अप़्ाफसोस इस बात का नहीं है कि मौत बेरहम है। अपफसोस इस बात का है कि अस्पताल बेरहम क्यों हैं?़;आइर्ने के सामनेद्ध कृश्नचंदर जन्मः सन्् 1914, पंजाब के वशीराबाद गाँव ;िाला - गुजरांकलांद्ध प्रमुुख रचनाएँः एक गिरजा - ए - खंदक, यूकेलिप्ट्स की डाली ;कहानी - संग्रहद्धऋ श्िाकस्त, शरगाँव की रानी, सड़क वापस जाती है, आसमान रौशन है, एक गधे की आत्मकथा, अन्नदाता, हम वहशी हैं,जब खेत जागे, बावन पत्ते, एक वायलिन समंदर के किनारे, कागश की नाव, मेरी यादों के किनारे ;उपन्यासद्ध सम्मानः साहित्य अकादमी सहित बहुत से पुरस्कार मृत्युः सन्् 1977 प्रेमचंद के बाद जिन कहानीकारों ने कहानी विध को नइर् ऊँचाइयों तक पहुँचाया,उनमें उदूर् कथाकार कृश्नचंदर का नाम महत्वपूणर् है। प्रगतिशील लेखक संघ से उनका गहरा संबंध् था, जिसका असर उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकता है।कृश्नचंदर ऐसे गिने - चुने लेखकों में आते हैं, जिन्होंने बाद में चलकर लेखन को ही रोशी - रोटी का सहारा बनाया।कृश्नचंदर की प्राथमिक श्िाक्षा पुंछ ;जम्मू एवं कश्मीरद्ध में हुइर्। उच्च श्िाक्षा के लिए वे सन्् 1930 में लाहौर आ गए और पफाॅरमेन िश्िचयन काॅलेज में प्रवेश लिया। 1934 में पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने अंग्रेशी में एम.ए. किया। बाद में उनका जुड़ाव प्ि़ाफल्म जगत से हो गया और अंतिम समय तक वे मुंबइर् में ही रहे। यों तो कृश्नचंदर ने उपन्यास, नाटक, रिपोतार्ज और लेख भी बहुत से लिखे हैं, लेकिन उनकी पहचान कहानीकार के रूप में अध्िक हुइर् है। महालक्ष्मी का पुल, आइर्ने के सामने आदि उनकी मशहूर कहानियाँ हैं। उनकी लोकपि्रयता इस कारण भी है कि वे काव्यात्मक रोमानियत और शैली की विविध्ता के कारण अलग मुकामबनाते हैं। कृश्नचंदर उदूर् कथा - साहित्य में अनूठी रचनाशीलता के लिए बहुचचिर्त रहे हैं। वे प्रगतिशील और यथाथर्वादी नशरिए से लिखे जाने वाले साहित्य के पक्षधर थे। जामुन का पेड़ कृश्नचंदर की एक प्रसि( हास्य - व्यंग्य कथा है। हास्य - व्यंग्य के लिए चीशों को अनुपात से श्यादा पैफला - पुफलाकर दिखलाने की परिपाटी पुरानी है और यह कहानी भी उसका अनुपालन करती है। इसलिए यहाँ घटनाएँ अतिशयोक्ित - पूणर् और अविश्वसनीय जान पड़ें, तो कोइर् हैरत नहीं। विश्वसनीयता ऐसी रचनाओं के मूल्यांकन की कसौटी नहीं हो सकती। प्रस्तुत पाठ में हँसते - हँसते ही हमारे भीतर इस बात की समझ पैदा होती है कि कायार्लयी तौर - तरीकों में पाया जाने वाला विस्तार कितना निरथर्क और पदानुक्रम कितना हास्यास्पद है। बात यहीं तक नहीं रहती? इस व्यवस्था के संवेदनशून्य एवं अमानवीय होने का पक्ष भी हमारे सामने आता है। जामुन का पेड़ रात को बड़े शोर का झक्कड़ चला। सेव्रेफटेरियेट के लाॅन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा। सवेरे को जब माली ने देखा, तो उसे पता चला कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है। माली दौड़ा - दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा - दौड़ा क्लवर्फ के पास गया, क्लवर्फ दौड़ा - दौड़ा सुपरिंटेंडेंट के पास गया, सुपरिंटेंडेंट दौड़ा - दौड़ा बाहर लाॅन में आया। मिनटों में गिरे हुए पेड़ के नीचे दबे हुए आदमी के चारों ओर भीड़ इकऋी हो गइर्। फ्बेचारा जामुन का पेड़। कितना पफलदार था!’’ एक क्लवर्फ बोला। फ्और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं!’’दूसराक्लवर्फयादकरतेहुए बोला। फ्मैं पफलों के मौसम में झोली भरकर ले जाता था, मेरे बच्चे इसकी जामुनें कितनी खुशी से खाते थे।’’ तीसरा क्लवर्फ लगभग रुआँसा होकर बोला। फ्मगर यह आदमी?’’ माली ने दबे हुए आदमी की तरप़्ाफ इशारा किया। फ्हाँ, यह आदमी।’’ सुपरिंटेंडेंट सोच में पड़ गया। फ्पता नहीं िंादा है कि मर गया?’’ एक चपरासी ने पूछा। फ्मर गया होगा, इतना भारी पेड़ जिसकी पीठ पर गिरे वह बच वैफसे सकता है?’’ दूसरा चपरासी बोला। फ्नहीं, मैं िांदा हूँ।’’ दबे हुए आदमी ने बड़ी कठिनता से कराहते हुए कहा। फ्िांदा है!’’ एक क्लवर्फ ने ताज्जुब से कहा। फ्पेड़ को हटाकर इसे जल्दी से निकाल लेना चाहिए।’’ माली ने सुझाव दिया। फ्मुश्िकल मालूम होता है,’’ एक सुस्त, कामचोर और मोटा चपरासी बोला, फ्पेड़ का तना बहुत भारी और वशनी है।’’ फ्क्या मुश्िकल है?’’ माली बोला, फ्अगर सुपरिंटेंडेंट साहब हुक्म दें, तो अभी पंद्रह - बीस माली, चपरासी और क्लवर्फ लगाकर पेड़ के नीचे से दबे हुए आदमी को निकाला जा सकता है।’’ फ्माली ठीक कहता है,’’ बहुत - से क्लवर्फ एक साथ बोल पड़े,फ्लगाओ शोर, हम तैयार हैं।’’ एक साथ बहुत से लोग पेड़ को उठाने को तैयार हो गए। फ्ठहरो!’’ सुपरिंटेंडेंट बोला, फ्मैं अंडर - सेव्रेफटरी से पूछ लूँ।’’ सुपरिंटेंडेंट अंडर - सेव्रेफटरी के पास गया। अंडर - सेव्रेफटरी डिप्टी सेव्रेफटरी के पास गया। डिप्टी सेव्रेफटरी ज्वाइंट सेव्रेफटरी के पास गया। ज्वाइंट सेव्रेफटरी चीप़्ाफ सेव्रेफटरी के पास गया। चीप़़्ाफ सेव्रेफटरी मिनिस्टर के पास गया। मिनिस्टर ने चीपफ सेव्रेफटरी से वुफछ कहा। चीपफ सेव्रेफटरी ने ज्वाइंट सेव्रेफटरी से वुफछ कहा। ज्वाइंट सेव्रेफटरी ने डिप्टी़सेव्रेफटरी से कहा। डिप्टी सेव्रेफटरी ने अंडर सेव्रेफटरी से कहा। प़्ाफाइल चलती रही। इसी में आधा दिन बीत गया। दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के चारों ओर बहुत भीड़ हो गइर् थी। लोग तरह - तरह की बातें कर रहे थे। वुफछ मनचले क्लको± ने समस्या को खुद ही सुलझाना चाहा। वे हुवूफमत के पैफसले का इंतशार किए बिना पेड़ को अपने - आप हटा देने का निश्चय कर रहे थे कि इतने में सुपरिंटेंडेंट प़्ाफाइल लिए भागा - भागा आया। बोलाμ फ्हमलोग खुद इस पेड़ को नहीं हटा सकते। हमलोग व्यापार - विभाग से संबंिात हैं,और यह पेड़ की समस्या है, जो कृष्िा - विभाग के अधीन है। मैं इस प़्ाफाइल को अजे±टमावर्फ करके कृष्िा - विभाग में भेज रहा हूँμ वहाँ से उत्तर आते ही इस पेड़ को हटवा दिया जाएगा।’’ दूसरे दिन कृष्िा - विभाग से उत्तर आया कि पेड़ व्यापार - विभाग के लाॅन में गिरा है, इसलिए इस पेड़ को हटवाने या न हटवाने की िाम्मेदारी व्यापार - विभाग पर पड़ती है।यह उत्तर पढ़कर व्यापार विभाग को गुस्सा आ गया। उन्होंने पफौरन लिखा किपेड़ों को हटवाने या न हटवाने की िाम्मेदारी कृष्िा - विभाग पर लागू होती है, व्यापार विभाग का इससे कोइर् संबंध नहीं है। दूसरे दिन भी प़्ाफाइल चलती रही। शाम को जवाब आ गयादृहम इस मामले को हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मेंट के हवाले कर रहे हैं, क्योंकि यह एक पफलदार पेड़ का मामला है और एग्रीकल्चर डिपाटर्मेंट अनाज और खेती - बाड़ी के मामलों में पैफसला करने़का हकदार है। जामुन का पेड़ चूँकि एक पफलदार पेड़ है, इसलिए यह पेड़ हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मेंट के अंतगर्त आता है। रात को माली ने दबे हुए आदमी को दाल - भात ख्िालाया, जबकि उसके चारों तरप़्ाफ पुलिस का पहरा था कि कहीं लोग कानून को अपने हाथ में लेकर पेड़ को खुद से हटवाने की कोश्िाश न करें। मगर एक पुलिस कांस्टेबल को दया आ गइर् और उसने माली को दबे हुए आदमी को खाना ख्िालाने की इजाशत दे दी। माली ने दबे हुए आदमी से कहा, फ्तुम्हारी प़्ाफाइल चल रही है, उम्मीद है कल तक पैफसला हो जाएगा।’’़दबा हुआ आदमी वुफछ नहीं बोला। माली ने पेड़ के तने को ध्यान से देखकर कहा, फ्अच्छा हुआ कि तना तुम्हारे वूफल्हे पर गिरा, अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हंी टूट जाती।’’ दबा हुआ आदमी पिफर भी वुफछ नहीं बोला। माली ने पिफर कहा, फ्तुम्हारा यहाँ कोइर् वारिस है तो मुझे उसका अता - पता बताओ, मैं उन्हें खबर देने की कोश्िाश करूँगा।’’ फ्मैं लावारिस हूँ।’’ दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्िकल से कहा। माली खेद प्रकट करता हुआ वहाँ से हट गया। तीसरे दिन हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मेंट से जवाब आ गया। बड़ा कड़ा जवाब था और व्यंग्यपूणर्! हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मेंट का सेव्रेफटरी साहित्य - प्रेमी आदमी जान पड़ता था। उसनेलिखा था, फ्आश्चयर् है, इस समय जब हम ‘पेड़ लगाओ’ स्कीम ऊँचे स्तर पर चला रहे हैं, हमारे देश में ऐसे सरकारी अप़्ाफसर मौजूद हैं जो पेड़ों को काटने का सुझाव देते हैं, और वह भी एक पफलदार पेड़ को, और वह भी जामुन के पेड़ को, जिसके पफल जनता बड़े चाव से खाती है! हमारा विभाग किसी हालत में इस पफलदार वृक्ष को काटने की इजाशत नहीं दे सकता।’’ फ्अब क्या किया जाए?’’ इसपर एक मनचले ने कहा, फ्अगर पेड़ काटा नहीं जा सकता, तो इस आदमी ही को काटकर निकाल लिया जाए।’’ फ्यह देख्िाए,’’ उस आदमी ने इशारे से बताया, फ्अगर इस आदमी को ठीक बीच में से, यानी धड़ से काटा जाए तो आधा आदमी इधर से निकल आएगा, आधा आदमी उधर से बाहर आ जाएगा और पेड़ वहीं का वहीं रहेगा।फ्मगर इस तरह तो मैं मर जाऊँगा।’’ दबे हुए आदमी ने आपिा प्रकट करते हुए कहा। फ्यह भी ठीक कहता है।’’ एक क्लवर्फ बोला। आदमी को काटने वाली युिाफ प्रस्तुत करने वाले ने भरपूर विरोध किया, फ्आपजानते नहीं हैं, आजकल प्लास्िटक सजर्री कितनी उÂति कर चुकी है। मैं तो समझता हूँ, अगर इस आदमी को बीच में से काटकर निकाल लिया जाए तो प्लास्िटक सजर्री से धड़ के स्थान से इस आदमी को पिफर से जोड़ा जा सकता है।’’ इस बार प़्ाफाइल को मेडिकल डिपाटर्मेंट में भेज दिया गया। मेडिकल डिपाटर्मेंट ने प़्ाफौरन एक्शन लिया और जिस दिन पफाइल उनके विभाग में पहुँची, उसके दूसरे़ही दिन उन्होंने अपने विभाग का सबसे योग्य प्लास्िटक सजर्न छान - बीन के लिए भेज दिया। सजर्न ने दबे हुए आदमी को अच्छी तरह टटोलकर, उसका स्वास्थ्य देखकर, खून का दबाव देखा, नाड़ी की गति को परखा, दिल और पेफपफड़ों की जाँच करके रिपोटर् भेज दी कि इस आदमी का प्लास्िटक आॅपरेशन तो हो सकता है, और आॅपरेशन सपफल भी होगा, मगर आदमी मर जाएगा। इसलिए यह प़्ौफसला भी रद्द कर दिया गया। रात को माली ने दबे हुए आदमी के मुँह में ख्िाचड़ी डालते हुए उसे बतायाकि अब मामला ऊपर चला गया है। सुना है कि कल सेव्रेफटेरियेट के सारे सेव्रेफटेरियों की मीटिंग होगी। उसमें तुम्हारा केस रखा जाएगा। उम्मीद है सब काम ठीक हो जाएगा। दबा हुआ आदमी एक आह भरकर धीरे से बोलाμ फ्ये तो माना कि तगाप़्ाुफल न करोगे लेकिन खाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तवफ!’’’ माली ने अचंभे से मुँह में उँगली दबा ली और चकित भाव से बोला, फ्क्या तुम शायर हो?’’ दबे हुए आदमी ने धीरे से सिर हिला दिया। दूसरे दिन माली ने चपरासी को बताया, चपरासी ने क्लवर्फ को, क्लवर्फ ने हैड - क्लवर्फ को। थोड़ी ही देर में सेव्रेफटेरियेट में यह अप़्ाफवाह पैफल गइर् कि दबा हुआ आदमी शायर है। बस, पिफर क्या था। लोगों का झुंड का झुंड शायर को देखने के लिए ’ मिशार् गालिब का शेर उमड़ पड़ा। इसकी चचार् शहर में भी पैफल गइर् और शाम तक गली - गली से शायर जमा होने शुरू हो गए। सेव्रेफटेरियेट का लाॅन भाँति - भाँति के कवियों से भर गया औरदबे हुए आदमी के चारों ओर कवि - सम्मेलन का - सा वातावरण उत्पÂ हो गया। सेव्रेफटेरियेट के कइर् क्लवर्फ और अंडर सेव्रेफटरी तक जिन्हें साहित्य और कविता से लगाव था, रुक गए। वुफछ शायर दबे हुए आदमी को अपनी कविताएँ और दोहे सुनाने लगे। कइर् क्लवर्फ उसको अपनी कविता पर आलोचना करने को मजबूर करने लगे। जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी एक कवि है, तो सेव्रेफटेरियेट की सब - कमेटी ने पैफसला किया किμ चूँकि दबा हुआ आदमी एक कवि है, इसलिए इस प़्ाफाइल का संबंध न एग्रीकल्चर डिपाटर्मेंट से है, न हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मेंट से, बल्िक सिप़्ार्फ कल्चरल डिपाटर्मेंट से है। कल्चरल डिपाटर्मेंट से अनुरोध किया गया कि जल्द से जल्द मामले का पैफसला करके अभागे कवि को इस पफलदार पेड़ से़छुटकारा दिलाया जाए। प़्ाफाइल कल्चरल डिपाटर्मेंट के अनेक विभागों से गुशरती हुइर् साहित्य अकादमी के सेव्रेफटरी के पास पहुँची। बेचारा सेव्रेफटरी उसी समय अपनी गाड़ी में सवार होकर सेव्रेफटेरियेट पहुँचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा। फ्तुम कवि हो?’’ उसने पूछा। फ्जी हाँ।’’ दबे हुए आदमी ने जवाब दिया। फ्किस उपनाम से शोभ्िात हो?’’ फ्ओस।’’ फ्ओस?’’ सेव्रेफटरी शोर से चीखा, फ्क्या तुम वही ‘ओस’ हो, जिसका गद्य - संग्रह ‘ओस के पूफल’ अभी हाल ही में प्रकाश्िात हुआ है?य् दबे हुए कवि ने हुँकार में सिर हिलाया। फ्क्या तुम हमारी अकादमी के मेंबर हो?’’ सेव्रेफटरी ने पूछा। फ्नहीं!य् फ्आश्चयर् है,य् सेव्रेफटरी शोर से चीखा, फ्इतना बड़ा कविμ ‘ओस के पूफल’ का लेखक और हमारी अकादमी का मेंबर नहीं है। उप़्ाफ! वैफसी भूल हो गइर् हमसे, कितना बड़ा कवि और वैफसी अँधेरी गुमनामी में दबा पड़ा है।’’फ्गुमनामी में नहीं,μ एक पेड़ के नीचे दबा हूँ, कृपया मुझे इस पेड़ के नीचे से निकालिए।’’ फ्अभी बंदोबस्त करता हूँ।’’ सेव्रेफटरी प़़्ाफौरन बोला और पफौरन उसने अपने विभाग में रिपोटर् की। दूसरे दिन सेव्रेफटरी भागा - भागा कवि के पास आया और बोला, फ्मुबारक हो, मिठाइर् ख्िालाओ। हमारी सरकारी साहित्य अकादमी ने तुम्हें अपनी वंेफद्रीय शाखा का मेंबर चुन लिया है, यह लो चुनाव - पत्रा।’’ फ्मगर मुझे इस पेड़ के नीचे से तो निकालो!’’ दबे हुए आदमी ने कराहकर कहा। उसकी साँस बड़ी मुश्िकल से चल रही थी और उसकी आँखों से मालूम होता था कि वह घोर पीड़ा और दुःख में पड़ा है। फ्यह हम नहीं कर सकते।’’ सेव्रेफटरी ने कहा, फ्और जो हम कर सकते थे, वह हमने कर दिया है, बल्िक हम तो यहाँ तक कर सकते हैं कि अगर तुम मर जाओ, तो तुम्हारी बीवी को वशीपफा दे सकते हैं, अगर तुम दरख्वास्त दो, तो हम वह भी कर सकते हैं।’’ फ्मैं अभी जीवित हूँ।’’ कवि रुक - रुककर बोला, फ्मुझे ¯शदा रखो।’’ फ्मुसीबत यह है,’’ सरकारी साहित्य अकादमी का सेव्रेफटरी हाथ मलते हुए बोला, फ्हमारा विभाग सिप़्ार्फ कल्चर से संबंध्ित है। पेड़ काटने का मामला कलम - दवात से नहीं, आरी - वुफल्हाड़ी से संबंध्ित है। उसके लिए हमने प़्ाफाॅरेस्ट डिपाटर्मेंट को लिख दिया है और अजे±ट लिखा है।’’ शाम को माली ने आकर दबे हुए आदमी को बताया, फ्कल प़्ाफाॅरेस्ट डिपाटर्मेंट के आदमी आकर इस पेड़ को काट देंगे और तुम्हारी जान बच जाएगी।’’ माली बहुत खुश था। दबे हुए आदमी का स्वास्थ्य जवाब दे रहा था, मगर वह किसी न किसी तरह अपने जीवन के लिए लड़े जा रहा था। कल तक, कल सवेरे तवफ...किसी न किसी तरह उसे जीवित रहना है। दूसरे दिन जब प़्ाफाॅरेस्ट डिपाटर्मेंट के आदमी आरी - वुफल्हाड़ी लेकर पहुँचे तो उनको पेड़ काटने से रोक दिया गया। मालूम हुआ कि विदेश - विभाग से हुक्म आया था कि इस पेड़ को न काटा जाए। कारण यह था कि इस पेड़ को दस साल पहले पीटोनिया राज्य के प्रधानमंत्राी ने सेव्रेफटेरियेट के लाॅन में लगाया था। अब अगर यह पेड़ काटा गया, तो इस बात का काप़्ाफी अंदेशा था कि पीटोनिया सरकार से हमारे संबंध सदा के लिए बिगड़ जाएँगे। फ्मगर एक आदमी की जान का सवाल है,’’ एक क्लवर्फ चिल्लाया। फ्दूसरी ओर दो राज्यों के संबंधों का सवाल है,’’ दूसरे क्लवर्फ ने पहले क्लवर्फ को समझाया, फ्और यह भी तो समझो कि पीटोनिया सरकार हमारे राज्य को कितनी सहायता देती हैμ क्या हम उनकी मित्राता की खातिर एक आदमी के जीवन का भी बलिदान नहीं कर सकते?’’ फ्कवि को मर जाना चाहिए।’’ फ्निस्संदेह।’’ अंडर सेव्रेफटरी ने सुपरिंटेंडेंट को बताया, फ्आज सवेरे प्रधानमंत्राी दौरे से वापस आ गए हैं। आज चार बजे विदेश विभाग इस पेड़ की प़्ाफाइल उनके सामने पेश करेगा। जो वे पैफसला देंगे, वही सबको स्वीकार होगा।’’ शाम के पाँच बजे स्वयं सुपरिंटेंडेंट कवि की प़्ाफाइल लेकर उसके पास आया, फ्सुनते हो!’’ आते ही वह खुशी से प़्ाफाइल को हिलाते हुए चिल्लाया, फ्प्रधानमंत्राी ने इस पेड़ को काटने का हुक्म दे दिया, और इस घटना की सारी अंतरार्ष्ट्रीय िाम्मेदारी अपने सिर ले ली है। कल यह पेड़ काट दिया जाएगा, और तुम इस संकट से छुटकारा हासिल कर लोगे। सुनते हो? आज तुम्हारी पफाइल पूणर् हो गइर्।’’़मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निजीर्व और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी....। उसके जीवन की प़्ाफाइल भी पूणर् हो चुकी थी। अभ्यास पाठ के साथ 1.बेचारा जामुन का पेड़। कितना पफलदार था। और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं। क.ये संवाद कहानी के किस प्रसंग में आए हैं? ख.इससे लोगों की वैफसी मानसिकता का पता चलता है? 2.दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात वैफसे पता चली और इस जानकारी का पफाइल की़यात्रा पर क्या असर पड़ा? 3.कृष्िा - विभाग वालों ने मामले को हाॅटीर्कल्चर विभाग को सौंपने के पीछे क्या तकर् दिया? 4.इस पाठ में सरकार के किन - किन विभागों की चचार् की गइर् है और पाठ से उनके कायर् के बारे में क्या अंदाशा मिलता है? पाठ के आस - पास 1.कहानी में दो प्रसंग ऐसे हैं, जहाँ लोग पेड़ के नीचे दबे आदमी को निकालने के लिए कटिब( होते हैं। ऐसा कब - कब होता है और लोगों का यह संकल्प दोनों बार किस - किस वजह से भंग होता है। 2.यह कहना कहाँ तक युक्ितसंगत है कि इस कहानी में हास्य के साथ - साथ करुणा की भीअंतधार्रा है। अपने उत्तर के पक्ष में तकर् दें। 3.यदि आप माली की जगह पर होते, तो हुवूफमत के पैफसले का इंतशार करते या नहीं? अगर हाँ, तो क्यों? और नहीं, तो क्यों? शीषर्क सुझाइए कहानी के वैकल्िपक शीषर्क सुझाएँ। निम्नलिख्िात बिंदुओं को ध्यान में रखकर शीषर्क गढ़े जा सकते हैंμ ऽ कहानी में बार - बार प़्ाफाइल का िाक्र आया है और अंत में दबे हुए आदमी के जीवन की पफाइल पूणर् होने की बात कही गइर् है।़ ऽ सरकारी दफ्ऱतरों की लंबी और विवेकहीन कायर्प्रणाली की ओर बार - बार इशारा किया गया है। ऽ कहानी का मुख्य पात्रा उस विवेकहीनता का श्िाकार हो जाता है। भाषा की बात 1. नीचे दिए गए अंग्रेशी शब्दों के हिंदी प्रयोग लिख्िाएμ अजे±ट, पफाॅरेस्ट डिपाटर्मंेट, मेंबर, डिप्टी सेव्रेफटरी, चीप़्ाफ सेव्रेफटरी, मिनिस्टर, अंडर सेव्रेफटरी, हाॅटीर्कल्चर डिपाटर्मंेट, एग्रीकल्चर डिपाटर्मेंट 2.इसकी चचार् शहर में भी पैफल गइर् और शाम तक गली - गली से शायर जमा होने शुरू हो गएμ यह एक संयुक्त वाक्य है, जिसमें दो स्वतंत्रा वाक्यों को समानाध्िकरण समुच्चयबोधक शब्द और से जोड़ा गया है। संयुक्त वाक्य को इस प्रकार सरल वाक्य में बदला जा सकता हैदृ इसकी चचार् शहर में पैफलते ही शाम तक गली - गली से शायर जमा होने शुरू हो गए। पाठ में से पाँच संयुक्त वाक्यों को चुनिए और उन्हें सरल वाक्य मंे रूपांतरित कीजिए। 3.साक्षात्कार अपने - आप में एक विधा है। जामुन के पेड़ के नीचे दबे आदमी के पफाइल बंद होने ;मृत्युद्ध के लिए िाम्मेदार किसी एक व्यक्ित का काल्पनिक साक्षात्कार करें और लिखें। शब्द छवि झक्कड़ - आँधी रुआँसा - रोनी सूरत ताज्जुब - आश्चयर् हाॅटीर्कल्चर - उद्यान कृष्िा एग्रीकल्चर - कृष्िा तगापुफल़ - विलंब, देर, उपेक्षा

