आप आंकड़ों के विभ्िान्न प्रकार देख और उपयोग कर चुके हैं। उदाहरण के लिए, दूरदशर्न पर प्रत्येक समाचार बुलेटिन के अंत में, मुख्य शहरों के अभ्िालिख्िात तापमान प्रदश्िार्त किये जाते हंै। उसी प्रकार, भारत के भूगोल पर लिखी गइर् पुस्तवेंफ, जनसंख्या की वृि एवं वितरण और विभ्िान्न पफसलों, खनिजों और औद्योगिक उत्पादों संबंधी आंकड़ों को तालिका के रूप में दशार्ती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि उनका अथर् क्या है? ये आंकड़े कहाँ से प्राप्त किए जाते हैं? अथर्पूणर् सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए वे किस प्रकार से तालिकाब( एवं प्रक्रमित किए जाते हैं। इस अध्याय में हम आंकड़ों के इन पक्षों पर विचार - विमशर् करेंगे और इन अनेक प्रश्नोंके उत्तर देने का प्रयत्न करेंगे। आंकड़े क्या हैं? आंकड़ों को ऐसी संख्याओं के रूप में परिभाष्िात किया गया है जो यथाथर् विश्व के मापन को प्रदश्िार्त करती हैं। आधार सामग्री एकमात्रा माप है। हम प्रायः समाचार पढ़ते हैं, जैसेμबाड़मेर में लगातार 20 से.मी. वषार् अथवा चैबीस घंटों में बाँसवाड़ा में निरंतर 35 से.मी. वषार् अथवा सूचना जैसेμरेलगाड़ी द्वारा नयी दिल्ली - मुंबइर् की दूरी, वाया कोटा - वड़ोदरा 1305 कि.मी. है और वाया इटारसी - मनमाड 1542 कि.मी. है। यह संख्यात्मक सूचना आंकड़ा कहलाती है। यह आसानी से अनुभव किया जा सकता है कि आज के संसार में बड़ी संख्या में आंकड़े उपलब्ध् हैं पिफर भी इन आंकड़ों से ता£कक निष्कषर् निकालना उस समय कठिन हो जाता है जबकिये अपरिष्कृत रूप में होते हैं। इसलिए यह सुनिश्िचत कर लेना महत्वपूणर् है कि मापी गइर् सूचना प्रतीक गण्िातीय रूप से प्राप्त की गइर् है अथवा ताविर्फक रूप से निगमित किए गए हैं अथवा सांख्ियकीय विध्ि से परिकलितकिए गए हैं। सूचना को एक प्रश्न के अथर्पूणर् उत्तर अथवा अथर्पूणर् उद्दीपक के रूप में परिभाष्िात किया गया है जिसे अगले प्रश्नों में सोपानित किया जा सकता है। आंकड़ों की आवश्यकता भौगोलिक अध्ययन में मानचित्रा एक महत्वपूणर् साध्न है। इसके अतिरिक्त परिघटनाओं के वितरण और वृि को सारणीब( रूप में आंकड़ों के द्वारा स्पष्ट किया गया है। हम जानते हैं कि पृथ्वी की सतह पर बहुत - सी परिघटनाओं के मध्य अंतस±बंध होते हैं। ये अन्योन्य ियाएँ बहुत से चरों द्वारा प्रभावित होती हैं जिनकी सबसे अच्छी व्याख्या मात्रात्मक रूप में की जा सकती है। आज उन चरों का सांख्ियकीय विश्लेषण आवश्यक हो गया है। उदाहरण के लिए किसी क्षेत्रा के शस्य प्रारूप के अध्ययन के लिए, पफसल के अंतगर्त क्षेत्रा, पफसल की उत्पादकता और उत्पादन, सिंचित क्षेत्रा, वषार् की मात्रा और उवर्रक, कीटनाशक और पीड़कनाशी के प्रयोग जैसे निवेश के बारे में सांख्ियकीय सूचना का होना आवश्यक है। इसी प्रकार से किसी क्षेत्रा में एक नगर के विकास के अध्ययन के लिए वुफल जनसंख्या, घनत्व, प्रवासियों की संख्या, लोगों के व्यवसाय, उनके