123 dot बदलती परंपराएँ तीन वर्ग बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ | संस्कृतियों का टकराव not to be repu 124 विश्व इतिहास के कुछ विषय बदलती परंपराएँ -मने देखा है कि नौवीं सदी तक कैसे एशिया और अमरीका के अधिकांश भागों में विशाल साम्राज्यों का विकास और विस्तार हुआ। इन साम्राज्यों में से कुछ यायावरों के थे, कुछ विकसित शहरों और उन शहरों के व्यापारी तंत्रों पर आधारित थे। मकदूनिया, रोम, अरब साम्राज्य, मंगोल साम्राज्य और उनसे पूर्व आने वाले साम्राज्यों (मिस्र, असीरिया, चीनी और मौर्य) में यह अंतर था कि यहाँ दिए गए पहले चार साम्राज्य विस्तृत क्षेत्रों में फैले हुए थे और महाद्वीपीय एवं पारमहाद्वीपीय स्वरूप के थे। जो कुछ हुआ उसमें विभिन्न सांस्कृतिक टकरावों की भूमिका निर्णायक थी। साम्राज्यों का उदय प्रायः अचानक होता था परन्तु वे हमेशा उन बदलावों के परिणाम थे जो साम्राज्य निर्माण की दिशा में लंबे समय से उन मूल क्षेत्रों में निहित थे जहाँ से ये साम्राज्य फैलने लगे। विश्व इतिहास में परंपराएँ विभिन्न तरीकों से बदल सकती हैं। पश्चिमी यूरोप में नौवीं से सत्रहवीं सदी के मध्य ऐसा बहुत कुछ धीरे-धीरे विकसित हुआ जिसे हम 'आधुनिक समय के साथ जोड़कर देखते हैं। इन कारकों में धार्मिक विश्वासों पर आधारित होने की अपेक्षा प्रयोगों पर आधारित वैज्ञानिक ज्ञान का विकास, लोक सेवाओं के निर्माण, संसद और विभिन्न कानूनी धाराओं के सृजन पर ध्यान देते हुए सरकार के संगठन पर गहन विचार और उद्योग व कृषि में प्रयोग आने वाली तकनीक में सुधार शामिल हैं। इन परिवर्तनों के परिणाम यूरोप के बाहर भी पुरज़ोर तरीके से महसूस किये गए। जैसा कि हमने देखा पाँचवीं सदी में पश्चिम में रोमन साम्राज्य विघटित हो गया था। पश्चिमी और मध्य यूरोप में रोमन साम्राज्य के अवशेषों ने धीरे-धीरे अपने को उन कबीलों की प्रशासनिक वाइकिग* स्कैंडीनेविया आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुसार ढाल लिया था, जिन्होंने वहाँ पर राज्य स्थापित कर (डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, लिए थे। पूर्वी यूरोप, पश्चिमी एशिया एवं उत्तरी अफ्रीका की तुलना में पश्चिमी यूरोप में नगरीय आइसलैंड) के वे लोग केंद्र छोटे थे। जो 8वीं-11वीं शताब्दी नौवीं सदी तक, पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप के वाणिज्यिक और शहरी केन्द्र-एक्स, लंदन, के बीच उत्तर पश्चिमी रोम व सियना यद्यपि छोटे थे तथापि उनका महत्त्व कम नहीं था। नौवीं से ग्यारहवीं सदी के मध्य यूरोप के क्षेत्रों पर पश्चिमी यूरोप के ग्रामीण क्षेत्रों में कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। चर्च व शाही शासन ने वहाँ के आक्रमण करने के बाद कबीलों के प्रचलित नियमों और रोमन संस्थाओं में सामंजस्य स्थापित करने में मदद की। इसका वहाँ बस गए। इनमें से सबसे अच्छा उदाहरण पश्चिमी और मध्य यूरोप में नौवीं सदी के प्रारंभ में शार्लमेन का साम्राज्य अधिकांश लोग समुद्री था। इसके शीघ्र पतन के पश्चात भी हंगरीवासियों व वाइकिंग* लोगों के भयंकर आक्रमणों के दस्यु और व्यापारी थे। बावजूद, ये नगरीय केंद्र व व्यापार तंत्र बने