अध्याय 5 जीवन की मौलिक इकाइर् ;ज्ीम थ्नदकंउमदजंस न्दपज व िस्पमिद्ध कावर्फ की पतली काट के अवलोकन पर राबटर् हुक ने पाया कि इनमें अनेक छोटे - छोटे प्रकोष्ठ हैं, जिसकीसरंचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी प्रतीत होती है। कावर्फ एक पदाथर् है जो वृक्ष की छाल से प्राप्त होता है। सन्1665 में हुक ने इसे स्वनिमिर्त सूक्ष्मदशीर् से देखा था। राबटर् हुक ने इन प्रकोष्ठकों को कोश्िाका कहा। ब्मसस ;कोश्िाकाद्धलैटिन शब्द है जिसका अथर् है फ्छोटा कमराय्। उपरोक्त घटना छोटी तथा अथर्हीन लगती होलेकिन विज्ञान के इतिहास में यह एक बहुत ही महत्वपूणर् घटना है। इस प्रकार सबसे पहले हुक नेदेखा कि सजीवों में अलग - अलग एकक होते हैं। इन एककों का वणर्न करने के लिए जीव विज्ञान मेंकोश्िाका शब्द का उपयोग आज तक किया जाता है। आओ, कोश्िाका के विषय में और जानकारी प्राप्त करें। 5ण्1 सजीव किससे बने होते हैं? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्1 ऽ प्याज का एक छोटा टुकड़ा लो। चिमटी कीसहायता से हम प्याज की अवतल सतह की ओर;भीतरी सतहद्ध से झिल्ली उतार सकते हैं। इसझिल्ली को तुरंत पानी वाले वाॅच ग्लास में रखलेते हैं। इससे झिल्ली मुड़ने अथवा सूखने से बचजाएगी। हम इस झिल्ली से क्या करें? ऽ एक काँच की स्लाइड लो। इस पर पानी की एकबूँद डालो। अब वाॅच ग्लास में रखी झिल्ली केइस छोटे टुकड़े को इस स्लाइड पर रख दो। यहध्यान रखें कि झिल्ली बिलवुफल सीध्ी हो। एकपतला पेंट ब्रुश इस झिल्ली को स्लाइड पर रखनेमें आपकी सहायता कर सकता है। अब इस परएक बूँद सेÚामाइन की डालो और इसे कवर स्िलप से ढक दो। कवर स्िलप को सुइर् कीसहायता से इस प्रकार रखें जिससे कि इसमें वायुके बुलबुले न आने पाएँ। अपने अध्यापक सेसहायता लें। हमने प्याज की झिल्ली की अस्थायीस्लाइड बनाइर् है। अब हम इसे पहले कम शक्ितवाले तथा उसके बाद उच्च शक्ित वाले संयुक्त सूक्ष्मदशीर् से देखते हैं। नेत्रिाका लेंस प्रारंभ्िाक समायोजन देह नलिका सूक्ष्म समायोजन भुजा क्िलपअभ्िादृश्यक लेंस सूक्ष्मदशीर् स्लाइड मंच घूणीर् पेंचसंग्राही दपर्ण ;परावतर्कद्ध आधर चित्रा 5ण्1रू संयुक्त सूक्ष्मदशीर् आपने क्या देखा? क्या आप जो संरचना सूक्ष्मदशीर्के द्वारा देखते हैं उसे कागज पर खींच सकते हैं? क्यायह चित्रा 5.2 जैसी दिखाइर् देती है? वेंफद्रक कोश्िाकाएँ चित्रा 5ण्2रू प्याज की झिल्ली की कोश्िाकाएँ अब हम विभ्िान्न आकार वाली प्याज की झिल्िलयों से अस्थायी स्लाइड बनाएँगे। हम क्या देखते हैं? क्याहम एकसमान संरचनाओं को देखते हैं अथवा भ्िान्न - भ्िान्न? ये संरचनाएँ क्या हैं? ये सभी संरचनाएँ एक जैसी दिखाइर् देती हैं। ये सभी मिलकर एक बड़ी संरचना ;शल्क कंदद्ध बनाते हैं जैसे प्याज। इस ियाकलाप से हमें पता चलता है किविभ्िान्न आकार के प्याज में सूक्ष्मदशीर् द्वारा देखने पर एक जैसी संरचनाएँ दिखाइर् देती हैं। प्याज की झिल्लीकी कोश्िाकाएँ एकसमान हैं। प्याज के आकार से इसका कोइर् संबंध् नहीं है।