एकक 9 हाइड्रोजन भ्ल्क्त्व्ळम्छ उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के बाद आपμ ऽ आवतर् सारणी में हाइड्रोजन की स्िथति कीज्ञात धरणाओं को बता सवेंफगेऋ ऽ हाइड्रोजन के लघु तथा व्यापारिक स्तर परबनाने की विध्ियों का तथा उनके समस्थानिकोंका वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ डाइहाइड्रोजन किस प्रकार विभ्िाÂ तत्वों सेसंयुक्त होकर आयनिक, आण्िवक तथाअरसमीकरणमितीय यौगिकों को बनाती है,इसे समझ सवेंफगेऋ ऽ इसके गुणों की समझ के आधर पर उपयोगीपदाथो± तथा नयी तकनीकों के उत्पादन का वणर्न कर सकेंगेऋ ऽ वातावरणीय जल की गुणवत्ता किस प्रकारविभ्िाÂ विलेय पदाथो± पर निभर्र करती है, यहसमझा सकेंगे। साथ ही कठोर और मृदु जलमें अंतर कर सवेंफगे तथा जल के मृदुकरणको समझ सवेंफगेऋ ऽ भारी जल और उसके महत्त्व के संबंध् मेंज्ञान अ£जत कर सवेंफगेऋ ऽ हाइड्रोजन पराॅक्साइड की संरचना समझसवेंफगे तथा इसे बनाने की विध्ियों औरइसके गुणों के आधर पर उपयोगी रसायनोंके उत्पादन तथा पयार्वरण की स्वच्छता कोसमझ सवेंफगेऋ ऽ इलेक्ट्राॅन - न्यून, इलेक्ट्राॅन - परिशु(, इलेक्ट्राॅन - समृ(, हाइड्रोजनीकरण, हाइड्रोजन अथर्व्यवस्था इत्यादि पदों को समझ सवेंफगे तथा इनका उपयोग कर पाएँगेऋ ऽ जल की संरचना के आधर पर उसके भौतिकतथा रासायनिक गुणों का वणर्न कर सवेंफगे। हाइड्रोजन ब्रह्मांड में अतिबहुल तत्व है। पृथ्वी की सतह पर अतिबहुलता के व्रफम में यह तीसरे स्थान पर है। यह भविष्य में उफजार् के प्रमुख स्रोत के रूप में प्रवृफति में समस्त ज्ञात तत्वों में हाइड्रोजन की परमाणु - संरचना सरलतम है। इसके परमाणु में एक प्रोट्राॅन तथा एक इलेक्टाॅन होता है। तात्िवक हाइड्रोजन का अस्ितत्व द्विपरमाणुक भ् अणु के रूप में है, जिसे डाइहाइड्रोजन ;भ्द्ध कहते2 2हैं। क्या आप यह जानते हैं कि हाइड्रोजन अन्य तत्वों की तुलना में अध्िक यौगिक बनाते हैं? हाइड्रोजन का उपयोग उफजार् - स्रोत के रूप में करके अत्यध्िक स्तर तक सावर्भौमिक उफजार् की पूतिर् की जा सकती है। इस एकक में आपहाइड्रोजन के औद्योगिक महत्त्व के बारे में अध्ययन कर सवेंफगे। 9.1 आवतर् सारणी में हाइड्रोजन का स्थान हाइड्रोजन आवतर् सारणी का प्रथम तत्व है, यद्यपि आवतर् सारणी में हाइड्रोजन का उचित स्थान विवेचना का विषय रहा है। जैसा आप जानते हैं, आवतर् सारणी में तत्व इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के आधर पर व्यवस्िथत रहते हैं। हाइड्रोजन का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 1े1 है। एक तरपफ इसका बाह्यतम इलेक्ट्राॅनिक विन्यास क्षार धतुओं ;दे1द्ध के समान होता है, जो आवतर् सारणी के प्रथम वगर् से संबंध्ित है, जबकि दूसरी तरपफ हैलोजनों की भाँति ;दे2 दच5 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के साथ आवतर् सारणी के सत्राहवंे वगर् से संबंध्ित हैद्ध जो संगत उत्वृफष्ट गैस विन्यास से एक इलेक्ट्राॅन कम है। इस प्रकार हाइड्रोजन क्षार धतुओं से समानता दशार्ता है, जो एक इलेक्ट्राॅन त्यागकर एकध्नीय आयन बनाते हैं। साथ ही यह हैलोजन की भाँति एक इलेक्ट्राॅन ग्रहण कर एक)णीय आयन बनाता है। क्षार धतुओं के समान हाइड्रोजन, आॅक्साइड, हैलाइड एवं सल्पफाइड बनाता है, यद्यपि सामान्य परिस्िथतियों में इसकी क्षार धातुओं के विपरीत उच्च आयनन एन्थैल्पी होती है एवं धत्िवक अभ्िालक्षण नहीं दशार्ता है। यथाथर् में आयनन उफजार् के पदों में हाइड्रोजन हैलोजन से अध्िक समानता दशार्ता है। स्प की Δपभ् 520 ाश्र उवसदृ1ए थ् की 1680 ाश्र उवसदृ1 एवं भ् की 1312 ाश्र उवसदृ1 । यह हैलोजेन के समान द्विपरमाणवीय अणु तथा विभ्िाÂ तत्वों से संयुक्त होकर हाइड्राइड एवं बहुत से सहसंयोजी यौगिक बनाता है। ियाशीलता के आधर पर यह हैलोजनों की तुलना में कम सिय है। वुफछ सीमा तक क्षार धतुओं एवं हैलोजनों से समानता दशार्ने के बावजूद उनसे असमानताएँ भी दशार्ता है। अब प्रासंगिक प्रश्न यह है कि इसे आवतर् सारणी में कहाँ रखा जाए? हाइड्रोजन से इलेक्ट्राॅन का परित्याग कर नाभ्िाक ;भ़्द्ध देता है, जिसका आकार ् 1ण्5 10दृ3 चउ है, जो सामान्य परमाणवीय एवं आयनिक आकार 50 से 200 चउ की तुलना में बहुत कम है। परिणामतः भ़् स्वतंत्रा अवस्था में नहीं मिलता है एवं दूसरे परमाणुओं या अणुओं से संयुक्त रहता है। अतः इसके अद्वितीय व्यवहार के कारण इसे आवतर् सारणी में अलग रखा गया है ;एकक - 3द्ध। 9.2 डाइहाइड्रोजन ;भ्द्ध29.2.1 प्राप्ित डाइहाइड्रोजन ब्रह्मांड में अतिबाहुल्य तत्व ;ब्रह्मांड के संपूणर् द्रव्यमान का 70 प्रतिशतद्ध है तथा यह सौरवायुमंडल का प्रमुख तत्व है। बड़े ग्रहोंμबृहस्पति ;श्रनचपजमतद्ध तथा शनि ;ैंजनतदद्ध में अध्िकांशतः हाइड्रोजन होती है, हालाँकि अपनी हलकी प्रवृफति के कारण यह पृथ्वी के वायुमंडल में कम मात्रा ;द्रव्यमानानुसार लगभग 0.15 प्रतिशतद्ध में पाया जाती है। संयुक्त अवस्था में हाइड्रोजन तत्व भू - पपर्टी तथा महासागर में 15.4 प्रतिशत भाग का निमार्ण करता है। संयुक्त अवस्था में जल के अतिरिक्त यह पादप तथा जंतु - उफतकों, काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, हाइड्राइड, हाइड्रोकाबर्न और कइर् अन्य यौगिकों में पाया जाता है। 9.2.2 हाइड्रोजन के समस्थानिक हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक प्रोटियम ;1भ्द्ध, ड्यूटीरियम1 ;2भ् या क्द्ध तथा ट्राइटियम ;3भ् या ज्द्ध होते हैं। क्या आप1 1 अनुमान लगा सकते हैं कि ये समस्थानिक एक - दूसरे से वैफसे भ्िाÂ होते हैं? ये तीनों समस्थानिक से न्यूट्राॅन की संख्या के आधर पर एक - दूसरे भ्िान्न होते हैं। सामान्य हाइड्रोजन ;प्रोटियमद्ध में कोइर् न्यूट्राॅन नहीं है। ड्यूटीरियम ;जिसे ‘भारी हाइड्रोजन’ भी कहा जाता हैद्ध में एक तथा ट्राइटियम के नाभ्िाक में दो न्यूट्राॅन होते हैं। सन् 1934 में एक अमेरिकी वैज्ञानिक हेराॅल्ड सी. यूरे को भौतिक विध्ियों द्वारा 2 परमाणु द्रव्यमान वाले हाइड्रोजन के समस्थानिक का पृथक्करण करने पर नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। रसायन विज्ञान हाइड्रोजन का प्रमुख समस्थानिक प्रोटियम है। ड्यूटीरियम लौकिक हाइड्रोजन में 0.0156 प्रतिशत तक मुख्यतः भ्क् के रूप में निहित है। ट्राइटियम की सांद्रता लगभग 1018 प्रोटियम परमाणुओं में एक ट्राइटियम के परमाणु की है। इन समस्थानिकों में से केवल ट्राइटियम रेडियो सवि्रफय ;ज1ध्2 त्र 12ण्33 वषर्द्ध है तथा न्यून उफजार् वाले β कणों को उत्स£जत करता है। चूँकि समस्थानिकों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास समान हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण भी लगभग समान हैं। इनकीकेवल अभ्िावि्रफया की गति मुख्य रुप से अपने विभ्िाÂ बंध् - वियोजन एन्थैल्पी के कारण भ्िाÂ होती है ;सारणी 9.1द्ध तथापि भौतिक गुणों में ये समस्थानिक परमाणु - भार में अंतर के कारण भ्िान्नता दशार्ते हैं। 9.3 डाइहाइड्रोजन बनाने की विध्ियाँ ;भ्2द्ध धतुओं तथा धतु हाइड्राइडों से डाइहाइड्रोजन बनाने की अनेक विध्ियाँ हैं। 9.3.1 डाइहाइड्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विध्िμ ;पद्ध सामान्यतः यह दानेदार ¯जक की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभ्िावि्रफया करके बनाइर् जाती हैμ र्द;ेद्ध ़ 2भ़्;ंुद्ध → र्द2़;ंुद्ध ़ भ्2;हद्ध ;पपद्ध यह ¯जक धतु की जलीय क्षार के साथ अभ्िावि्रफया करके भी बनाइर् जाती हैμ र्द;ेद्ध ़ 2छंव्भ्;ंुद्ध → छं2र्दव्2;ंुद्ध ़ भ्2;हद्ध सोडियम ¯जकेट 9.3.2 डाइहाइड्रोजन का व्यापारिक उत्पादन इसके लिए प्रयुक्त साधरण प्रव्रफमों की रूपरेखा नीचे दी जा रही हैμ ;पद्ध प्लैटिनम इलेक्ट्राॅड का उपयोग कर अम्लीय जल के विद्युत् - अपघटन से डाइहाइड्रोजन प्राप्त की जाती है। विद्युत्अपघटन 2भ् व्;सद्ध⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→2भ्;हद्ध व्;हद्ध 2अल्प मात्रा में अम्ल/क्षार 22 ;पपद्ध अति शु( हाइड्रोजन ;झ 99ण्95ःद्ध निवैफल इलेक्ट्रोडों के बीच रखे गए बेरियम हाइड्राॅक्साइड के जलीय विलयन को गरम अवस्था में विद्युत् - अपघटन कराकर प्राप्त की जाती है। ;पपपद्ध ब्राइन विलयन के विद्युत् - अपघटन द्वारा क्लोरीन तथा सोडियम हाइड्राॅक्साइड के औद्योगिक निमार्ण में डाइहाइड्रोजन उप - उत्पाद ;इल.चतवकनबजद्ध के रूप में प्राप्त होता है। विद्युत् - अपघटन में होने वाली अभ्िाियाएँ हैंμ एनोड पर: 2 ब्सदृ;ंुद्ध → ब्स2;हद्ध ़ 2मदृ वैफथोड पर: 2भ्2व् ;सद्ध 2मदृ → भ्2;हद्ध ़ 2व्भ्दृ ;ंुद्ध वुफल अभ्िािया: 2छं़ ;ंुद्ध ़ 2 ब्सदृ ;ंुद्ध ़ 2भ्2व्;सद्ध → ब्स2;हद्ध ़ भ्2;हद्ध ़ 2छं़ ;ंुद्ध ़ 2व्भ्दृ है। ;पअद्ध हाइड्रोकाबर्न अथवा कोक की उच्च ताप पर एवं उत्प्रेरक की उपस्िथति में भाप से अभ्िावि्रफया कराने पर डाइहाइड्रोजन प्राप्त होती है। 1270ज्ञ ब्भ् ़दभ् व् ⎯⎯⎯⎯→दब्व् ़;2द ़1द्धभ् द 2द ़22छप 2 उदाहरणस्वरूप - 1270ज्ञ ब्भ् ह भ्व्ह ब्व्ह 3भ् ह42छप 2 ब्व् एवं भ्के मिश्रण को वाटर गैस कहते हैं। ब्व् एवं2 भ्का यह मिश्रण मेथेनाॅल तथा अन्य कइर् हाइड्रोकाबर्नों के2 संश्लेषण में काम आता है। अतः इसे ‘संश्लेषण गैस’ या ‘सिन्गैस’ ;ैलदहंेद्ध भी कहते हैं। आजकल सिन्गैस वहितमल ;ैमूंहम ूंेजमद्धए अखबार, लकड़ी का बुरादा, लकड़ी की छीलन आदि से प्राप्त की जाती है। कोल से सिन्गैस का उत्पादन करने की प्रवि्रफया को ‘कोलगैसीकरण’ ;ब्वंसहंेपपिबंजपवदद्ध कहते हैंμ 1270ज्ञ ;द्ध भ्व् ह 2 ;द्ध⎯⎯→ब्व्ह भ् ;द्धब्े ़ ⎯⎯;द्ध़ 2ह सिन्गैस में उपस्िथत काबर्न मोनोआॅक्साइड को आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्िथति में भाप से वि्रफया कराने पर डाइहाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता हैμ 673 ज्ञ ;द्ध़भ्व्ह ;द्ध ⎯→ब्व्2 ह ़भ्2 ;द्ध हब्व्ह 2 ⎯⎯⎯;द्धउत्पर्रे क यह भाप ‘अंगार गैस सृति - अभ्िावि्रफया’ ;ॅंजमत हंे ेीपजि तमंबजपवदद्ध कहलाती है। वतर्मान में ्77 प्रतिशत डाइहाइड्रोजन का औद्योगिक उत्पादन शैल रसायनों ;च्मजतवबीमउपबंसेद्धए 18 प्रतिशत कोल, 4 प्रतिशत जलीय विलयनों के विद्युत् - अपघटन तथा 1 प्रतिशत उत्पादन अन्य स्रोतों से होता है। 9.4 डाइहाइड्रोजन के गुण 9.4.1 भौतिक गुण डाइहाइड्रोजन एक रंगहीन, गंध्हीन तथा स्वादहीन दहनशील गैस होती है। यह वायु से हलकी तथा जल में अघुलनशील है। इनके तथा ड्यूटीरियम के अन्य भौतिक गुण सारणी 9.1 में दिए गए हैं। 9.4.2 रासायनिक गुण डाइहाइड्रोजन अथवा ;किसी भी अणुद्ध का रासायनिक व्यवहार कापफी हद तक बंध् वियोजन एन्थैल्पी द्वारा निधर्रित किया जाता है। भ्दृभ् बंध् वियोजन एन्थैल्पी किसी तत्व के दो परमाणुओं के एकल बंध् के लिए अध्िकतम है। इस तथ्य से आप क्या निष्कषर् निकालते हैं? यह इस कारक के कारण है कि सारणी 9.1 हाइड्रोजन के समस्थानिकों के परमाण्िवक तथा भौतिक गुण गुण हाइड्रोजन ;भ्द्ध ड्यूटीरियम ;क्द्ध ट्राइटियम ;ज्द्ध सापेक्ष्िाक बहुतायत ;»द्ध 99.985 0.0156 10 - 15 सापेक्ष्िाक परमाणु - भारध्ह उवसदृ1 1.008 2.014 3.016 गलनांकध्ज्ञ 13.96 18.73 20.62 क्वथनांकध्ज्ञ 20.39 23.67 25.00 घनत्वध्ह स्दृ1 0.09 0.18 0.27 संलयन एन्थैल्पीधश्र उवसदृ1 0.117 0.197 - वाष्पन एन्थैल्पीधश्र उवसदृ1 0.904 1.226 - बंध् - वियोजन एन्थैल्पी ;ाश्र उवसदृ1द्ध 298ण्2 ज्ञ पर 435.88 443.35 - अंतरानाभ्िाक दूरीध्चउ 74.14 74.14 - आयनन एन्थैल्पीधश्र उवसदृ1 1312 - - इलेक्ट्राॅन - ग्रहण एन्थैल्पीधश्र उवसदृ1 - 73 - - सहसंयोजक त्रिाज्याध्चउ 37 - - आयनिक त्रिाज्या ;भ्दृद्धध्चउ 208 - - डाइहाइड्रोजन का इसके परमाणुओं में वियोजन केवल 2000 ज्ञ के उफपर लगभग 0ण्081 प्रतिशत ही होता है, जो 5000 ज्ञ पर बढ़कर 95.5 प्रतिशत तक पहुँच जाता है। उच्च भ्दृभ् बंध् एन्थैल्पी के कारण कक्ष ताप पर डाइहाइड्रोजन अपेक्षावृफत निष्िव्रफय है। अतः विद्युत् आवर्फ या पराबैंगनी विकिरणों द्वारा परमाण्िवक हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है। चूँकि इसका एक कक्षक 1े 1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के साथ अपूणर् है, अतः यह लगभग सभी तत्वों के साथ संयोग करता है। डाइहाइड्रोजन अभ्िावि्रफयाओं मेंμ ;पद्ध एक इलेक्ट्राॅन का परित्याग कर भ़् देता है। ;पपद्ध एक इलेक्ट्राॅन ग्रहण करके भ्दृ आयन बनाता है। ;पपपद्ध इलेक्ट्राॅन का साझा करके एकल सहसंयोजक बंध् बनाता है। डाइहाड्रोजन का रसायन निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफयाओं द्वारा स्पष्ट किया जाता हैμ हैलोजन के साथ अभ्िावि्रफया: डाइहाइड्रोजन हैलोजेन के साथ अभ्िावि्रफया करके हाइड्रोजन हैलाइड देते हैंμ भ्2 ;द्ध़ ग् ;द्धह → 2भ्ग्ह ;ग् ह2 ;द्ध त्र थ्एब्सए ठतएप्द्ध पफलुओरीन की अभ्िावि्रफया अँध्ेरे में भी हो सकती है। आयोडीन के साथ उत्प्रेरक की आवश्यकता पड़ती है। डाइआॅक्सीजन के साथ अभ्िावि्रफया: यह डाइआॅक्सीजन के साथ अभ्िावि्रफया करके जल बनाता है। यह अभ्िावि्रफया प्रबल उफष्माक्षेपी ;म्गवजीमतउपबद्ध है - उत्प्ररेक अथवा ताप2भ्2;हद्ध ़ व्2 ;हद्ध ⎯⎯⎯⎯⎯→ 2भ्2व्;सद्धय Δभ्ट त्र दृ285ण्9 ाश्र उवसदृ1 डाइनाइट्रोजन के साथ अभ्िावि्रफया: डाइनाइट्रोजन के साथ अभ्िावि्रफया करके अमोनिया बनाती है - 673ज्ञए200ंजउ 3भ् ह ़ छह ⎯⎯⎯⎯⎯⎯→2छभ् हय 2 ;द्ध 2 ;द्ध थ्म 3 ;द्ध Δभ्ट त्र− 92ण्6 ाश्र उवस−1 अमोनिया को व्यापारिक मात्रा में इस विध्ि से हाबर प्रव्रफम द्वारा बनाया जाता है। धतुओं के साथ वि्रफया: डाइहाइड्रोजन उच्च ताप पर कइर् धतुओं के साथ वि्रफया करके संगत हाइड्राइड देता है ;अनुभाग 9.5द्ध। भ्2;हद्ध ़2ड;हद्ध → 2डभ्;ेद्धय जहाँ ड क्षारीय धतु है। धतु आयन तथा धतु आॅक्साइड के साथ अभ्िावि्रफया: डाइहाइड्रोजन वुफछ धतु आयनों को जलीय विलयन तथा उनके धतु ;आयरन से कम वि्रफयाशीलद्ध आॅक्साइड से अभ्िावि्रफया करके संगत धतुओं में अपचयित कर देती हैμ 2़ ़भ्2 च्क → च्के ंु ;हद्ध़ ;ंु द्ध ;द्ध़ 2भ् ;द्ध 2 ़ डव् ल गडे ;द्धलभ्ह;द्ध ग ;द्धे →़ लभ्व् स 2 ;द्ध रसायन विज्ञान काबर्निक यौगिकों के साथ अभ्िावि्रफया: उत्प्रेरकांे की उपस्िथति में डाइहाइड्रोजन काबर्निक यौगिकों से अभ्िावि्रफयाकरके कइर् महत्त्वपूणर् औद्योगिक हाइड्रोजनीवृफत उत्पाद बनाती है। उदाहरणाथर्μ ;पद्ध वनस्पति तेलों को निवैफल उत्प्रेरक की उपस्िथति में हाइड्रोजनीकरण कराने पर खाद्य वसा ;मागेर्रीन तथा वनस्पति घीद्ध प्राप्त होता है। ;पपद्ध ओलिपफीन का हाइड्रोपफॅा£मलीकरण कराने पर ऐल्िडहाइड प्राप्त होता है, जो आगे एल्कोहाॅल में अपचयित हो जाता हैμ भ्2 ़ ब्व् ़ त्ब्भ् त्र ब्भ्2 → 22त्ब्भ् ब्भ् ब्भ्व् भ्2 ़ त्ब्भ् ब्भ् ब्भ्व् 2 → 222 त्ब्भ् ब्भ् ब्भ् व्भ् 2 उदाहरण 9.1 निम्नलिख्िात से डाइहाइड्रोजन की अभ्िावि्रफया पर टिप्पणी कीजिए - ;पद्धक्लोरीन ;पपद्ध सोडियम ;पपपद्धकाॅपर ;प्प्द्ध आॅक्साइड हल ;पद्धडाइहाइड्रोजन क्लोरीन को क्लोराइड ;ब्सदृद्ध आयन में अपचयित करती है तथा स्वयं क्लोरीन द्वारा आॅक्सीवृफत होकर हाइड्रोजन आयन ;भ़्द्ध हाइड्रोक्लोराइड के रूप में बनाती है। भ् एवं ब्स के मध्य एक इलेक्ट्राॅन युग्म का साझा होकर एक सहसंयोजक अणु बनता है। ;पपद्धडाइहाइड्रोजन सोडियम के द्वारा अपचयित होकर सोडियम हाइड्राइड बनाता है। एक इलेक्ट्राॅन सोडियम से हाइड्रोजन पर स्थानांतरित होकर आयनिक छं़ भ्दृ का निमार्ण करता है। ;पपपद्ध डाइहाइड्रोजन काॅपर ;प्प्द्ध आॅक्साइड को काॅपर की शून्य आॅक्सीकरण अवस्था में अपचयित कर देती है और स्वयं जल, जो एक सहसंयोजक अणु है, में आॅक्सीवृफत हो जाती है। 