रहे। बदलती परंपराएँ 125 इन सभी परिवर्तनों की अंतक्रियाओं के फलस्वरूप 'सामंती' व्यवस्था अस्तित्व में आई। सामंतवाद की पहचान थी दुर्गों व मेनर-भवन के इर्द-गिर्द कृषि उत्पादन। यह भूमि मेनर के लॉर्डी की थी जिस पर कृषक (कृषिदास) कार्य करते थे। ये वफ़ादार होने के साथ माल और सेवा प्रदान करने के प्रति वचनबद्ध होते थे। ये लॉर्ड, बड़े लॉ के, जो राजा के सामंत (Vassal) होते थे, के प्रति वचनबद्ध थे। कैथलिक चर्च (जिसका केंद्र-बिंदु पोप और उनकी व्यवस्था थी) सामंतवाद को समर्थन देता था और उनके पास अपनी भूमि भी थी। ऐसे संसार में जहाँ पर जीवन की अनिश्चितताएँ, औषधियों का अल्प ज्ञान और निम्न जीवन-प्रत्याशा आम बात थी, चर्च ने लोगों को व्यवहार का ऐसा तरीका सिखाया जिससे मृत्यु के बाद का जीवन सहनीय बन सके। मठों का निर्माण हुआ जहाँ पर धर्म में आस्था रखने वाले लोग अपने को कैथलिक चर्चवासियों के निर्देशानुसार सेवा में लगाते थे। साथ ही चर्च स्पेन से बाइजेंटियम तक के मुस्लिम राज्यों में फैले विद्वत्ता-तंत्र का भाग थे। इसके अलावा वे यूरोप के अधीनस्थ राजाओं, पूर्वी भूमध्यसागर तथा सुदूर क्षेत्रों को प्रचुर मात्रा में धन-संपदा उपलब्ध कराते थे। वेनिस और जिनेवा के भूमध्यसागरीय उद्यमियों से प्रेरित होकर (बारहवीं सदी से) सामंती व्यवस्था पर, वाणिज्य और नगरों का प्रभाव बढ़ता व बदलता गया। इन उद्यमियों के जहाज़ मुस्लिम राज्यों एवं पूर्व में बचे हुए रोमन साम्राज्य के साथ व्यापार करते रहे। इन क्षेत्रों की सम्पत्ति के लोभ में तथा ईसा के जीवन से जुड़े 'पवित्र स्थलों को मुसलमानों से आजाद कराने की भावना से प्रेरित होकर यूरोपीय राजाओं ने 'धर्म-युद्ध' के दौरान भूमध्यसागर के पार के स्थानों से संबंध मज़बूत किए। यूरोप के आंतरिक व्यापार में सुधार हुआ (जो मेलों और बाल्टिक समुद्र तथा उत्तरी सागर के बंदरगाहों पर केंद्रित था और बढ़ती हुई जनसंख्या द्वारा प्रेरित था)। वाणिज्य–विस्तार के ये अवसर जीवन के मूल्य के प्रति बदलते हुए रवैये से मेल खाते थे। इस्लामी कला और साहित्य में मानव और अन्य प्राणियों के प्रति प्रचुरता से दिखाई पड़ने वाला सम्मान और बाइजेंटाइन के व्यापार द्वारा यूरोप में आने वाली यूनानी कला और विचारों ने यूरोप को संसार देखने का एक नया नज़रिया प्रदान किया। चौदहवीं सदी से (जिसे पुनर्जागरण कहा जाता है) विशेष रूप से उत्तरी इटली के नगरों में रईस लोग मृत्योपरांत जीवन की अपेक्षा इस not t दक्षिणी फ्रांस के नगर एविगनोन (चौदहवीं शताब्दी) में पोप का महल। 126 विश्व इतिहास के कुछ विषय पंद्रहवीं शताब्दी में वेनिस में डोगे का महल। जीवन से अधिक वास्ता रखने लगे। मूर्तिकार, चित्रकार और लेखक मानव और संसार की खोज में अधिक दिलचस्पी लेने लगे। पंद्रहवीं सदी के अंत तक, इस तरह की परिस्थितियों ने यात्रा और खोजों को अभूतपूर्व ढंग से बढ़ावा दिया। कई खोज यात्राएँ शुरू हुई। स्पेनवासी और पुर्तगाली जो उत्तरी अफ्रीका के साथ व्यापार करते थे, पश्चिमी अफ्रीका के तट पर और दक्षिण में जाने लगे। इस तरह उत्तमाशा-अंतरीप (Cape of Good Hope) होते हुए वे भारत पहुँचे जो यूरोप में मसालों के एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में