4ण्1 बौिक खेल! अध्यापिका ने कहा है कि वह गण्िात का एक नया अध्याय पढ़ाना प्रारंभ करने जा रही हैं और वह है सरल समीकरण। अप्पू, सरिता और अमीना ने कक्षा टप् में पढ़े गए बीजगण्िात वाले अध्याय का पुनार्वलोकन कर लिया है। क्या आपने भी कर लिया है? अप्पू, सरिता और अमीना उत्साहित हैं क्यांेकि उन्होंने एक खेल बनाया है, जिसे वे बौिक खेल ;उपदक तमंकमतद्ध कहती हैं तथा वे उसे पूरी कक्षा के सम्मुख प्रस्तुत करना चाहती हैं। अध्यापिका उनके उत्साह की सराहना करती है और उन्हें अपना खेल प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रिात करती है। अमीना खेल प्रारंभ करती है। वह सारा से कोइर् संख्या सोचने को कहती हैै तथा उसे 4 से गुणा करके गुणनपफल में 5 जोड़ने को कहती है। इसके बाद वह सारा से इसका परिणाम बताने को भी कहती है। सारा कहती है कि परिणाम 65 है। अमीना तुरंत घोषणा करती है कि सारा द्वारा सोची गइर् संख्या 15 है। सारा सिर हिलाकर हाँ कहती है। सारा समेत पूरी कक्षा आश्चयर्चकित हो जाती है। अब अप्पू की बारी है। वह बालू से कोइर् संख्या सोचने, उसे 10 से गुणा करने और गुणनपफल में से 20 घटाने को कहता है। इसके बाद वह बालू से उसका परिणाम बताने को कहता है। बालू कहता है कि यह 50 है। अप्पू तुरंत बालू द्वारा सोची गइर् संख्या बताता है और कहता है कि वह संख्या 7 है। बालू इसकी पुष्िट करता है। प्रत्येक व्यक्ित यह जानना चाहता है कि अप्पू, सरिता और अमीना द्वारा प्रस्तुत बौिक खेल किस प्रकार कायर् करता है। क्या आप देख सकते हैं कि यह वैफसे कायर् करता है? इस अध्याय और अध्याय 12 को पढ़ने के बाद, आप भली - भाँति यह जान जाएँगे कि यह खेल किस प्रकार कायर् करता है। 4ण्2 समीकरण बनाना आइए अमीना का उदाहरण लें। अमीना सारा से कोइर् संख्या सोचने को कहती है। अमीना संख्या के बारे मंे वुफछ नहीं जानती है। उसके लिए, यह संख्या 1ए 2ए 3ए ण् ण् ण्ए 11ए ण् ण् ण् ए 100ए ण् ण् ण् ण् में से वुफछ भी हो सकती है। आइए इस अज्ञात संख्या को एक अक्षर ग से व्यक्त करें। आप ग के स्थान पर कोइर् अन्य अक्षर जैसे लए ज इत्यादि का प्रयोग कर सकते हैं। इससे कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता कि सारा द्वारा सोची गइर् अज्ञात संख्या के लिए हम कौन - सा अक्षर प्रयोग करते हैं। सारा जब संख्या को 4 से गुणा करती है, तो उसे 4ग प्राप्त होता है। पिफर वह इस गुणनपफल में 5 जोड़ती है और 4ग ़ 5 प्राप्त करती है। ;4ग ़ 5द्ध का मान ग के मान पर निभर्र करता है। इस प्रकार, यदि ग त्र 1 है, तो 4ग ़ 5 त्र 4 ×1 ़ 5 त्र 9 है। इसका अथर् है कि यदि सारा के मस्ितष्क में 1 होता, तो उसके द्वारा प्राप्त परिणाम 9 होता। इसी प्रकार, यदि उसने संख्या 5 सोची होती, तो उसका ग त्र 5 के लिए 4ग ़ 5 त्र 4 × 5 ़ 5 त्र 25 । यानी, सारा ने यदि संख्या 5 सोची होती तो उसका परिणाम 25 होता। सारा द्वारा सोची संख्या ज्ञात करने के लिए, आइए उसके द्वारा प्राप्त उत्तर 65 से विपरीत की ओर कायर् करना प्रारंभ करें। हमें ऐसा ग ज्ञात करना है कि 4ग ़ 5 त्र 65 ;4ण्1द्ध इस समीकरण ;मुनंजपवदद्ध का हल ही हमें सारा के मन की संख्या को बताएगा। इस प्रकार, आइए अब अप्पू के उदाहरण पर विचार करें। आइए बालू द्वारा चुनी गइर् संख्या को ल मान लें। अप्पू ने बालू से इस संख्या को 10 से गुणा कर और पिफर गुणनपफल में से 20 घटाने को कहा था। अथार्त् बालू ल से, पहले 10ल प्राप्त करता है और उसमें से 20 घटा कर ;10ल दृ 20द्ध प्राप्त करता है। इसका ज्ञात परिणाम 50 है। अतः, 10ल दृ 20 त्र 50 ;4ण्2द्ध इस समीकरण का हल ही बालू द्वारा सोची गइर् संख्या बताएगा। 4ण्3 जो हमें ज्ञात है उसकी समीक्षा ध्यान दीजिए कि ;4ण्1द्ध और ;4ण्2द्ध समीकरण हैं। आइए याद करें कि कक्षा टप् मंे हमने समीकरणों के बारे में क्या पढ़ा था। समीकरण चर पर एक प्रतिबंध् होता है। समीकरण ;4ण्1द्ध में, चर ग है तथा समीकरण ;4ण्2द्ध में, चर ल है। शब्द चर ;अंतपंइसमद्ध का अथर् है, ऐसी कोइर् वस्तु जो विचरण कर, अथार्त् बदल सकती हो। एक चर विभ्िान्न संख्यात्मक मान ले ;ग्रहण करद्ध सकता है, अथार्त् इसका मान निश्िचत या स्िथर नहीं होता है। चरों को प्रायः अंग्रेशी वणर्माला के अक्षरों गए लए ्रए सए उए दए च इत्यादि से व्यक्त किया जाता है। चरों से हम व्यंजकों ;मगचतमेेपवदेद्ध को बनाते हैं। ये व्यंजक चरों पर योग, व्यवकलन, गुणन और विभाजन जैसी संियाएँ करके प्राप्त किए ;बनाएद्ध जाते हैं। ग से हमने व्यंजक ;4ग ़ 5द्ध बनाया था। इसके लिए, हमने पहले ग को 4 से गुणा किया और पिफर गुणनपफल में 5 जोड़ा था। इसी प्रकार, हमने ल से व्यंजक ;10ल दृ 20द्ध