1ण्1 समग्र अवलोकन ;व्अमतअपमूद्ध 1ण्1ण्1 संबंध् किसी अरिक्त समुच्चय । से अरिक्त समुच्चय ठ में संबंध् त् कातीर्य गुणन । × ठ का एक उप - समुच्चय होता है। समुच्चय । से समुच्चय ठ में संबंध् त् के क्रमित युग्मों के सभी प्रथम घटकों के समुच्चय को संबंध् त् का प्रांत कहते हैं। समुच्चय। से समुच्चय ठ में संबंध् त् के क्रमित युग्मों के सभी द्वितीय घटकों के समुच्चय को संबंध् त् का परिसर कहते हैं। संपूणर् समुच्चय ठ संबंध् त् का सह - प्रांत कहलाता है। नोट कीजिए कि परिसर सदैव सह - प्रांत का एक उप - समुच्चय होता है। 1ण्1ण्2 संबंधें के प्रकार किसी समुच्चय । से । में संबंध् त्ए । × । का एक उप - समुच्चय होता है। अतः रिक्त समुच्चय φ तथा । ×। ;स्वयंद्ध, दो अन्त्य ; द्ध संबंध् हैं। ;पद्ध किसी समुच्चय । पर परिभाष्िात संबंध् त् एक रिक्त संबंध् कहलाता है, यदि । का कोइर् भी अवयव । के किसी भी अवयव से संबंध्ित नहीं है, अथार्त् त् त्र φ⊂ । ×। ;पपद्ध किसी समुच्चय । पर परिभाष्िात संबंध्त्ए एक सावर्त्रिाक ;नदपअमतेंसद्ध संबंध् कहलाता है, यदि । का प्रत्येक अवयव । के सभी अवयव से संबंध्ित हैं, अथार्त् त् त्र ।× । ;पपपद्ध समुच्चय । पर संबंध् त् स्वतुल्य ;तमसिमगपअमद्ध कहलाता है, यदि सभी ं∈। के लिए ंत्ं त् सममित ;ेलउउमजतपबद्ध कहलाता है, यदि ∀ ंए इ ∈ । के लिए ंत्इ ⇒ इत्ं तथा यह संक्रामक ;जतंदेपजपअमद्ध कहलाता है, यदि ∀ ंए इए ब ∈ । के लिए ंत्इ तथा इत्ब ⇒ ंत्ब कोइर् भी संबंध्, जो स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक है, एक तुल्यता ;मुनपअंसमदबमद्ध संबंध् 1ण्1ण्3 पफलनों के प्रकार ;पद्ध कोइर् पफलन िरू ग् → ल् एवैफकी ;वदम.वदमद्ध ख्या एवैफक ;पदरमबजपअमद्ध, पफलन कहलाता है, यदि िके अंतगर्त ग् के भ्िान्न - भ्िान्न अवयवों के प्रतिबिंब भी भ्िान्न - भ्िान्न होते हैं, अथार्त् ग∈ ग्ए ि;गद्ध त्र ि;गद्ध ⇒ ग त्र ग1 ए ग2 1212 ;पपद्ध पफलन िरू ग् → ल् आच्छादक ;वदजवद्ध ख्या आच्छादी ;ेनतरमबजपअमद्ध, कहलाता है, यदि िके अंतगर्त ल् का प्रत्येक अवयव, ग् के किसी न किसी अवयव का प्रतिबिंब है, अथार्त् प्रत्येक ल ∈ ल् के लिए, ग् में एक ऐसे अवयव ग का अस्ितत्व है कि ि;गद्ध त्र ल ;पपपद्ध पफलन िरू ग् → ल् एक एवैफकी तथा आच्छादक ख्या एवैफकी आच्छादी ;इपरमबजपअमद्ध, कहलाता है, यदि िएवैफकी तथा आच्छादक दोनों ही होता है। 1ण्1ण्4 पफलनों का संयोजन ;पद्ध मान लीजिए कि ि रू। → ठ तथा ह रू ठ → ब् दो पफलन हैं। तब ितथा ह का संयोजनए हवएि द्वारा निरूपित पफलन हव िरू । → ब् निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात हैः हव ि;गद्ध त्र ह ; ि;गद्धद्धए ∀ ग ∈ । ;पपद्ध यदि िरू । → ठ तथा ह रू ठ → ब् एवैफकी हैं, तो हव िरू । → ब् भी एवैफकी होता है ;पपपद्ध यदि िरू । → ठ तथा ह रू ठ → ब् आच्छादक हैं, तो हव िरू । → ब् भी आच्छादक होता है। तथापि, उपयुर्क्त कथ्िात नियम ;परिणामद्ध ;पपद्ध तथा;पपपद्ध के विलोम आवश्यक रूप से सत्य नहीं होते हैं। इसके अतिरिक्त इस संबंध् में निम्नलिख्िात नियम ;परिणामद्ध हैं। ;पअद्ध मान लीजिए कि िरू । → ठ तथा ह रू ठ → ब् दो दिए हुए पफलन इस प्रकार हैं कि हव िएवैफकी है, तो िभी एवैफकी है। ;अद्ध मान लीजिए कि िरू । → ठ तथा ह रू ठ → ब् दो दिए हुए पफलन इस प्रकार हैं कि हव िआच्छादी है, तो ह भी आच्छादी है। 1ण्1ण्5 व्युत्क्रमणीय पफलन ;पद्ध कोइर् पफलन िरू ग् → ल् व्युत्क्रमणीय होता है, यदि एक पफलन ह रू ल् → ग् का अस्ितत्व इस प्रकार है कि ह व ित्र प् तथा िव ह त्र प्ल्ण् पफलन ह को पफलन िका प्रतिलोम कहते हैं तथाग प्रतीक िदृ1 से निरूपित करते हैं। ;पपद्ध एक पफलन िरू ग् → ल् व्युत्क्रमणीय होता है, यदि और केवल यदि िएवैफकी आच्छादी है। ;पपपद्ध यदि िरू ग् → ल्ए ह रू ल् → र् तथा ी रू र् → ै तीन पफलन हैं, तो ी व ;ह व द्धि त्र ;ी व हद्ध व ि;पअद्ध मान लीजिए कि िरू ग् → ल् तथा ह रू ल् → र् दो व्युत्क्रमणीय पफलन हैं तो ह व िभी व्युत्क्रमणीय होता है, इस प्रकार कि ;ह व द्धिदृ1 त्र िदृ1 व हदृ1ण् 1ण्1ण्6 द्वि - आधरी संियाएँ ;पद्ध किसी समुच्चय। में एक द्वि - आधरी संिया ’ एक पफलन’ रू। ×। → ।ण्है। हम ’ ;ंए इद्ध को ं ’ इ द्वारा निरूपित करते हैं। ;पपद्ध समुच्चय ग् में एक द्वि - आधरी संिया ’ क्रम - विनिमेय कहलाती है, यदि प्रत्येक ंए इ ∈ ग् के लिए ं ’ इ त्र इ ’ ं ;पपपद्ध एक द्वि - आधरी संिया ’ रू। ×। → । साहचयर् कहलाती है, यदि प्रत्येक ंए इए ब ∈ । के लिए ;ं ’ इद्ध ’ ब त्र ं ’ ;इ ’ बद्ध ;पअद्ध किसी प्रदत्त द्वि - आधरी संिया ’रू ।