प्रसिद्ध था। कोलम्बस ने भारत के लिए एक पश्चिमी मार्ग खोजने का प्रयास किया और 1492 ई. में एक द्वीप पर पहुँचा जिसे यूरोपवासियों ने वेस्टइंडीज़ कहा। दूसरे खोजकर्ताओं ने आर्कटिक की ओर से भारत और चीन के लिए उत्तरी मार्ग खोजने का प्रयास किया। यूरोप के यात्रियों को अपनी यात्रा के दौरान भांति-भांति के लोग मिले। कुछ हद तक वे उनसे सीखने के इच्छुक थे। पोप और कैथलिक चर्च ने भूगोलवेत्ता एवं पर्यटक हसन-अल-वज़ान (Hassan-al-Wazzan, यूरोप में लियो अफ्रीकानस के नाम से विदित) के काम को प्रोत्साहित किया। इस भूगोलवेत्ता ने पोप लियो दशम के लिए सोलहवीं सदी के पूर्वार्ध में अफ्रीका का भूगोल पहली बार लिखा। जेसुइट चर्च के सदस्यों ने सोलहवीं सदी में जापान के बारे में जाना और उसके बारे में लिखा। सत्रहवीं सदी में एक अंग्रेज़ व्यक्ति विल एडम्स (Will Adams), जापानी शोगुन, तोकोगावा ईयास (Tokugawa leyasu) का मित्र एवं सलाहकार बन गया। अमरीका पहुँचने पर यूरोपीय लोगों का वहाँ के मूल निवासियों से सम्पर्क हुआ। हसन अल-वज्ञान की तरह ही इन लोगों ने यूरोपीय लोगों में दिलचस्पी ली और कभी-कभी उनके लिए काम भी किया। उदाहरण के लिए, एजटेक (Aztec) की एक महिला ने जो बाद में डोना मेरिना (Dona Marina) नाम से जानी गई मेक्सिको के स्पेनी विजेता कोरटेस (Cortes) से दोस्ती की, उसके लिए दुभाषिये का काम किया और कई तरह के प्रबंध करवाये। यूरोपवासी नये लोगों के साथ सामना होने की स्थिति में कभी-कभी सचेत, अनात्मशंसी और चौकन्ने होते थे। यहाँ तक कि जब वे व्यापारिक एकाधिकार स्थापित करने और हथियारों के बल बदलती परंपराएँ 127 पर अपनी सत्ता थोपने के लगातार प्रयास करते रहे। आप जानते होंगे कि ऐसा ही पुर्तगालियों ने 1498 में वास्को डि गामा के कालीकट (कोझीकोड) आगमन के बाद हिंद महासागर में भी किया। दूसरी ओर कभी-कभी वे दबंग, आक्रामक एवं क्रूर थे और जिनसे भी वे मिले उन्हें अज्ञानी मान कर उन्होंने अपने श्रेष्ठ होने का भाव प्रदर्शित किया। कैथलिक चर्च ने दोनों रवैयों को प्रोत्साहन दिया। चर्च, दूसरी सभ्यताओं और भाषाओं के लिए अध्ययन का केंद्र था, लेकिन उसने उन लोगों पर होने वाले हमलों को बढ़ावा दिया जिन लोगों को वह गैर-ईसाई मानता था। गैर-यूरोपवासियों की दृष्टि से, यूरोप के साथ उनके संपर्क - संघर्ष अलग-अलग तरह के थे। अधिकांश इस्लामी क्षेत्रों और भारत तथा चीन के लिए यूरोपवासी सत्रहवीं सदी के अंत तक एक कौतूहल का विषय थे। वे ऐसे हृष्ट-पुष्ट व्यापारियों तथा नाविकों के रूप में देखे जाते थे। जो बृहत्तर दुनिया के बारे में पूर्वी लोगों की समझ में बहुत योगदान नहीं कर सकते थे। फिर भी जापानियों ने उनकी प्रौद्योगिकी के कुछ लाभ जल्द ही सीख लिए। उदाहरण के लिए सोलहवीं सदी के उत्तरार्ध तक उन्होंने बड़े पैमाने पर बंदूकों का उत्पादन शुरू कर दिया। उत्तरी व दक्षिणी अमरीका में, एजटेक साम्राज्य के शत्रुओं ने यूरोपवासियों का उपयोग एज़टेकों की शक्ति को चुनौती देने में किया। साथ ही साथ यूरोपवासियों के साथ आई बीमारियों ने जनसंख्या का विनाश कर दिया। सोलहवीं सदी के अंत तक कुछ क्षेत्रों में नब्बे प्रतिशत जनसंख्या मृत्यु के आगोश