12ण्1 भूमिका उन्नीसवीं शताब्दी तक पदाथर् की परमाण्वीय परिकल्पना के समथर्न में काप़्ाफी साक्ष्य एकत्रिात हो गए थे। सन् 1897 में बि्रटिश भौतिकविज्ञानी जोसेपफ जे. टाॅमसन ;1856 दृ 1940द्ध ने गैसों के विद्युत विसजर्न प्रयोगों द्वारा ज्ञात किया कि विभ्िान्न तत्वों के परमाणुओं में उपस्िथत )णात्मक आवेश्िात संघटक ;इलेक्ट्राॅनद्ध सभी परमाणुओं के लिए पूणर्तया समान हैं। तथापि, परमाणु स्वयं में वैद्युत रूप से उदासीन होते हैं। इसलिए, इलेक्ट्राॅन के )ण आवेश को निष्प्रभावित करने के लिए परमाणु में ध्नात्मक आवेश भी अवश्य होना चाहिए। लेकिन परमाणु में ध्नात्मक आवेश तथा इलेक्ट्राॅन की व्यवस्था क्या है? दूसरे शब्दों में, परमाणु की संरचना क्या है? सन् 1898 में जे. जे. टाॅमसन ने परमाणु का पहला माॅडल प्रस्तावित किया। इस माॅडल के अनुसार, परमाणु का ध्न आवेश परमाणु में पूणर्तया एकसमान रूप से वितरित है तथा )ण आवेश्िात इलेक्ट्राॅन इसमें ठीक उसी प्रकार अंतःस्थापित हैं जैसे किसी तरबूज में बीज। इस माॅडल को चित्रामय रूप में प्लम पुडिंग माॅडल कहा गया। तथापि परमाणु के विषय में बाद के अध्ययनों ने जैसा कि इस अध्याय में वण्िार्त है, यह दशार्या कि परमाणु में इलेक्ट्राॅनों तथा ध्न आवेशों का वितरण इस प्रस्तावित माॅडल से बहुत भ्िान्न है। हम जानते हैं कि संघनित पदाथर् ;ठोस तथा द्रवद्ध तथा सघन गैसें सभी तापों पर वैद्युतचुंबकीय विकिरण उत्सजिर्त करते हैं जिसमें अनेक तरंगदैघ्यो± का संतत वितरण विद्यमान होता है यद्यपि उनकी तीव्रताएँ भ्िान्न होती हैं। यह समझा गया कि यह विकिरण परमाणुओं तथा अणुओं के दोलनों के कारण होता है, जो प्रत्येक परमाणु अथवा अणु का अपने समीप के परमाणुओं या अणुओं के साथ होने वाली अन्योन्य िया से नियंत्रिात होता है। इसके विपरीत ज्वाला में गमर् की गइर् विरलित गैसों द्वारा उत्सजिर्त प्रकाश अथवा किसी तापदीप्त नलिका में विद्युत उत्तेजित गैस, जैसे निआॅन साइन अथवा पारद - वाष्प प्रकाश में केवल निश्िचत विविक्त तरंगदैघ्यर् होती हैं। इनके स्पेक्ट्रम में चमकीली रेखाओं की एक शृंखला दिखाइर् देती है। ऐसी गैसों में परमाणुओं के मध्य अंतराल अध्िक होता है। अतः, उत्सजिर्त विकिरण, परमाणुओं अथवा अणुओं के बीच अन्योन्य ियाओं के परिणामस्वरूप नहीं, बल्िक व्यष्िटगत परमाणुओं के कारण माना जा सकता है। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में ही यह स्थापित हो गया था कि प्रत्येक तत्व से उत्सजिर्त विकिरण का एक अभ्िालाक्षण्िाक स्पेक्ट्रम होता है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम सदैव रेखाओं का एक समुच्चय होता है जिसमें रेखाओं के बीच की आपेक्ष्िाक स्िथतियाँ निश्िचत होती हैं। इस तथ्य ने किसी परमाणु की आंतरिक संरचना और इससे उत्सजिर्त विकिरण के स्पेक्ट्रम के बीच घनिष्ठ संबंध् की ओर संकेत किया। सन् 1885 में जान जेकब बामर ;1825 दृ 1898द्ध ने परमाण्वीय हाइड्रोजन से उत्सजिर्त रेखाओं के समूह की आवृिायों के लिए एक सरल आनुभविक सूत्रा प्राप्त किया। चूँकि हाइड्रोजन एक सरलतम ज्ञात तत्व है, हम इसके स्पेक्ट्रम का इस अध्याय में विस्तार से अध्ययन करेंगे। जे. जे. टाॅमसन के एक भूतपूवर् शोध् छात्रा अनेर्स्ट रदरपफोडर् ;1871दृ1937द्धए वुफछ रेडियोएक्िटव तत्वों से उत्सजिर्त ऐल्प़्ाफा - कणों ;α.कणोंद्ध पर एक प्रयोग करने में व्यस्त थे। परमाणु की संरचना का अन्वेषण करने के लिए उन्होंने सन् 1906 में परमाणुओं द्वारा ऐल्प़्ाफा - कणों के प्रकीणर्न से संबंध्ित एक क्लासिकी प्रयोग प्रस्तावित किया। यह प्रयोग वुफछ समय पश्चात सन् 1911 में हैंस गाइगर ;1882 दृ 1945द्ध तथा अनेर्स्ट मासर्डन ;1889 दृ 1970ए जो 20 वषीर्य छात्रा थे तथा जिन्होंने अभी स्नातक की उपाध्ि भी ग्रहण नहीं की थीद्ध ने किया। अनुच्छेद 12ण्2 में इसकी विस्तार से व्याख्या की गइर् है। इसके परिणामों की व्याख्या ने परमाणु के रदरपफोडर् के ग्रहीय माॅडल को जन्म दिया ;जिसे परमाणु का नाभ्िाकीय माॅडल भी कहा जाता हैद्ध। इसके अनुसार, किसी परमाणु का वुफल ध्नावेश तथा अध्िकांश द्रव्यमान एक सूक्ष्म आयतन में संवेंफित होता है जिसे नाभ्िाक कहते हैं और इसके चारों ओर इलेक्ट्राॅन उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं जैसे सूयर् के चारों ओर ग्रह परिक्रमा करते हैं। परमाणु के जिस वतर्मान रूप को हम जानते हैं, रदरपफोडर् का नाभ्िाकीय माॅडल उस दिशा में एक बड़ा कदम था। तथापि इसके द्वारा यह व्याख्या नहीं का जा सकी कि परमाणु केवल विविक्त ;कपेबतमजमद्ध तरंगदैघ्यर् का प्रकाश ही क्यों उत्स£जत करता है। हाइड्रोजन जैसा एक सरल परमाणु जिसमें एक इलेक्ट्राॅन तथा एक प्रोटाॅन होता है, विशेष तरंगदैघ्यर् का एक जटिल स्पेक्ट्रम वैफसे उत्सजिर्त करता है? परमाणु के क्लासिकी चित्राण में, इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के चारों ओर ठीक ऐसे ही परिक्रमा करता है जैसे कि सूयर् के चारों ओर ग्रह परिक्रमा करते हैं। तथापि, हम देखेंगे कि इस माॅडल को स्वीकार करने में वुफछ गंभीर कठिनाइयाँ हैं। 12ण्2 ऐल्प़्ाफा कण प्रकीणर्न तथा परमाणु का रदरपफोडर् नाभ्िाकीय माॅडल सन्् 1911 में रदरपफोडर् के सुझाव पर एच. गाइगर तथा इर्. मासर्डन ने वुफछ प्रयोग किए। उनके द्वारा भौतिकी चित्रा 12ण्1 गाइगर - मासर्डन प्रकीणर्न प्रयोग। संपूणर् उपकरण एक निवार्त कक्ष में रखा गया है। ;इस चित्रा में यह कक्ष नहीं दशार्या गया है।द्ध किए गए एक प्रयोग में रेडियोऐक्िटव स्रोत 214 ठप से उत्सजिर्त 5ण्5 डमट ऊजार् वाले α−कणों के एक पुंज को पतले स्वणर् पन्नी पर दिष्ट कराया गया, जैसा कि चित्रा 12ण्1 में दशार्या गया है। चित्रा 12ण्2 में इस प्रयोग के व्यवस्िथत चित्रा को दशार्या गया है। रेडियोऐक्िटव स्रोत 214 ठप से उत्सजिर्त α−कणों के83एक पतले किरण - पुंज को लेड की ईंटों के मध्य से गुशार कर संरेख्िात किया गया। इस किरण - पुंज का 2ण्1×10दृ7उ मोटी स्वणर् पन्नी पर आघात कराया गया। प्रकीण्िार्त α−कणों का विक्षेप मापने के लिए एक घूणीर् संसूचक का प्रयोग किया गया जिसमें एक ¯जक सल्पफाइड का परदा एवं एक सूक्ष्मदशीर् था। प्रकीण्िार्त ऐल्प़्ाफा - कण परदे से टकराकर चमकीले फ्रलैश अथवा प्रस्पुफर उत्पन्न करते हैं। ये फ्रलैश सूक्ष्मदशीर् द्वारा देखे जा सकते हैं तथा प्रकीण्िार्त कणों की संख्या के वितरण का प्रकीणर्न कोण के पफलन के रूप में अध्ययन किया जा सकता है। चित्रा 12ण्2 गाइगर - मासर्डन प्रयोग का व्यवस्थात्मक निरूपण। चित्रा 12ण्3 में किसी दिए समयांतराल में विभ्िान्न कोणों पर प्रकीण्िार्त वुफल ऐल्प़्ाफा - कणों की संख्या का प्रारूपिक आलेख दशार्या गया है। इस चित्रा में दिखाए गए ¯बदु प्रयोग में प्राप्त आँकड़ों को निरूपित करते हैं और संतत वक्र सै(ांतिक पूवार्नुमान है जो इस कल्पना पर आधरित है कि परमाणु में एक सूक्ष्म सघन तथा ध्नावेश्िात नाभ्िाक है। बहुत से ऐल्प़्ाफा - कण स्वणर् पन्नी को पार कर जाते हैं। इसका अथर् है उनमें संघट्टðन नहीं होता। आपतित ऐल्प़्ाफा - कणों में से केवल 0ण्14ः ;लगभगद्ध का 1व के कोण से अध्िक प्रकीणर्न होता है तथा 8000 ऐल्प़्ाफा - कणों में से लगभग 1 कण 90व से अध्िक विक्षेपित होता है। रदरपफोडर् ने तवर्फ किया कि ऐल्प़्ाफा - कणों को विपरीत दिशा में विक्षेपित करने के लिए, इन पर बहुत अध्िक प्रतिकषर्ण बल लगना चाहिए। इतना अध्िक बल तभी 107 प्राप्त हो सकता है यदि परमाणु का अध्िकांश द्रव्यमान 6तथा इसका ध्न - आवेश इसके वेंफद्र पर दृढ़ता पूवर्क 10संवेंफित हो। तब अंदर आता हुआ ऐल्प़्ाफा - कण ध्न आवेश को भेदे बिना इसके अत्यंत समीप आ सकता 105 है तथा इस प्रकार के समागम के परिणामस्वरूप 4 अिाक विक्षेप होगा। इससे नाभ्िाकीय परमाणु की 10परिकल्पना की पुष्िट होती है। यही कारण है कि 103 रदरपफोडर् को नाभ्िाक की खोज का श्रेय दिया जाता है। 