× ।→। के लिए, एक अवयवम ∈ ।ए यदि इसका अस्ितत्व है, संिया ’ का तत्समक ;पकमदजपजलद्ध कहलाता है, यदि ं ’ म त्र ं त्र म ’ ंए ∀ ं ∈। ;अद्ध । में तत्समक अवयव म वाले प्रदत्त एक द्वि - आधरी संिया ’रू ।× । → ।ए के लिए, किसी अवयव ं ∈ । को संिया ’ के संदभर् में व्युत्क्रमणीय कहते हैं, यदि । में एक ऐसे अवयव इ का अस्ितत्व इस प्रकार है कि ं ’ इ त्र म त्र इ ’ ं तथा इ को ं का प्रतिलोम ;पदअमतेमद्ध कहते हैं और जिसे प्रतीक ंदृ1 द्वारा निरूपित करते हैं। 1ण्2 हल किए हुए उदाहरणलघु उत्तरीय ;ैण्।ण्द्ध उदाहरण 1 मान लीजिए कि । त्र क्ष्0ए 1ए 2ए 3द्व तथा । में एक संबंध् त् निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात कीजिएः त् त्र क्ष्;0ए 0द्धए ;0ए 1द्धए ;0ए 3द्धए ;1ए 0द्धए ;1ए 1द्धए ;2ए 2द्धए ;3ए 0द्धए ;3ए 3द्धद्व क्या त् स्वतुल्य, सममित, संक्रामक है? हल त् स्वतुल्य तथा सममित है, पंरतु संक्रामक नहीं है, क्योंकि;1ए 0द्ध ∈ त् तथा;0ए 3द्ध ∈ त् जब कि ;1ए 3द्ध ∉ त् उदाहरण 2 समुच्चय। त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वए के लिए एक संबंध् त् नीचे लिखे अनुसार परिभाष्िात कीजिएः त् त्र क्ष्;1ए 1द्धए ;2ए 2द्धए ;3ए 3द्धए ;1ए 3द्धद्व उन क्रमित युग्मों को लिख्िाए, जिनको त् में जोड़ने से वह न्यूनतम ;छोटे से छोटाद्ध तुल्यता संबंध् बन जाए। हल ;3ए 1द्ध एक अकेला क्रमित युग्म है जिसको त् में जोड़ने से वह छोटे से छोटा तुल्यता संबंध् बन जाता है। उदाहरण 3 मान लीजिए कि त् त्र क्ष्;ंए इद्ध रू संख्या 2ए ं दृ इ को विभाजित करती हैद्व द्वारा परिभाष्िात संबंध् त् पूणा±कों के समुच्चय र् में तुल्यता संबंध् है। तुल्यता - वगर् ख्0, लिख्िाए। हल ख्0, त्र क्ष्0ए ± 2ए ± 4ए ± 6एण्ण्ण्द्व उदाहरण 4 मान लीजिए कि पफलन िरू त् → त् ए ि;गद्ध त्र 4ग दृ 1ए ∀ ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात है, तो सि( कीजिए कि िएवैफकी है। हल किन्हीं दो अवयव ग1ए ग∈ त्ए इस प्रकार कि ि;गद्ध त्र ि;गद्धए के लिए2 124ग1 दृ 1 त्र 4ग2 दृ 1 ⇒ 4ग1 त्र 4ग2ए अथार्त् ग1 त्र ग2 अतः िएवैफकी है। उदाहरण 5 यदि ित्र क्ष्;5ए 2द्धए ;6ए 3द्धद्वए ह त्र क्ष्;2ए 5द्धए ;3ए 6द्धद्वए तो िव ह लिख्िाए। हल िव ह त्र क्ष्;2ए 2द्धए ;3ए 3द्धद्व उदाहरण 6 मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र 4ग दृ 3 ∀ ग ∈ त्ण् द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तो िदृ1 लिख्िाए। हल दिया हुआ है कि ि;गद्ध त्र 4ग दृ 3 त्र ल, ;मान लीजिएद्धए तो 4ग त्र ल ़ 3 ल ़3⇒ ग त्र 4 ल ़3अतः िदृ1 ;लद्ध त्र 4 उदाहरण 7 क्या र् ;पूणा±कों का समुच्चयद्ध में उ ’ द त्र उ दृ द ़ उद ∀ उए द ∈ र् द्वारा परिभाष्िात द्विआधरी - संिया ’ क्रम - विनिमेय है? हल ’ क्रमविनिमेय नहीं है, क्योंकि 1ए 2 ∈ र् तथा 1 ’ 2 त्र 1 दृ 2 ़ 1ण्2 त्र 1 जब कि 2 ’ 1 त्र 2 दृ 1 ़ 2ण्1 त्र 3 इस प्रकार 1 ’ 2 ≠ 2 ’ 1ण् उदाहरण 8 यदि ित्र क्ष्;5ए 2द्धए ;6ए 3द्धद्व तथा ह त्र क्ष्;2ए 5द्धए ;3ए 6द्धद्वए तो ितथा ह के परिसर लिख्िाए। हल िका परिसर क्ष्2ए 3द्व तथा ह का परिसर त्र क्ष्5ए 6द्व उदाहरण9 यदि । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व तथा एि हए । ×। के उप - समुच्चय के संग निम्नलिख्िात प्रकार सूचित संबंध् हैं ित्र क्ष्;1ए 3द्धए ;2ए 3द्धए ;3ए 2द्धद्व ह त्र क्ष्;1ए 2द्धए ;1ए 3द्धए ;3ए 1द्धद्व ितथा ह में से कौन पफलन है और क्यों? हल िएक पफलन है क्योंकि क्रमित युग्मों में प्रथम स्थान ;घटकद्ध में । का प्रत्येक अवयव द्वितीय स्थान ;घटकद्ध में । के केवल एक ही अवयव से संबंध्ित है जब कि ह एक पफलन नहीं है क्योंकि 1ए । के एक से अध्िक अवयवों से संबंध्ित है, नामतः 2 तथा 3 से। उदाहरण 10 यदि । त्र क्ष्ंए इए बए कद्व तथा ित्र क्ष्ंए इद्धए ;इए कद्धए ;बए ंद्धए ;कए बद्धद्व तो सि( कीजिए कि िएवैफकी है तथा। से। पर आच्छादी है। िदृ1 भी ज्ञात कीजिए। हल िएवैफकी है, क्योंकि । का प्रत्येक अवयव समुच्चय । के एक अद्वितीय अवयव से निदिर्ष्ट ;संबंध्ितद्ध है। साथ ही िआच्छादी है, क्योंकि ि;।