अध्याय 6 हमने पिछले अध्याय में हमनें पढ़ा कि सभी जीवित प्राणी या पौध्े कोश्िाकाओं के बने होते हैं। एक कोश्िाक जीवों में, सभी मौलिक कायर् एक ही कोश्िाका द्वारा किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, अमीबा में एक ही कोश्िाका द्वारा गति, भोजन लेने की िया, श्वसन िया और उत्सजर्न िया संपन्न की जाती है। लेकिन बहुकोश्िाक जीवों में लाखों कोश्िाकाएँ होती हैं। इनमें से अध्िकतर कोश्िाकाएँ वुफछ ही कायो± को संपन्न करने में सक्षम होती हैं। प्रत्येक विशेष कायर् कोश्िाकाओं के विभ्िान्न समूहों द्वारा किया जाता है। कोश्िाकाओं के ये समूह एक विश्िाष्ट कायर् को ही अति दक्षता पूवर्क संपन्न करने के लिए सक्षम होते हंै। मनुष्यों में, पेशीय कोश्िाका पैफलती और सिवुफड़ती है, जिससे गति होती है, तंत्रिाका कोश्िाकाएँ संदेशों की वाहक होती हैंऋ रक्त, आॅक्सीजन, भोजन, हाॅमार्ेन और अपश्िाष्ट पदाथो± का वहन करता है। पौधें में, वाहक नलियों से संबंध्ित कोश्िाकाएँ भोजन और पानी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं। अतः बहुकोश्िाक जीवों में श्रम विभाजन होता है। शरीर के अंदर ऐसी कोश्िाकाएँ जो एक तरह के कायर् को संपन्न करने में दक्ष होती हैं, सदैव एक समूह में होती हैं। इससे ज्ञात होता है कि शरीर के अंदर एक निश्िचत कायर् एक निश्िचत स्थान पर कोश्िाकाओं के एक विश्िाष्ट समूह द्वारा संपन्न किया जाता है। कोश्िाकाओं का यह समूहऊतक कहलाता है। ये ऊतक अध्िकतम दक्षता के साथ कायर् कर सवफने के लिए एक विश्िाष्ट क्रम में़व्यवस्िथत होते हैं। रक्त, फ्रलोएम तथा पेशी ऊतक के उदाहरण हैं। ऊतक ;ज्पेेनमेद्ध वे कोश्िाकाएँ जो आवृफति में एक समान होती हैं तथा किसी कायर् को एक साथ संपन्न करती हैं, समूहमें एक ऊतक का निमार्ण करती हैं। 6ण्1 क्या पौध्े और जंतु एक ही तरह केऊतकों से बने होते हैं? आइए हम विभ्िान्न ऊतकों की संरचनाओं तथा उनके कायो± की तुलना करें। क्या पौधें और जंतुओं की संरचनाएँ समान होती हैं? क्या दोनों समरूप कायर् करते हैं? दोनों में स्पष्ट अंतर होता है। पौध्े स्िथर होते हैं - वे गति नहीं करते हैं। उनके अध्िकांश उफतक सहारा देने वाले होते हैं तथा पौधें को संरचनात्मक शक्ितप्रदान करते हैं। एसे अध्िकांश ऊतक मृत होते हैं। येमृत उफतक जीवित ऊतकों के समान ही यांत्रिाक शक्ित प्रदान करते हैं तथा उन्हें कम अनुरक्षण की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर, जंतु भोजन, साथी और आश्रय की खोज में इध्र - उध्र विचरण करते हैं। ये पौधें की अपेक्षा उफजार् का अध्िक उपभोग करते हैं। जंतुओं के अध्िकांश उफतक जीवित होते हैं। जंतु और पौधें के बीच उनकी वृि के प्रतिरूप में एक और भ्िान्नता है। पौधें की वृि वुफछ क्षेत्रों में ही सीमित रहती है जबकि जंतुओं में ऐसा नहींहोता। पौधें के वुफछ ऊतक जीवन भर विभाजितहोते रहते हैं। ऐसे ऊतक वुफछ क्षेत्रों में ही सीमितरहते हैं। ऊतकों की विभाजन - क्षमता के आधर पर ही पौधें के ऊतकों ;पादप ऊतकोंद्ध का वगीर्करण किया जाता हैः वृि अथवा विभज्योतक तथा स्थायी ऊतक। जंतुओं में कोश्िाका वृि अिाक एकरूप होती है। अतः जंतुओं में विभाज्य तथा अविभाज्य क्षेत्रों की कोइर् निश्िचत सीमा नहीं होती। अंगों और अंग - तंत्रों का संरचनात्मक संगठन जटिल पौधें की अपेक्षा जटिल जंतुओं में अति विश्िाष्ट तथा सीमित होता है। यह मूल अंतर जीवधारियों के दो महत्वपूणर् समूहों के जीवनयापन के विभ्िान्न तरीकांे को दशार्ता है, विशेषकर इनके भोजन करने की प्रिया में। संरचनात्मक संगठन, एक ओर पौधें के गतिहीन अस्ितत्व तथा दूसरी ओर जंतुओं के प्रचलन के लिए अंगतंत्रों के विकास हेतु विभ्िान्न प्रकार से अनुवूफलित होते हैं। जटिल जंतुओं तथा पौधें के संदभर् में अब हमऊतकों की अवधरणा के बारे में विस्तृत चचार् करेंगे। श्न 1ण् ऊतक क्या है? 2ण् बहुकोश्िाक जीवों में ऊतकों का क्या उपयोग है?