प्रारंभिक समाज समय की शुरुआत से लेखन कला और शहरी जीवन © NCER 2 विश्व इतिहास के कुछ विषय प्रारंभिक समाज स अनुभाग में, हम प्रारंभिक समाजों से संबंधित दो विषयों के बारे में पढ़ेंगे। पहला विषय सुदूर अतीत में, लाखों साल पहले, मानव अस्तित्व की शुरुआत के बारे में है। उसमें आप । यह पढ़ेंगे कि सर्वप्रथम अफ्रीका में मानव प्राणियों का प्रादुर्भाव कैसे हुआ और पुरातत्त्व विज्ञानियों ने इतिहास के इन प्रारंभिक चरणों के बारे में, हड़ियों और पत्थर के औजारों के अवशेषों की सहायता से, कैसे अध्ययन किया। पुरातत्त्व विज्ञानियों ने आरंभिक मानव के जीवन के बारे में पुनर्निर्माण करने के प्रयत्न किए हैं। उन्होंने यह जानने की कोशिश की है कि वे कैसे घरों में रहते थे, वे पेड़-पौधों से उत्पन्न कंदमूल एवं बीजों को इकट्ठा करके और जानवरों का शिकार करके अपना भरण-पोषण कैसे करते थे और वे किन तरीकों से अपने भावों एवं विचारों को अभिव्यक्त करते थे। आप यह भी पढ़ेंगे कि आदमी द्वारा आग और भाषा का प्रयोग कब और कैसे शुरू हुआ और अंत में आप यह देखेंगे कि आज की दुनिया में भी जो लोग शिकार और पेड़-पौधों से प्राप्त खाद्य-सामग्रियों से अपना भरण-पोषण करते हैं क्या उनके जीवन का अध्ययन करने से अतीत के बारे में जानकारी मिल सकती है। दूसरे विषय में कुछ प्रारंभिक नगरों जैसे- मेसोपोटामिया (वर्तमान इराक) के कुछ शहरों के बारे में चर्चा की गई है। इन नगरों का विकास मंदिरों के आस-पास हुआ था। ये नगर सुदूर व्यापार के केंद्र थे। पुरातात्त्विक साक्ष्यों यानी पुरानी बस्तियों के अवशेषों और बहुतायत से पाई जाने वाली लिखित सामग्रियों के आधार पर उस समय के भिन्न-भिन्न लोगों - शिल्पियों, लिपिकों, श्रमिकों, पुरोहितों, राजा-रानियों आदि के जीवन के पुनर्निर्माण का प्रयत्न किया गया है। आप यह भी देखेंगे कि इनमें से शहरों तथा कस्बों में पशुचारक समुदाय के लोग अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका कैसे निभाते थे। एक विचारणीय प्रश्न यह है कि यदि लेखन कला का विकास नहीं हुआ होता, तो इन शहरों में विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ कैसे संभव होती? आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लाखों वर्षों तक जंगलों, गुफ़ाओं अथवा कामचलाऊ घरों-आसरों में रहने वाले इनसानों ने आगे चलकर गाँवों और शहरों में रहना कैसे शुरू किया। यह एक लंबी कहानी है और ऐसी अनेक घटनाओं से जुड़ी है जो सर्वप्रथम नगरों की स्थापना से कम-से-कम पाँच हज़ार वर्ष पहले घटित हुई थी। | अत्यंत दूरगामी प्रभाव डालने वाले परिवर्तनों में से एक थाः धीरे-धीरे खानाबदोश जिंदगी को छोड़कर खेती के लिए एक स्थान पर बस जाना, जो लगभग दस हज़ार साल पहले शुरू हो गया था। जैसा कि आप आगे विषय एक में देखेंगे, खेती अपनाने से पहले, लोग अपने भोजन के