5ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध 5ण्1ण्1 किसी बिंदु पर एक पफलन का सांतत्य मान लीजिए कि वास्तविक संख्याओं के किसी उपसमुच्चय पर किोइर् वास्तविक पफलन है तथा यह भी मान लीजिए कि बपफलन विेफ प्रांत में स्िथत एक बिंदु है। तब एिबिंदु बपर संतत होता है, यदि सपउ ;िद्ध गत्रि ;द्ध ब गब→ अध्िक सुस्पष्ट रूप से, यदि गत्र बपर पफलन के वाम पक्ष की सीमा, दक्ष्िाण सीमा तथा पफलन के मान का अस्ितत्व हो और ये परस्पर बराबर हों, अथार्त् सपउ ;िद्ध ग;िद्ध ब सपउ ;िद्ध ग गब गब तो किो गत्र बपर संतत कहा जाता है। 5ण्1ण्2 एक अंतराल में सांतत्य ;पद्ध एिक खुले अंतराल ;ंए इद्ध में संतत कहा जाता है, यदि वह इस अंतराल में प्रत्येक बिंदु पर संतत हो। ;पपद्ध एिक बंद अंतराल ख्ंए इ, में संतत कहा जाता है, यदि ऽ अिंतराल ;ंए इद्ध में संतत हो। ऽ सपउ ़ ;िगद्ध त्र ;िंद्धऽ सपउ ;िगद्ध त्र ;िइद्धग→ंग→इदृ 5ण्1ण्3 सांतत्य का ज्यामितीय अथर् ;पद्ध ग त्र ब पर पफलन िसंतत होगा, यदि बिंदु ; ए;द्धब द्धब िपर इस पफलन के आलेख में कोइर् विच्छेदन न हो। ;पपद्ध एक अंतराल में कोइर् पफलन संतत कहा जाता है, यदि इस संपूणर् अंतराल में उस पफलन के आलेख में कोइर् विच्छेदन न हो। 5ण्1ण्4 असांतत्य पफलन िबिंदु ग त्र ं पर निम्नलिख्िात स्िथतियों में से किसी में भी असंतत होगाः ;पद्ध सपउ ि;गद्ध और सपउ ि;गद्ध का अस्ितत्व है, परंतु ये बराबर नहीं हैं।ग→ं− ग→ं़ ;पपद्ध सपउ − ि;गद्ध और सपउ ़ ि;गद्ध के अस्ितत्व बराबर हैं, परंतु इनका मान ि;ंद्ध के बराबरग→ंग→ंनहीं हैं। ;पपपद्ध ि;ंद्ध परिभाष्िात नहीं है। 5ण्1ण्5 वुफछ सामान्य पफलनों का सांतत्य पफलन ि;गद्ध अंतराल जिसमें िसंतत है 1ण् अचर पफलन, अथार्त् ि;गद्ध त्र ब 2ण् तत्समक पफलन, अथार्त् ि;गद्ध त्र ग त् 3ण् बहुपद पफलन, अथार्त् ि;गद्धत्र ं0 गद ़ ं1 गददृ1 ़ ण्ण्ण् ़ ंग ़ ं ददृ1 द 4ण् द्य ग दृ ं द्य ;दृ ∞ ए ∞ द्ध 5ण् गदृदए द एक ध्नात्मक पूणार्ंक है 6ण् च ;गद्ध ध् ु ;गद्धए जहाँ च ;गद्ध और ु ;गद्ध चर ग में बहुपद हैं 7ण् ेपद गए बवे ग ;दृ ∞ ए ∞ द्ध दृ क्ष्0द्व त् दृ क्ष् ग रू ु ;गद्ध त्र 0द्व त् 8ण् जंद गए ेमब ग त्दृ क्ष् ;2 द ़ 1द्ध π 2 रू द ∈ र्द्व 9ण् बवज गए बवेमब ग त्दृ क्ष् ;दπ रू द ∈ र्द्व 10ण् मग त् 11ण् सवह ग ;0ए ∞ द्ध 12ण् अपने संगत प्रांतों में प्रतिलोम त्रिाकोणमितीय पफलन अथार्त् ेपददृ1 गए बवेदृ1 ग इत्यादि। 5ण्1ण्6 संयोजित पफलनों का सांतत्य मान लीजिए कि िऔर ह वास्तविक मानों वाले ऐसे पफलन हैं कि ;विहद्ध बिंदु ं पर परिभाष्िात है। यदि ं पर ह संतत है तथा ह ;ंद्ध पर िसंतत है, तो ;विहद्ध बिंदु ं पर संतत होता है। 5ण्1ण्7 अवकलनीयता ि;गीद्ध ग़− ि;द्ध ि′ ;गद्ध त्र सपउ ए जहाँ भी सीमा का अस्ितत्व हो, से परिभाष्िात पफलन को ग पर िी→0 ी के अवकलज के रूप में परिभाष्िात किया जाता है। दूसरे शब्दों में हम कहते हैं कि कोइर् पफलन िअपने ि;बीद्ध ब़− ि;द्ध प्रांत में किसी बिंदु ब पर अवकलनीय होता है, यदि सपउ ए जिसे वाम अवकलज−ी→0 ी ि;बीद्ध ब़− ि;द्ध कहा जाता है और स् ि′ ;बद्ध से व्यक्त किया जाता है तथा सपउ ए जिसे दक्ष्िाणी→0़ ी अवकलज कहा जाता है और त् ि′ ;बद्ध से व्यक्त किया जाता है, दोनों ही परिमित हों तथा परस्पर बराबर हों। ;पद्ध पफलन ल त्र ि;गद्ध को एक खुले अंतराल ;ंए इद्ध में अवकलनीय कहा जाता है, यदि वह ;ंए इद्ध के प्रत्येक बिंदु पर अवकलनीय होता है। ;पपद्ध पफलन ल त्र ि;गद्ध को एक बंद अंतराल ख्ंए इ, में अवकलनीय कहा जाता है, यदि त् ि′ ;ंद्ध और स् ि′ ;इद्ध का अस्ितत्व हो तथा ;ंए इद्ध के प्रत्येक बिंदु के लिए ि′ ;गद्ध का अस्ितत्व हो। ;पपपद्ध प्रत्येक अवकलनीय पफलन संतत होता है, पंरतु इसका विलोम सत्य नहीं है। 5ण्1ण्8 अवकलजों का बीजगण्िात यदि न और अ चर ग के पफलन हैं, तो कन कअ; ±अद्ध कअ अ −कन कनकअक कन न⎛⎞;पद्ध त्र± ;पपद्ध ;द्धनअ त्रन ़अ ;पपपद्ध कन त्रकग कगकग कगकगकग कग कग⎜⎟कग ⎝⎠अअ2 5ण्1ण्9 शृंखला नियम पफलनों के संयोजन को अवकलित करने के लिए एक नियम है। मान लीजिए कज कअ क िकअकज कि ित्र अवन । यदिज त्र न ;गद्ध तथा और दोनों का ही अस्ितत्व है तो त्र ण् ।