त्रिाकोणमिति का परिचय ज्ीमतम पे चमतींचे दवजीपदह ूीपबी ेव वबबनचपमे जीम उपककसम चवेपजपवद व िउंजीमउंजपबे ंे जतपहवदवउमजतलण् ;संभवतः त्रिाकोणमिति के अतिरिक्त गण्िात की कोइर् ऐसी शाखा नहीं है, जो उसकी मध्य स्िथति का स्थान ले सके।द्ध दृ श्रण्थ्ण् भ्मतइंतज ;1890द्ध 8ण्1 भूमिका आप अपनी पिछली कक्षाओं में त्रिाभुजों, विशेष रूप से समकोण त्रिाभुजों के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। आइए हम अपने आस - पास के परिवेश से वुफछ ऐसे उदाहरण लें, जहाँ समकोण 1ण् मान लीजिए एक स्वूफल के छात्रा वुफतुबमीनार देखने गए हैं। अब, यदि कोइर् छात्रा मीनार के श्िाखर को देख रहा हो, तो एक समकोण त्रिाभुज बनने की कल्पना की जा सकती है जैसाकि आवृफति 8.1 में दिखाया गया है। क्या वास्तव में मापे बिना ही छात्रा मीनार की ऊँचाइर् ज्ञात कर सकता है?2ण् मान लीजिए एक लड़की नदी के किनारे स्िथत अपने मकान की बालकनी पर बैठी हुइर् है और वह इस नदी के दूसरे किनारे पर स्िथत पास ही के मंदिर की एक निचली सीढ़ी पर रखे गमले को देख रही है। इस स्िथति में, एक समकोण त्रिाभुज बनने की कल्पना की जा सकती है जैसाकि आवृफति 8.2 में दिखाया गया है, यदि आपको वहऊँचाइर् ज्ञात हो, जिस पर लड़की बैठी हुइर् है, तो क्या आप नदी की चैड़ाइर् ज्ञात कर सकते हैं? 3ण् मान लीजिए एक गमर् हवा वाला गुब्बारा आवृफति 8ण्2 हवा में उड़ रहा है। आसमान में उड़ने पर इस गुब्बारे को एक लड़की देख लेती है और इस बात को बताने के लिए वह अपनी माँ के पास दौड़कर जाती है। गुब्बारे को देखने के लिए उसकी माँ तुरंत घर से बाहर निकल आती है। अब मान लीजिए कि जब पहले - पहल लड़की गुब्बारे को देखती है, तब गुब्बारा ¯बदु । पर था। आवृफति 8ण्3जब माँ - बेटी दोनों ही गुब्बारे को देखने के लिए बाहर निकलकर आती हैं तब तक गुब्बारा एक अन्य ¯बदु ठ तक आ चुका होता है। क्या आप जमीन के उस स्थान से, जहाँ माँ और बेटी दोनों खड़ी हैं, ठ की ऊँचाइर् ज्ञात कर सकते हैं? ऊपर बताइर् गइर् सभी स्िथतियों में दूरियाँ अथवा ऊँचाइर्याँ वुफछ गण्िातीय तकनीकों को, जो त्रिाकोणमिति नामक गण्िात की एक शाखा के अंतगर्त आते हैं, लागू करके ज्ञात किया जा सकता है। अंग्रेजी शब्द ष्जतपहवदवउमजतलष् की व्युत्पिा ग्रीक शब्दों ष्जतपष् ;जिसका अथर् है तीनद्ध, ष्हवदष् ;जिसका अथर् है, भुजाद्ध और ष्उमजतवदष् ;जिसका अथर् है मापद्ध से हुइर् है। वस्तुतः त्रिाकोणमिति में एक त्रिाभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंधें का अध्ययन किया जाता है। प्राचीन काल में त्रिाकोणमिति पर किए गए कायर् का उल्लेख मिस्र और बेबीलाॅन में मिलता है। प्राचीन काल के खगोलविद् त्रिाकोणमिति का प्रयोग पृथ्वी से तारों और ग्रहों की दूरियाँ मापने में करते थे। आज भी इंजीनिय¯रग और भौतिक विज्ञान में प्रयुक्त अध्िकांश प्रौद्योगिकीय उन्नत विध्ियाँ त्रिाकोणमितीय संकल्पनाओं पर आधरित हैं। इस अध्याय में हम एक समकोण त्रिाभुज की भुजाओं के वुफछ अनुपातों का उसके न्यून कोणों के सापेक्ष अध्ययन करेंगे जिन्हें कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपात कहते हंै। यहाँ हम अपनी चचार् केवल न्यून कोणों तक ही सीमित रखेंगे। यद्यपि इन अनुपातों का विस्तार दूसरे कोणों के लिए भी किया जा सकता है। यहाँ हम 0° और 90° के माप वाले कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपातों को भी परिभाष्िात करेंगे। हम वुफछ विश्िाष्ट कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपात परिकलित करेंगे और इन अनुपातों से संबंध्ित वुफछ सवर्समिकाएँ ;पकमदजपजपमेद्धए जिन्हें त्रिाकोणमितीय सवर्समिकाएँ कहा जाता है, स्थापित करेंगे। 8ण्2 त्रिाकोणमितीय अनुपात अनुच्छेद 8.1 में आप विभ्िान्न स्िथतियों में बने वुफछ समकोण त्रिाभुजों की कल्पना कर चुके हैं। कणर् आइए हम एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् लें, जैसाकि आवृफति 8.4 में दिखाया गया है। यहाँ,∠ ब्।ठ ;या संक्षेप में कोण।द्ध एक न्यून कोण है। कोण। के सापेक्ष भुजा ठब् की स्िथति पर ध्यान दीजिए। कोण । की संलग्न भुजायह भुजा कोण । के सामने है। इस भुजा को हम कोण । की सम्मुख भुजा कहते हैं, भुजा ।ब् समकोण त्रिाभुज का आवृफति 8ण्4 कणर् है और भुजा ।ठए ∠ । का एक भाग है। अतः इसे हम कोण । की संलग्न भुजा कहते हैं। ध्यान दीजिए कि कोण। के स्थान पर कोण ब् लेने पर कोणकी सम्मुख भुजाकोणकी संलग्न भुजाभुजाओं की स्िथति बदल जाती हैेृ। ;दख्िाए आवफति 8.5द्ध पिछली कक्षाओं में आप फ्अनुपातय् की संकल्पना कणर् के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। यहाँ अब हम समकोण त्रिाभुज की भुजाओं से संबंध्ित वुफछ अनुपातों को, जिन्हें हम त्रिाकोणमितीय अनुपात कहते हैं, परिभाष्िात करेंगे। कोण ब् की समकोण त्रिाभुज ।ठब् ;देख्िाए आवृफति 8.4द्ध के सम्मुख भुजा कोण ।के त्रिाकोणमितीय अनुपात निम्न प्रकार से परिभाष्िात आवृफति 8ण्5 किए जाते हैंः ेा । की सम्मख भजुा ठब् काण्ु∠ । का ेपदम त्र त्र कणर् ।ब् काण्ेा । की सलंग्न भजा ु।ठ ∠ । का बवेपदम त्र त्र कणर् ।ब् काण े । की सम्मुठब् ख भजुा त्र∠ । का जंदहमदज त्र ेा । की सलग्न भजुा ।ठकाण्ं1 कणर् ।ब् त्रत्र∠ । का बवेमबंदज त्र ∠ । का ेपदम काण्ेा । की सम्मख भुजा ुठब् 1 कणर् ।ब् त्रत्र∠ । का ेमबंदज त्र ∠ । का बवेपदम कोण । की सम्मख्ुा भजुा ।ठ 1 काण्ेा ।की सलंग्न भजुा ।ठ त्रत्र∠ । का बवजंदहमदज त्र ∠ । का जंदहमदज काण्ेा । की सम्मख्ुा भजा ुठब् ऊपर परिभाष्िात किए गए अनुपातों को संक्षेप में क्रमशः ेपद ।ए बवे ।ए जंद ।ए बवेमब ।ए ेमब । और बवज । लिखा जाता है। ध्यान दीजिए कि अनुपात बवेमब ।ए ेमब । और बवज । अनुपातों ेपद ।ए बवे । और जंद । के क्रमशः व्युत्क्रम होते हैं। ठब् ठब् ेपद। और आप यहाँ यह भी देख सकते हैं कि जंद ।त्र त्र ।ब् त्र और।ठ ।ठ बवे। बवे। ।ब् बवज। त्र ेपद । अतः एक समकोण त्रिाभुज के एक न्यून कोण के त्रिाकोणमितीय अनुपात त्रिाभुज के कोण और उसकी भुजाओं की लंबाइर् के बीच के संबंध् को व्यक्त करते हैं। क्यों न यहाँ आप एक समकोण त्रिाभुज के कोण ब् के त्रिाकोणमितीय अनुपातों को परिभाष्िात करने का प्रयास करें ;देख्िाए आवृफति 8.5द्ध? शब्द श्ेपदमश् का सबसे पहला प्रयोग जिस रूप में आज हम करते हैं उसका उल्लेख 500 इर्. में आयर्भट्टð द्वारा लिख्िात पुस्तक आयर्भट्टीयम में मिलता है। आयर्भट्टð ने शब्द अध्र् - ज्या का प्रयोग अध्र् - जीवा के लिए किया था जिसने समय - अंतराल में ज्या या जीवा का संक्ष्िाप्त रूप ले लिया। जब पुस्तक आयर्भट्टीयम का अनुवाद अरबी भाषा में किया गया, तब शब्द जीवा को यथावत रख लिया गया। शब्द जीवा को साइनस ;ैपदनेद्ध के रूप में अनूदित किया गया, जिसका आयर्भट्टðअथर् वक्र है, जबकि अरबी रूपांतर को लैटिन में अनूदित किया 476 दृ 550 इर्गया। इसके तुरंत बाद ेपदम के रूप में प्रयुक्त शब्द ेपदने भी पूरे यूरोप में गण्िातीय पाठों में प्रयुक्त होने लगा। खगोलविद् के एक अंग्रेजी प्रोप़ेफसर एडमंड गुंटर ;1581 - 1626द्ध ने पहले - पहल संक्ष्िाप्त संकेत ष्ेपदष् का प्रयोग किया था। शब्दों ष्बवेपदमष् और ष्जंदहमदजष् का उद्गम बहुत बाद में हुआ था। बवेपदम पफलन का उद्गम पूरक कोण के ेपदम का अभ्िाकलन करने को ध्यान में रखकर किया गया था। आयर्भट्टð ने इसे कोटिज्या का नाम दिया था। नाम बवेपदने का उद्गम एडमंड गुंटर के साथ हुआ था। 1674 में अंग्रेज गण्िातज्ञ सर जोनास मूरे ने पहले - पहल संक्ष्िाप्त संकेत ष्बवेष् का प्रयोग किया था। टिप्पणीरू ध्यान दीजिए कि प्रतीक ेपद । का प्रयोग कोण।ष् के ेपद के संक्ष्िाप्त रूप में किया गया है। यहाँेपद।ए ेपद और । का गुणनपफल नहीं है। । से अलग रहकर ष्ेपदष् का कोइर् अथर् ही नहीं होता। इसी प्रकार बवे।ए ष्बवेष्और । का गुणनपफल नहीं है। इस प्रकार की व्याख्या अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपातों के साथ भी की जाती है। अब, यदि हम समकोण त्रिाभुज।ठब् के कणर् ।ब् पर एक ¯बदु च् लें या बढ़ी हुइर् भुजा ।ब् पर ¯बदु फ लें और ।ठ पर लंब च्ड डालें और बढ़ी हुइर् भुजा ।ठ पर लंबफछ डालें ;देख्िाए आवृफति 8.6द्ध, तो Δ च्।ड के∠ । के त्रिाकोणमितीय आवृफति 8ण्6 अनुपातों और Δ फ।छ के∠ । के त्रिाकोणमितीय अनुपातों में क्या अंतर होगा? इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात करने के लिए आइए पहले हम इन त्रिाभुजों को देखें। क्या Δ च्।ड और Δ ब्।ठ समरूप हैं? आपको याद होगा कि अध्याय 6 में आप।। समरूपता कसौटी के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। इस कसौटी को लागू करने पर आप पाएँगे कि त्रिाभुज च्।ड और ब्।ठ समरूप हैं। अतः समरूप त्रिाभुजों के गुणध्मर् के अनुसार इन त्रिाभुजों की संगत भुजाएँ आनुपातिक हैं। अतः ।ड ।ठ त्र ।च् ।ब् त्र डच् ठब् इससे हमें यह प्राप्त होता है डच् ।च् त्र ठब् ।ब् त्र ेपद । ।ड।ठ डच्ठब् इसी प्रकार त्र त्र बवे ।ए त्रत्र जंद । आदि - आदि।च् ।ब् ।ड।ठ इससे यह पता चलता है कि Δ च्।ड के कोण । के त्रिाकोणमितीय अनुपात और Δब्।ठ के कोण । के त्रिाकोणमितीय अनुपातों में कोइर् अंतर नहीं होता। इसी प्रकार आप यह जाँच कर सकते हैं किΔ फ।