ये छोटी - छोटी संरचनाएँ जो हम देख रहे हैं शल्क कंद प्याज की मूलभूत इकाइर् है। इन संरचनाओंको कोश्िाका कहते हैं। न केवल प्याज बल्िक जितने भी जीव - जंतु हम अपने आस - पास देखते हैं वे सभीकोश्िाकाओं से बनते हैं। यद्यपि, वुफछ जीव एककोश्िाक भी होते हैं। आवध्र्क लेंस की खोज के बाद सूक्ष्मदशीर् का आविष्कार संभव हो सका। यह पता चला है कि एक मात्रा कोश्िाका स्वयं में ही एक संपूणर् जीव जैसे अमीबा, क्लैमिडोमोनास, पैरामीश्िायम तथा बैक्टीरिया हो सकती है। इन सजीवों को एककोश्िाक जीव कहते हैं। इसके अतिरिक्त बहुकोश्िाक जीवों में अनेक कोश्िाकाएँ समाहित होकर विभ्िान्न कायो± को सम्पन्न करने हेतु विभ्िान्न अंगों का निमार्ण करती हैं। इसके वुफछ उदाहरण हैं पंफजाइर् ;कवकद्ध, पादप तथा जंतु। क्या हम वुफछ और एककोश्िाक जीवों के विषय में पता कर सकते हैं? प्रत्येक बहुकोश्िाक जीव एक कोश्िाका से ही विकसित हुआ है। वैफसे? कोश्िाकाएँ विभाजित होकर अपनी ही जैसी कोश्िाकाएँ बनाती हैं। इस प्रकार सभी कोश्िाकाएँ अपनी पूवर्वतीर् कोश्िाकाओं से उत्पन्न होती हैं। जीवन की मौलिक इकाइर् 5ण्2 ऽ हम पत्ती की झिल्ली, प्याज की मूलाग्र अथवा विभ्िान्न आकार के प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बना सकते हैं। ऽ उपरोक्त ियाकलाप करने के बाद निम्नलिख्िातप्रश्नों के उत्तर दीजिए: ;पद्ध क्या सभी कोश्िाकाएँ आकार तथा आवृफति की दृष्िट से एक जैसी दिखाइर् देती हैं? ;पपद्ध क्या सभी कोश्िाकाओं की संरचना एक जैसी दिखाइर् देती है? ;पपपद्ध क्या पादप के विभ्िान्न भागों में पायी जाने वाली कोश्िाकाओं में कोइर् अंतर है? ;पअद्ध हमें कोश्िाकाओं में क्या समानता दिखाइर् देती है? 65 शुक्राणु चित्रा 5ण्3रू मानव शरीर की विभ्िान्न कोश्िाकाएँ कोश्िाकाओं की आवृफति तथा आकार उनके विश्िाष्ट कायो± के अनुरूप होते हैं। वुफछ कोश्िाकाएँ अपना आकार बदलती रहती हैं जैसे एककोश्िाक अमीबा । वुफछ जीवों में कोश्िाका का आकार लगभग स्िथर रहता है और प्रत्येक प्रकार की कोश्िाका के लिए विश्िाष्ट होता हैऋ उदाहरण के लिए तंत्रिाका कोश्िाका। प्रत्येक जीवित कोश्िाका में वुफछ मूलभूत कायर् करने की क्षमता होती है, जो सभी सजीवों का गुण है। एक जीवित कोश्िाका ये मूलभूत कायर् वैफसे करती है? हम जानते हैं कि बहुकोश्िाक जीवों में श्रम विभाजन होता है जैसा कि मनुष्यों में। इसका अथर् यह है कि शरीर के विभ्िान्न अंग विभ्िान्न कायर् करते हैं। जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय रुध्िर को पम्प करता है तथा आमाशय भोजन का पाचन आदि। इसी प्रकार एककोश्िाक में भी श्रम विभाजन होता है। वास्तव में ऐसी प्रत्येक कोश्िाका में वुफछ विश्िाष्ट घटक होते हैं जिन्हें कोश्िाकांग कहते हैं। प्रत्येक कोश्िाकांग एक विश्िाष्ट कायर् करता है जैसे कोश्िाका में नए पदाथर् का निमार्ण, अपश्िाष्ट पदाथो± का निष्कासन आदि। इन कोश्िाका का संरचनात्मक संगठन क्या है? हमने देखा कि कोश्िाका में विश्िाष्ट घटक होते हैं जिन्हें कोश्िाकांग कहते हैं। कोश्िाका वैफसे संगठित होती है? यदि हम कोश्िाका का अध्ययन सूक्ष्मदशीर् से करें तो हमें लगभग प्रत्येक कोश्िाकाओं में तीन गुण दिखाइर् देंगेऋ प्लैज्मा झिल्ली, वेंफद्रक तथा कोश्िाकाद्रव्य। कोश्िाका के अंदर होने वाले समस्त ियाकलाप तथा उसकी बाह्य पयार्वरण से पारस्परिक ियाएँ इन्हीं गुणों के कारण संभव हैं। आओ देखें वैफसे? 5ण्2ण्1 प्लैज्मा झिल्ली अथवा कोश्िाका झिल्ली यह कोश्िाका की सबसे बाहरी परत है जो कोश्िाका के घटकों को बाहरी पयार्वरण से अलग करती है। प्लैज्मा झिल्ली वुफछ पदाथो± को अंदर अथवा बाहर आने - जाने देती है। यह अन्य पदाथो± की गति को भी रोकती है। कोश्िाका झिल्ली को इसलिए वणार्त्मक पारगम्य झिल्ली कहते हैं। कोश्िाका में पदाथो± की गति वैफसे होती है? पदाथर् कोश्िाका से बाहर वैफसे आते हैं? वुफछ पदाथर् जैसे काबर्न डाइआॅक्साइड अथवा आॅक्सीजन कोश्िाका झिल्ली के आर - पार विसरण प्रिया द्वारा आ - जा सकते हैं। हम