प्र 6ण्2 पादप ऊतक 6ण्2ण्1 विभज्योतक जार.1 जार.2 चित्रा 6ण्1रू प्याज के मूल में वृि ऊतक ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 6ण्1 ऽ दो शीशे के जार लेते हैं और उनमें पानी भर देते हैं। ऽ अब दो प्याश लेते हैं और दोनों जारों पर एक - एक प्याश रख देते हैं, जैसा कि चित्रा 6ण्1 में दिखाया गया है। ऽ वुफछ दिनों तक दोनो प्याशों वफी मूलों की लंबाइर् मापते हैं। ऽ पहले, दूसरे और तीसरे दिनों में मूल की लंबाइर् को माप लेते हैं। ऽ दूसरे जार में रखी प्याश की मूल को चैथे दिन 1 बउ काट लेते हैं। इसके बाद दोनों जार में रखी प्याश की मूलों की लंबाइयों का पाँच दिनों तक निरीक्षण करें और उनमें हुइर् प्रत्येक दिन की वृि की माप को नीचे दी गइर् तालिका में लिखें। लंबाइर् दिन.1 दिन.2 दिन.3 दिन.4 दिन.5 जार.1 जार.2 ऽ ऊपर के निरीक्षणों को देखते हुए नीचे दिए गएप्रश्नों के उत्तर देंः 1ण् किस जार में रखी हुइर् प्याश की मूल लंबी है? 2ण् हमारे द्वारा मूल के ऊपरी हिस्से को काट लेने के बाद भी क्या वह वृि करती रहती है? 3ण् जब हम जार - 2 में रखी प्याश की मूल केऊपरी हिस्से को काटते हैं तो वे वृि करना बंद कर देंगी, क्यों? पौधें में वृि वुफछ निश्िचत क्षेत्रों में ही होती है।ऐसा विभाजित ऊतकों के उन भागों में पाए जाने के कारण होता है। ऐसे ऊतकों को विभज्योतक ;डमतपेजमउंजपब जपेेनमद्ध भी कहा जाता है। ये विभज्योतक किस भाग में स्िथत हैं, विभज्योतक की उपस्िथति वाले क्षेत्रों के आधर पर इन्हें शीषर्स्थ, वेंफबियम ;पाश्वीर्यद्ध तथा अंतविर्ष्ट भागों में वगीर्वृफत किया जाता है ;चित्रा 6.2द्ध। विभज्योतक के द्वारा तैयार नइर् कोश्िाकाएँ प्रारंभ में विभज्योतक की तरह होती हैं लेकिन जैसे ही ये बढ़ती और परिपक्व होती हैं, इनके गुणों में ध्ीर - ध्ीरे परिवतर्न होता है और ये दूसरेऊतकों के घटकों के रूप में विभाजित हो जाती हैं। अंतविर्ष्ट विभज्योतक पिायों के आधर में या टहनी के पवर् ;पदजमतदवकमद्ध के दोनों ओर उपस्िथत होते हैं।इस ऊतक की कोश्िाकाएँ अत्यध्िक ियाशील होती हैं, उनके पास बहुत अध्िक कोश्िाकाद्रव्य,पतली कोश्िाका भ्िािा, और स्पष्ट वेंफद्रक होते हैं। उनके पास रसधनी नहीं होती है। क्या हम सोच सकते हैं कि उनके पास रसधनी क्यों नहीं होती है? ;आप कोश्िाकाओं पर आधरित अध्याय में उल्लेख्िात रसधानियों के कायो± का संज्ञान ले सकते हैं।द्ध 6ण्2ण्2 स्थायी ऊतक विभज्योतक द्वारा बनी कोश्िाकाओं का क्या होता है? ये एक विश्िाष्ट कायर् करती हैं और विभाजित होनेकी शक्ित को खो देती हैं जिसके फ्रफलस्वरूप वेस्थायी ऊतक का निमार्ण करती हैं। इस प्रकार एक विश्िाष्ट कायर् करने के लिए स्थायी रूप और आकार लेने की िया को विभेदीकरण कहते हैं। विभज्योतक की कोश्िाकाएँ विभाजित होकर विभ्िान्न प्रकार केस्थायी ऊतकों का निमार्ण करती हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 6ण्2 ऽ एक पौध्े के तने को लीजिए तथा अपने श्िाक्षक की सहायता से उसके पतले सैक्शन काटिए। ट्राइकोम म्यूसिलैगिनस वैफनालक्यूटिकिलएपीडमिर्स हाइपोडमिर्स कोटेर्क्स एंडोडमिर्स पेरीसायकिल फ्रलोएम़वैंफबियम मेटाशाइलम प्रोटोशाइलम मज्जा किरण शाइलम संवहन बंडलपिथ चित्रा 6ण्3रू तने का सैक्शन ;काटद्ध चित्रा 6ण्4रू विभ्िान्न प्रकार के सरल ऊतकः ;ंद्ध पैरेन्काइमा ;पद्ध अनुप्रस्थ सैक्शन, ;पपद्ध अनुदैध्यर् सैक्शनऋ ;इद्ध काॅलेन्काइमा ;पद्ध अनुप्रस्थ सैक्शन, ;पपद्ध अनुदैध्यर् सेक्शन ऽ अब सभी सैक्शन को सेप्रेफनिन से रंजित करें। एक अच्छे से कटे हुए सैक्शन को स्लाइड पर रखें और उस पर ग्िलसरीन की एक बँूद डालें। ऽ उसको कवर - स्िलप से ढक दें और स्लाइड का निरीक्षण सूक्ष्मदशीर् से करें। विभ्िान्न प्रकार की कोश्िाकाओं का अध्ययन करें और उनके विन्यास को देखें। चित्रा 6.3 से इसकी तुलना करें। ऽ अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर विचार करें और निरीक्षण के आधर पर उनके उत्तर देंः 1ण् क्या सभी कोश्िाकाओं की संरचनाएँ समान हैं? 