एकक 10 े.ब्लाॅक तत्त्व ज्भ्म् े .ठस्व्ब्ज्ञ म्स्म्डम्छज् उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के बाद आपμ ऽ क्षार - धातुओं एवं उनके यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षणों की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ क्षारीय मृदा - धातुओं एवं उनके यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षणों को समझ सवेंफगेऋ ऽ पोटर्लैंड सीमेन्ट सहित सोडियम एवं वैफल्िसयमके महत्त्वपूणर् यौगिकों के निमार्ण, गुणों एवं उपयोगों का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ सोडियम, पोटैश्िायम, मैग्नीश्िायम व वैफल्िसयमकी जैव महत्ता के बारे में जान सवेंफगे। आवतर् सारणी में े - ब्लाॅक के तत्त्व वे तत्त्व हैं। जिनमें अंतिम इलेक्ट्राॅन बाह्यतम े - कक्षक में जाता है। चूँकि े - कक्षक में अिाकतम दो ही इलेक्ट्राॅन हो सकते हैं, अतः केवल दो ही वगर् ;1 तथा 2द्ध े - ब्लाॅक तत्त्वों के अंतगर्त आते हैं। प्रथमवगर् के तत्त्व हैंμ लीथ्िायम ;स्पद्धए सोडियम ;छंद्धए पोटैश्िायम ;ज्ञद्धए रूबीडियम ;त्इद्धए सीजियम ;ब्ेद्ध एवं प्रेफन्िसयम ;थ्तद्ध। सामान्य रूप से ये तत्त्व क्षार धातुओंके रूप में जाने जाते हैं। चँूकि ये जल के साथ अभ्िािया करके क्षारीय प्रकृति के हाइड्राॅक्साइड बनाते हैं, इसलिए इन्हें ‘क्षार धातुएं’ कहते हैं। द्वितीय वगर् केतत्त्व हैंμ बेरीलियम ;ठमद्धए मैग्नीश्िायम ;डहद्धए वैफल्िसयम ;ब्ंद्धए स्ट्राॅन्िशयम ;ैतद्धए बेरियम ;ठंद्ध एवं रेडियम ;त्ंद्ध। बेरीलियम के अतिरिक्त शेष तत्त्व क्षारीय मृदा धातुओं के नाम से जाने जाते हैं। चूँकि इनके आॅक्साइड एवंहाइड्राॅक्साइड की प्रकृति क्षारीय होती है एवं ये आॅक्साइड सामान्यतः भू - पपर्टी’ ;म्ंतजी.ब्तनेजद्ध में मिलते हैं, इसलिए इन्हें ‘क्षारीय मृदा धातु’ कहते हैं। क्षार धातुओं में सोडियम एवं पोटैश्िायम प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, जबकि लीथ्िायम, रूबीडियम एवं सीजियम अल्प मात्रा में पाए जाते हैं। प्रेफन्िसयम एकअति रेडियो सिय तत्त्व है ;सारणी 10.1द्ध। प्रेफन्िसयम के अिाकतम दीघर् आयु वाले समस्थानिक 223थ्त की अधर् आयु मात्रा 21 मिनट है। क्षारीय मृदा धातुओं की भू - पपर्टी में उपस्िथति के आधार पर वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम का स्थान क्रमशः पाँचवाँ तथा छठवाँ है। स्ट्राॅन्िशयम एवं बेरियम की उपलब्धता बहुत कम है। बेरीलियम एक दुलर्भ धातु है, जबकि रेडियम की मात्रा आग्नेय शैल़ में केवल 10μ10 प्रतिशत है ;सारणी 10.2द्ध।क्षार धातुओं का सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ¹उत्कृष्ट गैसह्दे1 तथा क्षारीय मृदा - धातुओं का विन्यास ¹उत्कृष्ट गैसह्दे2 है। लीथ्िायम एवं बेरीलियम,जो क्रमशः वगर् 1 व वगर् 2 के प्रथम तत्त्व हैं, के वुफछ गुण इन वगो± के अन्यतत्त्वों से भ्िाÂ होते हैं। इस असंगत व्यवहार के कारण दोनों तत्त्व अपने ठीक आगे ’ पृथ्वी सतह पर पतली चट्टानी सतह भू - पपर्टी कहलाती है। ़ मेग्मा ;पिघली हुइर् चट्टानद्ध के शीतलन से बनी कठोर चट्टान। वाले वगर् के दूसरे तत्त्वों से गुणों में समानताएँ प्रद£शत करते हैं। लीथ्िायम के बहुत से गुण मैग्नीश्िायम तथा बेरीलियम के बहुत से गुण ऐलुमीनियम के गुणों के समान हैं। इस प्रकार की विकणर् समानताएँ आवतर् सारणी में विकणर् संबंध ;क्पंहवदंस त्मसंजपवदेीपचद्ध के रूप में संद£भत की जाती हैं। तत्त्वों के आयनिक आकार या उनके आवेश/त्रिाज्या अनुपात का समान होना ही विकणर् संबंध का मुख्य आधार है। एकल संयोजी सोडियम तथा पोटैश्िायम आयन एवं द्विसंयोजी मैग्नीश्िायम और वैफल्िसयम आयन जैव तरलों में बहुतायत में पाए जाते हैं। ये आयन जैवीय ियाओं, जैसेμ आयन का संतुलन ;डंपदजमदंदबम व् िप्वद ठंसंदबमद्ध और श्िारा आवेग संचरण ;छमतअम.पउचनसेम ब्वदकनबजपवदद्ध आदि में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। 10.1 वगर् 1 के तत्त्व: क्षार - धातुएं क्षार धातुओं के रासायनिक तथा भौतिक गुणों में परमाणु - क्रमांकके साथ एक नियमित प्रवृिा पाइर् जाती है। इन तत्त्वों के परमाण्वीय, भौतिक तथा रासायनिक गुणों का विवेचन यहाँ किया जा रहा है। 10.1.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास सभी क्षार धातुओं के तत्त्वों में एक संयोजी इलेक्ट्राॅन होता हैतथा अंतिम दूसरे कोश की उत्कृष्ट गैस की संरचना होती है;सारणी 10.1द्ध। इन तत्त्वों के बाह्यतम कोश में उपस्िथत े.इलेक्ट्राॅन को आसानी से त्यागने के कारण ये अत्यध्िकधनविद्युतीय तत्त्व एक संयोजी आयन ड़ देते हैं। अतः येप्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाए जाते हैं। तत्त्व प्रतीक इलेक्ट्राॅनिक विन्यास लीथ्िायम स्प 1े22े1 सोडियम छं 1े22े22च63े1 पोटैश्िायम ज्ञ 1े22े22च63े23च64े1 रूबीडियम त्इ 1े22े22च63े23च63क104े24च65े1 सीजियम ब्े 1े22े22च63े23च63क104े2 4च64क105े25च66े1या ख्ग्म,6े1 प्रेफन्िसयम थ्त ख्त्द,7े1 10.1.2 परमाणु तथा आयनी त्रिाज्या क्षार धातुओं के परमाणुओं का आकार आवतर् सारणी के किसी विशेष आवतर् में सवार्िाक होता है। परमाणु - क्रमांक में वृि होने के साथ - साथ परमाणु का आकार बढ़ता जाता है। एक संयोजी आयन ;ड़द्ध का आकार उसके जनक परमाणु के रसायन विज्ञान आकार की तुलना में कम होता है। क्षार धातुओं की परमाणु तथाआयनी त्रिाज्या वगर् में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती जाती है, अथार्त् इनका आकार स्प से ब्े तक बढ़ता है। 10.1.3 आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं के आयनन एन्थैल्पी का मान बहुत कम होता है। यह वगर् में लीथ्िायम से सीजियम की ओर नीचे जाने पर कम होता जाता है। इसका कारण यह है कि बढ़ते हुए नाभ्िाकीय आवेश की तुलना में बढ़ते हुए परमाणु - आकार का प्रभाव अिाक हो जाता है तथा बाह्यतम इलेक्ट्राॅन नाभ्िाकीय आवेश द्वारा भली - भाँति परिरक्ष्िात होते हैं। 10.1.4 जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी आयनिक आकार के बढ़ने पर घटती जाती है। स्प़झछं़झज्ञ़झत्इ़झब्े़ स्प की जलयोजन की मात्रा अिाकतम होती है, इसीलिए लीथ्िायम के अिाकांश लवण ;उदाहरणाथर्μ स्पब्सण्2भ्व्द्ध2जलयोजित होते हैं। 10.1.5 भौतिक गुण क्षार धातुएं बहुत ही नरम, हलकी तथा चाँदी के समान श्वेत होती हैं। बड़ा आकार होने के कारण इनका घनत्व कम होता है, जो लीथ्िायम से सीजियम की ओर नीचे जाने पर कम होता जाता है, यद्यपि पोटैश्िायम धातु सोडियम की तुलना में हलका होता है। क्षार धातुओं के गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं, जो इन धातुओं के मात्रा एक संयोजी इलेक्ट्राॅन की उपस्िथति के कारण इनके बीच दुबर्ल धात्िवक बंध को दशार्ते हैं। क्षार धातुएं तथा इनके लवण आॅक्सीकारक ज्वाला को अभ्िालाक्षण्िाक रंगप्रदान करते हैं। इसका कारण यह है कि ज्वाला की ऊष्मा इनकेबाह्यतम इलेक्ट्राॅन को उच्च ऊजार् - स्तर पर उत्तेजित कर देती है। जब ये इलेक्ट्राॅन पुनः अपनी तलस्थ अवस्था में आता है, तो दृश्य क्षेत्रा में विकिरण उत्सजर्न के कारण ज्वाला को रंग प्रदान करता है। आॅक्सीकारक ज्वाला को मिले रंग इस सारणी में दशार्ए गए हैंμधातु स्प छं ज्ञ त्इ ब्े रंग किरमिजी लाल पीला बैंगनी लाल बैंगनी नीला λ/दउ 670.8 589.2 766.5 780.0 455.5 अतः क्षार धातुओं को इनके ज्वाला - परीक्षण के द्वारा पहचाना जा सकता है तथा इनकी सांद्रता का निधर्रण ज्वाला - प्रकाशमापी ;फ्रलेम पफोटोमीट्रीद्ध अथवा परमाण्वीय अवशोषण स्पेक्ट्रोमिती ;एटाॅमिक ऐब्जाॅब्शर्न स्पेक्ट्रोस्कोपीद्ध द्वारा किया जा सकता है। इन तत्त्वों को जब प्रकाश द्वारा विकरित किया जाता है, तब प्रकाश - अवशोषण के कारण ये इलेक्ट्राॅन का परित्याग करते हैं। इसी गुण के कारण सीजियम तथा पोटैश्िायम का प्रयोग प्रकाश - विद्युत् सेल में इलेक्ट्रोड के रूप में किया जाता है। 10.1.6 रासायनिक गुण बड़े आकार तथा कम आयनन एन्थैल्पी के कारण धातुएंअत्यिाक ियाशील होती हैैं। इनकी ियाशीलता वगर् में ऊपर से नीचे क्रमशः बढ़ती जाती है। ;पद्ध वायु के साथ अभ्िाियाशीलता: क्षार धातुएं वायु की उपस्िथति में मलिन हो जाती हैं, क्योंकि वायु की उपस्िथति में इनपर आॅक्साइड तथा हाइड्राॅक्साइड की परत बन जाती है। ये आॅक्सीजन में तीव्रता से जलकर आॅक्साइड बनाती हैं। लीथ्िायम और सोडियम क्रमशः मोनोआॅक्साइड तथा पराॅक्साइड का निमार्ण करती हैं, जबकि अन्य धातुओं द्वारा सुपर आॅक्साइड आयन का निमार्ण होता है। सुपर आॅक्साइड आयन व्2दृ बड़े ध्नायनों, जैसेμ ज्ञ़ए त्इ़ तथा ब्े़ की उपस्िथति में स्थायी होता है। 4स्प ़ व् ⎯⎯→2स्प व् ;आॅक्साइडद्ध22 2छं ़ व् ⎯⎯→ छं व् ;पराॅक्साइडद्ध2 22 डव्2 डव् 2 ;सुपर आॅक्साइडद्ध ;ड त्र ज्ञए त्इए ब्ेद्ध इन सभी आॅक्साइडों में क्षार की आॅक्सीकरण अवस्था ़1 होती है। लीथ्िायम अपवादस्वरूप वायु मंे उपस्िथत नाइट्रोजन से अभ्िािया करके नाइट्राइड, स्प3छ बना लेता है। इस प्रकार लीथ्िायम भ्िान्न स्वभाव दशार्ता है। क्षार धातुओं को वायु एवं जल के प्रति उनकी अति सियता के कारण साधारणतया वैफरोसिन में रखा जाता है। उदाहरण 10.1 ज्ञव्2 में ज्ञ की आॅक्सीकरण अवस्था क्या है? हल दृसुपर आॅक्साइड को व् से दशार्या जाता है। चूँकि2 यौगिक उदासीन है, अतः इसमें ज्ञ की आॅक्सीकरण अवस्था ़1 है। ;।जवउपब ंदक च्ीलेपबंस च्तवचमतजपमे व िजीम ।सांसप डमजंसेद्ध सारणी 10.1 क्षार धातुओं के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण गुण लीथ्िायम स्प सोडियम छं पोटैश्िायम ज्ञ रूबीडियम त्इ सीजियम ब्े प्रेफन्िसयम थ्त परमाणु - क्रमांक 3 11 19 37 55 87 परमाणु द्रव्यमान ;ह उवस.1द्ध 6ण्94 22ण्99 39ण्10 85ण्47 132ण्91 ;223द्ध इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ख्भ्म, 2े1 ख्छम, 3ै1 ख्।त, 4े1 ख्ज्ञत, 5े1 ख्ग्म, 6े1 ख्त्द, 7े1 आयनन एन्थैल्पीधश्र उवस.1 520 496 419 403 376 ् 375 जलयोजन एन्थैल्पीधश्र उवस.1 दृ506 दृ406 दृ330 दृ310 दृ276 दृ धात्िवक त्रिाज्याध्चउ 152 186 227 248 265 दृ आयनी त्रिाज्या ड़ध्चउ 76 102 138 152 167 ;180द्ध गलनांकध्ज्ञ 454 371 336 312 302 दृ क्वथनांकध्ज्ञ 1615 1156 1032 961 944 दृ घनत्वध्ह बउ.3 0ण्53 0ण्97 0ण्86 1ण्53 1ण्90 दृ मानक विभव म्टध्ट ;ड़ध्डद्ध के लिए दृ3ण्04 दृ2ण्714 दृ2ण्925 दृ2ण्930 दृ2ण्927 दृ स्थलमंडल़ में प्राप्ित 18’ 2ण्27’’ 1ण्84’’ 78दृ12’ 2दृ6’ ् 10दृ18’ ’ चचउ ;च्ंतज चमत उपससपवदद्धए ’’भारात्मक:ए ़ स्थलमंडलः पृथ्वी का बाह्यतलऋ इसकी पपर्टी तथा ऊपरी मंेटल का भाग। ;पपद्ध जल के साथ अभ्िाियाशीलता: क्षार धातुएं जल के साथ अभ्िािया करके हाइड्राॅक्साइड एवं डाइहाइड्रोजन बनाती हैं। 2 ⎯⎯→ 2ड ़़ 2व्भ् −़ भ्22ड ़ 2भ् व् ;ड त्र क्षार धातुद्ध यद्यपि लीथ्िायम के म्0 का मान अिाकतम )णात्मक होता है, परंतु जल के साथ इसकी अभ्िाियाशीलता सोडियम की तुलना मंे कम है, जबकि सोडियम के म्0 का मान अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा न्यून )णात्मक होता है। लीथ्िायम के इस व्यवहार का कारण इसके छोटे आकार तथा अत्यिाकजलयोजन ऊजार् का होना है। अन्य क्षार धातुएं जल के साथ विस्पफोटी अभ्िािया करती हैं। ये क्षार धातुएं प्रोटाॅनदाता ;जैसेμऐल्कोहाॅल, गैसीय अमोनिया, ऐल्काइन आदिद्ध से भी अभ्िाियाएं करती हैं। ;पपपद्ध डाइहाइड्रोजन से अभ्िाियाशीलता: लगभग 673ज्ञ ;लीथ्िायम के लिए 1073ज्ञद्ध पर क्षार धातुएं डाइहाइड्रोजन से अभ्िािया कर हाइड्राइड बनाती हैं। सभी क्षार धातुओं के हाइड्राइड ठोस एवं आयनिक होते हैं। इन हाइड्राइडों के गलनांक उच्च होते हैं। ़−2ड ़ भ्2 ⎯⎯→ 2ड भ्;पअद्धहैलोजन से अभ्िाियाशीलता: क्षार धातुएं हैलोजन से शीघ्र प्रबल अभ्िािया करके आयनिक हैलाइड ड़ ग्दृ बनाती हैं, हालाँकि लीथ्िायम के हैलाइड आंश्िाक रूप से सहसंयोजक होते हैं। इसका कारण लीथ्िायम की उच्च ध्रुवण - क्षमता है। ;धनायन के कारण )णायन के इलेक्ट्राॅनअभ्र का विकृत होना ‘ध्रुवणता’ कहलाता है।द्ध लीथ्िायम आयन का आकार छोटा है, अतः यह हैलाइड आयन केइलेक्ट्राॅन अभ्र को विकृत करने की अिाक क्षमता दशार्ताहै। चूँकि बड़े आकार का )णायन आसानी से विकृत होजाता है, इसलिए लीथ्िायम आयोडाइड सहसंयोजक प्रकृति सबसे अिाक दशार्ते हैं। ;अद्ध अपचायक प्रकृति: क्षार धातुएं प्रबल अपचायक के रूप में कायर् करती हैं, जिनमें लीथ्िायम प्रबलतम एवं सोडियम दुबर्लतम अपचायक हैं ;सारणी 10.1द्ध। मानक इलेक्ट्रोड विभव ;म्0द्धए जो अपचायक क्षमता का मापक है, संपूणर् परिवतर्न का प्रतिनििात्व करता हैμ ड;ेद्ध ⎯⎯→ड;हद्ध ऊध्वर्पातन एन्थैल्पी ़−ड;हद्ध ⎯⎯→ ड ;हद्ध ़म आयनन एन्थैल्पी ़ ़ड;हद्ध ़ भ्व् ⎯⎯→ड;ंुद्ध जलयोजन एन्थैल्पी2 लीथ्िायम आयन का आकार छोटा होने के कारण इसकी जलयोजन एन्थैल्पी का मान अिाकतम होता है, जो इसके उच्च )णात्मक म्0 मान तथा इसके प्रबल अपचायक होने की पुष्िट करता है। उदाहरण 10.2 दृब्स2ध्ब्सदृ के लिए म्0 का मान ़1ण्36ए प्2ध्प् के लिए ़ 0ण्53ए ।ह़ध्।ह के लिए ़0ण्79ए छं़ध्छं के लिए दृ2ण्71 एवं स्प़ध्स्प के लिए दृ3ण्04 है। निम्नलिख्िात को उनकी घटती हुइर् अपचायक क्षमता के अनुसार व्यवस्िथत कीजिएμ प्दृ ए ।हए ब्सदृए स्पए छं हल क्रम इस प्रकार है: स्प झ छं झ सदृ झ ।ह झ ब्सदृ ;अपद्ध द्रव अमोनिया में विलयन: क्षार धातुएं द्रव अमोनिया में घुलनशील हैं। अमोनिया में इनके विलयन का रंग गहरानीला होता है एवं विलयन प्रकृति में विद्युत् का सुचालक होता हैμ ड;ग ़ लद्धछभ् ⎯⎯→ ़़ ख्म;छभ् द्ध , दृ़ ख्ड;छभ् द्ध , 3 3ग 3ल विलयन का नीला रंग अमोनीकृत इलेक्ट्राॅनों के कारणहोता है, जो दृश्यप्रकाश क्षेत्रा की संगत ऊजार् का अवशोषणकरके विलयन को नीला रंग प्रदान करते हैं। अमोनीकृत विलयन अनुचुंबकीय ;च्ंतंउंहदमजपबद्ध होता है, जो वुफछ समय पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है। पफलस्वरूप विलयन में ऐमाइड बनता है। ड़़ म−़ छभ् ;1द्ध → डछभ् ़ )भ् ;हद्ध ;ंउद्ध 3 2;ंउद्ध 2 ;जहाँ श्ंउश् अमोनीकृत विलयन दशार्ता है।द्ध सांद्र विलयन में नीला रंग ब्राॅन्ज रंग में बदल जाता है और विलयन प्रतिचुंबकीय ;क्पंउंहदमजपबद्ध हो जाता है। 10.1.7 उपयोग लीथ्िायम का उपयोग महत्त्वपूणर् मिश्रातुओं के निमार्ण में होता है। उदाहरणाथर्μलैड के साथ यह श्वेत धातु ;ॅीपजम उमजंसद्ध बनाता है, जिससे इंजन की बियरिंग बनाइर् जाती है। ऐलुमीनियम के साथ मिलकर लीथ्िायम उच्च शक्ित का मिश्रातु बनाता है, जिसका उपयोग वायुयानों के निमार्ण में होता है। मैग्नीश्िायम के साथ उसवफी मिश्रातु का उपयोग कवच - प्लेट ;।तउवनतचसंजमद्ध बनाने में तथा लीथ्िायम का उपयोग ताप नाभ्िाकीय अभ्िाियाओं के अतिरिक्त विद्युत् रासायनिक सेलों में भी होता है। सोडियम का उपयोग छंध्च्इ मिश्रातु में होता है, जो च्इम्ज तथा च्इडम के निमार्ण के लिए आवश्यक है। इन44काबर्लैड यौगिकों का उपयोग पूवर् में पेट्रोल में अपस्पफोटरोधी ;।दजपीादवबाद्ध के रूप में होता था, परंतु अब अिाकतर वाहनों में सीसारहित ;स्मंक.तिममद्ध पेट्रोल का उपयोग होने लगा है। द्रव सोडियम धातु का उपयोग नाभ्िाकीय रिऐक्टर में शीतलक ;ब्ववसंदजद्ध के रूप में होता है। जैवीय ियाओं मेंपोटैश्िायम की महत्त्वपूणर् भूमिका है। पोटैश्िायम क्लोराइड का उपयोग उवर्रक के रूप में तथा पोटैश्िायम हाइड्राॅक्साइड का उपयोग मृदु साबुन के निमार्ण में और काबर्न डाइआॅक्साइड के अवशोषक के रूप में भी होता है। सीजियम का उपयोग प्रकाश वैद्युत् सेल ;च्ीवजवमसमबजतपब बमससेद्ध में होता है। 10.2 क्षार धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षण क्षार धातुओं के सभी यौगिक साधारणतया आयनिक प्रकृति के होते हैं। इनमें से वुफछ यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षणों की विवेचना यहाँ की जा रही है। 