बनाया था। इसके लिए, हमने ल को 10 से गुणा किया और पिफर गुणनपफल में से 20 को घटाया था। ये सभी व्यंजकों के उदाहरण हैं। उपरोक्त प्रकार के बनाए गए एक व्यंजक का मान, चर के चुने गए मान पर निभर्र करता है। जैसा कि हम पहले ही देख चुके हैं कि जब ग त्र 1 है, तो 4ग ़ 5 त्र 9 हैऋ जब ग त्र 5 है, तो 4ग ़ 5 त्र 25 है इसी प्रकार, जब ग त्र 15ए तो 4 ग ़ 5 त्र 4×15 ़ 5 त्र 65 हैऋ जब ग त्र 0ए तो 4 ग ़ 5 त्र 4 × 0 ़ 5 त्र 5 है, इत्यादि। समीकरण ;4ण्1द्ध चर ग पर एक प्रतिबंध् है। यह बताती है कि व्यंजक 4ग ़ 5 का मान 65 है। यह प्रतिबंध् ग त्र 15 होने पर संतुष्ट होता है। संख्या 15 समीकरण 4ग ़ 5 त्र 65 का एक हल ;ेवसनजपवदद्ध है। जब ग त्र 5 है, तो 4ग ़ 5 त्र 25 है जो 65 के बराबर नहीं है। इस प्रकार, ग त्र 5 इस समीकरण का हल नहीं है। इसी प्रकार, ग त्र 0 भी इस समीकरण का हल नहीं है। 15 के अतिरिक्त, ग का कोइर् भी मान प्रतिबंध् 4ग ़ 5 त्र 65 को संतुष्ट नहीं करता है। 4ण्4 समीकरण क्या है? एक समीकरण में, समता या समिका ;मुनंसपजलद्ध का चिÉ सदैव होता है। समता का चिÉ यह दशार्ता है कि इस चिÉ के बाईं ओर के व्यंजक ¹बायाँ पक्ष ;स्भ्ैद्धह् का मान चिÉ के दाईं ओर के व्यंजक ¹दायाँ पक्ष;त्भ्ैद्धह् के मान के बराबर है। समीकरण;4ण्1द्ध में, स्ण्भ्ण्ै ;4ग ़ 5द्ध है तथा त्भ्ै 65 है। समीकरण ;4ण्2द्ध में, स्भ्ै ;10ल दृ 20द्ध तथा त्भ्ै 50 है। यदि स्भ्ै और त्भ्ै के बीच में समता चिÉ के अतिरिक्त कोइर् अन्य चिÉ हो, तो वह एक समीकरण नहीं होती है। इसलिए 4ग ़ 5 झ 65 एक समीकरण नहीं है। यह कथन हमें बताता है कि ;4ग ़ 5द्ध का मान 65 से अध्िक है। इसी प्रकार, 4ग ़ 5 ढ 65 भी एक समीकरण नहीं है। यह कथन हमें बताता है कि ;4ग ़ 5द्ध का मान 65 से कम है। समीकरणों में हम प्रायः यह देखते हैं कि त्भ्ै केवल एक संख्या है। समीकरण ;4ण्1द्ध में यह 65 है तथा समीकरण ;4ण्2द्ध में यह 50 है। परंतु ऐसा होना सदैव आवश्यक नहीं है। एक समीकरण का दायाँ पक्ष ;त्भ्ैद्ध चर से संब( एक व्यंजक भी हो सकता है। उदाहरणाथर्, समीकरण 4ग ़ 5 त्र6ग दृ 25 में समता चिÉ के बाईं ओर व्यंजक 4ग ़ 5 है तथा उसके दाईं ओर व्यंजक 6ग दृ 25 है। संक्ष्िाप्त रूप में, एक समीकरण चर पर एक प्रतिबंध् होता है। प्रतिबंध् यह है कि दोनों व्यंजकों के मान बराबर होने चाहिए। ध्यान दीजिए कि इन दोनों व्यंजकों में से कम से कम एक में चर अवश्य होना चाहिए। हम समीकरणों का एक सरल और उपयोगी गुण देखते हैं। समीकरण 4ग ़5 त्र 65 वही है जो समीकरण 65 त्र 4ग ़ 5 है। इसी प्रकार, समीकरण 6ग दृ 25 त्र 4ग ़5 वही है जो समीकरण 4ग ़ 5 त्र 6ग दृ 25 है। किसी समीकरण के बाएँ और दाएँ पक्षों के व्यंजकों को आपस में बदलने पर, समीकरण वही रहती है। यह गुण बहुध समीकरणों को हल करने में उपयोगी रहता है। उदाहरण 1 निम्नलिख्िात कथनों को समीकरणों के रूप में लिख्िाए: ;पद्ध ग के तिगुने और 11 का योग 32 है। ;पपद्ध यदि किसी संख्या के 6 गुने में से आप 5 घटाएँ, तो 7 प्राप्त होता है। ;पपपद्ध उ का एक चैथाइर् 7 से 3 अध्िक है। ;पअद्ध किसी संख्या के एक तिहाइर् में 5 जोड़ने पर 8 प्राप्त होता है । हल ;पद्ध ग का तिगुना 3ग है। 3ग और 11 का योग 3ग ़ 11 है। यह योग 32 है। अतः, वांछित समीकरण 3ग ़ 11 त्र 32 है। ;पपद्ध आइए मान लें कि यह संख्या ्र है। ्र को 6 से गुणा करने पर 6्र प्राप्त होता है। 6्र में से 5 घटाने पर 6्र दृ 5 प्राप्त होगा। यह परिणाम 7 है। अतः, वांछित समीकरण 6्र दृ 5 त्र 7 है। उ ;पपपद्ध उ का एक चैथाइर् है।4 उ यह 7 से 3 अध्िक है। इसका अथर् है कि अंतर ; 7द्ध बराबर 3 है।4 अतः, वांछित समीकरण उ 7 त्र 3 है। 4 द ;पअद्ध वांछित संख्या को द मान लीजिए। द का एक तिहाइर् है।3 द उपरोक्त एक - तिहाइर् जमा 5ए ़ 5 है। यह 8 के बराबर है ।3द अतः, वांछित समीकरण ़ 5 त्र 8 है।3उदाहरण 2 निम्नलिख्िात समीकरणों को सामान्य कथनों के रूप में बदलिए: उ ;पद्ध ग दृ 5 त्र 9 ;पपद्ध 5च त्र 20 ;पपपद्ध 3द ़ 7 त्र 1 ;पअद्ध दृ 2 त्र 6 5हल ;पद्ध ग में से 5 निकालने पर 9 प्राप्त होता है। ;पपद्ध एक संख्या च का पाँच गुना 20 है। ;पपपद्ध 1 प्राप्त करने के लिए द के तीन गुने में 7 जोडि़ए। 1 ;पअद्ध किसी संख्या उ के वें भाग में से 2 घटाने पर 6 प्राप्त होता है।