अध्याय 14 हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहाँ जीवन विद्यमान है। पृथ्वी पर जीवन बहुत सारे कारकों पर निभर्र करता है। हम यह भी जानते हैं कि जीवन के लिए परिवेश ताप, जल तथा भोजन की आवश्यकता होती है। पृथ्वी पर उपलब्ध सभी प्रकार के जीवों कीमूल आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए सूयर् से ऊजार् तथा पृथ्वी पर उपलब्ध संपदा की आवश्यकता होती है। पृथ्वी पर ये संपदा कौन - कौन सी हैं? ये स्थल, जल एवं वायु हैं। पृथ्वी वफी सबसे बाहरी परत को स्थलमंडल कहते हैं। पृथ्वी के 75 प्रतिशत भाग पर जल है। यह भूमिगत जल के रूप में भी पाया जाता है। इन सभी को जलमंडल कहते हंै। वायु जो पूरी पृथ्वी को वंफबल के समान ढके रहती है, उसे वायुमंडल कहते हैं। जीवित पदाथर् वहीं पाए जाते हैं जहाँ ये तीनों अवयव स्िथत होते हैं। जीवन को आश्रय देने वाला पृथ्वी का यह घेरा जहाँ वायुमंडल, स्थलमंडल तथा जलमंडल एक - दूसरे से मिलकर जीवन को संभव बनाते हैं उसे जीवमंडल के नाम से जाना जाता है। सजीव, जीवमंडल के जैविक घटक को बनाते हैं। वायु, जल और मृदा जीवमंडल के निजीर्व घटक हैं। आइए अब इन अजैव घटकों जो पृथ्वी पर जीवन के संपूषण के लिए आवश्यक हैं, उनकी भूमिका वफा विस्तृत अध्ययन करते हैं। 14ण्1 जीवन की श्वासः वायु हम पहले अध्याय में वायु के घटकों के विषय में पढ़ चुके हैं। यह बहुत - सी गैसोंऋ जैसेμनाइट्रोजन, आॅक्सीजन, प्रावृफतिक संपदा ;छंजनतंस त्मेवनतबमेद्ध काबर्न डाइआॅक्साइड तथा जलवाष्प का मिश्रण है। यह जानना रुचिकर है कि पृथ्वी पर जीवन वायु के घटकों का परिणाम है। शुक्र तथा मंगल जैसे ग्रहों जहाँ कोइर् जीवन नहीं है, वायुमंडल का मुख्य घटक काबर्न डाइआॅक्साइड है। वास्तव में शुक्र तथा मंगल ग्रहों के वायुमंडल में 95 से 97 प्रतिशत तक काबर्न डाइआॅक्साइड है। यवूैफरियोेटिक कोश्िाकाओं और बहुत - सी प्रोेवैफरियोटिक कोश्िाकाओं को ग्लूकोस अणुओं को तोड़ने तथा उससेऊजार् प्राप्त करने के लिए आॅक्सीजन की आवश्यकता होती है जैसा कि हम अध्याय 5 में पढ़ चुके हैं। इसकेपरिणामस्वरूप काबर्न डाइआॅक्साइड की उत्पिा होती है। दूसरी प्रिया, जिसके परिणामस्वरूप आॅक्सीजन की खपत होती है और काबर्न डाइआॅक्साइड का उत्पादन होता है, दहन की िया है। इसमें केवल मनुष्य के वे ियाकलाप ही नहीं जो ऊजार् प्राप्त करने के लिए ईंधन को जलाते हैं बल्िक जंगलों में लगी आग भी आती है। इसके अतिरिक्त, हमारे वायुमंडल में काबर्न डाइआॅक्साइड की मात्रा 1 प्रतिशत का एक छोटा - सा भाग है क्योंकि काबर्न डाइआॅक्साइड दो वििायों से ‘स्िथर’ होती हैः ;पद्ध हरे पेड़ पौधे सूयर् की किरणों की उपस्िथति में काबर्न डाइआॅक्साइड को ग्लूकोस में बदल देते हैं तथा ;पपद्ध बहुत - से समुद्री जंतु समुद्री जल में घुले काबोर्नेट से अपने कवच बनाते हैं। 14ण्1ण्1 जलवायु के नियंत्राण में वायुमंडल की भूमिका हम जान चुके हैं कि वायुमंडल पृथ्वी को वंफबल केसमान ढके हुए है। हम जानते हैं कि वायु ऊष्मा का वुफचालक है। वायुमंडल पृथ्वी के औसत तापमान को दिन के समय और यहाँ तक कि पूरे वषर्भर लगभग नियत रखता है। वायुमंडल दिन में तापमान को अचानकबढ़ने से रोकता है और रात के समय ऊष्मा को बाहरी अंतरिक्ष में जाने की दर को कम करता है। चंद्रमा के बारे में सोचंे जो सूयर् से लगभग उतनी ही दूरी पर है जितना कि पृथ्वी । इसके बावजूद चंद्रमा की सतह, जहाँ वायुमंडल नहीं है, पर तापमान दृ190 °ब् से 110°ब् के मध्य रहता है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्1 ऽ निम्नलिख्िात वफा ताप मापिएः ;पद्ध जल से भरा एक बीकरए ;पपद्ध मृदा या बालू से भरा एक बीकर और ;पपपद्ध एक बंद बोतल लें, जिसमें थमार्मीटर लगा हो। इन सभी को सूयर् के प्रकाश में तीन घंटे तक रखें। अब तीनों बतर्नों के तापमान की माप करें। उसी समय छाया में भी तापमान को देखें। अब उत्तर दें 1ण् ;पद्ध या ;पपद्ध में से किसमें तापमान की माप अिाक है? 2ण् प्राप्त निष्कषर् के आधार पर कौन सबसे पहले गमर् होगा - स्थल या समुद्र? 3ण् क्या छाया में वायु के तापमान बालू तथा जल के तापमान के समान होगा? आप इसके कारण के बारे में क्या सोचते हैं? और तापमान को छाया में क्यों मापा जाता है? 4ण् क्या बंद बोतल या शीशे के बतर्न में लिया गया हवा का तापमान और खुले में लिया गया हवा का तापमान समान है? इसके कारण के बारे में आप क्या सोचते हैं? क्या हम प्रायः इस तरह की घटनाओं से अवगत होते हैं? जैसा कि हमने देखा बालू तथा जल एकसमान दर से गमर् नहीं होते हैं। आप उनके ठंडा होने की दर के बारे में क्या सोचते हैं? क्या हम अपने अनुमान की सत्यता के लिए एक प्रयोग कर सकते हैं? 14ण्1ण्2 वायु की गतिः पवनें हम दिनभर की गमीर् के बाद शाम को बहने वाले ठंडे समीर से राहत महसूस करते हैं। कभी - कभी कइर् दिनों तक अध्िक गमर् मौसम के पश्चात् वषार् होती है। वायु वफी गति का क्या कारण है और वे कौन - से कारक हैं जो उन्हें कभी समीर, कभी तेश हवा या कभी तूप़फान के रूप में गति प्रदान करते हैं? वषार् का क्या कारण है?