10.2.1 आॅक्साइड एवं हाइड्राॅक्साइड वायु के आिाक्य में दहन करने पर लीथ्िायम मुख्य रूप से मोनोआॅक्साइड स्पव् ;एवं वुफछ पराॅक्साइड स्पव्द्ध, सोडियम222पराॅक्साइड छंव् ;एवं वुफछ सुपर आॅक्साइड छंव् भीद्ध222बनाते हैं, जबकि पोटैश्िायम, रूबीडियम तथा सीजियम सुपर आॅक्साइड ;डव्द्ध बनाते हैं। अनुवूफल परिस्िथतियों में डव्ए22डव् एवं डव् शु( रूप में बनाए जा सकते हैं। धातु - आयनों222का आकार बढ़ने के साथ - साथ पराॅक्साइडों तथा सुपर आॅक्साइडों के स्थायित्व में भी वृि होती है। इसका कारण जालकऊजार् - प्रभाव ;स्ंजजपबम म्दमतहल म्मििबजद्ध के पफलस्वरूप बड़े )णायनों का बड़े धनायनों द्वारा स्थायित्व प्रदान करना है। ये आॅक्साइड सरलतापूवर्क जल अपघटित होकर हाइड्राॅक्साइड मंे परिवतिर्त हो जाते हैं। डव् भ्व् ⎯⎯→ 2ड़़ 2भ्दृ 2 ़ 2व्डव् ़ 2भ्व् ⎯⎯→ 2ड़़ 2व्भ्दृ ़ भ्व्222 22 2डव् ़ 2भ्व् ⎯⎯→ 2ड़़ 2व्भ्दृ ़ भ्व् ़ व्2 2 222 शु( अवस्था में आॅक्साइड एवं पराॅक्साइड रंगहीन होते हैं, परंतु सुपर आॅक्साइड पीले या नारंगी रंग के होते हैं। सुपर आॅक्साइड भी अनुचुंबकीय ;च्ंतंउंहदमजपबद्ध होते हैं। अकाबर्निक रसायन में सोडियम पराॅक्साइड को आॅक्सीकारक के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। उदाहरण 10.3 ज्ञव्2 अनुचंुबकीय क्यों होता है? हल दृज्ञव्2 तथा व्2 में एक अयुग्िमत इलेक्ट्राॅन π’2च आण्िवक आ£बटल में होने के कारण ज्ञव्2 अनुचंुबकीय होता है। आॅक्साइड तथा जल - अभ्िािया से प्राप्त हाइड्राॅक्साइड श्वेत िस्टलीय ठोस होते हैं। क्षार धातुओं के हाइड्राॅक्साइडप्रबलतम क्षारक होते हैं। ये जल में अत्यिाक ऊष्मा के उत्सजर्न के साथ आसानी से घुल जाते हैं। जल में इनके घुलने का कारण तीव्र जलयोजन है। 10.2.2 हैलाइड क्षार धातुओं के हैलाइड, डग्ए ;ग् त्र थ्ए ब्सए ठतए सद्ध उच्च गलनांक वाले रंगहीन, िस्टलीय ठोस पदाथर् होते हैं। इन्हें उपयुक्त आॅक्साइड, हाइड्राॅक्साइड या काबार्ेनेट की हाइड्रोहेलिक अम्ल ;भ्ग्द्ध के साथ अभ्िािया करके बनाया जा सकता है। इन सभी हैलाइडों की संभवन एन्थैल्पी उच्च )णात्मक होतीहै। क्षार धातुओं के फ्रलुओराइडों के Δभ्0 का मान वगर् में नीचेिकी ओर बढ़ने पर कम )णात्मक होता जाता है, जबकि इन क्षार धातुओं के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड के Δभ्0 िका मान ठीक इससे विपरीत होता है। किसी धातु - विशेष के लिए Δभ्0 का मान फ्रलुओराइड से आयोडाइड तक हमेशा कमि)णात्मक होता जाता है। गलनांक एवं क्वथनांक का क्रम हमेशा फ्रलुओराइड झ क्लोराइड झ ब्रोमाइड झ आयोडाइड के अनुसार होता है। ये सभी हैलाइड जल में घुलनशील होते हैं। जल में स्पथ् की निम्न विलेयता इसकी उच्च जालक ऊजार् ;स्ंजपबम म्दमतहलद्ध के कारण तथा ब्ेस की निम्न विलेयता ब्े़ तथा प्दृ की निम्न जलयोजन ऊजार् ;भ्लकतंजपवद म्दमतहलद्ध के कारण है। लीथ्िायम के अन्य हैलाइड एथानाॅल, ऐसीटोन और एथ्िाल ऐसीटेट में घुलनशील हैं। स्पब्स पिरीडीन में भी घुलनशील हैं। 10.2.3 आॅक्सो - अम्लों के लवण आॅक्सो - अम्ल वे होते हैं, जिनमें जिस परमाणु पर अम्लीय प्रोटाॅन से युक्त हाइड्राॅक्िसल समूह होता है, उसी परमाणु पर आॅक्सो समूह जुड़ा रहता है। जैसेμकाबार्ेनिक अम्ल, भ्ब्व्23 ख्व्ब्;व्भ्द्ध2, सल्फ्रयूरिक अम्ल, भ्2ैव्4 ख्व्2ै;व्भ्द्ध2, क्षार धातुएंμसभी आॅक्सो - अम्लों के साथ लवण बनाते हैं। ये साधारणतया जल में घुलनशील होते हैं तथा तापीय स्थायी होते हैं। इनके काबार्ेनेटों ;डब्व्द्ध एवं हाइड्रोजन काबार्ेनेटों23;डभ्ब्व्3द्ध का तापीय स्थायित्व अत्यिाक होता है। चूँकिवगर् में ऊपर से नीचे धनविद्युतीय स्वभाव बढ़ता है, अतः काबोर्नेटों एवं हाइड्रोजन काबार्ेनेटों का स्थायित्व भी बढ़ता है। लीथ्िायम काबार्ेनेट ताप के प्रति अिाक स्थायी नहीं होता है। लीथ्िायम का आकार छोटा होने के कारण यह बड़े )णापन 2दृब्व् को ध्ु्रवित कर अध्िक स्थायी स्पव् एवं ब्व्का3 22 विरचन करता है। इसके हाइड्रोजन काबोर्नेट का अस्ितत्व ठोस अवस्था में नहीं होता है। 10.3 लीथ्िायम का असंगत व्यवहार निम्नलिख्िात कारणों से लीथ्िायम का व्यवहार असंगत हैμ ;कद्ध इसके परमाणु एवं आयन ;स्प़द्ध का असामान्य छोटा आकार, ;खद्ध उच्च ध््रुवण - क्षमता ;अथार्त् आवेश/त्रिाज्या अनुपातद्ध।परिणामस्वरूप लीथ्िायम यौगिकों की सहसंयोजक प्रवृिा अिाक होती है। इसी कारण ये काबर्निक विलायकों में घुलनशील होते हैं। लीथ्िायम मैग्नीश्िायम से विकणर् संबंध दशार्ता है, जिसका वणर्न आगे ;खंड 10.3.2 मेंद्ध दिया गया है। 10.3.1 लीथ्िायम एवं अन्य क्षार धतुओं में असमानताओं के मुख्य ¯बदु ;पद्ध लीथ्िायम अत्यिाक कठोर है। इसका गलनांक एवं क्वथनांक अन्य क्षार धातुओं की तुलना में अिाक है। ;पपद्ध लीथ्िायम की अभ्िाियाशीलता अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा सबसे कम है, परंतु यह प्रबलतम अपचायक का कायर् करता है। वायु में दहन के पफलस्वरूप लीथ्िायम मुख्यतः मोनोआॅक्साइड ;स्प2व्द्ध बनाता है। अन्य क्षार धातुओं के विपरीत लीथ्िायम नाइट्रोजन के साथ अभ्िािया करके नाइट्राइड ;स्प3छद्ध भी बना लेता है। ;पपपद्ध स्पब्स प्रस्वेद्य ;क्मसपुनमेबमदजद्ध है एवं हाइड्रेट, स्पब्सण्2भ्2व् के रूप में िस्टलित होता है, जबकि अन्य क्षार धातुओं के क्लोराइड हाइड्रेट नहीं बनाते हैं। ;पअद्ध लीथ्िायम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट ठोस अवस्था में प्राप्य नहीं है, जबकि अन्य क्षार धातु ठोस हाइड्रोजनकाबोर्नेट बनाते हैं। ;अद्ध लीथ्िायम एथाइन ;म्जीलदमद्ध से अभ्िािया करके एथाइनाइड ;म्जीलदपकमद्ध नहीं बनाता है, जबकि अन्य क्षार धातुएं ऐसा करती हैं। ;अपद्ध लीथ्िायम नाइट्रेट गरम करने पर लीथ्िायम आॅक्साइड, स्प2व् देता है, जबकि अन्य क्षार धातुएं नाइट्रेट विघटित होकर नाइट्राइट देती हैं। 4स्पछव् 2स्प व् 4छव् व्32 22 2छंछव् 3 → 2छंछव् 2 ़ व्2 ;अपपद्धअन्य क्षार धातुओं के फ्रलुओराइड एवं आॅक्साइड की तुलना में स्पथ् एवं स्प2व् जल में कम विलेय हैं। 10.3.2 लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम में समानताओं के ¯बदु लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम में समानताएँ मुख्य रूप से विचारणीय हैं। इनके समान आकार के कारण ऐसा होता है। स्प तथा डह की परमाण्वीय त्रिाज्या क्रमशः 152 चउ तथा 160 चउ है। स्प़ तथा डह2़ की आयनिक त्रिाज्या क्रमशः 76 चउ एवं 72 चउ है। लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम में समानताएँ निम्नलिख्िात हैंμ ;पद्ध लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम अपने वगा±े की अन्य धातुओं की तुलना में कठोर तथा हलकी धातुएं हैं। ;पपद्ध लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम जल के साथ धीमी गति से अभ्िािया करते हैं। इनके आॅक्साइड एवं हाइड्राॅक्साइड बहुत कम घुलनशील हैं। हाइड्राॅक्साइड गरम करने पर विघटित हो जाते हैं। दोनों ही नाइट्रोजन से सीधे संयोग करके नाइट्राइड क्रमशः स्प3छ एवं डह3छ2 बनाते हैं। ;पपपद्ध स्प2व् एवं डहव् आॅक्सीजन के आिाक्य से अभ्िािया करके सुपर आॅक्साइड नहीं बनाते हैं। ;पअद्ध लीथ्िायम एवं मैग्नीश्िायम धातुओं के काबार्ेनेट गरम करने पर सरलतापूवर्क विघटित होकर उनके आॅक्साइड एवं ब्व्2 बनाते हैं। दोनों ही ठोस हाइड्रोजनकाबोर्नेट नहीं बनाते हैं। ;अद्ध स्पब्स एवं डहब्स2 एथेनाॅल में विलेय हैं। ;अपद्ध स्पब्स एवं डहब्स2 दोनों ही प्रस्वेद्य ;क्मसपुनमेबमदजद्ध यौगिक हैं। ये जलीय विलयन से स्पब्सण्2भ्2व् एवं डहब्स2ण्8भ्2व् के रूप में िस्टलीकृत होते हैं। 10.4 सोडियम के वुफछ महत्त्वपूणर् यौगिक औद्योगिक स्तर पर सोडियम के महत्त्वपूणर् यौगिक हैंः सोडियम काबोर्नेट, सोडियम हाइड्राॅक्साइड, सोडियम क्लोराइड एवं सोडियम बाइकाबोर्नेट। इन यौगिकों के औद्योगिक निमार्ण एवं उपयोगों का वणर्न नीचे किया जा रहा है। सोडियम काबार्ेनेट ;धावन सोडाद्ध छंब्व्ण्10भ्व्232साधारणतया सोडियम काबार्ेनेट ‘साल्वे वििा’ द्वारा बनाया जाता है। इस प्रिया में लाभ यह है कि सोडियम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट, जो अमोनियम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट एवं सोडियम क्लोराइड के संयोग से अवक्षेपित होता है, अल्प विलेय होता है। अमोनियम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट, ब्व् गैस को सोडियम क्लोराइड के2अमोनिया से संतृप्त सांद्र विलयन में प्रवाहित कर बनाया जाता है। वहाँ पहले अमोनियम काबार्ेनेट और पिफर अमोनियम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट बनता है। संपूणर् प्रक्रम की अभ्िाियाएं निम्नलिख्िात हैंμ 2छभ् भ्व् ब्व् ;छभ् द्धब्व् 322 423 ;छभ्द्धब्व् भ्व् ब्व् 2छभ्भ्ब्व् 4232 2 43 छभ् भ्ब्व् छंब्स छभ् ब्स छंभ्ब्व् 43 43 इस प्रकार सोडियम बाइकाबोर्नेट के िस्टल पृथव्फ हो जाते हैं, जिन्हें गरम करके सोडियम काबार्ेनेट प्राप्त किया जाता हैμ 2छंभ्ब्व् छंब्व् ब्व् भ्व् 3 23 22 इस प्रक्रम में छभ्ब्स युक्त विलयन की ब्ं;व्भ्द्ध से42अभ्िािया पर छभ् को पुनः प्राप्त किया जा सकता है।3वैफल्िसयम क्लोराइड सह - उत्पाद के रूप में प्राप्त होता हैμ 2छभ् ब्स ब्ं;व्भ्द्ध 2छभ् ब्ंब्स भ् व् 4 2 322 यहाँ यह उल्लेखनीय है कि साल्वे वििा का उपयोग पोटैश्िायम काबार्ेनेट के निमार्ण में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पोटैश्िायम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट की अिाक विलेयता के कारण इसे पोटैश्िायम क्लोराइड के संतृप्त विलयन में अमोनियम हाइड्रोजनकाबार्ेनेट के संयोग द्वारा अवक्षेपित करना संभव नहीं है। गुण सोडियम काबार्ेनेट श्वेत िस्टलीय ठोस है, जो डेकाहाइड्रेट छंब्व् 10भ्व् के रूप में पाया जाता है। इसे ‘धावन23 2 सोडा’ ;ॅंेीपदह ैवकंद्ध भी कहते हैं। यह जल में आसानी से घुल जाता है। गरम करने पर डेकाहाइड्रेट िस्टलीय जल त्यागकर मोनोहाइड्रेट में बदल जाता है। 373 ज्ञ से उच्च ताप पर मोनोहाइड्रेट पूणर् रूप से शुष्क हो जाता है एवं एक श्वेत रंग के चूणर् में बदल जाता है, जिसे ‘सोडा ऐश’ ;ैवकं ।ेीद्ध कहते हैं। 375 ज्ञ छं ब्व् ⋅10भ् व् ⎯⎯⎯⎯छं ब्व् ⋅ भ्व् →़ 9भ् व् 232 232 झ373 ज्ञ छं ब्व् ⋅ भ्व् ⎯⎯⎯⎯→ छं ब्व् ़ भ्व् 232 232 सोडा ऐश सोडियम काबार्ेनेट का काबार्ेनेट वाला भाग जल - अपघटित होकर क्षारीय विलयन बनाता हैμ ब्व्2 भ्व् भ्ब्व् व्भ् 32 3 उपयोग ;1द्ध जल के मृदुकरण, धुलाइर् एवं निमर्लन मेंऋ ;2द्ध काँच, साबुन, बोरेक्स एवं कास्िटक सोडा के निमार्ण मेंऋ ;3द्ध कागश, पेन्ट एवं वस्त्रा उद्योग मेंऋ और ;4द्ध प्रयोगशाला में गुणात्मक एवं मात्रात्मक विश्लेषण में अभ्िाकमर्क के रूप में। सोडियम क्लोराइड ;छंब्सद्ध सोडियम क्लोराइड का मुख्य ड्डोत समुद्री जल है, जिसमें लगभग 2.7 से 2.9 प्रतिशत ;भारात्मकद्ध तक लवण होता है। हमारे देश जैसे देशों में समुद्री जल के वाष्पीकरण द्वारा साधारण नमक प्राप्त किया जाता है। हमारे देश में सूयर् से वाष्पीकरण द्वारा लगभग 50 लाख टन नमक का उत्पादन प्रतिवषर् किया जाता है। अपरिष्वृफत नमक, जो ब्राइन विलयन के िस्टलीकरण से प्राप्त किया जाता है, में सोडियम सल्पेफट, वैफल्िसयम सल्पेफट, वैफल्िसयम क्लोराइड एवं मैग्नीश्िायम क्लोराइड अशुि के रूप में होते हैं। वैफल्िसयम क्लोराइड ब्ंब्स एवं मैग्नीश्िायम2क्लोराइड डहब्स की अशुि का कारण उनका प्रस्वेद्य2;क्मसपुनमेबमदजद्ध होना है ;अथार्त् ये सरलतापूवर्क वायुमंडल से नमी का अवशोषण करते हैंद्ध। शु( सोडियम क्लोराइड प्राप्त करने के लिए अपरिष्वृफत लवण को जल की न्यूनतम मात्रा में घोला जाता है, जिसमें अविलेय अशुियाँ पृथव्फ हो जाती हैं। जब विलयन को हाइड्रोजन क्लोराइड गैस से संतृप्त करते हैं, तब सोडियम क्लोराइड के िस्टल पृथव्फ हो जाते हैं। वैफल्िसयम एवं मैग्नीश्िायम क्लोराइड सोडियम क्लोराइड से अिाक विलेय होने के कारण विलयन में ही रहते हैं। सोडियम क्लोराइड का गलनांक 1081 ज्ञ है। जल में इसकी विलेयता 273 ज्ञ पर 36ण्0 ह प्रति 100 ह जल है। ताप बढ़ाने पर विलेयता पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है। उपयोग ;पद्ध साधारण नमक के रूप में, तथा ;पपद्ध छं2व्2ए छंव्भ् एवं छं2ब्व्3 बनाने में। सोडियम हाइड्राक्साइड ;कास्िटक सोडाद्ध, छंव्भ्ॅऔद्योगिक स्तर पर सोडियम हाइड्राॅक्साइड का उत्पादन कास्टनर - वैफलनर सेल में सोडियम क्लोराइड के विद्युत् - अपघटन द्वारा किया जाता है। मवर्फरी वैफथोड एवं काबर्न ऐनोड का उपयोग करके लवण - जल का विद्युत् - अपघटन सेल में किया जाता है। सोडियम धातु मवर्फरी वैफथोड पर विस£जत होकर मवर्फरी के साथ संयुक्त होकर सोडियम अमलगम बनाता है। ऐनोड पर क्लोरीन गैस मुक्त होती है। वैफथोड: छं म भ्हछं अमलगम ऐनोड: ब्स−→ 1 ब्स ़ म− 22 अमलगम जल से अभ्िािया करके सोडियम हाइड्राॅक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देता है। 2छंदृ अमलगम 2भ् व् 2छंव्भ् 2भ्ह भ्2 2 सोडियम हाइड्रॅाक्साइड पारभासी श्वेत ठोस पदाथर् है। इसका गलनांक 591 ज्ञ है। यह जल में शीघ्रता से विलेय होकर क्षारीय विलयन बनाता है। सोडियम हाइड्राॅक्साइड के िस्टल प्रस्वेद्य ;क्मसपुनमेबमदजद्ध होते हैं। सतह पर सोडियम हाइड्र से अभ्िािया करकेाॅक्साइड विलयन वायुमंडलीय ब्व्2छं2ब्व्3 बनाता है। उपयोग ;पद्ध साबुन, कागश, कृत्रिाम रेशम तथा कइर् अन्य रसायनों के निमार्ण मेंऋ ;पपद्ध पेट्रोलियम के परिष्करण मेंऋ ;पपपद्ध बाॅक्साइट के शुिकरण मेंऋ ;पअद्ध वस्त्रा - उद्योग में सूती वस्त्रों के मसर्रीकरण मेंऋ ;अद्ध शु( वसा एवं तेलों के निमार्ण मेंऋ तथा ;अपद्ध प्रयोगशाला - अभ्िाकमर्क के रूप में। सोडियम हाइड्रोजन - काबार्ेनेट ;बे¯कग सोडाद्ध, छंभ्ब्व्3 सोडियम हाइड्रªोजन काबार्ेनेट को ‘बे¯कग सोडा’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह गरम करने पर विघटित होकर काबर्न - डाइआॅक्साइड के बुलबुले देता है। ;इसीलिए पेस्ट्री, केक आदि में छोट - छोटे छिद्र हो जाते हैं। पफलतः वे हलके तथा परिपुफल्िलत ;थ्सनलििद्ध बन जाते हैं।द्ध सोडियम हाइड्रªोजन - काबार्ेनेट को सोडियम काबार्ेनेट के विलयन में ब्व् गैस से संतृप्त करके बनाया जाता है। सोडियम2हाइड्रोजनकाबार्ेनेट का श्वेत चूणर् कम विलेय होने के कारण पृथव्फ हो जाता है। छं2ब्व्3 भ् व् ब्व्22 2छंभ्ब्व् 3 सोडियम हाइड्रोजन - काबार्ेनेट चमर् रोगों में मंद पूतिराधी ;डपसक ।दजपेमचजपबद्ध के रूप मेंऋ साथ ही अग्िनशमन यंत्रा में भी होता है। 10.5 सोडियम एवं पोटैश्िायम की जैव उपयोगिता 70 किलो के वशन वाले एक सामान्य व्यक्ित में लगभग 90 ग्राम सोडियम एवं 170 ग्राम पोटैश्िायम होता है, जबकि लोहा केवल 5 ग्राम तथा ताँबा 0.06 ग्राम होता है। सोडियम आयन मुख्यतः अंतराकाशीय द्रव में उपस्िथत रक्त प्लाश्मा, जो कोश्िाकाओं को घेरे रहता है, में पाया जाता है। यह आयन श्िारा - संकेतों के संचरण में भाग लेते हैं, जो कोश्िाका झिल्ली में जलप्रवाह को नियमित करते हैं तथा कोश्िाकाओं में शवर्फरा और एमीनो अम्लों के प्रवाह को भी नियंत्रिात करते हैं। सोडियम एवं पोटैश्िायम रासायनिक रूप से समान होते हुए भी कोश्िाका झिल्ली को पार करने की क्षमताएवं एन्शाइम को सिय करने में मात्रात्मक रूप से भ्िाÂ हैं। इसीलिए कोश्िाका द्रव में पोटैश्िायम धनायन बहुतायत में होते हैं। जहाँ ये एन्शाइम को सिय करते हैं तथा ग्लूकोश के आॅक्सीकरण से ।ज्च् बनने में भाग लेते हैं। सोडियम आयनश्िारा - संकेतों के संचरण के लिए उत्तरदायी है। कोश्िाका झिल्ली के अन्य हिस्सों में पाए जाने वाले सोडियम एवं पोटैश्िायम आयनों की सांद्रता में उल्लेखनीयभ्िाÂता पाइर् जाती है। उदाहरण के लिएμ रक्त प्लाश्मा में लाल रक्त कोश्िाकाओं में सोडियम की मात्रा 143 उ उवसस्.1 है, जबकि पोटैश्िायम का स्तर केवल 5 उ उवसस्.1 है। यह सांद्रता 10 उ उवसस्.1 ;छं़द्ध एवं 105 उ उवसस्.1;ज्ञ़द्ध तक परिवतिर्त हो सकती है। यह असाधारण आयनिक उतार - चढ़ाव, जिसे ‘सोडियम पोटैश्िायम पंप’ कहते हैं, सेल झिल्ली पर कायर् करता है, जो मनुष्य की विश्रामावस्था के वुफल उपभोगित ।