6ण्1 भूमिका विद्युत तथा चंुबकत्व कापफी लंबे समय तक अलग - अलग तथा असंब( परिघटनाएँ मानी जाती रही हैं। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ्िाक दशकों में आॅस्टेर्ड, ऐम्िपयर तथा वुफछ अन्य वैज्ञानिकों द्वारा विद्युत धारा पर किए गए प्रयोगों ने यह प्रमाण्िात किया कि विद्युत तथा चंुबकत्व परस्पर संबंिात हैं। उन्होंने ज्ञात किया कि गतिमान विद्युत आवेश चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, विद्युत धारा अपने पास रखी हुइर् एक चुंबकीय सुइर् को विक्षेपित करती है। इससे एक स्वाभाविक प्रश्न उत्पन्न होता है μ क्या इसका विपरीत प्रभाव संभव है? क्या गतिमान चुंबक विद्युत धारा उत्पन्न कर सकते हैं? क्या प्रवृफति विद्युत तथा चुंबकत्व के बीच इस प्रकार के संबंध की अनुमति देती है? इसका उत्तर एक निश्िचत ‘हाँ’ है। लगभग सन 1830 में माइकल पैफराडे द्वारा इंग्लैंड में तथा जोसेपफ हेनरी द्वारा अमेरिका में किए गए प्रयोगों ने स्पष्ट रूप से दशार्या कि परिवतर्नशील चुंबकीय क्षेत्रा बंद वुंफडलियों में विद्युत धारा उत्पन्न करता है। इस अध्याय में हम परिवतर्नशील चंुबकीय क्षेत्रों से संबंिात परिघटनाओं के बारे में अध्ययन करेंगे तथा इनमें निहित सि(ांतों को समझेंगे। वह परिघटना जिसमें चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा विद्युत धारा उत्पन्न होती है, उसे उचित रूप से ही वैद्युतचुंबकीय प्रेरण कहते हैं। जब पैफराडे ने प्रथम बार अपनी इस खोज को सावर्जनिक किया कि ‘चालक तार से बने लूप तथा दंड चंुबक के बीच सापेक्ष गति कराने पर लूप में क्षीण धारा उत्पन्न होती है’, तब उनसे पूछा गया कि ‘इसका क्या उपयोग है’? पैफराडे का उत्तर था, ‘नवजात श्िाशु का क्या उपयोग होता है?’ वैद्युतचुंबकीय प्रेरण वैद्युतचुंबकीय प्रेरण केवल सै(ांतिक या शैक्ष्िाक रूप से ही उपयोगी परिघटना नहीं है वरन व्यावहारिक दृष्िट से विद्युत न हो तो विद्युत प्रकाश न हो, ट्रेन न हो, टेलीपफोन न हो और वंफप्यूटर न हो। पैफराडे एवं हेनरी के इन पुरोगामी़;चपवदममतपदहद्ध प्रयोगों ने ही आध्ुनिक जनित्रों एवं ट्रांसपफामर्रों के विकास को संभव बनाया। आज की सभ्यता के विकास में वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की खोज ने एक अहम भूमिका निभाइर् है। 6ण्2 पैफराडे एवं हेनरी के प्रयोग वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की खोज तथा उसकी समझ पैफराडे एवं हेनरी द्वारा किए गए अनेक प्रयोगों पर आधारित है। हम उनमें से वुफछ प्रयोगों का वणर्न यहाँ जोसेपफ हेनरी ख्1797 दृ 1878,करेंगे। जोसेपफ हेनरी अमेरिकी प्रायोगिक भौतिक - प्रयोग6ण्1 शास्त्राी, ¯प्रस्टन विश्वविद्यालय में प्रोपेफसऱतथा स्िमथसोनियन इंस्टीट्यूशन के प्रथमचित्रा 6ण्1 में धारामापी ळ से जुड़ी हुइर् एक वंुफडली ब्1’दशार्यी गइर् है। जबनिदेशक थे। लोहे के ध््रुवों के चारों ओरएक दंड चुंबक के उत्तरी ध्रुव को इस वुंफडली की ओर धकेला जाता है तो पृथक्वृफत दंड चुंबक को स्िथर रखकर धारामापी का संकेतक विक्षेपित होता है जो वुुंफडली में विद्युत धारा की तथा इसके स्थान पर तार की वुंफडलियाँ उपस्िथति को दशार्ता है। यह विक्षेप तभी तक रहता है जब तक दंड चुंबक लपेटकर उन्होंने विद्युत चुंबकों में महत्वपूणर् सुधर किए एवं एक विद्युत चुंबकीयगति में रहता है। जब चुंबक स्िथर होता है तो धारामापी कोइर् विक्षेप नहीं मोटर तथा एक नए दक्ष टेलीग्राप़्ाफ कादशार्ता। जब चुंबक को वुुंफडली से दूर ले जाते हैं तो धारामापी विपरीत दिशा आविष्कार किया। उन्होंने स्वप्रेरण कीमें विक्षेप दशार्ता है, जो धारा प्रवाह की दिशा के विपरीत होने को दशार्ता है। खोज की तथा इस बात का पता लगायाइसके अतिरिक्त, जब दंड चुंबक के दक्ष्िाणी धु्रव को वुुंफडली की ओर याकि वैफसे एक परिपथ में प्रवाहित धरा इससे दूर ले जाते हैं तो धारामापी में विक्षेप की दिशाएंँ उत्तरी धु्रव की इसी दूसरे परिपथ में धरा प्रेरित करती है। प्रकार की गति की अपेक्षा विपरीत हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त, जब चुंबक को वुंफडली की ओर या इससे दूर तेजी से गतिमान किया जाता है तो विक्षेप और इसलिए धारा अिाक प्राप्त होता है। यह भी देखा गया है कि यदि दंड चुंबक को स्िथर रखा जाए तथा इसके बजाय वुंफडली ब्को चुंबक की ओर या इससे दूर गतिमान किया जाए तो भी इसी 1प्रकार का प्रभाव उत्पन्न होता है। यह दशार्ता है कि वुंफडली में विद्युत धारा कीउत्पिा ;प्रेरणद्ध चुंबक तथा वुंफडली के मध्य सापेक्ष गति का प्रतिपफल है। प्रयोग6ण्2 चित्रा 6ण्2 में दंड चुंबक को बैटरी से जुड़ी हुइर् एक दूसरी वंुफडली ब्2से प्रतिस्थापित किया गया है। वुंफडली ब्2में अपरिवतीर् धारा अपरिवतीर् चंुबकीय क्षेत्रा उत्पन्न करती है। जैसे ही वुंफडली ब्2को वुंफडली ब्1 की ओर लाते हैं, धारामापी एक विक्षेप दशार्ता है। यह वुंफडली ब्1 में प्रेरित चित्रा6ण्1 जब दंड चुंबक को वुंफडली की ओर ध्केलते विद्युत धारा को निद£शत करता है। जब ब्2को दूर ले जाते हैं तो धारामापी हैं, धरामापी ळ का संकेतक विक्षेपित होता है। पिफर से विक्षेप दशार्ता है, लेकिन इस बार यह विक्षेप विपरीत दिशा में होता है। यह विक्षेप तभी तक रहता है जब तक वुंफडली ब्2गति में रहती है। जब वुंफडली ब्2 को ’ जब भी वुंफडली या ‘लूप’ शब्द का उपयोग किया जाता है तो यह मान लिया जाता है कि वे चालक पदाथो± से बने हैं तथा इन्हें जिन तारों से बनाया गया है उन पर अवरोध्क पदाथो± की परत चढ़ी है। जोसेपफ हेनरी ;1797 दृ 1878द्ध स्िथर रखा जाता है तथा ब्1 गतिमान होता है तो उन्हीं प्रभावों को पिफर से देखा जा सकता है। यहाँ भी वुंफडलियों के मध्य सापेक्ष गति विद्युत धारा प्रेरित करती है। प्रयोग 6ण्3 उपरोक्त दोनों प्रयोगों में चुंबक तथा वंुफडली के बीच तथा दो वुंफडलियों के बीच सापेक्ष गति शामिल है। एक अन्य प्रयोग द्वारा पैफराडे ने दशार्या कि यह सापेक्ष गति कोइर् अति आवश्यक अनिवायर्ता नहीं है। चित्रा 6ण्3 में दो वुंफडलियाँ ब्1 तथा ब्2 दशार्यी गइर् हैं जो स्िथर रखी गइर् हैं। वुंफडली ब्1 को एक धारामापी ळ से जोड़ा गया है जबकि दूसरी वंुफडली ब्2 को एक दाब - वंुफजी ज्ञ से होकर एक बैटरी से जोड़ा जाता है। यह देखा जाता है कि दाब - वंुफजी ज्ञ को दबाने पर धारामापी एक क्षण्िाक विक्षेप दशार्ता है और पिफर इसका संकेतक तत्काल शून्य पर वापस आ जाता है। यदि वुंफजीचित्रा 6ण्2 धरायुक्त वुंफडली ब्2 की गति के कारण वंुफडली ब्1 में प्रेरित धरा उत्पन्न होती है। 206 चित्रा 6ण्3 प्रयोग 6ण्3 के लिए प्रयोगात्मक व्यवस्था को लगातार दबाकर रखा जाए तो धारामापी में कोइर् विक्षेप नहीं होता। जब वंुफजी को छोड़ा जाता है तो पिफर से एक क्षण्िाक विक्षेप देखा जाता है, लेकिन यह विक्षेप विपरीत दिशा में होता है। यह भी देखा गया है कि यदि वुंफडलियों में उनके अक्ष के अनुदिश एक लोहे की छड़ रख दी जाए तो विक्षेप नाटकीय रूप से बढ़ जाता है। 6ण्3 चंुबकीय फ्रलक्स पैफराडे की विशाल अंतदृर्ष्िट के कारण वैद्युतचुंबकीय प्रेरण पर उनके द्वारा किए गए प्रयोगों कीशृंखला की व्याख्या करने वाले एक सरल गण्िातीय संबंध की खोज करना संभव हुआ। तथापि,इसके पहले कि हम वह नियम बताएँ तथा उसकी प्रशंसा में वुफछ कहें, हमें चुंबकीय फ्रलक्स Φ ठ की अवधारणा से परिचित हो जाना आवश्यक है। चुंबकीय फ्रलक्स को भी ठीक उसी प्रकारपरिभाष्िात किया जाता है जिस प्रकार विद्युतीय फ्रलक्स को अध्याय 1 में परिभाष्िात किया गया है। वैद्युतचुंबकीय प्रेरण यदि क्षेत्रापफल।वाले समतल को एकसमान चुंबकीय क्षेत्राठ;चित्रा 6.4द्ध में रखा जाता हैतो चुंबकीय फ्रलक्स को व्यक्त किया जा सकता है μ Φ ठ त्र ठ ´। त्र ठ। बवे θ ;6ण्1द्ध जहाँ परθ ठतथा। के बीच का कोण है। एक सदिश राश्िा के रूप में क्षेत्रापफल की अवधारणा का विवेचन पहले ही अध्याय 1 में किया जा चुका है। समीकरण ;6ण्1द्ध को वक्र पृष्ठों एवं असमान क्षेत्रों के लिए विस्तारित किया जा सकता है। यदि चित्रा 6ण्5 में दशार्ए अनुसार किसी सतह के विभ्िान्न भागों पर चुंबकीय क्षेत्रा केपरिमाण तथा दिशाएँ भ्िान्न - भ्िान्न हों, तो सतह से होकर गुजरने वाला चुंबकीय फ्रलक्स होगा  त्ऱ़ककठ ण्ण्ण् त्र ०पप;6ण्2द्धकठ।।ठ। ठ 11 2 2 सभी चित्रा 6ण्4 एकसमान चंुबकीय क्षेत्राजहाँ ‘सभी’ का अथर् है सतह के सभी सूक्ष्म क्षेत्रा अवयवों क।के लिए योग तथाठपक्षेत्रा ठमें रखा पृष्ठ क्षेत्रापफल। वालापअवयव क।