अपवाह अपवाह शब्द एक क्षेत्रा के नदी तंत्रा की व्याख्या करता है। भारत के भौतिक मानचित्रा को देख्िाए। आप पाएँगे कि विभ्िान्न दिशाओं से छोटी - छोटी धाराएँ आकर एक साथ मिल जाती हैं तथा एक मुख्य नदी का निमार्ण करती हैं, अंततः इनका निकास किसी बड़े जलाशय, जैसेμ झील या समुद्र या महासागर में होता है। एक नदी तंत्रा द्वारा जिस क्षेत्रा का जल प्रवाहित होता है उसे एक अपवाह द्रोणी कहते हैं। मानचित्रा का अवलोकन करने पर यह पता चलता है कि कोइर् भी जलध - बरध - अ विभाजक ाराचित्रा 3.1: जल विभाजक ऊँंचा क्षेत्रा, जैसेμ पवर्त या उच्च भूमि दो पड़ोसी अपवाह द्रोण्िायों को एक दूसरे से अलग करती है। इस प्रकार की उच्च भूमि को जल विभाजक कहते हैं ;चित्रा 3.1द्ध। विश्व की सबसे बड़ी अपवाह द्रोणी अमेज़्ान नदी की है। भारत में किस नदी की अपवाह द्रोणी सबसे बड़ी ह?ैभारत में अपवाह तंत्रा भारत के अपवाह तंत्रा का नियंत्राण मुख्यतः भौगोलिक आवृफतियों के द्वारा होता है। इस आधार पर भारतीय नदियों को दो मुख्य वगोर्ं में विभाजित किया गया है - ऽ हिमालय की नदियाँ तथा ऽ प्रायद्वीपीय नदियाँ भारत के दो मुख्य भौगोलिक क्षेत्रों से उत्पन्न होने के कारण हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियाँ एक - दूसरे से भ्िान्न हैं। हिमालय की अिाकतर नदियाँ बारहमासी नदियाँ होती हैं। इनमें वषर् भर पानी रहता है, क्योंकि इन्हें वषार् के अतिरिक्त उँफचे पवर्तों से पिघलने वाले हिम द्वारा भी जल प्राप्त होता है। हिमालय की दो मुख्य नदियाँसिंधु तथा ब्रह्मपुत्रा इस पवर्तीय शृंखला के उत्तरी भाग से निकलती हैं। इन नदियों ने पवर्तों को काटकर गाॅजो± कानिमार्ण किया है। हिमालय की नदियाँ अपने उत्पिा के स्थान से लेकर समुद्र तक के लंबे रास्ते को तय करती अपवाह प्रतिरूप एक अपवाह प्रतिरूप में धाराएँ एक निश्िचत प्रतिरूप का निमार्ण करती हैं, जो कि उस क्षेत्रा कीभूमि की ढाल, जलवायु संबंध्ी अवस्थाओं तथा अध्ःस्थ शैल संरचना पर आधारित है। यहद्रुमावृफतिक, जालीनुमा, आयताकार तथा अरीय अपवाह प्रतिरूप है। द्रुमावृफतिक प्रतिरूप तब बनताहै जब धाराएँ उस स्थान के भूस्थल की ढाल के अनुसार बहती हैं। इस प्रतिरूप में मुख्य धरा तथाउसकी सहायक नदियाँ एक वृक्ष की शाखाओं की भाँति प्रतीत होती हैं। जब सहायक नदियाँ मुख्यनदी से समकोण पर मिलती हैं तब जालीनुमा प्रतिरूप का निमार्ण करती है। जालीनुमा प्रतिरूपवहाँ विकसित करता है जहाँ कठोर और मुलायम चट्टðानें समानांतर पायी जाती हैं। आयताकार अपवाह प्रतिरूप प्रबल संध्ित शैलीय भूभाग पर विकसित करता है। अरीय प्रतिरूप तब विकसितहोता है जब वेंफद्रीय श्िाखर या गुम्बद जैसी संरचना धरायें विभ्िान्न दिशाओं में प्रवाहित होती हैं। विभ्िान्न प्रकार के अपवाह प्रतिरूप का संयोजन एक ही अपवाह द्रोणी में भी पाया जा सकता है। अन्य निक्षपण्ेा आवृफतियों का निमार्ण करती हैं। ये पूणर् नदी का स्रोत विकसित डेल्टाओं का