2रदरपफोडर् के परमाणु के नाभ्िाकीय माॅडल में, 10परमाणु का वुफल ध्नावेश तथा इसका अध्िकांश द्रव्यमान परमाणु के बहुत छोटे से आयतन में संवेंफित 100 20 40 60 80 100 120 140 160 180 होता है जिसे नाभ्िाक कहते हैं तथा इलेक्ट्राॅन इससे प्रकीणर्न कोण θ ;डिग्री मेंद्ध वुफछ दूर होते हैं। इलेक्ट्राॅन, नाभ्िाक के चारों ओर कक्षा चित्रा 12ण्3 चित्रा 12ण्1 तथा 12ण्2 में गाइगर - मासर्डन द्वारा प्रयुक्त प्रयोग में चक्कर लगाते हैं, ठीक ऐसे ही जैसे सूयर् के चारों व्यवस्था में पतली पन्नी पर ऐल्पफा - कणों के प्रहार में विभ्िान्न कोणों पर ओर ग्रह चक्कर लगाते हैं। रदरपफोडर् के प्रयोगों ने प्राप्त प्रायोगिक प्रकीणर्न आँकड़े ;बिन्दुओं के रूप मेंद्ध। रदरपफोडर् के सुझाया कि नाभ्िाक का साइश लगभग 10दृ15 उ से नाभ्िाकीय माॅडल पर आधरित ठोस वक्र प्रायोगिक परीक्षणों के साथ मेल 10दृ14 उ हो सकता है। गतिज सि(ांत के अनुसार रखते हुए प्रतीत होते हैं। परमाणु का साइश 10दृ10 उ माना जाता है, जो कि नाभ्िाक के साइश की अपेक्षा लगभग 10ए000 से 100ए000 गुना बड़ा है ;कक्षा 11 की भौतिकी पाठ्यपुस्तक का अध्याय 11ए अनुच्छेद 11ण्6 देखेंद्ध। इस प्रकार, नाभ्िाक से इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के साइश की अपेक्षा लगभग 10ए000 से 100ए000 गुना दूर दिखाइर् देगा। इस प्रकार, परमाणु के भीतर का अध्िकांश भाग खाली है। परमाणु के भीतर का अध्िकतर भाग खाली होने के कारण यह समझना आसान है कि अध्िकतर ऐल्प़्ाफा - कण पतली धतु की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए बाहर क्यों निकल जाते हैं। तथापि, जब कोइर् ऐल्प़्ाफा - कण नाभ्िाक के समीप आता है तो वहाँ पर विद्यमान प्रबल विद्युत बल इसे बड़े कोण से प्रकीण्िार्त कर देता है। परमाणु के इलेक्ट्राॅन अत्यंत हलके होने के कारण ऐल्प़्ाफा - कणों पर पयार्प्त प्रभाव नहीं डाल पाते। चित्रा 12ण्3 में प्रदश्िार्त प्रकीणर्न आँकड़ों का विश्लेषण रदरपफोडर् के परमाणु के नाभ्िाकीय माॅडल द्वारा किया जा सकता है। स्वणर् पन्नी के बहुत पतली होने के कारण यह कल्पना की जा सकती है कि इस पन्नी को पार करते समय α.कण एक से अध्िक बार प्रकीण्िार्त नहीं होंगे। अतः किसी एक नाभ्िाक से प्रकीण्िार्त ऐल्प़्ाफा - कण के प्रक्षेप पथ का अभ्िाकलन काप़्ाफी है। ऐल्प़्ाफा - कण हीलियम परमाणु के नाभ्िाक हैं इसलिए इन पर दो इकाइर्, 2मए ध्नावेश है और द्रव्यमान हीलियम परमाणु के द्रव्यमान के बराबर है। स्वणर् के नाभ्िाक का आवेश र्म है, यहाँ र् परमाणु का परमाणु क्रमांक है, जो स्वणर् के लिए 79 है। चूँकि स्वणर् - नाभ्िाक α−कण के नाभ्िाक से 50 गुना भारी है, अतः यह कल्पना करना तवर्फसंगत है कि प्रकीणर्न प्रक्रम के समय स्वणर् - नाभ्िाक स्िथर रहता है। इन अभ्िाधरणाओं के आधर पर ऐल्प़्ाफा - कण और ध्नावेश्िात नाभ्िाक के मध्य स्िथर वैद्युत प्रतिकषर्ण बल के वूफलाॅम - नियम तथा न्यूटन के गति के द्वितीय नियम द्वारा ऐल्प़्ाफा - कण के प्रक्षेप पथ का अभ्िाकलन किया जा सकता है। इस बल का परिमाण इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: 419 संसूचित किए गए प्रकी£णत कणों की संख्याभौतिकी 1 ;2 द्ध; म र्म द्धथ् त्र 2 ;12ण्1द्ध4πε0 त जहाँ त ऐल्प़्ाफा - कण की नाभ्िाक से दूरी है। आरोपित बल, ऐल्प़्ाफा - कण और नाभ्िाक को मिलाने वाली रेखा के अनुदिश है। ऐल्प़्ाफा - कण पर आरोपित बल का परिमाण एवं दिशा, ऐल्प़्ाफा - कण के नाभ्िाक की ओर अभ्िागमन करने वाले तथा उससे दूर जाने के साथ लगातार परिवतिर्त होती रहती है। 12ण्2ण्1 ऐल्प़्ाफा - कण प्रक्षेप - पथ ऐल्प़्ाफा - कण द्वारा अनुरेख्िात प्रक्षेप पथ, संघट्टð के संघट्टð प्राचल, इ पर निभर्र करता है। संघट्टð प्राचल ऐल्प़्ाफा - कण के प्रारंभ्िाक वेग सदिश की नाभ्िाक के वेंफद्र से अभ्िालंबीय दूरी है ;चित्रा 12ण्4द्ध। दिए गए ऐल्प़्ाफा - कणों के पुंज के संघट्टð प्राचल इ का वितरण इस प्रकार है कि पुंज विभ्िान्न दिशाओं में भ्िान्न - भ्िान्न प्रायिकताओं से प्रकीण्िार्त होता है ;चित्रा 12ण्4द्ध। ;किसी पुंज में सभी कणों की लगभग समान गतिज ऊजार् होती है।द्ध यह देखा गया है कि नाभ्िाक के समीप कोइर् ऐल्प़्ाफा - कण ;कम संघट्टð प्राचलद्ध अध्िक प्रकीण्िार्त होता है। प्रत्यक्ष संघट्टð की स्िथति में संघट्टð प्राचल न्यूनतम है तथा ऐल्प़्ाफा - कण पीछे की ओर प्रतिक्ष्िाप्त होता है ;θ ≅ πद्ध। संघट्टð प्राचल के अध्िक मान के लिए, ऐल्प़्ाफा - कण लगभग अविचलित रहता है तथा विक्षेप बहुत कम होता है ;θ ≅ 0द्ध। इ यह तथ्य कि आपतित कणों में से केवल एक छोटा भाग ही टकराकर वापस लौटता है, यह सूचित करता हैचित्रा 12ण्4 किसी भारी नाभ्िाक के वूफलाॅम क्षेत्रा में ऐल्प़्ाफा - कण का कि प्रत्यक्ष संघट्टð की स्िथति में आने वाले ऐल्प़्ाफा - कणों प्रक्षेप पथ। संघट्टð प्राचल इ और प्रकीणर्न कोण θ अंतर चित्रा में दशार्ए गए हैं। की संख्या बहुत कम है। इससे ज्ञात होता है कि नाभ्िाक का द्रव्यमान बहुत छोटे आयतन में संवेंफित है। इस प्रकार रदरपफोडर् प्रकीणर्न नाभ्िाक के साइश की उच्चसीमा ज्ञात करने का एक शक्ितशाली साध्न है। उदाहरण 12ण्1 परमाणु के रदरपफोडर् के नाभ्िाकीय माॅडल में, नाभ्िाक ;त्रिाज्या लगभग 10दृ15 उद्ध सूयर् के सदृश है, जिसके परितः इलेक्ट्राॅन अपने कक्ष ;त्रिाज्या ≈ 10दृ10 उद्ध में ऐसे परिक्रमा करता है जैसे पृथ्वी सूयर् के चारों ओर परिक्रमा करती है। यदि सौर परिवार की विमाएँ उसी अनुपात में होतीं जो किसी परमाणु में होती हैं, तो क्या पृथ्वी अपनी वास्तविक स्िथति की अपेक्षा सूयर् के पास होगी या दूर होगी? पृथ्वी के कक्ष की त्रिाज्या लगभग 1ण्5 × 1011 उ है। सूयर् की त्रिाज्या 7 × 108 उ मानी गइर् है। हल इलेक्ट्राॅन के कक्ष की त्रिाज्या तथा नाभ्िाक की त्रिाज्या का अनुपात है ;10दृ10 उद्धध्;10दृ15 उद्ध त्र 105ए अथार्त इलेक्ट्राॅन के कक्ष की त्रिाज्या, नाभ्िाक की त्रिाज्या से 105 गुना अध्िक है। यदि सूयर् के चारों ओर पृथ्वी के कक्ष की त्रिाज्या सूयर् की त्रिाज्या से 105 गुना अध्िक हो, तो पृथ्वी के कक्ष की त्रिाज्या होगी 105 × 7 × 108 उ त्र 7 × 1013 उ। यह पृथ्वी की वास्तविक कक्षीय त्रिाज्या से 100 गुना अध्िक है। अतः इस स्िथति में पृथ्वी सूयर् से बहुत अध्िक दूर होगी। इससे यह भी ज्ञात होता है कि परमाणु में हमारे सौर परिवार की अपेक्षा बहुत अध्िक भाग खाली स्थान है। हल यहाँ मुख्य धारणा यह है कि प्रकीणर्न प्रक्रम की समस्त अविा में किसी तंत्रा जैसे ऐल्प़्ाफा - कण और स्वणर् - नाभ्िाक की वुफल यांत्रिाक उफजार् संरक्ष्िात रहती है। ऐल्प़्ाफा - कण और नाभ्िाक की अन्योन्यिया से पूवर् तंत्रा की प्रारंभ्िाक यांत्रिाक उफजार् म्प कण के क्षण्िाक रूप से विरामावस्था में आने पर उसकी यांत्रिाक उफजार् म् िके बराबर है। प्रारंभ्िाक उफजार् म्प आगामी ऐल्प़्ाफा - कण की गतिज उफजार् ज्ञके ठीक बराबर है। अंतिम उफजार् म् ितंत्रा की विद्युत स्िथतिज उफजार् न् ही है। स्िथतिज उफजार् न् का समीकरण ;12ण्1द्ध से परिकलन किया जा सकता है। मान लीजिए कि ऐल्प़्ाफा - कण के वेंफद्र और स्वणर् - नाभ्िाक के वेंफद्र के बीच दूरी क है। जब α - कण अपने विरामन बिंदु पर स्िथत है, तब उफजार् संरक्षण के नियमानुसार, म्प त्र म् िको इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: 1 ;2 द्ध; र्म द्ध2 2 म र्म ज्ञ त्रत्र 4πε0 क 4πε0क अतः समीपतम दूरी क होगी 2र्म 2 क त्र 4πε0 ज्ञ प्रावृफतिक स्रोतों के ऐल्प़्ाफा - कणों में पाइर् जाने वाली अध्िकतम गतिज ऊजार् 7ण्7 डमट अथवा 1ण्2 × 10दृ12 श्र है। क्योंकि 1ध्4πε0 त्र 9ण्0 × 109 छ उ2ध्ब्2 इसलिए म त्र 1ण्6 × 10दृ19 ब्ए के साथ, हमें प्राप्त होगा 9 22 −19 2;2द्ध;9ण्0 × 10छउ ध्ब् द्ध;1ण्6 × 10 ब्द्धर् क त्र 1ण्2 × 10 −12 श्र त्र 3ण्84 × 10दृ16 र् उ पन्नी के पदाथर् स्वणर् का परमाणु क्रमांक र् त्र 79ए इसलिए क ;।नद्ध त्र 3ण्0 × 10दृ14 उ त्र 30 उि ;1 उि ;अथार्त् पफमीर्द्ध त्र 10दृ15 उद्ध अतः स्वणर् नाभ्िाक की त्रिाज्या 3ण्0 × 10दृ14 उ से कम है। यह प्रेक्ष्िात परिणाम से बहुत अध्िक मेल नहीं खाती है क्योंकि स्वणर् नाभ्िाक की वास्तविक त्रिाज्या 6 उि है। इस विसंगति का कारण यह है कि समीपतम पहुँचने की दूरी ऐल्प़्ाफा - कण तथा स्वणर् - नाभ्िाक की त्रिाज्याओं के योग से काप़्ाफी अध्िक है। इस प्रकार ऐल्प़्ाफा - कण स्वणर् - नाभ्िाक को वास्तव में छुए बिना ही अपनी गति की दिशा विपरीत कर लेता है। रदरपफोडर् प्रकीणर्न प्रयोग के अनुकारीजजचरूध्ध्ूूू.