Chapter 1 अध्याय पालमपुर गाँव की कहानी अवलोकन इस कहानी का उद्देश्य उत्पादन से संबंधित कुछ मूल विचारों से परिचय कराना है और ऐसा हम एक काल्पनिक गाँव-पालमपुर की कहानी के माध्यम से कर रहे हैं। पालमपुर में खेती मुख्य क्रिया है, जबकि अन्य कई क्रियाएँ जैसे, लघु-स्तरीय विनिर्माण, डेयरी, परिवहन आदि सीमित स्तर पर की जाती हैं। इन उत्पादन क्रियाओं के लिए विभिन्न प्रकार के संसाधनों की आवश्यकता होती है, यथा-प्राकृतिक संसाधन, मानव निर्मित वस्तुएँ, मानव प्रयास, मुद्रा आदि। पालमपुर की कहानी से हमें विदित होगा कि गाँव चित्र 11 : एक गाँव का दृश्य में इच्छित वस्तुओं और सेवाओं को उत्पादित करने के लिए नलकूप बिजली से ही चलते हैं और इसका उपयोग विभिन्न विभिन्न संसाधन किस प्रकार समायोजित होते हैं। प्रकार के छोटे कार्यों के लिए भी किया जाता है। पालमपुर में परिचय दो प्राथमिक विद्यालय और एक हाई स्कूल है। गाँव में एक पालमपुर आस-पड़ोस के गाँवों और कस्बों से भलीभाँति जुड़ा राजकीय प्राथमिक स्वास्थ केंद्र और एक निजी औषधालय भी हुआ है। एक बड़ा गाँव, रायगंज, पालमपुर से तीन किलोमीटर । है, जहाँ रोगियों का उपचार किया जाता है। की दूरी पर है। प्रत्येक मौसम में यह सड़क गाँव को रायगंज और उससे आगे निकटतम छोटे कस्बे शाहपुर से जोड़ती है। इस उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि पालमपुर में सड़कों, परिवहन सड़क पर गुड़ और अन्य वस्तुओं से लदी हुई बैलगाड़ियाँ, के साधनों, बिजली, सिंचाई, विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों का भैंसाबग्घी से लेकर अन्य कई तरह के वाहन जैसे, मोटरसाइकिल, पर्याप्त विकसित तंत्र है। इन सुविधाओं की तुलना अपने निकट जीप, ट्रैक्टर और ट्रक तक देखे जा सकते हैं। के गाँव में उपलब्ध सुविधाओं से कीजिए। इस गाँव में विभिन्न जातियों के लगभग 450 परिवार रहते हैं। एक काल्पनिक गाँव पालमपुर की कहानी हमें किसी भी गाँव में अधिकांश भूमि के स्वामी उच्च जाति के 80 परिवार गाँव में विभिन्न प्रकार की उत्पादन संबंधी गतिविधियों के बारे हैं। उनके मकान, जिनमें से कुछ बहुत बड़े हैं, ईंट और सीमेंट में बताएगी। भारत के गाँवों में खेती उत्पादन की प्रमुख के बने हुए हैं। अनुसूचित जाति (दलित) के लोगों की संख्या गतिविधि है। अन्य उत्पादन गतिविधियों में, जिन्हें गैर-कृषि गाँव की कुल जनसंख्या का एक तिहाई है और वे गाँव के एक क्रियाएँ कहा गया है, लघु विनिर्माण, परिवहन, दुकानदारी कोने में काफ़ी छोटे घरों में रहते हैं, जिनमें कुछ मिट्टी और फूस आदि शामिल हैं। हम उत्पादन के बारे में कुछ सामान्य बातें के बने हैं। अधिकांश के घरों में बिजली है। खेतों में सभी जानने के बाद इन दोनों प्रकार की क्रियाओं पर विचार करेंगे। यह कथ्य आंशिक रूप से गिर्बट एटीन के शोध अध्ययन पर आधारित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर में एक गाँव से है। पालमपुर गाँव की कहानी 2018-19 उत्पादन का संगठन उत्पादन का उद्देश्य ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पादित करना है, कहा जाता है। मानव पूँजी के विषय में और अधिक अध्ययन जिनकी हमें आवश्यकता है। वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन हम अगले अध्याय में करेंगे। के लिए चार चीजें आवश्यक हैं। पहली आवश्यकता है भूमि तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन, जैसे-जल, वन, खनिज। दूसरी आवश्यकता है श्रम अर्थात् जो लोग काम करेंगे। कुछ उत्पादन क्रियाओं में जरूरी कार्यों को करने के लिए बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे कर्मियों की जरूरत होती है। दूसरी क्रियाओं के लिए शारीरिक कार्य करने वाले श्रमिकों की जरूरत होती है। प्रत्येक श्रमिक उत्पादन के लिए आवश्यक श्रम प्रदान करता है। तीसरी आवश्यकता भौतिक पूँजी है, अर्थात् उत्पादन के प्रत्येक स्तर पर अपेक्षित कई तरह के आगत। क्या आप जानते हैं कि भौतिक पूँजी के अंतर्गत कौन-कौन सी मदें आती हैं? (क) औजार, मशीन, भवन : औजारों तथा मशीनों में अत्यंत साधारण औज़ार जैसे-किसान का हल से लेकर चित्र 1.2 : कारखाने में मशीनों पर कार्य करते श्रमिक परिष्कृत मशीनें जैसे-जेनरेटर, टरबाइन, कंप्यूटर आदि आते हैं। औज़ारों, मशीनों और भवनों का उत्पादन में • चित्र में उत्पादन में प्रयुक्त भूमि, श्रम और स्थायी पूँजी की कई वर्षों तक प्रयोग होता है और इन्हें स्थायी पूँजी पहचान कीजिए। कहा जाता है। उत्पादन भूमि, श्रम और पूँजी को संयोजित करके संगठित (ख) कच्चा माल और नकद मुद्रा : उत्पादन में कई प्रकार के होता है, जिन्हें उत्पादन के कारक कहा जाता है। पालमपुर की कच्चे माल की आवश्यकता होती है, जैसे बुनकर द्वारा कहानी को पढ़ने के क्रम में हम उत्पादन के प्रथम तीन कारकों प्रयोग किया जाने वाला सत और कुम्हारों द्वारा प्रयोग में के बारे में और अधिक सीखेंगे। सुविधा के लिए, इस अध्याय के बारे में और अधिक सीखेगे। सुविधा के लिए, इस अध्याय । लाई जाने वाली मिट्टी। उत्पादन के दौरान भुगतान करने में हम भौतिक पूँजी को पूँजी कहेंगे। तथा ज़रूरी माल खरीदने के लिए कुछ पैसों की भी पालमपुर