भी निमार्ण करती हैं ;चित्रा 3.3द्ध। अिाकतर प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी होती हैं, क्योंकि इनका प्रवाह वषार् पर निभर्र करता है। शुष्क मौसम में बड़ी नदियों का जल भी घटकर छोटी - छोटी धाराओं में बहने लगता है। हिमालय की नदियों की तुलना मंे ऊपरी भाग मध्य भाग प्रायद्वीपीय नदियों की लंबाइर् कम तथा छिछली हैं। पिफर भी इनमें से वुफछ वेंफद्रीय उच्चभूमि से निकलती हैं तथा पश्िचम की तरपफ बहती हैं। क्या आप इस प्रकार की दो विसपर् बड़ी नदियों को पहचान सकते हैं? प्रायद्वीपीय भारत कीगोखुर झील अिाकतर नदियाँ पश्िचमी घाट से निकलती हैं तथा निचला भाग बंगाल की खाड़ी की तरपफ बहती हैं। हिमालय की नदियाँ सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्रा हिमालय से निकलने वाली प्रमुखडेल्टा ँँाालंबी हैं तथा अनेक महत्त्वपूणर् एवं नदियहैं। ये नदियचित्रा 3.3: नदी की विभ्िान्न अवस्थाएँ हैं। ये अपने मागर् के ऊपरी भागों में तीव्र अपरदन िया करती हैं तथा अपने साथ भारी मात्रा में सिल्ट एवं बालू का संवहन करती हैं। मध्य एवं निचले भागों में ये नदियाँ विसपर्, गोखुर झील तथा अपने बाढ़ वाले मैदानों में बहुत - सी बड़ी सहायक नदियाँ आकर इनमें मिलती हैं। किसी नदी तथा उसकी सहायक नदियों को नदी तंत्रा कहा जाता है। ¯सध्ु नदी तंत्रा सिंधु नदी का उद्गम मानसरोवर झील के निकट तिब्बत में है। पश्िचम की ओर बहती हुइर् यह नदी भारत में जम्मू चित्रा 3.4: मुख्य नदियाँ और झीलें कश्मीर के लद्दाख जिले से प्रवेश करती है। इस भाग में यह एक बहुत ही सुंदर दशर्नीय गाजर् का निमार्ण करती है। इस क्षेत्रा में बहुत - सी सहायक नदियाँ जैसे - जास्कर, नूबरा, श्योक तथा हुंज़ा इस नदी में मिलती हैं। सिंधु नदी बलूचिस्तान तथा गिलगित से बहते हुए अटक में पवर्तीय क्षेत्रा से बाहर निकलती है। सतलुज, ब्यास, रावी, चेनाब तथा झेलम आपस में मिलकर पाकिस्तान में मिठानकोट के पास सिंधु नदी में मिल जाती हैं। इसके बाद यह नदी दक्ष्िाण की तरपफ बहती है तथा अंत में कराची से पूवर् की ओर अरब सागर में मिल जाती है। सिंधु नदी के मैदान का ढाल बहुत ध्ीमा है। सिंधु द्रोणी का एकतिहाइर् से वुफछ अध्िक भाग भारत के जम्मू - कश्मीर, हिमाचल तथा पंजाब में तथा शेष भाग पाकिस्तान में स्िथत है। 2ए900 कि॰मी॰ लंबी सिंधु नदी विश्व की लंबी नदियों में से एक है। ऽ सिंधु जल समझौता संध्ि के अनुच्छेदों ;1960द्ध के अनुसार भारत इस नदी प्रक्रम के संपूणर् जल वफा केवल 20 प्रतिशत जल उपयोग कर सकता है। इस जल का उपयोग हम पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान के दक्ष्िाण - पश्िचम भागों में सिंचाइर् के लिए करते हैं। गंगा नदी तंत्रा गंगा की मुख्य धारा ‘भागीरथी’ गंगोत्राी हिमानी से निकलतीहै तथा अलकनंदा उत्तराखण्ड के देवप्रयाग में इससे मिलती हैं। हरिद्वार के पास गंगा पवर्तीय भाग को छोड़कर मैदानी भाग में प्रवेश करती है। हिमालय