भारत का भौतिक स्वरूप जैसा कि आप जानते हैं कि भारत विभ्िान्न स्थलावृफतियों वाला एक विशाल देश है। आप किस प्रकार के क्षेत्रा/भूभाग में रहते हैं? यदि आप मैदानी क्षेत्रा में रहते हैंए तो आप वहाँ के दूर तक पैफले विशाल मैदानों से परिचित होंगे और यदि पवर्तीय क्षेत्रा के निवासी हैंए तो आप पवर्तीय ढलानों और घाटियों से भली - भाँति परिचित होंगे। वास्तव मेंए हमारे देश में हर प्रकार की भू - आवृफतियाँ पायी जाती हैंए जैसे - पवर्तए मैदानए मरुस्थलए पठार तथा द्वीप समूह। आप यह सोच रहे होंगे कि यह विभ्िान्न प्रकार की भू - आवृफतियाँ वैफसे बनीं? अब हम भारत की मुख्य भू - आवृफतियों की विशेषताएंँ तथा उनकी संरचना के बारे में जानेंगे। यहाँ विभ्िान्न प्रकार की शैलें पायी जाती हैंए जिनमें से वुफछ संगमरमर की तरह कठोर होती हैंए जिसका प्रयोग ताजमहल के निमार्ण में हुआ है एवं वुफछ सेलखड़ी की तरह मुलायम होती हैंए जिसका प्रयोग टेल्कम पाउडर बनाने में होता है। एक स्थान से दूसरे स्थान पर मृदा के रंगों में भ्िान्नता पायी जाती है क्योंकि मृदा विभ्िान्न प्रकार की शैलों से बनी होती हैं। क्या आपने कभी इन विविधताओं के कारणों के बारे में सोचा है? इनमें से अिाकतर विविधताएँ शैलों के निमार्ण में विभ्िान्नता के कारण होती हैं। भारत एक विशाल भूभाग है। इसका निमार्ण विभ्िान्न भूगभीर्य कालों के दौरान हुआ हैए जिसने इसके उच्चावचों को प्रभावित किया है। भूगभीर्य निमार्णों के अतिरिक्तए कइर् अन्य प्रियाओ,ं जैसेμअपक्षयए अपरदन तथा निक्षेपण के द्वारा वतर्मान उच्चावचों का निमार्ण तथा संशोधन हुआ है। वुफछ प्रमाणों पर आधारित सि(ांतों की सहायता से भूगभर्शास्ित्रायों ने इन भौतिक आवृफतियों के निमार्ण की व्याख्या करने की कोश्िाश की है। इसी तरह का एक सवर्मान्य सि(ांत, प्लेट विवतर्निक का सि(ांत है। इस सि(ांत के अनुसारए पृथ्वी की ऊपरी पपर्टी सात बड़ी एवं वुफछ छोटी प्लेटों से बनी है ;चित्रा 2.2द्ध।प्लेटों की गति के कारण प्लेटों के अंदर एवं ऊपर की ओर स्िथत महाद्वीपीय शैलों में दबाव उत्पन्न होता है। इसके परिणामस्वरूप वलनए भ्रंशीकरण तथा ज्वालामुखीय ियाएँ होती हैं। सामान्य तौर पर इन प्लेटों की गतियों को चित्रा 2.1ः प्लेटों की विभ्िान्न गतियाँ चित्रा 2ण्2 रू भू - पृष्ठ की मुख्य प्लेटें तीन वगोर्ं में विभाजित किया गया है ;चित्रा 2.1द्ध। वुफछ प्लटेंएक - दूसरे के करीब आती हैं और अभ्िासारित परिसीमा का निमार्ण करती हैं। जबकि वुफछ प्लेट एक दूसरे से दूर जाती हैं और अपसारित परिसीमा का निमार्ण करती हैं। जब दो प्लेट एक - दूसरे के करीब आती हैंए तब या तो वे टकराकर टूट सकती हैं या एक प्लेट पिफसल कर दूसरी प्लेट के नीचे जा सकती है। कभी - कभी वे एक - दूसरे के साथ क्षैतिज दिशा में भी गति कर सकती हैं और रूपांतर परिसीमा का निमार्ंै टांे ंेंेण करती ह। इन प्ले म लाखा वषो± सहो रही गति के कारण महाद्वीपों की स्िथति तथा आकार में परिवतर्न