में समा गई। © NCE not to be repus.ished 128 विश्व इतिहास के कुछ विषय कालक्रम तीन (लगभग 1300-1700) be republished यूरोप में विचाराधीन काल में अनेक महत्त्वपूर्ण विकास हुए जिसमें कृषि और किसानों के जीवन में अनेक प्रकार के परिवर्तनों को देखा गया। इसके अलावा अनेक सांस्कृतिक परिवर्तन भी हुए। इस कालरेखा से ज्ञात होता है कि महाद्वीपों के आपसी संबंधों ने व्यापार को प्रोत्साहित किया। इन संपर्को ने अनेक क्षेत्रों को प्रभावित किया और विचारों, आविष्कारों तथा वस्तुओं का आदान-प्रदान एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में होने लगा। भूमि पर नियंत्रण, स्रोत और व्यापार के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखने के लिए राज्यों में परस्पर लगातार संघर्ष हो रहे थे जिसके कारण महिलाओं और पुरुषों को यदि उनकी हत्या न कर दी गई हो तो उन्हें उनके निवास स्थानों से निकाल कर उन्हें दास बनाया जा रहा था। इस तरह लोगों का जीवन अनेक रूपों में इतना अधिक बदल गया था कि उसे पहचानना बहुत कठिन हो गया था। कालक्रम तीन 129 farer अफ्रीका यूरोप स्पेन में अल्हम्ब्रा और ग्रेनेडा महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में प्रतिष्ठित हुए । मिस्र में प्लेग झलैंड और फ्रांस के मध्य शतवर्षीय युद्ध (1337-1453); संपूर्ण यूरोप में ‘ब्लैक डैथ' (एक प्रकार का प्लेग) का प्रकोप इब्नबतूता द्वारा सहारा की खोज फ्रांस के किसानों ने ऊँचे करों का विरोध किया (1358) ब्रिटेन में किसानों का विद्रोह (1381); जोफरी चॉसर (Geoffrey Chaucer) ने दि केन्टरबरी टेल्स की रचना की जो अंग्रेजी भाषा की प्राचीनतम कृति थी। पुर्तगालियों ने दास व्यापार (1442) को प्रारंभ किया। पश्चिम अफ्रीका में सोंघाई साम्राज्य की स्थापना यूरोप में पहली मुद्रित पुस्तक का निर्माण; इटली जिसका उद्देश्य सहारा के पार व्यापार का जाल के लियोनार्डो दा विन्सी (1452-1519), बिछाना था: पुर्तगालियों का अफ्रीका के पश्चिमी चित्रकार वास्तविद और अन्वेषक तटवर्ती (1471 के बाद) क्षेत्रों में आक्रमण और बस्तियों की स्थापना पुर्तगालियों ने बोकोंगो राजा को | इंग्लैंड में (1485) में टयूड़ वंश की स्थापना ईसाई बनाया अफ्रीकी गुलामों को अमरीका में गन्ने की खेती के दक्षिण अमरीका में उपजी काफी को यूरोप में लिए ले जाया गया (1510); ऑटोमन तुर्की ने मिस्र पहली बार (1517) तथा तंबाकू, चॉकलेट, पर विजय प्राप्त की (1517) टमाटर और तुर्की का भी पहली बार प्रयोग किया गया; मॉर्टिन लूथर ने कैथोलिक चर्च में सुधार किए (1521) कोपरनिकस ने सौर-परिवार सिद्धांत को प्रस्तुत किया (1543) विलियम शेक्सपियर (1564-1616) - इंग्लैंड के नाटककार जचरियास जेन्सेन माइक्रोस्कोप की खोज की (1590 का दशक) नाइजीरिया का ओयू राज्य अपने चरम-शिखर । प्रथम उपन्यास डॉन-क्विक जोट (Don Juixote) को पर था। यहाँ धातु-कर्म के अनेक केंद्र थे स्पेनी भाषा में (1605) में लिखा गया विलियम हॉर्वे ने यह दिखाया कि रक्त हृदय से पंप होकर शरीर में जाता है (1628) पुर्तगालियों ने कोंगो राज्य को नष्ट किया लुई चौदहवाँ फ्रांस का शासक बना (1638-1715) (1662) पीटर महान (1682-1725) ने रूस का आधुनिकीकरण