में खेती आवश्यकता होती है। कच्चा माल तथा नकद पैसों को कार्यशील पूँजी कहते हैं। औज़ारों, मशीनों तथा भवनों से | 1. भूमि स्थिर है। भिन्न ये चीजें उत्पादन-क्रिया के दौरान समाप्त हो पालमपुर में खेती उत्पादन की प्रमुख क्रिया है। काम करने जाती हैं। वालों में 75 प्रतिशत लोग अपनी जीविका के लिए खेती पर एक चौथी आवश्यकता भी होती है। आपको स्वयं उपभोग निर्भर हैं। वे किसान अथवा कृषि श्रमिक हो सकते हैं। इन लोगों हेतु या बाजार में बिक्री हेतु उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम का हित खेतों में उत्पादन से जुड़ा हुआ है। और भौतिक पूँजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान लेकिन याद रखिए, कृषि उत्पादन में एक मूलभूत कठिनाई और उद्यम की आवश्यकता पड़ेगी। आजकल इसे मानव पूंजी है। खेती में प्रयुक्त भूमि-क्षेत्र वस्तुतः स्थिर होता है। पालमपुर अर्थशास्त्र 2018-19 में वर्ष 1960 से आज तक जुताई के अंतर्गत भूमि-क्षेत्र में कोई की सिंचाई की जा सकती थी। प्रारंभ में कुछ नलकूप सरकार विस्तार नहीं हुआ है। उस समय तक, गाँव की कुछ बंजर भूमि द्वारा लगाए गए थे। पर, जल्दी ही किसानों ने अपने निजी नलकूप को कृषि योग्य भूमि में बदल दिया गया था। नयी भूमि को लगाने प्रारंभ कर दिए। परिणामस्वरूप, 1970 के दशक के मध्य खेती योग्य बनाकर कृषि उत्पादन को और बढ़ाने की कोई तक 200 हेक्टेयर के पूरे जुते हुए क्षेत्र की सिंचाई होने लगी। गुंजाइश नहीं है। भारत में सभी गाँवों में ऐसी उच्च स्तर की सिंचाई भूमि मापने की मानक इकाई हेक्टेयर है, यद्यपि गाँवों में व्यवस्था नहीं है। नदीय मैदानों के अतिरिक्त हमारे देश भूमि का माप बीघा, गुंठा आदि जैसी क्षेत्रीय इकाइयों में भी में तटीय क्षेत्रों में अच्छी सिंचाई होती है। इसके विपरीत, किया जाता है। एक हेक्टेयर, 100 मीटर की भुजा वाले वर्ग । पठारी क्षेत्रों जैसे, दक्षिणी पठार में सिंचाई कम होती है। के क्षेत्रफल के बराबर होता है। क्या आप एक हेक्टेयर के देश में आज भी कुल कृषि क्षेत्र के 40 प्रतिशत से भी मैदान के क्षेत्र की तुलना अपने स्कूल के मैदान से कर कम क्षेत्र में ही सिंचाई होती है। शेष क्षेत्रों में खेती मुख्यतः सकते हैं? वर्षा पर निर्भर है। 2. क्या उसी भूमि से अधिक पैदावार करने का कोई तरीका है? एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने यहाँ जिस प्रकार की फसल पैदा की जाती है और जैसी सुविधाएँ को बहुविध फसल प्रणाली कहते है। यह भूमि के किसी उपलब्ध हैं, उन्हें देखते हुए पालमपुर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी । एक टुकड़े में उपज बढ़ाने की सबसे सामान्य प्रणाली है। भाग के गाँव की तरह लगता है। पालमपुर में समस्त भूमि पर । पालमपुर में सभी किसान कम से कम दो मुख्य फसलें पैदा खेती की जाती है। कोई भूमि बेकार नहीं छोड़ी जाती। बरसात के करते हैं। कई किसान पिछले पंद्रह-बीस वर्षों से तीसरी मौसम (खरीफ़) में किसान ज्वार और बाजरा उगाते हैं। इन पौधों फसल के रूप में आलू पैदा कर रहे हैं। को पशुओं के चारे के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इसके बाद अक्तूबर और दिसंबर के बीच आलू की खेती होती है। सर्दी के मौसम (रबी) में खेतों में गेहूं उगाया जाता है। उत्पादित गेहूँ में से परिवार के खाने के लिए रखकर शेष गेहूँ किसान रायगंज की मंडी में बेच देते हैं। भूमि के एक भाग में गन्ने की खेती भी की जाती है, जिसकी वर्ष में एक बार कटाई होती है। गन्ना बाजरा गन्ना अपने कच्चे रूप में या गुड़ के रूप में शाहपुर के व्यापारियों को बेचा जाता है। चित्र 1.3 : विभिन्न फसलें | पालमपुर में एक वर्ष में किसान तीन अलग-अलग फसलें आइए चर्चा करें इसलिए पैदा कर पाते हैं, क्योंकि वहाँ सिंचाई की सुविकसित | सारणी 1.1 में 10 लाख हेक्टेयर की इकाइयों में भारत में व्यवस्था है। पालमपुर में बिजली जल्दी ही आ गई थी। उसका कृषि क्षेत्र को दिखाया गया है। सारणी के नीचे दिए गए मुख्य प्रभाव यह पड़ा कि सिंचाई की पद्धति ही बदल गई। तब आरेख में इसे चित्रित करें। आरेख क्या दिखाता है? कक्षा में तक किसान कुँओं से रहट द्वारा पानी निकालकर छोटे-छोटे चर्चा करें। खेतों की सिंचाई किया करते थे। लोगों ने देखा कि बिजली से • क्या सिंचाई के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को बढ़ाना चलने वाले नलकूपों से ज्यादा प्रभावकारी ढंग से अधिक क्षेत्र आवश्यक है? क्यों? पालमपुर गाँव की कहानी आलू 2018-19 वर्ष 120 सारणी 1.1: संबंधित वर्षों में जुताई क्षेत्र मौसम में पैदा की गई फसल के रूप में मापा जाता है। 1960 वर्ष कृषि क्षेत्र ( लाख हेक्टेयर) के दशक के मध्य तक खेती में पारंपरिक बीजों का प्रयोग किया जाता था, जिनकी उपज अपेक्षाकृत कम थी। परंपरागत 130 बीजों को कम सिंचाई की आवश्यकता होती थी। किसान 140 140 उर्वरकों के रूप में गाय के गोबर या दूसरी प्राकृतिक खाद का 140 प्रयोग करते थे। यह सब किसानों के पास तत्काल ही उपलब्ध 140 थे, उन्हें इनको खरीदना नहीं पड़ता था। 155 155 1960 के दशक के अंत में हरित क्रांति ने भारतीय स्रोत : स्टेट ऑफ इंडियन एग्रीकल्चरल 2015-16; आर्थिक एवं किसानों को अधिक उपज वाले बीजों (एच.