ये सभी प्रियाएँ हमारे वायुमंडल में हवा के गमर् होने और जलवाष्प के बनने का परिणाम हैं। जलवाष्प जीवित प्राण्िायों के ियाकलापों और जल के गमर् होने के कारण बनती है। स्थलीय भाग या जलीय भाग से होने वाले विकिरण के परावतर्न तथा पुन£वकिरण के कारण वायुमंडल गमर् होता है। गमर् होने पर, वायु में संवहन धाराएँ उत्पन्न होती हैं। संवहन धाराओं की प्रकृति को जानने के लिए आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्2 ऽ एक मोमबत्ती को चैड़े मुँह वाली बोतल में या बीकर में रखें और उसे जलाएँ। एक अगरबत्ती को जलाएँ और उसे बोतल के मुँह के समीप ले जाएँ ;चित्रा 14.1द्ध। ऽ जब अगरबत्ती को मुँह के किनारे पर ले जाया जाता है तब अवलोकन करें कि धुआँ किस ओर जाता है? ऽ जब अगरबत्ती को मोमबत्ती के थोड़ा ऊपर रखा जाता है तब धुआँ किस ओर जाता है? ऽ दूसरे भागों में जब अगरबत्ती को रखा जाता है तो धुआँ किस ओर जाता है? धुएँ द्वारा अपनाया गया पैटनर् हमें बताता है कि किस दिशा में गमर् और ठंडी हवाएँ बहती हैं। इसी प्रकार जब वायु स्थल और जल के विकिरण के कारण गमर् होती है तब यह उफपर की ओर प्रवाह करती है। चूँकि, जल की अपेक्षा स्थल जल्दी गमर् होता है इसलिए स्थल के उफपर की वायु जल के उफपर की वायु के अपेक्षा तेशी से गमर् होगी। इसलिए अगर हम तटीय क्षेत्रों वफो दिन में देखते हैं तो पाते हैं कि स्थल के उफपर की वायु तेशी से गमर्होकर ऊपर उठना शुरू करती है। जैसे ही यह वायु उफपर की ओर उठती है, वहाँ कम दाब का क्षेत्रा बन जाता है और समुद्र के ऊपर की वायु कम दाब वाले क्षेत्रा की ओर प्रवाहित हो जाती है। एक क्षेत्रा से दूसरे क्षेत्रा में वायु की गति पवनों का निमार्ण करती है। दिन के समय हवा की दिशा समुद्र से स्थल की ओर होगी।रात के समय स्थल और समुद्र दोनों ठंडे होने लगते हैं। चँूकि स्थल की अपेक्षा जल धीरे - धीरे ठंडा होता है इसलिए जल के उफपर की वायु स्थल के उफपर की वायु से गमर् होगी। उफपर दी गइर् परिचचार् के आधार पर आप निम्न के विषय में क्या कह सकते हैंः 1ण् तटीय क्षेत्रों पर कम तथा उच्च दाब के क्षेत्रा रात में प्रतीत होते हैं? 2ण् तटीय क्षेत्रों में रात के समय वायु की दिशा क्या होगी? इसी प्रकार, हवा की सभी गतियाँ विभ्िान्न वायुमंडलीय प्रियाओं का परिणाम है जो पृथ्वी के वायुमंडल के असमान विध्ियों से गमर् होने के कारण होता है। लेकिन इन हवाओं को बहुत - से अन्य कारक भी प्रभावित करते हैं जैसे पृथ्वी की घूणर्न गति तथा पवन के मागर् में आने वाली पवर्त शृं्रखलाएँ। हम इन कारकांे के बारे में इस अध्याय में विस्तृत अध्ययन नहीं करेंगे। लेकिन इसके बारे में सोचते हैंः वैफसेहिमालय की उपस्िथति से इलाहाबाद से उत्तर की ओर प्रवाहित होने वाली वायु की दिशा परिवतिर्त हो जाती है? 14ण्1ण्3 वषार् आइए हम इस प्रश्न पर विचार करें कि बादल वैफसे बनते हैं और वषार् करते हैं। हम इसके लिए एक साधारण प्रयोग कर सकते हैं जिससे ज्ञात हो सके कि वुफछ कारक जलवायु को वैफसे प्रभावित करते हंै। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्3 ऽ एक पतले प्लास्िटक की बोतल लें। इसमें 5 से 10 उस् जल लें तथा बोतल को कस कर बंद करें। इसे अच्छी तरह हिलाएँ तथा 10 मिनट तक धूप में रखें। इससे बोतल में मौजूद वायु जलवाष्प से संतृप्त हो जाती है। ऽ अब एक जली हुइर् अगरबत्ती लें। बोतल केढक्कन को खोलें और अगरबत्ती के धुएँ की वुफछ मात्रा को बोतल के अंदर जाने दें। पुनः बोतल को कस कर बंद करें। बोतल को अपने हथेलियों के बीच में रखकर जितना शोर से हो सके दबाएँ। वुफछ समय तक प्रतीक्षा करें और बोतल को छोड़ दें। एक बार पुनः बोतल को आप जितना शोर से संभव हो सकता है दबाएँ। अब उत्तर दें 1ण् आपने कब देखा कि बोतल के अंदर स्िथत हवा वुफहरे की भाँति हो जाती है? 2ण् यह वुफहासा कब समाप्त होता है? 3ण् बोतल के अंदर दाब कब अिाक है? 4ण् वुफहासा दिखाइर् देने की स्िथति में, बोतल के अंदर का दाब कम है या अध्िक है? 5ण् इस प्रयोग के लिए बोतल के भीतर धुएँ की आवश्यकता क्यों है? 6ण् क्या होगा जब आप इस प्रयोग को बिनाअगरबत्ती के धुएँ के करेंगे? अब ऐसा प्रयत्न करें और देखें कि परिकल्पना सही थी या गलत। बहुत छोटे स्तर पर उपरोक्त प्रयोग को दोहराएँ, क्या होता है जब जलवाष्प से भरी हुइर् वायु उच्च दाब वाले क्षेत्रा से कम दाब वाले क्षेत्रा में या इसके विपरीत प्रवाहित होती है। दिन के समय जब जलीय भाग गमर् हो जातेे हैं, तब बहुत बड़ी मात्रा में जलवाष्प बन जाती है और यह वाष्प वायु में प्रवाहित हो जाती है। जलवाष्प की वुफछ मात्रा विभ्िान्न जैविक ियाओं के कारण वायुमंडल में चली जाती है। यह वायु भी गमर् हो जाती है। गमर् वायु अपने साथ जलवाष्प को लेकर उफपर की ओर उठ जाती है। जैसे ही वायु उफपर की ओर जाती है यह पैफलती है तथा ठंडी हो जाती है। ठंडा होने के कारण हवा में उपस्िथत जलवाष्प छोटी - छोटी जल वफी बूँदों के रूप में संघनित हो जाती है। जल का यह संघनन सहज होता है यदि वुफछ कण नाभ्िाक की तरह कायर् करके अपने चारों ओर बूँदों को जमा होने देते हैं। सामान्यतः वायु में उपस्िथत धूल के कण तथा दूसरे निलंबित कण नाभ्िाक के रूप में कायर् करते हैं। एक बार जब जल की बूँदें निमिर्त हो जाती हैं तो वे संघनित होने के कारण बड़ी हो जाती हैं। जब ये बूँदें बड़ी और भारी हो जाती हैं तब ये वषार् के रूप में नीचे की ओर गिरती हैं। कभी - कभी जब वायु का तापमान काप़फी कम हो जाता है तब ये हिमवृष्िट अथवा ओले के रूप में अवक्षेपित हो जाती हैं। 