वनजतमंबीण्चीलण्बंउण्ंबण्नाध् बंउचीलध्दनबसमनेध्दनबसमने6ऋ1ण्ीजउ12ण्2ण्2 इलेक्ट्राॅन - कक्षाएँ परमाणु का रदरपफोडर् नाभ्िाकीय माॅडल जिसमें क्लासिकी धरणाएँ सम्िमलित हैं, परमाणु को एक विद्युतीय उदासीन गोले के रूप में चित्रिात करता है, जिसके वेंफद्र पर बहुत छोटा, भारी तथा ध्न आवेश्िात नाभ्िाक है, जो अपनी - अपनी गतिशील स्िथर कक्षाओं में घूमते इलेक्ट्राॅनों से घ्िारा हुआ है। परिक्रमा करते हुए इलेक्ट्राॅनों तथा नाभ्िाक के बीच स्िथरवैद्युत आकषर्ण बल थ्म इलेक्ट्राॅन को अपने कक्ष में बनाए रखने के लिए आवश्यक अभ्िावेंफद्री बल ;थ्बद्ध प्रदान करता है। अतः, हाइड्रोजन परमाणु में गतिशील स्िथर कक्षा के लिए थ् त्र थ् मब उअ 21 म 2 त्र 2 ;12ण्2द्ध 421 त 4πε0 त भौतिकी अतः कक्षा - त्रिाज्या तथा इलेक्ट्राॅन - वेग में संबंध् होगा 2 म त त्र 2 ;12ण्3द्ध4πε0उअ हाइड्रोजन के परमाणु में इलेक्ट्राॅन की गतिज ऊजार् ;ज्ञद्ध तथा स्िथरवैद्युत स्िथतिज ऊजार् ;न्द्ध होंगी 12 म 2 म 2 ज्ञ त्र उअ त्र तथा न् त्र− 28πε0त 4πε0त ; न् में )णात्मक चिÉ सूचित करता है कि स्िथरवैद्युत बल दृत दिशा में हैद्ध अतः हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्राॅन की वुफल ऊजार् म्, 22 मम म् त्र ज्ञ ़ न् त्र− 8πε0त 4πε0त 2 म त्र− ;12ण्4द्ध8πε0त इलेक्ट्राॅन की वुफल ऊजार् )णात्मक है। यह तथ्य दशार्ता है कि इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक से परिब( है। यदि म् ध्नात्मक होता तो इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के चारों ओर बंद कक्ष में नहीं घूमता। उदाहरण 12ण्3 प्रयोग द्वारा यह पाया गया कि हाइड्रोजन परमाणु को एक प्रोटाॅन तथा एक इलेक्ट्राॅन में पृथक करने के लिए 13ण्6 मट ऊजार् की आवश्यकता है। हाइड्रोजन परमाणु में कक्षीय - त्रिाज्या तथा इलेक्ट्राॅन का वेग परिकलित कीजिए। हल हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्राॅन की वुफल ऊजार् है दृ13ण्6 मट त्र दृ13ण्6 × 1ण्6 × 10दृ19 श्र त्र दृ2ण्2 ×10दृ18 श्र अतः समीकरण ;12ण्4द्ध से हमें प्राप्त होगा 2 म − त्र−2ण्2 × 10 −18 श्र 8πε0त इससे कक्षीय - त्रिाज्या प्राप्त होगी: 2 922 −19 2 म ;9 ×10 छउ ध्ब् द्ध;1ण्6 ×10 ब्द्ध त त्र− त्र− 8πε0म् ;2द्ध;दृ2ण्2 ×10 −18 श्रद्ध त्र 5ण्3 × 10दृ11 उ परिक्रमण करते इलेक्ट्राॅन का वेग, समीकरण ;12ण्3द्ध से उ त्र 9ण्1 × 10दृ31 ाह लेकर परिकलित कर सकते हैं म अ त्रत्र 2ण्2 ×10 6 उध्े 4πε0उत 12ण्3 परमाण्वीय स्पेक्ट्रम अनुच्छेद 12ण्1 में उल्लेख किए अनुसार, प्रत्येक तत्व अभ्िालाक्षण्िाक स्पेक्ट्रम - विकिरण उत्स£जत करता है। जब कोइर् परमाण्वीय गैस अथवा वाष्प निम्न दाब पर, प्रायः इससे विद्युत धरा प्रवाहित करके, उत्स£जत की जाती है तो उत्सजिर्त विकिरण से स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है जिसमें वुफछ विश्िाष्ट तरंगदैघ्यर् ही होती हैं। इस प्रकार के स्पेक्ट्रम को उत्सजर्न रैख्िाक स्पेक्ट्रम कहते हैं तथा इसमें काली पृष्ठभूमि पर दीप्त रेखाएँ होती हैं। चित्रा 12ण्5 तरंगदैघ्यर् λ में परमाण्वीय हाइड्रोजन द्वारा उत्स£जत स्पेक्ट्रम दशार्या गया है। अतः किसी पदाथर् के उत्सजर्न रैख्िाक स्पेक्ट्रम का अध्ययन, गैस की पहचान करने के लिए ¯पफगर¯प्रट के रूप में कायर् कर सकता है। जब श्वेत प्रकाश किसी गैस से होकर गुशरता है तथा हम स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा पारगत प्रकाश का विश्लेषण करते हैं तो स्पेक्ट्रम में वुफछ लाइमैन बामर श्रेणी पाशन श्रेणी श्रेणीअदीप्त रेखाएँ दिखाइर् देती हैं। ये अदीप्त चित्रा 12ण्5 हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम में उत्सजर्न रेखाएँ।रेखाएँ परिशु(तः रूप से उन तरंगदैघ्यो± के तदनुरूपी होती हैं जो उस गैस के उत्सजर्न रैख्िाक स्पेक्ट्रम में पाइर् जाती हैं। यह उस गैस के पदाथर् का अवशोषण स्पेक्ट्रम कहलाता है। 12ण्3ण्1 स्पेक्ट्रमी श्रेणी हम यह आशा कर सकते हैं कि किसी तत्व विशेष से उत्स£जत प्रकाश की आवृिायाँ वुफछ नियमित पैटनर् दशार्एँगी। हाइड्रोजन एक सरलतम परमाणु है और इसलिए इसका स्पेक्ट्रम सरलतम होता है। तथापि, पहली दृष्िट में हमें प्रेक्ष्िात स्पेक्ट्रम की स्पेक्ट्रमी रेखाओं में किसी क्रम या सममितता का आभास नहीं होता। लेकिन हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के वुफछ विशेष समुच्चयों के भीतर रेखाओं के बीच की दूरी नियमित रूप से घटती जाती है ;चित्रा 12ण्5द्ध। इसमें से प्रत्येक समुच्चय को स्पेक्ट्रमी श्रेणी कहते हैं। सन् 1885 में स्वीडन के एक स्वूफल अध्यापक जान जेकब बामर ;1825 दृ 1898द्ध ने हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम के दृश्य भाग में इस प्रकार की पहली 91 दउ122 दउ365 दउ656 दउ820 दउ1875 दउश्रेणी को देखा। इस श्रेणी को बामर श्रेणी कहते हैं ;चित्रा 12ण्6द्ध। लाल रंग की सवार्ध्िक तरंगदैघ्यर्, 656ण्3 दउ वाली रेखा को भ्αय चित्रा 12ण्6 हाइड्रोजन के उत्सजर्न स्पेक्ट्रम में बामर श्रेणी486ण्1 दउ तरंगदैघ्यर् की नीली - हरी अगली रेखा को भ्βय 434ण्1 दउ तरंगदैघ्यर् की बैंगनी रंग की तीसरी रेखा को भ्γ इत्यादि द्वारा व्यक्त किया जाता है। जैसे - जैसे तरंगदैघ्यर् घटती जाती है, रेखाएँ समीप होती प्रतीत होती हैं तथा उनकी तीव्रता कम हो जाती है। बामर ने इन रेखाओं की प्रेक्ष्िात तरंगदैघ्यो± के लिए एक सरल आनुभविक ;मउचपतपबंसद्ध सूत्रा ज्ञात किया: 1 11 त्र त् 2 − 2 ;12ण्5द्धλ 2 द जहाँ λ तरंगदैघ्यर् तथा त् एक नियतांक है जिसे रिडबगर् - नियतांक कहते हैं। यहाँ द के पूणा±क मान 3ए 4ए 5 इत्यादि हो सकते हैं। त् का मान 1ण्097 × 107 उदृ1 है। इस समीकरण को बामर सूत्रा कहते हैं। समीकरण ;12ण्5द्ध में द त्र 3 मानकर रेखा भ् α की तरंगदैघ्यर् प्राप्त कर सकते हैं 1 11 त्र 1ण्097× 10 7 − उदृ1 2 2 423λ 23 भौतिकीत्र 1ण्522 × 106 उदृ1 अथार्त λ त्र 656ण्3 दउ द त्र 4 रखने पर हम रेखा भ् β की तरंगदैघ्यर् तथा इसी प्रकार द के विभ्िान्न मान रखकर अन्य रेखाओं की तरंगदैघ्यर् प्राप्त कर सकते हैं। द त्र ∞ लेकर तरंगदैघ्यर् λ त्र 364ण्6 दउ पर, श्रेणी की सीमा प्राप्त की जाती है। यह बामर श्रेणी की लघुतम तरंगदैघ्यर् है। इस सीमा के आगे कोइर् स्पष्ट रेखा दिखाइर् नहीं देती, केवल मंद सा सतत स्पेक्ट्रम दिखाइर् देता है। हाइड्रोजन के लिए स्पेक्ट्रम की अन्य श्रेण्िायाँ लाइमैन, पाशन, ब्रेकेट, पुंफट की भी खोज हो चुकी है, जिन्हें उनके शोधकतार्ओं के नाम से ही जाना जाता है। इन्हें निम्न सूत्रों द्वारा निरूपित किया जाता है: लाइमैन श्रेणी: 1 1 1 त् λ त्र 21 2 द − द त्र 2ए3ए4ण्ण्ण् ;12ण्6द्ध पाशन श्रेणी: 1 1 1 त् λ त्र 23 2 द − द त्र 4ए5ए6ण्ण्ण् ;12ण्7द्ध ब्रेकेट श्रेणी: 1 1 1 त् λ त्र 24 2 द − द त्र 5ए6ए7ण्ण्ण् ;12ण्8द्ध पुंफट श्रेणी: 1 1 1 λ त्त्र 25 2 द − द त्र 6ए7ए8एण्ण्ण् ;12ण्9द्ध लाइमैन श्रेणी में उत्स£जत स्पेक्ट्रम रेखाएँ पराबैंगनी क्षेत्रा में और पाशन एवं ब्रेकेट श्रेण्िायों में स्पेक्ट्रम रेखाएँ स्पेक्ट्रम के अवरक्त क्षेत्रा में प्राप्त होती हैं। 1 νसंबंध ब त्र νλ अथवा त्र का उपयोग करके बामर श्रेणी के लिए सूत्रा ;12ण्5द्ध को प्रकाश λ बकी आवृिा के पदों में इस प्रकार भी लिखा जा सकता है। 11 ν त्र त्ब 2 − 2 ;12ण्10द्ध2 द समीकरण ;12ण्5 दृ12ण्9द्ध के सरल सूत्रों से केवल वुफछ तत्त्वों ;हाइड्रोजन, एकधा आयनित हीलियम और द्वितः आयनित लीथ्िायमद्ध के स्पेक्ट्रमों को ही निरूपित किया जा सकता है। समीकरण ;12ण्5द्ध दृ ;12ण्9द्ध उपयोगी हैं क्योंकि ये हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा उत्स£जत अथवा अवशोष्िात की जाने वाली तरंगदैघ्यो± के बारे में बतलाती हैं। तथापि, ये परिणाम केवल आनुभविक हैं तथा इसका कोइर् कारण नहीं बतलाते कि हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम में केवल वुफछ आवृिायाँ ही क्यों प्रेक्ष्िात की जाती हैं। 