वाई.वी.) के द्वारा सांख्यिकी निदेशालय कृषि निगम और किसानों के कल्याण विभाग गेहूँ और चावल की खेती करने के तरीके सिखाए। परंपरागत बीजों की तुलना में एच.वाई.वी. बीजों से एक ही पौधे से ज्यादा अधिक उपज वाले बीज उर्वरक आधुनिक कृषि विधियाँ कीटनाशक सिंचाई नहरें बाँध | आप पालमपुर में पैदा की जाने वाली फसलों के बारे में पढ़ चुके हैं। अपने क्षेत्र में पैदा की जाने वाली फसलों की सूचना के आधार पर निम्न सारणी को भरिए : आपने देखा कि एक ही ज़मीन के टुकड़े से उत्पादन बढ़ाने का एक तरीका बहुविध फसल प्रणाली है। दूसरा तरीका अधिक उपज के लिए खेती में आधुनिक कृषि विधियों का प्रयोग करना है। उपज को भूमि के किसी टुकड़े में एक ही पंप सेट बिजली चित्र 1.4 : आधुनिक कृषि के तरीके : एच.वाई. वी. बीज, रासायनिक उर्वरक आदि फसल का नाम किस माह में बोयी गई किस माह में काटी गई सिंचाई का साधन (वर्षा, तालाब, नलकूप, नहर आदि ) अर्थशास्त्र 2018-19 मात्रा में अनाज पैदा होने की आशा थी। इसके परिणामस्वरूप, एक आरेख बनाकर दिखाइए। क्या हरित क्रांति दोनों ही जमीन के उसी टुकड़े में, पहले की अपेक्षा कहीं अधिक फसलों के लिए समान रूप से सफल सिद्ध हुई? अनाज की मात्रा पैदा होने लगी। यद्यपि, अति उपज प्रजातियों विचार-विमर्श करें। वाले बीजों से अधिकतम उपज पाने के लिए बहुत ज्यादा पानी । | • आधुनिक कृषि विधियों को अपनाने वाले किसान के लिए तथा रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जरूरत थी। अधिक आवश्यक कार्यशील पूँजी क्या है? उपज केवल अति उपज प्रजातियों वाले बीजों, सिंचाई, रासायनिक • पहले की तुलना में कषि की आधनिक विधियों के लिए उवर्रकों, और कीटनाशकों आदि के संयोजन से ही संभव थी। किसानों को अधिक नकद की जरूरत पड़ती है। क्यों? भारत में पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने खेती के आधुनिक तरीकों का सबसे पहले प्रयोग सुझाई गईं क्रियाएँ किया। इन क्षेत्रों में किसानों ने खेती में सिंचाई के लिए नलकूप खेत पर जाने के पश्चात् अपने क्षेत्र के कुछ किसानों से बातें और एच.वाई.वी बीजों, रासायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों कर यह मालूम कीजिए : का प्रयोग किया। उनमें से कुछ ने ट्रैक्टर और फसल गहाने के 1. आधुनिक या परंपरागत या मिश्रित-खेती की इन विधियों में लिए मशीनें खरीदीं, जिसने जुताई और कटाई के काम को तेज़ से किसान किसका प्रयोग करते हैं? एक टिप्पणी लिखिए। कर दिया। उन्हें इनसे गेहूं की ज्यादा पैदावार प्राप्त हुई। 2. सिंचाई के क्या स्रोत हैं? | पालमपुर में, परंपरागत बीजों से गेहूं की उपज 1,300 किलोग्राम 3. कृषि भूमि के कितने भाग में सिंचाई होती है? (बहुत प्रति हेक्टेयर थी। एच.वाई.बी. बीजों से उपज 3, 200 किलोग्राम कम / लगभग आधी । अधिकांश / समस्त) प्रति हेक्टेयर तक पहुँच गई। गेहूं के उत्पादन में बहुत अधिक हुत अधिक 4. किसान अपने लिए आवश्यक आगत कहाँ से प्राप्त वृद्धि हुई। किसानों के पास बाजार में बेचने को अब अधिशेष । करते हैं? गेहूँ की काफ़ी मात्रा उपलब्ध थी। 3. क्या भूमि यह धारण कर पाएगी? आइए चर्चा करें भूमि एक प्राकृतिक संसाधन है, अतः इसका सावधानीपूर्वक बहुविधि फसल प्रणाली और खेती की आधुनिक विधियों प्रयोग करने की जरूरत है। वैज्ञानिक रिपोर्टों से संकेत मिलता में क्या अंतर है? है कि खेती की आधुनिक कृषि विधियों ने प्राकृतिक संसाधन | सारणी 1.2 में भारत में हरित क्रांति के बाद गेहूँ और दालों आधार का अति उपयोग किया है। अनेक क्षेत्रों में, हरित क्रांति के उत्पादन को करोड़ टन इकाइयों में दिखाया गया है। इसे । के कारण उर्वरकों के अधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता कम सारणी 1.2 : दालों तथा गेहूं का उत्पादन (करोड़ टन) हो गई है। इसके अतिरिक्त, नलकूपों से सिंचाई के कारण भूमि जल के सतत प्रयोग से भौम जल-स्तर कम हो गया है। मिट्टी वर्ष दालों का उत्पादन गेहूं का उत्पादन की उर्वरता और भौम जल जैसे पर्यावरणीय संसाधन कई वर्षों में बनते हैं। एक बार नष्ट होने के बाद उन्हें पुनर्जीवित करना | बहुत कठिन है। कृषि का भावी विकास सुनिश्चित करने के लिए हमें पर्यावरण की देखभाल करनी चाहिए। सुझाई गई क्रिया अखबारों / पत्रिकाओं से पाठ में दी गई रिपोर्टें पढ़ने के बाद, कृषि मंत्री को यह बताते हुए अपने शब्दों में एक पत्र लिखिए कि कैसे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग हानिकारक हो सकता है। पालमपुर गाँव की कहानी स्रोत : स्टेट ऑफ इंडियन एग्रीकल्चरल 2016; आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय, कृषि निगम और किसानों के कल्याण विभाग 2018-19 चित्र 1.5 : पालमपुर गाँव : कृषि भूमि का वितरण ...