™श्छंजनतंस दनउइमते ंतम जीम चतवकनबज व िीनउंद ेचपतपजश् दृ क्मकमापदक ऽ 9ण्1 भूमिका ;प्दजतवकनबजपवदद्ध गण्िात में, शब्द ‘अनुक्रम’ का उपयोग साधरण अँगे्रशी के समान किया जाता है। जब हम कहते हैं कि समूह के अवयवों को अनुक्रम में सूचीब( किया गया है तब हमारा तात्पयर् है कि समूह को इस प्रकार क्रमिक किया गया है कि हम उसके सदस्यों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय संख्या तथा आदि से पहचान सकते हैं। उदाहरणतः, विभ्िान्न समयों में मानव की जनसंख्या अथवा बैक्टीरिया अनुक्रम की रचना करते हैं। कोइर् ध्नराश्िा जो बैंक खातें में जमा कर दी जाती है, विभ्िान्न वषोर्ं में एक अनुक्रम का निमार्ण करती है। किसी सामान की अवमूल्ियत कीमतें एक अनुक्रम बनाती हैं मानव ियाओं के कइर् क्षेत्रों में अनुक्रमों काबहुत महत्त्वपूणर् उपयोग है। विश्िाष्ट पैटनो± का अनुसरण करने वाले थ्पइवदंबबप अनुक्रम श्रेणी ;च्तवहतमेेपवदद्ध कहलाते हैं। पिछली कक्षा में, हम ;1175.1250 ।ण्क्ण्द्ध समांतर श्रेणी के संबंध् में पढ़ चुके हैं। इस अध्याय में समांतर श्रेणी के बारे में और अध्िक चचार् करनेके साथ - साथ हम समांतर माध्य, गुणोत्तर माध्य, समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य में संबंध्, विशेष अनुक्रमों के क्रमागत द प्रावृफत संख्याओं का योग, द प्रावृफत संख्याआं के वगोर्ं का योग तथा द प्रावृफत संख्याओं के घनों के योग का भी अध्ययन करेंगे। 9ण्2 अनुक्रम ;ैमुनमदबमद्ध आइए हम निम्नलिख्िात उदाहरणों पर विचार करेंः माना कि पीढि़यों का अंतर 30 वषर् है और व्यक्ित के 300 वषार्ंे में पूवर्जों अथार्त्् माता - पिता दादा - दादी, परदादा - परदादी आदि की संख्या ज्ञात कीजिए। 300 यहाँ पीढि़यों की वुफल संख्या त्र 30 त्र 10ण् प्रथम, द्वितीय, तृतीय, ... दसवीं पीढ़ी के लिए व्यक्ित के पूवर्जों की संख्या क्रमशः 2ए 4ए 8ए 16ए 32ए ण्ण्ण्ए 1024 है। ये संख्याएँ एक अनुक्रम का निमार्ण करती हैं, ऐसा हम कहते हैं। 10 को 3 से भाग देते समय विभ्िान्न चरणांे के बाद प्राप्त क्रमिक भागपफलों पर विचार कीजिए। इस प्रिया में हम क्रमशः 3ए3ण्3ए3ण्33ए3ण्333ण्ण्ण् आदि पाते हैं ये भागपफल भी एक अनुक्रम का निमार्ण करते हैं। एक अनुक्रम में जो संख्याएँ आती हैं उन्हें हम उसका पद कहते हैं। अनुक्रम के पदों को हम ंए ंए ं3ए३ए ं ए ३ए आदि द्वारा निरूपित करते हैं। प्रत्येक पद के साथ लगी संख्या जिसे पदांक12दकहते हैं, उसका स्थान बताती है। अनुक्रम का दवाँ पद दवें स्थान को निरूपित करता है और इसे ं द द्वारा निरूपित करते हैं, इसे अनुक्रम का व्यापक पद भी कहते हैं। इस प्रकार, व्यक्ित के पूवर्जों ;पुवर्जोंद्ध के अनुक्रम के पदों को निम्न प्रकार से निरूपित करते हैंः ं त्र 2ए ं त्र 4ए ं त्र 8ए ३ए ं त्र 1024ण्12310इसी प्रकार क्रमिक भागपफलों वाले उदाहरण में: ं1 त्र 3ए ं2 त्र 3ण्3ए ं3 त्र 3ण्33ए ३ ं6 त्र 3ण्33333ए आदि। वे अनुक्रम, जिनमें पदों की संख्या सीमित होती हैं, उसे ‘परिमित अनुक्रम’ कहते हैं। उदाहरणतः पूवर्जों का अनुक्रम परिमित अनुक्रम है, क्योंकि उसमें 10 पद हैं ;सीमित संख्याद्ध। एक अनुक्रम, ‘‘अपरिमित अनुक्रम कहा जाता है, जिसमें पदों की संख्या सीमित नहीं होती है।’’ उदाहरणतः पूवोर्क्त क्रमागत भागपफलों का अनुक्रम एक ‘अपरिमित अनुक्रम’ है। अपरिमित कहने का अथर् है, जो कभी समाप्त नहीं होता। प्रायः यह संभव है कि अनुक्रम के विभ्िान्न पदों को व्यक्त करने के नियम को एक बीज गण्िातीय सूत्रा द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरणाथर्, प्रावृफत सम संख्याओं के अनुक्रम 2ए 4ए 6ए ३ पर विचार कीजिए। यहाँ ं त्र 2 त्र 2 × 1 ं त्र 4 त्र 2 × 212ं3 त्र 6 त्र 2 × 3 ं4 त्र 8 त्र 2 × 4 ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण् त्र 46 त्र 2 × 23 ं त्र 48 त्र 2 त्र 2 × 24ए और इसी प्रकार अन्य।ं2324वस्तुतः, हम देखते हैं कि अनुक्रम का दवाँ पद ं त्र 2दए लिखा जा सकता हैं, जबकि द दएक प्रावृफत संख्या है। इसी प्रकार, विषम प्रावृफत संख्याओं के अनुक्रम 1ए3ए5ए7ए३एमेंदवें पद के सूत्रा को ं त्र 2द दृ 1ए के रूप में निरूपित किया जा सकता है, जबकि द एक प्रावृफत संख्या है।दव्यवस्िथत संख्याओं 1ए 1ए 2ए 3ए 5ए 8एण्ण् का कोइर् स्पष्ट पैटनर् नहीं है, किंतु अनुक्रम की रचना पुनरावृिा संबंध् द्वारा व्यक्त की जा सकती हैं। उदाहरणतः ं1 त्र ं2 त्र 1 ं3 त्र ं1 ़ ं2 ंद त्र ंददृ2 ़ ंददृ1ए द झ 2 इस अनुक्रम को थ्पइवदंबबप अनुक्रम कहते हैं। अभाज्य संख्याओं के अनुक्रम 2ए3ए5ए7३ में दवीं अभाज्य संख्या का कोइर् सूत्रा नहीं हैं। ऐसे वण्िार्त अनुक्रम को केवल मौख्िाक निरूपित किया जा सकता हैं। प्रत्येक अनुक्रम में यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि उसके लिए विशेष सूत्रा होगा। किंतु पिफर भी ऐसे अनुक्रम के निमार्ण के लिए कोइर् न कोइर् सै(ांतिक योजना अथवा नियम की आशा तो की जा सकती है, जो पदों ं1ए ं2ए ं3ए३एं ए३ का क्रमागत रूप दे सके।दउपयुर्क्त तथ्यों के आधर पर, एक अनुक्रम को हम एक पफलन के रूप में ले सकते हैं जिसका प्रांत प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय हो अथवा उसका उपसमुच्चय क्ष्1ए 2ए 3ण्ण्णद्वण् के प्रकार का हो। कभी - कभी हम पफलन के संकेत ंके लिए ं;दद्ध का उपयोग करते हैं।द 9ण्3 श्रेणी ;ैमतपमेद्ध माना कि यदि ं1ए ं3ए३एं अनुक्रम है, तो व्यंजक ं ़ ं़ ं ़ए३़ ं संबंिात अनुक्रम से2ए द 12 3द बनी श्रेणी कहलाती हैं। श्रेणी परिमित अथवा अपरिमित होगी, यदि अनुक्रम क्रमशः परिमित अथवा अपरिमित है। श्रेणी को संध्ि रीति में प्रदश्िार्त करते हैं, जिसे सिग्मा संकेत कहते हैं। इसके लिए ग्रीक अक्षर संकेत ∑ ;सिग्माद्ध का उपयोग करते हैं, जिसका अथर् होता हैं जोड़ना। इस प्रकार, श्रेणी द ं1 ़ ं2 ़ ं3़ण्ण्ण् ़ ंद का संक्ष्िाप्त रूप, ∑ं है।ा ण्ा त्र1 टिप्पणी श्रेणी का उपयोग, योग के लिए नहीं, बल्िक निरूपित योग के लिए किया जाता है। उदाहरणतः 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 चार पदों वाली एक परिमित श्रेणी है। जब हम ‘श्रेणी का योग’ मुहावरे का उपयोग करते हैं, तब उसका तात्पयर् उस संख्या से है जो पदों के जोड़ने से परिण्िात होती है। अतः श्रेणी का योग 16 है। अब हम वुफछ उदाहरणों पर विचार करते हैं। उदाहरण 1 दी गइर् परिभाषाओं के आधर पर निम्नलिख्िात प्रत्येक अनुक्रम के प्रथम तीन पद बताइए: द − 3 ;पद्ध ंद त्र 2द ़ 5 ;पपद्ध ंद त्र ण्4 हल ;पद्ध यहाँ ंत्र 2द ़ 5एद द त्र 1ए 2ए 3ए रखने पर, हम पाते हैं: ं1 त्र 2;1द्ध ़ 5 त्र 7ए ं2 त्र 9ए ं3 त्र 11 इसलिए, वांछित पद 7ए 9 तथा 11 हैं। द − 3;पपद्ध यहाँ ं त्र 4द 13− 11 इस प्रकार ं1 त्र त्र− ए ं2 त्र− ए ं3 त्र 0 42 4 अतः प्रथम तीन पद 11 तथा 0 हैं।− ए24 उदाहरण 2 ं त्र ;द दृ 1द्ध ;2 दृ दद्ध ;3 ़ दद्ध द्वारा परिभाष्िात अनुक्रम का 20वाँ पद क्या हैं?दहल हम द त्र 20 रखने पर, पाते हैं त्र ;20 दृ 1द्ध ;2 दृ 20द्ध ;3 ़ 20द्ध ं20 त्र 19 × ;दृ 18द्ध × ;23द्ध त्र दृ 7866ण् उदाहरण 3 माना कि अनुक्रम ं निम्नलिख्िात रूप में परिभाष्िात है:दं1 त्र1ए ंद त्र ंददृ1 ़ 2 वित द ≥ 2ण् तो अनुक्रम के पाँच पद ज्ञात कीजिए तथा संगत श्रेणी लिख्िाए। हल हम पाते हैं: ं1 त्र1ए ं2 त्र ं1 ़ 2 त्र 1 ़ 2 त्र 3ए ं3 त्र ं2 ़ 2 त्र 3 ़ 2 त्र 5ए ं4 त्र ं3 ़ 2 त्र 5 ़ 2 त्र 7ए ं5 त्र ं4 ़ 2 त्र 7 ़ 2 त्र 9ण् अतः अनुक्रम के प्रथम पाँच पद 1ए3ए5ए7 तथा 9 हैं। संगत श्रेणी 1 ़ 3 ़ 5 ़ 7 ़ 9 ़ण्ण्ण् है। प्रश्नावली 9ण्1 प्रश्न 1 से 6 तक के अनुक्रमों में प्रत्येक के प्रथम पाँच पद लिख्िाये, जिनका दवाँ पद दिया गया है: द 1ण् ं त्र द ;द ़ 2द्ध 2ण् ंत्र 3ण् ंत्र 2द दद द ़1 द 2द − 3 द2 ़ 54ण् ंद त्र 5ण् ंद त्र ;दृ1द्धददृ1 5द़1 6ण् ंद त्र द ण्64 निम्नलिख्िात प्रश्न 7 से 10 तक के अनुक्रमों में प्रत्येक का वांछित पद ज्ञात कीजिए, जिनका दवाँ पर दिया गया है: 2द य ं7ण् ं त्र 4द दृ 3य ं17ए ं24 8ण् ंत्र 7 द द 2द ;दृ2द्ध दद 9ण् ंद त्र ;दृ1द्धद दृ 1द3य ं9 10ण् ंद त्र य ं20 ण् द ़ 3 प्रश्न 11 से 13 तक प्रत्येक अनुक्रम के पाँच पद लिख्िाए तथा संगत श्रेणी ज्ञात कीजिए: 11ण् ं1 त्र 3ए ंद त्र 3ंददृ1 ़ 2 सभी द झ 1 के लिए ंद−112ण् ं त्र दृ1ए ंत्र ए जहाँ द ≥ 21द द 13ण् ं त्र ंत्र 2ए ं त्र ं दृ1ए जहाँ द झ 21 2 दददृ114ण् थ्पइवदंबबप अनुक्रम निम्नलिख्िात रूप में परिभाष्िात है: 1 त्र ं त्र ंतथा ं त्र ं ़ ंए दण्झ2 तो1 2 दददृ1ददृ2ंद़1 ज्ञात कीजिए, जबकि द त्र 1ए 2ए 3ए 4ए 5ंद 9ण्4 समांतर श्रेणी ख्।तपजीउमजपब च्तवहतमेेपवद ;।ण्च्ण्द्ध, पूवर् में अध्ययन किए वुफछ सूत्रों तथा गुणों का पुनः स्मरण करते हैं। एक अनुक्रम ंए ं ंए३एं३ को समांतर अनुक्रम या समांतर श्रेणी कहते हैं, यदि12 3द ंद़1 त्र ंद ़ कए द ∈छ ं1 को प्रथम पद कहते हैं तथा अचर पद क को समांतर श्रेणी का सावर् अंतर कहते हैं। मान लीजिए एक समांतर श्रेणी ;प्रमाण्िात रूप मेंद्ध पर विचार करें, जिसका प्रथम पद ंए तथा सावर् अंतर क है, अथार्त् ंए ं ़ कए ं ़ 2कए ण्ण्ण् समांतर श्रेणी का दवाँ पद ;व्यापक पदद्ध ं त्र ं ़ ;द दृ 1द्धक है।दहम समांतर श्रेणी की सामान्य विशेषताओं का परीक्षण कर सकते हैंः ;पद्ध यदि समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में एक अचर जोड़ा जाए, तो इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है। ;पपद्ध यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में से एक अचर घटाया जाए तो, इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है। ;पपपद्ध यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में एक अचर से गुणा किया जाए तो, इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है। ;अपद्ध यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद को एक अशून्य अचर से भाग दिया जाए तो इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी एक समांतर श्रेणी होगा। यहाँ इसके बाद, हम समांतर श्रेणी के लिए निम्नलिख्िात संकेतों का उपयोग करेंगे: ं त्र प्रथम पद, स त्र अंतिम पद, क त्र सावर् अंतर द त्र पदों की संख्या, ैत्र समांतर श्रेणी के द पदों का योगपफलद माना ंए ं ़ कए ं ़ 2कए ३ए ं ़ ;द दृ 1द्ध क एक समांतर श्रेणी है, तो स त्र ं ़ ;द दृ 1द्ध क दै त्रख्2ं ़ ;द −1द्ध क ,द 2 हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं: दै ंसद त्र ख़्,2 आइए वुफछ उदाहरण लेते हैं। उदाहरण 4 यदि किसी समांतर श्रेणी का उवाँ पद द तथा दवाँ पद उए जहाँ उ ≠ दए हो तो चवाँ पद ज्ञात कीजिए। हल हम पाते हैं: ंउ त्र ं ़ ;उ दृ 1द्ध क त्र दए ण्ण्ण् ;1द्ध तथा ंद त्र ं ़ ;द दृ 1द्ध क त्र उए ण्ण्ण् ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को हल करने पर, हम पाते हैंः ;उ दृ दद्ध क त्र द दृ उए या क त्र दृ1ए ण्ण्ण् ;3द्ध तथा ं त्र द ़ उ दृ1 ण्ण्ण् ;4द्ध इसलिए ंच त्र ं ़ ;च दृ 1द्धक त्र द ़ उ दृ 1 ़; च दृ 1द्ध ;दृ1द्ध त्र द ़ उ दृ च अतः, च वाँ पद द ़ उ दृ चण् है। उदाहरण 5 यदि किसी समांतर श्रेणी के द पदों का योग च्1 द ददृ 1द्ध फए है, जहाँ च् तथा फ अचरद ़ ;2हो तो सावर् अंतर ज्ञात कीजिए। हल माना कि ं1ए ंए ३ए ं दी गइर् समांतर श्रेणी है, तो2द 1ै त्र ं1 ़ ं2 ़ ं3 ़ण्ण्ण़् ं ़ ं त्र दच् ़ द;द दृ 1द्धफदददृ1द2 इसलिए ै त्र ं त्र च्ए ै त्र ं ़ ं त्र 2च् ़ फ 11212इसलिए ं त्रै दृ ै त्र च् ़ फ221अतः सावर् अंतर है: क त्र ं2 दृ ं1 त्र ;च् ़ फद्ध दृ च् त्र फ उदाहरण 6 दो समांतर श्रेढि़यों के द पदों के योगपफल का अनुपात ;3द ़ 8द्ध रू ;7द ़ 15द्ध है। 12 वें पद का अनुपात ज्ञात कीजिए। हल माना कि ं1ए ं2ए तथा क1ए क2ए क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय समांतर श्रेढि़यों के प्रथम पद तथा सावर् अंतर हैं, तो दी हुइर् शतर् के अनुसार, हम पाते हैं: ्र ाम समांेढी वफद पदोे3़8 पथ्तरश्ऱें का याग द त्र द्वितीय समातंर श्रेढी वेद पदोे7़15 ़फं का याग द द ख्2ं1;द 1द्ध क1 ,़8़− 3द2 त्र या द 7द ़15 ख्2ं ;द 2 ,2 ़−1द्ध क2 2ं1 ़−;द 1द्ध क13द ़8 त्रया ण्ण्ण् ;1द्ध2ं2 ़−;द 1द्ध क27द ़15 ंर श्री का पथ््राम समातेढ़12वाँ पद ं1 ़11क1त्र अब द्वितीय समांतर श्रेढी़ का 12वाँ पद ं2 ़11क2 2ं ़22 क 3 23 ×़ 811 त्र ख्;1द्ध में द त्र 23 रखने पर,2ं2 ़22 क2 72315×़ ं ़11क 711 त्रया ं2 ़11क2 16 अतः वांछित अनुपात 7 रू 16 है। उदाहरण 7 एक व्यक्ित की प्रथम वषर् में आय 3ए00ए000 रुपयेहै तथा उसकी आय 10ए000 रुपये प्रति वषर्, उन्नीस वषो± तक बढ़ती है, तो उसके द्वारा 20 वषो± में प्राप्त आय ज्ञात कीजिए। हल यहाँ, हम पाते हैं, समांतर श्रेणी जिसका ं त्र 3ए00ए000ए क त्र 10ए000ए तथा द त्र 20 योग सूत्रा का उपयोग करने पर, हम पातें हैं, 20 19ै20 त्र ख्600000 ़× 10000, त्र 10 ;790000द्ध त्र 79ए00ए0002 वह व्यक्ित 20 वषर् के अंत में 79ए00ए000 रुपयेप्राप्त करता है। 