216 वषार् का पैटनर्, पवनों के पैटनर् पर निभर्र करता है। भारत के बहुत बड़े भू - भाग में अिाकतर वषार्दक्ष्िाण पश्िचम या उत्तर पूवीर् मानसून के कारण होती है। हमने मौसम सूचनाओं में भी सुना है कि बंगाल की खाड़ी पर वायु का दबाव कम होने के कारण कइर् क्षेत्रों में वषार् हुइर्। चित्रा 14ण्2रू भारत पर आच्छादित बादलों का उपग्रह द्वारा प्रदश्िार्त चित्रा ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्4 ऽ पूरे देश में होने वाली वषार् के पैटनर् के बारे में समाचारपत्रा या टेलीविजन के माध्यम से मौसम सूचनाओं की जानकारी एकत्रा करें। यह भी पता लगाएँ कि एक वषार् - मापक यंत्रा वैफसे बनाया जाता है और उसे बनाएँ। वषार् - मापक यंत्रा से सही डाटा प्राप्त करने के लिए कौन - कौन से सुरक्षात्मक उपाय करने आवश्यक हैं? अब निम्नलिख्िातप्रश्नों के उत्तर दें: ;पद्ध किस महीने में आपके शहर/नगर/गाँव में सबसे अिाक वषार् हुइर्? ;पपद्ध किस महीने में आपके राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में सबसे अिाक वषार् हुइर्? ;पपपद्ध क्या वषार् हमेशा बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ होती है? अगर नहीं तो किस मौसम में सबसे अिाक वषार्, बादल गरजने और बिजली चमकने के साथ होती है? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्5 ऽ पुस्तकालय से मानसून और चक्र्र्रवात के बारे में और अिाक जानकारी एकत्रा करें। किसी दूसरे विज्ञान देश की वषार् के पैटनर् का पता लगाएँ। क्या पूरेये वायु प्रदूषण की ओर संकेत करते हंै अध्ययनों से पता स लेने से ँमें सा विश्व में वषार् के लिए मानसून उत्तरदायी होता है? चलता है कि इन पदाथो± वाली वायुवैंफसर, हृदय रोग या एलजीर् जैसी बीमारियाँसंभावनाएहोने की ँ14ण्1ण्4 वायु प्रदूषण अिाक हो जाती हैं। वायु में स्िथत इन हम समाचारों में प्रायः सुनते हैं कि नाइट्रोेजन और सल्प़फर के आॅक्साइड का स्तर बढ़ रहा है। लोग प्रायः दुःख प्रकट करते हैं कि उनके बचपन से लेकर अभी तक वायुकी गुणवत्ता में कमी आइर् है। वायु की गुणवत्ता वैफसेप्रभावित होती है और इस गुणवत्ता में आए परिवतर्न हमें और दूसरे जीवों को वैफसे प्रभावित करते हैं? जीवाश्म ईंधन जैसे कोयला और पेट्रोलियम पदाथो± में नाइट्रोेजन और सल्प़फर की बहुत कम मात्रा होती है। जब ये ईंधन जलते हैं तब नाइट्रोेजन और सल्प़फर भी इसके साथ जलते हैं तथा यह नाइट्रोेजन और सल्प़फर के विभ्िान्न आॅक्साइड उत्पन्न करते हैं। इन गैसों का केवल साँस के रूप में लेना ही खतरनाक नहीं है बल्िक येे वषार् के जल में मिलकर अम्लीय वषार् भी करते हैं। जीवाश्म ईंधनों का दहन वायु में निलंबित कणों की मात्रा को भी बढ़ा देता है। ये निलंबित कण बिना जले काबर्न कण या पदाथर् हो सकते हैं जिन्हें हाइड्रोकाबर्न कहा जाता है। इन सभी प्रदूषकों की अिाक मात्रा में उपस्िथति दृश्यता को कम करती है विशेषकर सदीर् के मौसम में जब जल भी वायु के साथ संघनित होता है। इसे ध्ूम कोहरा कहते हंै तथा चित्रा 14ण्3रू लाइकेन प्रावृफतिक संपदा ृ±हानिकारक पदाथोकी वि को वायु प्रदूषण कहते हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्6 ऽ लाइकेन नामक जीव वायु में उपस्िथत सल्प़फर डाइआॅक्साइड के स्तर के प्रति अध्िक संवेदी होते हैं। जैसा कि अनुभाग 7.3.3 में बताया जा चुका है। ये प्रायः पेड़ों की छालों पर पतले हरे और सप़ेफद रंग की परत के रूप में पाए जाते हैं। यदि आपके आस - पास पेड़ों पर लाइकेन है तो उसे आप देख सकते हैं। ऽ वयस्त सड़क के समीप पेड़ पर स्िथत लाइकेन और वुफछ दूरी पर स्िथत पेड़ पर स्िथत लाइकेन की तुलना करें। ऽ सड़क के समीप स्िथत पेड़ों पर, सड़क की ओर की सतहों पर लगे लाइकेन की तुलना सड़क की विपरीत दिशा की ओर वाली सतहों पर लगे लाइकेन से करें। उफपर प्राप्त लक्षणों के आधार पर आप सड़क के किनारे या दूर प्रदूषण पैफलाने वाले पदाथो± के स्तर के विषय में क्या कह सकते हैं? श्न 1ण् शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमंडल से हमारा वायुमंडल वैफसे भ्िान्न है? 2ण् वायुमंडल एक वंफबल की तरह वैफसे कायर् करता है? प्र 3ण् वायु प्रवाह ;पवनद्ध के क्या कारण हैं? 4ण् बादलों का निमार्ण वैफसे होता है? 5ण् मनुष्य के तीन ियाकलापों का उल्लेख करें जो वायु प्रदूषण में सहायक हैं। 14ण्2 जलः एक अद्भुत द्रव जल पृथ्वी की सतह के सबसे बड़े भाग पर उपस्िथत है और यह भूमिगत भी होता है। जल की वुफछ मात्रा 217 जलवाष्प के रूप में वायुमंडल में भी पाइर् जाती है। पृथ्वी की सतह पर पाया जाने वाला अिाकतर जल समुद्र और महासागरों में है तथा यह खारा है। शु( जल बप़र्फ के रूप में दोनों ध्रुवों पर और बप़र्फ से ढके पहाड़ों पर पाया जाता है। भूमिगत जल और नदियों, झीलों और तालाबों का जल भी शु( होता है। पिफर भी इस जल की उपलब्धता विभ्िान्न स्थानों पर भ्िान्न - भ्िान्न होती है। गमीर् में अिाकतर स्थानों पर जल की कमी होती है। ग्रामीण इलाकों मंें जहाँ जल आपू£त की व्यवस्था नहीं है वहाँ लोगों का अिाकतर समय दूर से जल लाने में व्यय होता है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्7 ऽ बहुत से नगर निगम जल की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए जल - संग्रहण की तकनीकों पर कायर् कर रहे हैं। ऽ पता लगाइए ये कौन - सी तकनीक हैं तथा ये उपयोग के लिए उपलब्ध् जल की मात्रा बढ़ाने में किस प्रकार सहायक हैं। लेकिन जल इतना अिाक आवश्यक क्यों है? तथा क्या सभी प्राण्िायों को जल की आवश्यकता है? सभी कोश्िाकीय प्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं। सभी प्रतिियाएँ जो हमारे शरीर में या कोश्िाकाओं के अंदर होती हैं, वह जल में घुले हुए पदाथो± में होती हंै। शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पदाथो± का संवहन घुली हुइर् अवस्था में होता है। इसलिए जीवित प्राणी जीवित रहने के लिए अपने शरीर में जल की मात्रा को संतुलित बनाए रखते हैं। स्थलीय जीवों को जीवित रहने के लिए शु( जल की आवश्यकता होती है क्योंकि खारे जल में नमक की अिाक मात्रा होने के कारण जीवों का शरीर उसे सहन नहीं कर पाता है। इसलिए प्राण्िायों और पौधों को पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए आसानी से जल उपलब्िध् के स्रोत आवश्यक हैं। 