से निकलने वाली बहुत सी नदियाँ आकर गंगा मंे मिलती हैं, इनमें से वुफछ प्रमुख नदियाँ हैं - यमुना, घाघरा, गंडक तथा कोसी। यमुना नदी हिमालय के यमुनोत्राी हिमानी से निकलती है। यह गंगा के दाहिने किनारे के समानांतर बहती है तथा इलाहाबाद में गंगा में मिल जाती है। घाघरा, गंडक तथा कोसी, नेपाल हिमालय से निकलती हैं। इनके कारण प्रत्येक वषर् उत्तरी मैदान के वुफछ हिस्से में बाढ़ आती है, जिससे बड़े पैमाने पर जान - माल का नुकसान होता है, लेकिन ये वे नदियाँ हैं,जो मिट्टी को उपजाऊपन प्रदान कर वृफष्िा योग्य भूमि बना देती हैं। प्रायद्वीपीय उच्चभूमि से आने वाली मुख्य सहायक नदियाँ चंबल, बेतवा तथा सोन हैं। ये अ(र् शुष्क क्षेत्रों से निकलती हैं। इनकी लंबाइर् कम तथा इनमें पानी की मात्रा भी कम होती है। ज्ञात कीजिए कि ये नदियाँ वैफसे तथा कहाँ गंगा मंे मिलती हैं। बाएँ तथा दाहिने किनारे की सहायक नदियों के जल से परिपूणर् होकर गंगा पूवर् दिशा में, पश्िचम बंगाल केपफरक्का तक बहती है। यह गंगा डेल्टा का सबसे उत्तरी बिंदु है। यहाँ नदी दो भागों में बँट जाती है, भागीरथी हुगली ;जो इसकी एक वितरिका हैद्ध, दक्ष्िाण की तरपफ बहती है तथा डेल्टा के मैदान से होते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। मुख्य धारा दक्ष्िाण की ओर बहती हुइर् बांग्लादेश में प्रवेश करती है एवं ब्रह्मपुत्रा नदी इससे आकर मिल जाती है। अंतिम चरण में गंगा और ब्रह्मपुत्रा समुद्र में विलीन होने से पहले मेघना के नाम से जानी जाती हैं। गंगा एवं ब्रह्मपुत्रा के जल वाली यह वृहद् नदी बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इन नदियों के द्वारा बनाए गए डेल्टा को सुंदरवन डेल्टा के नाम से जाना जाता है। ऽ संुदरवन डेल्टा का नाम वहाँ पाये जाने वाले सुंदरी पादप से लिया गया है। ऽ सुंदरवन डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा एवं तेजी से वृि करने वाला डेल्टा है। यहाँ राॅयल बंगाल टाइर्गर भी पाये जाते हैं। गंगा की लंबाइर् 2ए500 कि॰मी॰ से अिाक है। चित्रा 3.4 देखें, क्या आप गंगा नदी के अपवाह तंत्रा को पहचान सकते हैं? अंबाला नगर, सिंधु तथा गंगा नदी तंत्रों के बीच जल - विभाजक पर स्िथत है। अंबाला से संुदरवन तक मैदान की लंबाइर् लगभग 1ए800 कि॰मी॰ है, परंतु इसके ढाल में गिरावट मुश्िकल से 300 मीटर है। दूसरे शब्दों में, प्रति 6 कि॰मी॰ की दूरी पर ढाल में गिरावट केवल 1 मीटर है। इसलिए इन नदियों में अनेक बड़े - बड़े विसपर् बन जाते हैं। ब्रह्मपुत्रा नदी तंत्रा ब्रह्मपुत्रा नदी तिब्बत की मानसरोवर झील के पूवर् तथासिंधु एवं सतलुज के ड्डोतों के कापफी नजदीक से निकलती है। इसकी लंबाइर् सिंधु से वुफछ अिाक है, परंतु इसका अिाकतर मागर् भारत से बाहर स्िथत है। यह हिमालय के समानांतर पूवर् की ओर बहती है। नामचा बारवा श्िाखर ;7ए757 मीटरद्ध के पास पहुँचकर यह अंग्रेजी के यू ;न्द्ध अक्षर जैसा मोड़ बनाकर भारत