आया है। भारत की वतर्मान स्थलावृफति का विकास भू - पपर्टी को अनेक टुकड़ों में विभाजित कर दिया और इस प्रकार भारत - आस्ट्रेलिया की प्लेट गोंडवाना भूमि सेअलग होने के बाद उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होनेलगी। उत्तर दिशा की ओर प्रवाह के परिणामस्वरूप ये प्लेट अपने से अिाक विशाल प्लेटए यूरेश्िायन प्लेट से टकरायी। इस टकराव के कारण इन दोनो प्लेटों के बीच स्िथत ‘टेथ्िास’ भू - अभ्िानति के अवसादी चट्टðान, वलित होकर हिमालय तथा पश्िचम एश्िाया की पवर्तीय शृंखला के रूप में विकसित हो गये। गोंडवाना भूमिः ये प्राचीन विशाल महाद्वीप पैंजिया का दक्ष्िाणतम भाग हैए जिसके उत्तर में अंगारा भूमि है।भी इस प्रकार की गतियों से प्रभावित हुआ है। विश्व के अिाकतर ज्वालामुखी एवं भूवंफप संभावी क्षेत्रा, प्लेट के किनारों पर स्िथत हैं । लेकिन वुफछ प्लेट के अंदर भी पाये जाते हैं। सबसे प्राचीन भूभाग ;अथार्त् प्रायद्वीपीय भागद्ध गोंडवाना भूमि का एक हिस्सा था। गोंडवाना भूभाग के विशाल क्षेत्रा में भारतए आस्ट्रेलियाए दक्ष्िाण अप्रफीका, दक्ष्िाण अमेरिका तथा अंटावर्फटिक के क्षेत्रा शामिल थे। संवहनीय धाराओं ने ‘टेथ्िास’ के हिमालय के रूप में ऊपर उठने तथाप्रायद्वीपीय पठार के उत्तरी किनारे के नीचे धँसने के परिणामस्वरूप एक बहुत बड़ी द्रेाणी का निमार्ण हुआ।समय के साथ - साथ यह बेसिन उत्तर के पवर्तों एवं दक्ष्िाण के प्रायद्वीपीय पठारों से बहने वाली नदियों के अवसादी निक्षेपों द्वारा धीरे - धीरे भर गया। इस प्रकार जलोढ़ निक्षेपों से निमिर्त एक विस्तृत समतल भूभागभारत के उत्तरी मैदान के रूप में विकसित हो गया। भारत की भूमि बहुत अिाक भौतिक विभ्िान्नताओं को दशार्ती है। भूगभीर्य तौर पर प्रायद्वीपीय पठार पृथ्वी की सतह का प्राचीनतम भाग है। इसे भूमि का एक बहुत ही स्िथर भाग माना जाता था। परंतु हाल के भूकंपों ने इसेगलत साबित किया है। हिमालय एवं उत्तरी मैदान हाल में बनी स्थलावृफतियाँ हैं। भूगभर् वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय पवर्त एक अस्िथर भाग है। हिमालय की पूरी पवर्त शृंखला एक युवा स्थलावृफति को दशार्ती हैए जिसमें ऊँचे श्िाखरए गहरी घाटियाँ तथा तेज बहने वाली नदियाँहैं। उत्तरी मैदान जलोढ़ निक्षेपों से बने हैं। प्रायद्वीपीय;1द्ध हिमालय पवर्त शृंखला ;2द्ध उत्तरी मैदान ;3द्ध प्रायद्वीपीय पठार ;4द्ध भारतीय मरुस्थल ;5द्ध तटीय मैदान ;6द्ध द्वीप समूह हिमालय पवर्त भारत की उत्तरी सीमा पर विस्तृत हिमालय भूगभीर्य रूप से युवा एवं बनावट के दृष्िटकोण से वलित पवर्त शृखलांपठार आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों वाली कम ऊँची पहाडि़यों एवं चैड़ी घाटियों से बना है। है। ये पवर्त शृंखलाएँ पश्िचम - पूवर् दिशा में सिंधु से लेकरब्रह्मपुत्रा तक पैफली हैं। हिमालय विश्व की सबसे ऊँची पवर्त श्रेणी है और एक अत्यिाक असम अवरोधों में से मुख्य भौगोलिक वितरण एक है। ये 2ए400 कि॰मी॰ की लंबाइर् में पैफले एक भारत की भौगोलिक आवृफतियों को निम्नलिख्िात वगो± में अ(र्ृवत्त का निमार्ण करते हैं। इसकी चैड़ाइर् कश्मीर में विभाजित किया जा सकता है ;चित्रा 2.4द्ध। 