एकक 11 च.ब्लाॅक तत्त्व ज्भ्म् च.ठस्व्ब्ज्ञ म्स्म्डम्छज्ै उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के बाद आपμ ऽ चदृ ब्लाॅक के तत्त्वों के रसायन की सामान्यप्रवृिायों की विवेचना कर सवेंफगेऋ ऽ समूह 13 तथा 14 के तत्त्वों के भौतिक एवंरासायनिक गुणों की प्रवृिायों की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ बोराॅन तथा काबर्न के असंगत व्यवहार को समझा सवेंफगेऋ ऽ काबर्न के अपररूपों की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ बोराॅन, काबर्न तथा सिलिकाॅन के कुछमहत्त्वपूणर् यौगिकों के रसायन को जान सवेंफगेऋ ऽ समूह 13 तथा 14 के तत्त्व एवं उनकेयौगिकों के महत्त्वपूणर् उपयोगों को सूचीब( कर सवेंफगे। कदृ तथा ि इलेक्ट्राॅनों के प्रभाव के कारण चदृब्लाॅक के तत्त्वों के गुणों में भ्िाÂता उनके रसायन को रुचिकर चदृ ब्लाॅक के तत्त्वों में अंतिम इलेक्ट्राॅन बाह्यतम चदृकक्षक में प्रवेश करता है। जैसा हम जानते हैं, चदृकक्षकों की संख्या तीन होती है। अतः चदृकक्षकों के एक समुच्चय में अध्िकतम छः इलेक्ट्राॅन समाहित हो सकते हैं। परिणामतः आवतर् सारणी में चदृब्लाॅक के 13 से 18 तक छः समूह हैं। बोराॅन, काबर्न, नाइट्रोजन,आॅक्सीजन, फ्रलुओरीन तथा हीलियम इन समूहों के शीषर् हैं। हीलियम के अतिरिक्त इनका संयोजी कोश इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे2दच1दृ6 है, हालाँकिइनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास का आंतरिक क्रोड भ्िाÂ हो सकता है। यह भ्िाÂता इनके भौतिक गुणों ;जैसेμपरमाण्वीय एवं आयनिक त्रिाज्या, आयनन एन्थैल्पी आदिद्ध के साथ - साथ रासायनिक गुणों को भी अत्यिाक प्रभावित करती है। परिणामतः चदृब्लाॅक के तत्त्वों के गुणों में अत्यिाक भ्िान्नता परिलक्ष्िात होती है। चदृब्लाॅक के एक तत्त्व द्वारा दशार्इर् जाने वाली अध्िकतम आॅक्सीकरण अवस्था उसके संयोजी इलेक्ट्राॅन ;अथार्त् ेदृ तथा चदृइलेक्ट्राॅन का योगद्ध की संख्या के समान होती है। स्पष्टतः आवतर् सारणी में दाईं ओर बढ़ने पर संभावित आॅक्सीकरण अवस्थाएँ बढ़ती जाती हैं। इसके अतिरिक्त तथाकथ्िात समूह आॅक्सीकरण अवस्था के साथ - साथ चदृब्लाॅक के तत्त्व अन्य आॅक्सीकरण अवस्थाएँ भी दशार्ते हैं, जो सामान्यतः ;परंतु आवश्यक नहींद्ध वुफल संयोजी इलेक्ट्राॅन से दो इकाइर् कम होती हैं। चदृब्लाॅक के तत्त्वों द्वारा दशार्इर् जाने वालीमहत्त्वपूणर् आॅक्सीकरण अवस्थाओं को सारणी 11.1 में दशार्या गया है। बोराॅन,काबर्न तथा नाइट्रोजन परिवार में हलके तत्त्वों के लिए समूह आॅक्सीकरण अवस्था अध्िकतम स्थायी होती है। समूह आॅक्सीकरण अवस्था से दो इकाइर्कम आॅक्सीकरण अवस्था प्रत्येक समूह में गुरुतर तत्त्वों के लिए क्रमिक रूप से स्थायी होती जाती है। समूह आॅक्सीकरण अवस्था से दो इकाइर् कम आॅक्सीकरण अवस्था की प्राप्ित को अिय युग्म प्रभाव ;पदमतज चंपत ममििबजद्ध कहा जाता है। इन दो आॅक्सीकरण अवस्थाओं ;समूह आॅक्सीकरण अवस्था तथा समूह आॅक्सीकरण अवस्था से दो इकाइर् कमद्ध के सापेक्ष स्थायित्व समूहवार परिवतिर्त होते हैं, जिसकी व्याख्या उपयुक्त स्थान पर की जाएगी। सारणी 11.1 चदृब्लाॅक के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास एवं आॅक्सीकरण अवस्थाएँ समूह 13 14 15 16 17 18 सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे2दच1 दे2दच2 दे2दच3 दे2दच4 दे2दच5 दे2दच6 ;भ्म के लिए 1े2द्ध समूह का प्रथम सदय ठ ब् छ व् थ् भ्म समूह आॅक्सीकरण अवस्था ़3 ़4 ़5 ़6 ़7 ़8 अन्य आॅक्सीकरण अवस्थाएँ ़1 ़2एदृ 4 ़3दृ 3 ़4ए ़2ए दृ 2 ़5ए ़3ए ़1ए दृ1 ़6ए ़4ए ़2 यह देखना रुचिकर है कि अधतु एवं उपधतु आवतर् सारणी के केवल चदृब्लाॅक में होते हैं। समूह में नीचे जाने पर अधात्िवक गुण कम होता जाता है। वास्तव में प्रत्येक चदृब्लाॅक के समूह में सबसे गुरुतर तत्त्व सवार्ध्िक धत्िवक प्रकृति का होता है। अधत्िवक से धत्िवक गुणों में इस प्रकार परिवतर्न इन तत्त्वों के रसायन में विविध्ता लाता है। यह परिवतर्न उस तत्त्व से संबंध्ित समूह पर निभर्र करता है। सामान्यतः धतुओं की तुलना में अधतुओं की उच्च विद्युत् आयनन एन्थैल्पी तथा उच्च विद्युत् ट्टणात्मकता होती है। अतः धातुओं के विपरीत जो आसानी से ध्नायन बनाते हैं, अधातुएँ )णायन बनाती हैं। अत्यध्िक सिय धतु से अत्यिाक सिय अधतु द्वारा बना यौगिक सामान्यतः आयनिक प्रकृति का होता है, क्योंकि इनकी विद्युत् )णात्मकताओं में अध्िक अंतर होता हैै, वहीं दूसरी ओर अधतुओं के स्वयं के मध्य बनाए गए यौगिक अध्िकांशतः सहसंयोजी होते हैं, क्योंकि उनकी विद्युत् )णात्मकता में बहुत कम अंतर होता है। अधत्िवक से धात्िवक गुण में परिवतर्न को इनके द्वारा बनाए गए आॅक्साइड की प्रकृति के आधर पर समझाया जा सकता है। अधात्िवक आॅक्साइड उदासीन अथवा अम्लीय होते हैं, जबकि धत्िवक आॅक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं। चदृब्लाॅक में प्रत्येक समूह का पहला सदस्य अन्य सदस्यों से दो कारणों से भ्िान्न है। इनमें पहला कारण इनका छोटा आकार तथा दूसरा कारण वे सभी गुण हैं, जो आकार पर निभर्र करते हैं। अतः ेदृब्लाॅक के हलके तत्त्व लीथ्िायम एवं बेरीलियम की भाँति चदृब्लाॅक के भी सबसे हलके तत्व भ्िान्नता प्रद£शत करते हैं।केवल चदृब्लाॅक के तत्त्वों पर लागू दूसरी महत्त्वपूणर् भ्िान्नता,गुरुतर तत्त्वों ;तृतीय आवतर् के उपरांत के तत्त्वद्ध के संयोजी कोश में कदृकक्षकों की उपस्िथति है, जो द्वितीय आवतर् तक के तत्त्वों में नहीं होते हैं। चदृब्लाॅक में द्वितीय आवतर् के तत्त्व, जो बोराॅन से प्रारंभ होते हैं, की अध्िकतम संयोजकता चार ;एक 2े तथा तीन 2च कक्षकांे का उपयोग करते हुएद्ध तक सीमित रहती है। इसके विपरीत च - समूह के तृतीय आवतर् के तत्त्व ;जिनका इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 3े23चद होता हैद्ध में रिक्त 3क कक्षक उपस्िथत होते हैं, जो 3च तथा 4े ऊजार् - स्तर के मध्य होते हैं। इन कदृकक्षकों का उपयोग करते हुए तृतीय आवतर् के तत्त्व अपनी संयोजकता को चार से अध्िक बढ़ा सकते हैं। जैसेμजहाँ बोराॅन दृकेवल ख्ठथ् , आयन बनाता है, वहीं ऐलुमीनियम4ख्।स्थ् , 3दृ आयन देता है। इन कदृकक्षकांे की उपस्िथति गुरुतर6तत्त्वों ;भ्मंअपमत म्समउमदजेद्ध के रसायन को कइर् अन्य प्रकार से प्रभावित करती है। आकार एवं कदृकक्षकों की उपलब्ध्ता कासंयुक्त प्रभाव इन तत्त्वों की π बंध् बनाने की क्षमता को प्रभावित करता है। समूह का प्रथम सदस्य अन्य गुरुतर सदस्यों से स्वयं के साथ ;उदाहरणाथर्μब्त्रब्ए ब् ≡ ब्ए छ ≡ छद्ध एवं अन्य दूसरे वगर्के तत्त्वों ;उदाहरणाथर्μब्त्रव्ए ब्त्रछए ब् ≡ छए छत्रव्द्ध के साथ चπ. चπ बहुबंध् बनाने की क्षमता में अंतर रखता है। गुरुतर तत्त्व भी π बंध् बनाते हैं, परंतु इनमें कदृकक्षक ;कπ दृचπ अथवा कπ दृकπद्ध सम्िमलित होते हैं। चूँकि कदृकक्षकों की ऊजार् चदृकक्षकांे की ऊजार् से अध्िक होती है, अतः द्वितीय पंक्ित केतत्त्वों के चπदृचπ बंध्न की तुलना में कदृकक्षकों का स्थायित्व में योगदान कम होता है, हालाँकि समान आॅक्सीकरण अवस्थावाले प्रथम सदस्य की तुलना में गुरुतर तत्त्वों की उपसहसंयोजक संख्या अध्िक हो सकती है। उदाहरणाथर्μ ़5 आॅक्सीकरण अवस्था में च् तथा छ दोनों आॅक्सो )णायन छव्− ;πμबंध् के3 साथ तीन उपसहसंयोजन में सम्िमलित करते हुए नाइट्रोजन के एक चदृकक्षक कोद्ध तथा च्व्3− ;ेए च एवं क कक्षकों को4 πदृ बंध् में सम्िमलित करते हुएद्ध बनाते हैं। इस एकक में हमआवतर् सारणी के समूह 13 तथा 14 के तत्त्वों के रसायन का अध्ययन करेंगे। 11.1 समूह 13 के तत्त्व: बोराॅन परिवार गुणों में इस समूह के तत्त्व बृहत्त भ्िाÂता प्रद£शत करते हैं। बोराॅन ;ठद्ध एक प्रारूपिक अधतु है, ऐलुमीनियम ;।सद्ध धतु है, परंतु इसके अनेक रासायनिक गुणध्मर् बोराॅन के समान हैं, जबकि गैलियम ;ळंद्ध, इंडियम ;प्दद्ध तथा थैलियम ;ज्सद्ध गुणध्मो± में लगभग पूणर्तः धतु हैं। उपस्िथतिदृ बोराॅन एक दुलर्भ तत्त्व है। यह मुख्यतः आथोर्बोरिक अम्ल ;भ्ठव्द्धए बोरेक्स ;छंठव्ऽ10भ्व्द्ध332472तथा करनाइट ;छंठव्ऽ4भ्व्द्ध के रूप में प्राप्त होता है।2472हमारे देश में बोरेक्स पूगा घाटी ;लद्दाखद्ध तथा सांभर झील ;राजस्थानद्ध में मिलता है। भू - पपर्टी ;म्ंतजी ब्तनेजद्ध में बोराॅन की बाहुल्यता 0ण्0001ः ;भारात्मकद्ध से भी कम है। बोराॅन के दो समस्थानिक रूप 10ठ ;19ःद्ध तथा 11ठ ;81ःद्ध मिलते हैं। ऐलुमीनियम की भू - पपर्टी में बाहुल्यता ;8ण्3ःद्ध सवार्ध्िक है। भारात्मक रूप से यह भू - पपर्टी पर आॅक्सीजन ;45ण्5ःद्ध तथा सिलिकन ;27ण्7ःद्ध के पश्चात् सवार्ध्िक पाया जाने वाला तत्व है। ऐलुमीनियम के प्रमुख बाॅक्साइट ;।सव्ण् 2भ्व्द्ध तथा क्रायोलाइट ;छं।सथ्द्ध अयस्क हैं।23236हमारे देश में यह मुख्यतः मध्य प्रदेश, कनार्टक, उड़ीसा तथा जम्मू में अभ्रक ;डपबंद्ध के रूप में मिलता है। गैलियम,इंडियम तथा थैलियम प्रकृति में यह बहुत कम मात्रा में मिलते हैं। सारणी 11.2 समूह 13 के तत्त्वों के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण गुण बोराॅन ठ ऐलुमीनियम ।स गैलीयम ळं इंडियम प्द थैलियम ज्स परमाणु क्रमांक 5 13 31 49 81 परमाणु द्रव्यमानध्ह उवसदृ1 10ण्81 26ण्98 69ण्72 114ण्82 204ण्38 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ख्भ्म,2े22च1 ख्छम,3े23च1 ख्।त,3क104े24च1 ख्ज्ञत,4क105े25च1 ख्ग्म,41ि45क106े26च1 परमाणु त्रिाज्याध्चउं ;85द्ध 143 135 167 170 आयनी त्रिाज्या ड3़ध्चउइ ;27द्ध 53ण्5 62ण्0 80ण्0 88ण्5 आयनी त्रिाज्या ड़ध्चउ . . 120 140 150 आयननएन्थैल्पी ;ाश्र उवसदृ1द्ध Δपभ्1 Δपभ्2 Δपभ्3 801 2427 3659 577 1816 2744 579 1979 2962 558 1820 2704 589 1971 2877 विद्युत् )णात्मकताब 2ण्0 1ण्5 1ण्6 1ण्7 1ण्8 घनत्व ध्ह बउदृ3 298 ज्ञ पर 2ण्35 2ण्70 5ण्90 7ण्31 11ण्85 गलनांक ध् ज्ञ 2453 933 303 430 576 क्वथनांकध् ज्ञ 3923 2740 2676 2353 1730 म्टध्ट, ड3़ध्ड के लिए . दृ1ण्66 दृ0ण्56 दृ0ण्34 ़1ण्26 म्टध्ट, ड़ध्ड के लिए . ़0ण्55 .0ण्79 ;अम्लद्ध दृ1ण्39 क्षारकद्ध दृ0ण्18 दृ0ण्34 ंधत्िवक त्रिाज्या इ 6.उपसहसंयोजनए ब पाॅलिं ग स्केल समूह 13 के तत्त्वों के परमाण्वीय, भौतिक तथा रासायनिक गुण निम्नलिख्िात हैंμ 11.1.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास समूहμ13 के तत्त्वों का बाह्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे2दच1 होता है। अतः इस समूह के तत्त्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यासप्रथम दो समूहों के तत्त्वों की तुलना में ;जैसे एकक - 10 में विवेचित किया गया हैद्ध अध्िक जटिल होते हैं। इलेक्ट्राॅनिकविन्यास में यही अंतर इस समूह के तत्त्वों के अन्य गुणों तथाइन तत्त्वों के रसायन को प्रभावित करता है। 11.1.2 परमाणु त्रिाज्या समूह में नीचे जाने पर प्रत्येक क्रमागत सदस्य में इलेक्ट्राॅनों का एक कोश जुड़ता है। अतः परमाणु त्रिाज्या की वृि संभावित होने के बावजूद विचलन देखा जा सकता है। ळं की परमाणु त्रिाज्या ।स की परमाणु त्रिाज्या से कम है। आंतरिक क्रोड के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास से यह देखा जा सकता है कि गैलियम में उपस्िथत अतिरिक्त 10 क इलेक्ट्राॅन बढ़े हुए नाभ्िाकीय आवेश की तुलना में बाह्य इलेक्ट्राॅनों पर दुबर्ल परिरक्षण प्रभाव डालते हैं ;एकक - 3 देखेंद्ध। परिणामतः गैलियम की परमाणु त्रिाज्या ;135 चउद्ध ऐलुमीनियम ;143चउद्ध की तुलना में कम होती है। 11.1.3 आयनन एन्थैल्पी आयनन एन्थैल्पी, जैसा सामान्य प्रवृिा से आशा की जाती है,समूह में ऊपर से नीचे सामान्य रूप से नहीं घटती है। ठ से ।स में कमी, आकार - वृि के साथ जुड़ी हुइर् है। ।स एवं ळं के मध्य तथा प्द व ज्स के मध्य आयनन एन्थैल्पी की प्रेक्ष्िात अनिरंतरता क एवं िइलेक्ट्राॅनों के कारण है, जिनका परिरक्षण प्रभाव बढ़े हुए नाभ्िाकीय प्रभाव की क्षतिपू£त करने के लिए कम होता है। आयनन एन्थैल्पी का क्रम Δप भ्1 ढΔ पभ्2 ढΔ पभ्3 है, जैसाकि अपेक्ष्िात है। प्रत्येक तत्त्व की प्रथम तीन एन्थैल्िपयों का योग उच्च होता है। यह इनके रासायनिक गुणों के अध्ययन में परिलक्ष्िात होगा। 11.1.4 विद्युत् )णात्मकता समूह - 13 के तत्त्वों की विद्युत् )णात्मकता वगर् में ऊपर से नीचे जाने पर ठ से ।स तक घटती है। तत्पश्चात् आंश्िाक वृि होती है। ऐसा परमाण्वीय आकार में अनियमित वृि के कारण होता है। 11.1.5 भौतिक गुणध्मर् बोराॅन प्रकृति में अधत्िवक तत्त्व है। यह काले रंग का अत्यध्िक कठोर पदाथर् है। इसके अनेक अपररूप मिलते हैं। िस्टलीय जालक संरचना के कारण बोराॅन का गलनांक असाधरण रूप सेउच्च होता हैै। इस समूह के अन्य तत्त्व निम्न गलनांक एवं उच्च वैद्युतचालकता वाले मुलायम ठोस होते है। यह ध्यान देने योग्य बात है कि गैलियम का गलनांक बहुत कम ;303 ज्ञद्ध होता है। अतः ग£मयों के दिनों में यह द्रव अवस्था में मिलता है। इसका उच्च क्वथनांक ;2676 ज्ञद्ध उच्च तापों के मापन के लिए इसेउपयोगी पदाथर् बनाता है। समूहμ13 के तत्त्वों का घनत्व वगर् में नीचे जाने पर बोराॅन से थैलियम तक बढ़ता जाता है। 11.1.6 रासायनिक गुणध्मर् आॅक्सीकरण अवस्था एवं रासायनिक अभ्िाियाशीलताकी प्रवृिा छोटे आकार के कारण बोराॅन की प्रथम तीन आयनन एन्थैल्िपयों का योग बहुत उच्च होता है। यह इसे न सिपर्फ ़3 आॅक्सीकरण अवस्था में आने से रोकता है, बल्िक केवल सहसंयोजक यौगिक बनाने के लिए बाध्य भी करता है। परंतु जब हम ठ से ।स तक जाते हैं, तब ।स की प्रथम तीन आयनन एन्थैल्िपयों का योग उल्लेखनीय रूप से घट जाता है। इस प्रकार यह ।स3़ आयन बनने की सामथ्यर् रखता है। यथाथर् में ।स एक उच्च ध्नविद्युती तत्त्व है। पिफर भी वगर् में नीचे क एवं िकक्षकों के दुबर्ल परिरक्षण प्रभाव के कारण, बढ़ा हुआ नाभ्िाकीय आवेश दे इलेक्ट्राॅनों को मजबूती से बाँध्े रखता है ;जो अिय युग्म प्रभाव के लिएउत्तरदायी हैद्ध। इस प्रकार बंध्न में इनकी सहभागिता को नियंत्रिात करता है। परिणामस्वरूप बंध्न में केवल चदृ कक्षक भाग लेते है। यथाथर् में ळंए प्द एवं ज्स में ़1 तथा ़3 दोनों आॅक्सीकरण अवस्थाएँ प्रेक्ष्िात होती हैं। गुरुतर तत्त्वों के लिए ़1 आॅक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व उत्तरोत्तर बढ़ता जाता हैः ।स ढ ळं ढ प्द ढ ज्स थैलियम में ़1 आॅक्सीकरण अवस्था स्थायी है, जबकि ़3 आॅक्सीकरण अवस्था प्रकृति में उच्च आॅक्सीकारकहै। ऊजार् संबंध्ी कारणों से अपेक्ष्िात ़1 आॅक्सीकरण अवस्था वाले यौगिक ़3 आॅक्सीकरण अवस्था की तुलना में अध्िक आयनिक होते हैं। इन तत्त्वों के त्रिासंयोजी अवस्था में अणुओं में वेंफद्रीय परमाणु के चारों ओर इलेक्ट्राॅनों की संख्या 6 होती है ;उदाहरणाथर्μठथ्में बोराॅनद्ध। ऐसे इलेक्ट्राॅन न्यून अणु स्थायी3 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास प्राप्त करने के लिए एक इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण करके लूइस अम्ल के समान व्यवहार करते हैं। समूह में ऊपर से नीचे जाने पर आकार में वृि के कारणलूइस अम्ल के समान व्यवहार करने की प्रवृिा कम होती जाती है। बोराॅन ट्राइक्लोराइड सरलतापूवर्क अमोनिया से एक एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण कर ठब्स ण्छभ् उपसहसंयोजक33 यौगिक बनाता है। इसी प्रकार ।सब्स चतुष्पफलकीय द्विलक बनाकर स्थायी हो3जाता है। चूँकि त्रिासंयोजी अवस्था में अध्िकांश यौगिक सहसंयोजक होते हैं, अतः वे जल - अपघटित हो जाते हैं। उदाहरणाथर्μ धत्िवक ट्राइक्लोराइड जल अपघटन पर चतुष्पफलकीय स्पीशीज़्ा ख्ड;व्भ्द्ध,कृ बनाते हैं, जहाँ ड की संकरण अवस्था ेच3 होती4है। ऐलुमीनियम क्लोराइड अम्लीय जल - अपघटन करने पर अष्टपफलकीय आयन ख्।स ;भ्व्द्ध,3़ आयन बनाता है। इस26संवुफल आयन में ।स के 3क कक्षक भाग लेते हैं। इसमें ।स की संकरण अवस्था ेच3क2 है। उदाहरण 11.1 ।स3़ध्।स एवं ज्स3़ध्ज्स के लिए मानक इलेक्ट्रोड विभव म्ट क्रमशः दृ1ण्66 ट एवं ़ 1ण्26 ट हैं। विलयन में ड3़ आयन बनने का अनुमान लगाइए एवं दोनों धातुओं के ध्नविद्युती गुण की तुलना कीजिए। हल दोनों अध्र्सेलों के मानक इलेक्ट्राॅड विभव बताते हैं कि ऐलुमीनियम में ।स3़ ;ंुद्ध आयन बनाने की प्रवृिा अिाक रहती है, जबकि ज्स3़ विलयम में न सिपर्फ अस्थायी है, बल्िक प्रबल आॅक्सीकारक भी है। अतः विलयन में ज्स3़ की तुलना में ।स3़ अध्िक स्थायी है। ़3 आयन बनाने के कारण ऐलुमीनियम थैलियम की तुलना में अध्िक ध्नविद्युती है। ;पद्ध वायु के प्रति अभ्िाियाशीलता िस्टलीय स्वरूप में बोराॅन अियाशील है। वायु के संपवर्फ में आने पर ऐलुमीनियम की सतह पर आॅक्साइड की पतली परत बन जाती है, जो और अध्िक क्षय होने से धतु को रोकती है। अिस्टलीय बोराॅन तथा ऐलुमीनियम वायु के संपवर्फ में गरम किए जाने पर क्रमशः ठव् तथा ।