छ में भी ेपद। का मान ;और अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपातों का मानद्ध समान बना रहता है। अपने प्रेक्षणों से अब यह स्पष्ट हो जाता है कि यदि कोण समान बना रहता हो, तो एक कोण के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मानों में त्रिाभुज की भुजाओं की लंबाइयों के साथ कोइर् परिवतर्न नहीं होता। टिप्पणी रू सुविध के लिए;ेपद।द्ध2ए ;बवे।द्ध2ए आदि के स्थान पर हम क्रमशःेपद2।ए बवे2। आदि लिख सकते हैं। परंतु बवेमब । त्र ;ेपद ।द्धदृ1 ≠ ेपददृ1 । ;इसे साइन इनवसर् । कहा जाता हैद्ध। ेपददृ1 । का एक अलग अथर् होता है जिस पर चचार् हम उच्च कक्षाओं में करेंगे। इसी प्रकार की परंपराएँ अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपातों पर भी लागू होती हैं। कभी - कभी ग्रीक अक्षर θ ;थीटाद्ध का प्रयोग कोण को प्रकट करने के लिए किया जाता है। यहाँ हमने एक न्यून कोण के छः त्रिाकोणमितीय अनुपात परिभाष्िात किए हैं। यदि हमें कोइर् एक अनुपात ज्ञात हो, तो क्या हम अन्य अनुपात प्राप्त कर सकते हैं? आइए हम इस पर विचार करें। यदि एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् में 1 ठब्1ेपद ।त्र ए तब इसका अथर् यह है कि त्र ए3 ।ब्3 अथार्त् त्रिाभुज।ठब् की भुजाओं ठब् और।ब् की आवृफति 8ण्7लंबाइयाँ1 रू 3 के अनुपात में हैं ;देख्िाए आवृफति 8.7द्ध। अतः यदि ठब्ए ा के बराबर हो, तो ।ब्ए 3ा के बराबर होगी, जहाँ ा एक ध्न संख्या है। कोण । के अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपात ज्ञात करने के लिए हमें तीसरी भुजा ।ठ की लंबाइर् ज्ञात करनी होती है। क्या आपको पाइथागोरस प्रमेय याद है? आइए हम पाइथागोरस प्रमेय की सहायता से अपेक्ष्िात लंबाइर् ।ठ ज्ञात करें। ।ठ2 त्र।ब्2 दृ ठब्2 त्र ;3ाद्ध2 दृ ;ाद्ध2 त्र 8ा2 त्र ;2 2 ाद्ध2 अतः ।ठ त्र ± 22 ा अतः हमें प्राप्त होता है ।ठ त्र22 ा ;।ठ क्यों दृ22 ा नहीं है?द्ध त्रिाकोणमिति का परिचय ।ठ 22 ा 22 त्र त्रअब बवे । त्र ।ब् 3ा 3 इसी प्रकार, आप कोण । के अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपात प्राप्त कर सकते हैं। टिप्पणी रू क्योंकि समकोण त्रिाभुज का कणर्, त्रिाभुज की सबसे लंबी भुजा होता है, इसलिए ेपद । या बवे । का मान सदा ही 1 से कम होता है ;या विशेष स्िथति में 1 के बराबर होता है।द्ध आइए अब हम वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 1 रू यदि जंद ।त्र 34ए तो कोण । के अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपात ज्ञात कीजिए। हलरू आइए सबसे पहले हम एक समकोण Δ।ठब् खींचें ;देख्िाए आवृफति 8.8द्ध। ठब् 4अब, हम जानते हैं कि जंद ।त्र त्र ।ठ 3 अतः यदि ठब् त्र 4ाए तब ।ठ त्र 3ाए जहाँ ा ध्न संख्या है। आवृफति 8ण्8 अब पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर हमें यह प्राप्त होता है ।ब्2 त्र।ठ2 ़ ठब्2 त्र ;4ाद्ध2 ़ ;3ाद्ध2 त्र 25ा2 इसलिए ।ब् त्र 5ा अब हम इनकी परिभाषाओं की सहायता से सभी त्रिाकोणमितीय अनुपात लिख सकते हैं। ठब् 4ा 4 ेपद ।त्र त्रत्र ।ब् 5ा 5 ।ठ 3ा 3 त्रत्रबवे । त्र ।ब् 5ा 5 1315 15अतः बवज । त्र त्र ए बवेमब । त्र त्र और ेमब ।त्र त्र जंद। 4 ेपद। 4 बवे। 3 उदाहरण 2 रू यदि ∠ ठ और ∠ फ ऐसे न्यूनकोण हों जिससे कि ेपद ठ त्र ेपद फए तो सि( कीजिए कि ∠ ठ त्र ∠ फ हलरू आइए हम दो समकोण त्रिाभुज।ठब् और च्फत् लें, जहाँ ेपद ठ त्र ेपद फ ;देख्िाए आवृफति 8.9द्ध। आवृफति 8ण्9 ।ब्यहाँ ेपद ठ त्र ।ठ च्त्और ेपद फ त्र च्फ ।ब् च्त् तब त्र ।ठच्फ ।ब् ।ठ अतः त्र त्र ा ;मान लीजिएद्ध ;1द्धच्त्च्फ अब, पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर हमें ये प्राप्त होते हैं ठब् त्र ।ठ2 − ।ब्2 और फत् त्र च्फ2दृच्त् 2 2 2 2222 22ठब् ।ठ − ।ब् ा च्फ − ा च्त् ा च्फ − च्त् त्र त्र त्र ाअतः त्र ;2द्ध2222 22फत्च्फ − च्त् च्फ − च्त् च्फ − च्त् ;1द्ध और ;2द्ध से हमें यह प्राप्त होता है ।ब् ।ठठब् त्र त्र च्त्च्फफत् तब प्रमेय 6.4 का प्रयोग करने पर Δ ।ब्ठ ् Δ च्त्फ प्राप्त होता है। अतः ∠ ठ त्र ∠ फ उदाहरण 3 रू Δ ।ब्ठ लीजिए जिसका कोणब् समकोण है जिसमें ।ठ त्र 29 इकाइर्, ठब् त्र 21 इकाइर् और ∠ ।ठब् त्र θ ;देख्िाए आवृफति 8.10द्ध हैं तो निम्नलिख्िात के मान ज्ञात कीजिए। ;पद्ध बवे2 θ ़ ेपद2 θ ;पपद्ध बवे2 θ दृ ेपद2 θण् हल रू Δ ।ब्ठ में हमें यह प्राप्त होता है 22 22।ब् त्र ।ठ − ठब् त्र ;29द्ध − ;21द्ध त्र ;29 − 21द्ध ;29 ़ 21द्ध त्र ;8द्ध ;50द्ध त्र 400 आवृफति 8ण्10 त्र 20 इकाइर् ।ब् 20 ठब् 21अतः ेपद θ त्र त्र ए बवे θ त्र त्र⋅ ।ठ29 ।ठ29 22⎛ 20 ⎞2 ⎛ 21 ⎞2 20 ़ 21 400 ़ 441 अब, ;पद्ध बवे2θ ़ ेपद2θ त्र ⎜ ⎟़⎜ ⎟त्र 2 त्रत्र 1ए⎝ 29 ⎠⎝ 29 ⎠ 29 841 ⎛ 21 ⎞2 ⎛ 20 ⎞2 ;21 ़ 20द्ध ;21 − 20द्ध 41और ;पपद्ध बवे2 θ दृ ेपद2 θ त्र ⎜ ⎟−⎜ ⎟त्र 2 त्र ⎝ 29 ⎠⎝ 29 ⎠ 29 841 उदाहरण 4 रू एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, यदि जंद । त्र 1 तो सत्यापित कीजिए कि 2 ेपद ।बवे । त्र 1 हल रू Δ ।ठब् में जंद ।त्र ठब् त्र 1 ;देख्िाए आवृफति 8.11द्ध।ठअथार्त् ठब् त्र ।ठ मान लीजिए ।ठ त्र ठब् त्र ाए जहाँ ा एक ध्न संख्या है। आवृफति 8ण्11 अब ।ब् त्र ।ठ2 ़ ठब् 2 त्र ;द्धा 2 ़ ;द्ध2 त्र ाा 2 ठब्1 ।ठ1 त्रत्रअतः ेपद ।त्र और बवे ।त्र ।ब्2 ।ब्2 ⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞इसलिए 2 ेपद । बवे । त्र 2 त्र 1ए जो कि अपेक्ष्िात मान है।⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ उदाहरण 5 रू Δ व्च्फ में, जिसका कोण च् समकोण है, व्च् त्र 7 बउ और व्फ दृ च्फ त्र 1 बउ ;देख्िाए आवृफति 8.12द्ध, ेपद फ और बवे फ के मान ज्ञात कीजिए। हल रू Δ व्च्फ से हमें यह प्राप्त है कि व्फ2 त्रव्च्2 ़ च्फ2 अथार्त् ;1 ़ च्फद्ध2 त्रव्च्2 ़ च्फ2 ;क्यों?द्ध अथार्त् 1 ़ च्फ2 ़ 2च्फ त्रव्च्2 ़ च्फ2 अथार्त् 1 ़ 2च्फ त्र 72 ;क्यों?द्ध आवृफति 8ण्12 अथार्त् च्फ त्र 24 बउ और व्फ त्र 1 ़ च्फ त्र 25 बउ अतः ेपद फ त्र 7 और बवे फ त्र 24 25 25 प्रश्नावली 8ण्1 1ण् Δ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, ।ठ त्र 24 बउ औरठब् त्र 7 बउहै। निम्नलिख्िात का मान ज्ञात कीजिए: ;पद्ध ेपद ।ए बवे । ;पपद्ध ेपद ब्ए बवे ब् 2ण् आवृफति 8.13 में, जंद च् दृ बवज त् का मान ज्ञात कीजिए। 3 ए3ण् यदि ेपद ।त्र 4 तोबवे । और जंद । का मान परिकलित कीजिए। 4ण् यदि 15 बवज । त्र 8 हो तो ेपद । औरेमब । का मान ज्ञात कीजिए। ए5ण् यदि ेमब θ त्र 13 हो तो अन्य सभी त्रिाकोणमितीय अनुपात परिकलित कीजिए।6ण् यदि∠ ।और ∠ ठ न्यून कोण हो, जहाँबवे। त्र बवे ठए तो दिखाइए कि∠ ।त्र ∠ ठ 12 7 ए ;1ेपद θ− θद्धए ़ द्ध;1ेपद 7ण् यदि बवजθ त्र तो ;पद्ध ;पपद्ध बवज2 θ का मान निकालिए?8 ;1बवे ़θद्ध;1बवे −θद्ध 1जंद 2 । 8ण् यदि 3 बवज ।त्र4ए तो जाँच कीजिए कि − त्र बवे2 । दृ ेपद2। है या नहीं।21़जंद । ए9ण् त्रिाभुज ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, यदि जंद । त्र 1 तो निम्नलिख्िात के मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ेपद । बवे ब् ़ बवे । ेपद ब् ;पपद्ध बवे । बवे ब् दृ ेपद ।ेपद ब् 10ण् Δ च्फत् में, जिसका कोणफ समकोण है, च्त् ़ फत् त्र 25 बउ और च्फ त्र 5 बउ है। ेपद च्ए बवे च् और जंद च् के मान ज्ञात कीजिए। 11ण् बताइए कि निम्नलिख्िात कथन सत्य हैं या असत्य। कारण सहित अपने उत्तर की पुष्िट कीजिए। ;पद्ध जंद । का मान सदैव 1 से कम होता है। ;पपद्ध कोण । के किसी मान के लिए ेमब ।त्र 12 5 ;पपपद्ध बवे ।ए कोण । के बवेमबंदज के लिए प्रयुक्त एक संक्ष्िाप्त रूप है। ;पअद्ध बवज ।ए बवज और । का गुणनपफल होता है। 4 ;अद्ध किसी भी कोण θ के लिए ेपद θ त्र 3 8ण्3 वुफछ विश्िाष्ट कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपात ज्यामिति के अध्ययन से आप 30°ए 45°ए 60° और 90° के कोणों की रचना से आप अच्छी तरह से परिचित हैं। इस अनुच्छेद में हम इन कोणों और साथ ही 0° वाले कोण के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मान ज्ञात करेंगे। 45° के त्रिाकोणमितीय अनुपात Δ ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, यदि एक कोण 45° का हो, तो अन्य कोण भी 45° का होगा अथार्त् ∠ । त्र ∠ ब् त्र 45° ;देख्िाए आवृफति 8.14द्ध। अतः ठब् त्र ।ठ ;क्यों?द्ध आवृफति 8ण्14अब मान लीजिए ठब् त्र ।ठ त्र ं तब पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार ।ब्2 त्र ।ठ2 ़ ठब्2 त्र ं2 ़ ं2 त्र 2ं2 इसलिए ।ब् त्र ं 2 ⋅ त्रिाकोणमितीय अनुपातों की परिभाषाओं को लागू करने पर हमें यह प्राप्त होता है: 45°के काण की सम्मेु ठब् ं 1ख भजुा त्रत्र त्रेपद 45° त्र कणर् ।ब् ं 22 45°वफ कोंग्न भु ।ठ ंेण कीसलजा 1 त्रत्र त्रबवे 45° त्र कणर् ।ब् ं 22 45°वफ काण्ुु ठब् ेेा की सम्मख भजा ं जंद 45° त्र त्र त्रत्र 1 45° वफ कोंग्न भु।ठेण की सलजा ं 1और बवेमब 45° त्र 1 त्र 2ए ेमब 45° त्र त्र 2ए बवज 45° त्र 1 त्र 1ेपद 45 ° बवे 45 ° जंद 45 ° 30° और 60° के त्रिाकोणमितीय अनुपात आइए, अब हम 30° और 60° के त्रिाकोणमितीय अनुपात परिकलित करें। एक समबाहु त्रिाभुज ।ठब् पर विचार करें। क्योंकि समबाहु त्रिाभुज का प्रत्येक कोण, 60ह् का होता है, इसलिए ∠ । त्र ∠ ठ त्र ∠ ब् त्र 60° । से भुजा ठब् पर लंब।क् डालिए ;देख्िाए आवृफति 8.15द्ध। आवृफति 8ण्15 अब Δ।ठक् ≅Δ।ब्क् ;क्यों?द्ध इसलिए ठक् त्र क्ब् और ∠ठ।क् त्र ∠ ब्।क् ;ब्च्ब्ज्द्ध अब आप यह देख सकते हैं किः Δ।ठक् एक समकोण त्रिाभुज है जिसका कोणक् समकोण है, और जहाँ∠ठ।