द्विघात समीकरण 4ण्1 भूमिका अध्याय 2 में, आपने विभ्िान्न प्रकार के बहुपदों का अध्ययन किया है। ंग2 ़ इग ़ बए ं ≠ 0 एक प्रकार का द्विघात बहुपद था। जब हम इस बहुपद को शून्य के तुल्य कर देते हैं, तो हमें एक द्विघात समीकरण प्राप्त हो जाती है। वास्तविक जीवन से संबंध्ित कइर् समस्याओं को हल करने में हम द्विघात समीकरणों का प्रयोग करते हैं। उदाहरणाथर्, मान लीजिए कि एक ध्मार्थर् ट्रस्ट 300 वगर् मीटर क्षेत्रापफल का प्राथर्ना कक्ष बनाना चाहता है, जिसकी लंबाइर् उसकी चैड़ाइर् के दो गुने से एक मीटर अध्िक हो। कक्ष की लंबाइर् और चैड़ाइर् क्या होनी चाहिए? माना कक्ष की चैड़ाइर् ग मीटर है। तब, उसकी लंबाइर् ;2ग ़ 1द्ध मीटर होनी चाहिए। हम इस सूचना को चित्राीय रूप में आवृफति 4ण्1 आवृफति 4.1 जैसा दिखा सकते हैं। अब कक्ष का क्षेत्रापफल त्र ;2ग ़ 1द्धण् ग उ2 त्र ;2ग2 ़ गद्ध उ2 इसलिए 2ग2 ़ ग त्र 300 ;दिया हैद्ध अतः 2ग2 ़ ग दृ 300 त्र 0 इसलिए, कक्ष की चैड़ाइर्, समीकरण 2ग2 ़ ग दृ 300 त्र 0ए जो एक द्विघात समीकरण है, को संतुष्ट करना चाहिए। अध्िकांश लोग विश्वास करते हैं कि बेबीलोनवासियों ने ही सवर्प्रथम द्विघात समीकरणों को हल किया था। उदाहरण के लिए, वे जानते थे कि वैफसे दो संख्याओं को ज्ञात किया जा सकता है, जिनका योग तथा गुणनपफल दिया हो। ध्यान दीजिए कि यह समस्या 2ग दृ चग ़ ु त्र 0 के प्रकार के समीकरण को हल करने के तुल्य है। यूनानी गण्िातज्ञ यूक्िलड ने लंबाइयाँ ज्ञात करने की एक ज्यामितीय विध्ि विकसित की जिसको हम वतर्मान शब्दावली मंे द्विघात समीकरण के हल कहते हैं। व्यापक रूप में, द्विघात समीकरणों को हल करने का श्रेय बहुध प्राचीन भारतीय गण्िातज्ञों को जाता है। वास्तव में, ब्रह्मगुप्त ;इर्.598.665द्ध ने 2ंग ़ इग त्र ब के रूप के द्विघात समीकरण को हल करने का एक स्पष्ट सूत्रा दिया था। बाद में, श्रीध्राचायर्;इर्.1025द्ध ने एक सूत्रा प्रतिपादित किया, जिसे अब द्विघाती सूत्रा के रूप में जाना जाता है, जो पूणर् वगर् विध्ि से द्विघात समीकरण को हल करने पर प्राप्त हुआ ;जैसा भास्कर प्प् ने लिखाद्ध। एक अरब गण्िातज्ञ अल - ख्वारिज़्मी ;लगभग इर्.800द्ध ने भी विभ्िान्न प्रकार के द्विघात समीकरणों का अध्ययन किया। अब्राह्म बार हिÕया हा - नासी यूरो ने 1145 में छपी अपनी पुस्तक ‘लिबर इंबाडोरम’ में विभ्िान्न द्विघात समीकरणों के पूणर् हल दिए। इस अध्याय में, आप द्विघात समीकरणों और उनके हल ज्ञात करने की विभ्िान्न वििायों का अध्ययन करेंगे। दैनिक जीवन की कइर् स्िथतियों में भी आप द्विघात समीकरणों के वुफछ उपयोग देखेंगे। 4ण्2 द्विघात समीकरण 2चर ग में एक द्विघात समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार की होती है, जहाँंए इए ब वास्तविक 2संख्याएँ हैं तथां ≠ 0 है। उदाहरण के लिए,2ग ़ ग दृ 300 त्र 0 एक द्विघात समीकरण है। इसी प्रकार, 2ग2 दृ 3ग ़ 1 त्र 0ए 4ग दृ 3ग2 ़ 2 त्र 0 और 1 दृ ग2 ़ 300 त्र 0 भी द्विघात समीकरण हैं। वास्तव में, कोइर् भी समीकरण च;गद्ध त्र 0ए जहाँ च;गद्धए घात 2 का एक बहुपद है, एक द्विघात समीकरण कहलाती है। परंतु जब हम च;गद्ध के पद घातों के घटते क्रम में लिखते हैं, 2तो हमें समीकरण का मानक रूप प्राप्त होता है। अथार्त् ंग ़ इग ़ ब त्र 0ए ं ≠ 0ए द्विघात समीकरण का मानक रूप कहलाता है। द्विघात समीकरण हमारे आसपास के परिवेश की अनेक स्िथतियों एवं गण्िात के विभ्िान्न क्षेत्रों में प्रयुक्त होते हैं। आइए हम वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 1 रू निम्न स्िथतियों को गण्िातीय रूप में व्यक्त कीजिए: ;पद्ध जाॅन और जीवंती दोनों के पास वुफल मिलाकर 45 वंफचे हैं। दोनों पाँच - पाँच वंफचे खो देते हैं और अब उनके पास वंफचों की संख्या का गुणनपफल 124 है। हम जानना चाहेंगे कि आरंभ में उनके पास कितने वंफचे थे। ;पपद्ध एक वुफटीर उद्योग एक दिन में वुफछ ख्िालौने नि£मत करता है। प्रत्येक ख्िालौने का मूल्य ;रुपयों मेंद्ध 55 में से एक दिन में निमार्ण किए गए ख्िालौने की संख्या को घटाने से प्राप्त संख्या के बराबर है। किसी एक दिन, वुफल निमार्ण लागत ृ 750 थी। हम उस दिन निमार्ण किए गए ख्िालौनों की संख्या ज्ञात करना चाहेंगे। हल रू ;पद्ध माना कि जाॅन के वंफचों की संख्या ग थी। तब जीवंती के वंफचों की संख्या त्र 45 दृ ग ;क्यों?द्ध जाॅन के पास, 5 वंफचे खो देने के बाद, बचे वंफचों की संख्या त्र ग दृ 5 जीवंती के पास, 5 वंफचे खोने के बाद, बचे वंफचों की संख्या त्र 45 दृ ग दृ 5 त्र40 दृ ग अतः उनका गुणनपफल त्र;ग दृ 5द्ध ;40 दृ गद्ध त्र 40ग दृ ग2 दृ 200 ़ 5ग त्रदृ ग2 ़ 45ग दृ 200 अब दृ ग2 ़ 45ग दृ 200 त्र 124 ;दिया है कि गुणनपफल त्र 124द्ध अथार्त् दृ ग2 ़ 45ग दृ 324 त्र 0 अथार्त् ग2 दृ 45ग ़ 324 त्र 0 अतः जाॅन के पास जितने वंफचे थे, जो समीकरण ग2 दृ 45ग ़ 324 त्र 0 को संतुष्ट करते हैं। ;पपद्ध माना उस दिन निमिर्त ख्िालौनों की संख्या ग है। इसलिए, उस दिन प्रत्येक ख्िालौने की निमार्ण लागत ;रुपयों मेंद्ध त्र 55 दृ ग अतः, उस दिन वुफल निमार्ण लागत ;रुपयों मेंद्ध त्र ग ;55 दृ गद्ध इसलिए ग ;55 दृ गद्ध त्र 750 2अथार्त् 55ग दृ ग त्र 750 अथार्त् दृ ग2 ़ 55ग दृ 750 त्र 0 अथार्त् ग2 दृ 55ग ़ 750 त्र 0 अतः उस दिन निमार्ण किए गए ख्िालौनों की संख्या द्विघात समीकरण ग2 दृ 55ग ़ 750 त्र 0 को संतुष्ट करती है। उदाहरण 2 रू जाँच कीजिए कि निम्न द्विघात समीकरण हैं या नहींः ;पद्ध ;ग दृ 2द्ध2 ़ 1 त्र 2ग दृ 3 ;पपद्ध ग;ग ़ 1द्ध ़ 8 त्र ;ग ़ 2द्ध ;ग दृ 2द्ध ;पपपद्ध ग ;2ग ़ 3द्ध त्र ग2 ़ 1 ;पअद्ध ;ग ़ 2द्ध3 त्र ग3 दृ 4 हल रू ;पद्ध बायाँ पक्ष त्र ;ग दृ 2द्ध2 ़ 1 त्र ग2 दृ 4ग ़ 4 ़ 1 त्र ग2 दृ 4ग ़ 5 इसलिए ;ग दृ 2द्ध2 ़1 त्र 2ग दृ 3 को ग2 दृ 4ग ़ 5 त्र 2ग दृ 3 लिखा जा सकता है। अथार्त् ग2 दृ 6ग ़ 8 त्र 0 यह ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का है। अतः दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है। ;पपद्ध चूँकि ग;ग ़ 1द्ध ़ 8 त्र ग2 ़ ग ़ 8 और ;ग ़ 2द्ध;ग दृ 2द्ध त्र ग2 दृ 4 है, 2इसलिए ग2 ़ ग ़ 8 त्र ग दृ 4 अथार्त् ग ़ 12 त्र 0 2यह ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का समीकरण नहीं है। इसलिए, दिया हुआ समीकरण एक द्विघात समीकरण नहीं है। ;पपपद्ध यहाँ बायाँ पक्ष त्र ग ;2ग ़ 3द्ध त्र 2ग2 ़ 3ग अतः ग ;2ग ़ 3द्ध त्र ग2 ़ 1 को लिखा जा सकता हैः 2ग2 ़ 3ग त्र ग2 ़ 1 इसलिए ग2 ़ 3ग दृ 1 त्र0 हमें प्राप्त होता है। यह ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का समीकरण है। अतः, दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है। ;पअद्ध यहाँ बायाँ पक्ष त्र ;ग ़ 2द्ध3 त्र ग3 ़ 6ग2 ़ 12ग ़ 8 अतः ;ग ़ 2द्ध3 त्र ग3 दृ 4 को लिखा जा सकता हैः ग3 ़ 6ग2 ़ 12ग ़ 8 त्र ग3 दृ 4 अथार्त् 6ग2 ़ 12ग ़ 12 त्र 0 या ग2 ़ 2ग ़ 2 त्र 0 यह ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का समीकरण है। अतः दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है। टिप्पणी रू ध्यान दीजिए कि उपयुर्क्त ;पपद्ध में, दिया गया समीकरण देखने में द्विघात समीकरण लगता है, परंतु यह द्विघात समीकरण नहीं है। उपयुर्क्त;पअद्ध में, समीकरण देखने में त्रिाघात ;घात 3 का समीकरणद्ध लगता है और द्विघात नहीं लगता है। परंतु वह द्विघात समीकरण निकलता है। जैसा आप देखते हैं समीकरण को यह तय करने कि वह द्विघात है अथवा नहीं, हमंे उसका सरलीकरण करना आवश्यक है। प्रश्नावली 4ण्1 1ण् जाँच कीजिए कि क्या निम्न द्विघात समीकरण हैं: ;पद्ध ;ग ़ 1द्ध2 त्र 2;ग दृ 3द्ध ;पपद्ध ग2 दृ 2ग त्र ;दृ2द्ध ;3 दृ गद्ध ;पपपद्ध ;ग दृ 2द्ध;ग ़ 1द्ध त्र ;ग दृ 1द्ध;ग ़ 3द्ध ;पअद्ध ;ग दृ 3द्ध;2ग ़1द्ध त्र ग;ग ़ 5द्ध ;अद्ध ;2ग दृ 1द्ध;ग दृ 3द्ध त्र ;ग ़ 5द्ध;ग दृ 1द्ध ;अपद्ध ग2 ़ 3ग ़ 1 त्र ;ग दृ 2द्ध2 ;अपपद्ध ;ग ़ 2द्ध3 त्र 2ग ;ग2 दृ 1द्ध ;अपपपद्ध ग3 दृ 4ग2 दृ ग ़ 1 त्र ;ग दृ 2द्ध3 2ण् निम्न स्िथतियों को द्विघात समीकरणों के रूप में निरूपित कीजिए: ;पद्ध एक आयताकार भूखंड का क्षेत्रापफल 528 उ2 है। क्षेत्रा की लंबाइर् ;मीटरों मेंद्ध चैड़ाइर् के दुगुने से एक अध्िक है। हमंे भूखंड की लंबाइर् और चैड़ाइर् ज्ञात करनी है। ;पपद्ध दो क्रमागत ध्नात्मक पूणा±कों का गुणनपफल 306 है। हमें पूणा±कों को ज्ञात करना है। ;पपपद्ध रोहन की माँ उससे 26 वषर् बड़ी है। उनकी आयु ;वषो± मेंद्ध का गुणनपफल अब से तीन वषर् पश्चात् 360 हो जाएगी। हमें रोहन की वतर्मान आयु ज्ञात करनी है। ;पअद्ध एक रेलगाड़ी480 ाउ की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल8 ाउध्ी कम होती, तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घंटे अध्िक लेती। हमें रेलगाड़ी की चाल ज्ञात करनी है। 