सव् बनाते हैं। उच्च ताप2323पर ये डाइनाइट्रोजन के साथ िया कराने पर नाइट्राइड बनाते हैं। ; द्ध़ 3व् ;हद्ध ⎯⎯→ 2म् व् 2म् े Δ;ेद्ध2 23 Δ2म् े ; द्ध़ छ2 ;हद्ध ⎯⎯→ 2म्छ े ;द्ध ;म् त्र तत्त्वद्ध समूह में नीचे जाने पर इनके आॅक्साइड की प्रकृतिपरिवतिर्त होती जाती है। बोराॅन ट्राइआॅक्साइड अम्लीय प्रकृति का होता है तथा क्षारकीय ;धत्िवकद्ध आॅक्साइड से िया करके धत्िवक बोरेट बनाता है। ऐलुमीनियम तथा गैलियम केआॅक्साइड उभयध्मीर् प्रकृति के होते हैं, जबकि इंडियम तथाथैलियम के आॅक्साइड गुणध्मो± में क्षारकीय प्रकृति के होते हैं। ;पपद्ध अम्ल एवं क्षार के प्रति अभ्िाियाशीलता बोराॅन अम्ल एवं क्षार के साथ कोइर् िया नहीं करता है, परंतु ऐलुमीनियम खनिज अम्लों तथा जलीय क्षारों में घुल जाता है। पफलतः ऐलुमीनियम उभयध्मीर् गुण प्रद£शत करता है। ऐलुमीनियम तनु भ्ब्स में घुलकर डाइहाड्रोजन निष्कासित करता है। 2।स;ेद्ध ़ 6भ्ब्स ;ंुद्ध → 2।स3़ ;ंुद्ध ़ 6ब्सदृ ;ंुद्ध ़ 3भ्2 ;हद्ध सांद्र नाइटिªक अम्ल ।स की सतह पर आॅक्साइड की सतह बनाकर उसे निष्िक्रय कर देता है। ऐलुमीनियम जलीय क्षारों से िया करके डाइहाइड्रोजन विस£जत करता है। 2।स ;ेद्ध ़ 2छंव्भ्;ंुद्ध ़ 6भ्2व्;सद्ध ↓ 2 छं़ ख्।स;व्भ्द्ध4,दृ ;ंुद्ध ़ 3भ्2;हद्ध सोडियम ट्रेट्राहाइड्राॅक्सो ऐलुमिनेट ;प्प्प्द्ध आयन ;पपपद्ध हैलोजेनों के प्रति अभ्िाियाशीलता ज्स प्को छोड़कर समूह - 13 के तत्त्व हैलोजेन से िया करके3 ट्राइहैलाइड बनाते हैं। 2म्;ेद्ध ़ 3 ग्2 ;हद्ध → 2म्ग्3 ;ेद्ध ;ग् त्र थ्ए ब्सए ठतए प्द्ध उदाहरण 11.2 निजर्लीय ऐलुमीनियम क्लोराइड की बोतल के चारों ओर श्वेत ध्ूम बन जाते हैं। इसका कारण बताइए। हल निजर्लीय ऐलुमीनियम क्लोराइड वायुमंडलीय नमी के साथ आंश्िाक रूप से जल अपघटित होकर भ्ब्स गैस विस£जत करता है। यह नमीयुक्त भ्ब्स श्वेत ध्ूम के रूप में दिखाइर् देती है। 11.2 बोराॅन की प्रवृिा तथा असंगत व्यवहार समूह - 13 के तत्त्वों के रासायनिक व्यवहार का अध्ययन करनेपर वुफछ महत्त्वपूणर् तथ्य सामने आते हैं। इस समूह के सभीतत्त्वों के ट्राइक्लोराइड, ब्रोमाइड एवं आयोडाइड सहसंयोजकप्रकृति के होने के कारण जल - अपघटित हो जाते हैं। बोराॅनके अतिरिक्त अन्य सभी तत्त्वों की चतुष्पफलकीय स्पीशीश ख्ड;व्भ्द्ध,दृ तथा अष्टपफलकीय ख्ड;भ्व्द्ध,3़ स्पीशीश जलीय426विलयन में उपस्िथत रहते हैं।तत्त्वों के एकलक ;डवदवउमतपद्ध ट्राइहैलाइड, इलेक्ट्राॅन न्यून होने के कारण प्रबल लूइस अम्ल के समान व्यवहार करते हैं। लूइस क्षार ;जैसेμछभ् आदिद्ध एक इलेक्ट्राॅन युग्म प्रदान3कर ऐसे यौगिकों के वेंफद्रीय परमाणु का अष्टक पूणर् करते हैं। 3 ़ 3 थ्ठ ← भ्3थ्ठ रूछभ् ⎯⎯→ 3छबोराॅन में क.कक्षक अनुपस्िथत रहते हैं। पफलतः इसकी अध्िकतम संयोजकता 4 हो सकती है। चूँकि ।स तथा अन्य तत्त्वों में क कक्षक उपस्िथत होते हैं, अतः इनकी अध्िकतम संयोजकता 4 से अध्िक हो सकती है। अध्िकांश अन्य धतु हैलाइड ;उदाहरणाथर्μ।सब्सद्ध सेतुबंध् हैलोजेन परमाणु द्वारा3द्विपफलकीय हो जाते हैं ;।सब्सद्ध। इन धतु यौगिकों में सेतुबंध्26हैलोजेन अणुओं से इलेक्ट्राॅन ग्रहण कर अपना अष्टक पूणर् करते हैं। उदाहरण 11.3 3बोराॅन ठथ्− आयन नहीं बना सकता है। इसकी व्याख्या6कीजिए। हल बोराॅन में क.कक्षक की अनुपस्िथति के कारण यह अपने अष्टक का प्रसार करने में असमथर् होता है। अतः इसकी अध्िकतम संयोजकता 4 से अध्िक नहीं हो सकती है। 11.3 बोराॅन के वुफछ महत्त्वपूणर् यौगिक बोराॅन के वुफछ उपयोगी यौगिक बोरेक्स, आॅथार्ेबोरिक अम्ल तथा डाइबोरेन हैं। इनके रसायन का अध्ययन हम संक्षेप में करेंगे। 11.3.1 बोरेक्स यह बोराॅन का महत्त्वपूणर् यौगिक है। यह श्वेत िस्टलीय ठोस है, जिसका सूत्रा छंठव्ण्10भ्व् होता है। तथ्यात्मक रूप2472से इसमें चतुष्वेंफद्रीय इकाइयाँ ⎡ठव् व्; भ्द्ध⎤2− होती हैं।⎣ 45 4⎦ अतः इसका उपयुक्त सूत्रा छं2ख्ठ4व्5 ;व्भ्द्ध4,ण्8भ्2व् होता है। बोरेक्स जल में घुलकर क्षारीय विलयन बनाता है। छंठव् ़ 7भ्व् → 2छंव्भ् ़ 4भ्ठव्247233 आथार्ेबोरिक अम्ल गरम किए जाने पर बोरेक्स पहले जल के अणु का निष्कासन करता है तथा पफूल जाता है। पुनः गरम किए जाने पर यह एक पारदशीर् द्रव में परिव£तत हो जाता है, जो काँच के समान एक ठोस में परिवतिर्त हो जाता है। उसे बोरेक्स मनका ;ठवतंग ठमंकद्ध कहते हैंμ ΔΔछंठव्ण्10भ्व् ⎯⎯→ छंठव्⎯⎯→ 2छंठव्2472247 2 सोडियम मेटाबोरेट ़ ठव्23बोरिक ऐनहाइडाªइडविभ्िाÂ संक्रमण तत्त्वों के मेटाबोरेट का विश्िाष्ट रंग होताहै, जिसके आधर पर इन तत्त्वों की पहचान में बोरेक्स मनका परीक्षण ;ठवतंग ठमंक ज्मेजद्ध का उपयोग प्रयोगशालाओं में होता है। उदाहरणाथर्μजब बोरेक्स को कोबाल्ट आॅक्साइड ;ब्वव्द्ध के साथ बुन्सन बनर्र पर गरम किया जाता है, तब नीले रंग का मनका ख्ब्व;ठव्द्ध, बनता है।2211.3.2 आथार्ेबोरिक अम्ल आथार्ेबोरिक अम्ल भ्ठव् एक श्वेत िस्टलीय ठोस होता है,33जिसका साबुनी स्पशर् होता है। यह जल में अल्पविलेय, परंतु गरम जल में पूणर् विलेय होता है। इसे बोरेक्स केजलीय विलयन को अम्लीकृत करके बनाया जा सकता है। छं2ठ4व्7 ़ 2भ्ब्स ़ 5भ्2व् → 2छंब्स ़ 4ठ;व्भ्द्ध3 इसे बोराॅन के अध्िकांश यौगिकों ;जैसेμहैलाइड, हाइड्राइड आदिद्ध के जल - अपघटन द्वारा ;जल तथा दुबर्ल अम्ल से िया करकेद्ध बनाया जा सकता है। इसकी परतीय संरचना होती है, जहाँ ठव् की इकाइयाँ हाइड्रोजन बंध् द्वारा जुड़ी रहती3हैं ;चित्रा 11.1द्ध। चित्रा 11.1 बोरिक अम्ल की संरचना में बिंदुकृत रेखाएँ हाइड्रोजन आबंध् को प्रद£शत करती हैं बोरिक अम्ल एक दुबर्ल क्षारीय अम्ल है। यह प्रोटोनी अम्ल नहीं है, परंतु हाइड्राॅक्िसल आयनों से एक इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण करने के कारण लूइस अम्ल की भाँति व्यवहार करता है। ,दृठ;व्भ्द्ध3 ़ 2भ्व्भ् → ख्ठ;व्भ्द्ध4़ भ्3व़् 370 ज्ञ से अध्िक ताप पर गरम किए जाने पर आथार्ेबोरिक अम्ल मेटाबोरिक अम्ल ;भ्ठव्द्ध बनाता है, जो2और अध्िक गरम करने पर बोरिक आॅक्साइड ;ठव्द्ध में23परिव£तत हो जाता है। भ्ठव्⎯→ भ्ठव्व्33 Δ2 ⎯Δ→ ठ23 उदाहरण 11.4 बोरिक अम्ल को एक दुबर्ल अम्ल क्यों माना गया है? हल बोरिक अम्ल को एक दुबर्ल अम्ल इसलिए माना गया है, क्योंकि यह अपने प्रोटाॅन का निष्कासन नहीं करता है। दृयह जल के अणु से हाइड्राॅक्िसल आयन ;व्भ् द्ध ग्रहण करके अपना अष्टक पूणर् करता है तथा भ़् निष्कासित करता है। 11.3.3 डाइबोरेन, ठभ्26 बोराॅन का ज्ञात सरलतम हाइड्राइड डाइबोरेन है। इसे डाइएथ्िालइर्थर की उपस्िथति में बोराॅन ट्राइफ्रलुओराइड की स्प।सभ् से4िया करके बनाया जाता है। 4ठथ् ़ 3 स्प।सभ्→ 2ठभ् ़ 3स्पथ् ़ 3।सथ्34263 प्रयोगशाला में डाइबोरेन बनाने हेतु सोडियम बोरोहाइड्राइड का आॅक्सीकरण आयोडीन के साथ किया जाता है। 2छंठभ् ़ प्→ ठभ् ़ 2छंप् ़ भ्42262 औद्योगिक रूप से डाइबोरेन बोराॅन ट्राइफ्रलुओराइड तथा सोडियम हाइड्राइड की िया द्वारा बनाया जाता है। 450ज्ञ 2ठथ् ़ 6छंभ्⎯⎯⎯⎯→ ठभ् ़ 6छंथ् 3 26 डाइबोरेन अत्यंत जहरीली रंगहीन गैस है, जिसका क्वथनांक 180 ज्ञ है। यह वायु के संपवर्फ में आने पर स्वयं जल उठतीहै। यह आॅक्सीजन की उपस्िथति में अत्यध्िक ऊजार् का उत्सजर्न करते हुए जलता है। ठ भ् ़3व् → ठव् ़ 3भ्व्य 26223 2 Θ−1Δब्भ् त्र− 1976 ाश्र उवस अध्िकांश उच्च बोरेन भी वायु के संपवर्फ में आने पर स्वयं जलने लगते हैं। बोरेन जल के साथ तेजी से जल - अपघटित होकर बोरिक अम्ल देते हैं। ठभ् ;हद्ध ़ 6भ्व्;सद्ध → 2ठ;व्भ्द्ध;ंुद्ध ़ 6भ्;हद्ध26232डाइबोरेन लूइस क्षारों ;स्द्ध के साथ विदलन अभ्िािया पर एक बोरेन योगोत्पाद ;ठभ्ण्स्द्ध देता है।3ठभ् ़ 2 छडम→ 2ठभ् ण्छडम26333 ठ2भ्6 ़ 2 ब्व् → 2ठभ्3 ण् ब्व् डाइबोरेन पर अमोनिया की अभ्िािया से प्रारंभ में ़ ,दृठभ्ण्2छभ् बनता है, जिसे सूत्रा ख्ठभ्;छभ्द्ध 2 , ख्ठभ् द्वारा263234प्रद£शत किया जाता है। यह और अध्िक गरम करने पर ठछभ्336 देता है। इसे एकांतर ठभ् एवं छभ् समूहों के साथ वलय - संरचना के परिप्रेक्ष्य में अकाबर्निक बेंजीन ;प्दवतहंदपब ठमद्रमदमद्ध के रूप में जाना जाता है। ़3ठ भ् ़6छभ् → 3ख्ठभ् ;छभ् द्ध , 263 232 ख्ठभ् , भ्मंज →2ठछभ् ़12भ् − ⎯⎯⎯⎯4 336 2 डाइबोरेन की संरचना को चित्रा 11.2 ;वफद्ध द्वारा दशार्या गया है। इसमें सिरेवाले चार हाइड्रोजन परमाणु तथादो बोराॅन परमाणु एक ही तल में होते हैं। इस तल के ऊपर तथा नीचे दो सेतुबंध् ;ठतपकहपदहद्ध हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। सिरेवाले चार ठ दृ भ् बंध् सामान्य द्विवेंफद्रीय - द्विइलेक्ट्राॅन ;ज्ूव ब्मदजतम.जूव म्समबजतवदद्ध बंध् बनाते हैं, जबकि दो सेतुबंध् ;ठ दृ भ् दृ ठद्ध बंध् भ्िाÂ प्रकार के होते हैं, जिन्हें ‘त्रिावंेफद्रीय द्विइलेक्ट्राॅन बंध्’ कहते हैं। चित्रा 11.2 ;खद्ध। चित्रा 11.2 ;कद्ध डाइबोरेन की ;ठ2भ्6द्ध संरचना ;खद्ध चित्रा 11.2 ;खद्ध डाइबोरेन में बंध्न। डाइबोरेन में प्रत्येक बोराॅन परमाणु ेच 3 संकरित होता है। इन चार ेच3 संकरित कक्षकों में सेएक इलेक्ट्राॅनरहित होता है, जिसे बिंदुकृत रेखाओं ;क्वजजमक स्पदमेद्ध द्वारा दशार्या गया है। सिरेवाले ठ दृ भ् सामान्य द्विवेंफद्रीय - द्विइलेक्ट्राॅन ;2ब दृ 2मद्ध बंध्े हैं, जबकि दो सेतुबंध् ;ठ दृ भ् दृ ठद्ध त्रिावेंफद्रीय - द्विइलेक्ट्राॅन ;3ब दृ 2मद्ध है। इसे ‘केलाबंध्’ ;ठंदंदं ठवदकद्ध भी कहते हैं। बोराॅन, हाइड्राइडोबोरेट की एक शंृखला का निमार्ण करता है, जिसमें चतुष्पफलकीय ख्ठभ्,दृ आयन प्रमुख है। विभ्िाÂ4धातुओं के टेट्राहाइड्राइडोबोरेट ज्ञात हैं। लीथ्िायम तथा सोडियम के टेट्राहाइड्राइडोबोरेट को बोरोहाइड्राइड भी कहते हैं। इन्हें धातु हाइड्राइड की डाइऐथ्िालइर्थर की उपस्िथति में डाइबोरेन से अभ्िािया करके बनाया जा सकता है। 2डभ् ़ ठ2भ्6 → 2 ड़ ख्ठभ्4,दृ ;ड त्र स्प अथवा छंद्ध काबर्निक संश्लेषणों में दोनों स्पठभ् तथा छंठभ् का44उपयोग अपचायक के रूप में होता है। अन्य धत्िवक बोराहाइड्राइड बनाने में इन्हें प्रारंभ्िाक पदाथर् ;ैजंतजपदह डंजमतपंसद्ध के रूप में उपयोग में लाया जाता है। 11.4 बोराॅन, ऐलुमीनियम तथा इनके यौगिकों के उपयोग उच्च गलनांक, निम्न घनत्व, निम्न वैद्युतचालकता तथा अत्यिाक कठोर ;त्मतिंबजवतलद्ध होने के कारण बोराॅन के अनेक अनुप्रयोग हैं। बोराॅन तंतुओं ;थ्पइमतेद्ध का उपयोग बुलेटप्रूपफ जैकेट बनाने में तथा वायुयानों के हलके सघन पदाथो± के निमार्ण में होता है। बोराॅन - 10 ;10ठद्ध समस्थानिक में न्यूट्राॅन - अवशोषण की अत्यध्ि क क्षमता होती है। अतः नाभ्िाकीय उद्योगों में धत्िवक बोराइडों का उपयोग परिरक्षण कवच ;च्तवजमबजपअम ैीपमसकद्ध तथा नियंत्राक छड़ों ;ब्वदजतवस त्वकेद्ध के रूप में होता है। बोरेक्स तथा बोरिक अम्ल का मुख्य औद्योगिक उपयोग उच्च ताप सह काँच ;भ्मंज त्मेपेजंदज ळसंेेमेद्धए जैसेμपाइरेक्स ;च्लतमगद्ध, ग्लासवुल तथा पफाइबर ग्लास बनाने में होता है। बोरेक्स का उपयोग धतुओं के टाँका लगाने ;ैवसकमतपदहद्ध के लिए गालक ;थ्सनगद्ध के रूप मेंऋ ऊष्मा, ध्ब्बा ;ैजतंपदद्ध तथा खरोंचप्रतिरोध्ी मिट्टी के बरतन बनाने में एवं औषध्कृत साबुन में घटक के रूप में होता है। बोरिक अम्ल के जलीय विलयन का उपयोग सामान्यतः मंद पू£तरोध्ी के रूप होता है। ऐलुमीनियम रजत श्वेत ;ैपसअमतल ॅीपजमद्ध रंग की एक चमकीली धतु है, जिसमें उच्च तनन सामथ्यर् ;ज्मदेपसम ैजतमदहजीद्ध होती है। इसकी वैद्युत एवं ऊष्मीय चालकता उच्च होती है। भार से भार आधर ;ॅमपहीज जव ॅमपहीज ठंेपेद्ध पर ऐलुमीनियम की चालकता काॅपर से दुगुनी होती है। दैनिक जीवन तथा उद्योगों में ऐलुमीनियम का अत्यध्िक उपयोग होता है। यह ब्नए डदए डहए ैप तथा र्द के साथ मिश्रधतु का निमार्ण करता है। ऐलुमीनियम तथा इसवफी मिश्रधतुओं को विश्िाष्ट आकृति ;जैसेμपाइप, ट्यूब, छड़, पÂी, तार, प्लेट आदिद्ध दी जा सकती है। इससे इसका उपयोग बरतन बनाने के कायर्, निमार्ण, पैकिं ग, हवाइर् जहाज तथा यातायात उद्योगों में होता है। चूँकि ऐलुमीनियम की प्रकृति विषैली ;ज्वगपब छंजनतमद्ध होती है। अतः घरेलू कायो± में ऐलुमीनियम तथा इसके यौगिकों का उपयोग कम होने लगा है। 11.5 समूह - 14 के तत्त्व: काबर्न परिवार काबर्न ;ब्द्ध, सिलिकन ;ैपद्ध, जमेर्नियम ;ळमद्ध, टिन ;ैदद्ध तथा लेड ;च्इद्ध समूह 14 के तत्त्व हैं। काबर्न भू - पपर्टी में पाया जानेवाला सत्राहवाँ अतिबाहुल्य ;डवेज ।इनदकंदजद्ध तत्त्व है। यह प्रकृति में स्वतंत्रा एवं संयुक्त अवस्था में बहुतायत से पाया जाता है। तत्त्व अवस्था में यह कोयला, ग्रैपफाइट तथा हीरा में मिलता है, जबकि संयुक्त अवस्था में यह धतु काबार्ेनेट, हाइड्रोकाबर्न तथा वायु में काबर्न डाइआॅक्साइड गैस ;0ण्03ःद्ध के रूप में मिलता है। यह कहा जा सकता है कि काबर्न संसारका सबसे चंचल तत्त्व है, जो अन्य तत्त्वों ;जैसेμडाइहाइड्रोजन, डाइआॅक्सीजन, क्लोरीन, सल्पफर आदिद्ध से योग करके जीवितऊतकों से दवाओं एवं प्लास्िटक तक का निमार्ण करता है। काबर्निक रसायन विज्ञान काबर्न के यौगिकों पर ही आधारित है।यह जीवित प्राण्िायों का आवश्यक घटक है। प्राकृतिक रूप से काबर्न के दो स्थायी समस्थानिक 12ब् तथा 13ब् मिलते हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य समस्थानिक 14ब् भी उपस्िथत रहता है। यह एक रेडियोऐक्िटव समस्थानिक है, जिसकी अधार्यु 5770 वषर् है। इसका उपयोग रेडियो काबर्न अंकन ;त्ंकपव ब्ंतइवद क्ंजपदहद्ध में होता है। सिलिकन भू - पपर्टी में बाहुल्यता से पाया जानेवाला ;27ण्7ः भार मेंद्ध द्वितीय तत्त्व है। यहप्रकृति में सिलिका तथा सिलिकेट के रूप में उपस्िथत रहताहै। यह सिलिकन, सिरेमिक, काँच तथा सीमेन्ट का महत्त्वपूणर् घटक है। जमर्ेनियम अति सूक्ष्म मात्रा में उपस्िथत रहता है। मुख्यतः टिन स्टोन ;केसिटेराइटद्ध, ैदव् टिन से तथा गैलेना2;च्इैद्ध अयस्क से लेड प्राप्त किया जाता है। जमर्ेनियम तथा सिलिकन की शु(तम अवस्था का उपयोग ट्रांजिस्टर तथा अधर्चालक युक्ित ;ैमउप ब्वदकनबजवत क्मअपबमद्ध बनाने में होता है। समूह - 14 के तत्त्वों के महत्त्वपूणर् परमाण्वीय एवं भौतिक गुण तथा उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास सारणी 11.3 में दिए गए हैं। कुछ परमाण्वीय, भौतिक एवं रासायनिक गुणों की व्याख्या नीचे की जा रही है। 11.5.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास समूह - 14 के तत्त्वों का संयोजकता कोश इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे2 दच2 होता है। इस समूह के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास में भी आंतरिक क्रोड भ्िान्न होता है। 11.5.2 सहसंयोजक त्रिाज्या काबर्न से सिलिकन की सहसंयोजक त्रिाज्या में उल्लेखनीय वृि तब होती है, जब ैप से च्इ तक सहसंयोजक त्रिाज्या में आंश्िाक वृि होती है। क.तथा .िकक्षकों के पूणर्पूरित होने के कारण ऐसा होता है। सारणी 11.3 समूह 14 के तत्त्वों के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण गुण ब् काबर्न ैप सिलिकन ळम जमेर्नियम ैद टिन च्इ लेड परमाणु क्रमांक 6 14 32 50 82 परमाणु द्रव्यमानध्ह उवसदृ1 12ण्01 28ण्09 72ण्60 118ण्71 207ण्2 इलेक्ट्राॅनिकविन्यास ख्भ्म,2े 22च 2 ख्छम,3े 23च 2 ख्।त,3क104े 24च 2 ख्ज्ञत,4क105े 2 5च 2 ख्ग्म,41ि45क6े 26च 2 सहसंयोजक त्रिाज्याध्चउं 77 118 122 140 146 आयनी त्रिाज्या ड4़ध्चउइ दृ 40 53 69 78 आयनी त्रिाज्या ड2़ध्चउइ दृ दृ 73 118 119 आयनन एन्थैल्पीध् ाश्र उवसदृ1 Δपभ्1 Δपभ्2 Δपभ्3 Δपभ्4 1086 2352 4620 6220 786 1577 3228 4354 761 1537 3300 4409 708 1411 2942 3929 715 1450 3081 4082 विद्युत् )णात्मकताब 2ण्5 1ण्8 1ण्8 1ण्8 1ण्9 घनत्वकध्ह बउदृ3 3ण्51म 2ण्34 5ण्32 7ण्26 ि 11ण्34 गलनांकध्ज्ञ 4373 1693 1218 505 600 क्वथनांकध्ज्ञ दृ 3550 3123 2896 2024 विद्युत् - प्रतिरोध्कता ध्वीउ बउ ;293 ज्ञद्ध 1014दृ1016 50 50 10दृ5 2 10दृ5 ंड प्ट आॅक्सीकरण अवस्था के लिएय इ 6दृउपसहसंयोजकय ब पाॅलिं ग मापक्रमय क 293 ज्ञय म हीरा के लिएय ग्रैपफाइट का घनत्व 2ण्22 हैय ि.रूप ;कमरे के ताप पर स्थायीद्ध। 11.5.3 आयनन एन्थैल्पी समूह - 14 के तत्त्वों की प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मानसमूह - 13 के संगत तत्त्वों की अपेक्षा अध्िक होते हैं। यहाँ पर भी आंतरिक क्रोड इलेक्ट्राॅनों का प्रभाव परिलक्ष्िात होता है। सामान्यतया समूह में नीचे जाने पर आयनन एन्थैल्पी घटती है। ैप से ळमए ळम से ैद तक अल्प न्यूनता एवं ैद से च्इ तक अल्पवृि, मध्यवतीर् क तथा िइलेक्ट्राॅनों के दुबर्ल परिरक्षण प्रभाव एवं परमाणु के बढ़े आकार का परिणाम है। 