9.4.3 डाइहाइड्रोजन के अनुप्रयोग ऽ डाइहाइड्रोजन का एकल बृहद् अनुप्रयोग अमोनिया के संश्लेषण में होता है, जो नाइटिªक अम्ल तथा नाइट्रोजनी उवर्रक उत्पादन में काम आता है। ऽ डाइहाइड्रोजन का उपयोग बहुअसंतृप्त वनस्पति तेलों ;जैसेμ सोयाबीन, बिनौला आदिद्ध से वनस्पति वसा के उत्पादन में होता है। ऽ डाइहाइड्रोजन का उपयोग अनेक काबर्निक रसायनों, मुख्यतः मेथेनाॅल के उत्पादन में होता हैμ कोबाल्ट ब्व्ह 2भ् 2ह ब्भ्व्भ्स ⎯⎯⎯⎯→3उत्परे्र क ऽ डाइहाइड्रोजन का उपयोग धत्िवक हाइड्राइड के निमार्ण में होता है। ;खण्ड - 9.5द्ध ऽ डाइहाइड्रोजन का उपयोग अति उपयोगी रसायन ;जैसेμ हाइड्रोजन क्लोराइडद्ध के निमार्ण में होता है। ऽ धतुकमर् प्रव्रफमों में डाइहाइड्रोजन का उपयोग भारी धतु आॅक्साइडों को धतु में अपचयित करने में होता है। ऽ परमाण्िवक हाइड्रोजन तथा आॅक्सी - हाइड्रोजन टाॅचर् का उपयोग कतर्न तथा वे¯ल्डग में होता है। परमाण्िवक हाइड्रोजन परमाणु ;जो विद्युत् आवर्फ की सहायता से डाइहाइड्रोजन के वियोजन से बनते हैंद्ध का पुनस±योग वे¯ल्डग की जाने वाली धतुओं की सतह पर लगभग 4000 ज्ञ तक ताप पैदा कर देता है। ऽ डाइहाइड्रोजन का उपयोग अंतरिक्ष अनुसंधन में राॅकेट ईंध्न के रूप में किया जाता है। ऽ डाइहाड्रोजन का उपयोग ईंध्न सेलों में विद्युत् उत्पादन के लिए किया जाता है। परंपरागत जीवाश्मी ईंध्न और विद्युत् शक्ित की तुलना में हाइहाड्रोजन का प्रयोग ईंध्न के रूप में करने से अनेक लाभ होते हैं। यह ईंध्न प्रदूषण मुक्त है और पेट्रोल तथा अन्य ईंध्न की तुलना में इकाइर् द्रव्यमान से अध्िक उफजार् मुक्त करता है। 9.5 हाइड्राइड डाइहाइड्रोजन निश्िचत परिस्िथतियों में उत्वृफष्ट गैसों के अलावा लगभग सभी तत्वों के साथ संयोग करके द्विअंगी यौगिक बनाती हैं, जिन्हें हाइड्राइड कहते हैं। अगर म् किसी तत्व का प्रतीक है, तो हाइड्राइड को म्भ् ;उदाहरणस्वरूप - डहभ्द्ध या म्भ् ,ग् 2उद;उदाहरणस्वरूप - ठभ्द्ध द्वारा प्रद£शत किया जा सकता है।26हाइड्राइडों को तीन विभ्िाÂ श्रेण्िायों में वगीर्वृफत किया गया हैμ ;पद्ध आयनिक या लवणीय या लवण - समान हाइड्राइड ;ैंसपदम भ्लकतपकमद्ध ;पपद्ध सहसंयोजक या आण्िवक हाइड्राइड ;डवसमबनसंत भ्लकतपकमद्ध ;पपपद्ध धत्िवक या अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड ;छवदेजवपबीवउमजतपब भ्लकतपकमद्ध 9.5.1 आयनिक या लवणीय हाइड्राइड े ब्लाॅक के अध्िकांश तत्व, जो उच्च विद्युत् ध्नीय प्रवृफति के होते हैं, डाइहाइड्रोजन के साथ रससमीकरणमितीय यौगिक बनाते हैं। यद्यपि हलके धत्िवक हाइड्राइड ;जैसे स्पभ्ए ठमभ्2 तथा डहभ्2द्ध में साथर्क सहसंयोजक गुण पाया जाता है। वस्तुतः स्पभ्ए ठमभ् तथा डहभ् में सहसंयोजी बहुलक22;च्वसलउमतपबद्ध संरचना होती है। आयनिक हाइड्राइड ठोस अवस्था में वि्रफस्टलीय, अवाष्पशील तथा ठोस अवस्था में अचालक होते हैं, तथापि क्षार - धतुओं के गलित हाइड्राइड विद्युत् का चालन करते हैं और विद्युत् - अपघटन द्वारा डाइहाइड्रोजन एनोड पर मुक्त होती है, जो हाइड्राइड भ्दृ आयन के अस्ितत्व की पुष्िट करता है। एनोड 2भ्दृ गलित ⎯⎯⎯⎯→भ्2 ;हद्ध ़ 2मदृ लवणीय हाइड्राइड जल के साथ विस्पफोटीय रूप से अभ्िावि्रफया करके डाइहाइड्रोजन गैस देते हैंμ छंभ् े ़ भ्व् ंु → छंव्भ् ंु ़ भ्ह;द्ध ;द्ध ;द्ध 2 ;द्ध 2 लिथ्िायम हाइड्रइड साधरण ताप पर व् एवं ब्स के22साथ अवि्रफयाशील है। अतः इसका उपयोग अन्य उपयोगी हाइड्राइड बनाने में किया जाता है। उदाहरणस्वरूपμ 8स्पभ् ़ ।स2→ 2स्प।सभ्4 ़ 6स्पब्सब्स6 2स्पभ् ़ ठ2→ 2स्पठभ्4भ्6 9.5.2 सहसंयोजक या आण्िवक हाइड्राइड डाइहाइड्रोजन अध्िकांश चदृब्लाॅक के तत्वों के साथ संयुक्त होकर आण्िवक यौगिक बनाती है। इसके वुफछ सुपरिचित उदाहरण ब्भ्ए छभ्ए भ्व् तथा भ्थ् हैं। सुविध के लिए4 32अधातुओं के हाइड्रोजन यौगिकों को भी हाइड्राइड माना गया है। सहसंयोजक होने के कारण ये वाष्पशील यौगिक हैं। आण्िवक हाइड्राइड का पुनः वगीर्करण उनके लूइस संरचना ;स्मूपे ेजतनबजनतमद्ध में आपेक्ष्िाक इलेक्ट्राॅन की संख्या तथा आबंधें की संख्या पर किया गया हैμ ;पद्ध इलेक्ट्राॅन न्यून ;म्समबजतवद.कममिबपमदजद्ध ;पपद्ध इलेक्ट्राॅन परिशु( ;म्समबजतवद.चतमबपेमद्ध ;पपपद्ध इलेक्ट्राॅन समृ( ;म्समबजतवद.तपबीद्ध इलेक्ट्राॅन न्यून हाइड्राइड, जैसा नाम से पता चलता है, परंपरागत लूइस - संरचना लिखने के लिए इनमें इलेक्ट्राॅन की संख्या अपयार्प्त होती है। इसका उदाहरण डाइबोरेन ;ठ2भ्6द्ध है। वस्तुतः आवतर् सारणी के 13वें वगर् के सभी तत्व इलेक्ट्राॅन न्यून यौगिक बनाते हैं। आप इनके व्यवहार से क्या अपेक्षा रखते हैं? ये लूइस अम्ल की भाँति कायर् करते हैं। ये इलेक्ट्राॅनग्राही होते हैं। इलेक्ट्राॅन परिशु( हाइड्राइड में परंपरागत लूइस - संरचना के लिए आवश्यक इलेक्ट्राॅन की संख्या होती है। आवतर् सारणी के 14वें वगर् के सभी तत्व इस प्रकार के यौगिक ;जैसेμ ब्भ्द्ध बनाते हैं, जो चतुष्पफलकीय ज्यामिति के होते हैं।4इलेक्ट्राॅन समृ( हाइड्राइड इलेक्ट्राॅन आध्िक्य एकांकी इलेक्ट्राॅन युग्म के रूप में उपस्िथत होते हैं। आवतर् सारणी के 15वें से 17वें वगर् तक के तत्व इस प्रकार के यौगिक बनाते हैंμ ;छभ् में एकांकी युग्म, भ्व् में दो तथा भ्थ् में तीन32एकांकी युग्म होते हैंद्ध। आप इनके व्यवहार से क्या अपेक्षा रखते हैं? ये लूइस क्षार के रूप में व्यवहार करते हैं। ये इलेक्ट्राॅनदाताहोते हैं। उच्च विद्युत् - ट्टणात्मकता वाले परमाणु, जैसेμ नाइट्रोजन,आॅक्सीजन तथा फ्रलूओरीन के हाइड्राइड पर एकांकी इलेक्ट्राॅन युग्म होने के कारण अणुओं में हाइड्रोजन बंध् बनता है, जिनके कारण अणुओं में संगुणन होता है। उदाहरण 9.2 क्या आप यह अपेक्षा करते हैं कि छएव् तथा थ् के हाइड्रइडों के क्वथनांक उनके वगर् के संगत सदस्यों के हाइड्राइडों से निम्न होते हैं? कारण बताइए। हल छभ्3ए भ्2व् तथा भ्थ् के आण्िवक भारों के आधर पर इनके क्वथनांक संगत सदस्यों के हाइड्राइडों से कम होने चाहिए, परंतु छएव्एथ् की उच्च विद्युत्ट्टणता के कारण हाइड्राइडों में हाइड्रोजन बंध् बनाने की क्षमता उल्लेखनीय है। अतः छभ्3ए भ्2व् तथा भ्थ् के क्वथनांक उनके वगर् के सदस्यों से उच्च होते हैं। 9.5.3 धत्िवक या अरसमीकरणमितीय;या अंतराकाशीद्ध हाइड्राइड ये अध्िकांश क.ब्लाॅक तथा .िब्लाॅक के तत्वों से बनते हैं, हालाँकि सातवें, आठवें तथा नौवें वगर् की धतुएँ इस प्रकार के हाइड्राइड नहीं बनाती है, छठे वगर् में केवल व्रफोमियम ही ब्तभ् हाइड्राइड बनाता है। इस प्रकार के हाइड्राइड उफष्मा एवं विद्युत् रसायन विज्ञान का चालन करते हैं, विं फतु उनकी चालकता जनक धतु की तरह कायर्क्षम नहीं हैं। हाइड्रोजन की न्यूनता के कारण लवणीय हाइड्राइड के विषम ये हमेशा अरससमीकरणमितीय होते हैं। उदाहरणस्वरूप - स्ंभ्ए ल्इभ्ए ज्पभ्ए र्तभ्ए2ण्872ण्551ण्5.1ण्81ण्3.1ण्75टभ्ए छपभ्ए च्कभ् आदि। ऐसे हाइड्राइड्रो में0ण्560ण्6.0ण्70ण्6.0ण्8स्िथत संगठन का नियम लागू नहीं होता है। पूवर् में यह सोचा जाता था कि इन हाइड्राइडों के धातु - जालक में हाइड्रोजन अंतराकाशी स्िथति ग्रहण करते हैं,जिससे इनमें बिना किसी परिवतर्न की विवृफति उत्पÂ होती है। पफलतः इन्हें ‘अंतराकाशी हाइड्राइड’ कहा गया, यद्यपि बाद में अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि छपए च्कए ब्म एवं ।ब के हाइड्राइड को छोड़कर इस वगर् के अन्य हाइड्राइड अपने जनकधतु की तुलना में भ्िाÂ जालक रखते हैं। संव्रफमण धतुओं पर हाइड्रोजन के अवशोषण के गुण को उत्प्रेरकीय अपचयन अथवा हाइड्रोजनीकरण अभ्िावि्रफयाओं द्वारा अनेक यौगिक बनाने में बृहद् रूप से प्रयुक्त होता है। वुफछ धतुएँ ;जैसे - च्क एवं च्जद्ध हाइड्रोजन के बृहद् आयतन को समायोजित कर सकती हैं। अतः इन्हें भंडारण - माध्यम के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। हाइड्रोजन भंडारण एवं उफजार् - स्रोत के रूप में इस गुण के प्रयोग की प्रबल संभावना है। उदाहरण 9.3 क्या पफाॅस्पफोरस बाह्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 3े 23च 3 के आधर पर च्भ्5 बनाएगा? हल यद्यपि पफाॅस्पफोरस ़3 तथा ़5 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ता है, तथापि यह च्भ्5 नहीं बनाता है। वुफछ अन्य तथ्यों के अतिरिक्त डाइहाइड्रोजन के उच्च Δ ं तथा Δ महभ् मान च् को सवोर्च्च आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत करने तथा पफलस्वरूप चभ्5 के विरचन का समथर्न नहीं करते। 9.6 जल सभी सजीवों का एक बृहद् भाग जल द्वारा नि£मत है। मानव शरीर में लगभग 65 प्रतिशत एवं वुफछ पौधें में लगभग 95 प्रतिशत जल होता है। जीवों को जीवित रखने के लिए जल एकमहत्त्वपूणर् यौगिक है। यह एक अतिमहत्त्वपूणर् विलायक है। पृथ्वी की सतह पर जल का वितरण एक समान नहीं है। विश्व की आकलित जल - आपूतिर् सारणी 9.2 में दी गइर् हैμ सारणी 9.2 विश्व की आकलित जल - आपू£त स्रोत संपूणर् » मात्रा महासागर;व्बमंदेद्ध 97ण्33 खारी झील ;ैंसपदम संामेद्ध तथा अंतःस्थलीय समुद्र ;प्दसंदक ेमंद्ध0ण्008 ध््रुवीय बपर्फ ;च्वसंत पबमद्ध तथा हिमानी ;ळसंबपमतेद्ध2ण्04 भौम जल ;ळतवनदक ूंजमतद्ध0ण्61 झील ;स्ंामेद्ध 0ण्009 मृदा - आद्रर्ता ;ैवपस उवपेजनतमद्ध 0ण्005 वायुमंडलीय जलवाष्प ;।जवउवेचीमतपब ूंजमत अंचवनतद्ध0ण्001 नदियाँ ;त्पअमतद्ध 0ण्0001 9.6.1 जल के भौतिक गुण यह एक रंगहीन तथा स्वादहीन द्रव है। जल ;भ्व्द्ध तथा भारी2जल ;क्व्द्ध के भौतिक गुण सारणी 9.3 में दिए गए हैं।2संघनित प्रावस्था ;द्रव तथा ठोस अवस्थाद्ध में जल के असामान्य गुणों का कारण जल के अणुओं के बीच विस्तृत हाइड्रोजन बंध्न का होना है। इसी वगर् के अन्य तत्वों के हाइड्राइड भ्ै तथा भ्ैम की तुलना में जल का उच्च22हिमांक, उच्च क्वथनांक, उच्च वाष्पन उफष्मा, उच्च संलयन उफष्मा का कारण हाइड्रोजन - बंध्न का होना है। अन्य द्रवों की तुलना में जल की विश्िाष्ट उफष्मा, तापीय चालकता, पृष्ठ - तनाव, द्विध््रुव आघूणर् तथा परावैद्युतांक के मान उच्च होते हैं। इन्हीं गुणोंके कारण जीवमंडल में जल की महत्त्वपूणर् भूमिका है। जल की उच्च वाष्पन उफष्मा तथा उच्च उफष्माधरिता ही जीवों के शरीर तथा जलवायु के सामान्य ताप को बनाए रखनेके लिए उत्तरदायी है। वनस्पतियों एवं प्राण्िायों के उपापचय ;डमजंइवसपेउद्ध में अणुओं के अभ्िागमन के लिए जल एकउत्तम विलायक का कायर् करता है। जल ध्ु्रवीय अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध् बनाता है, जिससे सहसंयोजक यौगिक,जैसेμ ऐल्कोहाॅल तथा काबोर्हाइड्रेट यौगिक जल में विलेय होते हैं। 9.6.2 जल की संरचना गैस - प्रावस्था में जल एक बंकित अणु है। आबंध् कोण तथा व्दृभ् आबंध् दूरी के मान व्रफमशः 104ण्5° तथा 95ण्7 चउ हैं, जैसा चित्रा 9.1 ;कद्ध में प्रद£शत किया गया है। अत्यध्िक ध््रुवित अणु चित्रा 9.1 ;खद्ध में तथा चित्रा 9.1 ;गद्ध में जल के अणु में आ£बटल अतिव्यापन दशार्या गया है। चित्रा 9.1 ;कद्ध जल की बंकित संरचना ;खद्ध जल अणु द्विध््रुव के रूप में और ;गद्ध जल के अणु में आ£बटल अतिव्यापन 22सारणी 9.3 भ्व्एवंक्व्के भौतिक गुणगुण भ्2व्क्2व् आण्िवक द्रव्यमानध्ह उवसदृ1 18ण्0151 20ण्0276 गलनांकध्ज्ञ 273ण्0 276ण्8 क्वनांकध्ज्ञ 373ण्0 374ण्4 विरचन एन्थैल्पी ;म्दजींसचल व िवितउंजपवदद्धध्;ाश्र उवसदृ1द्ध दृ285ण्9 दृ294ण्6 वाष्पन एन्थैल्पी;म्दजींसचल व िअंचवनतपेंजपवदद्धध्;373ाद्धध्;ाश्र उवसदृ1द्ध 40ण्66 41ण्61 संलयन एन्थैल्पी ;म्दजींसचल व िनिेपवदद्ध ;ाश्र उवसदृ1द्ध 6ण्01 दृ उच्च घनत्व का तापध्ज्ञ 276ण्98 284ण्2 घनत्व ;298ज्ञद्धध्ह बउदृ3 1ण्0000 1ण्1059 श्यानता ;ब्मदजपचवपेमद्ध 0ण्8903 1ण्107 परावैद्युतांक ध्ब्2ध्छण्उ2 78ण्39 78ण्06 विद्युत् - चालकता ;293ज्ञध्वीउदृ1 बउ दृ1द्ध 5ण्710दृ8 दृ जल का वि्रफस्टलीय प्रारूप बपर्फ है। वायुमंडलीय दाब पर बपर्फ का वि्रफस्टलीकरण षट्कोणीय आवृफति के रूप में होता है। परंतु न्यून ताप पर इसका संघनन घनीय आवृफति के रूप में होता है। बपर्फ का घनत्व जल से कम होता है। पफलतः बपर्फ का टुकड़ा जल में तैरता रहता है। शीतकाल में झीलों में पानी की सतह पर जमी बपर्फ की सतह उफष्मारोधन ;ज्ीमतउंस पदेनसंजपवदद्ध प्रदान करती है, जिससे जलीय जीवन सुरक्ष्िात रहता है। यह तथ्य पारिस्िथतिकी ;म्वसवहपबंसद्ध दृष्िट से अति महत्त्वपूणर् है। 9.6.3 बपर्फ की संरचना बपर्फ एक अतिव्यवस्िथत त्रिाविम हाइड्रोजन आबंध्ित संरचना ;भ्पहीसल वतकमतमक जीतमम कपउमदेपवदंस ीलकतवहमद इवदकमक ेजतनबजनतमद्ध है, जिसे चित्रा 9.2 में दशार्या गया है। ग्.