400 कि॰मी॰ एवं अरुणाचल में 150 कि॰मी॰ है। पश्िचमी चित्रा 2ण्3 रू हिमालय चित्रा 2.4रू भारत - मुख्य भौगोलिक वितरण भाग की अपेक्षा पूवीर् भाग की ऊँचाइर् में अिाक विविधता पाइर् जाती है। अपने पूरे देशांतरीय विस्तार के साथ हिमालय को तीन भागों में बाँट सकते हैं। इन शृंखलाओं के बीचबहुत अिाक संख्या में घाटियाँ पाइर् जाती हैं। सबसे उत्तरी भाग में स्िथत शृंखला को महान या आंतरिक हिमालय या हिमादि्र कहते हैं। यह सबसे अिाक सतत् शंृखला हैए जिसमें 6ए000 मीटर की औसत उँफचाइर् वाले सवार्िाक उँफचे श्िाखर हैं। इसमें हिमालय के सभी मुख्य श्िाखर हैं। हिमालय के वुफछ उँफचे श्िाखर श्िाखर देश उँफचाइर् ;मीटरद्ध महान हिमालय के वलय की प्रवृफति असंममित है।हिमालय के इस भाग का क्रोड ग्रेनाइट का बना है। यहशृंखला हमेशा बपर्फ से ढँकी रहती है तथा इससे बहुत - सीहिमानियों का प्रवाह होता है। ऽ महान हिमालय में पायी जाने वाली हिमानियोंतथा दरोर्ं के नाम। ऽ भारत के उन राज्यों के नाम जहाँ ऊपर दिए गए उँफचे श्िाखर स्िथत हैं। हिमादि्र के दक्ष्िाण में स्िथत शृंखला सबसे अिाकअसम है एवं हिमाचल या निम्न हिमालय के नाम सेजानी जाती है। इन शृंखलाओं का निमार्ण मुख्यतःअत्यािाक संपीडित तथा परिवतिर्त शैलों से हुआ हैं।इनकी ऊँचाइर् 3ए700 मीटर से 4ए500 मीटर के बीचतथा औसत चैड़ाइर् 50 किलोमीटर है। जबकि पीरपंजाल शृंखला सबसे लंबी तथा सबसे महत्त्वपूणर् शृंखलाहैए धौलाधर एवं महाभारत शृंखलाएँ भी महत्त्वपूणर् हैं।इसी शृंखला में कश्मीर की घाटी तथा हिमाचल केकांगड़ा एवं वुफल्लू की घाटियाँ स्िथत हैं। इस क्षेत्रा कोपहाड़ी नगरों के लिए जाना जाता है। ऽ एटलस से मसूरी, नैनीताल एवं रानीखेतकी स्िथति देखें तथा उन राज्यों के नाम लिखें जहाँ वे स्िथत हैं। हिमालय की सबसे बाहरी शृंखला को श्िावालिक कहा जाता है। इनकी चैड़ाइर् 10 से 50 कि॰मी॰ तथा उँफचाइर् 900 से 1ए100 मीटर के बीच है। ये शृंखलाएँए उत्तर में स्िथत मुख्य हिमालय की शृंखलाओं से नदियों द्वारा लायी गयी असंपिडित अवसादों से बनी है। ये घाटियाँ बजरी तथा जलोढ़ की मोटी परत से ढँकी हुइर् हैं। निम्न हिमाचल तथा श्िावालिक के बीच में स्िथत लंबवत् घाटी को दून के नाम से जाना जाता है। वुफछ प्रसि( दून हैं - देहरादूनए कोटलीदून एवं पाटलीदून।