11.5.4 विद्युत् )णात्मकता छोटे आकार के कारण समूह - 14 के तत्त्वों की विद्युत् )णात्मकताका मान समूह - 13 के संगत तत्त्वों की विद्युत् )णात्मकता के मान से थोड़ा सा अध्िक होता है। ैप से च्इ तक तत्त्वों की विद्युत् )णात्मकता का मान लगभग समान होता है। 11.5.5 भौतिक गुणध्मर् समूह - 14 के सभी तत्त्व ठोस हैं। काबर्न - सिलिकन अधतु और जमर्ेनियम उपधतु है, जबकि टिन तथा लेड कम गलनांकवाली मुलायम धतु है। समूह - 14 के तत्त्वों के गलनांक एवंक्वथनांक समूह - 13 के तत्त्वों के गलनांक एवं क्वथनांक की तुलना में अिाक होते हैं। 11.5.6 रासायनिक गुणध्मर् आॅक्सीकरण अवस्था तथा रासायनिक अभ्िाियाशीलता की प्रवृति समूह - 14 के तत्त्वों के बाह्यतम कोश में चार इलेक्ट्राॅन होते हैं।इन तत्त्वों द्वारा सामान्यतः ़4 तथा ़2 आॅक्सीकरण अवस्थादशार्इर् जाती है। काबर्न ट्टणात्मक आॅक्सीकरण अवस्था भी प्रद£शत करता है। चूँकि प्रथम चार आयनन एन्थैल्पी का योग अति उच्च होता है, अतः ़4 आॅक्सीकरण अवस्था में अिाकतरयौगिक सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं। इस समूह के गुरुतरतत्त्वों में ळम ढ ैद ढ च्इ क्रम में ़2 आॅक्सीकरण अवस्थाप्रद£शत करने की प्रवृिा बढ़ती जाती है। सहसंयोजक कोश में दे2 इलेक्ट्राॅन के बंध्न में भाग नहीं लेने के कारण यह होता है। इन दो आॅक्सीकरण अवस्थाओं का सापेक्ष्िाक स्थायित्व वगर् में परिव£तत होता है। काबर्न तथा सिलिकन मुख्यतः ़4 आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत करते हैं। जमर्ेनियम की ़4 आॅक्सीकरण अवस्था स्थायी होती है, जबकि वुफछ यौगिकों में ़2 आॅक्सीकरण अवस्था भी मिलती है। टिन ऐसी दोनों अवस्थाओं में यौगिक बनाता है ;़2 आॅक्सीकरण अवस्था में टिन अपचायक के रूप में कायर् करता हैद्ध। ़2 आॅक्सीकरण अवस्था में लेड के यौगिक स्थायी होते हैं, जबकि इसकी ़4 अवस्था प्रबल आॅक्सीकरक है। चतुःसंयोजी अवस्था में अणु के वंेफद्रीय परमाणु पर आठ इलेक्ट्राॅन होते हैं ख्उदाहरणाथर्μ ;ब्ब्सद्ध,।4इलेक्ट्राॅन परिपूणर् अणु होने के कारण सामान्यतया इलेक्ट्राॅनग्राही या इलेक्ट्राॅनदाता स्पीशीश की अपेक्षा इनसे नहीं की जाती है। यद्यपि काबर्न अपनी सहसंयोजकता ़4 का अतिक्रमण नहींकर सकता है, परंतु समूह के अन्य तत्त्व ऐसा करते हैं। यह उनतत्त्वों में क.कक्षकों की उपस्िथति के कारण होता है। यहीकारण है कि ऐसे तत्त्वों के हैलाइड जल अपघटन के उपरांत दाता स्पीशीश ;क्वदंत ैचमबपमेद्ध से इलेक्ट्राॅन ग्रहण करके संवुफल बनाते हैं। उदाहरणाथर्μवुफछ स्पीशीश ख्जैसेμ;ैप थ्2दृए6 ळमब्स,द्ध2दृए ;ैद;व्भ्द्धद्ध2दृ, ऐसी होती हैं, जिनके वेंफद्रीय66परमाणु ेच3क2 संकरित होते हैं। ;पद्ध आॅक्सीजन के प्रति अभ्िाियाशीलता इस समूह के सभी सदस्य आॅक्सीजन की उपस्िथति में गरम किए जाने पर आॅक्साइड बनाते हैं। ये मुख्यतः दो प्रकार के होते हैंμमोनोआॅक्साइड तथा डाइआॅक्साइड। इनके सूत्रा क्रमशः डव् तथा डव् हैं। ैपव् का अस्ितत्व केवल उच्च ताप2पर होता है। उच्च आॅक्सीकरण अवस्था वाले आॅक्साइड निम्न आॅक्सीकरण अवस्था वाले आॅक्साइड की तुलना मेंअम्लीय प्रकृति के होते हैं। डाइआॅक्साइड ;जैसेμब्व्ए2ैपव् तथा ळमव्द्ध अम्लीय हैं, जबकि ैदव् तथा च्इव्2222 उभयध्मीर् प्रकृति के होते हैं। मोनोआॅक्साइड में ब्व् उदासीन तथा ळमव् अम्लीय हैं, जबकि ैदव् तथा च्इव् उभयधमीर् हैं। उदाहरण 11.5 समूह - 14 में से उन सदस्य ;या सदस्योंद्ध को चुनिए, जो ;पद्धसबसे अध्िक अम्लीय डाइआॅक्साइड बनाता हैऋ ;पपद्धसामान्यतः ़2 आॅक्सीकरण अवस्था में मिलता हैऋ ;पपपद्ध अ(र्चालक ;या अ(र्चालकोंद्ध के रूप में प्रयोग में आता है। हल ;पद्ध काबर्न ;पपद्ध लेड ;पपपद्ध सिलिकन तथा जमर्ेनियम ;पपद्ध जल के प्रति ियाशीलता काबर्न, सिलिकन तथा जमर्ेनियम जल के द्वारा प्रभावित नहीं होते हैं। टिन, भाप को वियोजित कर डाइआॅक्साइड बनाता है तथा डाइहाइड्रोजन गैस देता हैμ ैद ़ 2भ् व् 2 ैदव्2 ़ 2भ् 2 लेड जल से अप्रभावित रहता है। ऐसा शायद आॅक्साइड की रक्षण पिफल्म ;च्तवजमबजपवद पिसउद्ध बनने के कारण होता है। ;पपपद्ध हैलोजन के प्रति अभ्िाियाशीलता समूह - 14 के तत्त्व डग् तथा डग्;ग् त्र थ्ए ब्सए ठतए प्द्ध प्रकार24 के हैलाइड बनाते हैं। काबर्न के अतिरिक्त अन्य सभी सदस्य उपयुक्त परिस्िथतियों में हैलोजन से िया करके सीधे हैलाइड बनाते हैं। अध्िकांश डग् सहसंयोजक प्रकृति के होते हैं। इन4हैलाइडों में वेंफद्रीय परमाणु ेच3 संकरित अवस्था में तथा अणुचतुष्पफलकीय आकृति में होता है। ैदथ् तथा च्इथ् अपवाद हैं।44ये आयनिक प्रकृति के होते हैं। च्इस का अस्ितत्व नहीं है,4क्योंकि च्इ दृ प् बंध् ;जो प्रारंभ में बनता हैद्ध इतनी ऊजार् उत्पÂ नहीं कर पाता है कि इससे 6े2 इलेक्ट्राॅन का वियुग्मन हो सकेतथा एक इलेक्ट्राॅन के उच्च कक्षक में उत्तेजन से चार अयुग्िमत इलेक्ट्राॅन प्राप्त हो सवंेफ। इस समूह के ळम से च्इ तक के उच्चतर सदस्य डग् प्रकार के हैलाइड बनाने की भी प्रवृिा2रखते हैं। रासायनिक एवं ऊष्मीय स्थायित्व के आधर पर ळमग्2 की तुलना में ळमग् अध्िक स्थायी है, जबकि च्इग् की4 4तुलना में च्इग् अिाक स्थायी होता है। ब्ब्स के अतिरिक्त2 4अन्य सभी टेट्राहेलाइड आसानी से जल अपघटित हो जाते हैं, क्योंकि वेंफद्रीय परमाणु जल के आॅक्सीजन परमाणु से कदृ कक्षक में एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण कर सकते हैं। ैपब्स का उदाहरण लेकर जल - अपघटन प्रिया को4समझा जा सकता है। यदि ैप के क.कक्षक में जल से एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म ग्रहण कर ैपब्स प्रारंभ्िाक तौर पर जल4अपघटित होता है, तो अंततः ैपब्स, इस प्रकार ैप;व्भ्द्ध में4 4जल अपघटित हो जाता हैμ उदाहरण 11.6 ,2दृ ,2दृख्ैपथ्6 ज्ञात है, जबकि ख्ैपब्स6 अज्ञात है। इसके संभावित कारण दीजिए। हल इसके मुख्य कारण निम्नलिख्िात हैंμ ;पद्ध सिलिकन परमाणु का आकार छोटा होने के कारण इसके चारों ओर क्लोरीन के छः बड़े आकार वाले परमाणु व्यवस्िथत नहीं हो पाते हैं। ;पपद्ध क्लोरीन परमाणु के एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म तथा सिलिकन परमाणु के मध्य अन्योन्य िया अध्िक प्रबल नहीं होती है। 11.6 काबर्न की महत्त्वपूणर् प्रवृिायाँएवं असामान्य व्यवहार अन्य समूहों के प्रथम सदस्यों की भाँति इस समूह का प्रथम सदस्य काबर्न अपने समूह के अन्य सदस्यों से भ्िान्न व्यवहार प्रद£शत करता है। इसके छोटे आकार, उच्च विद्युत् )णात्मकता, उच्च आयनन एन्थैल्पी तथा कदृकक्षकों की अनुपलब्धता के कारण ऐसा होता है। काबर्न में केवल ेदृ तथा चदृकक्षक ही बंधन के लिए उपलब्ध् रहते हैं। अतः यह अपने चारों ओर केवल चार इलेक्ट्राॅन युग्म ही समायोजित ;ंबबवउउवकंजमद्ध कर सकता है। यही कारण है कि इसकी अध्िकतम संयोजकता चार होती है, जबकि अन्य सदस्य कदृकक्षकों की उपलब्ध्ता के कारण अपनी संयोजकता में वृि कर लेते हैं। काबर्न में स्वयं से अथवा छोटे आकार एवं उच्च विद्युत् )णात्मकता वाले अन्य परमाणु से चπ दृ चπ बहुबंध् बनाने की अद्वितीय क्षमता ;नदपुनम ंइपसपजलद्ध होती है। ब्ीब्ए ब्त्रव्ए ब्त्रैए ब्ीछ आदि इसके कुछ उदाहरण हैं। इस समूह के उच्चतर सदस्य चπ दृ चπ बंध् नहीं बनाते हैं, क्योंकि बड़े तथा विसरित ;कपनििेमकद्ध परमाण्वीय कक्षक होने के कारण इनमें प्रभावी अतिव्यापन नहीं होता है। काबर्न में अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध् द्वारा जुड़कर लंबी शृंखला या वलय बनाने की प्रवृिा होती है। इस प्रवृति को शृंखलन ;बंजमदंजपवदद्ध कहते हैं। ब्.ब् बंध् अिाकमजबूत होने के कारण यह होता है। वगर् में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ता हुआ आकार तथा घटती हुइर् विद्युत् )णात्मकता के कारण शृंखलन की प्रवृिा घटती जाती है। इसे बंध् एन्थैल्पी मान से स्पष्टतः समझा जा सकता है। समूह - 14 में शृंखलन का क्रम ब्झझैप झळम ैद होता है। लेड शृंखलन नहीं दशार्ता है। बंध् बंध् एन्थैल्पी ध् ाश्र उवसदृ1 ब्कृब् ैपकृैप ळमकृळम ैदकृैद 348 297 260 240 शृंखलन तथा चπदृ चπ बंध् - निमार्ण के कारण काबर्न विभ्िात्रा अपररूप दशार्ता है। 11.7 काबर्न के अपररूप काबर्न के िस्टलीय और अिस्टलीय - दोनों ही अपररूप होते हैं। हीरा तथा ग्रैपफाइट काबर्न के दो प्रमुख िस्टलीय रूप हैं। एच. डब्ल्यू. क्रोटो, इर्. स्मैले तथा आर. एपफ. कलर् ;भ्ण्ॅण् ज्ञतवजवए म्ण् ैउंससमल ंदक त्ण्थ्ण् ब्नतसद्ध ने सन् 1985 में काबर्न के एक अन्य रूप पुफलरीन की खोज की। इस खोज के कारण इन्हें सन् 1996 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। चित्रा 11.3 हीरा की संरचना 11.7.1 हीरा हीरा में िस्टलीय जालक होता है। इसमें प्रत्येक परमाणु ेच3 संकरित होता है तथा चतुष्पफलकीय ज्यामिति से अन्य चार काबर्न परमाणुओं से जुड़ा रहता है। इसमें काबर्न - काबर्न बंध् लंबाइर् 154 चउ होती है। काबर्न परमाणु दिक ;ेचंबमद्ध में दृढ़ त्रिाविमीय जालक ;तपहपक जीतमम कपउमदेपवदंस दमजूवताद्ध का निमार्ण करते हैं। इस संरचना ;चित्रा 11.3द्ध में संपूणर् जालक में दिशात्मक सहसंयोजक बंध् उपस्िथत रहते हैं। इस प्रकार विस्तृत सहसंयोजक बंध्न को तोड़ना कठिन कायर् होता है। अतः हीरा पृथ्वी पर पाया जाने वाला सवार्िाक कठोर पदाथर् है। इसका उपयोग धर तेज करने के लिए अपघषर्क ;ंइतंेपअमद्ध के रूप में, रूपदा ;क्पमेद्ध बनाने में तथा विद्युत् - प्रकाश लैम्प में टंगस्टन तंतु ;पिसंउमदजद्ध बनाने में होता है। उदाहरण 11.7 हीरा में सहसंयोजन होने के उपरांत भी गलनांक उच्च होता है। क्यों? हल हीरा में मजबूत ब्कृब् बंध्युक्त त्रिाविमीय संरचना होती है, जिसे तोड़ना कापफी कठिन होता है। अतः इसका गलनांक उच्च होता है। 11.7.2 ग्रैपफाइट ग्रैपफाइट परतीय की संरचना ;संलमतमक ेजतनबजनतमद्ध होती है। ये परतें वान्डरवाल बल द्वारा जुड़ी रहती हैं। दो परतों के मध्य की दूरी 340 चउ होती है। प्रत्येक परत में काबर्न परमाणु षट्कोणीय वलय ;भ्मगंहवदंस तपदहेद्ध के रूप में व्यवस्िथत होते हैं, जिसमें ब्.ब् बंध् लंबाइर् 141ण्5 चउ होती है। षट्कोणीय वलय में प्रत्येक काबर्न परमाणु ;ेच2द्ध संकरित होता है। प्रत्येक काबर्न परमाणु तीन निकटवतीर् काबर्न परमाणुओं से तीन सिग्मा बंध् बनाता है। इसका चैथा इलेक्ट्राॅन च.बंध् बनाता हैं। संपूणर्परत में इलेक्ट्राॅन विस्थानीकृत होते हैं। इलेक्ट्राॅन गतिशील होते हैं, अतः ग्रैपफाइट विद्युत् का सुचालक होता है। ग्रैपफाइट को परतों के तल में आसानी से तोड़ा जा सकता है। यही कारण है कि ग्रैपफाइट मुलायम ;ेवजिद्ध तथा चिकना ;ेसपचचमतलद्ध होता है। उच्च ताप पर जिन मशीनों में तेल का प्रयोग स्नेहक ;सनइतपबंदजद्ध के रूप में नहीं हो सकता है, उनमें ग्रैपफाइट शुष्क स्नेहक का कायर् करता है। 11.7.3 पुफलरीन्स हीलियम, आॅगर्न आदि अिय गैसों की उपस्िथति में जब ग्रैपफाइट को विद्युत् आवर्फ ;मसमबजतपब ंतबद्ध में गरम किया जाता है, तब पुफलरीन का निमार्ण होता है। वाष्िपत लघु ब्द अणुओं को संघनित करने पर प्राप्त कज्जली पदाथर् ;ेववजल उंजमतपंसद्ध में मुख्य रूप से ब् वुफछ अंश ब्तथा अति सूक्ष्म मात्रा में 3506070 या अध्िक समसंख्या में काबर्न पुफलरीन में पाए गए। पुफलरीन काबर्न का शु(तम रूप है, क्योंकि पुफलरीन में किसी प्रकार का झूलता बंध् ;कंदहसपदह इवदकेद्ध नहीं होता है। पुफलरीन की संरचना पिंजरानुमा होती है। ;ब्द्ध अणु की आकृति साॅकर बाॅल60के समान होती है। इसे बकमिन्स्टर पुफलरीन ;ठनबाउपदेजमत निसमतमदमद्ध कहते हैं ;चित्रा 11.5द्ध। चित्रा 11.5 ;ब्60द्ध बकमिन्स्टर पुफलरीन की संरचनाः अणु की आकृति साॅकर बाॅल ;पुफटबाॅलद्ध की तरह होती है इसमें छः सदस्यीय बीस वलय तथा पाँच सदस्यीय बारह वलय होती हैं। एक छः सदस्यीय वलय छः अथवा पाँच सदस्यीय वलय के साथ संगलित ;थ्नेमकद्ध रहती है, जबकि पाँच सदस्यीय वलय केवल छः सदस्यीय वलय के साथ संगलित अवस्था में रहती है। सभी काबर्न परमाणु समान होते हैं तथा ;ेच2द्ध संकरित होते हैं। प्रत्येक काबर्न परमाणु अन्य तीन काबर्न परमाणुओं के साथ तीन आबंध् बनाता है। चैथा इलेक्ट्राॅनपूरे अणु पर विस्थानीकृत रहता है, जो अणु को ऐरोमैटिक गुण प्रदान करता है। इस गेंदनुमा अणुमें 60 उदग्र ;अमतजपबमेद्ध होते हैं। प्रत्येक उदग्र पर एक काबर्न परमाणु होता है। इस पर दोनों एकल तथा द्विबंध् होते हैं, जिसकी ब्.ब् की लंबाइर् क्रमशः 143ण्5 चउ तथा 138ण्3 चउ होती है। गोलाकार पुफलरीन को ‘बकी बाॅल’ ;ठनबाल इंससद्ध भी कहते हैं।एक महत्त्वपूणर् तथ्य यह है कि ऊष्मागतिक रूप से काबर्न का सवार्ध्िक स्थायी अपररूप ग्रैपफाइट है। अतः ग्रैपफाइट के Δभ्िट को शून्य माना जाता है। हीरा तथा पुफलरीन के Δ िभ्ट के मान क्रमशः 1ण्90 तथा 38ण्1 ाश्र उवसदृ1 होते हैं। काबर्नतत्त्व के अन्य रूप ;जैसेμकाबर्न ब्लैक, कोक, चारकोल आदिद्ध ग्रैपफाइट तथा पुफलरीन के अशु( रूप हैं। वायु की सीमित मात्रा में हाइड्रोकाबर्न को जलाने पर काबर्न ब्लैक प्राप्त होता है। वायु की अनुपस्िथति में लकड़ी अथवा कोयला को गरम करने पर चारकोल तथा कोक प्राप्त होते हैं। 11.7.4 काबर्न के उपयोग प्लास्िटक पदाथर् में अंतःस्थापित ग्रैपफाइट तंतु उच्च सामथ्यर् वाली हलकी वस्तुएँ बनाते हैं। इन वस्तुओं का उपयोग मछली पकड़ने की छड़ ;पिेीपदह तवकेद्धए टेनिस रैकेट, वायुयान तथा डोंगी ;बंदवमेद्ध बनाने में होता है। विद्युत् का अच्छा प्रचालक होने के कारण ग्रैपफाइट का उपयोग बैटरी के इलेक्ट्रोड बनाने में तथा औद्योगिक विद्युत् - अपघटन में होता है। ग्रैपफाइट द्वारा नि£मत क्रूसिबिल तनु अम्लों तथा क्षारों के प्रति अिय होती हैं। अत्यिाक सरंध् सिय चारकोल का उपयोग जहरीली गैसों को अध्िशोष्िात करने में होता है। इसका उपयोग जलμछनित्रा ;ूंजमत.पिसजमतद्ध में काबर्निक अशुियों को दूर करने तथा वातानुवूफलन में गंध् को नियंत्रिात करने में होता है। काबर्न स्याह ;बंतइवद इसंबाद्ध का उपयोग कृष्णरंजक बनाने में तथा स्वचालित वाहनों के टायर में पूरक के रूप में और कोक का उपयोग मुख्यतः धतुकमर् में अपचायक के रूप में तथा ईंध्न के रूप में होता है। हीरा एक मूल्यवान पत्थर है, जिसका उपयोग आभूषणों में होता है। इसे वैफरेट ;एक वैफरेट त्र 200 उहद्ध में मापा जाता है। 11.8 काबर्न तथा सिलिकन के प्रमुख यौगिक काबर्न के आॅक्साइड काबर्न के दो महत्त्वपूणर् आॅक्साइड - काबर्न मोनोआॅक्साइड ;ब्व्द्ध तथा काबर्न डाइआॅक्साइड ;ब्व्द्ध हैं।211.8.1 काबर्न मोनोआॅक्साइड आॅक्सीजन अथवा वायु की सीमित मात्रा में वायु के सीध्े आॅक्सीकरण पर काबर्न मोनोआॅक्साइड प्राप्त होती हैμ 2ब्;ेद्ध ़व् ;हद्ध ⎯Δ→2ब्व्;हद्ध 2 सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल 373 ज्ञ पर पफाॅ£मक अम्ल के द्वारा निजर्लीकरण कराने पर अल्प मात्रा में शु( काबर्न मोनोआॅक्साइड प्राप्त होती हैμ 373ज्ञ भ्ब्व्व्भ् ⎯⎯⎯→ भ् व् 2 ़ब्व्सादं्रभ्ैव् 24 औद्योगिक रूप से इसे कोक पर भाप ;ैजमंउद्ध प्रवाहित करके बनाया जाता है। इस प्रकार ब्व् तथा भ्का प्राप्त मिश्रण2 ‘वाटर गैस’ अथवा ‘संश्लेषण गैस’ ;ेलदजीमेपे हंेद्ध कहलाता है। −473 1273 ;द्ध़ 2ह →ब्व् भ्ह ब्े भ्व् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯ह ़ 2;द्ध ;द्ध;द्ध वाटर गैस जब भाप के स्थान पर वायु का प्रयोग किया जाता है, तब ब्व् तथा छ का मिश्रण प्राप्त होता है। इसे प्रोड्यूसर गैस2कहते हैं। 1273ज्ञ 2ब्;ेद्ध ़ व् ;हद्ध ़ 4छ ;हद्ध ⎯⎯⎯⎯⎯2ब्व्;हद्ध 22 → ़4छ ;हद्ध 2 प्रोड्यूसर गैसवाटर गैस तथा प्रोड्यूसर गैस एक महत्त्वपूणर् औद्योगिक इंर्ध्न हैं। इन दोनों में उपस्िथत काबर्न मोनोआॅक्साइड के अिाकदहन पर काबर्न डाइआॅक्साइड गैस प्राप्त होती है तथा ऊष्मा बाहर निकलती है। काबर्न मोनोआॅक्साइड जल में लगभग अविलेय रंगहीन तथा गंध्हीन गैस है। यह एक प्रबल अपचायक है। यह क्षारीय धतु ‘क्षारीय मृदा धतु’ ऐलुमीनियम तथा वुफछसंक्रमण तत्त्वों के आॅक्साइड के अतिरिक्त अन्य तत्त्वों के आॅक्साइड को अपचयित कर देती है। काबर्न मोनोआॅक्साइड के इस गुण का प्रयोग विभ्िान्न धतुओं के आॅक्साइड अयस्क ;वतमद्ध से धतु - निष्कषर्ण ;मगजतंबजपवदद्ध में होता हैμ 23 े ़ 3ब्व्; द्ध⎯⎯⎯े ़ 3ब्व्; द्ध थ्मव्; द्ध ह Δ→ 2थ्म;द्ध 2 ह र्दव्; द्ध़ ब्व्; द्ध ⎯⎯⎯र्द; द्ध ़ 2 हेह Δ→ े ब्व्; द्ध ब्व् रू ब् ≡ व् रू अणु में काबर्न तथा आॅक्सीजन के मध्य एकσ तथा दो π बंध् है। काबर्न परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म की उपस्िथति के कारण काबर्न मोनोआॅक्साइड दाता ;कवदमतद्ध के समान व्यवहार करती है तथा कइर् धतुओं के साथ गरम किए जाने पर धतु काबोर्निल बनाती है। ब्व् की अत्यंत विषैली प्रकृति हीमोग्लोबीन के साथ एक संवुफल बनाने की इसकी योग्यता के कारण होती है, जो आॅक्सीजन - हीमोग्लोबीन संवुफल से 300 गुना अध्िक स्थायी होती है। यह लाल रक्त कण्िाकाओं में उपस्िथत हीमोग्लोबीन को शरीर में आॅक्सीजन - प्रवाह से रोकती है। अंततः इसका परिणाम मृत्यु के रूप में होता है। 