4 जलवायु पिछले दो अध्यायों में, आप हमारे देश की स्थलावृफतियों एवं अपवाह के बारे में पढ़ चुके हैं। किसी क्षेत्रा के प्रावृफतिक पयार्वरण को समझने के लिए आवश्यक तीन मूल तत्त्वों में से दो तत्त्व ये ही हैं। इस अध्याय में, आप तीसरे तत्त्व, अथार्त् हमारे देश की वायुमंडलीय अवस्था के बारे में पढ़ेंगे। हम दिसंबर में ऊनी वस्त्रा क्यों पहनते हैं अथवा मइर् का महीना गमर् एवं असुविधाजनक क्यों होता है या जून एवं जुलाइर् में वषार् क्यों होती हैं? इन सभी प्रश्नों के उत्तर आप भारत की जलवायु का अध्ययन करके जान सकते हैं। एक विशाल क्षेत्रा में लंबे समयाविा ;30 वषर् से अिाकद्ध मंे मौसम की अवस्थाओं तथा विविधताओं का कुल योग ही जलवायु है। मौसम एक विशेष समय में एक क्षेत्रा के वायुमंडल की अवस्था को बताता है। मौसम तथा जलवायु के तत्त्व, जैसे - तापमान, वायुमंडलीय दाब, पवन, आद्रर्ता तथा वषर्ण एक ही होते हैं। आपने अवश्य ध्यान दिया होगा कि मौसम की अवस्था प्रायः एक दिन में ही कइर् बार बदलती है। लेकिन पिफर भी कुछ सप्ताह, महीनों तक वायुमंडलीय अवस्था लगभग एक समान ही बनी रहती है, जैसे दिन गमर् या ठंडे, हवादार या शांत, आसमान बादलों से घ्िारा या सापफ तथा आद्रर् या शुष्क हो सकते हैं। महीनों के औसत वायुमंडलीय अवस्था के आधार पर वषर् को ग्रीष्म/शीत या वषार् ट्टतुओं में विभाजित किया गया है। विश्व को अनेक जलवायु प्रदेशों में बाँटा गया है। क्या आप जानते हैं कि भारत की जलवायु वेैफसी है तथा ऐसा क्यों है? इस संबंध में, हम इस अध्याय में पढ़ेंगे। ऽ मानसून शब्द की व्युत्पिा अरबी शब्द ‘मौसिम’ से हुइर् है, जिसका शाब्िदक अथर् है - मौसम। ऽ मानसून का अथर्, एक वषर् के दौरान वायु की दिशा में ट्टतु के अनुसार परिवतर्न है। भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है। एश्िाया में इस प्रकार की जलवायु मुख्यतः दक्ष्िाण तथा दक्ष्िाण - पूवर् में पाइर् जाती है। सामान्य प्रतिरूप में लगभग एकरूपता होते हुए भी देश की जलवायु - अवस्था में स्पष्ट प्रादेश्िाक भ्िान्नताएँ हैं। आइए, हम दो महत्त्वपूणर् तत्त्व तापमान एवं वषर्ण को लेकर देखें कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर तथा एक मौसम से दूसरे मौसम में इनमें किस प्रकार की भ्िान्नता है। गमिर्यों में, राजस्थान के मरुस्थल में कुछ स्थानों का तापमान लगभग 50ú से॰ तक पहुँच जाता है, जबकि जम्मू - कश्मीर के पहलगाम में तापमान लगभग 20ú से॰ रहता है। सदीर् की