कग कज कग कजकग 5ण्1ण्10 वुफछ मानक अवकलज ;अपने उपयुक्त प्रांतों मेंद्ध निम्नलिख्िात हैंः क दृ1 1 क दृ1 −1;ेपद गद्ध त्र ;बवे गद्ध त्र1ण् 2ण्कग 2 कग 21−ग 1−ग क दृ1 1 क दृ1 −13ण् ;जंद गद्ध त्र 2 4ण् ;बवज गद्ध त्र 2कग 1़ग कग 1़ग क −1क ;ेमबदृ1गद्ध त्र 1ए ग झ1 ;बवेमब दृ1गद्ध त्र ए ग झ15ण् 6ण्कग कगगग2 −1 गग2 −1 5ण्1ण्11 चरघातांकी और लघुगणकीय पफलन ;पद्ध मान लीजिए ध्नात्मक आधर इ झ 1वाला चरघातांकी पफलन ल त्र ि;गद्ध त्र इग है। इसका प्रांत सभी वास्तविक संख्याओं का समुच्चय त् है तथा परिसर सभी ध्नात्मक वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है। आधर 10 वाला चरघातांकी पफलन सामान्य चरघातांकी पफलन कहलाता है तथा आघार म वाला चरघातांकी पफलन प्रावृफतिक चरघातांकी पफलन कहलाता है। ;पपद्ध मान लीजिए कि इ झ 1ए यदि इगत्रं तो आधर इ पर ं के लघ्ुागणक, ग होता है। इसे सवहइं त्र ग द्वारा व्यक्त किया जाता है। यदि आधर इ त्र 10 हो, तो इसे सामान्य लघुगणक कहा जाता है तथा यदि आधर इ त्र म हो, तो इसे प्रावृफतिक लघुगणक कहा जाता है। सवह ग आधर दृ म पर लघुगणक पफलन को व्यक्त करता है। लघुगणकीय पफलन का प्रांत सभी ध्नात्मक वास्तविक संख्याओं का समुच्चय त़् है तथा इसका परिसर सभी वास्तविक संख्याओं समुच्चय त् है। ;पपपद्ध किसी भी आधर इ झ 1 के लिए, लघुगणकीय पफलन के गुण नीचे लिखे जा रहे हंैः सवह बग 1ण् सवहइ ;गलद्ध त्र सवहइग ़ सवहइल य ग झ 0य ल झ 0 4ण् सवह इग त्र ए जहाँब झ 1 हैं।सवह बइ ⎛⎞ 1ग त्र2ण् सवहइ ⎜⎟त्र सवहइग दृ सवहइल 5ण् सवहइग ल सवह ⎝⎠ गइ 3ण् सवहगद त्र द सवह ग 6ण् सवहइ त्र 1 और सवह 1 त्र 0इइ इइकमग ग;पअद्ध ग के सापेक्ष मग का अवकलज मग है, अथार्त् कग ;द्धम है। ग के सापेक्ष ;सवह गद्ध का 1 क 1 गअवकलज है, अथार्त् ;सवह द्ध है।ग कगग 5ण्1ण्12 ि;गद्ध त्र ;न ;गद्धद्धअ;गद्धए के रूप के पफलनों को अवकलित करने के लिए, लघुगणकीय अवकलन एक सशक्त तकनीक है जहाँ िऔर न दोनों का, इस तकनीक का वुफछ अथर् होने के लिए, ध्नात्मक पफलन होना आवश्यक है। 5ण्1ण्13 किसी पफलन का एक अन्य पफलन के सापेक्ष अवकलन मान लीजिए कि न त्र ि;गद्ध और अ त्र ह ;गद्ध चर ग के दो पफलन हैं। तब, ह ;गद्ध के सापेक्ष ि;गद्ध का कनअवकलज ज्ञात करने के लिए, अथार्त् ज्ञात करने के लिए, हम सूत्राकअ कन कन कगत्र कअ कअ का उपयोग करते हैं। कग 5ण्1ण्14 द्वितीय कोटि अवकलज ककल कग कग 2 2 क ल कग , पफलन ल का ग के सापेक्ष द्वितीय कोटि अवकलज कहलाता है। यदि ल त्र ि;गद्ध हो, तो इसे ल′′ या लसे व्यक्त करते हैं।2 5ण्1ण्15 रोले का प्रमेय मान लीजिए कि िरू ख्ंए इ, त् अंतराल ख्ंए इ, पर संतत और ;ंए इद्ध पर अवकलनीय इस प्रकार है कि ि;ंद्ध त्र ि;इद्ध, जहाँ ं और इ कोइर् वास्तविक संख्याएँ हैं। तब ;ंए इद्ध में न्यूनतम एक बिंदु ब का अस्ितत्व इस प्रकार है कि ि′ ;बद्ध त्र 0 । ज्यामितीय रूप से, रोले का प्रमेय यह सुनिश्िचत करता है कि वक्र ल त्र ि;गद्ध पर न्यूनतम एक बिंदु ऐसा है कि जिस पर वक्र की स्पशर् रेखा ग.अक्ष के समांतर है ;बिंदु का भुज ;ंए इद्धमें स्िथत हैद्ध। 5ण्1ण्16 माध्यमान प्रमेय ;लग्रंाजद्ध मान लीजिए कि िरू ख्ंए इ, त् अंतराल ख्ंए इ, पर एक संतत पफलन है तथा ;ंए इद्ध पर अवकलनीय ;िद्धइ ;द्ध ंि है। तब, ;ंए इद्ध में कम से कम एक बिंदु बऐसा है कि ि ;बद्ध त्र होता है।इं ज्यामितीय रूप से, माध्य मान प्रमेय यह कहती है कि ;ंए इद्ध में न्यूनतम एक ऐसेे बिंदु बका अस्ितत्व है कि बिंदु ;बए ;िबद्धद्ध पर स्पशर् रेखा बिंदुओं ;ंए ;िंद्ध और ;इए ;िइद्धद्ध को मिलाने वाली रेखाखंड के समांतर होती है। 5ण्2 हल उदाहरणलघु उत्तरीय ;ैण्।ण्द्ध उदाहरण 1 अचर ाका मान ज्ञात कीजिए ताकि पफलन ,ि गत्र 0 पर संतत हो, जहाँ ⎧ ⎪⎪1दृ बवे4 गगित्र 0 8ग2;द्ध ⎨ ए ग≠ है।⎪ ⎪ाए गत्र0⎩ सपउ हल यह दिया है कि पफलन ,ि गत्र 0 पर संतत है। अतः, ग→0 ;िगद्ध त्र ;ि0द्ध है। 1दृ बवे4 ग⇒ सपउ 2 त्र ा ग→0 8ग 2ेपद 2 2ग⇒ सपउ त्र ा ग→0 8ग2 ⎛ ेपद 2 ग⎞2 ⇒ सपउ ⎜ ⎟त्र ा ग→0 ⎝ 2ग ⎠ ⇒ ात्र 1 अतः, यदि ,ि गत्र 0 पर संतत है, तो ाका मान 1 होगा। उदाहरण 2 पफलन ;िगद्ध त्र ेपद गण् बवे गके सांतत्य की चचार् कीजिए। हल क्योंकि ेपद गऔर बवे गसंतत पफलन हैं तथा दो संतत पफलनों का गुणनपफल एक संतत पफलन होता है, इसलिए ;िगद्ध त्र ेपद गण् बवे गएक संतत पफलन है। ⎧ ग3 ़ ग2 दृ16 ग़ 20 ⎪ ए ग≠ 2 उदाहरण 3 यदि गि;द्ध त्र⎨ ;दृ 2द्ध 2 गत्र 2 पर संतत है, तो ाका मान ज्ञातग ⎪ ागत्र 2⎩ कीजिए। हल ;ि2द्ध त्र ादिया है। ग3 ़ ग2 दृ16 ग़ 20 अब, सपउ गित्र सपउ गि त्र सपउ ;द्ध ;द्ध ग→2दृ ग→2़ ग→2 ;दृ2द्ध 2ग ;ग 5द्ध; गदृ 2द्ध 2 त्र सपउ 2 सपउ; ग 5द्ध 7 ग 2 ग 2;दृ2द्ध ग क्योंकि गत्र 2 पर सिंतत है, इसलिए हमें प्राप्त होता हैः सपउ ;िद्ध गत्र ;ि2द्ध ग→2 ⇒ ात्र 7 ⎧ 1⎪गेपद ए ग≠ 0;द्ध त्र⎨ गउदाहरण 4 दशार्इए कि गि द्वारा परिभाष्िात पफलन एि गत्र 0 पर संतत है।