11.8.2 काबर्न डाइआॅक्साइड वायु की अिाकता में यह काबर्न या काबर्नयुक्त ईंधन के पूणर् दहन पर प्राप्त होती है। ब्;ेद्ध ़ व् ;हद्धΔ→⎯⎯⎯ ब्व् ;हद्ध 22 Δब्भ् ;हद्ध ़ 2व् ;हद्ध ⎯⎯⎯ब्व् ;हद्ध ़ 2भ् व्;हद्ध →42 22 प्रयोगशाला में इसे वैफल्िसयम काबोर्नेट पर तनु भ्ब्प् की अभ्िािया द्वारा बनाया जा सकता है। ब्ंब्व् ;ेद्ध ़2भ्ब्स;ंुद्ध →ब्ंब्स ;ंुद्ध ़ब्व् ;हद्ध ़भ् व्;सद्ध 3 222 औद्योगिक रूप में चूना - पत्थर ;सपउम ेजवदमद्ध को गरम करके यह बनाया जाता है। काबर्न डाइआॅक्साइड एक रंगहीन तथा गंध्हीन गैस है। जल में इसकी अल्पविलेयता इसके जैव रासायनिक ;बीमउपबंसद्ध तथा भू - रासायनिक ;हमव.बीमउपबंसद्ध महत्त्व को बताती है। जल के साथ यह काबोर्निक अम्ल बनाती है, जो एक दुबर्ल द्विक्षारकीय अम्ल है। वे निम्नलिख्िात दो पदों से वियोजित होते हैंμ भ्ब्व्;ंुद्ध ़ भ्व्;सद्ध भ्ब्व्दृ;ंुद्ध ़ भ्व़्;ंुद्ध23233भ्ब्व्दृ;ंुद्ध ़ भ्व्;सद्ध ब्व्2दृ;ंुद्ध ़ भ्व़्;ंुद्ध3233भ्ब्व्ध्भ्ब्व्दृ का बपफर विलयन रक्त की चभ् को233 7ण्26 से 7ण्42 के मध्य अनुरक्ष्िात रखता है। अम्लीय प्रकृति होने के कारण क्षारों के साथ िया कर धतु - काबोर्नेट बनाता है। काबर्न डाइआॅक्साइड वायुमंडल में ्0ण्03ः ;आयतन सेद्ध उपस्िथत रहता है, जिसका उपयोग प्रकाश - संश्लेषण ;चीवजवेलदजीमेपेद्ध प्रिया में होता है। इस प्रिया में हरे पौध्े वायुमंडलीय ब्व्को काबोर्हाइड्रेट ;जैसेμग्लूकोसद्ध में2 परिव£तत कर देते हैं। इस प्रिया में रासायनिक परिवतर्न को इस प्रकार प्रद£शत किया जा सकता हैμ ीν6ब्व् ़12भ् व् ⎯⎯⎯⎯⎯ब्भ् व़् 6व् ़ 6भ् व् →2 2 612 62 2क्लारेोि पफल इस प्रिया द्वारा पौध्े जंतुओं, मनुष्यों तथा स्वयं के लिए भोजन बनाते हैं। काबर्न मोनोआॅक्साइड के विपरीत यह विषैलीप्रकृति की नहीं होती है, परंतु जीवाश्म इर्ंधन ;विेेपस निमसेद्ध के बढ़ते दहन तथा सीमेन्ट - निमार्ण के लिए चूना - पत्थर ;सपउम ेजवदमद्ध के विघटन के कारण वायुमंडल में ब्व् की मात्रा2बढ़ती है, जिससे वायुमंडल के ताप में वृि हो रही है। इसे हरित गृह - प्रभाव ;ळतममद भ्वनेम म्मििबजद्ध कहते हैं। इसके अनेक दुष्परिणाम सामने आए हैं। द्रवित ब्व्का प्रसार शीघ्रता से होने के कारण काबर्न2 डाइआॅक्साइड गैस को शुष्क बपर्फ ;कतल पबमद्ध के रूप में प्राप्त किया जा सकता है। शुष्क बपर्फ का उपयोग आइसक्रीम तथा हिमशीतित भोजन ;तिव्रमद विवकद्ध के लिए प्रशीतक के रूप में तथा गैसीय ब्व्2 का उपयोग काबोर्नीकृत मृदु पेय ;ेवजि कतपदोद्ध में, वायु से भारी तथा दहन में सहायक नहीं होने के कारण इसका उपयोग अग्िनशामक ;पितम मगसपदहनपेीमतद्ध के रूप में होता है। ब्व्का उपयोग बृहद् मात्रा में यूरिया के2 निमार्ण में होता है। ब्व्अणु में काबर्न परमाणु ेच संकरित होता है। काबर्न2 परमाणु दो ेच संकरित कक्षक, आॅक्सीजन परमाणु के दो चदृकक्षकों के साथ अतिव्यापन करके दो सिग्मा बंध् बनाते हैं, जबकि काबर्न परमाणु के शेष दो इलेक्ट्राॅन आॅक्सीजन परमाणु के साथ चπ दृ चπ बंध् बनाते हैं। पफलतः इसकी आकृति रेखीय होती है, जिसमें दोनों ब्कृव् बंधें की लंबाइर् एक समान ;115 चउद्ध रहती है। इसमें कोइर् द्विध््रुव आघूणर् नहीं होता है। ब्व्की अनुनादी संरचनाओं को इस प्रकार प्रद£शत कर सकते हैंμ2 काबर्न डाइआॅक्साइड की अनुनादी संरचना 11.8.3 सिलिकन डाइआॅक्साइड ;ैपव्द्ध2भू - पपर्टी का 95ः भाग सिलिका एवं सिलिकेट से बना है। सिलिकन डाइआॅक्साइड, जिसे सामान्यतः ‘सिलिका’ नाम से जाना जाता है, अनेक िस्टल संरचनात्मक ;ब्तलेजंससवहतंचीपबद्ध रूप में मिलता है। सिलिका के वुफछ रूप क्वाट्जर् ;ुनंतज्रद्धए िस्टलोबेलाइट ;ब्तपेजवइंसपजमद्ध तथा ट्राइडाइमाइट ;ज्तपकलउपजमद्ध हैं, जो उचित ताप पर अंतरपरिवतर्नीय होती हैं। सिलिकन डाइआॅक्साइड एक सहसंयोजक त्रिाविमीय जालकयुक्त ठोस है, जिसमें सिलिकन परमाणु चतुष्पफलकीय रूप में चार आॅक्सीजन परमाणुओं से सहसंयोजित बंध्ित रहता है। प्रत्येक आॅक्सीजन परमाणु विपरीततः दूसरे सिलिकन परमाणु से जुड़ा रहता है, जैसा चित्रा 11.6 में दशार्या गया है। प्रत्येक कोना दूसरे चतुष्पफलक से साझित रहता है। संपूणर् िस्टल को एक ऐसे बृहद् अणु के रूप में माना जा सकता है, जिसमें सिलिकन तथा आॅक्सीजन परमाणुओं की एकांतर क्रम में आठ सदस्यीय वलय बनती है। चित्रा 11.6: ैपव्2 की त्रिाविमीय संरचना सिलिका अपने सामान्य रूप में अति उच्च ैप दृ व् बंध एन्थैल्पी होने के कारण अियाशील होता है। उच्च ताप पर सिलिका, हैलोजेन, डाइहाइड्रोजन, अध्िकांश अम्लों तथा धातुओं के प्रहार को प्रतिरोपित करता है, हालाँकि भ्थ् तथा छंव्भ् से िया करता है। ैपव्2 ़ 2छंव्भ् → छं2ैपव्3 ़ भ्2व् ैपव्2 ़ 4भ्थ् → ैपथ्4 ़ 2भ्2व् क्वाट्र्ज़ का विस्तृत उपयोग दाब - विद्युत् ;च्पम्रवमसमबजतपबद्ध पदाथर् बनाने में होता है। इससे अतियथाथर् घडि़याँए आधुनिक रेडियो, दूरदशर्न - प्रसारण, गतिशील रेडियो संचार व्यवस्था आदि का निमार्ण संभव हो सका। सिलिका जैल का उपयोग शुष्कन कमर्क ;क्तलपदह ंहमदजद्धए वणर्लेखी पदाथर् ;ब्ीतवउंजवहतंचीपब उंजमतपंसद्ध के रूप में तथा उत्प्रेरक के रूप में होता है। सिलिका का एक अिस्टलीय रूप ;।उवतचीवने वितउद्धए कीसेलगुर ;ज्ञपमेमसहनतद्ध का उपयोग छनित्रा - संयत्रा ;थ्पसजतंजपवद चसंदजेद्ध में होता है। 11.8.4 सिलिकाॅन यह काबर् सिलिकाॅन बहुलकों का एक वगर् है, जिसमें त्ैपव्एक पुनरावतीर् इकाइर् ;त्मचमंजपदह नदपजद्ध होती है।22 सिलिकाॅन के निमार्ण में प्रारंभ्िाक पदाथर् ऐल्िकल अथवा ऐरिल प्रतिस्थापी सिलिकन क्लोराइड, त् ैपब्सहोता है, जिसमें त् द ;4दृदद्ध ऐल्िकल अथवा ऐरिल समूह होता है। जब 573ज्ञ ताप पर मेथ्िाल क्लोराइड, काॅपर उत्प्रेरक की उपस्िथति में सिलिकन से िया करता है, तो विभ्िान्न मेथ्िाल प्रतिस्थायी क्लोरोसिलेन ;जिनका सूत्रा डमैपब्सए डमैपब्सए डमैपब्स तथा सूक्ष्म3223मात्रा में डमैप बनते हैंद्ध डाइमेथ्िाल डाइक्लोरो सिलेन4;ब्भ्द्धैपब्सके जल - अपघटन के उपरांत संघनन बहुलकीकरण322 द्वारा शृंखला बहुलक प्राप्त होते हैं। सिलिकाॅन ;ब्भ्द्धैपब्स मिलाने से बहुलक की शृंखला की लंबाइर्33को नियंत्रिात किया जा सकता है, जो निम्नानुसार सिरे को बंद कर देता हैμसिलिकाॅन अध््रुवीय ऐल्िकल समूहों से घ्िारे रहने के कारण सिलिकाॅन की जलप्रतिकषीर् ;ॅंजमत तमचमससपदहद्ध प्रकृति होती है। सामान्यतःइनमें उच्च ऊष्मीय स्थायित्व, उच्च परावैद्युत सामथ्यर् तथा रसायनों एवं आॅक्सीकरण के प्रति प्रतिरोधत्मकता का गुण होता है। इनके विस्तृत अनुप्रयोग हैं। इनका उपयोग सीलित ग्रीस ;ैमंसमदज हतमंेमद्धए विद्युत्रोध्ी ;म्समबजतपबपदेनसंजमतद्ध तथा जलसह - वस्त्रा ;ॅंजमतचतवव िंिइतपबेद्ध और शल्यिया प्रसाधन - संयंत्रा बनाने में होता है। उदाहरण 11.8 सिलिकाॅन क्या है? हल सामान्यतः सिलिकाॅन शृंखलायुक्त वे यौगिक होते हैं, जिनमें ऐल्िकल अथवा पेफनिल समूह सिलिकन परमाणु के शेष बंध् स्िथतियों पर होते हैं। ये जलविरोध्ी ;भ्लकतवचीवइपबद्ध प्रकृति के होते हैं। 11.8.5 सिलिकेट प्रकृति में बड़ी मात्रा में सिलिकेट खनिज पाए जाते हैं। इनमें से वुफछ महत्त्वपूणर् खनिज हैंμपेफल्डस्पार ;मिसकेचंतद्धए जीओलाइट ;्रमवसपजमद्धए श्वेत अभ्रक ;उपबंद्ध तथा ऐस्बेस्टस ;ंेइमेजवेद्ध। 4दृसिलिकेट की मूल संरचनात्मक इकाइर् ैपव् 4 ;चित्रा 11.7द्ध, जिनमें सिलिकाॅन परमाणु चार आॅक्सीजन परमाणुओं से चतुष्पफलक रूप में बंध्ित रहता है। सिलिकेट में या तो एक विविक्त ;क्पेबतमजमद्ध इकाइर् उपस्िथत होती है अथवा इस प्रकार की कइर् इकाइयाँ प्रति सिलिकेट इकाइर् की 1ए 2ए 3 अथवा 4 आॅक्सीजन परमाणुओं के साथ साझित अवस्था में रहती है। जब सिलिकेट इकाइयाँ आपस में मिलती हैं, तो शृंखलित वलय, परत तथा त्रिाविमीय संरचना बनाती है। सिलिकेट संरचना )णावेश में ध्नावेश्िात धतु - आयनों द्वारा उदासीन होता है। यदि चारों कोने अन्य चतुष्पफलकीय इकाइयों के साथ साझित होते हैं, तो त्रिाविम जालक का निमार्ण होता है। मनुष्य द्वारा नि£मत दो महत्त्वपूणर् सिलिकेट काँच तथा सीमेन्ट हैं। 11.8.6 जीओलाइट यदि सिलिकन डाइआॅक्साइड के त्रिाविमिक जालक में से कुछ सिलिकन परमाणु ऐलुमीनियम परमाणुओं द्वारा प्रतिस्थपित हो ;कद्ध ;खद्ध 4दृचित्रा 11.7: ;कद्ध ैपव्4 )णायन की चतुष्पफलक संरचना ;खद्ध ैपव्4दृ इकाइर् का निरूपण4 जाते हैं, तो प्राप्त संपूणर् संरचना को ‘ऐलुमिनोसिलिकेट’ कहते हैं, जिसपर एक )णावेश होता है। छं़ए ज्ञ़ए ब्ं2़ आदि धनायन इस )णावेश को संतुलित करते हैं। इसके उदाहरण पेफल्डस्पार तथा जीओलाइट हैं। पेट्रोरसायन उद्योगों में हाइड्रोकाबर्नके भंजन तथा समावयवीकरण में जीओलाइट का विस्तृतउपयोग उत्प्रेरक के रूप में होता है। उदाहरणाथर्μर्ैड दृ 5 ;एक जीओलाइट का प्रकारद्ध का उपयोग ऐल्कोहाॅल को सीधेेगैसोलीन में परिव£तत करने में होता है। जलयोजित जीओलाइटका उपयोग कठोर जल के मृदुकरण में काम आने वाले आयन विनिमय रेजिन बनाने में होता है। दो महत्त्वपूणर् आॅक्साइड ब्व् तथा ब्व्2अम्लीय प्रवृिा की होती है। काबर्न मोनोआॅक्साइड में काबर्न पर उपस्िथत एकाकी इलेक्ट्राॅन युग्म के द्वारा यह धत्िवक काबोर्निल बनाता है। आॅक्सीहीमोग्लोबिन की तुलना में ब्व् का हीमोग्लोबिन से बना संवुफल अिाक स्थायी और अत्यंत विषैली होता है। काबर्न डाइआॅक्साइड मूलतः विषैली नहीं होती है, परंतु चूना - पत्थर के बढ़ते अपघटन तथा जीवाश्म ईंध्न के दहन के कारण वायुमंडल में ब्व्2कहते हैं। इससे वायुमंडल का ताप बढ़ जाता है तथा इससे गंभीर जटिलताएँ उत्पÂ हो जाती हैं। सिलिका, सिलिकाॅन तथा सिलिकेट महत्त्वपूणर् यौगिक हैं, जिनका अनुप्रयोग उद्योग एवं तकनीक में होता है। अभ्यास 11.1 ;कद्ध ठ से ज्1 तक तथा ;खद्ध ब् से च्इ तक की आॅक्सीकरण अवस्थाओं वफी भ्िाÂता के क्रम की व्याख्या कीजिए। 11.2 ज्पब्स की तुलना में ठब्स के उच्च स्थायित्व को आप वैफसे समझाएंगे?3311.3 बोराॅन ट्राइफ्रलुओराइड लूइस अम्ल के समान व्यवहार क्यों प्रद£शत करता है? 11.4 ठब्स तथा ब्ब्स यौगिकों का उदाहरण देते हुए जल के प्रति इनके व्यवहार के औचित्य को34समझाइए। 11.5 क्या बोरिक अम्ल प्रोटोनी अम्ल है? समझाइए। 11.6 क्या होता है, जब बोरिक अम्ल को गरम किया जाता है? दृ11.7 ठथ् तथा ठभ् की आकृति की व्याख्या कीजिए। इन स्पीशीश में बोराॅन के संकरण को निदिर्ष्ट34 कीजिए। 11.8 ऐलुमीनियम के उभयध्मीर् व्यवहार दशार्ने वाली अभ्िाियाएं दीजिए। 11.9 इलेक्ट्राॅन न्यून यौगिक क्या होते हैं? क्या ठब्सतथा ैपब्सइलेक्ट्राॅन न्यून यौगिक हैं? समझाइए।34 2दृ दृ11.10 ब्व्3 तथा भ्ब्व्3 की अनुनादी संरचनाएँ लिख्िाए। 11.11 ;कद्ध ब्व्2दृ , ;खद्ध हीरा तथा ;गद्ध ग्रैपफाइट में काबर्न की संकरण - अवस्था क्या होती है?3 11.12 संरचना के आधर पर हीरा तथा ग्रैपफाइट के गुणों में निहित भ्िाÂता को समझाइए। 11.13 निम्नलिख्िात कथनों को युक्ितसंगत कीजिए तथा रासायनिक समीकरण दीजिएμ ;कद्ध लेड ;प्प्द्ध क्लोराइड ब्ससे िया करके च्इब्सदेता है।2 4 ;खद्ध लेड ;प्टद्ध क्लोराइड ऊष्मा के प्रति अत्यध्िक अस्थायी है। ;गद्ध लेड एक आयोडाइड च्इप्नहीं बनाता है।4 दृ11.14 ठथ्में तथा ठथ् में बंध् लंबाइर् क्रमशः 130चउ तथा 143चउ होने के कारण बताइए।3 411.15 ठ.ब्स आबंध् द्विध््रुव आघूणर् रखता है, किन्तु ठब्सअणु का द्विध््रुव आघूणर् शून्य होता है। क्यों? 3 11.16 निजर्लीय भ्थ् में ऐलुमीनियम ट्राइफ्रलुओराइड अविलेय है, परंतु छंथ् मिलाने पर घुल जाता है। गैसीय ठथ्को प्रवाहित करने पर परिणामी विलयन में से ऐलुमीनियम ट्राइफ्रलुओराइड अवक्षेपित हो जाता3 है। इसका कारण बताइए। 11.17 ब्व् के विषैली होने का एक कारण बताइए। 11.18 ब्व्की अध्िक मात्रा भूमंडलीय तापवृि के लिए उत्तरदायी वैफसे है?2 11.19 डाइबोरेन तथा बोरिक अम्ल की संरचना समझाइए। 11.20 क्या होता है, जबμ ;कद्ध बोरेक्स को अध्िक गरम किया जाता है। ;खद्ध बोरिक अम्ल को जल में मिलाया जाता है। ;गद्ध ऐलुमिनियम की तनु छंव्भ् से अभ्िािया कराइर् जाती है। ;घद्ध ठथ्की िया अमोनिया से की जाती है।3 11.21 निम्नलिख्िात अभ्िाियाओं को समझाइएμ ;कद्ध काॅपर की उपस्िथति में उच्च ताप पर सिलिकन को मेथ्िाल क्लोराइड के साथ गरम किया जाता है। ;खद्ध सिलिकाॅन डाइआॅक्साइड की िया हाइड्रोजन फ्रलुओराइड के साथ की जाती है। ;गद्ध ब्व् को र्दव् के साथ गरम किया जाता है। ;घद्ध जलीय ऐलुमिना की िया जलीय छंव्भ् के साथ की जाती है। 11.22 कारण बताइएμ ;कद्ध सांद्र भ्छव्का परिवहन ऐलुमीनियम के पात्रा द्वारा किया जा सकता है।3 ;खद्ध तनु छंव्भ् तथा ऐलुमीनियम के टुकड़ों के मिश्रण का प्रयोग अपवाहिका खोलने के लिए किया जाता है। ;गद्ध ग्रैपफाइट शुष्क स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है। ;घद्ध हीरा का प्रयोग अपघषर्क के रूप में होता है। ;ड.द्ध वायुयान बनाने में ऐलुमीनियम मिश्रधतु का उपयोग होता है। ;चद्ध जल को ऐलुमीनियम पात्रा में पूरी रात नहीं रखना चाहिए। ;छद्ध संचरण केबल बनाने में ऐलुमीनियम तार का प्रयोग होता है। 11.23 काबर्न से सिलिकाॅन तक आयनीकरण एन्थैल्पी में प्रघटनीय कमी होती है। क्यों? 11.24 ।स की तुलना में ळं की कम परमाण्वीय त्रिाज्या को आप वैफसे समझाएंगे? 11.25 अपररूप क्या होता है? काबर्न के दो महत्त्वपूणर् अपररूप हीरा तथा ग्रैपफाइट की संरचना का चित्रा बनाइए। इन दोनों अपररूपों के भौतिक गुणों पर संरचना का क्या प्रभाव पड़ता है? 11.26 ;कद्ध निम्नलिख्िात आॅक्साइड को उदासीन, क्षारीय तथा उभयध्मीर् आॅक्साइड के रूप में वगीर्कृत कीजिएμ ब्व्ए ठ2व्3ए ैपव्2ए ब्व्2ए ।स2व्3ए च्इव्2ए ज्स2व्3 ;खद्ध इनकी प्रकृति को दशार्ने वाली रासायनिक अभ्िािया लिख्िाए। 11.27 वुफछ अभ्िाियाओं में थैलियम, ऐलुमीनियम से समानता दशार्ता है, जबकि अन्य में यह समूहदृप् के धातुओं से समानता दशार्ता है। इस तथ्य को वुफछ प्रमाणों के द्वारा सि( करें। 11.28 जब धतु ग् की िया सोडियम हाइआॅक्साइड के साथ की जाती है, तो श्वेत अवक्षेप ;।द्ध प्राप्त होता है, जो छंव्भ् के आध्िक्य में विलेय होकर विलेय संकुल ;ठद्ध बनाता है। यौगिक ;।द्ध तनु भ्ब्स में घुलकर यौगिक ;ब्द्ध बनाता है। यौगिक ;।द्ध को अध्िक गरम किए जाने पर यौगिक ;क्द्ध बनता है, जो एक निष्क£षत धतु के रूप में प्रयुक्त होता है। ग्ए ।ए ठए ब् तथा क् को पहचानिए तथा इनकी पहचान के समथर्न में उपयुक्त समीकरण दीजिए। 11.29 निम्नलिख्िात से आप क्या समझते हैंै? ;कद्ध अिय युग्म प्रभाव ;खद्ध अपररूप ;गद्ध शृंखलन 11.30 एक लवण ग् निम्नलिख्िात परिणाम देता हैμ ;कद्ध इसका जलीय विलयन लिटमस के प्रति क्षारीय होता है। ;खद्ध तीव्र गरम किए जाने पर यह काँच के समान ठोस में स्वेदित हो जाता है। ;गद्ध जब ग् के गरम विलयन में सांद्र भ्ैव्मिलाया जाता है, तो एक अम्ल र् का श्वेत िस्टल24 बनता है। उपरोक्त अभ्िाियाओं के समीकरण लिख्िाए और ग्एल् तथा र् को पहचानिए। 11.31 संतुलित समीकरण दीजिएμ ;कद्ध ठथ्3 ़ स्पभ् → ;खद्ध ठभ् ़ भ्व् →26 2 ;गद्ध छंभ् ़ ठभ् 2 6 → ;घद्ध भ्ठव्3 ⎯⎯→Δ 3;घद्ध ।स ़ छंव्भ् → ;चद्ध ठभ् ़ छभ् →26 3 11.32 ब्व् तथा ब्व्प्रत्येक के संश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला तथा एक औद्योगिक विध्ि दीजिए।2 11.33 बोरेक्स के जलीय विलयन की प्रकृति कौन सी होती हैμ ;कद्ध उदासीन ;खद्ध उभयध्मीर् ;गद्ध क्षारीय ;घद्ध अम्लीय 11.34 बोरिक अम्ल के बहुलकीय होने का कारण μ ;कद्ध इसकी अम्लीय प्रकृति है। ;खद्ध इसमें हाइड्रोजन बंधें की उपस्िथत है। ;गद्ध इसकी एकक्षारीय प्रकृति है। ;घद्ध इसकी ज्यामिति है। 11.35 डाइबोरेन में बोराॅन का संकरण कौन सा होता हैμ ;कद्ध ेच ;खद्ध ेच2 ;गद्ध ेच3 ;घद्ध केच2 11.36 ऊष्मागतिकीय रूप से काबर्न का सवार्ध्िक स्थायी रूप कौन सा हैμ ;कद्ध हीरा ;खद्ध ग्रैपफाइट ;गद्ध पुफलरीन्स ;घद्ध कोयला 11.37 निम्नलिख्िात में से समूह - 14 के तत्त्वों के लिए कौन सा कथन सत्य है? ;कद्ध ़4 आॅक्सीकरण प्रद£शत करते हैं। ;खद्ध ़2 तथा ़4 आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत करते हैं। ;बद्ध ड2दृ तथा ड4़ आयन बनाते हैं। ;घद्ध ड2़ तथा ड4दृ आयन बनाते हैं। 11.38 यदि सिलिकाॅन - निमार्ण मंे प्रारंभ्िाक पदाथर् त्ैपब्सहै, तो बनने वाले उत्पाद की संरचना बताइए।3