प्रारंभिक समाज 3 लिए पेड़-पौधों की उपज इकट्ठी किया करते थे। धीरे-धीरे उन्होंने भिन्न-भिन्न पौधों के बारे में जानकारी प्राप्त की: जैसे- वे कहाँ उगते हैं, वे किस मौसम में फलते हैं, आदि-आदि। इस जानकारी के आधार पर उन्होंने पौधे उगाना सीख लिया। पश्चिमी एशिया में, गेहूँ और जौ, मटर और कई तरह की दालों की फसलें उगाई जाती थीं। पूर्वी तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया में ज्वार-बाजरा और धान की फसलें आसानी से उगाई जा सकती थीं। ज्वार-बाजरा अफ्रीका में पैदा किया जाता था। उन्हीं दिनों, लोगों ने भेड़-बकरी, ढोर, सूअर और गधा जैसे जानवरों को पालतू बनाना सीख लिया था। तब, पौधों से निकलने वाले रेशों, जैसे रूई तथा पटसन और पशुओं पर उगने वाले रेशों जैसे ऊन आदि से कपड़े बुने जाने लगे थे। कुछ समय बाद, आज से लगभग पाँच हजार साल पहले ढोरों और गधों जैसे पालतू जानवरों को हलों तथा गाड़ियों में जोता जाने लगा था। | इन घटनाक्रमों के फलस्वरूप और भी अनेक परिवर्तन हुए। जब लोग फसलें उगाने लगे तो उन्हें एक ही स्थान पर तब तक रहना पड़ता था जब तक कि उनकी उगाई हुई फसल पक न जाए। इसलिए एक स्थान पर बसकर रहना आम बात हो गई और इसके फलस्वरूप, लोग अपने रहने के लिए अधिक स्थायी घर बनाने लगे। इसी बीच कुछ जन-समुदायों ने मिट्टी के बर्तन बनाना भी सीख लिया। अनाज और अन्य उपज इकट्ठी करने के लिए और नए उगाए गए अनाजों से तरह-तरह के भोजन बनाने के लिए इन बर्तनों का इस्तेमाल किया जाने लगा। वस्तुतः खाद्य पदार्थों को अधिक स्वादिष्ट और सुपाच्य बनाने के लिए, भोजन बनाने की प्रक्रिया पर अधिक ध्यान दिया जाने लगा। । साथ ही, पत्थर के औज़ार बनाने के तरीकों में भी बदलाव आया। हालाँकि औज़ार बनाने के पहले वाले तरीके भी चालू रहे पर कुछ औजारों तथा उपकरणों को, घिसाई की विशद प्रक्रिया के ज़रिये, चिकना और पॉलिशदार बनाया जाने लगा। अनेक नए उपकरण बनाए गए; जैसे - अनाज साफ करने के लिए ओखली व मूसल और पत्थर की कुल्हाड़ी, कसिया और फावड़ा जिनसे जुताई के लिए भूमि साफ की जाती थी और बीज बोने के लिए खुदाई की जाती थी। कुछ इलाकों में, लोग ताँबा और टिन (राँगा) जैसी धातुओं के खनिजों का उपयोग करना सीख गए। कभी-कभी, ताँबे के खनिजों को इकट्ठा करके उनके खास नीले, हरे रंग की वजह से उनका इस्तेमाल किया जाता था। इससे आगे चलकर धातुओं से गहने और औज़ार बनाने का रास्ता खुल गया। दूरस्थ स्थानों (और समुद्रों) से उत्पन्न होने वाली कुछ अन्य प्रकार की चीजों के बारे में भी जानकारी बढ़ती जा रही थी। ये चीजें थीं: लकड़ी, पत्थर, हीरे-जवाहरात, धातुएँ, सीपियाँ और ज्वालामुखी का पक्का जमा हुआ लावा। स्पष्टतः लोग इन चीजों और इनके बारे में अपनी जानकारी के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते थे और उनका प्रसार करते रहते थे। | इस प्रकार