वेतन, उद्योगों, यातायात और संचार के साध्नों से संबंध्ित आंकड़े आवश्यक होते हैं। इस प्रकार, आंकड़े भौगोलिक विश्लेषण में एक महत्वपूणर् भूमिका निभाता है। आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण आपने एक व्यक्ित की कहानी सुनी होगीे जो अपनी पत्नी और पाँच साल के बच्चे के साथ यात्रा कर रहा था। रास्ते में उसे एक नदी पार करनी थी। सबसे पहले उसने चार ¯बदुओं की गहराइर् 0ण्6ए 0ण्8ए 0ण्9ए 1ण्5 मीटर के रूप में मापी। उसने औसत गहराइर् 0ण्95 मीटर निकाली। उसके बच्चे की लंबाइर् 1 मीटर थी। इसलिए उसने उसे नदी पार करने के लिए उतार दिया और उसका बच्चा नदी में डूब गया। दूसरे किनारे पर वह ¯चतन करता हुआ बैठ गया, फ्लेखा - जोखा थाए, तो बच्चा डूबा काहे?य् ;बच्चा क्यों डूब गया जब गहराइर् सभी की पहुँच में थी?द्ध इसे सांख्ियकीय दोष कहते हैं जो कि आपको यथाथर् स्िथति से भ्रमित कर सकता है। इसलिए तथ्यों और आकार को जानने के लिए आंकड़ों को एकत्रा करना बहुत आवश्यक है, लेकिन उतना ही महत्वपूणर् आंकड़ों का प्रस्तुतीकरण है। आज सांख्ियकीय विध्ियों का उपयोग विश्लेषण, प्रस्तुतीकरण और निष्कषो± को निकालने में भूगोल सहित लगभग सभी शास्त्रों में जो कि आंकड़ों का उपयोग करते हैं, एक महत्वपूणर् भूमिका निभाता है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि परिघटनाओं का सांद्रण भ्िान्न पाया जाता है। जैसे कि जनसंख्या, वन अथवा यातायात या संचार नेटववर्फ न केवल स्थान और समय के अनुसार बल्िक आंकड़ों के उपयोग से आसानी से समझाया जा सकता है। अन्य शब्दों में आप कह सकते हैं कि चरों के बीच संबंधें की व्याख्या करने में गुणात्मक विश्लेषण से मात्रात्मक विश्लेषण में स्थानांतरण है। इसलिए इन दिनों विश्लेषणात्मक साध्न और तकनीवेंफ, विषय को और अध्िक ताविर्फक बनाने और परिशु( निष्कषर् प्राप्त करने के लिए अत्यध्िक महत्वपूणर् हो गए हैं। आंकड़ों के एकत्राण और संकलन के आरंभ से ही उनके सारणीयन, संगठन, क्रमब(ता और संियात्मक विश्लेषण तक जब तक कि निष्कषर् प्राप्त न हो जाए परिशु( सांख्ियकीय तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। आंकड़ों के ड्डोत आंकड़े निम्नलिख्िात विध्ियों से एकत्रिात किए जाते हैंμ1ण् प्राथमिक ड्डोत 2ण् द्वितीयक ड्डोत। जो आंकड़े प्रथम बार व्यक्ितगत रूप से अथवा व्यक्ितयों के समूह संस्था/संगठन द्वारा एकत्रिात किए जातेहैं, आंकड़ों के प्राथमिक ड्डोत कहलाते हैं। दूसरी तरप़्ाफ जो आंकड़े किसी प्रकाश्िात अथवा अप्रकाश्िात साधनों द्वारा एकत्रा किए जाते हैं, द्वितीयक ड्डोत कहलाते हैं। चित्रा 1ण्1 में आंकड़ा संग्रह की विभ्िान्न विध्ियाँ दशार्इर् गइर् हैं। प्राथमिक आंकड़ों के साध्न 1ण् व्यक्ितगत प्रेक्षण यह सूचनाओं के उस संग्रह की ओर संकेत करता है जो व्यक्ितगत या व्यक्ितयों के समूह द्वारा क्षेत्रा में प्रत्यक्षप्रेक्षण द्वारा एकत्रा किया जाता है। क्षेत्रा - सवेर्क्षण के द्वारा भू - आकृति के लक्षणों, अपवाह प्रारूप, मिट्टðी औरप्राकृतिक वनस्पति के प्रकारों के साथ - साथ जनसंख्या संरचना, लिंग अनुपात, साक्षरता, परिवहन और संचार के साध्न, नगरीय और ग्रामीण अध्िवास आदि के बारे में सूचनाएँ एकत्रा की जाती हैं। पिफर भी व्यक्ितगत 3ण् प्रश्नावली अनुसूची इस विध्ि में, साधरण प्रश्नों और उनके संभावित उत्तर एक सादे कागश पर लिखे रहते हैं और उत्तर देने वालों को दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर पर निशान लगाना होता है। कइर् बार प्रश्नावली में संरचनात्मक प्रश्नों का एक समूह लिखा रहता है और उत्तर देने वालों के विचार जानने के लिए पयार्प्त स्थान दिया रहता है। यदि केवल विवृत्तांत प्रश्नों के माध्यम से लोगों के विचारों को एकत्रा करने की जरूरत है तो इसे प्रश्नावली कहते हैं। प्रश्नावली में सवेर्क्षण के उद्देश्य स्पष्ट रूप से उल्िलख्िात होने चाहिए। यह विध्ि बड़े क्षेत्रा के सवेर्क्षण के लिए उपयोगी होती है। प्रश्नावली को दूरवतीर् क्षेत्रों में भी भेजा जा सकता है। इस विध्ि की सीमा यह है कि आवश्यक सूचनाओं को उपलब्ध् कराने के लिए केवल साक्षर और श्िाक्ष्िात लोगों से ही संपवर्फ किया जा सकता है। प्रश्नावली से मिलती - जुलती जिसमें जाँच - पड़ताल से जुडे़ प्रश्न दिए रहते हैं, उसे अनुसूची कहा जाता है। प्रश्नावली और अनुसूची में केवल यह अंतर होता है कि प्रश्नावली में उत्तर देने वाला प्रश्नावलियों को स्वयं भरता है जबकि सूची में परिगणक उत्तर देने वाले से प्रश्न पूछकर स्वयं भरता है। प्रश्नावली की तुलना में अनुसूची का मुख्य लाभ यह है कि इसके द्वारा सूचना श्िाक्ष्िात और अश्िाक्ष्िात दोनों ही उत्तर देने वालों से एकत्रा की जा सकती हैं। एक अनुसूची को भरने के लिए गणनाकतार् को पूरी तरह प्रश्िाक्ष्िात होना चाहिए। 4ण् अन्य विध्ियाँ मृदा और जल के गुणों से संबंध्ित आंकड़े सीध्े क्षेत्रों से, मृदा किट और जल गुणवत्ता किट का उपयोग करते हुए उनकी विशेषताओं को माप कर एकत्रा किए जाते हैं। इसी तरह क्षेत्रा - वैज्ञानिक के उपयोग से पफसलों और वनस्पति के स्वास्थ्य के बारे में आंकड़े इकट्टòे कर रहे हैं ;चित्रा 1.2द्ध। आंकड़ों के द्वितीयक ड्डोत द्वितीयक ड्डोतों के अंतगर्त आंकड़ों के प्रकाश्िात और अप्रकाश्िात ड्डोत आते हैं जिनमें सरकारी प्रकाशन, प्रलेख और रिपोटे± सम्िमलित किए जाते हैं। प्रकाश्िात साध्न 1ण् सरकारी प्रकाशन विभ्िान्न मंत्रालयों और भारत सरकार के विभागों, राज्य सरकारों के प्रकाशन और िालों के बुलेटिन द्वितीयक सूचनाओं के महत्वपूणर् साध्न हैं। इनके अंतगर्त भारत के महापंजीयक कायार्लय द्वारा प्रकाश्िात भारत की जनगणना, राष्ट्रीय प्रतिदशर् सवेर्क्षण की रिपोट±े, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की मौसम रिपोटर्, राज्य सरकारों द्वारा प्रकाश्िात सांख्ियकीय सारांश और विभ्िान्न आयोगों द्वारा प्रकाश्िात आवध्िक रिपोटर्े± सम्िमलित किए जाते चित्रा 1ण्3 रू वुफछ सरकारी प्रकाशन हैं। वुफछ सरकारी प्रकाशन चित्रा 1ण्3 में दशार्ए गए हैं। आंकडे़: ड्डोत और संकलन2ण् अध्र् सरकारी प्रकाशन इस श्रेणी के अंतगर्त नगर विकास प्राध्िकरणों और विभ्िान्न नगरों और शहरों के नगर - निगमों और िाला परिषदों के प्रकाशन और रिपोटर् आते हैं। 