9ण्4ण्1 समांतर माध्य ;।तपजीउमजपब उमंदद्ध दिया है दो संख्याएँ ं तथा इण् हम इन संख्याओं के बीचमें एक संख्या । ले सकते हैं ताकि ंए ।ए इ समांतर श्रेणी में हों, तो संख्या । को ं और इ का समांतर माध्य ;।ण्डण्द्ध कहते हैं। ंइ़ । दृ ंत्र इ दृ । अथार्त्् ।त्र 2 ंइ़ दो संख्याओं ंतथा इके मध्य समांतर माध्य को इनके औसत के रूप में व्याख्ियत किया2 जा सकता है। उदाहरण के लिए, दो संख्याओं 4 तथा 16 का समांतर माध्य 10 है। इस तरह हम एक संख्या 10 को 4 तथा 16 के मध्य रखकर एक समांतर श्रेणी 4ए 10ए 16 की रचना करते हैं। अब एक स्वाभाविक प्रश्न उठता हैं। क्या दिए गए किन्हीं दो संख्याओं के बीच दो या अिाक संख्याओं को रखने से समांतर श्रेणी ;।ण्च्ण्द्ध तैयार हो सकेगी? अवलोकन कीजिए कि संख्याओं 4 तथा 16 के बीच 8 और 12 रखा जाए तो 4ए 8ए 12ए 16 समांतर श्रेणी ;।ण्च्ण्द्ध हो जाती है। सामान्यतः किन्हीं दो संख्याओं ंतथा इके बीच कितनी भी संख्याओं को रखकर समांतर श्रेणी ।ण्च्ण् में परिण्िात किया जा सकता है। माना कि ।1ए ।2ए ।3ए ३।ंतथा इके मध्य दसंख्याएँ इस प्रकार हैं, कि ंए ।1ए ।2ए ।3एद ३। ए इसमांतर श्रेणी में है।दयहाँ इए;द़ 2द्ध वाँ पद हैं, अथार्त् इत्र ं़ ख्;द़ 2द्ध दृ 1,क त्र ं़ ;द़ 1द्धक − इससे पाते हैं कत्र इं ण्द़1 इस प्रकार, ंतथा इके मध्य दसंख्याएँ निम्नलिख्िात हैंः इं− ।1 त्र ं़ कत्र ं़ द़1 2; − द्धइं । त्र ं़ 2कत्र ं़2द़1 3;इंद्ध− ।3 त्र ं़ 3कत्र ं़ द़1 ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण् ; − द्धदइं । त्र ं़ दकत्र ं़ दद़1 उदाहरण 8 ऐसी 6 संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 3 और 24 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक समांतर श्रेणी बन जाए। हल माना कि ।ए ।ए ।ए ।ए ।तथा ।ए3 तथा 24 के मध्य 6 संख्याएँ हैं,1 2345 6इसलिए 3ए ।ए ।ए ।ए ।ए । ।24 समांतर श्रेणी में हैं।1 2345ए6 यहाँ ं त्र 3ए इ त्र 24ए द त्र 8ण् इसलिए 24 त्र 3 ़ ;8 दृ1द्ध कए इससे प्राप्त होता है क त्र 3ण् इस प्रकार । त्र ं ़ क त्र 3 ़ 3 त्र 6य । त्र ं ़ 2क त्र 3 ़ 2 × 3 त्र 9य1 2।3 त्र ं ़ 3क त्र 3 ़ 3 × 3 त्र 12य ।4 त्र ं ़ 4क त्र 3 ़ 4 × 3 त्र 15य ।5 त्र ं ़5क त्र 3 ़ 5 × 3 त्र 18य ।6 त्र ं ़ 6क त्र 3 ़ 6 × 3 त्र 21ण् अतः, संख्याएँ 3 तथा 24 के मध्य 6 संख्याएँ 6ए 9ए 12ए 15ए 18 तथा 21 हैं। प्रश्नावली 9ण्2 1ण् 1 से 2001 तक के विषम पूणा±कों का योग ज्ञात कीजिए। 2ण् 100 तथा 1000 के मध्य उन सभी प्रावृफत संख्याओं का योगपफल ज्ञात कीजिए जो 5 के गुणज हों। 3ण् किसी समांतर श्रेणी में प्रथम पद 2 है तथा प्रथम पाँच पदों का योगपफल, अगले पाँच पदों के योगपफल का एक चैथाइर् है। दशार्इए कि 20वाँ पद दृ112 है। 4ण् समांतर श्रेणी दृ 6ए −11ए दृ 5ए ३ के कितने पदों का योगपफल दृ25 है?2 5ण् किसी समांतर श्रेणी का चवाँ पद 1 तथा ुवाँ पद 1ए हो तो सि( कीजिए कि प्रथम चु पदों ु च का योग 1;चु ़1द्ध होगा जहाँ च≠ ुण् 2 6ण् यदि किसी समांतर श्रेणी 25ए 22ए 19ए ३ के वुफछ पदों का योगपफल 116 है तो अंतिम पद ज्ञात कीजिए। 7ण् उस समांतर श्रेणी के द पदों का योगपफल ज्ञात कीजिए, जिसका ा वाँ पद 5 ा ़ 1 है। 8ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के द पदों का योगपफल ;चद ़ ुद2द्धए है, जहाँ च तथा ु अचर हों तो सावर् अंतर ज्ञात कीजिए। 9ण् दो समांतर श्रेढि़यों के द पदों के योगपफल का अनुपात 5द ़ 4 रू 9द ़ 6ण् हो, तो उनके 18 वें पदों का अनुपात ज्ञात कीजिए। 10ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रथम च पदों का योग, प्रथम ु पदों के योगपफल के बराबर हो तो प्रथम ;च ़ ुद्ध पदों का योगपफल ज्ञात कीजिए। 11ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रथम चए ुए त पदों का योगपफल क्रमशः ंए इ तथा ब हो तो सि( कीजिए कि 12ण् किसी समांतर श्रेणी के उ तथा द पदों के योगपफलों का अनुपात उ2 रू द2 है तो दशार्इए कि उ वें तथा दवें पदों का अनुपात ;2उदृ1द्ध रू ;2ददृ1द्ध है। 13ण् यदि किसी समांतर श्रेणी के दवें पद का योगपफल 3द2 ़ 5द हैं तथा इसका उवाँ पद 164 है, तो उ का मान ज्ञात कीजिए। 14ण् 5 और 26 के बीच ऐसी 5 संख्याएँ डालिए ताकि प्राप्त अनुक्रम समांतर श्रेणी बन जाए। ंद ़इद 15ण् यदि ए ं तथा इ के मध्य समांतर माध्य हो तो द का मान ज्ञात कीजिए।द−1 द−1ं ़इ 16ण् उ संख्याओं को 1 तथा 31 के रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक समांतर श्रेणी है और 7वीं एवं ;उ दृ1द्ध वीं संख्याओं का अनुपात 5 रू 9 है। तो उ का मान ज्ञात कीजिए। 17ण् एक व्यक्ित )ण का भुगतान 100 रुपये की प्रथम किश्त से शुरू करता है। यदि वह प्रत्येक किश्त में 5 रुपये प्रति माह बढ़ता है तो 30 वीं किश्त की राश्िा क्या होगी? 18ण् एक बहुभुज के दो क्रमिक अंतःकोणों का अंतर 50 है। यदि सबसे छोटा कोण 1200 हो, तो बहुभुज की भुजाओं की संख्या ज्ञात कीजिए।ंइ ब;ुतद्ध;तचद्ध; चंद्ध−़−़ −त्र 0 चु त9ण्5 गुणोत्तर श्रेणी ख्ळमवउमजतपब च्तवहतमेेपवद ;ळण् च्ण्द्ध, आइए निम्नलिख्िात अनुक्रमों पर विचार करें: ;पद्ध 2ए4ए8ए16एण्ण्ण्ण् 111 −− 1;पपद्ध ए ए ए एण्ण्ण् 927 81 243;पपपद्ध ण्01ए0001एण्000001एण्ण्ण् इनमे से प्रत्येक अनुक्रम के पद किस प्रकार बढ़ते हैं? उपयुर्क्त प्रत्येक अनुक्रम में हम पाते हैं कि प्रथम पद को छोड़, सभी पद एक विशेष क्रम में बढ़ते हैं। ;पद्ध में हम पाते हैं: ंं234ं1 त्र2य त्र2य त्र2य त्र2 और इस प्रकारंं123 ;पपद्ध में हम पाते हैं: 1 ंदृ1 ंदृ1 ंदृ1234ं त्र य त्र य त्र य त्र 1 इत्यादि।9 ं 3 ं 3 ं 3123 इसी प्रकार ;पपपद्ध में पद वैफसे अग्रसर होते हैं बताइए? निरीक्षण से यह ज्ञात हो जाता है कि प्रत्येक स्िथति में, प्रथम पद को छोड़, हर अगला पद अपने पिछले पद से अचर अनुपात में बढ़ता है। ;पद्ध में यह अचर अनुपात 2 है, ;पपद्ध में यह दृ1 है ;पपपद्ध में यह अचर अनुपात 0ण्01 है। ऐसे अनुक्रमों को गुणोत्तर अनुक्रम3 या गुणोत्तर श्रेणी या संक्षेप में ळण्च्ण् कहते हैं। अनुक्रम ं1ए ं2ए ंए ३ए ं ए ३ को गुणोत्तर श्रेणी कहा जाता है, यदि प्रत्येक पद अशून्य हो तथा3दंा ़1 त्र त ;अचरद्ध, ा ≥ 1 के लिए।ं ं त्र ांए लिखने पर हम गुणोत्तर श्रेणी पाते हैं: ंए ंतए ंत2ए ंत3ए ़३ण्ए जहाँ ं को प्रथम पद कहते1हैं तथा त को गुणोत्तर श्रेणी का सावर् अनुपात कहते हैं। ;पद्धए ;पपद्ध तथा ;पपपद्ध में दी गइर् गुणोत्तर श्रेढि़यों का सावर् अनुपात क्रमशः 2ए दृ 1 तथा 0ण्01 है।3 जैसा कि समांतर श्रेणी के संदभर् में, वैसे ही पद गुणोत्तर श्रेणी का दवाँ खोजने की समस्या या गुणोत्तर श्रेणी के द पदों का योग जिसमें बहुत संख्याओं का समावेश हो तो इन्हें बिना सूत्रा के हल करना कठिन है। इन सूत्रों को हम अगले अनुच्छेद में विकसित करेंगेः हम इन सूत्रों के साथ निम्नलिख्िात संकेत का उपयोग करेंगे। ं त्र प्रथम पद, त त्र सावर् अनुपात, स त्र अंतिम पद, द त्र पदों की संख्या, ै त्र प्रथम द पदों का योगपफलद9ण्5ण्1 गुणोत्तर श्रेणी का व्यापक पद ;ळमदमतंस जमतउ व िं ळण्च्ण्द्ध आइए एक गुणोत्तर श्रेणी ळण्च्ण् जिसका प्रथम अशून्य पद ष्ंष् तथा सावर् अनुपात ष्तष् है, पर विचार करें। इसके वुफछ पदों को लिख्िाए। दूसरा पद, प्रथम पदं को सावर् अनुपात त से गुणा करने पर प्राप्त होता है, अथार्त् ं त्र ंत, इसी प्रकार2तीसरा पद ं3 कोत से गुणा करने पर प्राप्त होता है अथार्त् ं3 त्र ं2त त्र ंत2ए आदि। हम इन्हें तथा वुफछ और पद नीचे लिखते हैं: प्रथम पद त्र ं1 त्र ं त्र ंत1दृ1ए द्वितीय पद त्र ं2 त्र ंत त्र ंत2दृ1ए तृतीय पद त्र ं3 त्र ंत2 त्र ंत3दृ1 चतुथर् पद त्र ं त्र ंत3 त्र ंत4दृ1ए पाँचवाँँ पद त्र ं त्र ंत4 त्र ंत5दृ1 45क्या आप कोइर् पैटनर् देखते हैं? 16वाँ पद क्या होगा? ंत16दृ1ं16त्र त्र ंत15 इसलिए यह प्रतिरूप बताता है कि गुणोत्तर श्रेणी का द वाँ पद ं त्र ंत द−1ण्द अथार्त् गुणोत्तर श्रेणी इस रूप में लिखी जा सकती हैं: ंए ंतए ंत2ए ंत3ए ३ ंतददृ1य ंए ंतए ंत2ण्ण्ण्ए ंतददृ1ण्ण्ण् क्रमशः जब श्रेणी परिमित हो या जब श्रेणी अपरिमित हो। श्रेणी ं ़ ंत ़ ंत2 ़ ण्ण्ण् ़ ंतददृ1 अथवा ं ़ ंत ़ ंत2 ़ ण्ण्ण् ़ ंतददृ1 ़ण्ण्ण् क्रमशः परिमित या अपरिमित गुणोत्तर श्रेणी कहलाते हैं। 9ण्5ण्2ण् गुणोत्तर श्रेणी के द पदोें का योगपफल ;ैनउ जव द जमतउे व िं ळण्च्ण्द्ध माना कि गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद ं तथा सावर् अनुपात त हैं। माना गुणोत्तर श्रेणी के द पदों का योगपफल ै से लिखते हैं। तबद ै द त्र ं ़ ंत ़ ंत2 ़ण्ण्ण़्ंतददृ1 ण्ण्ण् ;1द्ध स्िथति 1 यदि त त्र 1ए तो हम पाते हैं ै द त्र ं ़ ं ़ ं ़ ण्ण्ण् ़ ं ;द पदों तकद्ध त्र दं स्िथति 2 यदि त ≠ 1ए तो ;1द्ध को त से गुणा करने पर हम पाते हैं तै द त्र ंत ़ ंत2 ़ ंत3 ़ ण्ण्ण् ़ ंतद ण्ण्ण् ;2द्ध ;2द्ध को ;1द्ध में से घटाने पर हम पाते हैं ;1 दृ तद्ध ैद त्र ं दृ ंतद त्र ं ;1 दृ तदद्ध इससे हम पाते हैं: ;1− तद द्ध ंतदं ; −1द्ध ैद त्र या ैद त्र 1−तत −1 उदाहरण 9 गुणोत्तर श्रेणी 5ए 25ए125३ का 10वाँ तथा दवाँ पद ज्ञात कीजिए? हल यहाँ ं त्र5 तथा त त्र 5 अथार्त् त्र 5;5द्ध10दृ1 त्र 5;5द्ध9 त्र 510ं10तथा ंद त्र ंतददृ1 त्र 5;5द्धददृ1 त्र 5द उदाहरण 10 गुणोत्तर श्रेणी 2ए8ए32ए ण्ण्ण् का कौन - सा पद 131072 है? हल माना कि 131072 गुणोत्तर श्रेणी का दवाँ पद है। यहाँ ं त्र2 तथा त त्र 4 इसलिए 131072 त्र ंद त्र 2;4द्धददृ1 या 65536 त्र 4ददृ1 जिससे हम पाते हैं 48 त्र4ददृ1 इसलिए द दृ 1 त्र 8ए अतः ए द त्र 9ए अथार्त् 131072 गुणोत्तर श्रेणी का 9वाँ पद है। उदाहरण 11एक गुणोत्तर श्रेणी में तीसरा पद 24 तथा 6वाँ पद 192 है, तो 10वाँ पद ज्ञात कीजिए। हल यहाँ ं3 त्र ंत2 24 ण्ण्ण् ;1द्ध तथा ं6 त्र ंत5 त्र 192 ण्ण्ण् ;2द्ध ;2द्ध को ;1द्ध से भाग देने पर, हम पाते हैं त त्र 2 ;1द्ध में त त्र 2 रखने पर, हम पाते हैं ं त्र 6 अतः ं10 त्र 6 ;2द्ध9 त्र 3072ण् 24उदाहरण 12 गुणोत्तर श्रेणी 1़़़ ण्ण्ण् के प्रथम द पदों का योग तथा प्रथम 5 पदों का योगपफल39 ज्ञात कीजिए। हल यहाँ ं त्र 1ए तथा त त्र 32ण् इसलिए ⎡ ⎛⎞2 द ⎤ ⎜⎟⎥ द⎛⎞⎤ ं ;1−तद द्ध ⎢⎢ 1−⎝⎠3 ⎥⎡ 2⎣⎦ 31−⎢ै त्र त्र त्र ⎜⎟⎥ द 31−त 2 ⎢⎣ ⎝⎠⎥⎦1−3 ⎡ 5 ⎤2⎛⎞ 211 21131−विशेषतः ै5 त्र ⎢ ⎜⎟⎥त्र 3× त्र3⎢ ⎝⎠⎥ 243 81⎣⎦33 3069 3एएउदाहरण 13 गुणोत्तर श्रेणी 24ण्ण्ण् के कितने पद आवश्यक हैं ताकि उनका योगपफल 512 हो जाए? 1 3069 हल माना कि द आवश्यक पदों की संख्या हैं। दिया है ं त्र 3ए त त्र तथा ैद त्र 2 512 ं;1दृ तद द्धक्योंकि ैद त्र 1−त 13;1 − द द्ध3069 2 ⎛ 1 ⎞ त्रत्र61इसलिए 512 1 ⎜− 2द ⎟⎝⎠1−2 3069 1त्र−या 1 3072 2द 1 3069त्र−या 2द 1 3072 13 1या त्रत्र 2द 3072 1024 या 2द त्र 1024 त्र 210ए या द त्र 10 उदाहरण 14 एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योगपफल 13 है तथा उनका गुणानपफल 112 है, तो सावर् अनुपात तथा पदों को ज्ञात कीजिए? ं एएहल माना ंतगुणोत्तर श्रेणी के तीन पद हैं तोत ं 13़़ त्रंत ण्ण्ण् ;1द्धत 12 ं⎛⎞ ंतथा ⎜⎟;द्ध; तद्ध त्र दृ 1 ण्ण्ण् ;2द्ध त⎝⎠;2द्ध से हम पाते हैं ं3 त्र दृ1 अथार्त् ंत्र .