4ण्3 गुणनखंडों द्वारा द्विघात समीकरण का हल द्विघात समीकरण2ग2 दृ 3ग ़ 1 त्र 0 पर विचार कीजिए। यदि हम इस समीकरण के बाएँ पक्ष में ग को 1 से प्रतिस्थापित करें, तो हमें प्राप्त होता हैः ;2 × 12द्ध दृ ;3 × 1द्ध ़ 1 त्र 0 त्र समीकरण का दाँया पक्ष। हम कहते हैं कि 1 द्विघात समीकरण2ग2 दृ 3ग ़ 1 त्र 0 का एक मूल है। इसका यह भी अथर् है कि 1 द्विघात बहुपद 2ग2 दृ 3ग ़ 1 का एक शून्यक है। व्यापक रूप में, एक वास्तविक संख्या α द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0ए ं ≠ 0 का एक मूल कहलाती है, यदि ं α2 ़ इα ़ ब त्र 0 हो। हम यह भी कहते हैं कि ग त्र α द्विघात समीकरण का एक हल है अथवा α द्विघात समीकरण को संतुष्ट करता है। ध्यान दीजिए 2 2कि द्विघात बहुपद ंग ़ इग ़ ब के शून्यक और द्विघात समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल एक ही हैं। आपने अध्याय 2 में, देखा है कि एक द्विघात बहुपद के अध्िक से अध्िक दो शून्यक हो सकते हैं। अतः, किसी द्विघात समीकरण के अध्िक से अध्िक दो मूल हो सकते हैं। आपने कक्षा प्ग् में सीखा है कि वैफसे मध्य पद को विभक्त करके एक द्विघात बहुपद के गुणनखंड किए जा सकते हैं। हम इस ज्ञान का प्रयोग द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने में करेंगे। आइए देखें वैफसे। उदाहरण 3 रू गुणनखंडन द्वारा समीकरण 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 के मूल ज्ञात कीजिए। हल रू सवर्प्रथम, हम मध्य पद दृ 5ग को दृ2ग दृ3ग ख्क्योंकि ;दृ2गद्ध × ;दृ3गद्ध त्र 6ग2 त्र ;2ग2द्ध × 3, के रूप में विभक्त करते हैं। अतः, 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 2ग2 दृ 2ग दृ 3ग ़ 3 त्र 2ग ;ग दृ 1द्ध दृ3;ग दृ 1द्ध त्र ;2ग दृ 3द्ध;ग दृ 1द्ध इसलिए, 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 को ;2ग दृ 3द्ध;ग दृ 1द्ध त्र 0 के रूप में पुनः लिखा जा सकता है। अतः, ग के वे मान जिनके लिए 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 वही है, जो;2ग दृ 3द्ध;ग दृ 1द्ध त्र 0 से प्राप्त है, अथार्त् 2ग दृ 3 त्र 0 या ग दृ 1 त्र 0 से प्राप्त होंगे। 3अब, 2ग दृ 3 त्र 0ए ग त्र देता है और ग दृ 1 त्र 0ए ग त्र 1 देता है।2 3अतः, ग त्र और ग त्र 1 दिए हुए समीकरण के हल हैं।2 3दूसरे शब्दों में, 1 और समीकरण 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 के मूल हैं।2 जाँच कीजिए कि ये ही दिए गए समीकरण के मूल हैं। ध्यान दीजिए कि हमने समीकरण 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 के मूलों को 2ग2 दृ 5ग ़ 3 के दो रैख्िाक गुणनखंडों में गुणनखंडित करके और प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर करके प्राप्त किए हैं। 2उदाहरण 4 रू द्विघात समीकरण 6ग दृ ग दृ 2 त्र 0 के मूल ज्ञात कीजिए। हल रू हमें प्राप्त हैः 6ग2 दृ ग दृ 2 त्र6ग2 ़ 3ग दृ 4ग दृ 2 त्र3ग ;2ग ़ 1द्ध दृ 2 ;2ग ़ 1द्ध त्र ;3ग दृ 2द्ध;2ग ़ 1द्ध 6ग दृ ग दृ 2 त्र 0 के मूल ग के वे मान हैं, जिनके लिए ;3ग दृ 2द्ध;2ग ़ 1द्ध त्र 0 हो। इसलिए 3ग दृ 2 त्र 0 या 2ग ़ 1 त्र 0 अथार्त् ग त्र2 या ग त्र − 1 32 21अतः 6ग2 दृ ग दृ 2 त्र 0 के मूल आरै दृ हैं।32 21हम मूलों का सत्यापन के लिए यह जाँच करते हैं कि आरै दृ समीकरण32 26ग दृ ग दृ 2 त्र 0 को संतुष्ट करते हैं या नहीं। 2उदाहरण 5 रू द्विघात समीकरण 3ग − 26ग ़ 2 त्र 0 के मूल ज्ञात कीजिए। हल रू 3ग 2 − 26ग ़2 त्र3ग 2 − 6ग − 6ग ़ 2 त्र3 ग; 3 ग − 2द्ध− 2 ; 3 ग − 2द्ध त्र ; 3 ग − 2 द्ध; 3 ग − 2 द्ध अतः समीकरण के मूल ग के वे मान हैं, जिनके लिए ; 3 ग − 2 द्ध; 3 ग − 2 द्धत्र 0 2 अब ग त्र के लिए, 3ग − 2 त्र 0 है।3 अतः यह मूल, गुणनखंड 3ग − 2 के दो बार आने के कारण, दो बार आता है, अथार्त् इस मूल की पुनरावृिा होती है। 222 ए हैं।इसलिए 3ग − 26ग ़ 2 त्र 0 के मूल 33 उदाहरण 6 रू अनुच्छेद 4.1 में दिए गए प्राथर्ना कक्ष की विमाएँ ज्ञात कीजिए। हल रू अनुच्छेद 4.1 में हमने ज्ञात किया था कि यदि कक्ष की चैड़ाइर् ग उ हो, तो ग समीकरण 22ग ़ ग दृ 300 त्र 0 को संतुष्ट करता है। गुणनखंडन विध्ि का प्रयोग कर, हम इस समीकरण को निम्न प्रकार से लिखते हैं: 2ग2 दृ 24ग ़ 25ग दृ 300 त्र 0 या 2ग ;ग दृ 12द्ध ़ 25 ;ग दृ 12द्ध त्र 0 अथार्त् ;ग दृ 12द्ध;2ग ़ 25द्ध त्र 0 अतः, दिए गए समीकरण के मूल ग त्र 12 या ग त्र दृ 12ण्5 हैं। क्योंकि ग कक्ष की चैड़ाइर् है, यह )णात्मक नहीं हो सकती। इसलिए, कक्ष की चैड़ाइर् 12 उ है। इसकी लंबाइर् त्र 2ग ़ 1 त्र 25 उ होगी। प्रश्नावली 4ण्2 1ण् गुणनखंड विध्ि से निम्न द्विघात समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग2 दृ 3ग दृ 10 त्र 0 ;पपद्ध 2ग2 ़ ग दृ 6 त्र 0 1 2;पपपद्ध 2 ग ़ 7 ग ़ 52 त्र 0 ;पअद्ध 2ग2 दृ ग ़ त्र 0 8;अद्ध 100 ग2 दृ 20ग ़ 1 त्र 0 2ण् उदाहरण 1 में दी गइर् समस्याओं को हल कीजिए। 3ण् ऐसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए, जिनका योग 27 हो और गुणनपफल 182 हो। 4ण् दो क्रमागत ध्नात्मक पूणा±क ज्ञात कीजिए जिनके वगो± का योग 365 हो। 5ण् एक समकोण त्रिाभुज की ऊँचाइर् इसके आधर से 7 बउ कम है। यदि कणर् 13 बउ का हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए। 6ण् एक वुफटीर उद्योग एक दिन में वुफछ बतर्नों का निमार्ण करता है। एक विशेष दिन यह देखा गया कि प्रत्येक नग की निमार्ण लागत ;ृ मेंद्ध उस दिन के निमार्ण किए बतर्नों की संख्या के दुगुने से 3 अध्िक थी। यदि उस दिन की वुफल निमार्ण लागत ृ 90 थी, तो नि£मत बतर्नों की संख्या और प्रत्येक नग की लागत ज्ञात कीजिए। 4ण्4 द्विघात समीकरण का पूणर् वगर् बनाकर हल पिछले अनुच्छेद में, आपने एक द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने की एक विध्ि पढ़ी थी। इस अनुच्छेद में, हम एक और विध्ि पढ़ेंगे। निम्न स्िथति पर विचार कीजिएः सुनीता की दो वषर् पूवर् आयु ;वषो± मेंद्ध तथा अब से चार वषर् उपरांत की आयु का गुणनपफल उसकी वतर्मान आयु के दो गुने से एक अध्िक है। उसकी वतर्मान आयु क्या है? इसका उत्तर देने के लिए, माना उसकी वतर्मान आयु ;वषो± मेंद्ध ग है। तब, उसकी 2 वषर् पूवर् आयु एवं अब से चार वषर् उपरांत की आयु का गुणनपफल ;ग दृ 2द्ध;ग ़ 4द्ध है। इसलिए ;ग दृ 2द्ध;ग ़ 4द्ध त्र 2ग ़ 1 अथार्त् ग2 ़ 2ग दृ 8 त्र 2ग ़ 1 अथार्त् ग2 दृ 9 त्र 0 2अतः सुनीता की वतर्मान आयु द्विघात समीकरणग दृ 9 त्र 0 को संतुष्ट करती है। 2हम इसेग त्र 9 के रूप में लिख सकते हैं। वगर्मूल लेने पर, हमग त्र 3 या ग त्र दृ 3 पाते हैं। क्योंकि आयु एक ध्नात्मक संख्या होती है, इसलिए ग त्र 3 ही होगा। अतः सुनीता की वतर्मान आयु 3 वषर् है। अब द्विघात समीकरण ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 त्र 0 पर विचार कीजिए। हल करने के लिए, इसेहम ;ग ़ 2द्ध2 त्र 9 के रूप में लिख सकते हैं। वगर्मूल लेने पर, हमग ़ 2 त्र 3 या ग ़ 2 त्र दृ 3 पाते हैं। इसलिए ग त्र 1 या ग त्र दृ5 अतः ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 त्र 0 के मूल 1 और दृ 5 हैं। उपयर्ुक्त दोनों उदाहरणों में, गको समाहित करने वाला पद पूणर्तया वगर् के अंदर है और हमने वगर्मूल लेकर आसानी से मूल ज्ञात कर लिए थे। परंतु यदि हमें समीकरण ग2 ़ 4ग दृ 5 त्र 0 को हल करने को कहा जाता, तो क्या होता? हम संभवतः इसे करने के लिए गुणनखंड विध्ि का प्रयोग करते, जब तक कि हम यह न जान लें ;किसी प्रकारद्ध कि ग2 ़ 4ग दृ 5 त्र ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 है। अतःग2 ़ 4ग दृ 5 त्र 0 को हल करना ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 त्र 0 को हल करने के तुल्य है, जो हमने देखा कि बहुत शीघ्र ही हल हो जाता है। वास्तव में, हम किसी भी द्विघात समीकरण को ;ग ़ ंद्ध2 दृ इ2 त्र 0 की तरह बना सकते हैं और पिफर हम इसके मूल आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। आइए देखें कि क्या यह संभव है। आवृफति 4.2 देख्िाए। इस आवृफति में, हम देख सकते हैं कि वैफसेग2 ़ 4गए ;ग ़ 2द्ध2 दृ 4 में बदल रहा है। आवृफति 4ण्2 प्रिया निम्न प्रकार से हैः 44 ग2 ़ 4ग त्र;ग2 ़ ग द्ध ़ ग 22 त्रग2 ़ 2ग ़ 2ग त्र ;ग ़ 2द्ध ग ़ 2× ग त्र;ग ़ 2द्ध ग ़ 2 × ग ़ 2 × 2 दृ 2 × 2 त्र;ग ़ 2द्ध ग ़ ;ग ़ 2द्ध × 2 दृ 2 × 2 त्र;ग ़ 2द्ध ;ग ़ 2द्ध दृ 22 त्र;ग ़ 2द्ध2 दृ 4 अतः ग2 ़ 4ग दृ 5 त्र ;ग ़ 2द्ध2 दृ 4 दृ 5 त्र ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 इस प्रकार, ग2 ़ 4ग दृ 5 त्र 0 को पूणर् वगर् बनाकर;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 त्र 0 के रूप में लिखा जा सकता है। इसे पूणर् वगर् बनाने की विध्ि से जाना जाता है। संक्षेप में, इसे निम्न प्रकार से दशार्या जा सकता हैः 22 2⎛ 4 ⎞⎛ 4 ⎞⎛ 4 ⎞ ग2 ़ 4ग त्र ⎜ ग ़⎟− त्र ग ़− 4⎜⎟⎜ ⎟⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ अतः ग2 ़ 4ग दृ 5 त्र 0 को पुनः निम्न रूप में लिखा जा सकता हैः ⎛ 4 ⎞2 ⎜ ग ़ ⎟− 4 − 5 त्र0⎝ 2 ⎠अथार्त् ;ग ़ 2द्ध2 दृ 9 त्र 0 अब समीकरण3ग2 दृ 5ग ़ 2 त्र 0 पर विचार कीजिए। ध्यान दीजिए किग2 का गुणांक पूणर् वगर् नहीं है। इसलिए, हम समीकरण को 3 से गुणा करके पाते हैंः 9ग2 दृ 15ग ़ 6 त्र 0 अब 9ग2 दृ 15ग ़ 6 त्र ;3द्ध ग 2 − 2 × 3ग× 5 ़ 6 2 25 ⎛ 5 ⎞2 ⎛ 5 ⎞2 ;3 द्ध − 2 × 3ग ×़ − ़ 6गत्र ⎜⎟ ⎜⎟2 ⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠ ⎛ 5 ⎞2 25 ⎛ 5 ⎞21 त्र ⎜ 3ग −⎟− ़ 6 त्र ⎜ 3ग − ⎟− ⎝ 2 ⎠4 ⎝ 2 ⎠ 4 अतः 9ग2 दृ 15ग ़ 6 त्र 0 को निम्न रूप में लिखा जा सकता हैः ⎛⎞2 ⎜3ग − 5 ⎟− 1 त्र0⎝ 2 ⎠4 ⎛ 5 ⎞21अथार्त् ⎜ 3ग −⎟ त्र ⎝ 2 ⎠4 ⎛ 5 ⎞21अतः 9ग2 दृ 15ग ़ 6 त्र 0 के वही हल हैं, जो ⎜3ग − ⎟त्र के हैं।⎝ 2 ⎠ 4 51 51अथार्त् 3ग दृ त्र या 3ग − त्र − 22 22 51;हम इसे 3ग − त्र± ए जहाँ ष्±ष् ध्न और )ण को निरूपित करते हैं, भी लिख सकते हैं।द्ध22 51 51अतः 3ग त्र ़ या 3ग त्र− 22 22 51 51अतः ग त्र ़ या ग त्र− 66 66 4इसलिए ग त्र1 या ग त्र 6 अथार्त् ग त्र1 या ग त्र 2 3 2इसलिए दिए गए समीकरण के मूल 1 और हैं।3 टिप्पणी रू इसको दशार्ने की एक दूसरी विध्ि निम्न है: समीकरण 3ग2 दृ 5ग ़ 2 त्र 0 25 2वही है जो ग − ग ़ त्र0 है।33 52 ⎧ 1 ⎛ 5 ⎞⎫2 ⎧1 ⎛ 5 ⎞⎫22 2अब ग दृ ग ़ त्र ⎨ग − ⎜ ⎟⎬−⎨ ⎜ ⎟⎬़ 33 ⎩ 2 ⎝ 3 ⎠ ⎩2 ⎝ 3 ⎠ 3 ⎛ 5 ⎞2 2 25 त्र ⎜ ग −⎟़ − ⎝ 6 ⎠ 3 36 2 22⎛ 5 ⎞ 1 ⎛ 5 ⎞⎛ 1 ⎞ त्र ⎜ ग −⎟− त्र ग −−⎜ ⎟⎜⎟⎝ 6 ⎠ 36 ⎝ 6 ⎠⎝ 6 ⎠ 2⎛ 5 ⎞2 ⎛ 1 ⎞2 इसलिए 3ग दृ 5ग ़ 2 त्र 0 का वही हल है, जो ⎜ ग − ⎟−⎜ ⎟त्र 0 का हल है।