प पर चुंबकीय क्षेत्रा है। चुंबकीय फ्रलक्स का ैप् मात्राक वेबर ;ॅइद्ध है। इसे टेस्ला एक समतल। वगर् मीटर ;ज् उ2द्ध द्वारा भी व्यक्त किया जाता है। चुंबकीय फ्रलक्स एक अदिश राश्िा है। 6ण्4 पैफराडे का प्रेरण का नियम प्रायोगिक प्रेक्षणों के आधार पर पैफराडे इस निष्कषर् पर पहुँचे कि जब किसी वंुफडलीमें चुंबकीय फ्रलक्स समय के साथ परिव£तत होता है तब वुंफडली में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। अनुभाग 6ण्2 में च£चत प्रायोगिक प्रेक्षणों की इस अवधारणा का उपयोग करके व्याख्या कर सकते हैं। प्रयोग 6ण्1 में वुंफडली ब्1की ओर अथवा इससे दूर चुंबक की गति तथा प्रयोग 6ण्2 में वुंफडली ब्1की ओर अथवा इससे दूर एक धारा वाहक वंुफडली ब्2की गति, वुंफडली ब्की ओर अथवा इससे दूर एक धारा वाहक वुंफडली ब्की गति, वुंफडली1 2 ब्1 से संब( चुंबकीय फ्रलक्स को परिव£तत करती है। चुंबकीय फ्रलक्स में परिवतर्न चित्रा 6ण्5 वे अवयव क्षेत्रा पर चुंबकीय क्षेत्रासे वुंफडली ब्1में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। इसी प्रेरित विद्युत वाहक बल के ठप । क।प ए पवें क्षेत्रा अवयव का क्षेत्रा सदिशकारण वंुफडली ब्1 तथा धारामापी में विद्युत धारा प्रवाहित होती है। प्रयोग निरूपित करता है। 6ण्3 में किए गए प्रेक्षणों का एक युक्ितयुक्त स्पष्टीकरण निम्न प्रकार हैμ जब दाब वुंफजी ज्ञ को दबाते हैं तो वुंफडली ब्2में विद्युत धारा ;तथा इसके कारण चुंबकीय क्षेत्राद्धअल्प समय मंे शून्य से अिाकतम मान तक बढ़ती है। परिणामस्वरूप, समीपस्थ वंुफडली ब्में भी चुंबकीय1फ्रलक्स बढ़ता है। वुंफडली ब्1 में होने वाले चंुबकीय फ्रलक्स के इस परिवतर्न के कारण वुंफडली ब्1 मेें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। जब वुंफजी को दबाकर रखा जाता है तो वंुफडली ब्2 मंे धारा स्िथर रहती है। इसीलिए वंुफडली ब्1 में चुंबकीय फ्रलक्स में कोइर् परिवतर्न नहीं होता तथा वुंफडली ब्1में धारा शून्य हो जाती है। जब वुंफजी को छोड़ते हैं तो वंुफडली ब्2 में विद्युत धारा तथा इसके कारण उत्पन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्रा अल्प समय में अिाकतम मान से घटकर शून्य हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप वंुफडली ब्’ में चुंबकीय फ्रलक्स घटता है और इस प्रकार वंुफडली1 ब्1में पुनः प्रेरित विद्युत धारा उत्पन्न होती है। इन सभी प्रेक्षणों में एक सवर्निष्ठ बात यह है किकिसी परिपथ में चुंबकीय फ्रलक्स के परिवतर्न दर के कारण प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। पैफराडे ने प्रायोगिक प्रेक्षणों को एक नियम के रूप में व्यक्त किया जिसे पैफराडे का वैद्युतचंुबकीय ’ नोट कीजिए कि विद्युत चुंबक के समीप रखे सुग्राही विद्युत यंत्रा विद्युत चुंबक को आॅन ;व्छद्धया आॅपफ़;व्थ्थ्द्ध करने पर उत्पन्न होने वाली धराओं के कारण क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। आकार में परिवतर्न करके ;जैसे इसे सिकोड़ कर या खींच करद्ध या वुंफडली को चुंबकीय क्षेत्रा में इस प्रकार घूणर्न कराकर कि ठ तथा । के बीच में कोण θ बदल जाए, भी किया जा सकता है। इन अवस्थाओं में भी क्रमानुसार वुंफडलियों में एक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। उदाहरण 6ण्2 एक वगार्कार लूप जिसकी एक भुजा 10 बउ लंबी है तथा जिसका प्रतिरोध 0ण्5 Ω है, पूवर् - पश्िचम तल में ऊध्वार्धर रखा गया है। 0ण्10 ज् के एक एकसमान चुंबकीय क्षेत्राको उत्तर - पूवर् दिशा में तल के आर - पार स्थापित किया गया है। चुंबकीय क्षेत्रा को एकसमान दरसे 0ण्70 े में घटाकर शून्य तक लाया जाता है। इस समय अंतराल में प्रेरित विद्युत वाहक बल तथाधारा का मान ज्ञात कीजिए। माइकल पैफराडे ख्1791दृ1867, माइकल पैफराडे ने विज्ञान के क्षेत्रा में महत्वपूणर् योगदान किया, उदाहरण के लिए वैद्युतचुंबकीय प्रेरण की खोज, विद्युत अपघटन के नियम, बेंजीन तथा यह तथ्य कि ध््रुवण तल विद्युत क्षेत्रा में घूणर्न कर सकता है। विद्युत मोटर, विद्युत जनित्रा तथा ट्रांसपफामर्र की खोज का श्रेय भी पैफराडे को ही जाता है। उन्हें उन्नीसवीं शताब्दी का महानतम प्रयोगात्मक वैज्ञानिक माना जाता है। प्रेरण का नियम कहते हैं। इस नियम को निम्न प्रकार से अभ्िाव्यक्त कियागया है।प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण चुंबकीय फ्रलक्स में समय के साथ होने वाले परिवतर्न की दर के बराबर होता है। गण्िातीय रूप मंे प्रेरित विद्युत धारा बल को क ठदृ ;6ण्3द्धकज )ण चिÉ ε की दिशा तथा परिणामतः बंद लूप में धारा की दिशा व्यक्त करता है। इसकी विस्तृत चचार् हम अगले अनुच्छेद में करेंगे। पास - पास लपेटे हुए छ पेफरों वाली किसी वंुफडली के प्रत्येक पेफरे से संब(फ्रलक्स में एकसमान परिवतर्न होता है। इसलिए वुफल प्रेरित विद्युत वाहक बल का व्यंजक होगा - क ठदृछ ;6ण्4द्धकज बंद वुंफडली में पेफरों की संख्या छ बढ़ा कर प्रेरित विद्युत वाहक बल को बढ़ाया जा सकता है। समीकरण ;6ण्1द्ध तथा ;6ण्2द्धए से हमें ज्ञात होता है कि फ्रलक्स में परिवतर्न ठए । तथा θ में से किसी एक या अिाक पदों को बदल कर किया जा सकता है। अनुच्छेद 6ण्2 के प्रयोगों 6ण्1 तथा 6ण्2 में फ्रलक्स को ठ में परिव£ततकरके बदला गया है। फ्रलक्स में परिवतर्न चुंबकीय क्षेत्रा में इसी वुंफडली के 208 हल वंुफडली का क्षेत्रापफल - सदिश, चुंबकीय क्षेत्रा के साथ θ त्र 45° कोण बनाता है। समीकरण ;6ण्1द्ध से, प्रारंभ्िाक चुंबकीय फ्रलक्स है Φ त्र ठ। बवे θ 0ण्1 10 दृ2 ॅइ 2 अंतिम फ्रलक्सए Φत्र 0न्यूनतम फ्रलक्स में परिवतर्न 0ण्70 े में हुआ। समीकरण ;6ण्3द्ध से, प्रेरक विद्युत वाहक बल होगा दृ0 10दृ3 ठ त्र 1ण्0 उट जज 20ण्7 और धारा का परिमाण होगा 10दृ3 टप् 2उ। त् 0ण्5 ध्यान दें कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्रा भी लूप में वुफछ फ्रलक्स उत्पन्न करता है। किन्तु पृथ्वी का चंुबकीय क्षेत्रा स्िथर है ;जो कि प्रयोग की अल्प अविा में परिव£तत नहीं होताद्ध और कोइर् विद्युत वाहक बल प्रेरित नहीं करता। 209 भौतिकी 6ण्5 लेंज का नियम तथा ऊजार् संरक्षण सन 1834 में जमर्न भौतिकविद हेनरिक प्रेफडरिच लेंज ;1804.1865द्ध ने एक नियम का निगमन किया जिसे लेंज का नियम के नाम से जाना जाता है। यह नियम प्रेरित विद्युत वाहक बल की ध्रुवता ;दिशाद्ध का स्पष्ट एवं संक्ष्िाप्त रूप में वणर्न करता है। इस नियम का प्रकथन हैμ प्रेरित विद्युत वाहक बल की ध्रुवता ;चवसंतपजलद्ध इस प्रकार होती है कि वह उस दिशा में धारा प्रवाह प्रवृत्त करे जो उसे उत्पन्न करने वाले कारक ;चुंबकीय क्षेत्रा परिवतर्नद्ध का विरोध करे। समीकरण ;6ण्3द्ध में )ण चिÉ इस प्रभाव को निरूपित करता है। अनुच्छेद 6ण्2ण्1 के प्रयोग 6ण्1 का निरीक्षण करके हम लेंज के नियम को समझ सकते हैं। चित्रा 6ण्1 में हम देखते हैं कि दंड चुंबक का उत्तरी - ध्रुव बंद वंुफडली की ओर ले जाया जा रहा है। जब दंड चुंबक का उत्तरी ध्रुव वंुफडली की ओर गति करता है तब वंुफडली में चुंबकीय फ्रलक्स बढ़ता है। इस प्रकार वंुफडली में प्रेरित धारा ऐसी दिशा में उत्पन्न होती है जिससे कि यह फ्रलक्स के बढ़ने का विरोध कर सके। यह तभी संभव है जब चुंबक की ओर स्िथत पे्रक्षक के सापेक्ष वंुफडली में धारा वामावतर् दिशा में हो। ध्यान दीजिए, इस धारा से संब( चुंबकीय आघूणर् की ध्रुवता उत्तरी है जबकि इसकी ओर चुंबक का उत्तरी ध्रुव आ रहा हो। इसी प्रकार, यदि वुंफडली में चुंबकीय फ्रलक्स घटेगा। चुंबकीय फ्रलक्स के इस घटने का विरोध करने के लिए वंुफडली में प्रेरित धारा दक्ष्िाणावतर् दिशा में बहती है तथा इसका दक्ष्िाणी ध्रुव दूर हटते दंड चुंबक के उत्तरी ध्रुव की ओर होता है। इसके पफलस्वरूप एक आकषर्ण बल काम करेगा जो चुंबक की गति तथा इससे संब( फ्रलक्स के घटने का विरोध करेगा। उपरोक्त उदाहरण में यदि बंद लूप के स्थान पर एक खुला परिपथ उपयोग किया जाए तो क्या होगा? इस दशा में भी, परिपथ के खुले सिरों पर एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होगा। प्रेरित विद्युत वाहक बल की दिशा लेंज के नियम का उपयोग करके ज्ञात की जा सकती है। चित्रा 6ण्6 ;ंद्ध तथा ;इद्ध पर विचार करें। ये प्रेरित धाराओं की दिशा को समझने के लिए एक सरल वििा सुझाते हैं। ध्यान दीजिए कि तथा द्वारा दशार्यी गइर् दिशाएँ प्रेरित धारा की दिशाएँ निरूपित करती हैं। इस विषय पर थोड़े से गंभीर ¯चतन से हम लेंज के नियम की सत्यता को स्वीकार कर सकते हैं। माना कि प्रेरित विद्युत धारा की दिशा चित्रा 6ण्6;ंद्ध में दशार्यी गइर् दिशा के विपरीत है। उस दशा में, प्रेरित धारा के कारण दक्ष्िाणी धु्रव पास आते हुए चंुबक के उत्तरी ध्रुव की ओर होगा।