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अफ़सोस इस बात का नहीं है कि मौत बेरहम है।

अफ़सोस इस बात का है कि अस्पताल बेरहम क्यों हैं?

(आईने के सामने)

कृश्नचंदर

जन्म: सन् 1914, पंजाब के वज़ीराबाद गाँव (ज़िला-गुजरांकलां) 

प्रमुुख रचनाएँ: एक गिरजा-ए-खंदक, यूकेलिप्टस की डाली (कहानी-संग्रह); शिकस्त, ज़रगाँव की रानी, सड़क वापस जाती है, आसमान रौशन है, एक गधे की आत्मकथा, अन्नदाता, हम वहशी हैं, जब खेत जागे, बावन पत्ते, एक वायलिन समंदर के किनारे, कागज़ की नाव, मेरी यादों के किनारे (उपन्यास)

सम्मानः साहित्य अकादमी सहित बहुत से पुरस्कार

मृत्यु : सन् 1977

प्रेमचंद के बाद जिन कहानीकारों ने कहानी विधा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, उनमें उर्दू कथाकार कृश्नचंदर का नाम महत्वपूर्ण है। प्रगतिशील लेखक संघ से उनका गहरा संबंध था, जिसका असर उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकता है। कृश्नचंदर एेसे गिने-चुने लेखकों में आते हैं, जिन्होंने बाद में चलकर लेखन को ही रोज़ी-रोटी का सहारा बनाया।

कृश्नचंदर की प्राथमिक शिक्षा पुंछ (जम्मू एवं कश्मीर) में हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे सन् 1930 में लाहौर आ गए और फॉरमेन क्रिश्चियन कॉलेज में प्रवेश लिया। 1934 में पंजाब विश्वविद्यालय से उन्होंने अंग्रेज़ी में एम.ए. किया। बाद में उनका जुड़ाव फ़िल्म जगत से हो गया और अंतिम समय तक वे मुंबई में ही रहे।

यों तो कृश्नचंदर ने उपन्यास, नाटक, रिपोर्ताज और लेख भी बहुत से लिखे हैं, लेकिन उनकी पहचान कहानीकार के रूप में अधिक हुई है। महालक्ष्मी का पुल, आईने के सामने आदि उनकी मशहूर कहानियाँ हैं। उनकी लोकप्रियता इस कारण भी है कि वे काव्यात्मक रोमानियत और शैली की विविधता के कारण अलग मुकाम बनाते हैं। कृश्नचंदर उर्दू कथा-साहित्य में अनूठी रचनाशीलता के लिए बहुचर्चित रहे हैं। वे प्रगतिशील और यथार्थवादी नज़रिए से लिखे जाने वाले साहित्य के पक्षधर थे।

जामुन का पेड़ कृश्नचंदर की एक प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कथा है। हास्य-व्यंग्य के लिए चीज़ों को अनुपात से ज़्यादा फैला-फुलाकर दिखलाने की परिपाटी पुरानी है और यह कहानी भी उसका अनुपालन करती है। इसलिए यहाँ घटनाएँ अतिशयोक्ति- पूर्ण और अविश्वसनीय जान पड़ें, तो कोई हैरत नहीं। विश्वसनीयता एेसी रचनाओं के मूल्यांकन की कसौटी नहीं हो सकती। प्रस्तुत पाठ में हँसते-हँसते ही हमारे भीतर इस बात की समझ पैदा होती है कि कार्यालयी तौर-तरीकों में पाया जाने वाला विस्तार कितना निरर्थक और पदानुक्रम कितना हास्यास्पद है। बात यहीं तक नहीं रहती? इस व्यवस्था के संवेदनशून्य एवं अमानवीय होने का पक्ष भी हमारे सामने आता है।

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जामुन का पेड़

रात को बड़े ज़ोर का झक्कड़ चला। सेक्रेटेरियेट के लॉन में जामुन का एक पेड़ गिर पड़ा। सवेरे को जब माली ने देखा, तो उसे पता चला कि पेड़ के नीचे एक आदमी दबा पड़ा है।

माली दौड़ा-दौड़ा चपरासी के पास गया, चपरासी दौड़ा-दौड़ा क्लर्क के पास गया, क्लर्क दौड़ा-दौड़ा सुपरिंटेंडेंट के पास गया, सुपरिंटेंडेंट दौड़ा-दौड़ा बाहर लॉन में आया। मिनटों में गिरे हुए पेड़ के नीचे दबे हुए आदमी के चारों ओर भीड़ इकट्ठी हो गई।

"बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था!’’ एक क्लर्क बोला।

"और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं!’’ दूसरा क्लर्क याद करते हुए बोला।

"मैं फलों के मौसम में झोली भरकर ले जाता था, मेरे बच्चे इसकी जामुनें कितनी खुशी से खाते थे।’’ तीसरा क्लर्क लगभग रुआँसा होकर बोला।

"मगर यह आदमी?’’ माली ने दबे हुए आदमी की तरफ़ इशारा किया।

"हाँ, यह आदमी।’’ सुपरिंटेंडेंट सोच में पड़ गया।

"पता नहीं ज़ि्ांदा है कि मर गया?’’ एक चपरासी ने पूछा।

"मर गया होगा, इतना भारी पेड़ जिसकी पीठ पर गिरे वह बच कैसे सकता है?’’ दूसरा चपरासी बोला।

"नहीं, मैं ज़िंदा हूँ।’’ दबे हुए आदमी ने बड़ी कठिनता से कराहते हुए कहा।

"ज़िंदा है!’’ एक क्लर्क ने ताज्जुब से कहा।

"पेड़ को हटाकर इसे जल्दी से निकाल लेना चाहिए।’’ माली ने सुझाव दिया।

"मुश्किल मालूम होता है,’’ एक सुस्त, कामचोर और मोटा चपरासी बोला, "पेड़ का तना बहुत भारी और वज़नी है।’’

"क्या मुश्किल है?’’ माली बोला, "अगर सुपरिंटेंडेंट साहब हुक्म दें, तो अभी पंद्रह-बीस माली, चपरासी और क्लर्क लगाकर पेड़ के नीचे से दबे हुए आदमी को निकाला जा सकता है।’’

