4ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध हम द कोटि के प्रत्येक वगर् आव्यूह । त्र ख्ंपर, को एक संख्या ;वास्तविक या सम्िमश्रद्ध द्वारा सबंध्ित करा सकते हैं जिसे वगर् आव्यूह का सारण्िाक कहते हैं। इसे कमज।ए द्वारा निरूपित किया जाता है। जहाँ ंपर अव्यव । का ;पए रद्धवाँ आव्यूह है। ंइयदि । है तो । का सारण्िाक को द्य।द्य ;या कमज ।द्ध बक ंइद्य।द्य त्र त्र ंक दृ इब द्वारा दिया जाता है।बक ;पद्ध केवल वगर् आव्यूहों के सारण्िाक होते हैं।;पपद्ध आव्यूह । के लिए । को । का सारण्िाक पढ़ते हैं न कि । का परिमाण ;डवकनसनेद्ध 4ण्1ण्1 एक कोटि के आव्यूह का सारण्िाक ;क्मजमतउपदंदजे व िं उंजतपग व िवतकमत वदमद्ध माना एक कोटि का आव्यूह । त्र ख्ं, है तो । के सारण्िाक को ं के बराबर परिभाष्िात किया जाता है। 4ण्1ण्2 द्वितीय कोटि के आव्यूह का सारण्िाक ;क्मजमतउपदंदजे व िं उंजतपग व िवतकमत जूवद्ध ⎡ंइ ⎤ माना कोटि 2 का आव्यूह । त्र ख्ंपर, त्र ⎢⎥ है। तब । के सारण्िाक को इस प्रकार परिभाष्िातबक⎣⎦ करते हैं - कमज ;।द्ध त्र द्य।द्य त्र ंक दृ इबण् 4ण्1ण्3 कोटि 3 के आव्यूह का सारण्िाक ;क्मजमतउपदंदजे व िं उंजतपग व िवतकमत 3द्ध तृतीय कोटि के आव्यूह के सारण्िाक को द्वितीय कोटि के सारण्िाकों में व्यक्त करके ज्ञात किया जाता है। यह एक सारण्िाक का एक पंक्ित ;या एक स्तंभद्ध के अनुदिश प्रसरण कहलाता है। तृतीय कोटि के सारण्िाक को छह प्रकार से प्रसारित किया जा सकता है यह है। तीनों पंक्ितयों ;त्ए त्तथा त्द्ध और तीनों12 3स्तंभों ;ब्ए ब्तथाब्द्ध में से प्रत्येक के संगत प्रसरण है प्रत्येक प्रसरण से समान ही मान प्राप्त होता है।12 3वगर् आव्यूह । त्र ख्ं,3×3ए के सारण्िाक पर विचार कीजिए, जहाँपरंं1112 13 । ंं2122 23 ंं3132 33 द्य।द्य को ब्1ए के अनुदिश प्रसरण करने पर हमें निम्न प्राप्त होता है। ं ं22 23 12 13द्य।द्य त्र ं11 ;दृ1द्ध1़1 ़ ं21 ;दृ1द्ध2़1 ंं32 33 32 33 ़ ं31 ;दृ1द्ध3़1 ं12 13 ं22 23 त्र दृ द्ध दृ ं21 दृ द्ध ़ ं31 दृ द्धं11;ं22 ं33ं23 ं32 ;ं12 ं33ं13 ं32 ;ं12 ं23ं13 ं22व्यापक रूप में यदि । त्र ाठए है जहाँ । और ठ कोटि द के वगर् आव्यूह हैं तब द्य।द्य त्र ाद द्यठद्यए द त्र 1ए 2ए 3ण् 4ण्1ण्4 सारण्िाकों के गुणध्मर् ;च्तवचमतजपमे व िक्मजमतउपदंजपवदेद्ध किसी भी वगर् आव्यूह । के लिए, द्य।द्य निम्नलिख्िात गुणध्मो± को संतुष्ट करता है।;पद्ध द्य।′द्य त्र द्य।द्यए जहाँ ।