3ण् अंतरार्ष्ट्रीय प्रकाशन अंतरार्ष्ट्रीय प्रकाशनों के अंतगर्त वाष्िार्की, संयुक्त राष्ट्र के विभ्िान्न अभ्िाकरणों जैसेμसंयुक्त राष्ट्रअभ्िाकरण, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन ;यूनेस्कोद्ध, संयुक्त राष्ट्र विकास कायर्क्रम ;यून. डी. पी.द्ध, विश्व स्वास्थ्य संगठन ;डब्ल्यूएच. ओ.द्ध, खाद्य व कृष्िा परिषद् ;एपफ. एओ.द्ध आदि द्वारा प्रकाश्िात रिपोटर् और मोनोग्राप़्ाफ सम्िमलित किए जाते हैं। संयुक्त राष्ट्र के वुफछ महत्वपूणर् प्रकाशन जो आवध्िक छपते हैं, वे हैंμ डैमोग्राप्ि़ाफक इयर बुक, स्टेटिस्टीकल इयर बुक और मानव विकास रिपोटर् ;चित्रा 1.4द्ध। 4ण् निजी प्रकाशन इस श्रेणी के अंतगर्त समाचारपत्रा और निजी संस्थाओं द्वारा प्रकाश्िात वाष्िार्की पुस्ितका, सवेर्क्षण शोध् रिपोटर् और प्रबंध् आते हैं। चित्रा 1ण्4 रू वुफछ संयुक्त राष्ट्र प्रकाशन 5ण् समाचारपत्रा और पत्रिाकाएँ दैनिक समाचारपत्रा और साप्ताहिक, पाक्ष्िाक और मासिक पत्रिाकाएँ द्वितीयक आंकड़ों के आसानी से प्राप्य ड्डोत हैं। 6ण् इलेक्ट्राॅनिक यह ड्डोत वतर्मान में इलेक्ट्राॅनिक माध्यम विशेषकर इंटरनेट, द्वितीयक आंकड़ों का एक महत्वपूणर् ड्डोत बनकर उभरा है। अप्रकाश्िात साध्न 1ण् सरकारी प्रलेख द्वितीयक आंकड़ों के अन्य ड्डोत अप्रकाश्िात रिपोटे±, मोनोग्राप़्ाफ और प्रलेख हैं। ये प्रलेख सरकार के विभ्िान्न स्तरों पर अप्रकाश्िात रिकाडर् के रूप में तैयार किए और अनुरक्ष्िात रखे जाते हैं। उदाहरण के लिए, गाँव के स्तर पर, राजस्व अभ्िालेख गाँव के पटवारियों के द्वारा बनाए जाते हैं जो एक गाँव स्तर की सूचना का महत्वपूणर् साध्न हैं। 2ण् अध्र् सरकारी प्रलेख अध्र् सरकारी प्रलेखों में, विभ्िान्न नगर निगम, िाला परिषदों और लोक सेवा विभागों द्वारा तैयार और अनुरक्ष्िात की गइर् आवध्िक रिपोटे± और विकास योजनाएँ सम्िमलित की जाती हैं। 3ण् निजी प्रलेख इसके अंतगर्त कंपनियों, व्यापार संघों, विभ्िान्न राजनैतिक और अराजनैतिक संगठनों और निवासीय कल्याण संघों के अप्रकाश्िात रिपोटर् और रिकाडर् सम्िमलित किए जाते हैं। प्राथमिक अथवा द्वितीयक साध्नों द्वारा एकत्रा किए गए आंकड़े प्रारंभ में बहुत कम समझ में आने वाली सूचनाओं के एक उलझे समूह के रूप में दिखाइर् देते हैं। यह आंकड़ा संरचना कच्चा आंकड़ा कहलाती है।