⎪ 0ए गत्र0⎩ हल गत्र 0 पर, वाम पक्ष की सीमा नीचे दिए अनुसार प्राप्त होती है - गि सपउ सपउ ;द्ध त्रगेपद 1 त्र 0 ख्क्योंकि दृ1 ढ ेपद1 ढ 1,दृदृ गगग→0 ग→0 गिइसी प्रकार, सपउ ;द्ध सपउ गेपद 1 0 है। साथ ही, ;ि0द्ध त्र 0 है।ग 0 ग 0 गइस प्रकार, सपउ गि सपउ गि ;ि0द्ध 0दृ;द्ध ;द्ध है। अतः, गत्र 0 पर पफलन सिंतत है।गग 0 1उदाहरण 5 ;िगद्ध त्र गदृ1 दिया है। संयोजित पफलन ल त्र ख्ि;िगद्ध, में असंतत के बिंदु ज्ञात कीजिए। हल हम जानते हैं कि पफलन ;िगद्ध त्र ग 1दृ1 बिंदु गत्र 1 पर असंतत है। अब ग 1के लिए, 1 गदृ1 ;ि;िगद्धद्ध त्र ि1 त्र 1 2दृ गदृ1गदृ1 गदृ1 जो गत्र 2 पर असंतत है। अतः वाँछित असंतत बिंदु गत्र 1 और गत्र 2 हैं। उदाहरण 6 मान लीजिए कि सभी ग∈ त् के लिए, ;िगद्ध त्र गगतो। गत्र 0 पर, ;िगद्ध की अवकलजता की चचार् कीजिए। ⎧ ग2ए यदि ग ≥ 0⎪गिहल हम िको पुनः निम्नलिख्िात रूप में लिख सकते हैः ;द्ध त्र⎨ ⎪−ग2ए यदि ग ढ0⎩ ि;0 ़ ीद्धदृ ि;0द्ध दृी2 दृ0 अब, स् ि′ ;0द्ध त्र सपउ त्र सपउ त्र सपउ ी त्र 0 दृदृ −ी→0 ीी→0 ीी→0 ि;0 ़ ीद्धदृ ि;0द्ध ी2 दृ0 तथा त् ि′ ;0द्ध त्र सपउ त्र सपउ त्र सपउ ी त्र 0 ़ ़−ी→0 ीी→0 ीी→0 क्योंकि वाम अवकलज और दक्ष्िाण अवकलज दोनों बराबर हैं अतः ग त्र 0 पर िअवकलनीय है। उदाहरण 7 को ग के सापेक्ष अवकलित कीजिए। हल मान लीजिए कि ल त्र जंद ग है। शृंखला नियम का प्रयोग करने पर, हम प्राप्त करते हैंः कल 1 क ण् ;जंद गद्धकग कग2जंद ग क1 ण्ेमब 2 ग ; गद्धत्र कग2जंद ग 11 ;ेमब2 गद्धत्र 2 ग2जंद ग कलउदाहरण 8 यदि ल त्र जंद;ग ़ लद्ध है, तो ज्ञात कीजिए।कग हल ल त्र जंद ;ग ़ लद्ध दिया है। दोनों पक्षों को ग के सापेक्ष अवकलित करने पर कल 2केमब ; गलद्ध;गलद्धकग कग कल त्र ेमब2 ;ग ़ लद्ध 1 कग कलया ख्1 दृ ेमब2 ;ग ़ ल, कग त्र ेमब2 ;ग ़ लद्ध कल ेमब 2 ;गलद्धअतः, 2 त्र दृ बवेमब2 ;ग ़ लद्धकग 1ेमब ;गलद्ध कल लगउदाहरण 9 यदि मग ़ मल त्र मग़ल दिया है, तो सि( कीजिए कि कग त्र−म − है। हल मग ़ मल त्र मग़ल दिया है। दोनों पक्षों को ग के सापेक्ष अवकलित करने पर कलकल कलत्र मग़लमग ़ मल 1 कग या ;मल दृ मग़लद्ध त्र मग़ल दृ मग कग कग गलग गलगकल म दृ म ममम लदृ मजिसकेपफलस्वरूप लगल लगल ग ण्कगमम म मम 3गग3 ⎞ 1 कल⎛− 1ढग ढउदाहरण 10 यदि ल त्र जंददृ1 ⎜ 2 ⎟ए− है, तो ज्ञात कीजिए।13ग 33 कग⎝− ⎠ हल ग त्र जंद रख्िाए, जहाँ −πढθढ π 66 ⎛3जंद θ−जंद 3 θ⎞ अतः ल त्र जंददृ1 ⎜− 2 ⎟13जंद θ⎝⎠ त्र जंददृ1 ;जंद3 द्ध त्र 3 ;क्योंकि 23 2द्ध त्र 3जंददृ1ग कल 3 इसलिए, त्र 2ण्कग 1 ग 2 कलउदाहरण 11 यदि ल त्र ेपददृ1 ग 1 गग 1 ग और 0 ढ ग ढ 1 है, तो ज्ञात कीजिए।कग हल हमें प्राप्त हैः ल त्र ेपददृ1 ग 1 गग 1 ग2 है, जहाँ 0 ढ ग ढ 1 ग त्र ेपद। और ग त्र ेपदठ रखने परः ल त्र ेपददृ1 ेपद । त्र ेपददृ1 ेपद।बवेठ ेपदठबवे। त्र ेपददृ1 ेपद;। ठद्ध त्र । दृ ठ इस प्रकार, ल त्र ेपददृ1 ग दृ ेपददृ1 ग ग के सापेक्ष अवकलित करने पर, कल 11 क ण् गकग 22 कग1 ग 1 ग 11 कलउदाहरण 12 यदि ग त्र ं ेमब3 और ल त्र ं जंद3 है, तो पर ज्ञात कीजिए।3कग हल हमें ग त्र ं ेमब3 और ल त्र ं जंद3 प्राप्त है। के सापेक्ष अवकलित करने पर, कग 2 क 33ंेमब ;ेमब द्ध 3ंेमब जंद कक कल 2 क 22तथा त्र3ं जंद θ ;जंद θद्ध त्र3ं जंद θेमब θ कθ कθ कल कल क 3ं जंद 2 ेमब 2 जंद 3 ेपद इस प्रकार, कग 3ेमब जंद ेमब कग ं क ⎛ कल ⎞π π 3अतः, ⎜⎟ंज θ पर त्र ेपद त्र ⎝ कग ⎠ 3 32 कल सवह ग उदाहरण 13 यदि गल त्र मगदृल है, तो सि( कीजिए कि त्र 2गकग;1 सवहद्ध हल हमें प्राप्त हैः गल त्र मगदृल दोनों पक्षों का लघुगणक लेने पर, ल सवह ग त्र ग दृ ल ⇒ ल ;1 ़ सवह गद्ध त्र ग ग अथार्त् लत्र 1सवह दोनों पक्षों को ग के सापेक्ष अवकलित करने परग 1;1 सवह गद्धण्1 गकल ग सवह ग कग ;1 सवह गद्ध2 ;1 सवह गद्ध2 2 बवे ग उदाहरण 14 यदि ल त्र जंदग ़ ेमबग है, तो सि( कीजिए कि त्र 2 है।कल कग2 ;1 ेपद गद्ध हल हमें प्राप्त हैः ल त्र जंदग ़ ेमबग ग के सापेक्ष अवकलित करने पर, कल त्र ेमब2ग ़ ेमबग जंदगकग1 ेपद ग 1ेपद ग 1ेपद़ ग त्र त्रत्र 22 2बवे ग बवे गबवे ग ;1़ेपद गद्ध;1−ेपद गद्ध कल 1 इस प्रकार, त्र अब, ग के सापेक्ष पुनः अवकलित करने परकग1दृेपद ग 2 दृदृबवे गकल बवे ग त्र2 2कग2 ;1दृ ेपद गद्ध ;1दृ ेपद गद्ध 3 उदाहरण 15 यदि ि;गद्ध त्र द्यबवे गद्य है, तो ि′ ज्ञात कीजिए।