5 यहाँ ध्यान देने योग्य एक महत्वपूणर् बात यह है कि एक दिए हुए समीकरण को, केवल एक ही नहीं, बल्िक अनेवफ सामान्य कथनों के रूप दिए जा सकते हैं। उदाहरणाथर्, उपरोक्त समीकरण ;पद्ध के लिए आप कह सकते हैं: ग में से 5 घटाइए। आपको 9 प्राप्त होता है। अथवा संख्या गए 9 से 5 अध्िक है। अथवा 9 संख्या ग से 5 कम है। अथवा ग और 5 का अंतर 9 हैऋ इत्यादि। उदाहरण 3 निम्नलिख्िात स्िथति पर विचार कीजिए: राजू के पिता की आयु राजू की आयु के तीन गुने से 5 वषर् अध्िक है। राजू के पिता की आयु 44 वषर् है। राजू की आयु ज्ञात करने के लिए, एक समीकरण बनाइए ;स्थापित कीजिएद्ध। हल हमें राजू की आयु ज्ञात नहीं है। आइए इसे ल वषर् मान लें। राजू की आयु का तीन गुना 3ल वषर् है। राजू के पिता की आयु 3ल वषर् से 5 वषर् अध्िक है। अथार्त् राजू के पिता की आयु ;3ल ़ 5द्ध वषर् है। यह भी दिया है कि राजू के पिता की आयु 44 वषर् है। अतः, 3ल ़ 5 त्र 44 ;4ण्3द्ध यह चर ल में एक समीकरण है। इसे हल करने पर राजू की आयु ज्ञात हो जाएगी। उदाहरण 4 एक दुकानदार दो प्रकार की पेटियों में आम बेचता है। ये पेटियाँ छोटी और बड़ी हैं। एक बड़ी पेटी में 8 छोटी पेटियों के बराबर आम और 4 खुले आम आते हैं। प्रत्येक छोटी पेटी में आमों की संख्या बताने वाला एक समीकरण बनाइए। दिया हुआ है कि एक बड़ी पेटी में आमों की संख्या 100 है। हल मान लीजिए कि एक छोटी पेटी में उ आम हैं। एक बड़ी पेटी में उ के 8 गुने से 4 अध्िक आम हैं। अथार्त् एक बड़ी पेटी में 8उ ़ 4 आम हैं। परंतु यह संख्या 100 दी हुइर् है। इस प्रकार, 8उ ़ 4 त्र 100 ;4ण्4द्ध इस समीकरण को हल करके, आप एक छोटी पेटी के आमों की संख्या ज्ञात कर सकते हैं। 1ण् निम्नलिख्िात सारणी के अंतिम स्तंभ को पूरा कीजिए: क्रम संख्या समीकरण चर का मान बताइए कि समीकरण संतुष्ट होती है या नहीं ;हाँ/नहींद्ध ;पद्ध ग ़ 3 त्र 0 ग त्र 3 दृ ;पपद्ध ग ़ 3 त्र 0 ग त्र 0 दृ ;पपपद्ध ग ़ 3 त्र 0 ग त्र दृ 3 दृ ;पअद्ध ग दृ 7 त्र 1 ग त्र 7 दृ ;अद्ध ग दृ 7 त्र 1 ग त्र 8 दृ ;अपद्ध 5ग त्र 25 ग त्र 0 दृ ;अपपद्ध 5ग त्र 25 ग त्र 5 दृ ;अपपपद्ध 5ग त्र 25 ग त्र दृ 5 दृ ;पगद्ध उ 3 त्र 2 उ त्र दृ 6 दृ ;गद्ध उ 3 त्र 2 उ त्र 0 दृ ;गपद्ध उ 3 त्र 2 उ त्र 6 दृ 2ण् जाँच कीजिए कि कोष्ठकों में दिये हुए मान, दिए गए संगत समीकरणों के हल हैं या नहीं: ;ंद्ध द ़ 5 त्र 19 ;द त्र 1द्ध ;इद्ध 7द ़ 5 त्र 19 ;द त्र दृ 2द्ध ;बद्ध 7द ़ 5 त्र 19 ;द त्र 2द्ध ;कद्ध 4च दृ 3 त्र 13 ;च त्र 1द्ध ;मद्ध 4च दृ 3 त्र 13 ;च त्र दृ 4द्ध ;द्धि 4च दृ 3 त्र 13 ;च त्र 0द्ध 3ण् प्रयत्न और भूल विध्ि से निम्नलिख्िात समीकरणों को हल कीजिए: ;पद्ध 5च ़ 2 त्र 17 ;पपद्ध 3उ दृ 14 त्र 4 4ण् निम्नलिख्िात कथनों के लिए समीकरण दीजिए: ;पद्ध संख्याओं ग और 4 का योग 9 है। ;पपद्ध ल में से 2 घटाने पर 8 प्राप्त होते हैं। ;पपपद्ध ं का 10 गुना 70 है। ;पअद्ध संख्या इ को 5 से भाग देने पर 6 प्राप्त होता है। ;अद्ध ज का तीन - चैथाइर् 15 है। ;अपद्ध उ का 7 गुना और 7 का योगपफल आपको 77 देता है। ;अपपद्ध एक संख्या ग की चैथाइर् )ण 4 आपको 4 देता है। ;अपपपद्ध यदि आप ल के 6 गुने में से 6 घटाएँ, तो आपको 60 प्राप्त होता है। ;पगद्ध यदि आप ्र के एक - तिहाइर् में 3 जोड़ें, तो आपको 30 प्राप्त होता है। 5ण् निम्नलिख्िात समीकरणों को सामान्य कथनों के रूप में लिख्िाए: उ ;पद्ध च ़ 4 त्र 15 ;पपद्ध उ दृ 7 त्र 3 ;पपपद्ध 2उ त्र 7 ;पअद्ध 5 त्र 3 3उ च;अद्ध त्र 6 ;अपद्ध 3च ़ 4 त्र 25 ;अपपद्ध 4च दृ 2 त्र 18 ;अपपपद्ध ़ 2 त्र 8 5 26ण् निम्नलिख्िात स्िथतियों मंे समीकरण बनाइए: ;पद्ध इरपफान कहता है कि उसके पास, परमीत के पास जितने वँफचे हैं उनके पाँच गुने से 7 अध्िक वँफचे हैं। इरपफान के पास 37 वँफचे हैं। ;परमीत के वँफचों की संख्या कोउ लीजिए।द्ध ;पपद्ध लक्ष्मी के पिता की आयु 49 वषर् है। उनकी आयु, लड़की की आयु के तीन गुने से 4 वषर् अध्िक है। ;लक्ष्मी की आयु को ल वषर् लीजिए।द्ध ;पपपद्ध अध्यापिका बताती हैं कि उनकी कक्षा मंे एक विद्याथीर् द्वारा प्राप्त किए गए अध्िकतम अंक, प्राप्त किए न्यूनतम अंक का दुगुना ध्न 7 हैं। प्राप्त किए गए अध्िकतम अंक 87 हैं। ;न्यूनतम प्राप्त किए गए अंकों को स लीजिए।द्ध ;पअद्ध एक समद्विबाहु त्रिाभुज में शीषर् कोण प्रत्येक आधर कोण का दुगुना है। ;मान लीजिए प्रत्येक आधर कोण इ डिग्री है। याद रख्िाए कि त्रिाभुज के तीनों कोणों का योग 180 डिग्री होता है।द्ध 4ण्4ण्1 एक समीकरण को हल करना इस समिका पर विचार कीजिए 8 दृ 3 त्र 4 ़ 1 ;4ण्5द्ध समिका ;4ण्5द्ध सत्य है, क्योंकि इसके दोनों पक्ष बराबर हैं ;प्रत्येक 5 के बराबर हैद्ध। ऽ आइए दोनों पक्षों में 2 जोड़ें। इसके परिणामस्वरूप, हमें प्राप्त होता हैः स्भ्ै त्र 8 दृ 3 ़ 2 त्र 5 ़ 2 त्र 7ए त्भ्ै त्र 4 ़ 1 ़ 2 त्र 5 ़ 2 त्र 7ण् पुनः, समिका ;4.5द्ध सत्य है ;अथार्त स्भ्ै और त्भ्ै समान हैंद्ध। इस प्रकार, यदि हम एक समिका के दोनों पक्षों में एक ही संख्या जोड़ें, तो भी वह समिका सत्य होती है। ऽ आइए अब दोनों पक्षों में से 2 घटाइए। इसके परिणामस्वरूप, हमें प्राप्त होता है: स्भ्ै त्र 8 दृ 3 दृ 2 त्र 5 दृ 2 त्र 3ए त्भ्ै त्र 4 ़ 1 दृ 2 त्र 5 दृ 2 त्र 3ण् पुनः, वह समिका सत्य है। इस प्रकार, यदि हम एक समिका के दोनों पक्षों में से एक ही संख्या घटाएँ, तो भी वह समिका सत्य होती है। ऽ इसी प्रकार, यदि हम एक समिका के दोनों पक्षों को एक ही शून्येतर ;दवद.