⎝ 6 ⎠⎝ 6 ⎠ 5 1 51 512अथार्त् ग दृ त्र ± ए अथार्त् ग त्र ़ त्र 1 और ग त्र − त्र है।66 66 663 उपयुर्क्त विध्ि को समझाने के लिए आइए वुफछ और उदाहरण लेते हैं। उदाहरण 7 रू उदाहरण 3 में दिया गया समीकरण पूणर् वगर् बनाने की विध्ि से हल कीजिए। 325 हल रू समीकरण 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 वही है, जो ग − ग ़त्र 0 है।22 22 2 25 3 ⎛ 5 ⎞⎛ 5 ⎞ 3 ⎛ 5 ⎞ 1 अब ग − ग ़ त्र ⎜ ग − ⎟−⎜ ⎟़ त्र ⎜ ग − ⎟− 22 ⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠2 ⎝ 4 ⎠ 16 ⎛ 5 ⎞21इसलिए 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 को ⎜ ग −⎟− त्र 0 की तरह लिखा जा सकता है।⎝ 4 ⎠ 16 ⎛ 5 ⎞21अतः समीकरण2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 के मूल वस्तुतः वही हैं, जो ⎜ ग −⎟− त्र 0 के मूल हैं।⎝ 4 ⎠ 16 ⎛ 5 ⎞21 ⎛ 5 ⎞21 अब ⎜ ग − ⎟− त्र0 वही है, जो ⎜ ग − ⎟त्र है।⎝ 4 ⎠16 ⎝ 4 ⎠ 16 51इसलिए ग − त्र ± 44 51अथार्त् ग त्र ± 44 51 51अथार्त् ग त्र ़ या ग त्र− 44 44 अथार्त् ग त्र3 या ग त्र 1 2 3इसलिए समीकरण के हल ग त्र और 1 हैं। 2 आइए इन हलों की जाँच करें। 3 ⎛ 3 ⎞2 ⎛ 3 ⎞ 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 में ग त्र रखने पर, हम 2 ⎜⎟ दृ5 ⎜ ⎟़ 3 त्र 0 पाते हैंए जो सही है।2 ⎝ 2 ⎠⎝ 2 ⎠इसी प्रकार, आप जाँच कर सकते हैं कि ग त्र 1 भी दिए गए समीकरण को संतुष्ट करता है। 53उदाहरण7में, हमने समीकरण 2ग2 दृ 5ग ़ 3 त्र 0 को 2 से भाग देकर ग2 दृ ग ़ त्र 0 22 प्राप्त किया जिससे प्रथम पद पूणर् वगर् बन गया और पिफर वगर् को पूरा किया। इसके स्थान पर, हम समस्त पदों को 2 से गुणा करके भी प्रथम पद को 4ग2 त्र ;2गद्ध2 बना सकते थे और तब पूणर् वगर् बना लेते। इस विध्ि को अगले उदाहरण में समझाया गया है। उदाहरण 8 रू पूणर् वगर् बनाने की विध्ि से समीकरण5ग2 दृ 6ग दृ 2 त्र 0 के मूल हल कीजिए। हल रू दिए हुए समीकरण को 5 से गुणा करने पर, हम पाते हैंः 25ग2 दृ 30ग दृ 10 त्र 0 यह निम्न के तुल्य हैः ;5गद्ध2 दृ 2 × ;5गद्ध × 3 ़ 32 दृ 32 दृ 10 त्र 0 अथार्त् ;5ग दृ 3द्ध2 दृ 9 दृ 10 त्र 0 अथार्त् ;5ग दृ 3द्ध2 दृ 19 त्र 0 अथार्त् ;5ग दृ 3द्ध2 त्र 19 अथार्त् 5ग दृ 3 त्र ± 19 अथार्त् 5ग त्र3 ± 19 3 ± 19 अतः ग त्र 5 3़ 19 3− 19 इसलिए मूल और हैं।55 ़ 19 − 19 सत्यापित कीजिए कि मूल 3 और 3 हैं।55 उदाहरण 9 रू पूणर् वगर् बनाने की विध्ि से 4ग2 ़ 3ग ़ 5 त्र 0 के मूल ज्ञात कीजिए। हल रू ध्यान दीजिए 4ग2 ़ 3ग ़ 5 त्र 0 निम्न के तुल्य हैः 3 ⎛ 3 ⎞2 ⎛ 3 ⎞2 ;2गद्ध2 ़ 2 × ;2गद्ध × ़⎜ ⎟−⎜ ⎟़ 5 त्र0 4 ⎝ 4 ⎠⎝ 4 ⎠⎛ 3 ⎞29अथार्त् ⎜ 2ग ़⎟− ़ 5 त्र0 ⎝ 4 ⎠16 ⎛ 3 ⎞2 71 अथार्त् ⎜ 2ग ़ ⎟़ त्र0 ⎝ 4 ⎠16 ⎛ 3 ⎞2 −71 अथार्त् ⎜ 2ग ़⎟ त्र ढ 0 है⎝ 4 ⎠6 ⎛ 3 ⎞2 परंतु हम जानते हैं किकिसी भी ग के वास्तविक मान के लिए ⎜ 2ग ़⎟ )णात्मक⎝ 4 ⎠नहीं हो सकता है ;क्यों?द्ध। इसलिए, ग का कोइर् वास्तविक मान दी हुइर् समीकरण को संतुष्ट नहीं कर सकता। अतः, दिए गए समीकरण के कोइर् वास्तविक मूल नहीं हैं। अब तक आपने पूणर् वगर् बनाने की विध्ि वाले अनेक उदाहरण देखे हैं। अतः, आइए इस विध्ि को व्यापक रूप में दें। द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 ;ं ≠ 0द्ध पर विचार कीजिए। समस्त पदों को ं से इबभाग देने पर, हम पाते हैंः ग 2 ़ ग ़त्र 0 ं इस समीकरण को हम इस प्रकार लिख सकते हैंः ⎛ इ ⎞2 ⎛ इ ⎞2 ब ⎜ ग ़ ⎟−⎜ ⎟़ त्र 0 ⎝ 2ं ⎠⎝ 2ं ⎠ ं 2⎛ इ ⎞2 इ − 4ंबअथार्त् ⎜ ग ़ ⎟− 2 त्र0 ⎝ 2ं ⎠4ं इसलिए दिए गए समीकरण के मूल वही हैं, जो 2 2 इ ⎞2 इ − 4ंब ⎛ इ ⎞2 इ − 4ंब ⎜ ग ़ ⎟− 2 त्र 0ए अथार्त् ⎜ ग ़ ⎟त्र 2 ;1द्ध⎝ 2ं ⎠ 4ं ⎝ 2ं ⎠ 4ं के हैं। यदि इ2 दृ 4ंब ≥ 0 हो, तो ;1द्ध का वगर्मूल लेने पर, हम पाते हैंः इ ± इ2 − 4ंब ग ़ त्र 2ं 2ं −इ ± इ2 − 4ंबइसलिए ग त्र 2ं 2 −इ ़ इ2 − 4ंब −इ − इ2 − 4ंब आरैअतः, ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल हैं, यदि2ं 2ं इ2 दृ 4ंब ≥ 0 है। उस स्िथति में जब इ2 दृ 4ंब ढ 0 है, तो समीकरण के वास्तविक मूल नहीं होते हैं। ;क्यों?द्ध 2अतः, यदि इ2 दृ 4ंब ≥ 0 हैए तो द्विघात समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल दृईं 2ंद्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने के इस सूत्रा को द्विघाती सूत्रा ;ुनंकतंजपब वितउनसंद्ध कहते हैं। द्विघाती सूत्रा के उपयोग के लिए आइए वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 10 रू प्रश्नावली 4ण्1 के प्रश्न संख्या 2;पद्ध को द्विघाती सूत्रा से हल कीजिए। हल रू माना भूखंड की चैड़ाइर् ग मीटर है। तब, लंबाइर् ;2ग ़ 1द्ध मीटर है। हमें दिया है कि ग;2ग ़ 1द्ध त्र 528ए अथार्त् 2ग2 ़ ग दृ 528 त्र 0 है। यह ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का है, जहाँ ं त्र 2ए इ त्र 1ए ब त्र दृ 528 है। अतः द्विघाती सूत्रा से, हमें निम्न हल मिलते हैंः −± 4;2द्ध;528द्ध 11 1़ −± 4225 −± 651 ग त्र त्रत्र 4 4 4 64 दृ66अथार्त् ग त्र या ग त्र 44 अथार्त् ग त्र 16 या ग त्र − 33 2 क्योंकि ग एक विमा होने के कारण )णात्मक नहीं हो सकता है, इसलिए भूखंड की चैड़ाइर् 16उ है और लंबाइर् 33उ है। आपको यह सत्यापित करना चाहिए कि ये मान समस्या के प्रतिबंधें को संतुष्ट करते हैं। उदाहरण 11 रू दो ऐसे क्रमागत विषम ध्नात्मक पूणा±क ज्ञात कीजिए जिनके वगो± का योग 290 हों। हल रू माना दोनों क्रमागत विषम ध्नात्मक पूणा±कों में छोटा पूणा±क ग है। तब, दूसरा पूणा±क ग ़ 2 होगा। प्रश्न के अनुसार, ग2 ़ ;ग ़ 2द्ध2 त्र 290 अथार्त् ग2 ़ ग2 ़ 4ग ़ 4 त्र 290 अथार्त् 2ग2 ़ 4ग दृ 286 त्र 0 अथार्त् ग2 ़ 2ग दृ 143 त्र 0ए जो ग में एक द्विघात समीकरण है। द्विघाती सूत्रा का प्रयोग करके, हम पाते हैंः −2 ± 4 ़ 572 −2 ± 576 −2 ± 24 ग त्र त्रत्र 2 22 अथार्त् ग त्र 11 या ग त्र दृ 13 परन्तु ग एक ध्नात्मक विषम पूणा±क दिया है। अतः, ग त्र 11 होगा, क्योंकि ग ≠ दृ 13 है। अतः, दोनों क्रमागत विषम ध्नात्मक पूणा±क 11 और 13 हैं। जाँच: 112 ़ 132 त्र 121 ़ 169 त्र 290 है। उदाहरण 12 रू एक ऐसे आयताकार पावर्फ को बनाना है जिसकी चैड़ाइर् इसकी लंबाइर् से 3 उ कम हो। इसका क्षेत्रापफल पहले से निमिर्त समद्विबाहु त्रिाभुजाकार पावर्फ जिसका आधर आयताकार पावर्फ की चैड़ाइर् के बराबर तथा ऊँचाइर् 12 उ है, से 4 वगर् मीटर अध्िक हो ;देख्िाए आकृति 4ण्3द्ध। इस आयताकार पावर्फ की लंबाइर् और चैड़ाइर् ज्ञात कीजिए। हल रू माना कि आयताकार पावर्फ की चैड़ाइर् ग उ है। इसलिए, इसकी लंबाइर् त्र ;ग ़ 3द्ध उ होगी। अतः आयताकार पावर्फ का क्षेत्रापफल त्र ग;ग ़ 3द्ध उ2 त्र ;ग2 ़ 3गद्ध उ2 अब समद्विबाहु त्रिाभुज का आधर त्र ग उ 1 2अतः इसका क्षेत्रापफल त्र × ग × 12 त्र 6 ग उ2प्रश्न के अनुसार ग2 ़ 3ग त्र6ग ़ 4 अथार्त् ग2 दृ 3ग दृ 4 त्र 0 द्विघाती सूत्रा का उपयोग करने पर, हम पाते हैंः 3 ±25 3 ±5 ग त्र त्र त्र 4 या दृ 1 22 परंतु ग ≠ दृ 1 है ;क्यों?द्ध। अतः, ग त्र 4 है। आवृफति 4ण्3 इसलिए, पावर्फ की चैड़ाइर् त्र 4उ और लंबाइर् 7उ होगी। सत्यापन रू आयताकार पावर्फ का क्षेत्रापफल त्र 28 उ2 त्रिाभुजाकार पावर्फ का क्षेत्रापफल त्र 24 उ2 त्र ;28 दृ 4द्ध उ2 उदाहरण 13 रू निम्न द्विघात समीकरणों के मूल, यदि उनका अस्ितत्व हो तो द्विघाती सूत्रा का उपयोग करके ज्ञात कीजिएः ;पद्ध 3ग2 दृ 5ग ़ 2 त्र 0 ;पपद्ध ग2 ़ 4ग ़ 5 त्र 0 ;पपपद्ध 2ग2 दृ 2 2 ग ़ 1 त्र 0 हल रू ;पद्ध 3ग2 दृ 5ग ़ 2 त्र 0 के लिएः यहाँ ं त्र 3ए इ त्र दृ 5ए ब त्र 2 है। इसलिए, इ2 दृ 4ंब त्र 25 दृ 24 त्र 1 झ 0 है। 5 ± 15 ±12अतः ग त्र त्र हैए अथार्त् ग त्र 1 या ग त्र है।66 3 2इसलिए मूल और 1 हैं।3 ;पपद्ध ग2 ़ 4ग ़ 5 त्र 0 के लिए यहाँ ं त्र 1ए इ त्र 4ए ब त्र 5 है। इसलिए इ2 दृ 4ंब त्र 16 दृ 20 त्र दृ 4 ढ 0 है। परंतु, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वगर् )णात्मक नहीं हो सकता है, इसलिए 2इ − 4ंब का मान वास्तविक नहीं होगा। अतः दिए हुए समीकरण के कोइर् वास्तविक मूल नहीं हैं। 2;पपपद्ध 2ग दृ 2 2 ग ़ 1 त्र 0 के लिएः यहाँ ं त्र 2ए इ त्र −2 2ए ब त्र 1 है। इसलिए इ2 दृ 4ंब त्र 8 दृ 8 त्र 0 है। 2 1अतः ग त्र त्र± 0 ह, अथातैर् ्ग त्र है।42 2 11इसलिए मूल ए हैं। 22 उदाहरण 14 रू निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए: 1 11 ;पद्ध ग ़त्र 3ए ग ≠ 0 ;पपद्ध −त्र 3ए ग ≠ 0ए2 ग गग − 2 हल रू 1 ;पद्ध ग ़त्र 3 के लिएः सभी पदों को ग ≠ 0 से गुणा करने पर, हम पाते हैंः ग ग2 ़ 1 त्र 3ग अथार्त् ग2 दृ 3ग ़ 1 त्र 0ए जो एक द्विघात समीकरण है। यहाँ ं त्र 1ए इ त्र दृ 3ए ब त्र 1 है। अतः इ2 दृ 4ंब त्र 9 दृ 4 त्र 5 झ 0 3 ± 5अतः ग त्र ;क्यों?द्ध2 3 ़ 53 − 5आरैइसलिए मूल हैं।22 11 ;पपद्ध −त्र 3ए ग ≠ 0ए 2 रू गग −2 चूँकि ग ≠ 0ए 2 हैए इसलिए समीकरण को ग ;ग दृ 2द्ध से गुणा करने पर, हम पाते हैंः ;ग दृ 2द्ध दृ ग त्र3ग ;ग दृ 2द्धत्र3ग2 दृ 6ग अतः, दी गइर् समीकरण परिवतिर्त होकर 3ग2 दृ 6ग ़ 2 त्र 0 बन जाती है, जो एक द्विघात समीकरण है। यहाँ ं त्र 3ए इ त्र दृ 6ए ब त्र 2 है। इसलिए इ2 दृ 4ंब त्र 36 दृ 24 त्र 12 झ 0 है। 6 ± 12 6 ± 23 3 ± 3अतः ग त्र त्रत्र 6 63 3 ़ 33 − 3आरैइसलिए, मूल हैं।