ज्च् की एक - तिहाइर् से श्यादा का उपयोग कर लेता है, जो मात्रा लगभग 15 किलो प्रति 24 घंटे तक हो सकती है। 10.6 वगर् 2 के तत्त्वः क्षारीय मृदा धातुएं आवतर् सारणी के वगर् 2 के तत्त्व हैंμ बेरीलियम, मैग्नीश्िायम, वैफल्िसयम, स्ट्राॅन्िशयम, बेरियम एवं रेडियम। बेरीलियम केअतिरिक्त अन्य तत्त्व संयुक्त रूप से ‘मृदा धातुएं’ कहलाती हैं।प्रथम तत्त्व बेरीलियम वगर् के अन्य तत्त्वों से भ्िाÂता दशार्ता है एवं ऐलुमीनियम के साथ विकणर् संबंध ;क्पंहवदंस त्मसंजपवदेीपचद्ध दशार्ता है। मृदा धातुओं के परमाण्वीय तथा भौतिक गुण सारणी 10.2 में दशार्ए गए हैं। 10.6.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास इन तत्त्वों के संयोजकता - कोश के ेदृकक्षक में 2 इलेक्ट्राॅन होतेहैं ;सारणी 10.2द्ध। इनका सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ¹उत्कृष्ट गैसह् दे2 होता है। क्षार धातुओं के समान ही इनके भी यौगिकमुख्यतः आयनिक प्रकृति के होते हैं। बेरीलियम ठम 1े22े2 मैग्नीश्िायम डह 1े22े22च63े2 वैफल्िसयम ब्ं 1े22े22च63े23च64े2 स्ट्राॅन्िशयम ैत 1े22े22च63े23च63क104े24च65े2 बेरियम ठं 1े22े22च63े23च63क104े24च6 4क105े25च66े2 या ख्ग्म, 6े2 रेडियम त्ं ख्त्द,7े2 10.6.2 परमाणु एवं आयनी त्रिाज्या आवतर् सारणी के संगत आवतो± मंे क्षार धातुओं की तुलना में क्षारीय मृदा धातुओं की परमाणु एवं आयनी त्रिाज्याएं छोटी होतीहैं। इसका कारण इन तत्त्वों के नाभ्िाकीय आवेशों में वृि होना है। 10.6.3 आयनन एन्थैल्पी क्षारीय मृदा धातुओं के परमाणुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन एन्थैल्पी के मान न्यून होते हैं। चूँकि वगर् मेंआकार ऊपर से नीचे क्रमशः बढ़ता जाता है, अतः इनकी आयनन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं ;सारणी 10.2द्ध। क्षारीय मृदा धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान क्षार धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में अिाक है। यह इनकी क्षार धतुओं की संगत तुलनात्मक रूप से छोटे आकार होने के कारण होती है, परंतु यह देखना रुचिकर है कि इनके द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मान क्षार धातुओं के द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में कम हैं। 10.6.4 जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातुओं के समान इसमें भी वगर् में ऊपर से नीचे आयनिक आकार बढ़ने पर इनकी जलयोजन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं। ठम2़ झ डह2़ झ ब्ं2़ झ ैत2़ झ ठं2़ क्षारीय मृदा धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में श्यादा होती है। इसीलिए मृदा धातुओं के यौगिक क्षार धातुओं के यौगिकों की तुलना ;।जवउपब ंदक च्ीलेपबंस च्तवचमतजपमे व िजीम ।सांसपदम म्ंतजी डमजंसेद्ध सारणी 10.2 क्षारीय मृदा धातुओं के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण गुण बेरीलियम ठम् मैग्नीश्िायम डळ वैफल्िसयम ब्। स्ट्राॅन्िशयम ैत् बेरियम ठ। रेडियम त्। परमाणु - क्रमांक 4 12 20 38 56 88 परमाणु द्रव्यमानध्ह उवसदृ1 9ण्01 24ण्31 40ण्08 87ण्62 137ण्33 226ण्03 इलेक्ट्राॅनिक - विन्यास ख्भ्म,2े2 ख्छम,3े2 ख्।त,4े2 ख्ज्ञत,5े2 ख्ग्म,6े2 ख्त्द,7े2 आयनन एन्थैल्पी ;प्द्धधश्र उवसदृ1 899 737 590 549 503 509 आयनन एन्थैल्पी ;प्प्द्धधश्र उवस.1 1757 1450 1145 1064 965 979 जलयोजन एन्थैल्पी ;ाश्र उवसदृ1द्ध दृ2494 दृ1921 दृ1577 दृ1443 दृ1305 दृ धात्िवक त्रिाज्याध्चउ 112 160 197 215 222 दृ आयनी त्रिाज्या ड2़ध्चउ 31 72 100 118 135 148 गलनांकध्ज्ञ 1560 924 1124 1062 1002 973 क्वथनांकध्ज्ञ 2745 1363 1767 1655 2078 ;1973द्ध घनत्वध्ह बउ.3 1ण्84 1ण्74 1ण्55 2ण्63 3ण्59 ;5ण्5द्ध मानक विभव म्0ध्ट;ड2़ध्डद्ध के लिए दृ1ण्97 दृ2ण्36 दृ2ण्84 दृ2ण्89 दृ2ण्92 दृ2ण्92 स्थलमंडल में प्राप्ित 2’ 2ण्76’’ 4ण्6’’ 384’ 390’ 10दृ6’ ’ पी.पी.एम’’ भारात्मक प्रतिशत में अिाक जलयोजित होते हैं। जैसेμडहब्स एवं ब्ंब्स22 जलयोजित अवस्था डहब्स2ण्6भ्2व् एवं ब्ंब्स2ण्6भ्व् में पाए2जाते हैं, जबकि छंब्स एवं ज्ञब्स ऐेसे हाइड्रेट नहीं बनाते हैं। 10.6.5 भौतिक गुण क्षारीय मृदा धातुएं सामान्यतया चाँदी की भाँति सपेफद, चमकदार एवं नरम, परंतु अन्य धातुओं की तुलना में कठोर होती हैं। बेरीलियम तथा मैग्नीश्िायम लगभग ध्ूसर रंग ;ळतमलपेीद्ध के होते हैं। इनके गलनांक एवं क्वथनांक क्षार धातुओं की तुलना में उच्च होते हैं, क्योंकि इनका आकार छोटा होता है। पिफर भी इनके गलनांकांे तथा क्वथनांकों में कोइर् नियमित परिवतर्न नहीं दिखता है। निम्न आयनन एन्थैल्पी के कारण ये प्रबल धन - विद्युतीयहोते हैं। धन - विद्युतीय गुण ऊपर से नीचे ठम से ठं तक बढ़ता है। वैफल्िसयम, स्ट्राॅन्िशयम एवं बेरियम ज्वाला को क्रमशः ईंट जैसा लाल ;ठतपबा त्मकद्ध रंग, किरमिजी लाल ;ब्तपउेवद त्मकद्ध एवं हरा ;।चचसम ळतममदद्ध रंग प्रदान करते हैं। ज्वाला में उच्च ताप पर वाष्प - अवस्था में क्षारीय मृदा धातुओं के बाह्यतमकोश के इलेक्ट्राॅन उत्तेजित होकर उच्च ऊजार् - स्तर पर चले जातेहैं। ये उत्तेजित इलेक्ट्राॅन जब पुनः अपनी तलस्थ अवस्था मेंलौटते हैं, तब दृश्य प्रकाश के रूप में ऊजार् उत्स£जत होती है। पफलतः ज्वाला रंगीन दिखने लगती है। बेरीलियम तथा मैग्नीश्िायम के बाह्यतम कोशों के इलेक्ट्राॅन इतनी प्रबलता से बँधे रहते हैंकि ज्वाला की ऊजार् द्वारा इनका उत्तेजित होना कठिन हो जाता है। अतः ज्वाला मंे इन धातुओं का अपना कोइर् अभ्िालाक्षण्िाक रंग नहीं होता है। गुणात्मक विश्लेषण में ब्ंए ैत एवं ठं मूलकों की पुष्िट ज्वाला - परीक्षण के आधार पर की जाती है तथा इनकी सांद्रता का निधर्रण ज्वाला प्रकाशमापी द्वारा किया जाता है। क्षारीय मृदा धातुओं की क्षार धतुओं की तरह वैद्युत्एवं ऊष्मीय चालकता उच्च होती है। यह इनका अभ्िा - लाक्षण्िाक गुण होता है। 10.6.6 रासायनिक गुण क्षारीय मृदा धातुएं क्षार धातुओं से कम ियाशील होती हैं। इनतत्त्वों की अभ्िाियाशीलता वगर् के ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है। ;पद्ध वायु एवं जल के प्रति अभ्िाियाशीलता रू बेरीलियम एवं मैग्नीश्िायम गतिकीय रूप से आॅक्सीजन तथा जल के प्रति निष्िक्रय हैं, क्योंकि इन धातुओं के पृष्ठों पर आॅक्साइड की पिफल्म जम जाती है। पिफर भी, बेरीलियम चूणर् रूप में वायु में जलने पर ठमव् एवं ठम3छ2 बना लेता है। मैग्नीश्िायम अिाक धनविद्युतीय है, जो वायु में अत्यिाक चमकीले प्रकाश के साथ जलते हुए डहव् तथा डह3छ2 बना लेता है। वैफल्िसयम, स्ट्राॅन्िशयम एवं बेरियम वायु से शीघ्र अभ्िािया करके आॅक्साइड तथा नाइट्राइड बनाते हैं। ये जल से और भी अिाक तीव्रता से अभ्िािया करते हैंऋ यहाँ तक कि ठंडे जल से अभ्िािया कर हाइड्राॅक्साइड बनाते हैं। ;पपद्ध हैलोजन के प्रति अभ्िाियाशीलता रू सभी क्षारीय मृदा धातुएं हैलोजन के साथ उच्च तापपर अभ्िािया करके हैलाइड बना लेती हैंμ ड़ ग् →डग् ;ग् त्रथ्ए ब्सए ठतए प्द्ध 22 ठमथ्2 बनाने की सबसे सरल वििा ;छभ्4द्ध2 ठमथ्4 का तापीय अपघटन है, जबकि ठमब्स2ए आॅक्साइड से सरलतापूवर्क बनाया जा सकता हैμ 600 800ज्ञ ठमव् ब् ब्स2 ठमब्स2 ब्व् ;पपपद्ध हाइड्रोजन के प्रति अभ्िाियाशीलता रू बेरीलियम के अतिरिक्त सभी क्षारीय मृदा धातुएं गरम करने पर हाइड्रोजन से अभ्िािया करके हाइड्राइड बनाती हैं। ठमभ्2 को ठमब्स2 एवं स्प।सभ्4 की अभ्िािया से बनाया जा सकता हैμ 2ठमब्स 2 ़ स्प।सभ् 4 →2ठमभ् 2 ़स्पब्स ़ ।सब्स 3 ;पअद्ध अम्लों के प्रति अभ्िाियाशीलता रू क्षारीय मृदा धातुएं शीघ्र ही अम्लों से अभ्िािया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं। ड 2भ्ब्स डब्स2 भ्2 ;अद्ध अपचायक प्रकृति: प्रथम वगर् की धातुओं के समान क्षारीय मृदा धातुएं प्रबल अपचायक हैं। इसका बोध् इनके अिाक )णात्मक अपचयन विभव के मानों से होता है ;सारणी 10.2द्ध, यद्यपि इनकी अपचयन - क्षमता क्षार धातुओं की तुलना में कम होती है। बेरीलियम के अपचयन विभव का मान अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से कम )णात्मक होता है। पिफर भी इसकी अपचयन - क्षमता का कारण ठम2़ आयन के छोटे आकार,इसकी उच्च जलयोजन ऊजार् एवं धातु की उच्च परमाण्वीय - करण एन्थैल्पी का होना है। ;अपद्ध द्रव अमोनिया में विलयन रू क्षार धातुओं की भाँति क्षारीय मृदा धातुएं भी द्रव अमोनिया में विलेय होकर गहरे नीले काले रंग का विलयन बना लेती हैं। इस विलयन से धातुओं केअमोनीकृत आयन प्राप्त होते हंैμ 2़ दृड ़;ग ़ लद्धछभ् 3 → 3ग ़ 2ख्म;छभ् द्ध , 3 लख्ड;छभ् द्ध , इन विलयनों से पुनः अमोनिएट्स ;।उउवदपंजमेद्ध ,2़ख्ड;छभ्3द्ध6 प्राप्त किए जा सकते हैं। 10.6.7 उपयोग बेरीलियम का उपयोग मिश्रातु के निमार्ण में होता है। ब्न.ठम मिश्रातु का उपयोग उच्च शक्ित के स्िंप्रग बनाने में होता है। धात्िवक बेरीलियम का उपयोग एक्स - किरण नली में वातायन ;ूपदकवूद्ध के लिए किया जाता है। मैग्नीश्िायम ऐलुमीनियम, ¯जक, मैंगनीज एवं टिन के साथ मिश्रातु बनाता है। डहदृ।स मिश्रातु हलकी होने के कारण वायुयानों के निमार्ण में प्रयुक्त होती है। मैग्नीश्िायम ;चूणर् एवं पफीताद्ध का उपयोग चमकीले पाउडर तथा बल्ब, तापदीप्त बमों ;प्दबमदकपंतल ठवउइेद्ध और संकेतकों ;ैपहदंसेद्ध में होता है। जल में मैग्नीश्िायम हाइड्राॅक्साइड के निलंबन ;जिसे ‘मिल्क आॅपफ मैग्नीश्िायम’ कहते हैंद्ध का उपयोग ऐन्टाएसिड ;।दजंबपकद्ध दवा के रूप में होता है। मैग्नीश्िायम काबोर्नेट किसी भी टूथपेस्ट का मुख्य घटक है। वैफल्िसयम का उपयोग आॅक्साइडांे से उन धातुओं के निष्कषर्ण में होता है, जिन्हें काबर्न द्वारा अपचयित करना संभव नहीं है। चूँकि वैफल्िसयम तथा बेरियम उच्च ताप पर आॅक्सीजन एवं नाइट्रोजन से अभ्िािया करते हैं, अतः इस गुण का उपयोग निवार्त् नली से वायु - निष्कासन करने में किया जाता है। रेडियम के लवणों का उपयोग विकिरण चिकित्सा ;उदाहरणाथर्μ वैफन्सर के उपचारद्ध में किया जाता है। 10.7क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षण वगर् 2 के तत्त्वों की द्विधनीय आॅक्सीकरण अवस्था ;ड2़द्ध इनकी प्रमुख संयोजकता है। क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिक प्रायः आयनिक होते हैं, लेकिन यह क्षार धातुओं के संगत यौगिकों की तुलना में कम आयनिक प्रवृफति के होते हैं। इसका कारण इनका अिाक नाभ्िाकीय आवेश एवं छोटा आकार है। बेरीलियम एवं मैग्नीश्िायम के आॅक्साइड तथा अन्य यौगिकइस वगर् के भारी और बड़े आकार वाले अन्य तत्त्वों ;ब्ंए ैतए ठंद्ध के आॅक्साइडों एवं अन्य यौगिकों की तुलना में अिाक सहसंयोजी होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभ्िालक्षण यहाँ बताए जा रहे हैं। ;पद्ध आॅक्साइड एवं हाइड्राॅक्साइड: क्षारीय मृदा धातु वायु में जलकर मोनोआॅक्साइड ;डव्द्ध बनाते हैं, जिनकी संरचना ठमव् को छोड़कर, राॅक - साल्ट ;त्वबा.ैंसजद्ध जैसी होती है। ठमव् आवश्यक रूप से सहसंयोजक प्रवृफति का होता है। इन यौगिकों की संभवन ऊष्माएँ उच्च होती हैं। यही कारण है किये ऊष्मा के प्रति अति स्थायी होते हैं। ठमव् उभयधमीर् है,जबकि अन्य तत्त्वों के आक्साॅइड क्षारीय प्रवृफति के होते हैं, जो जल से अभ्िािया कर अल्प विलेय हाइड्राॅक्साइड बनाते हैं। 2 →ड;व्भ्द्ध 2डव़्भ्व् इन हाइड्राॅक्साइडों की विलेयता, तापीय स्थायित्व एवं क्षारीय प्रवृफति डह;व्भ्द्धसे ठं;व्भ्द्धतक परमाणु क्रमांक22 बढ़ने पर बढ़ती है। क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्राॅक्साइड क्षार धातुओं के संगत हाइड्राॅक्साइडों की तुलना में कम स्थायी होते हैं। बेरीलियम हाइड्राॅक्साइड प्रवृफति में उभयधमीर् है, क्योंकि यह अम्ल तथा क्षार दोनों से अभ्िािया करता है। ठम;व्भ्द्ध2 ़ 2व्भ्दृ → ख्ठम ;व्भ्4द्ध,2दृबेरीलेट आयन ठम;व्भ्द्ध2 ़ 2भ्ब्स ़ 2भ्2व् → ख्ठम ;व्भ्द्ध4,ब्स2 ;पपद्ध हैलाइड रू बेरीलियम हैलाइड के अतिरिक्त अन्य धातुओं के हैलाइडों की प्रवृफति आयनिक होती है। बेरीलियम हैलाइड मुख्य रूप से सहसंयोजक होते हैं एवं काबर्निक विलायकों में विलेय होते हैं। बेरीलियम क्लोराइड की ठोस अवस्था में शृंखला - संरचना होती है, जैसाकि नीचे दशार्या गया हैμ वाष्प - अवस्था में ठमब्सक्लोरो - सेतु ;ब्ीसवतव2 ठतपकहमकद्ध द्विलक बनाता है, जो 1200ज्ञ के उच्च ताप पररेखीय एकलक में वियोजित हो जाता है। वगर् में ऊपर से नीचेहैलाइड हाइड्रेट बनाने की प्रवृिा कम होती जाती है। ब्ंए ैत एवं ठं के जलयोजित क्लोराइड, ब्रोमाइड एवं आयोडाइडों का निजर्लीकरण इन्हें गरम करके किया जा सकता है, जबकि ठम एवं डह के संगत जलयोजित हैलाइड का जल - अपघटन हो जाता है। उदाहरणाथर्μ डहब्स ण् 8भ्व्ए ब्ंब्सए 6भ्व्ए2222ैतब्सए 6भ्व् एवं ठंब्सण्2भ्व्द्ध उच्च जालक ऊजार् के2222कारण फ्रलुओराइड क्लोराइड की तुलना में कम विलेय होते हैं। ;पपपद्ध आॅक्सो - अम्लों के लवण: क्षारीय मृदा धातुएं आॅक्सो - अम्लों के लवण भी बनाती हैं। इनमें से वुफछ मुख्य निम्नलिख्िात हैंμ काबोर्नेट: क्षारीय मृदा धातुओं के काबोर्नेट जल में अविलेयहोते हैं, जिन्हें इन तत्त्वों के विलेय लवणों के विलयन में सोडियम या अमोनियम काबोर्नेट विलयन मिलाकर अवक्षेपितकिया जा सकता है। तत्त्व के परमाणु क्रमांक बढ़ने पर काबोर्नेटों की जल में विलेयता बढ़ती है। सभी काबोर्नेट गरम करने पर काबर्न डाइआॅक्साइड एवं आॅक्साइड में वियोजित हो जाते हैं। बेरीलियम काबोर्नेट अस्थायी होता है, जिसे केवल ब्व् के2वातावरण में रखा जा सकता है। काबोर्नेटों का तापीय स्थायित्व धनायन का आकार बढ़ने पर बढ़ता है। सल्पेफट रू क्षारीय मृदा धातुओं के सल्पेफट श्वेत एवं ठोस होते हैं तथा ताप के प्रति स्थायी होते हैं। ठमैव्एवं डहैव्44 शीघ्रता से जल में विलेय हो जाते हैं। ब्ंैव्से ठंैव्तक44 विलेयता कम होती जाती है। ठम2़ एवं डह2़ आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी इनके जालक एन्थैल्पी की तुलना में अिाक होती है। अतः इनके सल्पेफट जल में विलेय होते हैं। नाइट्रेट रू इन धातुओं के काबोर्नेटों को तनु नाइटिªक अम्ल में घोलकर इनके नाइट्रेट प्राप्त किए जाते हैं। मैग्नीश्िायम नाइट्रेट जल के छः अणुओं के साथ िस्टलित होता है, जबकि बेरियम नाइट्रेट निजर्ल लवण के रूप में िस्टलित होता है। यह पिफर बढ़ते आकार के साथ घटती जलयोजन एन्थैल्पी के कारणकम जलयोजित लवण बनाने की प्रवृिा को पुनः दशार्ता है। लीथ्िायम नाइट्रेट के समान सभी नाइट्रेट गरम करने पर अपघटित होकर आॅक्साइड बनाते हैं। 2ड;छव् द्ध →2डव् ़ 4छव् ़ व्32 22 रसायन विज्ञान है एवं जालक एन्थैल्पी वगर् में लगभग स्िथर रहती है।चूँकि वगर् में जलयोजन ऊजार् का मान ऊपर से नीचे घटता है, अतः धातु काबोर्नेटों एवं सल्पेफटों की विलेयतावगर् में ऊपर से नीचे जाने पर घटती जाती है। 10.8 बेरीलियम का असंगत व्यवहार वगर् 2 का प्रथम तत्त्व बेरीलियम वगर् में मैग्नीश्िायम तथा अन्यतत्त्वों के साथ असंगत व्यवहार दिखलाता है। यह ऐलुमीनियम से विकणर् भी दशार्ता है, जो तदंतर विवेचित किए जाएँगे। ;पद्ध बेरीलियम का परमाण्वीय एवं आयनिक आकार असाधारणरूप से छोटा होता है, जिसकी तुलना वगर् के अन्य तत्त्वों से नहीं की जा सकती है। उच्च आयनन एन्थैल्पी तथा लघु परमाणु आकार के कारण बेरीलियम के यौगिक बृहद् रूप से सहसंयोजी होते हैं तथा आसानी से जल अपघटित हो जाते हैं। ;पपद्ध बेरीलियम की उपसहसंयोजन संख्या ;ब्व.