क् त्र 30° और ∠।ठक् त्र 60° ;देख्िाए आवृफति 8.15द्ध। जैसा कि आप जानते हैं, कि त्रिाकोणमितीय अनुपातों को ज्ञात करने वें त्रिभज की फलिएहमाुभुजाओं की लंबाइयाँ ज्ञात करने की आवश्यकता होती है। आइए, हम यह मान लंेकि।ठ त्र 2ं 1 तब ठक् त्र ठब्त्र ं 2 और ।क्2 त्र ।ठ2 दृ ठक्2 त्र;2ंद्ध2 दृ ;ंद्ध2 त्र 3ं2 इसलिए ।क् त्र ं ठक् ं 1 ।क् ं 33 त्रअब ेपद 30° त्र त्रत्र ए बवे 30° त्र त्र ।ठ 2ं 2 ।ठ2ं 2 ठक् ं 1 त्रत्रजंद 30° त्र ।क् ं 33 1 12और बवेमब 30ह् त्र त्र 2ए ेमब 30° त्र त्र ेपद 30 °बवे 30 ° 1बवज 30° त्र त्र जंद 30 ° इसी प्रकार ।क् ं 33 1ेपद 60° त्र त्रत्र ए बवे 60° त्र ए जंद 60° त्र 3।ठ 2ं 22 21 एबवेमब 60° त्र ेमब 60° त्र 2 और बवज 60° त्र33 0° और 90° के त्रिाकोणमितीय अनुपात आइए, हम देखें कि यदि समकोण त्रिाभुज ।ठब् के कोण। को तब तक और छोटा किया जाए जब तक कि यह शून्य नहीं हो जाता है, तब इस स्िथति में कोण । के त्रिाकोणमितीय अनुपातों पर क्या प्रभाव पड़ता है ;देख्िाए आवृफति 8.16द्ध। जैसे - जैसे ∠ । छोटा होता जाता है, वैसे - वैसे भुजा ठब् की लंबाइर् कम होती जाती है। ¯बदु ब्ए ¯बदु ठ के निकट आता आवृफति 8ण्16जाता है और अंत में, जब ∠।ए 0° के कापफी निकट हो जाता है तब आवृफति 8ण्17 जब ∠ ।ए 0ह् के अत्यध्िक निकट होता है तब ठब्ए 0 के अत्यध्िक निकट आ जाता है। तब ेपद । त्र ठब् का मान 0 के अत्यध्िक निकट आ जाता है। और, जब ∠ ।ए 0ह् के अत्यिाक।ब् निकट होता है, तब।ब् लगभग वही होता है जो कि ।ठ होता है और बवे । त्र ।ठ का मान।ब् 1 के अत्यध्िक समीप होता है। इसकी सहायता से हम उस स्िथति में ेपद । और बवे । के मान परिभाष्िात कर सकते हैं जबकि । त्र 0°ए हम ेपद 0° त्र0 और बवे 0° त्र 1 परिभाष्िात करते हैं। इनका प्रयोग करने पर हमें ये प्राप्त होते हैंः ेपद0° 1 एजंद 0° त्र त्र 0ए बवज 0° त्र जो कि परिभाष्िात नहीं है ;क्यों?द्धबवे 0°जंद 0° ेमब 0° त्र 1 त्र 1 तथाबवेमब 0° त्र 1 ए और यह भी परिभाष्िात नहीं है। ;क्यों?द्ध बवे 0°ेपद 0° आइए अब हम उस स्िथति में देखें कि ∠ । के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के साथ क्या होता है जबकिΔ ।ठब् के इस कोण को तब तक बड़ा किया जाता है, जब तक कि 90° का नहीं हो जाता।∠ । जैसे - जैसे बड़ा होता जाता है, ∠ ब् वैसे - वैसे छोटा होता जाता है। अतः ऊपर वाली स्िथति की भाँति भुजा।ठ की लंबाइर् कम होती जाती है। ¯बदु ।ए ¯बदुठ के निकट होता जाता है और, अंत में जब ∠ ।ए 90° के अत्यध्िक निकट आ जाता है, तो ∠ ब्ए 0° के अत्यिाक निकट आ जाता है और भुजा।ब् भुजा ठब् के साथ लगभग संपाती हो जाती है ;देख्िाए आवृफति 8.18द्ध। आवृफति 8ण्18 जब ∠ ब्ए 0° के अत्यध्िक निकट होता है तो ∠ ।ए 90° के अत्यध्िक निकट हो जाता है और भुजा ।ब् लगभग वही हो जाती है, जो भुजा ठब् है। अतः ेपद ।ए 1 के अत्यध्िक निकट हो जाता है और, जब ∠ । ए 90° के अत्यध्िक निकट होता है, तब ∠ ब्ए 0° के अत्यिाक निकट हो जाता है और भुजा ।ठ लगभग शून्य हो जाती है। अतः बवे ।ए 0 के अत्यध्िक निकट हो जाता है। अतः हम यह परिभाष्िात करते हैं: ेपद 90° त्र 1 और बवे 90° त्र 0 अब आप क्यों नहीं 90° के अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपात ज्ञात करते हैं? अब हम तुरंत संदभर् के लिए एक सारणी 8.1 के रूप में 0°ए 30°ए 45°ए 60° और 90° के सभी त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मान प्रस्तुत करेंगे। सारणी 8ण्1 ∠। 0° 30° 45° 60° 90° ेपद । बवे । जंद । बवेमब । ेमब । बवज । 0 1 0 अपरिभाष्िात 1 अपरिभाष्िात 1 2 3 2 1 3 2 2 3 3 1 2 1 2 1 2 2 1 3 2 1 2 3 2 3 2 1 3 1 0 अपरिभाष्िात 1 अपरिभाष्िात 0 टिप्पणीरू उपयुर्क्त सारणी से आप देख सकते हैं कि जैसे - जैसे∠ । का मान 0° से 90° तक बढ़ता जाता ह,ै ेपद ।का मान0 से बढ़कर1 हो जाता है और बवे ।का मान1 से घटकर0 हो जाता है। आइए, अब हम वुफछ उदाहरण लेकर ऊपर की सारणी में दिए गए मानों के प्रयोग को प्रद£शत करें। उदाहरण 6 रू Δ ।ठब् में जिसका कोण ठ समकोण है, ।ठ त्र 5 बउ और∠ ।ब्ठ त्र 30° ;देख्िाए आवृफति 8.19द्ध। भुजाओं ठब् और।ब् की लंबाइयाँ ज्ञात करें। हल रू भुजा ठब् की लंबाइर् ज्ञात करने के लिए हम उस त्रिाकोणमितीय अनुपात को लेंगे जिसमें ठब् और दी हुइर् आवृफति 8ण्19भुजा।ठ हो। क्योंकि ठब् कोणब् की संलग्न भुजा है, और ।ठ कोण ब् की सम्मुख भुजा है, इसलिए ।ठ त्र जंद ब् ठब्51अथार्त् त्र जंद 30° त्रठब्जिससे ठब् त्र 53बउ प्राप्त होता है। भुजा ।ब् की लंबाइर् ज्ञात करने के लिए हम ेपद 30° त्र ।ठ लेते हैं ;क्यों?द्ध ।ब् अथार्त् 1 2 त्र 5 ।ब् अथार्त् ।ब् त्र 10 बउ ध्यान दीजिए कि ऊपर के उदाहरण में तीसरी भुजा की लंबाइर् ज्ञात करने के लिए विकल्प के रूप में हम पाइथागोरस प्रमेय को लागू कर सकते थे, 222 2अथार्त् ।ब् त्र ।ठ ़ ठब् त्र 5 ़ ;5 3द्ध बउत्र10बउ उदाहरण7 रू Δ च्फत् में, जिसका कोणफ समकोण है ;देख्िाए आवृफति 8.20द्ध, च्फ त्र 3 बउ और च्त् त्र 6 बउ है।∠ फच्त् और∠ च्त्फ ज्ञात कीजिए। हल रू दिया हुआ है च्फ त्र 3 बउ और च्त् त्र 6 बउ च्फइसलिए च्त् त्र ेपद त् आवृफति 8ण्20 31या ेपद त् त्र त्र 62 अतः ∠ च्त्फ त्र 30° और, इसलिए ∠ फच्त् त्र 60° ;क्यों?द्ध आप यहाँ यह देख सकते हैं कि यदि एक समकोण त्रिाभुज की एक भुजा और कोइर् एक अन्य भाग ;जो या तो न्यून कोण हो या कोइर् एक भुजा होद्ध ज्ञात हो, तो त्रिाभुज की शेष भुजाएँ और कोण ज्ञात किए जा सकते हैं। एएउदाहरण 8 रू यदि ेपद ;। दृ ठद्ध त्र 1 बवे ;। ़ ठद्ध त्र 1 0° ढ । ़ ठ ≤ 90°ए । झ ठए तो ।22 और ठ ज्ञात कीजिए। हल रू क्योंकि ेपद ;। दृ ठद्ध त्र 21ए इसलिए, । दृ ठ त्र 30° ;क्यों?द्ध ;1द्ध और, क्योंकि बवे ;। ़ ठद्ध त्र 21ए इसलिएए। ़ ठ त्र 60° ;क्यों?द्ध ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को हल करने पर हमें । त्र45° और ठ त्र 15° प्राप्त होता है। प्रश्नावली 8ण्2 1ण् निम्नलिख्िात के मान निकालिए: ;पद्ध ेपद 60° बवे 30° ़ ेपद 30° बवे 60° ;पपद्ध 2 जंद2 45° ़ बवे2 30° दृ ेपद2 60° बवे 45° ेपद 30° ़ जंद 45° दृ बवेमब 60° ;पपपद्ध ;पअद्धेमब 30° ़ बवेमब 30° ेमब 30° ़ बवे 60° ़ बवज 45° 2 225 बवे 60°़4 ेमब 30°−जंद 45° ;अद्ध ेपद 2 30°़बवे 2 30° 2ण् सही विकल्प चुनिए और अपने विकल्प का औचित्य दीजिएः 2जंद 30 त्र ° ;पद्ध 21जंद 30 ;।द्ध ेपद 60° ;ठद्ध बवे 60° ;ब्द्ध जंद 60° ;क्द्ध ेपद 30° 1जंद °़−2 45 त्र ° °;पपद्ध 21जंद ;।द्ध जंद 90° ;ठद्ध 1 ;ब्द्ध ेपद 45° ;क्द्ध 0 ;पपपद्ध ेपद 2। त्र 2ेपद । तब सत्य होता है, जबकि । बराबर हैः ;।द्ध 0° ;ठद्ध 30° ;ब्द्ध 45° ;क्द्ध 60° ़45 2जंद30 1जंद 2 ° −°बराबर हैः;पअद्ध 30 ;।द्ध बवे 60° ;ठद्ध ेपद 60° ;ब्द्ध जंद 60° ;क्द्ध ेपद 30° 3ण् यदिजंद ;। ़ ठद्ध त्र 3 और जंद ;। दृ ठद्ध त्र 1 य 0° ढ । ़ ठ ≤ 90°य । झ ठ तो । औरठ का मान3 ज्ञात कीजिए। 4ण् बताइए कि निम्नलिख्िात में कौन - कौन सत्य हैं या असत्य हैं। कारण सहित अपने उत्तर की पुष्िट कीजिए। ;पद्ध ेपद ;। ़ ठद्ध त्रेपद । ़ ेपद ठण् ;पपद्ध θ में वृि होने के साथ ेपद θ के मान में भी वृि होती है। ;पपपद्ध θ में वृि होने के साथ बवे θ के मान में भी वृि होती है। ;पअद्ध θ के सभी मानों पर ेपद θ त्र बवे θ ;अद्ध । त्र 0° पर बवज । परिभाष्िात नहीं है। 8ण्4 पूरक कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपात आपको याद होगा कि दो कोणों को पूरक कोण तब कहा जाता है जबकि उनका योग 90° के बराबर होता है। आवृफति 8ण्21 Δ ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, क्या आपको पूरक कोणों का कोइर् युग्म दिखाइर् पड़ता है ;देख्िाए आवृफति 8.21द्ध। क्योंकि ∠ । ़ ∠ ब् त्र 90°ए अतः इनसे पूरक कोणों का एक युग्म बनता है। हम जानते हैं कि ठब् ।ठठब्ेपद ।त्र बवे ।त्र जंद । त्र ।ब् ।ब्।ठ ।ब्।ब् ।ठबवेमब । त्र ेमब ।त्र बवज । त्र ठब्।ठ ठब् ⎫ ⎪⎪⎬ ⎪ ⎪⎭ ;1द्ध आइए, अब हम ∠ ब् त्र 90° दृ ∠ । के त्रिाकोणमितीय अनुपात लिखें। सुविध के लिए हम 90° दृ ∠। के स्थान पर 90° दृ । लिखेंगे। कोण 90° दृ । की सम्मुख भुजा और संलग्न भुजा क्या होगी? आप देखेंगे कि।ठ कोण 90° दृ । की सम्मुख भुजा है और ठब् संलग्न भुजा है। अतः ।ठ ठब्।ठ ेपद ;90° दृ ।द्धत्र बवे ;90° दृ ।द्ध त्र जंद ;90° दृ ।द्धत्र ।ब्ए ।ब्ए ठब् ⎫ ⎪⎪⎬ ⎪ ⎪⎭ ;2द्ध।ब्।ब् ठब् बवेमब ;90° दृ ।द्धत्र ऐमब ;90° दृ ।द्धत्र ए बवज ;90° दृ ।द्ध त्र।ठठब् ।ठ अब ;1द्ध और ;2द्ध के अनुपातों की तुलना करने पर हम यह पाते हैं कि ।ठ ठब् ेपद ;90° दृ ।द्ध त्र त्र बवे । और बवे ;90° दृ ।द्ध त्र त्र ेपद ।ण् ।ब्।ब्।ठ ठब्और बवज । जंद । जंद ;90° दृ ।द्ध त्र ए बवज ;90° दृ ।द्ध त्र त्रत्र ठब् ।ठ ।ब् ।ब्बवेमब । त्रेमब । ेमब ;90° दृ ।द्ध त्र ए बवेमब ;90° दृ ।द्ध त्र त्र ठब् ।ठ अतः ेपद ;90° दृ ।द्ध त्र बवे ।ए बवे ;90° दृ ।द्ध त्र ेपद ।ण् जंद ;90° दृ ।द्ध त्र बवज ।ए बवज ;90° दृ ।द्ध त्र जंद । ेमब ;90° दृ ।द्ध त्र बवेमब ।ए बवेमब ;90° दृ ।द्ध त्र ेमब । जहाँ कोण । के सभी मान 0° और 90° के बीच स्िथत हैं। बताइए कि यह । त्र 0° या । त्र 90° पर लागू होता है या नहीं। टिप्पणी रू जंद 0° त्र 0 त्र बवज 90°ए ेमब 0° त्र 1 त्र बवेमब 90° और ेमब 90°ए बवेमब 0°ए जंद 90° और बवज 0° परिभाष्िात नहीं है। आइए अब हम वुफछ उदाहरण लें। जंद 65° उदाहरण 9 रू का मान निकालिए।