्रमतवद्ध संख्या से गुणा करें या भाग दें, तो भी वह समिका सत्य होती है। उदाहरणाथर्, आइए उपरोक्त समिका के दोनों पक्षों को 3 से गुणा करें। हमंे प्राप्त होता है: स्भ्ै त्र 3 × ;8 दृ 3द्ध त्र 3 × 5 त्र 15ए त्भ्ै त्र 3 × ;4 ़ 1द्ध त्र 3 × 5 त्र 15ण् समिका सत्य है। आइए अब हम उपरोक्त समिका के दोनों पक्षों को 2 से भाग करें । 5 स्भ्ै त्र ;8 − 3द्ध झ् 2 त्र 5 झ् 2 त्र 2 5 त्भ्ै त्र ;4 ़ 1द्ध झ् 2 त्र 5 झ् 2 त्र त्र स्भ्ै2 पुनः, समिका सत्य है। यदि हम कोइर् अन्य समिका लें, तो भी हमें यही निष्कषर् प्राप्त होता है। मान लीजिए कि हम इस नियम का पालन नहीं करते हैं। विशेष रूप से, मान लीजिए कि हम एक समिका के दोनों पक्षों में भ्िान्न - भ्िान्न संख्याएँ जोड़ते हैं। इस स्िथति में, हम देखेंगे कि समिका सत्य नहीं होगी ;अथार्त दोनों पक्ष समान नहीं होंगेद्ध। उदाहरणाथर्, आइए समिका ;4ण्5द्ध को पुनः लें: 8 दृ 3 त्र4 ़ 1 अब, इसके बाएँ पक्ष में 2 जोड़ें और दाएँ पक्ष में 3 जोड़े। अब नइर् स्भ्ै त्र 8 दृ 3 ़ 2 त्र 5 ़ 2 त्र 7 है तथा नइर् त्भ्ै त्र 4 ़ 1 ़ 3 त्र 5 ़ 3 त्र 8 है। अब, समिका सत्य नहीं है, क्योंकि नइर् स्भ्ै और त्भ्ै बराबर नहीं हैं। इस प्रकार, यदि हम एक समिका के दोनों पक्षों में, कोइर् गण्िातीय संिया एक ही संख्या के साथ न करें, तो समिका सत्य नहीं होती है। समीकरण, एक चरों वाली समिका होती है। उपरोक्त निष्कषर् समीकरणों के लिए भी मान्य होते हैं, क्योंकि प्रत्येक समीकरण में चर केवल संख्या ही निरूपित करता है। प्रायः एक समीकरण को एक तौलने वाली तराजू या तुला ;इंसंदबमद्ध समझा जाता है। एक समीकरण पर एक गण्िातीय संिया करना इस प्रकार समझना चाहिए, जैसे कि तौलने वाली तराजू के दोनों पलड़ों में बराबर बाँट डालना या उनमें से बराबर बाँट निकाल लेना। ख् एक समीकरण एक ऐसी तौलने वाली तराजू समझा जा सकता है, जिसके दोनों पलड़ों में बराबर बाँट रखे हों।, इस स्िथति में, तराजू की डंडी ठीक क्षैतिज रहती है। यदि हम दोनों पलड़ों में बराबर बाँट ;ूमपहीजेद्ध डालें, तो डंडी अभी भी क्षैतिज ही रहती है। इसी प्रकार, यदि हम दोनों पलड़ों में से बराबर बाँट हटा लें ;निकालेंद्ध, तो भी डंडी क्षैतिज रहती है। इसके विपरीत, यदि हम दोनों पलड़ों मंे भ्िान्न बाँट डालें ;जोड़ेंद्ध या उनमें से भ्िान्न बाँट निकालें ;घटाएँद्ध, तो भी तराजू की डंडी का संतुलन बिगड़ जाता है, अथार्त् डंडी क्षैतिज पर नहीं रहती है।हम यह सि(ांत एक समीकरण को हल करने में प्रयोग करते हैं। निस्संदेह, यहाँ तराजू काल्पनिक है तथा संख्याओं को बाँटों की तरह भौतिक रूप से संतुलित करने के लिए प्रयोग किया जा सकता। इस सि(ांत को प्रस्तुत करने का यही मुख्य उद्देश्य है। आइए वुफछ उदाहरण लें। सरल समीकरण ऽ निम्नलिख्िात समीकरण पर विचार कीजिएः ग ़ 3 त्र 8 हम इस समीकरण के दोनों पक्षों में से 3 को घटाते हैं। नइर् स्भ्ै है: ग ़ 3 दृ 3 त्र ग तथा नइर् त्भ्ै है: 8 दृ 3 त्र 5 ;4ण्6द्ध हम 3 को क्यों घटाएँ कोइर् और संख्या क्यों न घटाएँ? 3 को जोड़ कर देख्िाए। क्या यह वुफछ सहायता करेगा? क्यों नहीं? ऐसा इसलिए किया है, क्योंकि 3 को घटाने पर स्ण्भ्ण्ैण् में ग रह जाता है। चूँकि इससे संतुलन में कोइर् परिवतर्न नहीं होता है, इसलिए हमें प्राप्त होता है: नइर् स्भ्ै त्र नइर् त्भ्ै या ग त्र 5 यह वही है, जो हम चाहते हैं। अथार्त् यह समीकरण ;4ण्6द्ध का एक हल है। इसकी पुष्िट करने के लिए कि यह सही है या नहीं, हम प्रारंभ्िाक समीकरण मंे ग त्र 5 रखेंगे। हमें स्भ्ै त्र ग ़ 3 त्र 5 ़ 3 त्र 8 प्राप्त होती है, जो त्भ्ै के बराबर है। यही हल सही होने के लिए आवश्यक है। समीकरण के दोनों पक्षों में सही गण्िातीय संिया करने से ;अथार्त् 3 घटाने सेद्ध, हम समीकरण के हल पर पहुँच गए । ऽ आइए एक अन्य समीकरण लें: ग दृ 3 त्र 10 ;4ण्7द्ध यहाँ हमें क्या करना चाहिए? हमें दोनों पक्षों में 3 जोड़ना चाहिए। ऐसा करने से, समीकरण का संतुलन बना रहेगा तथा स्ण्भ्ण्ै में केवल ग रह जाएगा। नइर् स्भ्ै त्र ग दृ 3 ़ 3 त्र ग ए नइर् त्भ्ै त्र 10 ़ 3 त्र 13 अतः ग त्र 13 है, जो वांछित हल है। प्रारंभ्िाक समीकरण ;4ण्7द्ध में ग त्र 13 रखने पर, हम इसकी पुष्िट करते हैं कि यह हल सही है: प्रारंभ्िाक समीकरण की स्भ्ै त्र ग दृ 3 त्र 13 दृ 3 त्र 10 है। जैसा कि वांछनीय है यह, त्भ्ै के बराबर है। ऽ इसी प्रकार, आइए निम्नलिख्िात समीकरणों को देखें: 5ल त्र 35 ;4ण्8द्ध उ 2 त्र 5 ;4ण्9द्ध पहली स्िथति में, हम दोनों पक्षों को 5 से भाग देंगे। इससे स्भ्ै में केवल ल रह जाता है। 