वतकपदंजपवद छनउइमतद्ध चार से अिाक नहीं होती है, क्योंकि इसके संयोजी - कोश में केवल चार कक्षक हैं। वगर् के अन्य सदस्यों की उपसहसंयोजन संख्या छः हो सकती है, क्योंकि ये क कक्षकों का उपयोग करते हैं। ;पपपद्ध अन्य सदस्यों के आॅक्साइड एवं हाइडाॅक्साइड के विपरीत ªबेरीलियम के आॅक्साइड तथा हाइड्राॅक्साइड का स्वभाव ;ड त्र ठमएडहएब्ंएैतएठंद्ध उदाहरण 10.4 क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्राॅक्साइडों की जल में विलेयता वगर् में नीचे जाने पर क्यों बढ़ती है? हल क्षारीय मृदा धतुओं मेें )णायन समान हों, तो धनायन की त्रिाज्या जालक एन्थैल्पी को प्रभावित करती है। चूँकि बढ़ती हुइर् आयनिक त्रिाज्या के साथ जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में )णात्मक एन्थैल्पी तेजी से कम होती है, अतः वगर् में नीचे जाने पर विलेयता बढ़ती है। उदाहरण 10.5 क्षारीय मृदा धातुओं के काबोर्नेटों एवं सल्पेफटों की जलमें विलेयता वगर् में ऊपर से नीचे क्यों घटती है? हल )णायन का आकार धनायन की तुलना में बहुत अिाक उभयधमीर् ;।उचीवजमतपबद्ध होता है। 10.8.1 बेरीलियम एवं ऐलुमीनियम में विकणर् संबंध् ठम2़ की अनुमानित आयनिक त्रिाज्या 31 चउ है। इसका आवेश/त्रिाज्या अनुपात ।स3़ आयन के लगभग समान है। अतः बेरीलियम वुफछ मामलों में ऐलुमीनियम के समान है। वुफछ समानताएँ निम्नलिख्िात हैंμ ;पद्ध ऐलुमीनियम के समान बेरीलियम शीघ्रता से अम्लों से प्रभावित नहीं होता है, क्योंकि धातु की सतह पर आॅक्साइड पिफल्म की उपस्िथति होती है। ;पपद्ध क्षार की अिाकता में बेरीलियम हाइड्राॅक्साइड घुल जाता है और बेरिलेट ;ठमतलससंजमद्ध आयन ख्ठम;व्भ्4द्ध,2दृ देता है। ठीक इसी प्रकार ऐलुमीनियम हाइड्राॅक्साइड ऐलुमिनेट ;।सनउपदंजमद्ध आयन ख्।स;व्भ्द्ध4,दृ देता है। ;पपपद्ध बेरीलियम एवं ऐलुमीनियम के क्लोराइड वाष्प प्रावस्था में सेतुबंिात क्लोराइड ;ठतपकहमक ब्ीसवतपकमद्ध की रचना करते हैं। दोनों ही क्लोराइड काबर्निक विलायकों में विलेय होते हैं एवं प्रबल लूइस अम्ल हैं। इनकाउपयोग Úीडेल - क्राफ्रट के उत्प्रेरक ;थ्तपमकमस ब्तंजि ब्ंजंसलेजद्ध के रूप में होता है। ;पअद्ध बेरीलियम एवं ऐलुमीनियम आयन जटिल यौगिक ;ब्वउचसमगमेद्ध बनाने की प्रबल प्रवृिा रखते हैं 2दृ 3दृजैसेμठमथ्4 ए ।सथ्6 । 10.9 वैफल्िसयम के वुफछ महत्त्वपूणर् यौगिक वैफल्िसयम के महत्त्वपूणर् यौगिक वैफल्िसयम आॅक्साइड, वैफल्िसयम हाइड्राॅक्साइड, वैफल्िसयम सल्पेफट, वैफल्िसयम काबोर्नेट एवंसीमेन्ट हैं। ये औद्योगिक रूप से महत्त्वपूणर् यौगिक हैं। वृहद् स्तर पर इनका विरचन एवं इनके उपयोग नीचे व£णत किए जा रहे हैं। वैफल्िसयम आॅक्साइड या बिना बुझा चूना, ब्ंव् इसका वाण्िाज्ियक निमार्ण घू£णत भट्ठी ;त्वजंतल ज्ञपसदद्ध में चूने के पत्थर ;ब्ंब्व्द्ध को लगभग 1070.1270 ज्ञ पर गरम3करके किया जाता है। उष्माब्ंब्व्3 ब्ंव् ़ ब्व्2 ब्व् को अभ्िािया से शीघ्रताशीघ्र हटाते रहते हैं, ताकि2 अभ्िािया अग्र दिशा में पूणर् हो सके। वैफल्िसयम आॅक्साइड एक श्वेत अिस्टलीय ठोस पदाथर् है, जिसका गलनांक 2870 ज्ञ है। वायुमंडल में खुला छोड़ने पर यह वायुमंडल से नमी एवं काबर्न डाइआॅक्साइड अवशोष्िात कर लेता है। ब्ंव् ़ भ्व्→ब्ं;व्भ्द्ध22 ब्ंव् ़ ब्व्2 →ब्ंब्व्3 सीमित मात्रा में जल मिलाने पर चूने के ¯पडक ;स्नउचेद्ध टूट जाते हैं। इस प्रक्रम को चूना बुझाने ;ैसंापदह व िसपउमद्ध की प्रिया कहते हैं। बिना बुझे चूने को जब सोडा द्वारा बुझाया जाता है, तब सोडा लाइम ;ैवकं स्पउमद्ध प्राप्त होता है। यह क्षारीय आॅक्साइड होने के कारण उच्च ताप अम्लीय आॅक्साइडों से संयोग करता है। ब्ंव् ़ ैपव्2 →ब्ंैपव्3 6ब्ंव् ़ च्व् →2ब्ं ;च्व् द्ध410 342 उपयोग ;पद्ध सीमेंट के निमार्ण के लिए प्राथमिक पदाथर् के रूप में तथा क्षार के सबसे सस्ते रूप मेंऋ 297 ;पपद्ध कास्िटक सोडा से सोडियम काबोर्नेट बनाने मेंऋ और ;पपपद्ध शवर्फरा के शुिकरण में एवं रंजकों ;क्लम ैजनेििद्ध के निमार्ण में। वैफल्िसयम हाइड्राॅक्साइड अथार्त् बुझा चूना, ब्ं;व्भ्द्ध2 वैफल्िसयम हाइड्राक्साइड का निमार्ण बिना बुझे चूने में जलॅमिलाकर किया जाता है। यह श्वेत पाउडर है। यह जल में अल्प विलेय है। इसके जलीय विलयन ¹चूने का पानी ;स्पउम ॅंजमतद्धह् में जब काबर्न डाइआॅक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, तब वैफल्िसयम काबोर्नेट के विचरन के कारण चूने का पानी दूिाया हो जाता है। ब्ं;व्भ्द्ध ़ ब्व् → ब्ंब्व् ़ भ्व्22 32 काबर्न डाइआॅक्साइड को अिाकता में प्रवाहित करने पर अवक्षेपित वैफल्िसयम काबोर्नेट जल में विलेय वैफल्िसयम हाइड्रोजन - काबोर्नेट में परिवतिर्त हो जाता है। ब्ंब्व़् ब्व् ़ भ्व् → ब्ं ;भ्ब्व्द्ध3 2232 चूने का पानी क्लोरीन से अभ्िािया कर हाइपोक्लोराइट ;भ्लचवबीसवतपजमद्ध बना लेता है, जो विरजंक चूणर् ;ब्लीच्िंाग पाउडरद्ध का एक अवयव है। 2ब्ं;व्भ्द्ध ़ 2ब्स → ब्ंब्स ़ ब्ं;व्ब्सद्ध ़ 2भ् व्222 22 ब्लीचिंग पाउडर उपयोग ;पद्ध बृहद् स्तर पर चूना - लेप ;डवतजंतद्ध के रूप में भवन - निमार्ण मेंऋ ;पपद्ध रोगाणुनाशी ;क्पेपदंिबजंदजद्ध प्रवृफति के कारण सपेफदी ;ॅीपजम ॅंेीद्ध के रूप मेंऋ और ;पपपद्ध काँच के उत्पादन, चमर्शोधन उद्योग, विरंजक चूणर् के उत्पादन एवं शवर्फरा - शोधन में। वैफल्िसयम काबोर्नेट ;ब्ंब्व्3द्ध प्रवृफति में कइर् रूपों, जैसेμ चूना - पत्थर, खडि़या ;ब्ींसाद्धए संगमरमर ;डंतइसमद्ध आदि के रूप में चूना पाया जाता है। बुझे चूने पर काबर्न डाइआॅक्साइड गैस प्रवाहित कर या वैफल्िसयम क्लोराइड में सोडियम काबोर्नेट को मिलाकर इसे बनाया जाता है। ब्ं;व्भ्द्ध ़ ब्व् →ब्ंब्व् ़भ्व्22 32 ब्ंब्स ़ छं ब्व् →ब्ंब्व् ़ 2छंब्स2 23 3 इस अभ्िािया में काबर्न डाइआॅक्साइड के आिाक्य से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी अिाकता में जल में घुलनशील वैफल्िसयम हाइड्रोजन - काबोर्नेट बन सकता है। वैफल्िसयम काबोर्नेट श्वेत रवेदार पाउडर होता है। यह जल में लगभग अविलेय होता है। 1200 ज्ञ पर गरम करने पर यह विघटित होकर काबर्न डाइआॅक्साइड देता है। 1200ज्ञ ब्ंब्व् 3 ⎯⎯⎯→ ब्ंव् ़ ब्व्2 यह तनु अम्लों से अभ्िािया करके काबर्न डाइआॅक्साइड मुक्त करता है। 3 ़ 2भ्ब्स →ब्ंब्स2 ़ भ्व् ़ ब्व्2ब्ंब्व् 2 ब्ंब्व् ़ भ् ैव् →ब्ंैव् ़ भ्व् ़ ब्व् 3 24 422 उपयोग ऽ संगमरमर के रूप में भवन - निमार्ण मेंऋ ऽ बुझे चूने के निमार्ण मेंऋ ऽ वैफल्िसयम काबोर्नेट को मैग्नीश्िायम काबोर्नेट के साथ लोहे जैसी धातुओं के निष्कषर्ण में फ्रलक्स ;थ्सनगद्ध के रूप मेंऋ ऽ विशेष रूप से अवक्षेपित ब्ंब्व्3 के प्रयोग से बृहद् रूपमें उच्च गुणवत्ता वाले कागज के निमार्ण मेंऋ और ऽ ऐन्टासिडए टूथपेस्ट में अपघषर्क के रूप में, च्यूइंगम के संघटक एवं सांैदयर् प्रसाधनों में पूरक के रूप में। वैफल्िसयम सल्पेफट ;प्लास्टर आॅपफ पेरिसद्ध ब्ंैव्4 ण् 1ध्2 भ्2व् यह वैफल्िसयम सल्पेफट का अधर् हाइड्रेट ;भ्मउपीलकतंजमद्ध है। इसे जिप्सम ;ब्ंैव्4 ण् 2भ्2व्द्ध को 393ज्ञ पर गरम करके प्राप्त किया जाता है। 2;ब्ंैव् ण्2भ्व्द्ध →2;ब्ंैव् द्धण्भ्व् ़3भ्व् 4 2 422 393 ज्ञ से उच्च ताप पर िस्टलीय जल नहीं बचता है एवं शुष्क वैफल्िसयम सल्पेफट ;ब्ंैव्द्ध बनता है। इसे ‘मृत4तापित प्लास्टर’ ;क्मंक ठनतदज च्संेजमतद्ध कहा जाता है। जल के साथ जमने की इसकी विशेष प्रवृफति होती है। पयार्प्त मात्रा में जल मिलाने पर यह प्लास्िटक जैसा एक द्रव्य बनाता है, जो 5 से 15 मिनट में जमकर कठोर और ठोस हो जाता है। उपयोग प्लास्टर आॅपफ पेरिस का बृहत्तर उपयोग भवन - निमार्ण उद्योग के साथ - साथ टूटी हुइर् हडि्डयों के प्लास्टर में भी होता है। इसका उपयोग दंत - चिकित्सा, अलंकरण - कायर् एवं मू£तयों तथा अधर् - प्रतिमाओं को बनाने में भी होता है। सीमेन्ट सीमेन्ट एक महत्त्वपूणर् भवन - निमार्ण सामग्री है। इसका उपयोग सवर्प्रथम बि्रटेन में सन् 1824 में जोसेपफ एस्िपडन ने किया था। इसे ‘पोटर्लैंड सीमेन्ट’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह बि्रटेन के पोटर्लैंड टापू पर प्राप्त प्रावृफतिक चूने के पत्थर से मिलता - जुलता है। यह एक ऐसा उत्पाद है, जो चूने के आिाक्य वाले पदाथर् ब्ंव् को अन्य पदाथर् ;जैसेμमिट्टी, जिसमें सिलिका, ैपव्एवं ऐलुमिनियम, लोहा तथा मैग्नेश्िायम के आॅक्साइड2 होते हैंद्ध को मिलाकर बनाया जाता है। पोटर्लैंड सीमेन्ट का औसत संघटन है: ब्ंव्ए 50.60ःए ैपव्ए 20.25ःए2।सव्ए 5.10ःए डहव्ए 2.3ःए थ्मव्ए 1.2ः एवं ैव्23 233 1.2ः। एक अच्छी गुणवत्ता वाले सीमेन्ट में सिलिका ;ैपव्द्ध2एवं ऐलुमिना ;।सव्द्ध का अनुपात 2ण्5 से 4 के मध्य होना23चाहिए एवं चूने ;ब्ंव्द्ध तथा अन्य वुफल आॅक्साइडों, ैपव् और2।सव् का अनुपात यथासंभव 2 के आस - पास होना चाहिए।23सीमेन्ट के निमार्ण में कच्चे माल के रूप में चूने के पत्थर ;स्पउमेजवदमद्ध एवं चिकनी मिट्टी का उपयोग होता है। जब इन दोनों को तेजी से गरम किया जाता है तब ये संगलित होकर अभ्िािया कर सीमेन्ट ¯क्लकर ;ब्मउमदज ब्सपदामतद्ध बनाते हैं। इस ¯क्लकर में 2.3ः ;भारात्मकद्ध जिप्सम ;ब्ंैव्ण्2भ्व्द्ध मिश्रित कर सीमेन्ट4 2बनाया जाता है। इस प्रकार पोटर्लैंड सीमेन्ट के मुख्य घटक डाइवैफल्िसयम सिलिकेट ;ब्ंैपव्द्ध 26ः, ट्राइवैफल्िसयम2 4सिलिकेट ;ब्ं3ैपव्द्ध 51ः तथा ट्राइवैफल्िसयम ऐलुमिनेट5;ब्ं3।सव्6द्ध 11ः हैं।2सीमेन्ट का जमना जल मिलाने पर सीमेन्ट जमकर कठोर हो जाता है। इसका कारण घटकों के अणुओं का जलयोजन एवं पुनः व्यवस्िथत होना है। जिप्सम मिलाने का कारण सीमेन्ट के जमने के प्रक्रम को धीमा करना है ताकि यह पूरी तरह ठोस हो सके। उपयोग लोहा तथा स्टील के पश्चात् सीमेन्ट ही एक ऐसा पदाथर् है, जो किसी राष्ट्र की उपयोगी वस्तुओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका उपयोग कंक्रीट ;ब्वदबतमजमद्धए प्रबलित कंक्रीट ;त्मपदवितबमक ब्वदबतमजमद्धए प्लास्टरिंग, पुल - निमार्ण, भवन - निमार्ण आदि में किया जाता है। 10.10 मैग्नीश्िायम व वैफल्िसयम की जैव महत्ता एक वयस्क व्यक्ित में करीब 25 ग्राम मैग्नीश्िायम एवं 1200 ग्राम वैफल्िसयम होता है, जबकि लोहा मात्रा 5 ग्राम एवं ताँबा 0ण्06 ग्राम होता है। मानव - शरीर में इनकी दैनिक आवश्यकता 200.300 उह अनुमानित की गइर् है। समस्त एन्शाइम, जो पफाॅस्पेफट के संचरण में ।ज्च् का उपयोग करते हैं, मैग्नीश्िायम का उपयोग सह - घटक के रूप में करते हैं। पौधों में प्रकाश - अवशोषण के लिए मुख्य रंजक ;च्पहउमदजद्ध क्लोरोपिफल में भी मैग्नीश्िायम होता है। शरीर में वैफल्िसयम का 99ः दाँतों तथा हडि्डयों में होता है। यह अंतरतांत्रिाकीय पेशीय कायर्प्रणाली, अंतरतांत्रिाकीय प्रेषण, कोश्िाका झिल्ली अखंडता ;ब्मसस डमउइतंदम प्दजमहतपजलद्ध तथा रक्त - स्वंफदन ;ठसववक.बवंहनसंजपवदद्ध में भी महत्त्वपूणर् भूमिका निभाता है। प्लाश्मा में वैफल्िसयम की सांद्रता लगभग 100 उहस्दृ1 होती है। दो हाॅमोर्न वैफल्िसटोनिन एवं पैराथायराइड इसे बनाए रखते हैं। क्या आप जानते हैं कि हड्डी अिय तथा अपरिवतर्नशील पदाथर् नहीं है, यह किसी मनुष्य में लगभग 400 उह प्रतिदिन के हिसाब से विलेयित और निक्षेपित होती है। इसका सारा वैफल्िसयम प्लाश्मा में से ही गुजरता है। 10.1 क्षार धातुओं के सामान्य भौतिक तथा रासायनिक गुण क्या हैं? 10.2 क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभ्िालक्षण एवं गुणों में आवतिर्ता की विवेचना कीजिए। 10.3 क्षार धातुएं प्रकृति में क्यों नहीं पाइर् जाती हैं? 10.4 छंव् में सोडियम की आॅक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।2210.5 पोटैश्िायम की तुलना में सोडियम कम अभ्िाियाशील क्यों है? बताइए। 10.6 निम्नलिख्िात के संदभर् में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना कीजिएμ ;कद्ध आयनन एन्थैल्पी, ;खद्ध आॅक्साइडों की क्षारकता, ;गद्ध हाइड्राॅक्साइडों की विलेयता। 10.7 लीथ्िायम किस प्रकार मैग्नीश्िायम से रासायनिक गुणों में समानताएं दशार्ता है? 10.8 क्षार धातुएं तथा क्षारीय मृदा धातुएं रासायनिक अपचयन वििा से क्यों नहीं प्राप्त किए जा सकते हैं? समझाइए। 10.9 प्रकाश वैद्युत सेल में लीथ्िायम के स्थान पर पोटैश्िायम एवं सीजियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं? 10.10 जब एक क्षार धातु को द्रव अमोनिया में घोला जाता है, तब विलयन विभ्िाÂ रंग प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार के रंग - परिवतर्न का कारण बताइए। 10.11 ज्वाला को बेरीलियम एवं मैग्नीश्िायम कोइर् रंग नहीं प्रदान करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएं ऐसा करती हैं। क्यों? 10.12 साल्वे प्रक्रम में होने वाली विभ्िाÂ अभ्िाियाओं की विवेचना कीजिए। 12.13 पोटैश्िायम काबार्ेनेट साल्वे वििा द्वारा नहीं बनाया जा सकता है। क्यों? 10.14 स्पब्व् कम ताप पर एवं छंब्व् उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है?23 2310.15 क्षार धातुओं के निम्नलिख्िात यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिएμ ;कद्ध नाइट्रेट ;खद्ध काबार्ेनेट ;गद्ध सल्पेफट। 10.16 सोडियम क्लोराइड से प्रारंभ करके निम्नलिख्िात को आप किस प्रकार बनाएँगे? ;पद्ध सोडियम धातु ;पपद्ध सोडियम हाइड्राॅक्साइड ;पपपद्ध सोडियम पराॅक्साइड ;पअद्ध सोडियम काबार्ेनेट 10.17 क्या होता है, जबμ ;पद्ध मैग्नीश्िायम को हवा में जलाया जाता है। ;पपद्ध बिना बूझे चूने को सिलीका के साथ गरम किया जाता है। ;पपपद्ध क्लोरीन बुझे चूने से अभ्िािया करती है। ;पअद्ध वैफल्िसयम नाइट्रेट को गरम किया जाता है। 10.18 निम्नलिख्िात में से प्रत्येक के दो - दो उपयोग बताइएμ ;पद्ध कास्िटक सोडा ;पपद्ध सोडियम काबार्ेनेट ;पपपद्ध बिना बुझा चूना 10.19 निम्नलिख्िात की संरचना बताइएμ ;पद्ध ठमब्स ;वाष्पद्ध, ;पपद्ध ठमब्स ;ठोसद्ध2 210.20 सोडियम एवं पोटैश्िायम के हाइड्राॅक्साइड एवं काबोर्नेट जल में विलेय हैं, जबकि मैग्नीश्िायम एवं वैफल्िसयम के संगत लवण जल में अल्प विलेय हैं। समझाइए। 10.21 निम्नलिख्िात की महत्ता बताइएμ ;पद्ध चूना - पत्थर ;पपद्ध सीमेन्ट ;पपपद्ध प्लास्टर आॅपफ पेरिस 10.22 लीथ्िायम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार - धातुओं के लवण साधारणतया निजर्लीय होते हैं। क्यों? 10.23 स्पथ् जल में लगभग अविलेय होता है, जबकि स्पब्स न सिपफर् जल में, बल्िक ऐसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए? 10.24 जैव द्रवों में सोडियम, पोटैश्िायम, मैग्नीश्िायम एवं वैफल्िसयम की साथर्कता बताइए। 10.25 क्या होता है, जबμ ;पद्ध सोडियम धातु को जल में डाला जाता है। ;पपद्ध सोडियम धातु को हवा की अध्िकता में गरम किया जाता है। ;पपपद्ध सोडियम पराॅक्साइड को जल में घोला जाता है। 10.26 निम्नलिख्िात में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिख्िाएμ ;कद्ध जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता स्प़ढछं़ढज्ञ़ढत्इ़ढब्े़ क्रम में होती है। ;खद्ध लीथ्िायम ऐसी एकमात्रा क्षार धातु है, जो नाइट्राइड बनाती है। 2़−;गद्ध ड;ंुद्ध ़ 2म ⎯⎯→ ड;ैद्ध हेतु म्ट ;जहाँ ड त्र ब्ंए ैत या ठं द्ध लगभग स्िथरांक है। 10.27 समझाइए कि क्योंμ ;कद्ध छंब्व् का विलयन क्षारीय होता है।23;खद्ध क्षार धातुएं उनके संगलित क्लोराइडों के वैद्युत - अपघटन से प्राप्त की जाती हैं। ;गद्ध पोटैश्िायम की तुलना में सोडियम अिाक उपयोगी है। 10.28 निम्नलिख्िात के मध्य ियाओं के संतुलित समीकरण लिख्िाएμ ;कद्ध छंब्व् एवं जल23;खद्ध ज्ञव् एवं जल2;गद्ध छंव् एवं ब्व्22 10.29 आप निम्नलिख्िात तथ्यों को वैफसे समझाएँगेμ ;कद्ध ठमव् जल में अविलेय है, जबकि ठमैव् विलेय है।4;खद्ध ठंव् जल में विलेय है, जबकि ठंैव् अविलेय है।4;गद्ध इर्थानाॅल में स्पप्ए ज्ञप् की तुलना में अिाक विलेय है। 10.30 इनमें से किस क्षार - धातु का गलनांक न्यूनतम है? ;कद्ध छं ;खद्ध ज्ञ ;गद्ध त्इ ;घद्ध ब्े 10.31 निम्नलिख्िात में से कौन सी क्षार - धातु जलयोजित लवण देती है? ;कद्ध स्प ;खद्ध छं ;गद्ध ज्ञ ;घद्ध ब्े 10.32 निम्नलिख्िात में कौन सी क्षारीय मृदा धातु काबार्ेनेट ताप के प्रति सबसे अिाक स्थायी है? ;कद्ध डहब्व्;खद्ध ब्ंब्व्;गद्ध ैतब्व्;घद्ध ठंब्व्33 33