2ण् कितने प्रकार की कोश्िाकाओं को देखा जा सकता है? 3ण् क्या हम उन कारणों पर विचार कर सकते हैं कि कोश्िाकाओं के इतने प्रकार क्यों हैं? अंतराकोश्िाक स्थान कोश्िाकाद्रव्य वेंफद्रक मध्य पटलिका ;डपककसम संउमससंद्ध हरित लवक ;क्लोरोप्लास्टद्ध रसधानी अंतराकोश्िाक स्थान प्राथमिक कोश्िाका भ्िािा ं ;पपद्ध ऽ हम पौधे की मूलों का सैक्शन काटने की कोश्िाश कर सकते हैं। हम विभ्िान्न पौधों के मूल और तने का सैक्शन भी काट सकते हैं। 6ण्2ण्2 ;पद्ध सरल स्थायी ऊतक कोश्िाकाओं की वुफछ परतें ऊतक के आधरीय पैकिंगका निमार्ण करती हैं। इन्हें पैरेन्काइमा ऊतक कहते हैं,जो स्थायी ऊतक का एक प्रकार है। यह पतलीकोश्िाका भ्िािा वाली सरल कोश्िाकाओं का बना होता है। ये कोश्िाकाएँ जीवित हैं। ये प्रायः बंध्न मुक्त होतीहैं तथा इस प्रकार के ऊतक की कोश्िाकाओं के मध्य कापफी रिक्त स्थान पाया जाता है ख्चित्रा 6.4 ं;पद्ध,। यहऊतक पौध्े को सहायता प्रदान करता है और भोजन अंत भ्िािा प्राथमिक कोश्िाका भ्िािा ;कोनों पर मोटीद्ध हरित लवक ;क्लोरोप्लास्टद्ध वेंफद्रक रसधानी कोश्िाकाद्रव्य अंतराकोश्िाक स्थान इ ;पपद्ध संकीणर् ल्यूमेन लिमित मोटी भ्िािासरल छिद्र युग्मक ब ;पद्ध ब ;पपद्ध चित्रा 6ण्4रू ;बद्ध स्क्लेरेंकाइमा;पद्ध अनुप्रस्थ सैक्शन ;पपद्ध अनुदैध्यर् सैक्शन का भंडारण करता है। वुफछ पैरेन्काइमा ऊतकों में क्लोरोपि़फल पाया जाता है, जिसके कारण प्रकाश संश्लेषण की िया संपन्न होती है। स्िथतियों में इनऊतकों को क्लोरेन्काइमा ;हरित ऊतकद्ध कहा जाता है। जलीय पौधों में पैरेन्काइमा की कोश्िाकाओं के मध्य हवा की बड़ी गुहिकाएँ ;बंअपजपमेद्ध होती हंै, जो पौधों को तैरने के लिए उत्प्लावन बल प्रदान करती हैं। इस प्रकार के पैरेन्काइमा को ऐरेन्काइमा कहते हैं। तने और जड़ों के पैरेन्काइमा पोषण करने वाले पदाथर् और जल का भी संग्रह करते हैं। पौधें में लचीलेपनका गुण एक अन्य स्थायी ऊतक, काॅलेन्काइमा केकारण होता है। यह पौधें के विभ्िान्न भागों ;पत्ती, तनाद्ध में बिना टूटे हुए लचीलापन लाता है। यह पौधों को यांत्रिाक सहायता भी प्रदान करता है। हम इसऊतक को एपिडमिर्स के नीचे पणर्वृत में पा सकते हैं।इस ऊतक की कोश्िाकाएँ जीवित, लंबी और अनियमित ढंग से कोनांे पर मोटी होती हैं तथा कोश्िाकाओं के बीच बहुत कम स्थान होता है ख्चित्रा 6.4 ;इद्ध,। एक अन्य प्रकार का ऊतक स्क्लेरेन्काइमा होताहै। यह ऊतक पौध्े को कठोर एवं मशबूत बनाता है। हमने नारियल के रेशेयुक्त छिलके को देखा है। यहस्क्लेरेन्काइमा ऊतक से बना होता है। इस ऊतक की कोश्िाकाएँ मृत होती हैं। ये लंबी और पतली होती हंैक्योंकि इस ऊतक की भ्िािा लिग्िनन के कारण मोटी होती है। ;लिग्िनन कोश्िाकाओं को दृढ़ बनाने के लिए सीमेंट का कायर् करने वाला एक रासायनिकपदाथर् है।द्ध ये भ्िािायाँ प्रायः इतनी मोटी होती हैं कि कोश्िाका के भीतर कोइर् आंतरिक स्थान नहीं होता है ख्चित्रा 6.4;बद्ध,। यह ऊतक तने में, संवहन बंडल केसमीप, पत्तों की श्िाराओं में तथा बीजों और पफलों के कठोर छिलके में उपस्िथत होता है। यह पौधंे के भागों को मशबूती प्रदान करता है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 6ण्3 ऽ रियो की ताशा तोड़ी हुइर् पत्ती लीजिए। ऽ इसे दबाव लगाकर इस तरह तोडि़ए कि पत्ती का छिलका अलग निकल आए। ;ंद्ध ;इद्ध कोश्िाका चित्रा 6ण्5रू द्वार कोश्िाकाएँ तथा एपीडमिर्स कोश्िाकाएँः;ंद्ध पाश्वर् दृश्यए ;इद्ध पृष्ठ दृश्य ऽ इस छिलके को अलग करके जल से भरी हुइर् पैटिªडिश में रखें। ऽ इसमें वुफछ बूँद सेप्रेफनिन विलयन की डालिए। ऽ वुफछ समय ;लगभग दो मिनटद्ध पश्चात् छिलके को स्लाइड पर रख दीजिए तथा इसे ध्ीरे से कवर स्िलप से ढवेंफ। ऽ इसका सूक्ष्मदशीर् द्वारा अवलोकन कीजिए। जो आप देख रहे हंै वह