"माली ठीक कहता है,’’ बहुत-से क्लर्क एक साथ बोल पड़े,"लगाओ ज़ोर, हम तैयार हैं।’’

एक साथ बहुत से लोग पेड़ को उठाने को तैयार हो गए।

"ठहरो!’’ सुपरिंटेंडेंट बोला, "मैं अंडर-सेक्रेटरी से पूछ लूँ।’’

सुपरिंटेंडेंट अंडर-सेक्रेटरी के पास गया। अंडर-सेक्रेटरी डिप्टी सेक्रेटरी के पास गया। डिप्टी सेक्रेटरी ज्वाइंट सेक्रेटरी के पास गया। ज्वाइंट सेक्रेटरी चीफ़ सेक्रेटरी के पास गया। चीफ़ सेक्रेटरी मिनिस्टर के पास गया। मिनिस्टर ने चीफ़ सेक्रेटरी से कुछ कहा। चीफ़ सेक्रेटरी ने ज्वाइंट सेक्रेटरी से कुछ कहा। ज्वाइंट सेक्रेटरी ने डिप्टी सेक्रेटरी से कहा। डिप्टी सेक्रेटरी ने अंडर सेक्रेटरी से कहा। फ़ाइल चलती रही। इसी में आधा दिन बीत गया।

दोपहर के खाने पर दबे हुए आदमी के चारों ओर बहुत भीड़ हो गई थी। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कुछ मनचले क्लर्कों ने समस्या को खुद ही सुलझाना चाहा। वे हुकूमत के फैसले का इंतज़ार किए बिना पेड़ को अपने-आप हटा देने का निश्चय कर रहे थे कि इतने में सुपरिंटेंडेंट फ़ाइल लिए भागा-भागा आया। बोला– "हमलोग खुद इस पेड़ को नहीं हटा सकते। हमलोग व्यापार-विभाग से संबंधित हैं, और यह पेड़ की समस्या है, जो कृषि-विभाग के अधीन है। मैं इस फ़ाइल को अर्जेंट मार्क करके कृषि-विभाग में भेज रहा हूँ– वहाँ से उत्तर आते ही इस पेड़ को हटवा दिया जाएगा।’’

दूसरे दिन कृषि-विभाग से उत्तर आया कि पेड़ व्यापार-विभाग के लॉन में गिरा है, इसलिए इस पेड़ को हटवाने या न हटवाने की ज़िम्मेदारी व्यापार-विभाग पर पड़ती है।

यह उत्तर पढ़कर व्यापार विभाग को गुस्सा आ गया। उन्होंने फौरन लिखा कि पेड़ों को हटवाने या न हटवाने की ज़िम्मेदारी कृषि-विभाग पर लागू होती है, व्यापार विभाग का इससे कोई संबंध नहीं है।

दूसरे दिन भी फ़ाइल चलती रही। शाम को जवाब आ गया–हम इस मामले को हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट के हवाले कर रहे हैं, क्योंकि यह एक फलदार पेड़ का मामला है और एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट अनाज और खेती-बाड़ी के मामलों में फ़ैसला करने का हकदार है। जामुन का पेड़ चूँकि एक फलदार पेड़ है, इसलिए यह पेड़ हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट के अंतर्गत आता है।

रात को माली ने दबे हुए आदमी को दाल-भात खिलाया, जबकि उसके चारों तरफ़ पुलिस का पहरा था कि कहीं लोग कानून को अपने हाथ में लेकर पेड़ को खुद से हटवाने की कोशिश न करें। मगर एक पुलिस कांस्टेबल को दया आ गई और उसने माली को दबे हुए आदमी को खाना खिलाने की इजाज़त दे दी।

माली ने दबे हुए आदमी से कहा, "तुम्हारी फ़ाइल चल रही है, उम्मीद है कल तक फ़ैसला हो जाएगा।’’

दबा हुआ आदमी कुछ नहीं बोला।

माली ने पेड़ के तने को ध्यान से देखकर कहा, "अच्छा हुआ कि तना तुम्हारे कूल्हे पर गिरा, अगर कमर पर गिरता तो रीढ़ की हड्डी टूट जाती।’’

दबा हुआ आदमी फिर भी कुछ नहीं बोला।

माली ने फिर कहा, "तुम्हारा यहाँ कोई वारिस है तो मुझे उसका अता-पता बताओ, मैं उन्हें खबर देने की कोशिश करूँगा।’’

"मैं लावारिस हूँ।’’ दबे हुए आदमी ने बड़ी मुश्किल से कहा।

माली खेद प्रकट करता हुआ वहाँ से हट गया।

तीसरे दिन हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट से जवाब आ गया। बड़ा कड़ा जवाब था और व्यंग्यपूर्ण!

हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट का सेक्रेटरी साहित्य-प्रेमी आदमी जान पड़ता था। उसने लिखा था, "आश्चर्य है, इस समय जब हम ‘पेड़ लगाओ’ स्कीम ऊँचे स्तर पर चला रहे हैं, हमारे देश में एेसे सरकारी अफ़सर मौजूद हैं जो पेड़ों को काटने का सुझाव देते हैं, और वह भी एक फलदार पेड़ को, और वह भी जामुन के पेड़ को, जिसके फल जनता बड़े चाव से खाती है! हमारा विभाग किसी हालत में इस फलदार वृक्ष को काटने की इजाज़त नहीं दे सकता।’’

"अब क्या किया जाए?’’ इसपर एक मनचले ने कहा, "अगर पेड़ काटा नहीं जा सकता, तो इस आदमी ही को काटकर निकाल लिया जाए।’’

"यह देखिए,’’ उस आदमी ने इशारे से बताया, "अगर इस आदमी को ठीक बीच में से, यानी धड़ से काटा जाए तो आधा आदमी इधर से निकल आएगा, आधा आदमी उधर से बाहर आ जाएगा और पेड़ वहीं का वहीं रहेगा।

"मगर इस तरह तो मैं मर जाऊँगा।’’ दबे हुए आदमी ने आपत्ति प्रकट करते हुए कहा।

"यह भी ठीक कहता है।’’ एक क्लर्क बोला।

आदमी को काटने वाली युत्ति प्रस्तुत करने वाले ने भरपूर विरोध किया, "आप जानते नहीं हैं, आजकल प्लास्टिक सर्जरी कितनी उन्नति कर चुकी है। मैं तो समझता हूँ, अगर इस आदमी को बीच में से काटकर निकाल लिया जाए तो प्लास्टिक सर्जरी से धड़ के स्थान से इस आदमी को फिर से जोड़ा जा सकता है।’’