इसके कारण दंड चुंबक वंुफडली की ओर लगातार बढ़ते हुए त्वरण से आक£षत होगा। चुंबक को दिया गया हलका - सा धक्का इस प्रिया को प्रारंभ कर देगा तथा बिना किसी ऊजार् निवेश के इसका वेग एवं गतिज ऊजार् सतत रूप से बढ़ती जाएगी। यदि ऐसा हो सके तो उचित प्रबंध द्वारा एक शाश्वत गतिक मशीन ;चमतचमजनंस उवजपवद उंबीपदमद्ध का निमार्ण किया जा सकता है। यह ऊजार् के संरक्षण नियम का उल्लंघन है और इसीलिए ऐसा नहीं हो सकता। अब चित्रा 6ण्6;ंद्ध में दशार्यी गइर् सही स्िथति पर विचार करें। इस स्िथति में दंड चुंबकचित्रा 6ण्6 प्रेरित विद्युत धारा के कारण एक प्रतिकषर्ण बल का अनुभव करता है। इसलिए चुंबक को गतिलेंज के नियम का चित्राण देने के लिए हमें कायर् करना पड़ेगा। हमारे द्वारा खचर् की गइर् ऊजार् कहाँ गइर्? वह ऊजार् प्रेरित 210 धारा द्वारा उत्पन्न जूल ऊष्मन के रूप में क्षयित होती है। वैद्युतचुंबकीय प्रेरणउदाहरण 6ण्4 चित्रा 6ण्7 में विभ्िान्न आकार के समतल लूप जो चुंबकीय क्षेत्रा में प्रवेश कर रहे हैं अथवा क्षेत्रा से बाहर निकल रहे हैं, दिखाए गए हैं। चुंबकीय क्षेत्रा लूप के तल के अभ्िालंबवत ¯कतु प्रेक्षक से दूर जाते हुए हैं। लेंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रत्येक लूप में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात कीजिए। चित्रा 6ण्7 हल ;पद्ध आयताकार लूप ंइबक में चुंबकीय फ्रलक्स, लूप के चंुबकीय क्षेत्रा के भाग की ओर गति करने के कारण बढ़ता है। प्रेरित धारा पथ इबकंइ के अनुदिश प्रवाहित होनी चाहिए जिससे कियह बढ़ते हुए फ्रलक्स का विरोध कर सके। ;पपद्ध बाहर की ओर गति करने के कारण, त्रिाभुजाकार लूप ंइब में चुंबकीय फ्रलक्स घटता है जिसके कारण पे्रेरित धारा इंबइ के अनुदिश प्रवाहित होती है, जिससे कि यह फ्रलक्स परिवतर्न का विरोध कर सके। ;पपपद्ध चुंबकीय क्षेत्रा से बाहर की ओर गति करने के कारण अनियमित आकार के लूप ंइबक में चुंबकीय फ्रलक्स घटता है जिसके कारण प्रेरित धारा बकंइब के अनुदिश प्रवाहित होती हैजिससे कि यह फ्रलक्स का विरोध कर सके। नोट कीजिए कि जब तक लूप पूरी तरह से चुंबकीय क्षेत्रा के अंदर या इससे बाहर रहता है तब कोइर् प्रेरित धारा उत्पन्न नहीं होती। उदाहरण 6ण्5 ;ंद्ध एक बंद लूप, दो स्िथर रखे गए स्थायी चुंबकों के उत्तरी तथा दक्ष्िाणी धु्रवों के बीच चुंबकीय क्षेत्रा में स्िथर रखा गया है। क्या हम अत्यंत प्रबल चुंबकों का उपयोग करके लूप में धारा उत्पन्न होने की आशा कर सकते हैं। ;इद्ध एक बंद लूप विशाल संधारित्रा की प्लेटों के बीच स्िथर विद्युत क्षेत्रा के अभ्िालंबवत गति करता है। क्या लूप में प्रेरित धारा उत्पन्न होगी ;पद्ध जब लूप संधारित्रा की प्लेटों के पूणर्तः अंदर हो ;पपद्ध जब लूप आंश्िाक रूप से प्लेटों के बाहर हो? विद्युत क्षेत्रा लूप के तल के अभ्िालंबवत है। ;बद्ध एक आयताकार लूप एवं एक वृत्ताकार लूप एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा में से ;चित्रा 6ण्8द्ध क्षेत्रा विहीन भाग में एकसमान वेग अ से निकल रहे हैं। चुंबकीय क्षेत्रा से बाहर निकलते समय, आप उदाहरण 6ण्4 उदाहरण 6ण्5 6ण्6 गतिक विद्युत वाहक बल च्फ स्वतंत्रा रूप से गति कर सकता है। छड़ च्फ को स्िथर वेग अ से बाईं ओर, चित्रा में दशार्ए अनुसार, चलाया जाता है। मानलीजिए कि घषर्ण के कारण किसी प्रकार का ऊजार् का क्षय नहीं हो रहा है। च्फत्ै एक बंद परिपथ बनाता है जिससे घ्िारा क्षेत्रापफल च्फ की गति के कारण परिव£तत होता है। इसे एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा ठ में इस प्रकार रखा जाता है कि इसका तल चुंबकीय क्षेत्रा के अभ्िालंबवत हो। यदि लंबाइर् त्फ त्र ग तथा त्ै त्र सए तो लूप च्फत्ै से घ्िारा चुंबकीय फ्रलक्स Φठ होगा Φठ त्र ठसग चित्रा 6ण्10 भुजा च्फ बाईं ओर गतिमान है जिससे आयताकार क्योंकि ग समय के साथ बदल रहा है, फ्रलक्स Φठ केलूप का क्षेत्रापफल घट जाता है। इस गति के कारण दशार्ए अनुसार परिवतर्न की दर के कारण एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न212 प्रेरित धरा प् उत्पन्न होती है। होगा जिसका मान होगा दृक कठ दृ ठसग कज कज कग त्र दृठस ठसअ ;6ण्5द्धकज जहाँ हमने कगध्कज त्र दृअ लिया है जो कि चालक च्फ की चाल है। प्रेरित विद्युत वाहक बल ठसअ को गतिक विद्युत वाहक बल कहते हैं। इस प्रकार हम चुंबकीय क्षेत्रा को परिव£तत करने की बजायकिसी चालक को गतिमान करके, किसी परिपथ द्वारा घ्िारे चुंबकीय फ्रलक्स में परिवतर्न करके प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न कर सकते हैं। समीकरण ;6ण्5द्ध में दशार्ए गए गतिक विद्युत वाहक बल के व्यंजक को चालक च्फ के स्वतंत्रा आवेशों पर कायर् करने वाले लोरेंज बल की सहायता से भी समझाना संभव है। चालक च्फ में कोइर् यादृच्िछक ;ंतइपजतंतलद्ध आवेश ु पर विचार करें। जब छड़ चाल अ से गति करती है तो आवेश भी चुंबकीय क्षेत्रा ठ में चाल अ से गति करेगा। इस आवेश पर लोरेंज बल का परिमाण ुअठ है तथा इसकी दिशा फ के अनुदिश होगी। प्रत्येक आवेश परिमाण तथा दिशा में, छड़ च्फ में उनकी स्िथति के निरपेक्ष, समान बल का अनुभव करेंगे। आवेश को च् से फ तक ले जाने में किया गया कायर् है, ॅ त्र ुअठस चूँकि प्रति इकाइर् आवेश पर किया गया कायर् ही विद्युत वाहक बल है, अतः ॅ ठसअ ु यह समीकरण छड़ च्फ के सिरों के बीच प्रेरण द्वारा उत्पन्न हुए विद्युत वाहक बल का मान बताती है तथा समीकरण ;6ण्5द्ध के तुल्य है। हम इस बात को जोर देकर कहना चाहते हैं कि हमारी यह प्रस्तुति पूणर्तः यथाथर् नहीं है। परंतु यह किसी एकसमान एवं समय के साथ न बदलने वाले चुंबकीय क्षेत्रा में गतिमान चालक के लिए पैफराडे के नियम का आधर समझने में हमारी सहायता करती है। दूसरी ओर, यह स्पष्ट नहीं होता है कि जब चालक स्िथर हो और चुंबकीय क्षेत्रा परिव£तत हो रहा हो तो इसमें मउ िवैफसे प्रेरित होता है - जो एक ऐसा तथ्य है जो पैफराडे के अनेक प्रयोग द्वारा पुष्ट होता है। स्िथर चालक के लिए इसके आवेशों पर लगने वाला बल, थ् त्र ु ;म् ़ अ ×ठद्ध त्र ुम् ;6ण्6द्ध क्योंकि अ त्र 0 है, अतः आवेश पर लगने वाला कोइर् भी बल केवल विद्युत क्षेत्रा म् के कारण होगा। इसलिए प्रेरित विद्युत वाहक बल या प्रेरित धारा के अस्ितत्व की व्याख्या करने के लिए हमें यह मान लेना चाहिए कि समय के साथ परितवतर्नशील चुंबकीय क्षेत्रा एक विद्युतीय क्षेत्रा भी उत्पन्न करता है। तथापि, साथ ही हम यह भी कहना चाहेंगे कि स्िथर विद्युत आवेशों द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्रा समय के साथ बदलते चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्रों से भ्िान्न गुण रखते हैं। अध्याय 4 में हमने अध्ययन किया कि गतिमान आवेश ;विद्युत धाराद्ध स्िथर चुंबक पर बल/बल युग्म आरोपित कर सकते हैं। इसके विपरीत एक गतिमान दंड चुंबक ;या अिाक व्यापक रूप में कहें तो एक परिवतर्नशील चुंबकीय क्षेत्राद्ध स्िथर आवेश पर एक बल आरोपित कर सकता है। यही पैफराडे कीखोज की मूलभूत महत्ता है। विद्युत एवं चुंबकत्व परस्पर संबंध्ित होते हैं। उदाहरण 6ण्6 एक मीटर लंबी धातु की एक छड़ को 50 चक्कर/संेकड की आवृिा से घुमायागया है। छड़ का एक सिरा वृत्ताकार धात्िवक वलय जिसकी त्रिाज्या 1 मीटर है, के केन्द्र पर तथादूसरा सिरा वलय की परििा पर कब्शे से इस प्रकार जुड़ा है कि छड़ की गति वलय के केन्द्र सेजाने वाले तथा वलय के तल में अभ्िालंबवत अक्ष के परितः है ;चित्रा 6.11द्ध। अक्ष के अनुदिशएक स्िथर तथा एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा 1 ज् सवर्त्रा उपस्िथत है। केन्द्र तथा धात्िवक वलय के बीचविद्युत वाहक बल क्या होगा? 