के अरुणाचल प्रदेश में गाॅजर् के माध्यम से प्रवेश करती है। यहाँ इसे दिहाँग के नाम से जाना जाता है तथा दिबांग, लोहित, केनुला एवं दूसरी सहायक नदियाँ इससे मिलकर असम में ब्रह्मपुत्रा का निमार्ण करती हैं। ऽ ब्रह्मपुत्रा को तिब्बत में सांगपो एवं बांग्लादेश में जमुना कहा जाता है। तिब्बत एक शीत एवं शुष्क क्षेत्रा है। अतः यहाँ इस नदी में जल एवं सिल्ट की मात्रा बहुत कम होती है। भारत में यह उच्च वषार् वाले क्षेत्रा से होकर गुजरती है। की अन्य नदियों के विपरीत, ब्रह्मपुत्रा नदी में सिल्ट निक्षेपण की मात्रा बहुत अिाक होती है। इसके कारण नदी की सतह बढ़ जाती है और यह बार - बार अपनी धारा के मागर् में परिवतर्न लाती है। प्रायद्वीपीय नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत में मुख्य जल विभाजक का निमार्ण पश्िचमी घाट द्वारा होता है, जो पश्िचमी तट के निकटउत्तर से दक्ष्िाण की ओर स्िथत है। प्रायद्वीपीय भाग की अिाकतर मुख्य नदियाँ जैसे - महानदी, गोदावरी, वृफष्णा तथा कावेरी पूवर् की ओर बहती हैं तथा बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। ये नदियाँ अपने मुहाने पर डेल्टा का निमार्ण करती हैं। पश्िचमी घाट से पश्िचम में बहने वाली अनेक छोटी धाराएँ हैं। नमर्दा एवं तापी, दो ही बड़ी नदियाँ हैं जो कि पश्िचम की तरपफ बहती हैं और ज्वारनदमुख का निमार्ण करती हैं। प्रायद्वीपीय नदियों की अपवाह द्रोण्िायांँ आकार में अपेक्षावृफत छोटी हैं। नमर्दा द्रोणी नमर्दा का उद्गम मध्य प्रदेश में अमरवफटक पहाड़ी के ंनिकट है। यह पश्िचम की ओर एक भ्रंश घाटी में बहती है। समुद्र तक पहुँचने के क्रम में यह नदी बहुत से दशर्नीय स्थलों का निमार्ण करती है। जबलपुर के निकट संगमरमर वेैलांेमंफ शेयह नदी गहरे गाजर् से बहती है तथा जहाँ यह नदी तीव्र ढाल से गिरती है, वहाँ ‘धुँआधार प्रपात’ का निमार्ण करती है। नमर्दा की सभी सहायक नदियाँ बहुत छोटी हैं, इनमें से अिाकतर समकोण पर मुख्य धारा से मिलती हैं। नमर्दा द्रोणी तहै। ृमध्य प्रदेश तथा गुजरात के वुफछ भागों में विस्तयहाँ नदी में जल एवं सिल्ट की मात्रा बढ़ जाती है। तापी द्रोणीअसम में ब्रह्मपुत्रा अनेक धराओं में बहकर एक गुंपिफत नदी के रूप में बहती है तथा बहुत से नदीय द्वीपों का तापी का उद्गम मध्य प्रदेश के बेतुल जिले में सतपुडशृंखलाओं में है। यह भी नमर्दा के समानांतर एक भ्रंश घाटी ़ा की निमार्ण करती है। क्या आपको ब्रह्मपुत्रा के द्वारा बनाए गए विश्व के सबसे बड़े नदीय द्वीप का नाम याद है?में बहती है, लेकिन इसकी लंबाइर् बहुत कम है। इसकीप्रत्येक वषर् वषार् ट्टतु में यह नदी अपने किनारों सेद्रोणी मध्यप्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्य में है।