12ण्4 हाइड्रोजन परमाणु का बोर माॅडल परमाणु के रदरपफोडर् द्वारा प्रस्तावित माॅडल में यह मान लिया गया है कि परमाणु के वेंफद्र में नाभ्िाक होता है तथा परिक्रमा करते इलेक्ट्राॅन स्िथर हैं ठीक वैसे ही जैसा सौर परिवार में होता है जिसका अनुकरण करके इस माॅडल को विकसित किया गया। तथापि, दोनों स्िथतियों में वुफछ मूलभूत अंतर है। ग्रहीय तंत्रा गुरुत्वीय बल के कारण बँध है, जबकि नाभ्िाक - इलेक्ट्राॅन तंत्रा में आवेश्िात कण होने के कारण, बल के वूफलाॅम - नियम द्वारा अन्योन्य िया होती है। हम जानते हैं कि वृत्ताकार पथ में घूमती कोइर् वस्तु लगातार त्वरण में होती है, और इस त्वरण की प्रवृफति अभ्िावेंफद्री है। क्लासिकी वैद्युतचुंबकीय सि(ांत के अनुसार कोइर् त्वरित आवेश्िात कण वैद्युतचुंबकीय तरंगों के रूप में विकिरण उत्स£जत करता है। अतः त्वरित इलेक्ट्राॅन की ऊजार् निरंतर घटनी चाहिए। इलेक्ट्राॅन अंदर की ओर स£पल पथ पर चलेगा तथा अंततः नाभ्िाक में गिर जाएगा ;चित्रा 12ण्7द्ध। अतः ऐसा परमाणु स्थायी नहीं हो सकता। इसके अतिरिक्त, क्लासिकी वैद्युतचुंबकीय सि(ांत के अनुसार परिक्रमी इलेक्ट्राॅनों द्वारा उत्स£जत वैद्युतचुंबकीय तरंगों की आवृिा परिक्रमण - आवृिा के बराबर होती है। जब इलेक्ट्राॅन स£पल पथ पर अंदर नाभ्िाक की ओर आते हैं तो उनके कोणीय वेग और इस प्रकार उनकी आवृिायाँ निरंतर परिव£तत होंगी। पफलस्वरूप उत्स£जत प्रकाश की आवृिा भी निरंतर परिव£तत होनी चाहिए। अतः इन्हें एक संतत स्पेक्ट्रम उत्सजिर्त करना चाहिए जो वास्तव में प्रेक्ष्िात रैख्िाक स्पेक्ट्रम के विपरीत है। स्पष्टतया रदरपफोडर् का माॅडल केवल तस्वीर का एक पहलू दिखलाता है जिसका अथर् है कि क्लासिकी विचार परमाणु संरचना की व्याख्या करने के लिए पयार्प्त नहीं है। प्रोटाॅन ;हाइड्रोजन नाभ्िाकद्ध इलेक्ट्राॅन मदृ चित्रा 12ण्7 परमाणु का कोइर् त्वरित इलेक्ट्राॅन ऊजार् ”ास करके स£पल पथ पर नाभ्िाक की ओर अंदर आ जाएगा। नील्स हेनरिक डेविड बोर ;1885 दृ 1962द्ध डेनमावर्फ के भौतिकविज्ञानी जिन्होंने क्वांटम विचारों के आधर पर हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम की व्याख्या की। नाभ्िाक के द्रव - बूँद माॅडल के आधर पर उन्होंने नाभ्िाकीय विखंडन का एक सि(ांत प्रस्तुत किया। बोर ने क्वांटम - यांत्रिाकी की संकल्पनात्मक समस्याओं को विशेषकर संपूरकता के सि(ांत की प्रस्तुति द्वारा स्पष्ट करने में योगदान किया। उदाहरण 12ण्4 क्लासिकी वैद्युतचुंबकीय सि(ांत के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटाॅन के चारों ओर परिक्रामी इलेक्ट्राॅन द्वारा उत्स£जत प्रकाश की प्रारंभ्िाक आवृिा परिकलित कीजिए। हल उदाहरण 12ण्3 से हम जानते हैं कि हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटाॅन के चारों ओर 5ण्3× 10दृ11 उ की त्रिाज्या की कक्षा में परिक्रामी इलेक्ट्राॅन का वेग2ण्2 × 10दृ6 उध्े है। अतः, प्रोटाॅन के चारों ओर परिक्रामी इलेक्ट्राॅन की आवृिा है: 6 −1 अ 2ण्2 × 10 उे νत्र त्र 2πत 2π;5ण्3 × 10 −11 उद्ध ≈ 6ण्6 × 1015 भ््र क्लासिकी वैद्युतचुंबकीय सि(ांत के अनुसार हम जानते हैं कि परिक्रामी इलेक्ट्राॅनों द्वारा उत्स£जत वैद्युतचुंबकीय तरंगों की आवृिा, इसकी नाभ्िाक के चारों ओर परिक्रमण आवृिा के बराबर है। अतः उत्स£जत प्रकाश की प्रारंभ्िाक आवृिा 6ण्6 × 1015 भ््र होगी। भौतिकी नील्स बोर ;1885 दृ 1962द्ध ने रदरपफोडर् के माॅडल में नयी विकासशील क्वांटम परिकल्पना के विचारों को जोड़कर वुफछ रूपांतर किया। नील्स बोर ने 1912 में कइर् महीनों तक रदरपफोडर् की प्रयोगशाला में अध्ययन किया था तथा वह रदरपफोडर् के नाभ्िाकीय माॅडल की वैध्ता के बारे में पूरी तरह आश्वस्त थे। उपरोक्त दुविधा में उलझे बोर ने 1913 में निष्कषर् निकाला कि यद्यपि वैद्युतचुंबकीय सि(ांत, वृहत स्तरीय परिघटनाओं को व्याख्या करने में सक्षम है तथापि इस सि(ांत को परमाणु स्तर के प्रक्रमों में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट हो गया कि परमाणु - संरचना और इसका परमाण्वीय स्पेक्ट्रम से संबंध समझने के लिए क्लासिकी यांत्रिाकी और वैद्युतचुंबकत्व के स्थापित सि(ांतों से आमूल विचलन की आवश्यकता होगी। बोर ने क्लासिकी एवं प्रारंभ्िाक क्वांटम संकल्पनाओं को संयुक्त करके तीन अभ्िागृहीतों के रूप में अपना सि(ांत प्रस्तुत किया। ये अभ्िागृहीत हैं: ;पद्ध बोर का पहला अभ्िागृहीत था कि किसी परमाणु में कोइर् इलेक्ट्राॅन निश्िचत स्थायी कक्षाओं में विकिरण उफजार् उत्स£जत किए बिना परिक्रमण कर सकता है। यह वैद्युतचुंबकीय सि(ांत के अनुमानों के विपरीत है। इस अभ्िागृहीत के अनुसार प्रत्येक परमाणु की वुफछ निश्िचत स्थायी अवस्थाएँ हैं जिसमें यह रह सकता है और प्रत्येक संभव अवस्था में निहित वुफल उफजार् निश्िचत होती है। इन संभावित अवस्थाओं को परमाणु की स्िथर अवस्थाएँ कहते हैं। ;पपद्ध बोर का दूसरा अभ्िागृहीत इन स्थायी कक्षाओं को परिभाष्िात करता है। इस अभ्िागृहीत के अनुसार इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के चारों ओर केवल उन कक्षाओं में ही परिक्रमण करता है जिनके लिए कोणीय संवेग का मान ीध्2π का पूणा±क गुणज होता है। जहाँ ी प्लांक नियतांक ;त्र 6ण्6 × 10दृ34 श्र ेद्ध । अतः परिक्रमा करते हुए इलेक्ट्राॅन का कोणीय संवेग ;स्द्ध क्वांटित है। अथार्त स् त्र दीध्2π ;12ण्11द्ध ;पपपद्ध बोर के तीसरे अभ्िागृहीत में परमाणु सि(ांत में प्लांक तथा आइंसटाइन द्वारा विकसित प्रारंभ्िाक क्वांटम परिकल्पनाओं को समाविष्ट किया गया। इसके अनुसार कोइर् इलेक्ट्राॅन अपने विशेष रूप से उल्िलख्िात अविकिरणी कक्षा से दूसरी निम्न उफजार् वाली कक्षा में संक्रमण कर सकता है। जब यह ऐसा करता है तो एक पफोटाॅन उत्स£जत होता है जिसकी उफजार् प्रारंभ्िाक एवं अंतिम अवस्थाओं की उफजार् के अंतर के बराबर होती है। उत्स£जत पफोटाॅन की आवृिा निम्न व्यंजक द्वारा दी जाती है: ीν त्र म्प दृ म् ि;12ण्12द्ध जहाँ म्एवं म्प्रारंभ्िाक और अंतिम अवस्थाओं की ऊजार्एँ हैं, म् झ म्।प ि प िसमीकरण ;12ण्4द्ध में हाइड्रोजन परमाणु के लिए विभ्िान्न ऊजार् स्िथतियों की ऊजार्एँ ज्ञात करने का व्यंजक दिया गया है। लेकिन इस समीकरण में इलेक्ट्राॅन कक्ष की त्रिाज्या त की आवश्यकता है। त का मान परिकलित करने के लिए, इलेक्ट्राॅन के कोणीय संवेग से संबंध्ित बोर के दूसरे अभ्िागृहीत - क्वांटमीकरण प्रतिबंध् का प्रयोग करते हैं। कोणीय संवेग स् होता है स् त्र उअत क्वांटमीकरण का बोर के दूसरे अभ्िागृहीत ख्समीकरण ;12ण्11द्ध, के अनुसार कोणीय संवेग के अनुमत मान ीध्2π के पूणा±क गुणज होते हैं। दी स् त्र उअत त्र ;12ण्13द्धद दद2π जहाँ द एक पूणा±क है, तद संभावित कक्ष द जी की त्रिाज्या है तथा अदए द जी कक्ष में गतिमान इलेक्ट्राॅन की चाल है। अनुमत कक्षों को द के मान के अनुसार, 1ए 2ए 3 ण्ण्ण्ए द्वारा क्रमांकित किया गया है, जिन्हें कक्ष की मुख्य क्वांटम संख्या कहते हैं। समीकरण ;12ण्3द्ध से अद तथा तद के बीच संबंध् है म अ त्र द 4πε0उत द इसे समीकरण ;12ण्13द्ध के साथ संयोजित करने पर हमें अद तथा तद के लिए निम्न व्यंजक प्राप्त होते हैं, 1 म 21 अ त्र ;12ण्14द्धदद 4πε ;ी 2πद्ध0 तथा 2 दी 24πε0 त त्र द 2 ;12ण्15द्धउ 2π म समीकरण ;12ण्14द्ध दशार्ता है कि दजी कक्षा में इलेक्ट्राॅन की कक्षीय - चाल, गुणक द से कम हो जाती है। समीकरण ;12ण्15द्ध का उपयोग करके अंतरतम कक्षा ;द त्र 1द्ध का साइश निम्न प्रकार प्राप्त किया जा सकता है। 