′ आव्यूह । का परिवतर् है। ;पपद्ध यदि हम एक सारण्िाक की कोइर् दो पंक्ितयों ;या स्ंतभोंद्ध को परस्पर परिवतिर्त कर दें तो सारण्िाक का चिन्ह परिवतिर्त हो जाता है। ;पपपद्ध यदि एक सारण्िाक की कोइर् दो पंक्ितयाँ ;अथवा स्तंभद्ध समान हैं ;या समानुपाती हैद्ध तब सारण्िाक का मान शून्य होता है। ;पअद्ध किसी सारण्िाक को एक अचर ा से गुणा करने का अथर् है कि इसके केवल एक पंक्ित ;अथवा स्तंभद्ध के प्रत्येक अवयव को ा से गुणा करना। ;अद्ध यदि हम एक सारण्िाक के किसी एक पंक्ित ;अथवा स्तंभद्ध के प्रत्येक अवयव को एक अचर ा से गुणा करते हैं तो सारण्िाक का मान भी ा से गुण्िात हो जाता है। ;अपद्ध यदि एक सारण्िाक की एक पंक्ित ;या स्तंभद्ध के अवयवों को दो या अध्िक पदों के योगपफल के रूप में व्यक्त किया गया हो तो दिए गए सारण्िाक को दो या अध्िक सारण्िाकों के योग के रूप में व्यक्त किया जा सकता है। ;अपपद्ध यदि एक सारण्िाक की किसी पंक्ित ;या स्तंभद्ध के प्रत्येक अवयव में दूसरी पंक्ित ;या स्तंभद्ध के संगत अवयवों के समान गुणशों को जोड़ दिया जाता है तो सारण्िाक का मान वही रहता है।;पद्ध यदि किसी पंक्ित ;या स्तंभद्ध के सभी अवयव शून्य हों तो सारण्िाक का मान शून्य होता है। ;पपद्ध यदि ग त्र α रखने पर सारण्िाक ष्Δष् का मान शून्य हो जाता है तब ष्Δष् का एक गुणनखंड ;ग दृ αद्ध होता है। ;पपपद्ध यदि किसी सारण्िाक के मुख्य विकणर् के उफपर या नीचे के सभी अवयव शून्य हैं तब सारण्िाक का मान विकणर् के सभी अवयवों के गुणनपफल के बराबर होता है। 4ण्1ण्5 त्रिाभुज का क्षेत्रापफल ;।तमं व िं जतपंदहसमद्ध ;ग1ए लद्धए ;ग2ए लद्ध और ;ग3ए लद्ध शीषो± वाले त्रिाभुज का क्षेत्रापफल123ग1 ल11 1 ग2 ल21 से दिया जाता है।2 ग3 ल31 4ण्1ण्6 उपसारण्िाक और सहखंड ;डपदवते ंदक ब्व.ंिबजवतद्ध ;पद्ध आव्यूह । के सारण्िाक के अवयव ंपर का उप - सारण्िाक वह सारण्िाक है जो प वीं पंक्ित और र वें स्तंभ को हटाने से प्राप्त होता है तथा इसे डपर द्वारा व्यक्त करते हैं। ;पपद्ध एक अवयव ंपर के सहखंड को ।पर त्र ;दृ1द्धप़र डपर द्वारा दिया जाता है। ;पपपद्ध किसी आव्यूह। के सारण्िाक का मान किसी पंक्ित ;या स्तंभद्ध के अवयवों और उनके संगत सहखंडों के गुणनपफल का योग होता है। उदाहरणाथर् द्य।द्य त्र ं । ़ ं । ़ ं ।11 1112121313 ;पअद्ध यदि एक पंक्ित ;या स्तंभद्ध के अवयवों को अन्य पंक्ित ;या स्तंभद्ध के सहखंडों से गुणा किया जाए तो उनका योग शून्य होता है। उदाहरणाथर् ं । ़ ं । ़ ं । त्र 011 21122213234ण्1ण्7 आव्यूह के सहखंडज और व्युत्क्रम ;।करवपदज ंदक प्दअमतेम व िं डंजतपगद्ध;पद्ध एक वगर् आव्यूह । त्र ख्ंपर,के सहखंडज को आव्यूह ख्।पर,के परिवतर् के रूप में द×द द×द परिभाष्िात किया जाता है। जहाँ ।अवयव ंका सहखंड है। इसेंकर । द्वारा व्यक्त करते हैं।पर पर 11ं 12ं 13 ं 11। 21। 31 । यदि । 21ं 22ं 23ं ए तब ंकर 12।। 22 । 32। ए जहाँ।पर का सहखंड ंपर है। 31 ं 32ं 33ं 13 । 23। 33। ;पपद्ध ।;ंकर ।द्ध त्र ;ंकर ।द्ध । त्र द्य।द्य प्ए जहाँ । एक कोटि द का वगर् आव्यूह है।;पपपद्ध यदि द्य।द्य त्र 0 तो वगर् आव्यूह । को अव्युत्क्रमणीय ;ेपदहनसंतद्ध कहते हैं तथा यदि द्य।द्य ≠ 0 हो तो व्युत्क्रमणीय ;दवद.