द्ध त्र । । इसके अतिरिक्त िदृ1 त्र क्ष्;इए ंद्धए ;कए इद्धए ;ंए बद्धए ;बए कद्धद्वण् उदाहरण 11 प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ में उ ’ द त्र हण्बण्क ;उए दद्धए उए द ∈ छ द्वारा द्वि - आधरी - संिया ’ परिभाष्िात कीजिए। क्या संिया ’ क्रमविनिमेय तथा साहचयर् है? हल संिया स्पष्टतः क्रम - विनिमेय है, क्योंकिउ ’ द त्र हण्बण्क ;उए दद्ध त्र हण्बण्क ;दए उद्ध त्र द ’ उ ∀ उए द ∈ छ यह साहचयर् भी है, क्योंकि सए उए द ∈ छ के लिए, स ’ ;उ ’ दद्ध त्र हण् बण् क ;सए हण्बण्क ;उए दद्धद्ध त्र हण्बण्कण् ;हण् बण् क ;सए उद्धए दद्ध त्र ;स ’ उद्ध ’ द दीघर् उत्तरीय ;स्ण्।द्ध उदाहरण12 प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ में एक संबंध्त् निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात कीजिएः ∀ दए उ ∈ छए दत्उ यदि द तथा उ में से प्रत्येक संख्या को 5 से विभाजित करने पर शेषपफल 5 से कम बचता है, अथार्त्,0ए 1ए 2ए 3 तथा4 में से कोइर् एक संख्या। सि( कीजिए कि त् एक तुल्यता संबंध् है। साथ ही त् द्वारा निधर्रित युगलतः असंयुक्त उप - समुच्चयों को भी ज्ञात कीजिए। हल त् स्वतुल्य है, क्योंकि प्रत्येक ं ∈ छ के लिए ंत्ंए त् सममित है, क्योंकि ंए इए ∈ छ के लिए, यदि ंत्इए तथा इत्ं त्र 54±ए साथ ही, त् संक्रामक है, क्योंकि ंए इए ब ∈ छ के लिए, यदि ंत्इ तथा ंत्ब तो ंत्ब अतः त्ए छ में एक तुल्यता संबंध् है, जो समुच्चय छ का युगलतः असंयुक्त उपसमुच्चयों में विभाजन ;चंतजपजपवदद्ध कर देता है। इस विभाजन से प्राप्त तुल्यता - वगर् नीचे उल्िलख्िात हैंः ।0 त्र क्ष्5ए 10ए 15ए 20 ण्ण्ण्द्व ।1 त्र क्ष्1ए 6ए 11ए 16ए 21 ण्ण्ण्द्व ।2 त्र क्ष्2ए 7ए 12ए 17ए 22ए ण्ण्ण्द्व ।3 त्र क्ष्3ए 8ए 13ए 18ए 23ए ण्ण्ण्द्व ।4 त्र क्ष्4ए 9ए 14ए 19ए 24ए ण्ण्ण्द्व यह सुस्पष्ट है कि उपयुर्क्त पाँच समुच्च्य युगलतः असंयुक्त हैं तथा 4 ।∪ ।∪ ।∪ ।∪ । त्र ∪ ।प त्र छ 0123 4प त्र0 ग उदाहरण 13 सि( कीजिए कि ि;गद्ध त्र ए∀∈त् ए द्वारा परिभाष्िात पफलन िरू त् → त् न तो ग2 ़1 ग एवैफकी है और न आच्छादी है। हल ग1ए ग2 ∈ त्ए के लिए विचार कीजिए कि ि;ग1द्ध त्र ि;ग2द्ध गग1 त्र 2⇒ 22ग1 ़1 ग2 ़1 ⇒ गग22 ़ गत्र गग12 ़ ग1 1 2 2 दृ ग1द्ध त्र ग2 दृ ग1⇒ ग1 ग2 ;ग2 ⇒ गत्र गया गग त्र 11 2 1 2हम देखते हैं कि गतथा गऐसे दो अवयव हो सकते हैं कि ग≠ गपिफर भी ि;गद्ध त्र ि;गद्धए12 1 2121 221उदाहरणाथर् हम ग1 त्र 2 तथा ग2 त्र 2ए लेते हैं, तो ि;ग1द्ध त्र तथा ि;ग2द्ध त्र परंतु 2≠ अतः ि5 52 एवैफकी नहीं है। साथ ही, िआच्छादी भी नहीं है क्योंकि, यदि ऐसा है, तो 1∈त् के लिए ∃ ग ∈ त् ग इस प्रकार कि ि;गद्ध त्र 1ए जिससे 2 त्र1 प्राप्त होता है। पंरतु प्रांत त् में ऐसा कोइर् अवयव नहींग ़1 है क्योंकि समीकरण ग2 दृ ग ़ 1 त्र 0ए ग का कोइर् वास्तविक मान नहीं देता है। उदाहरण 14 मान लीजिए कि ि;गद्ध त्र ग़ ग तथा ह ;गद्ध त्र गदृ ग ∀ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात एि ह रू त् → त् दो पफलन हैं, तो विह तथा हव िज्ञात कीजिए। हल यहाँ ि;गद्ध त्र ग़ ग जिसे निम्नलिख्िात प्रकार से पुनः परिभाष्िात कर सकते हैंः ⎧2ग यदि ग ≥0 ि;गद्ध त्र ⎨ ⎩0 यदि ग ढ0 इसी प्रकार, ह;गद्ध त्र गदृ ग द्वारा परिभाष्िात पफलन ह निम्नलिख्िात प्रकार से पुनः परिभाष्िात किया जा सकता है, ⎧0 यदि ग≥0 ह ;गद्ध त्र ⎨ ⎩दृ2ग यदि गढ0 इसलिए ह व िनिम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात होगाः ग ≥ 0 के लिए, ;ह व िद्ध ;गद्ध त्र ह ; ि;गद्ध त्र ह ;2गद्ध त्र 0 तथा ग ढ 0ए के लिए ;ह व िद्ध ;गद्ध त्र ह ; ि;गद्ध त्र ह ;0द्ध त्र 0 पफलस्वरूप, ;ह व िद्ध ;गद्ध त्र 0ए ∀ग ∈ त्ण् इसी प्रकार िव ह निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात होता हैः ग ≥ 0 के लिए, ; िव ह द्ध ;गद्ध त्र ि;ह ;गद्ध त्र ि;0द्ध त्र 0 तथा ग ढ 0 के लिए, ; िव ह द्ध ;गद्ध त्र ि;ह;गद्धद्ध त्र ि;दृ2 गद्ध त्र दृ 4ग ⎧0ए ग झ0द्ध; द्ध त्र⎨अथार्त्, ; विह ग ⎩−4एगग ढ0 उदारण 15 मान लीजिए कि त् वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है तथा िरू त् → त् एक पफलन है, जो ि;गद्ध त्र 4ग ़ 5 द्वारा परिभाष्िात है। सि( कीजिए कि िव्युत्क्रमणीय है तथा िदृ1 ज्ञात कीजिए। हल यहाँ पफलन िरू त् → त् निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात हैः ि;गद्ध त्र 4ग ़ 5 त्र ल ;मान लीजिएद्ध, तोल −54ग त्र ल दृ 5 या ग त्र 4 ल −5जिससे ह ;लद्ध त्र 4 द्वारा परिभाष्िात एक पफलन ह रू त् → त् मिलता है। इसलिए ;ह व द्धि ;गद्ध त्र ह; ि;गद्ध त्र ह ;4ग ़ 5द्ध 4ग ़−55 त्र त्र ग4 या ह व ित्र प्त् इसी प्रकार ; िव हद्ध ;लद्ध