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Rasayanbhag2-003

कक 10


s-ब्लॉक तत्त्व 

The s-Block Element


उद्देश्य

  • इस एकक के अध्ययन के बाद आप–
  • क्षार-धातुओं एवं उनके यौगिकों के सामान्य अभिलक्षणों की व्याख्या कर सकेंगे;
  • क्षारीय मृदा-धातुओं एवं उनके यौगिकों के सामान्य अभिलक्षणों को समझ सकेंगे;
  • पोर्टलैंड सीमेन्ट सहित सोडियम एवं कैल्सियम के महत्त्वपूर्ण यौगिकों के निर्माण, गुणों एवं उपयोगों का वर्णन कर सकेंगे;
  • सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम व कैल्सियम की जैव महत्ता के बारे में जान सकेंगे। 


क्षार एवं क्षारीय मृदा धातु-समूहों के प्रथम तत्त्व इन समूहों के अन्य तत्त्वों से कई गुणों में भिन्न होते हैं।

आवर्त सारणी में s-ब्लॉक के तत्त्व वे तत्त्व हैं। जिनमें अंतिम इलेक्ट्रॉन बाह्यतम s-कक्षक में जाता है। चूँकि s-कक्षक में अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, अतः केवल दो ही वर्ग (1 तथा 2) s-ब्लॉक तत्त्वों के अंतर्गत आते हैं। प्रथम वर्ग के तत्त्व हैं– लीथियम (Li), सोडियम (Na), पोटैशियम (K), रूबीडियम (Rb), सीजियम (Cs) एवं फ्रेन्सियम (Fr)। सामान्य रूप से ये तत्त्व क्षार धातुओं के रूप में जाने जाते हैं। चूँकि ये जल के साथ अभिक्रिया करके क्षारीय प्रकृति के हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं, इसलिए इन्हें ‘क्षार धातुएं’ कहते हैं। द्वितीय वर्ग के तत्त्व हैं– बेरीलियम (Be), मैग्नीशियम (Mg), कैल्सियम (Ca), स्ट्रॉन्शियम (Sr), बेरियम (Ba) एवं रेडियम (Ra)। बेरीलियम के अतिरिक्त शेष तत्त्व क्षारीय मृदा धातुओं के नाम से जाने जाते हैं। चूँकि इनके अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड की प्रकृति क्षारीय होती है एवं ये अॉक्साइड सामान्यतः भू-पर्पटी* (Earth-Crust) में मिलते हैं, इसलिए इन्हें ‘क्षारीय मृदा धातु’ कहते हैं।

क्षार धातुओं में सोडियम एवं पोटैशियम प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, जबकि लीथियम, रूबीडियम एवं सीजियम अल्प मात्रा में पाए जाते हैं। फ्रेन्सियम एक अति रेडियो सक्रिय तत्त्व है (सारणी 10.1)। फ्रेन्सियम के अधिकतम दीर्घ आयु वाले समस्थानिक 223Fr की अर्ध आयु मात्र 21 मिनट है। क्षारीय मृदा धातुओं की भू-पर्पटी में उपस्थिति के आधार पर कैल्सियम तथा मैग्नीशियम का स्थान क्रमशः पाँचवाँ तथा छठवाँ है। स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम की उपलब्धता बहुत कम है। बेरीलियम एक दुर्लभ धातु है, जबकि रेडियम की मात्रा आग्नेय शैल+ में केवल 10–10 प्रतिशत है (सारणी 10.2)।

क्षार धातुओं का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [उत्कृष्ट गैस]ns1 तथा क्षारीय मृदा-धातुओं का विन्यास [उत्कृष्ट गैस]ns2 है। लीथियम एवं बेरीलियम, जो क्रमशः वर्ग 1 व वर्ग 2 के प्रथम तत्त्व हैं, के कुछ गुण इन वर्गों के अन्य तत्त्वों से भिन्न होते हैं। इस असंगत व्यवहार के कारण दोनों तत्त्व अपने ठीक आगे वाले वर्ग के दूसरे तत्त्वों से गुणों में समानताएँ प्रदर्शित करते हैं। लीथियम के बहुत से गुण मैग्नीशियम तथा बेरीलियम के बहुत से गुण एेलुमीनियम के गुणों के समान हैं। इस प्रकार की विकर्ण समानताएँ आवर्त सारणी में विकर्ण संबंध (Diagonal Relationship) के रूप में संदर्भित की जाती हैं। तत्त्वों के आयनिक आकार या उनके आवेश/त्रिज्या अनुपात का समान होना ही विकर्ण संबंध का मुख्य आधार है।

* पृथ्वी सतह पर पतली चट्टानी सतह भू-पर्पटी कहलाती है। + मेग्मा (पिघली हुई चट्टान) के शीतलन से बनी कठोर चट्टान।


एकल संयोजी सोडियम तथा पोटैशियम आयन एवं द्विसंयोजी मैग्नीशियम और कैल्सियम आयन जैव तरलों में बहुतायत में पाए जाते हैं। ये आयन जैवीय क्रियाओं, जैसे– आयन का संतुलन (Maintenance Of Ion Balance) और शिरा आवेग संचरण (Nerve-impulse Conduction) आदि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


10.1 वर्ग 1 के तत्त्व ः क्षार-धातुएं

क्षार धातुओं के रासायनिक तथा भौतिक गुणों में परमाणु-क्रमांक के साथ एक नियमित प्रवृत्ति पाई जाती है। इन तत्त्वों के परमाण्वीय, भौतिक तथा रासायनिक गुणों का विवेचन यहाँ किया जा रहा है।


10.1.1 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

सभी क्षार धातुओं के तत्त्वों में एक संयोजी इलेक्ट्रॉन होता है तथा अंतिम दूसरे कोश की उत्कृष्ट गैस की संरचना होती है (सारणी 10.1)। इन तत्त्वों के बाह्यतम कोश में उपस्थित
s-इलेक्ट्रॉन को आसानी से त्यागने के कारण ये अत्यधिक धनविद्युतीय तत्त्व एक संयोजी आयन M+ देते हैं। अतः ये प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाए जाते हैं।


तत्त्व 
प्रतीक
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 
लीथियम
Li 1s22s1
सोडियम
Na 1s22s22p63s1
पोटैशियम  K 1s22s22p63s23p64s1
रूबीडियम
Rb 1s22s22p63s23p63d104s24p65s1
सीजियम
Cs 1s22s22p63s23p63d104s2


4p64d105s25p66s1या [Xe]6s1
फ्रेन्सियम
Fr [Rn]7s1


10.1.2 परमाणु तथा आयनी त्रिज्या

क्षार धातुओं के परमाणुओं का आकार आवर्त सारणी के किसी विशेष आवर्त में सर्वाधिक होता है। परमाणु-क्रमांक में वृद्धि होने के साथ-साथ परमाणु का आकार बढ़ता जाता है। एक संयोजी आयन (M+) का आकार उसके जनक परमाणु के आकार की तुलना में कम होता है। क्षार धातुओं की परमाणु तथा आयनी त्रिज्या वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती जाती है, अर्थात् इनका आकार Li से Cs तक बढ़ता है।


10.1.3 आयनन एन्थैल्पी

क्षार धातुओं के आयनन एन्थैल्पी का मान बहुत कम होता है। यह वर्ग में लीथियम से सीजियम की ओर नीचे जाने पर कम होता जाता है। इसका कारण यह है कि बढ़ते हुए नाभिकीय आवेश की तुलना में बढ़ते हुए परमाणु-आकार का प्रभाव अधिक हो जाता है तथा बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिकीय आवेश द्वारा भली-भाँति परिरक्षित होते हैं।


10.1.4 जलयोजन एन्थैल्पी

क्षार धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी आयनिक आकार के बढ़ने पर घटती जाती है।

Li+>Na+>K+>Rb+>Cs+

Li की जलयोजन की मात्रा अधिकतम होती है, इसीलिए लीथियम के अधिकांश लवण (उदाहरणार्थ– LiCl.2H2O) जलयोजित होते हैं।


10.1.5 भौतिक गुण

क्षार धातुएं बहुत ही नरम, हलकी तथा चाँदी के समान श्वेत होती हैं। बड़ा आकार होने के कारण इनका घनत्व कम होता है, जो लीथियम से सीजियम की ओर नीचे जाने पर कम होता जाता है, यद्यपि पोटैशियम धातु सोडियम की तुलना में हलका होता है। क्षार धातुओं के गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं, जो इन धातुओं के मात्र एक संयोजी इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति के कारण इनके बीच दुर्बल धात्विक बंध को दर्शाते हैं। क्षार धातुएं तथा इनके लवण अॉक्सीकारक ज्वाला को अभिलाक्षणिक रंग प्रदान करते हैं। इसका कारण यह है कि ज्वाला की ऊष्मा इनके बाह्यतम इलेक्ट्रॉन को उच्च ऊर्जा-स्तर पर उत्तेजित कर देती है। जब ये इलेक्ट्रॉन पुनः अपनी तलस्थ अवस्था में आता है, तो स्पेक्ट्रम के दृश्य क्षेत्र में विकिरण उत्सर्जन के कारण ज्वाला को रंग प्रदान करता है। अॉक्सीकारक ज्वाला को मिले रंग इस सारणी में दर्शाए गए हैं–


धातु
Li
Na  K
Rb
Cs
रंग
किरमिजी लाल
पीला
बैंगनी
लाल बैंगनी
नीला 
λ/nm
670.8 589.2
766.5 
780.0
455.5 

     

अतः क्षार धातुओं को इनके ज्वाला-परीक्षण के द्वारा पहचाना जा सकता है तथा इनकी सांद्रता का निर्धारण ज्वाला- प्रकाशमापी (फ्लेम फोटोमीट्री) अथवा परमाण्वीय अवशोषण स्पेक्ट्रोमिती (एटॉमिक एेब्जॉर्ब्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी) द्वारा किया जा सकता है। इन तत्त्वों को जब प्रकाश द्वारा विकरित किया जाता है, तब प्रकाश-अवशोषण के कारण ये इलेक्ट्रॉन का परित्याग करते हैं। इसी गुण के कारण सीजियम तथा पोटैशियम का प्रयोग प्रकाश-विद्युत् सेल में इलेक्ट्रोड के रूप में किया जाता है।


10.1.6 रासायनिक गुण

बड़े आकार तथा कम आयनन एन्थैल्पी के कारण धातुएं अत्यधिक क्रियाशील होती हैैं। इनकी क्रियाशीलता वर्ग में ऊपर से नीचे क्रमशः बढ़ती जाती है।

(i) वायु के साथ अभिक्रियाशीलता : क्षार धातुएं वायु की उपस्थिति में मलिन हो जाती हैं, क्योंकि वायु की उपस्थिति में इनपर अॉक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड की परत बन जाती है। ये अॉक्सीजन में तीव्रता से जलकर अॉक्साइड बनाती हैं। लीथियम और सोडियम क्रमशः मोनोअॉक्साइड तथा परॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जबकि अन्य
धातुओं द्वारा सुपर अॉक्साइड आयन का निर्माण होता
है। सुपर अॉक्साइड आयन O2 बड़े धनायनों, जैसे– K+, Rb+ तथा Cs+ की उपस्थिति में स्थायी होता है।

(अॉक्साइड)

(परॉक्साइड)

(सुपर अॉक्साइड)

(M = K, Rb, Cs)

इन सभी अॉक्साइडों में क्षार की अॉक्सीकरण अवस्था +1 होती है। लीथियम अपवादस्वरूप वायु में उपस्थित नाइट्रोजन से अभिक्रिया करके नाइट्राइड, Li3N बना लेता है। इस प्रकार लीथियम भिन्न स्वभाव दर्शाता है। क्षार धातुओं को वायु एवं जल के प्रति उनकी अति सक्रियता के कारण साधारणतया कैरोसिन में रखा जाता है।


उदाहरण 10.1

KO2 में K की अॉक्सीकरण अवस्था क्या है?

हल

सुपर अॉक्साइड को से दर्शाया जाता है। चूँकि यौगिक उदासीन है, अतः इसमें K की अॉक्सीकरण अवस्था +1 है।



(ii) जल के साथ अभिक्रियाशीलता : क्षार धातुएं जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड एवं डाइहाइड्रोजन बनाती हैं।

(M = क्षार धातु)

सारणी 10.1 क्षार धातुओं के परमाण्विक एवं भौतिक गुण

(Atomic and Physical Properties of the Alkali Metals)

10.1

* ppm (Part per million), **भारात्मक %, +स्थलमंडलः पृथ्वी का बाह्यतल; इसकी पर्पटी तथा ऊपरी मेंटल का भाग।


यद्यपि लीथियम के E0 का मान अधिकतम ऋणात्मक होता है, परंतु जल के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता सोडियम की तुलना में कम है, जबकि सोडियम के E0 का मान अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा न्यून ऋणात्मक होता है। लीथियम के इस व्यवहार का कारण इसके छोटे आकार तथा अत्यधिक जलयोजन ऊर्जा का होना है। अन्य क्षार धातुएं जल के साथ विस्फोटी अभिक्रिया करती हैं।

ये क्षार धातुएं प्रोटॉनदाता (जैसे–एेल्कोहॉल, गैसीय अमोनिया, एेल्काइन आदि) से भी अभिक्रियाएं करती हैं।

(iii) डाइहाइड्रोजन से अभिक्रियाशीलता : लगभग 673K (लीथियम के लिए 1073K) पर क्षार धातुएं डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाती हैं। सभी क्षार धातुओं के हाइड्राइड ठोस एवं आयनिक होते हैं। इन हाइड्राइडों के गलनांक उच्च होते हैं।

(iv) हैलोजन से अभिक्रियाशीलता : क्षार धातुएं हैलोजन से शीघ्र प्रबल अभिक्रिया करके आयनिक हैलाइड M+ X बनाती हैं, हालाँकि लीथियम के हैलाइड आंशिक रूप से सहसंयोजक होते हैं। इसका कारण लीथियम की उच्च ध्रुवण-क्षमता है। (धनायन के कारण ऋणायन के इलेक्ट्रॉन अभ्र का विकृत होना ‘ध्रुवणता’ कहलाता है।) लीथियम आयन का आकार छोटा है, अतः यह हैलाइड आयन के इलेक्ट्रॉन अभ्र को विकृत करने की अधिक क्षमता दर्शाता है। चूँकि बड़े आकार का ऋणायन आसानी से विकृत हो जाता है, इसलिए लीथियम आयोडाइड सहसंयोजक प्रकृति सबसे अधिक दर्शाते हैं।

(v) अपचायक प्रकृति : क्षार धातुएं प्रबल अपचायक के रूप में कार्य करती हैं, जिनमें लीथियम प्रबलतम एवं सोडियम दुर्बलतम अपचायक हैं (सारणी 10.1)। मानक इलेक्ट्रोड विभव (E0), जो अपचायक क्षमता का मापक है, संपूर्ण परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है–

ऊर्ध्वपातन एन्थैल्पी

आयनन एन्थैल्पी

जलयोजन एन्थैल्पी

लीथियम आयन का आकार छोटा होने के कारण इसकी जलयोजन एन्थैल्पी का मान अधिकतम होता है, जो इसके उच्च ऋणात्मक E0 मान तथा इसके प्रबल अपचायक होने की पुष्टि करता है।


उदाहरण 10.2

Cl2/Cl के लिए E0 का मान +1.36, I2/I के लिए + 0.53, Ag+/Ag के लिए +0.79, Na+/Na के लिए –2.71 एवं Li+/Li के लिए –3.04 है। निम्नलिखित को उनकी घटती हुई अपचायक क्षमता के अनुसार व्यवस्थित कीजिए–

I, Ag, Cl, Li, Na

हल

क्रम इस प्रकार है ः Li > Na > l > Ag > Cl– 


(vi) द्रव अमोनिया में विलयन : क्षार धातुएं द्रव अमोनिया में घुलनशील हैं। अमोनिया में इनके विलयन का रंग गहरा नीला होता है एवं विलयन प्रकृति में विद्युत् का सुचालक होता है–