इस बार फ़ाइल को मेडिकल डिपार्टमेंट में भेज दिया गया। मेडिकल डिपार्टमेंट ने फ़ौरन एक्शन लिया और जिस दिन फ़ाइल उनके विभाग में पहुँची, उसके दूसरे ही दिन उन्होंने अपने विभाग का सबसे योग्य प्लास्टिक सर्जन छान-बीन के लिए भेज दिया। सर्जन ने दबे हुए आदमी को अच्छी तरह टटोलकर, उसका स्वास्थ्य देखकर, खून का दबाव देखा, नाड़ी की गति को परखा, दिल और फेफड़ों की जाँच करके रिपोर्ट भेज दी कि इस आदमी का प्लास्टिक अॉपरेशन तो हो सकता है, और अॉपरेशन सफल भी होगा, मगर आदमी मर जाएगा।

इसलिए यह फ़ैसला भी रद्द कर दिया गया।

रात को माली ने दबे हुए आदमी के मुँह में खिचड़ी डालते हुए उसे बताया कि अब मामला ऊपर चला गया है। सुना है कि कल सेक्रेटेरियेट के सारे सेक्रेटेरियों की मीटिंग होगी। उसमें तुम्हारा केस रखा जाएगा। उम्मीद है सब काम ठीक हो जाएगा।

दबा हुआ आदमी एक आह भरकर धीरे से बोला–

"ये तो माना कि तगाफ़ुल न करोगे लेकिन

खाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तक!’’ *

माली ने अचंभे से मुँह में उँगली दबा ली और चकित भाव से बोला, "क्या तुम शायर हो?’’

दबे हुए आदमी ने धीरे से सिर हिला दिया।

दूसरे दिन माली ने चपरासी को बताया, चपरासी ने क्लर्क को, क्लर्क ने हैड-क्लर्क को। थोड़ी ही देर में सेक्रेटेरियेट में यह अफ़वाह फैल गई कि दबा हुआ आदमी शायर है। बस, फिर क्या था। 

* मिर्ज़ा ग़ालिब का शेर 

लोगों का झुंड का झुंड शायर को देखने के लिए उमड़ पड़ा। इसकी चर्चा शहर में भी फैल गई और शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए। सेक्रेटेरियेट का लॉन भाँति-भाँति के कवियों से भर गया और दबे हुए आदमी के चारों ओर कवि-सम्मेलन का-सा वातावरण उत्पन्न हो गया। सेक्रेटेरियेट के कई क्लर्क और अंडर सेक्रेटरी तक जिन्हें साहित्य और कविता से लगाव था, रुक गए। कुछ शायर दबे हुए आदमी को अपनी कविताएँ और दोहे सुनाने लगे। कई क्लर्क उसको अपनी कविता पर आलोचना करने को मजबूर करने लगे।

जब यह पता चला कि दबा हुआ आदमी एक कवि है, तो सेक्रेटेरियेट की सब-कमेटी ने फैसला किया कि– चूँकि दबा हुआ आदमी एक कवि है, इसलिए इस फ़ाइल का संबंध न एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट से है, न हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट से, बल्कि सिर्फ़ कल्चरल डिपार्टमेंट से है। कल्चरल डिपार्टमेंट से अनुरोध किया गया कि जल्द से जल्द मामले का फ़ैसला करके अभागे कवि को इस फलदार पेड़ से छुटकारा दिलाया जाए।

फ़ाइल कल्चरल डिपार्टमेंट के अनेक विभागों से गुज़रती हुई साहित्य अकादमी के सेक्रेटरी के पास पहुँची। बेचारा सेक्रेटरी उसी समय अपनी गाड़ी में सवार होकर सेक्रेटेरियेट पहुँचा और दबे हुए आदमी से इंटरव्यू लेने लगा।

"तुम कवि हो?’’ उसने पूछा।

"जी हाँ।’’ दबे हुए आदमी ने जवाब दिया।

"किस उपनाम से शोभित हो?’’

"ओस।’’

"ओस?’’ सेक्रेटरी ज़ोर से चीखा, "क्या तुम वही ‘ओस’ हो, जिसका गद्य-संग्रह ‘ओस के फूल’ अभी हाल ही में प्रकाशित हुआ है?"

दबे हुए कवि ने हुँकार में सिर हिलाया।

"क्या तुम हमारी अकादमी के मेंबर हो?’’ सेक्रेटरी ने पूछा।

"नहीं!"

"आश्चर्य है," सेक्रेटरी ज़ोर से चीखा, "इतना बड़ा कवि– ‘ओस के फूल’ का लेखक और हमारी अकादमी का मेंबर नहीं है। उफ़! कैसी भूल हो गई हमसे, कितना बड़ा कवि और कैसी अँधेरी गुमनामी में दबा पड़ा है।’’

"गुमनामी में नहीं,– एक पेड़ के नीचे दबा हूँ, कृपया मुझे इस पेड़ के नीचे से निकालिए।’’

"अभी बंदोबस्त करता हूँ।’’ सेक्रेटरी फ़ौरन बोला और फ़ौरन उसने अपने विभाग में रिपोर्ट की।

दूसरे दिन सेक्रेटरी भागा-भागा कवि के पास आया और बोला, "मुबारक हो, मिठाई खिलाओ। हमारी सरकारी साहित्य अकादमी ने तुम्हें अपनी केंद्रीय शाखा का मेंबर चुन लिया है, यह लो चुनाव-पत्र।’’

"मगर मुझे इस पेड़ के नीचे से तो निकालो!’’ दबे हुए आदमी ने कराहकर कहा। उसकी साँस बड़ी मुश्किल से चल रही थी और उसकी आँखों से मालूम होता था कि वह घोर पीड़ा और दुःख में पड़ा है।

"यह हम नहीं कर सकते।’’ सेक्रेटरी ने कहा, "और जो हम कर सकते थे, वह हमने कर दिया है, बल्कि हम तो यहाँ तक कर सकते हैं कि अगर तुम मर जाओ, तो तुम्हारी बीवी को वज़ीफा दे सकते हैं, अगर तुम दरख्वास्त दो, तो हम वह भी कर सकते हैं।’’

"मैं अभी जीवित हूँ।’’ कवि रुक-रुककर बोला, "मुझे ज़िंदा रखो।’’

"मुसीबत यह है,’’ सरकारी साहित्य अकादमी का सेक्रेटरी हाथ मलते हुए बोला, "हमारा विभाग सिर्फ़ कल्चर से संबंधित है। पेड़ काटने का मामला कलम- दवात से नहीं, आरी-कुल्हाड़ी से संबंधित है। उसके लिए हमने फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट को लिख दिया है और अर्जेंट लिखा है।’’