किया 7 not to 130 विश्व इतिहास के कुछ विषय farem एशिया दक्षिणी एशिया विजयनगर साम्राज्य की स्थापना (1336) चीन में मिंग राजवंश (1368 से) क्षेत्रीय सुल्तानों का अभ्युदय ऑटोमन तुर्को का कुंस्तुनतुनिया पर अधिकार (1453) वास्को-डि-गामा भारत आया (1498) पुर्तगालियों का चीन में प्रवेश, इनका विरोध और इन्हें मकावो की ओर खदेड़ा जाना (1522) बाबर ने उत्तरी भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। पानीपत का प्रथम युद्ध (1526) अकबर (1556-1605) ने मुगल शासन को संगठित किया प्रथम काबुकी नाटक जापान में प्रस्तुत किया गया (1586)। फारस के शाह अब्बास (1587-1629) ने यूरोपीय सैन्य प्रशिक्षण प्रणाली को लागू किया जापान में तोकूगावा शोगुनेट (Tokugawa ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना (1600) Shogunate) की स्थापना (1603) हुई डच लोगों को छोड़कर समस्त यूरोपीय व्यापारियों ताजमहल का निर्माण (1632-53) को जापान से व्यापार करने पर रोक लगाई गई (1637); चीन में मंचू शासन (1644 से आगे) 300 वर्षों तक रहा; यूरोप में चीन की चाय और रेशम की माँग में बढ़ोत्तरी कालक्रम तीन 131 falfer आस्ट्रेलिया/प्रशांत महासागरीय द्वीप अमरीका टेनोंक्टिटलान (Tenochtitlan) मेक्सिको की एजुटेक राजधानी (1325) यहाँ के भवनों, मंदिरों, सिंचाई प्रणालियों तथा लेखा प्रणाली (क्विपू) के लिए विख्यात इंका लोगों ने पेरु पर अधिकार किया कोलम्बस वेस्टइंडीज़ पहुँचा (1492) मेक्सिको पर स्पेन की विजय (1521) स्पेनी–नौचालक मेगलन प्रशांत महासागर (1519) में पहुँचा फ्रांसीसी अन्वेषक कनाडा पहुँचे (1534) स्पेन की पेरु पर विजय (1572) डच नाविक अनायास ही आस्ट्रेलिया पहुँचे इंग्लैण्ड ने उत्तरी अमरीका (1607) में अपनी प्रारंभिक स्पेनी नाविक तहिती (Tahiti) (1606) में पहुँचे कालोनियाँ बनाईं; सबसे पहले गुलामों को पश्चिमी अफ्रीका से वर्जिनिया (1619) लाया गया डच लोगों ने न्यू अमेस्टरडम की खोज की जिसे डच नाविक अबेल तस्मान (Abel Tasman) ने अनजाने आजकल न्यूयार्क (1626) कहते हैं: मेसाच्युसेट्स में आस्ट्रेलिया की परिक्रमा की। इसके बाद वह वान डिमेन (Van Diemen) की भूमि में उतरा जिसे बाद (Massachusetts) में प्रथम प्रिटिंग प्रेस की स्थापना में तस्मानिया नाम दिया गया। वह न्यूजीलैंड भी पहुँचा हुई (1635)। और उसने उसे विशाल क्षेत्र का भाग समझा वेस्टइंडीज़ (1654) में पहली बार गन्ने की खेती की मिसिसिपी घाटी में फ्रांसीसियों ने उपनिवेश स्थापित किए और इसका नामकरण सम्राट लुई चौदहवें के नाम पर लुसियाना रखा (1682) क्रियाकलाप आपने यह ध्यान दिया होगा कि आस्ट्रेलिया/प्रशांत महासागरीय द्वीपों के खाने में बहुत ही कम तिथियाँ अंकित हुई हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि इन क्षेत्रों के लोग प्रायः तिथि को बताने के लिए दूसरे साधनों जैसे पेटिंग आदि का प्रयोग करते थे जैसा ऊपर दिखाया गया है।* कृपया एक घटना बताएँ जो ऊपर दिए गए पाँच खानों में दिखाई गई है जिसे आस्ट्रेलिया के एक चित्रकार ने रिकार्ड करने योग्य समझा। ऐसे ही दूसरी अन्य पाँच घटनाओं की तालिका बनाएँ जो उसे असंगत लगीं।

RELOAD if chapter isn't visible.