अथर्पूणर् निष्कषर् निकालने और उपयोग में लाने के लिए उन अपरिष्कृत कच्चे आंकड़ों के सारणीयन और वगीर्करण की जरूरत होती है। सांख्ियकीय सारणी, आंकड़ों को संक्ष्िाप्त करने और प्रस्तुत करने के सबसे साधरण उपायों में से एक है। यह आंकड़ों की काॅलम और पंक्ितयों में की गइर् एक सुव्यवस्िथत व्यवस्था है। इस सारणी का उद्देश्य प्रस्तुतीकरण को आसान और तुलना को सरल बनाना है। इस सारणी से पाठकों को वांछित सूचना शीघ्र मिल जाती है। इस प्रकार तालिकाएँ विश्लेषक के लिए, कम स्थान में आंकड़ों के विशाल समूह वफो प्रस्तुत करना संभव बनाती हैं। आंकड़ों का संग्रह और प्रस्तुतीकरण आंकड़ों का संग्रह, सारणीयन और सारणी रूप में प्रस्तुतीकरण या तो निरपेक्ष रूप से, प्रतिशत में अथवा संकेतसूची के रूप में होता है। निरपेक्ष आंकड़ा जब आंकड़े अपने मूल रूप में पूणा±क की तरह प्रस्तुत किए जाते हैं, उन्हें निरपेक्ष आंकडे़ अथवा कच्चा आंकड़ेकहते हैं। उदाहरण के लिए, एक देश अथवा राज्य की वुफल जनसंख्या, एक पफसल अथवा एक विनिमार्णउद्योग का वुफल उत्पादन आदि। सारणी 1ण्1 भारत और उसके वुफछ चुने हुए राज्यों की जनसंख्या के निरपेक्षआंकड़े दशार्ती हैं। प्रतिशत/अनुपात कइर् बार आंकड़े अनुपात अथवा प्रतिशत रूप में सारणीब( किए जाते हैं जो कि एक सामान्य प्राचल सेपरिकलित होते हैं, जैसे साक्षरता दर अथवा जनसंख्या की वृि दर, कृष्िा उत्पादों अथवा औद्योगिक उत्पादों का प्रतिशत आदि। सारणी 1ण्2 विभ्िान्न दशकों की भारत की साक्षरता दर को प्रतिशत रूप में प्रस्तुत करती गया है - वफु ल साक्षर व्यक्ित 100 वुफल जनसख्ंया सूचकांक सूचकांक चर अथवा एक सांख्ियकीय माप है जिसे चर अथवा समय भौगोलिक स्िथति या दूसरी विशेषताओं ड्डोत - 2011 की जनगणना के आंकड़े।के संदभर् में संबंध्ित चरों के संबंध्ित समूह में परिवतर्न को दशार्ने के लिए अभ्िाकल्िपत किया जाता ँआंकड़ों का वगीर्करण कच्चे आंकड़ों के वगीर्करण के लिए श्रेण्िायों की संख्याओं को निधर्रित करना होता है जिसमें अपरिष्कृतआंकड़े अपने अंतराल के साथ वगीर्कृत किए जाते हैं। वगर् अंतराल का चुनाव और वगो± की संख्या, अपरिष्कृत आंकड़ों के परिसर और वगीर्करण के उद्देश्यों पर निभर्र करते हैं। तालिका 1ण्4 में दिए गए कच्चे आंकड़े 2 से 96 तक हैं। सुविध के लिए हम आंकड़ों को प्रत्येक वगर् में 10 इकाइयों के अंतराल के साथ, दस वगो± में रख सकते हैं, उदाहरण के लिए 0दृ10ए 10दृ20ए 20दृ30 आदि ;तालिका 1ण्5द्ध। सारणी 1ण्4 रू भूगोल विषय में 60 विद्या£थयों के प्राप्तांक 47 02 39 64 22 46 28 02 09 10 89 96 74 06 26 15 92 84 84 90 32 22 53 62 73 57 37 44 67 50 18 51 36 58 28 65 63 59 75 70 56 58 43 74 64 12 35 42 68 80 64 37 17 31 41 71 56 83 59 90 वगीर्करण की प्रिया जब एक बार वगो± की संख्या और प्रत्येक वगर् का वगर् अंतराल निश्िचत कर लिया जाता है, तब कच्चे आंकड़ोंको वगीर्कृत किया जाता है जैसा कि तालिका 1ण्5 में दशार्या गया है। यह एक प्रचलित विध्ि है जिसेे पफोरएंड क्रास विध्ि या मिलान चिÉ के नाम से जाना जाता है।