33 उदाहरण 15 रू एक मोटर बोट, जिसकी स्िथर जल में चाल 18 ाउध्ी है, 24 ाउ धरा के प्रतिवूफल जाने में, वही दूरी धरा के अनुवूफल जाने की अपेक्षा 1 घंटा अध्िक लेती है। धारा की चाल ज्ञात कीजिए। हल रू माना कि धरा की चाल ग ाउध्ी है। इसलिए, धरा के प्रतिवूफल नाव की चाल त्र ;18 दृ गद्ध ाउध्ी और धरा के अनुवूफल नाव की चाल त्र ;18 ़ गद्ध ाउध्ी है। दरू ी 24 धरा के प्रतिवूफल जाने में लिया गया समय त्र त्र घंटेचाल 18 − ग 24 इसी प्रकार, धरा के अनुवूफल जाने में लिया गया समय त्र घंटे 18 ़ ग प्रश्नानुसार 24 24 − त्र1 18 − ग 18 ़ग अथार्त् 24;18 ़ गद्ध दृ 24;18 दृ गद्ध त्र ;18 दृ गद्ध ;18 ़ गद्ध अथार्त् ग2 ़ 48ग दृ 324 त्र 0 द्विघाती सूत्रा का उपयोग करके, हम पाते हैंः − 48 ± 482 ़1296 − 48 ± 3600 ग त्र त्र 22 − 48 ±60 त्र त्र 6 या दृ 54 2 क्योंकि ग धरा की चाल है, इसलिए यह )णात्मक नहीं हो सकती है। अतः, हम मूल ग त्र दृ 54 को छोड़ देते हैं। इसलिए, ग त्र 6 से हम प्राप्त करते हैं कि धरा की चाल 6 ाउध्ी है। प्रश्नावली 4ण्3 1ण् यदि निम्नलिख्िात द्विघात समकरणों के मूलों का अस्ितत्व हो तो इन्हें पूणर् वगर् बनाने की विध्ि द्वारा ज्ञात कीजिए। ;पद्ध 2ग2 दृ 7ग ़ 3 त्र 0 ;पपद्ध 2ग2 ़ ग दृ 4 त्र 0 2;पपपद्ध 4ग ़ 43ग ़ 3 त्र 0 ;पअद्ध 2ग2 ़ ग ़ 4 त्र 0 2ण् उपयुर्क्त प्रश्न 1 में दिए गए द्विघात समीकरणों के मूल, द्विघाती सूत्रा का उपयोग करके, ज्ञात कीजिए। 3ण् निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए: 1 1 111 ;पद्ध ग −त्र 3ए ग ≠ 0 ;पपद्ध −त्र ए ग ≠ दृ 4ए 7 गग ़ 4 ग − 7 30 4ण् 3 वषर् पूवर् रहमान की आयु ;वषो± मेंद्ध का व्युत्क्रम और अब से 5 वषर् पश्चात् आयु के व्युत्क्रम 1 का योग है। उसकी वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए।3 5ण् एक क्लास टेस्ट में शेपफाली के गण्िात और अंग्रेजी में प्राप्त किए गए अंकों का योग 30 है। यदि उसको गण्िात में 2 अंक अध्िक और अंगे्रजी में 3 अंक कम मिले होते, तो उनके अंकों का गुणनपफल 210 होता। उसके द्वारा दोनों विषयों में प्राप्त किए अंक ज्ञात कीजिए। 6ण् एक आयताकार खेत का विकणर् उसकी छोटी भुजा से 60 मी अध्िक लंबा है। यदि बड़ी भुजा छोटी भुजा से 30 मी अध्िक हो, तो खेत की भुजाएँ ज्ञात कीजिए। 7ण् दो संख्याओं के वगो± का अंतर 180 है। छोटी संख्या का वगर् बड़ी संख्या का आठ गुना है। दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए। 8ण् एक रेलगाड़ी एक समान चाल से 360 ाउ की दूरी तय करती है। यदि यह चाल 5 ाउध्ी अिाक होती, तो वह उसी यात्रा में 1 घंटा कम समय लेती। रेलगाड़ी की चाल ज्ञात कीजिए। 9ण् दो पानी के नल एक - साथ एक हौज को 9 घंटों में भर सकते हैं। बड़े व्यास वाला नल हौज3 8 को भरने में, कम व्यास वाले नल से 10 घंटे कम समय लेता है। प्रत्येक द्वारा अलग से हौज को भरने के समय ज्ञात कीजिए। 10ण् मैसूर और बैगंलोर के बीच के132 ाउ यात्रा करने में एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी, सवारी गाड़ी से 1 घंटा समय कम लेती है ;मध्य के स्टेशनों पर ठहरने का समय ध्यान में न लिया जाएद्ध। यदि एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल, सवारी गाड़ी की औसत चाल से11ाउध्ी अध्िक हो, तो दोनों रेलगाडि़यों की औसत चाल ज्ञात कीजिए। 11ण् दो वगो± के क्षेत्रापफलों का योग 468 उ2 है। यदि उनके परिमापों का अंतर24 उ हो, तो दोनों वगो± की भुजाएँ ज्ञात कीजिए। 4ण्5 मूलों की प्रवृफति 2पिछले अनुच्छेद में, आपने देखा है कि समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल दृ इ ± इ2 − 4ंब ग त्र 2ं इइ2 − 4ंब द्वारा देय होते हैं। यदि इ2 दृ 4ंब झ 0 हैए तो हम दो भ्िान्न वास्तविक मूल −़ 2ं 2ं इइ2 − 4ंब और − दृ प्राप्त करते हैं। 2ं 2ं इ इइयदि इ2 दृ 4ंब त्र 0 है तो ग त्र −± 0ए अथातर् ् ग त्र− या दृ है।2ं 2ं 2ं −इअतः, समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के दोनों मूल हैं।2ं इसलिए, हम कहते हैं कि इस स्िथति में द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के दो बराबर वास्तविक मूल हैं। यदि इ2 दृ 4ंब ढ 0 है, तो ऐसी कोइर् वास्तविक संख्या नहीं है, जिसका वगर् इ2 दृ 4ंब हो। अतः दिए हुए द्विघात समीकरण के इस स्िथति में कोइर् वास्तविक मूल नहीं हैं। क्योंकि इ2 दृ 4ंब यह निश्िचत करता है कि द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल वास्तविक हैं अथवा नहीं,इ2 दृ 4ंब को इस द्विघात समीकरण का विविक्तकर ;क्पेबतपउपदंदजद्ध कहते हैं। अतः, द्विघात समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के ;पद्ध दो भ्िान्न वास्तविक मूल होते हैं, यदि इ2 दृ 4ंब झ 0 हो ;पपद्ध दो बराबर वास्तविक मूल होते हैं, यदि इ2 दृ 4ंब त्र 0 हो ;पपपद्ध कोइर् वास्तविक मूल नहीं होता, यदि इ2 दृ 4ंब ढ 0 हो आइए वुफछ उदाहरणों पर विचार करें। उदाहरण 16 रू द्विघात समीकरण 2ग2 दृ 4ग ़ 3 त्र 0 का विविक्तकर ज्ञात कीजिए और पिफर मूलों की प्रवृफति ज्ञात कीजिए। हल रू दिया गया समीकरण ंग2 ़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का है, जहाँ ं त्र 2ए इ त्र दृ 4 और ब त्र 3 है। इसलिए, विविक्तकार इ2 दृ 4ंब त्र ;दृ 4द्ध2 दृ ;4 × 2 × 3द्ध त्र 16 दृ 24 त्र दृ 8 ढ 0 है। अतः, दिए गए समीकरण के कोइर् वास्तविक मूल नहीं हैं। उदाहरण 17 रू 13 मीटर व्यास वाले एक वृत्ताकार पावर्फ की परिसीमा के एक ¯बदु पर एक खंभा इस प्रकार गाड़ना है कि इस पावर्फ के एक व्यास के दोनों अंत बिंदुओं पर बने पफाटकों । और ठ से खंभे की दूरियों का अंतर 7 मीटर हो। क्या ऐसा करना संभव है? यदि है, तो दोनों पफाटकों से कितनी दूरियों पर खंभा गाड़ना है? हल रू आइए सवर्प्रथम एक चित्रा बनाएँ ;देख्िाए आवृफति 4.4द्ध। माना खंभे की अभीष्ट स्िथति च् है। माना खंभे की पफाटक ठ से दूरी ग उ है अथार्त् ठच् त्र ग उ है। अब खंभे की दोनों पफाटकों की दूरियों का अंतर त्र ।च् दृ ठच् ;या ठच् दृ ।च्द्ध त्र 7 उ है। इसलिए,।च् त्र ;ग ़ 7द्ध उ होगा। साथ ही,।ठ त्र 13उ है। चूँकि।ठ व्यास है, इसलिए आवृफति 4ण्4 ∠।च्ठ त्र 90° ;क्यों?द्ध इसलिए ।च्2 ़ च्ठ2 त्र ।ठ2 ;पाइथागोरस प्रमेय द्वाराद्ध 2अथार्त् ;ग ़ 7द्ध2 ़ गत्र 132 2अथार्त् ग2 ़ 14ग ़ 49 ़ ग त्र 169 अथार्त् 2ग2 ़ 14ग दृ 120 त्र 0 अतः खंभे की पफाटक ठ से दूरी ष्गष् समीकरण ग2 ़ 7ग दृ 60 त्र 0 को संतुष्ट करती है। यह देखने के लिए कि ऐसा संभव है अथवा नहीं, आइए इसके विविक्तकर पर विचार करें। विविक्तकर हैः इ2 दृ 4ंब त्र 72 दृ 4 × 1 × ;दृ 60द्ध त्र 289 झ 0 अतः, दिए गए द्विघात समीकरण के दो वास्तविक मूल हैं और इसीलिए खंभे को पावर्फ की परिसीमा पर गाड़ा जा सकना संभव है। द्विघात समीकरण ग2 ़ 7ग दृ 60 त्र 0 को द्विघाती सूत्रा से हल करने पर, हम पाते हैंः −7 ±289 −7 ± 17 ग त्र त्र 22 इसलिए, ग त्र 5 या दृ 12 है। चूँकि ग खंभे और पफाटक ठ के बीच की दूरी है, यह ध्नात्मक होना चाहिए। इसलिए, ग त्र दृ 12 को छोड़ देते हैं। अतः, ग त्र 5 है। इस प्रकार, खंभे को पावर्फ की परिसीमा पर पफाटक ठ से 5उ और पफाटक । से 13 2 − 52 त्र 12उ की दूरी पर गाड़ना है। 1उदाहरण 18 रू समीकरण 3ग2 दृ 2ग ़ त्र 0 का विविक्तकार ज्ञात कीजिए और पिफर मूलों की3प्रवृफति ज्ञात कीजिए। यदि वे वास्तविक है, तो उन्हें ज्ञात कीजिए। 1 हल रू यहाँ ं त्र 3ए इ त्र दृ 2ए ब त्र है।3 1इसलिए विविक्तकर इ2 दृ 4ंब त्र ;दृ 2द्ध2 दृ 4 × 3 × त्र 4 दृ 4 त्र 0 है।3अतः द्विघात समीकरण के दो बराबर वास्तविक मूल हैं। −इ −इ 22 11 ये मूल एए अथातर्् एए अथातर््ए हैं।2ं 2ं 66 33 प्रश्नावली 4ण्4 1ण् निम्न द्विघात समीकरणों के मूलों की प्रवृफति ज्ञात कीजिए। यदि मूलों का अस्ितत्व हो तो उन्हें ज्ञात कीजिए: ;पद्ध 2ग2 दृ 3ग ़ 5 त्र 0 ;पपद्ध 3ग2 दृ 4 3 ग ़ 4 त्र 0 ;पपपद्ध 2ग2 दृ 6ग ़ 3 त्र 0 2ण् निम्न प्रत्येक द्विघात समीकरण में ा का ऐसा मान ज्ञात कीजिए कि उसके दो बराबर मूल हों। ;पद्ध 2ग2 ़ ाग ़ 3 त्र 0 ;पपद्ध ाग ;ग दृ 2द्ध ़ 6 त्र 0 3ण् क्या एक ऐसी आम की बगिया बनाना संभव है जिसकी लंबाइर्, चैड़ाइर् से दुगुनी हो और उसका क्षेत्रापफल 800 उ2 हो? यदि है, तो उसकी लंबाइर् और चैड़ाइर् ज्ञात कीजिए। 4ण् क्या निम्न स्िथति संभव है? यदि है तो उनकी वतर्मान आयु ज्ञात कीजिए। दो मित्रों की आयु का योग 20 वषर् है। चार वषर् पूवर् उनकी आयु ;वषो± मेंद्ध का गुणनपफल 48 था। 5ण् क्या परिमाप 80 उ तथा क्षेत्रापफल 400 उ2 के एक पावर्फ को बनाना संभव है? यदि है, तो उसकी लंबाइर् और चैड़ाइर् ज्ञात कीजिए। 4ण्6 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्न तथ्यों का अध्ययन किया हैः 21ण् चर ग में एक द्विघात समीकरणंग़ इग ़ ब त्र 0 के प्रकार का होता हैए जहाँंए इए ब वास्तविक संख्याएँ हैं और ं ≠ 0 है। 2ण् एक वास्तविक संख्या α द्विघात समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0 का एक मूल कहलाती है, यदि 22ंα2 ़ इα ़ ब त्र 0 हो। द्विघात बहुपद ंग ़ इग ़ ब के शून्यक और द्विघात समीकरण 2ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल एक ही होते हैं। 23ण् यदि हमंग ़ इग ़ बए ं ≠ 0 के दो रैख्िाक गुणकों में गुणनखंड कर सवेंफ, तो द्विघात समीकरण 2ंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल, प्रत्येक गुणक को शून्य के बराबर करके, प्राप्त कर सकते हैं। 4ण् पूणर् वगर् बनाने की विध्ि से भी दिए गए द्विघात समीकरण को हल किया जा सकता है। −इ ± इ2 − 4ंब 25ण् द्विघाती सूत्राः द्विघात समीकरणंग ़ इग ़ ब त्र 0 के मूल द्वारा देय होते हैं, 2ं यदि इ2 दृ 4ंब ≥ 0 हो। 26ण् एक द्विघात समीकरण ंग ़ इग ़ ब त्र 0ए ं ≠ 0 में, ;पद्ध दो भ्िान्न वास्तविक मूल होते हैं, यदिइ2 दृ 4ंब झ 0 हो। ;पपद्ध दो बराबर मूल ;अथार्त् संपाती वास्तविक मूलद्ध होते हैं, यदि इ2 दृ 4ंब त्र 0 हो और ;पपपद्ध कोइर् वास्तविक मूल नहीं होते हैं, यदि इ2 दृ 4ंब ढ 0 हो।