दृ1 ;केवल वास्तविक मूल पर विचार करने सेद्ध ;1द्ध में ंत्र दृ1 रखने पर हम पाते है 1 13 दृदृदृ1 तत्र या 12त2 ़ 25त़ 12 त्र 0ण् त 12 तदृदृयह तमें द्विघात समीकरण है, जिसे हल करने पर हम पाते हैं: त्र 43 या 34 अतः गुणोत्तर श्रेणी के तीन पद हैं 43 दृ3 34 दृ4ए1ए तत्रए1ए दृ ए तत्र के लिए तथा दृ ए के लिए344 433 उदाहरण 15 अनुक्रम 7ए 77ए 777ए 7777एण्ण्ण् के दपदों का योग ज्ञात कीजिए। हल इस रूप में यह गुणोत्तर श्रेणी नहीं हैं। तथापि इसे निम्नलिख्िात रूप में लिखकर गुणोत्तर श्रेणी से संबंध निरूपित किया जा सकता हैः ैद त्र 7 ़ 77 ़ 777 ़ 7777 ़ ण्ण्ण् जव दपदों तक 7 99 ण् पदांे तक ,त्र ख्9 ़़ 999 ़9999 ़ण्ण्जव द 9 7 234 त्र ख्;10 −़;10 −़;10 −़ ;10 −़ ण्ण्ण्दपदांे तक,1द्ध 1द्ध1द्ध 1द्ध 9 त्र 7 ख्;10 ़102 ़103 ़ण्ण्ण्पदों तक दृदपदांे तकद्ध, द द्ध ;1़1़1़ण्ण्ण् 9 द ⎤ द ⎤⎡⎡ त्र ⎢−द⎥त्र⎢ −द⎥ण् 7 10;10 −1द्ध 7 10;10 −1द्ध 9 10 −1 99⎣⎦⎣ ⎦उदाहरण 16 एक व्यक्ित की दसवीं पीढ़ी तक पूवर्जों की संख्या कितनी होगी, जबकि उसके 2 माता - पिता, 4 दादा - दादी, 8 पर दादा, पर दादी तथा आदि हैं। हल यहाँ ं त्र 2ए त त्र 2 तथा द त्र 10ए ; द −1द्ध ंत योगपफल का सूत्रा उपयोग करने पर ैद त्र त −1 हम पाते हैं ै10 त्र 2;210 दृ 1द्ध त्र 2046 अतः व्यक्ित के पूवर्जों की संख्या 2046 है। 9ण्5ण्3 गुणोत्तर माध्य ख्ळमवउमजतपब डमंद ळण्डण्द्ध, दो ध्नात्मक संख्याओं ं तथा इ का गुणोत्तर माध्य संख्या ंइ है। इसलिए 2 तथा 8 का गुणोत्तर माध्य 4 है। हम देखते हैं कि तीन संख्याओं 2ए 4ए 8 गुणोत्तर श्रेणी के क्रमागत पद हैं। यह दो संख्याओं के गुणोत्तर माध्य की धरणा के व्यापकीकरण की ओर अग्रसर करता है। यदि दो ध्नात्मक संख्याएँ ं तथा इ दी गइर् हो तो उनके बीच इच्िछत संख्याएँ रखी जा सकतीहैं ताकि प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाए। मान लीजिए ं तथा इ के बीच द संख्याएँ ळ1ए ळ2ए ळ3 ए३एळए इस प्रकार हैं कि ंएळएळ2एळ3ए३एळ एइ गुणोत्तर श्रेणी है। इस प्रकार इ गुणोत्तर श्रेणी का ;द ़ द2द्ध वाँ पद है।1दहम पाते हैंः 1 इद ़1़1 ⎛⎞इंतद ए या त त्र⎜⎟त्र ं⎝⎠ 12 3इ ⎛⎞1⎛⎞द़12 इद़ 3 ⎛⎞इद़1ंत ळ2 त्रंअतः ळ1 त्रत्रं⎜⎟ए त्रंत ⎜⎟ळ3 त्रंत त्रं⎜⎟ं⎝⎠ ⎝⎠ ए ं⎝⎠ ए द द इद़1⎛⎞ळद त्रंत त्रं⎜⎟ं⎝⎠ उदाहरण 17 ऐसी 3 संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 1 तथा 256 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एकगुणोत्तर श्रेणी बन जाए। हल माना कि ळ1ए ळ2एळ3 तीन गुणोत्तर माध्य 1 तथा 256 के बीच में है। 1ए ळएळएळ ए256 गुणोत्तर श्रेणी में हैं।123इसलिए 256 त्र त4 जिससे त त्र ±4 ;केवल वास्तविक मूल लेने परद्ध त त्र 4 के लिए हम पाते हैं ळ1 त्र ंत त्र 4ए ळ2 त्र ंत2 त्र 16ए ळ3 त्र ंत3 त्र 64 इसी प्रकार त त्र दृ 4ए के लिए संख्याएँ दृ 4ए16 तथा दृ 64 हैं। अतः 1 तथा 256 के बीच तीन संख्याएँ 4ए 16ए 64 हैं। 9ण्6 समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य के बीच संबंध् ;त्मसंजपवदेीपच इमजूममद ।ण्डण् ंदक ळण्डण्द्ध माना कि । तथा ळ दी गइर् दो ध्नात्मक वास्तविक संख्याओं ं तथा इ के बीच क्रमशः समांतर माध्य ;।ण्डण्द्ध तथा गुणोत्तर माध्य ;।ण्डण्द्ध हैं। तो ंइ। त्ऱ 2 तथा ळ त्र ंइ इस प्रकार द्ध2 ं −इ़ ़− ंइ;−त्र।ळ ंइ −ंइ त्र ंइ2 त्र ≥0 ण्ण्ण् ;1द्ध2 22 ;1द्ध से हम । ≥ ळ संबंध् पाते हैं। उदाहरण 18 यदि दो ध्नात्मक संख्याओं ं तथा इ के बीच समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य क्रमशः 10 तथा 8 हैं, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए। ंइ़ हल दिया है ।ण्डण् त्र 2 त्र10 ण्ण्ण् ;1द्ध तथा ळण्डण् त्रंइ त्र8 ण्ण्ण् ;2द्ध ;1द्ध तथा ;2द्ध से हम पाते हैं ं ़ इ त्र 20 ण्ण्ण् ;3द्ध ंइ त्र 64 ण्ण्ण् ;4द्ध ;3द्धए ;4द्ध से ं तथा इ का मान सवर्समिका ;ं दृ इद्ध2 त्र ;ं ़ इद्ध2 दृ 4ंइ में रखने पर हम पाते हैं ;ं दृ इद्ध2 त्र 400 दृ 256 त्र 144 या ं दृ इ त्र ±12 ;3द्ध तथा ;5द्ध को हल करने पर, हम पाते हैं ं त्र 4ए इ त्र 16 या ं त्र 16ए इ त्र 4 अतः संख्याएँ ं तथा इ क्रमशः 4ए 16 या 16ए 4 हैं। प्रश्नावली 9ण्3 एए1ण् गुणोत्तर श्रेणी 55 5 ए ण्ण्ण् का 20वाँ तथा दवाँ पद ज्ञात कीजिए।2ण् उस गुणोत्तर श्रेणी का 12वाँ पद ज्ञात कीजिए, जिसका 8वाँ पद 192 तथा सावर् अनुपात 2 है। 3ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी का 5वाँ, 8वाँ तथा 11वाँ पद क्रमशः चए ु तथा े हैं तो दिखाइए कि ु2 त्र चेण् 4ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी का चैथा पद उसके दूसरे पद का वगर् है तथा प्रथम पद दृ3 है तो 7वाँ पद ज्ञात कीजिए। 5ण् अनुक्रम का कौन सा पदः ;ंद्ध 2ए 2 2ए 4ए ण्ण्ण्य 128 है? ;इद्ध 3ए3 3 3ए ण्ण्ण् य 729 है? 248 111 1 ;बद्ध ए ए एण्ण्ण्य है?3 9 27 19683 2 दृ76ण् ग के किस मान के लिए संख्याएँ दृ 7एएग 2 गुणोत्तर श्रेणी में हैं? प्रश्न 7 से 10 तक प्रत्येक गुणोत्तर श्रेणी का योगपफल निदिर्ष्ट पदों तक ज्ञात कीजिए। 7ण् 0ण्15ए 0ण्015ए 0ण्0015ए ण्ण्ण् 20 पदों तक 8ण् 7ए 21ए 3 7ए ण्ण्ण् द पदों तक 9ण् 1ए दृ ंए ं2ए दृ ं3ए ण्ण्ण् द पदों तक ;यदि ं ≠ दृ1द्ध 10ण् ग3ए ग5ए ग7ए ण्ण्ण् द पदों तक ;यदि ग ≠± 1द्ध 11 ा11ण् मान ज्ञात कीजिए ∑;2 ़ 3द्धा त्र1 12ण् एक गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योगपफल 39 हैं तथा उनका गुणनपफल 1 है। सावर् अनुपात10 तथा पदों को ज्ञात कीजिए। 13ण् गुणोत्तर श्रेणी 3ए 32ए 33ए ३ के कितने पद आवश्यक हैं ताकि उनका योगपफल 120 हो जाए। 14ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योगपफल 16 है तथा अगले तीन पदों का योग 128 है तो गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद, सावर् अनुपात तथा द पदों का योगपफल ज्ञात कीजिए। 15ण् एक गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद ं त्र 729 तथा 7वाँ पद 64 है तो ै7 ज्ञात कीजिए? 16ण् एक गुणोत्तर श्रेणी को ज्ञात कीजिए, जिसके प्रथम दो पदों का योगपफल दृ 4 है तथा 5वाँ पद तृतीय पद का 4 गुना है। 17ण् यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का 4 वाँ, 10वाँ तथा 16वाँ पद क्रमशः गए ल तथा ्र हैं, तो सि( कीजिए कि गए लए ्र गुणोत्तर श्रेणी में हैं। 18ण् अनुक्रम 8ए 88ए 888ए 8888३ के द पदों का योग ज्ञात कीजिए। 19ण् अनुक्रम 2ए 4ए 8ए 16ए 32 तथा128ए 32ए 8ए 2ए 12 के संगत पदों के गुणनपफल से बने अनुक्रम का योगपफल ज्ञात कीजिए। 20ण् दिखाइए कि अनुक्रम ंए ंतए ंत2ए ३ ंतददृ1 तथा ।ए ।त्ए ।त्2ए३।त्ददृ1 के संगत पदों के गुणनपफल से बना अनुक्रम गुणोत्तर श्रेणी होती है तथा सावर् अनुपात ज्ञात कीजिए। 21ण् ऐसे चार पद ज्ञात कीजिए जो गुणोत्तर श्रेणी में हो, जिसका तीसरा पद प्रथम पद से 9 अिाक हो तथा दूसरा पद चैथे पद से 18 अध्िक हो। 22ण् यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का चवाँ, ुवाँ तथा त वाँ पद क्रमशः ंए इ तथा ब हो, तो सि( कीजिए कि ंुदृत इतदृचबच्दृु त्र 1 23ण् यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम तथा द वाँ पद क्रमशः ं तथा इ हैं, एवं च्ए द पदों का गुणनपफल हो, तो सि( कीजिए कि च्2 त्र ;ंइद्धद 24ण् दिखाइए कि एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम द पदों के योगपफल तथा;द ़ 1द्ध वें पद से ;2दद्धवें पद 1तक के पदों के योगपफल का अनुपात द है।त 25ण् यदि ंए इए ब तथा क गुणोत्तर श्रेणी में हैं तो दिखाइए कि ;ं2 ़ इ2 ़ ब2द्ध ;इ2 ़ ब2 ़ क2द्ध त्र ;ंइ ़ इब ़ बकद्ध2 ण् 26ण् ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 3 तथा 81 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाय। द़1 द़1ं ़ इ 27ण् द का मान ज्ञात कीजिए ताकि ए ं तथा इ के बीच गुणोत्तर माध्य हो।ंद ़ इद 28ण् दो संख्याओं का योगपफल उनके गुणोत्तर माध्य का 6 गुना है तो दिखाइए कि संख्याएँ ;3 ़ 2 2द्धरू;3 −2 2द्ध के अनुपात में हैं। 29ण् यदि । तथा ळ दो ध्नात्मक संख्याओं के बीच क्रमशः समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य हों, तो सि( कीजिए कि संख्याएँ । ±30ण् किसी कल्चर में बैक्टीरिया की संख्या प्रत्येक घंटे पश्चात् दुगुनी हो जाती है। यदि प्रारंभ में उसमें 30 बैक्टीरिया उपस्िथत थे, तो बैक्टीरिया की संख्या दूसरे, चैथे तथा दवें घंटों बाद क्या होगी? 31ण् 500 रुपये ध्नराश्िा 10ः वाष्िार्क चक्रवृि ब्याज पर 10 वषो± बाद क्या हो जाएगी, ज्ञात कीजिए? 32ण् यदि किसी द्विघात समीकरण के मूलों के समांतर माध्य एवं गुणोत्तर माध्य क्रमशः 8 तथा 5 हैं, तो द्विघात समीकरण ज्ञात कीजिए। 9ण्7 विशेष अनुक्रमों के द पदों का योगपफल ;ैनउ जव द ज्मतउे व िैचमबपंस ैमतपमेद्ध अब हम वुफछ विशेष अनुक्रमों के दपदों का योग ज्ञात करेंगे: वे निम्नलिख्िात हैं। ;पद्ध 1 ़ 2 ़ 3 ़३ ़ द;प्रथम दप्रावृफत संख्याओं का योगद्ध ;पपद्ध 12 ़ 22 ़ 32़३ ़ द2 ;प्रथम दप्रावृफत संख्याओं के वगोर्ं का योगद्ध ;पपपद्ध 13 ़ 23 ़ 33़३ ़ द3 ;प्रथम दप्रावृफत संख्याओं के घनों का योगद्ध आइए हम इन पर एक के बाद दूसरे पर विचार करें: ; 1द्ध दद़;पद्ध ैत्र1़ 2 ़ 3 ़ ३ ़ द, तो त्र 2 ;भाग 9ण्4 देखेंद्धद ;पपद्ध यहाँ ै त्र12़22़32़ ३ ़द2ण् द 3 32हम सवर्समिका ा − − ;ा 1द्धत्र3ा −3ा़1 पर विचार करते हैं क्रमशः ात्र 1ए 2३ ए दरखने पर, हम पाते हैं 13 दृ 03 त्र 3 ;1द्ध2 दृ 3 ;1द्ध ़ 1 23 दृ 13 त्र 3 ;2द्ध2 ़ 1 33 दृ 23 त्र 3;3द्ध2 दृ 3 ;3द्ध ़ 1 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् द3 दृ ;ददृ 1द्ध3 त्र 3 ;दद्ध2 दृ 3 ;दद्ध ़ 1 दोनों पक्षों को जोड़ने पर हम पाते हैं द3 दृ 03 त्र 3 ;12 ़ 22 ़ 32 ़ ण्ण्ण् ़ द2द्ध दृ 3 ;1 ़2 ़3 ़ ण्ण्ण् ़ दद्ध ़ द दद या द3 त्र3 ∑ा2 दृ3∑ा़द ात्र1 ात्र1 ;पद्ध से हम जानते हैं द ; ़1द्ध ददा 123 ण्ण्ण् द∑त्ऱ़़ ़त्र 2ात्र1 1 दद़1द्ध ⎤ ;1द्ध;2 द 2 ⎡33; 1 दद़ द़1द्ध अतः ै द त्र ∑ा त्र⎢द ़−द⎥त्र ;2द3 ़3द2 ़दद्ध त्र ात्र13 ⎣ 2 ⎦ 66 ;पपपद्ध यहाँ ै त्र 13 ़ 23 ़ ण्ण्ण़्द3 दहम सवर्समिका ;ा़ 1द्ध4 दृ ा4 त्र 4ा3 ़ 6ा2 ़ 4ा़ 1 पर विचार करते हैं क्रमशः ा त्र 1ए 2ए 3३ दए रखने पर, हम पाते हैं 24 दृ 14 त्र 4;1द्ध3 ़ 6;1द्ध2 ़ 4;1द्ध ़ 1 34 दृ 24 त्र 4;2द्ध3 ़ 6;2द्ध2 ़ 4;2द्ध ़ 1 44 दृ 34 त्र 4;3द्ध3 ़ 6;3द्ध2 ़ 4;3द्ध ़ 1 ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ;द दृ 1द्ध4 दृ ;द दृ 2द्ध4 त्र 4;द दृ 2द्ध3 ़ 6;द दृ 2द्ध2 ़ 4;द दृ 2द्ध ़ 1 द4 दृ ;द दृ 1द्ध4 त्र 4;द दृ 1द्ध3 ़ 6;द दृ 1द्ध2 ़ 4;द दृ 1द्ध ़ 1 ;द ़ 1द्ध4 दृ द4 त्र 4द3 ़ 6द2़ 4द ़ 1 दोनों पक्षों को जोड़ने पर, हम पाते हैं ;द ़ 1द्ध4 दृ 14 त्र 4;13 ़ 23 ़ 33 ़ण्ण्ण़् द3द्ध ़ 6;12 ़ 22 ़ 32 ़ ण्ण्ण़् द2द्ध ़ 4;1 ़ 2 ़ 3 ़ण्ण्ण़् दद्ध ़ द दद द त्र 4∑ ा3 ़ 6∑ ा2 ़ 4 ∑ ा ़ दए ण्ण्ण् ;1द्धा त्र 1 ा त्र 1 ा त्र 1 ;पद्ध तथा ;पपद्ध से, हम जानते हैं द दददद 1 दद द्ध; 6; दद;़द्ध ;़12द ़1द्ध दद ़1द्ध ;2 द ़ 1द्ध 4;234 32∑ा त्र तथा क ∑ा4 त्र∑ा त्र द ़ 4द ़ 6द ़ 4ददृ 6 दृ 21ा त्र12 ा त्र1 ा त्र 6 इन मानों को ;1द्ध में रखने पर, हम पाते हैं वत 4ै द त्र द4 ़ 4द3 ़ 6द2 ़ 4द दृ द ;2द2 ़ 3द ़ 1द्ध दृ 2द ;द ़ 1द्ध दृ द त्र द4 ़ 2द3 ़ द2 त्र द2;द ़ 1द्ध2ण् 22 अतः ै त्र दद; ़1द्ध ख्दद; ़1द्ध ,2 त्र द44 उदाहरण 19 श्रेणी 5 ़ 11 ़ 19 ़ 29 ़ 41३ के दपदों का योगपफल ज्ञात कीजिए। हल आइए लिखेंै त्र 5 ़ 11 ़ 19 ़ 29 ़ ण्ण्ण् ़ ं ़ ं द ददृ1द अथवा ै त्र 5 ़ 11 ़ 19 ़ ण्ण्ण् ़ ं ़ ंददृ1 ़ ं द ददृ2द घटाने पर हम पाते हैं 0 त्र 5 ़ ख्6 ़ 8 ़ 10 ़ 12 ़ ण्ण्ण्;ददृ 1द्ध पदों , दृ ंद ;द−1द्धख्12 ़ ;द−2द्ध ×2, अथवा ं त्र5 ़ द2 त्र5 ़ ;ददृ 1द्ध ;द़ 4द्ध त्र द2 ़ 3द़ 1 दद दद ∑ंा त्र∑;ा2 ़3ा़1द्ध त्र∑ा2 ़ 3∑ा़ दइस प्रकार ै त्र दात्र1 ात्र1 ात्र11 ़ 3; दद 2द्ध; द़दद;1द्ध;2 द़1द्ध दद़1द्ध ; ़ 4द्ध त्र ़़ दत्र ण्62 3 उदाहरण 20 उस श्रेणी के दपदों का योग ज्ञात कीजिए जिसका दवाँ पद द;द़ 3द्ध है। हल दिया गया है ंद त्र द;द़ 3द्ध त्र द2 ़ 3द इस प्रकार दपदों का योगपफल दद द ै त्र∑ंा त्र∑ा2 ़3∑ा दात्र1 ात्र1 ात्र1 दद ; दद़1द्ध; ; ़1द्ध ;2 द़1द्ध 3दद ़1द्ध ; द़5द्ध त्र ़त्र ण्6 23 प्रश्नावली 9ण्4 प्रश्न 1 से 7 तक प्रत्येक श्रेणी के दपदों का योग ज्ञात कीजिए। 1ण् 1 × 2 ़ 2 × 3 ़ 3 × 4 ़ 4 × 5 ़ण्ण्ण् 2ण् 1 × 2 × 3 ़ 2 × 3 × 4 ़ 3 × 4 × 5 ़ ण्ण्ण् 111़़़3ण् 3 × 12 ़ 5 × 22 ़ 7 × 32 ़ ण्ण्ण् 4ण् ण्ण्ण्12 × 23× 34× 5ण् 52 ़ 62 ़ 72 ़ ण्ण्ण् ़ 202 6ण् 3 × 8 ़ 6 × 11 ़ 9 × 14 ़ ण्ण्ण् 7ण् 12 ़ ;12 ़ 22द्ध ़ ;12 ़ 22 ़ 32द्ध ़ ण्ण्ण् प्रश्न 8 से 10 तक प्रत्येक श्रेणी के दपदों का योग ज्ञात कीजिए जिसका दवाँ पद दिया हैः 8ण् द;द़1द्ध ;द़4द्धण् 9ण् द2 ़ 2द 10ण् ;2ददृ1द्ध 2 विविध् उदाहरण उदाहरण 21 यदि किसी समांतर श्रेणी का च वाँ, ु वाँ, त वाँ तथा े वाँ पद गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो दिखाइए कि ;च दृ ुद्धए ;ु दृ तद्धए ;त.