सबसे पहले, वगर् की प्रत्येक इकाइर् के लिए जिसके अंतगर्त वह आता है, एक मिलान चिÉ निधार्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, कच्चे आंकड़ों में पहली संख्या 47 है, जो 40.50 के वगर् में आती है, सारणी 1ण्5 के तीसरे काॅलम में एक मिलान चिÉ अंकित कर दिया जाता है। सारणी 1ण्5 रू आवृिा प्राप्त करने के लिए बनाए गए मिलान चिÉ वग कच्चे आंकड़े की संख्या मिलान चिÉ व्यक्ित की संख्या 0.10 02ए02ए09ए06 4 10.20 10ए15ए18ए12ए17 5 20.30 22ए28ए26ए22ए28 5 30.40 39ए32ए37ए36ए35ए37ए31 7 40.50 47ए46ए44ए43ए42ए41 6 50.60 53ए57ए50ए51ए58ए 59ए56ए58ए56ए59 10 60.70 64ए62ए67ए65ए 63ए64ए68ए64 8 70.80 74ए73ए75ए70ए74ए71 6 80.90 89ए84ए84ए80ए83 5 90.100 96ए92ए90ए90 4  ित्र छ त्र 60 आवृिा वितरण तालिका 1ण्5 में हम मात्रात्मक चरों के कच्चे आंकड़े को वगीर्कृत और उन्हें वगार्नुसार सामूूहिक कर चुके हैं। मदों की संख्याएँ ;तालिका 1ण्5 के चतुथर् काॅलममें दिए गए स्थानद्ध आवृिा कहलाती है और काॅलमसारणी 1ण्6 रू आवृिा वितरणआवृिा वितरण को प्रदश्िार्त करता है। यह स्पष्ट होता है कि एक चर वफी विभ्िान्न मदों को वैफसे वितरितकिया गया है। आवृिायों को साधरण और संचयीआवृिायों में वगीर्कृत किया जाता है। साधरण आवृिाष्ि द्वारा प्रदश्िार्त साधरण आवृिा, प्रत्येक वगर् के व्यक्ितयों की संख्या को प्रदश्िार्त करती है। ;तालिका 1.6द्ध सभी वगो± के लिए दी गइर् आवृिा का योग, दी गइर् श्रेणी में व्यक्ितगत अवलोकनों के वुफल योग को दशार्ता है। सांख्ियकी में, यह श्छश् संकेत से स्पष्ट किया गया है जो कि  िण् के बराबर है। इसे  ित्र छ त्र 60 ;तालिका 1ण्5 और 1ण्6द्ध की तरह व्यक्त किया गया है। संचयी आवृिा संचयी आवृिा को ष्ब्िए द्वारा प्रदश्िार्त किया गया है जिसे प्रत्येक वगर् में दी गइर् क्रमिक सामान्य आवृिायोग के साथ जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है, जैसा कि तालिका 1.6 के काॅलम 3 में प्रदश्िार्त है। उदाहरण के लिए तालिका 1.6 में पहली सामान्य आवृिा 4 है। अगली आवृिा 5 को 4 में जोड़ा गया है जिसका योग9 है जो अगली संचयी आवृिा है। इसी प्रकार प्रत्येक अगली संख्या को जोड़ते जाते हैं जब तक कि अंतिम संचयीआवृिा 60 प्राप्त नहीं हो जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह छ अथवा  िके बराबर है।संचयी आवृिा का लाभ यह है कि एक व्यक्ित आसानी से समझ सकता है कि 27 व्यक्ित ऐसे हैं जिनके प्राप्तांक 50 से नीचे हैं अथवा 60 व्यक्ितयों में से 45 व्यक्ितयों के प्राप्तांक 70 से नीचे हैं।प्रत्येक सामान्य आवृिा इसके समूह अथवा वगर् से संबंिात होती है। समूहों या वगो± को तैयार करने के लिए अपवतीर् अथवा समावेशी विध्ि प्रयोग में लाइर् जाती है। अपवतीर् विध्ि जैसा कि तालिका 1.6 में सबसे पहले काॅलम में दो संख्याएँ दशार्इर् गइर् हैं। ध्यान दें कि एक वगर् की उच्च सीमा अगले वगर् की निम्न सीमा के जैसी है। उदाहरण के लिए एक वगर् ;20 - 30द्ध की उच्च सीमा 30 है जो कि अगले वगर् ;30 - 40द्ध की निम्न सीमा है। 