किरणों द्वारा परीक्षण से पता चला है कि बपर्फ वि्रफस्टल में आॅक्सीजन परमाणु चार अन्य हाइड्रोजन परमाणुओं से 276 चउ दूरी पर चतुष्पफलकीय रूप से घ्िारा रहता है। हाइड्रोजन आबंध् बपर्फ में बृहद छिद्रयुक्त एक प्रकार की खुली संरचना बनाते हैं। ये छिद्र उपयुक्त आकार के वुफछ दूसरे अणुओं को अंतराकाश में ग्रहण कर सकते हैं। चित्रा 9.2 बपर्फ की संरचना 9.6.4 जल के रासायनिक गुण जल अनेक पदाथो± के साथ अभ्िावि्रफया करता है। वुफछमहत्त्वपूणर् अभ्िावि्रफयाएँ निम्नलिख्िात हैंμ ;1द्ध उभयध्मीर् प्रवृफति: जल अम्ल तथा क्षार - दोनों रूपों में व्यवहार करता है। अतः यह उभयध्मीर् है। ब्रांस्टेड अवधरणा के संदभर् में जल छभ् के साथ अम्ल के रूप में3तथा भ्ै के साथ क्षार के रूप में कायर् करता हैμ रसायन विज्ञान भ्व् स ;द्ध़छभ् ;ंु द्ध व्भ् −;ंु द्ध़छभ् ़;ंु द्ध423 भ्व्स ़भ्ै ंु भ्व् ंु ़भ्ै ंु ;द्ध 2 ;द्ध ़;द्ध −;द्ध 23 जल के स्वतः प्रोटोअपघटन ;स्वतः आयननद्ध को निम्नलिख्िात रूप में प्रद£शत किया जा सकता हैμ ़ दृ;द्ध़भ्व्स ;द्ध भ्व् ंु ़व्भ् ;द्ध ंु भ्व्स ;द्ध 22 3 अम्ल - 1 क्षार - 2 अम्ल - 2 क्षार - 1 ;अम्लद्ध ;क्षारद्ध ;संयुग्मी अम्लद्ध ;संयुग्मी क्षारद्ध ;2द्ध जल की अपोपचयन अभ्िावि्रफया: उच्च विद्युत् ध्नीय धतुओं द्वारा जल आसानी से डाइहाइड्रोजन में अपचयित हो जाता हैμ 2भ्व् स ;द्ध ;द्ध →2छंव्भ् ंु भ् ;द्ध 2 ़2छं े ; द्ध ़ 2ह अतः यह अभ्िावि्रफया हाइड्रोजन के प्रमुख स्रोत के रूप में उपयोगी है। प्रकाश संश्लेषण की प्रिया में जल व् में आॅक्सीकृत होता है।26ब्व्;हद्ध ़ 12भ्व्;सद्ध → ब्भ्व् ;ंुद्ध ़ 6भ्व्;सद्ध2261262़ 6व्2;हद्ध फ्रलुओरीन द्वारा भी भ्व् का आॅक्सीजन में आॅक्सीकरण होता हैμ22थ्2 ह ़2भ्व् ंु →4भ् ़ ंु ़4थ् − ंु;द्ध 2 ;द्ध ;द्ध ;द्ध व्ह़ 2 ;द्ध ;3द्ध जल - अपघटन अभ्िावि्रफया: जल का परावैद्युतांक उच्च होने के कारण इसमें प्रबल जलयोजन गुण पाया जाता है। यह अनेक आयनिक यौगिक को घोलने में सक्षम है। पफलस्वरुप वुफछ आयनिक तथा सहसंयोजी यौगिकों का जल - अपघटन हो जाता हैμ च्व् े ़6भ्व् स →4भ्च्व् ंु 4 ;द्ध 2 ;द्ध 410 ;द्ध 3 ैपब्स ;द्ध़2भ्व् स ;द्ध→ैपव् े ़ ;द्ध स ;द्ध 4भ्ब्स ंु 42 2 3− −छ ;द्धे2 ;द्ध →छभ् 3 3व्भ् ;द्ध ़3भ्व् स ;द्ध ह ़ ंु ;4द्धहाइड्रेट - विरचन: जलीय विलयन से अनेक लवणजलयोजित लवण के रूप में िस्टलीकृत किए जा सकते हैं।जल का संगुणन विभ्िाÂ प्रकार से होता हैμ ;पद्ध उपसहसंयोजित जल −;उदाहरणस्वरूप ⎡ब्त भ्व् ; द्ध⎤3़ 3ब्स द्ध⎣ 26 ⎦ ;पपद्ध अंतराकाशीय जल ;उदाहरणस्वरूप ठंब्स ण्2भ् व् द्ध2 2;पपपद्ध हाइड्रोजन आबंध्ी जल ;उदाहरणस्वरूप ब्नैव् ण्5भ् व् में4 22दृ⎡ब्न भ्व् ⎤2़ ैव् ण्भ्व् द्ध⎣ ; 2 द्ध4 ⎦ 42 उदाहरण 9.4 ब्नैव्4ए 5भ्2व् में कितने जल - अणु हाइड्रोजन बंध् द्वारा संगुण्िात हैं? हल केवल जल का एक अणु, जो बड़े कोष्ठक के बाहर ;सहसंयोजन क्षेत्राद्ध है, हाइड्रोजन बंध् द्वारा संगुण्िात है। जल के शेष चार अणु उपसहसंयोजित हैं। 9.6.5 कठोर एवं मृदु जल सामान्यतः वषार् का जल लगभग शु( होता है। ;वायुमंडल की वुफछ विलयशील गैसें घुली हो सकती हैंद्ध। जब जल पृथ्वी कीसतह पर बहता है, तब इसका अस्ितत्व उत्तम विलायक के रूप में होता है। यह कइर् लवणों को घोल लेता है। जल में उपस्िथत विलयशील वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम लवण, ;जो हाइड्रोजन काबोर्नेट, क्लोराइड तथा सल्पेफट के रूप में रहते हैंद्ध उसकी कठोरता के कारण होते हैं। कठोर जल साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं देता है। विलयशील वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम लवण से मुक्त जल को ‘मृदु जल’ ;ैवजि ूंजमतद्ध कहते हैं। मृदु जल साबुन के साथ आसानी से झाग देता है। कठोर जल साबुन के साथ मलपेफन/अवक्षेप देता है। साबुन, जिसमें सोडियम स्टीअरेट ;ब्17भ्ब्व्व्छंद्ध होता है,35कठोर जल के साथ अभ्िावि्रफया करके ब्ंध्डह स्टीअरेट के रूप में अवक्षेपित हो जाता हैμ 2ब् 17भ्35ब्व्व्छं ;ंु द्ध़ ड2़;ंु द्ध→ ब्भ्ब्व्व् ड ↓़2छं ़ ंु यडब्ंध्डह ; 35 द्ध2 ;द्ध17 अतः कठोर जल ध्ुलाइर् के लिए उपयुक्त नहीं है। यह भाप क्वथ्िात्रा ;ैजमंउ इवपसमतद्ध के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि पपड़ी के रूप में इसमें लवण जम जाते हैं, जिससे भाप क्वथ्िात्रा की दक्षता में कमी आ जाती है। जल की कठोरता दो प्रकार की होती हैμ ;पद्ध अस्थायी कठोरता ;पपद्ध स्थायी कठोरता 9.6.6 अस्थायी कठोरता अस्थायी कठोरता जल में वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम के हाइड्रोजन काबोर्नेट की उपस्िथति के कारण होती है। जल की अस्थायी कठोरता निम्नलिख्िात विध्ियों द्वारा दूर की जाती हैμ ;पद्ध उबालना: उबालने की प्रवि्रफया में डह;भ्ब्व्द्ध एवं32277 ब्ं ;भ्ब्व्द्ध के विलयशील लवण क्रमशः अविलयशील32डह;व्भ्द्ध तथा ब्ंब्व् में परिव£तत हो जाते हैं। डहब्व्233 की तुलना में डह;व्भ्द्ध का विलेयता - गुणनपफल उच्च होता है,2अतः डह;भ्व्द्ध अवक्षेपित हो जाता है। इस अवक्षेप को2छानकर अलग कर लिया जाता है। प्राप्त छनित ही मृदु जल है। गरम करनेपर डह भ्ब्व् ; 3 द्ध→डह व्भ् द्ध 2ब्व् 2⎯⎯⎯⎯⎯⎯; ↓़ 22 गरम करनेपर ब्ं भ्ब्व् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯ब्ंब्व्3 ↓़ भ्व् ़ ब्व्2; 3 द्ध2 → 2 ;पपद्ध क्लाकर् विध्ि ;ब्संताश्े उमजीवकद्ध रू इस विध्ि में बुझे चूने की परिकलित मात्रा को कठोर जल में मिला दिया जाता है। पफलतः वैफल्िसयम काबोर्नेट तथा मैग्नेश्िायम हाइड्राॅक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। उसे छानकर अलग कर लिया जाता है। ; द्ध़;द्ध→ 2ब्ंब्व् ब्ंभ्ब्व् 2 ब्ंव्भ् 2 ↓़ 2भ् व् 3 32 डह भ्ब्व् 3 ़ 2ब्ं व्भ् → 2ब्ंब्व् ↓;द्ध2 ;द्ध23 ़ डह व्भ् ; द्ध़ 2भ् व् 22 9.6.7 स्थायी कठोरता इस प्रकार की कठोरता जल में विलयशील वैफल्िसयम तथा मैग्नीश्िायम के क्लोराइड तथा सल्पेफट के रूप में घुले रहने के कारण होती है। यह ;स्थायी कठोरताद्ध उबालने से दूर नहीं की जा सकती है। इसे निम्नलिख्िात विध्ियों द्वारा दूर किया जा सकता है - ;पद्ध धवन सोडा ;सोडियम काबोर्नेटद्ध के उपचार से: धवन सोडा कठोर जल में विलयशील वैफल्िसयम एवं मैग्नीश्िायम क्लोराइड तथा सल्पेफट के साथ वि्रफया करके अविलयशील काबोर्नेट बनाता है। डब्स ़ छं ब्व् → डब्व् ↓़ 2छंब्स 223 3 ;ड त्र डहए ब्ंद्ध डैव् ़ छं ब्व् → डब्व् ↓़ छं ैव् 423 324 ;पपद्ध केलगाॅन विध्िμसोडियम हेक्सामेटापफाॅस्पेफट ख्ैवकपनउ ीमगंउमजंचीवेचींजमए छंच्व्, को व्यापारिक रूप में6618‘केलगाॅन’ कहते हैं। जब यह कठोर जल में मिलाया जाता है, तब निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफया देता हैμ छं च्व् → 2छं ़़ छं च्व् 2दृ 6618 4618 2़ 2−़ड ़ छंच्व् →ख्छंडच्व् ,2−़ 2छं 4618 2 618 ;ड त्र डहए ब्ंद्ध यह ट्टणायन संवुफल डह2़ एवं ब्ं2़ आयन को विलयन में रखता है। ;पपपद्ध आयन विनिमय विध्ि ;प्वद मगबींदहम उमजीवकद्ध: इस विध्ि को ‘जीओलाइट/परम्यूटिट विध्ि’ भी कहते हैं। जलयुक्त सोडियम ऐलुमीनोसिलिकेट ;छं।प्ैपव्ण्3भ्व्द्ध जीओलाइट/परम्यूटिट ;च्मतउनपजपजद्ध42कहलाता है। सरलता के लिए सोडियम ऐलुमीनियम सिलिकेट को छंर् भी लिख सकते हैं। कठोर जल में इसके मिलाने पर निम्नलिख्िात विनिमय अभ्िावि्रफया होती हैμ 2़़2छंर् ;द्ध़ड ;द्ध ंु →डर् े ़2छं ;द्ध ंुे2 ;द्ध ;ड त्रडहए ब्ंद्ध परम्यूटिट/ जीओलाइट में से जब सारा सोडियम पूणर् रूप से समाप्त हो जाता है, तब जलीय सोडियम क्लारोइड विलयन द्वारा उपचार कराकर इनका पुनः प्रयोग करने के लिए पुनजर्नन ;त्महमदमतंजमकद्ध कर लिया जाता हैμ 2 ;ेद्ध़ ;द्ध→2छंर् े ़डब्स 2 ;ंु द्धडर् 2छंब्स ंु ;द्ध ;पअद्ध संश्लेष्िात रेजिन ;त्मेपदद्ध विध्ि: आजकल कठोर जल का मृदुकरण मुख्य रूप से संश्लेष्िात ध्नायन विनिमयक द्वारा किया जाता है। यह विध्ि जीओलाइट की तुलना में अिाक दक्ष है। ध्नायन विनिमयक रेजिन दृैव्भ् समूहयुक्त बृहद्3काबर्निक अणु होते हैं तथा जल में अविलेय होते हैं। आयन विनियम रेजिन ;त्दृैव्भ्द्ध को छंब्स से उपचार करके3त्दृछं में परिवतिर्त किया जाता है। रेजन छं़ आयन का जल में उपस्िथत ब्ं2़ एवं डह2़ आयन से विनिमय करके कठोर जल को मृदु बना देता है, जहाँ ;त् त्र रेजिन ट्टणायन हैद्धμ 2़़;द्ध ड ; द्ध →त्डे ़2छं ;द्ध ंु2त्छं े ़ ंु 2 ;द्ध रेजिन का पुनजर्नन ;त्महमदमतंजपवदद्ध सोडियम क्लोराइड विलयन मिलाकर किया जाता है।जल को उत्तरोत्तर ;ैनबबमेेपअमसलद्ध ध्नायन - विनिमयक ;भ़् आयन के रूप मेंद्ध तथा ट्टणायन - विनिमयक ;व्भ्दृ के रूप मेंद्ध रेजिन से प्रवाहित करने पर शु( विखनिजित ;क्मउपदमतंसपेमकद्ध तथा विआयनित ;क्मपवदपेमकद्ध जल प्राप्त किया जाता हैμ 2़़2त्भ्े ंु 2े ़ ंु;द्ध़ड ;द्ध डत् ;द्ध 2भ् ;द्ध ध्नायन विनिमय के इस प्रक्रम में, भ़् का विनिमय जल में उपस्िथत छं़ए ब्ं2़ए डह2़ एवं अन्य ध्नायनों द्वारा हो जाता है। पफलतः प्रोटान का निष्कासन होता है तथा जल अम्लीय हो जाता है। रसायन विज्ञान )ण आयन विनिमय के दूसरे प्रक्रम में त्छभ् ;द्ध़ ;द्ध त्छभ् ण्व्भ् े भ्व्स ़ −;द्ध ंु 22 3 ़ दृ − ़−त्छभ्ण्व्भ् ;ेद्ध़ग् ;ंु द्ध त्छभ्ण्ग् ;ेद्ध33 ़व्भ्−; द्ध ंु व्भ्दृ का विनिमय जल में उपस्िथत ट्टणायन ;जैसेμ ब्सदृए दृ भ्ब्व्3 ए ैव्42दृद्ध द्वारा होता है। इस प्रकार मुक्त व्भ्दृ आयन धनायन विनिमय से मुक्त भ़् आयन से अभ्िावि्रफया करके जल को उदासीन कर देता है। भ्ंु ; द्ध ़व्भ् ;द्ध ंु → 2 ़− भ्व्स ;द्ध ध्नायन तथा ट्टणायन विनिमयकों के रेजिन तल ;त्मेपद इमकद्ध का उपयोग जब पूणर् रूप से हो जाता है, तब इन्हें व्रफमशः तनु अम्ल तथा तनु क्षारक विलयनों से अभ्िावि्रफया कराकर पुनजर्नित कर लिया जाता है। 9.7 हाइड्रोजन पराॅक्साइड ;भ्व्द्ध22हाइड्रोजन पराॅक्साइड एक महत्त्वपूणर् रसायन है, जो पयार्वरण - नियंत्राण में घरेलू तथा औद्योगिक बहिःस्राव ;म्सििनमदजेद्ध के उपचार के रूप में काम आता है। 9.7.1 बनाने की विध्ियाँ यह निम्नलिख्िात विध्ियों द्वारा बनाया जा सकता हैμ ;पद्ध बेरियम पराॅक्साइड को अम्लीवृफत करके तथा जल की आध्िक्य मात्रा को कम दाब पर वाष्पीवृफत करके हाइड्रोजन पराॅक्साइड प्राप्त किया जाता हैμ 2 ़भ् ैव्ंु ;द्धठंव्ण्8भ्व् े 2 ;द्ध 24 ; द्ध →ठंैव्े 4 ़ भ्व् ;द्ध ंु ़8भ्व् स ;द्ध 22 2 ;पपद्ध उच्च धरा घनत्व पर अम्लीकृत सल्पेफट विलयन के विद्युत् - अपघटनी आॅक्सीकरण से प्राप्त पराॅक्साइड सल्पेफट के जल - अपघटन से हाइड्रोजन पराॅक्साइड प्राप्त किया जाता है। − विद्यतु् - अपघटन 4⎯⎯⎯⎯→ 332भ्ैव् ;ंुद्ध⎯⎯भ्व् ैव्व्ैव् भ् ;ंुद्ध जल - अपघटन ⎯4−़⎯⎯⎯⎯⎯→2भ्ैव् ;ंुद्ध ़2भ् ;ंुद्ध ़ भ्2व्2;ंुद्ध अब यह विध्ि प्रयोगशाला में ;क्2व्2द्ध बनाने के काम में आती है। 22 2क्व्स ;द्ध 2ज्ञ ै व् 8 ;ेद्ध़ 2 ;द्ध→2ज्ञक्ैव्ंु 4 ़ 2 ;द्धक्व्स ;पपपद्ध हाइड्रोजन पराॅक्साइड का औद्योगिक उत्पादन 2 - एल्िकलऐन्थ्राक्िवनाॅल ;2.ंसालसंदजीतंुनपदवसद्ध के स्वतः आॅक्सीकरण द्वारा किया जाता है। व्2 वायु2 - एथ्िालऐन्थ्राक्िवनाॅल भ्व् ;आॅक्सीकृत22भ्ध्च्क2 उत्पादद्ध इस विध्ि से प्राप्त ;्1प्रतिशतद्ध हाइड्रोजन पराॅक्साइड का निष्कषर्ण जल द्वारा कर लिया जाता है। तत्पश्चात् कम दाब पर इसका आसवन कराकर हाइड्रोजन पराॅक्साइड का सांद्रण ;द्रव्यमानानुसार 30 प्रतिशतद्ध तक कर लिया जाता है। हाइड्रोजन पराॅक्साइड के 85 प्रतिशत तक सांद्रण हेतु कम दाब पर विलयन का आसवन सावधानीपूवर्क कराकर किया जाता है। अवशेष को हिमशीतित ;थ्तव्रमदद्ध करके शु( हाइड्रोजन पराॅक्साइड प्राप्त की जाती है। 9.7.2 भौतिक गुण शु( अवस्था में हाइड्रोजन पराॅक्साइड लगभग रंगहीन ;अति हलका नीलाद्ध द्रव है। इसके मुख्य भौतिक गुण सारणी 9.4 में दिए गए हैं। हाइड्रोजन पराॅक्साइड जल के प्रत्येक अनुपात के साथ मिश्रणीय है। यह हाइड्रेट भ्व्ण्भ्व् ;क्वथनांक 221ज्ञद्ध बना लेता है।222बाजार में उपलब्ध् 30 प्रतिशत सांद्रता वाले हाइड्रोजन पराॅक्साइड विलयन की आयतन सांद्रता ;टवसनउम ेजतमदहजीद्ध ‘100 आयतन’ होती है। ‘100 आयतन’ भ्व् सांद्रता से अभ्िाप्राय यह है कि 1उस्22भ्व् विलयन के पूणर् अपघटन के पफलस्वरूप मानक ताप तथा दाब22पर 100 उस् आॅक्सीजन मुक्त होती है। बाजार में यह ‘10आयतन’ के रूप में बेचा जाता है, अथार्त् इसकी सांद्रता 3 प्रतिशत होती है। उदाहरण 9.5 10 आयतन भ्2व्2 विलयन की सामथ्यर् परिकलित करें। हल भ्2व्2 के ‘10 आयतन विलयन’ का अथर् है कि भ्2व्2 के इस विलयन का 1 लिटर मानक ताप एवं दाब पर 10 लिटर आॅक्सीजन देगाμ भ्व्स →व्ह ;द्ध 2;द्ध ;द्ध ़भ्व्स 22 22 2 34ह ैज्च् पर 22ण्4 स् ंज 68 ह उपरोक्त समीकरण के आधर पर 68 ग्राम भ्2व्2 से मानक ताप एवं दाब पर 22.7 स् व्2 प्राप्त होगी। मानक ताप एवं दाब पर 10स् लिटर व्2 उत्पÂ करने के लिए भ्2व्2 आवश्यक मात्रा होगीμ 68 10 ह त्र 29ण्9 ह त्र 30 ह भ्2व्222ण्7 अतः 10 आयतन भ्2व्2 की सामथ्यर् त्र 30ण्0 हध्स् है। यानी 3ः भ्2व्2 विलयन है। 9.7.3 संरचना हाइड्रोजन पराॅक्साइड की संरचना असमतलीय होती है। गैसीय प्रावस्था तथा ठोस प्रावस्था में इसकी आण्िवक संरचना को चित्रा 9.3 में दशार्या गया है। चित्रा 9.3 ;कद्ध गैसीय प्रावस्था में भ्2व्2 की संरचना द्वितल कोण 111ण्5° है। ;खद्ध ठोस प्रावस्था में 110 ज्ञ ताप पर भ्व्की संरचना22 द्वितल कोण 90ण्2° है। 9.7.4 रासायनिक गुण अम्लीय तथा क्षारीयμदोनों माध्यम में हाइड्रोजन पराॅक्साइड अपचायक तथा आॅक्सीकारक, दोनों कायर् करता है। वुफछ सरल अभ्िावि्रफयाओं का वणर्न नीचे किया जा रहा हैμ सारणी 9.4 हाइड्रोजन पराॅक्साइड के भौतिक गुण गलनांकध्ज्ञ 272ण्4 घनत्व ;द्रव 298 ज्ञद्धध्हबउदृ3 1ण्44 क्वथनांकध्ज्ञ 423ण्0 श्यानता ;290ज्ञद्धध्ब्मदजपचवपेम 1ण्25 वाष्प - दाब ;298ज्ञद्धध्उउभ्ह 1ण्9 परावैद्युतांक ;298ज्ञद्धध्ब्2ध्छण्उ2 70ण्7 घनत्व ;268ण्5ज्ञ पर ठोस द्धध्हबउदृ3 1ण्64 विद्युत् चालकता ;298ज्ञद्धध्Ω−1 बउ दृ1 5ण्1 10दृ8 ;पद्ध अम्लीय माध्यम में भ्व् आॅक्सीकारक के रूप मेंμ222़ ़2थ्म ; द्ध ़2भ् ;द्ध ंु ़भ्व् ंु ंु 22 ; द्ध → 3़; द्ध ़2भ्व् स ;द्ध 2थ्मंु 2 ;द्ध 2 ;द्ध ;द्ध 2 ;द्ध च्इै े ़4भ्व् ंु →च्इैव् े ़4भ्व् स 2 4 ;पपद्ध अम्लीय माध्यम में भ्व् अपचायक के रूप मेंμ22दृ ़ 2़2डदव् ़6भ् ़5भ् व् →2डद ़8भ् व् ़5व् 4 22 22 भ्व्ब्स ़भ्व् →भ्व् ़़ब्स−़व्223 2 ;पपपद्ध क्षारीय माध्यम में भ्व् आॅक्सीकारक के रूप मेंμ222़ 3़−2थ्म ़भ्व् →2थ्म ़2व्भ् 22 2़ 4़−डद ़भ्व् →डद ़2व्भ् 22 ;पअद्ध क्षारीय माध्यम में भ्व् अपचायक के रूप मेंμ22प् ़भ्व् ़2व्भ् −→2प् −़2भ् व् ़व्222 22 दृ2डदव् ़3भ् व् →2डदव् ़3व् ़422 22 2भ् व् ़2व्भ् दृ 2 9.7.5 भंडारण प्रकाश के मंद प्रभाव से भ्व् अपघटित हो जाता है।