कोश्िाकाओं की सबसे बाहरी परत एपीडमिर्स है। शुष्क स्थानों पर मिलने वाले पदों में एपीडमिर्स मोटी हो सकती है। यह जल की हानि कम करके पादपों की रक्षा करती है। पौधे की पूरी सतह एपीडमिर्स से ढकी रहती है। यह पौधे के सभी भागों की रक्षा करती है। एपीडमर्ल कोश्िाका पौधें की बाह्य सतह पर प्रायः एक मोम जैसी जल प्रतिरोध्ी परत बनाती है। यह जल हानि के विरु( यंात्रिाक आघात तथा परजीवी कवक के प्रवेश से पौधों की रक्षा करती है। क्योंकि एपीडमर्ल कोश्िाकाओंका उत्तरदायित्व रक्षा करने का है, अतः इसकी कोश्िाकाएँ बिना किसी अंतकोर्श्िाकीय स्थान के अछिन्न परत बनाती हैं। अध्िकांश एपीडमर्ल कोश्िाकाएँ अपेक्षावृफत चपटी होती हंै। सामान्यतः उनकी बाह्य तथा पाश्वर् भ्िािायाँ उनकी आंतरिक भ्िािायों से मोटी होती हैं। पत्ती की एपीडमिर्स में हम छोटे - छोटे छिद्रों को दख्ेा सकते हैं। इन छिद्रों को स्टोमेटा कहते हंै ;चित्रा 6.5द्ध। स्टोमेटा को दो वृक्क के आकार की कोश्िाकाएँ घेरे रहती हैं, जिन्हें रक्षी कोश्िाकाएँ कहते हैं। ये कोश्िाकाएँ वायुमंडल से गैसों का आदान - प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं। वाष्पोत्सजर्न ;वाष्प के रूप में पानी का निकलनाद्ध की िया भी स्टोमेटा के द्वारा होती है। श्न 1ण् प्रकाश संश्लेषण के लिए किस गैस की आवश्यकता होती है? 2ण् पौधें में वाष्पोत्सजर्न के कायो± का उल्लेखप्र करें। जड़ों की एपीडमर्ल कोश्िाकाएँ पानी को सोंखने का कायर् करती हैं। साधरणतः उनमें बाल जैसे प्रवधर् होते हैं, जिससे जड़ों की वुफल अवशोषक सतह बढ़ जाती है तथा उनकी पानी सोंखने की क्षमता में वृि होती है। मरुस्थलीय पौधें की बाहरी सतह वाले एपीडमिर्स में क्यूटिन ;एक जल अवरोध्क रासायनिक पदाथर्द्ध का लेप होता है। क्या हम इसका कारण सोच सकते हैं? क्या एक पेड़ की बाहरी शाखा की परत नए तने की बाह्य परत से भ्िान्न होती है? जैसे - जैसे वृक्ष की आयु बढ़ती है, उसके बाह्यसुरक्षात्मक ऊतकांे में वुफछ परिवतर्न होता है। एक दूसरे विभज्योतक की पट्टðी तने के एपीडमिर्स का स्थान ले लेती है। बाहरी सतह की कोश्िाकाएँ इस सतह से अलग हो जाती हैं। यह पौधंे पर बहुत परतों वाली मोटी छाल का निमार्ण करती हैं। इन छालों की कोश्िाकाएँ मृत होती हैं, ये बिना अंतःकोश्िाकीय स्थानों ;चित्रा 6.6द्ध के व्यवस्िथत होती हैं। इनवफीभ्िािा पर सुबरिन ;ेनइमतपदद्ध नामक रसायन होता है जो इन छालों को हवा एवं पानी के लिए अभेद्य बनाता है। छाल - कोश्िाकाएँ चित्रा 6ण्6रू रक्षी ऊतक 6ण्2ण्2 ;पपद्ध जटिल स्थायी ऊतक अब तक हम एक ही प्रकार की कोश्िाकाओं से बनेहुए भ्िान्न - भ्िान्न प्रकार के ऊतकों पर विचार कर चुके हैं, जो कि एक ही तरह के दिखाइर् देते हैं। ऐसे ऊतकों को साधरण स्थायी ऊतक कहते हैं। अन्यप्रकार के स्थायी ऊतक को जटिल ऊतक कहते हैं।जटिल ऊतक एक से अध्िक प्रकार की कोश्िाकाओं से मिलकर बने होते हैं और ये सभी एक साथ मिलकर एक इकाइर् की तरह कायर् करते हैं। शाइलम औरफ्ऱलोएम इसी प्रकार के जटिल ऊतकों के उदाहरण हैं।इन दोनों को संवहन ऊतक भी कहते हैं और ये मिलकर संवहन बंडल का निमार्ण करते हैं। यहऊतक बड़े पौधें की एक विशेषता है, जो कि उनको स्थलीय वातावरण में रहने के अनुवूफल बनाती है। चित्रा 6.3 में तने का एक भाग दिखाया गया है। क्या हम संवहन बंडल में मौजूद विभ्िान्न प्रकार की कोश्िाकाओं को देख सकते हैं? शाइलम टैªकीड् ;वाहिनिकाद्ध, वाहिका, शाइलम पैरेन्काइमा ख्चित्रा 6.7;ंद्ध, ;इद्ध तथा ;बद्ध, और शाइलम प़फाइबर ;रेशेद्ध से मिलकर बना होता है। इन कोश्िाकाओंकी कोश्िाका भ्िािा मोटी होती है और इनमें से अिाकतर कोश्िाकाएँ मृत होती हैं। टैªकीड् और वाहिकाओं की संरचना नलिकाकार होती है। इनकेद्वारा पानी और खनिज लवण का ऊध्वार्ध्र संवहन होता है। पैरेन्काइमा भोजन का संग्रह करता है और यह किनारे की ओर पानी के पाश्वीर्य संवहन में मदद करता है। प़फाइबर ;रेशेद्ध मुख्यतः सहारा देने का कायर् करते हैं।