>Chap–4>

Our Past -3

4

द्विघात समीकरण


4.1 भूमिका

अध्याय 2 में, आपने विभिन्न प्रकार के बहुपदों का अध्ययन किया है। ax2 + bx + c, a 0 एक प्रकार का द्विघात बहुपद था। जब हम इस बहुपद को शून्य के तुल्य कर देते हैं, तो हमें एक द्विघात समीकरण प्राप्त हो जाती है। वास्तविक जीवन से संबंधित कई समस्याओं को हल करने में हम द्विघात समीकरणों का प्रयोग करते हैं। उदाहरणार्थ, मान लीजिए कि एक धर्मार्थ ट्रस्ट 300 वर्ग मीटर क्षेत्रफल का प्रार्थना कक्ष बनाना चाहता है, जिसकी लंबाई उसकी चौड़ाई के दो गुने से एक मीटर अधिक हो। कक्ष की लंबाई और चौड़ाई क्या होनी चाहिए? माना कक्ष की चौड़ाई
x मीटर है। तब, उसकी लंबाई (2x + 1) मीटर होनी चाहिए। हम इस सूचना को चित्रीय रूप में
आकृति 4.1 जैसा दिखा सकते हैं।

664.png


आकृति 4.1

अब कक्ष का क्षेत्रफल = (2x + 1). x m2 = (2x2 + x) m2

इसलिए 2x2 + x = 300 (दिया है)

अतः 2x2 + x – 300 = 0

इसलिए, कक्ष की चौड़ाई, समीकरण 2x2 + x – 300 = 0, जो एक द्विघात समीकरण है, को संतुष्ट करना चाहिए।

अधिकांश लोग विश्वास करते हैं कि बेबीलोनवासियों ने ही सर्वप्रथम द्विघात
समीकरणों
को हल किया था। उदाहरण के लिए, वे जानते थे कि कैसे दो संख्याओं को ज्ञात किया जा सकता है, जिनका योग तथा गुणनफल दिया हो। ध्यान दीजिए कि यह समस्या
x2px + q = 0 के प्रकार के समीकरण को हल करने के तुल्य है। यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड ने लंबाइयाँ ज्ञात करने की एक ज्यामितीय विधि विकसित की जिसको हम वर्तमान शब्दावली में द्विघात समीकरण के हल कहते हैं। व्यापक रूप में, द्विघात समीकरणों को हल करने का श्रेय बहुधा प्राचीन भारतीय गणितज्ञों को जाता है। वास्तव में, ब्रह्मगुप्त (सा.यु. 598-665) ने
ax2 + bx = c के रूप के द्विघात समीकरण को हल करने का एक स्पष्ट सूत्र दिया था। बाद में, श्रीधराचार्य (सा.यु. 1025) ने एक सूत्र प्रतिपादित किया, जिसे अब द्विघाती सूत्र के रूप में जाना जाता है, जो पूर्ण वर्ग विधि से द्विघात समीकरण को हल करने पर प्राप्त हुआ (जैसा भास्कर II ने लिखा)। एक अरब गणितज्ञ अल-ख्वारिज़्मी (लगभग सा.यु. 800) ने भी विभिन्न प्रकार के द्विघात समीकरणों का अध्ययन किया। अब्राह्म बार हिय्या हा-नासी यूरो ने 1145 में छपी अपनी पुस्तक ‘लिबर इंबाडोरम’ में विभिन्न द्विघात समीकरणों के पूर्ण हल दिए।

इस अध्याय में, आप द्विघात समीकरणों और उनके हल ज्ञात करने की विभिन्न विधियों का अध्ययन करेंगे। दैनिक जीवन की कई स्थितियों में भी आप द्विघात समीकरणों के कुछ उपयोग देखेंगे।

4.2 द्विघात समीकरण

चर x में एक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के प्रकार की होती है, जहाँ a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं तथा a 0 है। उदाहरण के लिए, 2x2 + x – 300 = 0 एक द्विघात समीकरण है। इसी प्रकार, 2x2 – 3x + 1 = 0, 4x – 3x2 + 2 = 0 और 1 – x2 + 300 = 0 भी द्विघात समीकरण हैं।

वास्तव में, कोई भी समीकरण p(x) = 0, जहाँ p(x), घात 2 का एक बहुपद है, एक द्विघात समीकरण कहलाती है। परंतु जब हम p(x) के पद घातों के घटते क्रम में लिखते हैं, तो हमें समीकरण का मानक रूप प्राप्त होता है। अर्थात् ax2 + bx + c = 0, a 0,
द्विघात समीकरण का मानक रूप कहलाता है।

द्विघात समीकरण हमारे आसपास के परिवेश की अनेक स्थितियों एवं गणित के विभिन्न क्षेत्रों में प्रयुक्त होते हैं। आइए हम कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 1 : निम्न स्थितियों को गणितीय रूप में व्यक्त कीजिए :

(i) जॉन और जीवंती दोनों के पास कुल मिलाकर 45 कंचे हैं। दोनों पाँच-पाँच कंचे खो देते हैं और अब उनके पास कंचों की संख्या का गुणनफल 124 है। हम जानना चाहेंगे कि आरंभ में उनके पास कितने-कितने कंचे थे

(ii) एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ खिलौने निर्मित करता है। प्रत्येक खिलौने का मूल्य ( में) 55 में से एक दिन में निर्माण किए गए खिलौने की संख्या को घटाने से
प्राप्त संख्या के
बराबर है। किसी एक दिन, कुल निर्माण लागत 750 थी। हम उस दिन निर्माण किए गए खिलौनों की संख्या ज्ञात करना चाहेंगे।

हल :

(i)माना कि जॉन के कंचों की संख्या x थी।

तब जीवंती के कंचों की संख्या = 45 – x (क्यों?)