पिछले अध्यायों में विसरण की प्रवि्रफया के विषय में पढ़ चुके हैं। हमने देखा है कि पदाथो± की गति उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर होती है। वुफछ इसी प्रकार की प्रिया कोश्िाका में होती है, उदाहरण के लिए, जब वुफछ पदाथर् जैसे ब्व्;जो एक2 कोश्िाकीय अपश्िाष्ट है और जिसका निष्कासन आवश्यक हैद्ध कोश्िाका में एकत्रा हो जाती है तो उसकी सांद्रता बढ़ जाती है। कोश्िाका के बाह्य पयार्वरण मेंब्व्2 की सांद्रता कोश्िाका में स्िथत ब्व्की सांद्रता की अपेक्षा2 कम होती है। जैसे ही कोश्िाका के अंदर और बाहर ब्व्2 की सांद्रता में अंतर आता है उसी समय उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर विसरण द्वारा कोश्िाका से ब्व्2 बाहर निकल जाती है। इसी प्रकार जब कोश्िाका में आॅक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है तो व्बाहर2 से कोश्िाका में विसरण द्वारा अंदर चली जाती है। अतः कोश्िाका तथा बाह्य पयार्वरण में गैसों के आदान - प्रदान में विसरण एक महत्वपूणर् भूमिका निभाती है। जल भी विसरण के नियमों के अनुवूफल व्यवहार करता है। जल के अणुओं की गति जब वणार्त्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा हो तो उसे परासरण कहते हैं। प्लैज्मा झिल्ली से जल की गति जल में घुले पदाथो± की मात्रा के कारण भी प्रभावित होती है। इस प्रकार परासरण मेंजल के अणु वणार्त्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च जल की सांद्रता से निम्न जल की सांद्रता की ओर जाते हैं। यदि हम किसी जंतु कोश्िाका अथवा पादप कोश्िाका को शक्कर अथवा नमक के विलयन में रखें तो क्या होगा? निम्नलिख्िात तीन घटनाओं में से एक घटना हो सकती हैः 1ण् यदि कोश्िाका को तनु विलयन वाले माध्यम अथार्त् जल में शक्कर अथवा नमक की मात्रा कम और जल की मात्रा ज्यादा है, में रखा गया है तो जल परासरण विध्ि द्वारा कोश्िाका के अंदर चला जाएगा। ऐसे विलयन को अल्पपरासरण दाबी विलयन कहते हैं। जीवन की मौलिक इकाइर् जल के अणु कोश्िाका झिल्ली के दोनों ओर आवागमन करने के लिए स्वतंत्रा होते हैं, लेकिन कोश्िाका के अंदर जाने वाले जल की मात्रा कोश्िाका से बाहर आने वाले जल की मात्रा से अध्िक होगी। इस प्रकार शु( परिणाम यह होगा कि जल कोश्िाका के अंदर गया। इससे कोश्िाका पूफलने लगेगी। 2ण् यदि कोश्िाका को ऐसे माध्यम विलयन में रखा जाए जिसमें बाह्य जल की सांद्रता कोश्िाका में स्िथत जल की सांद्रता के ठीक बराबर हो तो कोश्िाका झिल्ली से जल में कोइर् शु( गति नहीं होगी। ऐसे विलयन को समपरासारी विलयन कहते हैं। जल कोश्िाका झिल्ली के दोनों ओर आता - जाता है, लेकिन जल की जो मात्रा अंदर गइर् उतनी ही बाहर आ जाती है। इस प्रकार व्यापक रूप से जल की कोइर् गति नहीं हुइर्। इसलिए कोश्िाका के माप में कोइर् परिवतर्न नहीं आएगा। 3ण् यदि कोश्िाका के बाहर वाला विलयन अंदर के घोल से अध्िक सांद्र है तो जल परासरण द्वारा कोश्िाका से बाहर आ जाएगा। ऐसे विलयन को अतिपरासरणदाबी विलयन कहते हैं। पुनः जल कोश्िाका झिल्ली के दोनों ओर आ - जा सकता है, लेकिन इस स्िथति में कोश्िाका से अध्िक जल बाहर आएगा और कम जल अंदर जाएगा। इसलिए कोश्िाका सिवुफड़ जाएगी। परासरण इस प्रकार विसरण की एक विश्िाष्ट विध्ि है जिसमें वणार्त्मक झिल्ली द्वारा गति होती है। आओ, निम्नलिख्िात ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्3 अंडे से परासरण ;ंद्ध अंडे को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डालकर