5ल 5× ल 35 ×57 नइर् स्भ्ै त्र त्रत्र ल ए नइर् त्भ्ै त्र त्रत्र 7 55 55 अतः ल त्र7 यही समीकरण का वांछित हल है। हम समीकरण ;4ण्8द्ध में ल त्र 7 प्रतिस्थापित करके इसकी जाँच कर सकते हैं कि समीकरण संतुष्ट हो जाता है। दूसरी स्िथति में, हम दोनों पक्षों को 2 से गुणा करते हैं। इससे स्भ्ै में केवल उ रह जाता है। उ नइर् स्भ्ै त्र × 2 त्र उण् तथा नइर् त्भ्ै त्र 5 × 2 त्र 10 है।2 अतः, उ त्र 10 ;यही वांछित हल है। आप इसकी जाँच कर सकते हैं कि यह हल सही है या नहींद्ध। उपरोक्त उदाहरणों से यह देखा जा सकता है कि समीकरण के हल करने के लिए, हमें जिस संिया की आवश्यकता पड़ेगी वह समीकरण पर निभर्र करता है। हमारा प्रयास यह होना चाहिए कि समीकरण में चर पृथव्फ हो जाए। कभी - कभी ऐसा करने के लिए, हमें एक से अध्िक गण्िातीय संियाएँ करनी पड़ सकती हैं। इसको मस्ितष्क में रखते हुए, आइए वुफछ और समीकरण हल करें। उदाहरण 5 हल कीजिएः ;ंद्ध 3द ़ 7 त्र 25 ;4ण्10द्ध ;इद्ध 2च दृ 1 त्र 23 ;4ण्11द्ध हल ;ंद्ध हम समीकरण की स्भ्ै मंे चर द को पृथव्फ करने के लिए, एक चरणब( विध्ि से कायर् करते हैं। स्भ्ै यहाँ 3द ़ 7 है। पहले हम इसमें से 7 घटाएँगे, जिससे 3द प्राप्त होगा। इससे अगले चरण में, हम इसे 3 से भाग देंगे, जिससे द प्राप्त होगा। याद रख्िाए कि हमें समीकरण के दोनों पक्षों में एक ही संिया करनी चाहिए। अतः, दोनों पक्षों में से 7 घटाने पर, 3द ़ 7 दृ 7 त्र25 दृ 7 ;चरण 1द्ध या, 3द त्र 18 अब दोनों पक्षों को 3 से भाग दीजिए: 3द18 त्र ;चरण 2द्ध3 3 या, द त्र 6ए जो इसका हल है। ;इद्ध यहाँ हमें क्या करना चाहिए? पहले हम दोनों पक्षों में 1 जोड़ते हैं: 2च दृ 1 ़ 1 त्र23 ़ 1 ;चरण 1द्ध या 2च त्र 24 2च 24 अब, दोनों पक्षों को 2 से भाग देते हैं: त्र ;चरण 2द्ध22 या च त्र 12ए जो इसका हल है। आपको एक अच्छी आदत विकसित कर लेनी चाहिए, जो यह है कि प्राप्त किए हल की जाँच अवश्य कर लें। यद्यपि हमने यह ;ंद्ध के लिए नहीं किया है, परंतु आइए इस उदाहरण ;इद्ध के लिए ऐसा करें। आइए इस हल च त्र 12 को समीकरण में रखें । स्भ्ै त्र 2च दृ 1 त्र 2 × 12 दृ 1 त्र 24 दृ 1 त्र 23 त्र त्भ्ै इस प्रकार, हल की सत्यता की जाँच हो गइर्। उपरोक्त ;ंद्ध के हल की भी अब आप जाँच कर ही लीजिए । अब हम इस स्िथति में हैं कि अप्पू, सरिता और अमीना द्वारा प्रस्तुत किए गए बौिक खेल पर वापस जाएँ और समझें कि उन्होंने अपने उत्तर किस प्रकार ज्ञात किए। इस कायर् के लिए, आइए समीकरणों ;4ण्1द्ध और ;4ण्2द्ध को देखें, जो क्रमशः अमीना और अप्पू के उदाहरणों के संगत हैं। ऽ पहले निम्नलिख्िात समीकरण पर विचार कीजिएः 4ग ़ 5 त्र 65ण् ;4ण्1द्ध दोनों पक्षों में से 5 घटाने पर, 4ग ़ 5 दृ 5 त्र 65 दृ 5ण् अथार्त्, 4ग त्र 60 4ग60 ग को पृथव्फ करने के लिए, दोनों पक्षों को 4 से भाग देने पर, त्र 4 4 या ग त्र 15ए जो वांछित हल है। ;जाँच कीजिए कि यह सही है।द्ध ऽ अब निम्नलिख्िात समीकरण पर विचार कीजिएः 10ल दृ 20 त्र 50 ;4ण्2द्ध दोनों पक्षों में, 20 जोड़ने पर, हमें प्राप्त होता हैः 10ल दृ 20 ़ 20 त्र 50 ़ 20 या 10ल त्र 70 10ल70 दोनों पक्षों को 10 से भाग देने पर, हमें प्राप्त होता है: त्र 10 10 या, ल त्र 7ए जो वांछित हल है। ;जाँच कीजिए कि यह सही है।द्ध आप यह अनुभव करेंगे कि ठीक यही उत्तर अप्पू, सरिता और अमीना ने दिए थे। उन्होंने समीकरण बनाना और पिफर उन्हें हल करना सीख लिया था। इसी कारण वे अपना बौिक खेल बनाकर संपूणर् कक्षा पर अपना प्रभाव डाल पाए। हम इस पर अनुच्छेद 4ण्7 में वापस आएँगे। 