ेपदहनसंतद्ध कहते हैं;पअद्ध यदि । एक कोटि द का वगर् आव्यूह है तो द्यंकर ।द्य त्र द्य।द्यददृ1 होता है।;अद्ध यदि । और ठ समान कोटि की व्युत्क्रमणीय आव्यूह हैं तो ।ठ तथा ठ। भी उसी कोटि की व्युत्क्रमणीय आव्यूह होंगे।;अपद्ध आव्यूहों के गुणनपफल का सारण्िाक उनके क्रमशः सारण्िाकों के गुणनपफल के समान होता है। अथार्त् द्य।ठद्य त्र द्य।द्य द्यठद्य;अपपद्ध यदि।ठ त्र ठ। त्र प् हो जहाँ । और ठ वगर् आव्यूह हैं तब ठ को । का व्युत्क्रम कहते हैं और इसे ठ त्र ।दृ1 लिखते हैं। इसके अतिरिक्त ठदृ1 त्र ;।दृ1द्धदृ1 त्र । होता है। ;अपपपद्ध आव्यूह । व्युत्क्रमणीय होता है यदि और केवल यदि द्य।द्य ≠ 0 हो।1 ;पगद्ध यदि । एक व्युत्क्रमणीय आव्यूह है तब ।दृ1 त्र द्य।द्य;ंकर ।द्ध 4ण्1ण्8 रैख्िाक समीकरणों के निकाय ;ैलेजमउ व िस्पदमंत मुनंजपवदेद्ध;पद्ध निम्नलिख्िात समीकरण निकाय पर विचार कीजिए ंग ़ इल ़ ब्र त्र क1 1 1 1 ंग ़ इल ़ ब्र त्र क2 2 2 2 ं3ग ़ इ3 ल ़ ब3 ्र त्र क3ए आव्यूहों के रूप में इन समीकरणों को । ग् त्र ठए से व्यक्त कर सकते हैं जहाँ ⎡ं इब ग ⎡⎤ 111 ⎤ ⎡⎤ क1⎢ ⎥⎢⎥ ⎢⎥ ं इब एग् त्र ल और ठ त्रक2 2। त्र ⎢22 ⎥ ⎢⎥ ⎢⎥ ⎢ ⎥⎢⎥⎢⎥ इ्र⎣ं3 3 ब3 ⎦ ⎣⎦ ⎣⎦ क3 ;पपद्ध समीकरण।ग् त्र ठ के अद्वितीय ;नदपुनमद्ध हल को ग् त्र ।दृ1ठए जहाँ द्य।द्य ≠ 0 है द्वारा दिया जाता है। ;पपपद्ध समीकरणों का एक निकाय संगत या असंगत होता है यदि इसके हल का अस्ितत्व है अथवा नहीं है। ;पअद्ध आव्यूह समीकरण ।ग् त्र ठ में वगर् आव्यूह । के लिए ;ंद्ध यदि द्य।द्य ≠ 0ए तो अद्वितीय हल अस्ितत्व है। ;इद्ध यदि द्य।द्य त्र 0 और ;ंकर ।द्ध ठ ≠ 0ए तो किसी हल का अस्ितत्व नहीं है। ;बद्ध यदि द्य।द्य त्र 0 और ;ंकर ।द्ध ठ त्र 0ए तो निकाय संगत तथा अनंत हल होते हैं। 4ण्2 हल किए हुए उदाहरण ;ैवसअमक म्गंउचसमेद्ध लघु उत्तरीय ;ैण्।ण्द्ध 2ग 5 65 उदाहरण 1 यदि ए तो ग ज्ञात कीजिए।8 ग83 2ग 5 65 हल हमें दिया है इसलिए8 ग 83 2ग2 दृ 40 त्र 18 दृ 40 ⇒ ग2 त्र 9 ⇒ ग त्र ± 3 1 2गग 1 1 1 उदाहरण 2 यदि 1Δत्र ल 2 1एल Δ त्र ल्र ्रग गल ए तो सि( कीजिए कि Δ ़ Δ1 त्र 0 1 2्र्र ग ल ्र 1 1 1 हल हमें दिया है 1 ल्र ्रग गल ग ल ्र पंक्ितयों और स्तंभों का परस्पर परिवतर्न करने पर हमें प्राप्त होता है ग गल्र ग2 1 ल्र ग 1 त्र ल गल्र ल21 ्रग ल1 गल्र1 गल्र ्र गल्र ्र2 ग 1 ग2 गल्र ल 1 ल2 ए ब्1 और ब्2 का परस्पर परिवतर्न करने परत्र गल्र ्र 1 ्र2 1 गग2 ;दृ1द्ध 1 लल2 दृ त्र 1 ्र्र2 ⇒Δ1़ Δ त्र 0 उदाहरण 3 बिना प्रसरण किए, दिखाइए कि बवेमब 2 बवज 2 1 बवज2 बवेमब 2 1 त्र 0 42 40 2 हल ब्→ ब् दृ ब् दृ ब्का प्रयोग करने पर हम पाते हैं कि1 123 22 2 0 बवज 2θ 1बवेमब दृ बवज दृ1 बवज 1 22 2 0बवेमब 2θ−1 त्र0बवज दृ बवेमब 1 बवेमब 1 त्र 040 20 40 2 ग चु उदाहरण 4 दशार्इए कि त्र ;ग दृ चद्ध ;ग2 ़ चग दृ 2ु2द्धचगु ुुगहल ब्1 → ब्1 