218 ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्8 ऽ किसी नदी, तालाब या झील के समीप एक छोटे स्थान को चुनें। मान लें एक वगर्मीटर इस क्षेत्रा में पाए जाने वाले विभ्िान्न पौधों एवं जंतुओं की संख्या को गिनें। प्रत्येक स्पीशीश की अलग - अलग गणना करें। ऽ इसकी तुलना सूखे और पथरीले भाग के उतने ही बड़े क्षेत्रा में पाए जाने वाले जंतुओं और पौधों से करें। ऽ क्या दोनों क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधे और जंतु एक ही प्रकार के हैं? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ14ण्9 ऽ अपने विद्यालय के समीप या किसी प्रयोग में न आने वाली भूमि को चुनें ;लगभग एक वगर्मीटरद्ध और उसे चिित करें। ऽ उसी प्रकार उस क्षेत्रा में पाए जाने वाले विभ्िान्न जंतुओं और पौधों तथा प्रत्येक स्पीशीश के जीवों की संख्याओं की गणना करें। ऽ उसी स्थान की गणना वषर् में दो बार करें, एक बार गमीर् या सूखे मौसम में और दूसरी बार बरसात के मौसम के बाद। अब उत्तर दें 1ण् क्या दोनों बार संख्याएँ समान थीं? 2ण् किस मौसम में आपने विभ्िान्न प्रकार के पौधों और जंतुओं की अिाकता पाइर्? 3ण् प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या किस मौसम में अिाक थी? उपरोक्त दोनों ियाकलापों के परिणामों को संकलित करने के बाद आप विचार करें कि क्या जल की मात्रा की उपलब्धता का संबंध पौधों और जंतुओं के प्रकार तथा उनकी संख्या से है जो एक निश्िचत या दिए हुए स्थान में रह सकते हैं। अगर संबंध है, तो बताएँ कि आप किस क्षेत्रा में सबसे अिाक प्रकार और जीवन की उपलब्धता पाएँगे कृ 200 बउ वषार् वाले क्षेत्रा में या 5 बउ वषार् वाले क्षेत्रा में? एटलस में वषार् के पैटनर् विज्ञान 1 उ2 वाले मानचित्रा को देखें और यह बताएँ कि भारत के किस राज्य में सबसे अिाक जैव विभ्िान्नता होगी और किस राज्य में कम। अनुमान सही है या गलत इसकी जाँच करने के लिए क्या हम किसी विध्ि पर विचार कर सकते हैं? जल की उपलब्धता प्रत्येक स्पीशीश के वगर् जो कि एक विशेष क्षेत्रा में जीवित रहने में सक्षम है, की संख्या को ही निधार्रित नहीं करती है अपितु यह वहाँ के जीवन में विविधता को भी निधार्रित करती है। यद्यपि जल की उपलब्धता ही केवल एक कारक नहीं है जो उस क्षेत्रा में जीवन के लिए आवश्यक है। दूसरे कारक जैसे तापमान और मिट्टðी की प्रवृफति भी महत्वपूणर् हैं। लेकिन जल एक महत्वपूणर् संपदा है, जो जीवन को स्थल पर निधार्रित करता है। 14ण्2ण्1 जल प्रदूषण जल उन कीटनाशकों और उवर्रकों को भी घोल लेता है जिसका उपयोग हम खेतों में करते हैं। अतः इन पदाथो± का वुफछ प्रतिशत भाग जल में चला जाता है। हमारे शहर या नगर के नाले का जल और उद्योगों का कचरा भी नदियों तथा झीलों में संग्रहित हो जाता है। वुफछ विशेष उद्योगों की बहुत सारी वि्रफयाओं में शीतलता बनाए रखने के लिए जल का प्रयोग किया जाता है तथा इस प्रकार निष्पादित गमर् जल को जलाशय में वापस लौटा दिया जाता है। जब बाँध् से जल को छोड़ा जाता है तब नदियों के जल के तापमान पर भी प्रभाव पड़ता है। गहरे जलाशय के अंदर का जल सूयर् के द्वारा गमर् उफपर की सतह के जल की तुलना में शीतल होगा। अतः हम निम्नलिख्िात प्रभावों को दिखाने के लिए जल - प्रदूषण शब्द का प्रयोग करते हैं। 1ण् जलाशयों में अनैच्िछक पदाथो± का मिलना। ये पदाथर् पीड़कनाशी या उवर्रक हो सकते हैं जो खेतों में उपयोग होते हैं, या वे कागश उद्योग में प्रयुक्त होने वाले विषैले पदाथर् जैसे पारा के लवण हो सकते हैं। ये बीमारी पैफलाने वाले जीव जैसे हैशा पैफलाने वाले बैक्टीरिया भी हो सकते हैं। 2ण् इच्िछत पदाथो± को जलाशयों से हटाना। घुली हुइर् आॅक्सीजन जल में रहने वाले पौधों और जंतुओं के द्वारा उपयोग की जाती है। किसी भी तरह का परिवतर्न जो इस घुली हुइर् आॅक्सीजन की मात्रा को कम करता है उसका जलीय जीवों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जलाशय से अन्य पोषक की कमी भी हो सकती है। प्र3ण् तापमान में परिवतर्न। जलीय जीव जिस जलाशय में रहते हैं वे वहाँ के एक विश्िाष्ट तापमान के अनुवूफल होते हैं और उस तापमान में अचानक परिवतर्न उनके लिए खतरनाक होगा या प्रजनन की प्रवि्रफया को प्रभावित करेगा। विभ्िान्न प्रकार के जंतुओं के अंडे और लावार् तापमान परिवतर्न के प्रति संवेदनशील होते हैं। श्न 1ण् जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है? जिस गाव/शहर/नगर में आप रहते हैं वहापर2ण्ँँउपलब्ध शु( जल का मुख्य स्रोत क्या है? 