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lewg13 osQ rÙoksa dk cká bysDVªkWfud foU;kl ns2np1 gksrk gSA vr% bl lewg osQ rÙoksa osQ bysDVªkWfud foU;kl izFke nks lewgksa osQ rÙoksa dh rqyuk esa (tSls ,dd&10 esa foosfpr fd;k x;k gS) vf/d tfVy gksrs gSaA bysDVªkWfud foU;kl esa ;gh varj bl lewg osQ rÙoksa osQ vU; xq.kksa rFkk bu rÙoksa osQ jlk;u dks izHkkfor djrk gSA

11-1-2 ijek.kq f=kT;k

lewg esa uhps tkus ij izR;sd Øekxr lnL; esa bysDVªkWuksa dk ,d dks'k tqM+rk gSA vr% ijek.kq f=kT;k dh o`f¼ laHkkfor gksus osQ ckotwn fopyu ns[kk tk ldrk gSA Ga dh ijek.kq f=kT;k Al dh ijek.kq f=kT;k ls de gSA vkarfjd ØksM osQ bysDVªkWfud foU;kl ls ;g ns[kk tk ldrk gS fd xSfy;e esa mifLFkr vfrfjDr 10 d bysDVªkWu c<+s gq, ukfHkdh; vkos'k dh rqyuk esa cká bysDVªkWuksa ij nqcZy ifjj{k.k izHkko Mkyrs gSa (,dd&3 ns[ksa)A ifj.kker% xSfy;e dh ijek.kq f=kT;k (135 pm) ,syqehfu;e (143pm) dh rqyuk esa de gksrh gSA

11-1-3 vk;uu ,UFkSYih

vk;uu ,UFkSYih] tSlk lkekU; izo`fÙk ls vk'kk dh tkrh gS] lewg esa Åij ls uhps lkekU; :i ls ugha ?kVrh gSA B ls Al esa deh] vkdkj&o`f¼ osQ lkFk tqM+h gqbZ gSA Al ,oa Ga osQ eè; rFkk In o Tl osQ eè; vk;uu ,UFkSYih dh izsf{kr vfujarjrk d ,oa f bysDVªkWuksa osQ dkj.k gS] ftudk ifjj{k.k izHkko c<+s gq, ukfHkdh; izHkko dh {kfriw£r djus osQ fy, de gksrk gSA

vk;uu ,UFkSYih dk Øe gS] tSlkfd visf{kr gSA izR;sd rÙo dh izFke rhu ,UFkSfYi;ksasa dk ;ksx mPp gksrk gSA ;g buosQ jklk;fud xq.kksa osQ vè;;u esa ifjyf{kr gksxkA

11-1-4 fo|qr~ ½.kkRedrk

lewg&13 osQ rÙoksa dh fo|qr~ ½.kkRedrk oxZ esa Åij ls uhps tkus ij B ls Al rd ?kVrh gSA rRi'pkr~ vkaf'kd o`f¼ gksrh gSA ,slk ijek.oh; vkdkj esa vfu;fer o`f¼ osQ dkj.k gksrk gSA

11-1-5 HkkSfrd xq.k/eZ

cksjkWu izÑfr esa v/kfRod rÙo gSA ;g dkys jax dk vR;f/d dBksj inkFkZ gSA blosQ vusd vij:i feyrs gSaA fØLVyh; tkyd lajpuk osQ dkj.k cksjkWu dk xyukad vlk/kj.k :i ls mPp gksrk gSSA bl lewg osQ vU; rÙo fuEu xyukad ,oa mPp oS|qrpkydrk okys eqyk;e Bksl gksrs gSA ;g è;ku nsus ;ksX; ckr gS fd xSfy;e dk xyukad cgqr de (303 K) gksrk gSA vr% x£e;ksa osQ fnuksa esa ;g nzo voLFkk esa feyrk gSA bldk mPp DoFkukad (2676 K) mPp rkiksa osQ ekiu osQ fy, bls mi;ksxh inkFkZ cukrk gSA lewg&13 osQ rÙoksa dk ?kuRo oxZ esa uhps tkus ij cksjkWu ls FkSfy;e rd c<+rk tkrk gSA

11-1-6 jklk;fud xq.k/eZ

vkWDlhdj.k voLFkk ,oa jklk;fud vfHkfØ;k'khyrk dh izo`fÙk

NksVs vkdkj osQ dkj.k cksjkWu dh izFke rhu vk;uu ,UFkSfYi;ksasa dk ;ksx cgqr mPp gksrk gSA ;g bls u fliZQ +3 vkWDlhdj.k voLFkk esa vkus ls jksdrk gS] cfYd osQoy lgla;kstd ;kSfxd cukus osQ fy, ckè; Hkh djrk gSA ijarq tc ge B ls Al rd tkrs gSa] rc Al dh izFke rhu vk;uu ,UFkSfYi;ksasa dk ;ksx mYys[kuh; :i ls ?kV tkrk gSA bl izdkj ;g vk;u cuus dh lkeF;Z j[krk gSA ;FkkFkZ esa Al ,d mPp /ufo|qrh rÙo gSA

fiQj Hkh oxZ esa uhps d ,oa f d{kdksa osQ nqcZy ifjj{k.k izHkko osQ dkj.k] c<+k gqvk ukfHkdh; vkos'k ns bysDVªkWuksa dks etcwrh ls ck¡/s j[krk gS (tks vfØ; ;qXe izHkko osQ fy, mÙkjnk;h gS)A bl izdkj ca/u esa budh lgHkkfxrk dks fu;af=kr djrk gSA ifj.kkeLo:i ca/u esa osQoy p– d{kd Hkkx ysrs gSA ;FkkFkZ esa Ga, In ,oa Tl esa +1 rFkk +3 nksuksa vkWDlhdj.k voLFkk,¡ izsf{kr gksrh gSaA xq#rj rÙoksa osQ fy, +1 vkWDlhdj.k voLFkk dk LFkkf;Ro mÙkjksÙkj c<+rk tkrk gS% Al < Ga < In < Tl FkSfy;e esa +1 vkWDlhdj.k voLFkk LFkk;h gS] tcfd +3 vkWDlhdj.k voLFkk izÑfr esa mPp vkWDlhdkjd gSA ÅtkZ laca/h dkj.kksa ls visf{kr +1 vkWDlhdj.k voLFkk okys ;kSfxd +3 vkWDlhdj.k voLFkk dh rqyuk esa vf/d vk;fud gksrs gSaA

bu rÙoksa osQ f=kla;ksth voLFkk esa v.kqvksa esa osaQæh; ijek.kq osQ pkjksa vksj bysDVªkWuksa dh la[;k 6 gksrh gS (mnkgj.kkFkZBF3 esa cksjkWu)A ,sls bysDVªkWu U;wu v.kq LFkk;h bysDVªkWfud foU;kl izkIr djus osQ fy, ,d bysDVªkWu ;qXe xzg.k djosQ ywbl vEy osQ leku O;ogkj djrs gSaA

lewg esa Åij ls uhps tkus ij vkdkj esa o`f¼ osQ dkj.k ywbl vEy osQ leku O;ogkj djus dh izo`fÙk de gksrh tkrh gSA cksjkWu VªkbDyksjkbM ljyrkiwoZd veksfu;k ls ,d ,dkdh bysDVªkWu ;qXe xzg.k dj milgla;kstd ;kSfxd cukrk gSA

blh izdkj AlCl3 prq"iQydh; f}yd cukdj LFkk;h gks tkrk gSA

pw¡fd f=kla;ksth voLFkk esa vf/dka'k ;kSfxd lgla;kstd gksrs gSa] vr% os ty&vi?kfVr gks tkrs gSaA mnkgj.kkFkZ /kfRod VªkbDyksjkbM ty vi?kVu ij prq"iQydh; Lih'khT+k [M(OH)4] cukrs gSa] tgk¡ M dh ladj.k voLFkk sp3 gksrh gSA ,syqehfu;e DyksjkbM vEyh; ty&vi?kVu djus ij v"ViQydh; vk;u [Al (H2O)6]3+ vk;u cukrk gSA bl laoqQy vk;u esa Al osQ 3d d{kd Hkkx ysrs gSaA blesa Al dh ladj.k voLFkk sp3d2 gSA

mnkgj.k 11-1

Al3+/Al ,oa Tl3+/Tl osQ fy, ekud bysDVªksM foHko EV Øe'k% –1.66 V ,oa + 1.26 V gSaA foy;u esa M3+ vk;u cuus dk vuqeku yxkb, ,oa nksuksa èkkrqvksa osQ /ufo|qrh xq.k dh rqyuk dhft,A

gy

nksuksa v/Zlsyksa osQ ekud bysDVªkWM foHko crkrs gSa fd ,syqehfu;e esa Al3+ (aq) vk;u cukus dh izo`fÙk vfèkd jgrh gS] tcfd Tl3+ foy;e esa u fliZQ vLFkk;h gS] cfYd izcy vkWDlhdkjd Hkh gSA vr% foy;u esa Tl3+ dh rqyuk esa Al3+ vf/d LFkk;h gSA +3 vk;u cukus osQ dkj.k ,syqehfu;e FkSfy;e dh rqyuk esa vf/d /ufo|qrh gSA

(i) ok;q osQ izfr vfHkfØ;k'khyrk

fØLVyh; Lo:i esa cksjkWu vfØ;k'khy gSA ok;q osQ laioZQ esa vkus ij ,syqehfu;e dh lrg ij vkWDlkbM dh iryh ijr cu tkrh gS] tks vkSj vf/d {k; gksus ls /krq dks jksdrh gSA vfØLVyh; cksjkWu rFkk ,syqehfu;e ok;q osQ laioZQ esa xje fd, tkus ij Øe'k% B2O3 rFkk Al2O3 cukrs gSaA mPp rki ij ;s MkbukbVªkstu osQ lkFk fØ;k djkus ij ukbVªkbM cukrs gSaA

(E = rÙo)

lewg esa uhps tkus ij buosQ vkWDlkbM dh izÑfr ifjofrZr gksrh tkrh gSA cksjkWu VªkbvkWDlkbM vEyh; izÑfr dk gksrk gS rFkk {kkjdh; (/kfRod) vkWDlkbM ls fØ;k djosQ /kfRod cksjsV cukrk gSA ,syqehfu;e rFkk xSfy;e osQ vkWDlkbM mHk;/ehZ izÑfr osQ gksrs gSa] tcfd bafM;e rFkk FkSfy;e osQ vkWDlkbM xq.k/eks± esa {kkjdh; izÑfr osQ gksrs gSaA

(ii) vEy ,oa {kkj osQ izfr vfHkfØ;k'khyrk

cksjkWu vEy ,oa {kkj osQ lkFk dksbZ fØ;k ugha djrk gS] ijarq ,syqehfu;e [kfut vEyksa rFkk tyh; {kkjksa esa ?kqy tkrk gSA iQyr% ,syqehfu;e mHk;/ehZ xq.k izn£'kr djrk gSA ,syqehfu;e ruq HCl esa ?kqydj MkbgkMªkstu fu"dkflr djrk gSA

2Al(s) + 6HCl (aq) 2Al3+ (aq) + 6Cl(aq) + 3H2 (g)

lkanz ukbfVªd vEy Al dh lrg ij vkWDlkbM dh lrg cukdj mls fuf"Ø; dj nsrk gSA ,syqehfu;e tyh; {kkjksa ls fØ;k djosQ MkbgkbMªkstu fol£tr djrk gSA

2Al (s) + 2NaOH(aq) + 6H2O(l)

2 Na+ [Al(OH)4] (aq) + 3H2(g)

lksfM;e VªsVªkgkbMªkWDlks

,syqfeusV (III) vk;u

(iii) gSykstsuksa osQ izfr vfHkfØ;k'khyrk

Tl I3 dks NksM+dj lewg&13 osQ rÙo gSykstsu ls fØ;k djosQ VªkbgSykbM cukrs gSaA

2E(s) + 3 X2 (g) 2EX3 (s) (X = F, Cl, Br, I)

mnkgj.k 11-2

futZyh; ,syqehfu;e DyksjkbM dh cksry osQ pkjksa vksj 'osr /we cu tkrs gSaA bldk dkj.k crkb,A

gy

futZyh; ,syqehfu;e DyksjkbM ok;qeaMyh; ueh osQ lkFk vkaf'kd :i ls ty vi?kfVr gksdj HCl xSl fol£tr djrk gSA ;g ueh;qDr HCl 'osr /we osQ :i esa fn[kkbZ nsrh gSA

11-2 cksjkWu dh izo`fÙk rFkk vlaxr O;ogkj

lewg&13 osQ rÙoksa osQ jklk;fud O;ogkj dk vè;;u djus ij oqQN egÙoiw.kZ rF; lkeus vkrs gSaA bl lewg osQ lHkh rÙoksa osQ VªkbDyksjkbM] czksekbM ,oa vk;ksMkbM lgla;kstd izÑfr osQ gksus osQ dkj.k ty&vi?kfVr gks tkrs gSaA cksjkWu osQ vfrfjDr vU; lHkh rÙoksa dh prq"iQydh; Lih'kh”k [M(OH)4] rFkk v"ViQydh; [M(H2O)6]3+ Lih'kh”k tyh; foy;u esa mifLFkr jgrs gSaA

rÙoksa osQ ,dyd (Monomeri) VªkbgSykbM] bysDVªkWu U;wu gksus osQ dkj.k izcy ywbl vEy osQ leku O;ogkj djrs gSaA ywbl {kkj (tSlsNH3 vkfn) ,d bysDVªkWu ;qXe iznku dj ,sls ;kSfxdksa osQ osaQnzh; ijek.kq dk v"Vd iw.kZ djrs gSaA

cksjkWu esa d-d{kd vuqifLFkr jgrs gSaA iQyr% bldh vf/dre la;kstdrk 4 gks ldrh gSA pw¡fd Al rFkk vU; rÙoksa esa d d{kd mifLFkr gksrs gSa] vr% budh vf/dre la;kstdrk 4 ls vf/d gks ldrh gSA vf/dka'k vU; /krq gSykbM (mnkgj.kkFkZAlCl3) lsrqca/ gSykstsu ijek.kq }kjk f}iQydh; gks tkrs gSa (Al2Cl6)A bu /krq ;kSfxdksa esa lsrqca/ gSykstsu v.kqvksa ls bysDVªkWu xzg.k dj viuk v"Vd iw.kZ djrs gSaA

mnkgj.k 11-3

cksjkWu vk;u ugha cuk ldrk gSA bldh O;k[;k dhft,A

gy

cksjkWu esa d-d{kd dh vuqifLFkfr osQ dkj.k ;g vius v"Vd dk izlkj djus esa vleFkZ gksrk gSA vr% bldh vf/dre la;kstdrk 4 ls vf/d ugha gks ldrh gSA

11-3 cksjkWu osQ oqQN egÙoiw.kZ ;kSfxd

cksjkWu osQ oqQN mi;ksxh ;kSfxd cksjsDl] vkWFkkZscksfjd vEy rFkk Mkbcksjsu gSaA buosQ jlk;u dk vè;;u ge la{ksi esa djsaxsA

11-3-1 cksjsDl

;g cksjkWu dk egÙoiw.kZ ;kSfxd gSA ;g 'osr fØLVyh; Bksl gS] ftldk lw=k Na2B4O7.10H2O gksrk gSA rF;kRed :i ls blesa prq"osaQnzh; bdkb;k¡ gksrh gSaA vr% bldk mi;qDr lw=k Na2[B4O5 (OH)4].8H2O gksrk gSA cksjsDl ty esa ?kqydj {kkjh; foy;u cukrk gSA