2ी ε0 त त्र 12π उम इसे बोर त्रिाज्या कहते हैं और संकेत ं0 द्वारा निरूपित करते हैं। इस प्रकार, 2ी ε ं0 त्र 02 ;12ण्16द्धπउम ीए उए ε0 तथा म के मान प्रतिस्थापित करने पर ं0 त्र 5ण्29 × 10दृ11 उ प्राप्त होता है। समीकरण ;12ण्15द्ध से यह भी देखा जा सकता है कि कक्षों की त्रिाज्याओं में द 2 के साथ वृि होती है। किसी हाइड्रोजन परमाणु की स्थायी अवस्था में इलेक्ट्राॅन की वुफल ऊजार्, समीकरण ;12ण्4द्ध में कक्षीय त्रिाज्या का मान प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त की जा सकती है। यथा 22 मउ 2π 2 म म् त्र− द 8πε0 द 2 ी 4πε0 4 उम अथवा म्द त्र− 2 2 2 ;12ण्17द्ध8द ε0ी समीकरण ;12ण्17द्ध में नियतांकों के मान रखने पर हमें प्राप्त होगा 2ण्18 × 10 −18 म्द त्र− 2 श्र ;12ण्18द्ध द परमाण्वीय ऊजार्एँ प्रायः जूल के स्थान पर इलेक्ट्राॅन वोल्ट ;मटद्ध में व्यक्त की जाती हैं। क्योंकि 1 मट त्र 1ण्6 × 10दृ19 श्र। समीकरण ;12ण्18द्ध को पुनः इस प्रकार लिखा जा सकता है 13ण्6 म् त्र− 2 मट ;12ण्19द्धद द किसी कक्ष में गतिमान इलेक्ट्राॅन की वुफल ऊजार् के व्यंजक में )णात्मक चिÉ इस बात का द्योतक है कि इलेक्ट्राॅन, परमाणु के नाभ्िाक से आब( है। अतः, हाइड्रोजन परमाणु से इलेक्ट्राॅन को नाभ्िाक से ;या हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटाॅन सेद्ध अनंत दूरी तक विलग करने के लिए ऊजार् की आवश्यकता होगी। भौतिकी समीकरणों ;12ण्17द्ध दृ ;12ण्19द्ध की व्युत्पिा इस कल्पना पर आधरित है कि इलेक्ट्राॅन की कक्षाएँ वृत्तीय हैं, यद्यपि व्युत्क्रम वगर् बल के अध्ीन कक्षाएँ सामान्यतः दीघर्वृत्तीय होती हैं। ;सभी ग्रह सूयर् के व्युत्क्रम वगर् गुरुत्वीय बल के अध्ीन दीघर्वृत्तीय कक्षाओं में गतिमान हैंद्ध। तथापि जमर्न भौतिकविज्ञानी अनोर्ल्ड सोमरपैफल्ड ;1868 दृ 1951द्ध ने यह दशार्या था कि यदि वृत्तीय कक्षा के प्रतिबंध् को श्िाथ्िाल कर दिया जाए तब भी ये समीकरण दीघर्वृत्तीय कक्षाओं पर भी समान रूप से लागू होती हैं। उदाहरण 12ण्5 10 ाह का कोइर् उपग्रह 8000 ाउ त्रिाज्या की एक कक्षा में पृथ्वी का एक चक्कर प्रत्येक 2 ी में लगाता है। यह मानते हुए कि बोर का कोणीय संवेग का अभ्िागृहीत, उसी प्रकार उपग्रह पर लागू होता है जिस प्रकार कि यह हाइड्रोजन के परमाणु में किसी इलेक्ट्राॅन के लिए मान्य है, उपग्रह की कक्षा की क्वांटम संख्या ज्ञात कीजिए। हल समीकरण ;12ण्13द्ध से हम पाते हैं उ अद तद त्र दीध्2π यहाँ उ त्र 10 ाह तथा तद त्र 8 × 106 उ। घूमते हुए उपग्रह का आवतर् काल ज्ए 2 ी है। अथार्त् ज् त्र 7200 े। अतः वेग अद त्र 2π तदध्ज् उपग्रह की कक्षा की क्वांटम संख्या द त्र ;2π तदद्ध2 × उध्;ज् × ीद्धण् मानों को प्रतिस्थापित करने पर, द त्र ;2π× 8 × 106 उद्ध2 × 10ध्;7200 े × 6ण्64 × 10दृ34 श्र ेद्ध त्र 5ण्3 × 1045 ध्यान दीजिए कि उपग्रह की गति के लिए क्वांटम संख्या अत्यंत अध्िक है! वास्तव में इतनी अिाक क्वांटम संख्या के लिए क्वांटमीकरण प्रतिबंधें के परिणाम क्लासिकी भौतिकी के परिणामों के समीप हैं। 12ण्4ण्1 ऊजार् स्तर परमाणु की उफजार् उस समय न्यूनतम ;अिाकतम )णात्मक मानद्ध होती है जब उसका इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक की निकटतम कक्षा ;अथार्त् द त्र 1द्ध में परिक्रमण करता है। द त्र 2ए 3 ण्ण्ण् के लिए, उफजार् म् के निरपेक्ष मान कम होते जाते हैं, अतः बाह्य कक्षा की ओर जाने पर कक्षाओं में उफजार् अिाक होती जाती है। परमाणु की न्यूनतम अवस्था में जिसे निम्नतम अवस्था कहते हैं इलेक्ट्राॅन की उफजार् न्यूनतम होती है, तथा इलेक्ट्राॅन, न्यूनतम त्रिाज्या ;बोर त्रिाज्या ंवद्ध की कक्षा में परिक्रमण करता है। इस अवस्था की उफजार् ;द त्र 1द्धए म्1 दृ13ण्6 मट है। अतः हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था से इलेक्ट्राॅन को मुक्त कराने के लिए आवश्यक न्यूनतम उफजार् 13ण्6 मट है। इसे हाइड्रोजन परमाणु की आयनन उफजार् भी कहते हैं। बोर के माॅडल के आधार पर प्राप्त मान आयनन उफजार् के प्रायोगिक मानों से उत्तम अनुरूपता रखता है। कमरे के ताप पर, अध्िकांश हाइड्रोजन परमाणु अपनी निम्नतम अवस्था में रहतेंहै। जब कोइर् परमाणु इलेक्ट्राॅन संघट्टð जैसे प्रक्रमों द्वारा उफजार् प्राप्त करता है, तब वह अस्थायी रूप से इतनी उफजार् अजिर्त कर सकता है जो इलेक्ट्राॅन को उच्च कक्षाओं तक पहुँचाने के लिए पयार्प्त होती है। तब वह परमाणु उत्तेजित अवस्था में कहलाता है। समीकरण ;12ण्19द्ध से द त्र 2 के लिएऋ ऊजार् म्2ए दृ3ण्40 मट है। इसका अथर् यह हुआ कि हाइड्रोजन परमाणु में किसी इलेक्ट्राॅन को इसकी पहली उत्तेजित अवस्था में उत्तेजित करने के लिए आवश्यक ऊजार् म्2 दृ म्1 त्र दृ3ण्40 मट दृ ;दृ13ण्6द्ध मट त्र 10ण्2 मट होगी। इसी प्रकार, म्3 त्र दृ1ण्53 मट तथा म्3 दृ म्1 त्र 12ण्09 मट। अथार्त्, हाइड्रोजन परमाणु को इसकी निम्नतम अवस्था से ;द त्र 1द्ध दूसरी उत्तेजित अवस्था ;द त्र 3द्धए तक उत्तेजित करने के लिए 12ण्09 मट ऊजार् की आवश्यकता होती है। यह क्रम इसी प्रकार आगे चलता रहता है। इन उत्तेजित अवस्थाओं से इलेक्ट्राॅन पिफर अपनी निम्न ऊजार् अवस्था में वापस गिर सकता है। इस प्रिया में वह एक पफोटाॅन उत्स£जत करता है। इस प्रकार, हाइड्रोजन परमाणु की उत्तेजित अवस्था बढ़ाने पर ;अथार्त द के बढ़ने परद्ध उत्तेजित परमाणु से इलेक्ट्राॅन को स्वतंत्रा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊजार् घटती है। समीकरण ;12ण्19द्ध से अभ्िाकलित हाइड्रोजन परमाणु की स्थायी अवस्थाओं का ऊजार् स्तर आरेख’ चित्रा ;12ण्8द्ध में दशार्या गया है। मुख्य क्वांटम संख्या द वुफल ऊजार् म् ;मटद्ध 0 −0ण्85 −1ण्51 −3ण्40 −13ण्6 अब( ;आयनितद्ध परमाणु द त्र 5 द त्र 4 उत्तेजित द त्र 3 अवस्थाएँ द त्र 2 निम्नतम अवस्था द त्र 1 चित्रा 12ण्8 हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊजार् - स्तर आरेख। कमरे के ताप पर हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्राॅन अपना अध्िकांश समय निम्नतम अवस्था में व्यतीत करता है। हाइड्रोजन परमाणु को आयनित करने के लिए किसी इलेक्ट्राॅन को निम्नतम अवस्था से 13ण्6 मट ऊजार् अवश्य उपलब्ध् करानी चाहिए। ;क्षैतिज रेखाएँ अनुमत ऊजार् अवस्थाओं की उपस्िथति को दशार्ती हैं।द्ध ’ किसी इलेक्ट्राॅन की म् त्र 0 मट से अध्िक वुफछ भी वुफल ऊजार् हो सकती है। ऐसी दशाओं में इलेक्ट्राॅन स्वतंत्रा होता है। इस प्रकार म् त्र 0 मट से ऊपर चित्रा 12.8 में दशार्ए अनुसार ऊजार् अवस्थाओं का एक सांतत्य है। भौतिकी स्थायी अवस्थाओं को ऊजार् के आरोही क्रम में अंकित करता है। इस चित्रा में उच्चतम ऊजार् अवस्था समीकरण ;12ण्19द्ध में द त्र ∞ के संगत है तथा इसकी ऊजार् 0 मट है। यह परमाणु की वह ऊजार् है जब नाभ्िाक से इलेक्ट्राॅन पूरी तरह दूर कर दिया गया है ;त त्र ∞द्ध और वह विराम में है। ध्यान दीजिए कि उत्तेजित अवस्थाओं की ऊजार्एँ द के बढ़ने पर किस प्रकार पास - पास आ जाती हैं। 12ण्5 हाइड्रोजन परमाणु का लाइन स्पेक्ट्रम बोर के माॅडल के तृतीय अभ्िाग्रहीत के अनुसार, जब कोइर् परमाणु उच्च ऊजार् स्िथति जिसकी क्वांटम संख्या दप है, से निम्न ऊजार् स्िथति जिसकी क्वांटम संख्या द िहै ;द िढ दप द्ध में संक्रमण करता है, तब उफजार् के इस अंतर को आवृिा ν प िका एक पफोटाॅन वहन करता है, ताकि ीν त्र दृ म्दप ;12ण्20द्धपम्िदपम्द िऔर म्दप के लिए समीकरण ;12ण्16द्ध का प्रयोग करने पर उम 411 ीνत्र − ;12ण्21द्धप ि222 28ε ीद द0 पि उम 411अथवा ν त्र − ;12ण्22द्धप2ि32 28ε ीद द0 पि समीकरण ;12ण्21द्ध हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम के लिए रिडबगर् का सूत्रा है। इस संबंध में यदि हम द ित्र 2 और दप त्र 3ए4ए5३ प्रतिस्थापित करते हैं, तो यह संबंध बामर श्रेणी के लिए समीकरण ;12ण्10द्ध के सदृश परिवतिर्त हो जाता है। इससे हम रिडबगर् नियतांक त् का मान ज्ञात कर सकते हैं जो इस प्रकार है: 4 उम त् त्र 2 3 ;12ण्23द्ध8ε0 ीब समीकरण ;12ण्23द्ध में विभ्िान्न नियतांकों के मान प्रतिस्थापित करने पर, हम पाते हैं कि त् त्र 1ण्03 × 107 उदृ1 यह मान आनुभविक बामर सूत्रा से प्राप्त मान ;1ण्097 × 107 उदृ1द्ध के अति निकट है। सै(ांतिक एवं प्रायोगिक मानों के इस सामंजस्य ने बोर - माॅडल की स्पष्ट एवं प्रभावशाली संपुष्िट की है। चँूकि द िऔर दप दोनों पूणा±क हैं अतः इससे तुरंत परिणाम प्राप्त होता है कि परमाण्वीय स्तरों के मध्य संक्रमणों में, विभ्िान्न विविक्त आवृिायों के प्रकाश उत्स£जत होते हैं। हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में बामर सूत्रा द ित्र 2 और दप त्र 3ए 4ए 5 आदि के तदनुरूपी है। बोर - माॅडल में अन्य रेखाओं की उपस्िथति को भी बताया गया था जो द ित्र 1 और दप त्र 2ए 3 आदिऋ द ित्र3 और दप त्र 4ए 5ण्ण्ण् इत्यादि तथा संक्रमणों के तदनुरूपी हो सकती हैं। इन श्रेण्िायों की पहचान वास्तव में स्पेक्ट्रोस्कोपिक शोध के समय हुइर् जिन्हें लाइमैन, बामर, पाशन, ब्रेकेट तथा पुंफट श्रेण्िायों के नाम से जाना जाता है। इन श्रेण्िायों के