3ण् क्या आप किसी ियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूष्िात कर रहा है? ये सभी जलाशयों में पाए जाने वाले जीवों के प्रकार को विभ्िान्न प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं। ये 14ण्3 मृदा में खनिज की प्रचुरता वुफछ जीवों की वि को प्रोत्साहित करतृको हानि पहुँचा सकते हैं। ये इस प्रणाली में उपस्िथत े हैं, तो वुफछ एक क्षेत्रा में जीवन की विविधता को निधार्रित करने विभ्िान्न जीवों के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। वाला एक महत्वपूणर् संपदा मृदा है। लेकिन मृदा ;मिट्टðीद्ध क्या है और यह वैफसे बनती है? पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को भू - पृष्ठ कहा जाता है और इस परत में पाए जाने वाले खनिज जीवों को विभ्िान्न प्रकार के पालन - पोषण करने वाले तत्व प्रदान करते हैं। लेकिन यदि ये खनिज बड़े पत्थरों के साथ संलग्न होते हैं तो ये जीवों के लिए उपलब्ध नहीं होंगे। हशारों और लाखों वषो± के लंबे समयांतराल में पृथ्वी की सतह या उसके समीप पाए जाने वाले पत्थर विभ्िान्न प्रकार के भौतिक रासायनिक और वुफछ जैव प्रव्रफमों के द्वारा टूट जाते हैं। टूटने के बाद सबसे अंत में बचा महीन कण मृदा है। लेकिन कौन - से कारक या प्रवि्रफयाएँ हैं जिनसे मृदा बनती है? ऽ सूयर्ः सूयर् दिन के समय पत्थर को गमर् कर देता है जिससे वे प्रसारित हो जाते हैं। रात के समय ये पत्थर ठंडे होते हैं और संवुफचित हो जाते हैं क्योंकि पत्थर का प्रत्येक भाग असमान रूप से प्रसारित तथा संवुफचित होता है। ऐसा बार - बार होने पर पत्थर में दरार आ जाती है तथा अंत में ये बड़े पत्थर टूट कर छोटे - छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाते हैं। ऽ जलः जल मृदा के निमार्ण में दो प्रकार से सहायता करता है। पहला सूयर् के ताप से बने पत्थरों की दरार में जल जा सकता है। यदि यह जल बाद में जम जाता है, तो यह दरार को और अिाक चैड़ा करेगा। क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा क्यों होना चाहिए? दूसरा बहता हुआ जल कठोर पत्थरों को भी तोड़ - पफोड़ देता है। तेश गति के साथ बहता हुआ जल प्रायः अपने साथ बड़े और छोटे पत्थरों को बहा कर ले जाता है। ये पत्थर दूसरे पत्थरों के साथ टकराकर छोटे - छोटे कणों में बदल जाते हैं। जल पत्थरों के इन कणों को अपने साथ ले जाता है और आगे निक्षेपित कर देता है। इस प्रकार मृदा अपने मूल पत्थर से काप़फी दूर वाले स्थान पर पाइर् जाती है। ऽ वायु: जिस प्रकार जल में पत्थर एक - दूसरे से टकराने के कारण टूटते हैं उसी प्रकार तेश हवाएँ भी पत्थरों को तोड़ देती हैं। वायु जल की ही तरह बालू को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है। ऽ जीव भी मृदा के बनने की प्रिया को प्रभावित करते हैं। लाइकेन जिसके बारे में हमने पहले पढ़ा है, पत्थरों की सतह पर भी उगते हैं। इस क्रम में वे एक पदाथर् छोड़ते हैं जो पत्थर की सतह को चूणर् के समान कर देता है और मृदा की एक पतली परत का निमार्ण करता है। अब इस सतह पर माॅस ;उवेेद्ध जैसे दूसरे छोटे पौधे उगने में सक्षम होते हैं और ये पत्थर को और अिाक तोड़ते हैं। बड़े पेड़ों की मूलें कभी - कभी पत्थरों में बनी दरारों में चली जाती हैं और वे दरार को चैड़ा कर देती हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 14ण्10 ऽ वुफछ मृदा लें तथा उसे जल से भरे बीकर में डाल दें। ली गइर् मृदा की मात्रा के लगभग पाँच गुणा जल होना चाहिए। मृदा और जल को मिलाएँ और पिफर मृदा को नीचे जमा होने दें। वुफछ समय पश्चात् अवलोकन करें। ऽ क्या बीकर के तल में मृदा समांगी है या परतों में विभाजित है? ऽ अगर परतों का निमार्ण हुआ है तो किस प्रकार एक परत दूसरे से भ्िान्न है? ऽ क्या वहाँ जल की सतह पर वुफछ तैर रहा है? ऽ क्या आप सोच सकते हैं कि वुफछ पदाथर् जल में घुल गए होंगे? आप इसे वैफसे रोकेंगे? जैसा कि आपने देखा है, मृदा एक मिश्रण है। इसमें विभ्िान्न आकार के छोटे - छोटे टुकड़े मिले होते हैं। इसमें सड़े - गले जीवों के टुकड़े भी मिले होते हैं, जिसे ह्यूमस ;ीनउनेद्ध कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, मिट्टðी में विभ्िान्न प्रकार के सूक्ष्म जीव भी मिले होते हैं। मृदा के प्रकार का निणर्य उसमें पाए जाने वाले कणों के औसत आकार द्वारा निधार्रित किया जाता है। मृदा के गुण को उसमें स्िथत ह्यूमस की मात्रा और पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों के आधार पर किया जाता है। मृदा की संरचना का मुख्य कारक ह्यूमस है क्योंकि यह मृदा को सरंध््र बनाता है और वायु तथा जल को भूमि के अंदर जाने में सहायक होता है। खनिज पोषक तत्व जो उस मृदा में पाए जाते हैं वह उन पत्थरों पर निभर्र करते हंै जिससे मृदा बनी है। किस मृदा पर कौन - सा पौधा होगा यह इस पर निभर्र करता है कि उस मृदा में पोषक तत्व कितने हंै, ह्यूमस की मात्रा कितनी है और उसकी गहराइर् क्या है। इस प्रकार, मृदा की उफपरी परत में जिसमें मृदा के कणों के अतिरिक्त ह्यूमस और सजीव स्िथत होते हंै,उसे ऊपरिमृदा कहा जाता है। उफपरिमृदा की गुणवत्ता जो उस क्षेत्रा की जैविक विविधता को निधार्रित करती है, में एक महत्वपूणर् कारक है। आधुनिक खेती में पीड़कनाशकों और उवर्रकों का बहुत बड़ी मात्रा में प्रयोग हो रहा है। लंबे समय तक इन पदाथो± का उपयोग करने से मृदा के सूक्ष्म जीव मृत हो जाते हैं और मृदा की संरचना को नष्ट कर सकते हैं जो कि मृदा के पोषक तत्वों का पुनचर्क्रण करते हैं। ह्यूमस बनाने मंे सहायक भूमि में स्िथत वेंफचुओं को भी ये समाप्त कर सकते हैं। अगरसंपूषणीय खेती नहीं की जाए तो उपजाऊ मृदा जल्द बंजर भूमि में परिवत्िार्त हो सकती है। उपयोगी घटकों का मृदा