उसके कवच को हटाओ। इसका कवच अध्ि कांशतः वैफल्िसयम काबोर्नेट का बना होता है। एक पतली बाह्य त्वचा ;झिल्लीद्ध अब अंडे को 67 घेरे रखती है। अंडे को शु( जल में रखो और 5 मिनट के बाद इसका अवलोकन करो। आप क्या देखते हैं? अंडा पूफल जाता है क्योंकि परासरण द्वारा जल अंडे के अंदर चला जाता है। ;इद्ध इसी प्रकार का एक कवचरहित अंडा नमक के सांदि्रत विलयन में रखो और 5 मिनट तक उसका अवलोकन करो। अंडा सिवुफड़ जाता है। क्यों? जल अंडे से निकलकर नमक के विलयन में आ जाता है, क्योंकि नमक का घोल अध्िक सांदि्रत है। इस प्रकार का ियाकलाप हम सूखी किशमिश अथवा खूबानी से भी करने का प्रयत्न कर सकते हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्4 ऽ सूखी किशमिश अथवा खूबानी को केवल जल में रखो और उसे वुफछ समय के लिए छोड़ दो। उसके बाद उसे शक्कर अथवा नमक के सांदि्रत विलयन में रखो। आप निम्नलिख्िात अंतर देखंेगे। ;ंद्ध जब उन्हें जल में रखा गया तो वे जल ग्रहण करके पूफल गईं। ;इद्ध जब उन्हें सांदि्रत घोल में रखा गया तो वे जल को बाहर निकाल कर सिवुफड़ गईं। एककोश्िाकीय अलवणीय जलीय जीवों तथा अध्िकांश पादप कोश्िाकाएँ परासरण द्वारा जल ग्रहण करते हैं। पौधें के मूल द्वारा जल का अवशोषण परासरण का एक उदाहरण है। इस प्रकार कोश्िाका के जीवन में विसरण जल तथा गैसों के आदान - प्रदान की प्रवि्रफया में महत्वपूणर् भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त विसरण, कोश्िाका को अपने बाहरी पयार्वरण से पोषण ग्रहण करने में सहायता करता है। कोश्िाका से विभ्िान्न अणुओं का अंदर आना तथा बाहर निकलना भी विसरण द्वारा हीहोता है। इस प्रकार के परिवहन में ऊजार् की आवश्यकता होती है। प्लैज्मा झिल्ली लचीली होती है और काबर्निक अणुओं जैसे लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती है। प्लैज्मा झिल्ली की रचना हम केवल इलैक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् से देख सकते हैं। कोश्िाका झिल्ली का लचीलापन एककोश्िाक जीवों में कोश्िाका के बाह्य पयार्वरण से अपना भोजन तथा अन्य पदाथर् ग्रहण करने में सहायता करता है। ऐसी प्रिया को एन्डोसाइटोसिस कहते हैं। अमीबा अपना भोजन इसी प्रिया द्वारा प्राप्त करता है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्5 प्रऽ विद्यालय के पुस्तकालय अथवा इंटरनेट से इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् के विषय में पता करेें। इसके विषय में अपने अध्यापक से चचार् करें। श्न 1ण् ब्व्2 तथा पानी जैसे पदाथर् कोश्िाका से वैफसे अंदर तथा बाहर जाते हैं? इस पर चचार् करें। 2ण् प्लैज्मा झिल्ली को वणार्त्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं? 5ण्2ण्2 कोश्िाका भ्िािा पादप कोश्िाकाओं में प्लैज्मा झिल्ली के अतिरिक्तकोश्िाका भ्िािा भी होती है। पादप कोश्िाका भ्िािा मुख्यतः सेल्यूलोज की बनी होती है। सेल्यूलोज एक बहुत जटिल पदाथर् है और यह पौधें को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है। जब किसी पादप कोश्िाका में परासरण द्वारा पानी की हानि होती है तो कोश्िाका झिल्ली सहित आंतरिक पदाथर् संवुफचित हो जाते हैं। इस घटना को जीवद्रव्य वुंफचन कहते हैं। हम इस परिघटना को निम्न ियाकलाप द्वारा देख सकते हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्6 ऽ रिओ की पत्ती की झिल्ली को पानी में रखकर एक स्लाइड बनाओ। इसे उच्च शक्ित वाले सूक्ष्मदशीर् से देखो। छोटे - छोटे हरे कण