जॉन के पास, 5 कंचे खो देने के बाद, बचे कंचों की संख्या = x – 5

जीवंती के पास, 5 कंचे खोने के बाद, बचे कंचों की संख्या = 45 – x – 5 = 40 – x

अतः उनका गुणनफल = (x – 5) (40 – x)

= 40xx2 – 200 + 5x

= – x2 + 45x – 200

अबx2 + 45x – 200 = 124 (दिया है कि गुणनफल = 124)

अर्थात्x2 + 45x – 324 = 0

अर्थात् x2 – 45x + 324 = 0

अतः जॉन के पास जितने कंचे थे, जो समीकरण

x2 – 45x + 324 = 0

को संतुष्ट करते हैं।

(ii) माना उस दिन निर्मित खिलौनों की संख्या x है।

इसलिए, उस दिन प्रत्येक खिलौने की निर्माण लागत (रुपयों में) = 55 – x

अतः, उस दिन कुल निर्माण लागत (रुपयों में) = x (55 – x)

इसलिए x (55 – x) = 750

अर्थात् 55xx2 = 750

अर्थात्x2 + 55x – 750 = 0

अर्थात् x2 – 55x + 750 = 0

अतः उस दिन निर्माण किए गए खिलौनों की संख्या द्विघात समीकरण

x2 – 55x + 750 = 0

को संतुष्ट करती है।

उदाहरण 2 : जाँच कीजिए कि निम्न द्विघात समीकरण हैं या नहींः

(i) (x – 2)2 + 1 = 2x – 3 (ii) x(x + 1) + 8 = (x + 2) (x – 2)

(iii) x (2x + 3) = x2 + 1 (iv) (x + 2)3 = x3 – 4

हल :

(i) बायाँ पक्ष = (x – 2)2 + 1 = x2 – 4x + 4 + 1 = x2 – 4x + 5

इसलिए (x – 2)2 + 1 = 2x – 3 को

x2 – 4x + 5 = 2x – 3 लिखा जा सकता है।

अर्थात् x2 – 6x + 8 = 0

यह ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का है।

अतः दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(ii) चूँकि x(x + 1) + 8 = x2 + x + 8 और (x + 2)(x – 2) = x2 – 4 है,

इसलिए x2 + x + 8 = x2 – 4

अर्थात् x + 12 = 0

यह ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का समीकरण नहीं है। इसलिए, दिया हुआ समीकरण एक द्विघात समीकरण नहीं है।

(iii) यहाँ बायाँ पक्ष = x (2x + 3) = 2x2 + 3x

अतः x (2x + 3) = x2 + 1 को लिखा जा सकता हैः

2x2 + 3x = x2 + 1

इसलिए x2 + 3x – 1 = 0 हमें प्राप्त होता है।

यह ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का समीकरण है।

अतः, दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

(iv) यहाँ बायाँ पक्ष = (x + 2)3 = x3 + 6x2 + 12x + 8

अतः (x + 2)3 = x3 – 4 को लिखा जा सकता हैः

x3 + 6x2 + 12x + 8 = x3 – 4

अर्थात् 6x2 + 12x + 12 = 0 या x2 + 2x + 2 = 0

यह ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का समीकरण है।

अतः दिया गया समीकरण एक द्विघात समीकरण है।

टिप्पणी : ध्यान दीजिए कि उपर्युक्त (ii) में, दिया गया समीकरण देखने में द्विघात समीकरण लगता है, परंतु यह द्विघात समीकरण नहीं है।

उपर्युक्त (iv) में, समीकरण देखने में त्रिघात (घात 3 का समीकरण) लगता है और द्विघात नहीं लगता है। परंतु वह द्विघात समीकरण निकलता है। जैसा आप देखते हैं समीकरण को यह तय करने कि वह द्विघात है अथवा नहीं, हमें उसका सरलीकरण करना आवश्यक है।

प्रश्नावली 4.1

1. जाँच कीजिए कि क्या निम्न द्विघात समीकरण हैं :

(i) (x + 1)2 = 2(x – 3)

(ii) x2 – 2x = (–2) (3 – x)

(iii) (x – 2)(x + 1) = (x – 1)(x + 3)

(iv) (x – 3)(2x +1) = x(x + 5)

(v) (2x – 1)(x – 3) = (x + 5)(x – 1)

(vi) x2 + 3x + 1 = (x – 2)2

(vii) (x + 2)3 = 2x (x2 – 1)

(viii) x3 – 4x2 x + 1 = (x – 2)3

2. निम्न स्थितियों को द्विघात समीकरणों के रूप में निरूपित कीजिए :

(i) एक आयताकार भूखंड का क्षेत्रफल 528 m2 है। क्षेत्र की लंबाई (मीटरों में) चौड़ाई के दुगुने से एक अधिक है। हमें भूखंड की लंबाई और चौड़ाई ज्ञात करनी है।

(ii) दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांकों का गुणनफल 306 है। हमें पूर्णांकों को ज्ञात करना है।

(iii) रोहन की माँ उससे 26 वर्ष बड़ी है। उनकी आयु (वर्षों में) का गुणनफल अब से तीन वर्ष पश्चात् 360 हो जाएगी। हमें रोहन की वर्तमान आयु ज्ञात करनी है।

(iv) एक रेलगाड़ी 480 km की दूरी समान चाल से तय करती है। यदि इसकी चाल 8 km/h कम होती, तो वह उसी दूरी को तय करने में 3 घंटे अधिक लेती। हमें रेलगाड़ी की चाल ज्ञात करनी है।

4.3 गुणनखंडों द्वारा द्विघात समीकरण का हल

द्विघात समीकरण 2x2 – 3x + 1 = 0 पर विचार कीजिए। यदि हम इस समीकरण के बाएँ पक्ष में x को 1 से प्रतिस्थापित करें, तो हमें प्राप्त होता हैः (2 × 12) – (3 × 1) + 1 = 0 = समीकरण का दाँया पक्ष। हम कहते हैं कि 1 द्विघात समीकरण 2x2 – 3x + 1 = 0 का एक मूल है। इसका यह भी अर्थ है कि 1 द्विघात बहुपद 2x2 – 3x + 1 का एक शून्यक है।

व्यापक रूप में, एक वास्तविक संख्या α द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0, a 0 का एक मूल कहलाती है, यदि a α2 + bα + c = 0 हो। हम यह भी कहते हैं कि x = α द्विघात समीकरण का एक हल है अथवा α द्विघात समीकरण को संतुष्ट करता है। ध्यान दीजिए कि द्विघात बहुपद ax2 + bx + c के शून्यक और द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0
के मूल एक ही हैं।

आपने अध्याय 2 में, देखा है कि एक द्विघात बहुपद के अधिक से अधिक दो शून्यक हो सकते हैं। अतः, किसी द्विघात समीकरण के अधिक से अधिक दो मूल हो सकते हैं।

आपने कक्षा IX में सीखा है कि कैसे मध्य पद को विभक्त करके एक द्विघात बहुपद के गुणनखंड किए जा सकते हैं। हम इस ज्ञान का प्रयोग द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने में करेंगे। आइए देखें कैसे।

उदाहरण 3 : गुणनखंडन द्वारा समीकरण 2x2 – 5x + 3 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।

हल : सर्वप्रथम, हम मध्य पद – 5x को –2x –3x [क्योंकि (–2x) × (–3x) = 6x2 = (2x2) × 3] के रूप में विभक्त करते हैं।

अतः, 2x2 – 5x + 3 = 2x2 – 2x – 3x + 3 = 2x (x – 1) –3(x – 1) = (2x – 3)(x – 1)

इसलिए, 2x2 – 5x + 3 = 0 को (2x – 3)(x – 1) = 0 के रूप में पुनः लिखा जा सकता है।

अतः, x के वे मान जिनके लिए 2x2 – 5x + 3 = 0 वही है, जो (2x – 3)(x – 1) = 0 से प्राप्त है, अर्थात् 2x – 3 = 0 या x – 1 = 0 से प्राप्त होंगे।

अब, 2x – 3 = 0, 967.png देता है और x – 1 = 0, x = 1 देता है।

अतः, 972.png और x = 1 दिए हुए समीकरण के हल हैं।

दूसरे शब्दों में, 1 और 977.png समीकर 2x2 – 5x + 3 = 0 के मूल हैं।

जाँच कीजिए कि ये ही दिए गए समीकरण के मूल हैं।

ध्यान दीजिए कि हमने समीकरण 2x2 – 5x + 3 = 0 के मूलों को 2x2 – 5x + 3 के दो रैखिक गुणनखंडों में गुणनखंडित करके और प्रत्येक गुणनखंड को शून्य के बराबर करके प्राप्त किए हैं।

उदाहरण 4 : द्विघात समीकरण 6x2x – 2 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।

हल : हमें प्राप्त हैः

6x2x – 2 = 6x2 + 3x – 4x – 2

= 3x (2x + 1) – 2 (2x + 1)

= (3x – 2)(2x + 1)

6x2x – 2 = 0 के मूल x के वे मान हैं, जिनके लिए (3x – 2)(2x + 1) = 0 हो।

इसलिए 3x – 2 = 0 या 2x + 1 = 0

अर्थात् x = 982.png या x = 987.png

अतः 6x2x – 2 = 0 के मूल  Screenshot from 2019-06-17 16-53-11 हैं।

हम मूलों के सत्यापन के लिए यह जाँच करते हैं कि  Screenshot from 2019-06-17 16-53-11 समीकरण
6x2 x – 2 = 0 को संतुष्ट करते हैं या नहीं।

उदाहरण 5 : द्विघात समीकरण 1002.png के मूल ज्ञात कीजिए।

Screenshot from 2019-06-17 14-43-39

Screenshot from 2019-06-17 14-45-00

अतः यह मूल, गुणनखंड 1042.png के दो बार आने के कारण, दो बार आता है, अर्थात् इस मूल की पुनरावृत्ति होती है।

Screenshot from 2019-06-17 14-45-46

उदाहरण 6 : अनुच्छेद 4.1 में दिए गए प्रार्थना कक्ष की विमाएँ ज्ञात कीजिए।

हल : अनुच्छेद 4.1 में हमने ज्ञात किया था कि यदि कक्ष की चौड़ाई x m हो, तो x समीकरण
2
x2 + x – 300 = 0 को संतुष्ट करता है। गुणनखंडन विधि का प्रयोग कर, हम इस समीकरण को निम्न प्रकार से लिखते हैं :

2x2 – 24x + 25x – 300 = 0

या 2x (x – 12) + 25 (x – 12) = 0

अर्थात् (x – 12)(2x + 25) = 0

अतः, दिए गए समीकरण के मूल x = 12 या x = – 12.5 हैं। क्योंकि x कक्ष की चौड़ाई है, यह ऋणात्मक नहीं हो सकती।

इसलिए, कक्ष की चौड़ाई 12 m है। इसकी लंबाई = 2x + 1 = 25 m होगी।

प्रश्नावली 4.2

1. गुणनखंड विधि से निम्न द्विघात समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिएः

(i) x2 – 3x – 10 = 0

(ii) 2x2 + x – 6 = 0

(iii) Screenshot from 2019-06-17 14-47-04

(iv) 2x2x + 1068.png = 0

(v) 100x2 – 20x + 1 = 0

2. उदाहरण 1 में दी गई समस्याओं को हल कीजिए।

3. एेसी दो संख्याएँ ज्ञात कीजिए, जिनका योग 27 हो और गुणनफल 182 हो।

4. दो क्रमागत धनात्मक पूर्णांक ज्ञात कीजिए जिनके वर्गों का योग 365 हो।

5. एक समकोण त्रिभुज की ऊँचाई इसके आधार से 7 cm कम है। यदि कर्ण 13 cm का हो, तो अन्य दो भुजाएँ ज्ञात कीजिए।

6. एक कुटीर उद्योग एक दिन में कुछ बर्तनों का निर्माण करता है। एक विशेष दिन यह देखा गया कि प्रत्येक नग की निर्माण लागत ( में) उस दिन के निर्माण किए बर्तनों की संख्या के दुगुने से 3 अधिक थी। यदि उस दिन की कुल निर्माण लागत 90 थी, तो निर्मित बर्तनों की संख्या और प्रत्येक नग की लागत ज्ञात कीजिए।

4.4 द्विघात समीकरण का पूर्ण वर्ग बनाकर हल

पिछले अनुच्छेद में, आपने एक द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने की एक विधि पढ़ी थी। इस अनुच्छेद में, हम एक और विधि पढ़ेंगे।

निम्न स्थिति पर विचार कीजिएः

सुनीता की दो वर्ष पूर्व आयु (वर्षों में) तथा अब से चार वर्ष उपरांत की आयु का गुणनफल उसकी वर्तमान आयु के दो गुने से एक अधिक है। उसकी वर्तमान आयु क्या है?

