ण्25 आकृति 5ण्26 में ;∠3 एवं ∠6 जैसेद्ध अंतः एकांतर कोण ;पद्ध के विभ्िान्न शीषर् होते हैं। ;पपद्ध तियर्क छेदी रेखा के सम्मुख स्िथति पर बने होते हैं। ;पपपद्ध दो रेखाओं के ‘‘मध्य’’ स्िथत होते हैं। 5ण्3ण्4 समांतर रेखाओं की तियर्क छेदी रेखा क्या आपको याद है कि समांतर रेखाएँ क्या हैं । ये किसी तल में ऐसी रेखाएँ होती हैं जो एक - दूसरेसे कहीं नहीं मिलती। क्या आप निम्नलिख्िात आकृतियों में समांतर रेखाओं की पहचान कर सकते हैं? ;आकृति 5ण्27द्ध आकृति 5ण्27 समांतर रेखाओं की तियर्क छेदी रेखा से बहुत ही रुचिकर परिणाम प्राप्त होते हैं। यह ियाकलाप निम्नलिख्िात तथ्य को दृष्टांतित करती है: इस परिणाम का उपयोग करते हुए हम एक दूसरा रुचिकर परिणाम प्राप्त करते हैं।आकृति 5ण्29 को देख्िाए। जब समांतर रेखाएँ स और उए रेखा ज द्वारा काटी जाती हैं, तो ∠3 त्र ∠7 ;उध्वार्ध्र सम्मुख कोणद्ध परंतु ∠7 त्र ∠8 ;संगत कोणद्ध इसलिए ∠3 त्र ∠8 इसी प्रकार आप दशार् सकते हैं कि ∠1 त्र ∠6ण् अतः हमें निम्नलिख्िात परिणाम की प्राप्ित होती हैः यह दूसरा परिणाम हमें एक ओर रुचिकर गुणध्मर् की ओर अग्रसर करता है। पिफर सेआकृति 5ण्29 में दिए हुए आलेख से, ∠3 ़ ∠1 त्र 180° ;∠3 और ∠1 रैख्िाक युग्म बनाते हैंद्ध परंतु ∠1 त्र ∠6 ;अंतः एकांतर कोणों का एक युग्मद्ध इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ∠3 ़ ∠6 त्र 180°। इसी प्रकार ∠1 ़ ∠8 त्र 180°ण् इस प्रकार हमंे निम्नलिख्िात परिणाम की प्राप्ित होती है: सुसंगत आकृतियों को ध्यान में रखते हुए आप इन परिणामों को बहुत आसानी से स्मरण कर सकते हैंः संगत कोणों के लिए थ्.आकार को ध्यान में रख्िाए एकांतर कोणों के लिए र् .आकार को ध्यान में रख्िाए। 5ण्4 समांतर रेखाओं की जाँच यदि दो रेखाएँ समांतर हैं, तो आप जानते हैं कि एक तियर्क छेदी रेखा की सहायता से, समान संगत कोणों का एक युग्म प्राप्त होता है, समान अंतः एकांतर कोणों का युग्म प्राप्त होता है और तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरप़फ बनंे अंतः कोण, जो संपूरक होते हैं। जब दो रेखाएँ दी हुइर् हैं तो क्या कोइर् ऐसी विध्ि है जिसकी सहायता से यह जाँच की जा सके कि दी हुइर् रेखाएँ समांतर हैं अथवा नहीं? जीवन से जुड़ी अनेक परिस्िथतियों में आपको इस कौशल की आवश्यकता होती है।इन खंडों को ;आकृति 5ण्30द्ध खींचने के लिए एक नक्शानवीश, बढ़इर् के वगर् एवं रुलर का प्रयोग करता है। वह दावा करता है कि ये समांतर हैं। कैसे? क्या आप देख पाते हैं कि उसने संगत कोणों को समान रखा है? ;यहाँ तियर्क छेदी रेखा क्या है?द्ध अतः जब एक तियर्क छेदी रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार काटती है कि संगत कोणों के युग्म समान हैं, तो रेखाएँ समांतर होती हैं। अक्षर र् ;आकृति 5ण्31द्ध को देख्िाए। यहाँ क्षैतिज खंड समांतर हैं क्योंकि एकांतर कोण समान हैं। जब एक तियर्क छेदी रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार काटती है कि अंतः एकांतर कोणों का युग्म समान है, तो रेखाएँ समांतर होती हैं। एक रेखा स खींचिए ;आकृति 5ण्32द्धण् रेखा स के लंबवत् एक रेखा उ खींचिए। एक रेखा च इस प्रकार खींचिए ताकि चए उ के लंबवत् हो। इस प्रकार चए स लंब पर लंब है। आप पाते हैं च द्यद्य स कैसे? यह इसलिए है क्योंकि आपने च को इस प्रकार खींचा है कि ∠1 ़ ∠2 त्र 180°ण् अतः जब एक तियर्क छेदी रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार काटती है कि तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरप़फ बने अंतः कोणों का युग्म संपूरक है, तोआकृति 5ण्32 रेखाएँ समांतर होती हैं। 