ेद्ध भी गुणोत्तर श्रेणी में होगें। हल यहाँ ंच त्र ं ़ ;च दृ1द्ध क ण्ण्ण् ;1द्ध ंु त्र ं ़ ;ु दृ1द्ध क ण्ण्ण् ;2द्ध ंत त्र ं ़ ;त दृ1द्ध क ण्ण्ण् ;3द्ध ंे त्र ं ़ ;े दृ1द्ध क ण्ण्ण् ;4द्ध दिया गया है कि ं ए ं ए ं तथा ं गुणोत्तर श्रेणी में हैं। इसलिएचुत े ंु ंतंु − ंत ु − त त्र त्रत्र ;क्यों?द्ध ३ ;5द्धंं − ंच − ुच ुचु ंत ंेंत − ंे ते−इसी प्रकार त्र त्रत्र य ;क्यों?द्ध ३ ;6द्धंं − ंु − तु तुत अतः ;5द्ध तथा ;6द्ध से ुत− ते− त्र − अथार्त् च दृ ुए ु दृ त तथा त दृ े गुणोत्तर श्रेणी में हैं।च −ु ुत उदाहरण 22 यदिंए इए ब गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा 1 ग 1 ल 1 ्र हैं तो सि( कीजिए गए लए ्र समांतरं त्र इ त्र ब श्रेणी में हैं। हल माना कि ं1ध्ग त्र इ1ध्ल त्र ब1ध््रत्र ाण् हैं तो ं त्र ाग ए इ त्र ाल तथा ब त्र ा्रण् ३ ;1द्ध क्योंकि ंए इए ब गुणोत्तर श्रेणी में हैं इ2 त्र ंब ३ ;2द्ध ;1द्ध तथा ;2द्ध के उपयोग से हम पाते हैं ा2लत्र ाग़्र इससे हमें मिलता है 2ल त्र ग ़ ्रण् अतः गए ल तथा ्र समांतर श्रेणी में हैं। उदाहरण 23 यदि ंए इए बए क तथा च विभ्िान्न वास्तविक संख्याएँ इस प्रकार हैं कि ;ं2 ़ इ2 ़ ब2द्धच2 दृ 2;ंइ ़ इब ़ बकद्धच ़ ;इ2 ़ ब2 ़ क2द्ध ≤ 0 तो दशार्इए कि ंए इए ब तथा क गुणोत्तर श्रेणी में हैं। हल दिया हैं ;ं2 ़ इ2 ़ ब2द्ध च2 दृ 2 ;ंइ ़ इब ़ बकद्धच ़ ;इ2 ़ ब2 ़ क2द्ध ≤ 0 ण्ण्ण् ;1द्ध परंतु बायाँ पक्ष त्र ;ं2च2 दृ 2ंइच़इ2द्ध ़ ;इ2च2 दृ 2इबच़ब2द्ध ़ ;ब2च2 दृ 2बकच ़ क2द्धएइससे हमें मिलता है;ंच दृ इद्ध2 ़ ;इच दृ बद्ध2 ़ ;बच दृ कद्ध2 ≥ 0 ण्ण्ण् ;2द्ध क्योंकि वास्तविक संख्याओं के वगो± का योग )णेतर है, इसलिए ;1द्ध तथा ;2द्ध से, हम पाते हैं 22 2 ंच −़ इच −़ − ;; इद्ध; बद्धबच कद्धत्र0 अथवा ंच दृ इ त्र 0ए इच दृ ब त्र 0ए बच दृ क त्र 0 इससे हमें मिलता है इबक त्रत्रत्र चंइब अतः ंए इए ब तथा क गुणोत्तर श्रेणी में हैं। उदाहरण 24 यदि चएुएत गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा समीकरणों चग2 ़ 2ुग ़ त त्र 0 और कमिकग2 ़ 2मग ़ ित्र 0 एक उभयनिष्ठ मूल रखते हों, तो दशार्इए कि एए समांतर श्रेणी में हैं।चु त हल समीकरण चग2 ़ 2ुग ़ त त्र 0 के मूल निम्नलिख्िात हैंः −±2ु 4ु2 −4तच ग त्र 2 च −ुुक्योंकि च एुए त गुणोत्तर श्रेणी में हैं, इसलिए ु2 त्र चतए अथार्त् ग त्र परंतु −समीकरणचच कग2 ़ 2मग ़ ित्र 0 का भी मूल है, ;क्यों?द्ध इसलिए 2 ⎛⎞ ⎛ ⎞ −ु −ुक ़2म ़त्र ि0ए⎜⎟ ⎜⎟ चच⎝⎠ ⎝⎠ या वुफ2 दृ 2मुच ़ चि2 त्र 0 ण्ण्ण् ;1द्ध ;1द्ध को चु2 से भाग देने पर तथा ु2 त्र चत का उपयोग करने से, हम पाते हैं क 2म चि 2मक ि−़ त्र0ए या त्ऱ चुचत ुचत कम िएएअतः चुत समांतर श्रेणी में हैं। अध्याय 9 पर विविध् प्रश्नावली 1ण् दशार्इए कि किसी समांतर श्रेणी के ;उ ़ दद्धवें तथा ;उ दृ दद्धवें पदों का योग उवें पद का दुगुना है। 2ण् यदि किसी समांतर श्रेणी की तीन संख्याओं का योग 24 है तथा उनका गुणनपफल 440 है, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 3ण् माना कि किसी समांतर श्रेणी के दए 2दए तथा 3द पदों का योगपफल क्रमशः ै1ए ै2 तथा ै3 है तो दिखाइए कि ै3 त्र 3;ै2 दृै1द्ध 4ण् 200 तथा 400 के मध्य आने वाली उन सभी संख्याओं का योगपफल ज्ञात कीजिए जो 7 से विभाजित हों। 5ण् 1 से 100 तक आने वाले उन सभी पूणा±कों का योगपफल ज्ञात कीजिए जो 2 या 5 से विभाजित हों। 6ण् दो अंकों की उन सभी संख्याओं का योगपफल ज्ञात कीजिए, जिनको 4 से विभजित करने पर शेषपफल 1 हो। 7ण् सभी ग ए ल ∈छ के लिए ि;ग ़ लद्ध त्र ि;गद्धण् ि;लद्ध को संतुष्ट करता हुआ िएक ऐसा पफलन है द कि ि;1द्ध त्र 3 एवं ∑ गि;द्ध त्र 120 तो द का मान ज्ञात कीजिए। ग त्र 1 8ण् गुणोत्तर श्रेणी के वुफछ पदों का योग 315 है, उसका प्रथम पद तथा सावर् अनुपात क्रमशः 5 तथा 2 हैं। अंतिम पद तथा पदों की संख्या ज्ञात कीजिए। 9ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद 1 है। तीसरे एवं पाँचवें पदों का योग 90 हो तो गुणोत्तर श्रेणी का सावर् अनुपात ज्ञात कीजिए। 10ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योग 56 है। यदि हम क्रम से इन संख्याओं में से 1ए 7ए 21 घटाएँ तो हमें एक समांतर श्रेणी प्राप्त होती है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 11ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी के पदों की संख्या सम है। यदि उसके सभी पदों का योगपफल, विषम स्थान पर रखे पदों के योगपफल का 5 गुना है, तो सावर् अनुपात ज्ञात कीजिए। 12ण् एक समांतर श्रेणी के प्रथम चार पदों का योगपफल 56 है। अंतिम चार पदों का योगपफल 112 है। यदि इसका प्रथम पद 11 है, तो पदों की संख्या ज्ञात कीजिए। ंइग ़ इबग ़ बकग ़ 13ण् यदि त्र त्र− ;ग ≠ 0द्धए हो तो दिखाइए कि ंए इए ब तथा क गुणोत्तर श्रेणींइग − इबग − बकग में हैं। 14ण् किसी गुणोत्तर श्रेणी में ैए द पदों का योग, च् उनका गुणनपफल तथा त् उनके व्युत्क्रमों का योग हो तो सि( कीजिए कि च्2त्द त्र ैदण् 15ण् किसी समांतर श्रेणी का चवाँ, ुवाँ तवाँ पद क्रमशः ंए इए ब हैं, तो सि( कीजिए ;ु दृ त द्धं ़ ;त दृ च द्धइ ़ ;च दृ ु द्धब त्र 0 ⎛11 ⎞⎛ 11 ⎞⎛ 11 ⎞ ं ़ एइ ़ एब ़16ण् यदि ⎜⎟⎜ ⎟⎜ ⎟समांतर श्रेणी में हैं, तो सि( कीजिए कि⎝इब ⎠⎝ बं ⎠⎝ ंइ ⎠ंए इए ब समांतर श्रेणी में हैं। द द दददद17ण् यदि ंए इए बए क गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो सि( कीजिए कि ;ं ़इ द्धए;इ ़ब द्धए; ब ़क द्ध गुणोत्तर श्रेणी में हैं। 18ण् यदि ग2 दृ 3ग ़च त्र 0 के मूल ं तथा इ हैं तथा ग2 दृ12ग ़ु त्र 0ए के मूल ब तथा क हैं, जहाँ ंए इए बए क गुणोत्तर श्रेणी के रूप में हैं। सि( कीजिए कि ;ु ़ चद्ध रू ;ु दृ चद्ध त्र 17रू15 19ण् दो ध्नात्मक संख्याओं ं तथा इ के बीच समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य का अनुपात उरूदण् 2 2 22है। दशार्इए कि ं रू इ त्र;उ ़उ दृद द्धरू ;उदृ उदृद द्ध 20ण् यदि ंए इए ब समांतर श्रेणी में हैं इए बए क गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा हैं, तो सि( कीजिए कि ंए बए म गुणोत्तर श्रेणी में हैं। 21ण् निम्नलिख्िात श्रेण्िायों के द पदों का योग ज्ञात कीजिए। ;पद्ध 5 ़ 55 ़555 ़ ३ ;पपद्ध ण्6 ़ण् 66 ़ण् 666़३ 22ण् श्रेणी का 20वाँ पद ज्ञात कीजिए: 2 × 4 ़ 4 × 6 ़ 6 × 8 ़ ण्ण्ण् ़ द पदों तक 111 एए समांतर श्रेणी मेंबक म 23ण् श्रेणी 3़ 7 ़13 ़21 ़31 ़३ के द पदों का योग ज्ञात कीजिए। 24ण् यदि ै1ए ै2ए ै3 क्रमशः प्रथम द प्रावृफत संख्याओं का योग, उनके वगो± का योग तथा घनों का योग है तो सि( कीजिए कि 9ै22 त्र ै3 ;1 ़ 8ै1द्धण् 25ण् निम्नलिख्िात श्रेण्िायों के द पदों तक योग ज्ञात कीजिएंः 3 32 3331 1 ़21 ़़ 32़़ ़ण्ण्ण् 1 1़31़़ 53 22 212 23 ण्ण्ण् द ;द 1द्ध 3द ़5× ़× ़़× ़ 26ण् दशार्इए कि: त्र ण्22 21 22 3 ण्ण्ण् द ;द 1द्ध 3 ़1×़×़़ ×़ द 27ण् कोइर् किसान एक पुराने टैªक्टर को 12000 रु में खरीदता है। वह 6000 रु नकद भुगतान करता है और शेष राश्िा को 500 रु की वाष्िार्क किस्त के अतिरिक्त उस धन पर जिसका भुगतान न किया गया हो 12ः वाष्िार्क ब्याज भी देता है। किसान को टैªक्टर की वुफल कितनी कीमत देनी पडे़गी? 28ण् शमशाद अली 22000 रुपये में एक स्कूटर खरीदता है। वह 4000 रुपये नकद देता है तथा शेष राश्िा को 1000 रुपयें वाष्िार्क किश्त के अतिरिक्त उस ध्न पर जिसका भुगतान न किया गया हो 10ः वाष्िार्क ब्याज भी देता है। उसे स्कूटर के लिए वुफल कितनी राश्िा चुकानी पड़ेगी? 29ण् एक व्यक्ित अपने चार मित्रों को पत्रा लिखता है। वह प्रत्येक को उसकी नकल करके चार दूसरे व्यक्ितयों को भेजने का निदेर्श देता है, तथा उनसे यह भी करने को कहता हैं कि प्रत्येक पत्रा प्राप्त करने वाला व्यक्ित इस श्ंाृखला को जारी रखे। यह कल्पना करके कि श्ंाृखला न टूटे तो 8 वें पत्रों के समूह भेजे जाने तक कितना डाक खचर् होगा जबकि एक पत्रा का डाक खचर् 50 पैसे है। 30ण् एक आदमी ने एक बैंक में 10000 रुपये 5ः वाष्िार्क साधरण ब्याज पर जमा किया। जब से रकम बैंक में जमा की गइर् तब से, 15 वें वषर् में उसके खातें में कितनी रकम हो गइर्, तथा 20 वषोर्ं बाद वुफल कितनी रकम हो गइर्, ज्ञात कीजिए। 31ण् एक निमार्ता घोष्िात करता है कि उसकी मशीन जिसका मूल्य 15625 रुपये है, हर वषर् 20ः की दर से उसका अवमूल्यन होता है। 5 वषर् बाद मशीन का अनुमानित मूल्य ज्ञात कीजिए। 32ण् किसी कायर् को वुफछ दिनों में पूरा करने के लिए 150 कमर्चारी लगाए गए। दूसरे दिन 4 कमर्चारियों ने काम छोड़ दिया, तीसरे दिन 4 और कमर्चारियों ने काम छोड़ दिया तथा इस प्रकार अन्य। अब कायर् पूणर् करने में 8 दिन अध्िक लगते हैं, तो दिनों की संख्या ज्ञात कीजिए, जिनमें कायर् पूणर् किया गया। सारांश ऽ अनुक्रम से हमारा तात्पयर् है, फ्किसी नियम के अनुसार एक परिभाष्िात ;निश्िचतद्ध क्रम में संख्याओं की व्यवस्थाय्। पुनः हम एक अनुक्रम को एक पफलन के रूप में परिभाष्िात कर सकते हैं, जिसका प्रांत प्रावृफत संख्याओं का समुच्चय हो अथवा उसका उपसमुच्चय क्ष्1ए 2ए 3ए ण्ण्ण्ए ाद्व के प्रकार का हो। वे अनुक्रम, जिनमें पदों की संख्या सीमित होती है, फ्परिमित अनुक्रमय् कहलाते हैं। यदि कोइर् अनुक्रम परिमित नहीं है तो उसे अपरिमित अनुक्रम कहते हैं। ऽ मान लीजिए ं1ए ं2ए ं3ए ण्ण्ण् एक अनुक्रम हैं तो ं1़ ं2़ ं3 ़ ण्ण्ण् के रूप में व्यक्त किया गया योग श्रेणी कहलाता है जिस श्रेणी के पदों की संख्या सीमित होती है उसे परिमित श्रेणी कहते हैं। ऽ किसी अनुक्रम में पद समान नियतांक से लगातार बढ़ते या घटते हैं, समांतर श्रेणी होती हैं। नियतांक को समांतर श्रेणी का सावर् अंतर कहते हैं। सामान्यतः हम समांतर श्रेणी का प्रथम पद ंए सावर् अंतर क तथा अंतिम पद स से प्रदश्िार्त करते हैं। समांतर श्रेणी का व्यापक पद या द वाँ पद ं त्र ं ़ ;द दृ 1द्ध क है।दसमांतर श्रेणी के द पदों का योग ै निम्नलिख्िात सूत्रा द्वारा प्राप्त होता हैःद द द त्र ⎡2 ;द्धक ⎤ त्र ;ं़स द्ध ण्ै ं़ ददृ 1द ⎣⎦2 2 ं़इ ऽ कोइर् दो संख्याओं ं तथा इ का समांतर माध्य ।ए 2 होता है अथार्त् अनुक्रम ंए ।ए इ समांतर श्रेणी ;।ण्च्ण्द्ध में है। ऽ किसी अनुक्रम को गुणोत्तर श्रेणी या ळण्च्ण् कहते हैं, यदि कोइर् पद, अपने पिछले पद से एक अचर अनुपात में बढ़ता है। इस अचर गुणांक को सावर् अनुपात कहते हैं। साधारणतः हमगुणोत्तर श्रेणी के प्रथम पद को ं तथा सावर् अनुपात त से सांकेतिक करते हैं। गुणोत्तर श्रेणी का व्यापक पद या दवाँ पद ं त्र ंतद दृ 1 होता है।द दंत; दृ 1द्धं ;1दृ तद द्धगुणोत्तर श्रेणी के प्रथम द पदों का योग ै त्र या त यदि त ≠1द तदृ1 1 दृ त होता है। ऽ कोइर् दो ध्नात्मक संख्याएँ ं तथा इ का गुणोत्तर माध्य ंइ है अथार्त्् अनुक्रम ंए ळए इ गुणोत्तर श्रेणी में हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि 4000 वषर् पूवर् बेबीलोनिया के निवासियों को समांतर तथागुणोत्तर अनुक्रमों का ज्ञान था। ठवमजीपने ;510 ।ण्क्ण्द्ध के अनुसार समांतर तथा गुणोत्तर अनुक्रमोंकी जानकारी प्रारंभ्िाक यूनानी ;ग्रीकद्ध लेखकों को थी। भारतीय गण्िातज्ञों में से आयर्भट ;476 ।ण्क्ण्द्ध ने पहली बार प्रावृफत संख्याओं के वगो± तथा घनों का योग अपनी प्रसि( पुस्तक‘आयर्भटीयम्’ जो लगभग 499 ।ण्क्ण् में लिखी गइर् थी, में दिया। उन्होंने च वाँ पद से आरंभ,समांतर अनुक्रम के द पदों के योग का सूत्रा भी दिया। अन्य महान भारतीय गण्िातज्ञ ब्रह्मगुप्त ;598 ।ण्क्ण्द्धए महावीर ;850 ।ण्क्ण्द्ध तथा भास्कर ;1114दृ1185 ।ण्क्ण्द्ध ने संख्याओं के वगोर्ं एवं घनोंके योग पर विचार किया। एक दूसरे विश्िाष्ट प्रकार का अनुक्रम जिसका गण्िात में महत्त्वपूणर्गुणध्मर् है जो थ्पइवदंबबप ेमुनमदबम कहलाता है, का आविष्कार इटली के महान गण्िातज्ञ स्मवदंतकव थ्पइवदंबबप ;1170दृ1250 ।ण्क्ण्द्ध ने किया। सत्राहवीं शताब्दी में श्रेण्िायों कावगीर्करण विश्िाष्ट रूप से हुआ। 1671 इर्. में श्रंउमे ळतमहवतल ने अपरिमित अनुक्रम के संदभर्में अपरिमित श्रेणी शब्द का उपयोग किया। बीजगण्िातीय तथा समुच्चय सि(ांतों के समुचितविकास के उपरांत ही अनुक्रम तथा श्रेण्िायों से संबंध्ित जानकारी अच्छे ढ़ंग से प्रस्तुत हो सकी।