213 गतिक मउ िसंबंध्ी प्रभावी सजीव चित्राणीजजचरूध्ध्दहेपतण्दमजपितउेण्बवउध्मदहसपेीीजउध्प्दकनबजपवदण्ीजउीजजचरूध्ध्ूमइचीलेपबेण्कंअपकेवदण्मकनध्चीलेसमजऋतमेवनतबमेध्इनऋेमउमेजमत2ध्पदकमगण्ीजउस भौतिकी चित्रा 6ण्11 हल प्रथम वििा: जब छड़ घूणर्न करती है तो छड़ में मुक्त इलेक्ट्राॅन लोरेंज बल के कारण बाहरी सिरे की ओर गतिकरते हैं तथा वलय के ऊपर वितरित हो जाते हैं। इस प्रकार, आवेशों के परिणामी पृथक्करण के कारण छड़ के सिरों के बीच एक विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। विद्युत वाहक बल के एक निश्िचत मान के लिए इलेक्ट्राॅनों का और अिाक प्रवाह नहीं होता तथा एक स्थायी दशा पहुँच जाती है। समीकरण ;6.5द्ध का उपयोग करने पर, जब छड़ चुंबकीय क्षेत्रा के लंबवत गतिमान है तो इसकी लंबाइर् कत के आर - पार उत्पन्न विद्युत वाहक बल का परिमाण प्राप्त होगा क ठअ कत अतः, त्त् 2ठत्क ठअ कत ठत कत 0 02 नोट कीजिए कि हमने अ त्र ω त उपयोग किया है। इससे प्राप्त होता है 12ε 1ण्0 2 50 ;1द्ध 2 त्र 157 ट द्वितीय वििाμ विद्युत वाहक बल की गणना करने के लिए हम एक बंद लूप व्च्फ की कल्पना करते हैं जिसमें¯बदु व् तथा च् को प्रतिरोध त् से जोड़ा गया है तथा व्फ घूमती हुइर् छड़ है। प्रतिरोध के आर - पारविभवान्तर प्रेरित विद्युत वाहक बल के बराबर होगा तथा येठ × ;लूप के क्षेत्रापफल परिवतर्न की दरद्धके बराबर होगा। यदि ज समय पर छड़ तथा च् पर वृत्त की त्रिाज्या के बीच का कोण θ है, तो खंड व्च्फ का क्षेत्रापफल प्राप्त होगा त्21 त्2 22 जहाँ पर त् वृत्त की त्रिाज्या है। अतः प्रेरित विद्युत वाहक बल है क121 2क ठत्2 ε त्र ठत् त्र ठत् जक2 2कज 2 क ख्नोट कीजिए रू कज 2, यह व्यंजक प्रथम वििा द्वारा प्राप्त व्यंजक के अनुरूप ही है और हम ε का समान मान पाते हैं।214 उदाहरण 6ण्7 एक पहिया जिसमंे 0ण्5 उ लंबे 10 धात्िवक स्पोक ;ेचवामेद्ध हैं, को 120 चक्र प्रति मिनट की दर से घुमाया जाता है। पहिये का घूणर्न तल उस स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रा के क्षैतिज घटक भ्के अभ्िालंबवत है। उस स्थान पर यदि भ् त्र 0ण्4 ळ है तो पहिये की धुरी ;ंगसमद्ध तथा रिमम्म्के मध्य स्थापित प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा? नोट कीजिए 1 ळ त्र 10दृ4 ज् हल प्रेरित विद्युत वाहक बल त्र ;1ध्2द्ध ω ठ त्2 त्र ;1ध्2द्ध × 4π × 0ण्4 × 10दृ4 × ;0ण्5द्ध2 त्र 6ण्28 × 10दृ5 ट क्योंकि स्पोक के आरपार विद्युत वाहक बल समांतर हैं इसलिए उनकी संख्या का कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता। 6ण्7 ऊजार् दृष्िट: एक परिमाणात्मक अध्ययन अनुच्छेद 6ण्5 के अंतगर्त हमने गुणात्मक विवेचन द्वारा यह दशार्या कि लेंज का नियम ऊजार् संरक्षण सि(ांत के अनुरूप या सुसंगत है। अब हम इसी पक्ष को अिाक ठोस उदाहरण द्वारा देखंेगे। मान लीजिए कि चित्रा 6ण्10 में दशार्ए आयताकार चालक की चल भुजा ;उवअंइसम ंतउद्ध च्फ का प्रतिरोध त है। हमने यह मान लिया है कि अन्य भुजाओं फत्ए त्ै तथा ैच् का प्रतिरोध त की तुलना में नगण्य है। इस प्रकार आयताकार लूप का नेट प्रतिरोध त होगा तथा च्फ की गति से भी यह नहीं बदलेगा। लूप में धारा प् है, प् तठसअ त्र ;6ण्7द्ध त चुंबकीय क्षेत्रा की उपस्िथति के कारण, भुजा च्फ पर एक बल कायर् करेगा। यह बल प् ;स × ठद्ध छड़ के वेग की दिशा के विपरीत बहिमुर्खी नि£दष्ट होगा। इस बल का परिमाण है 22ठसअथ् त्र प् सठ त्र त यहाँ हमने समीकरण ;6ण्7द्ध का उपयोग किया है। नोट कीजिए कि यह बल छड़ के अनुदिश ;धाराके लिए उत्तरदायीद्ध आवेशों के अपवाह वेग ;कतपजि अमसवबपजलद्ध तथा उनके परिणामस्वरूप प्रभावी होने वाले लोरेंज बलों के कारण उत्पन्न होता है। क्योंकि भुजा च्फ को एक स्िथर चाल अ से धकेला जाता है, इस िया में प्रयुक्त शक्ित च् थ्अ22ठसअ2 त्र ;6ण्8द्धत इस कायर् को करने वाला एजेंट यांत्रिाक है। इस यांत्रिाक ऊजार् का क्या हुआ? उत्तर है कि यहयांत्रिाक ऊजार् जूल ऊष्मा के रूप में क्षयित हो गइर् तथा इसका मान है 222 ठसअ 2 ठसअ2 च्श्रप्त त तत 215जो समीकरण ;6ण्8द्ध के सवर्सम है। इस प्रकार भुजा च्फ को चलाने में प्रयुक्त हुइर् यांत्रिाक ऊजार् विद्युतीय ऊजार् में परिव£तत हुइर्;प्रेरित विद्युत वाहक बलद्ध तथा अंततः ऊष्मीय ऊजार् में बदल गइर्।परिपथ में आवेश प्रवाह तथा चुंबकीय फ्रलक्स के परिवतर्न में भी एक रोचक संबंध है। पैफराडे के नियम से, हमने सीखा है कि प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण है ठ ज परंतु, फप्त त ज इसलिए, फ ठ त 216 वैद्युतचुंबकीय प्रेरणठसअ जब प्रेरित विद्युत वाहक बल शून्य नहीं है, तब धाराप्;का परिमाणद्ध प् है।तसमय μ ज चित्रा 6ण्12 ;इद्ध भुजा च्फ को स्िथर गति देने हेतु आवश्यक बलप् सठहोगा। इसकी दिशा बाईं ओर होगी। इसका परिमाण 22ठसअ0 इथ्ग त 02इग इजूल ऊष्मन क्षय है 2च्प्तश्र22 2ठसअ 0 गइ त 02इग इइसी प्रकार का व्यंजक भुजा च्फ के अंदर की ओरग त्र2इसेगत्र 0 तक की गति के लिए प्राप्त होता है। चित्रा 6ण्12 ;इद्ध में प्रद£शत विभ्िान्न राश्िायों के आरेख को देखकर कोइर् भी संपूणर् प्रिया को समझ सकता है। उदाहरण 6ण्8 भौतिकी 6ण्8 भँवर धाराएँ अभी तक हमने चालकों से बने वृत्ताकार लूपों जैसे सुपरिभाष्िात पथों में, प्रेरित हुइर् विद्युत धाराओं के विषय में अध्ययन किया है। लेकिन जब चालकों के स्थूल टुकड़ों को परिवतर्नशील चुंबकीयफ्रलक्स के प्रभाव में रखते हैं तो उनमें भी प्रेरित धराएँ उत्पन्न होती हैं। तथापि, उनके प्रवाह का पैटनर् पानी में चक्कर खाते भँवरों से मिलता है। इस प्रभाव को भौतिकविद चूल पफोको ;1819.1868द्ध ने खोजा तथा इन धाराओं को भँवर धाराएँ कहते हैं। चित्रा 6ण्13 में दशार्ए उपकरण पर विचार करें। इसमें एक ताम्र पिðका को एक शक्ितशाली चुंबक के धु्रवों के बीच सरल लोलक की भाँति दोलित कराते हैं। यह ै देखा गया कि पिðका की गति अवमंदित है तथा वुफछ ही क्षणों में वह चुंबकीय प् क्षेत्रा में विराम अवस्था में आ जाती है। इस परिघटना की व्याख्या हम विद्युत चुंबकीय प्रेरण के आधार पर कर सकते हैं। जब पिðका चुंबकीय ध्रुवों के क्षेत्रा में अंदर और प् बाहर गति करती है तो प‘िका से संब( चुंबकीय फ्रलक्स परिव£तत होता रहता है।छ फ्रलक्स में परिवतर्न प‘िका में भँवर धराएँ प्रेरित करता है। जब पिðका दोलन करते हुए धु्रवों के क्षेत्रा के बीच में प्रवेश करती है तथा जब यह उस क्षेत्रा से बाहर निकलती है तो भँवर धाराओं की दिशा विपरीत होती है। यदि ताँबे की पिðका में चित्रा 6ण्14 में दशार्ए अनुसार आयताकार खाँचे बनाए जाते हैं तो भँवर धाराओं के प्रवाह के लिए उपलब्ध क्षेत्रापफल कम हो जाता है। इस चित्रा 6ण्13 ताम्र पिका जब चुंबकीय क्षेत्रा प्रकार लोलक प‘िका में छिद्र अथवा खाँचे विद्युत चुंबकीय अवमंदन को कम करðमें अंदर बाहर आती - जाती है तो इसमें भँवर देते हैं तथा प‘िका अिाक स्वतंत्रातापूवर्क दोलन करती है। नोट कीजिए कि प्रेरित धराएँ उत्पन्न होती हैं। धाराओं का चुंबकीय आघूणर् ;जो गति का विरोध करता हैद्ध धाराओं द्वारा परिब( क्षेत्रापफल पर निभर्र है ;अध्याय 4 में समीकरणउ त्र प्। का स्मरण कीजिएद्ध। यह तथ्य ट्रांसपफामर्रों की धात्िवक क्रोड में, विद्युत मोटरों तथा दूसरी ऐसी अन्य युक्ितयों में जिनमें किसी धात्िवक क्रोड पर वुुंफडली को लपेटना होता है, भँवर धाराओं को कम करने मेंसहायक है। भँवर धराएँ अवांछनीय हैं क्योंकि ये क्रोड को गमर् करती हैं तथा विद्युत ऊजार्का ऊष्मा के रूप में क्षय करती हंै। धात्िवक क्रोड बनाने के लिए स्तरित धातु ;स्ंउपदंजमकद्ध का उपयोग करके भँवर धाराओं को कम किया जा सकता है। स्तरों को वुफचालक पदाथर्, जैसे लैकर ;संबुनमतद्ध से, पृथक्वृफत करते हैं। स्तरों के तल को चुंबकीय क्षेत्रा के समांतर व्यवस्िथत करना आवश्यक है जिससे कि वे भँवर धाराओं के पथों को आरपार काट सवेंफ। यह प्रबंध भँवर धाराओं की प्रबलता को घटा देता है। क्योंकिविद्युत ऊजार् का ऊष्मा में क्षय विद्युत धारा की प्रबलता के वगर् पर निभर्र है इसलिएऊष्मा - हानि पयार्प्त मात्रा में कम हो जाती है। भँवर धराएँ वुफछ अनुप्रयोगों में उपयोग की जाती हैं, जैसे कृ ;पद्ध रेलगाडि़यों में चुंबकीय ब्रेक मेंμ वुफछ विद्युत चालित रेलगाडि़यों में पटरियों के ऊपर प्रबल विद्युत चुंबक स्िथत होते हैं। जब विद्युत चुंबकों को सियित किया जाता है तो पटरियों में प्रेरित भँवर धराएँ रेलगाड़ी की गति का विरोध करती हैं। क्योंकि यहाँ कोइर् यांत्रिाक संयोजन नहीं है इसलिए ब्रेक के कारण किसी प्रकार के झटके नहीं चित्रा 6ण्14 ताम्र पिð लगेंगे।का में खाँचे बनाने से इसमें भँवर धराओं का प्रभाव ;पपद्ध विद्युत चुंबकीय अवमंदनμ वुफछ धारामापियों की क्रोड स्िथर होती है तथा अचुंबकीय कम हो जाता है। धात्िवक पदाथो± की बनी होती है। जब वुंफडली दोलन करती है तो क्रोड में उत्पन्न होने वाली भँवर धराएँ इसकी गति का विरोध करती हैं तथा वुंफडली को तेजी से218 विरामावस्था में ले आती हैं। ;पपपद्ध प्रेरण भ‘ीμ प्रेरण भ‘ी उच्च ताप उत्पन्न करने के लिए उपयोग की जा सकती है तथा घटक धातुओं को पिघला कर मिश्र धातु तैयार करने के काम आ सकती है। एक वंुफडली में उच्चआवृिा की प्रत्यावतीर् धारा ;ंसजमतदंजपदह बनततमदजद्ध प्रवाहित की जाती है। यह वंुफडली उन धातुओं को घेरे होती है जिनको पिघलाना होता है। धातुओं में उत्पन्न होने वाली भँवर धराएँ उच्च ताप उत्पन्न करती हैं जो उन धातुओं को पिघलाने के लिए पयार्प्त होता है। ;पअद्ध विद्युत शक्ित मीटरμ विद्युत शक्ित मीटर ;अनुरूप प्रकारद्ध में धातु की चमकदार डिस्क भँवर धाराओं के कारण ही घूणर्न करती है। वुंफडली में ज्यावक्रीय ;ेपदनेवपकंससलद्ध परिवतीर् धाराओं से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रों से डिस्क में प्रेरित विद्युत धराएँ उत्पन्न होती हैं। आप अपने घर के बिजली के मीटर में घूणर्न करती चमकदार डिस्क को देख सकते हैं। 