रासायनिक उर्वरक ऐसे खनिज देते हैं, जो पानी में घुल परिवारों में से लगभग एक तिहाई अर्थात् 150 परिवारों के पास, जाते हैं और पौधों को तुरंत उपलब्ध हो जाते हैं। लेकिन, | खेती के लिए भूमि नहीं है, जो अधिकांशतः दलित हैं। मिट्टी इन्हें लंबे समय तक धारण नहीं कर सकती। वे बाकी परिवारों में से 240 परिवार जिनके पास भूमि है, मिट्टी से निकलकर भौम जल, नदियों और तालाबों को 2 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे भूमि के टुकड़ों पर खेती प्रदूषित करते हैं। रासायनिक उर्वरक मिट्टी में उपस्थित करते हैं। भूमि के ऐसे टुकड़ों पर खेती करने से किसानों के जीवाणुओं और सूक्ष्म-अवयवों को नष्ट कर सकते हैं। परिवारों को पर्याप्त आमदनी नहीं होती। इसका अर्थ है कि उनके प्रयोग के कुछ समय पश्चात्, 1960 में कृषक गोविंद के पास 2.25 हेक्टेयर अधिकतर मिट्टी पहले की तुलना में कम उपजाऊ रह जाएगी... असिंचित भूमि थी। गोविंद अपने तीन पुत्रों की मदद से इस (स्रोत ः डाउन टू अर्थ, नयी दिल्ली) भूमि पर खेती करता था। यद्यपि वे बहुत आराम से नहीं रह रहे देश में रासायनिक खाद का सबसे अधिक प्रयोग पंजाब थे, लेकिन परिवार अपनी एक भैस से होने वाली कुछ में है। रासायनिक खाद के निरंतर प्रयोग ने मिट्टी की अतिरिक्त आय के द्वारा अपना गुजारा कर रहा था। गोविंद की गुणवत्ता को कम कर दिया है। पंजाब के किसानों को मृत्यु के कुछ वर्ष पश्चात्, यह भूमि उसके तीनों पुत्रों के बीच पहले का उत्पादन स्तर पाने के लिए अब अधिक से बँट गई। प्रत्येक के पास अब केवल 0.75 हेक्टेयर भूमि का अधिक रासायनिक उर्वरकों और अन्य आगतों का प्रयोग टुकड़ा था। परंतु, अब बेहतर सिंचाई व्यवस्था और खेती की करता पड़ता है। इसका मतलब है कि वहाँ खेती की । आधुनिक विधियों के बावजूद गोविंद के बेटे अपनी जमीन से लागत बहुत तेजी से बढ़ रही है। गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। वर्ष के कुछ भाग में उन्हें कुछ (स्रोत : द ट्रिब्यून, चंडीगढ़) अतिरिक्त कार्य भी ढूँढना पड़ता है। | चित्र 1.5 में आप एक गाँव के चारों ओर बिखरे हुए भूमि 4. पालमपुर के किसानों में भूमि किस प्रकार के छोटे-छोटे टुकड़ों को देख सकते हैं। इन पर छोटे किसान खेती वितरित है? करते हैं। दूसरी ओर, गाँव के आधे से ज्यादा क्षेत्र में काफ़ी बड़े आपने यह जान लिया होगा कि खेती के लिए भूमि कितनी आकार के प्लॉट हैं। पालमपुर में मझोले और बड़े किसानों के 60 महत्त्वपूर्ण है। दुर्भाग्यवश खेती के काम में लगे सभी लोगों के परिवार हैं, जो 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करते हैं। कुछ पास खेती के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है। पालमपुर में 450 बड़े किसानों के पास 10 हेक्टेयर या इससे अधिक भूमि है। अर्थशास्त्र 2018-19 चित्र 1.6 : खेतों में कार्य : गेहूं की फसल - कटाई, बीज बोना, कीटनाशकों का छिड़काव तथा आधुनिक एवं परंपरागत विधियों से फसलों की जुताई आइए चर्चा करें। • चित्र 1.5 में क्या तुम छोटे किसानों द्वारा खेती में प्रयुक्त आइए चर्चा करें भूमि को छायांकित कर सकते हो? क्या आप इस बात से सहमत हैं कि पालमपुर में कृषि भूमि • किसानों के इतने अधिक परिवार भूमि के इतने छोटे प्लॉटों का वितरण असमान है? क्या भारत में भी ऐसी ही स्थिति पर क्यों खेती करते हैं? । है? व्याख्या कीजिए। आरेख 1.1 में भारत में किसानों और उनके द्वारा खेती में प्रयुक्त 5. श्रम की व्यवस्था कौन करेगा? भूमि का वितरण दिया गया है। इसकी कक्षा में चर्चा करें। भूमि के पश्चात्, श्रम उत्पादन का दूसरा आवश्यक कारक है। आरेख 1.1 : कृषि क्षेत्र और कृषकों का वितरण खेती में बहुत ज्यादा परिश्रम की आवश्यकता होती है। छोटे किसान अपने परिवारों के साथ अपने खेतों में स्वयं काम करते हैं। इस तरह, वे खेती के लिए आवश्यक श्रम की व्यवस्था स्वयं ही करते हैं। मझोले और बड़े किसान अपने खेतों में काम करने के लिए दूसरे श्रमिकों को किराये पर लगाते हैं। आइए चर्चा करें खेतों में किए जाने वाले कार्यों को चित्र 1.6 में पहचानिए तथा इनको उचित क्रम में व्यवस्थित कीजिए। खेतों में काम करने के लिए श्रमिक या तो भूमिहीन परिवारों से आते हैं या बहुत छोटे प्लॉटों में खेती करने वाले परिवारों से। खेतों में काम करने वाले श्रमिकों का उगाई गई पालमपुर गाँव की कहानी स्रोत : पॉकेट बुक ऑफ एग्रीकल्चरल स्टैटिस्टिक्स 2015 एवं स्टेट ऑफ इंडियन एग्रीकल्चर 2015, कृषि सहयोग एवं किसानों के कल्याण विभाग 7 2018-19 आजकल काम मिलना कठिन है। केवल बड़े किसान ही हमें रखते हैं और वह भी बहुत कम दिनों के लिए। घनश्याम एक बड़ा किसान है और उसने अभी-अभी एक हार्वेस्टर खरीदा है। इसलिए इस वर्ष कटाई के मौसम में हमें और भी कम काम मिलेगा। पिछले वर्ष, मैंने पूरे वर्ष में 5 माह से भी कम समय काम किया था। हमारे पास जुताई के लिए ट्रैक्टर, कटाई के लिए हार्वेस्टर तथा गहाई के लिए भैसर है। यहाँ तक कि खर-पतवार को साफ़ करने के लिए कुछ किसान ‘खर-पतवार नाशकों को छिड़कते हैं। इस वर्ष मुझे रायगंज में । ईंट भट्टे पर काम की तलाश करनी पड़ेगी। मुझे स्थानीय साहूकार को 2, 000 रु. देने हैं। मैंने पिछली गर्मियों में 1, 000 रु. लिए थे, जब खेतों में काम नहीं था। मैं इसे कैसे चुकता कर पाऊँगा? मैं दो वक्त के भोजन के लिए भी कठिनाई से कमाता हूँ। मेरी स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। पिछले कर्ज के कारण साहूकार मुझे ऋण देने से मना कर देते हैं। चित्र 1.7 : डाला और