अध्याय 10 अध्याय 8 तथा 9 में हमने वस्तुओं की गति के बारे में तथा बल को गति के कारक के रूप में अध्ययन किया है। हमने सीखा है कि किसी वस्तु की चाल या गति की दिशा बदलने के लिए बल की आवश्यकता होती है। हम सदैव देखते हैं कि जब किसी वस्तु कोऊँचाइर् से गिराया जाता है तो वह पृथ्वी की ओर ही गिरती है। हम जानते हैं कि सभी ग्रह सूयर् के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इन सभी अवस्थाओं में, वस्तुओं पर, ग्रहों पर तथा चंद्रमा पर लगने वाला कोइर् बल अवश्य होना चाहिए। आइजक न्यूटन इस तथ्य को समझ गए थेकि इन सभी के लिए एक ही बल उत्तरदायी है। इस बल को गुरुत्वाकषर्ण बल कहतेे हैं। इस अध्याय में हम गुरुत्वाकषर्ण तथा गुरुत्वाकषर्ण के सावर्त्रिाक नियम के बारे में अध्ययन करेंगे। हम पृथ्वी पर गुरुत्वाकषर्ण बल के प्रभाव के अंतगर्त वस्तुओं की गति पर विचार करेंगे। हम अध्ययन करेंगे कि किसी वस्तु का भार एक स्थान से दूसरे स्थान पर किस प्रकार परिव£तत होता है। द्रवों में वस्तुओं के प्लवन की शतो± के बारे में भी हम विचार - विमशर् करेंगे। 10ण्1 गुरुत्वाकषर्ण हम जानते हैं कि चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है।किसी वस्तु को जब ऊपर की ओर पेंफकते हैं, तो वहवुफछ ऊँचाइर् तक ऊपर पहुँचती है और पिफर नीचे की ओर गिरने लगती है। कहते हैं कि जब न्यूटन एक पेड़ के नीचे बैठे थे तो एक सेब उन पर गिरा। सेब गुरुत्वाकषर्ण ;ळतंअपजंजपवदद्ध के गिरने की िया ने न्यूटन को सोचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सोचा कि यदि पृथ्वी सेब को अपनी ओर आक£षत कर सकती है तो क्या यह चंद्रमा को आक£षत नहीं कर सकती? क्या दोनों स्िथतियों में वही बल लग रहा है? उन्होंने अनुमान लगाया किदोनों अवस्थाओं में एक ही प्रकार का बल उत्तरदायी है। उन्होंने तवर्फ दिया कि अपनी कक्षा के प्रत्येक ¯बदु पर चंद्रमा किसी सरल रेखीय पथ पर गति नहीं करता वरन् पृथ्वी की ओर गिरता रहता है। अतः वह अवश्य ही पृथ्वी द्वारा आक£षत होता है। लेकिन हम वास्तव में चंद्रमा को पृथ्वी की ओर गिरते हुए नहीं देखते। आइए चंद्रमा की गति को समझने के लिए ियाकलाप 8ण्11 पर पुनः विचार करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्1 ऽ धगे का एक टुकड़ा लीजिए। इसके एक सिरे पर एक छोटा पत्थर बाँध्िए। ऽ धगे के दूसरे सिरे को पकडि़ए और पत्थर कोवृत्ताकार पथ में घुमाइए जैसा कि चित्रा 10.1 में चित्रा 10ण्1रू पत्थर द्वारा नियत परिमाण के वेग से वृत्ताकार पथ में गति ऽ पत्थर की गति की दिशा को देख्िाए। ऽ अब धगे को छोडि़ए। ऽ पिफर से पत्थर की गति की दिशा को देख्िाए। धगे को छोड़ने से पहले पत्थर एक निश्िचतचाल से वृत्ताकार पथ में गति करता है तथा प्रत्येक ¯बदु पर उसकी गति की दिशा बदलती है। दिशा के परिवतर्न में वेग - परिवतर्न या त्वरण सम्िमलित है। जिस बल के कारण यह त्वरण होता है तथा जो वस्तुको वृत्ताकार पथ में गतिशील रखता है, वह बल वेंफद्र्र की ओर लगता है। इस बल को अभ्िावेंफद्र बल कहते हैं। इस बल की अनुपस्िथति में पत्थर एक सरल रेखा में मुक्त रूप से गतिशील हो जाता है। यह सरल रेखावृत्तीय पथ पर स्पशर् रेखा होगी। पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गति अभ्िावेंफद्र बल के कारण है। अभ्िावेंफद्र बल पृथ्वी के आकषर्ण बल के कारण मिल पाता है। यदि ऐसा कोइर् बल न हो तो चंद्रमा एकसमान गति से सरल रेखीय पथ पर चलता रहेगा। यह देखा गया है कि गिरता हुआ सेब पृथ्वी की ओर आक£षत होता है। क्या सेब भी पृथ्वी को आक£षत करता है? यदि ऐसा है, तो हम पृथ्वी को सेब की ओर गति करते क्यों नहीं देख पाते? गति के तीसरे नियम के अनुसार सेब भी पृथ्वी को आक£षत करता है। लेकिन गति के दूसरे नियम के अनुसार, किसी दिए हुए बल के लिए त्वरण वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है ख्समीकरण ;9.4द्ध,। पृथ्वी की अपेक्षा सेब का द्रव्यमान नगण्य है। इसीलिए हम पृथ्वी को सेब की ओर गति करते नहीं देखते। इसी तवर्फ का विस्तार यह जानने के लिए कीजिए कि पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती। हमारे सौर परिवार में, सभी ग्रह सूयर् की परिक्रमा करते हैं। पहले की भाँति तवर्फ करके हम कह सकते हैं कि सूयर् तथा ग्रहों के बीच एक बल विद्यमान है। उपरोक्त तथ्यों के आधर पर न्यूटन ने निष्कषर् निकाला कि केवल पृथ्वी ही सेब और चंद्रमा को आक£षत नहीं करती, बल्िक विश्व के सभी पिंड एक - दूसरे को आक£षत करते हैंं। वस्तुओं के बीच यह आकषर्ण बल गुरुत्वाकषर्ण बल कहलाता है। 10ण्1ण्1 गुरुत्वाकषर्ण का सावर्त्रिाक नियम विश्व का प्रत्येक पिंड प्रत्येक अन्य पिंड को एक बल से आक£षत करता है, जो दोनों पिंडों के द्रव्यमानों के गुणनपफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वगर् के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह बल दोनों पिंडों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में लगता है। चित्रा 10ण्2रू किन्हीं दो एकसमान पिंडों के बीच गुरुत्वाकषर्ण बल उनके वेंफद्र्रों को मिलाने वाली रेखा की दिशा में निदेश्िात होता है आइजक न्यूटन का जन्म इंग्लैंड में ग्रैंथम के निकट वूल्सथोपेर् में हुआ था। विज्ञान के इतिहास में वह प्रायः सबसे अिाक मौलिक तथा प्रभावशाली सि(ांतवादी के रूप में जाने जाते हैं। वे एक निध्र्न वृफषक परिवार मंे जन्मेआइजक न्यूटन थे। लेकिन वे खेती के काम;1642 दृ 1727द्ध में वुफशल नहीं थे। 