त्र ि;ह;लद्धद्ध ⎛ल −5 ⎞ित्र ⎜⎟⎝ 4 ⎠ ⎛ ल −5 ⎞ त्र 4 ⎜ ⎟़ 5 त्र ल⎝ 4 ⎠या िव ह त्र प्त्ण् ग −5अतः िव्युत्क्रमणीय है तथा िदृ1 त्र ह , जिससे िदृ1 ;गद्ध त्र 4 मिलता है। उदाहरण 16 मान लीजिए कि फ में परिभाष्िात ’ एक द्वि - आधरी संिया है। ज्ञात कीजिए कि निम्नलिख्िात द्वि - आधरी संियाओं में से कौन - कौन साहचयर् हैंः ;पद्ध ंए इ ∈ फ के लिए ं ’ इ त्र ं दृ इ ंइ;पपद्ध ंए इ ∈ फ के लिए ं ’ इ त्र 4 ;पपपद्ध ंए इ ∈ फ के लिए ं ’ इ त्र ं दृ इ ़ ंइ ;पअद्ध ंए इ ∈ फ के लिए ं ’ इ त्र ंइ2 हल ;पद्ध ’ साहचयर् नहीं है, क्योंकि यदि हम ं त्र 1ए इ त्र 2 तथा ब त्र 3ए लेते हैं, तो ;ं ’ इद्ध ’ ब त्र ;1 ’ 2द्ध ’ 3 त्र ;1 दृ 2द्ध ’ 3 त्र दृ 1 दृ 3 त्र दृ 4 तथा ं ’ ;इ ’ बद्ध त्र 1 ’ ;2 ’ 3द्ध त्र 1 ’ ;2 दृ 3द्ध त्र 1 दृ ; दृ 1द्ध त्र 2 अतः ;ं ’ इद्ध ’ ब ≠ ं ’ ;इ ’ बद्ध और इसलिए ’ साहचयर् नहीं है। ;पपद्ध ’ साहचयर् है, क्योंकि फ में गुणन साहचयर् होता है। ;पपपद्ध ’ साहचयर् नहीं है, क्योंकि यदि हम ं त्र 2ए इ त्र 3 तथा ब त्र 4 लेते हैं, तो ;ं ’ इद्ध ’ ब त्र ;2 ’ 3द्ध ’ 4 त्र ;2 दृ 3 ़ 6द्ध ’ 4 त्र 5 ’ 4 त्र 5 दृ 4 ़ 20 त्र 21ए तथा ं ’ ;इ ’ बद्ध त्र 2 ’ ;3 ’ 4द्ध त्र 2 ’ ;3 दृ 4 ़ 12द्ध त्र 2 ’ 11 त्र 2 दृ 11 ़ 22 त्र 13 अतः ;ं ’ इद्ध ’ ब ≠ ं ’ ;इ ’ बद्ध और इसलिए ’ साहचयर् नहीं है। ;पअद्ध ’ साहचयर् नहीं है, क्योंकि यदि हम ं त्र 1ए इ त्र 2 तथा ब त्र 3 लेते हैं, तो ;ं ’ इद्ध ’ ब त्र ;1 ’ 2द्ध ’ 3 त्र 4 ’ 3 त्र 4 × 9 त्र 36 तथा ं ’ ;इ ’ बद्ध त्र 1 ’ ;2 ’ 3द्ध त्र 1 ’ 18 त्र 1 × 182 त्र 324 अतः ;ं ’ इद्ध ’ ब ≠ ं ’ ;इ ’ बद्ध और इसलिए ’ संक्रामक नहीं है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न उदाहरण 17 से 25 तक प्रत्येक में दिए हुए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए - उदाहरण 17 मान लीजिए कि त् प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ में एक संबंध् है, जो दत्उ यदि द विभाजित करता है उ को, द्वारा परिभाष्िात है, तो त् ;।द्ध स्वतुल्य एवं सममित है। ;ठद्ध संक्रामक एवं सममित है ;ब्द्ध तुल्यता संबंध् है ;क्द्ध स्वतुल्य, संक्रामक है परंतु सममित नहीं है हल सही विकल्प ;क्द्ध है, क्योंकि द विभाजित करता है द कोए ∀ द ∈ छए तो त् स्वतुल्य है। त् सममित नहीं है, क्योंकि 3ए 6 ∈ छ परंतु 3त्≠ 6 त् 3ण् त् संक्रामक है, क्योंकि दए उए त के लिए जब - जब दध्उ तथा6 उध्त ⇒ दध्तए अथार्त्, जब - जब द विभाजित करता है त को। उदाहरण18 मान लीजिए कि स् किसी समतल में स्िथत सभी सरल रेखाओं के समुच्चय को निरूपित करता है। मान लीजिए कि एक संबंध् त्, नियम सत्उ यदि और केवल यदि स लम्ब है उ पर, ∀ सए उ ∈ स्, द्वारा परिभाष्िात है। तब त् ;।द्ध स्वतुल्य है ;ठद्ध सममित है ;ब्द्ध संक्रामक है ;क्द्ध इनमें से कोइर् भी नहीं है हल सही विकल्प ;ठद्ध है। उदाहरण 19 मान लीजिए कि छ प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है तथा िरू छ → छए ि;दद्ध त्र 2द ़ 3 ∀ द ∈ छ द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तो ि;।द्धआच्छादी है ;ठद्ध एवैफक है ;ब्द्ध एवैफकी आच्छादी है ;क्द्धइनमें से कोइर् भी नहीं है हल ;ठद्ध सही विकल्प है। उदाहरण 20 समुच्चय । में 3 अवयव हैं तथा समुच्चय ठ में 4 अवयव हैं, तो । से ठ में परिभाष्िात एवैफक प्रतिचित्राणों की संख्या ;।द्ध144 ;ठद्ध 12 ;ब्द्ध 24 ;क्द्ध 64 हल सही विकल्प ;ब्द्ध है। 3 अवयव वाले समुच्चय से 4 अवयव वाले समुच्चय में एवैफक प्रतिचित्राणों की वुफल संख्या 4च्है। अथार्त् 4! त्र 243 उदाहरण 21 मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ेपद ग तथा ह रू त् → त् ह ;गद्ध त्र ग2, द्वारा परिभाष्िात हैं, तो िव ह ेपद ग ;।द्ध ग2 ेपद ग ;ठद्ध ;ेपद गद्ध2 ;ब्द्ध ेपद ग2 ;क्द्ध 2ग हल ;ब्द्ध सही विकल्प है। उदाहरण 22 मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र 3ग दृ 4ए द्वारा परिभाष्िात है, तो िदृ1 ;गद्ध ग ़ 4 ग ;।द्ध 3 ;ठद्ध 3 −4 ;ब्द्ध 3ग ़ 4 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है। हल ;।द्ध सही विकल्प है। उदाहरण 23 मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ग2 ़ 1 द्वारा परिभाष्िात है, तो 17 तथा दृ3 के पूवर् प्रतिबिम्ब क्रमशःण् ;।