बवज 25° हल रू जैसा कि हम जानते हैं कि बवज । त्र जंद ;90° दृ ।द्धण् अतः बवज 25° त्र जंद ;90° दृ 25°द्ध त्र जंद 65° जंद 65° जंद 65° अथार्त् 1त्रत्र बवज 25°जंद 65° उदाहरण 10 रू यदि ेपद 3। त्र बवे ;। दृ 26°द्ध हो, जहाँ, 3। एक न्यून कोण है तो । का मान ज्ञात कीजिए। हल रू यहाँ यह दिया हुआ है किेपद 3। त्र बवे ;। दृ 26°द्ध ;1द्ध क्योंकि ेपद 3। त्र बवे ;90° दृ 3।द्धए इसलिए हम ;1द्ध को इस रूप में लिख सकते हैं बवे ;90° दृ 3।द्ध त्र बवे ;। दृ 26°द्ध क्योंकि 90° दृ 3। और। दृ 26° दोनों ही न्यून कोण है, इसलिए 90° दृ 3। त्र ।दृ26° जिससे । त्र 29° प्राप्त होता है। उदाहरण 11 रू बवज 85° ़ बवे 75° को 0° और 45° के बीच के कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कीजिए। हल रू बवज 85° ़ बवे 75° त्र बवज ;90° दृ 5°द्ध ़ बवे ;90° दृ 15°द्ध त्र जंद 5° ़ ेपद 15° प्रश्नावली 8ण्3 1ण् निम्नलिख्िात का मान निकालिएः ेपद 18 ° जंद 26 ° ;पद्ध ;पपद्ध ;पपपद्ध बवे 48° दृ ेपद 42° ;पअद्ध बवेमब 31° दृ ेमब 59° बवे 72 ° बवज 64 ° 2ण् दिखाइए कि ;पद्ध जंद 48° जंद 23° जंद 42° जंद 67° त्र 1 ;पपद्ध बवे 38° बवे 52° दृ ेपद 38° ेपद 52° त्र 0 3ण् यदि जंद 2। त्र बवज ;। दृ 18°द्धए जहाँ 2। एक न्यून कोण है, तो । का मान ज्ञात कीजिए। 4ण् यदि जंद । त्र बवज ठए तो सि( कीजिए कि। ़ ठ त्र 90° 5ण् यदि ेमब 4। त्र बवेमब ;। दृ 20°द्धए जहाँ 4। एक न्यून कोण है, तो । का मान ज्ञात कीजिए। 6ण् यदि ।ए ठ और ब् त्रिाभुज।ठब् के अंतःकोण हों, तो दिखाइए कि ⎛ ठ़ ब् ⎞ ।ेपद बवे ⎜⎟ त्र ⎝ 2 ⎠2 7ण् ेपद 67° ़ बवे 75° को 0° और 45° के बीच के कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कीजिए। 8ण्5 त्रिाकोणमितीय सवर्समिकाएँ आपको याद होगा कि एक समीकरण को एक सवर्समिका तब कहा जाता है जबकि यह संबंध्ित चरों के सभी मानों के लिए सत्य हो। इसी प्रकार एक कोण के त्रिाकोणमितीय अनुपातों से संबंध्ित सवर्समिका को त्रिाकोणमितीय सवर्समिका कहा जाता है। जबकि यह संबंध्ित कोण ;कोणोंद्ध के सभी मानों के लिए सत्य होता है। इस भाग में, हम एक त्रिाकोणमितीय सवर्समिका सि( करेंगे आवृफति 8ण्22और इसका प्रयोग अन्य उपयोगी त्रिाकोणमितीय सवर्समिकाओं को सि( करने में करेंगे। Δ ।ठब् में, जो ठ पर समकोण है ;देख्िाए आवृफति 8.22द्ध हमें यह प्राप्त है ।ठ2 ़ ठब्2 त्र।ब्2 ;1द्ध ;1द्ध के प्रत्येक पद को ।ब्2 से भाग देने पर हमें यह प्राप्त होता है 22 2।ठठब् ।ब् ़ त्र 22 2।ब्।ब् ।ब् 22 2⎛ ।ठ ⎞⎛ ठब् ⎞⎛ ।ब् ⎞या ⎜ ⎟़⎜ ⎟ त्र ⎜⎟⎝ ।ब् ⎠⎝ ।ब् ⎠⎝ ।ब् ⎠ अथार्त् ;बवे ।द्ध2 ़ ;ेपद ।द्ध2 त्र1 अथार्त् बवे2। ़ ेपद2 । त्र 1 ;2द्ध यह सभी । के लिए, जहाँ 0° ≤ । ≤ 90°ए सत्य होता है। अतः यह एक त्रिाकोणमितीय सवर्समिका है। आइए, अब हम ;1द्ध को ।ठ2 से भाग दें। ऐसा करने पर हमें यह प्राप्त होता है 22 2।ठठब् ।ब़् त्र 22 2।ठ।ठ ।ठ 22 2⎛ ।ठ ⎞⎛ ठब् ⎞⎛ ।ब् ⎞या ⎜ ⎟़⎜ ⎟ त्र ⎜⎟⎝ ।ठ ⎠⎝ ।ठ ⎠⎝ ।ठ ⎠ अथार्त् 1 ़ जंद2 । त्र ेमब2 । ;3द्ध क्या यह समीकरण, । त्र 0° के लिए सत्य है? हाँ, यह सत्य है। क्या यह । त्र 90° के लिए भी सत्य है? । त्र 90° के लिए जंद । और ेमब । परिभाष्िात नहीं है। अतः ;3द्धए ऐसे सभी। के लिए सत्य होता है, जहाँ 0° ≤ । ढ 90ह् आइए हम यह देखें कि ;1द्ध को ठब्2 से भाग देने पर हमें क्या प्राप्त होता है। 22 2।ठठब् ।ब् ़ त्र 22 2ठब्ठब् ठब् 22 2।ठठब् ।ब्⎛⎞⎛⎞⎛⎞ ़अथार्त् ⎜⎟⎜⎟त्र ⎜⎟ठब् ठब् ⎝⎠ ⎝⎠⎝⎠ठब् अथार्त् बवज2 । ़ 1 त्र बवेमब2 । ;4द्ध ध्यान दीजिए कि । त्र 0° के लिए बवेमब । और बवज । परिभाष्िात नहीं है। अतः ऐसे सभी । के लिए ;4द्ध सत्य होता है जहाँ 0° ढ । ≤ 90° इन सवर्समिकाओं का प्रयोग करके हम प्रत्येक त्रिाकोणमितीय अनुपात को अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कर सकते हैं अथार्त् यदि कोइर् एक अनुपात ज्ञात हो, तो हम अन्य त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मान भी ज्ञात कर सकते हैं। आइए हम यह देखें कि इन सवर्समिकाओं का प्रयोग करके इसे हम वैफसे ज्ञात कर 1 सकते हैं। मान लीजिए हमें जंद ।त्र 3 ज्ञात है। तब बवज ।त्र 3 142 3क्योंकि ेमब2। त्र 1 ़ जंद2 । त्र 1 ़त्रए ेमब ।त्र ए और बवे ।त्र 333 2 1और, क्योंकि ेपद । त्र त्रण् इसलिए बवेमब । त्र 2 2 उदाहरण 12 रू अनुपातों बवे ।ए जंद । और ेमब । को ेपद । के पदों में व्यक्त कीजिए। हल रू क्योंकि बवे2। ़ ेपद2 । त्र 1ए इसलिए बवे2। त्र 1 दृ ेपद2 ।ए अथार्त् बवे ।त्र इससे यह प्राप्त होता है बवे । त्र − । ;क्यों?द्ध1ेपद2 ेपद। ेपद। 1 अतः जंद ।त्र त्र 2 आरै ेमब । त्र त्र 12बवे।1दृेपद । बवे। 1 −ेपद । उदाहरण 13 रू सि( कीजिए कि ेमब । ;1 दृ ेपद ।द्ध ;ेमब । ़जंद ।द्ध त्र 1 हल रू ⎛ 1 ⎞⎛ 1 ेपद । ⎞वाम पक्ष त्र ेमब । ;1 दृ ेपद ।द्ध;ेमब । ़ जंद ।द्धत्र ⎜⎟;1 −ेपद ।द्ध ⎜़⎟बवे। बवे। बवे। ⎝⎠⎝ ⎠ ;1 −ेपद।द्ध;1़ेपद।द्ध 1 −ेपद 2 । त्र त्र बवे 2 । बवे 2 । बवे 2 । त्र त्र1 त्र दाँया पक्षबवे 2 । बवज। दृबवे। बवेमब। दृ1 त्रउदाहरण 14 रू सि( कीजिए कि बवज।़बवे। बवेमब।़1 बवे । −बवे । बवज। दृबवे। ेपद। हल रू वाम पक्ष त्र त्र बवज।़ बवे। बवे। ़बवे । ेपद । ⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞बवे । −1 −1⎜ ⎟⎜⎟⎝ेपद। ⎠⎝ेपद। ⎠ बवेमब । दृ1 त्रत्र त्र दाँया पक्ष⎛ 1 ⎞⎛ 1 ⎞ बवेमब । ़1 बवे । ़1 ़1⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ेपद। ⎠⎝ेपद। ⎠उदाहरण 15 रू सवर्समिका ेमब2θ त्र 1 ़ जंद2θ का प्रयोग करके सि( कीजिए कि ेपद θ−बवे θ़ 11 त्र ेपद θ़ बवे θ−1 ेमब θ−जंद θ हल रू क्योंकि हमें ेमब θ और जंद θ से संबंध्ित सवर्समिका प्रयुक्त करनी है, इसलिए आइए हम सबसे पहले सवर्समिका के वाम पक्ष के अंश और हर को बवे θ से भाग देकर वाम पक्ष को ेमब θ और जंद θ के पदों में रूपांतरित करें। ेपदθ दृ बवे θ़ 1 जंद θ− 1 ़ेमब θवाम पक्ष त्र त्र ेपद θ़ बवे θदृ 1 जंद θ़ 1 −ेमब θ ;जंद θ़ेमब θ− 1 क्ष्;जंद θ़ेमब θ− 1द्व ;जंद θ−ेमब θद्धद्धद्धत्रत्र ;जंद θ−ेमब θ़ 1 क्ष्;जंद θ− ेमब θ़ 1द्व ;जंद θ− ेमब θद्धद्धद्ध ;जंद 2 θ−ेमब 2 θ− ;जंद θ−ेमब द्धद्ध θ त्र क्ष्जंद θ−ेमब θ़1द्व ;जंद θ−ेमब θद्ध दृ1 −जंद θ़ ेमब θ त्र ;जंद θ−ेमब θ़ 1द्ध ;जंद θ−ेमब θद्ध दृ1 1 एत्र त्र जंद θ−ेमब θ ेमब θ−जंद θ जो सि( की जाने वाली अपेक्ष्िात सवर्समिका का दाँया पक्ष है। प्रश्नावली 8ण्4 1ण् त्रिाकोणमितीय अनुपातों ेपद ।ए ेमब । और जंद । को बवज । के पदों में व्यक्त कीजिए। 2ण् ∠ । के अन्य सभी त्रिाकोणमितीय अनुपातों को ेमब । के पदों मंे लिख्िाए। 3ण् मान निकालिए: ेपद 2 63 °़ेपद 2 27 ° ;पद्ध2 2बवे 17°़बवे 73° ;पपद्ध ेपद 25° बवे 65° ़ बवे 25° ेपद 65° 4ण् सही विकल्प चुनिए और अपने विकल्प की पुष्िट कीजिए: ;पद्ध 9 ेमब2। दृ 9 जंद2 । बराबर हैः ;।द्ध 1 ;ठद्ध9 ;ब्द्ध8 ;क्द्ध0 ;पपद्ध ;1 ़ जंद θ ़ ेमब θद्ध ;1 ़ बवज θ दृ बवेमब θद्ध बराबर हैः ;।द्ध 0 ;ठद्ध 1 ;ब्द्ध 2 ;क्द्धदृ1 ;पपपद्ध ;ेमब ।़ जंद ।द्ध ;1 दृेपद ।द्ध बराबर हैः ;।द्ध ेमब । ;ठद्ध ेपद । ;ब्द्ध बवेमब । ;क्द्ध बवे । 1जंद 2 ।़ ;पअद्ध 2 बराबर हैः1़बवज । ;।द्ध ेमब2 । ;ठद्ध दृ1 ;ब्द्ध बवज2 । ;क्द्धजंद2 । 5ण् निम्नलिख्िात सवर्समिकाएँ सि( कीजिए, जहाँ वे कोण, जिनके लिए व्यंजक परिभाष्िात है, न्यून कोण है: 1बवे θ− ;पद्ध ;बवेमब θ दृ बवज θद्ध2 त्र ़1बवे θ बवे। 1 ़ेपद । ;पपद्ध ़त्र2ेमब । 1़ेपद। बवे। जंद θ बवज θ त्र1ेमब θबवेमब θ;पपपद्ध ़़ 1बवज θ 1 θ−−जंद ख्संकेतः व्यंजक कोेपद θ और बवे θ के पदों में लिख्िए, 1ेमब । ेपद 2 ।़ त्र;पअद्ध ेमब। 1दृबवे। ख्संकेतः वाम पक्ष और दाँया पक्ष को अलग - अलग सरल कीजिए।, ;अद्ध सवर्समिका बवेमब2। त्र 1 ़ बवज2 । को लागू करके बवे। दृेपद। ़1 त्रबवेमब। ़बवज। बवे। ़ेपद।दृ1 त्रेमब । ़जंद। ेपद θ−2 ेपद 3 θ;अपपद्ध 3 त्रजंद θ 2 बवे θ−बवे θ ;अपपपद्ध ;ेपद ।़बवेमब ।द्ध2 ़ ;बवे ।़ेमब ।द्ध2 त्र 7 ़ जंद2। ़ बवज2 । 1;बवेमब । दृ ेपद ।द्ध;ेमब । दृ बवे ।द्ध त्र;पगद्ध जंद। ़बवज । ख्संकेत रू वाम पक्ष और दाँया पक्ष को अलग - अलग सरल कीजिए, ⎛1जंद 2 । −⎞2 ़ ⎞⎛ 1जंद । त्र;गद्ध ⎝⎜ 2 ⎟⎜ ⎝ ⎟ त्र जंद2।1़बवज । ⎠1 दृ बवज । ⎠ 8ण्6 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात तथ्यों का अध्ययन किया हैः 1ण् समकोण त्रिाभुज ।ठब् में, जिसका कोण ठ समकोण है, ेा। की सम्मख भजुा को।काण्ु ण की सलंग्न भजुाेपद ।त्र एबवे। त्र कणर् कणर् कोण । की सम्मख्ुा भुजा जंद । त्र कोण । की संलग्न भजुा 1 1 1 ेपद। 2ण् बवेमब। त्र येमब।त्र यजंद। त्र एजंद। त्र ेपद । बवे। बवज। बवे। 3ण् यदि एक न्यून कोण का एक त्रिाकोणमितीय अनुपात ज्ञात हो, तो कोण के शेष त्रिाकोणमितीय अनुपात सरलता से ज्ञात किए जा सकते हैं। 4ण् 0°ए 30°ए 45°ए 60° और 90° के कोणों के त्रिाकोणमितीय अनुपातों के मान। 5ण् ेपद । या बवे । का मान कभी भी 1 से अध्िक नहीं होता, जबकि ेमब । या बवेमब । का मान सदैव 1 से अध्िक या 1 के बराबर होता है। 6ण् ेपद ;90° दृ ।द्ध त्र बवे ।ए बवे ;90° दृ ।द्ध त्र ेपद ।य जंद ;90° दृ ।द्ध त्र बवज ।ए बवज ;90° दृ ।द्ध त्र जंद ।य ेमब ;90° दृ ।द्ध त्र बवेमब ।ए बवेमब ;90° दृ ।द्ध त्र ेमब ।ण् 7ण् ेपद2 । ़ बवे2 । त्र 1 ेमब2। दृ जंद2 । त्र 1 जहाँ 0° ≤ । ढ 90° बवेमब2 । त्र 1 ़ बवज2 । जहाँ 0° ढ ।≤ 90ह्