4 हल जब 2ढ ग ढ π तो बवेग ढ 0ए जिससे द्यबवे गद्य त्र दृ बवे गए अथार्त् ि;गद्ध त्र दृ बवे ग है। ि′ ;गद्ध त्र ेपद ग 3 31 अतः ि′ त्र ेपद त्र 4 42 उदाहरण16 यदि ि;गद्ध त्र द्यबवे ग दृ ेपदगद्य है, तो ि′ ज्ञात कीजिए।6 π हलजब 0 ढ गढ 4 है, तो बवे गझ ेपद गहोता है, जिससे बवे गदृ ेपद गझ 0 है, अथार्त् ;िगद्ध त्र बवे गदृ ेपद गहै।ि ;गद्ध त्र दृ ेपद गदृ बवे ग अतः ि त्र दृ ेपद दृ बवे त्र − 1 ;1़ 3द्ध है।6 662 उदाहरण17 0ए 2 में पफलन ;िगद्ध त्र ेपद 2गके लिए रोले के प्रमेय का सत्यापन कीजिए। हल 0ए 2 में पफलन ;िगद्ध त्र ेपद 2गपर विचार कीजिए। ध्यान दीजिए किः ;पद्ध 0ए में पफलन सिंतत है, क्योंकि एिक साइन ;ेपदमद्ध पफलन है, जो सदैव संतत2 होता है। ⎛ π⎞;पपद्ध 0ए में ि ;गद्ध त्र 2बवे 2गका अस्ितत्व है। अतः, ⎜0ए ⎟ में अिवकलनीय है।2 ⎝ 2 ⎠ ;पपपद्ध ;ि0द्ध त्र ेपद0 त्र 0 है तथा ि2 त्र ेपदπ त्र 0 है। इससे ;ि0द्ध त्र ि2 है। यहाँ रोले के प्रमेय के प्रतिबंध् संतुष्ट हो जाते हैं। अतः, कम से कम एक ऐसे बिन्दु ब∈ 0ए 2 का अस्ितत्व है ताकि ि;बद्ध त्र 0 है। इस प्रकार, 2 बवे 2बत्र 0 ⇒ 2बत्र ⇒ बत्र 24 उदाहरण18 ख्3ए 5, में पफलन ;िगद्ध त्र ;गदृ 3द्ध ;गदृ 6द्ध ;गदृ 9द्ध के लिए माध्यमान प्रमेय का सत्यापन कीजिए। हल ;पद्ध ख्3ए 5, में पफलन सिंतत है, क्योंकि बहुपद पफलनों का गुणनपफल एक बहुपद है, जो संतत है।;पपद्ध ;3ए 5द्ध में ि;गद्ध त्र 3ग2 दृ 36ग़ 99 का अस्ितत्व है। अतः, यहाँ ;3ए 5द्ध में अवकलनीय है। इस प्रकार, माध्यमान प्रमेय के प्रतिबंध् संतुष्ट हो जाते हैं। अतः कम से कम एक ऐसे बिंदु ब∈ ;3ए 5द्ध के लिए - ;ि5द्ध ;ि3द्ध;द्धबि 53 80⇒ 3ब2 दृ 36ब ़ 99 त्र त्र 4213⇒ ब त्र 6 3 13अतः, ब 63 ;क्योंकि दूसरा मान अमान्य है।द्ध दीघर् उत्तरीय उदाहरण ;स्ण्।ण्द्ध 2बवे ग 1 उदाहरण19 यदि ि;गद्ध त्र ए ग है, तो िका ऐसा मान ज्ञात कीजिए किबवज ग 14 4 ग त्र 4 पर ि;गद्ध संतत बन जाए। 2बवे ग 1 गहल दिया है ि;गद्ध त्र एबवज ग 14 2बवे ग 1सपउ गि; द्ध सपउअतः, ग गग 1बवज 44 ग −1 ेपद ग सपउ द्ध त्र π ग→ बवे ग −ेपद ग 4 2बवे ग 1 2 बवे ग 1 बवे ग ेपद गसपउ ण् ण् ण्ेपद गत्र ग 2बवे ग 1 बवे ग ेपद ग बवे ग ेपद ग 4 2बवे2 ग −1 बवे ग ़ ेपद गसपउ ण् ;ेपद गद्धत्र ग→π बवे2 ग − ेपद2 ग 2बवे ग ़1 4 बवे 2ग ⎛ बवे ग ़ ेपद ग ⎞सपउ ण्⎜ ⎟;ेपद गद्धत्र ग→π बवे 2ग ⎝ 2बवे ग ़1 4 ⎠ बवे ग ेपद गसपउ ेपद ग त्र ग 2बवे ग 1 4 1 1 1 त्र 2 2 12ण् 2 2 1 1 2 1 π1ित्रइस प्रकार, ग सपउ गि;द्ध 2 यदि हम ⎜⎟⎛⎞ परिभाष्िात करें, तो गपर ;िगद्ध संतत बन जाएगा। 4 ⎝⎠42 4 πअतः, विेफ गत्र पर संतत होने के लिए ि1 है।4 42 ⎧1 ग⎪म−1 ⎪ ए यदि ग≠0गिउदाहरण 20 दशार्इए कि ;द्ध त्र⎨1 द्वारा दिया जाने वाला पफलन बििंदुग⎪म़1 ⎪0ए यदिगत्र0⎩ गत्र 0 पर असंतत है। हल गत्र 0 पर: 1 गम 101सपउ ;द्ध 1 1गि सपउ ण्ग 0 ग 0 01 गम 1 1 गम 1सपउ गि;द्ध सपउ 1इसी प्रकार, ग 0 ग 0 गम 1 111 1 मग 1 म 10सपउ ग ग 01 ग सपउ 0 11त्र त्र11 ग 10 1 म मग गि गि इस प्रकार, सपउ ;द्ध सपउ गि ; द्धए ह।ै अतः, सपउ ;द्ध का अस्ितत्व नहीं है। इसीलिए, गत्र 0 पर िग 0 ग 0 ग 0 असंतत है। ⎧ 1बवे 4 − ग ए यदि गढ0⎪ 2ग⎪गि ⎨ ⎪ ग ए पगि झ0 −4 उदाहरण 21 मान लीजिए कि ;द्ध त्र⎪ ं ए यदि गत्र0 है। ंके किस मान के लिए गत्र 0 पर सिंतत है? हल यहाँ ;ि0द्ध त्र ंहै तथा 0 पर किी वाम सीमा हैः 1बवे4 ग 2ेपद 2 2गसपउ गि;द्ध सपउ 2 सपउ 2ग 0 ग 0 गग 0 ग ेपद 2 ग 2 सपउ 8 त्र 8 ;1द्ध2 त्र 8 2 ग 02ग तथा 0 पर किी दक्ष्िाण सीमा हैः गसपउ गि; द्ध सपउ ग 0 ग 0 ग;16 ग 4द्ध सपउ त्र ग 0; 16 ग 4द्ध; 16 ग4द्ध ग;16 ग 4द्ध त्र सपउ सपउ 16 ग 48 ग 0 16 ग 16 ग 0 ;द्ध ;द्ध त्र 8 हो।इस प्रकार, सपउ गि सपउ गि 8 है। अतः, गत्र 0 पर विेफवल तभी संतत होगा जब ंग 0 ग 0 ⎧ 2ग़3ए यदि − 3 ≤ गढ− 2 गित्र ⎪उदाहरण 22 ;द्ध ⎨⎪ ग़1ए यदि − 2 ≤ गढ0 द्वारा परिभाष्िात पफलन की अवकलनीयता की ⎩ ग़ 2ए यदि 0 ≤ ग≤1 जाँच कीजिए। हल ि;गद्ध की अवकलनीयता के संदेहास्पद बिंदु केवल ग त्र दृ 2 और ग त्र 0 हैं। ग त्र दृ 2 पर अवलनीयता के लिएः ि;दृ2 ीद्ध ि;दृ2द्ध अब, स् ि′ ;दृ2द्ध त्र सपउ ी 0 ी 2;दृ2 ीद्ध3 ;दृ2 1द्ध 2ी त्र सपउ सपउ सपउ 2 2 ी 0 ीी 0 ीी 0 ि;दृ2 ीद्ध ि;दृ2द्ध तथा त् ि′ ;दृ2द्ध त्र सपउ ी 0 ी दृ2 ी 1 ;2 1द्ध त्र सपउ ी 0 ी ी 1;दृ1द्ध ी त्र सपउ सपउ 1 ी 0 ीी 0 ी इस प्रकार, त् ि′ ;दृ2द्ध ≠ स् ि′ ;दृ2द्ध है। अतः, ग त्र दृ 2 पर, िअवकलनीय नहीं है। इसी प्रकार, ग त्र 0 पर पफलन की अवकलनीयता के लिए, हमें ि;0 ीद्ध ि;0द्ध स् ; ि′;0द्धत्र सपउ ी 0 ी 0 ी 1 ;0 2द्ध त्र सपउ ी 0 ी ी 11सपउ सपउ 1त्र ी 0 ीी 0 ी जिसका अस्ितत्व नहीं है। अतः, ग त्र 0 पर पफलन अवकलनीय नहीं है। 