व्यापार में वृद्धि होती गई, गाँवों और कस्बों का विकास होता गया और लोगों का आवागमन बढ़ता गया, जिसके फलस्वरूप पुराने छोटे-छोटे जन-समुदायों के स्थान पर छोटे-छोटे राज्य विकसित हो गए। यद्यपि ये परिवर्तन बहुत धीमी गति से हुए और इस प्रक्रिया में कई हज़ार वर्ष लग गए, लेकिन जब शहर स्थापित हो गए और उनका विकास होने लगा तो इन परिवर्तनों की रफ्तार भी तेज़ हो गई। इसके अलावा, इन परिवर्तनों के दूरगामी परिणाम निकले। कुछ विद्वानों ने तो इसे 'क्रांति' कहकर पुकारा, क्योंकि लोगों के जीवन में संभवतः इतना अधिक परिवर्तन आ गया था कि उन्हें पहचानना ही मुश्किल हो गया था। जब आप आरंभिक इतिहास में इन दो विपरीत विषयों का अन्वेषण करें तो इन निरंतरताओं और परिवर्तनों का अवश्य अवलोकन करें। | यह भी याद रखें कि हमने प्रारंभिक समाजों में से कुछ को ही उदाहरण के तौर पर विस्तृत अध्ययन के लिए चुना है। इनके अलावा, और भी कई प्रकार के प्रारंभिक समाज थे; जैसे - किसान समुदाय और पशुचारक यानी ग्वाले लोग, शिकारी-संग्राहक समुदाय और नगरवासी लोग। 4 विश्व इतिहास के कुछ विषय कालक्रम का अध्ययन कैसे करें कालक्रम एक (6 लाख वर्ष पूर्व से 1 ई.पू.) आप इस प्रकार का कालक्रम पुस्तक के प्रत्येक अनुभाग (section) में पाएँगे। प्रत्येक कालक्रम आपको विश्व इतिहास की प्रमुख प्रक्रियाओं और घटनाओं के बारे में बताएगा। जब आप इन कालक्रमों का अध्ययन कर रहे हों तो यह ध्यान रखें • राजाओं के बीच लड़े गये युद्धों की अपेक्षा उन प्रक्रियाओं या घटनाओं, जिनके द्वारा सामान्य स्त्रियों और पुरुषों ने इतिहास को प्रभावित किया, की तिथियों को अंकित करना अधिक कठिन है। कुछ तिथियाँ किसी प्रक्रिया के आरंभ या उसकी परिपक्व अवस्था को दर्शाती हैं। इतिहासकार लगातार नए-नए साक्ष्यों के आधार पर तिथियों में संशोधन कर रहे हैं। या पुरानी तिथियों के निर्धारण के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यद्यपि हमने कालक्रम को सुविधा की दृष्टि से भौगोलिक आधार पर बाँटा है पर वास्तविक ऐतिहासिक विकास प्रायः इन सीमाओं के पार जाते हैं। ऐतिहासिक प्रक्रियाओं में काल-अनुक्रम प्रायः ऊपर-नीचे या अतिव्यापित (overlapping) हो जाता है। मानव इतिहास की कुछ युगांतरकारी घटनाओं | को ही यहाँ दिया गया है- इनकी प्रक्रियाओं का वर्णन आने वाले अध्यायों में किया गया है जिनके पृथक कालक्रम भी हैं। जहाँ पर आप एक* देखेंगे वहाँ पर आपको एक चित्र दिखाई देगा जो कि खाने में लिखी तिथि से संबंधित है। कालक्रमों में दिए गए खाली खानों का यह अर्थ नहीं है कि उस काल में कुछ भी विशेष घटित नहीं हुआ - कभी-कभी यह हमें बताता है कि हमें अभी तक यह पता नहीं है कि उस काल में क्या घटित हुआ। अगले वर्ष हम दक्षिण एशिया के इतिहास और विशेष रूप से भारतीय इतिहास का अध्ययन करेंगे। दक्षिण एशिया के बारे