विलयन का नीला रंग अमोनीकृत इलेक्ट्रॉनों के कारण होता है, जो दृश्यप्रकाश क्षेत्र की संगत ऊर्जा का अवशोषण करके विलयन को नीला रंग प्रदान करते हैं। अमोनीकृत विलयन अनुचुंबकीय (Paramagnetic) होता है, जो कुछ समय पड़े रहने पर हाइड्रोजन को मुक्त करता है। फलस्वरूप विलयन में एेमाइड बनता है।

(जहाँ 'am' अमोनीकृत विलयन दर्शाता है।) सांद्र विलयन में नीला रंग ब्रॉन्ज रंग में बदल जाता है और विलयन प्रतिचुंबकीय (Diamagnetic) हो जाता है।


10.1.7 उपयोग

लीथियम का उपयोग महत्त्वपूर्ण मिश्रातुओं के निर्माण में होता है। उदाहरणार्थ–लैड के साथ यह श्वेत धातु (White metal) बनाता है, जिससे इंजन की बियरिंग बनाई जाती है। एेलुमीनियम के साथ मिलकर लीथियम उच्च शक्ति का मिश्रातु बनाता है, जिसका उपयोग वायुयानों के निर्माण में होता है। मैग्नीशियम के साथ उसकी मिश्रातु का उपयोग कवच-प्लेट (Armour-plate) बनाने में तथा लीथियम का उपयोग ताप नाभिकीय अभिक्रियाओं के अतिरिक्त विद्युत् रासायनिक सेलों में भी होता है। सोडियम का उपयोग Na/Pb मिश्रातु में होता है, जो PbEt4 तथा PbMe4 के निर्माण के लिए आवश्यक है। इन कार्बलैड यौगिकों का उपयोग पूर्व में पेट्रोल में अपस्फोटरोधी (Antihknock) के रूप में होता था, परंतु अब अधिकतर वाहनों में सीसारहित (Lead-free) पेट्रोल का उपयोग होने लगा है। द्रव सोडियम धातु का उपयोग नाभिकीय रिएेक्टर में शीतलक (Coolant) के रूप में होता है। जैवीय क्रियाओं में पोटैशियम की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। पोटैशियम क्लोराइड का उपयोग उर्वरक के रूप में तथा पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग मृदु साबुन के निर्माण में और कार्बन डाइअॉक्साइड के अवशोषक के रूप में भी होता है। सीजियम का उपयोग प्रकाश वैद्युत् सेल (Photoelectric cells) में होता है।


10.2 क्षार धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभिलक्षण

क्षार धातुओं के सभी यौगिक साधारणतया आयनिक प्रकृति के होते हैं। इनमें से कुछ यौगिकों के सामान्य अभिलक्षणों की विवेचना यहाँ की जा रही है।


10.2.1 अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड

वायु के आधिक्य में दहन करने पर लीथियम मुख्य रूप से मोनोअॉक्साइड Li2O (एवं कुछ परॉक्साइड Li2O2), सोडियम परॉक्साइड Na2O2 (एवं कुछ सुपर अॉक्साइड NaO2 भी) बनाते हैं, जबकि पोटैशियम, रूबीडियम तथा सीजियम सुपर अॉक्साइड (MO2) बनाते हैं। अनुकूल परिस्थितियों में M2O, M2O2 एवं MO2 शुद्ध रूप मेें बनाए जा सकते हैं। धातु-आयनों का आकार बढ़ने के साथ-साथ परॉक्साइडों तथा सुपर अॉक्साइडों के स्थायित्व में भी वृद्धि होती है। इसका कारण जालक ऊर्जा-प्रभाव (Lattice Energy Effect) के फलस्वरूप बड़े ऋणायनों का बड़े धनायनों द्वारा स्थायित्व प्रदान करना है। ये अॉक्साइड सरलतापूर्वक जल अपघटित होकर हाइड्रॉक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं।

शुद्ध अवस्था में अॉक्साइड एवं परॉक्साइड रंगहीन होते हैं, परंतु सुपर अॉक्साइड पीले या नारंगी रंग के होते हैं। सुपर अॉक्साइड भी अनुचुंबकीय (Paramagnetic) होते हैं। अकार्बनिक रसायन में सोडियम परॉक्साइड को अॉक्सीकारक के रूप में प्रयोग में लाया जाता है।


उदाहरण 10.3

KO2 अनुचुंबकीय क्यों होता है?

हल

KO2 तथा O2 में एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन π*2p
आण्विक
आर्बिटल में होने के कारण KO2 अनुचुंबकीय होता है।


अॉक्साइड तथा जल-अभिक्रिया से प्राप्त हाइड्रॉक्साइड श्वेत क्रिस्टलीय ठोस होते हैं। क्षार धातुओं के हाइड्रॉक्साइड प्रबलतम क्षारक होते हैं। ये जल में अत्यधिक ऊष्मा के उत्सर्जन के साथ आसानी से घुल जाते हैं। जल में इनके घुलने का कारण तीव्र जलयोजन है।


10.2.2 हैलाइड

क्षार धातुओं के हैलाइड, MX, (X = F, Cl, Br, l) उच्च गलनांक वाले रंगहीन, क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होते हैं। इन्हें उपयुक्त अॉक्साइड, हाइड्रॉक्साइड या कार्बाेनेट की हाइड्रोहेलिक अम्ल (HX) के साथ अभिक्रिया करके बनाया जा सकता है। इन सभी हैलाइडों की संभवन एन्थैल्पी उच्च ऋणात्मक होती है। क्षार धातुओं के फ्लुओराइडों के fH0 का मान वर्ग में नीचे की ओर बढ़ने पर कम ऋणात्मक होता जाता है, जबकि इन क्षार धातुओं के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड के fH0 का मान ठीक इससे विपरीत होता है। किसी धातु-विशेष के लिए fH0 का मान फ्लुओराइड से आयोडाइड तक हमेशा कम ऋणात्मक होता जाता है।

गलनांक एवं क्वथनांक का क्रम हमेशा फ्लुओराइड > क्लोराइड > ब्रोमाइड > आयोडाइड के अनुसार होता है। ये सभी हैलाइड जल में घुलनशील होते हैं। जल में LiF की निम्न विलेयता इसकी उच्च जालक ऊर्जा (Latice Energy) के कारण तथा Csl की निम्न विलेयता Cs+ तथा I की निम्न जलयोजन ऊर्जा (Hydration Energy) के कारण है। लीथियम के अन्य हैलाइड एथानॉल, एेसीटोन और एथिल एेसीटेट में घुलनशील हैं। LiCl पिरीडीन में भी घुलनशील हैं।


10.2.3 अॉक्सो-अम्लों के लवण

अॉक्सो-अम्ल वे होते हैं, जिनमें जिस परमाणु पर अम्लीय प्रोटॉन से युक्त हाइड्रॉक्सिल समूह होता है, उसी परमाणु पर अॉक्सो समूह जुड़ा रहता है। जैसे–कार्बाेनिक अम्ल, H2CO3 [OC(OH)2] सल्फ्यूरिक अम्ल, H2SO4 [O2S(OH)2] क्षार धातुएं–सभी अॉक्सो-अम्लों के साथ लवण बनाते हैं। ये साधारणतया जल में घुलनशील होते हैं तथा तापीय स्थायी होते हैं। इनके कार्बाेनेटों (M2CO3) एवं हाइड्रोजन कार्बाेनेटों (MHCO3) का तापीय स्थायित्व अत्यधिक होता है। चूँकि वर्ग में ऊपर से नीचे धनविद्युतीय स्वभाव बढ़ता है, अतः कार्बोनेटों एवं हाइड्रोजन कार्बाेनेटों का स्थायित्व भी बढ़ता है। लीथियम कार्बाेनेट ताप के प्रति अधिक स्थायी नहीं होता है। लीथियम का आकार छोटा होने के कारण यह बड़े ऋणापन CO32– को ध्रुवित कर अधिक स्थायी Li2O एवं CO2 का विरचन करता है। इसके हाइड्रोजन कार्बोनेट का अस्तित्व ठोस अवस्था में नहीं होता है।


10.3 लीथियम का असंगत व्यवहार

निम्नलिखित कारणों से लीथियम का व्यवहार असंगत है–

(क) इसके परमाणु एवं आयन (Li+) का असामान्य छोटा आकार, (ख) उच्च ध्रुवण-क्षमता (अर्थात् आवेश/त्रिज्या अनुपात)। परिणामस्वरूप लीथियम यौगिकों की सहसंयोजक प्रवृत्ति अधिक होती है। इसी कारण ये कार्बनिक विलायकों में घुलनशील होते हैं। लीथियम मैग्नीशियम से विकर्ण संबंध दर्शाता है, जिसका वर्णन आगे (खंड 10.3.2 में) दिया गया है।

10.3.1 लीथियम एवं अन्य क्षार धातुओं में असमानताओं के मुख्य बिंदु

(i) लीथियम अत्यधिक कठोर है। इसका गलनांक एवं क्वथनांक अन्य क्षार धातुओं की तुलना में अधिक है।

(ii) लीथियम की अभिक्रियाशीलता अन्य क्षार धातुओं की अपेक्षा सबसे कम है, परंतु यह प्रबलतम अपचायक का कार्य करता है। वायु में दहन के फलस्वरूप लीथियम मुख्यतः मोनोअॉक्साइड (Li2O) बनाता है। अन्य क्षार धातुओं के विपरीत लीथियम नाइट्रोजन के साथ अभिक्रिया करके नाइट्राइड (Li3N) भी बना लेता है।

(iii) LiCl प्रस्वेद्य (Deliquescent) है एवं हाइड्रेट, LiCl.2H2O के रूप में क्रिस्टलित होता है, जबकि अन्य क्षार धातुओं के क्लोराइड हाइड्रेट नहीं बनाते हैं।

(iv) लीथियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट ठोस अवस्था में प्राप्य नहीं है, जबकि अन्य क्षार धातु ठोस हाइड्रोजनकार्बोनेट बनाते हैं।

(v) लीथियम एथाइन (Ethyne) से अभिक्रिया करके एथाइनाइड (Ethynide) नहीं बनाता है, जबकि अन्य क्षार धातुएं एेसा करती हैं।

(vi) लीथियम नाइट्रेट गरम करने पर लीथियम अॉक्साइड, Li2O देता है, जबकि अन्य क्षार धातुएं नाइट्रेट विघटित होकर नाइट्राइट देती हैं।

(vii) अन्य क्षार धातुओं के फ्लुओराइड एवं अॉक्साइड की तुलना में LiF एवं Li2O जल में कम विलेय हैं।


10.3.2 लीथियम एवं मैग्नीशियम में समानताओं के बिंदु

लीथियम एवं मैग्नीशियम में समानताएँ मुख्य रूप से विचारणीय हैं। इनके समान आकार के कारण एेसा होता है। Li तथा Mg की परमाण्वीय त्रिज्या क्रमशः 152 pm तथा 160 pm है। Li+ तथा Mg2+ की आयनिक त्रिज्या क्रमशः 76 pm एवं 72 pm है। लीथियम एवं मैग्नीशियम में समानताएँ निम्नलिखित हैं–

(i) लीथियम एवं मैग्नीशियम अपने वर्गाें की अन्य धातुओं की तुलना में कठोर तथा हलकी धातुएं हैं।

(ii) लीथियम एवं मैग्नीशियम जल के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करते हैं। इनके अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड बहुत कम घुलनशील हैं। हाइड्रॉक्साइड गरम करने पर विघटित हो जाते हैं। दोनों ही नाइट्रोजन से सीधे संयोग करके नाइट्राइड क्रमशः Li3N एवं Mg3N2 बनाते हैं।

(iii) Li2O एवं MgO अॉक्सीजन के आधिक्य से अभिक्रिया करके सुपर अॉक्साइड नहीं बनाते हैं।

(iv) लीथियम एवं मैग्नीशियम धातुओं के कार्बाेनेट गरम करने पर सरलतापूर्वक विघटित होकर उनके अॉक्साइड एवं CO2 बनाते हैं। दोनों ही ठोस हाइड्रोजनकार्बोनेट नहीं बनाते हैं।

(v) LiCl एवं MgCl2 एथेनॉल में विलेय हैं।

(vi) LiCl एवं MgCl2 दोनों ही प्रस्वेद्य (Deliquescent) यौगिक हैं। ये जलीय विलयन से LiCl.2H2O एवं MgCl2.8H2O के रूप में क्रिस्टलीकृत होते हैं।


10.4 सोडियम के कुछ महत्त्वपूर्ण यौगिक

औद्योगिक स्तर पर सोडियम के महत्त्वपूर्ण यौगिक हैंः सोडियम कार्बोनेट, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, सोडियम क्लोराइड एवं सोडियम बाइकार्बोनेट। इन यौगिकों के औद्योगिक निर्माण एवं उपयोगों का वर्णन नीचे किया जा रहा है।


सोडियम कार्बाेनेट (धावन सोडा) Na2CO3.10H2O

साधारणतया सोडियम कार्बाेनेट ‘साल्वे विधि’ द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में लाभ यह है कि सोडियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट, जो अमोनियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट एवं सोडियम क्लोराइड के संयोग से अवक्षेपित होता है, अल्प विलेय होता है। अमोनियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट, CO2 गैस को सोडियम क्लोराइड के अमोनिया से संतृप्त सांद्र विलयन में प्रवाहित कर बनाया जाता है। वहाँ पहले अमोनियम कार्बाेनेट और फिर अमोनियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट बनता है। संपूर्ण प्रक्रम की अभिक्रियाएं निम्नलिखित हैं–

इस प्रकार सोडियम बाइकार्बोनेट के क्रिस्टल पृथक् हो जाते हैं, जिन्हें गरम करके सोडियम कार्बाेनेट प्राप्त किया जाता है–

इस प्रक्रम में NH4Cl युक्त विलयन की Ca(OH)2 से अभिक्रिया पर NH3 को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। कैल्सियम क्लोराइड सह-उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है–

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि साल्वे विधि का उपयोग पोटैशियम कार्बाेनेट के निर्माण में नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पोटैशियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट की अधिक विलेयता के कारण इसे पोटैशियम क्लोराइड के संतृप्त विलयन में अमोनियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट के संयोग द्वारा अवक्षेपित करना संभव नहीं है।


गुण

सोडियम कार्बाेनेट श्वेत क्रिस्टलीय ठोस है, जो डेकाहाइड्रेट के रूप में पाया जाता है। इसे ‘धावन सोडा’ (Washing Soda) भी कहते हैं। यह जल में आसानी से घुल जाता है। गरम करने पर डेकाहाइड्रेट क्रिस्टलीय जल त्यागकर मोनोहाइड्रेट में बदल जाता है। 373 K से उच्च ताप पर मोनोहाइड्रेट पूर्ण रूप से शुष्क हो जाता है एवं एक श्वेत रंग के चूर्ण में बदल जाता है, जिसे ‘सोडा एेश’ (Soda Ash) कहते हैं।

सोडा एेश

सोडियम कार्बाेनेट का कार्बाेनेट वाला भाग जल-अपघटित होकर क्षारीय विलयन बनाता है–


उपयोग

(1) जल के मृदुकरण, धुलाई एवं निर्मलन में;

(2) काँच, साबुन, बोरेक्स एवं कास्टिक सोडा के निर्माण में;

(3) कागज़, पेन्ट एवं वस्त्र उद्योग में; और

(4) प्रयोगशाला में गुणात्मक एवं मात्रात्मक विश्लेषण में अभिकर्मक के रूप में।


सोडियम क्लोराइड (NaCl)

सोडियम क्लोराइड का मुख्य स्रोत समुद्री जल है, जिसमें लगभग 2.7 से 2.9 प्रतिशत (भारात्मक) तक लवण होता है। हमारे देश जैसे देशों में समुद्री जल के वाष्पीकरण द्वारा साधारण नमक प्राप्त किया जाता है। हमारे देश में सूर्य से वाष्पीकरण द्वारा लगभग 50 लाख टन नमक का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जाता है। अपरिष्कृत नमक, जो ब्राइन विलयन के क्रिस्टलीकरण से प्राप्त किया जाता है, में सोडियम सल्फेट, कैल्सियम सल्फेट, कैल्सियम क्लोराइड एवं मैग्नीशियम क्लोराइड अशुद्धि के रूप में होते हैं। कैल्सियम क्लोराइड CaCl2 एवं मैग्नीशियम क्लोराइड MgCl2 की अशुद्धि का कारण उनका प्रस्वेद्य (Deliquescent) होना है (अर्थात् ये सरलतापूर्वक वायुमंडल से नमी का अवशोषण करते हैं)। शुद्ध सोडियम क्लोराइड प्राप्त करने के लिए अपरिष्कृत लवण को जल की न्यूनतम मात्रा में घोला जाता है, जिसमें अविलेय अशुद्धियाँ पृथक् हो जाती हैं। जब विलयन को हाइड्रोजन क्लोराइड गैस से संतृप्त करते हैं, तब सोडियम क्लोराइड के क्रिस्टल पृथक् हो जाते हैं। कैल्सियम एवं मैग्नीशियम क्लोराइड सोडियम क्लोराइड से अधिक विलेय होने के कारण विलयन में ही रहते हैं।

सोडियम क्लोराइड का गलनांक 1081 K है। जल में इसकी विलेयता 273 K पर 36.0 g प्रति 100 g जल है। ताप बढ़ाने पर विलेयता पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है।


उपयोग

(i) साधारण नमक के रूप में, तथा

(ii) Na2O2, NaOH एवं Na2CO3 बनाने में।


सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा), NaOH

औद्योगिक स्तर पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड का उत्पादन  कास्टनर-कैलनर सेल में सोडियम क्लोराइड के विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है। मर्करी कैथोड एवं कार्बन एेनोड का उपयोग करके लवण-जल का विद्युत्-अपघटन सेल में किया जाता है। सोडियम धातु मर्करी कैथोड पर विसर्जित होकर मर्करी के साथ संयुक्त होकर सोडियम अमलगम बनाता है। एेनोड पर क्लोरीन गैस मुक्त होती है।

कैथोड ः अमलगम

एेनोड ः

अमलगम जल से अभिक्रिया करके सोडियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देता है।

2Na– अमलगम

सोडियम हाइड्रॉक्साइड पारभासी श्वेत ठोस पदार्थ है। इसका गलनांक 591 K है। यह जल में शीघ्रता से विलेय होकर क्षारीय विलयन बनाता है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड के क्रिस्टल प्रस्वेद्य (Deliquescent) होते हैं। सतह पर सोडियम हाइड्रॉक्साइड विलयन वायुमंडलीय CO2 से अभिक्रिया करके Na2CO3 बनाता है।


उपयोग

(i) साबुन, कागज़, कृत्रिम रेशम तथा कई अन्य रसायनों के निर्माण में;

(ii) पेट्रोलियम के परिष्करण में;

(iii) बॉक्साइट के शुद्धिकरण में;

(iv) वस्त्र-उद्योग में सूती वस्त्रों के मर्सरीकरण में;

(v) शुद्ध वसा एवं तेलों के निर्माण में; तथा

(vi) प्रयोगशाला-अभिकर्मक के रूप में।


सोडियम हाइड्रोजन-कार्बाेनेट (बेकिंग सोडा), NaHCO3

सोडियम हाइड्रोजन कार्बाेनेट को ‘बेकिंग सोडा’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह गरम करने पर विघटित होकर कार्बन-डाइअॉक्साइड के बुलबुले देता है। (इसीलिए पेस्ट्री, केक आदि में छोट-छोटे छिद्र हो जाते हैं। फलत : वे हलके तथा परिफुल्लित (Fluffy) बन जाते हैं।)

सोडियम हाइड्रोजन-कार्बाेनेट को सोडियम कार्बाेनेट के विलयन में CO2 गैस से संतृप्त करके बनाया जाता है। सोडियम हाइड्रोजनकार्बाेनेट का श्वेत चूर्ण कम विलेय होने के कारण पृथक् हो जाता है।

सोडियम हाइड्रोजन-कार्बाेनेट चर्म रोगों में मंद पूतिराधी (Mild Antiseptic) के रूप में; साथ ही अग्निशमन यंत्र में भी होता है।


10.5 सोडियम एवं पोटैशियम की जैव उपयोगिता

70 किलो के वज़न वाले एक सामान्य व्यक्ति में लगभग
90 ग्राम सोडियम एवं 170 ग्राम पोटैशियम होता
है, जबकि लोहा केवल 5 ग्राम तथा ताँबा 0.06 ग्राम होता है।

सोडियम आयन मुख्यतः अंतराकाशीय द्रव में उपस्थित रक्त प्लाज़्मा, जो कोशिकाओं को घेरे रहता है, में पाया जाता है। यह आयन शिरा-संकेतों के संचरण में भाग लेते हैं, जो कोशिका झिल्ली में जलप्रवाह को नियमित करते हैं तथा कोशिकाओं में शर्करा और एमीनो अम्लों के प्रवाह को भी नियंत्रित करते हैं। सोडियम एवं पोटैशियम रासायनिक रूप से समान होते हुए भी कोशिका झिल्ली को पार करने की क्षमता एवं एन्ज़ाइम को सक्रिय करने में मात्रात्मक रूप से भिन्न हैं। इसीलिए कोशिका द्रव में पोटैशियम धनायन बहुतायत में होते हैं। जहाँ ये एन्ज़ाइम को सक्रिय करते हैं तथा ग्लूकोज़ के अॉक्सीकरण से ATP बनने में भाग लेते हैं। सोडियम आयन शिरा-संकेतों के संचरण के लिए उत्तरदायी है।