>Chap–8>


8

त्रिकोणमिति का परिचय


There is perhaps nothing which so occupies the middle position of mathematics as trigonometry.

(संभवतः त्रिकोणमिति के अतिरिक्त गणित की कोई एेसी शाखा नहीं है, जो उसकी मध्य स्थिति का स्थान ले सके।)

– J.F. Herbart (1890)

 

8.1 भूमिका

आप अपनी पिछली कक्षाओं में त्रिभुजों, विशेष रूप से समकोण त्रिभुजों के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। आइए हम अपने आस-पास के परिवेश से कुछ एेसे उदाहरण लें, जहाँ समकोण त्रिभुजों के बनने की कल्पना की जा सकती है। उदाहरण के लिए :

844.png

 

आकृति 8.1

1. मान लीजिए एक स्कूल के छात्र कुतुबमीनार देखने गए हैं। अब, यदि कोई छात्र मीनार के शिखर को देख रहा हो, तो एक समकोण त्रिभुज बनने की कल्पना की जा सकती है जैसाकि आकृति 8.1 में दिखाया गया है। क्या वास्तव में मापे बिना ही छात्र मीनार की ऊँचाई ज्ञात कर सकता है?

2. मान लीजिए एक लड़की नदी के किनारे स्थित अपने मकान की बालकनी पर बैठी हुई है और वह इस नदी के दूसरे किनारे पर स्थित पास ही के मंदिर की एक निचली सीढ़ी पर रखे गमले को देख रही है। इस स्थिति में, एक समकोण त्रिभुज बनने की कल्पना की जा सकती है जैसाकि आकृति 8.2 में दिखाया गया है, यदि आपको वह ऊँचाई ज्ञात हो, जिस पर लड़की बैठी हुई है, तो क्या आप नदी की चौड़ाई ज्ञात कर सकते हैं?

949.png

आकृति 8.2

3. मान लीजिए एक गर्म हवा वाला गुब्बारा हवा में उड़ रहा है। आसमान में उड़ने पर इस गुब्बारे को एक लड़की देख लेती है और इस बात को बताने के लिए वह अपनी माँ के पास दौड़कर जाती है। गुब्बारे को देखने के लिए उसकी माँ तुरंत घर से बाहर निकल आती है। अब मान लीजिए कि जब पहले-पहल लड़की गुब्बारे को देखती है, तब गुब्बारा बिंदु A पर था। जब माँ-बेटी दोनों ही गुब्बारे को देखने के लिए बाहर निकलकर आती हैं तब तक गुब्बारा एक अन्य बिंदु B तक आ चुका होता है। क्या आप जमीन के उस स्थान से, जहाँ माँ और बेटी दोनों खड़ी हैं, B की ऊँचाई ज्ञात कर सकते हैं?