1661 में श्िाक्षा ग्रहण करने के लिए उन्हंे कैंबि्रज विश्वविद्यालय भेज दिया गया। सन् 1665 में वैंफबि्रज में प्लेग पैफल गया और न्यूटन को एक वषर् की छुट्टðी मिल गइर्। ऐसाकहा जाता है कि इसी वषर् उनके ऊपर सेब गिरने की घटना घटित हुइर्। इस घटना ने न्यूटन को, चंद्रमा को उसकी कक्षा मंे बनाए रखने वाले बल तथा गुरुत्व बल के बीच संबंध् की संभावना की खोज करने को प्रेरित किया। इससे उन्होंने गुरुत्वाकषर्ण का सावर्त्रिाक नियम खोज निकाला। विश्िाष्ट बात यह है कि उनसे पहले भी बहुत से महान वैज्ञानिक गुरुत्व के बारे में जानते थे, किंतु वे उसके महत्व को समझने में असपफल रहे। न्यूटन ने गति के सुप्रसि( नियमों का प्रतिपादन किया। उन्होंने प्रकाश तथा रंगों के सि(ांतों पर कायर् किया। उन्होंने खगोलीय प्रेक्षणों के लिए खगोलीय दूरदशीर् की रचना की। न्यूटन एक महान गण्िातज्ञ भी थे। उन्होंने गण्िात की एक नइर् शाखा की खोज की जिसे कलन ;ब्ंसबनसनेद्ध कहते हैं। इसका उपयोग उन्होंने यह सि( करने के लिए किया कि किसी एकसमान घनत्व वाले गोले के बाहर स्िथत वस्तुओं के लिए गोले का व्यवहार इस प्रकार का होता है जैसे कि उसका संपूणर् द्रव्यमान उसके वेंफद्र्र पर स्िथत हो। न्यूटन ने अपने गति के तीन नियमों तथा गुरुत्वाकषर्ण के सावर्त्रिाक नियम से भौतिकीय विज्ञान के ढाँचे को बदल दिया। सत्राहवीं शताब्दी की प्रमुख वैज्ञानिक क्रांति के रूप में न्यूटन ने काॅपरनिकस, वैफप्लर, गैलीलियो तथा अन्य के योगदान को अपने कायो± के साथ एक नए शक्ितशाली संश्लेषण के रूप में सम्िमश्रित किया। यह एक विश्िाष्ट बात है कि उस समय तक गुरुत्वीय सि(ांत का सत्यापन नहीं हो सका था यद्यपि उसकी सत्यता के बारे में कोइर् संदेह नहीं था। इसका कारण था कि न्यूटन का सि(ांत ठोस वैज्ञानिक तको± पर आधरित था और गण्िात से उसकी पुष्िट भी की गइर् थी। इससे यह सि(ांत सरल व परिष्वृफत हो गया। ये विशेषताएँ आज भी किसी अच्छे वैज्ञानिक सि(ांत के लिए अपेक्ष्िात हैं। न्यूटन ने व्युत्क्रम वगर् नियम का अनुमान वैफसे लगाया? ग्रहों की गति के अध्ययन में सदैव से ही हमारी गहरी रुचि रही है। सोलहवीं शताब्दी तक अनेक खगोलशास्ित्रायों ने ग्रहों की गति से संबंध्ित बहुत से आँकड़े एकत्रिात कर लिए थे। जोहांस वैफप्लर ने इन आँकड़ों के आधर पर तीन नियम व्युत्पन्न किए। इन्हें वैफप्लर के नियम कहा जाता है। ये नियम इस प्रकार हैंः 1ण् प्रत्येक ग्रह की कक्षा एक दीघर्वृत्त होती हैऔर सूयर् इस दीघर्वृत्त के एक पफोकस पर होता है जैसा कि निम्न चित्रा में दिखाया गया है। इस चित्रा में सूयर् की स्िथति को व् से दशार्या गया है। 2ण् सूयर् तथा ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समय में समान क्षेत्रापफल तय करती है। इस प्रकार यदि । सेठतक गति करने में लगा समय ब् सेक् तक गति करने में लगे समय के बराबर हो तो क्षेत्रापफल व्।ठ तथा क्षेत्रापफलव्ब्क् बराबर होेंगे। 3ण् सूयर् से किसी ग्रह की औसत दूरी ;त द्ध का घन उस ग्रह के सूयर् के परितः परिक्रमण कालज् के वगर् के समानुपाती होता है। अथवा त3ध्ज्2 त्र स्िथरांक। यह जानना महत्वपूणर् क् ब् है कि ग्रहों की गति की व्याख्या करने के ठ लिए वैफप्लर कोइर् सि(ांत प्रस्तुत नहीं कर सके। न्यूटन ने ही यह दिखाया कि ग्रहों की गति का कारण गुरुत्वाकषर्ण का वह बल है जो सूयर् उन पर लगाता है। न्यूटन ने वैफप्लर के तीसरे नियम का उपयोग गुरुत्वाकषर्ण बल का परिकलन करने में किया। पृथ्वी का गुरुत्वाकषर्ण बल दूरी के साथ घटता जाता है। एक सरल तवर्फ इस प्रकार है। हम कल्पना कर सकते हैं कि ग्रहोंकी कक्षाएँ वृत्ताकार हैं। मान लीजिए कि कक्षीय वेग अ तथा ग्रह की कक्षा की त्रिाज्या त है। तब परिक्रमा करते हुए ग्रह पर लगने वाला बल, थ् अ2ध्त यदि परिक्रमण काल ज् है, तब अ त्र 2πतध्ज्ए 2अथार्त् अ त2ध्ज्2 इस संबंध् को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है अ2 ;1ध्तद्ध × ; त3ध्ज्2द्ध क्योंकि त3ध्ज्2 वैफप्लर के तीसरे नियम के अनुसार एक स्िथरांक है। अतः अ2 ;1ध्तद्ध इसे थ् अ2ध्त के साथ संयोजित करने पर हमें प्राप्त होता है, थ् 1ध् त2 ण् मान लीजिए ड तथा उ द्रव्यमान के दो पिंड । तथाठ एक - दूसरे से क दूरी पर स्िथत हैं ;चित्रा 102द्ध। मान लीजिए दोनों पिंडों के बीच आकषर्ण बल थ् है। गुरुत्वाकषर्ण के सावर्त्रिाक नियम के अनुसार, दोनों पिंडों के बीच लगने वाला बल उनके द्रव्यमानों के गुणनपफल के समानुपाती है। अथार्त्, थ्ड × उ ;10ण्1द्ध तथा दोनों ¯पडों के बीच लगने वाला बल उनके बीच की दूरी के वगर् के व्युत्क्रमानुपाती है, अथार्त्, 1 थ्2 ;10ण्2द्धक समीकरणों ;10ण्1द्ध तथा ;10ण्2द्ध से हमें प्राप्त होगा डउ थ् 2 ;10ण्3द्धक ड×उ या, ळ क2 ;10ण्4द्धथ्त्र जहाँ ळ एक आनुपातिकता स्िथरांक है और इसे सावर्त्रिाक गुरुत्वीय स्िथरांक कहते हैं। वज्र - गुणन करने पर, समीकरण ;10.4द्ध से प्राप्त होगाथ् × क 2 त्र ळ ड × उ 2थ्कया ळ ;10ण्5द्धडउ समीकरण ;10.5द्ध में बल, दूरी तथा द्रव्यमान के मात्राक प्रतिस्थापित करने पर हमें ळ के ैप् मात्राक प्राप्त होंगे जोछ उ2 ाहदृ2 है। हैनरी वैफवेंडिस ;1731 - 1810द्ध ने एक सुग्राही तुला का उपयोग करके ळ का मान ज्ञात किया। ळ का वतर्मान मान्य मान 6ण्673 × 10दृ11 छ उ2 ाहदृ2 है। हम जानते हैं कि किन्हीं भी दो वस्तुओं के बीच आकषर्ण बल विद्यमान होता है। आप अपने तथा समीप बैठे अपने मित्रा के बीच लगने वाले इस बल के मान का अभ्िाकलन कीजिए। निष्कषर् निकालिए कि आप इस बल का अनुभव क्यों नहीं करते। उदाहरण 10ण्1 पृथ्वी का द्रव्यमान 6 1024 ाह है तथा चंद्रमा का द्रव्यमान 7ण्4 1022 ाह है। यदि पृथ्वी तथा चंद्रमा के बीच की दूरी 3ण्84 105 ाउ है तो पृथ्वी द्वारा चंद्रमा पर लगाए गए बल का परिकलन कीजिए। 