222भ् व् ;सद्ध→2भ्व् स ;द्ध़व् ;हद्ध22 22 धतुओं की सतह तथा क्षार की सूक्ष्म मात्रा ;जो काँच में निहित रहती हैद्ध की उपस्िथति के कारण उपरोक्त अभ्िावि्रफया उत्प्रेरित होती है। अतः इसे मोम के स्तर से युक्त काँच या प्लास्िटक पात्रों में अँध्ेरे में रखा जाता है। यूरिया एक स्थायीकारी के रूप में मिलाया जाता है। इसे ध्ूल के कण से दूर रखा जाता है, क्योंकि ध्ूल हाइड्रोजन पराॅॅक्साइड के विस्पफोटी अपघटन को प्रेरित कर देती है। 9.7.6 उपयोग भ्व् के बृहद् रूप में उपयोग के कारण इसके औद्योगिक22उत्पादन में वृि होती जा रही है। इसके वुफछ उपयोग नीचे दिए जा रहे हैंμ ;पद्ध दैनिक जीवन में इसका उपयोग मंद कीटनाशी तथा बालों के विरंजन के रूप में किया जाता है। पूतिरोध्ी ;।दजपेमचजपबद्ध के रूप में यह बाजार में ‘परहाइडॅªाल’ ;च्मतीलकतवसद्ध नाम से बेचा जाता है। ;पपद्ध इसका उपयोग सोडियम परबोरेट तथा सोडियम परकाबोर्नेट के निमार्ण में किया जाता है, जो उच्च कोटि के अपमाजर्कों के लिए उपयोगी है। रसायन विज्ञान ;पपपद्ध इसका उपयोग हाइड्रोक्यूनोन, टाटर्रिक अम्ल, खाद्य - उत्पादों तथा औषध्ियों ;सिपैफलोस्पोरिनद्ध के संश्लेषण में किया जाता है। ;पअद्ध उद्योगों में भ्2व्2 का उपयोग वस्त्रों, कागज की लुगदी, चमड़ा, तेल, वसा आदि के विरंजन कारक ;ठसमंबीपदह ।हमदजद्ध के रूप में किया जाता है। ;अद्ध आजकल भ्2व्2 का उपयोग पयार्वरणीय ;हरितद्ध रसायन ;उदाहरणस्वरूपμपयार्वरण - नियंत्राण में, घरेलू तथा औद्योगिक बहिस्राव ;म्सििनमदजेद्ध उपचार में, सायनाइड के आॅक्सीकरण में, वाहित मल के लिए वायुजीवी दशाओं पुनस्थार्पन आदिद्ध में किया जाता है। 9.8 भारी जल, क्व्2भारी जल विस्तृत रूप से नाभ्िाकीय रिएक्टरों में न्यूटाॅन मंदक के रूप में तथा विनिमय अभ्िावि्रफयाओं की वि्रफयाविध्ियों के अध्ययन में काम आता है। इसका उत्पादन जल के वैद्युत अपघटन द्वारा तथा उवर्रक उद्योगों में उपोत्पाद ;ठल चतवकनबजेद्ध के रूप में होता है। भारी जल के भौतिक गुण सारणी 9.3 में दिए गए हैं। भारी जल का उपयोग ड्यूटीरियम के अनेक यौगिक बनाने के लिए किया जाता है। उदाहरणाथर्μ ब्ंब् ़2क् व् →ब्क् ़ब्ंव्क् 222 ;द्ध22 ैव् ़क्व् →क् ैव् 3 2 24 ।स ब् ़12क् व् →3ब्क् ़4।सव्क् 33 4 ;द्ध42 9.9 डाइहाइड्रोजन ईंध्न के रूप में दहन में डाइहाइड्रोजन अध्िक मात्रा में उफष्मा मुक्त करती है। ईंध्न ;जैसेμहाइहाइड्रोजन, मेथैन, एल.पी.जी. आदिद्ध की समान आण्िवक मात्रा, द्रव्यमान तथा आयतन के दहन से मुक्त उफजार् के आँकड़े सारणी 9.5 में दशार्ए गए हैं। इस सारणी से स्पष्ट है कि डाइहाइड्रोजन, पेट्रोल के ;समान द्रव्यमान कीद्ध तुलना में तीनगुना अध्िक उफजार् मुक्त कर सकती है, हालाँकि डाइहाइड्रोजन के दहन में प्रदूषक पेट्रोल से कम होते हैं। केवल डाइनाइट्रोजन के आॅक्साइड ही प्रदूषक हांेगेे। ;डाइहाइड्रोजन के साथ डाइनाइट्रोजन की अशुि के रूप में उपस्िथति के कारणद्ध गैस सिलेंडर में थोड़ी मात्रा में जल अंतःक्ष्िाप्त ;प्दरमबजद्ध करने पर डाइनाइट्रोजन तथा डाइआॅक्सीजन की अभ्िावि्रफया नहीं हो पाती, हालाँकि पात्रा ;जिसमें डाइहाइड्रोजन रखी जाती हैद्ध के द्रव्यमान का भी ध्यान रखना चाहिए। संपीडित डाइहाइड्रोजन के एक सिलिं डर का भार समान उफजार् वाले पेट्रोल सारणी 9.5 विभ्िाÂ ईंध्नों द्वारा दहन से मुक्त उफजार् मोल, द्रव्यमान तथा आयतन में दहन से मुक्त हुइर् उफजार् ाश्र में डाइहाइड्रोजन;गैसीय प्रावस्थाद्ध डाइहाइड्रोजन ;द्रव - प्रावस्थाद्ध एल.पी.जी मेथैन गैस आॅक्टेन ;द्रव - अवस्थाद्ध प्रति मोल 286 285 2220 880 5511 प्रति ग्राम 143 142 50 53 47 प्रति लिटर 12 9968 25590 35 34005 हाइड्रोजन केवल एक इलेक्ट्रॅान से युक्त सबसे हलका परमाणु है। यह इलेक्ट्राॅन को परित्याग कर मूल कण प्रोट्राॅन बनाता11 इन तीनों में केवल ट्राइटियम रेडियोसवि्रफय हैं। क्षार धतुओं तथा हैलोजेन में समानताओं के बावजूद इसके विश्िाष्ट गुणों केब्रह्मांड में हाइड्रोजन अतिबहुल तत्व है। मुक्त अवस्था में यह पृथ्वी के वायुमंडल में नहीं पाया जाता, हालाशैल रसायनों से भाप अंगार सृति अभ्िावि्रफया ;ॅंजमत हंे ेीपजि तमंबजपवदद्ध द्वारा डाइहाइड्रोजन का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है। यह लवणी जल के विद्युत् - अपघटन में सह - उत्पादन के रूप में प्राप्त होता है। डाइहाइड्रोजन भ्दृभ् एकलबंध् पर डाइहाइड्रोजन का उपयोग परमाण्िवय टाॅचर् ;।जवउपब जवतबीद्ध में किया जाता है। पफलस्वरूप तापमान ्4000ज्ञ तक पहुँच कक्ष ताप पर डाइहाइड्रोजन उच्च वियोजन एन्थैल्पी के कारण अवि्रफय होती है। यह लगभग सभी तत्वों के साथ उपयुक्त परिस्िथतियों में संयुक्त होकर हाइड्राइड बनाता है। सभी हाइड्राइडों को तीन श्रेण्िायोंμआयनिक या लवणीय ;ैंसपदमद्ध हाइड्राइड, सहसंयोजक या आण्िवक हाइड्राइड तथा धत्िवक या अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड में वगीर्वृफत किया गया है। अन्य हाइड्राइड बनाने के लिए क्षार - धतु हाइड्राइड उपयुक्त अभ्िाकमर्क हैं। आण्िवक हाइड्राइड ;उदाहरणस्वरूप ठव्द्ध का दैनिक जीवन में अत्यध्िक महत्त्व है। धत्िवक हाइड्राइडों का उपयोग डाइहाइड्रोजन के अतिशुिकरण ;न्सजतंचनतपपिबंजपवदद्ध तथा डाइहाइड्रोजन - संग्रह हेतु माध्यम ;डमकपनउद्ध के रूप में होता है। टैंक से लगभग 30 गुना अध्िक होता। डाइहाइड्रोजन को 20 ज्ञ पर ठंडा कर द्रवित भी किया जा सकता है। इसके लिए महँगे रोध्ी टैंकों की आवश्यकता पड़ती है। भ्िाÂ - भ्िाÂ धतुओं, जैसेμ छंछप5ए ज्पदृज्पभ्2ए डहदृडहभ्2 आदि के टैंकों का प्रयोग डाइहाइड्रोजन की कम मात्रा का भंडारण करने हेतु किया जाताहै। इन सीमाओं ने शोध्कत्तार्ओं को डाइहाइड्रोजन के सपफल प्रयोग की वैकल्िपक तकनीकों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस संदभर् में भावी विकल्प ‘हाइड्रोजन अथर्व्यवस्था’ है। हाइड्रोजन अथर्व्यवस्था का मूल सि(ांत उफजार् का द्रव हाइड्रोजन अथवा गैसीय हाइड्रोजन के रूप में अभ्िागमन तथा भंडारण है। हाइड्रोजन अथर्व्यवस्था का मुख्य ध्येय तथा लाभ - उफजार् का संचरण विद्युत् - उफजार् के रूप में न होकर हाइड्रोजन के रूप में होना है। हमारे देश में पहली बार अक्तूबर, 2005 में आरंभ परियोजना में डाइहाइड्रोजन स्वचालित वाहनों के ईंध्न के रूप में प्रयुक्त किया गया। प्रारंभ में चैपहिया वाहन के लिए 5 प्रतिशत डाइहाइड्रोजन मिश्रित ब्छळ को प्रयोग किया गया। बाद में डाइहाइड्रोजन की प्रतिशतता ध्ीरे - ध्ीरे अनुवूफलतम स्तर तक बढ़ाइर् जाएगी। आजकल डाहहाइड्रोजन का उपयोग ईंध्न सेलों में विद्युत् - उत्पादन के लिए किया जाता है। ऐसी आशा की जाती है कि आथ्िार् क रूप से व्यवहायर् तथा डाइहाइड्रोजन के सुरक्ष्िात स्रोत का पता आने वाले वषो± में लग सकेगा तथा उसका उपयोग उफजार् के रूप में हो सकेगा। डाइहाइड्रोजन से हाइड्रोजन हैलाइड, जल, अमोनिया मेथेनाॅल, वनस्पति घी आदि महत्त्वपूणर् यौगिकों का विरचन अपचयन अभ्िाियाओं द्वारा होता है। धतुकमीर्य अभ्िावि्रफयाओं में यह धत्िवक आॅक्साइड को धतु में अपचयित करता है। अंतरिक्ष - अनुसंधन में डाइहाइड्रोजन का उपयोग राॅकेट ईंध्न के रूप में होता है। वस्तुतः भविष्य में डाइहाइड्रोजन का उपयोगप्रदूषणमुक्त ईंध्न के रूप में महत्त्वपूणर् होगा ;हाइड्रोजन अथर्व्यवस्थाद्ध। जल अति सामान्य, बहुतायत तथा आसानी से उपलब्ध् पदाथर् है। रासायनिक एवं जैविक दृष्िटकोण से यह अतिमहत्त्वपूणर्है। द्रव - अवस्था से ठोस अवस्था तथा द्रव अवस्था का गैसीय अवस्था में इसका रूपांतरण सरल है, जो जीवमंडल में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाता है। जल के अणु की बंकित संरचना के कारण अत्यध्िक ध््रुवीय प्रवृफति होती है, जिससे जल बपर्फ में सबसेज्यादा एवं जलवाष्प में सबसे कम हाइड्रोजन बंध्न के लिए उत्तरदायी है। जल ;कद्ध ध््रुवीय प्रवृफति के आधर पर यह आयनिकतथा आंश्िाक आयनिक यौगिकों में उत्तम विलायक के रूप में व्यवहार करता है ;खद्ध एक उभयध्मीर् ;अम्ल अथवा क्षारद्ध पदाथर् के रूप में व्यवहार करता है तथा ;गद्ध यह कइर् प्रकार के हाइड्रेट बनाता है। जल में अनेक लवणों की अध्िक मात्राघुलने से जल कठोर हो जाता है, जो व्यापारिक महत्त्व के लिए हानिकारक है। जल की अस्थायी तथा स्थायी कठोरता जीओलाइट और संश्लेष्िात आयन विनिमयकों का उपयोग करके दूर की जाती है। भारी जल क्व् एक अन्य महत्त्वपूणर् यौगिक है, जिसका निमार्ण साधरण जल के विद्युत् - अपघटन द्वारा किया जाता2 है। इसका उपयोग नाभ्िाकीय रिएक्टरों में मंदक के रूप में किया जाता है। हाइड्रोजन पराॅक्साइड भ्व् की असमतलीय संरचना होती है। इसका उपयोग औद्योगिक विरंजन, औषध्ि,22प्रदूषण - नियंत्राण, औद्योगिक तथा घरेलू बहिस्राव उपचार में बृहद् रूप से किया जाता है। 9.1 हाइड्रोजन के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के आधर पर आवतर् सारणी में इसकी स्िथति को युक्ितसंगत ठहराइए। 9.2 हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिख्िाए तथा बताइए कि इन समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात क्या है। 9.3 सामान्य परिस्िथतियों में हाइड्रोजन एक परमाण्िवक की अपेक्षा द्विपरमाण्िवक रूप में क्यों पाया जाता है? 9.4 ‘कोल गैसीकरण’ से प्राप्त डाइहाइड्रोजन का उत्पादन वैफसे बढ़ाया जा सकता है? 9.5 विद्युत् - अपघटन विध्ि द्वारा डाइहाइड्रोजन बृहद् स्तर पर किस प्रकार बनाइर् जा सकती है? इस प्रक्रम में वैद्युत - अपघट्य की क्या भूमिका है? 9.6 निम्नलिख्िात समीकरणों को पूरा कीजिएμ ;पद्ध भ्ह डव् े2 उव ;पपद्ध ब्व्ह ़भ् 2ह उत्प्रेरक ब्भ् ह 3भ्व्ह उत्पे;पपपद्ध 38 2 र्रक ऊष्मा ;पअद्ध र्दे छंव्भ्ंु 9.7 डाइहाड्रोजन की अभ्िावि्रफयाशीलता के पदों में भ्दृभ् बंध् की उच्च एन्थैल्पी के परिणामों की विवेचना कीजिए। 9.8 हाइड्रोजन के ;पद्ध इलेक्ट्राॅन न्यून, ;पपद्ध इलेक्ट्राॅन परिशु( तथा ;पपपद्ध इलेक्ट्राॅन समृ( यौगिकों से आप क्या समझते हैं? उदाहरणों द्वारा समझाइए। 9.9 संरचना एवं रासायनिक अभ्िावि्रफयाओं के आधर पर बताइए कि इलेक्ट्राॅन न्यून हाइड्राइड के कौन - कौन से अभ्िालक्षण होते हैं। 9.10 क्या आप आशा करते हैं कि ;ब्भ्द्ध काबर्निक हाइड्राइड लूइस अम्ल या क्षार की भाँति कायर्द 2द ़ 2करेंगे? अपने उत्तर को युक्ितसंगत ठहराइए। 9.11 अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड ;छवद ेजवबीपवउमजतपब ीलकतपकमद्ध से आप क्या समझते हैं? क्याआप क्षारीय धतुओं से ऐसे यौगिकों की आशा करते हैं? अपने उत्तर को न्यायसंगत ठहराइए। 9.12 हाइड्रोजन भंडारण के लिए धत्िवक हाइड्राइड किस प्रकार उपयोगी है? समझाइए। 9.13 कतर्न और वे¯ल्डग में परमाण्िवय हाइड्रोजन अथवा आॅक्सी हाइड्रोजन टाॅचर् किस प्रकार कायर् करती है? समझाइए। 9.14 छभ्ए भ्व् तथा भ्थ् में से किसका हाइड्रोजन बंध् का परिमाण उच्चतम अपेक्ष्िात है और क्यों?329.15 लवणीय हाइड्राइड जल के साथ प्रबल अभ्िावि्रफया करके आग उत्पÂ करती है। क्या इसमें ब्व् ;जो2एक सुपरिचित अग्िनशामक हैद्ध का उपयोग हम कर सकते हैं? समझाइए। 9.16 निम्नलिख्िात को व्यवस्िथत कीजिएμ ;पद्ध ब्ंभ्ए ठमभ्तथा ज्पभ् को उनकी बढ़ती हुइर् विद्युत्चालकता के व्रफम में।2 2 2;पपद्ध स्पभ्ए छंभ् तथा ब्ेभ् आयनिक गुण के बढ़ते हुए व्रफम में। ;पपपद्ध भ्दृभ्ए क्दृक् तथा थ्दृथ् को उनके बंध् - वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते हुए व्रफम में। ;पअद्ध छंभ्ए डहभ्तथा भ्व् को बढ़ते हुए अपचायक गुण के व्रफम में।2 29.17 भ्व् तथा भ्व् की संरचनाओं की तुलना कीजिए।2229.18 जल के स्वतः प्रोटोनीकरण से आप क्या समझते हैं? इसका क्या महत्त्व है? 9.19 थ् के साथ जल की अभ्िावि्रफया में आॅक्सीकरण तथा अपचयन के पदों पर विचार कीजिए एवं बताइए2कि कौन सी स्पीशीज़ आॅक्सीवृफत/अपचयित होती है। 9.20 निम्नलिख्िात अभ्िावि्रफयाओं को पूणर् कीजिएμ ;पद्ध ;द्ध़भ्व् 2 2 ;द्ध ंु →च्इै े ;पपद्ध डदव्घ् ; द्ध ़भ्व् ;द्ध ंु →ंु 4 22 ;पपपद्ध ;द्ध़भ्व् ह 2 ;द्ध →ब्ंव् े ।सब्स 3 ह ़भ्व् स →;पअद्ध ;द्ध 2 ;द्ध ;अद्ध ब्ं छ 2 ;द्ध़भ्व्स 3े 2 ;द्ध → उपरोक्त को ;कद्ध जल - अपघटन, ;खद्ध अपचयोपचय ;त्मकवगद्ध तथा ;गद्ध जलयोजन अभ्िावि्रफयाओं में वगीर्वृफत कीजिए। 9.21 बपर्फ के साधरण रूप की संरचना का उल्लेख कीजिए। 9.22 जल की अस्थायी एवं स्थायी कठोरता के क्या कारण हैं? वणर्न कीजिए। 9.23 संश्लेष्िात आयन विनिमयक विध्ि द्वारा कठोर जल के मृदुकरण के सि(ांत एवं विध्ि की विवेचना कीजिए। 9.24 जल के उभयध्मीर् स्वभाव को दशार्ने वाले रासायनिक समीकरण लिख्िाए। 9.25 हाइड्रोजन पराॅक्साइड के आॅक्सीकारक एवं अपचायक रूप को अभ्िावि्रफयाओं द्वारा समझाइए। 9.26 विखनिजित जल से क्या अभ्िावि्रफया है? यह वैफसे प्राप्त किया जा सकता है? 9.27 क्या विखनिजित या आसुत जल पेय - प्रयोजनों में उपयोगी है? यदि नहीं, तो इसे उपयोगी वैफसे बनाया जा सकता है? 9.28 जीवमंडल एवं जैव प्रणालियों में जल की उपादेयता को समझाइए। 9.29 जल का कौन सा गुण इसे विलायक के रूप में उपयोगी बनाता है? यह किस प्रकार के यौगिक - ;पद्ध घोल सकता है और ;पपद्ध जल - अपघटन कर सकता है? 9.30 भ्व् एवं क्व् के गुणों को जानते हुए क्या आप मानते हैं कि क्व् का उपयोग पेय - प्रयोजनों के222रूप में लाया जा सकता है? 9.31 ‘जल - अपघटन’ ;भ्लकतवसलेपेद्ध तथा ‘जलयोजन’ ;भ्लकतंजपवदद्ध पदों में क्या अंतर है? 9.32 लवणीय हाइड्राइड किस प्रकार काबर्निक यौगिकों से अति सूक्ष्म जल की मात्रा को हटा सकते हैं? 9.33 परमाणु व्रफमांक 15, 19, 23 तथा 44 वाले तत्व यदि डाइहाइड्रोजन से अभ्िावि्रफया कर हाइड्राइड बनाते हैं, तो उनकी प्रवृफति से आप क्या आशा करेंगे? जल के प्रति इनके व्यवहार की तुलना कीजिए। 9.34 जब ऐलुमिनियम ;प्प्प्द्ध क्लोराइड एवं पोटैश्िायम क्लोराइड को अलग - अलग ;पद्ध सामान्य जल, ;पपद्ध अम्लीय जल एवं ;पपपद्ध क्षारीय जल से अभ्िावृफत कराया जाएगा, तो आप किन - किन विभ्िाÂ उत्पादों की आशा करेंगे? जहाँ आवश्यक हो, वहाँ रासायनिक समीकरण दीजिए। 9.35 भ्व् विरंजन कारक के रूप में वैफसे व्यवहार करता है? लिख्िाए।229.36 निम्नलिख्िात पदों से आप क्या समझते हैं? ;पद्ध हाइड्रोजन अथर्व्यवस्था, ;पपद्ध हाइड्रोजनीकरण, ;पपपद्ध सिन्गैस, ;पअद्ध भाप अंगार गैस सृति अभ्िावि्रफया तथा ;अद्ध ईंध्न सेल।