दिखाइर् देंगे। इन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। इनमें एक हरा पदाथर् होता है जिसे क्लोरोपिफल कहते हैं। इस स्लाइड पर शक्कर अथवा नमक का सांद्र विलयन डालो। एक मिनट प्रतीक्षा करो और इसे सूक्ष्मदशीर् से देखो। हम क्या देखते हैं? ऽ अब रिओ की पिायों को वुफछ मिनट तक जलमें उबालो। इससे पिायों की सभी कोश्िाकाएँ मरजाएँगी। अब एक पिायों को स्लाइड पर रखो और उसे सूक्ष्मदशीर् से देखो। स्लाइड पर रखी इसपत्ती पर शक्कर अथवा नमक का सांद्र विलयन डालो। एक मिनट प्रतीक्षा करो और पुनः सूक्ष्मदशीर् से देखो। हम क्या देखते हैं? क्या अब जीवद्रव्य वुंफचन हुआ? इस ियाकलाप से क्या निष्कषर् निकलता है? इससे पता लगता है कि केवल जीवित कोश्िाकाओं में ही परासरण द्वारा जल अवशोषण की क्षमता होती है कोश्िाका को रँगने के लिए हम आयोडीन विलयन के अतिरिक्त सैप्रफानिन अथवा मेथलीन ब्लू विलयन का भी उपयोग कर सकते हैं। हमने प्याज की कोश्िाका को देखा हैऋ आओ, अब हम अपने शरीर से ली गइर् कोश्िाकाओं को देखें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 5ण्7 ऽ काँच की एक स्लाइड लो और उस पर एक बूँद पानी रखो। आइसक्रीम खाने वाले चम्मच से अपने गाल के अंदर की खाल को ध्ीरे से खुरचो। क्या चम्मच पर कोइर् वस्तु चिपक गइर् है? सूइर् की सहायता से इसे स्लाइड पर समान रूप से पैफला कर ँरखो। इसे रगने के लिए एक बूँद मेथलीन ब्लू की डालें। सूक्ष्मदशीर् द्वारा अवलोकन के लिए स्लाइडन कि मृत कोश्िाकाओं में। कोश्िाका भ्िािा पौधें, कवक तथा बैक्टीरिया की कोश्िाकाओं को अपेक्षावृफत कम तनु विलयन ;अल्पपरासरण दाबी विलयनद्ध में बिना पफटे बनाए रखती है। ऐसे माध्यम से कोश्िाका परासरण विध्ि द्वारा पानी लेती है। कोश्िाका पूफल जाती है औरकोश्िाका भ्िािा के ऊपर दबाव डालती है। कोश्िाकाभ्िािा भी पूफली हुइर् कोश्िाका के प्रति समान रूप सेदबाव डालती है। कोश्िाका भ्िािा के कारण पादप कोश्िाकाएँ परिवतर्नीय माध्यम को जंतु कोश्िाका की अपेक्षा आसानी से सहन कर सकती है। 5ण्2ण्3 वेंफद्रक आपको याद होगा कि हमने प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बनाइर् थी। हमने इस झिल्ली पर आयोडीन की बूँद डाली थी। क्यों? यदि हम बिना आयोडीन के स्लाइड देखें तो हम क्या देखेंगे? प्रयत्न करो और देखो कि क्या अंतर है। जब हमने आयोडीन का घोल डाला तो क्या प्रत्येक कोश्िाका समान रूप से रंगीन हो गइर्? कोश्िाका के विभ्िान्न भाग रासायनिक संघटन के आधर पर विभ्िान्न रंगों से रँगे जाते हैं। वुफछ क्षेत्रा अिाक गहरे रंग के प्रतीत होते हैं तथा वुफछ कम। जीवन की मौलिक इकाइर् तैयार है। इस पर कवर स्िलप रखना ना भूलें। ऽ हम क्या देखते हैं? कोश्िाकाओं की आकृति वैफसी है? इस आवृफति को एक पेपर ;कागजद्ध पर बनाएँ। ऽ क्या आप कोश्िाका के मध्य में एक गहरे रंग वाली गोलाकार अथवा अंडाकार, डाॅट की तरह की संरचना देख रहे हैं? इस संरचना को वेंफद्रक कहते हैं। क्या इसी प्रकार की संरचना प्याज की झिल्ली में भी थी? वेंफद्रक के चारों ओर दोहरे परत का एक स्तर होता है जिसे वेंफद्रक झिल्ली कहते हैं। वेंफद्रक झिल्लीमें छोटे - छोटे छिद्र होते हैं। इन छिद्रों के द्वारा वेंफद्रक के अंदर का कोश्िाकाद्रव्य वेंफद्रक के बाहर जा पाताहै। कोश्िाकाद्रव्य के विषय में हम अनुभाग 5.2.4 में पढ़ेंगे। वेंफद्रक में क्रोमोसोम होते हैं जो कोश्िाका विभाजन के समय छड़ाकार दिखाइर् पड़ते हैं। क्रोमोसोम मेंआनुवांश्िाक गुण होते हैं जो माता - पिता से क्छ। ;डिआॅक्सी राइबो न्यूक्लीक अम्लद्ध अणु के रूप मेंअगली संतति मंे जाते हैं। क्रोमोसोम क्छ। तथा प्रोटीन के बने होते हैं। क्छ। अणु में कोश्िाका के निमार्ण वसंगठन की सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं। क्छ। के वि्रफयात्मक खंड को जीन कहते हैं। जो कोश्िाका विभाजित नहीं हो रही होती है उसमें यह क्छ। 