द्ध φए क्ष्4ए दृ 4द्व ;ठद्ध क्ष्3ए दृ 3द्व ;ब्द्ध क्ष्4ए दृ 4द्वए φ ;क्द्ध क्ष्4ए दृ 4द्वए क्ष्2ए दृ2द्व है। हल ;ब्द्ध सही विकल्प है, क्योंकि िदृ1 ; 17 द्ध त्र ग ⇒ ि;गद्ध त्र 17 या ग2 ़ 1 त्र 17 ⇒ ग त्र ± 4 या िदृ1 ; 17 द्ध त्र क्ष्4ए दृ 4द्व तथा िदृ1 ;दृ3द्ध के लिए, िदृ1 ;दृ3द्ध त्र ग ⇒ ि;गद्ध त्र दृ 3 ⇒ ग2 ़ 1 त्र दृ 3 ⇒ ग2 त्र दृ 4 अतः िदृ1 ;दृ 3द्ध त्र φ उदाहरण24 वास्तविक संख्याओं ग तथाल के लिए परिभाष्िात कीजिए कि गत्लए यदि और केवल यदि ग दृ ल ़2 एक अपरिमेय संख्या है, तो संबंध् त् ;।द्ध स्वतुल्य है ;ठद्ध सममित है ;ब्द्ध संक्रामक है ;क्द्धइनमें से कोइर् भी नहीं हैै हल ;।द्ध सही विकल्प है। उदाहरण 25 से 30 तक प्रत्येक में रिक्त स्थान की पूतिर् कीजिए। उदाहरण 25 समुच्चय । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व पर विचार कीजिए तथा त्ए । में छोटे से छोटा तुल्यता संबंध् है, तो त् त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋ हल त् त्र क्ष्;1ए 1द्धए ;2ए 2द्धए ;3ए 3द्धद्वण् उदाहरण 26 ि;गद्ध त्र ग2दृ3ग ़ 2 द्वारा परिभाष्िात पफलन िरू त् → त् का प्रांत ऋऋऋऋऋऋऋऋहै। हल यहाँ ग2 दृ 3ग ़ 2 ≥ 0 ⇒ ;ग दृ 1द्ध ;ग दृ 2द्ध ≥ 0⇒ ग ≤ 1 या ग ≥ 2 अतः िका प्रांत त्र ;दृ ∞ए 1, ∪ ख्2ए ∞द्ध उदाहरण 27 द अवयवों वाले समुच्चय । पर विचार कीजिए। । से स्वयं । पर एवैफकी आच्छादक पफलनों की वुफल संख्या ऋऋऋऋऋऋऋऋहै। हल द! उदाहरण28 मान लीजिए कि र् पूणार्ंकों का समुच्चय है तथा त्ए र् में परिभाष्िात एक संबंध् इस प्रकार है कि ंत्इए यदि ं दृ इ भाज्य है 3 से, तो त् समुच्चय र् को ऋऋऋऋऋऋऋऋ युगलतः असंयुक्त उप - समुच्चयों में विभाजन करता है। हल तीन उदाहरण 29 मान लीजिए कि त् वास्तविक संख्याओं का समुच्चय है तथा त् में एक द्वि - आधरी संिया ’ इस प्रकार परिभाष्िात है कि ं ’ इ त्र ं ़ इ दृ ंइ ∀ ंए इ ∈ त्ण् तो द्वि - आधरी संिया ’ के लिए तत्समक अवयवऋऋऋऋऋऋऋहै। हल द्वि - आधरी सिया ’ के लिए तत्समक अवयव 0 है। उदाहरण 30 से 34 तक प्रत्येक में प्रदत्त कथन सत्य हैं या असत्य हैं - उदाहरण 30 समुच्चय । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व तथा संबंध् त् त्र क्ष्;1ए 2द्धए ;1ए 3द्धद्व पर विचार कीजिए। त् एक संक्रामक संबंध् है। हल सत्य है। उदाहरण 31 मान लीजिए कि । एक परिमित समुच्चय है, तो । से स्वयं । में प्रत्येक एवैफक पफलन आच्छादी नहीं है। हल असत्य है। उदाहरण 32 समुच्चय ।ए ठ तथा ब् के लिए, मान लीजिए कि िरू । → ठए ह रू ठ → ब् पफलन इस प्रकार के हैं कि पफलन ह व िएवैफक है, तो ितथा ह दोनों ही एवैफक पफलन हैं। हल असत्य है। उदाहरण 33 समुच्चय ।ए ठ तथा ब् के लिए, मान लीजिए कि िरू । → ठए ह रू ठ → ब् पफलन इस प्रकार के हैं कि पफलन ह व िआच्छादी है, तो ह भी आच्छादी है। हल सत्य है। उदाहरण 34 मान लीजिए कि छ प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है, तो ं ’ इ त्र ं ़ इए ∀ ंए इ ∈ छ द्वारा छ में परिभाष्िात द्वि - आधरी संिया ’ के लिए तत्समक अवयव है। हल असत्य है। 1ण्3 प्रश्नावली लघु उत्तरीय प्रश्न ;ै।द्ध 1ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्ंए इए बद्व तथा । में परिभाष्िात संबंध् त् निम्नलिख्िात हैः त् त्र क्ष्;ंए ंद्धए ;इए बद्धए ;ंए इद्धद्वण् तो उन क्रमित युग्मों की, कम से कम, संख्या लिख्िाए, जिनको त् में जोड़ने से त् स्वतुल्य तथा संक्रामक बन जाता है। 2ण् मान लीजिए कि क्ए ि;गद्ध त्र 25− ग2 द्वारा परिभाष्िात, वास्तविक मान पफलन िका प्रांत है, तो क् को लिख्िाए। 3ण् मान लीजिए कि िए ह रू त् → त् क्रमशः ि;गद्ध त्र 2ग ़ 1 तथा ह ;गद्ध त्र ग2 दृ 2ए ∀ ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात हैं, तो ह व िज्ञात कीजिए।4ण् मान लीजिए कि िरू त् → त् पफलन ि;गद्ध त्र 2ग दृ 3 ∀ ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात है। िदृ1 लिख्िाए।5ण् यदि । त्र क्ष्ंए इए बए कद्व तथा पफलन ित्र क्ष्;ंए इद्धए ;इए कद्धए ;बए ंद्धए ;कए बद्धद्वए तो िदृ1 लिख्िाए।6ण् यदि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ग2 दृ 3ग ़ 2 द्वारा परिभाष्िात है, तो ि; ि;गद्धद्ध लिख्िाए।7ण् क्या ह त्र क्ष्;1ए 1द्धए ;2ए 3द्धए ;3ए 5द्धए ;4ए 7द्धद्व एक पफलन है? यदि हए ह ;गद्ध त्र αग ़ β द्वारा वण्िार्त है, तो α तथा β का मान क्या निधर्रित होना चाहिए?8ण् क्या क्रमित युग्मों के निम्नलिख्िात समुच्चय, पफलन हैं? यदि ऐसा है, तो जाँच कीजिए कि प्रतिचित्राण एवैफक अथवा आच्छादी हैं कि नहीं हैं। ;पद्ध क्ष्;गए लद्धरू ग एक व्यक्ित है, ल माँ है ग कीद्व ;पपद्धक्ष्;ंए इद्धरू ं एक व्यक्ित है, इ पूवर्ज है ं काद्व9ण् यदि प्रतिचित्राण ितथाह क्रमशः ित्र क्ष्;1ए 2द्धए ;3ए 5द्धए ;4ए 1द्धद्व तथाह त्र क्ष्;2ए 3द्धए ;5ए 1द्धए ;1ए 3द्धद्व द्वारा दत्त हैं, तो वि ह लिख्िाए। 