10दृ11ळ त्र 6ण्7 छ उ2 ाह.2 हलः पृथ्वी का द्रव्यमान, ड त्र 6 1024 ाह चंद्रमा का द्रव्यमान, उ त्र 7ण्4 1022 ाह पृथ्वी तथा चंद्रमा के बीच की दूरी, क त्र 3ण्84 105 ाउ त्र 3ण्84 105 1000 उ त्र 3ण्84 108 उ 10दृ11ळ त्र 6ण्7 छ उ2 ाहदृ2 समीकरण ;10.4द्ध से, पृथ्वी द्वारा चंद्रमा पर लगाया गया बल, ड × उ थ्त्र ळ क2 112दृ2 24 226ण्7 10 छउ ाह 610 ाह7ण्4 10 ाह ;3ण्84 108 उद्ध2 त्र 2ण्01 × 1020 छण् अतः पृथ्वी द्वारा चंद्रमा पर लगाया गया बल प्र2ण्01 × 1020 छ है। श्न 1ण् गुरुत्वाकषर्ण का सावर्त्रिाक नियम बताइए। 2ण् पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी वस्तु के बीच लगने वाले गुरुत्वाकषर्ण बल का परिमाण ज्ञात करने का सूत्रा लिख्िाए। 10ण्1ण्2 गुरुत्वाकषर्ण के सावर्त्रिाक नियम का महत्व गुरुत्वाकषर्ण का सावर्त्रिाक नियम अनेक ऐसी परिघटनाओं की सपफलतापूवर्क व्याख्या करता है जो असंब( मानी जाती थींः ;पद्ध हमें पृथ्वी से बाँध्े रखने वाला बलऋ ;पपद्ध पृथ्वी के चारों ओर चंद्रमा की गतिऋ ;पपपद्ध सूयर् के चारों ओर ग्रहों की गतिऋ तथा ;पअद्ध चंद्रमा तथा सूयर् के कारण ज्वार - भाटा। 10ण्2 मुक्त पतन मुक्त पतन का अथर् जानने के लिए आइए एक ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्2 ऽ एक पत्थर लीजिए। ऽ इसे ऊपर की ओर पेंफकिए। ऽ यह एक निश्िचत ऊँचाइर् तक पहुँचता है और तब नीचे गिरने लगता है। हम जानते हैं कि पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर आक£षत करती है। पृथ्वी के इस आकषर्ण बल को गुरुत्वीय बल कहते हैं। अतः जब वस्तुएँ पृथ्वी की ओर केवल इसी बल के कारण गिरती हैं, हम कहते हैं कि वस्तुएँ मुक्त पतन में हैं। क्या गिरती हुइर् वस्तुओं के वेग में कोइर् परिवतर्न होता है? गिरते समय वस्तुओं वफी गति की दिशा में केाइर् परिवतर्न नहीं होता। लेकिन पृथ्वी के आकषर्ण के कारण वेग के परिमाण में परिवतर्न होता है। वेग में कोइर् भी परिवतर्न त्वरण को उत्पन्न करता है। जब भी कोइर् वस्तु पृथ्वी की ओर गिरती है, त्वरण कायर् करता है। यह त्वरण पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण है। इसलिए इस त्वरण को पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण या गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। इसे श्हश् से नि£दष्ट करते हैं।ह के मात्राक वही हैं जो त्वरण के हैं, दृ2।अथार्त् उ ेगति के दूसरे नियम से हमें ज्ञात है कि बल द्रव्यमान तथा त्वरण का गुणनपफल है। मान लीजिए ियाकलाप 10.2 में पत्थर का द्रव्यमान उ है। हम पहले से ही जानते हैं कि मुक्त रूप से गिरती वस्तुओं में गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण लगता है और इसे ह से नि£दष्ट करते हैं। इसलिए गुरुत्वीय बल का परिमाण थ्ए द्रव्यमान तथा गुरुत्वीय त्वरण के गुणनपफल के बराबर होगा, अथार्त् थ् त्र उ ह ;10ण्6द्ध समीकरण ;10ण्4द्ध तथा ;10ण्6द्ध से हमें प्राप्त होता है डउ उहत्रळ क2 डया ळ क2 ;10ण्7द्धहत्र जहाँ पर ड पृथ्वी का द्रव्यमान है तथा क वस्तु तथा पृथ्वी के बीच की दूरी है। मान लीजिए एक वस्तु पृथ्वी पर या इसकी सतह के पास है। समीकरण ;10ण्7द्ध में दूरी कए पृथ्वी की त्रिाज्या त् के बराबर होगी। इस प्रकार पृथ्वी की सतह पर या इसके समीप रखी वस्तुओं के लिए ड×उ उहत्रळ 2 ;10ण्8द्धत् ड हत्रळ 2 ;10ण्9द्धत् पृथ्वी एक पूणर् गोला नहीं है। पृथ्वी की त्रिाज्याध्ु्रवों से विषुवत वृत्त की ओर जाने पर बढ़ती है, इसलिए ह का मान ध््रुवों पर विषुवत वृत्त की अपेक्षा अध्िक होता है। अध्िकांश गणनाओं के लिए पृथ्वी की सतह पर या इसके पास ह के मान को लगभग स्िथर मान सकते हैं लेकिन पृथ्वी से दूर की वस्तुओं के लिए पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण समीकरण ;10ण् 7द्ध से ज्ञात किया जा सकता है। 10ण्2ण्1 गुरुत्वीय त्वरणह के मान का परिकलन गुरुत्वीय त्वरण ह के मान का परिकलन करने के लिए हमें समीकरण ;10ण्9द्ध में ळए ड तथा त् के मान रखने होंगे। जैसे, सावर्त्रिाक गुरुत्वीय नियतांक,ळ त्र 6ण्7 × 10दृ11 छ उ2 ाह.2ए पृथ्वी का द्रव्यमान, ड त्र 6 × 1024 ाहए तथा पृथ्वी की त्रिाज्या, त् त्र 6ण्4 × 106 उ ड हत्रळ त्2 दृ11 2दृ2 246ण्7 10 छउ ाह 610 ाहत्र ;6ण्4 106 उद्ध2 त्र 9ण्8 उ ेदृ2 अतः पृथ्वी के गुरुत्वीय त्वरण का मान ह त्र 9ण्8 उ ेदृ2 10ण्2ण्2 पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के प्रभाव में वस्तुओं की गति यह समझने के लिए कि क्या सभी वस्तुएँ खोखलीया ठोस, बड़ी या छोटी, किसी ऊँचाइर् से समान दर से गिरेंगी, आइए एक ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्3 ऽ कागश की एक शीट तथा एक पत्थर लीजिए। ऽ दोनों को किसी इमारत की पहली मंजिल से एक साथ गिराइए। देख्िाए, क्या दोनों ध्रती पर एक साथ पहुँचते हैं। ऽ हम देखते हैं कि कागश ध्रती पर पत्थर की अपेक्षा वुफछ देर से पहुँचता है। ऐसा वायु के प्रतिरोध् के कारण होता है। गिरती हुइर् गतिशील वस्तुओं पर घषर्ण के कारण वायु प्रतिरोध् लगाती है। कागश पर लगने वाला वायु का प्रतिरोध् पत्थर पर लगने वाले प्रतिरोध् से अध्िक होता है। इस प्रयोग को यदि हम काँच के