तदनुरूपी इलेक्ट्राॅनिक संक्रमण चित्रा ;12ण्9द्ध में दशार्ए गए हैं। जब इलेक्ट्राॅन उच्च ऊजार् स्िथति से निम्न ऊजार् स्िथति में आते हैं तो पफोटाॅन उत्स£जत होते हैं तथा परमाण्वीय स्पेक्ट्रम की अनेक रेखाएँ उत्पन्न होती हैं। इन स्पेक्ट्रमी रेखाओं को उत्सजर्न रेखाएँ कहते हैं। लेकिन जब कोइर् परमाणु पफोटाॅन को अवशोष्िात करता है जिसकी ठीक वही ऊजार् है जो किसी चित्रा 12ण्9 लाइन स्पेक्ट्रम ऊजार् स्तरों के बीच संक्रमणोंइलेक्ट्राॅन को निम्न ऊजार् स्िथति से उच्च ऊजार् के कारण उत्पन्न होता है। भौतिकी स्िथति में संक्रमण के लिए आवश्यक होती है, तो इस प्रक्रम को अवशोषण कहते हैं। अतः यदि सतत परिसर की आवृिायों के पफोटाॅन किसी विरलित गैस से गुशरने के पश्चात किसी स्पेक्ट्रोमीटर से विश्लेष्िात किए जाते हैं तो संतत स्पेक्ट्रम में अदीप्त स्पेक्ट्रमी अवशोष्िात रेखाओं की श्रेणी दिखाइर् देती है। अदीप्त रेखाएँ उन आवृिायों को नि£दष्ट करती हैं जो गैस के परमाणुओं द्वारा अवशोष्िात की गइर् हैं। हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम का बोर माॅडल द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण एक प्रतिभाशाली महान उपलब्िध् था जिसने आध्ुनिक क्वांटम सि(ांत की प्रगति को अत्यध्िक प्रोत्साहित किया। सन् 1922 में बोर को भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उदाहरण 12ण्6 रिडबगर् सूत्रा का उपयोग करके हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की लाइमैन श्रेणी में प्रथम चार स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तरंगदैघ्यर् को परिकलित कीजिए। हल रिडबगर् सूत्रा इस प्रकार व्यक्त किया जाता है: उम 411 ीबध्λत्र −8ε ीद द0 िप लाइमै प त्र 2ए3ए4ए5 से दिन श्रेणी की प्रथम चार रेखाओं की तरंगदैघ्यर् द त्र 1 के संक्रमण के तदनुरूपी प ि222 2होती है। हम जानते हैं कि 4 उम 2 28 ी0ε त्र 13ण्6 मट त्र 21ण्76 ×10दृ19 श्र अतः त्र प िλ 21ण्76 −× 19 10 ीब − 2 1 1 1 पद उ त्र ण् 34 8 2 19 2 6 625 10 3 10 21ण्76 10 ; 1द्ध प प द द − − × × × × × × − उ त्र 2 2 0ण्9134 ; 1द्ध प प द द − 710 −× उ त्र 913ण्4 दप2ध्;दप2 दृ1द्ध ऊ इस संबंध में दप त्र2ए3ए4ए5 प्रतिस्थापित करने पर हमें, चारों वांछित तरंगदैघ्यर् प्राप्त होती हैं जो इस प्रकार हैं: λ त्र 1218 ऊए λ त्र 1028 ऊए λ त्र 974ण्3 ऊ तथा λ त्र 951ण्4 ऊ। 213141 5112ण्6 बोर के क्वांटमीकरण के द्वितीय अभ्िागृहीत का दे ब्राॅग्ली द्वारा स्पष्टीकरण बोर द्वारा प्रस्तुत परमाणु के माॅडल के सभी अभ्िागृहीतों में संभवतः दूसरा अभ्िागृहीत सबसे अिाक उलझन पैदा करने वाला था। इसके कथन के अनुसार नाभ्िाक के चारों ओर परिक्रमा करते इलेक्ट्राॅन का कोणीय संवेग क्वांटित है ;अथार्त स्द त्र दीध्2πय द त्र 1ए 2ए 3 ३द्ध । कोणीय संवेग के केवल वही मान क्यों होते हैं जो ीध्2π के पूणा±क गुणज हैं? बोर द्वारा अपना माॅडल प्रस्तुत करने के दस वषर् पश्चात सन् 1923 में एक प्रफांसीसी भौतिक वैज्ञानिक लुइस दे ब्राॅग्ली ने इस समस्या का हल ढूँढ़ा। हमने अध्याय 11 में दे ब्राॅग्ली की परिकल्पना का अध्ययन किया था जिसके अनुसार, द्रव्य कण जैसे इलेक्ट्राॅन भी तरंग जैसे लक्षण प्रदश्िार्त करते हैं। सी.जे. डेविसन तथा एल.एच. जमर्र द्वारा 1927 में प्रायोगिक तौर पर इलेक्ट्राॅनों की तरंग प्रवृफति का सत्यापन किया गया। लुइस दे ब्राॅग्ली ने तवर्फ किया कि इलेक्ट्राॅन को बोर द्वारा प्रस्तावित इसकी वृत्ताकार कक्षा में, एक कण - तरंग के रूप में देखा जाना चाहिए। डोरी में गमन करती तरंगों के सदृश, कणतरंगें भी अनुनादी अवस्थाओं में अप्रगामी तरंगें उत्पन्न कर सकती हैं। कक्षा 11 के लिए भौतिकी की पाठ्यपुस्तक के अध्याय 15 से हम जानते हैं कि किसी तनित डोरी को विभ्िान्न स्थानों पर कषर्ण करके, उसमें विभ्िान्न तरंगदैघ्यो± को उत्पन्न किया जा सकता है। तथापि, केवल वही तरंगदैघ्यर् विद्यमान रह पाती हैं जिनके सिरों पर निष्पंद होते हैं तथा जो डोरी में अप्रगामी तरंग बनाती हैं। इसका अथर् है कि किसी डोरी में, अप्रगामी तरंगें तभी बनेंगी जब तरंग द्वारा डोरी में एक ओर जाने में तथा वापस आने में तय की गइर् वुफल दूरी, एक तरंगदैघ्यर्, दो तरंगदैघ्यर्, अथवा कोइर् भी पूणा±क संख्या की तरंगदैघ्यर् के बराबर हो। अन्य तरंगदैघ्यो± की तरंगों में परावतर्न के पश्चात आपस में व्यतिकरण होता है तथा उनके आयाम शीघ्रता से शून्य हो जाते हैं। तद त्रिाज्या की द जी की कक्षा में परिक्रमा करते किसी इलेक्ट्राॅन द्वारा कक्षा की परिध्ि में तय की गइर् वुफल दूरी 2πतद होगी। अतः 2π तद त्र दλए द त्र 1ए 2ए 3ण्ण्ण् ;12ण्24द्ध चित्रा 12ण्10 में किसी वृत्ताकार कक्षा पर जिसके लिए द त्र 4 है, एक अप्रगामी कणतरंग दशार्यी गइर् है। इस प्रकार, 2πतद त्र 4λए जहाँ λ द जी कक्षा में परिक्रमा करते हुए इलेक्ट्राॅन की दे ब्राॅग्ली तरंगदैघ्यर् है। अध्याय 11 से, हम जानते हैं λ त्र ीध्चए जहाँ च इलेक्ट्राॅन के संवेग का परिमाण है। यदि इलेक्ट्राॅन की चाल प्रकाश की चाल से बहुत कम है, तो संवेग उअद होगा। इस प्रकार λ त्र ीध्उअद होगा। समीकरण ;12ण्24द्ध से हमें प्राप्त होगा: 2π त त्र द ीध्उअअथवा उ अत त्र दीध्2π दद द द यह बोर द्वारा प्रस्तावित इलेक्ट्राॅन के कोणीय संवेग का क्वांटम प्रतिबंध् है ¹समीकरण ;12ण्13द्धह्। अनुच्छेद 12ण्5 में हमने देखा है कि यह समीकरण हाइड्रोजन परमाणु में ऊजार् स्तरों तथा विविक्त कक्षाओं की व्याख्या करने का आधार है। इस प्रकार दे ब्राॅग्ली की परिकल्पना, परिक्रामी इलेक्ट्राॅन के कोणीय संवेग के क्वांटमीकरण की बोर द्वारा प्रस्तावित द्वितीय अभ्िागृहीत के लिए व्याख्या प्रस्तुत करती है। इलेक्ट्राॅन की क्वांटित कक्षाएँ तथा ऊजार् स्िथतियाँ, इलेक्ट्राॅन की तरंग प्रवृफति के कारण हैं और केवल अनुनादी अप्रगामी तरंगें ही अवस्िथत रह सकती हैं। बोर - माॅडल जिसमें चिर प्रतिष्िठत प्रक्षेप पथ चित्राण ;नाभ्िाक के चारों ओर ग्रह - सदृश कक्षाएँद्ध सम्िमलित हैं, हाइड्रोजनसम परमाणुओं’;एकल इलेक्ट्राॅनद्ध के मुख्य लक्षणों, मुख्य रूप से उत्स£जत अथवा वरणात्मक अवशोष्िात विकिरणों की आवृिायों की उचित भविष्यवाणी करता है। तथापि इस माॅडल की वुफछ सीमाएँ हैं। इनमें से वुफछ हैं: ;पद्ध बोर - माॅडल हाइड्रोजनसम परमाणुओं के लिए ही उपयुक्त है। द्वि - इलेक्ट्राॅन परमाणु जैसे हीलियम के लिए भी इसे विस्तारित नहीं किया जा सकता। हाइड्रोजनसम’ परमाणुओं के लिए बोर माॅडल को एक से अध्िक इलेक्ट्राॅन वाले परमाणुओं के विश्लेषण के लिए प्रयोग करने के प्रयत्न किए गए, परंतु कोइर् सपफलता प्राप्त नहीं हुइर्। कठिनाइर् यह है कि प्रत्येक इलेक्ट्राॅन केवल धनावेश्िात नाभ्िाक से ही नहीं परंतु दूसरे सभी इलेक्ट्राॅनों से भी अन्योन्य िया करता है। ’ हाइड्रोजनसम परमाणु वे परमाणु हैं जिनमें ध्न आवेश ़र्म युक्त नाभ्िाक और एकल इलेक्ट्राॅन होता है जहाँ र् प्रोटाॅन संख्या है। हाइªडोजन परमाणु, एकध आयनित हीलियम, द्वितः आयनित लीथ्िायम इत्यादि हाइड्रोजनसम परमाणुओं के उदाहरण हैं। इन परमाणुओं में अध्िक जटिल इलेक्ट्राॅन - इलेक्ट्राॅन अन्योन्य ियाएँ नहीं पाइर् जातीं। भौतिकी बोर माॅडल के संरूपण में इलेक्ट्राॅन तथा ध्नावेश्िात नाभ्िाक के बीच विद्युत बल सम्िमलित है। इनमें इलेक्ट्राॅनों के मध्य विद्युत बल शामिल नहीं है जो कि बहु - इलेक्ट्राॅन परमाणुओं में आवश्यक रूप से प्रकट होता है। ;पपद्ध यद्यपि बोर - माॅडल हाइड्रोजनसम परमाणुओं द्वारा उत्स£जत प्रकाश की आवृिायों की सही भविष्यवाणी करता है, पिफर भी यह स्पेक्ट्रम में आवृिायों की आपेक्ष्िाक तीव्रताओं की व्याख्या नहीं कर पाता। हाइड्रोजन के उत्सजर्न स्पेक्ट्रम में वुफछ दृश्य आवृिायों की तीव्रता क्षीण होती है, जबकि दूसरी आवृिायों की तीव्रता प्रबल होती है। ऐसा क्यों होता है? प्रायोगिक प्रेक्षण दशार्ते हैं कि वुफछ संक्रमण दूसरों की अपेक्षा अध्िक स्वीकायर् हैं। बोर - माॅडल विभ्िान्न संक्रमणों की विविध तीव्रताओं की व्याख्या करने में असमथर् है। बोर - माॅडल परमाणु का परिष्वृफत चित्रा प्रस्तुत करता है तथा इसका जटिल परमाणुओं के लिए व्यापकीकरण नहीं किया जा सकता। जटिल परमाणुओं के लिए हमंे क्वांटम यांत्रिाकी पर आधरित एक नए मूलभूत सि(ांत का उपयोग करना होगा जो परमाणु संरचना का अध्िक पूणर् चित्रा प्रस्तुत करता है। सारांश 1ण् परमाणु वुफल मिलाकर वैद्युत उदासीन होता है और इसलिए परमाणु में धनावेश और )णावेश की मात्राएँ समान होती हैं। 