रात में, जम्मू - कश्मीर में द्रास का तापमान .45ú से॰ तक हो सकता है, जबकि थ्िारुवनंथपुरम् में यह 22ú से॰ हो सकता है। ऽ कुछ क्षेत्रों में रात एवं दिन के तापमान में बहुत अिाक अंतर होता है। थार के मरुस्थल में दिन का तापमान 50ú से॰ तक हो सकता है, जबकि उसी रात यह नीचे गिर कर 15ú से॰ तक पहुँच सकता है। दूसरी ओर, केरल या अंडमान एवं निकोबार मंे दिन तथा रात का तापमान लगभग समान ही रहता है। अब वषर्ण की ओर ध्यान दें। वषर्ण के रूप तथा प्रकार में ही नहीं, बल्िक इसकी मात्रा एवं ट्टतु के अनुसार वितरण में भी भ्िान्नता होती है। हिमालय में वषर्ण अिाकतर हिम के रूप में होता है तथा देश के जो पेरू की ठंडी धारा के स्थान पर प्रत्येक 2 या 5 वषर् के अंतराल में पेरू तट से होकर बहती है। दाब की अवस्था में परिवतर्न का संबंध एलनीनो से है। इसलिए इस परिघटना को एंसो ;म्छैव्द्ध ;एलनीनो दक्ष्िाणी दोलनद्ध कहा जाता है। मानसून का आगमन एवं वापसी व्यापारिक पवनों के विपरीत मानसूनी पवनें नियमित नहीं हैं, लेकिन ये स्पंदमान प्रवृफति की होती हैं। उष्ण कटिबंधीय समुद्रों के ऊपर प्रवाह के दौरान ये विभ्िान्न वायुमंडलीय अवस्थाओं से प्रभावित होती हैं। मानसून का समय जून के आरंभ से लेकर मध्य सितंबर तक, 100 से 120 दिनों के बीच होता है। इसके आगमन के समय सामान्य वषार् में अचानक वृिद्ध हो जाती है तथा लगातार कइर् दिनों तक यह जारी रहती है। इसे मानसून प्रस्पफोट ;पफटनाद्ध कहते हैं तथा इसे मानसून - पूवर् बौछारों से पृथक किया जा सकता है। सामान्यतः जून के प्रथम सप्ताह में मानसून भारतीय प्रायद्वीप के दक्ष्िाणी छोर से प्रवेश करता है। इसके बाद यह दो भागों में बँट जाता है - अरब सागर शाखा एवं बंगाल की खाड़ी शाखा। अरब सागर शाखा लगभग दस दिन बाद, 10 जून के आस - पास मुंबइर् पहुँचती है। यह एक तीव्र प्रगति है। बंगाल की खाड़ी शाखा भी तीव्रता से आगे की ओर बढ़ती है तथा जून के प्रथम सप्ताह में असम पहुँच जाती है। ऊँचे पवर्तों के कारण मानसून पवनें पश्िचम में गंगा के मैदान की ओर मुड़ जाती है। मध्य जून तक अरब सागर शाखा सौराष्ट्र, कच्छ एवं देश के मध्य भागों में पहुँच जाती है। अरब सागर शाखा एवं बंगाल की खाड़ी शाखा, दोनो गंगा के मैदान के उत्तर - पश्िचम भाग में आपस में मिल जाती हैं। दिल्ली में सामान्यतः मानसूनी वषार् बंगाल की खाड़ी शाखा से जून के अंतिम सप्ताह में ;लगभग 29 जून तकद्ध होती है। जुलाइर् के प्रथम सप्ताह तक मानसून