शार में करें जिसमें से हवा निकाल दी गइर् है तो कागश तथा पत्थर एक ही दर से नीचे गिरेंगे। हम जानते हैं कि मुक्त पतन में वस्तु त्वरण का अनुभव करती है। समीकरण ;10ण्9द्ध से, वस्तु द्वारा अनुभव किया जाने वाला यह त्वरण इसके द्रव्यमान पर निभर्र नहीं करता। इसका अथर् हुआ कि सभी वस्तुएँ खोखली या ठोस, बड़ी या छोटी, एक ही दर से नीचे गिरनी चाहिए। एक कहानी के अनुसार, इस विचार की पुष्िट के लिए गैलीलियो ने इटली में पीसा की झुकी हुइर् मीनार से विभ्िान्न वस्तुओं को गिराया। क्योंकि पृथ्वी के निकट ह का मान स्िथर है, अतः एकसमान त्वरित गति के सभी समीकरण, त्वरण ं के स्थान पर ह रखने पर भी मान्य रहेंगे ;देख्िाए अनुभाग 8.5द्ध। ये समीकरण हैं: अ त्र न ़ ंज ;10ण्10द्ध 1 े त्र नज ़ ंज2 ;10ण्11द्ध2अ2 त्र न2 ़ 2ंे ;10ण्12द्ध यहाँ न एवंअ क्रमशः प्रारंभ्िाक एवं अंतिम वेग तथा े वस्तु द्वारा ज समय में चली गइर् दूरी है। इन समीकरणों का उपयोग करते समय, यदि त्वरण ;ंद्ध वेग की दिशा में अथार्त् गति की दिशा में लग रहा हो तो हम इसको ध्नात्मक लेंगे। त्वरण ;ंद्ध को )णात्मक लेंगे जब यह गति की दिशा के विपरीत लगता है। उदाहरण 10ण्2 एक कार किसी कगार से गिर कर 0ण्5 े में ध्रती पर आ गिरती है। परिकलन में सरलता के लिए ह का मान 10 उ ेदृ2 लीजिए। ;पद्ध ध्रती पर टकराते समय कार की चाल क्या होगी? ;पपद्ध 0ण्5 े के दौरान इसकी औसत चाल क्या होगी? ;पपपद्ध ध्रती से कगार कितनी ऊँचाइर् पर है? हलः समय, ज त्र 0ण्5 े प्रारंभ्िाक वेग, न त्र 0 उ ेदृ1 गुरुत्वीय त्वरण, ह त्र 10 उ ेदृ2 कार का त्वरण, ं त्र ़ 10 उ ेदृ2 ;अधेमुखीद्ध ;पद्ध चाल अत्र ं ज अ त्र 10 उ ेदृ2 × 0ण्5 े त्र 5 उ ेदृ1 ;पपद्ध औसत चाल त्र ऩअ 2 त्र ;0 उ ेदृ1़ 5 उ ेदृ1द्धध्2 त्र 2ण्5 उ ेदृ1 ;पपपद्ध तय की गइर् दूरी, े त्र ) ं ज2 त्र) × 10 उ ेदृ2 × ;0ण्5 ेद्ध 2 त्र ) × 10 उ ेदृ2 × 0ण्25 े 2 त्र 1ण्25 उ अतः, ;पद्ध ध्रती पर टकराते समय इसकी चाल त्र 5 उ ेदृ1 ;पपद्ध 0ण्5 सेवंफड के दौरान इसकी औसत चाल त्र 2ण्5 उ ेदृ1 ;पपपद्ध ध्रती से कगार की ऊँचाइर् त्र 1ण्25 उ उदाहरण 10ण्3 एक वस्तु को ऊध्वार्ध्र दिशा मेंऊपर की ओर पेंफका जाता है और यह 10 उ की ऊँचाइर् तक पहुँचती है। परिकलन कीजिए ;पद्ध वस्तु कितने वेग से ऊपर पेंफकी गइर् तथा ;पपद्ध वस्तु द्वारा उच्चतम ¯बदु तक पहुँचने में लिया गया समय। हलः तय की गइर् दूरी, े त्र 10 उ अंतिम वेग, अ त्र 0 उ ेदृ1 गुरुत्वीय त्वरण, ह त्र 9ण्8 उ ेदृ2 वस्तु का त्वरण, ं त्र दृ9ण्8 उ ेदृ2 ;ऊध्वर्मुखीद्ध ;पद्ध अ2 त्रन2 ़ 2ं े 0 त्र न2 ़ 2 × ;दृ9ण्8 उ ेदृ2द्ध × 10 उ उ2 ेदृ2दृन2त्र दृ2 × 9ण्8 × 10 न त्र 196 उ े.1 न त्र 14 उ े.1 ;पपद्ध अ त्र न ़ ं ज 0 त्र 14 उ ेदृ1 दृ 9ण्8 उ ेदृ2 × ज ज त्र 1ण्43 ेण् अतः, ;पद्ध प्रारंभ्िाक वेग न त्र 14 उ ेदृ1 तथा ;पपद्ध लिया गया समय ज त्र 1ण्43 े प्रश्न 1ण् मुक्त पतन से आप क्या समझते हैं? 2ण् गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं? 10ण्3 द्रव्यमान हमने पिछले अध्याय में पढ़ा है कि किसी वस्तु का द्रव्यमान उसके जड़त्व की माप होता है ;अनुभाग 9ण्3द्ध। हमने यह भी सीखा है कि जितना अध्िक वस्तु का द्रव्यमान होगा, उतना ही अध्िक उसका जड़त्व भी होगा। किसी वस्तु का द्रव्यमान उतना ही रहता है चाहे वस्तु पृथ्वी पर हो, चंद्रमा पर हो या पिफर बाह्य अंतरिक्ष में हो। इस प्रकार वस्तु का द्रव्यमान स्िथर रहता है तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं बदलता। 10ण्4 भार हम जानते हैं कि पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को एक निश्िचत बल से आक£षत करती है और यह बल वस्तु के द्रव्यमान ;उद्ध तथा पृथ्वी के गुरुत्वीय बल के कारण त्वरण ;हद्ध पर निभर्र है। किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे यह पृथ्वी की ओर आक£षत होती है। हमें ज्ञात है कि थ् त्र उ × ं ;10ण्13द्ध अथार्त् थ् त्र उ × ह ;10ण्14द्ध वस्तु पर पृथ्वी का आकषर्ण बल वस्तु का भार कहलाता है। इसेॅ से नि£दष्ट करते हैं। इसे समीकरण ;10ण्14द्ध में प्रतिस्थापित करने पर ॅ त्र उ × ह ;10ण्15द्ध क्योंकि वस्तु का भार एक बल है जिससे यह पृथ्वी की ओर आक£षत होता है, भार का ैप् मात्राक वही है जो बल का है, अथार्त् न्यूटन;छद्ध। भार एकबल है जो ऊध्वार्ध्र दिशा में नीचे की ओर लगता है, इसलिए इसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं। हम जानते हैं कि किसी दिए हुए स्थान पर ह का मान स्िथर रहता है। इसलिए किसी दिए हुए स्थान पर, वस्तु का भार वस्तु के द्रव्यमान उ के समानुपाती होता है। अथार्त् ॅ उ । यही कारण है कि किसी दिए हुए स्थान पर हम वस्तु के भार को उसके द्रव्यमान की माप के रूप में उपयोग कर सकते हैं। किसी वस्तु का द्रव्यमान प्रत्येक स्थान पर, चाहे पृथ्वी पर या किसी अन्य ग्रह पर, उतना ही रहता है जबकि वस्तु का भार इसके स्थान पर निभर्र करता है। 10ण्4ण्1 किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार हमने सीखा है कि पृथ्वी पर किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे पृथ्वी उस वस्तु को अपनी ओर आक£षत करती है। इसी प्रकार, चंद्रमा पर किसी वस्तु का भार वह बल है जिससे चंद्रमा उस वस्तु को आक£षत करता है। चंद्रमा का द्रव्यमान पृथ्वी की अपेक्षा कम है। इस कारण चंद्रमा वस्तुओं पर कम आकषर्ण बल लगाता है। मान लीजिए किसी वस्तु का द्रव्यमान उ है तथा चंद्रमा पर इसका भार ॅ है। मान लीजिए चंद्रमा काउ द्रव्यमान ड है तथा इसकी त्रिाज्या त् है।