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Ganit





अध्याय 9

अनुक्रम तथा श्रेणी (Sequence and Series)

“Natural numbers are the product of human spirit” – Dedekind 

9.1 भूमिका (Introduction)

गणित में, शब्द ‘अनुक्रम’ का उपयोग साधारण अँग्रेाी के समान किया जाता है। जब हम कहते हैं कि समूह के अवयवों को अनुक्रम में सूचीबद्ध किया गया है तब हमारा तात्पर्य है कि समूह को इस प्रकार क्रमिक किया गया है कि हम उसके सदस्यों को प्रथम, द्वितीय, तृतीय संख्या तथा आदि से पहचान सकते हैं। उदाहरणत:, विभिन्न समयों में मानव की जनसंख्या अथवा बैक्टीरिया अनुक्रम की रचना करते हैं। कोई धनराशि जो बैंक खातें में जमा कर दी जाती है, विभिन्न वर्षों में एक अनुक्रम का निर्माण करती है। किसी सामान की अवमूल्यित कीमतें एक अनुक्रम बनाती हैं मानव क्रियाओं के कई क्षेत्रों में अनुक्रमों का बहुत महत्त्वपूर्ण उपयोग है। विशिष्ट पैटर्नों का अनुसरण करने वाले अनुक्रम Js.kh (Progression) कहलाते हैं। पिछली कक्षा में, हम समांतर श्रेणी के संबंध में पढ़ चुके हैं। इस अध्याय में समांतर श्रेणी के बारे में और अधिक चर्चा करने के साथ-साथ हम समांतर माध्य, गुणोत्तर माध्य, समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य में संबंध, विशेष अनुक्रमों के क्रमागत n प्राकृत संख्याओं का योग, n प्राकृत संख्याआं के वगाेρं का योग तथा n प्राकृत संख्याओं के घनों के योग का भी अध्ययन करेंगे।

Fibonacci

(1175-1250 A.D.)

9.2 अनुक्रम (Sequence)

आइए हम निम्नलिखित उदाहरणों पर विचार करें:

माना कि पीढ़ियों का अंतर 30 वर्ष है और व्यक्ति के 300 वर्षाें में पूर्वजों अर्थात् माता-पिता दादा-दादी, परदादा-परदादी अादि की संख्या ज्ञात कीजिए।

यहाँ पीढ़ियों की कुल संख्या = = 10.

प्रथम, द्वितीय, तृतीय, ... दसवीं पीढ़ी के लिए व्यक्ति के पूर्वजों की संख्या क्रमश: 2ए 4ए 8ए 16ए 32ए ...ए 1024 है। ये संख्याएँ एक अनुक्रम का निर्माण करती हैं, एेसा हम कहते हैं।

10 को 3 से भाग देते समय विभिन्न चरणाें के बाद प्राप्त क्रमिक भागफलों पर विचार कीजिए। इस प्रक्रिया में हम क्रमश: 3,3.3,3.33,3.333... आदि पाते हैं ये भागफल भी एक अनुक्रम का निर्माण करते हैं। एक अनुक्रम में जो संख्याएँ आती हैं उन्हें हम उसका in कहते हैं। अनुक्रम के पदों को हम a1, a2, a3,…, an, …, आदि द्वारा निरूपित करते हैं। प्रत्येक पद के साथ लगी संख्या जिसे inkad कहते हैं, उसका स्थान बताती है। अनुक्रम का nवाँ पद nवें स्थान को निरूपित करता है और इसे an द्वारा निरूपित करते हैं, इसे अनुक्रम का व्यापक पद भी कहते हैं।

इस प्रकार, व्यक्ति के पूर्वजों (पुर्वजों) के अनुक्रम के पदों को निम्न प्रकार से निरूपित करते हैं:

a1 = 2, a2 = 4, a3 = 8, …, a10 = 1024.

इसी प्रकार क्रमिक भागफलों वाले उदाहरण में:

a1 = 3, a2 = 3.3, a3 = 3.33, … a6 = 3.33333,  आदि।

वे अनुक्रम, जिनमें पदों की संख्या सीमित होती हैं, उसे परिमित अनुक्रम कहते हैं। उदाहरणत: पूर्वजों का अनुक्रम परिमित अनुक्रम है, क्योंकि उसमें 10 पद हैं (सीमित संख्या)।

एक अनुक्रम, ‘‘अपरिमित अनुक्रम कहा जाता है, जिसमें पदों की संख्या सीमित नहीं होती है।’’ उदाहरणत: पूर्वोक्त क्रमागत भागफलों का अनुक्रम एक ‘अपरिमित अनुक्रम’ है। अपरिमित कहने का अर्थ है, जो कभी समाप्त नहीं होता।

प्राय: यह संभव है कि अनुक्रम के विभिन्न पदों को व्यक्त करने के नियम को एक बीज गणितीय सूत्र द्वारा व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरणार्थ, प्राकृत सम संख्याओं के अनुक्रम 2, 4, 6, … पर विचार कीजिए।

यहाँ a1 = 2 = 2 × 1 a2 = 4 = 2 × 2

a3 = 6 = 2 × 3 a4 = 8 = 2 × 4

.... .... .... .... .... ....