दृ ब्2 का प्रयोग करने पर हम पाते हैं कि ग चचु 1 चु चगगु 1 गु ;गचद्ध 0 ुग 0 ुग 0 च़ग2ु ;गचद्धत्र− −1 गुएत्→ त् ़ त्का प्रयोग करने पर1 12 0 ुग ब्के अनुदिश प्रसरण करने पर हम पाते हैं1 22 22; द्ध; गग 2ुद्धत्र ; द्ध; गु द्धगचचगचग च2 0 इंबं उदाहरण 5 यदि ंइ 0 बइ एदो दिखाइए कि त्र 0 है। ंबइब 0 0 ंइंब हल पंक्ितयों तथा स्तभों का परस्पर विनिमय करने पर हम पाते हैं कि इं 0 इब बं बइ 0 त्1ए त्2 और त्3 में ष्दृ1ष् उभयनिष्ठ लेने पर हम पाते हैं 0 इंबं ;दृ1द्ध 3 दृंइ 0 बइ ंब इब 0 ⇒ 2 त्र 0 या त्र 0 उदाहरण 6 सि( कीजिए कि ;।दृ1द्ध′ त्र ;।′द्धदृ1ए जहाँ । एक व्युत्क्रमणीय आव्यूह है। हल क्योंकि । व्युत्क्रमणीय आव्यूह है इसलिए द्य।द्य ≠ 0 हम जानते हैं कि द्य।द्य त्र द्य।′द्य परंतु द्य।द्य ≠ 0ण् इसलिए द्य।′द्य ≠ 0 अथार्त्, ।′ भी व्युत्क्रमणीय आव्यूह है। हम जानते हैं कि ।।दृ1 त्र ।दृ1। त्र प् दोनों ओर आव्यूहों का परिवतर् लेने पर हम पाते हैं ;।दृ1द्ध′ ।′ त्र ।′ ;।दृ1द्ध′ त्र ;प्द्ध′ त्र प् अतः ;।दृ1द्ध′ आव्यूह ।′ का व्युत्क्रम है अथार्त् ;।′द्धदृ1 त्र ;।दृ1द्ध′ दीघर् उत्तरीय ;स्ण्।ण्द्ध ग 23 1 ग 1उदाहरण 7 यदि त्र 0ए का एक मूल ग त्र दृ 4 हो तो अन्य दो मूलों को ज्ञात कीजिए। 32 ग हल त्→ ;त् ़ त् ़ त्द्ध का प्रयोग करने पर हम पाते हैं कि1 123ग 4 ग 4 ग 4 1 ग 1 ण् 3 2 ग त्से उभयनिष्ठ ;ग ़ 4द्ध लेने पर हम पाते हैं1 111 ;ग 4द्ध 1 ग 1 32 ग ब्2 → ब्2 दृ ब्1ए ब्3 → ब्3 दृ ब्1ए के प्रयोग से हम पाते हैं 1 0 0 ;ग 4द्ध 1 ग 1 0 ण् 3 1 ग 3 त्1 के अनुदिश प्रसरण करने पर हम पाते हैं Δ त्र ;ग ़ 4द्ध ख्;ग दृ 1द्ध ;ग दृ 3द्ध दृ 0,ण् परंतु Δ त्र 0 दिया है इसलिए ग त्र दृ 4ए 1ए 3 अतः ग त्र दृ 4 के अतिरिक्त अन्य दो मूल 1 तथा 3 हैं। उदाहरण 8 एक त्रिाभुज ।ठब् में यदि 1 11 1ेपद। 1 ेपदठ 1ेपदब् 0 2 22ेपद।़ेपद । ेपदठ़ेपद ठ ेपदब़्ेपद ब् तो सि( कीजिए कि Δ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है। 1 11 1ेपद। 1 ेपदठ 1ेपदब् हल माना Δ त्र 2 22ेपद।़ेपद । ेपदठ़ेपद ठ ेपदब़्ेपद ब्111 1ेपद। 1 ेपदठ 1 ेपदब् त्र ए त्3 → त्3 दृ त्22 22बवे। बवेठ बवे ब्10 0 1 ेपद। ेपदठ ेपद। ेपदब् ेपदठ त्र ए ;ब्3 → ब्3 दृ ब्2 और ब्2 → ब्2 दृ ब्1द्ध222 22बवे । बवे । बवे ठ बवे ठ बवे ब् के अनुदिश प्रसरण करने पर हम पाते हैंत्1 Δ त्र ;ेपदठ दृ ेपद।द्ध ;ेपद2ब् दृ ेपद2ठद्ध दृ ;ेपदब् दृ ेपद ठद्ध ;ेपद2ठ दृ ेपद2।द्ध त्र ;ेपदठ दृ ेपद।द्ध ;ेपदब् दृ ेपदठद्ध ;ेपदब् दृ ेपद ।द्ध त्र 0 ⇒ ेपदठ दृ ेपद। त्र 0 या ेपदब् दृ ेपदठ या ेपदब् दृ ेपद। त्र 0 ⇒ । त्र ठ या ठ त्र ब् या ब् त्र । अथार्त् त्रिाभुज ।ठब् समद्विबाहु त्रिाभुज है। 3 2 ेपद3 7 8 बवे2 उदाहरण 9 दिखाइए कि यदि सारण्िाक 0 है तब ेपदθ त्र 0 या 12 होगा। 