उउ गुरुत्वाकषर्ण का सावर्त्रिाक नियम लगाने पर, चंद्रमा पर वस्तु का भार होगा डउ ॅउ ळ उ 2 ;10ण्16द्धत्उ मान लीजिए उसी वस्तु का पृथ्वी पर भार ॅ है।म पृथ्वी का द्रव्यमान ड तथा इसकी त्रिाज्या त् है। समीकरणों ;10ण्9द्ध तथा ;10ण्15द्ध से हमें प्राप्त होता है, डउ ॅ ळ म 2 ;10ण्17द्धत् समीकरण ;10ण्16द्ध तथा ;10ण्17द्ध में सारणी 10ण्1 से उपयुक्त मान रखने पर 7ण्36 1022ाह उ ॅउ ळ2 1ण्74 106उ 10ॅउ 2ण्43110ळ × उ ;10ण्18ंद्ध 11तथा ॅम 1ण्474 10 ळ × उ ;10ण्18इद्ध समीकरण ;10ण्18ंद्ध को समीकरण ;10ण्18इद्ध से भाग देने पर हमें प्राप्त होता है ॅ 2ण्431 1010 उ ॅ 1ण्474 1011 म ॅया उत्र 0ण्165 ≈ 1 ;10ण्19द्धॅम 6 वस्तु का चदंम्र ा पर भार 1 त्र वस्तु का पथ्ृ वी पर भार 6 वस्तु का चंद्रमा पर भार त्र ;1ध्6द्ध × इसका पृथ्वी पर भार उदाहरण 10ण्4 एक वस्तु का द्रव्यमान 10 ाह है। पृथ्वी पर इसका भार कितना होगा? हलः द्रव्यमान उ त्र 10 ाह गुरुत्वीय त्वरण ह त्र 9ण्8 उ े.2 ॅ त्र उ × ह ॅ त्र 10 ाह × 9ण्8 उ े.2 त्र 98 छ अतः वस्तु का भार 98 छ है। उदाहरण 10ण्5 एक वस्तु का भार पृथ्वी की सतह पर मापने पर 10 छ आता है। इसका भार चंद्रमा की सतह पर मापने पर कितना होगा? हल: हमें ज्ञात है चंद्रमा पर वस्तु का भार त्र ;1ध्6द्ध × पृथ्वी पर इसका भार अथार्त्, ॅम 10 उत्र छॅत्र 66 त्र 1ण्67 छ अतः चंद्रमा की सतह पर वस्तु का भार 1ण्67 प्रछ होगा। श्न 1ण् किसी वस्तु के द्रव्यमान तथा भार में क्या अंतर है? 2ण् किसी वस्तु का चंद्रमा पर भार पृथ्वी पर 1इसके भार का 6 गुणा क्यों होता है? 10ण्5 प्रणोद तथा दाब क्या कभी आपने सोचा है कि ऊँट रेगिस्तान में आसानी से क्यों दौड़ पाता है? सेना का टैंक जिसका भार एक हजार टन से भी अध्िक होता है, एक सतत् चेन पर क्यों टिका होता है? किसी ट्रक या बस के टायर अध्िक चैड़े क्यों होते हैं? काटने वाले औजारों की धर तेश क्यों होती है?इन प्रश्नों का उत्तर जानने के लिए तथा इनमें शामिल परिघटनाओं को समझने के लिए दी गइर् वस्तु पर एक विशेष दिशा में लगने वाले नेट बल ;प्रणोदद्ध तथा प्रति एकांक क्षेत्रापफल पर लगने वाले बल ;दाबद्ध की धरणा से परिचय कराना सहायक होगा। प्रणोद तथा दाब का अथर् समझने के लिए आइए निम्नलिख्िात स्िथतियों पर विचार करें: स्िथति 1 रू किसी बुलेटिन बोडर् पर आप एक चाटर् लगाना चाहते हैं जैसा कि चित्रा 10ण्3 में दशार्या गया है। यह कायर् करने के लिए आपको ड्राइंग पिनों को अपने अँगूठे से दबाना होगा। इस अवस्था में आप पिन के शीषर् ;चपटे भागद्ध के सतह के क्षेत्रापफल पर बल लगाते हैं। यह बल बोडर् की सतह ;पृष्ठद्ध के लंबवत् लगता है। यह बल पिन की नोक पर अपेक्षावृफत छोटे क्षेत्रापफल पर लगता है। चित्रा 10ण्3रू चाटर् लगाने के लिए ड्राइंग पिनों को अँगूठे सेबोडर् के लंबवत् दबाया जाता है स्िथति 2 रू आप श्िाथ्िाल ;ढीलेद्ध रेत पर खड़े होते हैं। आपके पैर रेत में गहरे ध्ँस जाते हैं। अब रेत पर लेटिए। आप देखेंगे कि आपका शरीर रेत में पहले जितना नहीं ध्ँसता। दोनों अवस्थाओं में रेत पर लगने वाला बल आपके शरीर का भार है।आप पढ़ चुके हैं कि भार ऊध्वार्ध्र दिशा में नीचे की ओर लगने वाला बल है। यहाँ बल रेत की सतह के लंबवत् लग रहा है। किसी वस्तु की सतह के लंबवत् लगने वाले बल को प्रणोद कहते हैं। जब आप श्िाथ्िाल रेत पर खड़े होते हैं तो बल अथार्त् आपके शरीर का भार, आपके पैरों के क्षेत्रापफल के बराबर क्षेत्रापफल पर लग रहा होता है। जब आप लेट जाते हैं तो वही बल आपके पूरे शरीर के संपवर्फ क्षेत्रापफल के बराबर क्षेत्रापफल पर लगता है जो कि आपके पैरों के क्षेत्रापफल से अध्िक है। इस प्रकार समान परिमाण के बलों का भ्िान्न - भ्िान्न क्षेत्रापफलों पर भ्िान्न - भ्िान्न प्रभाव होता है। उपरोक्त स्िथति में प्रणोद समान है। लेकिन उसके प्रभाव अलग - अलग हैं। इसलिए प्रणोद का प्रभाव उस क्षेत्रापफल पर निभर्र है जिस पर कि वह लगता है। रेत पर प्रणोद का प्रभाव लेटे हुए की अपेक्षा खड़े होने की स्िथति में अध्िक है। प्रति एकांक क्षेत्रापफल पर लगने वाले प्रणोद को दाब कहते हैं। इस प्रकार प्रणोददाब त्र ;10ण्20द्धक्षत्रेापफल समीकरण ;10ण्20द्ध में प्रणोद तथा क्षेत्रापफल के ैप् मात्राक प्रतिस्थापित करने पर हमें दाब का ैप् मात्राक प्राप्त होता है। यह मात्राक छध्उ2 याछ उदृ2 है। वैज्ञानिक ब्लैस पास्कल के सम्मान में, दाब के ैप् मात्राक को पास्कल कहते हैं, जिसे च्ं से व्यक्त किया जाता है। विभ्िान्न क्षेत्रापफलों पर लगने वाले प्रणोद के प्रभाव को समझने के लिए आइए एक संख्यात्मक उदाहरण पर विचार करें। उदाहरण 10ण्6 एक लकड़ी का गुटका मेज पर रखा है। लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान5 ाह है तथा इसकी विमाएँ40 बउ × 20 बउ × 10 बउ चित्रा 10ण्4 हैं। लकड़ी के टुकड़े द्वारा मेज पर लगने वाले दाब को ज्ञात कीजिए, यदि इसकी निम्नलिख्िात विमाओं की सतह मेज पर रखी जाती हैः ;ंद्ध 20 बउ × 10 बउ तथा ;इद्ध 40 बउ × 20 बउ। हलः लकड़ी के गुटके का द्रव्यमान त्र 5 ाह तथा इसकी विमाएँत्र 40 बउ × 20 बउ × 10 बउ यहाँ लकड़ी के गुटके का भार मेज की सतह पर प्रणोद लगाता है। अथार्त्,प्रणोद त्र थ्त्र उ× ह त्र 5 ाह × 9ण्8 उ ेदृ2 त्र 49 छ सतह का क्षेत्रापफल त्र लंबाइर् × चैड़ाइर् त्र 20 बउ × 10 बउ त्र 200 बउ2 त्र 0ण्02 उ2 समीकरण ;10ण्20द्ध से, 49छदाब त्र 0ण्02 उ 2 त्र 2450 छ उदृ2ण् जब गुटके की 40 बउ × 20 बउ विमाओं की सतह मेज पर रखी जाती है, यह मेज की सतह पर पहले जितना ही प्रणोद लगाता है। क्षेत्रापफल त्र लंबाइर् × चैड़ाइर् त्र 40 बउ × 20 बउ त्र 800 बउ2 त्र 0ण्08 उ2 समीकरण ;10ण्20द्ध से, 49 छदाब त्र 0ण्08 उ 2 त्र 612ण्5 छ उदृ2 सतह 20 बउ × 10 बउ द्वारा लगाया गया दाब 2450 छ उदृ2 है तथा सतह 40 बउ × 20 बउ द्वारा लगाया गया दाब 612ण्5 छ उदृ2 है। इस प्रकार वही बल जब छोटे क्षेत्रापफल पर लगता है तो अध्िक दाब तथा बड़े क्षेत्रापफल पर कम दाब लगाता है। यही कारण है कि कीलों के सिरे नुकीले होते हैं, चावूफ की तेश धर होती है तथा भवनों की नींव चैड़ी होती है। 