से हटना और दूसरे हानिकारक पदाथो± कामृदा में मिलना जो कि मृदा की ऊवर्रता को प्रभावित करते हैं और उसमें स्िथत जैविक विविधता को नष्ट कर देते हैं। इसे भूमि - प्रदूषण कहते हंै। मृदा जिसे हम आज एक स्थान पर देखते हैं वह लंबे समयांतराल के पश्चात् निमिर्त हुइर् है। यद्यपि, वुफछ मृदा को एक स्थान पर निमिर्त करने वाले वुफछ कारक, इसको किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरितकरने के लिए भी उत्तरदायी हो सकते हैं। मृदा के महीन कण प्रवाहित वायु या जल के साथ भी स्थानांतरित हो सकते हैं। मृदा के समस्त कणों के स्थानांतरित हो जाने पर कठोर पत्थर बाहर आ जाता है। इस प्रवि्रफया में एक महत्वपूणर् संपदा की हानिहो जाती है क्योंकि पत्थर पर ऊवर्रता नगण्य होती है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 14ण्11 ऽ एक ही तरह की दो टेª लें और उन्हें मृदा से भर दें। एक टेª में सरसों या मूंग अथवा धान या हरे चने का पौधा रोप दें और दोनों टेª में तब तक जल दें जब तक कि जिस टेªमें पौधा रोपा गया है वह पौध्े की वृि से ढक नहीं जाए। यह सुनिश्िचत करें कि दोनों टेª एक ही कोण पर झुके हों। दोनों टेª में समान मात्रा में जल इस तरह से डालंे कि जल बाहर की ओर निकल जाए ;चित्रा 14.4द्ध। ऽ टेª से बाहर जाने वाली मृदा की मात्रा का अध्ययन करें। क्या बहने वाली मृदा की मात्रा दोनों टेª में समान है? ऽ अब वुफछ उफँचाइर् से दोनों टेª में समान मात्रा में जल डालें। जितना आपने पहले डाला है उतनी ही मात्रा में जल तीन से चार बार डालें। ऽ अब मृदा की मात्रा का अध्ययन करें जो टेª से बाहर चली गइर्। क्या दोनों टेª में मृदा की मात्रा समान हंै? चित्रा 14ण्4रूबहते जल का ऊपरिमृदा ;सतह की मृदाद्ध पर प्रभाव पौधों की जड़ें मृदा के अपरदन ;मतवेपवदद्ध को रोकने में महत्वपूणर् भूमिका निभाती हैं। बड़े स्तर पर जंगलों का कटना ;जो कि पूरे विश्व में हो रहा हैद्ध न केवल जैविक विविधता को नष्ट कर रहा है बल्िकमृदा के अपरदन के लिए भी उत्तरदायी है। वनस्पति के लिए सहायक उफपरिमृदा, अपरदन की प्रवि्रफया में तीव्रता से हट सकती है। यह पहाड़ी और पवर्तों वाले भागों में त्वरित गति से होता है। मृदा के अपरदन की इस िया ;मृदा - अपरदनद्ध को रोकना बहुत कठिन है। सतह पर पाइर् जाने वाली वनस्पति, जल को परतों के अंदर जाने में महत्वपूणर् भूमिका निभाती हैं। श्न 1ण् मृदा ;मिट्टीद्ध का निमार्ण किस प्रकार होता है?ð2ण् मृदा - अपरदन क्या है? 3ण् अपरदन को रोकने और कम करने के कौन - कौन से तरीके हैं? प्र 14ण्4 जैव रासायनिक चक्रण जीवमंडल के जैविक और अजैविक घटकों के बीच का सामंजस्य जीवमंडल को गतिशील और स्िथर बनाता है। इस सामंजस्य के द्वारा जीवमंडल के विभ्िान्नघटकों के बीच पदाथर् और ऊजार् का स्थानांतरण होता है। आइए देखते हैं कि वे कौन - कौन सी ियाएँ हैं जो संतुलन को बनाए रखती हैं। 14ण्4ण्1 जलीय - चक्र आपने देखा है कि जलाशयों से जल के वाष्पीकरण और पिफर संघनन के बाद वषार् वैफसे होती है। लेकिन हमने समुद्रों और महासागरों को सूखते हुए नहीं देखा है, तो किस प्रकार जल इन जलाशयों में वापस आता है? पूरी प्रिया को, जिसके द्वारा जल, जलवाष्प बनता है और वषार् के रूप में सतह पर गिरता है औरिफर नदियों के द्वारा समुद्र में पहुँच जाता है, जलीय चक्र कहते हैं। यह चक्र उतना आसान और सरल नहीं है जैसा कि वक्तव्य से प्रतीत होता है। वह सारा जल जो पृथ्वी पर गिरता है तुरंत समुद्र में नहीं चला जाता है। इनमें से वुफछ मृदा के अंदर चला जाता है और भूजल का हिस्सा बन जाता है। वुफछ भूजल झरनों के द्वारा सतह पर आ जाता है या हम इसे अपने व्यवहार के लिए वूफपों और नलवूफपों की मदद से सतह पर लाते हैं। जीवन की विभ्िान्न प्रकियाओं में स्थलीय जीव - जंतु और पौधे जल का उपयोग करते हैं ;चित्रा 14.5द्ध। सतही जल भूजल चित्रा 14ण्5रूप्रवृफति में जलीय - चक्र आइए जलीय - चक्र में जल का क्या होता है, के एक अन्य पहलू पर विचार करते हैं। जैसा कि आप जानते हैं जल बहुत से पदाथो± को घुलाने में सक्षम है। घुलने वाले खनिजों से होकर जब जल गुजरता है तब इनमें से वुफछ खनिज जल में घुल जाते हैं। इस प्रकार नदी बहुत से पोषक तत्वों को सतह से समुद्र में ले जाती है और इनका उपयोग समुद्री जीव - जंतुआंे द्वारा किया जाता है। 14ण्4ण्2 नाइट्रोेजन - चक्र हमारे वायुमंडल का 78 प्रतिशत भाग नाइट्रोेजन गैस है। यह गैस जो जीवन के लिए आवश्यक बहुत सारे अणुओं का भाग हैऋ जैसेμप्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल, डी.एन.ए. और आर.एन.ए. तथा वुफछ विटामिन। नाइट्रोेजन चित्रा 14ण्6रू प्रवृफति में नाइट्रोेजन - चक्र दूसरे जैविक यौगिकों में भी पाया जाता हैऋ जैसेμ ऐल्केलाॅइड् तथा यूरिया। इसलिए नाइट्रोेजन सभी प्रकार के जीवों के लिए एक आवश्यक पोषक है। सभी जीवरूपों द्वारा वायुमंडल में उपस्िथत नाइट्रोजन गैस के प्रत्यक्ष उपयोग से जीवन सरल हो जाएगा। यद्यपि वुफछ प्रकार के बैक्टीरिया को छोड़कर दूसरे जीवरूप निष्िक्रय नाइट्रोेजन परमाणुओं को नाइटेªट्स तथा नाइट्राइट्स जैसे दूसरे आवश्यक अणुओं में बदलने में सक्षम नहीं हैं। ‘नाइट्रोेजन स्िथरीकरण’ करने वाले ये बैक्टीरिया या तो स्वतंत्रा रूप से रहते हैं या द्विबीजपत्राी पौधांे की वुफछ स्पीशीश के साथ पाए जाते हैं। साधारणतः ये नाइट्रोेजन को स्िथर करने वाले बैक्टीरिया पफलीदार पौधें की जड़ों में एक विशेष प्रकार