में दी गई तिथियाँ उस उपमहाद्वीप में हुए केवल कुछ विकासों को ही दर्शाती हैं। CERT republished यह कालक्रम मानव के उदय, पौधों और पशुओं के बसने की प्रक्रिया (domestication) के बारे में प्रकाश डालता है। यहाँ पर कुछ प्रमुख प्रौद्योगिक विकासों; जैसे- आग का आविष्कार, धातुओं के प्रयोग, हल द्वारा खेती तथा । पहिए या चाक के प्रयोग के बारे में जानकारी मिलती है। इस प्रक्रिया में नगरों का आविर्भाव और लेखन के प्रयोग के बारे में भी बताया गया है। आपको यहाँ पर कुछ प्राचीनतम साम्राज्यों का भी उल्लेख मिलेगा जिनकी विषय-वस्तु विस्तार से कालक्रम दो में दी जाएगी। कालक्रम एक 5 faret अफ्रीका यूरोप लाख वर्ष पूर्व आस्ट्रेलोपिथिकस के जीवाश्म (वर्तमान से 56 लाख वर्ष पूर्व वर्ष वर्तमान से पूर्व अग्नि के प्रयोग के साक्ष्य मिले (वर्तमान से 14 लाख वर्ष पूर्व) वर्तमान से पूर्व प्राज्ञ मानव (होमो सेपियंस) के जीवाश्म (195,000 वर्तमान से पूर्व) वर्तमान से पूर्व अग्नि के प्रयोग के साक्ष्य (400,000 वर्तमान से पूर्व) गुफाओं/गुफा आवासों में चित्रकारी प्राज्ञ मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म गुफाओं/गुफा आवासों में चित्रकारी (विशेषकर फ्रांस और स्पेन में) 8. पशुओं और कुत्तों को पालतू बनाया गया गेहूँ और जौ की खेती (यूनान) गधे को पालतू बनाया गया, ज्वार-बाजरा आदि की ताँबे का प्रयोग (क्रीट) खेती, ताँबे का प्रयोग हल द्वारा कृषि, प्रथम राजवंशों, नगरों, पिरामिडों, घोड़े को पालतू बनाया गया (पूर्वी यूरोप) कैलेंडर, चित्रात्मक लिपि*, पैपाइरस पर लेखन (मिस्र) नगरों, महलों, काँसे का प्रयोग, कुम्हार के चाक, व्यापार का विकास (क्रीट) लिपि का विकास (क्रीट) काँच की बोतलों का प्रयोग (मिस्र) लोहे का प्रयोग हुआ पश्चिम एशिया के फोनिशियनों ने उत्तरी अफ्रीका में कार्थेज नगर की स्थापना की; भूमध्यसागरीय क्षेत्र में व्यापार का विस्तार प्रथम ओलंपिक खेल (यूनान 776 ई.पू.) लोहे का प्रयोग (सूडान) लोहे का प्रयोग (मिस्र) सिक्कों का प्रयोग (यूनान); रोम गणराज्य की स्थापना (510 ई.पू.) एथेन्स में 'प्रजातंत्र की स्थापना (यूनान) फ़ारसियों का मिस्र पर आक्रमण मिस्र में सिकंदरिया (Alexandria) की स्थापना (332 ई.पू.) जो ज्ञान का प्रमुख केन्द्र बना । मकदूनिया (Macedonia) के सिकंदर ने मिस्र और पश्चिम एशिया के भागों को जीता (336-323 ई.पू.) tos ad 6 विश्व इतिहास के कुछ विषय farem एशिया दक्षिण एशिया are रिवात में पाषाणकालीन स्थल (1,900,000 वर्तमान से पूर्व, पाकिस्तान) अग्नि का प्रयोग (700,000 वर्तमान से पूर्व, चीन) वर्तमान से पूर्व । वर्तमान से पूर्व वर्तमान से पूर्व प्राज्ञ मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म (100,000 वर्तमान से पूर्व, पश्चिम एशिया) वर्तमान से पूर्व वर्तमान से पूर्व कुत्ते को