रामकली के बीच बातचीत। डाला और रामकली गाँव के सबसे निर्धन नागरिक में से हैं। फसल पर कोई अधिकार नहीं होता, जैसा किसानों का होता है, काफ़ी भिन्नताएँ हैं। खेत में काम करने वाले श्रमिक या तो दैनिक बल्कि उन्हें उन किसानों द्वारा मज़दूरी मिलती है जिनके लिए मज़दूरी के आधार पर कार्य करते हैं या उन्हें कार्य विशेष जैसे वे काम करते हैं। मजदूरी नकद या वस्तु जैसे-अनाज के रूप कटाई या पूरे साल के लिए काम पर रखा जा सकता है। में हो सकती है। कभी-कभी श्रमिकों को भोजन भी मिलता है। डाला पालमपुर में दैनिक मज़दूरी पर काम करने वाला एक मज़दूरी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र, एक फसल से दूसरी फसल भूमिहीन श्रमिक है। इसका मतलब है कि उसे लगातार काम ढूंढ़ते और खेत में एक से दूसरे कृषि कार्य (जैसे बुआई और कटाई) रहना पड़ता है। सरकार द्वारा खेतों में काम करने वाले श्रमिकों के के लिए अलग-अलग होती है। रोजगार की अवधि में भी लिए एक दिन का न्यूनतम वेतन 300 रु. (मार्च 2017) निर्धारित अर्थशास्त्र 2018-19 आइए चर्चा करें है। लेकिन, डाला को मात्र 160 रु. ही मिलते हैं। पालमपुर में उसे 3000रु. चाहिए। उसके पास पैसा नहीं है, इसलिए वह खेतिहर श्रमिकों में बहुत ज्यादा स्पर्धा है, इसलिए लोग कम एक बड़े किसान तेजपाल सिंह से कर्ज लेने का निर्णय लेती वेतन में भी काम करने को सहमत हो जाते हैं। डाला अपनी है। तेजपाल सिंह सविता को 24 प्रतिशत की दर पर चार स्थिति के बारे में रामकली से शिकायत करता है, जो कि एक महीने के लिए कर्ज देने को तैयार हो जाता है, जो ब्याज अन्य खेतिहर श्रमिक है। डाला और रामकली दोनों गाँव के की एक बहुत ऊँची दर है। सविता को यह भी वचन देना निर्धनतम व्यक्यिों में से हैं। पड़ता है कि वह कटाई के मौसम में उसके खेतों में एक श्रमिक के रूप में 100 रु. प्रतिदिन पर काम करेगी। आप भी कह सकते हैं कि यह मजदूरी बहुत कम है। सविता डाला तथा रामकली जैसे खेतिहर श्रमिक गरीब क्यों हैं? जानती है कि उसे अपने खेत की कटाई पूरी करने में बहुत गोसाईंपुर और मझौली उत्तर बिहार के दो गाँव हैं। दोनों मेहनत करनी पड़ेगी और उसके बाद तेजपाल के खेतों में गाँवों के कुल 850 परिवारों में 250 से अधिक पुरुष ऐसे श्रमिक की तरह काम करना होगा। कटाई का समय बहुत हैं, जो पंजाब और हरियाणा के ग्रामीण इलाकों या दिल्ली, व्यस्त होता है। तीन बच्चों की माँ के रूप में उस पर घर मुंबई, सूरत, हैदराबाद या नागपुर में काम कर रहे हैं। इस के कामों की भी बहुत जिम्मेदारी है। सविता इन कठोर शर्तो प्रकार का प्रवास अधिसंख्य भारतीय गाँवों में होता है। लोग को मानने के लिए तैयार हो जाती है, क्योंकि उसे मालूम प्रवास क्यों करते हैं? क्या आप इस बात की व्याख्या है कि छोटे किसानों को कर्ज मिलना बहुत कठिन है। (अपनी कल्पना के आधार पर) कर सकते हैं कि । । 2. छोटे किसानों के विपरीत, मझोले और बड़े किसानों को गोसाईंपुर और मझोली के प्रवासी अपने गंतव्यों पर किस । खेती से बचत होती है। इस तरह वे आवश्यक पूँजी की तरह का काम करते होंगे? व्यवस्था कर लेते हैं। इन किसानों को बचत कैसे होती है? 6. खेतों के लिए आवश्यक पूँजी आप इसका उत्तर अगले भाग में पाएँगे। आप पहले ही देख चुके हैं कि खेती के आधुनिक तरीकों के अब तक की कहानी... लिए बहुत अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है, अतः अब | हमने उत्पादन के तीन कारकों-भूमि, श्रम और पूँजी तथा खेती किसानों को पहले की अपेक्षा ज्यादा पैसा चाहिए। 1. अधिसंख्य छोटे किसानों को पूँजी की व्यवस्था करने के। में उनके प्रयोग के बारे में पढ़ा। आइए अब दिए गए रिक्त लिए पैसा उधार लेना पड़ता है। वे बड़े किसानों से या गाँव स्थानों को भरें- के साहूकारों से या खेती के लिए विभिन्न आगतों की पूर्ति उत्पादन के तीन कारकों में श्रम उत्पादन का सर्वाधिक प्रचुर करने वाले व्यापारियों से कर्ज लेते है। ऐसे कर्जा पर ब्याज मात्रा में उपलब्ध कारक है। ऐसे अनेक लोग हैं, जो गाँवों में की दर बहुत ऊँची होती है। कर्ज चुकाने के लिए उन्हें खेतिहर मजदूरों के रूप में काम करने को तैयार हैं, जबकि बहुत कष्ट सहने पड़ते है। काम के अवसर सीमित हैं। वे या तो भूमिहीन परिवारों से हैं। सविता की कहानी । या:::::::::::::::::::::। उन्हें बहुत कम मजदूरी मिलती है और सविता एक लघु कृषक है। वह अपनी एक हेक्टेयर जमीन वे एक कठिन जीवन जीते हैं। पर गेहूँ पैदा करने की योजना बनाती है। बीज और श्रम के विपरीत,:::::::::::::::"उत्पादन का एक दुर्लभ कीटनाशकों के अतिरिक्त, उसे पानी खरीदने और खेती के कारक है। कृषि भूमि का क्षेत्र............: है। इसके अतिरिक्त औजारों की मरम्मत करवाने के लिए नकद पैसों की जरूरत उपलब्ध भूमि भी...........(समान/असमान) रूप से खेती है। उसका अनुमान है कि कार्यशील पूँजी के रूप में ही में लगे लोगों में वितरित है। ऐसे कई छोटे किसान हैं जो भूमि पालमपुर गाँव की कहानी 2018-19 के छोटे टुकड़ों पर खेती करते हैं और जिनकी स्थिति भूमिहीन को वह रायगंज के बाजार में बेच देता है और अच्छी कमाई खेतिहर मजदूरों से बेहतर नहीं है। उपलब्ध भूमि का अधिकतम करता है। प्रयोग करने के लिए किसान............