1114 2 हल त्→ त् ़ 4त्और त्→ त् ़ 7त्के प्रयोग से हम पाते हैं कि221 331 3 2 ेपद 3 5 0 बवे2 4ेपद 3 0 10 0 2़7ेपद3 या 2 ख्5 ;2 ़ 7 ेपद3θद्ध दृ 10 ;बवे2θ ़ 4ेपद3θद्ध, त्र 0 या 2 ़ 7ेपद3θ दृ 2बवे2θ दृ 8ेपद3θ त्र 0 या 2 दृ 2बवे 2θ दृ ेपद 3θ त्र 0 या ेपदθ ;4ेपद2θ ़ 4ेपदθ दृ 3द्ध त्र 0 या ेपदθ त्र 0 या ;2ेपदθ दृ 1द्ध त्र 0 या ;2ेपदθ ़ 3द्ध त्र 0 1या ेपदθ त्र 0 या ेपदθ त्र ;क्यों घ्द्ध2वस्तुनिष्ठ प्रश्न ;व्इरमबजपअम ज्लचम फनमेजपवदेद्ध उदाहरण 10 और 11 में दिए गए चार विकल्पों में से प्रत्येक के लिए सही उत्तर चुनिए - ।गग21 ।ठब् ठलल21 तथा Δत्र गल्रउदाहरण 10 यदि Δत्र ए तब1 ्रल ्रग गल ब््र्र21 ;।द्ध Δ1 त्र दृ Δ ;ठद्ध Δ≠Δ1 ;ब्द्ध Δ दृ Δ1 त्र 0 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं । ग ल्र।ठब् त्र ठ ल्रग गल्र ्रल ्रग गल हल सही उत्तर ;ब्द्ध है क्योंकि 1 ब् ्रगल ।गग2 गल्र 1 ठलल2 गल्र त्र गल्र ब््र्र2 गल्र गल्र त्र गल्र ।गग21 ठलल21 त्र Δ ब््र ्र21 बवे ग ेपद ग 1 ेपद ग बवे ग 1उदाहरण 11 यदि गए ल∈ त्ए तब सारण्िाक किस अंतराल में है बवे; गलद्ध ेपद; गलद्ध0 ;।द्ध 2ए 2 ;ठद्ध ख्दृ1ए 1, ;ब्द्ध 2ए1 ;क्द्ध 1ए 2ए हल सही उत्तर ;।द्ध है। वास्तव में त्3→ त्3 दृ बवेलत्1 ़ ेपदलत्2 के प्रयोग से हमें प्राप्त होता है बवे ग ेपद ग 1 ेपद ग बवे ग 1 ण् 0 0 ेपद ल बवे ल त्के अनुदिश प्रसरण करने पर हम पाते हैं3 Δ त्र ;ेपदलदृ बवेलद्ध ;बवे2ग़ ेपद2गद्ध 112 ेपद ल बवे लत्र ;ेपदलदृ बवेलद्ध त्र 22 π2बवे ेपद लेपद बवे ल त्र 2 ेपद ;लदृ द्धत्र 44 4 इसलिए दृ2 ≤ Δ ≤ 2 उदाहरण 12 से 14 तक प्रत्येक में रिक्त स्थान को भरिए - उदाहरण 12 यदि ।ए ठए ब् एक त्रिाभुज के कोण हैं तब 2ेपद। बवज। 1 2ेपद ठ बवजठ 1 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् 2ेपदब् बवजब् 1 हल उत्तर 0 है। त्→ त् दृ त्तथा त्→ त् दृ त्का प्रयोग कीजिए।221 331 उदाहरण 13 सारण्िाक Δत्र 15 ़ 46 5 10 त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हल उत्तर 0 है। ब्और ब्से उभयनिष्ठ 5 निकालिए और उसके बाद ब्→ ब् दृ 3 ब्के23 13प्रयोग से वाँछित परिणाम प्राप्त होगा। उदाहरण 14 सारण्िाक 22ेपद 23 ° ेपद 67 ° बवे180 ° 2 22Δत्र −ेपद 67 °−ेपद 23 ° बवे 180 ° त्रऋऋऋऋऋऋऋण् बवे180 ° ेपद 2 23 ° ेपद 2 67 ° हल Δ त्र 0 है। ब्1 → ब्1 ़ ब्2 ़ ब्3 का प्रयोग कीजिए। बताइए कि उदाहरण 15 से 18 तक दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य - उदाहरण 15 सारण्िाक बवे; गलद्ध ेपद ; गलद्ध बवे 2 ल ेपद ग बवे ग ेपद ल ए ग से स्वतंत्रा है। बवे ग ेपद ग बवे ल हल सत्य है। त्1 → त्1 ़ ेपदलत्2 ़ बवेल त्3 का प्रयोग कीजिए और पिफर सरल कीजिए। उदाहरण 16 सारण्िाक 11 1 दद़2 द़4ब्ब्ब्111 त्र 8 दद़2 द़4ब्ब्ब्222 हल सत्य है। ग 52 उदाहरण 17 यदि ।2 ल 3ए गल्र त्र 80ए 3ग ़ 2ल ़ 10्र त्र 20ए तब 11 ्र 810 0 । ंकरण् । 