1ण् पहले चर को पृथव्फ करने वाला चरण बताइए और पिफर समीकरण को हल कीजिए: ;ंद्ध ग दृ 1 त्र 0 ;इद्ध ग ़ 1 त्र 0 ;बद्ध ग दृ 1 त्र 5 ;कद्ध ग ़ 6 त्र 2 ;मद्ध ल दृ 4 त्र दृ 7 ;द्धि ल दृ 4 त्र 4 ;हद्ध ल ़ 4 त्र 4 ;ीद्ध ल ़ 4 त्र दृ 4 2ण् पहले चर को पृथव्फ करने के लिए प्रयोग किए जाने वाले चरण को बताइए और पिफर समीकरण को हल कीजिए: इ च;ंद्ध 3स त्र 42 ;इद्ध त्र 6 ;बद्ध त्र 4 ;कद्ध 4ग त्र 25 2 7 ्र 5 ं 7 ;मद्ध 8ल त्र 36 ;द्धि त्र ;हद्ध त्र ;ीद्ध 20ज त्र दृ 10 34 515 3ण् चर को पृथव्फ करने के लिए, जो आप चरण प्रयोग करेंगे, उसे बताइए और पिफर समीकरण को हल कीजिए: 20 च 3च;ंद्ध 3द दृ 2 त्र 46 ;इद्ध 5उ ़ 7 त्र 17 ;बद्ध त्र 40 ;कद्ध त्र 6 3 10 4ण् निम्नलिख्िात समीकरणों को हल कीजिए: च च;ंद्ध 10च त्र 100 ;इद्ध 10च ़ 10 त्र 100 ;बद्ध त्र 5 ;कद्ध त्र 5 4 3 3च;मद्ध त्र 6 ;द्धि 3े त्र दृ9 ;हद्ध 3े ़ 12 त्र 0 ;ीद्ध 3े त्र 0 4 ;पद्ध 2ु त्र 6 ;रद्ध2ु दृ 6 त्र 0 ;ाद्ध 2ु ़ 6 त्र 0 ;सद्ध 2ु ़ 6 त्र 12 4ण्5 वुफछ और समीकरण आइए वुफछ और समीकरणों को हल करने का अभ्यास करें। इन समीकरणों को हल करते समय, हम एक संख्या ;पदद्ध को स्थानापन्न ;जतंदेचवेमद्ध करने ;अथार्त् एक पक्ष से दूसरे पक्ष में ले जानेद्ध के बारे में पढ़ेंगे ;सीखेंगेद्ध हम किसी संख्या को, समीकरण के दोनों पक्षों में जोड़ने या दोनों पक्षों में घटाने के एवज में, स्थानापन्न कर सकते हैं। उदाहरण 6 हल कीजिए: 12च दृ 5 त्र 25 ;4ण्12द्ध हल ऽ समीकरण के दोनों पक्षों में 5 जोड़ने पर, 12च दृ 5 ़ 5 त्र 25 ़ 5 या, 12च त्र 30 ऽ दोनों पक्षों को 12 से भाग देने पर, 12 च 30 5 त्र या च त्र 12 12 2 जाँच: समीकरण ;4ण्12द्ध की स्भ्ै में, च त्र 5 रखने पर2 5 स्भ्ै त्र 12 × 5 2 त्र6 × 5 दृ 5 त्र 30 दृ 5 त्र 25 त्र त्भ्ै ध्यान दीजिए कि दोनों पक्षों में 5 जोड़ने का वही अथर् है, जो;दृ 5द्ध का पक्ष बदलने का है! 12च दृ 5 त्र 25 12च त्र 25 ़ 5 पक्ष बदलने को स्थानापन्न करना कहते हैं। स्थानापन्न करने में, संख्या का चिÉ बदल जाता है। जैसा कि हमने किसी समीकरण को हल करते समय देखा है, सामान्यतः हम समीकरण के दोनों पक्षों में एक ही संख्या जोड़ते हैं या उनमें से एक ही संख्या को घटाते हैं। किसी संख्या को स्थानापन्न करना ;अथार्त् संख्या के पक्षों में परिवतर्न करनाद्ध संख्या को दोनों पक्षों में जोड़ने या दोनों पक्षों मंे से घटाने जैसा ही है। ऐसा करने के लिए, उस संख्या का चिÉ बदलना पड़ता है। जो नियम संख्याओं के लिए प्रयोग किया जाता है, वही नियम व्यंजकों के लिए भी प्रयोग किया जाता है। आइए स्थानापन्न के दो और उदाहरण लें। दोनों पक्षों में जोड़ना या स्थानापन्न करना घटाना ;पद्ध 3च दृ 10 त्र 5 ;पद्ध 3च दृ 10 त्र 5 दोनों पक्षों में 10 जोडि़ए स्भ्ै से ;दृ10द्ध को स्थानापन्न करना 3च दृ 10 ़ 10 त्र 5 ़ 10 ;स्थानापन्न करने पर, दृ 10 बदल कर ़ 10 हो जाता है।द्ध या 3च त्र 15 3च त्र 5 ़ 10 या 3च त्र 15 ;पपद्ध 5ग ़ 12 त्र 27 ;पपद्ध 5ग ़ 12 त्र 27 दोनों पक्षों में से 12 घटाइए। ़ 12 को स्थानापन्न करना ;़ 12 स्थानापन्न करने पर, दृ 12 हो जाता हैद्ध 5ग ़ 12 दृ 12 त्र 27 दृ 12 5ग त्र 27 दृ 12 या 5ग त्र 15 या 5ग त्र 15 अब हम दो और समीकरणों को हल करेंगे। जैसा कि आप देख सकते हैं, इन समीकरणों में कोष्ठक भी हैं, जिन्हें सवर्प्रथम खोलना पड़ेगा। उदाहरण 7 हल कीजिए: ;ंद्ध 4 ;उ ़ 3द्ध त्र 18 ;इद्ध दृ 2;ग ़ 3द्ध त्र 8 हल ;ंद्ध 4;उ ़ 3द्ध त्र 18 आइए दोनों पक्षों को 4 से विभाजित करें। इससे स्भ्ै में से कोष्ठक हट जाएँगे। हमें प्राप्त होता हैः 18 9 उ ़ 3त्र या उ ़ 3त्र 42 9 या उ त्र 3 ;3 को त्भ्ै में स्थानापन्न करने परद्ध2 3 ⎛ 9 963⎞ ⎝⎜ कि ⎠⎟या उ त्र ;वांछित हलद्ध क्यों−3त्र−त्र 2 2 222 ⎡ 3 ⎤ 3 3जाँच स्भ्ै त्र 4 ़34×़ 4× 3त्र 2× 3़ 4×3 ख्उ त्र रख्िाए , ⎣⎢ ⎦⎥त्र 222 त्र 6 ़ 12 त्र 18 त्र त्भ्ै ;इद्ध दृ2;ग ़ 3द्ध त्र 8 स्भ्ै में से कोष्ठकों को हटाने के लिए, हम दोनांे पक्षों को दृ 2 से भाग देते हैं। हमें प्राप्त होता है: ग़ 3त्रदृ 8 या ग ़ 3 त्र दृ 4 2 या, ग त्र दृ 4 दृ 3 ;3 को त्भ्ै में स्थानापन्न करने परद्ध या ग त्र दृ7 ;वांछित हलद्ध जाँच स्भ्ै त्र दृ2;दृ7़3द्ध त्र दृ2;दृ4द्ध त्र 8 त्र त्भ्ै जो होना चाहिए। 4ण्6 हल से समीकरण अतुल सदैव अलग प्रकार से सोचता है। वह किसी विद्याथीर् द्वारा समीकरण हल करने में लिए गए उत्तरोतर चरणों को देखता है। वह सोचता है कि क्यों न इसके विपरीत ;उल्टेद्ध पथ का अनुसरण किया जाए। समीकरण हल ;सामान्य पथद्ध हल समीकरण ;विपरीत पथद्ध वह नीचे दिए पथ का अनुसरण करता है: प्रारंभ कीजिए ग त्र 5 दोनों पक्षों को 4 से गुणा कीजिए 4ग त्र 20 दोनों पक्षों को 4 से भाग दीजिए दोनों पक्षों में से 3 घटाइए 4ग दृ 3 त्र 17 दोनों पक्षों में 3 जोडि़ए इससे एक समीकरण प्राप्त हो जाती है। यदि हम प्रत्येक चरण के लिए, उसके विपरीत पथ का अनुसरण करें। ;जैसे दाईं ओर दशार्या गया हैद्ध, तो हमें समीकरण का हल प्राप्त हो जाता है। हेतल इसमें रुचि लेने लगती है। वह उसी पहले चरण से प्रारंभ करती है और एक अन्य समीकरण बना लेती है। ग त्र5 दोनों पक्षों को 3 से गुणा करने पर, 3ग त्र 15 दोनों पक्षों में 4 जोड़ने पर, 3ग ़ 4 त्र 19 ल त्र 4 से प्रारंभ कीजिए और इससे दो भ्िान्न - भ्िान्न समीकरण बनाइए। अपने तीन मित्रों से भी ऐसा करने को कहिए। क्या उनके समीकरण आपसे भ्िान्न हैं? क्या यह अच्छा नहीं है कि आप समीकरणों को केवल हल ही नहीं कर सकते, अपितु उनको बना भी सकते हैं। साथ ही, क्या आपने यह देखा कि एक दी हुइर् समीकरण का आप केवल एक ही हल प्राप्त करते हैं, लेकिन एक दिए हुए हल से आप अनेक समीकरण बना सकते हैं। अब सारा यह चाहती है कि पूरी कक्षा यह जान जाए कि वह क्या सोच रही है। वह कहती है, ‘‘मैं हेतल की समीकरण को लेकर उसे एक कथन के रूप में बदलँूगी, जिससे एक पहेली बन जाएगी। उदाहरणाथर्, कोइर् संख्या सोचिए, उसे 3 से गुणा कीजिए और गुणनपफल में 4 जोडि़ए। अब बताइए कि आपने क्या संख्या प्राप्त की है। यदि योग 19 है, तो हेतल द्वारा प्राप्त किये गए समीकरण से पहेली हल हो जाएगी। वास्तव में, हम जानते हैं कि यह 5 है, क्योंकि हेतल ने इससे प्रारंभ किया था।’’ वह अप्पू, सरिता और अमीना की ओर मुख करके पूछती है कि क्या उन्होंने ऐसे ही अपनी पहेली बनाइर् थी। वे तीनों कहते है, ‘‘हाँ’’। अब हम जान गए हैं कि किस प्रकार अनेक संख्या पहेलियों और अन्य समस्याओं को बनाया जा सकता है। 1ण् निम्नलिख्िात समीकरणों को हल कीजिए: ;ंद्ध 2 5 2 37 2 ल ़ त्र ;इद्ध 5ज ़ 28 त्र 10 ;बद्ध ं 5 3 2़ त्र ;कद्ध ु 4 7 5़ त्र ;मद्ध 5 2 10 ग त्र ;द्धि 5 2 25 4 ग त्र ;हद्ध 7 19 2 13 उ ़ त्र ;ीद्ध 6्र ़ 10 त्र दृ2 ;पद्ध 3 2 स 2 3 त्र ;रद्ध 2 3 इ 5 3त्र 2ण् निम्नलिख्िात समीकरणों को हल कीजिए: ;ंद्ध 2;ग ़ 4द्ध त्र 12 ;इद्ध 3;द दृ 5द्ध त्र 21 ;बद्ध 3;द दृ 5द्ध त्र दृ 21 ;कद्ध दृ 4;2 ़ गद्ध त्र 8 ;मद्ध 4;2 दृ गद्ध त्र 8 3ण् निम्नलिख्िात समीकरणों को हल कीजिए: ;ंद्ध 4 त्र 5;च दृ 2द्ध ;इद्ध दृ 4 त्र 5;च दृ 2द्ध ;बद्ध 16 त्र 4 ़ 3;ज ़ 2द्ध ;कद्ध 4़5;च दृ 1द्ध त्र 34 ;मद्ध 0 त्र 16 ़ 4;उ दृ 6द्ध 4ण् ;ंद्ध ग त्र 2 से प्रारंभ करते हुए, 3 समीकरण बनाइए। ;इद्ध ग त्र दृ 2 से प्रारंभ करते हुए, 3 समीकरण बनाइए। 4ण्7 व्यावहारिक स्िथतियों में सरल समीकरणों के अनुप्रयोग हम ऐसे कइर् उदाहरण देख चुके हैं, जिनमें हमने दैनिक जीवन की भाषा से कथनों को लेकर, उन्हें सरल समीकरणों के रूप में बदला था। हम यह भी सीख चुके हैं कि सरल समीकरणों को किस प्रकार हल किया जाता है। इस प्रकार, अब हम पहेलियों और व्यावहारिक स्िथतियों से संबंध्ित समस्याओं को हल करने के लिए, पूणर्तया समथर् हो चुके हैं। इसकी विध्ि यह है कि पहले इन स्िथतियों के संगत समीकरणों को बना लिया जाए और पिफर इन पहेलियों/समस्याओं के हल प्राप्त करने के लिए प्राप्त समीकरणों को हल कर लिया जाए। हम उसी से प्रारंभ करते हैं, जिसे हम पहले ही देख चुके हैं¹उदाहरण 1 ;पद्ध और ;पपपद्धए अनुच्छेद 4ण्2ह् उदाहरण 8 किसी संख्या के तिगुने और 11 का योग 32 है। वह संख्या ज्ञात कीजिए। हल ऽ यदि अज्ञात संख्या को ग मान लिया जाए, तो उसका तिगुना 3ग होगा तथा 3ग और 11 का योग 32 है। अथार्त् 3ग ़ 11 त्र 32ण् ऽ इस समीकरण को हल करने के लिए, हम 11 को त्भ्ै में स्थानापन्न करते हैं, जिससे हमें प्राप्त होता है: 3ग त्र 32 दृ 11 या, 3ग त्र 21 यही समीकरण हमें पहले अनुच्छेदअब दोनों पक्षों को 3 से भाग देने पर, हमें प्राप्त होता हैः 4ण्2 के उदारहण 1 में प्राप्त हुआ था।21 ग त्र त्र 7 3अतः वांछनीय संख्या 7 है। ;हम इसकी जाँच के लिए 7 के तिगुने में 11 जोड़कर देख सकते हैं कि परिणाम 32 आता हैद्ध। उदाहरण 9 वह संख्या ज्ञात कीजिए जिसका एक - चैथाइर्, 7 से 3 अध्िक है। हल ल ऽ आइए अज्ञात संख्या को ल लें। इसका एक - चैथाइर् है।4 ⎛ ल⎞ संख्या ⎝⎜ ⎠⎟ संख्या 7 से 3 अध्िक है।4 अतः, हमें ल में निम्नलिख्िात समीकरण प्राप्त होता है: ल दृ 7 त्र 3 4ऽ इस समीकरण को हल करने के लिए पहले दृ 7 को त्भ्ै में स्थानापन्न कीजिए। इस प्रकार, ल त्र 3 ़ 7 त्र 10ण् 4पिफर हम दोनों पक्षों को 4 से गुणा करके, प्राप्त करते हैं: ल × 4 त्र 10 × 4 या, ल त्र 40 ;वांछित संख्याद्ध4जाँच ल का मान रखने पर, 40 स्भ्ै त्र दृ 7 त्र 10 दृ 7 त्र 3 त्र त्भ्ैए जो होना चाहिए।4उदाहरण 10 राजू के पिता की आयु राजू की आयु के तीन गुने से 5 वषर् अध्िक है। राजू की आयु ज्ञात कीजिए, यदि उसके पिता की आयु 44 वषर् है। हल ऽ उदाहरण 3 के अनुसार राजू की आयु ;लद्ध ज्ञात करने का समीकरण हैः 3ल ़ 5 त्र 44 ऽ इसे हल करने के लिए, पहले हम 5 को स्थानापन्न करते हैं। हमें प्राप्त होता हैः 3ल त्र 44 दृ 5 त्र 39 दोनों पक्षों को 3 से भाग देने पर, हमें प्राप्त होता हैः ल त्र 13 अथार्त् राजू की आयु 13 वषर् है। ;आप अपने उत्तर की जाँच कर सकते हैं।