ऊपर बहने लगती है एवं बाढ़ के द्वारा असम तथाअरब सागर तथा पश्िचमी घाट के बीच का तटीयबंाग्लादेश में बहुत अिाक क्षति पहुँचाती है। उत्तर भारत मैदान बहुत अिाक संकीणर् है। इसलिए तटीय नदियों की लंबाइर् बहुत कम है। पश्िचम की ओर बहने वाली मुख्य नदियाँ साबरमती, माही, भारत - पुज़ा तथा पेरियार हैं। उन राज्यों के नाम बताइए जहाँ ये नदियाँ बहती हैं। गोदावरी द्रोणी गोदावरी सबसे बड़ी प्रायद्वीपीय नदी है। यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में पश्िचम घाट की ढालों से निकलती है। इसकी लंबाइर् लगभग 1ए500 कि॰मी॰ है। यह बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। प्रायद्वीपीय नदियों में इसका अपवाह तंत्रा सबसे बड़ा है। इसकी द्रोणी महाराष्ट्र ;नदी द्रोणी का 50 प्रतिशत भागद्ध, मध्य प्रदेश, उड़ीसा तथा आंध्र प्रदेश में स्िथत है। गोदावरी में अनेक सहायक नदियाँ मिलती हैं, जैसे - पूणार्, वधार्, प्रान्िहता, मांजरा, वेनगंगा तथा पेनगंगा। इनमें से अंतिम तीनों सहायक नदियाँ बहुत बड़ी हैं। बड़े आकार और विस्तार के कारण इसे ‘दक्ष्िाण गंगा’ के नाम से भी जाना जाता है। महानदी द्रोणी महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ की उच्चभूमि से है तथा यह उड़ीसा से बहते हुए बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इस नदी की लंबाइर् 860 कि॰मी॰ है। इसकी अपवाह द्रोणी महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड तथा उड़ीसा में है। वृफष्णा द्रोणी महाराष्ट्र के पश्िचमी घाट में महाबालेश्वर के निकट एकड्डोत से निकलकर वृफष्णा लगभग 1ए400 कि॰मी॰ बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा, मुसी तथा भीमा इसकी वुफछ सहायक नदियाँ हैं। इसकी द्रोणी महाराष्ट्र, कनार्टक तथा आंध्र प्रदेश में पैफली है। कावेरी द्रोणी कावेरी पश्िचमी घाट के ब्रह्मगिरी शृंखला से निकलती है तथा तमिलनाडु में वुफडलूर के दक्ष्िाण में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इसकी लंबाइर् 760 कि॰मी॰ है। इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं - अमरावती, भवानी, हेमावती तथा काबिनि। इसकी द्रोणी तमिलनाडु, केरल तथा कनार्टक में विस्तृत है। ऽ भारत में दूसरा सबसे बड़ा जलप्रपात कावेरी नदी बनाती है। इसे श्िावसमुंदरम् के नाम से जाना जाता है। प्रपात द्वारा उत्पादित विद्युत मैसूर, बंगलोर तथा कोलार स्वणर् - क्षेत्रा को प्रदान की जाती है। ऽ भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात कौन - सा है? इन बड़ी नदियों के अतिरिक्त वुफछ छोटी नदियाँ हैं, जो पूवर् की तरपफ बहती हैं। दामोदर, ब्रह्मनी, वैतरणी तथासुवणर् रेखा वुफछ महत्त्वपूणर् उदाहरण हैं। अपने एटलस में इनकी स्िथति ज्ञात कीजिए। ऽ पृथ्वी के धरातल का लगभग 71 प्रतिशत भाग जल से ढँका है, लेकिन इसका 97 प्रतिशत जल लवणीय है। ऽ केवल 3 प्रतिशत ही स्वच्छ जल के रूप में उपलब्ध है, जिसका तीन - चैथाइर् भाग हिमानी के रूप में है। झीलें कश्मीर घाटी तथा प्रसि( डल झील, नाववाले घरों तथा श्िाकारा से तो आप परिचित ही हांेगे, जो प्रत्येक वषर् हज़ारों पयर्टकों को