2 21 ग उदाहरण 23 बवे.1 21ग के सापेक्ष जंद.1 को अवकलित कीजिए, जहाँग ग ग 1 ए1 है।2 1 ग2 हल मान लीजिए कि और अ त्र बवे.1 ग 2 न त्र जंद.1 21ग है।ग कन कन कग हम कअ कअ ज्ञात करना चाहते हैं। कग 1 ग2 ⎛π π⎞ अब न त्र जंद.1 में ग त्र ेपदθ रख्िाए, जहाँ ⎜ ढθढ ⎟ है।ग ⎝ 42 ⎠ 1ेपद2 तब, न त्र जंद.1 त्र जंद.1 ;बवज θद्धेपद⎛ ⎛π ⎞π त्र जंद.1 ⎜जंद ⎜ −θ⎞⎟⎟ त्र −θ ेपददृ1 ग 2⎝⎝ 2 ⎠⎠ 2 कन 1 अतः, कग 2 होगा।1 ग अब अ त्र बवेदृ1 ;2ग या, अ त्र 2 दृ ेपददृ1 ;2ग 1 ग2द्ध य ग त्र ेपद अ रखने परः 2 π दृ1 त्र दृ ेपददृ1 ;2ेपदθ 1−ेपद θद्धत्र−ेपद ;ेपद2 द्ध θ2 2 πत्र दृ ेपददृ1 ;ेपद ;π दृ 2θद्धद्ध ख्क्योंकि ढ 2 θ ढ π,22 त्र ;2द्ध 222 अतः अ त्र ़ 2ेपददृ1ग2 कअ 2 ⇒ 2कग 1 ग −1कन कन कग 1− ग2 −1 ण्त्रत्र त्र अतः कअ कअ 22 कग 21− ग वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरणों 24 से 35 तक प्रत्येक में, दिए हुए चारों विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए - ⎧ेपद ग⎪़बवे गए यदि ग ≠ 0 उदाहरण 24 यदि पफलन ि;गद्ध त्र ⎨ ग बिंदु ग त्र 0 पर संतत है, तो ा का मान है⎪ ाए यदि ग त्र 0⎩ ;।द्ध 3 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध 1 ;क्द्ध 1ण्5 हल ;ठद्ध सही उत्तर है। उदाहरण 25 पफलन ि;गद्ध त्र ख्ग,ए जहाँ ख्ग, महत्तम पूणार्ंक पफलन को व्यक्त करता है, निम्नलिख्िात पर संतत है ;।द्ध 4 ;ठद्ध दृ 2 ;ब्द्ध 1 ;क्द्ध 1ण्5 हल ;क्द्ध सही उत्तर है। महत्तम पूणार्ंक पफलन ख्ग,ए ग के सभी पूणार्ंकीय मानों पर असंतत है। अतः, क् सही उत्तर है। 1 उदाहरण 26 उन बिंदुओं की संख्या, जिन पर पफलन ि;गद्ध त्र संतत नहीं है,ग दृख् ,ग ;।द्ध 1 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध 3 ;क्द्धइनमें से कोइर् नहीं हल ;क्द्ध सही उत्तर है। क्योंकि जब ग एक पूणार्ंक है, तो ग दृ ख्ग, त्र 0 है, इसलिए दिया हुआ पफलन सभी ग ∈ र् के लिए असंतत है। उदाहरण 27 ि;गद्ध त्र जंदग द्वारा दिए जाने वाला पफलन निम्नलिख्िात समुच्चय पर असंतत है द ;।द्ध रूर् ;ठद्ध 2रूर् ;ब्द्ध ;2द 1द्ध 2 रू द र् ;क्द्ध 2रू द र्दद दद हल ;ब्द्ध सही उत्तर है। उदाहरण 28 मान लीजिए कि ि;गद्धत्र द्यबवेगद्य है। जब, ;।द्ध िप्रत्येक स्थान पर अवकलनीय है ;ठद्ध िप्रत्येक स्थान पर संतत है, परंतु ग त्र दπए द र् पर अवकलनीय नहीं है ;ब्द्ध िप्रत्येक स्थान पर संतत है, परंतु ग त्र ;2द ़ 1द्ध π 2ए द∈ र् पर अवकलनीय नहीं है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं हल ;ब्द्ध सही उत्तर है। उदाहरण 29 पफलन ि;गद्ध त्र द्यगद्य ़ द्यग दृ 1द्य ;।द्ध ग त्र 0 तथा ग त्र 1 दोनों पर संतत है ;ठद्ध ग त्र 1 पर संतत है, परंतु ग त्र 0 पर संतत नहीं है ;ब्द्ध ग त्र 0 तथा ग त्र 1 दोनों पर असंतत है ;क्द्ध ग त्र 0 पर संतत है, परंतु ग त्र 1 पर संतत नहीं है हलः सही उत्तर ;।द्ध है। ⎧ 1⎪ेपद ए यदि ग ≠0गि त्र⎪उदाहरण 30 ा का वह मान, जो ;द्ध ⎨ ग ⎩ा ए यदि ग त्र0 द्वारा परिभाष्िात पफलन को ग त्र 0 पर संतत बना दे, ;।द्ध 8 ;ठद्ध 1 ;ब्द्ध दृ1 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं हल ;क्द्ध सही उत्तर है। निःसंदेह, सपउ ेपद 1 का अस्ितत्व नहीं है।ग→0 ग उदाहरण 31 उन बिंदुओं का सम्मुच्चय, जहाँ ि;गद्ध त्र द्यग दृ 3द्य बवेग द्वारा दिया जाने वाला पफलन अवकलनीय है, ;।द्ध त् ;ठद्ध त् दृ क्ष्3द्व ;ब्द्ध ;0ए ∞द्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं हल ;ठद्ध सही उत्तर है। उदाहरण 32 ग के सापेक्ष ेमब ;जंददृ1गद्ध का अवकल गुणांक है ग 1ग ;।द्ध 2;ठद्ध 2 ;ब्द्ध ग 1़ ग2 ;क्द्ध 21़ ग 1़ ग 1़ ग हल ;।द्ध सही उत्तर है। ⎛ 2ग ⎞⎛ 2ग ⎞दृ1 दृ1 कनउदाहरण 33 यदि न त्र ेपद ⎜ 2 ⎟ और अ त्र जंद ⎜ 2 ⎟ है, तो है⎝1़ ग ⎠⎝1− ग ⎠ कअ1 1दृ ग2 ;।द्ध ;ठद्ध ग ;ब्द्ध ;क्द्ध 1 21़ ग2 हल ;क्द्ध सही उत्तर है। गउदाहरण 34 पफलन ;िगद्ध त्र मेपदगए गख्0ए , का मान है∈πके लिए, रोले के प्रमेय में बπππ 3π;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध642 4 हल ;क्द्ध सही उत्तर है। उदाहरण 35 पफलन ;िगद्ध त्र ग;गदृ 2द्धए ग∈ ख्1ए 2, के लिए, माध्य मान प्रमेय में बका मान है 321 3;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध दृ 232 2 हल ;।द्ध सही उत्तर है। उदाहरण 36 निम्नलिख्िात का सुमेलन कीजिए - स्तंभ प् स्तंभ प्प् ेपद3 ग ए यदि ग 0 ग;।