शाम को माली ने आकर दबे हुए आदमी को बताया, "कल फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट के आदमी आकर इस पेड़ को काट देंगे और तुम्हारी जान बच जाएगी।’’

माली बहुत खुश था। दबे हुए आदमी का स्वास्थ्य जवाब दे रहा था, मगर वह किसी न किसी तरह अपने जीवन के लिए लड़े जा रहा था। कल तक, कल सवेरे तक...किसी न किसी तरह उसे जीवित रहना है।

दूसरे दिन जब फ़ॉरेस्ट डिपार्टमेंट के आदमी आरी-कुल्हाड़ी लेकर पहुँचे तो उनको पेड़ काटने से रोक दिया गया। मालूम हुआ कि विदेश-विभाग से हुक्म आया था कि इस पेड़ को न काटा जाए। कारण यह था कि इस पेड़ को दस साल पहले पीटोनिया राज्य के प्रधानमंत्री ने सेक्रेटेरियेट के लॉन में लगाया था। अब अगर यह पेड़ काटा गया, तो इस बात का काफ़ी अंदेशा था कि पीटोनिया सरकार से हमारे संबंध सदा के लिए बिगड़ जाएँगे।

"मगर एक आदमी की जान का सवाल है,’’ एक क्लर्क चिल्लाया।

"दूसरी ओर दो राज्यों के संबंधों का सवाल है,’’ दूसरे क्लर्क ने पहले क्लर्क को समझाया, "और यह भी तो समझो कि पीटोनिया सरकार हमारे राज्य को कितनी सहायता देती है– क्या हम उनकी मित्रता की खातिर एक आदमी के जीवन का भी बलिदान नहीं कर सकते?’’

"कवि को मर जाना चाहिए।’’

"निस्संदेह।’’

अंडर सेक्रेटरी ने सुपरिंटेंडेंट को बताया, "आज सवेरे प्रधानमंत्री दौरे से वापस आ गए हैं। आज चार बजे विदेश विभाग इस पेड़ की फ़ाइल उनके सामने पेश करेगा। जो वे फैसला देंगे, वही सबको स्वीकार होगा।’’

शाम के पाँच बजे स्वयं सुपरिंटेंडेंट कवि की फ़ाइल लेकर उसके पास आया, "सुनते हो!’’ आते ही वह खुशी से फ़ाइल को हिलाते हुए चिल्लाया, "प्रधानमंत्री ने इस पेड़ को काटने का हुक्म दे दिया, और इस घटना की सारी अंतर्राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी अपने सिर ले ली है। कल यह पेड़ काट दिया जाएगा, और तुम इस संकट से छुटकारा हासिल कर लोगे। सुनते हो? आज तुम्हारी फ़ाइल पूर्ण हो गई।’’

मगर कवि का हाथ ठंडा था, आँखों की पुतलियाँ निर्जीव और चींटियों की एक लंबी पाँत उसके मुँह में जा रही थी....।

उसके जीवन की फ़ाइल भी पूर्ण हो चुकी थी। 

अभ्यास

पाठ के साथ

1. बेचारा जामुन का पेड़। कितना फलदार था।

और इसकी जामुनें कितनी रसीली होती थीं।

क. ये संवाद कहानी के किस प्रसंग में आए हैं?

ख. इससे लोगों की कैसी मानसिकता का पता चलता है?

2. दबा हुआ आदमी एक कवि है, यह बात कैसे पता चली और इस जानकारी का फ़ाइल की यात्रा पर क्या असर पड़ा?

3. कृषि-विभाग वालों ने मामले को हॉर्टीकल्चर विभाग को सौंपने के पीछे क्या तर्क दिया?

4. इस पाठ में सरकार के किन-किन विभागों की चर्चा की गई है और पाठ से उनके कार्य के बारे में क्या अंदाज़ा मिलता है?

पाठ के आस-पास

  1. कहानी में दो प्रसंग एेसे हैं, जहाँ लोग पेड़ के नीचे दबे आदमी को निकालने के लिए कटिबद्ध होते हैं। एेसा कब-कब होता है और लोगों का यह संकल्प दोनों बार किस-किस वजह से भंग होता है।
  2. यह कहना कहाँ तक युक्तिसंगत है कि इस कहानी में हास्य के साथ-साथ करुणा की भी अंतर्धारा है। अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दें।
  3. यदि आप माली की जगह पर होते, तो हुकूमत के फैसले का इंतज़ार करते या नहीं? अगर हाँ, तो क्यों? और नहीं, तो क्यों?

शीर्षक सुझाइए

कहानी के वैकल्पिक शीर्षक सुझाएँ। निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखकर शीर्षक गढ़े जा सकते हैं–

  • कहानी में बार-बार फ़ाइल का ज़िक्र आया है और अंत में दबे हुए आदमी के जीवन की फाइल पूर्ण होने की बात कही गई है।
  • सरकारी दफ़्तरों की लंबी और विवेकहीन कार्यप्रणाली की ओर बार-बार इशारा किया गया है।
  • कहानी का मुख्य पात्र उस विवेकहीनता का शिकार हो जाता है।

भाषा की बात

1. नीचे दिए गए अंग्रेज़ी शब्दों के हिंदी प्रयोग लिखिए–

अर्जेंट, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, मेंबर, डिप्टी सेक्रेटरी, चीफ़ सेक्रेटरी, मिनिस्टर, अंडर सेक्रेटरी, हॉर्टीकल्चर डिपार्टमेंट, एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट

2. इसकी चर्चा शहर में भी फैल गई और शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए– यह एक संयुक्त वाक्य है, जिसमें दो स्वतंत्र वाक्यों को समानाधिकरण समुच्चयबोधक शब्द और से जोड़ा गया है। संयुक्त वाक्य को इस प्रकार सरल वाक्य में बदला जा सकता हैइसकी चर्चा शहर में फैलते ही शाम तक गली-गली से शायर जमा होने शुरू हो गए। पाठ में से पाँच संयुक्त वाक्यों को चुनिए और उन्हें सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए।

3. साक्षात्कार अपने-आप में एक विधा है। जामुन के पेड़ के नीचे दबे आदमी के फाइल बंद होने (मृत्यु) के लिए ज़िम्मेदार किसी एक व्यक्ति का काल्पनिक साक्षात्कार करें और लिखें।

शब्द छवि

झक्कड़ - आँधी

रुआँसा - रोनी सूरत

ताज्जुब - आश्चर्य

हॉर्टीकल्चर - उद्यान कृषि

एग्रीकल्चर - कृषि

तगाफ़ुल - विलंब, देर, उपेक्षा

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