Na2B4O7 + 7H2O 2NaOH + 4H3BO3

vkFkkZscksfjd vEy

xje fd, tkus ij cksjsDl igys ty osQ v.kq dk fu"dklu djrk gS rFkk iQwy tkrk gSA iqu% xje fd, tkus ij ;g ,d ikjn'khZ nzo esa ifjo£rr gks tkrk gS] tks dk¡p osQ leku ,d Bksl esa ifjofrZr gks tkrk gSA mls cksjsDl eudk (Borax Bead) dgrs gSa

Na2B4O7.10H2ONa2B4O72NaBO2

lksfM;e esVkcksjsV + B2O3

cksfjd ,sugkbMkªbM

fofHk laØe.k rÙoksa osQ esVkcksjsV dk fof'k"V jax gksrk gS] ftlosQ vk/kj ij bu rÙoksa dh igpku esa cksjsDl eudk ijh{k.k (Borax Bead Test) dk mi;ksx iz;ksx'kkykvksa esa gksrk gSA mnkgj.kkFkZtc cksjsDl dks dksckYV vkWDlkbM (CoO) osQ lkFk cqUlu cuZj ij xje fd;k tkrk gS] rc uhys jax dk eudk [Co(BO2)2] curk gSA

11-3-2 vkFkkZscksfjd vEy

vkFkkZscksfjd vEy H3BO3 ,d 'osr fØLVyh; Bksl gksrk gS] ftldk lkcquh Li'kZ gksrk gSA ;g ty esa vYifoys;] ijarq xje ty esa iw.kZ foys; gksrk gSA bls cksjsDl osQ tyh; foy;u dks vEyhÑr djosQ cuk;k tk ldrk gSA

Na2B4O7 + 2HCl + 5H2O 2NaCl + 4B(OH)3

bls cksjkWu osQ vf/dka'k ;kSfxdksa (tSlsgSykbM] gkbMªkbM vkfn) osQ ty&vi?kVu }kjk (ty rFkk nqcZy vEy ls fØ;k djosQ) cuk;k tk ldrk gSA bldh ijrh; lajpuk gksrh gS] tgk¡ BO3 dh bdkb;k¡ gkbMªkstu ca/ }kjk tqM+h jgrh gSa (fp=k 11-1)A

fp=k 11-1 cksfjd vEy dh lajpuk esa fcanqÑr js[kk,¡ gkbMªkstu vkca/ dks izn£'kr djrh gSa

cksfjd vEy ,d nqcZy {kkjh; vEy gSA ;g izksVksuh vEy ugha gS] ijarq gkbMªkWfDly vk;uksa ls ,d bysDVªkWu ;qXe xzg.k djus osQ dkj.k ywbl vEy dh Hkk¡fr O;ogkj djrk gSA

B(OH)3 + 2HOH [B(OH)4]+ H3O+

370 K ls vf/d rki ij xje fd, tkus ij vkFkkZscksfjd vEy esVkcksfjd vEy (HBO2) cukrk gS] tks vkSj vf/d xje djus ij cksfjd vkWDlkbM (B2O3) esa ifjo£rr gks tkrk gSA

H3BO3HBO2B2O3

mnkgj.k 11-4

cksfjd vEy dks ,d nqcZy vEy D;ksa ekuk x;k gS\

gy

cksfjd vEy dks ,d nqcZy vEy blfy, ekuk x;k gS] D;ksafd ;g vius izksVkWu dk fu"dklu ugha djrk gSA ;g ty osQ v.kq ls gkbMªkWfDly vk;u (OH) xzg.k djosQ viuk v"Vd iw.kZ djrk gS rFkk H+ fu"dkflr djrk gSA

11-3-3 Mkbcksjsu] B2H6

cksjkWu dk Kkr ljyre gkbMªkbM Mkbcksjsu gSA bls Mkb,fFky bZFkj dh mifLFkfr esa cksjkWu VªkbÝyqvksjkbM dh LiAlH4 ls fØ;k djosQ cuk;k tkrk gSA

4BF3 + 3 LiAlH4 2B2H6 + 3LiF + 3AlF3

iz;ksx'kkyk esa Mkbcksjsu cukus gsrq lksfM;e cksjksgkbMªkbM dk vkWDlhdj.k vk;ksMhu osQ lkFk fd;k tkrk gSA

2NaBH4 + I2 B2H6 + 2NaI + H2

vkS|ksfxd :i ls Mkbcksjsu cksjkWu VªkbÝyqvksjkbM rFkk lksfM;e gkbMªkbM dh fØ;k }kjk cuk;k tkrk gSA

Mkbcksjsu vR;ar tgjhyh jaxghu xSl gS] ftldk DoFkukad 180 K gSA ;g ok;q osQ laioZQ esa vkus ij Lo;a ty mBrh gSA ;g vkWDlhtu dh mifLFkfr esa vR;f/d ÅtkZ dk mRltZu djrs gq, tyrk gSA

vf/dka'k mPp cksjsu Hkh ok;q osQ laioZQ esa vkus ij Lo;a tyus yxrs gSaA cksjsu ty osQ lkFk rsth ls ty&vi?kfVr gksdj cksfjd vEy nsrs gSaA

B2H6 (g) + 6H2O(l) 2B(OH)3(aq) + 6H2(g)

Mkbcksjsu ywbl {kkjksa (L) osQ lkFk fonyu vfHkfØ;k ij ,d cksjsu ;ksxksRikn (BH3.L) nsrk gSA

B2H6 + 2 NMe3 2BH3 .NMe3

B2H6 + 2 CO 2BH3 . CO

Mkbcksjsu ij veksfu;k dh vfHkfØ;k ls izkjaHk esa B2H6.2NH3 curk gS] ftls lw=k [BH2(NH3)] [BH4] }kjk izn£'kr fd;k tkrk gSA ;g vkSj vf/d xje djus ij B3N3H6 nsrk gSA bls ,dkarj BH ,oa NH lewgksa osQ lkFk oy;&lajpuk osQ ifjizs{; esa vdkcZfud csathu (Inorganic Benzene) osQ :i esa tkuk tkrk gSA

Mkbcksjsu dh lajpuk dks fp=k 11-2 (oQ) }kjk n'kkZ;k x;k gSA blesa fljsokys pkj gkbMªkstu ijek.kq rFkk nks cksjkWu ijek.kq ,d gh ry esa gksrs gSaA bl ry osQ Åij rFkk uhps nks lsrqca/ (Bridging) gkbMªkstu ijek.kq gksrs gSaA fljsokys pkj B – H ca/ lkekU; f}osaQnzh;&f}bysDVªkWu (Two Centre-two Electron) ca/ cukrs gSa] tcfd nks lsrqca/ (B – H – B) ca/ fHk izdkj osQ gksrs gSa] ftUgsa ^f=koasQnzh; f}bysDVªkWu ca/* dgrs gSaA fp=k 11-2 ([k)A

fp=k 11-2 (d) Mkbcksjsu dh (B2H6) lajpuk


([k)

fp=k 11-2 ([k) Mkbcksjsu esa ca/uA Mkbcksjsu esa izR;sd cksjkWu ijek.kq sp3 ladfjr gksrk gSA bu pkj sp3 ladfjr d{kdksa esa ls ,d bysDVªkWujfgr gksrk gS] ftls fcanqÑr js[kkvksa (Dotted Lines) }kjk n'kkZ;k x;k gSA fljsokys B – H lkekU; f}osaQnzh;&f}bysDVªkWu (2c – 2e) ca/s gSa] tcfd nks lsrqca/ (B – H – B) f=kosaQnzh;&f}bysDVªkWu (3c – 2e) gSA bls ^osQykca/* (Banana Bond) Hkh dgrs gSaA

cksjkWu] gkbMªkbMkscksjsV dh ,d Üka`[kyk dk fuekZ.k djrk gS] ftlesa prq"iQydh; [BH4] vk;u izeq[k gSA fofHk èkkrqvksa osQ VsVªkgkbMªkbMkscksjsV Kkr gSaA yhfFk;e rFkk lksfM;e osQ VsVªkgkbMªkbMkscksjsV dks cksjksgkbMªkbM Hkh dgrs gSaA bUgsa èkkrq gkbMªkbM dh Mkb,sfFkybZFkj dh mifLFkfr esa Mkbcksjsu ls vfHkfØ;k djosQ cuk;k tk ldrk gSA

2MH + B2H6 2 M+ [BH4]

(M = Li vFkok Na)

dkcZfud la'ys"k.kksa esa nksuksa LiBH4 rFkk NaBH4 dk mi;ksx vipk;d osQ :i esa gksrk gSA vU; /kfRod cksjkgkbMªkbM cukus esa bUgsa izkjafHkd inkFkZ (Starting Material) osQ :i esa mi;ksx esa yk;k tkrk gSA

11-4 cksjkWu] ,syqehfu;e rFkk buosQ ;kSfxdksa osQ mi;ksx

mPp xyukad] fuEu ?kuRo] fuEu oS|qrpkydrk rFkk vR;fèkd dBksj (Refractory) gksus osQ dkj.k cksjkWu osQ vusd vuqiz;ksx gSaA cksjkWu rarqvksa (Fibers) dk mi;ksx cqysVizwiQ tSosQV cukus esa rFkk ok;q;kuksa osQ gyosQ l?ku inkFkks± osQ fuekZ.k esa gksrk gSA cksjkWu&10 (10B) leLFkkfud esa U;wVªkWu&vo'kks"k.k dh vR;f/d {kerk gksrh gSA vr% ukfHkdh; m|ksxksa esa /kfRod cksjkbMksa dk mi;ksx ifjj{k.k dop (Protective Shield) rFkk fu;a=kd NM+ksa (Control Rods) osQ :i esa gksrk gSA cksjsDl rFkk cksfjd vEy dk eq[; vkS|ksfxd mi;ksx mPp rki lg dk¡p (Heat Resistant Glasses), tSlsikbjsDl (Pyrex)] Xykloqy rFkk iQkbcj Xykl cukus esa gksrk gSA cksjsDl dk mi;ksx /krqvksa osQ Vk¡dk yxkus (Soldering) osQ fy, xkyd (Flux) osQ :i esa_ Å"ek] /Cck (Strain) rFkk [kjksap-izfrjks/h feV~Vh osQ cjru cukus esa ,oa vkS"k/Ñr lkcqu esa ?kVd osQ :i esa gksrk gSA cksfjd vEy osQ tyh; foy;u dk mi;ksx lkekU;r% ean iw£rjks/h osQ :i gksrk gSA

,syqehfu;e jtr 'osr (Silvery White) jax dh ,d pedhyh /krq gS] ftlesa mPp ruu lkeF;Z (Tensile Strength) gksrh gSA bldh oS|qr ,oa Å"eh; pkydrk mPp gksrh gSA Hkkj ls Hkkj vk/kj (Weight to Weight Basis) ij ,syqehfu;e dh pkydrk dkWij ls nqxquh gksrh gSA nSfud thou rFkk m|ksxksa esa ,syqehfu;e dk vR;f/d mi;ksx gksrk gSA ;g Cu, Mn, Mg, Si rFkk Zn osQ lkFk feJ/krq dk fuekZ.k djrk gSA ,syqehfu;e rFkk bloQh feJ/krqvksa dks fof'k"V vkÑfr (tSlsikbi] V~;wc] NM+] iÂh] rkj] IysV vkfn) nh tk ldrh gSA blls bldk mi;ksx cjru cukus osQ dk;Z] fuekZ.k] iSfdax] gokbZ tgkt rFkk ;krk;kr m|ksxksa esa gksrk gSA pw¡fd ,syqehfu;e dh izÑfr fo"kSyh (Toxic Nature) gksrh gSA vr% ?kjsyw dk;ks± esa ,syqehfu;e rFkk blosQ ;kSfxdksa dk mi;ksx de gksus yxk gSA

11-5 lewg&14 osQ rÙo % dkcZu ifjokj

dkcZu] flfydu] tesZfu;e] fVu] ysM rFkk Ýysjksfo;e lewg 14 osQ rÙo gSaA dkcZu Hkw&iiZVh esa ik;k tkusokyk l=kgok¡ vfrckgqY; (Most Abundant) rÙo gSA ;g izÑfr esa Lora=k ,oa la;qDr voLFkk esa cgqrk;r ls ik;k tkrk gSA rÙo voLFkk esa ;g dks;yk] xzSiQkbV rFkk ghjk esa feyrk gS] tcfd la;qDr voLFkk esa ;g /krq dkckZsusV] gkbMªksdkcZu rFkk ok;q esa dkcZu MkbvkWDlkbM xSl (0.03%) osQ :i esa feyrk gSA ;g dgk tk ldrk gS fd dkcZu lalkj dk lcls papy rÙo gS] tks vU; rÙoksa (tSlsMkbgkbMªkstu] MkbvkWDlhtu] Dyksjhu] lYiQj vkfn) ls ;ksx djosQ thfor Årdksa ls nokvksa ,oa IykfLVd rd dk fuekZ.k djrk gSA dkcZfud jlk;u foKku dkcZu osQ ;kSfxdksa ij gh vkèkkfjr gSA ;g thfor izkf.k;ksa dk vko';d ?kVd gSA izkÑfrd :i ls dkcZu osQ nks LFkk;h leLFkkfud 12C rFkk 13C feyrs gSaA blosQ vfrfjDr ,d vU; leLFkkfud 14C Hkh mifLFkr jgrk gSA ;g ,d jsfM;ks,sfDVo leLFkkfud gS] ftldh vèkkZ;q 5770 o"kZ gSA bldk mi;ksx jsfM;ks dkcZu vadu (Radio Carbon Dating) esa gksrk gSA flfydu Hkw&iiZVh esa ckgqY;rk ls ik;k tkusokyk (27.7% Hkkj esa) f}rh; rÙo gSA ;g izÑfr esa flfydk rFkk flfyosQV osQ :i esa mifLFkr jgrk gSA ;g flfydu] fljsfed] dk¡p rFkk lhesUV dk egÙoiw.kZ ?kVd gSA teZsfu;e vfr lw{e ek=kk esa mifLFkr jgrk gSA eq[;r% fVu LVksu (osQflVsjkbV)] SnO2 fVu ls rFkk xSysuk (PbS) v;Ld ls ysM izkIr fd;k tkrk gSA Ýysjksfo;e la'ysf"kr jsfM;ks,fDVo rRo gSA

teZsfu;e rFkk flfydu dh 'kq¼re voLFkk dk mi;ksx VªkaftLVj rFkk vèkZpkyd ;qfDr (Semi Conductor Device) cukus esa gksrk gSA

Ýysjksfo;e dk izrhd Fl gSA bldh ijek.kq la[;k 114 rFkk ijek.kq æO;eku 289g mol–1 rFkk bysDVªkWfud foU;kl [Rn] 5f14 6d10 7s2 7p2 gSA bls cgqr de ek=kk esa cuk;k tk ldk gSA bldh v/kZ;q cgqr de gSA bldk jlk;u vHkh rd Kkr ugha gSA Ýysjksfo;e dks NksM+dj ;gk¡ lewg&14 osQ vU; rÙoksa osQ egÙoiw.kZ ijek.oh; ,oa HkkSfrd xq.k rFkk muosQ bysDVªkWfud foU;kl lkj.kh 11-3 esa fn, x, gSaA dqN ijek.oh;] HkkSfrd ,oa jklk;fud xq.kksa dh O;k[;k uhps dh tk jgh gSA

11-5-1 bysDVªkWfud foU;kl

lewg&14 osQ rÙoksa dk la;kstdrk dks'k bysDVªkWfud foU;kl ns2 np2 gksrk gSA bl lewg osQ bysDVªkWfud foU;kl esa Hkh vkarfjd ØksM fHkUu gksrk gSA

lkj.kh 11-3 lewg 14 osQ rÙoksa osQ ijekf.od ,oa HkkSfrd xq.k

image46

11-5-2 lgla;kstd f=kT;k

dkcZu ls flfydu dh lgla;kstd f=kT;k esa mYys[kuh; o`f¼ rc gksrh gS] tc Si ls Pb rd lgla;kstd f=kT;k esa vkaf'kd o`f¼ gksrh gSA d- rFkk f- d{kdksa osQ iw.kZiwfjr gksus osQ dkj.k ,slk gksrk gSA

11-5-3 vk;uu ,UFkSYih

lewg&14 osQ rÙoksa dh izFke vk;uu ,UFkSYih osQ eku lewg&13 osQ laxr rÙoksa dh vis{kk vf/d gksrs gSaA

;gk¡ ij Hkh vkarfjd ØksM bysDVªkWuksa dk izHkko ifjyf{kr gksrk gSA lkekU;r;k lewg esa uhps tkus ij vk;uu ,UFkSYih ?kVrh gSA Si ls Ge, Ge ls Sn rd vYi U;wurk ,oa Sn ls Pb rd vYio`f¼] eè;orhZ d rFkk f bysDVªkWuksa osQ nqcZy ifjj{k.k izHkko ,oa ijek.kq osQ c<+s vkdkj dk ifj.kke gSA

11-5-4 fo|qr~ ½.kkRedrk

NksVs vkdkj osQ dkj.k lewg&14 osQ rÙoksa dh fo|qr~ ½.kkRedrk dk eku lewg&13 osQ laxr rÙoksa dh fo|qr~ ½.kkRedrk osQ eku ls FkksM+k lk vf/d gksrk gSA Si ls Pb rd rÙoksa dh fo|qr~ ½.kkRedrk dk eku yxHkx leku gksrk gSA

11-5-5 HkkSfrd xq.k/eZ

lewg&14 osQ lHkh rÙo Bksl gSaA dkcZu&flfydu v/krq vkSj teZsfu;e mi/krq gS] tcfd fVu rFkk ysM de xyukad okyh eqyk;e /krq gSA lewg&14 osQ rÙoksa osQ xyukad ,oa DoFkukad lewg&13 osQ rÙoksa osQ xyukad ,oa DoFkukad dh rqyuk esa vfèkd gksrs gSaA

11-5-6 jklk;fud xq.k/eZ

vkWDlhdj.k voLFkk rFkk jklk;fud vfHkfØ;k'khyrk dh izo`fr

lewg&14 osQ rÙoksa osQ ckáre dks'k esa pkj bysDVªkWu gksrs gSaA bu rÙoksa }kjk lkekU;r% +4 rFkk +2 vkWDlhdj.k voLFkk n'kkZbZ tkrh gSA dkcZu Í.kkRed vkWDlhdj.k voLFkk Hkh izn£'kr djrk gSA pw¡fd izFke pkj vk;uu ,UFkSYih dk ;ksx vfr mPp gksrk gS] vr% +4 vkWDlhdj.k voLFkk esa vfèkdrj ;kSfxd lgla;kstd izÑfr osQ gksrs gSaA bl lewg osQ xq#rj rÙoksa esa Ge < Sn < Pb Øe esa +2 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djus dh izo`fÙk c<+rh tkrh gSA lgla;kstd dks'k esa ns2 bysDVªkWu osQ ca/u esa Hkkx ugha ysus osQ dkj.k ;g gksrk gSA bu nks vkWDlhdj.k voLFkkvksa dk lkisf{kd LFkkf;Ro oxZ esa ifjo£rr gksrk gSA dkcZu rFkk flfydu eq[;r% +4 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djrs gSaA teZsfu;e dh +4 vkWDlhdj.k voLFkk LFkk;h gksrh gS] tcfd oqQN ;kSfxdksa esa +2 vkWDlhdj.k voLFkk Hkh feyrh gSA fVu ,slh nksuksa voLFkkvksa esa ;kSfxd cukrk gS (+2 vkWDlhdj.k voLFkk esa fVu vipk;d osQ :i esa dk;Z djrk gS)A +2 vkWDlhdj.k voLFkk esa ysM osQ ;kSfxd LFkk;h gksrs gSa] tcfd bldh +4 voLFkk izcy vkWDlhdjd gSA prq%la;ksth voLFkk esa v.kq osQ oasQæh; ijek.kq ij vkB bysDVªkWu gksrs gSa [mnkgj.kkFkZ (CCl4)]A bysDVªkWu ifjiw.kZ v.kq gksus osQ dkj.k lkekU;r;k bysDVªkWuxzkgh ;k bysDVªkWunkrk Lih'kh”k dh vis{kk buls ugha dh tkrh gSA ;|fi dkcZu viuh lgla;kstdrk +4 dk vfrØe.k ugha dj ldrk gS] ijarq lewg osQ vU; rÙo ,slk djrs gSaA ;g mu rÙoksa esa d-d{kdksa dh mifLFkfr osQ dkj.k gksrk gSA ;gh dkj.k gS fd ,sls rÙoksa osQ gSykbM ty vi?kVu osQ mijkar nkrk Lih'kh”k (Donar Species) ls bysDVªkWu xzg.k djosQ laoqQy cukrs gSaA mnkgj.kkFkZoqQN Lih'kh”k [tSls(Si F62–, GeCl6])2–, (Sn(OH)6)2–] ,slh gksrh gSa] ftuosQ osaQnzh; ijek.kq sp3d2 ladfjr gksrs gSaA

(i) vkWDlhtu osQ izfr vfHkfØ;k'khyrk

bl lewg osQ lHkh lnL; vkWDlhtu dh mifLFkfr esa xje fd, tkus ij vkWDlkbM cukrs gSaA ;s eq[;r% nks izdkj osQ gksrs gSaeksuksvkWDlkbM rFkk MkbvkWDlkbMA buosQ lw=k Øe'k% MO rFkk MO2 gSaA SiO dk vfLrRo osQoy mPp rki ij gksrk gSA mPp vkWDlhdj.k voLFkk okys vkWDlkbM fuEu vkWDlhdj.k voLFkk okys vkWDlkbM dh rqyuk esa vEyh; izÑfr osQ gksrs gSaA MkbvkWDlkbM (tSlsCO2, SiO2 rFkk GeO2) vEyh; gSa] tcfd SnO2 rFkk PbO2 mHk;/ehZ izÑfr osQ gksrs gSaA eksuksvkWDlkbM esa CO mnklhu rFkk GeO vEyh; gSa] tcfd SnO rFkk PbO mHk;èkehZ gSaA

mnkgj.k 11-5

lewg&14 esa ls mu lnL; (;k lnL;ksa) dks pqfu,] tks
(i)
lcls vf/d vEyh; MkbvkWDlkbM cukrk gS_
(ii)
lkekU;r% +2 vkWDlhdj.k voLFkk esa feyrk gS_

(iii) v¼Zpkyd (;k v¼Zpkydksa) osQ :i esa iz;ksx esa vkrk gSA

gy

(i) dkcZu (ii) ysM (iii) flfydu rFkk teZsfu;e

(ii) ty osQ izfr fØ;k'khyrk

dkcZu] flfydu rFkk teZsfu;e ty osQ }kjk izHkkfor ugha gksrs gSaA fVu] Hkki dks fo;ksftr dj MkbvkWDlkbM cukrk gS rFkk MkbgkbMªkstu xSl nsrk gS

ysM ty ls vizHkkfor jgrk gSA ,slk 'kk;n vkWDlkbM dh j{k.k fiQYe (Protection film) cuus osQ dkj.k gksrk gSA