081 0 0 081 हलरू असत्य 01 3 1 2 4 5 2 उदाहरण 18 यदि । 1 2 23 1 ग दृ1ए । 1 2 1 3 3 2 1 2 ल 2 तब गत्र 1ए लत्र दृ 1 हल सत्य 4ण्3 प्रश्नावली लघु उत्तरीय ;ैण्।ण्द्ध सारण्िाकों के गुणध्मो± का प्रयोग करके प्रश्न 1 से 6 तक के मान निकालिए - ग2 ग 1 ग 1 1ण् ग 1 ग 1 0 गल2 ग्र2 ग2 ल 0 ल्र2 3ण् 22ग्र ्रल 0 2ण् 4ण् ंगल ्र गंल ्र ग लं्र 3ग गल ग्र गल 3ल ्रल ग्र ल्र 3्र ग 4 ग ग ंइ ब 2ं 2ं 5ण् ग ग 4 ग 6ण् 2इ इ ब ं 2इ ग ग ग 4 2ब 2ब ब ं इ सारण्िाकों के गुणध्मो± का प्रयोग करके प्रश्न 7 से 9 तक सि( कीजिए। 7ण् 22ल्र ल्र ल ्र 22्रग ्रग ्र ग 22गल गल ग ल 8ण् 0 ल्र्र ल ्र ्रग ग ल गगल 9ण् 4गल्र ं22ं 2ं 11 2ं 1 ं 21 ;ं 1द्ध 3 3 31 1 बवेब् बवेठ बवेब् 1 बवे। 010ण् यदि । ़ ठ ़ ब् त्र 0 तो सि( कीजिए कि बवेठ बवे। 1 11ण् यदि एक समबाहु त्रिाभुज के शीषर् ;ग1ए ल1द्धए ;ग2ए ल2द्धए ;ग3ए ल3द्ध तथा त्रिाभुज की भुजाओं ग1 ल1 12 3ं4 ग2 ल21 त्रकी लंबाइर् ष्ंष् है तो सि( कीजिए कि 4 ग3 ल3 1 ⎡ 1 1 ेपद3 θ⎤ ⎢⎥−4 3 बवे2 θत्र 012ण् θ का वह मान ज्ञात कीजिए जो ⎢⎥ को संतुष्ट करता हो।⎢ 7 −7 −2 ⎥⎣⎦ 4 ग 4 ग 4 ग 13ण् यदि 4 ग 4 ग 4 ग 0ए तो ग का मान ज्ञात कीजिए। 4 ग 4 ग 4 ग 14ण् यदि ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण्ए ं ळण्च्ण् में हैं तो सि( कीजिए कि सारण्िाकतंत 1 ंत 5 ंत 9 ं ंत 7 त 11 त 15 त से स्वतंत्रा है।ं ंत 11 त 17 त 21 15ण् दशार्इए कि ं के किसी भी मान के लिए बिंदु ;ं ़ 5ए ं दृ 4द्धए ;ं दृ 2ए ं ़ 3द्ध और ;ंए ंद्ध एक सरल रेखा में नहीं है। 16ण् दशार्इए कि त्रिाभुज ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है यदि सारण्िाक ⎡ 1 11 ⎤ ⎢ ⎥Δत्र 1़बवे। 1़बवेठ 1़बवेब् त्र0⎢ ⎥ ⎢ 2 22 ⎥बवे । ़बवे। बवे ठ ़बवेठ बवे ब् ़बवेब् ⎣ ⎦ 011 ।2 3प् 17ण् यदि । 101 तो ।दृ1 ज्ञात कीजिए और दशार्इए कि ।दृ1 2ण् 110 दीघर् उत्तरीय ;स्ण्।ण्द्ध ⎡120 ⎤ ⎢⎥18ण् यदि । त्र−2 −1 −2ए तो ।दृ1 ज्ञात कीजिए।⎢⎥ ⎢0 −11 ⎥⎣⎦ ।दृ1 का प्रयोग करके रैख्िाक समीकरणों के निकाय ग दृ 2ल त्र 10 ए 2ग दृ ल दृ ्र त्र 8ए दृ2ल ़ ्र त्र 7 को हल कीजिए। 19ण् आव्यूह विध्ि से समीकरण निकाय 3ग ़ 2ल दृ 2्र त्र 3ए ग ़ 2ल ़ 3्र त्र 6ए 2ग दृ ल ़ ्र त्र 2 को हल कीजिए। 224 110 20ण् यदि । 42 4एठ 234ए तो ठ। ज्ञात कीजिए और इसका प्रयोग 2 15 012 समीकरण निकाय ल ़ 2्र त्र 7ए ग दृ ल त्र 3ए 2ग ़ 3ल ़ 4्र त्र 17 को हल करने के लिए कीजिए। ंइब इबं21ण् यदि ं ़ इ ़ ब ≠ 0 और त्र0ए तो सि( कीजिए कि ं त्र इ त्र ब बंइ 22 2इबं बं इ ंइ ब 222बंइ ंइ ब इबं22ण् सि( कीजिए कि ए ं ़ इ ़ ब से विभाजित होता है। 