स्थलावृफतिक मानचित्रा घाटी: यह दो पहाडि़यों या कटकों के बीच भूमि का निम्न क्षेत्रा है, जो एक नदी या हिमानी के पाश्वर् अपरदन के परिणामस्वरूप बनती है। ट आकार की घाटी न् आकार की घाटी भूगोल में प्रयोगात्मक कायर् भूगोल में प्रयोगात्मक कायर् होने वाले रूढ़ चिÉों तथा प्रतीकों को दशार्या जाता है। ये रूढ़ चिÉ एवं प्रतीक पूरे विश्व में स्वीवृफत हैं, कोइर् भी व्यक्ित विश्व में कहीं भी बिना उस देश की भाषा जाने भी इन मानचित्रों को पढ़ सकता है। सामान्यतः जिन शीषर्कों के अंतगर्त स्थलावृफतिक मानचित्रों की व्याख्या की जाती है, वे हैं: ;कद्ध उपांत सूचनाएँ ;खद्ध उच्चावच एवं अपवाह ;गद्ध भूमि उपयोग ;घद्ध यातायात तथा संचार के साधन ;घद्ध मानव बस्ितयाँ उपांत सूचनाएँ: मानचित्रा की सीमाओं पर लिखी गइर् सूचनाओं को उपांत सूचनाएँ कहते हैं। इसमें स्थलावृफतिक शीट संख्या, इसकी स्िथति, डिग्री एवं मिनट में इसका विस्तार, मापनी एवं सम्िमलित जिले, आदि की सूचनाएँ होती हैं। क्षेत्रा का उच्चावच: इसमें किसी क्षेत्रा के सामान्य स्थलावृफति का अध्ययन मैदानों, पठारों, पहाडि़यों या पवर्तों को उनके श्िाखरों, टीलों एवं ढाल की दिशा के साथ किया जाता है। इन आवृफतियों को निम्नलिख्िात वगो± के अंतगर्त पढ़ा जाता है: ऽ पहाड़ी: अवतल, उत्तल, सीध या मंद ढाल तथा आकार के साथ ऽ पठार: यह चैड़ा, संकरा, चपटा, तरंगित अथवा कटा - पफटा है या नहीं। ऽ मैदान: इसके प्रकार यानि, जलोढ़, हिमानी, कास्टर्, तटीय, कच्छ इत्यादि। ऽ पवर्त: सामान्य उफँचाइर्, श्िाखर, दरेर् इत्यादि। क्षेत्रा का अपवाह: महत्त्वपूणर् नदियाँ एवं उनकी सहायक नदियाँ तथा उनके द्वारा बनाए गए घाटियों के प्र्रकार एवं विस्तार। उनके द्वारा बनाए गए अपवाह तंत्रा, जैसे - द्रुमावृफतिक, अरीय, वलय, जालीनुमा एवं आंतरिक इत्यादि की व्याख्या की जाती है। भूमि उपयोग: इसमें विभ्िान्न प्रकारों से भूमि उपयोगों का विश्लेषण किया जा सकता है, जैसे - ऽ प्रावृफतिक वनस्पति एवं वन ;कौन - सा क्षेत्रा वनाच्छादित है, यह वन घना है या विरल तथा वन के वगर्, जैसे - यह संरक्ष्िात, वगीर्वृफत या अवगीर्वृफत हैद्ध। ऽ वृफष्िागत्, पफलोद्यान, बंजर भूमि, औद्योगिक इत्यादि। ऽ सुविधाएँ एवं सेवाएँ, जैसे - विद्यालय, महाविद्यालय, चिकित्सालय, पाकर्, हवाइर्अîेó, विद्युत उपवेंफद्र इत्यादि। यातायात एवं संचार: यातायात के साधनों के अंतगर्त राष्ट्रीय तथा राज्य महामागर्, जिला सड़वेंफ, रथ्या, उँफटों के रास्ते, पगडंडी, रेलवे, जल मागर्, मुख्य संचार साधन, डाकघर इत्यादि। बस्ितयाँ: निम्नलिख्िात शीषर्कों में बस्ितयों का अध्ययन किया जाता है - स्थलावृफतिक मानचित्रा ऽ ग्रामीण बस्ितयाँ: ग्रामीण बस्ितयों के प्रकार, जैसे - संहत, प्रकीणर्, रैख्िाक इत्यादि। ऽ नगरीय