पालतू बनाया गया पश्चिम एशिया । भीमबेटका के गुफा चित्र (मध्य-प्रदेश); होमो सेपियंस के जीवाश्म (25,500 वर्तमान से पूर्व, श्रीलंका) 2 भेड़ और बकरियों को पालतू बनाया गया, गेहूँ और जौ। की खेती (पश्चिम एशिया) सूअर और पशुओं को पालतू बनाया (पश्चिम और पूर्व प्रारंभिक कृषि-बस्तियाँ (बलूचिस्तान) एशिया)। कुक्कुटपालन, ज्वार-बाजरा तथा अरबी (yam) की खेती (पूर्वी एशिया) कपास की खेती (दक्षिण एशिया); ताँबे का प्रयोग (पश्चिम एशिया) कुम्हार के चाक का प्रयोग, यातायात के लिए पहिए ताँबे का प्रयोग का प्रयोग (3600 ई.पू.), लेखन का प्रयोग (3200 ई.पू. , मेसोपोटामिया), काँसे का प्रयोग हल कृषि, नगर (मेसोपोटामिया); सिल्क का प्रयोग हड़प्पाकालीन संस्कृति के नगर, लिपि का प्रयोग (लगभग (चीन); घोड़े को पालतू बनाया गया (मध्य एशिया); 2700 ई.प. ) चावल की खेती (दक्षिण-पूर्व एशिया)। खास पानी में रहने वाली भैंस को पालतू बनाया गया (पूर्वी एशिया) नगरों, लेखन, राज्यों (शांग राजवंश), काँसे का प्रयोग हुआ (चीन) लोहे का प्रयोग हुआ (पश्चिम एशिया) ऋग्वेद की रचना लोहे का प्रयोग, महापाषाण (megaliths) (दकन और दक्षिण भारत) । एक कोहान वाले ऊँट को पालतू बनाया (अरब) nOC** सिक्कों का प्रयोग (तुर्की); फारसी साम्राज्य (546 ई. अनेक क्षेत्रों में नगरों और राज्यों की स्थापना, पहली पू.) जिसकी राजधानी पर्सिपोलिस थी; चीनी दार्शनिक बार सिक्कों का प्रयोग, जैन और बौद्ध धर्म का कन्फ्यूशियस (लगभग 551 ई.पू.) प्रसार मौर्य साम्राज्य की स्थापना (लगभग 321 ई.पू.) चीन में एक साम्राज्य की स्थापना (221 ई.पू.), चीन की विशाल दीवार के निर्माण-कार्य का प्रारंभ कालक्रम एक 7 farem अमरीका आस्ट्रेलिया/प्रशान्त महासागरीय द्वीप Mike वर्तमान से पूर्व वर्तमान से पूर्व वर्तमान से पूर्व वर्तमान से पूर्व प्राज्ञ मानव (होमो सैपियंस) के जीवाश्म, समुद्र-यात्रा के प्राचीनतम संकेत (45,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) वर्तमान से पूर्व होमो सैपियंस के जीवाश्म (12,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) चित्रकला (20,000 वर्ष वर्तमान से पूर्व) कुम्हड़ा (Squash) की खेती क्रियाकलाप सेम की खेती कपास और लौकी की खेती गिनि पिग, टर्की को पालतू बनाया, मक्के की खेती आलू, मिर्च कैसावा, मूंगफली की खेती, लामा और ऐल्पेका को पालतू बनाया प्रत्येक छह खानों से एक तिथि को लीजिए और उस क्षेत्र में रहने वाले पुरुषों और स्त्रियों के लिए उस तिथि की प्रक्रिया/घटना का क्या महत्त्व रहा होगा, इस पर विचार-विमर्श कीजिए। be rep पोलिनेशिया और माइक्रोनेशिया में बस्तियाँ मैक्सिको खाड़ी के चारों और ओल्मेक लोगों की बस्तियाँ, प्रारंभिक मंदिर और मूर्ति-शिल्प चित्रात्मक लिपि का विकास not qui nd

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