इस उत्तर - दक्ष्िाण के अतिरिक्त हिमालय को पश्िचम से पूवर् तक स्िथत क्षेत्रों के आधार पर भी विभाजित किया गया है। इन वगीर्करणों को नदी घाटियों की सीमाओं के आधार पर किया गया है। उदाहरण के लिएए सतलुज एवं सिंधु के बीच स्िथत हिमालय के भाग को पंजाब हिमालय के नाम से जाना जाता है। लेकिन पश्िचम से पूवर् तक क्रमशः इसे कश्मीर तथा हिमाचल हिमालय के नाम से भी जाना जाता है। सतलुज तथा काली नदियों के बीच स्िथत हिमालय के भाग को वुफमाँउफ हिमालय के नाम से भी जाना जाता है। काली तथा तिस्ता नदियाँए नेपाल हिमालय का एवं तिस्ता तथा दिहांग नदियाँ असम हिमालय का सीमांकन करती है। हिमालय के वुफछ क्षेत्राीय नाम पता कीजिए। ब्रह्मपुत्रा हिमालय की सबसे पूवीर् सीमा बनाती है। दिहांग महाखड्ड ;गाजर्द्ध के बाद हिमालय दक्ष्िाण की ओर एक तीखा मोड़ बनाते हुए भारत की पूवीर् सीमा के साथ पैफल जाता है। इन्हें पूवार्चल या पूवीर् पहाडि़यों तथा पवर्त शृंखलाओं के नाम से जाना जाता है। ये पहाडि़याँउत्तर - पूवीर् राज्यों से होकर गुजरती हैं तथा मज़बूत बलुआ पत्थरोंए जो अवसादी शैल हैए से बनी है। ये घने जंगलों से ढँकी हैं तथा अिाकतर समानांतर शृंखलाओं एवं घाटियों के रूप में पैफली हैं। पूवार्चल में पटकाइर्ए नागाए मिशो तथा मण्िापुर पहाडि़याँ शामिल हैं। उत्तरी मैदानउत्तरी मैदान तीन प्रमुख नदी प्रणालियों - सिंधुए गंगा एवं ब्रह्मपुत्रा तथा इनकी सहायक नदियों से बना है। यह मैदान जलोढ़ मृदा से बना है। लाखों वषो± में हिमालय के गिरिपाद में स्िथत बहुत बड़े बेसिन ;द्रोणीद्ध में जलोढ़ों वफा निक्षेप हुआए जिससे इस उपजाऊ मैदान का निमार्ण हुआ है। इसका विस्तार 7 लाख वगर् कि॰मी॰ के क्षेत्रा पर है। यह मैदान लगभग 2ए400 कि॰मी॰ लंबा एवं 240 से ऽ ब्रह्मपुत्रा नदी में स्िथत माजोली विश्व का सबसे बड़ा नदीय द्वीप है। जहाँ लोगों का निवास है। 320 कि॰मी॰ चैड़ा है। यह सघन जनसंख्या वाला भौगोलिक क्षेत्रा है। समृ( मृदा आवरणए प्रयार्प्त पानी की उपलब्धता एवं अनुवूफल जलवायु के कारण वृफष्िा की दृष्िट से यह भारत का अत्यिाक उत्पादक क्षेत्रा है।उत्तरी पवर्तों से आने वाली नदियाँ निक्षेपण कायर् में लगी हैं। नदी के निचले भागों में ढाल कम होने के कारण नदी की गति कम हो जाती हैए जिसके परिणामस्वरूप नदीय द्वीपों का निमार्ण होता है। ये नदियाँ अपने निचले भाग में गाद एकत्रा हो जाने के कारण बहुत - सी धाराओं में बँट जाती हैं। इन धाराओं उत्तरी मैदान को मोटे तौर पर तीन उपवगो± मेंविभाजित किया गया है। उत्तरी मैदान के पश्िचमी भाग को पंजाब का मैदान कहा जाता है। सिंधु तथा इसकी सहायक नदियों के द्वारा बनाये गए इस मैदान का बहुत बड़ा भाग पाकिस्तान में स्िथत है। सिंधु तथा इसकी सहायक नदियाँ झेलमए चेनाबए रावीए ब्यास तथा सतलुज हिमालय से निकलती हैं। मैदान के इस भाग में दोआबों की संख्या बहुत अिाक है। गंगा के मैदान का विस्तार घघ्घर तथा तिस्ता नदियोंके बीच है। यह उत्तरी भारत के राज्यों हरियाणाए दिल्लीए उत्तर प्रदेशए बिहारए झारखंड के वुफछ भाग तथा पश्िचम बंगाल में पैफला है। ब्रह्मपुत्रा का मैदान इसके पश्िचम विशेषकर असम में स्िथत है।