6ण्9 प्रेरकत्व एक वुंफडली के निकट रखी दूसरी वुंफडली में फ्रलक्स परिवतर्न से अथवा उसी वुंफडली में फ्रलक्स परिवतर्न से, उस वुंफडली में विद्युत धारा प्रेरित हो सकती है। ये दोनों स्िथतियाँ अगले दो उपखंडोंमें अलग - अलग व£णत की गइर् हैं। तथापि, इन दोनों स्िथतियों में, वुुंफडली में फ्रलक्स धारा के समानुपाती है। अथार्त् Φठ α प् इसके अतिरिक्त यदि समय के साथ वुंफडली की ज्यामिति नहीं बदलती, तब क ठ कप् कज कज समीप - समीप लिपटे छ पेफरों ;जनतदेद्ध वाली वुंफडली के सभी पेफरों से समान चुंबकीय फ्रलक्ससंब( होता है। जब वुंफडली में फ्रलक्स Φठ परिव£तत होता है तो प्रत्येक पेफस प्रेरित विद्युत वाहक बल में योगदान करता है। इसलिए एक पद फ्रलक्स - बंध्ता ;सिनग सपदांहमद्ध का उपयोग होता है जो कि पास - पास लिपटी वुंफडली के लिए छΦठ के बराबर है तथा इस स्िथति में छΦठ प् इस संबंध में समानुपातिक स्िथरांक को प्रेरकत्व कहते हैं। हम देखेंगे कि प्रेरकत्व का मान वुंफडली की ज्यामिति तथा उसके पदाथर् के नैज ;पदजतपदेपबद्ध गुणधमो± पर निभर्र करता है। यह पक्ष 219 छ1 220 धारिता की प्रवृफति के समान है जो समांतर प्लेट संधारित्रा के लिए प्लेट के क्षेत्रापफल तथा प्लेट - पृथक्करण ;ज्यामितिद्ध तथा उनके बीच उपस्िथत माध्यम के परावैद्युतांक ज्ञ ;पदाथर् के नैज गुणधमर्द्ध पर निभर्र करती है। प्रेरकत्व एक अदिश राश्िा है। इसकी विमाएँ ख्ड स्2 ज्दृ2 ।दृ2, हैं जो कि फ्रलक्स की विमाओं तथा धारा की विमाओं के अनुपात द्वारा व्यक्त की जाती हैं। प्रेरकत्व की ैप् मात्राक हेनरी है तथा इसे भ् द्वारा व्यक्त किया जाता है। यह नाम जोसेपफ हेनरी के सम्मान में रखा गया है जिन्होंने इंग्लैंड के वैज्ञानिक पैफराडे से अलग अमेरिका में वैद्युत चंुबकीय प्रेरण की खोज की। 6ण्9ण्1 अन्योन्य प्रेरकत्व चित्रा 6ण्15 में दशार्यी गइर् दो लंबी समाक्षी ;बव.ंगपंसद्ध परिनालिकाओं ;ेवसमदवपकेद्ध जिनकी प्रत्येक की लंबाइर् स है, पर विचार कीजिए। हम अंतः परिनालिका ै1 की त्रिाज्या त1 तथा उसकी इकाइर् लंबाइर् में पेफरों की संख्या को द1 द्वारा व्यक्त करते हैं। बाह्य परिनालिका ै2 के लिए संगत राश्िायाँ क्रमशः ततथा दहैं। मान लीजिए छतथा छक्रमशः वुंफडलियों ैतथा ैमें पेफरों की वुफल2 2 12 12 संख्या है। जब ै2 में धारा प्2 प्रवाहित करते हैं तो यह ै1 में एक चुंबकीय फ्रलक्स स्थापित करती है। हम इसे Φ1 से नि£दष्ट करते हैं। परिनालिका ै1 में संगत फ्रलक्स - बंध्ता है Φ1 त्र ड12प्2 ;6ण्9द्धछ1 ड12 को परिनालिका ै1 का परिनालिका ै2 के सापेक्ष अन्योन्य प्रेरकत्व कहते हैं। इसे अन्योन्य प्रेरक गुणांक भी कहा जाता है। इन सरल समाक्षी परिनालिकाओं के लिएड12 की गणना संभव है। परिनालिकौ2 में स्थापित विद्युत धारा प्2 द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्रा है μ0द2प्2 । वुंफडली ै1 के साथ परिणामी फ्रलक्स - बंध्ता है दप् छ11 दस 1 त12 022 2दद तसप् ;6ण्10द्ध0121 2 जहाँ द1स परिनालिका ै1 में वुफल पेफरों की संख्या है। इस प्रकार, समीकरण ;6ण्9द्ध तथा समीकरण ;6ण्10द्ध से ड त्र μददπत2स ;6ण्11द्ध120121ध्यान दीजिए कि हमने यहाँ पर कोर - प्रभावों को नगण्य मान लिया है तथा चुंबकीय क्षेत्रा μ0द2प्2 को परिनालिका ै2 को लंबाइर् तथा चैड़ाइर् में सवर्त्रा एकसमान माना है। यह ध्यान रखते हुए कि परिनालिका लंबी है, जिसका अथर् है स झझ त2 यह एक अच्छा सन्िनकटन ;ंचचतवगपउंजपवदद्ध है। अब हम विपरीत स्िथति पर विचार करते हैं। परिनालिका ै1 से एक विद्युत धारा प्1 प्रवाहित की जाती है तथा परिनालिका ै2 से फ्रलक्स - बंध्ता है, छ2Φ2त्र ड21 प्1 ;6ण्12द्ध डको परिनालिका ैका परिनालिका ैके सापेक्ष अन्योन्य प्रेरकत्व21 21 कहते हैं। ैमें धारा प्के कारण फ्रलक्स पूरी तरह ैके अंदर सीमित माना जा1 1 1 सकता है क्योंकि परिनालिकाएँ बहुत लंबी हंै। अतः, परिनालिका ै2 के साथ फ्रलक्स - बंध्ता है छ दस त 2 दप् 22 2 1011 दीघर् परिनालिकाएँ। यहाँ पर द2सए ै2 में पेफरों की वुफल संख्या है। समीकरण ;6ण्12द्ध से, त्र μ0द1द2πत2 स ;6ण्13द्धड21 1समीकरण ;6ण्11द्ध तथा समीकरण ;6ण्12द्ध का उपयोग करके हमें प्राप्त होता है ड12 त्र ड21त्र ड ;मानाद्ध ;6ण्14द्ध हमने यह समानता दीघर् लंबाइर् की समाक्षी परिनालिकाओं के लिए दशार्यी है। तथापि, यह संबंध व्यापक रूप से सत्य है। नोट कीजिए कि यदि अंतःपरिनालिका बाह्य परिनालिका से बहुत छोटीहोती ;तथा बाह्य परिनालिका में ठीक प्रकार अंदर रखी होतीद्ध तब भी हम फ्रलक्स ग्रंथ्िाका छ1Φ1 की गणना कर पाते, क्योंकि अंतःपरिनालिका बाह्य परिनालिका के कारण प्रभावी ढंग से एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा में निमज्िजत है। इस स्िथति में, ड12 की गणना सरल होगी। तथापि, बाह्य परिनालिकासे आब( फ्रलक्स की गणना करना अत्यंत कठिन होगा क्योंकि अंतःपरिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्रा बाह्य परिनालिका की लंबाइर् तथा साथ - ही - साथ अनुप्रस्थ काट के आर - पार परिव£तत होगा। इसीलिए इस स्िथति में ड21 की गणना भी अत्यंत कठिन होगी। ऐसी स्िथतियों में ड12त्रड21 जैसी समानता अत्यंत लाभकारी होगी। उपरोक्त उदाहरण की व्याख्या हमने यह मान कर की है कि परिनालिकाओं के अंदर माध्यम वायु है। इसके स्थान पर यदि μ सापेक्ष चुंबकशीलता का माध्यम मौजूद होता तो अन्योन्य प्रेरकत्वत का मान होता ड त्रμπ त2 स त μ0 द1द21 यह जानना भी महत्वपूणर् है कि वुंफडलियों, परिनालिकाओं आदि के युग्म का अन्योन्य प्रेरकत्व उनके पृथक्करण एवं साथ - ही - साथ उनके सापेक्ष दिव्फविन्यास ;वतपमदजंजपवदद्ध पर निभर्र है। उदाहरण 6ण्9 दो संकेन्द्री वृत्ताकार वुंफडलियाँ, एक कम त्रिाज्या त1 की तथा दूसरी अिाक त्रिाज्या तकी, ऐसी कि त ढढ त2ए समाक्षी रखी हैं तथा दोनों के केन्द्र संपाती हैं। इस व्यवस्था के लिए2 1अन्योन्य प्रेरकत्व ज्ञात कीजिए। हल माना कि बाह्य वृत्ताकार वुंफडली में से प्धारा प्रवाहित होती है। वुंफडली के केन्द्र पर चुंबकीय2 क्षेत्रा हैठ त्र μप् ध् 2त। क्योंकि दूसरी समाक्षी वुंफडली की त्रिाज्या अत्यंत अल्प है, उसके अनुप्रस्थ2022 काट क्षेत्रापफल पर ठ2 का मान स्िथर माना जा सकता है। अतः,2Φ1 त्र πत1ठ2 2त01 प्22त2 त्र ड12 प्2 इस प्रकार, 2त01ड12 2त2 समीकरण ;6ण्14द्ध से 0  त12 ड  ड 12 21 2त2 ध्यान दीजिए कि हमने डकी गणना Φके सन्िनकट मान से यह मानते हुए की है कि चुंबकीय12 1 क्षेत्रा ठ2 का मान क्षेत्रापफल π त12 पर एकसमान है। तथापि, हम इस मान को स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि त1 ढढ त2 । 221 222 अब, अनुच्छेद 6ण्2 के प्रयोग 6ण्3 को स्मरण करें। उस प्रयोग में, जब भी वंुफडली ब्2 में धारा परिव£तत होती है, वुंफडली ब्1 में विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। मान लीजिए वंुफडली ब्1 ;माना छ1 पेफरों वालीद्ध में फ्रलक्स Φ1 है, जबकि वंुफडली ब्2 में धारा प्2 है। तब समीकरण ;6ण्9द्ध से हमें प्राप्त होगा छ1Φ1 त्र डप्2 समय के साथ परिवतर्नशील धाराओं के लिए क छ11 क डप् 2 कज कज क्योंकि वंुफडली ब्1 में प्रेरक विद्युत वाहक बल का मान है क छ11 दृ कज हमें प्राप्त होगा, प्क2दृड कज यह दशार्ता है कि किसी वंुफडली में परिवतीर् धारा समीपस्थ वंुफडली में विद्युत वाहक बल प्रेरित कर सकती है। प्रेरक विद्युत वाहक बल का परिमाण धारा परिवतर्न की दर तथा दोनों वंुफडलियों के अन्योन्य प्रेरकत्व पर निभर्र है। 