आकष्िार्त करते हैं। इसी प्रकार, आप अन्य झील वाले स्थानों पर भी गए होंगे तथा वहाँ नौकायान, तैराकी एवं अन्य जलीय खेलों का आनंद लिया होगा। कल्पना कीजिए की अगर कश्मीर, नैनीताल एवं दूसरे पयर्टन स्थलों पर झीलें नहीं होतीं, तब क्या वे उतना ही आकष्िार्त करते जितना कि आज करते हैं? क्या आपने कभी यह जानने की कोश्िाश की है कि इन पयर्टकों को आकष्िार्त करने के लिए किसी स्थान परझीलों का क्या महत्त्व है? पयर्टकों के आकषर्ण के अतिरिक्त, मानव के लिए अन्य कारणों से भी झीलोंका महत्त्व है। पृथ्वी की सतह के गतर् वाले भागों में जहाँ जल जमा हो जाता है, उसे झील कहते हैं। ऽ बडे़ आकार वाली झीलों को समुद्र कहा जाता है, जैसे μ केस्िपयन, मृत तथा अरल सागर। भारत में भी बहुत - सी झीलें हैं। ये एक दूसरे से आकार तथा अन्य लक्षणों में भ्िान्न हैं। अिाकतर झीलेंस्थायी होती हैं तथा वुफछ में केवल वषार् ट्टतु में ही पानी होता है, जैसे - अंतदेर्शीय अपवाह वाले अधर्शुष्क क्षेत्रों की द्रोणी वाली झीलें। यहाँ वुफछ ऐसी झीलें हैं, जिनका निमार्ण हिमानियों एवं बपर्फ चादर की िया के पफलस्वरूप हुआ है। जबकि वुफछ अन्य झीलों का निमार्ण वायु, नदियों एवं मानवीय ियाकलापों के कारण हुआ है। एक विसपर् नदी बाढ़ वाले क्षेत्रों में कटकर गौखुर झील का निमार्ण करती है। स्िपट तथा बार ;रोिाकाद्ध तटीय क्षेत्रों में लैगून का निमार्ण करते हैं, जैसे - चिल्का झील, पुलीकट झील तथा कोलेरू झील। अंतदेर्शीय भागों वाली झीलें कभी - कभी मौसमी होती हैं, उदाहरण के लिए राजस्थान की सांभर झील, जो एक लवण जल वाली झील है। इसके जल का उपयोग नमक के निमार्ण के लिए किया जाता है। मीठे पानी की अिाकांश झीलें हिमालय क्षेत्रा में हैंै। ये मुख्यतः हिमानी द्वारा बनी हैं। दूसरे शब्दों में, ये तब बनीं जब हिमानियों ने या कोइर् द्रोणी गहरी बनायी, जो बाद में हिम पिघलने से भर गयी, या किसी क्षेत्रा में श्िालाओं अथवा मिट्टðी से हिमानी मागर् बँध गये। इसके विपरीत, जम्मू तथा कश्मीर की वूलर झील भूगभीर्य ियाओं से बनी है। यह भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी वाली प्रावृफतिक झील है। डल झील, भीमताल, नैनीताल,लोकताक तथा बड़ापानी वुफछ अन्य महत्त्वपूणर् मीठे पानी की झीलें हैं। इसके अतिरिक्त, जल - विद्युत उत्पादन के लिए नदियों पर बाँध बनाने से भी झील का निमार्ण हो जाता है, जैसे - गुरु गोबिंद सागर ;भाखड़ा - नंगल परियोजनाद्ध। झीलें मानव के लिए अत्यिाक लाभदायक होती हैं। एक झील नदी के बहाव को सुचारु बनाने में सहायक होती है। अत्यिाक वषार् के समय यह बाढ़ को रोकती है तथा सूखे के मौसम में यह पानी के बहाव को संतुलित करने में सहायता करती है। झीलों का प्रयोग जलविद्युत उत्पन्न करने में भी किया जा सकता है। ये आस - पास के क्षेत्रों की जलवायु को सामान्य बनाती हैं, जलीय पारितंत्रा को संतुलित रखती हैं, झीलों की प्रावृफतिक सुंदरता व पयर्टन को बढ़ाती