फ्ऱलोएम चार प्रकार के अवयवोंः चालनी नलिका, ़;ेपमअम जनइमेद्ध, साथी कोश्िाकाएँ, फ्रलोएम पैरेन्काइमा ़तथा फ्रलोएम रेशों से मिलकर बना होता है ख्चित्रा 6ण्7;कद्ध,। चालनी नलिका छिदि्रत भ्िािा वाली तथा़नलिकाकार कोश्िाका होती है। फ्रलोएम, शाइलम के असमान पदाथो± को कोश्िाकाओं में दोनों दिशाओं में ़गति करा सकते हैं। फ्रलोएम पिायों से भोजन को पौधे ़के विभ्िान्न भागों तक पहुँचाता है। फ्रलोएम रेशांे को ़छोड़कर, फ्रलोएम कोश्िाकाएँ जीवित कोश्िाकाएँ हैं। फ्ऱलोएम शाइलम वेंफद्रक छिद्र कोश्िाकाद्रव्य ;ंद्ध टैªकीड् ;इद्ध वाहिका ;बद्ध शाइलम पैरेन्काइमा ़;कद्ध फ्रलोएम - सैक्शन चित्रा 6ण्7रू जटिल उफतकों के प्रकार प्रश्न 1ण् सरल ऊतकों के कितने प्रकार हैं? 2ण् प्ररोह का शीषर्स्थ विभज्योतक कहाँ पाया जाता है? 3ण् नारियल का रेशा किस ऊतक का बना होता है? 4ण् फ्ऱलोएम के संघटक कौन - कौन से हैं? 6ण्3 जंतु ऊतक जब हम साँस लेते हैं तब हम अपनी छाती की गति को महसूस कर सकते हैं। शरीर के ये अंग वैफसे गति करते हैं? इसके लिए हमारे पास वुफछ विशेष कोश्िाकाएँ होती हैं जिन्हें हम पेशीय कोश्िाकाएँ कहते चित्रा 6ण्8रू पेशीय रेशे हैं ;चित्रा 6.8द्ध। इन कोश्िाकाओं का पैफलना और सिवुफड़ना अंगों को गति प्रदान करता है। साँस लेते समय हम आॅक्सीजन लेते हैं। यह आॅक्सीजन कहाँ जाती है? यह पेफपफड़ों के द्वारा अवशोष्िात की जाती है तथा रक्त के साथ शरीर की सभी कोश्िाकाओं तक पहुँच जाती है। कोश्िाकाओं को आॅक्सीजन की आवश्यकता क्यों होती है? माइटोकाॅन्िड्रया का कायर् इस प्रश्न के हल के लिए एक संकेत देता है, जिसके बारे में हम पहले पढ़ चुके हैं। रक्त अपने साथ विभ्िान्न पदाथो± को शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है। उदाहरण के लिए यह भोजन और आॅक्सीजन को सभी कोश्िाकाओं तक पहुँचाता है। यह शरीर के सभी भागोंसे अपश्िाष्ट पदाथो± को एकत्रा कर यकृत तथा वृक्क तक उत्सजर्न के लिए पहुँचाता है। रक्त और पेश्िायाँ दोनों ही हमारे शरीर में पाएजाने वाले ऊतकों के उदाहरण हैं। उनके कायर् के आधर पर हम विभ्िान्न प्रकार के जंतु ऊतकों के बारे में विचार कर सकते हैं जैसे कि एपिथीलियमीऊतक, संयोजी ऊतक, पेशीय ऊतक तथा तंत्रिाकाऊतक। रक्त, संयोजी ऊतक का एक प्रकार है तथापेशी, पेशीय ऊतक का। 6ण्3ण्1 एपिथीलियमी ऊतक जंतु के शरीर को ढकने या बाह्य रक्षा प्रदान करनेवाले ऊतक एपिथीलियमी उफतक हैं। एपिथीलियम शरीर के अंदर स्िथत बहुत से अंगों और गुहिकाओं को ढकते हैं। ये भ्िान्न - भ्िान्न प्रकार के शारीरिक तंत्रों को एक - दूसरे से अलग करने के लिए अवरोध् का निमार्ण करते हैं। त्वचा, मुँह, आहारनली, रक्त वाहिनी नली का अस्तर, पेफपफड़ों की वूफपिका, वृक्कीय नलीआदि सभी एपिथीलियमी ऊतक से बने होते हैं।एपिथीलियमी ऊतक की कोश्िाकाएँ एक - दूसरे से सटी होती हैं और ये एक अनवरत परत का निमार्ण ;ंद्ध शल्की ;इद्ध घनाकार ;बद्ध स्तंभाकार ;पक्ष्माभीद्ध चित्रा 6ण्9रू विभ्िान्न प्रकार के एपिथीलियम उफतक करती हैं। इन परतों के बीच चिपकाने वाले पदाथर् कम होते हैं तथा कोश्िाकाओं के बीच बहुत कम स्थान होता है। स्पष्टतः जो भी पदाथर् शरीर में प्रवेश करता है या बाहर निकलता है, वह एपिथीलियम की किसी परत से होकर अवश्य गुशरता है। इसके पफलस्वरूप विभ्िान्न प्रकार की एपिथीलियमी कोश्िाकाओं के बीच की पारगम्यता शरीर तथा बाहरी वातावरण और शरीर के विभ्िान्न अंगों के बीच पदाथो± के आदान - प्रदान में महत्वपूणर् भूमिका निभाती है। सामान्यतः सभी एपिथीलियमों को एक बाह्य रेशेदार आधरझिल्ली उसे नीचे रहने वाले ऊतकों से अलग करती है। चित्रा 6.9 में दशार्ए अनुसार, विभ्िान्न एपिथीलियम की संरचनाएँ विभ्िान्न प्रकार की होती हैं, जो उनके कायो± पर निभर्र करती हैं। उदाहरण के लिए, कोश्िाकाओं में रक्त नलिका अस्तर