की संरचना ;मूल ग्रंथ्िाकाद्ध में पाए जाते हैं। इन बैक्टीरिया के अलावा नाइट्रोेजन परमाणु नाइटेªट्स और नाइट्राइट्स मंे भौतिक ियाओं के द्वारा बदलते हैं। बिजली चमकने के समय वायु में पैदा हुआ उच्च ताप तथा दाब नाइट्रोेजन को नाइट्रोेजन के आॅक्साइड में बदल देता है। ये आॅक्साइड जल में घुलकर नाइटिªक तथा नाइट्रस अम्ल बनाते हैं और वषार् के साथ भूमि की सतह पर गिरते हैं। तब इसका उपयोग विभ्िान्न जीवरूपों द्वारा किया जाता है। नाइट्रोजन - संयोजी अणु बनाने में प्रयुक्त होने वाले रूपों के निमार्ण के पश्चात् नाइट्रोजन का क्या होता है? सामान्यतः पौधे नाइटेªट्स और नाइट्राइट्स को ग्रहण करते हैं तथा उन्हें अमीनो अम्ल में बदल देते हैं जिनका उपयोग प्रोटीन बनाने में होता है। वुफछ दूसरे जैव - रासायनिक विकल्प हैं जिनका प्रयोग नाइट्रोेजन वाले दूसरे जटिल यौगिकों को बनाने में होता है। इन प्रोटीनों और दूसरे जटिल यौगिकों का प्रयोग जंतुओं द्वारा किया जाता है। जब जंतु या पौधे की मृत्यु हो जाती है तो मिट्टðी में मौजूद अन्य बैक्टीरिया विभ्िान्न यौगिकों में स्िथत नाइट्रोेजन को नाइटेªट्स और नाइट्राइट्स में बदल देते हैं तथा अन्य तरह के बैक्टीरिया इन नाइटेªट्स एवं नाइट्राइट्स को नाइट्रोेजन तत्व में बदल देते हैं। इसी प्रकार, प्रवृफति में एक नाइट्रोेजन - चक्र होता है जिसमें नाइट्रोेजन वायुमंडल मेें अपने मूल रूप से गुजरता हुआ मृदा और जल में साधारण परमाणु के रूप में बदलता है तथा जीवित प्राण्िायों में और अिाक जटिल यौगिक के रूप में बदल जाता है। पिफर ये साधारण परमाणु के रूप में वायुमंडल में वापस आ जाता है। 14ण्4ण्3 काबर्न - चक्र काबर्न पृथ्वी पर बहुत सारी अवस्थाओं में पाया जाता हैं। यह अपने मूल रूप में हीरा और ग्रेप़फाइट में पाया जाता है। यौगिक के रूप में यह वायुमंडल में काबर्न डाइआॅक्साइड के रूप में, विभ्िान्न प्रकार के खनिजों में काबोर्नेट और हाइड्रोजन काबोर्नेट के रूप में पाया जाता है। जबकि सभी जीवरूप काबर्न आधारित अणुओंऋ जैसेμप्रोटीन, काबोर्हाइड्रेट्स, वसा, न्यूक्िलक अम्ल और विटामिन पर आधारित होते हैं। बहुत सारे जंतुओं के बाहरी और भीतरी वंफकाल भी काबोर्नेट लवणों से बने होते हंै। प्रकाशसंश्लेषण की िया जो सूयर् की उपस्िथति में उन सभी पौधें में होती है जिनमें कि क्लोरोपि़फल होता है। इस मूल िया द्वारा काबर्न जीवन के विभ्िान्न प्रकारों में समाविष्ट होता है। यह प्रिया वायुमंडल में या जल में घुले काबर्न डाइआॅक्साइड को ग्लूकोस अणुओं में बदल देती है। ये ग्लूकोस अणु या तो दूसरे पदाथो± में बदल दिए जाते हैं या ये दूसरे चित्रा 14ण्7रू प्रवृफति में काबर्न - चक्र जैविक रूप से महत्वपूणर् अणुओं के संश्लेषण केलिए ऊजार् प्रदान करते हैं ;चित्रा 14.7द्ध।जीवित प्राण्िायों को ऊजार् प्रदान करने की प्रिया में ग्लूकोस का उपयोग होता है। श्वसन की िया द्वारा ग्लूकोस को काबर्न डाइआॅक्साइड में बदलने के लिए आॅक्सीजन का प्रयोग हो भी सकता है और नहीं भी। यह काबर्न डाइआॅक्साइड वायुमंडल में वापस चली जाती है। दहन की िया जहाँ ईंधन का उपयोग खाना पकाने, गमर् करने, यातायात और उद्योगों में होता है, के द्वारा वायुमंडल में काबर्न डाइआक्साइड का प्रवेश होता है। वास्तव में, जब से औद्योगिक क्रांति हुइर् है और मानव ने बहुत बड़े पैमाने पर जीवाश्म ईंधनों को जलाना शुरू किया है तब से वायुमंडल में काबर्न डाइआॅक्साइड की मात्रा दोगुनी हो गइर् है। जल की तरह काबर्न का भी विभ्िान्न भौतिक एवं जैविक ियाओं के द्वारा पुनचर्क्रण होता है। 14ण्4ण्3 ;पद्ध ग्रीन हाउस प्रभाव ियाकलाप 14.1 में किए गए अवलोकनों का स्मरण कीजिए। शीशे ;हसंेेद्ध द्वारा उफष्मा को रोक लेने के कारण शीशे के अंदर का तापमान बाहर के तापमान से काप़फी अिाक हो जाता है। ठंडे मौसमों में ऊष्ण कटिबंधीय पौधों को गमर् रखने के लिए आवरण बनाने की प्रिया में इस अवधरणा का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के आवरण को ग्रीन हाउस कहते हैं। वायुमंडलीय प्रियाओं में भी ग्रीन हाउस होता है। वुफछ गैसें पृथ्वी से उफष्मा को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर जाने से रोकती हैं। वायुमंडल में विद्यमान इस प्रकार की गैसों में वृि संसार के औसत तापमान को बढ़ा सकती है। इस प्रकार के प्रभाव को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं। काबर्न डाइआॅक्साइड भी एक इसी प्रकार की ग्रीन हाउस गैस है। वायुमंडल में विद्यमान काबर्न डाइआॅक्साइड में वृि से वायुमंडल में उफष्मा की वृि होगी। इस प्रकार के कारणों द्वारा वैश्िवक उफष्मीकरण ;हसवइंस ूंतउपदहद्ध की स्िथति उत्पन्न हो रही है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 14ण्12 ऽ वैश्िवक ऊष्मीकरण के क्या परिणाम हो सकते हैं? ऽ वुफछ अन्य ग्रीन हाउस गैसों के नामों का भी पता लगाएँ। 