पश्िचमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा तथा पूवीर् राजस्थान में पहुँच जाता है। मध्य जुलाइर् तक मानसून हिमाचल प्रदेश एवं देश के शेष हिस्सांे में पहुँच जाता है ;चित्रा 4.3द्ध। मानसून की वापसी अपेक्षावृफत एक क्रमिक प्रिया है ;चित्रा 4.4द्ध जो भारत के उत्तर - पश्िचमी राज्यों से सितंबर में प्रारंभ हो जाती है। मध्य अक्तूबर तक मानसून प्रायद्वीप के उत्तरी भाग से पूरी तरह पीछे हट जाता है। प्रायद्वीप के दक्ष्िाणी आधे भाग में वापसी की गति तीव्र होती है। दिसंबर के प्रारंभ तक देश के शेष भाग से मानसून की वापसी हो जाती है। द्वीपों पर मानसून की सबसे पहली वषार् होती है। यह क्रमशः दक्ष्िाण से उत्तर की ओर अप्रैल के अंतिम सप्ताह से लेकर मइर् के प्रथम सप्ताह तक होती है। मानसून की वापसी भी क्रमशः दिसंबर के प्रथम सप्ताह से जनवरी के प्रथम सप्ताह तक उत्तर से दक्ष्िाण की ओर होती है। इस समय देश का शेष भाग शीत ट्टतु के प्रभाव में होता है। )तुएँ मानसूनी जलवायु की विशेषता एक विश्िाष्ट मौसमी प्रतिरूप होता है। एक ट्टतु से दूसरे ट्टतु में मौसम की अवस्थाओं में बहुत अिाक परिवतर्न होता है। विशेषकर देश के आंतरिक भागों में, ये परिवतर्न अिाक मात्रा में परिलक्ष्िात होते हैं। तटीय क्षेत्रों के तापमान में बहुत अिाक भ्िान्नता नहीं होती है, यद्यपि यहाँ वषार् के प्रारूपों में भ्िान्नताएँ होती हैं। आप अपने क्षेत्रा में कितने प्रकार की ट्टतुओं का अनुभव करते हैं। भारत में मुख्यतः चार ट्टतुओं को पहचाना जा सकता है। ये हैं, शीत ट्टतु, ग्रीष्म ट्टतु, कुछ क्षेत्राीय विविधताओं के साथ मानसून के आगमन तथा वापसी का काल। शीत )तु उत्तरी भारत में शीत ट्टतु मध्य नवंबर से आरंभ होकर पफरवरी तक रहती है। भारत के उत्तरी भाग में जलवायु 33 चित्रा 4.6: मौसमी वषार् ;जून - सितंबरद्ध 38 समकालीन भारत ियाकलाप: ;पद्ध उपरोक्त समाचार पत्रों के अंशों में वण्िार्त स्थानों तथा )तुओं के नाम बताएंँ।;पपद्ध मुंबइर् और चेन्नइर् की वषार् की तुलना कीजिए और उनके अंतर के कारण दीजिए।;पपपद्ध वस्तुस्िथति अध्ययन के दृष्िटकोण से ‘बाढ़ - एक विपदा’ का मूल्यांकन करें। 