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Rasayanbhag2-002

कक 9

हाइड्रोजन

Hydrogen

हाइड्रोजन ब्रह्मांड में अतिबहुल तत्व है। पृथ्वी की सतह पर अतिबहुलता के क्रम में यह तीसरे स्थान पर है। यह भविष्य में ऊर्जा के प्रमुख स्रोत के रूप में दृष्टिगोचर होता है।


उद्देश्य

इस एकक के अध्ययन के बाद आप–

  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन की स्थिति की ज्ञात धारणाओं को बता सकेंगे;
  • हाइड्रोजन के लघु तथा व्यापारिक स्तर पर बनाने की विधियों का तथा उनके समस्थानिकों का वर्णन कर सकेंगे;
  • डाइहाइड्रोजन किस प्रकार विभिन्न तत्वों से संयुक्त होकर आयनिक, आण्विक तथा अरसमीकरणमितीय यौगिकों को बनाती है, इसे समझ सकेंगे;
  • इसके गुणों की समझ के आधार पर उपयोगी पदार्थों तथा नयी तकनीकों के उत्पादन का वर्णन कर सकेंगे;
  • वातावरणीय जल की गुणवत्ता किस प्रकार विभिन्न विलेय पदार्थों पर निर्भर करती है, यह समझा सकेंगे। साथ ही कठोर और मृदु जल में अंतर कर सकेंगे तथा जल के मृदुकरण को समझ सकेंगे;
  • भारी जल और उसके महत्त्व के संबंध में ज्ञान अर्जित कर सकेंगे;
  • हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना समझ सकेंगे तथा इसे बनाने की विधियों और इसके गुणों के आधार पर उपयोगी रसायनों के उत्पादन तथा पर्यावरण की स्वच्छता को समझ सकेंगे;
  • इलेक्ट्रॉन-न्यून, इलेक्ट्रॉन-परिशुद्ध, इलेक्ट्रॉन- समृद्ध, हाइड्रोजनीकरण, हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था इत्यादि पदों को समझ सकेंगे तथा इनका उपयोग कर पाएँगे;
  • जल की संरचना के आधार पर उसके भौतिक तथा रासायनिक गुणों का वर्णन कर सकेंगे।

प्रकृति में समस्त ज्ञात तत्वों में हाइड्रोजन की परमाणु-संरचना सरलतम है। इसके परमाणु में एक प्रोट्रॉन तथा एक इलेक्टॉन होता है। तात्विक हाइड्रोजन का अस्तित्व द्विपरमाणुक H2 अणु के रूप में है, जिसे डाइहाइड्रोजन (H2) कहते हैं। क्या आप यह जानते हैं कि हाइड्रोजन अन्य तत्वों की तुलना में अधिक यौगिक बनाते हैं? हाइड्रोजन का उपयोग ऊर्जा-स्रोत के रूप में करके अत्यधिक स्तर तक सार्वभौमिक ऊर्जा की पूर्ति की जा सकती है। इस एकक में आप हाइड्रोजन के औद्योगिक महत्त्व के बारे में अध्ययन कर सकेंगे।

9.1 आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है, यद्यपि आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का उचित स्थान विवेचना का विषय रहा है। जैसा आप जानते हैं, आवर्त सारणी में तत्व इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर व्यवस्थित रहते हैं।

हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s1 है। एक तरफ इसका बाह्यतम इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्षार धातुओं (ns1) के समान होता है, जो आवर्त सारणी के प्रथम वर्ग से संबंधित है, जबकि दूसरी तरफ हैलोजनों की भाँति (ns2 np5 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के साथ आवर्त सारणी के सत्रहवें वर्ग से संबंधित है) जो संगत उत्कृष्ट गैस विन्यास से एक इलेक्ट्रॉन कम है। इस प्रकार हाइड्रोजन क्षार धातुओं से समानता दर्शाता है, जो एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर एकधनीय आयन बनाते हैं। साथ ही यह हैलोजन की भाँति एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर एकऋणीय आयन बनाता है। क्षार धातुओं के समान हाइड्रोजन, अॉक्साइड, हैलाइड एवं सल्फाइड बनाता है, यद्यपि सामान्य परिस्थितियों में इसकी क्षार धातुओं के विपरीत उच्च आयनन एन्थैल्पी होती है एवं धात्विक अभिलक्षण नहीं दर्शाता है। यथार्थ में आयनन ऊर्जा के पदों में हाइड्रोजन हैलोजन से अधिक समानता दर्शाता है। Li की iH 520 kJ mol–1, F की 1680 kJ mol–1 एवं H की 1312 kJ mol–1 । यह हैलोजेन के समान द्विपरमाणवीय अणु तथा विभिन्न तत्वों से संयुक्त होकर हाइड्राइड एवं बहुत से सहसंयोजी यौगिक बनाता है। क्रियाशीलता के आधार पर यह हैलोजनों की तुलना में कम सक्रिय है।

कुछ सीमा तक क्षार धातुओं एवं हैलोजनों से समानता दर्शाने के बावजूद उनसे असमानताएँ भी दर्शाता है। अब प्रासंगिक प्रश्न यह है कि इसे आवर्त सारणी में कहाँ रखा जाए? हाइड्रोजन से इलेक्ट्रॉन का परित्याग कर नाभिक (H+) देता है, जिसका आकार ~ 1.5 × 10–3 pm है, जो सामान्य परमाणवीय एवं आयनिक आकार 50 से 200 pm की तुलना में बहुत कम है। परिणामत: H+ स्वतंत्र अवस्था में नहीं मिलता है एवं दूसरे परमाणुओं या अणुओं से संयुक्त रहता है। अत: इसके अद्वितीय व्यवहार के कारण इसे आवर्त सारणी में अलग रखा गया है (एकक-3)।

9.2 डाइहाइड्रोजन (H2)

9.2.1 प्राप्ति

डाइहाइड्रोजन ब्रह्मांड में अतिबाहुल्य तत्व (ब्रह्मांड के संपूर्ण द्रव्यमान का 70 प्रतिशत) है तथा यह सौरवायुमंडल का प्रमुख तत्व है। बड़े ग्रहों–बृहस्पति (Jupiter) तथा शनि (Saturn) में अधिकांशत: हाइड्रोजन होती है, हालाँकि अपनी हलकी प्रकृति के कारण यह पृथ्वी के वायुमंडल में कम मात्रा (द्रव्यमानानुसार लगभग 0.15 प्रतिशत) में पाया जाती है। संयुक्त अवस्था में हाइड्रोजन तत्व भू-पर्पटी तथा महासागर में 15.4 प्रतिशत भाग का निर्माण करता है। संयुक्त अवस्था में जल के अतिरिक्त यह पादप तथा जंतु-ऊतकों, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, हाइड्राइड, हाइड्रोकार्बन और कई अन्य यौगिकों में पाया जाता है।

9.2.2 हाइड्रोजन के समस्थानिक

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक प्रोटियम (11H), ड्यूटीरियम (12H या D) तथा ट्राइटियम (13H या T) होते हैं। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ये समस्थानिक एक-दूसरे से कैसे भिन्न होते हैं? ये तीनों समस्थानिक से न्यूट्रॉन की संख्या के आधार पर एक-दूसरे भिन्न होते हैं। सामान्य हाइड्रोजन (प्रोटियम) में कोई न्यूट्रॉन नहीं है। ड्यूटीरियम (जिसे ‘भारी हाइड्रोजन’ भी कहा जाता है) में एक तथा ट्राइटियम के नाभिक में दो न्यूट्रॉन होते हैं। सन् 1934 में एक अमेरिकी वैज्ञानिक हेरॉल्ड सी. यूरे को भौतिक विधियों द्वारा 2 परमाणु द्रव्यमान वाले हाइड्रोजन के समस्थानिक का पृथक्करण करने पर नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

हाड्रोजन का प्रमुख समस्थानिक प्रोटियम है। ड्यूटीरियम लौकिक हाइड्रोजन में 0.0156 प्रतिशत तक मुख्यत: HD के रूप में निहित है। ट्राइटियम की सांद्रता लगभग 1018 प्रोटियम परमाणुओं में एक ट्राइटियम के परमाणु की है। इन समस्थानिकों में से केवल ट्राइटियम रेडियो सक्रिय (t1/2 = 12.33 वर्ष) है तथा न्यून ऊर्जा वाले β कणों को उत्सर्जित करता है।