द्ध यदि पफलन ;द्ध ;ंद्ध द्यगद्यगि ा ए यदि ग 02 गत्र 0 पर संतत है, तो ाबराबर है ;ठद्ध प्रत्येक संतत पफलन अवकलनीय होता है ;इद्ध सत्य ;ब्द्ध एक पफलन का उदाहरण, जो प्रत्येक स्थान पर ;बद्ध 6 संतत है, परंतु ठीक एक स्थान पर अवकलनीय नहीं है ;क्द्ध तत्समक पफलन, अथार्त, ;िगद्ध त्र ग∀∈गत् एक ;कद्ध असत्य संतत पफलन है हल । → बए ठ → कएब् → ंए क् → इ उदाहरणों 37 से 41 तक प्रत्येक में रिक्त स्थानों को भरिए - 1 उदाहरण 37 उन बिंदुओं की संख्या, जहाँ पफलन ;िगद्ध त्र असंतत है, ऋऋऋऋऋऋऋऋहै।सवह द्य गद्य हल दिया हुआ पफलन गत्र 0ए ± 1 बिंदुओं पर असंतत है। अतः, असंततता के बिंदुओं की वाँछित संख्या 3 है। ⎧ंग़1प िग≥1 उदाहरण 38 यदि ;द्ध त्र⎨ संतत है, तो ंऋऋऋऋऋऋऋ के बराबर मान होना चाहिए।गि ग़2प िगढ1⎩ हल ंत्र 2 उदाहरण 39 गके सापेक्ष सवह10गका अवकलज ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 1 हल ;सवह मद्ध10 ग दृ1 ⎛ ग़1 ⎞ ेपददृ1 ⎛ गदृ1 ⎞ उदाहरण 40 यदि लत्र ेमब ⎜ ़ ⎜ ⎟ हैए तो कलत्र ऋऋऋऋऋऋहै।⎟ ग−1 ⎠⎝ ग़1 ⎠ कग⎝ हल 0 उदाहरण 41 बवे गके सापेक्ष ेपद गका अवकलज ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। हल दृ बवज ग उदाहरण 42 से 46 तक प्रत्येक में बताइए कि कथन सत्य है या असत्य - ;िद्धग सपउ ;द्धउदाहरण 42 गत्र ंए पर ;िगद्ध संततता के लिए? गं सपउ ़ और गं→ दृ गिमें से प्रत्येक ;िंद्ध→के बराबर होता है। हल सत्य उदाहरण 43 लत्र द्यगदृ 1द्य एक संतत पफलन है। हल सत्य उदाहरण 44 एक संतत पफलन में वुफछ ऐसे बिंदु हो सकते हैं जहाँ सीमाओं का अस्ितत्व न हों। हल असत्य उदाहरण 45 द्येपदगद्य चर गके प्रत्येक मान के लिए एक अवकलनीय पफलन है। हल असत्य उदाहरण 46 बवे द्यगद्य प्रत्येवफ स्थान पर अवकलनीय है। हल सत्य 5ण्3 प्रश्नावली संक्ष्िाप्त उत्तर ;ैण्।ण्द्ध 1ण् पफलन ;िगद्ध त्र ग3 ़ 2ग2 दृ 1 को गत्र 1 पर संततता की जाँच कीजिए। ज्ञात कीजिए कि प्रश्न 2 से 10 तक में दिए पफलनों में से कौन से पफलन इंगित बिंदुओं पर संतत या असंतत हैंः 1बवे 2ग3ग5ए यदि ग2 2ए यदि ग0 गि2ण् गत्र 2 पर ;द्ध 2 3ण् गत्र0 पर गि;द्ध ग गए यदि ग 2 5ए यदि ग0 सांतत्य और अवकलनीयता 1052ग23ग2 ए यदि ग2गि 24ण् गत्र2 पर ;द्ध ग 5ए यदि ग2 ग4 ए यदि ग4गि5ण् गत्र 4 पर ;द्ध 2;ग4द्ध 0ए यदिग4 1 गबवे ए यदि ग0गि ग 0ए यदिग0 6ण् गत्र 0 पर ;द्ध 1 गंेपद ए यदि ग0 गंगि7ण् गत्र ंपर ;द्ध 0ए यदिगं 1 मग यदि ग0;द्ध 1ए 8ण् गत्र 0 पर गि ग1 म 0ए यदिग0 2ग ए यदि 0 ग 12;द्ध9ण् गत्र 1 पर गि 2ग23ग 3ए यदि 1 ग22 10ण् गग गग−1त्र 1 पर;द्ध त्ऱप्रश्न 11 से 14 तक प्रत्येक में ाका वह मान ज्ञात कीजिए जिसके लिए पफलन इंगित बिंदु पर संतत हैः ⎧ग़22 −16 ⎧3ग−8ए यदि ग≤5ए यदि ग≠211ण् गत्र5 पर गि ;द्ध त्र⎨ 12ण् गत्र2 पर गि ⎪ ग−;द्ध त्र⎨416 ⎩2ा ए यदिगझ5 ⎪⎩ा ए यदि गत्र2 1 ाग 1 ाग ए यदि 1 ग 0 गगि13ण् गत्र 0 पर ;द्ध 2ग1 ए यदि 0 ग1 ग1 1बवे ाग ए यदि ग 0 गेपद गगि ए यदि ग 0 14ण् गत्र 0 पर ;द्ध 1 2 ⎧ ग 2ए ग≠0⎪ग़2ग;द्धत्र⎨गि15ण् सि( कीजिए कि से परिभाष्िात पफलन बििंदु गत्र 0 पर असंतत⎪ागत्र0⎩ रहता है, चाहे ाका कोइर् भी मान लिया जाए। 16ण् ंऔर इके मान ज्ञात कीजिए जिसके लिये दिया हुआ पफलन ⎧ग−4 ़ंए यदि गढ4⎪ ⎪ग−4 ⎪;द्धत्र⎨ंइ ए यदि गत्रगि ़ 4 ⎪⎪ग−4 ़इए यदि गझ4 ⎪ग−4⎩ बिंदु गत्र 4 पर संतत है। 1 17ण् पफलन ;िगद्ध त्र दिया है। संयोजित पफलन लत्र ;ि;िगद्धद्ध में असंतत्य के बिंदु ज्ञात कीजिए।ग़2 1118ण् पफलन जि;द्ध त्र की असंततता के सभी बिंदु ज्ञात कीजिए, जहाँ जत्र है।ज2 ज 2 ग−1़− 19ण् दशार्इए कि पफलन ि;गद्ध त्र ेपद ग ़बवे ग बिंदु ग त्र π पर संतत है। प्रश्न 20 से 22 में, िकी अवकलनीयता की जाँच कीजिए जब कि िनिम्नलिख्िात द्वारा परिभाष्िात है - ख्,ए ए यदि 0 ग 2गग 20ण् ग त्र 2 पर, ि;गद्ध त्र ;ग 1द्ध गए यदि 2 ग 3 ग2ेपद1 ए यदि ग 0 ग21ण् ग त्र 0 पर, ि;गद्ध त्र 0ए यदि ग 0 1 ग ए यदि ग 2 22ण् ग त्र 2 पर, ि;गद्ध त्र 5 ग ए यदि ग 2 23ण् दशार्इए कि ग त्र 5 पर, ि;गद्ध त्र ग −5 संतत है, परंतु अवकलनीय नहीं है। 