और................. तेजपाल सिंह इस कमाई का क्या करता है? पिछले वर्ष का उपयोग करते हैं। इन दोनों से फसलों के उत्पादन में वृद्धि तेजपाल सिंह ने अधिकांश पैसा बैंक के अपने खाते में जमा कर हुई है। दिया था। बाद में उसने इस पैसे का उपयोग सविता जैसे खेती की आधुनिक विधियों में की अत्यधिक आवश्यकता किसानों को कर्ज देने में किया, जिन्हें कर्ज की आवश्यकता होती है। छोटे किसानों को सामान्यतः पूँजी की व्यवस्था करने थी। उसने बचत का उपयोग अगले मौसम की खेती के लिए कार्यशील पूँजी की व्यवस्था करने में भी किया। इस वर्ष के लिए पैसा उधार लेना पड़ता है और कर्ज चुकाने के लिए तेजपाल सिंह बचत के पैसों से एक और ट्रैक्टर खरीदने की उन्हें बहुत कष्ट सहने पड़ते हैं। इसलिए, विशेष रूप से छोटे योजना बना रहा है। दूसरे ट्रैक्टर से, उसकी स्थिर पूँजी में वृद्धि किसानों के लिए पूँजी भी उत्पादन का एक दुर्लभ कारक है। हो जाएगी। । यद्यपि भूमि और पूँजी दोनों दुर्लभ हैं, उत्पादन के इन दोनों | तेजपाल सिंह की भाँति दूसरे बड़े और मझोले किसान भी कारकों में एक मूल अंतर है।............“प्राकृतिक संसाधन है, खेती के अधिशेष कृषि उत्पादों को बेचते हैं। कमाई के एक जबकि............."मानव निर्मित है। पूँजी को बढ़ाना संभव है, भाग को अगले मौसम के लिए पूँजी की व्यवस्था के लिए बचा जबकि भूमि स्थिर है। इसलिए, यह बहुत आवश्यक है कि हम । | कर रखा जाता है। इस तरह वे अपनी खेती के लिए पूँजी की भूमि और खेती में प्रयुक्त अन्य प्राकृतिक संसाधनों की अच्छी व्यवस्था अपनी ही बचतों से कर लेते हैं। कुछ किसान बचत तरह देखभाल करें। का उपयोग पशु, ट्रक आदि खरीदने अथवा दुकान खोलने में भी करते हैं। जैसा कि हम देखेंगे, इन सबको गैर-कृषि कार्यों के 7. अधिशेष कृषि उत्पादों की बिक्री लिए पूँजी कहते हैं। मान लीजिए कि किसानों ने उत्पादन के तीनों कारकों का प्रयोग पालमपुर में गैर-कृषि क्रियाएँ कर अपनी भूमि में गेहूँ पैदा किया है। गेहूँ की कटाई की जाती हमने देखा की पालमपुर में खेती ही प्रमुख उत्पादन क्रिया है। है और उत्पादन पूर्ण हो जाता है। किसान गेहूँ का क्या करते हैं? अब हम कुछ गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं पर विचार करेंगे। वे परिवार के उपभोग के लिए कुछ गेहूँ रख लेते हैं और पालमपुर में काम करने वाले केवल 25 प्रतिशत लोग कृषि के अधिशेष गेहूँ को बेच देते हैं। सविता और गोविंद के बेटों जैसे अतिरिक्त अन्य कार्य करते हैं। छोटे किसानों के पास बहुत कम अधिशेष गेहूँ होता है, क्योंकि उनका कुल उत्पादन बहुत कम होता है तथा इसमें से एक बड़ा 1. डेयरी : अन्य प्रचलित क्रिया भाग वे परिवार की आवश्यकताओं के लिए रख लेते हैं। पालमपुर के कई परिवारों में डेयरी एक प्रचलित क्रिया है। लोग इसलिए मझोले और बड़े किसान ही बाज़ार में गेहूं की पूर्ति अपनी भैंसों को कई तरह की घास और बरसात के मौसम में करते हैं। चित्र 1.1 में आप गेहूँ से लदी बाज़ार जाती बैलगाड़ी । उगने वाली ज्वार और बाजरा (चरी) खिलाते हैं। दूध को निकट देख सकते हैं। बाजार में व्यापारी गेहूं खरीदकर उसे आगे कस्बों के बड़े गाँव रायगंज में बेचा जाता है। शाहपुर शहर के दो और शहरों के दुकानदारों को बेच देते हैं। व्यापारियों ने रायगंज में दूध संग्रहण एवं शीतलन केंद्र खोला | एक बड़े किसान तेजपाल सिंह को अपनी समस्त भूमि हुआ है, जहाँ से दूध दूर-दराज़ के शहरों और कस्बों में भेजा से 350 क्विटल अधिशेष गेहूँ प्राप्त होता है। अपने अतिरिक्त गेहूँ जाता है। 10 अर्थशास्त्र 2018-19 आइए चर्चा करें हम तीन किसानों के उदाहरण लेते हैं। प्रत्येक ने अपने खेतों में गेहूं बोया है, यद्यपि उनका उत्पादन भिन्न-भिन्न है (देखिए स्तंभ 2, 'दूसरा किसान')। प्रत्येक किसान के परिवार द्वारा गेहूं का उपभोग समान है (देखिए स्तंभ 3, 'तीसरा किसान')। इस वर्ष के समस्त अधिशेष गेहूं का उपयोग अगले वर्ष के उत्पादन के लिए पूँजी के रूप में किया जाता है। यह भी मान लीजिए कि उत्पादन, इसमें प्रयुक्त होने वाली पूँजी का दोगुना होता है। सारणियों को पूरा करें : पहला किसान उत्पादन उपभोग अधिशेष-उत्पादन-उपभोग अगले वर्ष के लिए पूँजी 100 40 60 60 60 120 ॐ ॐ दूसरा किसान उत्पादन उपभोग अधिशेष-उत्पादन-उपभोग अगले वर्ष के लिए पूँजी 80 ॐ ॐ । ॐ तीसरा किसान उत्पादन उपभोग अधिशेष-उत्पादन-उपभोग अगले वर्ष के लिए पूँजी 60 46 40 तीनों किसानों के गेहूँ के तीनों वर्षों के उत्पादन की तुलना कीजिए। तीसरे वर्ष, तीसरे किसान के साथ क्या हुआ? क्या वह उत्पादन जारी रख सकता है? उत्पादन जारी रखने के लिए उसे क्या करना होगा? 