चूँकि समस्थानिकों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण भी लगभग समान हैं। इनकी केवल अभिक्रिया की गति मुख्य रुप से अपने विभिन्न बंध-वियोजन एन्थैल्पी के कारण भिन्न होती है (सारणी 9.1) तथापि भौतिक गुणों में ये समस्थानिक परमाणु-भार में अंतर के कारण भिन्नता दर्शाते हैं।

9.3 डाइहाइड्रोजन बनाने की विधियाँ (H2)

धातुओं तथा धातु हाइड्राइडों से डाइहाइड्रोजन बनाने की अनेक विधियाँ हैं।

9.3.1 डाइहाइड्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि–

(i) सामान्यत: यह दानेदार जिंक की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से अभिक्रिया करके बनाई जाती है–

Zn(s) + 2H+(aq) Zn2+(aq) + H2(g)

(ii) यह जिंक धातु की जलीय क्षार के साथ अभिक्रिया करके भी बनाई जाती है–

Zn(s) + 2NaOH(aq) Na2ZnO2(aq) + H2(g)

सोडियम जिंकेट

9.3.2 डाइहाइड्रोजन का व्यापारिक उत्पादन

इसके लिए प्रयुक्त साधारण प्रक्रमों की रूपरेखा नीचे दी जा रही है–

(i) प्लैटिनम इलेक्ट्रॉड का उपयोग कर अम्लीय जल के विद्युत्-अपघटन से डाइहाइड्रोजन प्राप्त की जाती है।

9.1

(ii) अति शुद्ध हाइड्रोजन (> 99.95%) निकैल इलेक्ट्रोडों के बीच रखे गए बेरियम हाइड्रॉक्साइड के जलीय विलयन को गरम अवस्था में विद्युत्-अपघटन कराकर प्राप्त की जाती है।

(iii) ब्राइन विलयन के विद्युत्-अपघटन द्वारा क्लोरीन तथा सोडियम हाइड्रॉक्साइड के औद्योगिक निर्माण में डाइहाइड्रोजन उप-उत्पाद (by-product) के रूप में प्राप्त होता है। विद्युत्-अपघटन में होने वाली अभिक्रियाएँ हैं–

एनोड पर : 2 Cl(aq) Cl2(g) + 2e

कैथोड पर : 2H2O (l) 2e H2(g) + 2OH (aq)

कुल अभिक्रिया : 2Na+ (aq) + 2 Cl (aq) + 2H2O(l)  Cl2(g) + H2(g) + 2Na+ (aq) + 2OH है।

(iv) हाइड्रोकार्बन अथवा कोक की उच्च ताप पर एवं उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से अभिक्रिया कराने पर डाइहाइड्रोजन प्राप्त होती है।

9.2

उदाहरणस्वरूप-

9.3

CO एवं H2 के मिश्रण को वाटर गैस कहते हैं। CO एवं H2 का यह मिश्रण मेथेनॉल तथा अन्य कई हाइड्रोकार्बनों के संश्लेषण में काम आता है। अत: इसे ‘संश्लेषण गैस’ या ‘सिन्गैस’ (Syngas) भी कहते हैं। आजकल सिन्गैस वहितमल (Sewage waste), अखबार, लकड़ी का बुरादा, लकड़ी की छीलन आदि से प्राप्त की जाती है। कोल से सिन्गैस का उत्पादन करने की प्रक्रिया को ‘कोलगैसीकरण’ (Coal-gasification) कहते हैं

8.4

सिन्गैस में उपस्थित कार्बन मोनोअॉक्साइड को आयरन क्रोमेट उत्प्रेरक की उपस्थिति में भाप से क्रिया कराने पर डाइहाइड्रोजन का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है–

9.5

यह भाप ‘अंगार गैस सृति-अभिक्रिया’ (Water gas shift reaction) कहलाती है। वर्तमान में ~77 प्रतिशत डाइहाइड्रोजन का औद्योगिक उत्पादन शैल रसायनों (Petrochemicals), 18 प्रतिशत कोल, 4 प्रतिशत जलीय विलयनों के विद्युत्-अपघटन तथा 1 प्रतिशत उत्पादन अन्य स्रोतों से होता है।

9.4 डाइहाइड्रोजन के गुण

9.4.1 भौतिक गुण

डाइहाइड्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन दहनशील गैस होती है। यह वायु से हलकी तथा जल में अघुलनशील है। इनके तथा ड्यूटीरियम के अन्य भौतिक गुण सारणी 9.1 में दिए गए हैं।

9.4.2 रासायनिक गुण

डाइहाइड्रोजन अथवा (किसी भी अणु) का रासायनिक व्यवहार काफी हद तक बंध वियोजन एन्थैल्पी द्वारा निर्धारित किया जाता है। H–H बंध वियोजन एन्थैल्पी किसी तत्व के दो परमाणुओं के एकल बंध के लिए अधिकतम है। इस तथ्य से आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं? यह इस कारक के कारण है कि डाइहाइड्रोजन का इसके परमाणुओं में वियोजन केवल 2000 K के ऊपर लगभग 0.081 प्रतिशत ही होता है, जो 5000 K पर बढ़कर 95.5 प्रतिशत तक पहुँच जाता है। उच्च H–H बंध एन्थैल्पी के कारण कक्ष ताप पर डाइहाइड्रोजन अपेक्षाकृत निष्क्रिय है। अत: विद्युत् आर्क या पराबैंगनी विकिरणों द्वारा परमाण्विक हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है। चूँकि इसका एक कक्षक 1s1 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के साथ अपूर्ण है, अत: यह लगभग सभी तत्वों के साथ संयोग करता है। डाइहाइड्रोजन अभिक्रियाओं में– (i) एक इलेक्ट्रॉन का परित्याग कर H+ देता है। (ii) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके H आयन बनाता है। (iii) इलेक्ट्रॉन का साझा करके एकल सहसंयोजक बंध बनाता है।

9.6

हैलोजन के साथ अभिक्रिया : डाइहाइड्रोजन हैलोजेन के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन हैलाइड देते हैं–

9.7

फलुओरीन की अभिक्रिया अँधेरे में भी हो सकती है। आयोडीन के साथ उत्प्रेरक की आवश्यकता पड़ती है।

डाइअॉक्सीजन के साथ अभिक्रिया : यह डाइअॉक्सीजन के साथ अभिक्रिया करके जल बनाता है। यह अभिक्रिया प्रबल ऊष्माक्षेपी (Exothermic) है-

9.8

डाइनाइट्रोजन के साथ अभिक्रिया : डाइनाइट्रोजन के साथ अभिक्रिया करके अमोनिया बनाती है-

9.9

अमोनिया को व्यापारिक मात्रा में इस विधि से हाबर प्रक्रम द्वारा बनाया जाता है।

धातुओं के साथ क्रिया : डाइहाइड्रोजन उच्च ताप पर कई धातुओं के साथ क्रिया करके संगत हाइड्राइड देता है (अनुभाग 9.5)।

H2(g) +2M(g) 2MH(s); जहाँ M क्षारीय धातु है।

धातु आयन तथा धातु अॉक्साइड के साथ अभिक्रिया : डाइहाइड्रोजन कुछ धातु आयनों को जलीय विलयन तथा उनके धातु (आयरन से कम क्रियाशील) अॉक्साइड से अभिक्रिया करके संगत धातुओं में अपचयित कर देती है–

9.10

कार्बनिक यौगिकों के साथ अभिक्रिया : उत्प्रेरकाें की उपस्थिति में डाइहाइड्रोजन कार्बनिक यौगिकों से अभिक्रिया करके कई महत्त्वपूर्ण औद्योगिक हाइड्रोजनीकृत उत्पाद बनाती है। उदाहरणार्थ–

(i) वनस्पति तेलों को निकैल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजनीकरण कराने पर खाद्य वसा (मार्गेरीन तथा वनस्पति घी) प्राप्त होता है।

(ii) ओलिफीन का हाइड्रोफॅार्मिलीकरण कराने पर एेल्डिहाइड प्राप्त होता है, जो आगे एल्कोहॉल में अपचयित हो जाता है–

9.11

उदाहरण 9.1

निम्नलिखित से डाइहाइड्रोजन की अभिक्रिया पर टिप्पणी कीजिए-

(i)क्लोरीन (ii) सोडियम (iii)कॉपर (II) अॉक्साइड

हल

(i) डाइहाइड्रोजन क्लोरीन को क्लोराइड (Cl) आयन में अपचयित करती है तथा स्वयं क्लोरीन द्वारा अॉक्सीकृत होकर हाइड्रोजन आयन (H+) हाइड्रोक्लोराइड के रूप में बनाती है। H एवं Cl के मध्य एक इलेक्ट्रॉन युग्म का साझा होकर एक सहसंयोजक अणु बनता है।

(ii) डाइहाइड्रोजन सोडियम के द्वारा अपचयित होकर सोडियम हाइड्राइड बनाता है। एक इलेक्ट्रॉन सोडियम से हाइड्रोजन पर स्थानांतरित होकर आयनिक Na+ H का निर्माण करता है।

(iii) डाइहाइड्रोजन कॉपर (II) अॉक्साइड को कॉपर की शून्य अॉक्सीकरण अवस्था में अपचयित कर देती है और स्वयं जल, जो एक सहसंयोजक अणु है, में अॉक्सीकृत हो जाती है।

9.4.3 डाइहाइड्रोजन के अनुप्रयोग

  • डाइहाइड्रोजन का एकल बृहद् अनुप्रयोग अमोनिया के संश्लेषण में होता है, जो नाइट्रिक अम्ल तथा नाइट्रोजनी उर्वरक उत्पादन में काम आता है।
  • डाइहाइड्रोजन का उपयोग बहुअसंतृप्त वनस्पति तेलों (जैसे– सोयाबीन, बिनौला आदि) से वनस्पति वसा के उत्पादन में होता है।
  • डाइहाइड्रोजन का उपयोग अनेक कार्बनिक रसायनों, मुख्यत: मेथेनॉल के उत्पादन में होता है–9.12
  • डाइहाइड्रोजन का उपयोग धात्विक हाइड्राइड के निर्माण में होता है। (खण्ड-9.5)
  • डाइहाइड्रोजन का उपयोग अति उपयोगी रसायन (जैसे– हाइड्रोजन क्लोराइड) के निर्माण में होता है।
  • धातुकर्म प्रक्रमों में डाइहाइड्रोजन का उपयोग भारी धातु अॉक्साइडों को धातु में अपचयित करने में होता है।
  • परमाण्विक हाइड्रोजन तथा अॉक्सी-हाइड्रोजन टॉर्च का उपयोग कर्तन तथा वेल्डिंग में होता है। परमाण्विक हाइड्रोजन परमाणु (जो विद्युत् आर्क की सहायता से डाइहाइड्रोजन के वियोजन से बनते हैं) का पुनर्संयोग वेल्डिंग की जाने वाली धातुओं की सतह पर लगभग 4000 K तक ताप पैदा कर देता है।
  • डाइहाइड्रोजन का उपयोग अंतरिक्ष अनुसंधान में रॉकेट ईंधन के रूप में किया जाता है।
  • डाइहाड्रोजन का उपयोग ईंधन सेलों में विद्युत् उत्पादन के लिए किया जाता है। परंपरागत जीवाश्मी ईंधन और विद्युत् शक्ति की तुलना में हाइहाड्रोजन का प्रयोग ईंधन के रूप में करने से अनेक लाभ होते हैं। यह ईंधन प्रदूषण मुक्त है और पेट्रोल तथा अन्य ईंधन की तुलना में इकाई द्रव्यमान से अधिक ऊर्जा मुक्त करता है।

9.5 हाइड्राइड

डाइहाइड्रोजन निश्चित परिस्थितियों में उत्कृष्ट गैसों के अलावा लगभग सभी तत्वों के साथ संयोग करके द्विअंगी यौगिक बनाती हैं, जिन्हें हाइड्राइड कहते हैं। अगर E किसी तत्व का प्रतीक है, तो हाइड्राइड को EHX (उदाहरणस्वरूप- MgH2) या EmHn, (उदाहरणस्वरूप- B2H6) द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

हाइड्राइडों को तीन विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है

(i) आयनिक या लवणीय या लवण-समान हाइड्राइड (Saline Hydride)

(ii) सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड (Molecular Hydride)

(iii) धात्विक या अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड (Non-stoichometric Hydride)

9.5.1 आयनिक या लवणीय हाइड्राइड

s ब्लॉक के अधिकांश तत्व, जो उच्च विद्युत् धनीय प्रकृति के होते हैं, डाइहाइड्रोजन के साथ रससमीकरणमितीय यौगिक बनाते हैं। यद्यपि हलके धात्विक हाइड्राइड (जैसे LiH, BeH2 तथा MgH2) में सार्थक सहसंयोजक गुण पाया जाता है। वस्तुत: LiH, BeH2 तथा MgH2 में सहसंयोजी बहुलक (Polymeric) संरचना होती है। आयनिक हाइड्राइड ठोस अवस्था में क्रिस्टलीय, अवाष्पशील तथा ठोस अवस्था में अचालक होते हैं, तथापि क्षार-धातुओं के गलित हाइड्राइड विद्युत् का चालन करते हैं और विद्युत्-अपघटन द्वारा डाइहाइड्रोजन एनोड पर मुक्त होती है, जो हाइड्राइड H आयन के अस्तित्व की पुष्टि करता है।

9.13

लवणीय हाइड्राइड जल के साथ विस्फोटीय रूप से अभिक्रिया करके डाइहाइड्रोजन गैस देते हैं–

9.14

लिथियम हाइड्रइड साधारण ताप पर O2 एवं Cl2 के साथ अक्रियाशील है। अत: इसका उपयोग अन्य उपयोगी हाइड्राइड बनाने में किया जाता है। उदाहरणस्वरूप–

8LiH + Al2Cl6 2LiAlH4 + 6LiCl

2LiH + B2H6 2LiBH4

9.5.2 सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड

डाइहाइड्रोजन अधिकांश pब्लॉक के तत्वों के साथ संयुक्त होकर आण्विक यौगिक बनाती है। इसके कुछ सुपरिचित उदाहरण CH4, NH3, H2O तथा HF हैं। सुविधा के लिए अधातुओं के हाइड्रोजन यौगिकों को भी हाइड्राइड माना गया है। सहसंयोजक होने के कारण ये वाष्पशील यौगिक हैं।

आण्विक हाइड्राइड का पुन: वर्गीकरण उनके लूइस संरचना (Lewis structure) में आपेक्षिक इलेक्ट्रॉन की संख्या तथा आबंधों की संख्या पर किया गया है–

(i) इलेक्ट्रॉन न्यून (Electron-defecient)

(ii) इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध (Electron-precise)

(iii) इलेक्ट्रॉन समृद्ध (Electron-rich)

इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड, जैसा नाम से पता चलता है, परंपरागत लूइस-संरचना लिखने के लिए इनमें इलेक्ट्रॉन की संख्या अपर्याप्त होती है। इसका उदाहरण डाइबोरेन (B2H6) है। वस्तुत: आवर्त सारणी के 13वें वर्ग के सभी तत्व इलेक्ट्रॉन न्यून यौगिक बनाते हैं। आप इनके व्यवहार से क्या अपेक्षा रखते हैं? ये लूइस अम्ल की भाँति कार्य करते हैं। ये इलेक्ट्रॉनग्राही होते हैं।

इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड में परंपरागत लूइस-संरचना के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन की संख्या होती है। आवर्त सारणी के 14वें वर्ग के सभी तत्व इस प्रकार के यौगिक (जैसे– CH4) बनाते हैं, जो चतुष्फलकीय ज्यामिति के होते हैं।

इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड इलेक्ट्रॉन आधिक्य एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म के रूप में उपस्थित होते हैं। आवर्त सारणी के 15वें से 17वें वर्ग तक के तत्व इस प्रकार के यौगिक बनाते हैं– (NH3 में एकांकी युग्म, H2O में दो तथा HF में तीन एकांकी युग्म होते हैं)। आप इनके व्यवहार से क्या अपेक्षा रखते हैं? ये लूइस क्षार के रूप में व्यवहार करते हैं। ये इलेक्ट्रॉनदाता होते हैं। उच्च विद्युत्-ऋणात्मकता वाले परमाणु, जैसे– नाइट्रोजन, अॉक्सीजन तथा फ्लूओरीन के हाइड्राइड पर एकांकी इलेक्ट्रॉन युग्म होने के कारण अणुओं में हाइड्रोजन बंध बनता है, जिनके कारण अणुओं में संगुणन होता है।

उदाहरण 9.2

क्या आप यह अपेक्षा करते हैं कि N,O तथा F के हाइड्रइडों के क्वथनांक उनके वर्ग के संगत सदस्यों के हाइड्राइडों से निम्न होते हैं? कारण बताइए।

हल

NH3, H2O तथा HF के आण्विक भारों के आधार पर इनके क्वथनांक संगत सदस्यों के हाइड्राइडों से कम होने चाहिए, परंतु N,O,F की उच्च विद्युत्ऋणता के कारण हाइड्राइडों में हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता उल्लेखनीय है। अत: NH3, H2O तथा HF के क्वथनांक उनके वर्ग के सदस्यों से उच्च होते हैं।

9.5.3 धात्विक या अरसमीकरणमितीय (या अंतराकाशी) हाइड्राइड

ये अधिकांश d-ब्लॉक तथा f-ब्लॉक के तत्वों से बनते हैं, हालाँकि सातवें, आठवें तथा नौवें वर्ग की धातुएँ इस प्रकार के हाइड्राइड नहीं बनाती है, छठे वर्ग में केवल क्रोमियम ही CrH हाइड्राइड बनाता है। इस प्रकार के हाइड्राइड ऊष्मा एवं विद्युत् का चालन करते हैं, किंतु उनकी चालकता जनक धातु की तरह कार्यक्षम नहीं हैं। हाइड्रोजन की न्यूनता के कारण लवणीय हाइड्राइड के विषम ये हमेशा अरससमीकरणमितीय होते हैं। उदाहरणस्वरूप- LaH2.87, YbH2.55, TiH1.5-1.8, ZrH1.3-1.75, VH0.56, NiH0.6-0.7, PdH0.6-0.8 आदि। एेसे हाइड्राइड्रो में स्थित संगठन का नियम लागू नहीं होता है।

पूर्व में यह सोचा जाता था कि इन हाइड्राइडों के धातु-जालक में हाइड्रोजन अंतराकाशी स्थिति ग्रहण करते हैं, जिससे इनमें बिना किसी परिवर्तन की विकृति उत्पन्न होती है। फलत: इन्हें ‘अंतराकाशी हाइड्राइड’ कहा गया, यद्यपि बाद में अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि Ni, Pd, Ce एवं Ac के हाइड्राइड को छोड़कर इस वर्ग के अन्य हाइड्राइड अपने जनक धातु की तुलना में भिन्न जालक रखते हैं। संक्रमण धातुओं पर हाइड्रोजन के अवशोषण के गुण को उत्प्रेरकीय अपचयन अथवा हाइड्रोजनीकरण अभिक्रियाओं द्वारा अनेक यौगिक बनाने में बृहद् रूप से प्रयुक्त होता है। कुछ धातुएँ (जैसे- Pd एवं Pt) हाइड्रोजन के बृहद् आयतन को समायोजित कर सकती हैं। अत: इन्हें भंडारण-माध्यम के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। हाइड्रोजन भंडारण एवं ऊर्जा-स्रोत के रूप में इस गुण के प्रयोग की प्रबल संभावना है।

उदाहरण 9.3

क्या फॉस्फोरस बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 3s23p3 के आधार पर PH5 बनाएगा?