कोशिका झिल्ली के अन्य हिस्सों में पाए जाने वाले सोडियम एवं पोटैशियम आयनों की सांद्रता में उल्लेखनीय भिन्नता पाई जाती है। उदाहरण के लिए– रक्त प्लाज़्मा में लाल रक्त कोशिकाओं में सोडियम की मात्रा 143 m molL-1 है, जबकि पोटैशियम का स्तर केवल 5 m molL-1 है। यह सांद्रता 10 m molL-1 (Na+) एवं 105 m molL-1(K+) तक परिवर्तित हो सकती है। यह असाधारण आयनिक उतार-चढ़ाव, जिसे ‘सोडियम पोटैशियम पंप’ कहते हैं, सेल झिल्ली पर कार्य करता है, जो मनुष्य की विश्रामावस्था के कुल उपभोगित ATP की एक-तिहाई से ज़्यादा का उपयोग कर लेता है, जो मात्रा लगभग 15 किलो प्रति 24 घंटे तक हो सकती है।


10.6 वर्ग 2 के तत्त्वः क्षारीय मृदा धातुएं

आवर्त सारणी के वर्ग 2 के तत्त्व हैं– बेरीलियम, मैग्नीशियम, कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम, बेरियम एवं रेडियम। बेरीलियम के अतिरिक्त अन्य तत्त्व संयुक्त रूप से ‘मृदा धातुएं’ कहलाती हैं। प्रथम तत्त्व बेरीलियम वर्ग के अन्य तत्त्वों से भिन्नता दर्शाता है एवं एेलुमीनियम के साथ विकर्ण संबंध (Diagonal Relationship) दर्शाता है। मृदा धातुओं के परमाण्वीय तथा भौतिक गुण सारणी 10.2 में दर्शाए गए हैं।


10.6.1 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

इन तत्त्वों के संयोजकता-कोश के s–कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं (सारणी 10.2)। इनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [उत्कृष्ट गैस] ns2 होता है। क्षार धातुओं के समान ही इनके भी यौगिक मुख्यतः आयनिक प्रकृति के होते हैं।


तत्त्व 
प्रतीक
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 
बेरीलियम
Be
1s22s2
मैग्नीशियम
Mg
1s22s22p63s2
कैल्सियम  Ca
1s22s22p63s23p64s2
स्ट्रॉन्शियम
Sr
1s22s22p63s23p63d104s24p65s2
बेरियम
Ba
1s22s22p63s23p63d104s24p6


4d105s25p66s2 या [Xe] 6s2
रेडियम
Ra
[Rn]7s2


10.6.2 परमाणु एवं आयनी त्रिज्या

आवर्त सारणी के संगत आवर्तों में क्षार धातुओं की तुलना में क्षारीय मृदा धातुओं की परमाणु एवं आयनी त्रिज्याएं छोटी होती हैं। इसका कारण इन तत्त्वों के नाभिकीय आवेशों में वृद्धि होना है।


10.6.3 आयनन एन्थैल्पी

क्षारीय मृदा धातुओं के परमाणुओं के बड़े आकार के कारण इनकी आयनन एन्थैल्पी के मान न्यून होते हैं। चूँकि वर्ग में आकार ऊपर से नीचे क्रमशः बढ़ता जाता है, अतः इनकी आयनन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं (सारणी 10.2)। क्षारीय मृदा धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान क्षार धातुओं के प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में अधिक है। यह इनकी क्षार धातुओं की संगत तुलनात्मक रूप से छोटे आकार होने के कारण होती है, परंतु यह देखना रुचिकर है कि इनके द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मान क्षार धातुओं के द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के मानों की तुलना में कम हैं।


10.6.4 जलयोजन एन्थैल्पी

क्षार धातुओं के समान इसमें भी वर्ग में ऊपर से नीचे आयनिक आकार बढ़ने पर इनकी जलयोजन एन्थैल्पी के मान कम होते जाते हैं।

Be2+ > Mg2+ > Ca2+ > Sr2+ > Ba2+


क्षारीय मृदा धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी क्षार धातुओं की जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में ज़्यादा होती है। इसीलिए मृदा धातुओं के यौगिक क्षार धातुओं के यौगिकों की तुलना में अधिक जलयोजित होते हैं। जैसे–MgCl2 एवं CaCl2 जलयोजित अवस्था MgCl2.6H2O एवं CaCl2.6H2O में पाए जाते हैं, जबकि NaCl एवं KCl एेेसे हाइड्रेट नहीं बनाते हैं।


सारणी 10.2 क्षारीय मृदा धातुओं के परमाण्विक एवं भौतिक गुण

(Atomic and Physical Properties of the Alkaline Earth Metals)

10.2



10.6.5 भौतिक गुण

क्षारीय मृदा धातुएं सामान्यतया चाँदी की भाँति सफेद, चमकदार एवं नरम, परंतु अन्य धातुओं की तुलना में कठोर होती हैं। बेरीलियम तथा मैग्नीशियम लगभग धूसर रंग (Greyish) के होते हैं। इनके गलनांक एवं क्वथनांक क्षार धातुओं की तुलना में उच्च होते हैं, क्योंकि इनका आकार छोटा होता है। फिर भी इनके गलनांकाें तथा क्वथनांकों में कोई नियमित परिवर्तन नहीं दिखता है। निम्न आयनन एन्थैल्पी के कारण ये प्रबल धन-विद्युतीय होते हैं। धन-विद्युतीय गुण ऊपर से नीचे Be से Ba तक बढ़ता है। कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम ज्वाला को क्रमशः ईंट जैसा लाल (Brick Red) रंग, किरमिजी लाल (Crimson Red) एवं हरा (Apple Green) रंग प्रदान करते हैं। ज्वाला में उच्च ताप पर वाष्प-अवस्था में क्षारीय मृदा धातुओं के बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा-स्तर पर चले जाते हैं। ये उत्तेजित इलेक्ट्रॉन जब पुनः अपनी तलस्थ अवस्था में लौटते हैं, तब दृश्य प्रकाश के रूप में ऊर्जा उत्सर्जित होती है। फलतः ज्वाला रंगीन दिखने लगती है। बेरीलियम तथा मैग्नीशियम के बाह्यतम कोशों के इलेक्ट्रॉन इतनी प्रबलता से बँधे रहते हैं कि ज्वाला की ऊर्जा द्वारा इनका उत्तेजित होना कठिन हो जाता है। अतः ज्वाला में इन धातुओं का अपना कोई अभिलाक्षणिक रंग नहीं होता है। गुणात्मक विश्लेषण में Ca, Sr एवं Ba मूलकों की पुष्टि ज्वाला-परीक्षण के आधार पर की जाती है तथा इनकी सांद्रता का निर्धारण ज्वाला प्रकाशमापी द्वारा किया जाता है। क्षारीय मृदा धातुओं की क्षार धातुओं की तरह वैद्युत् एवं ऊष्मीय चालकता उच्च होती है। यह इनका अभि-लाक्षणिक गुण होता है।


10.6.6 रासायनिक गुण

क्षारीय मृदा धातुएं क्षार धातुओं से कम क्रियाशील होती हैं। इन तत्त्वों की अभिक्रियाशीलता वर्ग के ऊपर से नीचे जाने पर बढ़ती है।

(i) वायु एवं जल के प्रति अभिक्रियाशीलता : बेरीलियम एवं मैग्नीशियम गतिकीय रूप से अॉक्सीजन तथा जल के प्रति निष्क्रिय हैं, क्योंकि इन धातुओं के पृष्ठों पर अॉक्साइड की फिल्म जम जाती है। फिर भी, बेरीलियम चूर्ण रूप में वायु में जलने पर BeO एवं Be3N2 बना लेता है। मैग्नीशियम अधिक धनविद्युतीय है, जो वायु में अत्यधिक चमकीले प्रकाश के साथ जलते हुए MgO तथा Mg3N2 बना लेता है। कैल्सियम, स्ट्रॉन्शियम एवं बेरियम वायु से शीघ्र अभिक्रिया करके अॉक्साइड तथा नाइट्राइड बनाते हैं। ये जल से और भी अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करते हैं; यहाँ तक कि ठंडे जल से अभिक्रिया कर हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं।

(ii) हैलोजन के प्रति अभिक्रियाशीलता : सभी क्षारीय मृदा धातुएं हैलोजन के साथ उच्च ताप पर अभिक्रिया करके हैलाइड बना लेती हैं–

BeF2 बनाने की सबसे सरल विधि (NH4)2 BeF4 का तापीय अपघटन है, जबकि BeCl2, अॉक्साइड से सरलतापूर्वक बनाया जा सकता है–

10.3

(iii) हाइड्रोजन के प्रति अभिक्रियाशीलता : बेरीलियम के अतिरिक्त सभी क्षारीय मृदा धातुएं गरम करने पर हाइड्रोजन से अभिक्रिया करके हाइड्राइड बनाती हैं। BeH2 को BeCl2 एवं LiAlH4 की अभिक्रिया से बनाया जा सकता है–

(iv) अम्लों के प्रति अभिक्रियाशीलता : क्षारीय मृदा धातुएं शीघ्र ही अम्लों से अभिक्रिया कर हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं।

(v) अपचायक प्रकृति : प्रथम वर्ग की धातुओं के समान क्षारीय मृदा धातुएं प्रबल अपचायक हैं। इसका बोध इनके अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव के मानों से होता है (सारणी 10.2), यद्यपि इनकी अपचयन-क्षमता क्षार धातुओं की तुलना में कम होती है। बेरीलियम के अपचयन विभव का मान अन्य क्षारीय मृदा धातुओं से कम ऋणात्मक होता है। फिर भी इसकी अपचयन-क्षमता का कारण Be2+ आयन के छोटे आकार, इसकी उच्च जलयोजन ऊर्जा एवं धातु की उच्च परमाण्वीय- करण एन्थैल्पी का होना है।

(vi) द्रव अमोनिया में विलयन : क्षार धातुओं की भाँति क्षारीय मृदा धातुएं भी द्रव अमोनिया में विलेय होकर गहरे नीले काले रंग का विलयन बना लेती हैं। इस विलयन से धातुओं के अमोनीकृत आयन प्राप्त होते हैं–

इन विलयनों से पुनः अमोनिएट्स (Ammoniates) [M(NH3)6]2+ प्राप्त किए जा सकते हैं।


10.6.7 उपयोग

बेरीलियम का उपयोग मिश्रातु के निर्माण में होता है। Cu-Be मिश्रातु का उपयोग उच्च शक्ति के सि्ंप्रग बनाने में होता है। धात्विक बेरीलियम का उपयोग एक्स-किरण नली में वातायन (window) के लिए किया जाता है। मैग्नीशियम एेलुमीनियम, जिंक, मैंगनीज एवं टिन के साथ मिश्रातु बनाता है। Mg–Al मिश्रधातु हलकी होने के कारण वायुयानों के निर्माण में प्रयुक्त होती है। मैग्नीशियम (चूर्ण एवं फीता) का उपयोग चमकीले पाउडर तथा बल्ब, तापदीप्त बमों (Incendiary Bombs) और संकेतकों (Signals) में होता है। जल में मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड के निलंबन (जिसे ‘मिल्क अॉफ मैग्नीशियम’ कहते हैं) का उपयोग एेन्टाएसिड (Antacid) दवा के रूप में होता है। मैग्नीशियम कार्बोनेट किसी भी टूथपेस्ट का मुख्य घटक है। कैल्सियम का उपयोग अॉक्साइडाें से उन धातुओं के निष्कर्षण में होता है, जिन्हें कार्बन द्वारा अपचयित करना संभव नहीं है। चूँकि कैल्सियम तथा बेरियम उच्च ताप पर अॉक्सीजन एवं नाइट्रोजन से अभिक्रिया करते हैं, अतः इस गुण का उपयोग निर्वात् नली से वायु-निष्कासन करने में किया जाता है। रेडियम के लवणों का उपयोग विकिरण चिकित्सा (उदाहरणार्थ– कैन्सर के उपचार) में किया जाता है।


10.7 क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभिलक्षण

वर्ग 2 के तत्त्वों की द्विधनीय अॉक्सीकरण अवस्था (M2+) इनकी प्रमुख संयोजकता है। क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिक प्रायः आयनिक होते हैं, लेकिन यह क्षार धातुओं के संगत यौगिकों की तुलना में कम आयनिक प्रकृति के होते हैं। इसका कारण इनका अधिक नाभिकीय आवेश एवं छोटा आकार है। बेरीलियम एवं मैग्नीशियम के अॉक्साइड तथा अन्य यौगिक इस वर्ग के भारी और बड़े आकार वाले अन्य तत्त्वों (Ca, Sr, Ba) के अॉक्साइडों एवं अन्य यौगिकों की तुलना में अधिक सहसंयोजी होते हैं। क्षारीय मृदा धातुओं के यौगिकों के सामान्य अभिलक्षण यहाँ बताए जा रहे हैं।

(i) अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड ः क्षारीय मृदा धातु वायु में जलकर मोनोअॉक्साइड (MO) बनाते हैं, जिनकी संरचना BeO को छोड़कर, रॉक-साल्ट (Rock-Salt) जैसी होती है। BeO आवश्यक रूप से सहसंयोजक प्रकृति का होता है। इन यौगिकों की संभवन ऊष्माएँ उच्च होती हैं। यही कारण है कि ये ऊष्मा के प्रति अति स्थायी होते हैं। BeO उभयधर्मी है, जबकि अन्य तत्त्वों के आक्सॉइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं, जो जल से अभिक्रिया कर अल्प विलेय हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं।

इन हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता, तापीय स्थायित्व एवं क्षारीय प्रकृति Mg(OH)2 से Ba(OH)2 तक परमाणु क्रमांक बढ़ने पर बढ़ती है। क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइड क्षार धातुओं के संगत हाइड्रॉक्साइडों की तुलना में कम स्थायी होते हैं। बेरीलियम हाइड्रॉक्साइड प्रकृति में उभयधर्मी है, क्योंकि यह अम्ल तथा क्षार दोनों से अभिक्रिया करता है।

Be(OH)2 + 2OH [Be (OH4)]2-

बेरीलेट आयन

Be(OH)2 + 2HCl + 2H2O [Be (OH)4]Cl2

(ii) हैलाइड : बेरीलियम हैलाइड के अतिरिक्त अन्य धातुओं के हैलाइडों की प्रकृति आयनिक होती है। बेरीलियम हैलाइड मुख्य रूप से सहसंयोजक होते हैं एवं कार्बनिक विलायकों में विलेय होते हैं। बेरीलियम क्लोराइड की ठोस अवस्था में शृंखला-संरचना होती है, जैसाकि नीचे दर्शाया गया है–

वाष्प-अवस्था में BeCl2 क्लोरो-सेतु (Chloro-Bridged) द्विलक बनाता है, जो 1200K के उच्च ताप पर रेखीय एकलक में वियोजित हो जाता है। वर्ग में ऊपर से नीचे हैलाइड हाइड्रेट बनाने की प्रवृत्ति कम होती जाती है। Ca, Sr एवं Ba के जलयोजित क्लोराइड, ब्रोमाइड एवं आयोडाइडों का निर्जलीकरण इन्हें गरम करके किया जा सकता है, जबकि Be एवं Mg के संगत जलयोजित हैलाइड का जल-अपघटन हो जाता है। उदाहरणार्थ– MgCl2 . 8H2O, CaCl2, 6H2O, SrCl2, 6H2O एवं BaCl2.2H2O) उच्च जालक ऊर्जा के कारण फ्लुओराइड क्लोराइड की तुलना में कम विलेय होते हैं।

(iii) अॉक्सो-अम्लों के लवण : क्षारीय मृदा धातुएं अॉक्सो-अम्लों के लवण भी बनाती हैं। इनमें से कुछ मुख्य निम्नलिखित हैं–

कार्बोनेट : क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेट जल में अविलेय होते हैं, जिन्हें इन तत्त्वों के विलेय लवणों के विलयन में सोडियम या अमोनियम कार्बोनेट विलयन मिलाकर अवक्षेपित किया जा सकता है। तत्त्व के परमाणु क्रमांक बढ़ने पर कार्बोनेटों की जल में विलेयता बढ़ती है। सभी कार्बोनेट गरम करने पर कार्बन डाइअॉक्साइड एवं अॉक्साइड में वियोजित हो जाते हैं। बेरीलियम कार्बोनेट अस्थायी होता है, जिसे केवल CO2 के वातावरण में रखा जा सकता है। कार्बोनेटों का तापीय स्थायित्व धनायन का आकार बढ़ने पर बढ़ता है।

सल्फेट : क्षारीय मृदा धातुओं के सल्फेट श्वेत एवं ठोस होते हैं तथा ताप के प्रति स्थायी होते हैं। BeSO4 एवं MgSO4 शीघ्रता से जल में विलेय हो जाते हैं। CaSO4 से BaSO4 तक विलेयता कम होती जाती है। Be2+ एवं Mg2+ आयनों की जलयोजन एन्थैल्पी इनके जालक एन्थैल्पी की तुलना में अधिक होती है। अतः इनके सल्फेट जल में विलेय होते हैं।

नाइट्रेट : इन धातुओं के कार्बोनेटों को तनु नाइट्रिक अम्ल में घोलकर इनके नाइट्रेट प्राप्त किए जाते हैं। मैग्नीशियम नाइट्रेट जल के छः अणुओं के साथ क्रिस्टलित होता है, जबकि बेरियम नाइट्रेट निर्जल लवण के रूप में क्रिस्टलित होता है। यह फिर बढ़ते आकार के साथ घटती जलयोजन एन्थैल्पी के कारण कम जलयोजित लवण बनाने की प्रवृत्ति को पुन: दर्शाता है। लीथियम नाइट्रेट के समान सभी नाइट्रेट गरम करने पर अपघटित होकर अॉक्साइड बनाते हैं।


उदाहरण 10.4

क्षारीय मृदा धातुओं के हाइड्रॉक्साइडों की जल में विलेयता वर्ग में नीचे जाने पर क्यों बढ़ती है?

हल

क्षारीय मृदा धातुओं मेें ऋणायन समान हों, तो धनायन की त्रिज्या जालक एन्थैल्पी को प्रभावित करती है। चूँकि बढ़ती हुई आयनिक त्रिज्या के साथ जलयोजन एन्थैल्पी की तुलना में ऋणात्मक एन्थैल्पी तेजी से कम होती है, अतः वर्ग में नीचे जाने पर विलेयता बढ़ती है।

उदाहरण 10.5

क्षारीय मृदा धातुओं के कार्बोनेटों एवं सल्फेटों की जल में विलेयता वर्ग में ऊपर से नीचे क्यों घटती है?

हल

ऋणायन का आकार धनायन की तुलना में बहुत अधिक है एवं जालक एन्थैल्पी वर्ग में लगभग स्थिर रहती है। चूँकि वर्ग में जलयोजन ऊर्जा का मान ऊपर से नीचे घटता है, अतः धातु कार्बोनेटों एवं सल्फेटों की विलेयता वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर घटती जाती है। 


10.8 बेरीलियम का असंगत व्यवहार

वर्ग 2 का प्रथम तत्त्व बेरीलियम वर्ग में मैग्नीशियम तथा अन्य तत्त्वों के साथ असंगत व्यवहार दिखलाता है। यह एेलुमीनियम से विकर्ण भी दर्शाता है, जो तदंतर विवेचित किए जाएँगे।

(i) बेरीलियम का परमाण्वीय एवं आयनिक आकार असाधारण रूप से छोटा होता है, जिसकी तुलना वर्ग के अन्य तत्त्वों से नहीं की जा सकती है। उच्च आयनन एन्थैल्पी तथा लघु परमाणु आकार के कारण बेरीलियम के यौगिक बृहद् रूप से सहसंयोजी होते हैं तथा आसानी से जल अपघटित हो जाते हैं।

(ii) बेरीलियम की उपसहसंयोजन संख्या (Co-ordination Number) चार से अधिक नहीं होती है, क्योंकि इसके संयोजी-कोश में केवल चार कक्षक हैं। वर्ग के अन्य सदस्यों की उपसहसंयोजन संख्या छः हो सकती है, क्योंकि ये d कक्षकों का उपयोग करते हैं।

(iii) अन्य सदस्यों के अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड के विपरीत बेरीलियम के अॉक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड का स्वभाव उभयधर्मी (Amphoteric) होता है।


10.8.1 बेरीलियम एवं एेलुमीनियम में विकर्ण संबंध

Be2+ की अनुमानित आयनिक त्रिज्या 31 pm है। इसका आवेश/त्रिज्या अनुपात Al3+ आयन के लगभग समान है। अतः बेरीलियम कुछ मामलों में एेलुमीनियम के समान है। कुछ समानताएँ निम्नलिखित हैं–

(i) एेलुमीनियम के समान बेरीलियम शीघ्रता से अम्लों से प्रभावित नहीं होता है, क्योंकि धातु की सतह पर अॉक्साइड फिल्म की उपस्थिति होती है।

(ii) क्षार की अधिकता में बेरीलियम हाइड्रॉक्साइड घुल जाता है और बेरिलेट (Beryllate) आयन [Be(OH4)]2– देता है। ठीक इसी प्रकार एेलुमीनियम हाइड्रॉक्साइड एेलुमिनेट (Aluminate) आयन [Al(OH)4] देता है।

(iii) बेरीलियम एवं एेलुमीनियम के क्लोराइड वाष्प प्रावस्था में सेतुबंधित क्लोराइड (Bridged Chloride) की रचना करते हैं। दोनों ही क्लोराइड कार्बनिक विलायकों में विलेय होते हैं एवं प्रबल लूइस अम्ल हैं। इनका उपयोग फ्रीडेल-क्राफ्ट के उत्प्रेरक (Friedel Craft Catalyst) के रूप में होता है।

(iv) बेरीलियम एवं एेलुमीनियम आयन जटिल यौगिक (Complexes) बनाने की प्रबल प्रवृत्ति रखते हैं जैसे–