या वूफपिका, जहाँ पदाथो± का संवहन वरणात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा होता है, वहाँ पर चपटी एपिथीलियमी उफतक कोश्िाकाएँ होती हैं। इनको सरल शल्की एपिथीलियम कहते हैं। ये अत्यिाक पतली और चपटी होती हैं तथा कोमल अस्तर का निमार्ण करती हंै। आहारनली तथा मुँह का अस्तर शल्की एपिथीलियम से ढका होता है। शरीर का रक्षात्मक कवच अथार्त् त्वचा इन्हीं शल्की एपिथीलियम से बनी होती है। त्वचा की एपिथीलियमी कोश्िाकाएँ इनको कटने तथा पफटने से बचाने के लिए कइर् परतों में व्यवस्िथत होती हैं। चूँकि ये कइर् परतों के पैटनर् में व्यवस्िथत होती हैं इसलिए इन एपिथीलियम को स्तरित शल्की एपिथीलियम कहते हैं। जहाँ अवशोषण और स्राव होता है, जैसे आँत के भीतरी अस्तर ;सपदपदहद्ध में, वहाँ लंबी एपिथीलियमी कोश्िाकाएँ मौजूद होती हैं। यह स्तंभाकार एपिथीलियम, एपिथीलियमी अवरोध् को पार करने में सहायता प्रदान करता है। श्वास नली में, स्तंभाकार एपिथीलियमीऊतक में पक्ष्माभ ;ब्पसपंद्ध होते हैं, जो कि एपिथीलियमी उफतक की कोश्िाकाओं की सतह पर बाल जैसी रचनाएँ होती हंै। ये पक्ष्माभ गति कर सकते हैं तथा इनकी गति श्लेष्मा को आगे स्थानांतरित करके साप़फ करने में सहायता करती हैं। इस प्रकार के एपिथीलियम को पक्ष्माभी स्तंभाकार एपिथीलियम कहते हैं। घनाकार एपिथीलियम वृक्कीय नली तथा लार गं्रथी की नली के अस्तर का निमार्ण करता है, जहाँ यह उसे यांत्रिाक सहारा प्रदान करता है। ये एपिथीलियम कोश्िाकाएँ प्रायः गं्रथ्िा कोश्िाका के रूप में अतिरिक्त विशेषता अजिर्त करती हैं, जो एपिथीलियमी उफतक की सतह पर पदाथो± का स्राव कर सकती हैं। कभी - कभीएपिथीलियमी ऊतक का वुफछ भाग अंदर की ओर मुड़ा होता है तथा एक बहुकोश्िाक ग्रंथ्िा का निमार्ण करता है। यह गं्रथ्िाल एपिथीलियम कहलाता है। 6ण्3ण्2 संयोजी ऊतक रक्त एक प्रकार का संयोजी ऊतक है। इसे संयोजीऊतक क्यों कहते हैं? इस अध्याय की भूमिका में इस संबंध् में एक संकेत दिया गया है। आइए अब हमइस तरह के ऊतक के बारे में विस्तृत जानकारी लें।संयोजी ऊतक की कोश्िाकाएँ आपस में कम जुड़ी होती हैं और अंतरकोश्िाकीय आधत्राी ;उंजतपगद्ध में धँसी होती हैं ;चित्रा 6.10द्ध। यह आधत्राी जैली की तरह, तरल, सघन या कठोर हो सकती है। आधत्राीकी प्रकृति, विश्िाष्ट संयोजी ऊतक के कायर् के अनुसार बदलती रहती है। रक्त की एक बूँद स्लाइड पर लें और उसमें मौजूद विभ्िान्न कोश्िाकाओं को सूक्ष्मदशीर् में देखें। रक्त के तरल आधत्राी भाग को प्लाश्मा कहते हैं, प्लाश्मा में लाल रक्त कोश्िाकाएँ ;त्ठब्द्ध, श्वेत रक्त कोश्िाकाएँ ;ॅठब्द्ध तथा प्लेटलेट्स निलंबित होते हैं। प्लाश्मा में प्रोटीन, नमक तथा हॅामोर्न भी होते हैं। रक्त गैसों, शरीर के पचे हुए भोजन, हाॅमोर्न और उत्सजीर् पदाथो± को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में संवहन करता है।अस्िथ संयोजी ऊतक का एक अन्य उदाहरण है। यह पंजर का निमार्ण कर शरीर को आकार प्रदान ऊतक वेंफद्रक लिम्पफोसाइट ेनेप्लेटले;मद्ध चित्रा 6ण्10रू संयोजी उफतकों के प्रकारः;ंद्ध एरिओलर उफतकए ;इद्ध वसामय ;एडीपोशद्ध उफतकए ;बद्ध संहत अस्िथ उफतकए ;कद्ध काचाभ स्नायु उफतकए ;मद्ध विभ्िान्न रक्त कोश्िाकाएँ करती है। यह मांसपेश्िायों को सहारा देती है औरशरीर के मुख्य अंगों को सहारा देती है। यह ऊतक मशबूत और कठोर होता है। ;अस्िथ कायो± के लिए इन गुणों के क्या उपयोग हैं।द्ध अस्िथ कोश्िाकाएँ कठोर आधत्राी में ध्ँसी होती हैं, जो वैफल्िसयम तथा पफाॅस्पफोरस से बनी होती हैं। दो अस्िथयाँ आपस में एक - दूसरे से, एक अन्यसंयोजी ऊतक जिसे स्नायु ;अस्िथ बंधन तंतुद्ध कहते हैं, से जुड़ी होती हैं। यह ऊतक बहुत लचीला एवं मशबूत होता है। स्नायु में बहुत कम आधत्राी होती है।