उत्तरी मैदानों की व्याख्या सामान्यतः इसके उच्चावचों में बिना किसी विविधता वाले समतल स्थल के रूप में की जाती है। यह सही नहीं है। इन विस्तृत मैदानों की भौगोलिक आवृफतियों में भी विविधता है। आवृफतिकभ्िान्नता के आधार पर उत्तरी मैदानों को चार भागों में विभाजित किया जा सकता है। नदियाँ पवर्तों से नीचे उतरते समय श्िावालिक की ढाल पर 8 से 16 कि॰मी॰ के चैड़ी पट्टðी में गुटिका का निक्षेपण करती हैं। इसे ‘भाबर’ के नाम से जाना जाता है। सभी सरिताएँ इस भाबर पट्टðी में विलुप्त हो जाती हैं। इस पट्टðी के दक्ष्िाण में ये सरिताएँ एवं नदियाँ पुनः निकल आती हैं। एवं नम तथा दलदली क्षेत्रा का निमार्ण करती हैंए जिसे ‘तराइर्’ कहा जाता है। यह वन्य प्राण्िायों से भरा घने जंगलों का क्षेत्रा था। बँटवारे के बाद पाकिस्तान से आए शरणाथ्िार्यों को वृफष्िा योग्य भूमि उपलब्ध कराने के लिए इस जंगल को काटा जा चुका है। इस क्षेत्रा के दुधवा राष्ट्रीय पावर्फ की स्िथति ज्ञात कीजिए।उत्तरी मैदान का सबसे विशालतम भाग पुराने जलोढ़का बना है। वे नदियों के बाढ़ वाले मैदान के ऊपर स्िथत हैं तथा वेदिका जैसी आवृफति प्रदश्िार्त करते हैं। इस भाग को ‘भांगर’ के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्रा की मृदा में चूनेदार निक्षेप पाए जाते हैंए जिसे स्थानीय भाषा में ‘कंकड़’ कहा जाता है। बाढ़ वाले मैदानों के नये तथा युवा निक्षेपों को ‘खादर’ कहा जाता है। इनका लगभग प्रत्येक वषर् पुननिमार्ण होता हैए इसलिए ये उपजाऊ होते हैं तथा गहन खेती के लिए आदशर् होते हैं। प्रायद्वीपीय पठार प्रायद्वीपीय पठार एक मेज की आवृफति वाला स्थल है जो पुराने िस्टलीयए आग्नेय तथा रूपांतरित शैलों से बना है। यह गोंडवाना भूमि के टूटने एवं अपवाह के कारण बना था तथा यही कारण है कि यह प्राचीनतम भूभाग का एक हिस्सा है। इस पठारी भाग में चैड़ी तथा छिछली घाटियाँ एवं गोलाकार पहाडि़याँ हैं। इस पठार के दो मुख्य भाग हैं - ‘मध्य उच्चभूमि’ तथा ‘दक्कन का पठार’। नमर्दानदी के उत्तर में प्रायद्वीपीय पठार का वह भाग जो कि मालवा के पठार के अिाकतर भागों पर पैफला है उसे मध्य उच्चभूमि के नाम से जाना जाता है। विंध्य शृंखलादक्ष्िाण में मध्य उच्चभूमि तथा उत्तर - पश्िचम में अरावली से घ्िारी है। पश्िचम में यह धीरे - धीरे राजस्थान के बलुइर् तथा पथरीले मरुस्थल से मिल जाता है। इस क्षेत्रा में बहने वाली नदियाँए चंबलए सिंधए बेतवा तथा केन दक्ष्िाण - पश्िचमसे उत्तर - पूवर् की तरपफ बहती हैंए इस प्रकार वे इस क्षेत्रा के ढाल को दशार्ती हैं। मध्य उच्चभूमि पश्िचम में चैड़ी लेकिन पूवर् में संकीणर् है। इस पठार के पूवीर् विस्तार को स्थानीय रूप से बुंदेलखंड तथा बघेलखंड के नाम से जाना जाता है। इसके और पूवर् के विस्तार को दामोदर नदी द्वारा अपवाहित छोटा नागपुर पठार दशार्ता है। दक्ष्िाण का पठार एक त्रिाभुजाकार भूभाग हैए जो नमर्दा नदी के दक्ष्िाण में स्िथत है। उत्तर में इसके चैड़े आधार पर सतपुड़ा की शृंखला हैए जबकि महादेवए वैफमूर की पहाड़ी तथा मैकाल शृंखला इसके पूवीर् विस्तार हैं। भारत के भौतिक मानचित्रा पर इन पहाडि़यों एवं शृंखलाओं की स्िथति को ज्ञात करें। दक्ष्िाण का पठार पश्िचम मेंऊँचा एवं पूवर् की ओर कम ढाल वाला है। इस पठारका एक भाग उत्तर - पूवर् में भी देखा जाता हैए जिसे स्थानीय रूप से ‘मेघालय’, ‘काबीर् एंगलौंग पठार’ तथा‘उत्तर कचार पहाड़ी’ के नाम से जाना जाता है। यह एक भ्रंश के द्वारा छोटा नागपुर पठार से अलग हो गया है।