हैं तथा हमें मनोरंजन प्रदान करती हैं। नदियों का अथर्व्यवस्था में महत्त्व संपूणर् मानव इतिहास में नदियों का अत्यिाक महत्त्व रहा है। नदियों का जल मूल प्रावृफतिक संसाधन है तथा अनेक मानवीय ियाकलापों के लिए अनिवायर् है। यही कारण है कि नदियों के तट ने प्राचीन काल से ही अिावासियों को अपनी ओर आकष्िार्त किया है। ये गाँव अब बड़े शहरों में परिवतिर्त हो चुके हैं। अपने राज्य के उन शहरों की एक सूची तैयार कीजिए जो नदी के किनारे स्िथत हैं। किंतु भारत जैसे देश के लिए, जहाँ कि अिाकांश जनसंख्या जीविका के लिए वृफष्िा पर निभर्र है, वहाँ सिंचाइर्, नौसंचालन, जलविद्युत निमार्ण में नदियों कामहत्त्व बहुत अिाक है। नदी प्रदूषण नदी जल की घरेलू, औद्योगिक तथा वृफष्िा में बढ़तीमाँग के कारण, इसकी गुणवत्ता प्रभावित हुइर् है। इसके परिणामस्वरूप, नदियों से अिाक जल की निकासी होती है तथा इनका आयतन घटता जाता है। दूसरी ओर, उद्योगों का प्रदूषण तथा अपरिष्वृफत कचरेनदी में मिलते रहते हैं। यह केवल जल की गुणवत्ता को ही नहीं, बल्िक नदी के स्वतः स्वच्छीकरण की क्षमता को भी प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, दिए गए समुचित जल प्रवाह में गंगा का जल लगभग 20 कि॰मी॰ क्षेत्रा में पैफले बड़े शहरों की गंदगी को तनु करके समाहित कर सकता है। लेकिन लगातार बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाता तथा अनेक नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। नदियों में बढ़ते प्रदूषण के कारण इनको स्वच्छ बनाने के लिए अनेक कायर् योजनाएँ लागू की गयी हैं। क्या आपने कभी ऐसी कायर् योजनाओं के बारे में सुना है? नदी के प्रदूष्िात जल से हमारा स्वास्थ्य किस प्रकार प्रभावित होता है? ‘बिना स्वच्छ जल का मानव जीवन’, इस विषय पर विचार करें तथा अपनी कक्षा में एक वाद - विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करंे। अभ्यास 1ण् दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए। ;पद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सा वृक्ष की शाखाओं के समान अपवाह प्रतिरूप प्रणाली को दशार्ता है? ;कद्ध अरीय ;खद्ध वेंफद्राभ्िामुख ;गद्ध द्रुमावृफतिक ;घद्धजालीनुमा ;पपद्ध वूलर झील निम्नलिख्िात में से किस राज्य में स्िथत है? ;कद्धराजस्थान ;खद्ध पंजाब ;गद्ध उत्तर प्रदेश ;घद्धजम्मू - कश्मीर ;पपपद्ध नमर्दा नदी का उद्गम कहाँ से है? ;कद्धसतपुड़ा ;खद्ध अमरकंटक ;गद्ध ब्र;घद्धपश्िचमी घाट के ढाल ह्मागिरी ;पअद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सी लवणीय जलवाली झील है? ;कद्धसांभर ;खद्ध वलर ू;गद्ध डल ;घद्धगोबिंद सागर ;अद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे बड़ी नदी है? ;कद्धनमर्दा ;खद्ध गोदावरी ;गद्ध वृफष्णा ;घद्ध महानदी ;अपद्ध निम्नलिख्िात नदियों में से कौन - सी नदी भ्रंश घाटी से होकर बहती है? ;कद्धमहानदी ;खद्ध वृफष्णा ;गद्ध