इसका उत्तर देने के लिए, माना उसकी वर्तमान आयु (वर्षों में) x है। तब, उसकी 2 वर्ष पूर्व आयु एवं अब से चार वर्ष उपरांत की आयु का गुणनफल (x – 2)(x + 4) है।

इसलिए (x – 2)(x + 4) = 2x + 1

अर्थात् x2 + 2x – 8 = 2x + 1

अर्थात् x2 – 9 = 0

अतः सुनीता की वर्तमान आयु द्विघात समीकरण x2 – 9 = 0 को संतुष्ट करती है।

हम इसे x2 = 9 के रूप में लिख सकते हैं। वर्गमूल लेने पर, हम x = 3 या
x
= – 3 पाते हैं। क्योंकि आयु एक धनात्मक संख्या होती है, इसलिए x = 3 ही होगा।

अतः सुनीता की वर्तमान आयु 3 वर्ष है।

ब द्विघात समीकरण (x + 2)2 – 9 = 0 पर विचार कीजिए। हल करने के लिए, इसे हम (x + 2)2 = 9 के रूप में लिख सकते हैं। वर्गमूल लेने पर, हम x + 2 = 3 या
x
+ 2 = – 3 पाते हैं।

इसलिए x = 1 या x = –5

अतः (x + 2)2 – 9 = 0 के मूल 1 और – 5 हैं।

उपर्युक्त दोनों उदाहरणों में, x को समाहित करने वाला पद पूर्णतया वर्ग के अंदर है और हमने वर्गमूल लेकर आसानी से मूल ज्ञात कर लिए थे। परंतु यदि हमें समीकरण
x
2 + 4x – 5 = 0 को हल करने को कहा जाता, तो क्या होता? हम संभवतः इसे करने के
लिए गुणनखंड
विधि का प्रयोग करते, जब तक कि हम यह न जान लें (किसी प्रकार) कि x2 + 4x – 5 = (x + 2)2 – 9 है।

अतः x2 + 4x – 5 = 0 को हल करना (x + 2)2 – 9 = 0 को हल करने के तुल्य है, जो हमने देखा कि बहुत शीघ्र ही हल हो जाता है। वास्तव में, हम किसी भी द्विघात समीकरण को (x + a)2b2 = 0 की तरह बना सकते हैं और फिर हम इसके मूल आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। आइए देखें कि क्या यह संभव है। आकृति 4.2 देखिए।

इस आकृति में, हम देख सकते हैं कि कैसे x2 + 4x, (x + 2)2 – 4 में बदल रहा है।



772.png


आकृति 4.2

प्रक्रिया निम्न प्रकार से हैः

x2 + 4xScreenshot from 2019-06-17 14-51-23

= x2 + 2x + 2x

= (x + 2) x + 2 × x

= (x + 2) x + 2 × x + 2 × 2 – 2 × 2

= (x + 2) x + (x + 2) × 2 – 2 × 2

= (x + 2) (x + 2) – 22

= (x + 2)2 – 4

अतः x2 + 4x – 5 = (x + 2)2 – 4 – 5 = (x + 2)2 – 9

इस प्रकार, x2 + 4x – 5 = 0 को पूर्ण वर्ग बनाकर (x + 2)2 – 9 = 0 के रूप में लिखा जा सकता है। इसे पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से जाना जाता है।

संक्षेप में, इसे निम्न प्रकार से दर्शाया जा सकता हैः

x2 + 4x =Screenshot from 2019-06-17 14-52-36

अतः x2 + 4x – 5 = 0 को पुनः निम्न रूप में लिखा जा सकता हैः

Screenshot from 2019-06-17 14-53-30

अर्थात् (x + 2)2 – 9 = 0

अब समीकरण 3x2 – 5x + 2 = 0 पर विचार कीजिए। ध्यान दीजिए कि x2 का गुणांक पूर्ण वर्ग नहीं है। इसलिए, हम समीकरण को 3 से गुणा करके पाते हैंः

9x2 – 15x + 6 = 0

Screenshot from 2019-06-17 15-07-03

अतः 9x2 – 15x + 6 = 0 को निम्न रूप में लिखा जा सकता हैः

Screenshot from 2019-06-17 15-09-25

अतः 9x2 – 15x + 6 = 0 के वही हल हैं, जो  Screenshot from 2019-06-17 15-10-37 के हैं।

अर्थात् Screenshot from 2019-06-17 15-11-22

(हम इसे  Screenshot from 2019-06-17 15-13-03, जहाँ±धन और ऋण को निरूपित करते हैं, भी लिख सकते हैं।)

Screenshot from 2019-06-17 15-13-31

इसलिए दिए गए समीकरण के मूल 1 और 1190.png हैं।

टिप्पणी : इसको दर्शाने की एक दूसरी विधि निम्न है :

समीकरण 3x2 – 5x + 2 = 0

वही है जो Screenshot from 2019-06-17 15-14-11 = 0 है।

अबScreenshot from 2019-06-17 15-15-11

Screenshot from 2019-06-17 15-16-03


इसलिए 3x2 – 5x + 2 = 0 का वही हल है, जो  Screenshot from 2019-06-17 15-17-46 का हल है।
Screenshot from 2019-06-17 15-18-16

उपर्युक्त विधि को समझाने के लिए आइए कुछ और उदाहरण लेते हैं।

उदाहरण 7 : उदाहरण 3 में दिया गया समीकरण पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से हल कीजिए।

हल : समीकरण 2x2 – 5x + 3 = 0 वही है, जो 1251.pngहै।

Screenshot from 2019-06-17 15-19-24

इसलिए 2x2 – 5x + 3 = 0 को  Screenshot from 2019-06-17 15-20-49 की तरह लिखा जा सकता है।

अतः समीकरण 2x2 – 5x + 3 = 0 के मूल वस्तुतः वही हैं, जो  Screenshot from 2019-06-17 15-20-49 के मूल हैं।

अब Screenshot from 2019-06-17 15-20-49 वही है, जो  Screenshot from 2019-06-17 15-21-58 है।

Screenshot from 2019-06-17 15-22-27




इसलिए 1292.png = 1297.png

अर्थात् x = 1302.png

अर्थात् x = 1307.png

अर्थात् x = 1312.png या x = 1

इसलिए समीकरण के हल  Screenshot from 2019-06-17 15-23-27 और 1 हैं।

आइए इन हलों की जाँच करें।

2x2 – 5x + 3 = 0 में  Screenshot from 2019-06-17 15-23-27 रखने पर, हम  Screenshot from 2019-06-17 15-24-04 पाते हैं, जो सही है। इसी प्रकार, आप जाँच कर सकते हैं कि x = 1 भी दिए गए समीकरण को संतुष्ट करता है।

उदाहरण7में, हमने समीकरण 2x2 – 5x + 3 = 0 को 2 से भाग देकर  Screenshot from 2019-06-17 15-24-49 प्राप्त किया जिससे प्रथम पद पूर्ण वर्ग बन गया और फिर वर्ग को पूरा किया। इसके स्थान पर, हम समस्त पदों को 2 से गुणा करके भी प्रथम पद को 4x2 = (2x)2 बना सकते थे और तब पूर्ण वर्ग बना लेते।

इस विधि को अगले उदाहरण में समझाया गया है।

उदाहरण 8 : पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से समीकरण 5x2 – 6x – 2 = 0 के मूल हल कीजिए।

हल : दिए हुए समीकरण को 5 से गुणा करने पर, हम पाते हैंः

25x2 – 30x – 10 = 0

यह निम्न के तुल्य हैः

(5x)2 – 2 × (5x) × 3 + 32 – 32 – 10 = 0

अर्थात् (5x – 3)2 – 9 – 10 = 0

अर्थात् (5x – 3)2 – 19 = 0

अर्थात् (5x – 3)2 = 19

अर्थात् 5x – 3 =Screenshot from 2019-06-17 15-26-28

अर्थात् 5x = 3 Screenshot from 2019-06-17 15-26-28

अतः x =Screenshot from 2019-06-17 15-27-20

इसलिए मूल  Screenshot from 2019-06-17 15-27-39 और   हैं।

सत्यापित कीजिए कि मूल 1363.png और 1368.png हैं।

उदाहरण 9 : पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से 4x2 + 3x + 5 = 0 के मूल ज्ञात कीजिए।

हल : ध्यान दीजिए 4x2 + 3x + 5 = 0 निम्न के तुल्य हैः

Screenshot from 2019-06-17 15-28-43

परंतु हम जानते हैं कि किसी भी x के वास्तविक मान के लिए 1399.png ऋणात्मक नहीं हो सकता है (क्यों?)। इसलिए, x का कोई वास्तविक मान दी हुई समीकरण को संतुष्ट नहीं कर सकता। अतः, दिए गए समीकरण के कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

अब तक आपने पूर्ण वर्ग बनाने की विधि वाले अनेक उदाहरण देखे हैं। अतः, आइए इस विधि को व्यापक रूप में दें।

द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 (a 0) पर विचार कीजिए। समस्त पदों को a से भाग देने पर, हम पाते हैंः 1404.png

इस समीकरण को हम इस प्रकार लिख सकते हैंः

1409.png 

अर्थात् 1414.png = 0

इसलिए दिए गए समीकरण के मूल वही हैं, जो

1419.png अर्थात् 1425.png (1)

के हैं। यदि b2 – 4ac 0 हो, तो (1) का वर्गमूल लेने पर, हम पाते हैंः

1430.png = 1435.png

इसलिए x = 1440.png

अतः, ax2 + bx + c = 0 के मूल  Screenshot from 2019-06-17 15-30-41 यदि
b2 – 4ac 0 है। उस स्थिति में जब b2 – 4ac < 0 है, तो समीकरण के वास्तविक मूल नहीं होते हैं। (क्यों?)

अतः, यदि b2 – 4ac 0 है, तो द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल  Screenshot from 2019-06-17 15-31-39हैं।

द्विघात समीकरण के मूल ज्ञात करने के इस सूत्र को द्विघाती सूत्र (quadratic formula) कहते हैं।

द्विघाती सूत्र के उपयोग के लिए आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 10 : प्रश्नावली 4.1 के प्रश्न संख्या 2(i) को द्विघाती सूत्र से हल कीजिए।

हल : माना भूखंड की चौड़ाई x मीटर है। तब, लंबाई (2x + 1) मीटर है। हमें दिया है कि
x
(2x + 1) = 528, अर्थात् 2x2 + x – 528 = 0 है।

यह ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का है, जहाँ a = 2, b = 1, c = – 528 है।

अतः द्विघाती सूत्र से, हमें निम्न हल मिलते हैंः

Screenshot from 2019-06-17 15-34-05

क्योंकि x एक विमा होने के कारण ऋणात्मक नहीं हो सकता है, इसलिए भूखंड की चौड़ाई 16m है और लंबाई 33m है।

आपको यह सत्यापित करना चाहिए कि ये मान समस्या के प्रतिबंधों को संतुष्ट करते हैं।

उदाहरण 11 : दो एेसे क्रमागत विषम धनात्मक पूर्णांक ज्ञात कीजिए जिनके वर्गों का योग 290 हों।

हल : माना दोनों क्रमागत विषम धनात्मक पूर्णांकों में छोटा पूर्णांक x है। तब, दूसरा पूर्णांक
x + 2 होगा। प्रश्न के अनुसार,

x2 + (x + 2)2 = 290

अर्थात् x2 + x2 + 4x + 4 = 290

अर्थात् 2x2 + 4x – 286 = 0

अर्थात् x2 + 2x – 143 = 0,

जो x में एक द्विघात समीकरण है।

द्विघाती सूत्र का प्रयोग करके, हम पाते हैंः

Screenshot from 2019-06-17 15-35-18

अर्थात् x = 11 या x = – 13

परन्तु x एक धनात्मक विषम पूर्णांक दिया है। अतः, x = 11 होगा, क्योंकि x – 13 है।

अतः, दोनों क्रमागत विषम धनात्मक पूर्णांक 11 और 13 हैं।

जाँच : 112 + 132 = 121 + 169 = 290 है।

उदाहरण 12 : एक एेसे आयताकार पार्क को बनाना है जिसकी चौड़ाई इसकी लंबाई से 3 m कम हो। इसका क्षेत्रफल पहले से निर्मित समद्विबाहु त्रिभुजाकार पार्क जिसका आधार आयताकार पार्क की चौड़ाई के बराबर तथा ऊँचाई 12 m है, से 4 वर्ग मीटर अधिक हो (देखिए आकृति 4.3)। इस आयताकार पार्क की लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।

हल : माना कि आयताकार पार्क की चौड़ाई x m है।

इसलिए, इसकी लंबाई = (x + 3) m होगी।

अतः आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = x(x + 3) m2 = (x2 + 3x) m2

अब समद्विबाहु त्रिभुज का आधार = x m

अतः इसका क्षेत्रफल = 1476.png × x × 12 = 6x m2

प्रश्न के अनुसार

x2 + 3x = 6x + 4

अर्थात् x2 – 3x – 4 = 0

द्विघाती सूत्र का उपयोग करने पर, हम पाते हैं:

x = 1481.png = 1486.png = 4 या – 1

Screenshot from 2019-06-17 15-40-06


          आकृति 4.3

परंतु x – 1 है (क्यों?)। अतः, x = 4 है।

इसलिए, पार्क की चौड़ाई = 4m और लंबाई 7m होगी।

सत्यापन : आयताकार पार्क का क्षेत्रफल = 28 m2

त्रिभुजाकार पार्क का क्षेत्रफल = 24 m2 = (28 – 4) m2

उदाहरण 13 : निम्न द्विघात समीकरणों के मूल, यदि उनका अस्तित्व हो तो द्विघाती सूत्र का उपयोग करके ज्ञात कीजिएः

(i) 3x2 – 5x + 2 = 0

(ii) x2 + 4x + 5 = 0

(iii) 2x2 – 21491.pngx + 1 = 0

हल :

(i) 3x2 – 5x + 2 = 0 के लिएः यहाँ a = 3, b = – 5, c = 2 है। इसलिए, b2 – 4ac = 25 – 24 = 1 > 0 है।

अतः xScreenshot from 2019-06-17 15-38-31 है, अर्थात् x = 1 या x = 1501.png है।

इसलिए मूल 1506.png और 1 हैं।

(ii) x2 + 4x + 5 = 0 के लिए यहाँ a = 1, b = 4, c = 5 है। इसलिए b2 – 4ac = 16 – 20 = – 4 < 0 है।

परंतु, क्योंकि किसी वास्तविक संख्या का वर्ग ऋणात्मक नहीं हो सकता है, इसलिए 1511.png का मान वास्तविक नहीं होगा।

अतः दिए हुए समीकरण के कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

(iii) 2x21516.pngx + 1 = 0 के लिएः यहाँ a = 2, b = 1521.png, c = 1 है।

इसलिए b2 – 4ac = 8 – 8 = 0 है।

Screenshot from 2019-06-17 15-43-18

उदाहरण 14 : निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए :

Screenshot from 2019-06-17 15-43-56

हल :