10ण्5ण्1 तरलों में दाब सभी द्रव या गैसंे तरल हैं। ठोस अपने भार के कारण किसी सतह पर दाब लगाता है। इसी प्रकार, तरलों में भी भार होता है तथा वे जिस बतर्न में रखे जाते हैं उसके आधर तथा दीवारों पर दाब लगाते हैं। किसी परिरु( द्रव्यमान के तरल पर लगने वाला दाब सभी दिशाओं में बिना घटे संचरित हो जाता है। 10ण्5ण्2 उत्प्लावकता क्या आप कभी किसी तालाब में तैरे हैं और आपने स्वयं वुफछ हलका अनुभव किया है? क्या कभी आपने किसी वुफएँ से पानी खींचा है और अनुभव किया है कि जब पानी से भरी बाल्टी, वुफएँ के पानी से बाहर आती है तो वह अध्िक भारी लगती है? क्या कभी आपने सोचा है कि लोहे तथा स्टील से बना जलयान समुद्र के पानी में क्यों नहीं डूबता, लेकिन उतनी ही मात्रा का लोहा तथा स्टील यदि चादर के रूप में हो तो क्या वह डूब जाएगा? इन सभी प्रश्नोंका उत्तर जानने के लिए उत्प्लावकता के बारे में जानना आवश्यक है। उत्प्लावकता का अथर् समझने के लिए आइए एक ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्4 ऽ प्लास्िटक की एक खाली बोतल लीजिए। बोतल के मुँह को एक वायुरु( डाट से बंद कर दीजिए। इसे एक पानी से भरी बाल्टी में रख्िाए। आप देखेंगे कि बोतल तैरती है। ऽ बोतल को पानी में ध्केलिए। आप ऊपर की ओर एक ध्क्का महसूस करते हैं। इसे और अध्िक नीचे ध्केलने का प्रयत्न कीजिए। आप इसे और अध्िक गहराइर् में ध्केलने में कठिनाइर् अनुभव करेंगे। यह दिखाता है कि पानी बोतलपर ऊपर की दिशा में एक बल लगाता है। जैसे - जैसे बोतल को पानी में ध्केलते जाते हैं,पानी द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल बढ़ता जाता है जब तक कि बोतल पानी में पूरी तरह न डूब जाए। ऽ अब बोतल को छोड़ दीजिए। यह उछलकर सतह पर वापस आती है। ऽ क्या पृथ्वी का गुरुत्वाकषर्ण बल इस बोतल पर कायर्रत है? यदि ऐसा है तो बोतल छोड़ देने पर पानी में डूबी ही क्यों नहीं रहती? आप बोतल को पानी में वैफसे डुबो सकते हैं? पृथ्वी का गुरुत्वाकषर्ण बल बोतल पर नीचे की दिशा में लगता है। इसके कारण बोतल नीचे की दिशामें ¯खचती है। लेकिन पानी बोतल पर ऊपर की ओर बल लगाता है। अतः बोतल ऊपर की दिशा में धकेली जाती है। हम पढ़ चुके हैं कि वस्तु का भार पृथ्वी के गुरुत्वाकषर्ण बल के बराबर है। जब बोतल डुबोइर् जाती है तो बोतल पर पानी द्वारा लगने वालाऊपर की दिशा में बल इसके भार से अध्िक है।इसीलिए छोड़ने पर यह ऊपर उठती है। बोतल को पूरी तरह डुबोए रखने के लिए, पानीके द्वारा बोतल पर ऊपर की ओर लगने वाले बल को संतुलित करना पड़ेगा। इसे नीचे की दिशा में लगने वाले एक बाहरी बल को लगाकर प्राप्त किया जा सकता है। यह बल कम से कम ऊपर की ओर लगने वाले बल तथा बोतल के भार के अंतर के बराबर होना चाहिए।बोतल पर पानी द्वारा ऊपर की ओर लगने वाला बल उत्प्लावन बल कहलाता है। वास्तव में किसी तरल में डुबोने पर, सभी वस्तुओं पर एक उत्प्लावन बल लगता है। उत्प्लावन बल का परिमाण तरल के घनत्व पर निभर्र है। 10ण्5ण्3 पानी की सतह पर रखने पर वस्तुएँ तैरती या डूबती क्यों हैं? इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिए आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्5 ऽ पानी से भरा एक बीकर लीजिए। ऽ एक लोहे की कील लीजिए और इसे पानी की सतह पर रख्िाए। ऽ देख्िाए क्या होता है? कील डूब जाती है। कील पर लगने वाला पृथ्वी वफा गुरुत्वाकषर्ण बल इसे नीचे की ओर खींचता है।पानी कील पर उत्प्लावन बल लगाता है जो इसे ऊपर की दिशा में ध्केलता है। लेकिन कील पर नीचे की ओर लगने वाला बल, कील पर पानी द्वारा लगाए गए उत्प्लावन बल से अध्िक है। इसलिए यह डूब जाती है ;चित्रा 10ण्5द्ध। चित्रा 10ण्5रू पानी की सतह पर रखने पर लोहे की कील डूब जाती है तथा काॅवर्फ तैरता है ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्6 ऽ पानी से भरा बीकर लीजिए। ऽ एक कील तथा समान द्रव्यमान का एक काॅवर्फ का टुकड़ा लीजिए। ऽ इन्हें पानी की सतह पर रख्िाए। ऽ देख्िाए क्या होता है। काॅवर्फ तैरता है जबकि कील डूब जाती है। ऐसा उनके घनत्वों में अंतर के कारण होता है। किसी पदाथर् का घनत्व, उसके एकांक आयतन के द्रव्यमान को कहते हैं। काॅवर्फ का घनत्व पानी के घनत्व से कम है। इसका अथर् है कि काॅवर्फ पर पानी का उत्प्लावन बल, काॅवर्फ के भार से अध्िक है। इसीलिए यह तैरता है ;चित्रा 10ण्5द्ध। लोहे की कील का घनत्व पानी के घनत्व से अध्िक है। इसका अथर् है कि लोहे की कील पर पानी का उत्प्लावन बल लोहे की कील के भार से कम है। इसीलिए यह डूब जाती है। इस प्रकार द्रव के घनत्व से कम घनत्व की वस्तुएँ द्रव पर तैरती हैं। द्रव के घनत्व से अध्िक घनत्व की वस्तुएँ द्रव में डूब जाती हैं। श्न 1ण् एक पतली तथा मजबूत डोरी से बने पट्टेð की सहायता से स्वूफल बैग को उठाना कठिन होता है, क्यों?