10ण् मान लीजिए कि ब् सम्िमश्र संख्याओं का समुच्चय है। सि( कीजिए कि ि;्रद्ध त्र द्य्रद्यए ∀ ्र ∈ ब् द्वारा दत्त प्रतिचित्राण िरू ब् → त् न तो एवैफकी है और न आच्छादक ;आच्छादीद्ध है। 11ण् मान लीजिए कि पफलन िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र बवेगए ∀ ग ∈ त्, द्वारा परिभाष्िात है। सि( कीजिए कि िन तो एवैफकी है और न आच्छादक ;आच्छादीद्ध है। 12ण् मान लीजिए कि ग् त्र क्ष्1ए 2ए 3द्वतथा ल् त्र क्ष्4ए 5द्वण् ज्ञात कीजिए कि क्या ग् ×ल् के निम्नलिख्िात उपसमुच्चय ग् से ल् में पफलन हैं या नहीं हैं। ;पद्ध ित्र क्ष्;1ए 4द्धए ;1ए 5द्धए ;2ए 4द्धए ;3ए 5द्धद्व ;पपद्ध ह त्र क्ष्;1ए 4द्धए ;2ए 4द्धए ;3ए 4द्धद्व ;पपपद्ध ी त्र क्ष्;1ए4द्धए ;2ए 5द्धए ;3ए 5द्धद्व ;पअद्ध ा त्र क्ष्;1ए4द्धए ;2ए 5द्धद्व 13ण् यदि पफलन िरू । → ठ तथा ह रू ठ → । ए ह व ित्र प्को संतुष्ट करते हैं, तो सि( कीजिए। कि ि एवैफक है तथा ह आच्छादक है। 1 14ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्, ि;गद्ध त्र ग त् द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है,2दृबवे ग तो ि का परिसर ज्ञात कीजिए। 15ण् मान लीजिए कि द एक निश्िचत ;स्िथरद्ध ध्न पूणार्ंक है। र् में एक संबंध् त् निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात कीजिएः ंए इ र्ए ंत्इ यदि और केवल यदि ं दृ इ भाज्य है द से। सि( कीजिए कि त् एक तुल्यता संबंध् है। दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;स्ण्।ण्द्ध 16ण् यदि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4 द्वए तो । में निम्नलिख्िात गुणों वाले संबंधें को परिभाष्िात कीजिएः ;ंद्ध स्वतुल्य तथा संक्रामक हों किंतु सममित नहीं हों। ;इद्ध सममित हों परन्तु न तो स्वतुल्य हों और न संक्रामक हों। ;बद्ध स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक हों।17ण् मान लीजिए कि त्, प्रावृफत संख्याओं के समुच्चय छ में निम्नलिख्िात प्रकार से परिभाष्िात एक संबंध् है। त् त्र क्ष्;गए लद्धरू ग छए ल छए 2ग ़ ल त्र 41द्वण् संबंध् त् का प्रांत तथा परिसर ज्ञात कीजिए। साथ ही सत्यापित ;जाँचद्ध कीजिए कि क्या त् स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक है। 18ण् दिया हुआ है कि । त्र क्ष्2ए 3ए 4द्वए ठ त्र क्ष्2ए 5ए 6ए 7द्व निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के एक उदाहरण की रचना कीजिएः ;ंद्ध । से ठ में एक एवैफक प्रतिचित्राण। ;इद्ध । से ठ में एक ऐसा प्रतिचित्राण, जो एवैफक नहीं है। ;बद्ध ठ से । में एक प्रतिचित्राण। 19ण् एक ऐसे प्रतिचित्राण का उदाहरण दीजिए जो - ;पद्ध एवैफकी है किंतु आच्छादक नहीं है।;पपद्ध एवैफकी नहीं है किंतु आच्छादक है।;पपपद्ध न तो एवैफकी है और न आच्छादक है। ग दृ2 20ण् मान लीजिए कि । त्र त् दृ क्ष्3द्वए ठ त्र त् दृ क्ष्1द्वण् मान लीजिए कि िरू । → ठए ि;गद्ध त्र ग दृ3 ग । द्वारा परिभाष्िात है, तो सि( कीजिए कि िएवैफकी आच्छादी है। 21ण् मान लीजिए कि । त्र ख्दृ1ए 1,, तो विचार कीजिए कि क्या । में परिभाष्िात निम्नलिख्िात पफलन एवैफकी, आच्छादक या एवैफकी आच्छादी हैंः ग;पद्ध ;द्ध ;पपद्ध ह;गद्ध त्र ग ीग ग;पअद्ध ा;गद्ध त्र ग2;पपपद्ध ;द्धगगि 2 22ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक छ में एक संबंध् परिभाष्िात करते हैंः;पद्ध ग बड़ा है ल से, गए ल छ ;पपद्ध ग ़ ल त्र 10ए गए ल छ ;पपपद्ध ग ल किसी पूणार्ंक का वगर् है, गए ल छ ;पअद्ध ग ़ 4ल त्र 10 गए ल छ निधर्रित कीजिए कि उपयुर्क्त संबंधें में से कौन - से संबंध् स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक हैं। 23ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए ण्ण्ण् 9द्व तथा । ×। में ;ंए इद्ध, ;बए कद्ध के लिए ;ंए इद्ध त् ;बए कद्ध यदि और केवल यदि ं ़ क त्र इ ़ ब द्वारा परिभाष्िात त् एक संबंध् है। सि( कीजिए कि त् एक तुल्यता संबंध् है तथा तुल्यता - वगर् ख्;2ए 5द्ध, भी प्राप्त ;ज्ञातद्ध कीजिए। 24ण् परिभाषा का प्रयोग करते हुए, सि( कीजिए कि पफलन िरू । → ठ व्युत्क्रमणीय है, यदि और केवल यदि, िएवैफकी तथा आच्छादक दोनो है। 