.... .... .... .... .... ....

a23 = 46 = 2 × 23 a24 = 48 = 2 = 2 × 24,  और इसी प्रकार अन्य।

वस्तुत:, हम देखते हैं कि अनुक्रम का nवाँ पद a = 2n, लिखा जा सकता हैं, जबकि n एक प्राकृत संख्या है। इसी प्रकार, विषम प्राकृत संख्याओं के अनुक्रम  1,3,5,7,…, में nवें पद के सूत्र को an = 2n – 1,  के रूप में निरूपित किया जा सकता है, जबकि n एक प्राकृत संख्या है।

व्यवस्थित संख्याओं 1, 1, 2, 3, 5, 8,.. का कोई स्पष्ट पैटर्न नहीं है, किंतु अनुक्रम की रचना पुनरावृत्ति संबंध द्वारा व्यक्त की जा सकती हैं। उदाहरणत:

a1 = a2 = 1

a3 = a1 + a2

an = an–2 + an–1, n > 2

इस अनुक्रम को Fibonacci अनुक्रम कहते हैं।

अभाज्य संख्याओं के अनुक्रम 2,3,5,7… में nवीं अभाज्य संख्या का कोई सूत्र नहीं हैं। एेसे वर्णित अनुक्रम को केवल मौखिक निरूपित किया जा सकता हैं।

प्रत्येक अनुक्रम में यह अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि उसके लिए विशेष सूत्र होगा। किंतु फिर भी एेसे अनुक्रम के निर्माण के लिए कोई न कोई सैद्धांतिक योजना अथवा नियम की आशा तो की जा सकती है, जो पदों a1, a2, a3,…,an,… का क्रमागत रूप दे सके।

उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर, एक अनुक्रम को हम एक फलन के रूप में ले सकते हैं जिसका प्रांत प्राकृत संख्याओं का समुच्चय हो अथवा उसका उपसमुच्चय हो। कभी-कभी हम फलन के संकेत an के लिए a(n) का उपयोग करते हैं।

9.3 श्रेणी (Series)

माना कि यदि a1, a2, a3,…,a अनुक्रम है, तो व्यंजक a1 + a2 + a3 +,…+ an संबंधित अनुक्रम से बनी श्रेणी कहलाती हैं। श्रेणी परिमित अथवा अपरिमित होगी, यदि अनुक्रम क्रमश: परिमित अथवा अपरिमित है। श्रेणी को संधि रीति में प्रदर्शित करते हैं, जिसे सिग्मा संकेत कहते हैं। इसके लिए ग्रीक अक्षर संकेत (सिग्मा) का उपयोग करते हैं, जिसका अर्थ होता हैं जोड़ना। इस प्रकार, श्रेणी

a1 + a2 + a3 + ... + an  का संक्षिप्त रूप, . है।

टिप्पणी श्रेणी का उपयोग, योग के लिए नहीं, बल्कि निरूपित योग के लिए किया जाता है।

उदाहरणत: 1 + 3 + 5 + 7 चार पदों वाली एक परिमित श्रेणी है। जब हम ‘श्रेणी का योग’ मुहावरे का उपयोग करते हैं, तब उसका तात्पर्य उस संख्या से है जो पदों के जोड़ने से परिणित होती है। अत: श्रेणी का योग 16 है।

अब हम कुछ उदाहरणों पर विचार करते हैं।

उदाहरण 1 दी गई परिभाषाओं के आधार पर निम्नलिखित प्रत्येक अनुक्रम के प्रथम तीन पद बताइए: 

(i) an = 2n + 5 

 (ii) an .

हल (1) यहाँ an = 2n + 5,

n=1,2,3, रखने पर, हम पाते हैं: 

a1 = 2(1) + 5 = 7, a2 = 9, a3 = 11

इसलिए, वांछित पद 7, 9 तथा 11 हैं।

(ii) यहाँ an =

इस प्रकार

अत: प्रथम तीन पद , तथा 0 हैं।

उदाहरण 2 an = (n – 1) (2 – n) (3 + n) द्वारा परिभाषित अनुक्रम का 20वाँ पद क्या हैं?

हल हम n = 20 रखने पर, पाते हैं 

a20 = (20 – 1) (2 – 20) (3 + 20) 

= 19 * (– 18) * (23) 

= – 7866.

उदाहरण 3 माना कि अनुक्रम an निम्नलिखित रूप में परिभाषित है: 

a1 = 1, 

an = an–1 + 2 for n 2.

तो अनुक्रम के पाँच पद ज्ञात कीजिए तथा संगत श्रेणी लिखिए।

हल हम पाते हैं: 

a1 = 1, a2 = a1 + 2 = 1 + 2 = 3, a3 = a2 + 2 = 3 + 2 = 5, 

a4 = a3 + 2 = 5 + 2 = 7, a5 = a4 + 2 = 7 + 2 = 9.

अत: अनुक्रम के प्रथम पाँच पद 1,3,5,7 तथा 9 हैं। 

संगत श्रेणी 1 + 3 + 5 + 7 + 9 +..है।

प्रश्नावली 9.1

प्रश्न 1 से 6 तक के अनुक्रमों में प्रत्येक के प्रथम पाँच पद लिखिये, जिनका nवाँ पद दिया गया है: 

1. an = n (n + 2) 2. an = 3. an = 2द 

4. an = 5. an = (–1)n–1 5n+1 6. an.

निम्नलिखित प्रश्न 7 से 10 तक के अनुक्रमों में प्रत्येक का वांछित पद ज्ञात कीजिए, जिनका nवाँ पर दिया गया है: 

7. an = 4n – 3; a17, a24   8. an =  

9. an = (–1)n – 1n3;   a9 10. .

प्रश्न 11 से 13 तक प्रत्येक अनुक्रम के पाँच पद लिखिए तथा संगत श्रेणी ज्ञात कीजिए: 

11. a1 = 3, an = 3an–1 + 2 सभी n > 1 के लिए 

12. a1 = –1, an = , जहाँ n

13. a1 = a2 = 2, an = a–1–1, जहाँ n 2

14. Fibonacci अनुक्रम निम्नलिखित रूप में परिभाषित है: 

1 = a1 = a2 तथा an = an–1 + an–2, n.>2  तो

ज्ञात कीजिए, जबकि n = 1, 2, 3, 4, 5


9.4 समांतर श्रेणी [Arithmetic Progression (A.P.)]

पूर्व में अध्ययन किए कुछ सूत्रों तथा गुणों का पुन: स्मरण करते हैं।

एक अनुक्रम a1, a2 a3,…,an को समांतर अनुक्रम या समांतर श्रेणी कहते हैं, यदि 

an+1 = an + d, n N

aको प्रथम पद कहते हैं तथा अचर पद को समांतर श्रेणी का सार्व अंतर कहते हैं।

मान लीजिए एक समांतर श्रेणी (प्रमाणित रूप में) पर विचार करें, जिसका प्रथम पद a, तथा सार्व अंतर d है, अर्थात् a, a + d, a + 2d, ...समांतर श्रेणी का nवाँ पद (व्यापक पद) an = a + (n – 1)d है।

हम समांतर श्रेणी की सामान्य विशेषताओं का परीक्षण कर सकते हैं:

(1) यदि समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में एक अचर जोड़ा जाए, तो इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है।

(ii) यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में से एक अचर घटाया जाए तो, इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है।

(iii)  यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद में एक अचर से गुणा किया जाए तो, इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी समांतर श्रेणी होता है।

(iv) यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रत्येक पद को एक अशून्य अचर से भाग दिया जाए तो इस प्रकार प्राप्त अनुक्रम भी एक समांतर श्रेणी होगा।

यहाँ इसके बाद, हम समांतर श्रेणी के लिए निम्नलिखित संकेतों का उपयोग करेंगे:

a = प्रथम पद, l = अंतिम पद, d = सार्व अंतर

n = पदों की संख्या, S= समांतर श्रेणी के n पदों का योगफल

माना a, a + d, a + 2d, …, a + (n – 1) d एक समांतर श्रेणी है, तो 

l = a + (n – 1) d

हम इस प्रकार भी लिख सकते हैं:

आइए कुछ उदाहरण लेते हैं।

उदाहरण 4 यदि किसी समांतर श्रेणी का mवाँ पद n तथा nवाँ पद m, जहाँ m n, हो तो pवाँ पद ज्ञात कीजिए।

हल हम पाते हैं: 

am = a + (m – 1) d = n, ... (1)

तथा an = a + (n – 1) d = m, ... (2)

(1) और (2) को हल करने पर, हम पाते हैं: 

(m – n) d = n – m, या d = –1, ... (3)

तथा a = n + m –1 ... (4)

इसलिए 

ap = a + (p – 1)

= n + m – 1 +( p – 1) (–1) = n + m p

अत: , p वाँ पद n + m – p.  है।

उदाहरण 5 यदि किसी समांतर श्रेणी के n पदों का योग Q, है, जहाँ P तथा Q अचर हो तो सार्व अंतर ज्ञात कीजिए।

हल माना कि a1, a2, …, an  दी गई समांतर श्रेणी है, तो 

Sn = a1 + a2 + a3 +...+ an–1 + an = nP + n(n – 1)Q

इसलिए S1 = a1 = P, S2 = a1 + a2 = 2P + Q

इसलिए a2 = S2 – S1 = P + Q

अत: सार्व अंतर है: d = a2 a1 = (P + Q) – P = Q

उदाहरण 6 दाे समांतर श्रेढ़ियों के n पदों के योगफल का अनुपात (3n + 8) : (7n + 15) है। 12 वें पद का अनुपात ज्ञात कीजिए।

हल माना कि a1, a2,  तथा  d1, d2क्रमश: प्रथम एवं द्वितीय समांतर श्रेढ़ियों के प्रथम पद तथा सार्व अंतर हैं, तो दी हुई शर्त के अनुसार, हम पाते हैं:

या

या ... (1)

अब

[(1) में n = 23 रखने पर]

या

: वांछित अनुपात 7 : 16 है।

उदाहरण 7 एक व्यक्ति की प्रथम वर्ष में आय 3,00,000 रुपये है तथा उसकी आय 10,000 रुपये प्रति वर्ष, उन्नीस वर्षों तक बढ़ती है, तो उसके द्वारा 20 वर्षों में प्राप्त आय ज्ञात कीजिए।

हल यहाँ, हम पाते हैं, समांतर श्रेणी जिसका 

a = 3,00,000, d = 10,000, तथा n = 20

योग सूत्र का उपयोग करने पर, हम पातें हैं,

= 10 (790000) = 79,00,000

वह व्यक्ति 20 वर्ष के अंत में 79,00,000 रुपये प्राप्त करता है।


9.4.1 समांतर माध्य (Arithmetic mean) 

दिया है दो संख्याएँ a तथा b. हम इन संख्याओं के बीच में एक संख्या A ले सकते हैं ताकि a, A, b समांतर श्रेणी में हों, तो संख्या A को a और b का समांतर माध्य (A.M.) कहते हैं।

A – a = b – A अर्थात् A =

दो संख्याओं a तथा b के मध्य समांतर माध्य को इनके औसत के रूप में व्याख्यित किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए, दो संख्याओं 4 तथा 16 का समांतर माध्य 10 है। इस तरह हम एक संख्या 10 को 4 तथा 16 के मध्य रखकर एक समांतर श्रेणी 4, 10, 16 की रचना करते हैं। अब एक स्वाभाविक प्रश्न उठता हैं। क्या दिए गए किन्हीं दो संख्याओं के बीच दो या अधिक संख्याओं को रखने से समांतर श्रेणी (A.P.) तैयार हो सकेगी? अवलोकन कीजिए कि संख्याओं 4 तथा 16 के बीच 8 और 12 रखा जाए तो 4ए 8ए 12ए 16 समांतर श्रेणी (A.P.) हो जाती है।

सामान्यत: किन्हीं दो संख्याओं a तथा b के बीच कितनी भी संख्याओं को रखकर समांतर श्रेणी A.P. में परिणित किया जा सकता है।

माना कि A1, A2, A3, …An  a  तथा  के मध्य   संख्याएँ इस प्रकार हैं, कि a, A1, A2, A3, …An, b  समांतर श्रेणी में है।

यहाँ b, (n + 2) वाँ पद हैं, 

अथााρत् 

b = a + [(n + 2) – 1]

= a + (n + 1)d

इससे पाते हैं .

इस प्रकार, a तथा b के मध्य n संख्याएँ निम्नलिखित हैं: 

A1 = a + d = a +  

A2 = a + 2d = a +  

A3 = a + 3d = a +  

....  . .....   .....   .....

  ..... ..... ..... .....  

An = a + nd = a +

उदाहरण 8 एेसी 6 संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 3 और 24 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक समांतर श्रेणी बन जाए।

हल माना कि A1, A2, A3, A4, A5 तथा A6,3 तथा 24 के मध्य 6 संख्याएँ हैं, इसलिए 3, A1, A2, A3, A4, A5, A6 24 समांतर श्रेणी में हैं।

यहाँ a = 3, b = 24, n = 8.

इसलिए 24 = 3 + (8 –1) d, इससे प्राप्त होता है d = 3.

इस प्रकार 

A= a + d = 3 + 3 = 6; A2 = a + 2d = 3 + 2 × 3 = 9; 

A3 = a + 3d = 3 + 3 × 3 = 12; A4 = a + 4d = 3 + 4 × 3 = 15;  

A5 = a + 5d = 3 + 5 × 3 = 18; A6 = a + 6d = 3 + 6 × 3 = 21.

अत:, संख्याएँ 3 तथा 24 के मध्य 6 संख्याएँ 6, 9, 12, 15, 18 तथा 21 हैं।

प्रश्नावली 9.2

1. 1 से 2001 तक के विषम पूर्णांकों का योग ज्ञात कीजिए।

2. 100 तथा 1000 के मध्य उन सभी प्राकृत संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए जो 5 के गुणज हों।

3. किसी समांतर श्रेणी में प्रथम पद 2 है तथा प्रथम पाँच पदों का योगफल, अगले पाँच पदों के योगफल का एक चौथाई है। दर्शाइए कि 20वाँ पद –112 है।

4. समांतर श्रेणी – 6, , – 5, … के कितने पदों का योगफल –25 है?

5. किसी समांतर श्रेणी का pवाँ पद तथा qवाँ पद , हो तो सिद्ध कीजिए कि प्रथम pq पदों का योग (pq +1) होगा जहाँ p.

6. यदि किसी समांतर श्रेणी 25, 22, 19, … के कुछ पदों का योगफल 116 है तो अंतिम पद ज्ञात कीजिए।

7. उस समांतर श्रेणी के n पदों का योगफल ज्ञात कीजिए, जिसका k वाँ पद 5 k + 1 है।

8. यदि किसी समांतर श्रेणी के n पदों का योगफल (pn + qn2), है, जहाँ p तथा q अचर हों तो सार्व अंतर ज्ञात कीजिए।

9. दो समांतर श्रेढ़ियों के n पदों के योगफल का अनुपात 5n + 4 : 9n + 6. हो, तो उनके 18 वें पदों का अनुपात ज्ञात कीजिए।

10. यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रथम p पदों का योग, प्रथम q पदों के योगफल के बराबर हो तो प्रथम (p + q) पदों का योगफल ज्ञात कीजिए।

11. यदि किसी समांतर श्रेणी के प्रथम p, q, r पदों का योगफल क्रमश: a, b तथा c हो तो सिद्ध कीजिए कि

12. किसी समांतर श्रेणी के m तथा n पदों के योगफलों का अनुपात m2 : n2 है तो दर्शाइए कि m वें तथा nवें पदों का अनुपात (2m–1) : (2n–1)  है।

13. यदि किसी समांतर श्रेणी के nवें पद का योगफल 3n2 + 5n हैं तथा इसका mवाँ पद 164 है, तो m का मान ज्ञात कीजिए।

14. 5 और 26 के बीच एेसी 5 संख्याएँ डालिए ताकि प्राप्त अनुक्रम समांतर श्रेणी बन जाए।

15. यदि , a तथा b के मध्य समांतर माध्य हो तो n का मान ज्ञात कीजिए।

16. m संख्याओं को 1 तथा 31 के रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक समांतर श्रेणी है और 7वीं एवं  (m –1) वीं संख्याओं का अनुपात 5 : 9 है। तो m का मान ज्ञात कीजिए।

17. एक व्यक्ति ऋण का भुगतान 100 रुपये की प्रथम किश्त से शुरू करता है। यदि वह प्रत्येक किश्त में 5 रुपये प्रति माह बढ़ता है तो 30 वीं किश्त की राशि क्या होगी?

18. एक बहुभुज के दो क्रमिक अंत:कोणों का अंतर 50 है। यदि सबसे छोटा कोण 1200 हो, तो बहुभुज की भुजाओं की संख्या ज्ञात कीजिए।


9.5 गुणोत्तर श्रेणी [Geometric Progression (G . P.)]

आइए निम्नलिखित अनुक्रमों पर विचार करें:

(i) 2,4,8,16,....

(ii)

(iii) .01,0001,.000001,...

इनमे से प्रत्येक अनुक्रम के पद किस प्रकार बढ़ते हैं?