(iii) gSykstu osQ izfr vfHkfØ;k'khyrk

lewg&14 osQ rÙo MX2 rFkk MX4 (X = F, Cl, Br, I) izdkj osQ gSykbM cukrs gSaA dkcZu osQ vfrfjDr vU; lHkh lnL; mi;qDr ifjfLFkfr;ksa esa gSykstu ls fØ;k djosQ lhèks gSykbM cukrs gSaA vf/dka'k MX4 lgla;kstd izÑfr osQ gksrs gSaA bu gSykbMksa esa osaQnzh; ijek.kq sp3 ladfjr voLFkk esa rFkk v.kq prq"iQydh; vkÑfr esa gksrk gSA SnF4 rFkk PbF4 viokn gSaA ;s vk;fud izÑfr osQ gksrs gSaA Pbl4 dk vfLrRo ugha gS] D;ksafd Pb – I ca/ (tks izkjaHk esa curk gS) bruh ÅtkZ mRi ugha dj ikrk gS fd blls 6s2 bysDVªkWu dk fo;qXeu gks losQ rFkk ,d bysDVªkWu osQ mPp d{kd esa mÙkstu ls pkj v;qfXer bysDVªkWu izkIr gks loasQA bl lewg osQ Ge ls Pb rd osQ mPprj lnL; MX2 izdkj osQ gSykbM cukus dh Hkh izo`fÙk j[krs gSaA jklk;fud ,oa Å"eh; LFkkf;Ro osQ vk/kj ij GeX2 dh rqyuk esa GeX4 vf/d LFkk;h gS] tcfd PbX4 dh rqyuk esa PbX2 vfèkd LFkk;h gksrk gSA CCl4 osQ vfrfjDr vU; lHkh VsVªkgsykbM vklkuh ls ty vi?kfVr gks tkrs gSa] D;ksafd osaQnzh; ijek.kq ty osQ vkWDlhtu ijek.kq ls dd{kd esa ,dkdh bysDVªkWu ;qXe xzg.k dj ldrs gSaA

SiCl4 dk mnkgj.k ysdj ty&vi?kVu izfØ;k dks le>k tk ldrk gSA ;fn Si osQ d- d{kd esa ty ls ,dkdh bysDVªkWu ;qXe xzg.k dj SiCl4 izkjafHkd rkSj ij ty 


vi?kfVr gksrk gS] rks varr% SiCl4] bl izdkj Si(OH)4 esa ty vi?kfVr gks tkrk gS

mnkgj.k 11-6

[SiF6]2– Kkr gS] tcfd [SiCl6]2– vKkr gSA blosQ laHkkfor dkj.k nhft,A

gy

blosQ eq[; dkj.k fuEufyf[kr gSa

(i) flfydu ijek.kq dk vkdkj NksVk gksus osQ dkj.k blosQ pkjksa vksj Dyksjhu osQ N% cM+s vkdkj okys ijek.kq O;ofLFkr ugha gks ikrs gSaA

(ii) Dyksjhu ijek.kq osQ ,dkdh bysDVªkWu ;qXe rFkk flfydu ijek.kq osQ eè; vU;ksU; fØ;k vf/d izcy ugha gksrh gSA

11-6 dkcZu dh egÙoiw.kZ izo`fÙk;k¡ ,oa vlkekU; O;ogkj

vU; lewgksa osQ izFke lnL;ksa dh Hkk¡fr bl lewg dk izFke lnL; dkcZu vius lewg osQ vU; lnL;ksa ls fHkUu O;ogkj izn£'kr djrk gSA blosQ NksVs vkdkj] mPp fo|qr~ ½.kkRedrk] mPp vk;uu ,UFkSYih rFkk dd{kdksa dh vuqiyCèkrk osQ dkj.k ,slk gksrk gSA

dkcZu esa osQoy s rFkk pd{kd gh caèku osQ fy, miyC/ jgrs gSaA vr% ;g vius pkjksa vksj osQoy pkj bysDVªkWu ;qXe gh lek;ksftr (accommodate) dj ldrk gSA ;gh dkj.k gS fd bldh vf/dre la;kstdrk pkj gksrh gS] tcfd vU; lnL; dd{kdksa dh miyC/rk osQ dkj.k viuh la;kstdrk esa o`f¼ dj ysrs gSaA

dkcZu esa Lo;a ls vFkok NksVs vkdkj ,oa mPp fo|qr~ ½.kkRedrk okys vU; ijek.kq ls pπ – pπ cgqca/ cukus dh vf}rh; {kerk (unique ability) gksrh gSA C=C, C=O, C=S, ChN vkfn blosQ dqN mnkgj.k gSaA bl lewg osQ mPprj lnL; pπ – pπ ca/ ugha cukrs gSa] D;ksafd cM+s rFkk folfjr (diffused) ijek.oh; d{kd gksus osQ dkj.k buesa izHkkoh vfrO;kiu ugha gksrk gSA

dkcZu esa vU; ijek.kqvksa osQ lkFk lgla;kstd ca/ }kjk tqM+dj yach Ük`a[kyk ;k oy; cukus dh izo`fÙk gksrh gSA bl izo`fr dk  Ük`a[kyu (catenation) dgrs gSaA C-C ca/ vfèkd etcwr gksus osQ dkj.k ;g gksrk gSA oxZ esa Åij ls uhps tkus ij c<+rk gqvk vkdkj rFkk ?kVrh gqbZ fo|qr~ ½.kkRedrk osQ dkj.k Ük`a[kyu dh izo`fÙk ?kVrh tkrh gSA bls ca/ ,UFkSYih eku ls Li"Vr% le>k tk ldrk gSA lewg&14 esa Ük`a[kyu dk Øe gksrk gSA ysM Ük`a[kyu ugha n'kkZrk gSA

ca/ ca/ ,UFkSYih / kJ mol-1
C—C  348
Si—Si 297
Ge—Ge  260
Sn—Sn 240

Ük`a[kyu rFkk pπ– pπ ca/&fuekZ.k osQ dkj.k dkcZu fofHk=k vij:i n'kkZrk gSA

11-7 dkcZu osQ vij:i

dkcZu osQ fØLVyh; vkSj vfØLVyh;&nksuksa gh vij:i gksrs gSaA ghjk rFkk xzSiQkbV dkcZu osQ nks izeq[k fØLVyh; :i gSaA ,p- MCY;w- ØksVks] bZ- LeSys rFkk vkj- ,iQ- dyZ (H.W. Kroto, E. Smalley and R.F. Curl) us lu~ 1985 esa dkcZu osQ ,d vU; :i iqQyjhu dh [kkst dhA bl [kkst osQ dkj.k bUgsa lu~ 1996 esa ukscsy iqjLdkj iznku fd;k x;kA

fp=k 11-3 ghjk dh lajpuk

11-7-1 ghjk

ghjk esa fØLVyh; tkyd gksrk gSA blesa izR;sd ijek.kq sp3 ladfjr gksrk gS rFkk prq"iQydh; T;kfefr ls vU; pkj dkcZu ijek.kqvksa ls tqM+k jgrk gSA blesa dkcZu&dkcZu ca/ yackbZ 154 pm gksrh gSA dkcZu ijek.kq fnd (space) esa n`<+ f=kfoeh; tkyd (rigid three dimensional network) dk fuekZ.k djrs gSaA bl lajpuk (fp=k 11-3) esa laiw.kZ tkyd esa fn'kkRed lgla;kstd ca/ mifLFkr jgrs gSaA bl izdkj foLr`r lgla;kstd ca/u dks rksM+uk dfBu dk;Z gksrk gSA vr% ghjk i`Foh ij ik;k tkus okyk lokZfèkd dBksj inkFkZ gSA bldk mi;ksx /kj rst djus osQ fy, vi?k"kZd (abrasive) osQ :i esa] :ink (Dies) cukus esa rFkk fo|qr~&izdk'k ySEi esa VaxLVu rarq (filament) cukus esa gksrk gSA

mnkgj.k 11-7

ghjk esa lgla;kstu gksus osQ mijkar Hkh xyukad mPp gksrk gSA D;ksa\

gy

ghjk esa etcwr C—C ca/;qDr f=kfoeh; lajpuk gksrh gS] ftls rksM+uk dkiQh dfBu gksrk gSA vr% bldk xyukad mPp gksrk gSA

11-7-2 xzSiQkbV

xzSiQkbV ijrh; dh lajpuk (layered structure) gksrh gSA ;s ijrsa okUMjoky cy }kjk tqM+h jgrh gSaA nks ijrksa osQ eè; dh nwjh 340 pm gksrh gSA izR;sd ijr esa dkcZu ijek.kq "kV~dks.kh; oy; (Hexagonal rings) osQ :i esa O;ofLFkr gksrs gSa] ftlesa C-C ca/ yackbZ 141.5 pm gksrh gSA "kV~dks.kh; oy; esa izR;sd dkcZu ijek.kq (sp2) ladfjr gksrk gSA izR;sd dkcZu ijek.kq rhu fudVorhZ dkcZu ijek.kqvksa ls rhu flXek ca/ cukrk gSA bldk pkSFkk bysDVªkWu p-ca/ cukrk gSaA laiw.kZ ijr esa bysDVªkWu foLFkkuhÑr gksrs gSaA bysDVªkWu xfr'khy gksrs gSa] vr% xzSiQkbV fo|qr~ dk lqpkyd gksrk gSA xzSiQkbV dks ijrksa osQ ry esa vklkuh ls rksM+k tk ldrk gSA ;gh dkj.k gS fd xzSiQkbV eqyk;e (soft) rFkk fpduk (slippery) gksrk gSA mPp rki ij ftu e'khuksa esa rsy dk iz;ksx Lusgd (lubricant) osQ :i esa ugha gks ldrk gS] muesa xzSiQkbV 'kq"d Lusgd dk dk;Z djrk gSA

fp=k 11-4 xzSiQkbV dh lajpuk

11-7-3 iqQyjhUl

ghfy;e] vkWxZu vkfn vfØ; xSlksa dh mifLFkfr esa tc xzSiQkbV dks fo|qr~ vkoZQ (electric arc) esa xje fd;k tkrk gS] rc iqQyjhu dk fuekZ.k gksrk gSA okf"ir y?kq Cn v.kqvksa dks la?kfur djus ij izkIr dTtyh inkFkZ (sooty material) esa eq[; :i ls C60 oqQN va'k C70 rFkk vfr lw{e ek=kk esa 350 ;k vf/d lela[;k esa dkcZu iqQyjhu esa ik, x,A iqQyjhu dkcZu dk 'kq¼re :i gS] D;ksafd iqQyjhu esa fdlh izdkj dk >wyrk ca/ (dangling bonds) ugha gksrk gSA iqQyjhu dh lajpuk fiatjkuqek gksrh gSA (C60) v.kq dh vkÑfr lkWdj ckWy osQ leku gksrh gSA bls cdfeULVj iqQyjhu (Buckminster fulerene) dgrs gSa (fp=k 11-5)A

fp=k 11-5 (C60) cdfeULVj iqQyjhu dh lajpuk% v.kq dh vkÑfr lkWdj ckWy (iqQVckWy) dh rjg gksrh gS

blesa N% lnL;h; chl oy; rFkk ik¡p lnL;h; ckjg oy; gksrh gSaA ,d N% lnL;h; oy; N% vFkok ik¡p lnL;h; oy; osQ lkFk laxfyr (Fused) jgrh gS] tcfd ik¡p lnL;h; oy; osQoy N% lnL;h; oy; osQ lkFk laxfyr voLFkk esa jgrh gSA lHkh dkcZu ijek.kq leku gksrs gSa rFkk (sp2) ladfjr gksrs gSaA izR;sd dkcZu ijek.kq vU; rhu dkcZu ijek.kqvksa osQ lkFk rhu vkca/ cukrk gSA pkSFkk bysDVªkWu iwjs v.kq ij foLFkkuhÑr jgrk gS] tks v.kq dks ,sjkseSfVd xq.k iznku djrk gSA bl xsanuqek v.kq esa 60 mnxz (vertices) gksrs gSaA izR;sd mnxz ij ,d dkcZu ijek.kq gksrk gSA bl ij nksuksa ,dy rFkk f}ca/ gksrs gSa] ftldh C-C dh yackbZ Øe'k% 143.5 pm rFkk 138.3 pm gksrh gSA xksykdkj iqQyjhu dks ^cdh ckWy* (Bucky ball) Hkh dgrs gSaA

,d egÙoiw.kZ rF; ;g gS fd Å"ekxfrd :i ls dkcZu dk lokZf/d LFkk;h vij:i xzSiQkbV gSA vr% xzSiQkbV osQ dks 'kwU; ekuk tkrk gSA ghjk rFkk iqQyjhu osQ osQ eku Øe'k% 1.90 rFkk 38.1 kJ mol–1 gksrs gSaA dkcZu rÙo osQ vU; :i (tSlsdkcZu CySd] dksd] pkjdksy vkfn) xzSiQkbV rFkk iqQyjhu osQ v'kq¼ :i gSaA ok;q dh lhfer ek=kk esa gkbMªksdkcZu dks tykus ij dkcZu CySd izkIr gksrk gSA ok;q dh vuqifLFkfr esa ydM+h vFkok dks;yk dks xje djus ij pkjdksy rFkk dksd izkIr gksrs gSaA

11-7-4 dkcZu osQ mi;ksx

IykfLVd inkFkZ esa var%LFkkfir xzSiQkbV rarq mPp lkeF;Z okyh gydh oLrq,¡ cukrs gSaA bu oLrqvksa dk mi;ksx eNyh idM+us dh NM+ (fishing rods), Vsful jSosQV] ok;q;ku rFkk Mksaxh (canoes) cukus esa gksrk gSA fo|qr~ dk vPNk izpkyd gksus osQ dkj.k xzSiQkbV dk mi;ksx cSVjh osQ bysDVªksM cukus esa rFkk vkS|ksfxd fo|qr~&vi?kVu esa gksrk gSA xzSiQkbV }kjk fu£er Øwflfcy ruq vEyksa rFkk {kkjksa osQ izfr vfØ; gksrh gSaA vR;fèkd lja/ lfØ; pkjdksy dk mi;ksx tgjhyh xSlksa dks vf/'kksf"kr djus esa gksrk gSA bldk mi;ksx tyNfu=k (water-filter) esa dkcZfud v'kqf¼;ksa dks nwj djus rFkk okrkuqowQyu esa xa/ dks fu;af=kr djus esa gksrk gSA dkcZu L;kg (carbon black) dk mi;ksx Ñ".kjatd cukus esa rFkk Lopkfyr okguksa osQ Vk;j esa iwjd osQ :i esa vkSj dksd dk mi;ksx eq[;r% /krqdeZ esa vipk;d osQ :i esa rFkk b±/u osQ :i esa gksrk gSA ghjk ,d ewY;oku iRFkj gS] ftldk mi;ksx vkHkw"k.kksa esa gksrk gSA bls oSQjsV (,d oSQjsV = 200 mg) esa ekik tkrk gSA

11-8 dkcZu rFkk flfydu osQ izeq[k ;kSfxd

dkcZu osQ vkWDlkbM dkcZu osQ nks egÙoiw.kZ vkWDlkbM&dkcZu eksuksvkWDlkbM (CO) rFkk dkcZu MkbvkWDlkbM (CO2) gSaA

11-8-1 dkcZu eksuksvkWDlkbM

vkWDlhtu vFkok ok;q dh lhfer ek=kk esa ok;q osQ lh/s vkWDlhdj.k ij dkcZu eksuksvkWDlkbM izkIr gksrh gS

lkanz lYÝ;wfjd vEy 373 K ij iQkW£ed vEy osQ }kjk futZyhdj.k djkus ij vYi ek=kk esa 'kq¼ dkcZu eksuksvkWDlkbM izkIr gksrh gS

vkS|ksfxd :i ls bls dksd ij Hkki (Steam) izokfgr djosQ cuk;k tkrk gSA bl izdkj CO rFkk H2 dk izkIr feJ.k ^okVj xSl* vFkok ^la'ys"k.k xSl* (synthesis gas) dgykrk gSA

okVj xSl

tc Hkki osQ LFkku ij ok;q dk iz;ksx fd;k tkrk gS] rc CO rFkk N2 dk feJ.k izkIr gksrk gSA bls izksM~;wlj xSl dgrs gSaA

izksM~;wlj xSl

okVj xSl rFkk izksM~;wlj xSl ,d egÙoiw.kZ vkS|ksfxd baZ/u gSaA bu nksuksa esa mifLFkr dkcZu eksuksvkWDlkbM osQ vfèkd ngu ij dkcZu MkbvkWDlkbM xSl izkIr gksrh gS rFkk Å"ek ckgj fudyrh gSA dkcZu eksuksvkWDlkbM ty esa yxHkx vfoys; jaxghu rFkk xa/ghu xSl gSA ;g ,d izcy vipk;d gSA ;g {kkjh; /krq ^{kkjh; e`nk /krq* ,syqehfu;e rFkk oqQN laØe.k rÙoksa osQ vkWDlkbM osQ vfrfjDr vU; rÙoksa osQ vkWDlkbM dks vipf;r dj nsrh gSA dkcZu eksuksvkWDlkbM osQ bl xq.k dk iz;ksx fofHkUu /krqvksa osQ vkWDlkbM v;Ld (ore) ls /krq&fu"d"kZ.k (extraction) esa gksrk gS

CO : C O : v.kq esa dkcZu rFkk vkWDlhtu osQ eè; ,drFkk nks π ca/ gSA dkcZu ijek.kq ij ,dkdh bysDVªkWu ;qXe dh mifLFkfr osQ dkj.k dkcZu eksuksvkWDlkbM nkrk (doner) osQ leku O;ogkj djrh gS rFkk dbZ /krqvksa osQ lkFk xje fd, tkus ij /krq dkcksZfuy cukrh gSA CO dh vR;ar fo"kSyh izÑfr gheksXykschu osQ lkFk ,d laoqQy cukus dh bldh ;ksX;rk osQ dkj.k gksrh gS] tks vkWDlhtu&gheksXykschu laoqQy ls 300 xquk vf/d LFkk;h gksrh gSA ;g yky jDr df.kdkvksa esa mifLFkr gheksXykschu dks 'kjhj esa vkWDlhtu&izokg ls jksdrh gSA varr% bldk ifj.kke e`R;q osQ :i esa gksrk gSA

11-8-2 dkcZu MkbvkWDlkbM

ok;q dh vfèkdrk esa ;g dkcZu ;k dkcZu;qDr b±èku osQ iw.kZ ngu ij izkIr gksrh gSA

iz;ksx'kkyk esa bls oSQfYl;e dkcksZusV ij ruq HCI dh vfHkfØ;k }kjk cuk;k tk ldrk gSA

vkS|ksfxd :i esa pwuk&iRFkj (lime stone) dks xje djosQ ;g cuk;k tkrk gSA

dkcZu MkbvkWDlkbM ,d jaxghu rFkk xa/ghu xSl gSA ty esa bldh vYifoys;rk blosQ tSo jklk;fud (chemical) rFkk Hkw&jklk;fud (geo-chemical) egÙo dks crkrh gSA ty osQ lkFk ;g dkcksZfud vEy cukrh gS] tks ,d nqcZy f}{kkjdh; vEy gSA os fuEufyf[kr nks inksa ls fo;ksftr gksrs gSa

image47

H2CO3/HCO3dk ciQj foy;u jDr dh pH dks 7.26 ls 7.42 osQ eè; vuqjf{kr j[krk gSA vEyh; izd`fr gksus osQ dkj.k {kkjksa osQ lkFk fØ;k dj /krq&dkcksZusV cukrk gSA

dkcZu MkbvkWDlkbM ok;qeaMy esa ~0.03% (vk;ru ls) mifLFkr jgrk gS] ftldk mi;ksx izdk'k&la'ys"k.k (photosynthesis) izfØ;k esa gksrk gSA bl izfØ;k esa gjs ikS/s ok;qeaMyh; CO2 dks dkcksZgkbMªsV (tSlsXywdksl) esa ifjo£rr dj nsrs gSaA bl izfØ;k esa jklk;fud ifjorZu dks bl izdkj izn£'kr fd;k tk ldrk gS

bl izfØ;k }kjk ikS/s tarqvksa] euq";ksa rFkk Lo;a osQ fy, Hkkstu cukrs gSaA dkcZu eksuksvkWDlkbM osQ foijhr ;g fo"kSyh izÑfr dh ugha gksrh gS] ijarq thok'e bZaèku (fossil fuels) osQ c<+rs ngu rFkk lhesUV&fuekZ.k osQ fy, pwuk&iRFkj (lime stone) osQ fo?kVu osQ dkj.k ok;qeaMy esa CO2 dh ek=kk c<+rh gS] ftlls ok;qeaMy osQ rki esa o`f¼ gks jgh gSA bls gfjr x`g&izHkko (Green House Effect) dgrs gSaA blosQ vusd nq"ifj.kke lkeus vk, gSaA

nzfor CO2 dk izlkj 'kh?kzrk ls gksus osQ dkj.k dkcZu MkbvkWDlkbM xSl dks 'kq"d ciZQ (dry ice) osQ :i esa izkIr fd;k tk ldrk gSA 'kq"d ciZQ dk mi;ksx vkblØhe rFkk fge'khfrr Hkkstu (frozen food) osQ fy, iz'khrd osQ :i esa rFkk xSlh; CO2 dk mi;ksx dkcksZuhÑr e`nq is; (soft drinks) esa] ok;q ls Hkkjh rFkk ngu esa lgk;d ugha gksus osQ dkj.k bldk mi;ksx vfXu'kked (fire exlinguisher) osQ :i esa gksrk gSA CO2 dk mi;ksx c`gn~ ek=kk esa ;wfj;k osQ fuekZ.k esa gksrk gSA

CO2 v.kq esa dkcZu ijek.kq sp ladfjr gksrk gSA dkcZu ijek.kq nks sp ladfjr d{kd] vkWDlhtu ijek.kq osQ nks
p–d{kdksa osQ lkFk vfrO;kiu djosQ nks flXek ca/ cukrs gSa] tcfd dkcZu ijek.kq osQ 'ks"k nks bysDVªkWu vkWDlhtu ijek.kq osQ lkFk pπ – pπ ca/ cukrs gSaA iQyr% bldh vkÑfr js[kh; gksrh gS] ftlesa nksuksa C—O ca/ksa dh yackbZ ,d leku (115 pm) jgrh gSA blesa dksbZ f}/zqo vk?kw.kZ ugha gksrk gSA CO2 dh vuquknh lajpukvksa dks bl izdkj izn£'kr dj ldrs gSa

dkcZu MkbvkWDlkbM dh vuquknh lajpuk

11-8-3 flfydu MkbvkWDlkbM (SiO2)

Hkw&iiZVh dk 95% Hkkx flfydk ,oa flfyosQV ls cuk gSA flfydu MkbvkWDlkbM] ftls lkekU;r% ^flfydk* uke ls tkuk tkrk gS] vusd fØLVy lajpukRed (Crystallographic) :i esa feyrk gSA flfydk osQ oqQN :i DokV~tZ (quartz), fØLVykscsykbV (Cristobalite) rFkk VªkbMkbekbV (Tridymite) gSa] tks mfpr rki ij varjifjorZuh; gksrh gSaA flfydu MkbvkWDlkbM ,d lgla;kstd f=kfoeh; tkyd;qDr Bksl gS] ftlesa flfydu ijek.kq prq"iQydh; :i esa pkj vkWDlhtu ijek.kqvksa ls lgla;ksftr caf/r jgrk gSA izR;sd vkWDlhtu ijek.kq foijhrr% nwljs flfydu ijek.kq ls tqM+k jgrk gS] tSlk fp=k 11-6 esa n'kkZ;k x;k gSA izR;sd dksuk nwljs prq"iQyd ls lkf>r jgrk gSA laiw.kZ fØLVy dks ,d ,sls c`gn~ v.kq osQ :i esa ekuk tk ldrk gS] ftlesa flfydu rFkk vkWDlhtu ijek.kqvksa dh ,dkarj Øe esa vkB lnL;h; oy; curh gSA

fp=k 11-6 % SiO2 dh f=kfoeh; lajpuk

flfydk vius lkekU; :i esa vfr mPp Si – O caèk ,UFkSYih gksus osQ dkj.k vfØ;k'khy gksrk gSA mPp rki ij flfydk] gSykstsu] MkbgkbMªkstu] vf/dka'k vEyksa rFkk èkkrqvksa osQ izgkj dks izfrjksfir djrk gS] gkyk¡fd HF rFkk NaOH ls fØ;k djrk gSA