एक अन्य प्रकार का संयोजी ऊतक वंफडरा ;जमदकवदद्ध है, जो अस्िथयों से मांसपेश्िायों को जोड़ता है। वंफडरामशबूत तथा सीमित लचीलेपन वाले रेशेदार ऊतक होते हैं। उपास्िथ ;बंतजपसंहमद्ध एक अन्य प्रकार का संयोजीऊतक होता है, जिसमें कोश्िाकाओं के बीच पयार्प्त स्थान होता है। इसकी ठोस आधत्राी प्रोटीन और शवर्फरा की बनी होती है। यह अस्िथयों के जोड़ों को चिकना बनाती है। उपास्िथ नाक, कान, कंठ और श्वास नली में भी उपस्िथत होती है। हम कान की उपास्िथ को मोड़ सकते हैं, परंतु हाथ की अस्िथ को नहीं। सोचिए, ये दो उफतक किस प्रकार भ्िान्न हैं!एरिओलर संयोजी ऊतक त्वचा और मांसपेश्िायों के बीच, रक्त नलिका के चारों ओर तथा नसों और अस्िथ मज्जा में पाया जाता है। यह अंगों के भीतर की खाली जगह को भरता है, आंतरिक अंगों को सहारा प्रदान करता है और ऊतकों की मरम्मत में सहायता करता है। हमारे शरीर में वसा कहाँ संचित होता है? वसाका संग्रह करने वाला वसामय ऊतक त्वचा के नीचेआंतरिक अंगांे के बीच पाया जाता है। इस ऊतक की कोश्िाकाएँ वसा की गोलिकाओं से भरी होती हैं। वसासंग्रहित होने के कारण यह ऊष्मीय वुफचालक का कायर् भी करता है। 6ण्3ण्3 पेशीय ऊतक पेशीय ऊतक लंबी कोश्िाकाओं का बना होता है जिसे पेशीय रेशा ;उनेबसम पिइतमद्ध भी कहा जाता है। यहहमारे शरीर में गति के लिए उत्तरदायी है। पेश्िायों में एक विशेष प्रकार की प्रोटीन होती है, जिसे सिवुफड़ने वाला प्रोटीन कहते हैं, जिसके संवुफचन एवं प्रसार के कारण गति होती है। वुफछ पेश्िायों की हम इच्छानुसार गति करा सकते हैं। हाथ और पैर में विद्यमान पेश्िायों को हम अपनी इच्छानुसार आवश्यकता पड़ने पर गति करा सकते हैं या उनकी गति को रोक सकते हैं। इस तरह की पेश्िायों को ऐच्िछक पेशी ;अवसनदजंतल उनेबसमद्ध कहा जाता है ख्चित्रा 6ण्11;ंद्ध,। इन पेश्िायों को कंकाल पेशी भी कहा जाता है क्योंकि ये अध्िकतर हिóयों से जुड़ी होती हैं तथा शारीरिक गति में सहायक होती हैं। सूक्ष्मदशीर् से देखने पर ये पेश्िायाँ हलके तथा गहरे रंगों में एक के बाद एक रेखाओं या धरियों की तरह प्रतीत होती हैं। इसी कारण इसे रेख्िात पेशी भी कहतेहैं। इस ऊतक की कोश्िाकाएँ लंबी, बेलनाकार, शाखारहित और बहुनाभीय होती हैं। आहारनली में भोजन का प्रवाह या रक्त नलिका का प्रसार एवं संवुफचन जैसी गतियाँ ऐच्िछक नहीं हैं। इन गतिविध्ियों को हम स्वयं संचालित नहीं कर सकते हैं, अथार्त् हम इन गतियों को इच्छानुसार प्रारंभ या बंद नहीं कर सकते हैं। चिकनी पेश्िायाँ ख्चित्रा 6ण्11;इद्ध, अथवा अनैच्िछक पेश्िायाँ इनकी गति को नियंत्रिात करती हैं। ये आँख की पलक, मूत्रावाहिनी और पेफपफड़ों की श्वसनी में भी पाया जाता है। कोश्िाकाएँ लंबी और इनका आख्िारी सिरा नुकीला ;तवर्ुफरूपी - ेचपदकसम ेींचमकद्ध होता है। ये एक - वेंफद्रकीय होती हैं। इनको आरेख्िात पेशी भी कहा जाता है। इनका नाम आरेख्िात क्यों है? हृदय की पेश्िायाँ जीवन भर लयब( होकर प्रसार एवं संवुफचन करती रहती हैं। इन अनैच्िछक पेश्िायों को काडिर्क ;हृदयकद्ध पेशी कहा जाता है ख्चित्रा 6ण्11;बद्ध,। हृदय की पेशी कोश्िाकाएँ बेलनाकार, शाखाओं वाली और एक - वेंफद्रकीय होती हैं।विभ्िान्न प्रकार की पेशीय ऊतकों की संरचना की तुलना करें। उनके आकार, वेंफद्रक की संख्या तथा कोश्िाका में वेंफद्रक की स्िथति को नोट करें। वेंफद्रक तवुर्फरूपी पेशीय कोश्िाका ;इद्ध धरियाँ वेंफद्रक ;बद्ध चित्रा 6ण्11रूपेशीय उफतकरू ;ंद्ध रेख्िात पेशीए ;इद्ध चिकनी पेशीए ;बद्ध काडिर्क ;हृदयकद्ध पेशी 6ण्3ण्4 तंत्रिाका ऊतक सभी कोश्िाकाओं में उत्तेजना के अनुवूफल प्रतिियाकरने की क्षमता होती है। यद्यपि, तंत्रिाका ऊतक कीकोश्िाकाएँ बहुत शीघ्र उत्तेजित होती हैं और इसउत्तेजना को बहुत ही शीघ्र पूरे शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती हैं। मस्ितष्क, मेरुरज्जु तथातंत्रिाकाएँ सभी तंत्रिाका ऊतकों की बनी होती हैं।