2. पालमपुर में लघुस्तरीय विनिर्माण का एक उदाहरण विधियों का प्रयोग होता है और उसे छोटे पैमाने पर ही किया इस समय पालमपुर में 50 से कम लोग विनिर्माण कार्यों में लगे जाता है। विनिर्माण कार्य पारिवारिक श्रम की सहायता से अधिकतर हैं। शहरों और कस्बों में बड़ी फैक्ट्रियों में होने वाले विनिर्माण घरों या खेतों में किया जाता है। श्रमिकों को कभी-कभार ही के विपरीत, पालमपुर में विनिर्माण में बहुत सरल उत्पादन किराये पर लिया जाता है। पालमपुर गाँव की कहानी 11 2018-19 मिश्रीलाल की कहानी मिश्रीलाल ने गन्ना पेरने वाली एक मशीन खरीदी है, जो बिजली से चलती है और उसे अपने खेत में लगाया है। पहले गन्नों को पेरने का काम बैलों की मदद से किया जाता था, पर अब लोग इसे मशीनों से करना पसंद करते हैं। मिश्रीलाल दूसरे किसानों से भी गन्ना खरीदकर उससे गुड़ बनाता है। गुड़ को फिर शाहपुर के व्यापारियों को बेचा जाता है। इस प्रक्रिया में मिश्रीलाल थोड़ा लाभ कमा लेता है। करीम की कहानी करीम ने गाँव में एक कंप्यूटर केंद्र खोल लिया है। हाल के वर्षों में कई विद्यार्थी शाहपुर शहर के कॉलेज जाने लगे हैं। करीम ने देखा कि गाँव के कई छात्र शहर की कंप्यूटर कक्षाओं में जाते हैं। गाँव में दो महिलाओं के पास कंप्यूटर अनुप्रयोग में डिग्री थी। उसने उन्हें काम पर लगाने का निश्चय किया। उसने कंप्यूटर खरीदे और अपने घर में बाजार की ओर खुले बाहर के कमरे में कक्षाएँ प्रारंभ की। हाईस्कूल के छात्रों ने पर्याप्त संख्या में इन कक्षाओं में आना प्रारंभ कर दिया है। आइए चर्चा करें आइए चर्चा करें मिश्रीलाल को गुड़ बनाने की उत्पादन इकाई लगाने में , • करीम की पूँजी और श्रम किस रूप से मिश्रीलाल की कितनी पूँजी की जरूरत पड़ी? पूँजी और श्रम से भिन्न है? इस कार्य में श्रम कौन उपलब्ध कराता है? क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि मिश्रीलाल क्यों • इससे पहले किसी और ने कंप्यूटर केंद्र क्यों नहीं शुरू किया? संभावित कारणों की चर्चा कीजिए। अपना लाभ नहीं बढ़ा पा रहा है? • क्या आप ऐसे कारणों के बारे में सोच सकते हैं जिनसे उसे 4. परिवहन : तेजी से विकसित होता एक क्षेत्रक हानि भी हो सकती है। पालमपुर और रायगंज के बीच सड़क पर कई प्रकार के वाहन • मिश्रीलाल अपना गुड़ गाँव में न बेचकर शाहपुर के चलते हैं। रिक्शावाले, ताँगेवाले, जीप, ट्रैक्टर, ट्रक ड्राइवर तथा व्यापारियों को क्यों बेचता है? परंपरागत बैलगाड़ी और दूसरी गाड़ियाँ चलाने वाले, वे लोग हैं, जो परिवहन सेवाओं में शामिल हैं। वे लोगों और वस्तुओं को 3. पालमपुर के दुकानदार एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाते हैं और इसके बदले में उन्हें पालमपुर में ज्यादा लोग व्यापार (वस्तु-विनिमय) नहीं करते।। पैसे मिलते हैं। गत कई वर्षों में परिवहन से जुड़े लोगों की पालमपुर के व्यापारी वे दुकानदार हैं, जो शहरों के थोक बाजारों संख्या बहत बढ़ गई है। से कई प्रकार की वस्तुएँ खरीदते हैं और उन्हें गाँव में लाकर किशोर की कहानी बेचते हैं। आप देखेंगे कि गाँव में छोटे जनरल स्टोरों में चावल, किशोर एक खेतिहर मजदूर है। अन्य ऐसे ही श्रमिकों की गेहूँ, चाय, तेल, बिस्कुट, साबुन, टूथ पेस्ट, बैट्री, मोमबत्तियाँ, भाँति किशोर को अपनी मजदूरी से अपने घर-परिवार कॉपियाँ, पैन, पैंसिल यहाँ तक कि कुछ कपड़े भी बिकते हैं। की आवश्यकताएँ पूरी करने में कठिनाई होती थी। कुछ वर्ष पहले किशोर ने बैंक से कर्ज लिया था। यह एक कुछ परिवारों ने जिनके घर बस स्टैंड के निकट हैं, अपने घर सरकारी कार्यक्रम के अंतर्गत था, जिसमें भूमिहीन निर्धन के एक भाग में छोटी दुकान खोल ली है। वे खाने की चीजें परिवारों को सस्ते कर्ज दिए जा रहे थे। किशोर ने इस बेचते हैं। पैसे से एक भैंस खरीदी। अब वह भैंस का दूध बेचता 12 अर्थशास्त्र 2018-19 आइए चर्चा करें है। अब उसने अपनी भैंसागाड़ी भी बना ली है, जिसमें वह कई प्रकार के सामान ले जाता है। सप्ताह में एक दिन, वह गंगा के किनारे से कुम्हार के लिए मिट्टी लेकर आता है या कभी-कभी वह गुड़ अथवा अन्य वस्तुओं को लेकर शाहपुर जाता है। हरेक महीने उसे परिवहन संबंधित कोई न कोई काम मिल जाता है। परिणामस्वरूप, किशोर पिछले वर्षों की तुलना में अब अधिक कमाने लगा है। • किशोर की स्थायी पूँजी क्या है? क्या आप सोच सकते हैं कि उसकी कार्यशील पूँजी कितनी होगी? किशोर कितनी उत्पादन क्रियाओं में लगा हुआ है? क्या आप कह सकते हैं कि किशोर को पालमपुर की अच्छी सड़कों से लाभ हुआ है? सारांश गाँव में खेती मुख्य उत्पादन क्रिया है। पिछले वर्षों में खेती की विधियों में कई महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। इनकी वजह से किसान उतनी ही भूमि से अधिक फसल पैदा करने लगे हैं। यह एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि भूमि स्थायी तथा दुर्लभ है। उत्पादन को बढ़ाने के लिए भूमि और अन्य प्राकृतिक संसाधनों पर बहुत अधिक दबाव पड़ा है। खेती की नयी विधियों में कम भूमि परंतु अधिक पूँजी की ज़रूरत पड़ती है। मझोले और बड़े किसान अपने उत्पादन से हुई बचत से अगले मौसम के लिए पूँजी की व्यवस्था कर लेते हैं। दूसरी ओर, छोटे किसानों के लिए, जो भारत में किसानों की कुल संख्या का 80 प्रतिशत भाग है, पूँजी की व्यवस्था करना बहुत कठिन है। उनके भूखंड का आकार छोटा होने के कारण उनका उत्पादन पर्याप्त नहीं होता। अतिरिक्त साधनों की कमी के कारण वे अपनी बचत से पूँजी नहीं निकाल पाते, अतः उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। कर्ज के अतिरिक्त कई छोटे किसानों को अपने व अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खेतिहर