SiO2 + 2NaOH Na2SiO3 + H2O

SiO2 + 4HF SiF4 + 2H2O

DokV~Zt+ dk foLr`r mi;ksx nkc&fo|qr~ (Piezoelectric) inkFkZ cukus esa gksrk gSA blls vfr;FkkFkZ ?kfM+;k¡, vkèkqfud jsfM;ks] nwjn'kZu&izlkj.k] xfr'khy jsfM;ks lapkj O;oLFkk vkfn dk fuekZ.k laHko gks ldkA flfydk tSy dk mi;ksx 'kq"du deZd (Drying agent), o.kZys[kh inkFkZ (Chromat- ographic material) osQ :i esa rFkk mRizsjd osQ :i esa gksrk gSA flfydk dk ,d vfØLVyh; :i (Amorphous form), dhlsyxqj (Kieselgur) dk mi;ksx Nfu=k&la;=k (Filtration plants) esa gksrk gSA

11-8-4 flfydkWu

;g dkcZ flfydkWu cgqydksa dk ,d oxZ gS] ftlesa R2SiO2 ,d iqujkorhZ bdkbZ (Repeating unit) gksrh gSA flfydkWu osQ fuekZ.k esa izkjafHkd inkFkZ ,sfYdy vFkok ,sfjy izfrLFkkih flfydu DyksjkbM] RnSiCl(4–n) gksrk gS] ftlesa R ,sfYdy vFkok ,sfjy lewg gksrk gSA tc 573K rki ij esfFky DyksjkbM] dkWij mRizsjd dh mifLFkfr esa flfydu ls fØ;k djrk gS] rks fofHkUu esfFky izfrLFkk;h Dyksjksflysu (ftudk lw=k MeSiCl3, Me2SiCl2, Me3SiCl rFkk lw{e ek=kk esa Me4Si curs gSa) MkbesfFky MkbDyksjks flysu (CH3)2SiCl2 osQ ty&vi?kVu osQ mijkar la?kuu cgqydhdj.k }kjk Ük`a[kyk cgqyd izkIr gksrs gSaA


                      flfydkWu

(CH3)3SiCl feykus ls cgqyd dh Ük`a[kyk dh yackbZ dks fu;af=kr fd;k tk ldrk gS] tks fuEukuqlkj fljs dks can dj nsrk gS

flfydkWu

v/zqoh; ,sfYdy lewgksa ls f?kjs jgus osQ dkj.k flfydkWu dh tyizfrd"khZ (Water repelling) izÑfr gksrh gSA lkekU;r% buesa mPp Å"eh; LFkkf;Ro] mPp ijkoS|qr lkeF;Z rFkk jlk;uksa ,oa vkWDlhdj.k osQ izfr izfrjks/kRedrk dk xq.k gksrk gSA buosQ foLr`r vuqiz;ksx gSaA budk mi;ksx lhfyr xzhl (Sealent grease), fo|qr~jks/h (Electricinsulater) rFkk tylg&oL=k (Waterproof fabrics) vkSj 'kY;fØ;k izlkèku&la;a=k cukus esa gksrk gSA

mnkgj.k 11-8

flfydkWu D;k gS\

gy

lkekU;r% flfydkWu Ük`a[kyk;qDr os ;kSfxd gksrs gSa] ftuesa ,sfYdy vFkok isQfuy lewg flfydu ijek.kq osQ 'ks"k ca/ fLFkfr;ksa ij gksrs gSaA ;s tyfojks/h (Hydrophobic) izÑfr osQ gksrs gSaA

11-8-5 flfyosQV

izÑfr esa cM+h ek=kk esa flfyosQV [kfut ik, tkrs gSaA buesa ls oqQN egÙoiw.kZ [kfut gSaisQYMLikj (feldspar), thvksykbV (zeolite), 'osr vHkzd (mica) rFkk ,sLcsLVl (asbestos)A flfyosQV dh ewy lajpukRed bdkbZ (fp=k 11-7)] ftuesa flfydkWu ijek.kq pkj vkWDlhtu ijek.kqvksa ls prq"iQyd :i esa caf/r jgrk gSA flfyosQV esa ;k rks ,d fofoDr (Discrete) bdkbZ mifLFkr gksrh gS vFkok bl izdkj dh dbZ bdkb;k¡ izfr flfyosQV bdkbZ dh 1, 2, 3 vFkok 4 vkWDlhtu ijek.kqvksa osQ lkFk lkf>r voLFkk esa jgrh gSA tc flfyosQV bdkb;k¡ vkil esa feyrh gSa] rks Ük`a[kfyr oy;] ijr rFkk f=kfoeh; lajpuk cukrh gSA flfyosQV lajpuk ½.kkos'k esa /ukosf'kr /krq&vk;uksa }kjk mnklhu gksrk gSA ;fn pkjksa dksus vU; prq"iQydh; bdkb;ksa osQ lkFk lkf>r gksrs gSa] rks f=kfoe tkyd dk fuekZ.k gksrk gSA

euq"; }kjk fu£er nks egÙoiw.kZ flfyosQV dk¡p rFkk lhesUV gSaA

11-8-6 thvksykbV

;fn flfydu MkbvkWDlkbM osQ f=kfofed tkyd esa ls dqN flfydu ijek.kq ,syqehfu;e ijek.kqvksa }kjk izfrLFkfir gks tkrs gSa] rks izkIr laiw.kZ lajpuk dks ^,syqfeuksflfyosQV* dgrs gSa] ftlij ,d ½.kkos'k gksrk gSA Na+, K+, Ca2+ vkfn èkuk;u bl ½.kkos'k dks larqfyr djrs gSaA blosQ mnkgj.k isQYMLikj rFkk thvksykbV gSaA isVªksjlk;u m|ksxksa esa gkbMªksdkcZu osQ Hkatu rFkk leko;ohdj.k esa thvksykbV dk foLr`r mi;ksx mRizsjd osQ :i esa gksrk gSA mnkgj.kkFkZZSM – 5 (,d thvksykbV dk izdkj) dk mi;ksx ,sYdksgkWy dks lhèkss xSlksyhu esa ifjo£rr djus esa gksrk gSA ty;ksftr thvksykbV dk mi;ksx dBksj ty osQ e`nqdj.k esa dke vkus okys vk;u fofue; jsftu cukus esa gksrk gSA

                              (d) ([k)

fp=k 11-7 % (d)  ½.kk;u dh prq"iQyd lajpuk ([k)  bdkbZ dk fu:i.k

lkjka'k

vkorZ lkj.kh esa p-CykWd lHkh izdkj osQ rÙo] /krq] v/krq rFkk mi/krq gksus osQ dkj.k vf}rh; gSaA vkorZ lkj.kh esa p-CykWd rÙoksa dk vadu N% oxks± esa 13 ls 18 rd fd;k x;k gSA ghfy;e osQ vfrfjDr budk la;kstdrk dks'k bysDVªkWfud foU;kl ns2 np1–6 gksrs gSaA buosQ vkarfjd ØksM esa mifLFkr fHkUurk osQ dkj.k buosQ HkkSfrd ,oa jklk;fud xq.k vR;f/d izHkkfor gksrs gSaA iQyr% bu rÙoksa osQ xq.kksa esa vR;f/d fHkUurk feyrh gSA oxZ vkWDlhdj.k voLFkk (group oxidation state) osQ vfrfjDr ;s rÙo vU; vkWDlhdj.k voLFkk Hkh izn£'kr djrs gSa] tks la;kstdrk bysDVªksWu ls nks bdkbZ fHkUu gksrs gSaA oxZ vkWDlhdj.k voLFkk gyosQ rÙoksa osQ fy, LFkk;h gksrh gS] ogha Hkkjh rÙoksa osQ fy, fuEu vkWDlhdj.k voLFkk LFkk;h gksrh pyh tkrh gSA vkdkj ,oa d&d{kd dh miyC/rk dk la;qDr izHkko bu rÙoksa osQ ca/ cukus dh ;ksX;rk dks izHkkfor djrk gSA gyosQ rÙo pπ - pπ ca/ cukrs gSaA ogha xq#rj rÙo dπ - pπ vFkok dπ - dπ ca/ cukrs gSaA f}rh; vkorZ esa d&d{kd dh vuqifLFkfr budh vf/dre la;kstdrk dks pkj ij lhfer djrh gS] ogha xq#rj rÙo bl lhek dks ikj djrs gSaA

lewg&13 esa cksjkWu v/krq gS] tcfd vU; lnL; /krq gSaA ca/&fuekZ.k esa dke vkusokys pkj d{kdksa (2s, 2px, 2py rFkk 2py) esa osQoy rhu la;ksth bysDVªkWu (2s22p1) dh miyC/rk osQ dkj.k cksjkWu osQ ;kSfxd bysDVªkWu U;wu gksrs gSaA ;g U;wurk cksjkWu ;kSfxd dks mÙke bysDVªkWuxzkgh cuk nsrh gSA bl izdkj cksjkWu ;kSfxd ywbl vEy dh Hkk¡fr O;ogkj djrs gSaA cksjkWu MkbgkbMªkstu osQ lkFk lgla;ksth ;kSfxd cksjsu cukrs gSaA blesa ljyre Mkbcksjsu B2H6 gSA Mkbcksjsu esa nks cksjkWu ijek.kqvksa osQ eè; lsrqca/ gkbMªkstu ijek.kq gksrs gSaA bl lsrqca/ dks f=kosaQnzh;&f}bysDVªkWu ca/ ekuk x;k gSA MkbvkWDlhtu osQ lkFk cksjkWu osQ egÙoiw.kZ ;kSfxd cksfjd vEy rFkk cksjsDl gSaA cksfjd vEy B(OH)3 ,d nqcZy ,d{kkjdh; vEy gSA ;g gkbMªkWfDly vk;u ls bysDVªkWu xzg.k dj yqbl vEy osQ leku O;ogkj djrk gSA cksjsDl Na2 [B4O5(OH)4. 8H2O ,d 'osr fØLVyh; Bksl gSA ;g eudk ijh{k.k laØe.k /krqvksa osQ fy, pkfjf=kd jax nsrk gSA

,syqehfu;e +3 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djrk gSA lewg esa uhps tkus ij Hkkjh rÙoksa dh +1 vkWDlhdj.k voLFkk LFkk;h gksrh tkrh gSA ;g vfØ; ;qXe izHkko dk ifj.kke gksrk gSA

dkcZu ,d izk:fid v/krq gS] tks vius pkjksa la;ksth bysDVªkWu (2s22p2) dk mi;ksx djosQ lgla;kstd ca/ cukrk gSA ;g Ük`a[kyk dk xq.k n'kkZrk gSA ;g u osQoy C-C ,dy ca/ osQ }kjk] vfirq cgqca/ (C=C vFkok osQ }kjk Ük`a[kyk ;k oy; cukus dh Hkh ;ksX;rk j[krk gSA Ük`a[kyu dh izo`fÙk bl Øe esa ?kVrh gS A vij:irk izn£'kr djus okys rÙo dk mÙke mnkgj.k dkcZu gSA blosQ rhu egÙoiw.kZ vij:i ghjk] xzSiQkbV rFkk iqQyjhUl gSaA dkcZu ifjokj osQ lnL; +4 rFkk +2 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djrs gSaA +4 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djus okys ;kSfxd lkekU;r% lgla;kstd izÑfr osQ gksrs gSaA xq#rj rÙoksa osQ }kjk +2 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djus dh izo`fÙk c<+rh tkrh gSA ysM dh +2 vkWDlhdj.k voLFkk +4 vkWDlhdj.k voLFkk ls vf/d LFkk;h gksrh gSA dkcZu ½.kkRed vkWDlhdj.k voLFkk Hkh izn£'kr djrk gSA dkcZu nks egÙoiw.kZ vkWDlkbM CO rFkk CO2 cukrk gSA dkcZu eksuksvkWDlkbM mnklhu gS] tcfd dkcZu MkbvkWDlkbM vEyh; izo`fÙk dh gksrh gSA dkcZu eksuksvkWDlkbM esa dkcZu ij mifLFkr ,dkdh bysDVªkWu ;qXe osQ }kjk ;g /kfRod dkcksZfuy cukrk gSA vkWDlhgheksXyksfcu dh rqyuk esa CO dk gheksXyksfcu ls cuk laoqQy vfèkd LFkk;h vkSj vR;ar fo"kSyh gksrk gSA dkcZu MkbvkWDlkbM ewyr% fo"kSyh ugha gksrh gS] ijarq pwuk&iRFkj osQ c<+rs vi?kVu rFkk thok'e b±/u osQ ngu osQ dkj.k ok;qeaMy esa CO2 dh c<+rh ek=kk us Hk;kog fLFkfr mRi dj nh gS] ftls gfjr x`g&izHkko dgrs gSaA blls ok;qeaMy dk rki c<+ tkrk gS rFkk blls xaHkhj tfVyrk,¡ mRi gks tkrh gSaA flfydk] flfydkWu rFkk flfyosQV egÙoiw.kZ ;kSfxd gSa] ftudk vuqiz;ksx m|ksx ,oa rduhd esa gksrk gSA

vH;kl

11-1 (d) B ls T1 rd rFkk ([k) C ls Pb rd dh vkWDlhdj.k voLFkkvksa oQh fHkÂrk osQ Øe dh O;k[;k dhft,A

11-2 TiCl3 dh rqyuk esa BCl3 osQ mPp LFkkf;Ro dks vki oSQls le>k,axs\

11-3 cksjkWu VªkbÝyqvksjkbM ywbl vEy osQ leku O;ogkj D;ksa izn£'kr djrk gS\

11-4 BCl3 rFkk CCl4 ;kSfxdksa dk mnkgj.k nsrs gq, ty osQ izfr buosQ O;ogkj osQ vkSfpR; dks le>kb,A

11-5 D;k cksfjd vEy izksVksuh vEy gS\ le>kb,A

11-6 D;k gksrk gS] tc cksfjd vEy dks xje fd;k tkrk gS\

11-7 BF3 rFkk dh vkÑfr dh O;k[;k dhft,A bu Lih'kh”k esa cksjkWu osQ ladj.k dks fufnZ"V dhft,A

11-8 ,syqehfu;e osQ mHk;/ehZ O;ogkj n'kkZus okyh vfHkfØ;k,a nhft,A

11-9 bysDVªkWu U;wu ;kSfxd D;k gksrs gSa\ D;k BCl3 rFkk SiCl4 bysDVªkWu U;wu ;kSfxd gSa\ le>kb,A

11-10 rFkk dh vuquknh lajpuk,¡ fyf[k,A

11-11 (d) ] ([k) ghjk rFkk (x) xzSiQkbV esa dkcZu dh ladj.k&voLFkk D;k gksrh gS\

11-12 lajpuk osQ vk/kj ij ghjk rFkk xzSiQkbV osQ xq.kksa esa fufgr fHkÂrk dks le>kb,A

11-13 fuEufyf[kr dFkuksa dks ;qfDrlaxr dhft, rFkk jklk;fud lehdj.k nhft,

(d) ysM (II) DyksjkbM Cl2 ls fØ;k djosQ PbCl4 nsrk gSA

([k) ysM (IV) DyksjkbM Å"ek osQ izfr vR;f/d vLFkk;h gSA

(x) ysM ,d vk;ksMkbM PbI4 ugha cukrk gSA

11-14 BF3 esa rFkk esa ca/ yackbZ Øe'k% 130pm rFkk 143pm gksus osQ dkj.k crkb,A

11-15 B-Cl vkca/ f}/zqo vk?kw.kZ j[krk gS] fdUrq BCl3 v.kq dk f}/zqo vk?kw.kZ 'kwU; gksrk gSA D;ksa\

11-16 futZyh; HF esa ,syqehfu;e VªkbÝyqvksjkbM vfoys; gS] ijarq NaF feykus ij ?kqy tkrk gSA xSlh; BF3 dks izokfgr djus ij ifj.kkeh foy;u esa ls ,syqehfu;e VªkbÝyqvksjkbM vo{ksfir gks tkrk gSA bldk dkj.k crkb,A

11-17 CO osQ fo"kSyh gksus dk ,d dkj.k crkb,A

11-18 CO2 dh vf/d ek=kk HkweaMyh; rkio`f¼ osQ fy, mÙkjnk;h oSQls gS\

11-19 Mkbcksjsu rFkk cksfjd vEy dh lajpuk le>kb,A

11-20 D;k gksrk gS] tc

(d) cksjsDl dks vf/d xje fd;k tkrk gSA

([k) cksfjd vEy dks ty esa feyk;k tkrk gSA

(x) ,syqfefu;e dh ruq NaOH ls vfHkfØ;k djkbZ tkrh gSA

(?k) BF3 dh fØ;k veksfu;k ls dh tkrh gSA

11-21 fuEufyf[kr vfHkfØ;kvksa dks le>kb,

(d) dkWij dh mifLFkfr esa mPp rki ij flfydu dks esfFky DyksjkbM osQ lkFk xje fd;k
tkrk gSA

([k) flfydkWu MkbvkWDlkbM dh fØ;k gkbMªkstu ÝyqvksjkbM osQ lkFk dh tkrh gSA

(x) CO dks ZnO osQ lkFk xje fd;k tkrk gSA

(?k) tyh; ,syqfeuk dh fØ;k tyh; NaOH osQ lkFk dh tkrh gSA

11-22 dkj.k crkb,

(d) lkanz HNO3 dk ifjogu ,syqehfu;e osQ ik=k }kjk fd;k tk ldrk gSA

([k) ruq NaOH rFkk ,syqehfu;e osQ VqdM+ksa osQ feJ.k dk iz;ksx viokfgdk [kksyus osQ fy, fd;k tkrk gSA

(x) xzSiQkbV 'kq"d Lusgd osQ :i esa iz;qDr gksrk gSA

(?k) ghjk dk iz;ksx vi?k"kZd osQ :i esa gksrk gSA

(M-) ok;q;ku cukus esa ,syqehfu;e feJ/krq dk mi;ksx gksrk gSA

(p) ty dks ,syqehfu;e ik=k esa iwjh jkr ugha j[kuk pkfg,A

(N) lapj.k osQcy cukus esa ,syqehfu;e rkj dk iz;ksx gksrk gSA

11-23 dkcZu ls flfydkWu rd vk;uhdj.k ,UFkSYih esa iz?kVuh; deh gksrh gSA D;ksa\

11-24 Al dh rqyuk esa Ga dh de ijek.oh; f=kT;k dks vki oSQls le>k,axs\

11-25 vij:i D;k gksrk gS\ dkcZu osQ nks egÙoiw.kZ vij:i ghjk rFkk xzSiQkbV dh lajpuk dk fp=k cukb,A bu nksuksa vij:iksa osQ HkkSfrd xq.kksa ij lajpuk dk D;k izHkko iM+rk gS\

11-26 (d) fuEufyf[kr vkWDlkbM dks mnklhu] {kkjh; rFkk mHk;/ehZ vkWDlkbM osQ :i esa oxhZÑr dhft,

CO, B2O3, SiO2, CO2, Al2O3, PbO2, Tl2O3

([k) budh izÑfr dks n'kkZus okyh jklk;fud vfHkfØ;k fyf[k,A

11-27 oqQN vfHkfØ;kvksa esa FkSfy;e] ,syqehfu;e ls lekurk n'kkZrk gS] tcfd vU; esa ;g lewg–I osQ èkkrqvksa ls lekurk n'kkZrk gSA bl rF; dks oqQN izek.kksa osQ }kjk fl¼ djsaA

11-28 tc /krq X dh fØ;k lksfM;e gkbvkWDlkbM osQ lkFk dh tkrh gS] rks 'osr vo{ksi (A) izkIr gksrk gS] tks NaOH osQ vkf/D; esa foys; gksdj foys; ladqy (B) cukrk gSA ;kSfxd (A) ruq HCl esa ?kqydj ;kSfxd (C) cukrk gSA ;kSfxd (A) dks vf/d xje fd, tkus ij ;kSfxd (D) curk gS] tks ,d fu"d£"kr /krq osQ :i esa iz;qDr gksrk gSA X, A, B, C rFkk D dks igpkfu, rFkk budh igpku osQ leFkZu esa mi;qDr lehdj.k nhft,A

11-29 fuEufyf[kr ls vki D;k le>rs gSaS\

(d) vfØ; ;qXe izHkko ([k) vij:i (x) Ük`a[kyu

11-30 ,d yo.k X fuEufyf[kr ifj.kke nsrk gS

(d) bldk tyh; foy;u fyVel osQ izfr {kkjh; gksrk gSA

([k) rhoz xje fd, tkus ij ;g dk¡p osQ leku Bksl esa Losfnr gks tkrk gSA

(x) tc X osQ xje foy;u esa lkanz H2SO4 feyk;k tkrk gS] rks ,d vEy Z dk 'osr fØLVy curk gSA

mijksDr vfHkfØ;kvksa osQ lehdj.k fyf[k, vkSj X,Y rFkk Z dks igpkfu,A

11-31 larqfyr lehdj.k nhft,

(d) ([k)

(x) (?k)

(Ä) (p)

11-32 CO rFkk CO2 izR;sd osQ la'ys"k.k osQ fy, ,d iz;ksx'kkyk rFkk ,d vkS|ksfxd fof/ nhft,A

11-33 cksjsDl osQ tyh; foy;u dh izÑfr dkSu lh gksrh gS

(d) mnklhu ([k) mHk;/ehZ (x) {kkjh; (?k) vEyh;

11-34 cksfjd vEy osQ cgqydh; gksus dk dkj.k

(d) bldh vEyh; izÑfr gSA ([k) blesa gkbMªkstu ca/ksa dh mifLFkr gSA

(x) bldh ,d{kkjh; izÑfr gSA (?k) bldh T;kfefr gSA

11-35 Mkbcksjsu esa cksjkWu dk ladj.k dkSu lk gksrk gS

(d) sp ([k) sp2 (x) sp3 (?k) dsp2

11-36 Å"ekxfrdh; :i ls dkcZu dk lokZf/d LFkk;h :i dkSu lk gS

(d) ghjk ([k) xzSiQkbV (x) iqQyjhUl (?k) dks;yk

11-37 fuEufyf[kr esa ls lewg&14 osQ rÙoksa osQ fy, dkSu lk dFku lR; gS\

(d) +4 vkWDlhdj.k izn£'kr djrs gSaA

([k) +2 rFkk +4 vkWDlhdj.k voLFkk izn£'kr djrs gSaA

(c) M2- rFkk M4+ vk;u cukrs gSaA

(?k) M2- rFkk M4 vk;u cukrs gSaA

11-38 ;fn flfydkWu&fuekZ.k esa izkjafHkd inkFkZ RSiCl3 gS] rks cuus okys mRikn dh lajpuk crkb,A


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