पश्िचम से पूवर् की ओर तीन महत्त्वपूणर् शृंखलाएँ गारोए खासी तथा जयंतिया हैं। दक्ष्िाण के पठार के पूवीर् एवं पश्िचमी सिरे पर क्रमशः पूवीर् तथा पश्िचमी घाट स्िथत हैं। पश्िचमी घाटए पश्िचमी तट के समानांतर स्िथत है। वे सतत् हैं तथा उन्हें केवल दरो± के द्वारा ही पार किया जा सकता है। भारत के भौतिक मानचित्रा में थाल घाटए भोर घाट तथा पाल घाट की स्िथति ज्ञात करें। पश्िचमी घाटए पूवीर् घाट की अपेक्षा उँफचे हैं। पूवीर् घाट के 600 मीटर की औसत उँफचाइर् की तुलना में पश्िचमी घाट की उँफचाइर् 900 से 1ए600 मीटर है। पूवीर् घाट का विस्तार महानदी घाटी से दक्ष्िाण में नीलगिरी तक है। पूवीर् घाट का विस्तार सतत् नहीं है। ये अनियमित हैं एवं बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियों ने इनको काट दिया है। पश्िचमी घाट में पवर्तीय वषार् होती है। यह वषार् घाट के पश्िचमी ढाल पर आदर््र हवा के टकराकरऊपर उठने के कारण होती है। पश्िचमी घाट को विभ्िान्नस्थानीय नामों से जाना जाता है। पश्िचमी घाट की ऊँचाइर्ए उत्तर से दक्ष्िाण की ओर बढ़ती जाती है। इस भाग केश्िाखर ऊँचे हैंए जैसे - अनाइर् मुडी ;2ए695 मी॰द्ध तथा डोडा बेटा ;2ए633 मी॰द्ध। पूवीर् घाट का सबसे उँफचा श्िाखर महेंद्रगिरी ;1ए500 मी॰द्ध है। पूवीर् घाट के दक्ष्िाण - पश्िचम में शेवराय तथा जावेडी की पहाडि़याँ स्िथत हैं। उड्गमंडलम्ए जिसे ऊटी के नाम से जाना जाता है तथा कोडइर्कनाल जैसे प्रसि( पहाड़ी नगरों की स्िथति मानचित्रा में ज्ञात कीजिए। प्रायद्वीपीय पठार की एक विशेषता यहाँ पायी जाने वाली काली मृदा हैए जिसे ‘दक्कन ट्रैप’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी उत्पिा ज्वालामुखी से हुइर् हैए इसलिए इसके शैल आग्नेय हैं। वास्तव में इन शैलों का समय के साथ अपरदन हुआ हैए जिनसे काली मृदा का निमार्ण हुआ है। अरावली की पहाडि़याँ प्रायद्वीपीय पठारके पश्िचमी एवं उत्तर - पश्िचमी किनारे पर स्िथत है। ये बहुत अिाक अपरदित एवं खंडित पहाडि़याँ हैं। येगुजरात से लेकर दिल्ली तक दक्ष्िाण - पश्िचम एवं उत्तर - पूवर् दिशा में पैफली हैं। भारतीय मरुस्थल अरावली पहाड़ी के पश्िचमी किनारे पर थार का मरुस्थल स्िथत है। यह बालू के टिब्बों से ढँका एक तरंगित मैदान है। इस क्षेत्रा में प्रति वषर् 150 मि॰मी॰ से भी कम वषार् होती है। इस शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रा में वनस्पति बहुतकम है। वषार् ट्टतु में ही वुफछ सरिताएँ दिखती हैं और उसके बाद वे बालू में ही विलीन हो जाती हैं। पयार्प्त जल नहीं मिलने से वे समुद्र तक नहीं पहुँच पाती हैं। केवल ‘लूनी’ ही इस क्षेत्रा की सबसे बड़ी नदी है। बरकान ;अधर्चंद्राकार बालू का टीलाद्ध का विस्तार बहुत अिाक क्षेत्रा पर होता हैए लेकिन लंबवत् टीले भारत - पाकिस्तान सीमा के समीप प्रमुखता से पाए जाते विस्तार है। यह पश्िचम में अरब सागर से लेकर पूवर् में बंगाल की खाड़ी तक विस्तृत है। पश्िचमी तटए पश्िचमी घाट तथा अरब सागर के बीच स्िथत एक संकीणर् मैदान है।