6ण्9ण्2 स्व - प्रेरकत्व पिछले उप - परिच्छेद में हमने एक परिनालिका में बहने वाली धारा के कारण दूसरी परिनालिका मेंउत्पन्न होने वाले फ्रलक्स के बारे में विचार किया। किसी एकल वियुक्त वुंफडली में भी उसी वंुफडलीमें धारा परिव£तत करने पर वंुफडली में होने वाले फ्रलक्स परिवतर्न के कारण, विद्युत वाहक बल पे्ररित करना संभव है। इस परिघटना को स्व - प्रेरण कहते हैं। इस स्िथति में, छ पेफरों वाली वंुफडलीमें फ्रलक्स - बंध्ता, वंुफडली में बहने वाली धारा के समानुपातिक है तथा इसे व्यक्त कर सकते हैं, प्छठ छठ स्प् ;6ण्15द्ध यहाँ समानुपातिक स्िथरांक स् को वंुफडली का स्व - प्रेरकत्व कहते हैं। इसे वुंफडली का स्व - प्रेरण गुणांक भी कहते हैं। जब धारा परिव£तत होती है, वंुफडली से संब( फ्रलक्स भी परिव£तत होता है। समीकरण ;6ण्15द्ध का उपयोग करने पर प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा क छ ठ दृ कज कप् दृस् ;6ण्16द्धकज इस प्रकार, स्व - प्रेरित विद्युत वाहक बल सदैव वंुफडली में किसी भी धारा परिवतर्न ;बढ़ना या घटनाद्ध का विरोध करता है। सरल ज्यामितियों से किसी परिपथ के लिए स्व - पे्ररकत्व की गणना करना संभव है। आइए एक लंबी परिनालिका के स्व - प्रेरकत्व की गणना करें, जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रापफल । तथा लंबाइर् स है, तथा इसी एकांक लंबाइर् में पेफरों की संख्या द है। परिनालिका में प्रवाहित होने वाली धारा प् के कारण चुंबकीय क्षेत्रा ठ त्र μ द प् है ;पहले की भाँति कोर प्रभावों को नगण्य मानते हुएद्ध।0परिनालिका से संब( वुफल फ्रलक्स हैं छठ दस 0दप् । 0द2।स प् यहाँ पर दस पेफरों की वुफल संख्या है। अतः, स्व - प्रेरकत्व है, स् प् 2 0द।स ;6ण्17द्ध यदि हम परिनालिका की अंतःधारा को μ आपेक्ष्िाक चुंबकशीलता वाले पदाथर् से भर देंत ;उदाहरण के लिए नमर् लोहा, जिसकी आपेक्ष्िाक चुंबकशीलता का मान उच्च हैद्ध, तब, स्द2 ;6ण्18द्धत 0 ।स वंुफडली का स्वप्रेरकत्व उसकी ज्यामितीय संरचना तथा माध्यम की चुंबकशीलता पर निभर्र है। स्वप्रेरित विद्युत वाहक बल को विरोधी विद्युत वाहक बल ;इंबा मउ िद्ध भी कहते हैं क्योंकि यह परिपथ में किसी भी धारा - परिवतर्न का विरोध करता है। भौतिक दृष्िट से स्व - प्रेरकत्व जड़त्व का कायर् करता है। यह यांत्रिाकी में द्रव्यमान का विद्युतचुंबकीय अनुरूप है। अतः, धारा स्थापित करने के लिए, विरोधी विद्युत वाहक बल ;εद्ध के विरु( कायर् करना पड़ता है। यह किया गया कायर्चंुबकीय स्िथतिज ऊजार् के रूप में संचित हो जाता है। किसी परिपथ में किसी क्षण धारा प् के लिए कायर् करने की दर है, कॅ प् कज यदि हम प्रतिरोधक क्षयों को नगण्य मान लें तथा केवल प्रेरण्िाक प्रभाव पर ही विचार करें, तब समीकरण ;6ण्16द्ध का उपयोग करने पर, कॅ कप्स्प् कज कज धारा प् स्थापित करने में किया गया वुफल कायर् है, प् ॅ कॅ स्प् कप् 0 अतः, धारा प् स्थापित करने में आवश्यक ऊजार् होगी, 1ॅ स्प् 2 ;6ण्19द्ध 2 यह व्यंजक हमें उ द्रव्यमान के किसी कण की गतिज ऊजार् ;यांत्रिाकद्ध के व्यंजक उअ2ध्2 की याद दिलाता है तथा दशार्ता है कि स्ए उ के अनुरूप है ;अथार्त स् विद्युत जड़त्व है तथा किसी परिपथ में जिसमें यह संयोजित है, धारा के बढ़ने तथा घटने का विरोध करता हैद्ध। दो समीपस्थ वंुफडलियों में साथ - साथ प्रवाहित होने वाली धाराओं की सामान्य स्िथति पर विचारकरें। एक वंुफडली के साथ संब( फ्रलक्स, स्वतंत्रा रूप से विद्यमान दो फ्रलक्सों के योग के बराबर होगा। समीकरण ;6ण्9द्ध निम्न रूप में रूपातंरित हो जाएगी। छडप् डप्11 11 1 12 2 यहाँ ड11 उसी वुंफडली के प्रेरकत्व को निरूपित करता है। अतः, पैफराडे का नियम उपयोग करने पर, कप्1कप्2 1 ड11 ड12 223कज कज ड11 स्व - प्रेरकत्व है तथा इसे स्1 द्वारा लिखा जाता है। इसलिए, कप्1कप्2स्ड11 12 कज कज प्रत्यावतीर् धरा जनित्रा का प्रभावी सजीव चित्राणीजजचरूध्ध्उपबतवण्उंहदमजण्ेिनण्मकनध्मसमबजतवउंहध्रंअंध्हमदमतंजवतध्ंबण्ीजउस उदाहरण 6ण्10 ;ंद्ध परिनालिका में संचित चुंबकीय ऊजार् का व्यंजक परिनालिका के चुंबकीय क्षेत्रा ठए क्षेत्रापफल । तथा लंबाइर् स के पदों में ज्ञात कीजिए। ;इद्ध यह चुंबकीय ऊजार् तथा संधारित्रा मेंसंचित स्िथरवैद्युत ऊजार् किस रूप में तुलनीय है? हल ;ंद्ध समीकरण ;6ण्19द्ध से, चुंबकीय ऊजार् है 12स्प् न्ठ 2 1  ठ 2  स्  क्योंकि परिनालिका वेठ 0दप्  फ लिए, 2 0द  2 12 ठ; द।स द्ध ख्समीकरण ;6ण्17द्ध से,20 0द12ठ।स 20 ;इद्ध प्रति एकांक आयतन चंुबकीय ऊजार् है, न न्ठ ;यहाँ ट आयतन है जिसमें फ्रलक्स विद्यमान हैद्धठट न्ठ ।स ठ2 ;6ण्20द्ध20 हम पहले ही समांतर प्लेट संधारित्रा के एकांक आयतन में संचित स्िथरवैद्युत ऊजार् का संबंधप्राप्त कर चुके हैं ¹अध्याय 2 समीकरण 2.77 देख्िाएह्। 12न 0म् ;2ण्77द्ध2 दोनों दशाओं में ऊजार् क्षेत्रा की तीव्रता के समानुपाती है। समीकरण ;6ण्20द्ध तथा ;2ण्77द्ध विशेष स्िथतियों क्रमशः एक परिनालिका तथा एक समांतर प्लेट संधारित्रा के लिए व्युत्पन्न किए गए हैं। लेकिन वे व्यापक हैं तथा विश्व के किसी भी ऐसे स्थान के लिए सत्य है जिसमें कोइर् चुंबकीय क्षेत्रा अथवा/और विद्युतीय क्षेत्रा विद्यमान है। 6ण्10 प्रत्यावतीर् धारा जनित्रा विद्युत चंुबकीय प्रेरण परिघटना का प्रौद्योगिक रूप से कइर् प्रकार से उपयोग किया गया है। एक असाधारण तथा महत्वपूणर् उपयोग प्रत्यावतीर् धारा ;ंबद्ध उत्पादन है। 100 डॅ सामथ्यर् का आधुनिक प्रत्यावतीर् धारा जनित्रा एक अत्यंत विकसित मशीन है। इस अनुच्छेद में, हम इस मशीन के मूल सि(ांतों का वणर्न करेंगे। इस मशीन के विकास का श्रेय यूगोस्लाव वैज्ञानिक निकोला टेस्ला को जाता है। जैसा कि अनुच्छेद 6ण्3 में संकेत किया गया था, किसी लूप में विद्युत वाहक बल या धारा224 प्रेरित करने के लिए, एक वििा यह है कि लूप के अभ्िाविन्यास में अथवा इसके प्रभावी क्षेत्रापफल वैद्युतचुंबकीय प्रेरण में परिवतर्न किया जाए। जब वंुफडली एक चुंबकीय क्षेत्रा ठ में ध्ुरीवुंफडलीघूणर्न करती है तो लूप का ;क्षेत्रा के अभ्िालंबवतद्ध प्रभावी क्षेत्रापफल । बवे θ है, यहाँ θए । तथा ठ के बीच का कोण है।फ्रलक्स परिवतर्न करने की यह वििा, एक सरल प्रत्यावतीर् धाराजनित्रा का कायर् सि(ांत है। जनित्रा यांत्रिाक ऊजार् को विद्युत ऊजार् में परिव£तत करता है।प्रत्यावतीर् धारा जनित्रा के मूल अवयव चित्रा 6ण्16 में दशार्एगए हैं। इसमें एक वुंफडली होती है जो रोटर शैफ्रट ;तवजमत ेींजिद्ध पर आरोपित होती है। वुंफडली का घूणर्न अक्ष चुंबकीयक्षेत्रा की दिशा के लंबवत है। वुंफडली ;जिसे आमेर्चर कहते हैंद्धको किसी एकसमान चंुबकीय क्षेत्रा में किसी बाह्य साधन द्वारासपीर् यांत्रिाक विध्ि से घूणर्न कराया जाता है। वुंफडली के घूमने से,वलय प्रत्यावतीर्इसमें चुंबकीय फ्रलक्स परिव£तत होता है, जिससे कि वंुफडली मेंएक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है। वंुफडली के सिरों को सपीर्वलयों ;ेसपच तपदहेद्ध तथा बु्रशों ;इतनेीमेद्ध की सहायता से काबर्नएक बाह्य परिपथ से जोड़ा जाता है।जब वुंफडली को एकसमान कोणीय चाल ω से घूणर्न कराया ब्रश जाता है तो चुंबकीय क्षेत्रा सदिश ठ तथा क्षेत्रापफल सदिश । के चित्रा 6ण्16 प्रत्यावतीर् धरा जनित्रा। बीच कोण θ का मान किसी समय ज पर θ त्र ωज है;यह मानते हुए कि जब ज त्र 0 ए θ त्र 0ह्द्ध है। परिणामस्वरूप, वंुफडली का प्रभावी क्षेत्रापफल, जिसमें चुंबकीयक्षेत्रा रेखाएँ होकर गुजरती हैं, समय के साथ परिव£तत होता है। समीकरण;6ण्1द्ध के अनुसार किसी समय ज पर फ्रलक्स हैः Φठ त्र ठ। बवे θ त्र ठ। बवे ωज पैफराडे के नियम से, छ पेफरों वाली घूणीर् वंुफडली के लिए प्रेरित विद्युत वाहक बल होगा क ठ क दृ छ दृ छठ। ;बवे ज द्धकज कज अतः, विद्युत वाहक बल का तात्क्षण्िाक मान है  छठ।  ेपद ज ;6ण्21द्ध यहाँ छठ।ω विद्युत वाहक बल का अिाकतम मान है, जो ेपद ωज त्र ±1 पर प्राप्त होता है। यदि हम छठ।ω को ε0 से दशार्एँ, तब ε त्र ε0 ेपद ωज ;6ण्22द्ध क्योंकि ज्या पफलन ;ेपदम निदबजपवदद्ध का मान ़1 से दृ1 के बीच बदलता है, विद्युत वाहकबल का चिÉ या ध्रुवता समय के साथ परिव£तत होता है। चित्रा 6ण्17 से नोट कीजिए कि जब θ त्र 90ह् या θ त्र 270ह् होता है तो विद्युत वाहक बल अपने चरम मान पर होता है क्योंकि इन¯बदुओं पर फ्रलक्स में परिवतर्न अिाकतम है।