उपर्युक्त प्रत्येक अनुक्रम में हम पाते हैं कि प्रथम पद को छोड़, सभी पद एक विशेष क्रम में बढ़ते हैं।

(i) में हम पाते हैं:

और इस प्रकार

(ii) में हम पाते हैं:

इत्यादि।

इसी प्रकार (iii) में पद कैसे अग्रसर होते हैं बताइए? निरीक्षण से यह ज्ञात हो जाता है कि प्रत्येक स्थिति में, प्रथम पद को छोड़, हर अगला पद अपने पिछले पद से अचर अनुपात में बढ़ता है। (i) में यह अचर अनुपात 2 है, (ii) में यह है (iii) में यह अचर अनुपात 0.01 है। एेसे अनुक्रमों को गुणोत्तर अनुक्रम या गुणोत्तर श्रेणी या संक्षेप में G.P. कहते हैं।

अनुक्रम a1, a2, a3, …, a, … को गुणोत्तर श्रेणी कहा जाता है, यदि प्रत्येक पद अशून्य हो तथा = r (अचर), k 1 के लिए।

a1 = a, लिखने पर हम गुणोत्तर श्रेणी पाते हैं  : a, ar, ar2, ar3, +…., जहाँ a को प्रथम पद कहते हैं तथा r को गुणोत्तर श्रेणी का 

सार्व अनुपात कहते हैं। (i), (ii) तथा (iii) में दी गई गुणोत्तर श्रेढ़ियों का सार्व अनुपात क्रमश: 2, तथा 0.01 है।

जैसा कि समांतर श्रेणी के संदर्भ में, वैसे ही पद गुणोत्तर श्रेणी का nवाँ खोजने की समस्या या गुणोत्तर श्रेणी के n पदों का योग जिसमें बहुत संख्याओं का समावेश हो तो इन्हें बिना सूत्र के हल करना कठिन है। इन सूत्रों को हम अगले अनुच्छेद में विकसित करेंगे:

हम इन सूत्रों के साथ निम्नलिखित संकेत का उपयोग करेंगे।

a = प्रथम पद, r = सार्व अनुपात, l = अंतिम पद,

n = पदों की संख्या, Sn = प्रथम n पदों का योगफल

9.5.1 गुणोत्तर श्रेणी का व्यापक पद (General term of a G.P.) 

आइए एक गुणोत्तर श्रेणी G.P. जिसका प्रथम अशून्य पद a तथा सार्व अनुपात r है, पर विचार करें। इसके कुछ पदों को लिखिए। दूसरा पद, प्रथम पद a को सार्व अनुपात r से गुणा करने पर प्राप्त होता है, अर्थात् a2 = ar, इसी प्रकार तीसरा पद a3 को r से गुणा करने पर प्राप्त होता है अर्थात् a3 = a2r = ar2, आदि। हम इन्हें तथा कुछ और पद नीचे लिखते हैं:

प्रथम पद = a1 = a = ar1–1ए द्वितीय पद = a2 = ar = ar2–1ए तृतीय पद = a3 = ar2 = ar3–1

चतुर्थ पद = a4 = ar3 = ar4–1ए पाँचवाँँ पद= a5 = ar4 = ar5–1

क्या आप कोई पैटर्न देखते हैं? 16वाँ पद क्या होगा?

a16 = ar16–1 = ar15

इसलिए यह प्रतिरूप बताता है कि गुणोत्तर श्रेणी का n वाँ पद .

अर्थात् गुणोत्तर श्रेणी इस रूप में लिखी जा सकती हैं  : a, ar, ar2, ar3 ,… arn–1; a, ar, ar2...,


ar
n–1... क्रमश: जब श्रेणी परिमित हो या जब श्रेणी अपरिमित हो।

श्रेणी a + ar + ar2 + ... + arn–1 अथवा a + ar + ar2 + ... + arn–1 +... क्रमश: परिमित या अपरिमित गुणोत्तर श्रेणी कहलाते हैं।


9.5.2. गुणोत्तर श्रेणी के पदोें का योगफल (Sum to n terms of a G.P.)

m1

उदाहरण 12 गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम n पदों का योग तथा प्रथम 5 पदों का योगफल ज्ञात कीजिए।

हल यहाँ a = 1, तथा r = . इसलिए

Sn = =

विशेषत: S5 = = =

उदाहरण 13 गुणोत्तर श्रेणी ... के कितने पद आवश्यक हैं ताकि उनका योगफल हो जाए?

हल माना कि n आवश्यक पदों की संख्या हैं। दिया है a = 3, r = तथा

क्योंकि

इसलिए

या

या

या

या 2n = 1024 = 210, या n = 10

उदाहरण 14 एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योगफल है तथा उनका गुणानफल 1 है, तो सार्व अनुपात तथा पदों को ज्ञात कीजिए?

हल माना गुणोत्तर श्रेणी के तीन पद हैं तो

... (1)

तथा = – 1 ... (2)

(2) से हम पाते हैं a3 = –1 अर्थात् a = -–1 (केवल वास्तविक मूल पर विचार करने से)

(1) में a = –1 रखने पर हम पाते है  या 12r2 + 25r + 12 = 0.

यह r में द्विघात समीकरण है, जिसे हल करने पर हम पाते हैं: या

अत: गुणोत्तर श्रेणी के तीन पद हैं

के लिए तथा के लिए

दाहरण 15 अनुक्रम 7, 77, 777, 7777,... के nपदों का योग ज्ञात कीजिए।

हल इस रूप में यह गुणोत्तर श्रेणी नहीं हैं। तथापि इसे निम्नलिखित रूप में लिखकर गुणोत्तर श्रेणी से संबंध निरूपित किया जा सकता है:

Sn = 7 + 77 + 777 + 7777 + ... to n पदों तक

=

=

=

= .

उदाहरण 16 एक व्यक्ति की दसवीं पीढ़ी तक पूर्वजों की संख्या कितनी होगी, जबकि उसके 2 माता-पिता, 4 दादा-दादी, 8 पर दादा, पर दादी तथा आदि हैं।

हल यहाँ a = 2, r = 2 तथा n = 10,

योगफल का सूत्र उपयोग करने पर

हम पाते हैं S10 = 2(210 – 1) = 2046

अत: व्यक्ति के पूर्वजों की संख्या 2046 है।

9.5.3 गुणोत्तर माध्य (Geometric Mean G .M.) , 

दो धनात्मक संख्याओं a तथा b का गुणोत्तर माध्य संख्या है। इसलिए 2 तथा 8 का गुणोत्तर माध्य 4 है। हम देखते हैं कि तीन संख्याओं 2, 4, 8 गुणोत्तर श्रेणी के क्रमागत पद हैं। यह दो संख्याओं के गुणोत्तर माध्य की धारणा के व्यापकीकरण की ओर अग्रसर करता है।

यदि दो धनात्मक संख्याएँ a तथा b दी गई हो तो उनके बीच इच्छित संख्याएँ रखी जा सकती हैं ताकि प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाए।

मान लीजिए a तथा b के बीच n संख्याएँ G1, G2, G3 ,…,Gn, इस प्रकार हैं कि a,G1,G2,G3,…,Gn,b 

गुणोत्तर श्रेणी है। इस प्रकार b गुणोत्तर श्रेणी का (n + 2) वाँ पद है।

हम पाते हैं:

, या

अत: , , ,

उदाहरण 17 एेसी 3 संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 1 तथा 256 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाए।

हल माना कि G1, G2,G3 तीन गुणोत्तर माध्य 1 तथा 256 के बीच में है।

1, G1,G2,G3 ,256 गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

इसलिए 256 = r4 जिससे r = 4 (केवल वास्तविक मूल लेने पर) r = 4 के लिए हम पाते हैं ़G1 = ar = 4, G2 = ar2 = 16, G3 = ar3 = 64

इसी प्रकार r = – 4, के लिए संख्याएँ – 4,16 तथा – 64 हैं।

अत: 1 तथा 256 के बीच तीन संख्याएँ 4, 16, 64 हैं।


9.6 समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य के बीच संबंध (Relationship between A.M. and G.M.)

माना कि A तथा G दी गई दो धनात्मक वास्तविक संख्याओं a तथा b के बीच क्रमश: समांतर माध्य (A.M.) तथा गुणोत्तर माध्य (A.M.) हैं। तो

तथा

इस प्रकार

= = 0 ... (1)

(1) से हम A G संबंध पाते हैं।

उदाहरण 18 यदि दो धनात्मक संख्याओं a तथा b के बीच समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य क्रमश: 10 तथा 8 हैं, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

हल दिया है ... (1)

तथा ... (2)

(1) तथा (2) से हम पाते हैं

a + b = 20 ... .............(3)

 ab = 64 ...................... (4)

(3), (4) से a तथा b का मान सर्वसमिका  (a b)2 = (a + b)2 – 4ab में रखने पर हम पाते हैं

(a b)2 = 400 – 256 = 144 या a b = 12

(3) तथा (5) को हल करने पर, हम पाते हैं

a = 4, b = 16 या a = 16, b = 4

अत: संख्याएँ a तथा b क्रमश: 4, 16 या 16, 4 हैं।

प्रश्नावली 9.3

1. गुणोत्तर श्रेणी , ... का 20वाँ तथा nवाँ पद ज्ञात कीजिए।

2. उस गुणोत्तर श्रेणी का 12वाँ पद ज्ञात कीजिए, जिसका 8वाँ पद 192 तथा सार्व अनुपात 2 है।

3. किसी गुणोत्तर श्रेणी का 5वाँ, 8वाँ तथा 11वाँ पद क्रमश: p, q तथा s हैं तो दिखाइए
कि
q2 = ps.

4. किसी गुणोत्तर श्रेणी का चौथा पद उसके दूसरे पद का वर्ग है तथा प्रथम पद –3 है तो 7वाँ पद ज्ञात कीजिए।

5. अनुक्रम का कौन सा पद:

(a) 2, 2, 4, ...; 128 है?

(b) ,3 3, ... ; 729 है?

(c) है?

6. x के किस मान के लिए संख्याएँ गुणोत्तर श्रेणी में हैं?

प्रश्न 7 से 10 तक प्रत्येक गुणोत्तर श्रेणी का योगफल निर्दिष्ट पदों तक ज्ञात कीजिए।

7. 0.15, 0.015, 0.0015, ... 20 पदों तक

8. , , 3, ... n पदों तक

9. 1, – a, a2, – a3, ... n पदों तक (यदि a –1)

10. x3, x5, x7, ... n पदों तक (यदि x 1)

11. मान ज्ञात कीजिए

12. एक गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योगफल हैं तथा उनका गुणनफल 1 है। सार्व अनुपात तथा पदों को ज्ञात कीजिए।

13. गुणोत्तर श्रेणी 3, 32, 33, … के कितने पद आवश्यक हैं ताकि उनका योगफल 120 हो जाए।

14. किसी गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम तीन पदों का योगफल 16 है तथा अगले तीन पदों का योग 128 है तो गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद, सार्व अनुपात तथा n पदों का योगफल ज्ञात कीजिए।

15. एक गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद a = 729 तथा 7वाँ पद 64 है तो S7 ज्ञात कीजिए?

16. एक गुणोत्तर श्रेणी को ज्ञात कीजिए, जिसके प्रथम दो पदों का योगफल – 4 है तथा 5वाँ पद तृतीय पद का 4 गुना है।

17. यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का 4 वाँ, 10वाँ तथा 16वाँ पद क्रमश: x, y तथा z हैं, तो सिद्ध कीजिए कि x, y, z गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

18. अनुक्रम 8, 88, 888, 8888… के n पदों का योग ज्ञात कीजिए।

19. अनुक्रम 2, 4, 8, 16, 32 तथा 128, 32, 8, 2, के संगत पदों के गुणनफल से बने अनुक्रम का योगफल ज्ञात कीजिए।

20. दिखाइए कि अनुक्रम a, ar, ar2, … arn-1  तथा A, AR, AR2, ...ARn-1 के संगत पदों के गुणनफल से बना अनुक्रम गुणोत्तर श्रेणी होती है तथा सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए।

21. एेसे चार पद ज्ञात कीजिए जो गुणोत्तर श्रेणी में हो, जिसका तीसरा पद प्रथम पद से 9 अधिक हो तथा दूसरा पद चौथे पद से 18 अधिक हो।

22. यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का pवाँ, qवाँ तथा r वाँ पद क्रमश: a, b तथा c हो, तो सिद्ध कीजिए कि aq–r br-pcचp-q= 1

23. यदि किसी गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम तथा n वाँ पद क्रमश: a तथा b हैं, एवं P, n पदों का गुणनफल हो, तो सिद्ध कीजिए कि P2 = (ab)n

24. दिखाइए कि एक गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम n पदों के योगफल तथा (n + 1) वें पद से (2n)वें पद तक के पदों के योगफल का अनुपात है।

25. यदि a, b, c तथा d गुणोत्तर श्रेणी में हैं तो दिखाइए कि (a2 + b2 + c2) (b2 + c2 + d2) = (ab + bc + cd)2 .

26. एेसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनको 3 तथा 81 के बीच रखने पर प्राप्त अनुक्रम एक गुणोत्तर श्रेणी बन जाय।

27. n का मान ज्ञात कीजिए ताकि , a तथा b के बीच गुणोत्तर माध्य हो।

28. दो संख्याओं का योगफल उनके गुणोत्तर माध्य का 6 गुना है तो दिखाइए कि संख्याएँ के अनुपात में हैं।

29. यदि A तथा G दो धनात्मक संख्याओं के बीच क्रमश: समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य हों, तो सिद्ध कीजिए कि संख्याएँ हैं।

30.  किसी कल्चर में बैक्टीरिया की संख्या प्रत्येक घंटे पश्चात् दुगुनी हो जाती है। यदि प्रारंभ में उसमें 30 बैक्टीरिया उपस्थित थे, तो बैक्टीरिया की संख्या दूसरे, चौथे तथा nवें घंटों बाद
क्या होगी?

31. 500 रुपये धनराशि 10: वार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज पर 10 वर्षों बाद क्या हो जाएगी, ज्ञात कीजिए?

32. यदि किसी द्विघात समीकरण के मूलों के समांतर माध्य एवं गुणोत्तर माध्य क्रमश: 8 तथा 5 हैं, तो द्विघात समीकरण ज्ञात कीजिए।

9.7 विशेष अनुक्रमों के पदों का योगफल (Sum to n Terms of Special Series)

अब हम कुछ विशेष अनुक्रमों के n पदों का योग ज्ञात करेंगे: वे निम्नलिखित हैं।

(i) 1 + 2 + 3 +… + n (प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग)

(ii) 12 + 22 + 32+… + n2 (प्रथम n प्राकृत संख्याओं के वर्गों का योग)

(iii) 13 + 23 + 33+… + n3 (प्रथम n प्राकृत संख्याओं के घनों का योग)

आइए हम इन पर एक के बाद दूसरे पर विचार करें:

(i) Sn=1+ 2 + 3 + … + n, तो = (भाग 9.4 देखें)

(ii) यहाँ Sn=12+22+32+ … +n2

हम सर्वसमिका पर विचार करते हैं

क्रमश: k = 1, 2… , n रखने पर, हम पाते हैं  

13 – 03 = 3 (1)2 – 3 (1) + 1

23 – 13 = 3 (2)2 + 1

33 – 23 = 3(3)2 – 3 (3) + 1

.......................................

.......................................

......................................

n3 – (n – 1)3 = 3 (n)2 – 3 (n) + 1

दोनों पक्षों को जोड़ने पर हम पाते हैं

n3 – 03 = 3 (12 + 22 + 32 + ... + n2) – 3 (1 +2 +3 + ... + n) + n

या

(i) से हम जानते हैं

अत: Sn = = =

(iii) यहाँ Sn = 13 + 23 + ...+n3

हम सर्वसमिका (k + 1)4 k4 = 4k3 + 6k2 + 4k + 1 पर विचार करते हैं

क्रमश: k = 1, 2, 3… n, रखने पर, हम पाते हैं

24 – 14 = 4(1)3 + 6(1)2 + 4(1) + 1

34 – 24 = 4(2)3 + 6(2)2 + 4(2) + 1

44 – 34 = 4(3)3 + 6(3)2 + 4(3) + 1

..................................................

..................................................

..................................................

(n – 1)4 – (n – 2)4 = 4(n – 2)3 + 6(n – 2)2 + 4(n – 2) + 1

n4 – (n – 1)4 = 4(n – 1)3 + 6(n – 1)2 + 4(n – 1) + 1

(n + 1)4n4 = 4n3 + 6n2 + 4n + 1

दोनों पक्षों को जोड़ने पर, हम पाते हैं

(n + 1)4 – 14 = 4(13 + 23 + 33 +...+ n3) + 6(12 + 22 + 32 + ...+ n2) +

4(1 + 2 + 3 +...+ n) + n

, ... (1)

(i) तथा (ii) से, हम जानते हैं

तथा

इन मानों को (1) में रखने पर, हम पाते हैं

c3 c2 c1n

or 4Sn = n4 + 4n3 + 6n2 + 4nn (2n2 + 3n + 1) – 2n (n + 1) – n

= n4 + 2n3 + n2

= n2(n + 1)2.