25ण् पफलन िए ह रू त् → त् क्रमशः ि;गद्ध त्र ग2 ़ 3ग ़ 1 तथा ह ;गद्ध त्र 2ग दृ 3 द्वारा परिभाष्िात हैं, तो निम्नलिख्िात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध िव ह ;पपद्ध ह व ि;पपपद्ध िव ि;पअद्ध ह व ह 26ण् मान लीजिए कि एक द्वि - आधरीय संिया ’ फ में परिभाष्िात है। ज्ञात कीजिए कि निम्नलिख्िात द्वि - आधरी संियाओं में से कौन - कौन सी संियाएँ क्रम - विनिमेय हैं ;पद्ध ं ’ इ त्र ं दृ इ ंए इ ∈ फ ;पपद्ध ं ’ इ त्र ं2 ़ इ2 ंए इ ∈ फ ;पपपद्ध ं ’ इ त्र ं ़ ंइ ंए इ ∈ फ ;पअद्ध ं ’ इ त्र ;ं दृ इद्ध2 ंए इ ∈ फ 27ण् मान लीजिए कि त् में द्वि - आधरी संिया ’ए ं ’ इ त्र 1़ ंइए ंए इ ∈ त्ण् तो संिया ’ ;पद्ध क्रम - विनिमेय है किंतु साहचयर् नहीं है। ;पपद्धसाहचयर् है किंतु क्रम - विनिमेय नहीं है। ;पपपद्ध न तो क्रम - विनिमेय है और न साहचयर् है। ;पअद्धक्रम - विनिमेय तथा साहचयर् दोनों ही है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रश्न संख्या 28 से 47 तक प्रत्येक में दिए हुए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए - 28ण् मान लीजिए कि ज्, युक्िलडीय समतल में, सभी त्रिाभुजों का समुच्चय है तथा मान लीजिए कि ज् में एक संबंध् त् इस प्रकार परिभाष्िात है कि ंत्इ , यदि ं सवार्ंगसम है इ के, ंए इ ∈ ज्, तो त् ;।द्ध स्वतुल्य है किंतु संक्रामक नहीं है। ;ठद्ध संक्रामक है किंतु सममित नहीं है। ;ब्द्ध तुल्यता संबंध् है। ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है। 29ण् किसी परिवार में बच्चों के अरिक्त समुच्चय तथा ंत्इ, यदि ं भाइर् है इ का, द्वारा परिभाष्िात संबंध् त् पर विचार कीजिए, तो त् ;।द्ध सममित है किन्तु संक्रामक नहीं है। ;ठद्ध संक्रामक है किन्तु सममित नही है। ;ब्द्ध न तो सममित है और न संक्रामक है ;क्द्ध सममित तथा संक्रामक दोनों है। 30ण् समुच्चय । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व में तुल्यता संबंधें की अध्िकतम संख्या ;।द्ध 1 ;ठद्ध2 ;ब्द्ध3 ;क्द्ध 5 है। 31ण् यदि समुच्चय क्ष्1ए 2ए 3द्व में त् त्र क्ष्;1ए 2द्धद्व द्वारा परिभाष्िात एक संबंध् त् है, तो त् ;।द्ध स्वतुल्य है ;ठद्ध संक्रामक है ;ब्द्ध सममित है ;क्द्धइनमें से कोइर् भी नहीं हैै 32ण् मान लीजिए कि हम त् में एक संबंध् त् इस प्रकार परिभाष्िात करें कि ंत्इ,यदि ं ≥ इ, तो त् ;।द्ध एक तुल्यता संबंध् है ;ठद्ध स्वतुल्य तथा संक्रामक है किंतु सममित नहीं है ;ब्द्ध सममित तथा संक्रामक है किंतु ;क्द्ध न तो संक्रामक है और न स्वतुल्य है किंतु स्वतुल्य नहीं हंै सममित है 33ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व संबंध् त् त्र क्ष्1ए 1द्धए ;2ए 2द्धए ;3ए 3द्धए ;1ए 2द्धए ;2ए 3द्धए ;1ए3द्धद्व पर विचार कीजिए, तो त् ;।द्ध स्वतुल्य है किंतु सममित नहीं है ;ठद्ध स्वतुल्य है किंतु संक्रामक नहीं है ;ब्द्ध सममित तथा संक्रामक है ;क्द्ध न तो सममित है और न संक्रामक है ंइ34ण् फ ् क्ष्0द्व में ं ’ इ त्र 2 ंए इ ∈ फ ् क्ष्0द्व प्रकार से परिभाष्िात द्वि - आधरी संिया ’ का ;के लिएद्ध तत्सम अवयव ;।द्ध 1 ;ठद्ध 0 ;ब्द्ध 2 ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है। 35ण् यदि समुच्चय । में 5 अवयव हैं तथा समुच्चय ठ में 6 अवयव हैं, तो । से ठ में एवैफकी तथा आच्छादक प्रतिचित्राणों की संख्या ;।द्ध 720 है ;ठद्ध 120 है ;ब्द्ध 0 है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है36ण् मान लीजिए कि। त्र क्ष्1ए 2ए 3ए ण्ण्ण्दद्व तथा ठ त्र क्ष्ंए इद्व , तो । से ठ में आच्छादी प्रतिचित्रों ;प्रतिचित्राणोंद्ध की संख्या ;।द्ध दच्2 है ;ठद्ध 2द दृ 2 है ;ब्द्ध 2द दृ 1 है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है 137ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ग ∈ त् के द्वारा परिभाष्िात है, तो िग ;।द्ध एवैफकी है ;ठद्धआच्छादक है ;ब्द्ध एवैफकी आच्छादी है ;क्द्ध िपरिभाष्िात नहीं है ग 38ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र 3ग2 दृ 5 द्वारा तथा ह रू त् → त् ह ;गद्ध त्र 2ग ़1 द्वारा परिभाष्िात है, तो ह व िनिम्नलिख्िात है, 2 2223ग −5 3ग −53ग 3ग ;।द्ध 4 2 ;ठद्ध 4 2 ;ब्द्ध 4 2 ;क्द्ध 4 29ग −30 ग ़26 9ग −6ग ़26 ग ़ 2ग −49ग ़30 ग − 2 39ण् र् से र् में निम्नलिख्िात पफलनों से कौन - से एवैफकी आच्छादी हैं? ;।