30 दोनों वगर् में प्रदश्िार्त हैं। लेकिन कोइर् भी अवलोकन जिसका मूल्य 30 है, उसी वगर् में रखा जाएगा जिसमें यह निम्न सीमा पर आता है और यह उस वगर् से निकाल दिया जाता है जिसमें यह उच्च सीमा ;20 - 30द्ध पर है। इसीलिए इस विध्ि को अपवतीर् विध्ि कहते हैं। अब आप जान सकते हो कि तालिका 1.4 के सभी सीमांत मूल्य कहाँ जाएँगे। पिफर से तालिका 1.6 में देख्िाए, इसके वगो± की निम्नलिख्िात प्रकार से व्याख्या की गइर् है μ 0 और 10 से नीचे 10 और 20 से नीचे 20 और 30 से नीचे 30 और 40 से नीचे 40 और 50 से नीचे 50 और 60 से नीचे 60 और 70 से नीचे 70 और 80 से नीचे 80 और 90 से नीचे 90 और100 से नीचे समावेशी विध्ि सारणी 1ण्6 रू आवृिा वितरण: समावेशी विध्िवगर् ि ब् ि 0 दृ 9 4 4 10 दृ 19 5 9 20 दृ 29 5 14 30 दृ 39 7 21 40 दृ 49 6 27 50 दृ 59 10 37 60 दृ 69 8 45 70 दृ 79 6 51 80 दृ 89 5 56 90 दृ 99 4 60  ित्र छ त्र 60 इस विध्ि में एक मूल्य जो वगर् की उच्च सीमा के मूल्य के समान होता है, उसे उसी वगर् में रखा जाता है। इसीलिए इस विध्ि को समावेशी विध्ि कहते हैं। इस विध्ि में वगो± को अलग प्रकार से प्रदश्िार्त किया जाता है जैसा तालिका 1.7 के पहले काॅलम में दिखाया गया है। साधरणतया वगर् की उच्च सीमा में अगले वगर् की निम्न सीमा से 1 का अंतर होता है। महत्वपूणर् बात यह है कि इस विध्ि में भी वगर् का विस्तार 10 इकाइयों तक होता है। उदाहरण के लिए 50 - 59 का वगर् 10 मानों 50, 51, 52, 53, 54, 55, 56, 57, 58 और 59 ;तालिका 1.7द्ध का समावेश करता है। इस विध्ि में उच्च और निम्नदोनों सीमाएँ आवृिा वितरण को प्राप्त करने के लिए समाविष्ट की जाती हैं। आवृिा बहुभुज आवृिायों वितरण का ग्रापफ आवृिा बहुभुज के नाम से जाना जाता है। यह दो या दो से अध्िक आवृिा वितरण़की तुलना में सहायता करता है। दोआवृिा को दंड आरेख और रेखाचित्रा के द्वारा दिखाया गया है। ओजाइव जब आवृिा को जोड़ दिया जाता है,उन्हें संचयी आवृिा कहा जाता है और जिस सारणी में सूचीगत किए जाते हैं,उसे संचयी आवृिा सारणी कहते हैं।संचयी आवृिा द्वारा प्राप्त किए गए वक्र को ओजाइव कहते हैं। जिसका उच्चारण ओजाइव है। इसका निमार्ण या तो कमतर विध्ि ;समेे जींद उमजीवकद्ध या अिाकतर विध्ि ;उवतम जींदचित्रा 1ण्5 रू आवृिा वितरण बहुभुजउमजीवकद्ध द्वारा करते हैं। कमतर विध्ि में, हम श्रेण्िायों की उच्च सीमा से शुरू करते हैं और आवृिा काजाडेत़े जाते हैं। जब इन आवृिायों ेको अंकित किया जाता हैंे एक उभरता हुआ वक्र प्राप्त हाता है जिसे तालिका 1.8 और चित्रा 1.5 में दशार्या, तो हमेगया है। अध्िकतर विध्ि में, हम वगो± की निम्न सीमा से शुरू करते हैं और संचयी आवृिा से प्रत्येक वगर् कीआवृिा को घटा देते हैं। जब ये आवृिायाँ अंकित की जाती हैं तब हमें एक गिरता हुआ वक्र प्राप्त होता है जैसा कि तालिका 1.9 और चित्रा 1.6 में दशार्या गया है।