मजदूरों के रूप में अतिरिक्त काम करना पड़ता है। श्रम पूर्ति उत्पादन के अन्य कारकों की तुलना में सबसे अधिक प्रचुर है, अतः नयी विधियों में श्रम का अधिक प्रयोग करना आदर्श होता, दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हुआ। खेती में श्रमिकों का उपयोग सीमित है। अवसरों की तलाश में श्रमिक आस-पड़ोस के गाँवों, शहरों तथा कस्बों में जा रहे हैं। कुछ श्रमिकों ने गाँव में ही गैर-कृषि क्षेत्र काम करना प्रारंभ कर दिया है। इस समय गाँव में गैर-कृषि क्षेत्रक बहुत बड़ा नहीं है। भारत में ग्रामीण क्षेत्र के 100 कामगारों में से केवल 24 ही गैर-कृषि कार्यों में लगे हैं। यद्यपि, गाँव में अनेक प्रकार के गैर-कृषि कार्य होते हैं (हमने केवल कुछ ही उदाहरण देखें हैं), प्रत्येक कार्य में नियुक्त लोगों की संख्या बहुत ही कम है। हम चाहेंगे कि भविष्य में गाँव में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं में भी वृद्धि हो। खेती के विपरीत, गैर-कृषि कार्यों में कम भूमि की आवश्यकता होती है। लोग कम पूँजी से भी गैर-कृषि कार्य प्रारंभ कर सकते हैं। इस पूँजी को प्राप्त कैसे किया जाता है? या तो अपनी ही बचत का प्रयोग किया जाता है, या फिर कर्ज लिया जाता है। आवश्यकता है कि कर्ज़ ब्याज की कम दर पर उपलब्ध हों, ताकि बिना बचत वाले लोग भी गैर-कृषि कार्य शुरू कर सकें। गैर-कृषि कार्यों के प्रसार के लिए यह भी आवश्यक है कि ऐसे बाज़ार हों, जहाँ वस्तुएँ और सेवाएँ बेची जा सकें। पालमपुर में हमने देखा कि आस-पड़ोस के गाँवों, कस्बों और शहरों में दूध, गुड़, गेहूँ। आदि उपलब्ध हैं। जैसे-जैसे ज्यादा गाँव कस्बों और शहरों से अच्छी सड़कों, परिवहन और टेलीफ़ोन से जुड़ेंगे, भविष्य में गाँवों में गैर-कृषि उत्पादन क्रियाओं के अवसर बढ़ेंगे। पालमपुर गाँव की कहानी 13 2018-19 अभ्यास भारत में जनगणना के दौरान दस वर्ष में एक बार प्रत्येक गाँव का सर्वेक्षण किया जाता है। पालमपुर से संबंधित सूचनाओं के आधार पर निम्न तालिका को भरिए । (क) अवस्थिति क्षेत्र (ख) गाँव का कुल क्षेत्र (ग) भूमि का उपयोग (हेक्टेयर में) भूमि जो कृषि के लिए उपलब्ध नहीं है। (निवास स्थानों, सड़कों, तालाबों, चरागाहों आदि के क्षेत्र) सिंचित असिंचित 26 हेक्टेयर (घ) सुविधाएँ शैक्षिक चिकित्सा बाज़ार बिजली पूर्ति संचार निकटतम कस्बा 2. खेती की आधुनिक विधियों के लिए ऐसे अधिक आगतों की आवश्यता होती है, जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है, क्या आप सहमत हैं? 3. पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की किस तरह मदद की? 4. क्या सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है? क्यों? 5. पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि के वितरण की एक सारणी बनाइए। 6. पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मज़दूरी न्यूनतम मजदूरी से कम क्यों है? 7. अपने क्षेत्र में दो श्रमिकों से बात कीजिए। खेतों में काम करने वाले या विनिर्माण कार्य में लगे मजदूरों में से किसी को चुनें। उन्हें कितनी मज़दूरी मिलती है? क्या उन्हें नकद पैसा मिलता है या वस्तु-रूप में ? क्या उन्हें नियमित रूप से काम मिलता है? क्या वे कर्ज में हैं? 8. एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग कौन से तरीके हैं? समझाने के लिए उदाहरणों का प्रयोग कीजिए। 9. एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के कार्य का ब्यौरा दीजिए। 10. मझोले और बड़े किसान कृषि से कैसे पूँजी प्राप्त करते है? वे छोटे किसानों से कैसे भिन्न है? अर्थशास्त्र 2018-19 11. सविता को किन शर्तों पर तेजपाल सिंह से ऋण मिला है? क्या ब्याज़ की कम दर पर बैंक से कर्ज मिलने पर सविता की स्थिति अलग होती? 12. अपने क्षेत्र के कुछ पुराने निवासियों से बात कीजिए और पिछले 30 वर्षों में सिंचाई और उत्पादन के तरीकों में हुए परिवर्तनों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए (वैकल्पिक)। 13. आपके क्षेत्र में कौन से गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं? इनकी एक संक्षिप्त सूची बनाइए। 14. गाँवों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारंभ करने के लिए क्या किया जा सकता है? संदर्भ एटीन, गिल्बर्ट, 1985, रूरल डेवलपमेंट इन एशिया : मीटिंग्स विद पीजेंट्स, सेज पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली। एटीन, गिल्बर्ट, 1988, फूड एंड पावर्टी : इंडियाज़ हाफ़ वन बैटल, सेज पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली। राज, के.एन., 1991, विलेज इंडिया एंड इट्स पॉलिटिकल इकोनॉमी, सी.टी. कुरियन द्वारा संपादित इकोनॉमी, सोसायटी एंड डेवलेपमेंट, सेज पब्लिकेशन्स, नयी दिल्ली। थार्नर, डेनियल एंड थार्नर, एलीस, 1962, लैंड एंड लेबर इन इंडिया, एशिया पब्लिशिंग हाउस, मुंबई।। एच टीटी पीः// इकनॉमिक्स टाइम्स, इंडिया टाइम्स, कॉम/न्यूज़/ पॉलिसी/ गवर्नमेंट-टाइम्स-मिनिमम वेज-फोर- एग्रीकल्चर-लेबरर/आर्टिकलशो/57408252, सी.एम.एस. पालमपुर गाँव की कहानी 2018-19

RELOAD if chapter isn't visible.