द्ध ि;गद्ध त्र ग3 ;ठद्ध ि;गद्ध त्र ग ़ 2 ;ब्द्ध ि;गद्ध त्र 2ग ़ 1 ;क्द्ध ि;गद्ध त्र ग2 ़ 1 40ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ग3 ़ 5 द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तो िदृ1 ;गद्ध निम्नलिख्िात है, 11 1 ;।द्ध ;ग ़5द्ध 3 ;ठद्ध ;ग −5द्ध 3 ;ब्द्ध ;5−गद्ध3 ;क्द्ध 5दृ ग 41ण् मान लीजिए कि िरू । → ठ तथा ह रू ठ → ब् एवैफकी आच्छादी पफलन हैं, तो ;ह व द्धिदृ1 निम्नलिख्िात है, ;।द्ध िदृ1 व हदृ1 ;ठद्ध ि व ह ;ब्द्ध ह दृ1 व ि1 ;क्द्ध ह व ि⎧⎫3 3ग ़2 42ण् मान लीजिए कि िरू त्−⎨⎬→ त्ए ि;गद्ध त्र − द्वारा परिभाष्िात है, तो5 5ग 3⎩⎭ ;।द्ध िदृ1 ;गद्ध त्र ि;गद्ध ;ठद्ध िदृ1 ;गद्ध त्र दृ ि;गद्ध ;ब्द्ध ; िव िद्ध ग त्र दृ ग ;क्द्ध िदृ1 ;गद्ध त्र ि;गद्ध119 ⎡ गए यदि ग परिमये है ⎤ 43ण् मान लीजिए कि िरू ख्0ए 1, → ख्0ए 1,ए ि;गद्ध त्र ⎢⎢− े⎥द्वारा परिभाष्िात⎣1 गए यदि ग अपरिमय है⎦⎥ है, तो ; िव िद्ध ग ;।द्ध अचर है ;ठद्ध 1 ़ ग है ;ब्द्ध ग है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है 44ण् मान लीजिए कि िरू ख्2ए ∞द्ध → त्ए ि;गद्ध त्र ग2 दृ 4ग ़ 5 द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तो िका परिसर ;।द्ध त् है ;ठद्ध ख्1ए ∞द्ध है ;ब्द्ध ख्4ए ∞द्ध है ;क्द्ध ख्5ए ∞द्ध है 2145ण् मान लीजिए कि िरू छ → त्ए ि;गद्ध त्र ग 2 − द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तथा 3⎛⎞ ह रू फ → त्ए ह ;गद्ध त्र ग ़ 2 द्वारा परिभाष्िात एक अन्य पफलन है, तो ;ह व द्धि ⎜⎟2⎝⎠ ;।द्ध 1 है ;ठद्ध 1 है ;ब्द्ध 72 है ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है 46ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए 2रू झ3⎧ गग ⎪2ि;द्धग त्र⎨ग रू1 ग 3ढ≤ ⎪3रू ≤1गग⎩ द्वारा परिभाष्िात है, तो ि;दृ 1द्ध ़ ि;2द्ध ़ ि;4द्ध ;।द्ध 9 है ;ठद्ध 14 है ;ब्द्ध 5 है ;क्द्धइनमें से कोइर् नहीं है 47ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र जंद ग द्वारा दत्त है, तो िदृ1 ;1द्ध π4π;।द्ध 4 है ;ठद्ध क्ष्द π ़ रू द ∈ र्द्वहै ;ब्द्ध का अस्ितत्व नहीं है। ;क्द्ध इनमें से कोइर् नहीं है प्रश्न संख्या 48 से 52 तक प्रत्येक में रिक्त स्थान की पूतिर् कीजिए - 48ण् मान लीजिए कि छ में एक संबंध् त्ए ंत्इ यदि 2ं ़ 3इ त्र 30 द्वारा परिभाष्िात है, तो त् त्र ऋऋऋऋऋऋण् 49ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्1ए 2ए 3ए 4ए 5द्व में एक संबंध् त् त्र क्ष्;ंए इद्ध रू द्यं2 दृ इ2द्य ढ 8 द्वारा परिभाष्िात है, तो त् ऋऋऋऋऋऋऋ द्वारा व्यक्त है। 50ण् मान लीजिए कि ित्र क्ष्;1ए 2द्धए ;3ए 5द्धए ;4ए 1द्धद्व तथा ह त्र क्ष्;2ए 3द्धए ;5ए 1द्धए ;1ए 3द्धद्व तो ह व ित्र ऋऋऋऋऋऋऋ तथा िव ह त्र ऋऋऋऋऋऋऋण् गगि51ण् मान लीजिए कि िरू त् → त्ए ;द्धत्र ण् 12 द्वारा परिभाष्िात है, तो़ग ; िव िव िद्ध ;गद्ध त्र ऋऋऋऋऋऋऋ 52ण् यदि ि;गद्ध त्र ;4 दृ ;गदृ7द्ध3द्वए तो िदृ1;गद्ध त्र ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋण् बतलाइए कि प्रश्न संख्या 53 से 62 तक प्रत्येक के कथन सत्य हैं या असत्य हैं - 53ण् मान लीजिए कि समुच्चय । त्र क्ष्1ए 2ए 3द्व में परिभाष्िात एक संबंध् त् त्र क्ष्;3ए 1द्धए ;1ए 3द्धए ;3ए 3द्धद्व, तो त् सममित तथा संक्रामक है किंतु स्वतुल्य नहीं है। 54ण् मान लीजिए िरू त् → त्ए ि;गद्ध त्र ेपद ;3ग़2द्धए ग ∈ त् द्वारा परिभाष्िात एक पफलन है, तो िव्युत्क्रमणीय है। 55ण् प्रत्येक संबंध् जो सममित तथा संक्रामक है स्वतुल्य भी है। 56ण् एक पूणार्ंक उ एक अन्य पूणार्ंक द से संबंध्ित कहलाता है, यदि उ एक पूणार्ंकीय गुणज है द का। र् में इस प्रकार का संबंध् स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक होता है। 57ण् मान लीजिए कि । त्र क्ष्0ए 1द्व तथा छप्रावृफत संख्याओं का समुच्चय है, तो ि;2ददृ1द्ध त्र 0ए ि;2दद्ध त्र 1ए द ∈ छ द्वारा परिभाष्िात प्रतिचित्राण िरू छ → । आच्छादक है। 58ण् समुच्चय । में, त् त्र क्ष्क्ष्1ए 1द्धए ;1ए 2द्धए ;2ए 1द्धए ;3ए 3द्धद्व प्रकार से परिभाष्िात संबंध् त् स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक है। 59ण् पफलनों का संयोजन क्रम - विनिमेय होता है। 60ण् पफलनों का संयोजन साहचयर् होता है। 61ण् प्रत्येक पफलन व्युत्क्रमणीय होता है। 62ण् किसी समुच्चय में किसी द्वि - आधरी संिया का तत्समक अवयव सदैव होता है।

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