222ंइब इब ं बंइ इसका भागपफल भी ज्ञात कीजिए। गंलइ ्रब ंइ ब लब ्रं गइ त्रगल्र बंइ23ण् यदि ग ़ ल ़ ्र त्र 0ए तो सि( कीजिए कि ्रइ गब लं इब ं बहुविकल्पीय प्रश्न ;व्इरमबजपअम ज्लचम फनमेजपवदेद्ध प्रश्न 24 से 37 तक प्रत्येक के लिए दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए - 2ग 5 62 24ण् यदि ए तब ग का मान है8 ग 73 ;।द्ध 3 ;ठद्ध ± 3;ब्द्ध ± 6 ;क्द्ध 6 ंइ इ ़बं− इं ब ़ंइ−25ण् सारण्िाक का मान है बं ं ़इब− ;।द्ध ं3 ़ इ3 ़ ब3 ;ठद्ध 3 ंइब ;ब्द्ध ं3 ़ इ3 ़ ब3 दृ 3ंइब ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 26ण् एक त्रिाभुज का क्षेत्रापफल 9 वगर् इकाइर् है जिसके शीषर् ;दृ3ए 0द्धए ;3ए 0द्ध और ;0ए ाद्ध हैं तो ा का मान होगा ;।द्ध 9 ;ठद्ध 3 ;ब्द्ध दृ 9 ;क्द्ध 6 इ2 ंइ इब इब ंब ंइ ं2 ंइइ2 ंइ 27ण् सारण्िाक बराबर है इबंब बंइ ं2 ;।द्ध ंइब ;इदृबद्ध ;ब दृ ंद्ध ;ं दृ इद्ध ;ठद्ध ;इदृबद्ध ;ब दृ ंद्ध ;ं दृ इद्ध ;ब्द्ध ;ं ़ इ ़ बद्ध ;इ दृ बद्ध ;ब दृ ंद्ध ;ं दृ इद्ध ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं ेपद ग बवे ग बवे ग ππ ग बवे ग ेपद ग बवे ग28ण् अंतराल −≤≤ में सारण्िाक 0 के विभ्िान्न वास्तविक मूलों44 बवे ग बवे ग ेपद ग की संख्या है ;।द्ध 0 ;ठद्ध 2 ;ब्द्ध 1 ;क्द्ध 3 29ण् यदि ।ए ठ और ब् एक त्रिाभुज के कोण हैं तो सारण्िाक 1 बवेब् बवेठ बवेब् 1 बवे। बराबर है बवेठ बवे। 1 ;।द्ध 0 ;ठद्ध दृ 1 ;ब्द्ध 1 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं बवे जज 1 ;िद्धज2ेपद जज 2ज30ण् यदि ;िजद्ध त्र ए तब सपउ 2 बराबर हैज 0 जेपद जजज ;।द्ध 0 ;ठद्ध दृ 1 ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध 3 1 11 31ण् यदि θ एक वास्तविक संख्या है तब 1 1ेपद 1 का अध्िकतम मान है। 1बवे 11 1 3 23;।द्ध ;ठद्ध ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध22 4 0 गंगइ गं 0 गब 32ण् यदि ;िगद्ध त्र ए तब गइ गब0 ;।द्ध ;िंद्ध त्र 0 ;ठद्ध ;िइद्ध त्र 0 ;ब्द्ध ;ि0द्ध त्र 0 ;क्द्ध ;ि1द्ध त्र 0 23 33ण् यदि । त्र 02 5 ए तब ।दृ1 का अस्ितत्व है यदि 11 3;।द्ध λ त्र2 ;ठद्ध λ≠ 2 ;ब्द्ध λ≠ दृ 2 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं 34ण् यदि । और ठ व्युत्क्रमणीय आव्यूह हंै तब निम्न में से कौन सा सत्य नहीं है? ;।द्ध ंकर। त्र द्य।द्यण् ।दृ1 ;ठद्ध कमज;।द्धदृ1 त्र ख्कमज ;।द्ध,दृ1 ;ब्द्ध ;।ठद्धदृ1 त्र ठदृ1 ।दृ1 ;क्द्ध ;। ़ ठद्धदृ1 त्र ठदृ1 ़ ।दृ1 35ण् यदि गए लए ्र में कोइर् भी शून्य नहीं है और 1 1 1 ग 1 1 1 ल 1 1 1 ्र 0 ए है तब गदृ1 ़ लदृ1 ़ ्रदृ1 बराबर है ;।द्ध ग ल ्र ;ठद्ध गदृ1 लदृ1 ्रदृ1 ;ब्द्ध दृ ग दृ ल दृ ्र ;क्द्ध दृ1 36ण् सारण्िाक 2 ग ग ल ग ल 2 गल ग ग ल 2ग ल ग ल ग का मान है ;।द्ध 9ग2 ;ग ़ लद्ध ;ठद्ध 9ल2 ;ग ़ लद्ध ;ब्द्ध 3ल2 ;ग ़ लद्ध ;क्द्ध 7ग2 ;ग ़ लद्ध 1दृ2 5 37ण् श्ंश् के ऐसे दो मान हैं जिनके लिए Δ त्र 2 ं 1 त्र 86ए है तो इन दो संख्याओं का योग है 0 4 2ं ;।