69 क्रोमैटिन पदाथर् के रूप में विद्यमान रहता है। क्रोमैटिन पदाथर् धगे की तरह की रचनाओं के एक जाल का पिंड होता है। जब कभी भी कोश्िाका विभाजित होने वाली होती है, तब यह क्रोमोसोम में संगठित हो जाता है। वुफछ जीवों में कोश्िाकीय जनन में वेंफद्रक महत्वपूणर् भूमिका निभाता है। इस प्रिया में एक अकेली कोश्िाका विभाजित होकर दो नयी कोश्िाकाएँ बनाती हैं। यह कोश्िाका के विकास व परिपक्वन को निधार्रित करता है तथा साथ ही सजीव कोश्िाका की रासायनिक ियाओं को भी निदेर्श्िात करता है। बैक्टीरिया जैसे वुफछ जीवों में कोश्िाका का वेंफद्रकीय क्षेत्रा बहुत कम स्पष्ट होता है क्योंकि इसमें वेंफद्रक झिल्ली नहीं होती। ऐसे अस्पष्ट वेंफद्रक क्षेत्रा में केवल क्रोमैटिन पदाथर् होता है। ऐसे क्षेत्रा को वेंफद्रकाय कहते हैं। ऐसे जीव जिसकी कोश्िाकाओं में वेंफद्रक झिल्ली नहीं होती उन्हें प्रोवैफरियोट ;प्रो - आदि अथवा पूवर्ऋ वैफरियोट = वैफरियोन = वेंफद्रकद्ध। जिन जीवों की कोश्िाकाओं में वेंफद्रक झिल्ली होती है उन्हें यूवैफरियोट कहते हैं। प्रोवैफरियोटी कोश्िाकाओं ;चित्रा 5.4द्ध में और भी अन्य अध्िकांश द्रव्य अंगक नहीं होते हैं जो कि यूवैफरियोटी कोश्िाकाओं में होते हैं। ऐसे अंगकों के अनेक कायर् भी कोश्िाका द्रव्य के असंगठित भागों द्वारा ही किए जाते हैं ;अनुभाग 5.2.4 पढ़ेंद्ध। प्रकाश संश्लेषी बैक्टीरिया में क्लोरोपिफल झिल्लीदार पुटिका ;थैले की तरह की संरचनाद्ध के साथ होता है जबकि यूवैफरियोटी कोश्िाकाओं में क्लोरोपिफल प्लैस्िटड में होता है ;अनुभाग 5.2.5 देखेंद्ध। राइबोसोम 5ण्2ण्4 कोश्िाका द्रव्य जब हमने प्याज की झिल्ली तथा मनुष्य के गाल कीकोश्िाकाओं की स्लाइड को देखा, तब हमें प्रत्येक कोश्िाका में एक बड़ा क्षेत्रा दिखा जो कोश्िाका झिल्ली से घ्िारा हुआ था। इस क्षेत्रा में बहुत हलका धब्बा था। इसे कोश्िाका द्रव्य कहते हैं। प्लैज्मा झिल्ली के अंदर कोश्िाका द्रव्य एक तरल पदाथर् है। इसमें बहुत से विश्िाष्ट कोश्िाका के घटक होते हैं जिन्हें कोश्िाक का अंगक कहते हैं। प्रत्येक अंगक कोश्िाका के लिए विश्िाष्ट कायर् करते हैं। कोश्िाका द्रव्य तथा वंेफद्रक दोनों को मिलाकर जीवद्रव्य कहते हैं। कोश्िाका अंगक झिल्ली युक्त होते हैं। प्रोवैफरियोटी कोश्िाकाओं में वास्तविक वेंफद्रक के अतिरिक्त झिल्ली युक्त अंगक भी नहीं होेत। जबकि यूवैफरियोटी कोश्िाकाओं में वेंफद्रकीय झिल्ली तथा झिल्ली युक्त अंगक होते हैं। झिल्ली की साथर्कता वाइरस के उदाहरण से स्पष्ट कर सकते हैं। वाइरस में किसी भी प्रकार की झिल्ली नहीं होती और इसलिए इसमें जीवन के गुण तब तक लक्ष्िात नहीं होते जब तक कि यह किसीसजीव के शरीर में प्रविष्ट करके कोश्िाका की मशीनरीका उपयोग कर अपना बहुगुणन नहीं कर लेता। श्न 1ण् क्या अब आप निम्नलिख्िात तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों को भर सवफते हैं, जिससेकि प्रोवैफरियोटी तथा यूवैफरियोटी कोश्िाकाओंप्र में अंतर स्पष्ट हो सकेः 5ण्2ण्5 कोश्िाका अंगक प्रत्येक कोश्िाका के चारों ओर अपनी झिल्ली होती है जिससे कि उसमें स्िथत पदाथर् बाह्य