इस मैदान के तीन भाग हैं। तट के उत्तरी भाग को कोंकण ;मुंबइर् तथा गोवाद्धए मध्य भाग को कन्नड मैदान एवं दक्ष्िाणी भाग को मालाबार तट कहा जाता है। हैं। यदि आप जैसलमेर जाएँएसकते हैं। तो बरकान के समूह देख तटीय मैदान प्रायद्वीपीय पठार के किनारों संकीणर् तटीय पट्टð ीयों का बंगाल की खाड़ी के साथ विस्तृत मैदान चैड़ा एवंसमतल है। उत्तरी भाग में इसे ‘उत्तरी सरकार’ कहा जाता है। जबकि दक्ष्िाणी भाग ‘कोरोमंडल’ तट के नाम से जाना जाता है। बड़ी नदियाँ, जैसे - महानदीए गोदावरीए ृकरती ह। चिल्का झील पैूंवीर् भू - लक्षण है। ऽ चिल्का झील भारत में खारे पानी की सबसे बड़ी झील है। यह उड़ीसा में महानदी डेल्टा के दक्ष्िाण में स्िथत है। द्वीप समूह आप पहले ही देख चुके हैं कि भारत का मुख्य स्थल भाग अत्यिाक विशाल है। इसके अतिरिक्त भारत में दो द्वीपों का समूह भी स्िथत है। क्या आप इन द्वीप समूहों को पहचान सकते हैं? चित्रा 2ण्11 रू एक द्वीप केरल के मालाबार तट के पास स्िथत लक्षद्वीप की स्िथति को ज्ञात कीजिए। द्वीपों का यह समूह छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है। पहले इनको लकादीवए मीनीकाय तथा एमीनदीव के नाम से जाना जाता था। 1973 में इनका नाम लक्षद्वीप रखा गया। यह 32 वगर् कि॰मी॰ के छोटे सेक्षेत्रा में पैफला है। कावारत्ती द्वीप लक्षद्वीप का प्रशासनिक मुख्यालय है। इस द्वीप समूह पर पादप तथा जंतु के बहुत से प्रकार पाए जाते हैं। पिटली द्वीपए जहाँ मनुष्य का निवास नहीं हैए वहाँ एक पक्षी - अभयारण्य है।अब बंगाल की खाड़ी में उत्तर से दक्ष्िाण के तरपफ पैफले द्वीपों की शृंखला की ओर ध्यान दीजिए। ये अंडमान में बहुल तथा बिखरे हुंै ह मख्यतः दोए ह। यह द्वीप समूुभागों में बाँटा गया है - उत्तर में अंडमान तथा दक्ष्िाण में निकोबार। यह माना जाता है कि यह द्वीप समूह निमज्िजत पवर्त श्रेण्िायों के श्िाखर हैं। यह द्वीप समूह देश की सुरक्षाके लिए बहुत महत्त्वपूणर् है। इन द्वीप समूहों में पाए जाने वाले पादप एवं जंतुओं में बहुत अिाक विविधता है। ये द्वीप विषवत् वत के समीप स्िथत हैं एवं यहाँ की जलवायु ृविषुवतीय है तथा यह घने जंगलों से आच्छादित है। ऽ भारत का एकमात्रा सिय ज्वालामुखी अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह के बैरेन द्वीप पर स्िथत है। विभ्िान्न भू - आवृफतिक विभागों का विस्तृत विवरण प्रत्येक विभाग की विशेषताएँ स्पष्ट करता है परंतु यह स्पष्ट है कि ये विभाग एक - दूसरे के पूरक हैं और वे देश को प्रावृफतिक संसाधनों में समृ( बनाते