तंत्रिाका ऊतक की कोश्िाकाओं को तंत्रिाका कोश्िाका या न्यूराॅन कहा जाता है। न्यूराॅन में कोश्िाकाएँ वेंफद्रक तथा कोश्िाकाद्रव्य ;साइटोप्लाश्मद्ध होते हैं। इससे लंबे, पतले बालों जैसी शाखाएँ निकली होती हैं ;चित्रा 6.12द्ध। प्रायः प्रत्येक न्यूराॅन में इस तरह का एक लंबा प्रवध्र् होता है, जिसको एक्साॅन कहते हैं तथा बहुत सारे छोटी शाखा वाले प्रवध्र् ;डेंडराइट्सद्ध होते हैं। एक तंत्रिाका कोश्िाका 1 मीटर तक लंबी होसकती है। बहुत सारे तंत्रिाका रेशे संयोजी ऊतक के द्वारा एक साथ मिलकर एक तंत्रिाका का निमार्ण करते हैं। वेंफद्रक डेंड्राइट तंत्रिाकाक्ष कोश्िाकाकाय चित्रा 6ण्12रू न्यूराॅन - तंत्रिाका उफतक की इकाइर् तंत्रिाका का स्पंदन हमें इच्छानुसार अपनी पेश्िायों की गति करने में सहायता करता है। तंत्रिाका तथापेशीय ऊतकों का कायार्त्मक संयोजन प्रायः सभी जीवों में मौलिक है। साथ ही, यह संयोजन उत्तेजना के अनुसार जंतुओं को तेश गति प्रदान करता है। श्न 1ण् उस ऊतक का नाम बताएँ जो हमारे शरीर मेंगति के लिए उत्तरदायी है। 2ण् न्यूराॅन देखने में वैफसा लगता है?प्र3ण् हृदय पेशी के तीन लक्षणों को बताएँ। 4ण् एरिओलर ऊतक के क्या कायर् हैं? आपने क्या सीखा ऽ ऊतक कोश्िाकाओं का समूह होता है जिसमें कोश्िाकाओं की संरचना तथा कायर् एकसमान होते हैं। ऽ पौधें के उफतक ;पादप ऊतकद्ध दो प्रकार के होते हैं कृ विभज्योतक तथा स्थायी ऊतक। ऽ विभज्योतक ;मेरिस्टेमेटिकद्ध ऊतक एक विभाज्य ऊतक है तथा यह पौधें के वृि वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं। ऽ स्थायी ऊतक विभज्योतक से बनते हैं, जो एक बार विभाजित होने की क्षमता को खो देते हैं। इनको सरल तथा जटिल उफतकों में वगीर्वृफत किया जाता है। ऽ पैरेन्काइमा, काॅलेन्काइमा तथा स्क्लेरेन्काइमा सरल ऊतकों के तीन प्रकार हैं।़शाइलम और फ्रलोएम जटिल ऊतकों के प्रकार हैं। ऽ एपिथीलियमी, पेशीय, संयोजी तथा तंत्रिाका ऊतक जंतु ऊतक होते हैं। ऽ आवृफति और कायर् के आधर पर एपिथीलियमी ऊतक को शल्की, घनाकार, स्तंभाकार, रोमीय तथा ग्रंथ्िाल श्रेण्िायों में वगीर्वृफत किया जाता है। ऽ हमारे शरीर में विद्यमान संयोजी ऊतक के विभ्िान्न प्रकार हैंः एरिओलरऊतक, एडीपोश ;वसामयद्ध ऊतक, अस्िथ, वंफडरा, स्नायु, उपास्िथ तथा रक्त ;रुिारद्ध। ऽ पेशीय ऊतक के तीन प्रकार होते हैं कृ रेख्िात, आरेख्िात और काडिर्क ;हृदयक पेशीद्ध। ऽ तंत्रिाका ऊतक न्यूरॅान का बना होता है, जो संवेदना को प्राप्त और संचालित करता है। अभ्यास 1ण् ऊतक को परिभाष्िात करें। 2ण् कितने प्रकार के तत्व मिलकर शाइलम ऊतक का निमार्ण करते हैं? उनके नाम बताएँ। 3ण् पौधें में सरल ऊतक जटिल ऊतक से किस प्रकार भ्िान्न होते हैं? 4ण् कोश्िाका भ्िािा के आधर पर पैरेन्काइमा, काॅलेन्काइमा और स्क्लेरेन्काइमा के बीच भेद स्पष्ट करें। 5ण् रंध््र के क्या कायर् हैं? 6ण् तीनों प्रकार के पेशीय रेशों में चित्रा बनाकर अंतर स्पष्ट करें। 7ण् काडिर्क ;हृदयकद्ध पेशी का विशेष कायर् क्या है? 8ण् रेख्िात, अरेख्िात तथा काडिर्क ;हृदयकद्ध पेश्िायों में शरीर में स्िथत कायर् और स्थान के आधर पर अंतर स्पष्ट करें। 9ण् न्यूराॅन का एक चिित चित्रा बनाएँ। 10ण् निम्नलिख्िात के नाम लिखेंः ;ंद्ध ऊतक जो मुँह के भीतरी अस्तर का निमार्ण करता है। ;इद्ध ऊतक जो मनुष्य में पेश्िायों को अस्िथ से जोड़ता है। ;बद्ध ऊतक जो पौधें में भोजन का संवहन करता है। ;कद्ध ऊतक जो हमारे शरीर में वसा का संचय करता है। ;मद्ध तरल आधत्राी सहित संयोजी ऊतक। ;द्धि मस्ितष्क में स्िथत ऊतक। 11ण् निम्नलिख्िात में ऊतक के प्रकार की पहचान करेंः त्वचा, पौध्े का वल्क, अस्िथ, वृक्कीय नलिका अस्तर, संवहन बंडल। 12ण् पैरेन्काइमा ऊतक किस क्षेत्रा में स्िथत होते हैं? 13ण् पौधें में एप्िाडमिर्स की क्या भूमिका है? 14ण् छाल ;काॅवर्फद्ध किस प्रकार सुरक्षा ऊतक के रूप में कायर् करता है? 15ण् निम्न दी गइर् तालिका को पूणर् करें

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