पयार्वरण से अलग रहे। बड़ी तथा जटिल कोश्िाकाओं, जिसमें बहुकोश्िाक जीवों की कोश्िाकाएँ भी शामिल हैं, को भी उपापचयी ियाओं की बहुत आवश्यकता होती है जिससे कि वे जटिल संरचना तथा कायर् को सहारा दे सवेंफ। इन विभ्िान्न प्रकार की उपापचयी ियाओं को अलग - अलग रखने के लिए, ये कोश्िाकाएँ झिल्लीयुक्त छोटी - छोटी संरचनाओं ;अंगकद्ध का उपयोग करती हैं। यह यूवैफरियोटी कोश्िाकाओं का एक ऐसा गुण है जो उन्हें प्रोवैफरियोटी कोश्िाकाओं से अलग करता है। इनमें से वुफछ अंगक केवल इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् से ही देखे जा सकते हैं। हमने पिछले अनुभाग में वेंफद्रक के विषय में पढ़ा है। अंतद्रर्व्यी जालिका, गाॅल्जी उपकरण, लाइसोसोम, माइटोकाॅन्िड्रया, प्लैस्िटड तथा रसधनीऋ कोश्िाका अंगकों के महत्वपूणर् उदाहरण हैं जिन पर हम विचार करेंगे। ये इसलिए महत्वपूणर् हंै क्योंकि ये कोश्िाकाओं के बहुत निणार्यक कायर् करते हैं। 5ण्2ण्5 ;पद्ध अंतद्रर्व्यी जालिका ;म्त्द्ध अंतद्रर्व्यी जालिका झिल्ली युक्त नलिकाओं तथा शीट का एक बहुत बड़ा तंत्रा है। ये लंबी नलिका अथवा गोल या आयताकार थैलांे ;पुटिकाओंद्ध की तरह दिखाइर् देती हैं। अंतद्रर्व्यी जालिका की रचना भी प्लैज्मा झिल्ली के समरूप होती है। अंतद्रर्व्यी जालिका दो प्रकार की होती हैः खुरदरी अंतद्रर्व्यी जालिका ;त्म्त्द्ध तथा चिकनी अंतद्रर्व्यी जालिका ;ैम्त्द्ध। त्म्त् सूक्ष्मदशीर् से देखने पर खुरदरी दिखाइर् पड़ती है क्योंकि इस पर राइबोसोम लगे होते हैं। राइबोसोम पर प्रोटीन संश्लेष्िात होती है। त्म्त् तैयार प्रोटीन को आवश्यकतानुसार म्त् के द्वारा कोश्िाका के अन्य भागों में भेज देता है। ैम्त् वसा अथवा लिपिड अणुओं के बनाने में सहायता करती है। यह कोश्िाकीय वि्रफया के लिए बहुत महत्वपूणर् है। वुफछ प्रोटीन तथा वसा कोश्िाका झिल्ली को बनाने में सहायता करते हैं। इस प्रिया को झिल्ली जीवात् - जनन कहते हैं। वुफछ अन्य प्रोटीन तथा वसा, एंजाइम एवं हामार्ेन की भाँति कायर् करते हैं। यद्यपि विभ्िान्न कोश्िाकाओं में म्त् भ्िान्न रूपों में दिखाइर् देती है परंतु सदैव एक जालिका तंत्रा का निमार्ण करती है। तारक वेंफद्र चिकनी अंतद्रर्व्यी जालिका लाइसोसोमवेंफद्रकीय झिल्ली राइबोसोम माइटोकांडिªयन खुरदरी अंतद्रर्व्यी जालिका इस प्रकार म्त् का एक कायर् कोश्िाकाद्रव्य के विभ्िान्न क्षेत्रों के मध्य अथवा कोश्िाकाद्रव्य के विभ्िान्न क्षेत्रों तथा वेंफद्रक के मध्य पदाथो± ;मुख्यतः प्रोटीनद्ध के परिवहन के लिए नलिका के रूप में कायर् करना है। म्त् कोश्िाका की वुफछ जैव रासायनिक ियाओं के लिए कोश्िाका द्रव्यी ढाँचे का कायर् भी करती है। एक वगर् के जंतुओं, जिन्हें कशेरुकी भी कहते हैं;अध्याय - 7 देखेंद्ध, के यकृत की कोश्िाकाओं में ैम्त् विष तथा दवा को निराविषीकरण करने में महत्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। 5ण्2ण्5 ;पपद्ध गाॅल्जी उपकरण गाॅल्जी उपकरण का सबसे पहले विवरण वैफमिलो गाॅल्जी ने किया था। गाॅल्जी उपकरण झिल्ली युक्तपुटिका है जो एक - दूसरे के ऊपर समानांतर रूप से सजी रहती है। जिन्हें वुंफडिका कहते हैं। इन झिल्िलयों का संपवर्फ म्त् झिल्िलयों से होता है और इसलिए जटिल कोश्िाकीय झिल्ली तंत्रा के दूसरे भाग को बनाती है। खुरदरी अंतद्रर्व्यी जालिकालाइसोसोम चित्रा 5ण्6 रू पादप कोश्िाका म्त् में संश्लेष्िात पदाथर् गाॅल्जी उपकरण में पैक किए जाते हैं ओर उन्हें कोश्िाका के बाहर तथा अंदर विभ्िान्न क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। इस कायर् में शामिल हंै पुटिका में पदाथो± का संचयन, रूपांतरण तथा बंद करना। वुफछ परिस्िथति में गाॅल्जी उपकरण में सामान्य शक्कर से जटिल शक्कर बनती है। गाॅल्जी उपकरण के द्वारा लाइसोसोम को भी बनाया जाता है। 