क्योंकि धारा की दिशा आवतीर् रूप से परिव£तत होती है इसलिए धारा को प्रत्यावतीर् धारा ;ंबद्ध कहते हैं। क्योंकि ωत्र2πνए समीकरण ;6ण्22द्ध को हम निम्न प्रकार से लिख सकते हैंμ ε त्र ε0ेपद 2π ν ज ;6ण्23द्ध यहाँ, νए जनित्रा की वंुफडली ;आमेर्चरद्ध के परिक्रमण की आवृिा है। ध्यान रख्िाए कि समीकरण ;6ण्22द्ध तथा ;6ण्23द्ध विद्युत वाहक बल का तात्क्षण्िाक मान बतलाते हैं तथा εए ़ε0 तथा दृε0 के बीच आवतीर् रूप से परिव£तत होता है। हम अध्याय 7 में सीखेंगे कि प्रत्यावतीर् वोल्टता तथा धारा का काल औसत मान वैफसे ज्ञात करते हैं। चित्रा 6ण्17 एक चुंबकीय क्षेत्रा में घूणर्न करते तार के लूप में एक प्रत्यावतीर् विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। व्यावसायिक जनित्रों में, आमेर्चर को घुमाने के लिए आवश्यक यांत्रिाक ऊजार् ऊँचाइर् से गिरते हुए पानी द्वारा प्राप्त की जाती है, उदाहरण के लिए, बाँधों द्वारा। इन्हें जल - विद्युत जनित्रा ;ीलकतवमसमबजतपब हमदमतंजवतद्ध कहते हैं। विकल्पतः, कोयला या अन्य स्रोतों का उपयोग करके, पानी को गमर् करके भाप पैदा करते हैं। उच्च दाब पर भाप को आमेर्चर को घुमाने के लिए प्रयोग में लाते हैं। इन्हें तापीय जनित्रा ;जीमतउंस हमदमतंजवतद्ध कहते हैं। कोयले के स्थान पर यदि नाभ्िाकीय ईंधन का प्रयोग किया जाता है तो हमें नाभ्िाकीय शक्ित प्राप्त होती है। आधुनिक जनित्रा 500 डॅ उच्च विद्युत शक्ित उत्पन्न कर सकते हैं, अथार्त् इनसे100 ॅ के 50 लाख बल्ब एक साथ जलाए जा सकते हैं। अिाकांश जनित्रों में वुंफडलियों को अचर रखा जाता है तथा विद्युत चुंबकों को घुमायाजाता है। भारत में जनित्रों में घूणर्न आवृिा 50 भ््र है। वुफछ देशों में, जैसे अमेरिका ;न्ै।द्ध में यहआवृिा 60 भ््र है। उदाहरण 6ण्11 कमला एक स्िथर साइकिल के पैडल को घुमाती है। पैडल का संबंध 100 पेफरों तथा 0ण्10 उ2 क्षेत्रापफल वाली एक वुंफडली से है। वुंफडली प्रति सेवंफड आधा परिक्रमण ;चक्करद्ध कर पाती है तथा यह एक 0ण्01 ज् तीव्रता वाले एकसमान चंुबकीय क्षेत्रा मंे, जो वुंफडली के घूणर्न अक्ष के लंबवत है, रखी है। वुंफडली में उत्पन्न होने वाली अिाकतम वोल्टता क्या होगी? हल यहाँ ित्र 0ण्5 भ््रय छ त्र100ए । त्र 0ण्1 उ2 तथा ठ त्र 0ण्01 ज्। समीकरण ;6ण्21द्ध लगाने पर ε0 त्र छठ। ;2 π νद्धत्र 100 × 0ण्01 × 0ण्1 × 2 × 3ण्14 × 0ण्5त्र 0ण्314 ट अिाकतम वोल्टता 0ण्314 ट है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि विद्युत शक्ित उत्पादन के लिए वैकल्िपक संभावनाओं का पता लगाएँ। 226 सारांश 1ण् क्षेत्रापफल।की किसी सतह को एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा ठमें रखने पर उसमें से गुजरने वालेचुंबकीय फ्रलक्स को निम्न प्रकार परिभाष्िात कर सकते हैं। Φठ त्र ठ। त्र ठ। बवे θयहाँ θ ए ठएवं । के बीच का कोण है। 2ण् पैफराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार छ पेफरे युक्त वुंफडली में प्रेरित विद्युतवाहक बल उससे गुजरने वाले चुंबकीय फ्रलक्स में परिवतर्न की दर के तुल्य होता है कठछ कज यहाँ ΦΒ एक पेफरे से संब( चुंबकीय फ्रलक्स है। यदि परिपथ एक बंद परिपथ हो तो उसमेंएक धारा प् त्र εध्त् स्थापित हो जाती है, जहाँ त् परिपथ का प्रतिरोध है। 3ण् लेंज के नियम के अनुसार, पे्ररित विद्युत वाहक बल की ध्रुवता इस प्रकार होती है कि वहउस दिशा में धारा प्रवाहित करे, जो उसी परिवतर्न का विरोध करे जिसके कारण उसकीउत्पिा हुइर् है। पैफराडे द्वारा निष्पादित व्यंजक में )ण चिÉ इसी बात का द्योतक है। 4ण् यदि एक स लंबाइर् की धात्िवक छड़ को एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा ठ के लंबवत रखें तथा इसेक्षेत्रा के लंबवतअ वेग से चलाएँ तो इसके सिरों के बीच प्रेरित विद्युत वाहक बल ;जिसे गतिकविद्युत वाहक बल कहते हैंद्ध का मान है ε त्र ठस अ 5ण् परिवतीर् चुंबकीय क्षेत्रा के निकट स्िथत धातु ;कोइर् चालकद्ध की वस्तुओं में धारा लूप स्थापितहो जाते हैं। इन लूपों में ऊष्मा के रूप में विद्युत ऊजार् क्षयित होती है। ऐसी धाराओं कोभँवर धराएँ कहते हैं। 6ण् प्रेरकत्व, फ्रलक्स बंध्ता तथा धारा का अनुपात है। इसका मान छΦध्प् होता है। 227 7ण् किसी वंुफडली ;वुंफडली 2द्ध में धारा परिवतर्न निकट स्िथत वुंफडली ;वुंफडली 1द्ध में प्रेरित विद्युतवाहक बल उत्पन्न कर सकता है। इस संबंध को कप्ड 2 1 12 कज द्वारा व्यक्त करते हैं। यहाँ राश्िा ड12 वुंफडली 1 का वुंफडली 2 के सापेक्ष अन्योन्य प्रेरकत्व है। ड21 को भी इसी प्रकार परिभाष्िात किया जा सकता है। इन दो प्रेरकत्वों में एक सामान्यतुल्यता होती है। ड12 त्र ड21 8ण् जब किसी वुंफडली में धारा परिवतर्न होता है तो वह परिवतर्न वंुफडली में एक विरोधी विद्युतवाहक बल को उत्पन्न करता है। इस स्व - प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान निम्नलिख्िातसमीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है: कप्स् कज यहाँ स् वुंफडली का स्व - प्रेरकत्व है। यह वुंफडली के जड़त्व की माप है जो परिपथ में किसीभी धारा परिवतर्न का विरोध करता है। 9ण् किसी लंबी परिनालिका जिसकी क्रोड μ चुंबकशीलता के पदाथर् की है, का स्व - प्रेरकत्वत निम्नलिख्िात समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है, 2 ।सस् त्र μ त μ0 दयहाँ। परिनालिका का अनुप्रस्थ काट, स उसकी लंबाइर् तथाद उसकी इकाइर् लंबाइर् में लपेटोंकी संख्या को व्यक्त करते हैं। 10ण् किसी प्रत्यावतीर् धारा जनित्रा में विद्युत चुंबकीय प्रेरण द्वारा यांत्रिाक ऊजार् को विद्युत ऊजार् मेंरूपांतरित करते हैं। यदि छ पेफरों वाली तथा । अनुप्रस्थ काट वाली वुंफडली एकसमान चुंबकीयक्षेत्रा Β में प्रति सेवंफड ν चक्कर लगाए तो गतिक विद्युत वाहक बल का मान ε त्र छठ। ;2πνद्ध ेपद ;2πνजद्ध द्वारा व्यक्त किया जाता है। यहाँ हमने मान लिया है कि ज त्र 0 ेए पर वुंफडली चुंबकीय क्षेत्राके अभ्िालंबवत है। ठचुंबकीय फ्रलक्स Φॅइ ;वेबरद्ध ख्ड स्2 ज्दृ2 ।दृ1, Φ त्र ठ।ठ विद्युत वाहक बल ;मउद्धि ε ट ;वोल्टद्ध ख्ड स्2 ज्दृ3 ।दृ1, ε त्र क;छ द्धध्क जठ अन्योन्य प्रेरकत्व ड भ् ;हेनरीद्ध ख्ड स्2 ज्दृ2 ।दृ2, εड कध्क प्ज12 21 स्व - प्रेरकत्व स् भ् ;हेनरीद्ध ख्ड स्2 ज्दृ2 ।दृ2, स् कध्कजप् विचारणीय विषय 1ण् विद्युत एवं चुंबकत्व का एक - दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध् है। उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में आस्टेर्ड, ऐम्िपयर एवं अन्य द्वारा किए गए प्रयोगों ने सि( कर दिया कि गतिमान आवेश ;धाराद्धचुंबकीय क्षेत्रा की उत्पिा करते हैं। वुफछ समय पश्चात सन 1830 के आसपास पैफराडे तथा हेनरी द्वारा किए गए प्रयोगों ने स्पष्ट रूप से प्रद£शत किया कि गतिमान चुंबक विद्युत धरा पे्रेरित ;उत्पन्नद्ध करते हैं। गुरुत्वीय, विद्युत चुंबकीय, क्षीण तथा प्रबल नाभ्िाकीय बल एक - दूसरे से संबंध्ित हैं? 2ण् किसी बंद परिपथ में, विद्युत धरा इस प्रकार उत्पन्न होती है जिससे कि यह परिवतीर् चुंबकीयफ्रलक्स का विरोध् कर सके। यह ऊजार् संरक्षण के सि(ांत के अनुरूप है। तथापि, एक खुले228 वैद्युतचुंबकीय प्रेरण परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल इसके सिरों पर उत्पन्न होता है। यह फ्रलक्स परिवतर्न से किस प्रकार संबंध्ित है। 3ण् अनुच्छेद 6ण्5 में गतिक विद्युत वाहक बल की विवेचना की गइर् है। इस अवधरणा का निष्पादनहम गतिमान आवेश पर लगने वाले लोरेंश बल का प्रयोग करते हुए पैफराडे के नियम से भीस्वतंत्रातापूवर्क कर सकते हैं। तथापि, यदि आवेश स्िथर भी हों ¹तथा लोरेंश बल का ु ;अ × ठद्ध पद ियात्मक नहीं हैह् तब भी समय के साथ परिवतीर् चुंबकीय क्षेत्रा के कारण एकप्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। अतः स्िथर चुंबकीय क्षेत्रा में गतिमान आवेश एवं समयके साथ परिवतीर् चुंबकीय क्षेत्रा में स्िथर आवेश पैफराडे के नियम के लिए सममित स्िथति में प्रतीतहोते हैं। यह पैफराडे के नियम के लिए सापेक्षता के सि(ांत की प्रासंगिकता पर ललचाने वालासंकेत देता है। 4ण् जब एक ताम्र पिðका को चुंबक के ध््रुवों के बीच दोलित कराया जाता है तो प‘िका की गति अवमंदित हो जाती है। भँवर धराओं द्वारा अवमंदन बल वैफसे उत्पन्न होता है? अभ्यास 6ण्1 चित्रा 6ण्18 ;ंद्ध से ;द्धि में व£णत स्िथतियों के लिए प्रेरित धरा की दिशा की प्रागुक्ित ;चतमकपबजद्ध कीजिए। उभयनिष्ठ अक्ष उभयनिष्ठ अक्ष धरा नियंत्राक का;दाब वंुफजी तुरंत बंद करने के बाद स्िथतिद्ध समंजन बदलते हुए धरा में एकअचर दर पर कमी ;दाब वुंफजी खोलने के तुरंत बाद की स्िथतिद्ध चित्रा 6ण्18 229 6ण्2 चित्रा 6ण्19 में व£णत स्िथतियों के लिए लेंज के नियम का उपयोग करते हुए प्रेरित विद्युत धराकी दिशा ज्ञात कीजिए। ;ंद्ध जब अनियमित आकार का तार वृत्ताकार लूप में बदल रहा होऋ ;इद्ध जब एक वृत्ताकार लूप एक सीध्े बारीक तार में विरूपित किया जा रहा हो। चित्रा 6ण्19 6ण्3 एक लंबी परिनालिका के इकाइर् सेंटीमीटर लंबाइर् में 15 पेफरे हैं। उसके अंदर 2ण्0 बउ2 का एक छोटा - सा लूप परिनालिका की अक्ष के लंबवत रखा गया है। यदि परिनालिका में बहने वाली धारा का मान 2ण्0 । में 4ण्0 । से 0ण्1 े कर दिया जाए तो धरा परिवतर्न के समय प्रेरित विद्युत वाहक बल कितना होगा? 