1ण् निम्नलिख्िात कथनों में प्रत्येक कथन में उपयोग किए गए गुणध्मर् का वणर्न कीजिए ;आवृफति 5.33द्ध। ;पद्ध यदि ं द्यद्य इए तो ∠1 त्र ∠5 ;पपद्ध यदि ∠4 त्र ∠6ए तो ं द्यद्य इण् ;पपपद्ध यदि ∠4 ़ ∠5 त्र 180°ए तो ं द्यद्य इ 2ण् आकृति 5.34 में निम्नलिख्िात की पहचान कीजिएः ;पद्ध संगत कोणों के युग्म ;पपद्ध अंतः एकांतर कोणों के युग्म ;पपपद्ध तियर्क छेदी रेखा के एक तरप़फ बने अंतःकोणों के युग्म ;पअद्ध उध्वार्ध्र सम्मुख कोण 3ण् सलंग्न आकृति में च द्यद्य ु।अज्ञात कोण ज्ञात कीजिए। 4ण् यदि स द्यद्य उ है, तो निम्नलिख्िात आकृतियों में प्रत्येक में ग का मान ज्ञात कीजिए। 5ण् दी हुइर् आकृति में, दो कोणों की भुजाएँ समांतर हैं। यदि ∠।ठब् त्र 70ह्ए तो ;पद्ध ∠क्ळब् ज्ञात कीजिए। ;पपद्ध ∠क्म्थ् ज्ञात कीजिए। 6ण् नीचे दी हुइर् आकृतियों में निणर्य लीजिए कि क्या स ए हमने क्या चचार् की? 1ण् हम स्मरण करते हैं कि ;पद्ध एक रेखाखंड के दो अंत ¯बदु होते हैं। ;पपद्ध एक किरण का केवल एक अंत ¯बदु ;इसका शीषर्द्ध होता है। ;पपपद्ध एक रेखा का किसी भी तरप़फ कोइर् अंत ¯बदु नहीं होता है। 2ण् एक कोण का निमार्ण तब होता है जब दो रेखाएँ ;अथवा किरण अथवा रेखाखंडद्ध एक दूसरे को मिलती हैं। 3ण् जब दो रेखाएँ स और उ एक दूसरे सेे मिलती हैं तो हम कहते हैं कि ये रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं। मिलान ¯बदु प्रतिच्छेद ¯बदु कहलाता है। ऐसी रेखाएँ जिन्हें कितना भी बढ़ाया जाए, आपस में नहीं मिलती, समांतर रेखाएँ कहलाती हैं। 4ण् ;पद्ध जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं ;सामान्यतः, अक्षर ग् की भाँति दिखाइर् देती हैंद्ध तो हमें सम्मुख कोणों के दो युग्म प्राप्त होते हैं। इन्हें उध्वार्ध्र सम्मुख कोण कहा जाता है। इनका माप समान होता है। कोण युग्म प्रतिबंध् दो पूरक कोण दो संपूरक कोण दो आसन्न कोण रैख्िाक युग्म मापों का योग 90व है। मापों का योग 180व है। एक उभयनिष्ठ शीषर् और एक उभयनिष्ठ भुजा होती है। परंतु कोइर् उभयनिष्ठ अंतस्थ नहीं होता है। आसन्न एवं संपूरक ;पपद्ध दो अथवा अध्िक रेखाओं को विभ्िान्न ¯बदुओं पर प्रतिच्छेद करने वाली रेखा तियर्क छेदी रेखा कहलाती है। ;पपपद्ध एक तियर्क छेदी रेखा आरेख से विभ्िान्न प्रकार के कोण प्राप्त होते हैं। ;पअद्ध आकृति में हमें मिलता है कोणों के प्रकार दशार्ने वाले कोण अंतः ∠3ए ∠4ए ∠5ए ∠6 बाह्य ∠1ए ∠2ए ∠7ए ∠8 संगत ∠1 तथा ∠5ए ∠2 एवं ∠6ए ∠3 तथा ∠7ए ∠4 एवं ∠8 अंतः एकांतर ∠3 तथा ∠6ए ∠4 एवं ∠5ए बाह्य एकांतर ∠1 तथा ∠8ए ∠2 एवं ∠7ए तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरप़फ बने ∠3 तथा ∠5ए ∠4 एवं ∠6ए ;अद्ध जब एक तियर्क छेदी रेखा दो समांतर रेखाओं को काटती है, तो हमें निम्नलिख्िात रुचिकर संबंध् प्राप्त होते है। संगत कोणों का प्रत्येक युग्म समान होता हैः ∠1 त्र ∠5ए ∠3 त्र ∠7ए ∠2 त्र ∠6ए ∠4 त्र ∠8 अंतः एकांतर कोणों के युग्म समान होते हैंः ∠3 त्र ∠6ए ∠4 त्र ∠5 तियर्क छेदी रेखा के एक ही तरप़फ बने अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता हैः ∠3 ़ ∠5 त्र 180°ए ∠4 ़ ∠6 त्र 180°

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