2ण् टाॅमसन - माॅडल में परमाणु धनावेशों का गोलीय मेघ है जिसमें इलेक्ट्राॅन अंतःस्थापित होते हैं। 3ण् रदरपफोडर् - माॅडल में परमाणु का सवार्िाक द्रव्यमान और इसका वुफल धनावेश एक सूक्ष्म नाभ्िाक में संवेंफित होता है ;प्ररूपतः परमाणु के साइश का दस हशारवाँ भागद्ध तथा इलेक्ट्राॅन इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। 4ण् परमाणु की संरचना की व्याख्या करने में रदरपफोडर् के नाभ्िाकीय माॅडल में दो मुख्य कठिनाइयाँ हैं: ;ंद्ध इसके अनुसार परमाणु अस्िथर हैं क्योंकि नाभ्िाक के चारों ओर घूमते हुए त्वरित इलेक्ट्राॅनों को स£पल पथ पर नाभ्िाक की ओर अंदर आ जाना चाहिए। यह पदाथर् के स्थायित्व का खंडन करता है। ;इद्ध यह विभ्िान्न तत्वों के परमाणुओं के अभ्िालाक्षण्िाक लाइन स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सकता। 5ण् प्रत्येक तत्व के परमाणु स्थायी होते हैं और अभ्िालाक्षण्िाक स्पेक्ट्रम उत्स£जत करते हैं। स्पेक्ट्रम में विलग समांतर रेखाओं का समुच्चय होता है जिसे रेख्िाल स्पेक्ट्रम कहते हैं। यह परमाणु - संरचना के विषय में उपयोगी सूचनाएँ देता है। 6ण् परमाण्वीय हाइड्रोजन अनेक श्रेणी युक्त रेख्िाल स्पेक्ट्रम उत्स£जत करता है। किसी श्रेणी में किसी रेखा की आवृिा को दो पदों के अंतर के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। 11 लाइमैन श्रेणी रू 22य द त्र 2ए 3ए 4एण्ण्ण्νत्र त्ब − 1 द 11 बामर श्रेणी रू 22य द त्र 3ए 4ए 5एण्ण्ण्νत्र त्ब − 2 द 11 पाशन श्रेणी रू νत्र त्ब 2 − 2य द त्र 4ए 5ए 6एण्ण्ण्3 द 11 ब्रेकेट श्रेणी रू νत्र त्ब 2 − 2य द त्र 5ए 6ए 7एण्ण्ण्4 द 11 पुंफट श्रेणी रू 22य द त्र 6ए 7ए 8एण्ण्ण्νत्र त्ब − 5 द 7ण् परमाणुओं द्वारा उत्स£जत रेख्िाल स्पेक्ट्रम तथा परमाणुओं के स्थायित्व की व्याख्या करने के लिए नील्स बोर ने हाइड्रोजनसम परमाणुओं ;एकल इलेक्ट्राॅनद्ध के लिए एक माॅडल प्रस्तावित किया। उन्होंने तीन अभ्िागृहीत प्रस्तुत किए तथा क्वांटम यांत्रिाकी की नींव रखीः ;ंद्ध किसी हाइड्रोजन परमाणु में कोइर् इलेक्ट्राॅन बिना विकिरण उफजार् के उत्सजर्न के निश्िचत कक्षाओं ;जिन्हें स्थायी कक्षा कहते हैंद्ध में परिक्रमण करते हैं। ;इद्ध स्थायी कक्षा वे हैं जिनके लिए कोणीय संवेग ीध्2π का कोइर् पूणा±क गुणज होता है ;बोर का क्वांटमीकृत प्रतिबंध्द्ध। अथार्त स् त्र दीध्2πए जहाँ द एक पूणा±क है जिसे क्वांटम संख्या कहते हैं। ;बद्ध तीसरे अभ्िागृहीत के अनुसार कोइर् इलेक्ट्राॅन अपनी एक विनिदिर्ष्ट अविकरणी कक्षा से अन्य निम्नतर उफजार् की कक्षा में संक्रमण कर सकता है। ऐसा करने में एक पफोटाॅन उत्स£जत होता है जिसकी उफजार् प्रारंभ्िाक और अंतिम अवस्थाओं की ऊजार्आंे के अंतर के बराबर होती है। उत्स£जत पफोटाॅन की आवृिा ;νद्ध निम्न संबंध द्वारा दी गइर् है: ीν त्र म् दृ म्प िकोइर् परमाणु उसी आवृिा के विकिरण को अवशोष्िात करता है जिसे वह परमाणु उत्स£जत करता है, इस स्िथति में इलेक्ट्राॅन द से उच्च मान की कक्षा में अंतरित होता है। म् ़ ीν त्र म्प िभौतिकी 8ण् कोणीय संवेग के क्वांटमीकरण प्रतिबंध् के परिणामस्वरूप, इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक की परिक्रमा केवल विश्िाष्ट त्रिाज्याओं की कक्षाओं में ही करता है। हाइड्रोजन परमाणु के लिए इसका मान है 2 दी 24πε0 त त्र दउ 2π म 2 वुफल ऊजार् भी क्वांटित है: 4 उम म् त्र द 22 28द ε0ी त्र दृ13ण्6 मटध्द 2 तब, द त्र 1 अवस्था, निम्नतम अवस्था कहलाती है। हाइड्रोजन परमाणु में निम्नतम अवस्था ऊजार् का मान दृ13ण्6 मट है।द के बड़े मान;द झ 1द्ध उत्तेजित अवस्थाओं के संगत हैं। परमाणु इन उत्तेजित अवस्थाओं में, दूसरे परमाणुओं या इलेक्ट्राॅनों से संघट्टð द्वारा अथवा उचित आवृिा के पफोटाॅन को अवशोष्िात करके, पहुँचते हैं। 9ण् दे ब्राॅग्ली की परिकल्पना, कि इलेक्ट्राॅन की तरंगदैघ्यर् λ त्र ीध्उअ होती है, ने तरंग - कण के द्वैती संबंध् का उपयोग करके बोर की क्वांटित कक्षाओं की व्याख्या की। कक्षाएँ वृत्ताकार अप्रगामी तरंगों के संगत हैं जिनकी कक्षा की परिध्ि तरंगदैघ्यो± के पूणर् गुणजों के बराबर है। 10ण् बोर माॅडल हाइड्रोजनसम परमाणुओं ;एकल इलेक्ट्राॅनद्ध के लिए ही उपयुक्त है। इसे द्वि - इलेक्ट्राॅन परमाणु जैसे हीलियम के लिए भी विस्तारित नहीं किया जा सकता। यह माॅडल हाइड्रोजनसम परमाणुओं की आवृिायों की आपेक्ष्िाक तीव्रताओं की भी व्याख्या नहीं कर पाता। विचारणीय विषय 1ण् टामसन माॅडल और रदरपफोडर् माॅडल दोनों ही अस्थायी तंत्रा बनाते हैं। टाॅमसन माॅडल स्िथर वैद्युत रूप से अस्थायी है, जबकि रदरपफोडर् माॅडल कक्षीय इलेक्ट्राॅनों के वैद्युतचुंबकीय विकिरण के कारण अस्थायी होता है। 2ण् बोर ने कोणीय संवेग ;द्वितीय अभ्िागृहीतद्ध का ही क्वांटमीकरण क्यों किया, किसी और राश्िा का क्यों नहीं? ध्यान दें कि ी तथा कोणीय संवेग की विमा एक ही होती है, और वृत्ताकार कक्षाओं के लिए कोणीय संवेग एक बहुत प्रासंगिक राश्िा है। अतः द्वितीय अभ्िागृहीत स्वाभाविक ही है। 3ण् हाइड्रोजन परमाणु में बोर माॅडल में कक्षीय चित्राण, अनिश्िचतता सि(ांत के साथ असंगत था। यह आधुनिक क्वांटम यांत्रिाकी द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया था जिसमें बोर की कक्षाएँ वे क्षेत्रा हैं जहाँ इलेक्ट्राॅन के पाए जाने की प्रायिकता बहुत अिाक हो सकती है। 4ण् सौर परिवार की स्िथति से भ्िान्न, जहाँ ग्रह - ग्रह के बीच गुरुत्वाकषर्ण बल, सूयर् और प्रत्येक ग्रह के बीच गुरुत्वाकषर्ण बल ;क्योंकि सूयर् का द्रव्यमान किसी भी ग्रह के द्रव्यमान से बहुत अध्िक हैद्ध की अपेक्षा बहुत कम है, इलेक्ट्राॅन - इलेक्ट्राॅन की अन्योन्य िया के कारण वैद्युत बल का परिमाण इलेक्ट्राॅन - नाभ्िाक वैद्युत बल के तुल्य है, क्योंकि आवेश तथा दूरियाँ परिमाण में समान कोटि की हैं। यही कारण है कि ग्रह सदृश इलेक्ट्राॅन की मान्यता वाला बोर माॅडल बहु - इलेक्ट्राॅन परमाणुओं के लिए उपयुक्त नहीं है। 5ण् वुफछ विश्िाष्ट कक्षों की परिकल्पना करके जिनमें इलेक्ट्राॅन विकिरित नहीं करते, बोर ने क्वांटम सि(ांत की नींव रखी। बोर के माॅडल में केवल एक क्वांटम संख्या द सम्िमलित है। नया सि(ांत जिसे क्वांटम यांत्रिाकी कहते हैं, बोर के अभ्िागृहीत की पुष्िट करता है। तथापि क्वांटम यांत्रिाकी ;अध्िक व्यापक रूप से मान्यद्ध में, कोइर् विशेष ऊजार् स्तर सदैव एक ही क्वांटम अवस्था के संगत नहीं होता। उदाहरण के लिए, कोइर् अवस्था चार क्वांटम संख्याओं ;दए सए उए तथा ेद्ध से अभ्िालक्षण्िात है, लेकिन शु( वूफलाॅम विभव के लिए ;हाइड्रोजन परमाणु की भांतिद्ध ऊजार् केवल द पर निभर्र करती है। 6ण् साधरण क्लासिकी अपेक्षाओं के प्रतिवूफल, बोर माॅडल में किसी इलेक्ट्राॅन के अपनी कक्षा में परिक्रमण की आवृिा का स्पेक्ट्रमी रेखा की आवृिा से कोइर् संबंध नहीं है। स्पेक्ट्रमी रेखा की आवृिा ी द्वारा विभाजित दो कक्षीय उफजार्ओं का अंतर होता है। बड़ी क्वांटम संख्याओं ;द से द दृ 1 तक, द बहुत बड़ा लेने परद्ध के मध्य संक्रमणों में दोनों के मान समान हो जाते हैं जैसा कि अपेक्ष्िात है। 