हैं। उत्तरी पवर्त जलएवं वनों के प्रमुख स्रोत हैं। उत्तरी मैदान देश के अन्न भंडार हैं। इनसे प्राचीन सभ्यताओं के विकास को आधार मिला। पठारी भाग खनिजों के भंडार हैंए जिसने देश के औद्योगीकरण में विशेष भूमिका निभाइर् है। तटीय क्षेत्रा मत्स्यन और पोत संबंधी िया - कलापों के लिए उपयुक्त स्थान हैं। इस प्रकार देश की विविध भौतिक आवृफतियाँ ़ेएवं निकोबार द्वीप हैं। यह द्वीप समूह आकार में बडसंख्या भविष्य में विकास की अनेक संभावनाएँ प्रदान करती हैं। अभ्यास 1ण् निम्नलिख्िात विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। ;पद्ध एक स्थलीय भाग जो तीन ओर से समुद्र से घ्िारा हो - ;कद्धतट ;खद्ध प्रायद्वीप ;गद्ध द्वीप ;घद्ध इनमें से कोइर् नहीं ;पपद्ध भारत के पूवीर् भाग में म्यांमार की सीमा का निधार्रण करने वाले पवर्तों का संयुक्त नाम - ;कद्धहिमाचल ;खद्ध पूवार्ंचल ;गद्ध उत्तराखण्ड ;घद्ध इनमें से कोइर् नहीं ;पपपद्ध गोवा के दक्ष्िाण में स्िथत पश्िचम तटीय पट्टðी - ;कद्धकोरोमंडल ;खद्ध कन्नड ;गद्ध कोंकण ;घद्ध उत्तरी सरकार ;पअद्ध पूवीर् घाट का सवोर्च्च श्िाखर - ;कद्ध अनाइर्मुडी ;खद्ध महेंद्रगिरि ;गद्ध कंचनजंुगा ;घद्ध खासी 2 निम्नलिख्िात प्रश्नों के संक्षेप में उत्तर दीजिए - ;पद्ध भूगभीर्य प्लेटें क्या हैं? ;पपद्ध आज के कौन से महाद्वीप गोंडवाना लैंड के भाग थे? ;पपपद्ध ‘भाबर’ क्या है? ;पअद्ध हिमालय के तीन प्रमुख विभागों के नाम उत्तर से दक्ष्िाण के क्रम में बताइए? ;अद्ध अरावली और विंध्याचल की पहाडि़यों में कौन - सा पठार स्िथत है? ;अपद्ध भारत के उन द्वीपों के नाम बताइए जो प्रवाल भ्िािा के हैं। 3ण् निम्नलिख्िात में अंतर स्पष्ट कीजिए - ;पद्ध अपसारी तथा अभ्िासारी भूगभीर्य प्लेटें ;पपद्ध बंागर और खादर ;पपपद्ध पूवीर् घाट तथा पश्िचमी घाट 4ण् बताइए हिमालय का निमार्ण वैफसे हुआ था? 5ण् भारत के प्रमुख भू - आवृफतिक विभाग कौन से हैं? हिमालय क्षेत्रा तथा प्रायद्वीप पठार के उच्चावच लक्षणों में क्या अंतर है? 6ण् भारत के उत्तरी मैदान का वणर्न कीजिए। 7ण् निम्नलिख्िात पर संक्ष्िाप्त टिप्पण्िायाँ लिख्िाए - ;पद्ध मध्य हिमालय ;पपद्ध मध्य उच्च भूमि ;पपपद्ध भारत के द्वीप समूह मानचित्रा कायर् भारत के रेखा मानचित्रा पर निम्नलिख्िात दिखाइए - ;पद्ध पवर्त श्िाखर - के - 2, कंचनजंुगा, नंगा पवर्त, अनाइर्मुडी ;पपपद्ध पठार - श्िालांग, छोटानागपुर, मालवा तथा बुंदेलखंड ;पअद्ध थार मरुस्थल, पश्िचमी घाट, लक्षद्वीप समूह, गंगा - यमुना दोआब तथा कोरोमंडल तट ियाकलाप ऽ दी गइर् वगर् पहेली में वुफछ श्िाखरों, दरो±, श्रेण्िायों, पठारों, पहाडि़याँ एवं घाटियों के नाम छुपे हैं। उन्हें ढूँढिए। ऽ ज्ञात कीजिए कि ये आवृफतियाँ कहाँ स्िथत हैं? आप अपनी खोज क्षैतिज, ऊध्वार्धर या विकणीर्र्य दिशा में कर सकते हैं। नोटः पहेली के उत्तर अंग्रेज़ी के शब्दों में हैं।

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