963.png


आकृति 8.3


ऊपर बताई गई सभी स्थितियों में दूरियाँ अथवा ऊँचाईयाँ कुछ गणितीय तकनीकों को, जो त्रिकोणमिति नामक गणित की एक शाखा के अंतर्गत आते हैं, लागू करके ज्ञात किया जा सकता है। अंग्रेजी शब्द ‘trigonometry’ की व्युत्पत्ति ग्रीक शब्दों ‘tri’ (जिसका अर्थ है तीन), ‘gon’ (जिसका अर्थ है, भुजा) और ‘metron’ (जिसका अर्थ है माप) से हुई है। वस्तुतः त्रिकोणमिति में एक त्रिभुज की भुजाओं और कोणों के बीच के संबंधों का अध्ययन किया जाता है। प्राचीन काल में त्रिकोणमिति पर किए गए कार्य का उल्लेख मिस्र और बेबीलॉन में मिलता है। प्राचीन काल के खगोलविद् त्रिकोणमिति का प्रयोग पृथ्वी से तारों और ग्रहों की दूरियाँ मापने में करते थे। आज भी इंजीनियरिंग और भौतिक विज्ञान में प्रयुक्त अधिकांश प्रौद्योगिकीय उन्नत विधियाँ त्रिकोणमितीय संकल्पनाओं पर आधारित हैं।

इस अध्याय में हम एक समकोण त्रिभुज की भुजाओं के कुछ अनुपातों का उसके न्यून कोणों के सापेक्ष अध्ययन करेंगे जिन्हें कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात कहते हैं। यहाँ हम अपनी चर्चा केवल न्यून कोणों तक ही सीमित रखेंगे। यद्यपि इन अनुपातों का विस्तार दूसरे कोणों के लिए भी किया जा सकता है। यहाँ हम 0° और 90° के माप वाले कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों को भी परिभाषित करेंगे। हम कुछ विशिष्ट कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात परिकलित करेंगे और इन अनुपातों से संबंधित कुछ सर्वसमिकाएँ (identities), जिन्हें त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ कहा जाता है, स्थापित करेंगे।

 8.2 त्रिकोणमितीय अनुपात

अनुच्छेद 8.1 में आप विभिन्न स्थितियों में बने कुछ समकोण त्रिभुजों की कल्पना कर चुके हैं।

आइए हम एक समकोण त्रिभुज ABC लें, जैसाकि आकृति 8.4 में दिखाया गया है।

913.png


आकृति 8.4

यहाँ, CAB (या संक्षेप में कोण A) एक न्यून कोण है। कोण A के सापेक्ष भुजा BC की स्थिति पर ध्यान दीजिए। यह भुजा कोण A के सामने है। इस भुजा को हम कोण A की सम्मुख भुजा कहते हैं, भुजा AC समकोण त्रिभुज का कर्ण है और भुजा AB, A का एक भाग है। अतः इसे हम कोण A की संलग्न भुजा कहते हैं।

ध्यान दीजिए कि कोण A के स्थान पर कोण C लेने पर भुजाओं की स्थिति बदल जाती है। (देखिए आकृति 8.5)

933.png

आकृति 8.4


पिछली कक्षाओं में आप "अनुपात" की संकल्पना के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। यहाँ अब हम समकोण त्रिभुज की भुजाओं से संबंधित कुछ अनुपातों को, जिन्हें हम त्रिकोणमितीय अनुपात कहते हैं, परिभाषित करेंगे।

समकोण त्रिभुज ABC (देखिए आकृति 8.4) के कोण A के त्रिकोणमितीय अनुपात निम्न प्रकार से परिभाषित किए जाते हैंः

Screenshot from 2019-06-20 12-01-49

Screenshot from 2019-06-20 12-02-53


ऊपर परिभाषित किए गए अनुपातों को संक्षेप में क्रमशः sin A, cos A, tan A, cosec A, sec A और cot A लिखा जाता है। ध्यान दीजिए कि अनुपात cosec A, sec A और cot A अनुपातों sin A, cos A और tan A के क्रमशः व्युत्क्रम होते हैं।

और आप यहाँ यह भी देख सकते हैं कि tan A = 1591.png और  cotA = 1596.png

1037.png

अतः एक समकोण त्रिभुज के एक न्यून कोण के त्रिकोणमितीय अनुपात त्रिभुज के कोण और उसकी भुजाओं की लंबाई के बीच के संबंध को व्यक्त करते हैं।

क्यों न यहाँ आप एक समकोण त्रिभुज के कोण C के त्रिकोणमितीय अनुपातों को परिभाषित करने का प्रयास करें (देखिए आकृति 8.5)?


1026.png

आर्यभट्ट
476 – 550 सा.यु.


शब्द “sine” का सबसे पहला प्रयोग जिस रूप में आज हम करते हैं उसका उल्लेख 500 ई. में आर्यभट्ट द्वारा लिखित पुस्तक आर्यभटीयम में मिलता है। आर्यभट्ट ने शब्द  अर्ध-ज्या का प्रयोग अर्ध-जीवा के लिए किया था जिसने समय-अंतराल में ज्या या जीवा का संक्षिप्त रूप ले लिया। जब पुस्तक आर्यभटीयम का अनुवाद अरबी भाषा में किया गया, तब शब्द जीवा को यथावत रख लिया गया। शब्द जीवा को साइनस (Sinus) के रूप में अनूदित किया गया, जिसका अर्थ वक्र है, जबकि अरबी रूपांतर को लैटिन में अनूदित किया गया। इसके तुरंत बाद sine के रूप में प्रयुक्त शब्द sinus भी पूरे यूरोप में गणितीय पाठों में प्रयुक्त होने लगा। खगोलविद् के एक अंग्रेजी प्रोफ़ेसर एडमंड गुंटर (1581-1626) ने पहले-पहल संक्षिप्त संकेत ‘sin’ का प्रयोग किया था।

शब्दों ‘cosine’ और ‘tangent’ का उद्गम बहुत बाद में हुआ था। cosine फलन का उद्गम पूरक कोण के sine का अभिकलन करने को ध्यान में रखकर किया गया था। आर्यभट्ट ने इसे कोटिज्या का नाम दिया था। नाम cosinus का उद्गम एडमंड गुंटर के साथ हुआ था। 1674 में अंग्रेज गणितज्ञ सर जोनास मूरे ने पहले-पहल संक्षिप्त संकेत ‘cos’ का प्रयोग किया था।


टिप्पणी : ध्यान दीजिए कि प्रतीक sin A का प्रयोग कोण A’ के sin के संक्षिप्त रूप में किया गया है। यहाँ sinA, sin और A का गुणनफल नहीं है। A से अलग रहकर ‘sin’ का कोई अर्थ ही नहीं होता। इसी प्रकार cosA, ‘cos’ और A का गुणनफल नहीं है। इस प्रकार की व्याख्या अन्य त्रिकोणमितीय अनुपातों के साथ भी की जाती है।

अब, यदि हम समकोण त्रिभुज ABC के कर्ण AC पर एक बिंदु P लें या बढ़ी हुई भुजा AC पर बिंदु Q लें और AB पर लंब PM डालें और बढ़ी हुई भुजा AB पर लंब QN डालें (देखिए आकृति 8.6), तो ∆ PAM के ∠ A के त्रिकोणमितीय अनुपातों और ∆ QAN के ∠ A के त्रिकोणमितीय अनुपातों में क्या अंतर होगा?

Screenshot from 2019-06-24 15-27-11

इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात करने के लिए आइए पहले हम इन त्रिभुजों को देखें। क्या  ∆ PAM और ∆ CAB समरूप हैं? आपको याद होगा कि अध्याय 6 में आप AA समरूपता कसौटी के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। इस कसौटी को लागू करने पर आप पाएँगे कि त्रिभुज PAM और CAB समरूप हैं। अतः समरूप त्रिभुजों के गुणधर्म के अनुसार इन त्रिभुजों की संगत भुजाएँ आनुपातिक हैं।

Screenshot from 2019-06-24 15-27-51

इसी प्रकार Screenshot from 2019-06-24 15-28-32आदि-आदि

इससे यह पता चलता है कि PAM के कोण A के त्रिकोणमितीय अनुपात और CAB के कोण A के त्रिकोणमितीय अनुपातों में कोई अंतर नहीं होता।

इसी प्रकार आप यह जाँच कर सकते हैं कि QAN में भी sinA का मान (और अन्य त्रिकोणमितीय अनुपातों का मान) समान बना रहता है।

अपने प्रेक्षणों से अब यह स्पष्ट हो जाता है कि यदि कोण समान बना रहता हो, तो एक कोण के त्रिकोणमितीय अनुपातों के मानों में त्रिभुज की भुजाओं की लंबाइयों के साथ कोई परिवर्तन नहीं होता।

टिप्पणी : सुविधा के लिए (sinA)2, (cosA)2, आदि के स्थान पर हम क्रमशः sin2A, cos2A आदि लिख सकते हैं। परंतु cosec A = (sin A)–1 sin–1 A (इसे साइन इनवर्स A कहा जाता है)। sin–1 A का एक अलग अर्थ होता है जिस पर चर्चा हम उच्च कक्षाओं में करेंगे। इसी प्रकार की परंपराएँ अन्य त्रिकोणमितीय अनुपातों पर भी लागू होती हैं। कभी-कभी ग्रीक अक्षर θ (थीटा) का प्रयोग कोण को प्रकट करने के लिए किया जाता है।

यहाँ हमने एक न्यून कोण के छः त्रिकोणमितीय अनुपात परिभाषित किए हैं। यदि हमें कोई एक अनुपात ज्ञात हो, तो क्या हम अन्य अनुपात प्राप्त कर सकते हैं? आइए हम इस पर विचार करें।

यदि एक समकोण त्रिभुज ABC में  sin A = 1631.png ब इसका अर्थ यह है कि 1636.png, अर्थात् त्रिभुज ABC की भुजाओं BC AC की लंबाइयाँ 1 : 3 के अनुपात में हैं (देखिए आकृति 8.7)। अतः यदि BC, k के बराबर हो, तो AC, 3k के बराबर होगी, जहाँ k एक धन संख्या है। कोण A के अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात करने के लिए हमेें तीसरी भुजा AB की लंबाई ज्ञात करनी होती है। क्या आपको पाइथागोरस प्रमेय याद है? आइए हम पाइथागोरस प्रमेय की सहायता से अपेक्षित लंबाई AB ज्ञात करें।

Screenshot from 2019-06-24 15-29-20

AB2 = AC2 – BC2 = (3k)2 – (k)2 = 8k2 = (21641.pngk)2

अतः AB = 1646.png

अतः हमें प्राप्त होता है AB = 1651.png (AB = –1656.png क्यों नहीं है?)

अब cos A = 1662.png

इसी प्रकार, आप कोण A के अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात प्राप्त कर सकते हैं।


टिप्पणी : क्योंकि समकोण त्रिभुज का कर्ण, त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा होता है, इसलिए sin A या cos A का मान सदा ही 1 से कम होता है (या विशेष स्थिति में 1 के बराबर होता है।)

आइए अब हम कुछ उदाहरण लेें।

उदाहरण 1 : यदि tan A = 1667.png, तो कोण A के अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात कीजिए।

हल : आइए सबसे पहले हम एक समकोण ABC खींचें (देखिए आकृति 8.8)।

Screenshot from 2019-06-24 15-29-59

अब, हम जानते हैं कि tan A = 1672.png

अतः यदि BC = 4k, तब AB = 3k, जहाँ k धन संख्या है।

अब पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर हमें यह प्राप्त होता है

AC2 = AB2 + BC2 = (4k)2 + (3k)2 = 25k2

इसलिए AC = 5k

अब हम इनकी परिभाषाओं की सहायता से सभी त्रिकोणमितीय अनुपात लिख सकते हैं।

sin A = 1677.png

cos A = 1682.png

अतः cot A = 1687.png और sec A = 1692.png

उदाहरण 2 : यदि B और Q एेसे न्यूनकोण हों जिससे कि sin B = sin Q, तो सिद्ध कीजिए कि B = Q

हल : आइए हम दो समकोण त्रिभुज ABC और PQR लें, जहाँ sin B = sin Q (देखिए आकृति 8.9)।

Screenshot from 2019-06-24 15-31-01

यहाँ     sin B = 1697.png

और      sin Q = 1702.png

तब      1707.png = 1713.png

अतः     1718.png = 1723.png (मान लीजिए) (1)

अब, पाइथागोरस प्रमेय लागू करने पर हमें ये प्राप्त होते हैं

Screenshot from 2019-06-20 12-30-12

(1) और (2) से हमें यह प्राप्त होता है

1748.png = 1753.png 

तब प्रमेय 6.4 का प्रयोग करने पर ACB ~ PRQ प्राप्त होता है। अतः B = Q

उदाहरण 3 : ACB लीजिए जिसका कोण C समकोण है जिसमें AB = 29 इकाई, BC = 21 इकाई और  ABC = θ (देखिए आकृति 8.10) हैं तो निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिए।

(i) cos2 θ + sin2 θ

(ii) cos2 θ – sin2 θ.