10.9 कैल्सियम के कुछ महत्त्वपूर्ण यौगिक

कैल्सियम के महत्त्वपूर्ण यौगिक कैल्सियम अॉक्साइड, कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड, कैल्सियम सल्फेट, कैल्सियम कार्बोनेट एवं सीमेन्ट हैं। ये औद्योगिक रूप से महत्त्वपूर्ण यौगिक हैं। वृहद् स्तर पर इनका विरचन एवं इनके उपयोग नीचे वर्णित किए जा रहे हैं।


कैल्सियम अॉक्साइड या बिना बुझा चूना, CaO

इसका वाणिज्यिक निर्माण घूर्णित भट्ठी (Rotary Kiln) में चूने के पत्थर (CaCO3) को लगभग 1070-1270 K पर गरम करके किया जाता है।

10.4

CO2 को अभिक्रिया से शीघ्रताशीघ्र हटाते रहते हैं, ताकि अभिक्रिया अग्र दिशा में पूर्ण हो सके। कैल्सियम अॉक्साइड एक श्वेत अक्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है, जिसका गलनांक 2870 K है। वायुमंडल में खुला छोड़ने पर यह वायुमंडल से नमी एवं कार्बन डाइअॉक्साइड अवशोषित कर लेता है।

सीमित मात्रा में जल मिलाने पर चूने के पिंडक (Lumps) टूट जाते हैं। इस प्रक्रम को चूना बुझाने (Slaking of lime) की प्रक्रिया कहते हैं। बिना बुझे चूने को जब सोडा द्वारा बुझाया जाता है, तब सोडा लाइम (Soda Lime) प्राप्त होता है। यह क्षारीय अॉक्साइड होने के कारण उच्च ताप अम्लीय अॉक्साइडों से संयोग करता है।


उपयोग

(i) सीमेंट के निर्माण के लिए प्राथमिक पदार्थ के रूप में तथा क्षार के सबसे सस्ते रूप में;

(ii) कास्टिक सोडा से सोडियम कार्बोनेट बनाने में; और

(iii) शर्करा के शुद्धिकरण में एवं रंजकों (Dye Stuffs) के निर्माण में।


कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड अर्थात् बुझा चूना, Ca(OH)2

कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण बिना बुझे चूने में जल मिलाकर किया जाता है। यह श्वेत पाउडर है। यह जल में अल्प विलेय है। इसके जलीय विलयन [चूने का पानी (Lime Water)] में जब कार्बन डाइअॉक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, तब कैल्सियम कार्बोनेट के विचरन के कारण चूने का पानी दूधिया हो जाता है।

कार्बन डाइअॉक्साइड को अधिकता में प्रवाहित करने पर अवक्षेपित कैल्सियम कार्बोनेट जल में विलेय कैल्सियम हाइड्रोजन-कार्बोनेट में परिवर्तित हो जाता है।

CaCO3 + CO2 + H2O Ca (HCO3)2

चूने का पानी क्लोरीन से अभिक्रिया कर हाइपोक्लोराइट (Hypochlorite) बना लेता है, जो विरजंक चूर्ण (ब्लीचि्ांग पाउडर) का एक अवयव है।

ब्लीचिंग पाउडर

उपयोग

(i) बृहद् स्तर पर चूना-लेप (Mortar) के रूप में भवन- निर्माण में;

(ii) रोगाणुनाशी (Disinfactant) प्रकृति के कारण सफेदी (White Wash) के रूप में; और

(iii) काँच के उत्पादन, चर्मशोधन उद्योग, विरंजक चूर्ण के उत्पादन एवं शर्करा-शोधन में।


कैल्सियम कार्बोनेट (CaCO3)

प्रकृति में कई रूपों, जैसे– चूना-पत्थर, खड़िया (Chalk), संगमरमर (Marble) आदि के रूप में चूना पाया जाता है। बुझे चूने पर कार्बन डाइअॉक्साइड गैस प्रवाहित कर या कैल्सियम क्लोराइड में सोडियम कार्बोनेट को मिलाकर इसे बनाया जाता है।

इस अभिक्रिया में कार्बन डाइअॉक्साइड के आधिक्य से बचना चाहिए, क्योंकि इसकी अधिकता में जल में घुलनशील कैल्सियम हाइड्रोजन-कार्बोनेट बन सकता है।

कैल्सियम कार्बोनेट श्वेत रवेदार पाउडर होता है। यह जल में लगभग अविलेय होता है। 1200 K पर गरम करने पर यह विघटित होकर कार्बन डाइअॉक्साइड देता है।

यह तनु अम्लों से अभिक्रिया करके कार्बन डाइअॉक्साइड मुक्त करता है।


उपयोग

संगमरमर के रूप में भवन-निर्माण में;

बुझे चूने के निर्माण में;

कैल्सियम कार्बोनेट को मैग्नीशियम कार्बोनेट के साथ लोहे जैसी धातुओं के निष्कर्षण में फ्लक्स (Flux) के रूप में;

विशेष रूप से अवक्षेपित CaCO3 के प्रयोग से बृहद् रूप में उच्च गुणवत्ता वाले कागज के निर्माण में; और

एेन्टासिड, टूथपेस्ट में अपघर्षक के रूप में, च्यूइंगम के संघटक एवं साैंदर्य प्रसाधनों में पूरक के रूप में।


कैल्सियम सल्फेट (प्लास्टर अॉफ पेरिस) CaSO4 . 1/2 H2O

यह कैल्सियम सल्फेट का अर्ध हाइड्रेट (Hemihydrate) है। इसे जिप्सम (CaSO4 . 2H2O) को 393K पर गरम करके प्राप्त किया जाता है।

393 K से उच्च ताप पर क्रिस्टलीय जल नहीं बचता है एवं शुष्क कैल्सियम सल्फेट (CaSO4) बनता है। इसे ‘मृत तापित प्लास्टर’ (Dead Burnt Plaster) कहा जाता है। जल के साथ जमने की इसकी विशेष प्रकृति होती है। पर्याप्त मात्रा में जल मिलाने पर यह प्लास्टिक जैसा एक द्रव्य बनाता है, जो 5 से 15 मिनट में जमकर कठोर और ठोस हो जाता है।


उपयोग

प्लास्टर अॉफ पेरिस का बृहत्तर उपयोग भवन-निर्माण उद्योग के साथ-साथ टूटी हुई हड्डियों के प्लास्टर में भी होता है। इसका उपयोग दंत-चिकित्सा, अलंकरण-कार्य एवं मूर्तियों तथा अर्ध- प्रतिमाओं को बनाने में भी होता है।


सीमेन्ट

सीमेन्ट एक महत्त्वपूर्ण भवन-निर्माण सामग्री है। इसका उपयोग सर्वप्रथम ब्रिटेन में सन् 1824 में जोसेफ एस्पिडन ने किया था। इसे ‘पोर्टलैंड सीमेन्ट’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह ब्रिटेन के पोर्टलैंड टापू पर प्राप्त प्राकृतिक चूने के पत्थर से मिलता- जुलता है। यह एक एेसा उत्पाद है, जो चूने के आधिक्य वाले पदार्थ CaO को अन्य पदार्थ (जैसे–मिट्टी, जिसमें सिलिका, SiO2 एवं एेलुमिनियम, लोहा तथा मैग्नेशियम के अॉक्साइड होते हैं) को मिलाकर बनाया जाता है। पोर्टलैंड सीमेन्ट का औसत संघटन है ः CaO, 50-60%, SiO2, 20-25%, Al2O3, 5-10%, MgO, 2-3%, Fe2O3, 1-2% एवं SO3 1-2%। एक अच्छी गुणवत्ता वाले सीमेन्ट में सिलिका (SiO2) एवं एेलुमिना (Al2O3) का अनुपात 2.5 से 4 के मध्य होना चाहिए एवं चूने (CaO) तथा अन्य कुल अॉक्साइडों, SiO2 और Al2O3 का अनुपात यथासंभव 2 के आस-पास होना चाहिए।

सीमेन्ट के निर्माण में कच्चे माल के रूप में चूने के पत्थर (Limestone) एवं चिकनी मिट्टी का उपयोग होता है। जब इन दोनों को तेजी से गरम किया जाता है तब ये संगलित होकर अभिक्रिया कर सीमेन्ट क्लिंकर (Cement Clinker) बनाते हैं। इस क्लिंकर में 2-3% (भारात्मक) जिप्सम (CaSO4.2H2O) मिश्रित कर सीमेन्ट बनाया जाता है। इस प्रकार पोर्टलैंड सीमेन्ट के मुख्य घटक डाइकैल्सियम सिलिकेट (Ca2SiO4) 26%, ट्राइकैल्सियम सिलिकेट (Ca3SiO5) 51% तथा ट्राइकैल्सियम एेलुमिनेट (Ca3Al2O6) 11% हैं।


सीमेन्ट का जमना

जल मिलाने पर सीमेन्ट जमकर कठोर हो जाता है। इसका कारण घटकों के अणुओं का जलयोजन एवं पुनः व्यवस्थित होना है। जिप्सम मिलाने का कारण सीमेन्ट के जमने के प्रक्रम को धीमा करना है ताकि यह पूरी तरह ठोस हो सके।


उपयोग

लोहा तथा स्टील के पश्चात् सीमेन्ट ही एक एेसा पदार्थ है, जो किसी राष्ट्र की उपयोगी वस्तुओं की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसका उपयोग कंक्रीट (Concrete), प्रबलित कंक्रीट (Reinforced Concrete), प्लास्टरिंग, पुल-निर्माण, भवन-निर्माण आदि में किया जाता है।


10.10 मैग्नीशियम व कैल्सियम की जैव महत्ता

एक वयस्क व्यक्ति में करीब 25 ग्राम मैग्नीशियम एवं  1200 ग्राम कैल्सियम होता है, जबकि लोहा मात्र 5 ग्राम एवं ताँबा 0.06 ग्राम होता है। मानव-शरीर में इनकी दैनिक आवश्यकता 200-300 mg अनुमानित की गई है।

समस्त एन्ज़ाइम, जो फॉस्फेट के संचरण में ATP का उपयोग करते हैं, मैग्नीशियम का उपयोग सह-घटक के रूप में करते हैं। पौधों में प्रकाश-अवशोषण के लिए मुख्य रंजक (Pigment) क्लोरोफिल में भी मैग्नीशियम होता है। शरीर में कैल्सियम का 99% दाँतों तथा हड्डियों में होता है। यह अंतरतांत्रिकीय पेशीय कार्यप्रणाली, अंतरतांत्रिकीय प्रेषण, कोशिका झिल्ली अखंडता (Cell Membrane Integrity) तथा रक्त-स्कंदन (Blood-coagulation) में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्लाज़्मा में कैल्सियम की सांद्रता लगभग 100 mgL-1 होती है। दो हॉर्मोन कैल्सिटोनिन एवं पैराथायराइड इसे बनाए रखते हैं। क्या आप जानते हैं कि हड्डी अक्रिय तथा अपरिवर्तनशील पदार्थ नहीं है, यह किसी मनुष्य में लगभग 400 mg प्रतिदिन के हिसाब से विलेयित और निक्षेपित होती है। इसका सारा कैल्सियम प्लाज़्मा में से ही गुजरता है।




सारांश

वर्ग 1 की क्षार धातुएं तथा वर्ग 2 की क्षारीय मृदा धातुएं संयुक्त रूप से आवर्त सारणी के s-ब्लॉक तत्त्वों की रचना करती हैं। इन्हें ‘क्षार धातुएँ’ कहने का कारण यह है कि इनके अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं। क्षार धातुओं तथा क्षारीय मृदा धातुओं की पहचान उनके परमाणुओं के संयोजी कोशों में क्रमशः एक s-इलेक्ट्रॉन एवं दो s-इलेक्ट्रॉन के आधार पर होती है। ये अत्यंत अभिक्रियाशील धातुएं हैं, जो क्रमशः एक धनीय (M+) एवं द्विधनीय (M2+) आयन बनाती हैं।

क्षार धातुओं के बढ़ते हुए परमाणु-क्रमांक के साथ इनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों में एक नियमित प्रवृत्ति पाई जाती है। वर्ग में ऊपर से नीचे व्यवस्थित क्रम में परमाण्वीय एवं आयनिक आकार में वृद्धि होती जाती है तथा आयनन एन्थैल्पी घटती जाती है। क्षारीय मृदा धातुओं के गुणों में भी लगभग इसी प्रकार की प्रवृत्ति पाई जाती है।

इन वर्गों में प्रत्येक वर्ग का प्रथम तत्त्व वर्ग 1 में लीथियम एवं वर्ग 2 में बेरीलियम अपने ठीक बाद वाले वर्ग के दूसरे तत्त्व से समानताएँ प्रदर्शित करता है। आवर्त सारणी में इस प्रकार की समानताओं को विकर्ण संबंध की संज्ञा दी जाती है। इन वर्गों के प्रथम तत्त्व अपने ही वर्ग के अन्य तत्त्वों से असमानताएँ प्रदर्शित करते हैं। क्षार धातुएं रजत श्वेत (Silver White), मुलायम एवं निम्न गलनांकी होती हैं। ये अत्यंत अभिक्रियाशील होती हैं। क्षार धातुओं के यौगिक मुख्य रूप से आयनिक होते हैं। इनके अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड जल में विलेय होते हैं तथा प्रबल क्षार बनाते हैं। सोडियम के प्रमुख यौगिकों में सोडियम कार्बोनेट, सोडियम क्लोराइड, सोडियम हाइड्रॉक्साइड एवं सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट हैं। सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण कास्टनर-कैलनर विधि एवं सोडियम कार्बोनेट का निर्माण साल्वे विधि के अनुसार किया जाता है।

क्षारीय मृदा धातुओं का रसायन अधिकांशतः क्षार धातुओं के समान है। क्षारीय मृदा धातुओं के छोटे परमाण्वीय तथा आयनिक आकार एवं बढ़े हुए धनायनिक आवेश के कारण कुछ असमानताएँ उत्पन्न होती हैं। इनके अॉक्साइड एवं हाइड्रॉक्साइड, क्षार धातुओं के अॉक्साइड हाइड्रॉक्साइड की तुलना में कम क्षारीय होते हैं। कैल्सियम की औद्योगिक महत्ता के यौगिकों में कैल्सियम अॉक्साइड (चूना), कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा चूना), कैल्सियम सल्फेट (प्लास्टर अॉफ पेरिस), कैल्सियम कार्बोनेट (चूना-पत्थर) तथा सीमेन्ट प्रमुख हैं। पोर्टलैंड सीमेन्ट एक महत्त्वपूर्ण निर्माण-सामग्री है। चूना-पत्थर एवं चिकनी मिट्टी के चूर्ण-मिश्रण को घूर्णी भट्ठी में गरम करने के उपरांत इसका निर्माण किया जाता है। इस प्रकार प्राप्त क्लिंकर में जिप्सम की कुछ मात्रा (2-3%) मिलाकर सीमेन्ट का महीन पाउडर प्राप्त किया जाता है। ये सभी पदार्थ विभिन्न क्षेत्रों में विविध प्रकार के उपयोग दर्शाते हैं।

एकल संयोजी सोडियम एवं पोटैशियम आयन तथा द्विसंयोजी मैग्नीशियम एवं कैल्सियम आयन जैव तरलों (Biological Fluids) में उच्च अनुपातों में पाए जाते हैं। ये आयन कई जैव क्रियाओं, जैसे–आयन-संतुलन का निर्वाह, शिरा-आवेग संचरण (Nerve Impulse Conduction) आदि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



अभ्यास

10.1 क्षार धातुओं के सामान्य भौतिक तथा रासायनिक गुण क्या हैं?

10.2 क्षारीय मृदा धातुओं के सामान्य अभिलक्षण एवं गुणों में आवर्तिता की विवेचना कीजिए।

10.3 क्षार धातुएं प्रकृति में क्यों नहीं पाई जाती हैं?

10.4 Na2O2 में सोडियम की अॉक्सीकरण अवस्था ज्ञात कीजिए।

10.5 पोटैशियम की तुलना में सोडियम कम अभिक्रियाशील क्यों है? बताइए।

10.6 निम्नलिखित के संदर्भ में क्षार धातुओं एवं क्षारीय मृदा धातुओं की तुलना कीजिए–

(क) आयनन एन्थैल्पी, (ख) अॉक्साइडों की क्षारकता, (ग) हाइड्रॉक्साइडों की विलेयता।

10.7 लीथियम किस प्रकार मैग्नीशियम से रासायनिक गुणों में समानताएं दर्शाता है?

10.8 क्षार धातुएं तथा क्षारीय मृदा धातुएं रासायनिक अपचयन विधि से क्यों नहीं प्राप्त किए जा सकते हैं? समझाइए।

10.9 प्रकाश वैद्युत सेल में लीथियम के स्थान पर पोटैशियम एवं सीजियम क्यों प्रयुक्त किए जाते हैं?

10.10 जब एक क्षार धातु को द्रव अमोनिया में घोला जाता है, तब विलयन विभिन्न रंग प्राप्त कर सकता है। इस प्रकार के रंग-परिवर्तन का कारण बताइए।

10.11 ज्वाला को बेरीलियम एवं मैग्नीशियम कोई रंग नहीं प्रदान करते हैं, जबकि अन्य क्षारीय मृदा धातुएं एेसा करती हैं। क्यों?

10.12 साल्वे प्रक्रम में होने वाली विभिन्न अभिक्रियाओं की विवेचना कीजिए।

12.13 पोटैशियम कार्बाेनेट साल्वे विधि द्वारा नहीं बनाया जा सकता है। क्यों?

10.14 Li2CO3 कम ताप पर एवं Na2CO3 उच्च ताप पर क्यों विघटित होता है?

10.15 क्षार धातुओं के निम्नलिखित यौगिकों की तुलना क्षारीय मृदा धातुओं के संगत यौगिकों से विलेयता एवं तापीय स्थायित्व के आधार पर कीजिए– (क) नाइट्रेट (ख) कार्बाेनेट (ग) सल्फेट।

10.16 सोडियम क्लोराइड से प्रारंभ करके निम्नलिखित को आप किस प्रकार बनाएँगे?

(i) सोडियम धातु

(ii) सोडियम हाइड्रॉक्साइड

(iii) सोडियम परॉक्साइड

(iv) सोडियम कार्बाेनेट

10.17 क्या होता है, जब–

(i) मैग्नीशियम को हवा में जलाया जाता है।

(ii) बिना बूझे चूने को सिलीका के साथ गरम किया जाता है।

(iii) क्लोरीन बुझे चूने से अभिक्रिया करती है।

(iv) कैल्सियम नाइट्रेट को गरम किया जाता है।

10.18 निम्नलिखित में से प्रत्येक के दो-दो उपयोग बताइए–

(i) कास्टिक सोडा

(ii) सोडियम कार्बाेनेट

(iii) बिना बुझा चूना

10.19 निम्नलिखित की संरचना बताइए– (i) BeCl2 (वाष्प), (ii) BeCl2 (ठोस)

10.20 सोडियम एवं पोटैशियम के हाइड्रॉक्साइड एवं कार्बोनेट जल में विलेय हैं, जबकि मैग्नीशियम एवं कैल्सियम के संगत लवण जल में अल्प विलेय हैं। समझाइए।

10.21 निम्नलिखित की महत्ता बताइए–

(i) चूना-पत्थर (ii) सीमेन्ट (iii) प्लास्टर अॉफ पेरिस

10.22 लीथियम के लवण साधारणतया जलयोजित होते हैं, जबकि अन्य क्षार-धातुओं के लवण साधारणतया निर्जलीय होते हैं। क्यों?

10.23 LiF जल में लगभग अविलेय होता है, जबकि LiCl न सिर्फ जल में, बल्कि एेसीटोन में भी विलेय होता है। कारण बताइए?

10.24 जैव द्रवों में सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम एवं कैल्सियम की सार्थकता बताइए।

10.25 क्या होता है, जब–

(i) सोडियम धातु को जल में डाला जाता है।

(ii) सोडियम धातु को हवा की अधिकता में गरम किया जाता है।

(iii) सोडियम परॉक्साइड को जल में घोला जाता है।

10.26 निम्नलिखित में से प्रत्येक प्रेक्षण पर टिप्पणी लिखिए–

(क) जलीय विलयनों में क्षार धातु आयनों की गतिशीलता Li+<Na+<K+<Rb+<Cs+ क्रम में होती है।

(ख) लीथियम एेसी एकमात्र क्षार धातु है, जो नाइट्राइड बनाती है।

(ग) हेतु EV (जहाँ M = Ca, Sr या Ba ) लगभग स्थिरांक है।

10.27 समझाइए कि क्यों–

(क) Na2CO3 का विलयन क्षारीय होता है।

(ख) क्षार धातुएं उनके संगलित क्लोराइडों के वैद्युत-अपघटन से प्राप्त की जाती हैं।

(ग) पोटैशियम की तुलना में सोडियम अधिक उपयोगी है।

10.28 निम्नलिखित के मध्य क्रियाओं के संतुलित समीकरण लिखिए–

(क) Na2CO3 एवं जल

(ख) KO2 एवं जल

(ग) Na2O एवं CO2

10.29 आप निम्नलिखित तथ्यों को कैसे समझाएँगे–

(क) BeO जल में अविलेय है, जबकि BeSO4 विलेय है।

(ख) BaO जल में विलेय है, जबकि BaSO4 अविलेय है।

(ग) ईथानॉल में LiI, KI की तुलना में अधिक विलेय है।

10.30 इनमें से किस क्षार-धातु का गलनांक न्यूनतम है?

(क) Na (ख) K (ग) Rb (घ) Cs

10.31 निम्नलिखित में से कौन सी क्षार-धातु जलयोजित लवण देती है?

(क) Li (ख) Na (ग) K (घ) Cs

10.32 निम्नलिखित में कौन सी क्षारीय मृदा धातु कार्बाेनेट ताप के प्रति सबसे अधिक स्थायी है?

(क) MgCO3 (ख) CaCO3 (ग) SrCO3 (घ) BaCO3      






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