प्र2ण् उत्प्लावकता से आप क्या समझते हैं? 3ण् पानी की सतह पर रखने पर कोइर् वस्तु क्यों तैरती या डूबती है? 10ण्6 आ£कमीडीश का सि(ंात ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ10ण्7 ऽ एक पत्थर का टुकड़ा लीजिए और इसे कमानीदार तुला या रबड़ की डोरी के एक सिरे से बाँध्िए। ऽ तुला या डोरी को पकड़ कर पत्थर को लटकाइए जैसा कि चित्रा 10ण्6;ंद्ध में दिखाया गया है। ऽ पत्थर के भार के कारण रबड़ की डोरी की लंबाइर् में वृि या कमानीदार तुला का पाठ्यांक नोट कीजिए। ऽ अब पत्थर को एक बतर्न में रखे पानी में ध्ीरे से डुबोइए जैसा कि चित्रा 10ण्6;इद्ध में दिखाया गया है। ऽ पे्रक्षण कीजिए कि डोरी की लंबाइर् में या तुला की माप में क्या परिवतर्न होता है। ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 10ण्6रू ;ंद्ध हवा में लटके पत्थर के टुकड़े के भार के कारण रबड़ की डोरी में प्रसार का प्रेक्षण कीजिए। ;इद्ध पत्थर को पानी में डुबोने पर डोरी के प्रसार में कमी आ जाती है आप देखेंगे कि जैसे ही पत्थर को ध्ीरे - ध्ीरे पानी में नीचे ले जाते हैं, डोरी की लंबाइर् में या तुला के पाठ्यांक में भी कमी आती है। तथापि, जब पत्थर पानी में पूरी तरह डूब जाता है तो उसके बाद कोइर् परिवतर्न नहीं दिखाइर् देता। डोरी के प्रसार या तुला की माप में कमी से आप क्या निष्कषर् निकालते हैं? हम जानते हैं कि रबड़ की डोरी की लंबाइर् में परिवतर्न या तुला के पाठ्यांक में वृि, पत्थर के भार के कारण होती है। क्योंकि पत्थर को पानी में डुबोने पर इन वृियों में कमी आ जाती है, इसका अथर् हैकि पत्थर पर ऊपर की दिशा में कोइर् बल लगता है। इसके परिणामस्वरूप, रबड़ की डोरी पर लगने वाला नेट बल कम हो जाता है और इसीलिए लंबाइर् की वृि में भी कमी आ जाती है। जैसी कि पहले ही चचार् की जा चुकी है, पानी द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया यह बल, उत्प्लावन बल कहलाता है। किसी वस्तु पर लगने वाले उत्प्लावन बल का परिमाण कितना होता है? क्या किसी एक ही वस्तु के लिए यह सभी तरलों में समान होता है? क्या किसी दिए गए तरल में, सभी वस्तुएँ समान उत्प्लावनबल का अनुभव करती हैं? इन प्रश्नों का उत्तर आ£कमीडीश के सि(ांत द्वारा प्राप्त होता है, जिसको निम्न प्रकार से व्यक्त किया जाता हैः जब किसी वस्तु को किसी तरल में पूणर् याआंश्िाक रूप से डुबोया जाता है तो वह ऊपर की दिशा में एक बल का अनुभव करती है जो वस्तु द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है। क्या अब आप स्पष्ट कर सकते हैं कि ियाकलाप 10ण्7 में पत्थर के पानी में पूरी तरह डूबने के बाद डोरी के प्रसार में और कमी क्यों नहीं हुइर् थी? आ£कमीडीश एक ग्रीक वैज्ञानिक थे। उन्हांेने एक सि(ांत की खोज की जो उन्हीं के नाम से विख्यात है। यह सि(ांत उन्होंने यह देखने के बाद खोजा कि नहाने के टबआ£कमिडीज में घुसने पर पानी बाहर बहने लगता है। वे सड़कों पर यूरेका ;म्नतमांद्ध यूरेका चिल्लाते हुए भागे, जिसका अथर् है फ्मैंने पा लिया है।य् इस ज्ञान का उपयोग उन्होंने राजा के मुवुफट में उपयोग हुए सोने की शु(ता को मापने के लिए किया। उनके यांत्रिाकी तथा ज्यामिति में किए गए कायो± ने उन्हें प्रसि( कर दिया। उत्तोलक, घ्िारनी तथा पहिया और धुरी के विषय में उनके ज्ञान ने ग्रीक सेना को रोमन सेना के विरु( लड़ाइर् में बहुत सहायता की। आ£कमीडीश के सि(ांत के बहुत से अनुप्रयोग हैं। यह जलयानों तथा पनडुब्िबयों के डिशाइन बनाने में काम आता है। दुग्ध्मापी, जो दूध् के किसी नमूने की शु(ता की जाँच करने के लिए प्रयुक्त होते हैं तथा हाइड्रोमीटर, जो द्रवों के घनत्व मापने के लिए प्रयुक्त होतेे हैं, इसी सि(ांत पर आधरित हैं।प्रश्न 1ण् एक तुला ;ूमपहीपदह उंबीपदमद्ध पर आप अपना द्रव्यमान 42 ाह नोट करते हैं। क्या आपका द्रव्यमान 42 ाह से अध्िक है या कम? 2ण् आपके पास एक रुइर् का बोरा तथा एक लोहे की छड़ है। तुला पर मापने पर दोनों 100 ाह द्रव्यमान दशार्ते हैं। वास्तविकता में एक - दूसरे से भारी है। क्या आप बता सकते हैं कि कौन - सा भारी है और क्यों? 10ण्7 आपेक्ष्िाक घनत्व? आप जानते हैं कि किसी वस्तु का घनत्व, उसके प्रति एकांक आयतन के द्रव्यमान को कहते हैं। घनत्व का मात्राक किलोग्राम प्रति घन मीटर है;ाह उदृ3द्ध। विश्िाष्ट परिस्िथतियों में किसी पदाथर् का घनत्व सदैव समान रहता है। अतः किसी पदाथर् का घनत्व उसका एक लाक्षण्िाक गुण होता है। यह भ्िान्न - भ्िान्न पदाथो± के लिए भ्िान्न - भ्िान्न होता है। उदाहरण के लिए, सोने का घनत्व 19300 ाह उ.3 है जबकि पानी का 1000 ाह उ.3 है। किसी पदाथर् के नमूने का घनत्व, उस पदाथर् की शु(ता की जाँच में सहायता कर सकता है। प्रायः किसी पदाथर् के घनत्व को पानी के घनत्व की तुलना में व्यक्त करना सुविधजनक होता है। किसी पदाथर् का आपेक्ष्िाक घनत्व उस पदाथर् का घनत्व व पानी के घनत्व का अनुपात है। अथार्त् किसी पदाथर् का घनत्व आपेि क्षक घनत्व त्र पानी का घनत्व चूँकि आपेक्ष्िाक घनत्व समान राश्िायों का एक अनुपात है, अतः इसका कोइर् मात्राक नहीं होता। उदाहरण 10ण्7 चाँदी का आपेक्ष्िाक घनत्व 10ण्8 है। पानी का घनत्व 103 ाह उदृ3 है। ैप् मात्राक में चाँदी का घनत्व क्या होगा? आपने क्या सीखा हलः चाँदी का आपेक्ष्िाक घनत्व त्र 10ण्8 चादँी का घनत्व आपेक्ष्िाक घनत्व त्र पानी का घनत्व चाँदी का घनत्व त्र चाँदी का आपेक्ष्िाक घनत्व × पानी