बस्ितयाँ: नगरीय बस्ितयों के प्रकार एवं उनके कायर्, जैसे - राजधानी नगर, प्रशासनिक नगर, धा£मक नगर, पत्तन नगर, पवर्त नगर इत्यादि। व्यवसाय: किसी क्षेत्रा के लोगों के सामान्य व्यवसाय को वहाँ के भूमि उपयोग तथा बस्ितयों के प्रकार के द्वारा पहचाना जा सकता है। उदाहरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में अिासंख्य लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती होता है, आदिवासी क्षेत्रों में लकड़ी काटना एवं प्रारंभ्िाक खेती की अिाकता होती है तथा तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने का कायर् किया जाता है। इसी प्रकार शहरों एवं नगरों में सेवाएँ तथा व्यापार लोगों का मुख्य पेशा है। मानचित्रा निवर्चन वििा मानचित्रा निवर्चन में उन कारकों का अध्ययन शामिल है, जो मानचित्रा पर दिखाए गए अनेक लक्षणों के बीच संबंधों को समझने में सहायता करते हैं। उदाहरण के लिए, स्थलावृफतिक मानचित्रों पर प्रावृफतिक वनस्पतियों के वितरण तथा वृफष्िा के अंतगर्त क्षेत्रों को भू - आवृफतियों एवं अपवाह तंत्रा की पृष्ठ भूमि में ठीक से समझ सकते हैं। इसी प्रकार बस्ितयों के वितरण को परिवहन के साधनों एवं स्थलावृफतियों के द्वारा पहचाना जा सकता है। निम्नलिख्िात चरण मानचित्रों की व्याख्या में सहायता प्रदान करेंगे: ऽ स्थलावृफतिक मानचित्रा में स्थलावृफतिक शीट सूचक संख्या के अनुसार भारत में इसकी अवस्िथति ज्ञात की जा सकती है। इससे बृहत एवं मध्यम स्तर वाले भू - आवृफतिक विभागों की भी सामान्य विशेषताओं की जानकारी मिलती है। मानचित्रा के मापनी तथा समोच्च अंतरालों को देख्िाए, जो आपको एक क्षेत्रा की सामान्य स्थलावृफति एवं उसके विस्तार को बताता है। ऽ ट्रे¯सग कागज पर निम्नलिख्िात लक्षणों को उतारिए: ;कद्ध मुख्य स्थलावृफतियाँ - समोच्च रेखाओं एवं भौगोलिक लक्षणों द्वारा दिखाए गए। ;खद्ध अपवाह एवं जलीय लक्षण - मुख्य नदी एवं उसकी महत्त्वपूणर् सहायक नदियाँ। ;गद्ध भूमि उपयोग, जैसे - वन, वृफष्िागत् भूमि, बेकार भूमि, पशु विहार, पावर्फ, विद्यालय इत्यादि। ;घद्ध बस्ितयाँ एवं परिवहन प्रतिरूप। ऽ प्रत्येक लक्षण के वितरण प्रतिरूप का वणर्न सबसे महत्त्वपूणर् पक्षों की ओर ध्यान आक£षत करते हुए अलग - अलग कीजिए। ऽ एक समय में मानचित्रों के एक जोड़े को अध्यारोपित करके, यदि किन्हीं दो प्रारूपों के बीच कोइर् संबंध है, तो उसे लिख्िाए। उदाहरण के लिए, अगर एक समोच्च मानचित्रा भूमि उपयोग से मिल जाता है, तो ढाल के डिग्री एवं उपयोग में आने वाली भूमि के बीच संबंध को बताएगा। एक ही क्षेत्रा के हवाइर् चित्रों तथा उपग्रही प्रति¯बबों की तुलना उस क्षेत्रा के स्थलावृफतिक मानचित्रा के द्वारा की जा सकती है।

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