हल

यद्यपि फॉस्फोरस +3 तथा +5 अॉक्सीकरण अवस्था दर्शाता है, तथापि यह PH5 नहीं बनाता है। कुछ अन्य तथ्यों के अतिरिक्त डाइहाइड्रोजन के उच्च a तथा egH मान P को सर्वोच्च अॉक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने तथा फलस्वरूप pH5 के विरचन का समर्थन नहीं करते।

9.6 जल

सभी सजीवों का एक बृहद् भाग जल द्वारा निर्मित है। मानव शरीर में लगभग 65 प्रतिशत एवं कुछ पौधों में लगभग 95 प्रतिशत जल होता है। जीवों को जीवित रखने के लिए जल एक महत्त्वपूर्ण यौगिक है। यह एक अतिमहत्त्वपूर्ण विलायक है। पृथ्वी की सतह पर जल का वितरण एक समान नहीं है। विश्व की आकलित जल-आपूर्ति सारणी 9.2 में दी गई है–

सारणी 9.2 विश्व की आकलित जल-आपूर्ति

स्रोत
संपूर्ण % मात्रा
महासागर (Oceans)
97.33
खारी झील (Saline lakes)  तथा अंत:स्थलीय समुद्र (Inland sea) 0.008
ध्रुवीय बर्फ (Polar ice) तथा हिमानी  (Glaciers)  2.04
भौम जल (Ground water) 0.61
झील (Lakes)
0.009
मृदा-आर्द्रता (Soil moisture)
0.005
वायुमंडलीय जलवाष्प (Atomospheric  water vapour)
0.001
नदियाँ (River)  0.0001

9.6.1 जल के भौतिक गुण

यह एक रंगहीन तथा स्वादहीन द्रव है। जल (H2O) तथा भारी जल (D2O) के भौतिक गुण सारणी 9.3 में दिए गए हैं। 

संघनित प्रावस्था (द्रव तथा ठोस अवस्था) में जल के असामान्य गुणों का कारण जल के अणुओं के बीच विस्तृत हाइड्रोजन बंधन का होना है। इसी वर्ग के अन्य तत्वों के हाइड्राइड H2S तथा H2Se की तुलना में जल का उच्चहिमांक, उच्च क्वथनांक, उच्च वाष्पन ऊष्मा, उच्च संलयन ऊष्मा का कारण हाइड्रोजन-बंधन का होना है। अन्य द्रवों की तुलना में जल की विशिष्ट ऊष्मा, तापीय चालकता, पृष्ठ-तनाव, द्विध्रुव आघूर्ण तथा परावैद्युतांक के मान उच्च होते हैं। इन्हीं गुणों के कारण जीवमंडल में जल की महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

जल की उच्च वाष्पन ऊष्मा तथा उच्च ऊष्माधारिता ही जीवों के शरीर तथा जलवायु के सामान्य ताप को बनाए रखने के लिए उत्तरदायी है। वनस्पतियों एवं प्राणियों के उपापचय (Metabolism) में अणुओं के अभिगमन के लिए जल एक उत्तम विलायक का कार्य करता है। जल ध्रुवीय अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बनाता है, जिससे सहसंयोजक यौगिक,जैसे– एेल्कोहॉल तथा कार्बोहाइड्रेट यौगिक जल में विलेय होते हैं।

9.6.2 जल की संरचना

गैस-प्रावस्था में जल एक बंकित अणु है। आबंध कोण तथा O–H आबंध दूरी के मान क्रमश: 104.5° तथा 95.7 pm हैं, जैसा चित्र 9.1 (क) में प्रदर्शित किया गया है। अत्यधिक ध्रुवित अणु चित्र 9.1 (ख) में तथा चित्र 9.1 (ग) में जल के अणु में आर्बिटल अतिव्यापन दर्शाया गया है।


चित्र 9.1 (क) जल की बंकित संरचना (ख) जल अणु द्विध्रुव के रूप में और (ग) जल के अणु में आर्बिटल अतिव्यापन

9.15

जल का क्रिस्टलीय प्रारूप बर्फ है। वायुमंडलीय दाब पर बर्फ का क्रिस्टलीकरण षट्कोणीय आकृति के रूप में होता है। परंतु न्यून ताप पर इसका संघनन घनीय आकृति के रूप में होता है। बर्फ का घनत्व जल से कम होता है। फलत: बर्फ का टुकड़ा जल में तैरता रहता है। शीतकाल में झीलों में पानी की सतह पर जमी बर्फ की सतह ऊष्मारोधन (Thermal insulation) प्रदान करती है, जिससे जलीय जीवन सुरक्षित रहता है। यह तथ्य पारिस्थितिकी (Eological) दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है।

9.6.3 बर्फ की संरचना

बर्फ एक अतिव्यवस्थित त्रिविम हाइड्रोजन आबंधित संरचना (Highly ordered three dimensional hydrogen bonded structure) है, जिसे चित्र 9.2 में दर्शाया गया है।

X-किरणों द्वारा परीक्षण से पता चला है कि बर्फ क्रिस्टल में अॉक्सीजन परमाणु चार अन्य हाइड्रोजन परमाणुओं से 276 pm दूरी पर चतुष्फलकीय रूप से घिरा रहता है।

हाइड्रोजन आबंध बर्फ में बृहद छिद्रयुक्त एक प्रकार की खुली संरचना बनाते हैं। ये छिद्र उपयुक्त आकार के कुछ दूसरे अणुओं को अंतराकाश में ग्रहण कर सकते हैं।


चित्र 9.2 बर्फ की संरचना

9.6.4 जल के रासायनिक गुण

जल अनेक पदार्थों के साथ अभिक्रिया करता है। कुछ महत्त्वपूर्ण अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं–

(1) उभयधर्मी प्रकृति : जल अम्ल तथा क्षार-दोनों रूपों में व्यवहार करता है। अत: यह उभयधर्मी है। ब्रांस्टेड
अवधारणा के संदर्भ में जल
NH3 के साथ अम्ल के रूप में तथा H2S के साथ क्षार के रूप में कार्य करता है–

9.16

जल के स्वत: प्रोटोअपघटन (स्वत: आयनन) को निम्नलिखित रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है–

9.17

(2) जल की अपोपचयन अभिक्रिया : उच्च विद्युत् धनीय धातुओं द्वारा जल आसानी से डाइहाइड्रोजन में अपचयित हो जाता है–

9.18

अत: यह अभिक्रिया हाइड्रोजन के प्रमुख स्रोत के रूप में उपयोगी है।

प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में जल O2 में अॉक्सीकृत होता है।

6CO2(g) + 12H2O(l) C6H12O6 (aq) + 6H2O(l) + 6O2(g)

फ्लुओरीन द्वारा भी H2O का अॉक्सीजन में अॉक्सीकरण होता है–

9.19

(3) जल-अपघटन अभिक्रिया : जल का परावैद्युतांक उच्च होने के कारण इसमें प्रबल जलयोजन गुण पाया जाता है। यह अनेक आयनिक यौगिक को घोलने में सक्षम है। फलस्वरुप कुछ आयनिक तथा सहसंयोजी यौगिकों का जल-अपघटन हो जाता है–

9.20

(4) हाइड्रेट-विरचन : जलीय विलयन से अनेक लवण जलयोजित लवण के रूप में क्रिस्टलीकृत किए जा सकते हैं। जल का संगुणन विभिन्न प्रकार से होता है–

(i) उपसहसंयोजित जल

(उदाहरणस्वरूप 9.21

(ii) अंतराकाशीय जल

(उदाहरणस्वरूप)9.22

(iii) हाइड्रोजन आबंधी जल

(उदाहरणस्वरूप 9.23 में 9.24

उदाहरण 9.4

CuSO4, 5H2O में कितने जल-अणु हाइड्रोजन बंध द्वारा संगुणित हैं?

हल

केवल जल का एक अणु, जो बड़े कोष्ठक के बाहर (सहसंयोजन क्षेत्र) है, हाइड्रोजन बंध द्वारा संगुणित है। जल के शेष चार अणु उपसहसंयोजित हैं।

9.6.5 कठोर एवं मृदु जल

सामान्यत: वर्षा का जल लगभग शुद्ध होता है। (वायुमंडल की कुछ विलयशील गैसें घुली हो सकती हैं)। जब जल पृथ्वी की सतह पर बहता है, तब इसका अस्तित्व उत्तम विलायक के रूप में होता है। यह कई लवणों को घोल लेता है। जल में उपस्थित विलयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण, (जो हाइड्रोजन कार्बोनेट, क्लोराइड तथा सल्फेट के रूप में रहते हैं) उसकी कठोरता के कारण होते हैं। कठोर जल साबुन के साथ आसानी से झाग नहीं देता है। विलयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम लवण से मुक्त जल को ‘मृदु जल’ (Soft water) कहते हैं। मृदु जल साबुन के साथ आसानी से झाग देता है।

कठोर जल साबुन के साथ मलफेन/अवक्षेप देता है। साबुन, जिसमें सोडियम स्टीअरेट (C17H35COONa) होता है, कठोर जल के साथ अभिक्रिया करके Ca/Mg स्टीअरेट के रूप में अवक्षेपित हो जाता है–

9.25

अत: कठोर जल धुलाई के लिए उपयुक्त नहीं है। यह भाप क्वथित्र (Steam boiler) के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि पपड़ी के रूप में इसमें लवण जम जाते हैं, जिससे भाप क्वथित्र की दक्षता में कमी आ जाती है। जल की कठोरता दो प्रकार की होती है–

(i) अस्थायी कठोरता

(ii) स्थायी कठोरता

9.6.6 अस्थायी कठोरता

अस्थायी कठोरता जल में कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के हाइड्रोजन कार्बोनेट की उपस्थिति के कारण होती है। जल की अस्थायी कठोरता निम्नलिखित विधियों द्वारा दूर की जाती है–

(i) उबालना : उबालने की प्रक्रिया में Mg(HCO3)2 एवं Ca (HCO3)2 के विलयशील लवण क्रमश: अविलयशील Mg(OH)2 तथा CaCO3 में परिवर्तित हो जाते हैं। MgCO3 की तुलना में Mg(OH2) का विलेयता-गुणनफल उच्च होता है, अत: Mg(HO)2 अवक्षेपित हो जाता है। इस अवक्षेप को छानकर अलग कर लिया जाता है। प्राप्त छनित ही मृदु जल है।

9.26

(ii) क्लार्क विधि (Clark's method) : इस विधि में बुझे चूने की परिकलित मात्रा को कठोर जल में मिला दिया जाता है। फलत: कैल्सियम कार्बोनेट तथा मैग्नेशियम हाइड्रॉक्साइड अवक्षेपित हो जाता है। उसे छानकर अलग कर लिया जाता है।

9.27

9.6.7 स्थायी कठोरता

इस प्रकार की कठोरता जल में विलयशील कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के क्लोराइड तथा सल्फेट के रूप में घुले रहने के कारण होती है। यह (स्थायी कठोरता) उबालने से दूर नहीं की जा सकती है।

इसे निम्नलिखित विधियों द्वारा दूर किया जा सकता है-

(i) धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट) के उपचार से : धावन सोडा कठोर जल में विलयशील कैल्सियम एवं मैग्नीशियम क्लोराइड तथा सल्फेट के साथ क्रिया करके अविलयशील कार्बोनेट बनाता है।

9.28

(ii) केलगॉन विधि–सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट [Sodium hexametaphosphate, Na6P6O18] को व्यापारिक रूप में ‘केलगॉन’ कहते हैं। जब यह कठोर जल में मिलाया जाता है, तब निम्नलिखित अभिक्रिया देता है–

9.29

यह ऋणायन संकुल Mg2+ एवं Ca2+  आयन को विलयन में रखता है।            

(iii) आयन विनिमय विधि (Ion exchange method) : इस विधि को ‘जीओलाइट/परम्यूटिट विधि’ भी कहते हैं। जलयुक्त सोडियम एेलुमीनोसिलिकेट (NaAISiO4.3H2O)जीओलाइट/परम्यूटिट (Permuitit) कहलाता है। सरलता के लिए सोडियम एेलुमीनियम सिलिकेट को NaZ भी लिख सकते हैं। कठोर जल में इसके मिलाने पर निम्नलिखित विनिमय अभिक्रिया होती है–

3.0

परम्यूटिट/ जीओलाइट में से जब सारा सोडियम पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है, तब जलीय सोडियम क्लारोइड विलयन द्वारा उपचार कराकर इनका पुन: प्रयोग करने के लिए पुनर्जनन (Regenerated) कर लिया जाता है–

9.30

(iv) संश्लेषित रेजिन (Resin) विधि : आजकल कठोर जल का मृदुकरण मुख्य रूप से संश्लेषित धनायन विनिमयक द्वारा किया जाता है। यह विधि जीओलाइट की तुलना में अधिक दक्ष है। धनायन विनिमयक रेजिन –SO3H समूहयुक्त बृहद् कार्बनिक अणु होते हैं तथा जल में अविलेय होते हैं। आयन विनियम रेजिन (R–SO3H) को NaCl से उपचार करके
R–Na में परिवर्तित किया जाता है। रेजन Na+ आयन का जल में उपस्थित Ca2+ एवं Mg2+ आयन से विनिमय करके कठोर जल को मृदु बना देता है, जहाँ (R = रेजिन ऋणायन है)–

9.31

रेजिन का पुनर्जनन (Regeneration) सोडियम क्लोराइड विलयन मिलाकर किया जाता है।

जल को उत्तरोत्तर (Successively) धनायन-विनिमयक (H+ आयन के रूप में) तथा ऋणायन-विनिमयक (OH– के रूप में) रेजिन से प्रवाहित करने पर शुद्ध विखनिजित (Demineralised) तथा विआयनित (Deionised) जल प्राप्त किया जाता है–

9.32

धनायन विनिमय के इस प्रक्रम में, H+ का विनिमय जल में उपस्थित Na+, Ca2+, Mg2+ एवं अन्य धनायनों द्वारा हो जाता है। फलत: प्रोटान का निष्कासन होता है तथा जल अम्लीय हो जाता है।

ऋण आयन विनिमय के दूसरे प्रक्रम में

9.33

OH– का विनिमय जल में उपस्थित ऋणायन (जैसे– Cl, HCO3, SO42–) द्वारा होता है। इस प्रकार मुक्त OH– आयन धनायन विनिमय से मुक्त H+ आयन से अभिक्रिया करके जल को उदासीन कर देता है।

9.34

धनायन तथा ऋणायन विनिमयकों के रेजिन तल (Resin bed) का उपयोग जब पूर्ण रूप से हो जाता है, तब इन्हें क्रमश: तनु अम्ल तथा तनु क्षारक विलयनों से अभिक्रिया कराकर पुनर्जनित कर लिया जाता है।


9.7 हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2)

हाइड्रोजन परॉक्साइड एक महत्त्वपूर्ण रसायन है, जो पर्यावरण- नियंत्रण में घरेलू तथा औद्योगिक बहि:स्राव (Effluents) के उपचार के रूप में काम आता है।

9.7.1 बनाने की विधियाँ

यह निम्नलिखित विधियों द्वारा बनाया जा सकता है–

(i) बेरियम परॉक्साइड को अम्लीकृत करके तथा जल की आधिक्य मात्रा को कम दाब पर वाष्पीकृत करके हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त किया जाता है–

9.35

(ii) उच्च धारा घनत्व पर अम्लीकृत सल्फेट विलयन के विद्युत्-अपघटनी अॉक्सीकरण से प्राप्त परॉक्साइड सल्फेट के जल-अपघटन से हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त किया जाता है।

9.36

अब यह विधि प्रयोगशाला में (D2O2) बनाने के काम में आती है।

9.37

(iii) हाइड्रोजन परॉक्साइड का औद्योगिक उत्पादन 2-एल्किलएेन्थ्राक्विनॉल (2-alkylanthraquinol) के स्वत: अॉक्सीकरण द्वारा किया जाता है।

9.38

इस विधि से प्राप्त (~1प्रतिशत) हाइड्रोजन परॉक्साइड का निष्कर्षण जल द्वारा कर लिया जाता है। तत्पश्चात् कम दाब पर इसका आसवन कराकर हाइड्रोजन परॉक्साइड का सांद्रण (द्रव्यमानानुसार 30 प्रतिशत) तक कर लिया जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड के 85 प्रतिशत तक सांद्रण हेतु कम दाब पर विलयन का आसवन सावधानीपूर्वक कराकर किया जाता है। अवशेष को हिमशीतित (Frozen) करके शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड प्राप्त की जाती है।

9.7.2 भौतिक गुण

शुद्ध अवस्था में हाइड्रोजन परॉक्साइड लगभग रंगहीन (अति हलका नीला) द्रव है। इसके मुख्य भौतिक गुण सारणी 9.4 में दिए गए हैं।

हाइड्रोजन परॉक्साइड जल के प्रत्येक अनुपात के साथ मिश्रणीय है। यह हाइड्रेट H2O2.H2O (क्वथनांक 221K) बना लेता है। बाजार में उपलब्ध 30 प्रतिशत सांद्रता वाले हाइड्रोजन परॉक्साइड विलयन की आयतन सांद्रता (Volume strength) ‘100 आयतन’ होती है। ‘100 आयतन’ H2O2 सांद्रता से अभिप्राय यह है कि 1mL H2O2 विलयन के पूर्ण अपघटन के फलस्वरूप मानक ताप तथा दाब पर 100 mL अॉक्सीजन मुक्त होती है। बाजार में यह ‘10 आयतन’ के रूप में बेचा जाता है, अर्थात् इसकी सांद्रता 3 प्रतिशत होती है।

उदाहरण 9.5

10 आयतन H2O2 विलयन की सामर्थ्य परिकलित करें।

हल

H2O2 के ‘10 आयतन विलयन’ का अर्थ है कि H2O2 के इस विलयन का 1 लिटर मानक ताप एवं दाब पर 10 लिटर अॉक्सीजन देगा–

9.39

उपरोक्त समीकरण के आधार पर 68 ग्राम H2O2 से मानक ताप एवं दाब पर 22.7 L O2 प्राप्त होगी। मानक ताप एवं दाब पर 10L लिटर O2 उत्पन्न करने के लिए H2O2 आवश्यक मात्रा होगी–

9.40

अत: 10 आयतन H2O2 की सामर्थ्य = 30.0 g/L है।

यानी 3% H2O2 विलयन है।

9.7.3 संरचना

हाइड्रोजन परॉक्साइड की संरचना असमतलीय होती है। गैसीय प्रावस्था तथा ठोस प्रावस्था में इसकी आण्विक संरचना को चित्र 9.3 में दर्शाया गया है।

चित्र 9.3 (क) गैसीय प्रावस्था में H2O2 की संरचना द्वितल कोण 111.5° है।

(ख) ठोस प्रावस्था में 110 K ताप पर H2O2 की संरचना द्वितल कोण 90.2° है।

9.7.4 रासायनिक गुण

अम्लीय तथा क्षारीय–दोनों माध्यम में हाइड्रोजन परॉक्साइड अपचायक तथा अॉक्सीकारक, दोनों कार्य करता है। कुछ सरल अभिक्रियाओं का वर्णन नीचे किया जा रहा है–