Screenshot from 2019-06-24 15-32-16

हल : ACB में हमें यह प्राप्त होता है

Screenshot from 2019-06-20 12-33-25

Screenshot from 2019-06-20 12-33-48

Screenshot from 2019-06-20 12-34-21


उदाहरण 4 : एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसका कोण B समकोण है, यदि tan A = 1 तो सत्यापित कीजिए कि 2 sin A cos A = 1

हल : ABC में tan A = 1789.png = 1 (देखिए आकृति 8.11)

Screenshot from 2019-06-24 15-32-52

अर्थात् BC = AB

मान लीजिए AB = BC = k, जहाँ k एक धन संख्या है।

अब AC =Screenshot from 2019-06-20 12-46-34

Screenshot from 2019-06-20 12-47-12

इसलिए 2 sin A cos A = 1815.png जो कि अपेक्षित मान है।

उदाहरण 5 : OPQ में, जिसका कोण P समकोण है, OP = 7 cm और OQ – PQ = 1 cm (देखिए आकृति 8.12), sin Q और cos Q के मान ज्ञात कीजिए।

Screenshot from 2019-06-24 15-33-19

हल : OPQ से हमें यह प्राप्त है कि

OQ2 = OP2 + PQ2

अर्थात् (1 + PQ)2 = OP2 + PQ2     (क्यों?)

अर्थात् 1 + PQ2 + 2PQ = OP2 + PQ2

अर्थात् 1 + 2PQ = 72     (क्यों?)

अर्थात् PQ = 24 cm और OQ = 1 + PQ = 25 cm

अतः sin Q = 1820.png और cos Q = 1825.png

प्रश्नावली 8.1

1. ABC में, जिसका कोण B समकोण है, AB = 24 cm BC = 7 cm है। निम्नलिखित का मान ज्ञात कीजिए :

(i) sin A, cos A

(ii) sin C, cos C

2. आकृति 8.13 में, tan P – cot R का मान ज्ञात कीजिए।

Screenshot from 2019-06-24 15-35-32

3. यदि sin A = 1830.png तो cos A और tan A का मान परिकलित कीजिए।

4. यदि 15 cot A = 8 हो तो sin A और sec A का मान ज्ञात कीजिए।

5. यदि sec θ = 1835.png हो तो अन्य सभी त्रिकोणमितीय अनुपात परिकलित कीजिए।

6. यदि A और B न्यून कोण हो, जहाँ cos A = cos B, तो दिखाइए कि A = B

7. यदि cot θ = 1840.png तो (i) Screenshot from 2019-06-20 12-49-03

(ii) cot2 θ का मान निकालिए?

8. यदि 3 cot A = 4, तो जाँच कीजिए कि 1850.png = cos2 A – sin2A है या नहीं।

9. त्रिभुज ABC में, जिसका कोण B समकोण है, यदि tan A = 1855.png तो निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिएः

(i) sin A cos C + cos A sin C

(ii) cos A cos C – sin A sin C

10. PQR में, जिसका कोण Qमकोण है, PR + QR = 25 cm और PQ = 5 cm है। sin P, cos P और tan P के मान ज्ञात कीजिए।

11. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य। कारण सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

(i) tan A का मान सदैव 1 से कम होता है।

(ii) कोण A के किसी मान के लिए sec A = 1860.png

(iii) cos A, कोण A के cosecant के लिए प्रयुक्त एक संक्षिप्त रूप है।

(iv) cot A, cot और A का गुणनफल होता है।

(v) किसी भी कोण θ के लिए sin θ = 1866.png

8.3 कुछ विशिष्ट कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात

ज्यामिति के अध्ययन से आप 30°, 45°, 60° और 90° के कोणों की रचना से आप अच्छी तरह से परिचित हैं। इस अनुच्छेद में हम इन कोणों और साथ ही 0° वाले कोण के त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान ज्ञात करेंगे।

45° के त्रिकोणमितीय अनुपात

ABC में, जिसका कोण B समकोण है, यदि एक कोण 45° का हो, तो अन्य कोण भी 45° का होगा अर्थात्   A = C = 45° (देखिए आकृति 8.14)।

अतः    BC = AB (क्यों?)

अब मान लीजिए BC = AB = a

तब पाइथागोरस प्रमेय के अनुसार AC2 = AB2 + BC2 = a2 + a2 = 2a2

इसलिए AC = 1871.png

त्रिकोणमितीय अनुपातों की परिभाषाओं को लागू करने पर हमें यह प्राप्त होता है :

Screenshot from 2019-06-20 12-54-28


30° और 60° के त्रिकोणमितीय अनुपात

आइए, अब हम 30° और 60° के त्रिकोणमितीय अनुपात परिकलित करें। एक समबाहु त्रिभुज ABC पर विचार करें। क्योंकि समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण, 60º का होता है, इसलिए A = B = C = 60°

A से भुजा BC पर लंब AD डालिए (देखिए आकृति 8.15)।

Screenshot from 2019-06-24 15-36-10

अब ABD ≅ ∆ ACD         (क्यों?)

इसलिए BD = DC

और BAD = CAD (CPCT)

अब आप यह देख सकते हैं किः

ABD एक समकोण त्रिभुज है जिसका कोण D समकोण है, और जहाँ BAD = 30° और ABD = 60° (देखिए आकृति 8.15)।

जैसा कि आप जानते हैं, कि त्रिकोणमितीय अनुपातों को ज्ञात करने के लिए हमें त्रिभुज की भुजाओं की लंबाइयाँ ज्ञात करने की आवश्यकता होती है। आइए, हम यह मान लें कि AB = 2a

Screenshot from 2019-06-20 14-26-14

और 90° के त्रिकोणमितीय अनुपात

आइए, हम देखें कि यदि समकोण त्रिभुज ABC के कोण A को तब तक और छोटा किया जाए जब तक कि यह शून्य नहीं हो जाता है, तब इस स्थिति में कोण A के त्रिकोणमितीय अनुपातों पर क्या प्रभाव पड़ता है (देखिए आकृति 8.16)। जैसे-जैसे ∠ A छोटा होता जाता है, वैसे-वैसे भुजा BC की लंबाई कम होती जाती है। बिंदु C, बिंदु B के निकट आता जाता है और अंत में, जब ∠A, 0° के काफी निकट हो जाता है तब AC लगभग वही हो जाता है जो कि AB है (देखिए आकृति 8.17)।

Screenshot from 2019-06-24 15-36-53

Screenshot from 2019-06-24 15-37-32

जब A, के अत्यधिक निकट होता है तब BC, 0 के अत्यधिक निकट आ जाता है। तब sin A = 1973.png का मान 0 के अत्यधिक निकट आ जाता है। और, जब A, के अत्यधिक निकट होता है, तब AC लगभग वही होता है जो कि AB होता है और cos A = 1978.png का मान 1 के अत्यधिक समीप होता है।

इसकी सहायता से हम उस स्थिति में sin A और cos A के मान परिभाषित कर सकते हैं जबकि A = 0°, हम sin 0° = 0 और cos 0° = 1 परिभाषित करते हैं।

इनका प्रयोग करने पर हमें ये प्राप्त होते हैंः

tan 0° = 1983.png = 0, cot 0° = 1988.png जो कि परिभाषित नहीं है (क्यों?)

sec 0° = 1993.png = 1 तथा cosec 0° = 1998.png और यह भी परिभाषित नहीं है। (क्यों?)

आइए अब हम उस स्थिति में देखें कि ∠ A के त्रिकोणमितीय अनुपातों के साथ क्या होता है जबकि ∆ ABC के इस कोण को तब तक बड़ा किया जाता है, जब तक कि 90° का नहीं हो जाता। ∠ A जैसे-जैसे बड़ा होता जाता है, ∠ C वैसे-वैसे छोटा होता जाता है। अतः ऊपर वाली स्थिति की भाँति भुजा AB की लंबाई कम होती जाती है। बिंदु A, बिंदु B के निकट होता जाता है और, अंत में जब ∠ A, 90° के अत्यधिक निकट आ जाता है, तो ∠ C, 0° के अत्यधिक निकट आ जाता है और भुजा AC भुजा BC के साथ लगभग संपाती हो जाती है (देखिए आकृति 8.18)।
Screenshot from 2019-06-24 15-38-14
जब ∠ C, 0° के अत्यधिक निकट होता है तो ∠ A, 90° के अत्यधिक निकट हो जाता है और भुजा AC लगभग वही हो जाती है, जो भुजा BC है। अतः sin A, 1 के अत्यधिक निकट हो जाता है और, जब ∠ A , 90° के अत्यधिक निकट होता है, तब ∠ C, 0° के अत्यधिक निकट हो जाता है और भुजा AB लगभग शून्य हो जाती है। अतः cos A, 0 के अत्यधिक निकट हो जाता है।
अतः हम यह परिभाषित करते हैं : sin 90° = 1 और cos 90° = 0
अब आप क्यों नहीं 90° के अन्य त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात करते हैं?
अब हम तुरंत संदर्भ के लिए एक सारणी 8.1 के रूप में 0°, 30°, 45°, 60° और 90° के सभी त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान प्रस्तुत करेंगे।
Screenshot from 2019-06-20 14-31-45

टिप्पणी : उपर्युक्त सारणी से आप देख सकते हैं कि जैसे-जैसे ∠ A का मान 0° से 90° तक बढ़ता जाता है, sin A का मान 0 से बढ़कर 1 हो जाता है और cos A का मान 1 से घटकर 0 हो जाता है।

आइए, अब हम कुछ उदाहरण लेकर ऊपर की सारणी में दिए गए मानों के प्रयोग को प्रदर्शित करें।

उदाहरण 6 : ∆ ABC में जिसका कोण B समकोण है,  AB = 5 cm और ∠ ACB = 30° (देखिए आकृति 8.19)। भुजाओं BC और AC की लंबाइयाँ ज्ञात करें।

Screenshot from 2019-06-24 15-39-08

हल : भुजा BC की लंबाई ज्ञात करने के लिए हम उस त्रिकोणमितीय अनुपात को लेंगे जिसमें BC और दी हुई भुजा AB हो। क्योंकि BC कोण C की संलग्न भुजा है, और AB कोण C की सम्मुख भुजा है, इसलिए

Screenshot from 2019-06-20 14-34-02

भुजा AC की लंबाई ज्ञात करने के लिए हम

Screenshot from 2019-06-20 14-34-25

ध्यान दीजिए कि ऊपर के उदाहरण में तीसरी भुजा की लंबाई ज्ञात करने के लिए विकल्प के रूप में हम पाइथागोरस प्रमेय को लागू कर सकते थे,

अर्थात् Screenshot from 2019-06-20 14-35-12

उदाहरण 7 : PQR में, जिसका कोण Q समकोण  है (देखिए आकृति 8.20), PQ = 3 cm और  PR = 6 cm है। QPR और PRQ ज्ञात कीजिए।

Screenshot from 2019-06-24 15-39-45

हल : दिया हुआ है PQ = 3 cm और PR = 6 cm

इसलिए 2115.png = sin R

या sin R = 2121.png

अतः PRQ = 30°

और, इसलिए QPR = 60° (क्यों?)

आप यहाँ यह देख सकते हैं कि यदि एक समकोण त्रिभुज की एक भुजा और कोई एक अन्य भाग (जो या तो न्यून कोण हो या कोई एक भुजा हो) ज्ञात हो, तो त्रिभुज की शेष भुजाएँ और कोण ज्ञात किए जा सकते हैं।

उदाहरण 8 : यदि sin (A – B) = 2126.png cos (A + B) = 2131.png0° < A + B 90°, A > B, तोऔर B ज्ञात कीजिए।

हल : क्योंकि sin (A – B) = 2136.png, इसलिए, A – B = 30° (क्यों?) (1)

और, क्योंकि cos (A + B) = 2141.png, इसलिए, A + B = 60° (क्यों?) (2)

(1) और (2) को हल करने पर हमें A = 45° और B = 15° प्राप्त होता है।

प्रश्नावली 8.2

1. निम्नलिखित के मान निकालिए:

(i) sin 60° cos 30° + sin 30° cos 60° (ii) 2 tan2 45° + cos2 30° – sin2 60°

Screenshot from 2019-06-20 14-38-41

2. सही विकल्प चुनिए और अपने विकल्प का औचित्य दीजिएः

(i)Screenshot from 2019-06-20 14-44-44

(A) sin 60°

(B) cos 60°

(C) tan 60°

(D) sin 30°

(ii)Screenshot from 2019-06-20 14-45-32

(A) tan 90°

(B) 1

(C) sin 45°

(D) 0

(iii) sin 2A = 2 sin A तब सत्य होता है, जबकि A बराबर हैः

(A) 0° (B) 30° (C) 45° (D) 60°

(iv) Screenshot from 2019-06-20 14-46-17 बराबर हैः

(A) cos 60°

(B) sin 60°

(C) tan 60°

(D) sin 30°

3. यदि tan (A + B) = 2177.png और tan (A – B) = 2182.png; 0° < A + B 90°; A > B तो A और B का मान ज्ञात कीजिए।

4. बताइए कि निम्नलिखित में कौन-कौन सत्य हैं या असत्य हैं। कारण सहित अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

(i) sin (A + B) = sin A + sin B.