का घनत्व त्र 10ण्8 × 103 ाह उदृ3ण् ऽ गुरुत्वाकषर्ण के नियम के अनुसार किन्हीं दो पिंडों के बीच आकषर्ण बल उन दोनों के द्रव्यमानों के गुणनपफल के समानुपाती तथा उनके बीच की दूरी के वगर् के व्युत्क्रमानुपाती होता है। यह नियम सभी पिंडों पर लागू होता है चाहे वह विश्व में कहीं भी हों। इस प्रकार के नियम को सावर्त्रिाक नियम कहते हैं। ऽ गुरुत्वाकषर्ण एक क्षीण बल है जब तक कि बहुत अध्िक द्रव्यमान वाले पिंड संब( न हों। ऽ पृथ्वी द्वारा लगाए जाने वाले गुरुत्वाकषर्ण बल को गुरुत्व बल कहते हैं। ऽ गुरुत्वीय बल पृथ्वी तल से ऊँचाइर् बढ़ने पर कम होता जाता है। यह पृथ्वी तल के विभ्िान्न स्थानों पर भी परिव£तत होता है और इसका मान ध्ु्रवों सेविषुवत वृत्त की ओर घटता जाता है। ऽ किसी वस्तु का भार, वह बल है जिससे पृथ्वी उसे अपनी ओर आक£षत करती है। ऽ किसी वस्तु का भार, द्रव्यमान तथा गुरुत्वीय त्वरण के गुणनपफल के बराबर होता है। ऽ किसी वस्तु का भार भ्िान्न - भ्िान्न स्थानों पर भ्िान्न - भ्िान्न हो सकता है, ¯कतु द्रव्यमान स्िथर रहता है। ऽ सभी वस्तुएँ किसी तरल में डुबाने पर उत्प्लावन बल का अनुभव करती हैं। ऽ जिस द्रव में वस्तुओं को डुबोया जाता है उसके घनत्व से कम घनत्व की वस्तुएँ द्रव की सतह पर तैरती हैं। यदि वस्तु का घनत्व, डुबोए जाने वाले द्रव से अध्िक है तो वे द्रव में डूब जाती हैं। अभ्यास 1ण् यदि दो वस्तुओं के बीच की दूरी को आध कर दिया जाए तो उनके बीच गुरुत्वाकषर्ण बल किस प्रकार बदलेगा? 2ण् सभी वस्तुओं पर लगने वाला गुरुत्वीय बल उनके द्रव्यमान के समानुपाती होता है। पिफर एक भारी वस्तु हलकी वस्तु के मुकाबले तेशी से क्यों नहीं गिरती? 3ण् पृथ्वी तथा उसकी सतह पर रखी किसी 1 ाह की वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल का परिमाण क्या होगा? ;पृथ्वी का द्रव्यमान 6 × 1024 ाह है तथा पृथ्वी की त्रिाज्या 6ण्4 × 106 उ हैद्ध। 4ण् पृथ्वी तथा चंद्रमा एक - दूसरे को गुरुत्वीय बल से आक£षत करते हैं। क्या पृथ्वी जिस बल से चंद्रमा को आक£षत करती है वह बल, उस बल से जिससे चन्द्रमा पृथ्वी को आक£षत करता है बड़ा है या छोटा है या बराबर है? बताइए क्यों? 5ण् यदि चंद्रमा पृथ्वी को आक£षत करता है, तो पृथ्वी चंद्रमा की ओर गति क्यों नहीं करती? 6ण् दो वस्तुओं के बीच लगने वाले गुरुत्वाकषर्ण बल का क्या होगा, यदि ;पद्ध एक वस्तु का द्रव्यमान दोगुना कर दिया जाए? ;पपद्ध वस्तुओं के बीच की दूरी दोगुनी अथवा तीन गुनी कर दी जाए? ;पपपद्ध दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान दोगुने कर दिए जाएँ? 7ण् गुरुत्वाकषर्ण के सावर्त्रिाक नियम के क्या महत्व हैं? 8ण् मुक्त पतन का त्वरण क्या है? 9ण् पृथ्वी तथा किसी वस्तु के बीच गुरुत्वीय बल को हम क्या कहेंगे? 10ण् एक व्यक्ित। अपने एक मित्रा के निदेर्श पर ध्ु्रवों पर वुफछ ग्राम सोना खरीदताहै। वह इस सोने को विषुवत वृत्त पर अपने मित्रा को देता है। क्या उसका मित्रा खरीदे हुए सोने के भार से संतुष्ट होगा? यदि नहीं, तो क्यों? ;संकेतः ध््रुवों पर ह का मान विषुवत वृत्त की अपेक्षा अध्िक है।द्ध 11ण् एक कागज की शीट, उसी प्रकार की शीट को मरोड़ कर बनाइर् गइर् गेंद से ध्ीमी क्यों गिरती है? 12ण् चंद्रमा की सतह पर गुरुत्वीय बल, पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय बल की अपेक्षा 1ध्6 गुणा है। एक 10 ाह की वस्तु का चंद्रमा पर तथा पृथ्वी पर न्यूटन में भार क्या होगा? 13ण् एक गंेद ऊध्वार्ध्र दिशा में ऊपर की ओर 49 उध्े के वेग से पेंफकी जाती है। परिकलन कीजिए ;पद्ध अध्िकतम ऊँचाइर् जहाँ तक कि गेंद पहुँचती है। ;पपद्ध पृथ्वी की सतह पर वापस लौटने में लिया गया वुफल समय। 14ण् 19ण्6 उ ऊँची एक मीनार की चोटी से एक पत्थर छोड़ा जाता है। पृथ्वी पर पहँुचने से पहले इसका अंतिम वेग ज्ञात कीजिए। 15ण् कोइर् पत्थर ऊध्वार्ध्र दिशा में ऊपर की ओर 40 उध्े के प्रारंभ्िाक वेग से पेंफका गया है।ह त्र 10 उध्े2 लेते हुए ग्रापफ की सहायता से पत्थर द्वारा पहुँचीअिाकतम ऊँचाइर् ज्ञात कीजिए। नेट विस्थापन तथा पत्थर द्वारा चली गइर् वुफल दूरी कितनी होगी? 16ण् पृथ्वी तथा सूयर् के बीच गुरुत्वाकषर्ण बल का परिकलन कीजिए। दिया है, पृथ्वी का द्रव्यमान त्र 6 × 1024 ाह तथा सूयर् का द्रव्यमान त्र 2 × 1030 ाह। दोनों के बीच औसत दूरी 1ण्5 × 1011 उ है। 17ण् कोइर् पत्थर 100 उ ऊँची किसी मीनार की चोटी से गिराया गया और उसी समय कोइर् दूसरा पत्थर 25 उध्े के वेग से ऊध्वार्ध्र दिशा में ऊपर की ओर पेंफका गया। परिकलन कीजिए कि दोनों पत्थर कब और कहाँ मिलेंगे। 18ण् ऊध्वार्ध्र दिशा में ऊपर की ओर पेंफकी गइर् एक गेंद 6 े पश्चात् पेंफकने वाले के पास लौट आती है। ज्ञात कीजिए ;ंद्ध यह किस वेग से ऊपर पेंफकी गइर्ऋ ;इद्ध गेंद द्वारा पहुँची गइर् अध्िकतम ऊँचाइर्ऋ तथा ;बद्ध 4 े पश्चात् गेंद की स्िथति। 19ण् किसी द्रव में डुबोइर् गइर् वस्तु पर उत्प्लावन बल किस दिशा में कायर् करता है? 20ण् पानी के भीतर किसी प्लास्िटक के गुटके को छोड़ने पर यह पानी की सतह पर क्यों आ जाता है? 21ण् 50 ह के किसी पदाथर् का आयतन 20 बउ3 है। यदि पानी का घनत्व 1 ह बउदृ3 हो, तो पदाथर् तैरेगा या डूबेगा? 22ण् 500 ह के एक मोहरबंद पैकेट का आयतन 350 बउ3 है। पैकेट 1 ह बउदृ3 घनत्व वाले पानी में तैरेगा या डूबेगा? इस पैकेट द्वारा विस्थापित पानी का द्रव्यमान कितना होगा?

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