6ण्4 एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ 8 बउ एवं 2 बउ हैं, एक स्थान पर थोड़ा कटा हुआ है। यह लूप अपने तल के अभ्िालंबवत 0ण्3 ज् के एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा से बाहर की ओर निकल रहा है। यदि लूप के बाहर निकलने का वेग 1 बउ ेदृ1 है तो कटे भाग के सिरों पर उत्पन्न विद्युत वाहक बल कितना होगा, जब लूप की गति अभ्िालंबवत हो ;ंद्ध लूप की लंबी भुजा के ;इद्ध लूप की छोटी भुजा के। प्रत्येक स्िथति में उत्पन्न प्रेरित वोल्टता कितने समय तक टिकेगी? 6ण्5 1ण्0 उ लंबी धतु की छड़ उसके एक सिरे से जाने वाले अभ्िालंबवत अक्ष के परितः 400 तंक ेदृ1 की कोणीय आवृिा से घूणर्न कर रही है। छड़ का दूसरा सिरा एक धत्िवक वलय से संप£कत है। अक्ष के अनुदिश सभी जगह 0ण्5 ज् का एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा उपस्िथत है। वलय तथा अक्ष के बीच स्थापित विद्युत वाहक बल की गणना कीजिए। 6ण्6 एक वृत्ताकार वुंफडली जिसकी त्रिाज्या 8ण्0 बउ तथा पेफरों की संख्या 20 है अपने ऊध्वार्ध्र व्यासके परितः 50 तंक ेदृ1 की कोणीय आवृिा से 3ण्0 × 10दृ2 ज् के एकसमान चुंबकीय क्षेत्रा में घूमरही है। वुंफडली में उत्पन्न अध्िकतम तथा औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान ज्ञात कीजिए।यदि वुंफडली 10 Ω प्रतिरोध् का एक बंद लूप बनाए तो वुंफडली में धरा के अध्िकतम मान कीगणना कीजिए। जूल ऊष्मन के कारण क्षयित औसत शक्ित की गणना कीजिए। यह शक्ित कहाँ से प्राप्त होती है? 6ण्7 पूवर् से पश्िचम दिशा में विस्तृत एक 10 उ लंबा क्षैतिज सीध तार 0ण्30 × 10दृ4 ॅइ उदृ2 तीव्रता वाले पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रा के क्षैतिज घटक से लंबवत 5ण्0 उ ेदृ1 की चाल से गिर रहा है। ;ंद्ध तार में प्रेरित विद्युत वाहक बल का तात्क्षण्िाक मान क्या होगा? ;इद्ध विद्युत वाहक बल की दिशा क्या है? ;बद्ध तार का कौन - सा सिरा उच्च विद्युत विभव पर है? 6ण्8 किसी परिपथ में 0ण्1 े में धरा 5ण्0 । से 0ण्0 । तक गिरती है। यदि औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल 200 ट है तो परिपथ में स्वप्रेरकत्व का आकलन कीजिए। 6ण्9 पास - पास रखे वुंफडलियों के एक युग्म का अन्योन्य प्रेरकत्व 1ण्5 भ् है। यदि एक वुंफडली में 0ण्5 े में धरा 0 से 20 । परिव£तत हो, तो दूसरी वुंफडली की फ्रलक्स बंध्ता में कितना परिवतर्न होगा? 6ण्10 एक जेट प्लेन पश्िचम की ओर 1800 ाउध्ी वेग से गतिमान है। प्लेन के पंख 25 उ लंबे हैं। इनके सिरों पर कितना विभवांतर उत्पन्न होगा? पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रा का मान उस स्थान230 पर 5 × 10दृ4 ज् तथा नति कोण ;कपच ंदहसमद्ध 30° है। वैद्युतचुंबकीय प्रेरण अतिरिक्त अभ्यास 6ण्11 मान लीजिए कि अभ्यास 6ण्4 में उल्िलख्िात लूप स्िथर है किन्तु चुंबकीय क्षेत्रा उत्पन्न करने वाले विद्युत चुंबक में धरा का मान कम किया जाता है जिससे चुंबकीय क्षेत्रा का मान अपने प्रारंभ्िाक मान 0ण्3 ज् से 0ण्02 ज् ेदृ1 की दर से घटता है। अब यदि लूप का कटा भाग जोड़ दें जिससे प्राप्त बंद लूप का प्रतिरोध् 1ण्6 Ω हो तो इस लूप में ऊष्मन के रूप में शक्ित ह्यस क्या है? इस शक्ित का स्रोत क्या है? 6ण्12 12 बउ भुजा वाला वगार्कार लूप जिसकी भुजाएँ ग्एवं ल् अक्षों के समांतर हैं, ग.दिशा में 8 बउ ेदृ1की गति से चलाया जा रहा है। लूप तथा उसकी गति का परिवेश ध्नात्मक्र.दिशा के चुंबकीय क्षेत्रा का है। चुंबकीय क्षेत्रा न तो एकसमान है और न ही समय के साथ नियत है। इस क्षेत्रा की )णात्मक दिशा में प्रवणता 10दृ3 ज् बउदृ1है ;अथार्त )णात्मकग.अक्ष की दिशा में इकाइर् सेंटीमीटर दूरी पर क्षेत्रा के मान में10 दृ3 ज् बउदृ1की वृि होती हैद्ध, तथा क्षेत्रा के मान में 10दृ3 ज् ेदृ1 की दर से कमी भी हो रही है। यदि वुंफडली का प्रतिरोध् 4ण्50 उΩ हो तो प्रेरित धारा का परिमाण एवं दिशा ज्ञात कीजिए। 6ण्13 एक शक्ितशाली लाउडस्पीकर के चुंबक के ध््रुवों के बीच चुंबकीय क्षेत्रा की तीव्रता के परिमाण का मापन किया जाना है। इस हेतु एक छोटी चपटी 2 बउ2क्षेत्रापफल की अन्वेषी वुंफडली ;ेमंतबी बवपसद्ध का प्रयोग किया गया है। इस वंुफडली में पास - पास लिपटे 25 पेफरे हैं तथा इसे चुंबकीय क्षेत्रा के लंबवत व्यवस्िथत किया गया है और तब इसे द्रुत गति से क्षेत्रा के बाहर निकाला जाता है। तुल्यतः एक अन्य विध्ि में अन्वेषी वुंफडली को90° से तेजी से घुमा देते हैं जिससे वंुुफडली का तल चुंबकीय क्षेत्रा के समांतर हो जाए। इन दोनों घटनाओं में वुफल 7ण्5 उब् आवेश का प्रवाह होता है ;जिसे परिपथ में प्रक्षेप धरामापी ;इंससपेजपब हंसअंदवउमजमतद्ध लगाकर ज्ञात किया जा सकता हैद्ध। वुंफडली तथा धरामापी का संयुक्त प्रतिरोध् 0ण्50 Ω है। चुंबक की क्षेत्रा तीव्रता का आकलन कीजिए। 6ण्14 चित्रा 6ण्20 में एक धतु की छड़ च्फ को दशार्या गया है जो पटरियों ।ठ पर रखी है तथा एक स्थायी चुंबक के ध््रुवों के मध्य स्िथत है। पटरियाँ, छड़ एवं चुंबकीय क्षेत्रा परस्पर अभ्िालंबवत दिशाओं में हैं। एक गैल्वेनोमीटर ;धरामापीद्ध ळ को पटरियों से एक स्िवच ज्ञ की सहायता से संयोजित किया गया है। छड़ की लंबाइर् त्र 15 बउए ठ त्र 0ण्50 ज् तथा पटरियों, छड़ तथा धारामापी से बने बंद लूप का प्रतिरोध् त्र 9ण्0 उΩ है। क्षेत्रा को एकसमान मान लें। ;ंद्ध माना वुंफजी ज्ञ खुली ;वचमदद्ध है तथा छड़ 12 बउ ेदृ1की चाल से दशार्यी गइर् दिशा में गतिमान है। प्रेरित विद्युत वाहक बल का मान एवं ध्ु्रवणता ;चवसंतपजलद्ध बताइए। चित्रा 6ण्20 ;इद्ध क्या वुंफजी ज्ञ खुली होने पर छड़ के सिरों पर आवेश का आध्िक्य हो जाएगा? क्या होगा यदि वुंफजी ज्ञ बंद ;बसवेमद्ध कर दी जाए? ;बद्ध जब वुंफजी ज्ञ खुली हो तथा छड़ एकसमान वेग से गति में हो तब भी इलेक्ट्राॅनों पर कोइर् परिणामी बल कायर् नहीं करता यद्यपि उन पर छड़ की गति के कारण चुंबकीय बल कायर् करता है। कारण स्पष्ट कीजिए। ;कद्ध वुंफजी बंद होने की स्िथति में छड़ पर लगने वाले अवमंदन बल का मान क्या होगा? 231 भौतिकी ;मद्ध वुंफजी बंद होने की स्िथति में छड़ को उसी चाल ;त्र12 बउ ेदृ1द्ध से चलाने हेतु कितनी शक्ित ;बाह्य कारक के लिएद्ध की आवश्यकता होगी? ;द्धि बंद परिपथ में कितनी शक्ित का ऊष्मा के रूप में क्षय होगा? इस शक्ित का ड्डोत क्या है? ;हद्ध गतिमान छड़ में उत्पन्न विद्युत वाहक बल का मान क्या होगा यदि चुंबकीय क्षेत्रा की दिशा पटरियों के लंबवत होने की बजाय उनके समांतर हो? 6ण्15 वायु के क्रोड वाली एक परिनालिका में, जिसकी लंबाइर् 30 बउ तथा अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रापफल 25 बउ2तथा वुफल पेफरे 500 हैं, 2ण्5 । धरा प्रवाहित हो रही है। धरा को 10दृ3 े के अल्पकालमें अचानक बंद कर दिया जाता है। परिपथ में स्िवच के खुले सिरों के बीच उत्पन्न औसत विद्युतवाहक बल का मान क्या होगा? परिनालिका के सिरों पर चुंबकीय क्षेत्रा के परिवतर्न की उपेक्षाकर सकते हैं। 6ण्16 ;ंद्ध चित्रा 6ण्21 में दशार्ए अनुसार एक लंबे, सीध्े, तार तथा एक वगार्कार लूप जिसकी एक भुजाकी लंबाइर् ं है, के लिए अन्योन्य प्रेरकत्व का व्यंजक प्राप्त कीजिए। ;इद्ध अब मान लीजिए कि सीध्े तार में 50 । की धरा प्रवाहित हो रही है तथा लूप एक स्िथर वेगअ त्र 10 उध्े से दाईं ओर को गति कर रहा है। लूप में प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिकलन उस क्षण पर कीजिए जबग त्र 0ण्2 उ हो। लूप के लिएं त्र 0ण्1 उ लीजिए तथा यह मान लीजिए कि उसका प्रतिरोध् बहुत अध्िक है। चित्रा 6ण्21 6ण्17 किसी ड द्रव्यमान तथा त्त्रिाज्या वाले एक पहिए के किनारे ;तपउद्ध पर एक रैख्िाक आवेश स्थापितकिया गया है जिसकी प्रति इकाइर् लंबाइर् पर आवेश का मान λ है। पहिए के स्पोक ;ेसवचमद्ध हलके एवं वुफचालक हैं तथा वह अपनी अक्ष के परितः घषर्ण रहित घूणर्न हेतु स्वतंत्रा है जैसाकि चित्रा 6ण्22 में दशार्या गया है। पहिए के वृत्तीय भाग पर, रिम के अंदर एकसमान चुंबकीयक्षेत्रा विस्तरित है। इसे इस प्रकार परिभाष्िात किया गया है,ठ त्र दृ ठ0 ा ;त≤ंय ं ढ त्द्धत्र 0 ;अन्यथाद्ध चुंबकीय क्षेत्रा को अचानक ‘आॅप़्ाफ’ ;ेूपजबीमक वद्धिि करने के पश्चात, पहिए का कोणीय वेगज्ञात कीजिए। चित्रा 6ण्22 232

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