(ii) θ में वृद्धि होने के साथ sin θ के मान में भी वृद्धि होती है।

(iii) θ में वृद्धि होने के साथ cos θ के मान में भी वृद्धि होती है।

(iv) θ के सभी मानों पर sin θ = cos θ

(v) A = 0° पर cot A परिभाषित नहीं है।

8.4 पूरक कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपात

आपको याद होगा कि दो कोणों को पूरक कोण तब कहा जाता है जबकि उनका योग 90° के बराबर होता है।

ABC में, जिसका कोण B समकोण है, क्या आपको पूरक कोणों का कोई युग्म दिखाई पड़ता है (देखिए आकृति 8.21)।

1383.png

आकृति 8.21


क्योंकि A + C = 90°, अतः इनसे पूरक कोणों का एक युग्म बनता है। हम जानते हैं कि

Screenshot from 2019-06-20 14-48-04

आइए, अब हम C = 90° – A के त्रिकोणमितीय अनुपात लिखें।

सुविधा के लिए हम 90° – A के स्थान पर 90° – A लिखेंगे।

कोण 90° – A की सम्मुख भुजा और संलग्न भुजा क्या होगी?

आप देखेंगे कि AB कोण 90° – A की सम्मुख भुजा है और BC संलग्न भुजा है। अतः

Screenshot from 2019-06-20 14-48-43

अब (1) और (2) के अनुपातों की तुलना करने पर हम यह पाते हैं कि

Screenshot from 2019-06-20 14-49-28

अतः sin (90° – A) = cos A, cos (90° – A) = sin A.

tan (90° – A) = cot A, cot (90° – A) = tan A

sec (90° – A) = cosec A, cosec (90° – A) = sec A

जहाँ कोण A के सभी मानऔर 90° के बीच स्थित हैं। बताइए कि यह A = 0° या
A = 90° पर लागू होता है या नहीं।

टिप्पणी : tan 0° = 0 = cot 90°, sec 0° = 1 = cosec 90° और sec 90°, cosec 0°, tan 90° और cot 0° परिभाषित नहीं है।

आइए अब हम कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 9 :  Screenshot from 2019-06-20 14-51-50 का मान निकालिए।

हल : जैसा कि हम जानते हैं कि cot A = tan (90° – A).

अतः cot 25° = tan (90° – 25°) = tan 65°

अर्थात्Screenshot from 2019-06-20 14-52-44

उदाहरण 10 : यदि sin 3A = cos (A – 26°) हो, जहाँ, 3 A एक न्यून कोण है तो A का मान ज्ञात कीजिए।

हल : यहाँ यह दिया हुआ है कि sin 3A = cos (A – 26°)                      (1)

क्योंकि sin 3A = cos (90° – 3A), इसलिए हम (1) को इस रूप में लिख सकते हैं

cos (90° – 3A) = cos (A – 26°)

क्योंकि 90° – 3A और A – 26° दोनों ही न्यून कोण है, इसलिए

90° – 3A = A – 26°

जिससे A = 29° प्राप्त होता है।

उदाहरण 11 : cot 85° + cos 75° कोऔर 45° के बीच के कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कीजिए।

हल : cot 85° + cos 75° = cot (90° – 5°) + cos (90° – 15°)

= tan 5° + sin 15°

प्रश्नावली 8.3

1. निम्नलिखित का मान निकालिएः

(i) Screenshot from 2019-06-20 14-54-40 

(ii) Screenshot from 2019-06-20 14-55-07 

 (iii) cos 48° – sin 42° 

 (iv) cosec 31° – sec 59°

2. दिखाइए कि

(i) tan 48° tan 23° tan 42° tan 67° = 1

(ii) cos 38° cos 52° – sin 38° sin 52° = 0

3. यदि tan 2A = cot (A – 18°), जहाँ 2A एक न्यून कोण है, तो A का मान ज्ञात कीजिए।

4. यदि tan A = cot B, तो सिद्ध कीजिए कि A + B = 90°

5. यदि sec 4A = cosec (A – 20°), जहाँ 4A एक न्यून कोण है, तो A का मान ज्ञात कीजिए।

6. यदि A, B और C त्रिभुज ABC के अंतःकोण हों, तो दिखाइए कि

Screenshot from 2019-06-20 14-55-40

7. sin 67° + cos 75° को और 45° के बीच के कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कीजिए।

8.5 त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएँ

आपको याद होगा कि एक समीकरण को एक सर्वसमिका तब कहा जाता है जबकि यह संबंधित चरों के सभी मानों के लिए सत्य हो। इसी प्रकार एक कोण के त्रिकोणमितीय अनुपातों से संबंधित सर्वसमिका को त्रिकोणमितीय सर्वसमिका कहा जाता है। जबकि यह संबंधित कोण (कोणों) के सभी मानों के लिए सत्य होता है।

इस भाग में, हम एक त्रिकोणमितीय सर्वसमिका सिद्ध करेंगे और इसका प्रयोग अन्य उपयोगी त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाओं को सिद्ध करने में करेंगे।

∆ ABC में, जो B पर समकोण है (देखिए आकृति 8.22)

Screenshot from 2019-06-24 15-43-17

हमें यह प्राप्त है AB2 + BC2 = AC2            (1)

(1) के प्रत्येक पद को AC2 से भाग देने पर हमें यह प्राप्त होता है

Screenshot from 2019-06-20 14-56-45

अर्थात् (cos A)2 + (sin A)2 = 1

अर्थात् cos2 A + sin2 A = 1 (2)

यह सभी A के लिए, जहाँ A 90°, सत्य होता है। अतः यह एक त्रिकोणमितीय सर्वसमिका है।

आइए, अब हम (1) को AB2 से भाग दें। एेसा करने पर हमें यह प्राप्त होता है

Screenshot from 2019-06-20 14-58-28

अर्थात् 1 + tan2 A = sec2 A                    (3)

क्या यह समीकरण, A = 0° के लिए सत्य है? हाँ, यह सत्य है। क्या यह A = 90° के लिए भी सत्य है? A = 90° के लिए tan A और sec A परिभाषित नहीं है। अतः (3), एेसे सभी A के लिए सत्य होता है, जहाँ A < 90º

आइए हम यह देखें कि (1) को BC2 से भाग देने पर हमें क्या प्राप्त होता है।

Screenshot from 2019-06-20 15-00-45

अर्थात् cot2 A + 1 = cosec2 A                     (4)

ध्यान दीजिए कि A = 0° के लिए cosec A और cot A परिभाषित नहीं है। अतः एेसे सभी A के लिए (4) सत्य होता है जहाँ 0° < A 90°

इन सर्वसमिकाओं का प्रयोग करके हम प्रत्येक त्रिकोणमितीय अनुपात को अन्य त्रिकोणमितीय अनुपातों के पदों में व्यक्त कर सकते हैं अर्थात् यदि कोई एक अनुपात ज्ञात हो, तो हम अन्य त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान भी ज्ञात कर सकते हैं।

आइए हम यह देखें कि इन सर्वसमिकाओं का प्रयोग करके इसे हम कैसे ज्ञात कर सकते हैं। मान लीजिए हमें tan A = 2376.pngज्ञात है। तब cot A = 2381.png

क्योंकि sec2 A = 1 + tan2 A = 2386.png sec A = 2391.png, और cos A = 2396.png

और, क्योंकि sin A = Screenshot from 2019-06-20 15-01-33इसलिए cosec A = 2

उदाहरण 12 : अनुपातों cos A, tan A और sec A को sin A के पदों में व्यक्त कीजिए।

हल : क्योंकि cos2 A + sin2 A = 1, इसलिए

cos2 A = 1 – sin2 A, अर्थात् cos A = 2406.png

इससे यह प्राप्त होता है cos A = 2411.png (क्यों?)

Screenshot from 2019-06-20 15-05-15

उदाहरण 13 : सिद्ध कीजिए कि sec A (1 – sin A) (sec A + tan A) = 1

हल :

Screenshot from 2019-06-20 15-07-06



हल : क्योंकि हमें sec θ और tan θ से संबंधित सर्वसमिका प्रयुक्त करनी है, इसलिए आइए हम सबसे पहले सर्वसमिका के वाम पक्ष के अंश और हर को cos θ से भाग देकर वाम पक्ष को sec θ और tan θ के पदों में रूपांतरित करें।

Screenshot from 2019-06-20 15-08-10

Screenshot from 2019-06-20 15-08-39

जो सिद्ध की जाने वाली अपेक्षित सर्वसमिका का दाँया पक्ष है।

प्रश्नावली 8.4

1. त्रिकोणमितीय अनुपातों sin A, sec A और tan A को cot A के पदों में व्यक्त कीजिए।

2. A के अन्य सभी त्रिकोणमितीय अनुपातों को sec A के पदों में लिखिए।

3. मान निकालिए:

(i)Screenshot from 2019-06-20 15-09-25

(ii) sin 25° cos 65° + cos 25° sin 65°

4. सही विकल्प चुनिए और अपने विकल्प की पुष्टि कीजिए ः

(i) 9 sec2 A – 9 tan2 A बराबर हैः

(A) 1

(B) 9

(C) 8

(D) 0

(ii) (1 + tan θ + sec θ) (1 + cot θ – cosec θ) बराबर हैः

(A) 0

(B) 1

(C) 2

(D) –1

(iii) (sec A + tan A) (1 – sin A) बराबर हैः

(A) sec A

(B) sin A

 (C) cosec A

 (D) cos A

(iv) Screenshot from 2019-06-20 15-11-03 बराबर हैः

(A) sec2 A

(B) –1

(C) cot2 A

(D) tan2 A

5. निम्नलिखित सर्वसमिकाएँ सिद्ध कीजिए, जहाँ वे कोण, जिनके लिए व्यंजक परिभाषित है, न्यून कोण है :

Screenshot from 2019-06-20 15-11-52

[संकेतः व्यंजक को sin θ और cos θ के पदों में लिखि्ए]

(iv)Screenshot from 2019-06-20 15-12-45

[संकेतः वाम पक्ष और दाँया पक्ष को अलग-अलग सरल कीजिए।]

(v) सर्वसमिका cosecA= 1 + cot2 A को लागू करके  Screenshot from 2019-06-20 15-13-44

Screenshot from 2019-06-20 15-16-12

(viii) (sin A + cosec A)2 + (cos A + sec A)2 = 7 + tan2 A + cot2 A

(ix)Screenshot from 2019-06-20 15-16-37

[संकेत : वाम पक्ष और दाँया पक्ष को अलग-अलग सरल कीजिए]

(x)Screenshot from 2019-06-20 15-17-08

8.6 सारांश

इस अध्याय में, आपने निम्नलिखित तथ्यों का अध्ययन किया हैः

1. समकोण त्रिभुज ABC में, जिसका कोण B समकोण है,

Screenshot from 2019-06-20 15-17-54

2.Screenshot from 2019-06-20 15-18-33

3. यदि एक न्यून कोण का एक त्रिकोणमितीय अनुपात ज्ञात हो, तो कोण के शेष त्रिकोणमितीय अनुपात सरलता से ज्ञात किए जा सकते हैं।

4. 0°, 30°, 45°, 60° और 90° के कोणों के त्रिकोणमितीय अनुपातों के मान।

5. sin A या cos A का मान कभी भी 1 से अधिक नहीं होता, जबकि sec A या cosec A का मान सदैव 1 से अधिक या 1 के बराबर होता है।

6. sin (90° – A) = cos A, cos (90° – A) = sin A;

tan (90° – A) = cot A, cot (90° – A) = tan A;

sec (90° – A) = cosec A, cosec (90° – A) = sec A.

7. sin2 A + cos2 A = 1

sec2 A – tan2 A = 1 जहाँ A < 90°

cosec2 A = 1 + cot2 A जहाँ 0° < A 90º

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