द्ध 1ण् निम्नलिख्िात स्िथतियों के लिए समीकरण बनाइए और पिफर उन्हें हल करके अज्ञात संख्याएँ ज्ञात कीजिए: ;ंद्ध एक संख्या के आठ गुने में 4 जोडि़एऋ आपको 60 प्राप्त होगा। ;इद्ध एक संख्या का घटा 4ए संख्या 3 देता है।;बद्ध यदि मैं किसी संख्या का तीन - चैथाइर् लेकर इसमें 3 जोड़ दूँ, तो मुझे21 प्राप्त होते हैं। ;कद्ध जब मैंने किसी संख्या के दुगुने में से 11 को घटाया, तो परिणाम 15 प्राप्त हुआ। ;मद्ध मुन्ना ने 50 में से अपनी अभ्यास - पुस्ितकाओं की संख्या के तिगुने को घटाया, तो उसे परिणाम 8 प्राप्त होता है। ;द्धि इबेनहल एक संख्या सोचती है। वह इसमें 19 जोड़कर योग को 5 से भाग देती है, उसे 8 प्राप्त होता है। ;हद्ध अनवर एक संख्या सोचता है। यदि वह इस संख्या के में से 7 निकाल दे, तो1 552 परिणाम 23 है। 2ण् निम्नलिख्िात को हल कीजिए: ;ंद्ध अध्यापिका बताती है कि उनकी कक्षा में एक विद्याथीर् द्वारा प्राप्त किए गए अध्िकतम अंक, प्राप्त किए न्यूनतम अंक का दुगुना जमा 7 है। प्राप्त किए गए अध्िकतम अंक 87 हैं। प्राप्त किए गए न्यूनतम अंक क्या हैं? ;इद्ध किसी समद्विबाहु त्रिाभुज में आधर कोण बराबर होते हैं। शीषर् कोण 40° है। इस त्रिाभुज के आधार कोण क्या हैं? ;याद कीजिए कि त्रिाभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।द्ध ;बद्ध सचिन द्वारा बनाए गए रनों की संख्या राहुल द्वारा बनाए गए रनों की संख्या की दुगुनी है। उन दोनों द्वारा मिलकर बनाए गए वुफल रन एक दोहरे शतक से 2 रन कम हैं। प्रत्येक ने कितने रन बनाए थे? 3ण् निम्नलिख्िात को हल कीजिए: ;पद्ध इरपफान कहता है कि उसके पास परमीत के पास जितने वँफचे हैं उनके पाँच गुने से 7 अध्ि क वँफचे हैं। इरपफान के पास 37 वँफचे हैं। परमीत के पास कितने वँफचे हैं? ;पपद्ध लक्ष्मी के पिता की आयु 49 वषर् है। उनकी आयु लक्ष्मी की आयु के तीन गुने से 4 वषर् अध्िक है। लक्ष्मी की आयु क्या है? ;पपपद्ध संुदरग्राम के निवासियों ने अपने गाँव के एक बाग में वुफछ पेड़ लगाए। इनमें से वुफछ पेड़ पफलों के पेड़ थे। उन पेड़ों की संख्या, जो पफलों के नहीं थे, पफलों वाले पेड़ों की संख्या के तिगुने से 2 अध्िक थी। यदि ऐसे पेड़ों की संख्या, जो पफलों के नहीं थे, 77 है, तो लगाए गए पफलों के पेड़ों की संख्या क्या थी? 4ण् निम्नलिख्िात पहेली को हल कीजिए: मैं एक संख्या हँू, मेरी पहचान बताओ! मुझे सात बार लो, और एक पचास जोड़ो! एक तिहरे शतक तक पहुँचने के लिए आपको अभी भी चालीस चाहिए! हमने क्या चचार् की? 1ण् एक समीकरण, एक चर पर ऐसा प्रतिबंध् होता है जिसमें दोनों पक्षों में व्यंजकों का मान बराबर होना चाहिए । 2ण् चर का वह मान जिसके लिए समीकरण संतुष्ट होता है, समीकरण का हल कहलाता है । 3ण् किसी समीकरण के बाएँ और दाएँ पक्षों को परस्पर बदलने पर, समीकरण नहीं बदलता । 4ण् एक संतुलित समीकरण की स्िथति में यदि हम ;पद्ध दोनों पक्षों में एक ही संख्या जोड़ें या ;पपद्ध दोनों पक्षों में से एक ही संख्या घटाएँ या ;पपपद्ध दोनों पक्षों को एक ही संख्या से गुणा करें या ;पअद्ध दोनों पक्षों को एक ही संख्या से भाग दें तो संतुलन में कोइर् परिवतर्न नहीं होता है अथार्त् स्भ्ै और त्भ्ै के मान समान रहते हैं । 5ण् उपरोक्त गुणों द्वारा समीकरण को चरणब( विध्ि से हल किया जा सकता है। हमें दोनों पक्षों में एक से अध्िक गण्िातीय संियाएँ करनी पड़ती हैं, जिससे कि दोनों में से एक पक्ष में हमें केवल चर प्राप्त हो। अंतिम चरण समीकरण का हल है। 6ण् स्थानापन्न का अथर् है एक पक्ष से दूसरे पक्ष में जाना । किसी संख्या को स्थानापन्न करना, संख्या को दोनों पक्षांे में जोड़ने या दोनांे पक्षों में से घटाने के समान ही है। जब आप एक संख्या को एक पक्ष से दूसरे पक्ष में स्थानापन्न करते हैं तो आप उसके चिÉ को बदल देते हैं । उदाहरणाथर्, समीकरण ग ़ 3 त्र 8 में ़ 3 का स्थानापन्न स्भ्ै से त्भ्ै करने पर ग त्र 8 दृ 3 त्र 5 प्राप्त होता है । हम व्यंजकों का भी स्थानापन्न उसी विध्ि से करते हैं जैसे एक संख्या का स्थानापन्न करते हैं । 7ण् हमने व्यावहारिक स्िथतियों को, संगत सरल बीजीय व्यंजक के रूप में लिखना भी सीखा। 8ण् हमने यह भी सीखा कि हम किसी समीकरण के हल से प्रारंभ कर, दोनों पक्षों पर समान गण्िातीय संियाओं की विध्ि का प्रयोग कर ;उदाहरण के लिए दोनों पक्षों में समान संख्या जोड़ना या घटानाद्ध एक समीकरण वैफसे बना सकते हैं। साथ ही हमने यह भी सीखा कि हम किसी दिए गए समीकरण का व्यावहारिक स्िथति से संबंध् बना सकते हैं और उस समीकरण के लिए कोइर् व्यावहारिक समस्या या पहेली भी बना सकते हैं ।

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