7ण् बोर का सेमीक्लासिकी माॅडल जो वुफछ तो क्लासिकी भौतिकी के पहलुओं पर तथा वुफछ आधुनिक भौतिकी के पहलुओं पर आधरित है, सरलतम हाइड्रोजनसम परमाणुओं का भी सही चित्राण नहीं करता। सही चित्रा वास्तव में क्वांटम यांत्रिाकी से प्राप्त होता है जो बोर माॅडल से अनेक मूलभूत रूपों में भ्िान्न है। पिफर यदि बोर माॅडल पूणर् रूप से ठीक नहीं है तो हम इसके बारे में ¯चतित क्यों होते हैं? तथापि बोर माॅडल को उपयोगी बनाने वाले वुफछ कारण हैं: ;पद्ध यह माॅडल केवल तीन अभ्िागृहीतों पर आधरित है लेकिन पिफर भी हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की लगभग सभी विशेषताओं की व्याख्या करता है। ;पपद्ध हमने क्लासिकी भौतिकी की जिन संकल्पनाओं को सीखा है उनका इस माॅडल में समावेश है। ;पपपद्ध माॅडल दशार्ता है कि वुफछ भविष्यवाण्िायों की आशा में, किस प्रकार किसी सै(ांतिक भौतिकविज्ञानी को, कभी - कभी वुफछ सदृश समस्याओं की अक्षरशः उपेक्षा कर देनी चाहिए। यदि सि(ांत या माॅडल की भविष्यवाणी प्रयोग से मेल खाती है तो वैज्ञानिक को उपेक्ष्िात की गइर् समस्याओं की व्याख्या करने का प्रयत्न करना चाहिए। अभ्यास 12ण्1 प्रत्येक कथन के अंत में दिए गए संकेतों में से सही विकल्प का चयन कीजिए: ;ंद्ध टाॅमसन माॅडल में परमाणु का साइश, रदरपफोडर् माॅडल में परमाणवीय साइश से ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् होता है। ;अपेक्षाकृत काप़्ाफी अिाक, भ्िान्न नहीं, अपेक्षाकृत काप़्ाफी कमद्ध ;इद्ध ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् में निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्राॅन स्थायी साम्य में होते हैं जबकि ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् में इलेक्ट्राॅन, सदैव नेट बल अनुभव करते हैं। ;बद्ध ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् पर आधरित किसी क्लासिकी परमाणु का नष्ट होना निश्िचत है। ;टाॅमसन माॅडल, रदरपफोडर् माॅडलद्ध ;कद्ध किसी परमाणु के द्रव्यमान का ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् में लगभग संतत वितरण होता है लेकिन ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् में अत्यंत असमान द्रव्यमान वितरण होता है। ;टाॅमसन माॅडल, रदरपफोडर् माॅडलद्ध ;मद्ध ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् में परमाणु के ध्नावेश्िात भाग का द्रव्यमान सवार्िाक होता है। ;रदरपफोडर् माॅडल, दोनों माॅडलोंद्ध 12ण्2 मान लीजिए कि स्वणर् पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग करके आपको ऐल्प़्ाफा - कण प्रकीणर्न प्रयोग दोहराने का अवसर प्राप्त होता है। ;हाइड्रोजन 14 ज्ञ से नीचे ताप पर ठोस हो जाती है।द्ध आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं? भौतिकी 12ण्3 पाशन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुतम तरंगदैघ्यर् क्या है? 12ण्4 2ण्3 मट उफजार् अंतर किसी परमाणु में दो उफजार् स्तरों को पृथक कर देता है। उत्स£जत विकिरण की आवृिा क्या होगी यदि परमाणु में इलेक्ट्राॅन उच्च स्तर से निम्न स्तर में संक्रमण करता है? 12ण्5 हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में उफजार् दृ13ण्6 मट है। इस अवस्था में इलेक्ट्राॅन की गतिज और स्िथतिज उफजार्एँ क्या होंगी? 12ण्6 निम्नतम अवस्था में विद्यमान एक हाइड्रोजन परमाणु एक पफोटाॅन को अवशोष्िात करता है जो इसे द त्र 4 स्तर तक उत्तेजित कर देता है। पफोटाॅन की तरंगदैघ्यर् तथा आवृिा ज्ञात कीजिए। 12ण्7 ;ंद्ध बोर माॅडल का उपयोग करके किसी हाइड्रोजन परमाणु में द त्र 1ए 2ए तथा 3 स्तरों पर इलेक्ट्राॅन की चाल परिकलित कीजिए। ;इद्ध इनमें से प्रत्येक स्तर के लिए कक्षीय अवध्ि परिकलित कीजिए। 12ण्8 हाइड्रोजन परमाणु में अंतरतम इलेक्ट्राॅन - कक्षा की त्रिाज्या 5ण्3 × 10दृ11 उ है। कक्षा द त्र 2 और द त्र 3 की त्रिाज्याएँ क्या हैं? 12ण्9 कमरे के ताप पर गैसीय हाइड्रोजन पर किसी 12ण्5 मट की इलेक्ट्राॅन पुंज की बमबारी की गइर्। किन तरंगदैघ्यो± की श्रेणी उत्स£जत होगी? 12ण्10 बोर माॅडल के अनुसार सूयर् के चारों ओर 1ण्5 × 1011 उ त्रिाज्या की कक्षा में, 3× 104 उध्े के कक्षीय वेग से परिक्रमा करती पृथ्वी की अभ्िालाक्षण्िाक क्वांटम संख्या ज्ञात कीजिए ;पृथ्वी का द्रव्यमान त्र 6ण्0 × 1024 ाहद्ध। अतिरिक्त अभ्यास 12ण्11 निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर दीजिए जो आपको टाॅमसन माॅडल और रदरपफोडर् माॅडल में अंतर समझने हेतु अच्छी तरह से सहायक हैं। ;ंद्ध क्या टाॅमसन माॅडल में पतले स्वणर् पन्नी से प्रकीण्िार्त α - कणों का पूवर्ानुमानित औसत विक्षेपण कोण, रदरपफोडर् माॅडल द्वारा पूवार्नुमानित मान से अत्यंत कम, लगभग समान अथवा अत्यिाक बड़ा है? ;इद्ध टाॅमसन माॅडल द्वारा पूवार्नुमानित पश्च प्रकीणर्न की प्रायिकता ;अथार्त α - कणों का 90° से बड़े कोणों पर प्रकीणर्नद्ध रदरपफोडर् माॅडल द्वारा पूवार्नुमानित मान से अत्यंत कम, लगभग समान अथवा अत्यिाक है? ;बद्ध अन्य कारकों को नियत रखते हुए, प्रयोग द्वारा यह पाया गया है कि कम मोटाइर् ज के लिए, मध्यम कोणों पर प्रकीण्िार्त α - कणों की संख्या ज के अनुक्रमानुपातिक है। ज पर यह रैख्िाक निभर्रता क्या संकेत देती है? ;कद्ध किस माॅडल में α - कणों के पतली पन्नी से प्रकीणर्न के पश्चात औसत प्रकीणर्न कोण के परिकलन हेतु बहुप्रकीणर्न की उपेक्षा करना पूणर्तया गलत है? 12ण्12 हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्राॅन एवं प्रोटाॅन के मध्य गुरुत्वाकषर्ण, वूफलाॅम - आकषर्ण से लगभग 10दृ40 के गुणक से कम है। इस तथ्य को देखने का एक वैकल्िपक उपाय यह है कि यदि इलेक्ट्राॅन एवं प्रोटाॅन गुरुत्वाकषर्ण द्वारा आब( हों तो किसी हाइड्रोजन परमाणु में प्रथम बोर कक्षा की त्रिाज्या का अनुमान लगाइए। आप मनोरंजक उत्तर पाएँगे। 12ण्13 जब कोइर् हाइड्रोजन परमाणु स्तर द से स्तर ;द दृ 1द्ध पर व्युत्तेजित होता है तो उत्स£जत विकिरण की आवृिा हेतु व्यंजक प्राप्त कीजिए। द के अिाक मान हेतु, दशार्इए कि यह आवृिा, इलेक्ट्राॅन की कक्षा में परिक्रमण की क्लासिकी आवृिा के बराबर है। 12ण्14 क्लासिकी रूप में किसी परमाणु में इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के चारों ओर किसी भी कक्षा में हो सकता है। तब प्ररूपी परमाण्वीय साइश किससे निधार्रित होता है? परमाणु अपने प्ररूपी साइश की अपेक्षा दस हशार गुना बड़ा क्यों नहीं है? इस प्रश्न ने बोर को अपने प्रसि( परमाणु माॅडल, जो आपने पाठ्यपुस्तक में पढ़ा है, तक पहुँचने से पहले बहुत उलझन में डाला था। अपनी खोज से पूवर् उन्होंने क्या किया होगा, इसका अनुकरण करने के लिए हम मूल नियतांकों की प्रकृति के साथ निम्न गतिविध्ि करके देेेंखें कि क्या हमें लंबाइर् की विमा वाली कोइर् राश्िा प्राप्त होती है, जिसका साइश, लगभग परमाणु के ज्ञात साइश ;् 10दृ10 उद्ध के बराबर है। ;ंद्ध मूल नियतांकों मए उमए और ब से लंबाइर् की विमा वाली राश्िा की रचना कीजिए। उसका संख्यात्मक मान भी निधार्रित कीजिए। ;इद्ध आप पाएँगे कि ;ंद्ध में प्राप्त लंबाइर् परमाण्वीय विमाओं के परिमाण की कोटि से काप़्ाफी छोटी है। इसके अतिरिक्त इसमें ब सम्िमलित है। परंतु परमाणुओं की उफजार् अिाकतर अनापेक्ष्िाकीय क्षेत्रा ;दवद.तमसंजपअपेपजपब कवउंपदद्ध में है जहाँ ब की कोइर् अपेक्ष्िात भूमिका नहीं है। इसी तवर्फ ने बोर को ब का परित्याग कर सही परमाण्वीय साइश को प्राप्त करने के लिए ‘वुफछ अन्य’ देखने के लिए प्रेरित किया। इस समय प्लांक नियतांक ी का कहीं और पहले ही आविभार्व हो चुका था। बोर की सूक्ष्मदृष्िट ने पहचाना कि ीए उम और म के प्रयोग से ही सही परमाणु साइश प्राप्त होगा। अतः ीए उम और म से ही लंबाइर् की विमा वाली किसी राश्िा की रचना कीजिए और पुष्िट कीजिए कि इसका संख्यात्मक मान, वास्तव में सही परिमाण की कोटि का है। 12ण्15 हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम उत्तेजित अवस्था में इलेक्ट्राॅन की वुफल उफजार् लगभग दृ 3ण्4 मट है। ;ंद्ध इस अवस्था में इलेक्ट्राॅन की गतिज उफजार् क्या है? ;इद्ध इस अवस्था में इलेक्ट्राॅन की स्िथतिज उफजार् क्या है? ;बद्ध यदि स्िथतिज उफजार् के शून्य स्तर के चयन में परिवतर्न कर दिया जाए तो उफपर दिए गए उत्तरों में से कौन - सा उत्तर परिवतिर्त होगा? 12ण्16 यदि बोर का क्वांटमीकरण अभ्िागृहीत ;कोणीय संवेग त्र दीध्2πद्ध प्रकृति का मूल नियम है तो यह ग्रहीय गति की दशा में भी लागू होना चाहिए। तब हम सूयर् के चारों ओर ग्रहों की कक्षाओं के क्वांटमीकरण के विषय में कभी चचार् क्यों नहीं करते? 12ण्17 प्रथम बोर - त्रिाज्या और म्यूओनिक हाइड्रोजन परमाणु ख्अथार्त कोइर् परमाणु जिसमें लगभग 207 उम द्रव्यमान का )णावेश्िात म्यूआॅन ; - दृद्ध प्रोटाॅन के चारों ओर घूमता है, की निम्नतम अवस्था उफजार् को प्राप्त करने का परिकलन कीजिए।

RELOAD if chapter isn't visible.