कमतर ओजाइव और अध्िकतर ओजाइव का तुलनात्मक चित्रा प्राप्त करने के लिए ऊपर के दोनों चित्रों 1.5 और 1.6 का संयोजन कर सकते हैं जैसा कि तालिका 1.10 और चित्रा 1.7 में दिखाया गया है। सारणी 1ण्8 रू आवृिा वितरण कमतर विध्ि कमतर विध्ि ब् ि 10 से कम 4 20 से कम 9 30 से कम 14 40 से कम 21 50 से कम 27 60 से कम 37 70 से कम 45 80 से कम 51 90 से कम 56 100 से कम 60 सारणी 1ण्9 रू आवृिा वितरण अध्िकतर विध्ि अध्िकतर विध्ि ब् ि 0 से अध्िक 60 10 से अध्िक 56 20 से अध्िक 51 30 से अध्िक 44 40 से अध्िक 38 50 से अध्िक 28 60 से अध्िक 20 70 से अध्िक 14 80 से अध्िक 9 90 से अध्िक 4 सारणी 1ण्10 रू कमतर और अध्िकतर ओजाइव 0 . 10 4 60 10 . 20 9 56 20 . 30 14 51 30 . 40 21 44 30 . 40 27 38 50 . 60 37 28 60 . 70 45 20 70 . 80 51 14 80 . 90 56 9 90 . 100 60 4 1ण् नीचेे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: ;पद्ध एक संख्या अथवा लक्षण को जो मापन को प्रदश्िार्त करता है, कहते हैं ;कद्ध अंक ;खद्ध आँकड़े ;गद्ध सख्या ं ;घद्ध लक्षण ;पपद्ध एकल आधर सामग्री एकमात्रा माप है ;कद्ध तालिका ;खद्ध आवृिा ;गद्ध वास्तविक संसार ;घद्ध सूचना ;पपपद्ध एक मिलान चिÉ में, पफोर एंड क्रांसिंग पिफफ्रथ द्वारा समूहीकरण को कहते हैं ;कद्ध पफोर एंड क्रास विध्ि ;खद्ध मिलान चिÉ विध्ि ;गद्ध आवृिा अंकित विध्ि ;घद्ध समावेश विध्ि ;पअद्ध ओजाइव एक विध्ि है जिसमें ;कद्ध साधरण आवृिा नापी जाती है। ;खद्ध संचयी आवृिा नापी जाती है। ;गद्ध साधरण आवृिा अंकित की जाती है। ;घद्ध संचयी आवृिा अंकित की जाती है। ;अद्ध यदि वगर् के दोनों अंत आवृिा समूह में लिए गए हों, इसे कहते हैं ;कद्ध बहिष्कार विध्ि ;खद्ध समावेश विध्ि ;गद्ध चिÉ विध्ि ;घद्ध सांख्ियकीय विध्ि 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध आंकड़ा और सूचना के बीच अंतर। ;पपद्ध आंकड़ों से आप क्या समझते हंै? ;पपपद्ध एक तालिका में पाद टिप्पणी से क्या लाभ हैं? ;पअद्ध आंकड़ों के प्राथमिक ड्डोतों से आपका क्या तात्पयर् है? ;अद्ध द्वितीयक आंकड़ों के पाँच ड्डोत बताइए। ;अपद्ध आवृिा वगीर्करण की अपवतीर् विध्ि क्या है? 3ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 125 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध राष्ट्रीय और अंतरार्ष्ट्रीय अभ्िाकरणों की चचार् कीजिए जहाँ से द्वितीयक आँकड़े एकत्रा किए जा सकते हैं। ;पपद्ध सूचकांक का क्या महत्त्व है? सूचकांक की परिकलन की प्रिया को बताने के लिए एक उदाहरण लीजिए और परिवतर्नों को दिखाइए। ियाकलाप 1ण् भूगोल की 35 विद्याथ्िार्यों की कक्षा में, निम्नलिख्िात अंक, 10 अंक के यूनिट टेस्ट में प्राप्त किए गए हैं दृ 1ए 0ए 2ए 3ए 4ए 5ए 6ए 7ए 2ए 3ए 4ए 0ए 2ए 5ए 8ए 4ए 5ए 3ए 6ए 3ए 2ए 7ए 6ए 5ए 4ए 3ए 7ए 8ए 9ए 7ए 9ए 4ए 5ए 4ए 3 आँकड़े को संचयी आवृिा वितरण के रूप में प्रस्तुत करिए। अपनी कक्षा के भूगोल विषय की अंतिम परीक्षा का परिणाम एकत्रा कीजिए और प्राप्तांकों को संचयी आवृिा वितरण के रूप में प्रदश्िार्त कीजिए।

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