24ण् एक पफलन िरू त् →त् सभी गए ल ∈त्ए ि;गद्ध ≠0 के लिए समीकरण ि;ग ़लद्धत्र ि;गद्ध ि;लद्ध को संतुष्ट करता है। मान लीजिए कि यह पफलन ग त्र 0 पर अवकलनीय है तथा ि′ ;0द्ध त्र 2 है। सि( कीजिए कि ि′;गद्ध त्र 2 ि;गद्ध है। निम्नलिख्िात प्रश्न 25 से 43 तक प्रत्येक को ग के सापेक्ष अवकलित कीजिए - 8ग 25ण् 2बवे2 ग 26ण् 27ण् सवह ;ग ़8ग 228ण् सवह ⎡सवह सवह ग5 ⎦⎤ 29ण्;द्ध ेपद ग ़बवे ग ेपद ;ंग ़़ब30ण् द 2 इग द्ध⎣ ⎛⎞ ⎟31ण् बवे;जंद ग ़1द्ध 32ण् ेपदग2 ़ ेपद2ग ़ ेपद2;ग2द्ध 33ण् ेपददृ1 ⎜⎜ 1 ⎟ग 1⎝ ़⎠ बवे ग34ण् ;द्धग 35ण् ेपदउग ण् बवेदग 36ण् ;ग ़ 1द्ध2 ;ग ़ 2द्ध3 ;ग ़ 3द्ध4ेपद दृ1 ⎛ेपद ग ़बवे ग −π π दृ1 ⎛−⎞ 1बवे ग ⎞π π ए −ढग ढए ग जंदढढ37ण् बवे ⎜ ⎟ 38ण् ⎜ ⎟ ⎝ 2 ⎠44 ⎝1बवे़ ग 44⎠ ππ39ण् जंददृ1 ;ेमब ग ़जंद गद्धए−ढढग 22 दृ1 ⎛ं बवे ग −इेपद ग ⎞ π π ंजंद ए −ढढ तथा जंद ग झदृ1 40ण् ⎜⎟ गइबवे ग ़ंेपद ग 22 इ⎝⎠ 23 दृ1 ⎛ 1 ⎞ 1 दृ13ंग ग 1 ग 1 ेमब ए0 ढढ जंद ए41ण् ⎜ 3 ⎟ ग 42ण् 32 ं⎝4ग −3ग ⎠ 2 ं 3ंग 33 ⎛ 22 दृ1 1 ग 1़़− ग ⎞ जंद ⎜ ए1 ग 1ए ग 0⎟−ढढ ≠ ⎜2243ण् ⎝ ़−− ग ⎟⎠1 ग 1 कलप्रश्न 44 से 48 तक प्राचलिक रूप में दिये पफलनों में से प्रत्येक के लिए कग ज्ञात कजिए - 11 ⎛ 1 ⎞ −θ⎛ 1 ⎞ त्रθ44ण् ग त्र ज ़ ए ल त्र ज दृ 45ण् ग त्र मु ⎜θ़ ⎟ए लम⎜− ⎟जज ⎝θ⎠ ⎝θ⎠ 46ण् ग त्र 3बवेु दृ 2बवे3ुए ल त्र 3ेपदु दृ 2ेपद3ु 22ज ़ ज 3ज 1सवह ़2सवह जेपद ग त्र ए जंद ल त्र ग त्र ए ल त्र47ण् 22 48ण् 21़ज 1−ज जज कल −ल सवह ग त्र49ण् यदि ग त्र मबवे2ज और ल त्र मेपद2ज , तो सि( कीजिए कि है।कग ग सवह ल 50ण् यदि ग त्र ंेपद2ज ;1 ़ बवे2जद्ध और ल त्र इ बवे2ज ;1दृबवे2जद्ध तो दशार्इए कि , π कल इ ग त्र परऋ त्र 4 कग ं πकल51ण् यदि ग त्र 3ेपदज दृ ेपद 3ज और ल त्र 3बवेज दृ बवे 3ज तो ज त्र 3 पर कग ज्ञात कीजिए। ग52ण् ेपदग के सापेक्ष को अवकलित कीजिए।ेपद ग ⎛ 53ण् जंददृ1 ग के सापेक्ष जंददृ1 ⎜⎜⎝ ⎞ग2 −1 ग ⎟⎟को अवकलित कीजिए, जब ग ≠ 0ण् ⎠कलप्रश्न 54 से 57 तक प्रत्येक में कग ज्ञात कीजिए, जबकि ग और ल दिये हुए संबंध् से संयोजित हंै ग 54ण् ेपद ;गलद्ध ़ त्र ग2 दृ ल 55ण् ेमब ;ग ़ लद्ध त्र गलल56ण् जंददृ1 ;ग2 ़ ल2द्ध त्र ं 57ण् ;ग2 ़ ल2द्ध2 त्र गल कल कग ण् त्र158ण् यदि ंग2 ़ 2ीगल ़ इल2 ़ 2हग ़ 2लि ़ ब त्र 0 तो दशार्इए कि कग कल ग कलग − ल59ण् यदि ग त्रमल तो सि( कीजिए कि त्र कग ग सवह ग ग लग ;1सवह लद्ध2 − कल ़ 60ण् यदि ल त्रम तो सि( कीजिए कि त्र कग सवह ल ;बवे ग द्धण्ण्ण्ण्ण् ∞;बवे द्ध कल ल2 जंद ग 61ण् यदि ल त्र;बवे गद्ध ग तो सि( कीजिए कि त्र कग ल सवह बवे ग −1 2कल ेपद ; ं ़ लद्ध62ण् यदि ग ेपद ;ं ़ लद्ध ़ ेपद ं बवे ;ं ़ लद्ध त्र 0 तो सि( कीजिए कि त्र कग ेपद ं कल 1− ल2 63ण् यदि 1− ग2़ 1− ल2त्र ं ;ग दृ लद्ध तो सि( कीजिए कि त्र 2कग 1− ग 2कल64ण् यदि ल त्र जंददृ1ग तो केवल ल के पदों में ज्ञात कीजिए।कग2 प्रश्न 65 से 69 तक दिये पफलनों में से प्रत्येक के लिए रोले के प्रमेय का सत्यापन कीजिए - 65ण् ख्0ए 1, में ि;गद्ध त्र ग ;ग दृ 1द्ध267ण् ख्दृ1ए 1, में ि;गद्ध त्र सवह ;ग2 ़ 2द्ध दृ सवह3 69ण् ख्दृ 2ए 2, में ि;गद्ध त्र 4 − ग2 ⎧ग2 ़1ए यदि 0≤ ग ≤ 1⎪ त्र⎡ π⎤66ण् ⎢0ए ⎥ में ि;गद्ध त्र ेपद4ग ़ बवे4ग⎣ 2 ⎦ 68ण् ख्दृ3ए 0, में ि;गद्ध त्र ग ;ग ़ 3द्धम दृगध्2 गि70ण् ;द्ध ⎨ द्वारा दिए जाने वाले पफलन पर रोले के प्रमेय की⎪3− गए यदि 1≤ ग ≤ 2⎩ अनुप्रयोगता पर चचार् कीजिए। 71ण् ख्0ए 2च, में वक्र ल त्र ;बवेग दृ 1द्ध पर उन बिंदुओं को ज्ञात कीजिए, जहाँ स्पशर् रेखा ग.अक्ष के समांतर है। 72ण् रोले के प्रमेय का प्रयोग करते हुए वक्र ल त्र ग ;ग दृ 4द्धए ग ट्ठ ख्0ए 4, पर वह बिंदु ज्ञात कीजिए जहाँ स्पशर् रेखा ग.अक्ष के समांतर है। प्रश्न 73 से 76 तक दिये हुए पफलनों में से प्रत्येक के लिए माध्यमान प्रमेय का सत्यापन कीजिए - 1 73ण् ख्1ए 4, में ि;गद्ध त्र 74ण् ख्0ए 1, में ि;गद्ध त्र ग3 दृ 2ग2 दृ ग ़ 341ग − 75ण् ख्0ए च, में ि;गद्ध त्र ेपदग दृ ेपद2ग 76ण् ख्1ए 5, में ि;गद्ध त्र 25− ग2 77ण् वक्र ल त्र ;ग दृ 3द्ध2 पर एक ऐसा बिंदु ज्ञात कीजिए, जिस पर स्पशर् रेखा ;3ए 0द्ध और ;4ए 1द्ध बिंदुओं को मिलाने वाली जीवा के समांतर हो। 78ण् माध्य मान प्रमेय का प्रयोग करते हुए, सि( कीजिए कि वक्र ल त्र 2ग2 दृ 5ग ़ 3 पर एक ऐसा बिंदु है जो ।;1ए 0द्ध औरठ ;2ए 1द्ध बिंदुओं के बीच स्िथत है तथा उस पर खींची गयी स्पशर् रेखा जीवा ।ठ के समांतर है। साथ ही, वह बिंदु भी ज्ञात कीजिए। दीघर् उत्तरीय ;स्ण्।ण्द्ध 79ण् च और ु के ऐसे मान ज्ञात कीजिए कि पफलन गि ⎧ग2 ़ 3ग ़ चए यदि ग ≤ 1⎪;द्ध त्र⎨ ⎩ुग ़ 2ए यदि ग झ1⎪बिंदु ग त्र 1 पर अवकलनीय हो। 80ण् यदि गउण्लद त्र ;ग ़ लद्धउ़द है तो सि( कीजिए कि 2कलल कल;पद्ध त्र और ;पपद्ध त्र0कगग कग2 2कल कल 281ण् यदि ग त्र ेपदज और ल त्र ेपद चज है तो सि( कीजिए कि;1दृग2द्ध दृ ग ़ चल त्र0 है।