(i) Screenshot from 2019-06-17 15-45-24 के लिएः सभी पदों को x 0 से गुणा करने पर, हम पाते हैंः

x2 + 1 = 3

अर्थात् x2 – 3x + 1 = 0, जो एक द्विघात समीकरण है।

यहाँ a = 1, b = – 3, c = 1 है।

अतः b2 – 4ac = 9 – 4 = 5 > 0

Screenshot from 2019-06-17 15-49-07

(ii)Screenshot from 2019-06-17 15-50-22

चूँकि x 0, 2 है, इसलिए समीकरण को x (x – 2) से गुणा करने पर, हम पाते हैंः

(x – 2) – x = 3x (x – 2)

= 3x2 – 6x

अतः, दी गई समीकरण परिवर्तित होकर 3x2 – 6x + 2 = 0 बन जाती है, जो एक द्विघात समीकरण है।

यहाँ a = 3, b = – 6, c = 2 है। इसलिए b2 – 4ac = 36 – 24 = 12 > 0 है।

Screenshot from 2019-06-17 15-52-04

उदाहरण 15 : एक मोटर बोट, जिसकी स्थिर जल में चाल 18 km/h है, 24 km धारा के प्रतिकूल जाने में, वही दूरी धारा के अनुकूल जाने की अपेक्षा 1 घंटा अधिक लेती है। धारा की चाल ज्ञात कीजिए।

हल : माना कि धारा की चाल x km/h है।

इसलिए, धारा के प्रतिकूल नाव की चाल = (18 – x) km/h और धारा के अनुकूल नाव की चाल = (18 + x) km/h है।

धारा के प्रतिकूल जाने में लिया गया समयScreenshot from 2019-06-17 15-53-25 घंटे

इसी प्रकार, धारा के अनुकूल जाने में लिया गया समयScreenshot from 2019-06-17 15-54-01 घंटे

प्रश्नानुसार

Screenshot from 2019-06-17 15-54-26

अर्थात् 24(18 + x) – 24(18 – x) = (18 – x) (18 + x)

अर्थात् x2 + 48x – 324 = 0

द्विघाती सूत्र का उपयोग करके, हम पाते हैंः

Screenshot from 2019-06-17 15-54-52

क्योंकि x धारा की चाल है, इसलिए यह ऋणात्मक नहीं हो सकती है। अतः, हम मूल x = – 54 को छोड़ देते हैं। इसलिए, x = 6 से हम प्राप्त करते हैं कि धारा की चाल 6 km/h है।

प्रश्नावली 4.3

1. यदि निम्नलिखित द्विघात समकरणों के मूलों का अस्तित्व हो तो इन्हें पूर्ण वर्ग बनाने की विधि द्वारा ज्ञात कीजिए।

(i) 2x2 – 7x + 3 = 0

(ii) 2x2 + x – 4 = 0

(iii) Screenshot from 2019-06-17 16-42-24

(iv) 2x2 + x + 4 = 0

2. उपर्युक्त प्रश्न 1 में दिए गए द्विघात समीकरणों के मूल, द्विघाती सूत्र का उपयोग करके, ज्ञात कीजिए।

3. निम्न समीकरणों के मूल ज्ञात कीजिए :

Screenshot from 2019-06-17 16-41-02

4. 3 वर्ष पूर्व रहमान की आयु (वर्षों में) का व्युत्क्रम और अब से 5 वर्ष पश्चात् आयु के व्युत्क्रम का योग 1630.pngहै। उसकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।

5. एक क्लास टेस्ट में शेफाली के गणित और अंग्रेजी में प्राप्त किए गए अंकों का योग 30 है। यदि उसको गणित में 2 अंक अधिक और अंग्रेजी में 3 अंक कम मिले होते, तो उनके अंकों का गुणनफल 210 होता। उसके द्वारा दोनों विषयों में प्राप्त किए अंक ज्ञात कीजिए।

6. एक आयताकार खेत का विकर्ण उसकी छोटी भुजा से 60 मी अधिक लंबा है। यदि बड़ी भुजा छोटी भुजा से 30 मी अधिक हो, तो खेत की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।

7. दो संख्याओं के वर्गों का अंतर 180 है। छोटी संख्या का वर्ग बड़ी संख्या का आठ गुना है। दोनों संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

8. एक रेलगाड़ी एक समान चाल से 360 km की दूरी तय करती है। यदि यह चाल 5 km/h अधिक होती, तो वह उसी यात्रा में 1 घंटा कम समय लेती। रेलगाड़ी की चाल ज्ञात कीजिए।

9. दो पानी के नल एक-साथ एक हौज को 1635.png घंटों में भर सकते हैं। बड़े व्यास वाला नल हौज को भरने में, कम व्यास वाले नल से 10 घंटे कम समय लेता है। प्रत्येक द्वारा अलग से हौज को भरने के समय ज्ञात कीजिए।

10. मैसूर और बैगंलोर के बीच के 132 km यात्रा करने में एक एक्सप्रेस रेलगाड़ी, सवारी गाड़ी से 1 घंटा समय कम लेती है (मध्य के स्टेशनों पर ठहरने का समय ध्यान में न लिया जाए)। यदि एक्सप्रेस रेलगाड़ी की औसत चाल, सवारी गाड़ी की औसत चाल से 11km/h अधिक हो, तो दोनों रेलगाड़ियों की औसत चाल ज्ञात कीजिए।

11. दो वर्गों के क्षेत्रफलों का योग 468 m2 है। यदि उनके परिमापों का अंतर 24 m हो, तो दोनों वर्गों की भुजाएँ ज्ञात कीजिए।

4.5 मूलों की प्रकृति

पिछले अनुच्छेद में, आपने देखा है कि समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल

Screenshot from 2019-06-17 16-40-28

द्वारा देय होते हैं। यदि b2 – 4ac > 0 है, तो हम दो भिन्न वास्तविक मूल  Screenshot from 2019-06-17 16-37-33 और  Screenshot from 2019-06-17 16-37-55 प्राप्त करते हैं।

यदि b2 – 4ac = 0 है तो xScreenshot from 2019-06-17 16-35-13 है।

अतः, समीकरण ax2 + bx + c = 0 के दोनों मूल 1660.png हैं।

इसलिए, हम कहते हैं कि इस स्थिति में द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के दो बराबर वास्तविक मूल हैं।

यदि b2 – 4ac < 0 है, तो एेसी कोई वास्तविक संख्या नहीं है, जिसका वर्ग b2 – 4ac हो। अतः दिए हुए द्विघात समीकरण के इस स्थिति में कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

क्योंकि b2 – 4ac यह निश्चित करता है कि द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल वास्तविक हैं अथवा नहीं, b2 – 4ac को इस द्विघात समीकरण का विविक्तकर (Discriminant) कहते हैं।

अतः, द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के

(i) दो भिन्न वास्तविक मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac > 0 हो

(ii) दो बराबर वास्तविक मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac = 0 हो

(iii) कोई वास्तविक मूल नहीं होता, यदि b2 – 4ac < 0 हो

आइए कुछ उदाहरणों पर विचार करें।

उदाहरण 16 : द्विघात समीकर 2x2 – 4x + 3 = 0 का विविक्तकर ज्ञात कीजिए और फिर मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए।

हल : दिया गया समीकरण ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का है, जहाँ a = 2, b = – 4 और c = 3
है। इसलिए, विविक्तकार

b2 – 4ac = (– 4)2 – (4 × 2 × 3) = 16 – 24 = – 8 < 0 है।

अतः, दिए गए समीकरण के कोई वास्तविक मूल नहीं हैं।

उदाहरण 17 : 13 मीटर व्यास वाले एक वृत्ताकार पार्क की परिसीमा के एक बिंदु पर एक खंभा इस प्रकार गाड़ना है कि इस पार्क के एक व्यास के दोनों अंत बिंदुओं पर बने फाटकों A और से खंभे की दूरियों का अंतर 7 मीटर हो। क्या एेसा करना संभव है? यदि है, तो दोनों फाटकों से कितनी दूरियों पर खंभा गाड़ना है?

हल : आइए सर्वप्रथम एक चित्र बनाएँ (देखिए आकृति 4.4)।

माना खंभे की अभीष्ट स्थिति P है। माना खंभे की फाटक B से दूरी x m है अर्थात् BP = x m है। अब खंभे की दोनों फाटकों की दूरियों का अंतर = AP – BP
(या BP – AP) = 7 m है। इसलिए, AP = (x + 7) m होगा।


923.png


 आकृति 4.4


साथ ही, AB = 13m है। चूँकि AB व्यास है, इसलिए

APB = 90° (क्यों?)
इसलिए AP2 + PB2 = AB2 (पाइथागोरस प्रमेय द्वारा)

अर्थात् (x + 7)2 + x2 = 132

अर्थात् x2 + 14x + 49 + x2 = 169

अर्थात् 2x2 + 14x – 120 = 0

अतः खंभे की फाटक B से दूरीxसमीकरण x2 + 7x – 60 = 0 को संतुष्ट करती है।

यह देखने के लिए कि एेसा संभव है अथवा नहीं, आइए इसके विविक्तकर पर विचार करें। विविक्तकर हैः

b2 – 4ac = 72 – 4 × 1 × (– 60) = 289 > 0

अतः, दिए गए द्विघात समीकरण के दो वास्तविक मूल हैं और इसीलिए खंभे को पार्क की परिसीमा पर गाड़ा जा सकना संभव है।

द्विघात समीकरण x2 + 7x – 60 = 0 को द्विघाती सूत्र से हल करने पर, हम पाते हैंः

x = 1665.png = 1670.png

इसलिए, x = 5 या – 12 है।

चूँकि x खंभे और फाटक B के बीच की दूरी है, यह धनात्मक होना चाहिए। इसलिए,
x
= – 12 को छोड़ देते हैं। अतः, x = 5 है।

इस प्रकार, खंभे को पार्क की परिसीमा पर फाटक B से 5m और फाटक A से 1675.png= 12m की दूरी पर गाड़ना है।

उदाहरण 18 : समीकरण 3x2 – 2x +1681.png = 0 का विविक्तकर ज्ञात कीजिए और फिर मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए। यदि वे वास्तविक है, तो उन्हें ज्ञात कीजिए।

हल : यहाँ a = 3, b = – 2, 1686.png है।

इसलिए विविक्तकर b2 – 4ac = (– 2)2 – 4 × 3 × 1691.png = 4 – 4 = 0 है।

अतः द्विघात समीकरण के दो बराबर वास्तविक मूल हैं।

Screenshot from 2019-06-17 15-57-40

प्रश्नावली 4.4

1. निम्न द्विघात समीकरणों के मूलों की प्रकृति ज्ञात कीजिए। यदि मूलों का अस्तित्व हो तो उन्हें ज्ञात कीजिए :

(i) 2x2 – 3x + 5 = 0 (ii) 3x2 – 41701.pngx + 4 = 0

(iii) 2x2 – 6x + 3 = 0

2. निम्न प्रत्येक द्विघात समीकरण में k का एेसा मान ज्ञात कीजिए कि उसके दो बराबर मूल हों।

(i) 2x2 + kx + 3 = 0 (ii) kx (x – 2) + 6 = 0

3. क्या एक एेसी आम की बगिया बनाना संभव है जिसकी लंबाई, चौड़ाई से दुगुनी हो और उसका क्षेत्रफ 800 m2 हो? यदि है, तो उसकी लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए

4. क्या निम्न स्थिति संभव है? यदि है तो उनकी वर्तमान आयु ज्ञात कीजिए।

दो मित्रों की आयु का योग 20 वर्ष है। चार वर्ष पूर्व उनकी आयु (वर्षों में) का गुणनफल 48 था।

5. क्या परिमाप 80 m तथा क्षेत्रफल 400 m2 के एक पार्क को बनाना संभव है? यदि है, तो उसकी लंबाई और चौड़ाई ज्ञात कीजिए।

4.6 सारांश

इस अध्याय में, आपने निम्न तथ्यों का अध्ययन किया हैः

1. चर x में एक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के प्रकार का होता है, जहाँ a, b, c वास्तविक संख्याएँ हैं और a 0 है।

2. एक वास्तविक संख्या α द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 का एक मूल कहलाती है, यदि
aα2 + bα + c = 0 हो। द्विघात बहुपद ax2 + bx + c के शून्यक और द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल एक ही होते हैं।

3. यदि हम ax2 + bx + c, a 0 के दो रैखिक गुणकों में गुणनखंड कर सकें, तो द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल, प्रत्येक गुणक को शून्य के बराबर करके, प्राप्त कर सकते हैं।

4. पूर्ण वर्ग बनाने की विधि से भी दिए गए द्विघात समीकरण को हल किया जा सकता है।

5. द्विघाती सूत्रः द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0 के मूल 1706.png द्वारा देय होते हैं, यदि b2 – 4ac 0 हो।

6. एक द्विघात समीकरण ax2 + bx + c = 0, a 0 में,

(i) दो भिन्न वास्तविक मूल होते हैं, यदि b2 – 4ac > 0 हो।

(ii) दो बराबर मूल (अर्थात् संपाती वास्तविक मूल) होते हैं, यदि b2 – 4ac = 0 हो और

(iii) कोई वास्तविक मूल नहीं होते हैं, यदि b2 – 4ac < 0 हो।

 

पाठकों के लिए विशेष
शाब्दिक समस्याओं की स्थिति में, प्राप्त हलों की जाँच समस्या के अंतर्गत बनी समीकरणों से नहीं, अपितु मूल समस्या मे दिए गए प्रतिबंधों द्वारा की जानी चाहिए (अध्याय 3 के उदाहरणों 11, 13, 19 तथा अध्याय 4 के उदाहरणों 10, 11, 12 को देखिए)।

RELOAD if chapter isn't visible.