द्ध4 ;ठद्ध 5 ;ब्द्ध दृ 4 ;क्द्ध 9 रिक्त स्थान भरिए - 38ण् यदि । एक 3 × 3 कोटि का आव्यूह है तो द्य3।द्य त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 39ण् यदि । एक 3 × 3 कोटि का व्युत्क्रमणीय आव्यूह है तब द्य।दृ1 द्य त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 22ग दृ गग दृ ग22 221 22ग दृ गग दृ ग40ण् यदि गए लए ्र ∈ त्ए तब सारण्िाक 33 331 बराबर है ऋऋऋऋऋऋऋ। 22ग दृ गग दृ ग44 441 20 बवे θ ेपद θ बवेθ ेपद θ 0 त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋण् 41ण् यदि बवे2θ त्र 0ए तब ेपद θ 0 बवे θ 42ण् यदि । एक 3 × 3 कोटि का आव्यूह है तब ;।2द्धदृ1 त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋ 43ण् यदि । एक 3 × 3 कोटि का आव्यूह है तब । के सारण्िाक के सभी उप - सारण्िाकों की संख्या ऋऋऋऋऋऋऋऋ है। 44ण् एक सारण्िाक । की किसी पंक्ित के अवयवों और उनके संगत सहखंडों के गुणनपफल का योग ऋऋऋऋऋऋऋऋऋ के बराबर होता है। ग 37 45ण् यदि समीकरण त्र 0 का एक मूल ग त्र दृ 9 है तब इसके अन्य दो मूल2 ग 2 76 गऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ हैं। 0 गल्र ग ्र− 46ण् लग− 0 ल्र− त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ्रग− ्र ल− 0 1719 23;1़ गद्ध ;1 ़ गद्ध ;1़ गद्ध 2329 34;1़ गद्ध ;1 ़ गद्ध ;1 ़ गद्ध47ण् यदि ि;गद्ध त्र त्र । ़ ठग ़ ब्ग2 ़ ण्ण्ण्ए है तब 41 43 47;1़ गद्ध ;1 ़ गद्ध ;1़गद्ध । त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋ बताइए कि प्रश्न 48 से 58 तक दिए गए कथन सत्य हैं या असत्य - ।1348ण् ।3दृ1 त्र ए जहाँ । एक वगर् आव्यूह है और द्य।द्य ≠ 0 है। 49ण् ;ं।द्धदृ1 त्र 1।दृ1ए जहाँ ं एक वास्तविक संख्या हैैे और । एक वगर् आव्यूह है।ं 50ण् द्य।दृ1द्य ≠ द्य।द्यदृ1 ए जहाँ । व्युत्क्रमणीय आव्यूह है। 51ण् यदि। औरठ कोटि 3 के आव्यूह हैं और द्य।द्य त्र 5ए द्यठद्य त्र 3ए तबद्य3।ठद्य त्र 27 × 5 × 3 त्र 405ण् 52ण् यदि तीन कोटि के एक सारण्िाक का मान 12 है तब इसके प्रत्येक अवयव को इसके सहखंड से बदलने पर प्राप्त सारण्िाक का मान 144 होगा। ग ़1 ग ़ 2 ग ़ ं ग ़ 2 ग ़3 ग ़ इ53ण् त्र0ए जहाँ ंए इए बए ।ण्च् में है। ग ़ 3 ग ़ 4 ग ़ ब 54ण् द्यंकरण् ।द्य त्र द्य।द्य2 ए जहाँ। एक कोटि 2 का वगर् आव्यूह है। ेपद। बवे। ेपद।़बवेठ ेपदठ बवे। ेपदठ़बवेठ 55ण् सारण्िाक त्र 0 ेपदब् बवे। ेपदब़्बवेठ गंचनस िलइ ुअ उह 56ण् यदि सारण्िाक को कोटि 3 केज्ञ सारण्िाकों में ऐसे विघटित किया ़्रबतू दी जाए कि उनके प्रत्येक अवयव में केवल एक पद हो तब ज्ञ का मान 8 है। ंचग 57ण् यदि इुल बत्र 11 58ण् 1;1 ़ेपद θद्ध 16 ए है तब Δत्र1 1 चगंगंच ़़़ ुलइल इु ़़़ त्र32 होगा। त्र ब्र बत ़़़ 1 111़बवे θ 1 का अध्िकतम मान 2 है।

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