कग2 कग ग2 ़1 कल82ण् यदि ल त्र गजंदग ़ है, तो ज्ञात कीजिए।2 कग वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न संख्या 83 से 96 तक प्रत्येक में से दिये हुए चारों विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए - 2ग83ण् यदि ;िगद्ध त्र 2गऔर ह;गद्ध त्र ़1 है तो निम्नलिख्िात में से कौन - सा पफलन असंतत हो2 सकता है? ह;द्धग ;।द्ध ;िगद्ध ़ ह;गद्ध ;ठद्ध ;िगद्ध दृ ह;गद्ध ;ब्द्ध ;िगद्ध ण् ह;गद्ध ;क्द्ध ;द्धगि 4−ग2 84ण् पफलन ;िगद्ध त्र 4ग−ग3 ;।द्ध केवल एक बिंदु पर असंतत है ;ठद्ध ठीक दो बिंदुओं पर असंतत है ;ब्द्ध ठीक तीन बिंदुओं पर असंतत है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 85ण् बिंदुओं का वह समुच्चय, जहाँ ;िगद्ध त्र 21ेपद गसे दिये जाना वाला पफलन अिवकलनीयग− है, निम्नलिख्िात है 1⎧⎫;।द्ध त् ;ठद्ध त् दृ ⎨⎬ ;ब्द्ध ;0ए ∞द्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं2⎩⎭86ण् पफलन ;िगद्ध त्र बवज गनिम्नलिख्िात समुच्चय पर असंतत है ;।द्ध क्ष्गदत्रπ ∈रू दर् ;ठद्ध त्र2πद∈द्वद्वक्ष्गदरू र् ⎧π⎫ ⎧ दπ⎫;ब्द्ध ⎨गत्र;2द़1द्धय द∈र्⎬ ;क्द्ध ⎨गत्र य द∈र्⎬⎩ 2 ⎭⎩ 2 ⎭ ग87ण् पफलन ;िगद्ध त्र म ;।द्ध प्रत्येक स्थान पर संतत है, परंतु गत्र 0 पर अवकलनीय नहीं है ;ठद्ध प्रत्येक स्थान पर संतत और अवकलनीय है ;ब्द्ध गत्र 0 पर संतत नहीं है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 2188ण् यदि ;िगद्ध त्र गेपद , जहाँ ग≠ 0 तो गत्र 0 पर पफलन किा मान निम्नलिख्िात होगा यदिगयह पफलन गत्र 0 संतत है ;।द्ध 0 ;ठद्ध दृ 1 ;ब्द्ध 1 ;क्द्धइनमें से कोइर् नहीं ⎧π उग़1ए यदि ग ≤⎪π;द्धत्र ⎨ ⎪ेपद गदए यदि ग झπ 289ण् यदि गि 2बिंदु ग त्र पर संतत है तो ़⎪दπ उππ ⎩ 2 ;।द्ध उ त्र 1ए द त्र 0 ;ठद्ध उ त्र ़ 1 ;ब्द्ध द त्र ;क्द्ध उ त्र द त्र 2 22 90ण् मान लीजिए ि;गद्ध त्र द्येपद गद्य है, तब ;।द्ध िप्रत्येक स्थान पर अवकलनीय है ;ठद्ध िप्रत्येक स्थान पर संतत है, परंतु ग त्र दπए द ∈ र् पर अवकलनीय नहीं है ;ब्द्ध िप्रत्येक स्थान पर संतत है परंतु ग त्र ;2द ़ 1द्ध π 2ए द ∈ र् पर अवकलनीय नहीं है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं ⎛1− ग2 ⎞ कल91ण् यदि ल त्र सवह ⎜ 2 ⎟ तो बराबर है1़ ग कग⎝⎠ 4ग3 −4ग 1 − 4ग3 ;।द्ध4 ;ठद्ध4 ;ब्द्ध 4;क्द्ध41− ग 1− ग 4− ग 1− ग कल92ण् यदि ल त्र ेपद ग ़ ल है, तो कग बराबर है बवे ग बवे ग ेपद ग ेपद ग ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध2ल −1 − ल − ल 2ल −112 12 93ण् बवेदृ1ग के सापेक्ष बवेदृ1 ;2ग2 दृ 1द्ध का अवकलज है −12 ;।द्ध 2 ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध 1 दृ ग2 21− ग2 ग 2कल94ण् यदि ग त्र ज2 और ल त्र ज3 है, तो हैकग2 3 333 ;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध ;क्द्ध24ज 2ज 2ज 95ण् अंतराल ख्0ए 3, में पफलन ि;गद्ध त्र ग3 दृ 3ग के लिए, रोले के प्रमेय में ब का मान है 3 1;।द्ध 1 ;ठद्ध दृ 1 ;ब्द्ध ;क्द्ध2 3 196ण् पफलन ि;गद्ध त्र ग ़ ए ग ∈ ख्1ए 3, के लिए, माध्य मान प्रमेय में ब का मान हैग ;।द्ध 1 ;ठद्ध 3 ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं प्रश्न संख्या 97 से 101 तक प्रत्येक में रिक्त स्थानों को भरिए - 97ण् एक ऐसे पफलन का उदाहरण जो सभी स्थानों पर संतत है, परंतु ठीक दो बिंदुओं पर अवकलनीय रहने में असमथर् रहता है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ है।98ण् ग3 के सापेक्ष ग2 अवकलज ऋऋऋऋऋऋऋऋऋहै।99ण् यदि ि;गद्ध त्र द्यबवेगद्य तो ि′ त्र ऋऋऋऋऋऋऋ100ण् यदि ि;गद्ध त्र द्यबवेग दृ ेपदग द्य है तो ि′ त्र ऋऋऋऋऋऋऋ43⎛ 11 ⎞ कल101ण् वक्र गल 1 के लिए, ⎜ ए⎟ पर ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ⎝ 44 ⎠ कगप्रश्न संख्या 102 से 106 तक प्रत्येक में दिए हुए कथन के लिए बताइए कि यह सत्य है या असत्य - 102ण् ख्0ए 2, में पफलन ि;गद्ध त्र द्यग दृ 1द्य के लिए, रोले का प्रमेय प्रयुक्त है। 103ण् यदि िअपने प्राँत क् पर संतत है, तो द्य िद्य भी क् पर संतत होगा। 104ण् दो संतत पफलनों का संयोजन एक संतत पफलन होता है। 105ण् त्रिाकोणमितीय एवं त्रिाकोणमितीय व्युत्क्रम पफलन अपने - अपने प्राँतों में अवकलनीय होते हैं। 106ण् यदि िण् ह बिंदु ग त्र ं पर संतत है, तो िऔर ह बिंदु ग त्र ं पर पृथक - पृथक रूप से संतत होते हैं।

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