तुंगभद्रा ;घद्ध तापी 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में दीजिए - ;पद्ध जल विभाजक का क्या कायर् है? एक उदाहरण दीजिए। ;पपद्ध भारत में सबसे विशाल नदी द्रोणी कौन - सी है? ;पपपद्ध सिंधु एवं गंगा नदियाँ कहाँ से निकलती हैं? ;पअद्ध गंगा की दो मुख्य धाराओं के नाम लिख्िाए? ये कहाँ पर एक - दूसरे से मिलकर गंगा नदी का निमार्ण करती हैं? ;अद्ध लंबी धरा होने के बावजूद तिब्बत के क्षेत्रों में ब्रह्मपुत्रा में कम गाद ;सिल्टद्ध क्यों है? ;अपद्ध कौन - सी दो प्रायद्वीपीय नदियाँ गतर् से होकर बहती हैं? समुद्र में प्रवेश करने के पहले वे किस प्रकार की आवृफतियों का निमार्ण करती हैं? ;अपपद्ध नदियों तथा झीलों के वुफछ आथ्िार्क महत्त्व को बताएँ। 3ण् दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;पद्ध नीचे भारत की वुफछ झीलों के नाम दिए गए हैं। इन्हें प्रावृफतिक तथा मानव निमिर्त वगो± में बांटिए। ;कद्ध वूलर ;खद्ध डल ;गद्ध नैनीताल ;घद्ध भीमताल ;ड.द्ध गोबिंद सागर ;चद्ध लोकताक ;छद्ध बारापानी ;जद्ध चिल्का ;झद्ध सां;यद्ध राणा प्रताप सागर ;टद्ध निज़ाम सागर ;ठद्ध ुभर पलिकट ;डद्ध नागाजुर्न सागर ;ढद्ध हीरावुंफड 4ण् हिमालय तथा प्रायद्वीपीय नदियों के मुख्य अंतरों को स्पष्ट कीजिए। 5ण् प्रायद्वीपीय पठार के पूवर् एवं पश्िचम की ओर बहने वाली नदियों की तुलना कीजिए। 6ण् किसी देश की अथर्व्यवस्था के लिए नदियाँ महत्त्वपूणर् क्यों हैं? मानचित्रा कौशल ;पद्ध भारत के मानचित्रा पर निम्नलिख्िात नदियों को चिित कीजिए तथा उनके नाम लिख्िाए - गंगा, सतलुज, दामोदर, वृफष्णा, नमर्दा, तापी, महानदी, दिहांग। ;पपद्ध भारत के रेखा मानचित्रा पर निम्नलिख्िात झीलों को चिित कीजिए तथा उनके नाम लिख्िाए - चिल्का, सांभर, वूलर, पुलीकट तथा कोलेरू। ियाकलाप नीचे दी गयी वगर् पहेली को हल करेंμ नोट: पहेली के उत्तर अंग्रजी के शब्दों में हैं। बाएँ से दाएँ 1ण् नागाजुर्न सागर नदी परियोजना किस नदी पर है? 2ण् भारत की सबसे लंबी नदी। 3ण् ब्यास वुंफड से उत्पन्न होेने वाली नदी। 4ण् मध्य प्रदेश के बेतुल जिले से उत्पन्न होकर पश्िचम की ओर बहने वाली नदी। 5ण् प. बंगाल का ‘शोक’ के नाम से जानी जाने वाली नदी। 6ण् किस नदी से इंदिरा गांधी नहर निकाली गयी है? 7ण् रोहतांग दरार्ं के पास किस नदी का ड्डोत है? 8ण् प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी। ऊपर से नीचे 9ण् सिंध्ु नदी की सहायक नदी, जिस का उदगम हिमाचल प्रदेश में है। 10ण् भ्रंश अपवाह होकर अरब सागर में मिलने वाली नदी। 11ण् दक्ष्िाण भारतीय नदी, जो ग्रीष्म तथा शीत ट्टतु दोनों में वषार् का जल प्राप्त करती है। 12ण् लद्दाख, गिलगित तथा पाकिस्तान से बहने वाली नदी। 13ण् भारतीय मरुस्थल की एक महत्त्वपूणर् नदी। 14ण् पाकिस्तान में चेनाब से मिलने वाली नदी। 15ण् यमुनोत्राी हिमानी से निकलने वाली नदी।

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