40 समकालीन भारत तालिका - प् वेंफद्र देशांतर अक्षांश ;मीटरद्ध जन पफर माचर् अप्रै मइर् जून जुलाइर् अग सित अक्तू नव दिस वाष्िार्क वषार् तापमान ;ú से॰द्ध बेंगलुरु वषार् ;से॰मी॰द्ध 12°58श् उ॰ 909 20ण्5 0ण्7 22ण्7 0ण्9 25ण्2 1ण्1 27ण्1 4ण्5 26ण्7 10ण्7 24ण्2 7ण्1 23ण्0 11ण्1 23ण्0 13ण्7 23ण्1 16ण्4 22ण्9 15ण्3 18ण्9 6ण्1 20ण्2 1ण्3 88ण्9 तापमान ;ú से॰द्ध मुंबइर् वषार् ;से॰मी॰द्ध 19° उ॰ 11 24ण्4 0ण्2 24ण्4 0ण्2 26ण्7 दृ 28ण्3 दृ 30ण्0 1ण्8 28ण्9 50ण्6 27ण्2 61ण्0 27ण्2 36ण्9 27ण्2 26ण्9 27ण्8 4ण्8 27ण्2 1ण्0 25ण्0 दृ 183ण्4 तापमान ;ú से॰द्ध कोलकाता वषार् ;से॰मी॰द्ध 22°34श् उ॰ 6 19ण्6 1ण्2 22ण्0 2ण्8 27ण्1 3ण्4 30ण्1 5ण्1 30ण्4 13ण्4 29ण्9 29ण्0 28ण्9 33ण्1 28ण्7 33ण्4 28ण्9 25ण्3 27ण्6 12ण्7 23ण्4 2ण्7 19ण्7 0ण्4 162ण्5 तापमान ;ú से॰द्ध दिल्ली वषार् ;से॰मी॰द्ध 29° उ॰ 219 14ण्4 2ण्5 16ण्7 1ण्5 23ण्3 1ण्3 30ण्0 1ण्0 33ण्3 1ण्8 33ण्3 7ण्4 30ण्0 19ण्3 29ण्4 17ण्8 28ण्9 11ण्9 25ण्6 1ण्3 19ण्4 0ण्2 15ण्6 1ण्0 67ण्0 तापमान ;ú से॰द्ध जोध्पुर वषार् ;से॰मी॰द्ध 26°18श् उ॰ 224 16ण्8 0ण्5 19ण्2 0ण्6 26ण्6 0ण्3 29ण्8 0ण्3 33ण्3 1ण्0 33ण्9 3ण्1 31ण्3 10ण्8 29ण्0 13ण्1 20ण्1 5ण्7 27ण्0 0ण्8 20ण्1 0ण्2 14ण्9 0ण्2 36ण्6 तापमान ;ú से॰द्ध चैन्नइर् वषार् ;से॰मी॰द्ध 13°4श् उ॰ 7 24ण्5 4ण्6 25ण्7 1ण्3 27ण्7 1ण्3 30ण्4 1ण्8 33ण्0 3ण्8 32ण्5 4ण्5 31ण्0 8ण्7 30ण्2 11ण्3 29ण्8 11ण्9 28ण्0 30ण्6 25ण्9 35ण्0 24ण्7 13ण्9 128ण्6 तापमान ;ú से॰द्ध नागपुर वषार् ;से॰मी॰द्ध 21°9श् उ॰ 312 21ण्5 1ण्1 23ण्9 2ण्3 28ण्3 1ण्7 32ण्7 1ण्6 35ण्5 2ण्1 32ण्0 22ण्2 27ण्7 37ण्6 27ण्3 28ण्6 27ण्9 18ण्5 26ण्7 5ण्5 23ण्1 2ण्0 20ण्7 1ण्0 124ण्2 तापमान ;ú से॰द्ध श्िालांग वषार् ;से॰मी॰द्ध 24°34श् उ॰ 1461 9ण्8 1ण्4 11ण्3 2ण्9 15ण्9 5ण्6 18ण्5 14ण्6 19ण्2 29ण्5 20ण्5 47ण्6 21ण्1 35ण्9 20ण्9 34ण्3 20ण्0 30ण्2 17ण्2 18ण्8 13ण्3 3ण्8 10ण्4 0ण्6 225ण्3 तापमान ;ú से॰द्ध थ्िारुवनंथपुरम् वषार् ;से॰मी॰द्ध 8°29श् उ॰ 61 26ण्7 2ण्3 27ण्3 2ण्1 28ण्3 3ण्7 28ण्7 10ण्6 28ण्6 20ण्8 26ण्6 35ण्6 26ण्2 22ण्3 2ण्6ण्2 14ण्6 26ण्5 13ण्8 26ण्7 27ण्3 26ण्6 20ण्6 26ण्5 7ण्5 181ण्2 तापमान ;ú से॰द्ध लेह वषार् ;से॰मी॰द्ध 34° उ॰ 3506 दृ 8ण्5 1ण्0 दृ 7ण्2 0ण्8 दृ 0ण्6 0ण्8 6ण्1 0ण्5 10ण्0 0ण्5 14ण्4 0ण्5 17ण्2 1ण्3 16ण्1 1ण्3 12ण्2 0ण्8 6ण्1 0ण्5 0ण्0 दृ दृ 5ण्6 0ण्5 8ण्5 गंभीरता से विचार कीजिए कि इन सब तथ्यों के बावजूद क्या हमारे पास इस निष्कषर् पर पहुँचने के लिए पुष्ट प्रमाण है कि पूरे देश में जलवायु की सामान्य एकता बनाए रखने में मानसून का अत्यिाक महत्त्वपूणर् योगदान है। 44 समकालीन भारत

RELOAD if chapter isn't visible.