14ण्4ण्4 आॅक्सीजन - चक्र आॅक्सीजन पृथ्वी पर बहुत अिाक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है। इसकी मात्रा मूल रूप में वायुमंडल में लगभग 21 प्रतिशत है। यह बड़े पैमाने पर पृथ्वी के पटल में यौगिक के रूप में तथा वायु में काबर्न डाइआॅक्साइड के रूप में भी पाइर् जाती है। पृथ्वी के पटल में यह धातुओं तथा सिल्िाकन के आॅक्साइडों के रूप में पाइर् जाती है। यह काबोर्नेट, सल्प़ेफट, नाइटेªट तथा अन्य खनिजों के रूप में भी पाइर् जाती है। यह जैविक अणुओंऋ जैसेμकाबोर्हाइड्रेट्स, प्रोटीन, न्यूक्िलक अम्ल और वसा ;अथवा लिपिडद्ध का भी एक आवश्यक घटक है। लेकिन जब हम आॅक्सीजन - चक्र के बारे में बात करते हैं तब हम मुख्यतः उस चक्र को निदेर्श्िात करते हैं जो आॅक्सीजन की मात्रा को वायुमंडल में संतुलित बनाए रखता है। वायुमंडल से आॅक्सीजन का उपयोग तीन प्रियाओं में होता है, जिनके नाम हैंः श्वसन, दहन तथा नाइट्रोेजन के आॅक्साइड के निमार्ण में। वायुमंडल में आॅक्सीजन में केवल एक ही मुख्य प्रिया, जिसे प्रकाशसंश्लेषण कहते हैं, के द्वारा लौटती है। इस प्रकार से प्रवृफति में आॅक्सीजन - चव्रफ की रूपरेखा बनती है ;चित्रा 14.8द्ध। यद्यपि हम जीवन में श्वसन की िया में आॅक्सीजन को महत्वपूणर् मानते हैं, परन्तु वुफछ जीव मुख्यतः बैक्टीरिया, तत्वीय आॅक्सीजन द्वारा शहरीले हो जाते हैं। वास्तव में, बैक्टीरिया के द्वारा नाइट्रोेजन स्िथरीकरण की प्रिया आॅक्सीजन की उपस्िथति में नहीं होती। 14ण्5 ओशोन परत तत्वीय आॅक्सीजन मूल रूप में समान्यतः द्विपरमाण्िवक अणु के रूप में पाइर् जाती है। यद्यपि, वायुमंडल के उफपरी भाग में आॅक्सीजन के तीन परमाणु वाले अणु भी पाए जाते हैं। इसका सूत्रा व् होता है तथा इसे3ओशोन कहते हैं। आॅक्सीजन के सामान्य द्विपरमाण्िवक अणु के विपरीत ओशोन विषैला होता है। हम भाग्यशाली हैं कि ओशोन पृथ्वी की सतह के नजदीक स्िथर नहीं रह पाता है। यह सूयर् से आने वाले हानिकारक विकिरणों को अवशोष्िात करती है। इस प्रकार यह उन हानिकारक विकिरणों को पृथ्वी की सतह पर पहुँचने से रोकती है जो कि कइर् जीवरूपों को हानि पहुँचा सकते हैं। हाल ही में यह पता चला कि ओशोन परत का ”ास ;अवक्षयद्ध होता जा रहा है। मनुष्य के द्वाराबनाए गए विभ्िान्न प्रकार के यौगिक जैसे क्लोरो - फ्रलोरो काबर्न ;ब्थ्ब्द्ध वायुमंडल में स्िथर अवस्था में उपस्िथत हो जाते हैं। ;ब्थ्ब्द्ध क्लोरीन तथा फ्रलोरीन युक्त काबर्न यौगिक हैं। ये बहुत स्थायी होते हैं तथा किसी जैव - प्रवि्रफया द्वारा भी विघटित नहीं होते हैं। एक बार जब वे ओशोन परत के समीप पहुँचते हैं, वे ओशोन अणुओं के साथ प्रतििया करते हैं। इसके परिणामस्वरूप ओशोन की परत में कमी आइर् और हाल ही में अंटाकर्टिका के उफपर ओशोन परत में छिद्र पाया गया। ओशोन परत के और भी अध्िक क्षीण होने के कारण पृथ्वी पर जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में कल्पना करना भी कठिन है। अतः बहुत लोगों के विचार में ओशोन की परत के क्षीण होने की प्रवि्रफया को रोकने के प्रयास आवश्यक हैं। अक्टूबर1980 अक्टूबर1985 अक्टूबर1990 चित्रा 14ण्9रू अंटाकर्टिका के उफपर ओशोन की परत में छिद्र ;मैजंेटा रंगद्ध को दिखाते उपग्रह चित्रा ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 14ण्13 ऽ यह पता लगाएँ कि और कौन से अणु हैं जो ओशोन परत को हानि पहुँचाते हैं। ऽ समाचारपत्रों में प्रायः ओशोन परत में होने वाले छिद्र की चचार् की जाती है। प्रऽ यह पता लगाएँ कि क्या छिद्र में कोइर् परिवतर्न हो रहा है। वैज्ञानिक क्या सोचते हैं कि यह किस प्रकार पृथ्वी पर जीवन को प्रभावित करेगा। श्न 1ण् जल - चक्र के क्रम में जल की कौन - कौन सी अवस्थाएँ पायी जाती हैं? 2ण् जैविक रूप से महत्वपूणर् दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें आॅक्सीजन और नाइट्रोेजन दोनों पाए जाते हों? 3ण् मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविध्ियों को पहचानें जिनसे वायु में काबर्न डाइआॅक्साइड की मात्रा बढ़ती है। 4ण् ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है? 5ण् वायुमंडल में पाए जाने वाले आॅक्सीजन के दो रूप कौन - कौन से हैं? आपने क्या सीखा ऽ पृथ्वी पर जीवन मृदा, वायु, जल तथा सूयर् से प्राप्त उफजार् जैसी संपदाओं पर निभर्र करता है। ऽ स्थल और जलाशयों के उफपर विषम रूप में वायु के गमर् होने के कारण पवनें उत्पन्न होती हैं। ऽ जलाशयों से होने वाले जल का वाष्पीकरण तथा संघनन हमें वषार् प्रदान करता है। ऽ किसी क्षेत्रा में पहले से विद्यमान वायु के रूप पर होने वाली वषार् का पैटनर् निभर्र करता है। ऽ विभ्िान्न प्रकार के पोषक तत्व चक्रीय रूपों से पुनः उपयोग किए जाते हैं जिसके कारण जैवमंडल के विभ्िान्न घटकों में एक निश्िचत संतुलन स्थापित होता है। ऽ वायु, जल तथा मृदा का प्रदूषण जीवन की गुणवत्ता और जैव विविधताओं को हानि पहुँचाता है। ऽ हमें अपनी प्रावृफतिक संपदाओं को संरक्ष्िात रखने की आवश्यकता है और उन्हें संपूषणीय रूपों में उपयोग करने की आवश्यकता है। अभ्यास 1ण् जीवन के लिए वायुमंडल क्यों आवश्यक है? 2ण् जीवन के लिए जल क्यों अनिवायर् है? 3ण् जीवित प्राणी मृदा पर वैफसे निभर्र हैं? क्या जल में रहने वाले जीव संपदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतंत्रा हैं? 4ण् आपने टेलीविशन पर और समाचारपत्रा में मौसम संबंधी रिपोटर् को देखा होगा। आप क्या सोचते हैं कि हम मौसम के पूवार्नुमान में सक्षम हैं? 5ण् हम जानते हैं कि बहुत - सी मानवीय गतिविध्ियाँवायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण - स्तर को बढ़ा रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविध्ियों को वुफछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में सहायता मिलेगी? 6ण् जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को वैफसे प्रभावित करते हैं?

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