9.41

(i) अम्लीय माध्यम में H2O2 अॉक्सीकारक के रूप में–                   

9.42

(ii) अम्लीय माध्यम में H2O2 अपचायक के रूप में–

9.43

(iii) क्षारीय माध्यम में H2Oअॉक्सीकारक के रूप में– 

9.44

(iv) क्षारीय माध्यम में H2O2  अपचायक के रूप में–        

9.45

9.7.5 भंडारण

प्रकाश के मंद प्रभाव से H2O2 अपघटित हो जाता है।

9.46

धातुओं की सतह तथा क्षार की सूक्ष्म मात्रा (जो काँच में निहित रहती है) की उपस्थिति के कारण उपरोक्त अभिक्रिया उत्प्रेरित होती है। अत: इसे मोम के स्तर से युक्त काँच या प्लास्टिक पात्रों में अँधेरे में रखा जाता है। यूरिया एक स्थायीकारी के रूप में मिलाया जाता है। इसे धूल के कण से दूर रखा जाता है, क्योंकि धूल हाइड्रोजन परॉॅक्साइड के विस्फोटी अपघटन को प्रेरित कर देती है।

9.7.6 उपयोग

H2O2 के बृहद् रूप में उपयोग के कारण इसके औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होती जा रही है। इसके कुछ उपयोग नीचे दिए जा रहे हैं–

(i) दैनिक जीवन में इसका उपयोग मंद कीटनाशी तथा बालों के विरंजन के रूप में किया जाता है। पूतिरोधी (Antiseptic) के रूप में यह बाजार में ‘परहाइडॅΡाल’ (Perhydrol) नाम से बेचा जाता है।

(ii) इसका उपयोग सोडियम परबोरेट तथा सोडियम परकार्बोनेट के निर्माण में किया जाता है, जो उच्च कोटि के अपमार्जकों के लिए उपयोगी है।

(iii) इसका उपयोग हाइड्रोक्यूनोन, टार्टरिक अम्ल, खाद्य-उत्पादों तथा औषधियों (सिफैलोस्पोरिन) के संश्लेषण में किया जाता है।

(iv) उद्योगों में H2O2 का उपयोग वस्त्रों, कागज की लुगदी, चमड़ा, तेल, वसा आदि के विरंजन कारक (Bleaching Agent) के रूप में किया जाता है।

(v) आजकल H2O2 का उपयोग पर्यावरणीय (हरित) रसायन (उदाहरणस्वरूप–पर्यावरण-नियंत्रण में, घरेलू तथा औद्योगिक बहिस्राव (Effluents) उपचार में, सायनाइड के अॉक्सीकरण में, वाहित मल के लिए वायुजीवी दशाओं पुनर्स्थापन आदि) में किया जाता   है।

9.8 भारी जल, D2O

भारी जल विस्तृत रूप से नाभिकीय रिएक्टरों में न्यूटॉन मंदक के रूप में तथा विनिमय अभिक्रियाओं की क्रियाविधियों के अध्ययन में काम आता है। इसका उत्पादन जल के वैद्युत अपघटन द्वारा तथा उर्वरक उद्योगों में उपोत्पाद (By products) के रूप में होता है। भारी जल के भौतिक गुण सारणी 9.3 में दिए गए हैं। भारी जल का उपयोग ड्यूटीरियम के अनेक यौगिक बनाने के लिए किया जाता है। उदाहरणार्थ–

9.47

9.9 डाइहाइड्रोजन ईंधन के रूप में

दहन में डाइहाइड्रोजन अधिक मात्रा में ऊष्मा मुक्त करती है। ईंधन (जैसे–हाइहाइड्रोजन, मेथैन, एल.पी.जी. आदि) की समान आण्विक मात्रा, द्रव्यमान तथा आयतन के दहन से मुक्त ऊर्जा के आँकड़े सारणी 9.5 में दर्शाए गए हैं।

सारणी 9.5 विभिन्न ईंधनों द्वारा दहन से मुक्त ऊर्जा मोल, द्रव्यमान तथा आयतन में

दहन से मुक्त हुई ऊर्जा kJ में डाइहाइड्रोजन (गैसीय प्रावस्था)
डाइहाइड्रोजन (द्रव-प्रावस्था)
एल.पी.जी. मेथैन गैस
अॉक्टेन (द्रव-अवस्था)
प्रति मोल 286 285 2220 880 5511
प्रति ग्राम 143 142 50 53 47
प्रति लिटर 12 9968 25590 35 34005

इस सारणी से स्पष्ट है कि डाइहाइड्रोजन, पेट्रोल के (समान द्रव्यमान की) तुलना में तीनगुना अधिक ऊर्जा मुक्त कर सकती है, हालाँकि डाइहाइड्रोजन के दहन में प्रदूषक पेट्रोल से कम होते हैं। केवल डाइनाइट्रोजन के अॉक्साइड ही प्रदूषक हाेंगेे। (डाइहाइड्रोजन के साथ डाइनाइट्रोजन की अशुद्धि के रूप में उपस्थिति के कारण) गैस सिलेंडर में थोड़ी मात्रा में जल अंत:क्षिप्त (Inject) करने पर डाइनाइट्रोजन तथा डाइअॉक्सीजन की अभिक्रिया नहीं हो पाती, हालाँकि पात्र (जिसमें डाइहाइड्रोजन रखी जाती है) के द्रव्यमान का भी ध्यान रखना चाहिए। संपीडित डाइहाइड्रोजन के एक सिलिंडर का भार समान ऊर्जा वाले पेट्रोल टैंक से लगभग 30 गुना अधिक होता। डाइहाइड्रोजन को 20 K पर ठंडा कर द्रवित भी किया जा सकता है। इसके लिए महँगे रोधी टैंकों की आवश्यकता पड़ती है। भिन्न-भिन्न धातुओं, जैसे– NaNi5, Ti–TiH2, Mg–MgH2 आदि के टैंकों का प्रयोग डाइहाइड्रोजन की कम मात्रा का भंडारण करने हेतु किया जाता है। इन सीमाओं ने शोधकर्त्ताओं को डाइहाइड्रोजन के सफल प्रयोग की वैकल्पिक तकनीकों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया है।

इस संदर्भ में भावी विकल्प ‘हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था’ है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का मूल सिद्धांत ऊर्जा का द्रव हाइड्रोजन अथवा गैसीय हाइड्रोजन के रूप में अभिगमन तथा भंडारण है। हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था का मुख्य ध्येय तथा लाभ-ऊर्जा का संचरण विद्युत्-ऊर्जा के रूप में न होकर हाइड्रोजन के रूप में होना है। हमारे देश में पहली बार अक्तूबर, 2005 में आरंभ परियोजना में डाइहाइड्रोजन स्वचालित वाहनों के ईंधन के रूप में प्रयुक्त किया गया। प्रारंभ में चौपहिया वाहन के लिए 5 प्रतिशत डाइहाइड्रोजन मिश्रित CNG को प्रयोग किया गया। बाद में डाइहाइड्रोजन की प्रतिशतता धीरे-धीरे अनुकूलतम स्तर तक बढ़ाई जाएगी।

आजकल डाहहाइड्रोजन का उपयोग ईंधन सेलों में विद्युत्- उत्पादन के लिए किया जाता है। एेसी आशा की जाती है कि आर्थिक रूप से व्यवहार्य तथा डाइहाइड्रोजन के सुरक्षित स्रोत का पता आने वाले वर्षों में लग सकेगा तथा उसका उपयोग ऊर्जा के रूप में हो सकेगा।

सारांश

हाइड्रोजन केवल एक इलेक्ट्रॅान से युक्त सबसे हलका परमाणु है। यह इलेक्ट्रॉन को परित्याग कर मूल कण प्रोट्रॉन बनाता है। यह इसका विशिष्ट व्यवहार है। इसके तीन समस्थानिक प्रोटियम (11H), ड्यूटीरियम (D या 12H), ट्राइटियम ( T या 13H) हैं। इन तीनों में केवल ट्राइटियम रेडियोसक्रिय हैं। क्षार धातुओं तथा हैलोजेन में समानताओं के बावजूद इसके विशिष्ट गुणों के कारण आवर्त्त सारणी में पृथक् स्थान दिया गया है।

ब्रह्मांड में हाइड्रोजन अतिबहुल तत्व है। मुक्त अवस्था में यह पृथ्वी के वायुमंडल में नहीं पाया जाता, हालाँकि संयुक्त अवस्था में पृथ्वी की सतह पर अतिबहुल्य तत्वों के क्रम में हाइड्रोजन का स्थान तीसरा है।

शैल रसायनों से भाप अंगार सृति अभिक्रिया (Water gas shift reaction) द्वारा डाइहाइड्रोजन का औद्योगिक उत्पादन किया जाता है। यह लवणी जल के विद्युत्-अपघटन में सह-उत्पादन के रूप में प्राप्त होता है। डाइहाइड्रोजन H–H एकलबंध वियोजन एन्थैल्पी (435.88kJ mol–1) तत्वों के दो परमाणुओं के मध्य एकल बंध के लिए अधिकतम है। इस गुण के आधार पर डाइहाइड्रोजन का उपयोग परमाण्विय टॉर्च (Atomic torch) में किया जाता है। फलस्वरूप तापमान ~4000K तक पहुँच जाता है, जो उच्च गलनांक वाले धातुओं की वेल्डिंग के लिए उपयुक्त होती है।

कक्ष ताप पर डाइहाइड्रोजन उच्च वियोजन एन्थैल्पी के कारण अक्रिय होती है। यह लगभग सभी तत्वों के साथ उपयुक्त परिस्थितियों में संयुक्त होकर हाइड्राइड बनाता है। सभी हाइड्राइडों को तीन श्रेणियों–आयनिक या लवणीय (Saline) हाइड्राइड, सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड तथा धात्विक या अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड में वर्गीकृत किया गया है। अन्य हाइड्राइड बनाने के लिए क्षार-धातु हाइड्राइड उपयुक्त अभिकर्मक हैं। आण्विक हाइड्राइड (उदाहरणस्वरूप B2H6, CH4, NH3, H2O) का दैनिक जीवन में अत्यधिक महत्त्व है। धात्विक हाइड्राइडों का उपयोग डाइहाइड्रोजन के अतिशुद्धिकरण (Ultrapurification) तथा डाइहाइड्रोजन-संग्रह हेतु माध्यम (Medium) के रूप में होता है।

डाइहाइड्रोजन से हाइड्रोजन हैलाइड, जल, अमोनिया मेथेनॉल, वनस्पति घी आदि महत्त्वपूर्ण यौगिकों का विरचन अपचयन अभिक्रियाओं द्वारा होता है। धातुकर्मीय अभिक्रियाओं में यह धात्विक अॉक्साइड को धातु में अपचयित करता है। अंतरिक्ष-अनुसंधान में डाइहाइड्रोजन का उपयोग रॉकेट ईंधन के रूप में होता है। वस्तुत: भविष्य में डाइहाइड्रोजन का उपयोग प्रदूषणमुक्त ईंधन के रूप में महत्त्वपूर्ण होगा (हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था)।

जल अति सामान्य, बहुतायत तथा आसानी से उपलब्ध पदार्थ है। रासायनिक एवं जैविक दृष्टिकोण से यह अतिमहत्त्वपूर्ण है। द्रव-अवस्था से ठोस अवस्था तथा द्रव अवस्था का गैसीय अवस्था में इसका रूपांतरण सरल है, जो जीवमंडल में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जल के अणु की बंकित संरचना के कारण अत्यधिक ध्रुवीय प्रकृति होती है, जिससे जल बर्फ में सबसे ज्यादा एवं जलवाष्प में सबसे कम हाइड्रोजन बंधन के लिए उत्तरदायी है। जल (क) ध्रुवीय प्रकृति के आधार पर यह आयनिक तथा आंशिक आयनिक यौगिकों में उत्तम विलायक के रूप में व्यवहार करता है (ख) एक उभयधर्मी (अम्ल अथवा क्षार) पदार्थ के रूप में व्यवहार करता है तथा (ग) यह कई प्रकार के हाइड्रेट बनाता है। जल में अनेक लवणों की अधिक मात्रा घुलने से जल कठोर हो जाता है, जो व्यापारिक महत्त्व के लिए हानिकारक है। जल की अस्थायी तथा स्थायी कठोरता जीओलाइट और संश्लेषित आयन विनिमयकों का उपयोग करके दूर की जाती है।

भारी जल D2O एक अन्य महत्त्वपूर्ण यौगिक है, जिसका निर्माण साधारण जल के विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है। इसका उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में मंदक के रूप में किया जाता है।

हाइड्रोजन परॉक्साइड H2O2 की असमतलीय संरचना होती है। इसका उपयोग औद्योगिक विरंजन, औषधि, प्रदूषण-नियंत्रण, औद्योगिक तथा घरेलू बहिस्राव उपचार में बृहद् रूप से किया जाता है।


अभ्यास

9.1 हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को युक्तिसंगत ठहराइए।

9.2 हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए तथा बताइए कि इन समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात क्या है।

9.3 सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन एक परमाण्विक की अपेक्षा द्विपरमाण्विक रूप में क्यों पाया जाता है?

9.4 ‘कोल गैसीकरण’ से प्राप्त डाइहाइड्रोजन का उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है?

9.5 विद्युत्-अपघटन विधि द्वारा डाइहाइड्रोजन बृहद् स्तर पर किस प्रकार बनाई जा सकती है? इस प्रक्रम में वैद्युत-अपघट्य की क्या भूमिका है?

9.6 निम्नलिखित समीकरणों को पूरा कीजिए–

9.49

9.7 डाइहाड्रोजन की अभिक्रियाशीलता के पदों में H–H बंध की उच्च एन्थैल्पी के परिणामों की विवेचना कीजिए।

9.8 हाइड्रोजन के (i) इलेक्ट्रॉन न्यून, (ii) इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध तथा (iii) इलेक्ट्रॉन समृद्ध यौगिकों से आप क्या समझते हैं? उदाहरणों द्वारा समझाइए।

9.9 संरचना एवं रासायनिक अभिक्रियाओं के आधार पर बताइए कि इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड के कौन-कौन से अभिलक्षण होते हैं।

9.10 क्या आप आशा करते हैं कि (CnH2n + 2) कार्बनिक हाइड्राइड लूइस अम्ल या क्षार की भाँति कार्य करेंगे? अपने उत्तर को युक्तिसंगत ठहराइए।

9.11 अरससमीकरणमितीय हाइड्राइड (Non stochiometric hydride) से आप क्या समझते हैं? क्या आप क्षारीय धातुओं से एेसे यौगिकों की आशा करते हैं? अपने उत्तर को न्यायसंगत ठहराइए।

9.12 हाइड्रोजन भंडारण के लिए धात्विक हाइड्राइड किस प्रकार उपयोगी है? समझाइए।

9.13 कर्तन और वेल्डिंग में परमाण्विय हाइड्रोजन अथवा अॉक्सी हाइड्रोजन टॉर्च किस प्रकार कार्य करती है? समझाइए।

9.14 NH3, H2O तथा HF में से किसका हाइड्रोजन बंध का परिमाण उच्चतम अपेक्षित है और क्यों?

9.15 लवणीय हाइड्राइड जल के साथ प्रबल अभिक्रिया करके आग उत्पन्न करती है। क्या इसमें CO2 (जो एक सुपरिचित अग्निशामक है) का उपयोग हम कर सकते हैं? समझाइए।

9.16 निम्नलिखित को व्यवस्थित कीजिए–

(i) CaH2, BeH2 तथा TiH2 को उनकी बढ़ती हुई विद्युत्चालकता के क्रम में।

(ii) LiH, NaH तथा CsH आयनिक गुण के बढ़ते हुए क्रम में।

(iii) H–H, D–D तथा F–F को उनके बंध-वियोजन एन्थैल्पी के बढ़ते हुए क्रम में।

(iv) NaH, MgH2 तथा H2O को बढ़ते हुए अपचायक गुण के क्रम में।

9.17 H2O तथा H2O2 की संरचनाओं की तुलना कीजिए।

9.18 जल के स्वत: प्रोटोनीकरण से आप क्या समझते हैं? इसका क्या महत्त्व है?

9.19 F2 के साथ जल की अभिक्रिया में अॉक्सीकरण तथा अपचयन के पदों पर विचार कीजिए एवं बताइए कि कौन सी स्पीशीज़ अॉक्सीकृत/अपचयित होती है।

9.20 निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए–

(i)

(ii)

(iii)

(iv)

(v)

उपरोक्त को (क) जल-अपघटन, (ख) अपचयोपचय (Redox) तथा (ग) जलयोजन अभिक्रियाओं में वर्गीकृत कीजिए।

9.21 बर्फ के साधारण रूप की संरचना का उल्लेख कीजिए।

9.22 जल की अस्थायी एवं स्थायी कठोरता के क्या कारण हैं? वर्णन कीजिए।

9.23 संश्लेषित आयन विनिमयक विधि द्वारा कठोर जल के मृदुकरण के सिद्धांत एवं विधि की विवेचना कीजिए।

9.24 जल के उभयधर्मी स्वभाव को दर्शाने वाले रासायनिक समीकरण लिखिए।

9.25 हाइड्रोजन परॉक्साइड के अॉक्सीकारक एवं अपचायक रूप को अभिक्रियाओं द्वारा समझाइए।

9.26 विखनिजित जल से क्या अभिक्रिया है? यह कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

9.27 क्या विखनिजित या आसुत जल पेय-प्रयोजनों में उपयोगी है? यदि नहीं, तो इसे उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है?

9.28 जीवमंडल एवं जैव प्रणालियों में जल की उपादेयता को समझाइए।

9.29 जल का कौन सा गुण इसे विलायक के रूप में उपयोगी बनाता है? यह किस प्रकार के यौगिक-

(i) घोल सकता है और (ii) जल-अपघटन कर सकता है?

9.30 H2O एवं D2O के गुणों को जानते हुए क्या आप मानते हैं कि D2O का उपयोग पेय-प्रयोजनों के रूप में लाया जा सकता है?

9.31 ‘जल-अपघटन’ (Hydrolysis) तथा ‘जलयोजन’ (Hydration) पदों में क्या अंतर है?

9.32 लवणीय हाइड्राइड किस प्रकार कार्बनिक यौगिकों से अति सूक्ष्म जल की मात्रा को हटा सकते हैं?

9.33 परमाणु क्रमांक 15, 19, 23 तथा 44 वाले तत्व यदि डाइहाइड्रोजन से अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाते हैं, तो उनकी प्रकृति से आप क्या आशा करेंगे? जल के प्रति इनके व्यवहार की तुलना कीजिए।

9.34 जब एेलुमिनियम (III) क्लोराइड एवं पोटैशियम क्लोराइड को अलग-अलग (i) सामान्य जल, (ii) अम्लीय जल एवं (iii) क्षारीय जल से अभिकृत कराया जाएगा, तो आप किन-किन विभिन्न उत्पादों की आशा करेंगे? जहाँ आवश्यक हो, वहाँ रासायनिक समीकरण दीजिए।

9.35 H2O2 विरंजन कारक के रूप में कैसे व्यवहार करता है? लिखिए।

9.36 निम्नलिखित पदों से आप क्या समझते हैं?

(i) हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था, (ii) हाइड्रोजनीकरण, (iii) सिन्गैस, (iv) भाप अंगार गैस सृति अभिक्रिया तथा (v) ईंधन सेल।

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