अत: Sn =

उदाहरण 19 श्रेणी 5 + 11 + 19 + 29 + 41… के nपदों का योगफल ज्ञात कीजिए।

हल आइए लिखें

Sn = 5 + 11 + 19 + 29 + ... + an–1 + an

अथवा Sn = 5 + 11 + 19 + ... + an–2 + an–1 + an

घटाने पर हम पाते हैं

0 = 5 + [6 + 8 + 10 + 12 + ...(n – 1) पदों ] – an

अथवा an =

= 5 + (n – 1) (n + 4) = n2 + 3n + 1

इस प्रकार Sn =

= = .

उदाहरण 20 उस श्रेणी के n पदों का योग ज्ञात कीजिए जिसका nवाँ पद n (n + 3) है।

हल दिया गया है

an = n (n + 3) = n2 + 3n

इस प्रकार n पदों का योगफल

Sn =

= .

प्रश्नावली 9.4

प्रश्1 से 7 तक प्रत्येक श्रेणी के nपदों का योग ज्ञात कीजिए।

1. 1 × 2 + 2 × 3 + 3 × 4 + 4 × 5 +... 2. 1 × 2 × 3 + 2 × 3 × 4 + 3 × 4 × 5 + ...

3. 3 × 12 + 5 × 22 + 7 × 32 + ... 4. ...

5. 52 + 62 + 72 + ... + 202 6. 3 × 8 + 6 × 11 + 9 × 14 + ...

7. 12 + (12 + 22) + (12 + 22 + 32) + ...

प्रश्न 8 से 10 तक प्रत्येक श्रेणी के n पदों का योग ज्ञात कीजिए जिसका n वाँ पद दिया है:

8. n (n+1) (n+4).

9. n2 + 2.

10.

विविध उदाहरण

उदाहरण 21 यदि किसी समांतर श्रेणी का p वाँ, q वाँ, r वाँ तथा s वाँ पद गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो दिखाइए कि (p – q), (q r), (r-s) भी गुणोत्तर श्रेणी में होगें।

हल यहाँ ap = a + (p –1) d ............. (1)

aq = a + (q –1) d ......................... (2)

ar = a + (r –1) d .......................... (3)

as = a + (s –1) d ... ......................(4)

दिया गया है कि ap, aq, ar तथा as गुणोत्तर श्रेणी में हैं। इसलिए

= (क्यों?) … (5)

इसी प्रकार = ; (क्यों?) … (6)

अत: (5) तथा (6) से

= अर्थात् p – q, q – r तथा r – s गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

उदाहरण 22 यदि a, b, c गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा हैं तो सिद्ध कीजिए x, y, z समांतर श्रेणी में हैं।

हल माना कि a1/x = b1/y = c1/z= k. हैं तो 

a = kx , b = ky तथा  c = kΡ. … (1)

क्योंकि a, b, c गुणोत्तर श्रेणी में हैं

b2 = ac … (2)

(1) तथा (2) के उपयोग से हम पाते हैं

k2y = kx+z

इससे हमें मिलता है 2y = x + z.

अत: x, y तथा z समांतर श्रेणी में हैं।

उदाहरण 23 यदि a, b, c, d तथा p विभिन्न वास्तविक संख्याएँ इस प्रकार हैं कि (a2 + b2 + c2)p2 – 2(ab + bc + cd)p + (b2 + c2 + d2) 0 तो दर्शाइए कि a, b, c तथा d गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

हल दिया हैं

(a2 + b2 + c2) p2 – 2 (ab + bc + cd)p + (b2 + c2 + d2) 0 .................... (1)

परंतु बायाँ पक्ष

= (a2p2 – 2abp+b2) + (b2p2 – 2bcp+c2) + (c2p2 – 2cdp + d2),

इससे हमें मिलता है

(apb)2 + (bpc)2 + (cpd)2 0 ................. (2)

क्योंकि वास्तविक संख्याओं के वर्गों का योग ऋणेतर है, इसलिए (1) तथा (2) से, हम पाते हैं

अथवा ap – b = 0, bp – c = 0, cpd = 0 इससे हमें मिलता है

अत: a, b, c तथा d गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

उदाहरण 24 यदि p,q,r गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा समीकरणों px2 + 2qx + r = 0 और dx2 + 2ex + f = 0 एक उभयनिष्ठ मूल रखते हों, तो दर्शाइए कि समांतर श्रेणी में हैं।

हल समीकरण px2 + 2qx + r = 0 के मूल निम्नलिखित हैं:

क्योंकि p ,q, r गुणोत्तर श्रेणी में हैं, इसलिए q2 = pr, अर्थात् परंतु समीकरण
dx
2 + 2ex + f = 0 का भी मूल है, (क्यों?)

इसलिए

या oqQ2 – 2eqp + fp2 = 0 ................ (1)

(1) को pq2 से भाग देने पर तथा q2 = pr का उपयोग करने से, हम पाते हैं

या

अत: समांतर श्रेणी में हैं।

अध्याय 9 पर विविध प्रश्नावली

1. दर्शाइए कि किसी समांतर श्रेणी के (m + n)वें तथा (m – n)वें पदों का योग mवें पद का दुगुना है।

2. यदि किसी समांतर श्रेणी की तीन संख्याओं का योग 24 है तथा उनका गुणनफल 440 है, तो संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

3. माना कि किसी समांतर श्रेणी के n, 2n, तथा 3n पदों का योगफल क्रमश: S1, S2 तथा S3 है तो दिखाइए कि S3 = 3(S2 –S1)

4. 200 तथा 400 के मध्य आने वाली उन सभी संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए जो 7 से विभाजित हों।

5. 1 से 100 तक आने वाले उन सभी पूर्णांकों का योगफल ज्ञात कीजिए जो 2 या 5 से विभाजित हों।

6. दो अंकों की उन सभी संख्याओं का योगफल ज्ञात कीजिए, जिनको 4 से विभजित करने पर शेषफल 1 हो।

7. सभी x , y N के लिए f (x + y) = f (x). f (y) को संतुष्ट करता हुआ f एक एेसा फलन है कि f (1) = 3 एवं तो n का मान ज्ञात कीजिए।

8. गुणोत्तर श्रेणी के कुछ पदों का योग 315 है, उसका प्रथम पद तथा सार्व अनुपात क्रमश: 5 तथा 2 हैं। अंतिम पद तथा पदों की संख्या ज्ञात कीजिए।

9. किसी गुणोत्तर श्रेणी का प्रथम पद 1 है। तीसरे एवं पाँचवें पदों का योग 90 हो तो गुणोत्तर श्रेणी का सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए।

10. किसी गुणोत्तर श्रेणी के तीन पदों का योग 56 है। यदि हम क्रम से इन संख्याओं में से 1, 7, 21 घटाएँ तो हमें एक समांतर श्रेणी प्राप्त होती है। संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

11. किसी गुणोत्तर श्रेणी के पदों की संख्या सम है। यदि उसके सभी पदों का योगफल, विषम स्थान पर रखे पदों के योगफल का 5 गुना है, तो सार्व अनुपात ज्ञात कीजिए।

12. एक समांतर श्रेणी के प्रथम चार पदों का योगफल 56 है। अंतिम चार पदों का योगफल 112 है। यदि इसका प्रथम पद 11 है, तो पदों की संख्या ज्ञात कीजिए।

13. यदि हो तो दिखाइए कि a, b, c तथा d गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

14. किसी गुणोत्तर श्रेणी में S, n पदों का योग, P उनका गुणनफल तथा R उनके व्युत्क्रमों का योग हो तो सिद्ध कीजिए कि P2Rn = Sn.

15. किसी समांतर श्रेणी का pवाँ, qवाँ rवाँ पद क्रमश: a, b, c हैं, तो सिद्ध कीजिए

(qr )a + (rp )b + (pq )c = 0

16. यदि समांतर श्रेणी में हैं, तो सिद्ध कीजिए कि a, b, c समांतर श्रेणी में हैं।

17. यदि a, b, c, d गुणोत्तर श्रेणी में हैं, तो सिद्ध कीजिए कि

गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

18. यदि x2 – 3x +p = 0 के मूल a तथा b हैं तथा x2 –12x +q = 0, के मूल c तथा d हैं, जहाँ a, b, c, d गुणोत्तर श्रेणी के रूप में हैं। सिद्ध कीजिए कि (q + p) : (qp) = 17:15

19.दो धनात्मक संख्याओं a तथा b के बीच समांतर माध्य तथा गुणोत्तर माध्य का अनुपात m:n. है। दर्शाइए कि

20. यदि a, b, c समांतर श्रेणी में हैं b, c, d गुणोत्तर श्रेणी में हैं तथा समांतर श्रेणी में हैं, तो सिद्ध कीजिए कि a, c, e गुणोत्तर श्रेणी में हैं।

21. निम्नलिखित श्रेणियों के n पदों का योग ज्ञात कीजिए।

(i) 5 + 55 +555 + …

(ii) .6 +. 66 +. 666+…

22. श्रेणी का 20वाँ पद ज्ञात कीजिए:

2 × 4 + 4 × 6 + 6 × 8 + ... + n पदों तक

23. श्रेणी 3+ 7 +13 +21 +31 +… के n पदों का योग ज्ञात कीजिए।

24. यदि S1, S2, S3 क्रमश: प्रथम n प्राकृत संख्याओं का योग, उनके वर्गों का योग तथा घनों का योग है तो सिद्ध कीजिए कि 9= S3 (1 + 8S1).

25.निम्नलिखित श्रेणियों के n पदों तक योग ज्ञात कीजिएं:

26. दर्शाइए कि: .

27. कोई किसान एक पुराने ट्रैक्टर को 12000 रुपये में खरीदता है। वह Rs 6000 रुपये  नकद भुगतान करता है और शेष राशि को Rs 500 रुपये की वार्षिक किस्त के अतिरिक्त उस धन पर जिसका भुगतान न किया गया हो 12% वार्षिक ब्याज भी देता है। किसान को ट्रैक्टर की कुल कितनी कीमत देनी पड़ेगी?

28. मशाद अली 22000 रुपये में एक स्कूटर खरीदता है। वह 4000 रुपये नकद देता है तथा शेष राशि को 1000 रुपयें वार्षिक किश्त के अतिरिक्त उस धन पर जिसका भुगतान न किया गया हो 10% वार्षिक ब्याज भी देता है। उसे स्कूटर के लिए कुल कितनी राशि चुकानी पड़ेगी?

29. एक व्यक्ति अपने चार मित्रों को पत्र लिखता है। वह प्रत्येक को उसकी नकल करके चार दूसरे व्यक्तियों को भेजने का निर्देश देता है, तथा उनसे यह भी करने को कहता हैं कि प्रत्येक पत्र प्राप्त करने वाला व्यक्ति इस शाृंखला को जारी रखे। यह कल्पना करके कि शाृंखला न टूटे तो 8 वें पत्रों के समूह भेजे जाने तक कितना डाक खर्च होगा जबकि एक पत्र का डाक खर्च 50 पैसे है।

30. एक आदमी ने एक बैंक में 10000 रुपये 5% वार्षिक साधारण ब्याज पर जमा किया। जब से रकम बैंक में जमा की गई तब से, 15 वें वर्ष में उसके खातें में कितनी रकम हो गई, तथा 20 वर्षों बाद कुल कितनी रकम हो गई, ज्ञात कीजिए।

31. एक निर्माता घोषित करता है कि उसकी मशीन जिसका मूल्य 15625 रुपये है, हर वर्ष 20% की दर से उसका अवमूल्यन होता है। 5 वर्ष बाद मशीन का अनुमानित मूल्य ज्ञात कीजिए।

32. किसी कार्य को कुछ दिनों में पूरा करने के लिए 150 कर्मचारी लगाए गए। दूसरे दिन 4 कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया, तीसरे दिन 4 और कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया तथा इस प्रकार अन्य। अब कार्य पूर्ण करने में 8 दिन अधिक लगते हैं, तो दिनों की संख्या ज्ञात कीजिए, जिनमें कार्य पूर्ण किया गया।


सारांश

अनुक्रम से हमारा तात्पर्य है, "किसी नियम के अनुसार एक परिभाषित (निश्चित) क्रम में संख्याओं की व्यवस्था"। पुन: हम एक अनुक्रम को एक फलन के रूप में परिभाषित कर सकते हैं, जिसका प्रांत प्राकृत संख्याओं का समुच्चय हो अथवा उसका उपसमुच्चय
{1, 2, 3, ...,
k} के प्रकार का हो। वे अनुक्रम, जिनमें पदों की संख्या सीमित होती है, "परिमित अनुक्रम" कहलाते हैं। यदि कोई अनुक्रम परिमित नहीं है तो उसे अपरिमित अनुक्रम कहते हैं।

मान लीजिए a1,a2,a3, ... एक अनुक्रम हैं ता a1 +a2+a3 + ... के रूप में व्यक्त किया गया योग श्रेणी कहलाता है जिस श्रेणी के पदों की संख्या सीमित होती है उसे परिमित श्रेणी कहते हैं।

किसी अनुक्रम में पद समान नियतांक से लगातार बढ़ते या घटते हैं, समांतर श्रेणी होती हैं। नियतांक को समांतर श्रेणी का सार्व अंतर कहते हैं। सामान्यत: हम समांतर श्रेणी का प्रथम पद a, सार्व अंतर d तथा अंतिम पद l से प्रदर्शित करते हैं। समांतर श्रेणी का व्यापक पद या n वाँ पद an = a + (n – 1) d है।

समांतर श्रेणी के n पदों का योग Sn निम्नलिखित सूत्र द्वारा प्राप्त होता है:

.

कोई दो संख्याओं a तथा b का समांतर माध्य A, होता है अर्थात् अनुक्रम a, A, b समांतर श्रेणी (A.P.) में है।

किसी अनुक्रम को गुणोत्तर श्रेणी या G.P. कहते हैं, यदि कोई पद, अपने पिछले पद से एक अचर अनुपात में बढ़ता है। इस अचर गुणांक को सार्व अनुपात कहते हैं। साधारणत: हम गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम पद को a तथा सार्व अनुपात r से सांकेतिक करते हैं। गुणोत्तर श्रेणी का व्यापक पद या nवाँ पद an= arn – 1 होता है।

गुणोत्तर श्रेणी के प्रथम पदों का योग या यदि 1
होता है।

कोई दो धनात्मक संख्याएँ  तथा का गुणोत्तर माध्य है अर्थात् अनुक्रम a, G, b गुणोत्तर श्रेणी में हैं।



एेतिहासिक पृष्ठभूमि

स बात के प्रमाण मिलते हैं कि 4000 वर्ष पूर्व बेबीलोनिया के निवासियों को समांतर तथा गुणोत्तर अनुक्रमों का ज्ञान था। Boethius (510 A.D.) के अनुसार समांतर तथा गुणोत्तर अनुक्रमों की जानकारी प्रारंभिक यूनानी (ग्रीक) लेखकों को थी। भारतीय गणितज्ञों में से आर्यभट (476 A.D.) ने पहली बार प्राकृत संख्याओं के वर्गों तथा घनों का योग अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘आर्यभटीयम्’ जो लगभग 499 A.D. में लिखी गई थी, में दिया। उन्होंने p वाँ पद से आरंभ, समांतर अनुक्रम के n पदों के योग का सूत्र भी दिया। अन्य महान भारतीय गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त (598 A.D.), महावीर (850 A.D.) तथा भास्कर (1114–1185 A.D.) ने संख्याओं के वर्गों एवं घनों के योग पर विचार किया। एक दूसरे विशिष्ट प्रकार का अनुक्रम जिसका गणित में महत्त्वपूर्ण गुणधर्म है जो Fibonacci sequence कहलाता है, का आविष्कार इटली के महान गणितज्ञ Leonardo Fibonacci (1170–1250 A.D.) ने किया। सत्रहवीं शताब्दी में श्रेणियों का वर्गीकरण विशिष्ट रूप से हुआ। 1671 ई. में James Gregory ने अपरिमित अनुक्रम के संदर्भ में अपरिमित श्रेणी शब्द का उपयोग किया। बीजगणितीय तथा समुच्चय सिद्धांतों के समुचित विकास के उपरांत ही अनुक्रम तथा श्रेणियों से संबंधित जानकारी अच्छे ढ़ंग से प्रस्तुत हो सकी। 


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