5ण्2ण्5 ;पपपद्ध लाइसोसोम लाइसोसोम कोश्िाका का अपश्िाष्ट निपटाने वाला तंत्रा है। लाइसोसोम बाहरी पदाथर् के कोश्िाका अंगकों के टूटे - पूफटे भागों को पाचित करके कोश्िाका को सापफ करते हैं। कोश्िाका के अंदर आने वाले बाहरी पदाथर् जैसे बैक्टीरिया अथवा भोजन तथा पुराने अंगक लाइसोसोम में चले जाते हैं जो उन्हें छोटे - छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं। लाइसोसोम में बहुत शक्ितशाली पाचनकारी एंजाइम होते हैं जो सभी काबर्निक पदाथो± को तोड़ सकने में सक्षम होते हैं। कोश्िाकीय चयापचय ;उमजंइवसपेउद्ध में व्यवधन के कारण जब कोश्िाका क्षतिग्रस्त या मृत हो जाती है, तो लाइसोसोम पफट जाते हैं और एंजाइम अपनी ही कोश्िाकाओं को पाचित कर देते हैं इसलिए लाइसोसोम को कोश्िाका की ‘आत्मघाती थैली’ भी कहते हैं। संरचनात्मक दृष्िट से, लाइसोसोम में झिल्ली से घ्िारी हुइर् संरचना होती है जिनमें पाचक एंजाइम होते हैं। त्म्त् इन एंजाइमों को बनाते हैं। वैफमिलो गाॅल्जी काजन्म 7जुलाइर्, 1843 को ब्रेसिका के समीप कोरटनो में हुआ था। उन्होंने पाविआ विश्वविद्यालय से मेडिसिन का अध्ययन किया। 1865 में स्नातक के बाद उन्होंने पाविआ के सेंट मेटिओ के अस्पताल मेंअध्ययन जारी रखा। उस समय उनकी सारी खोज तंत्रिाका तंत्रा से संबंध्ित थी। 1872 में उन्होंने एबियाटेग्रेसो के एक दीघर्कालिक रोग के अस्पताल में मुख्य चिकित्सा पदाध्िकारी का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने सबसे पहले अपनी खोज इसअस्पताल के किचन में तंत्रिाका तंत्रा पर की। उन्होंने इस छोटी - सी किचन को प्रयोगशाला बना लिया था। उनका सबसे महत्वपूणर् कायर् यह था कि उन्होंने अकेली तंत्रिाका तथा कोश्िाका संरचनाओं को अभ्िारंगित करने की क्रांतिकारी विध्ि प्रदानकी। इस विध्ि को फ्ब्लैक रिएक्शनय् के नाम से जाना गया। इस विध्ि में उन्होंने सिल्वर नाइट्रेट के तनु घोल का उपयोग किया था और विशेषतः यह कोश्िाकाओं की कोमल शाखाओं की प्रियाओं का मागर् पता लगाने में महत्वपूणर् था। सारा जीवनवे इसी दिशा में कायर् करते रहे और इस विध्ि में सुधर करते रहे। गाॅल्जी ने अपने शोध् के लिए उच्चतम उपाध्ि तथा पुरस्कार प्राप्त किए। सन् 1906 में इन्हें सैंटियागो रैमोनी कजाल के साथ संयुक्त रूप से तंत्रिाका तंत्रा की संरचना कायर् केलिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 5ण्2ण्5 ;पअद्ध माइटोकाॅन्िड्रया माइटोकाॅन्िड्रया कोश्िाका का बिजलीघर है। जीवन के लिए आवश्यक विभ्िान्न रासायनिक ियाओं को करने के लिए माइटोकाॅन्िड्रया ।ज्च् ;ऐडिनोसिन ट्राइपफाॅस्पेफटद्धके रूप में ऊजार् प्रदान करते हैं। ।ज्च् कोश्िाका की ऊजार् है। शरीर नए रासायनिक यौगिकों को बनाने तथा यांत्रिाक कायर् के लिए ।ज्च् में संचित ऊजार् का उपयोग करता है। माइटोकाॅन्िड्रया में दोहरी झिल्ली होती है। बाहरी झिल्ली छिदि्रत होती है। भीतरी झिल्ली बहुत अध्िक वलित होती है। ये वलय ।ज्च्.बनाने वाली रासायनिक ियाओं के लिए एक बड़ा क्षेत्रा बनाते हैं। माइटोकाॅन्िड्रया बहुत अद्भुत अंगक है क्योंकि इसमें उसका अपना क्छ। तथा राइबोसोम होते हैं। अतः माइटोकाॅन्िड्रया अपना वुफछ प्रोटीन स्वयं बनाते हैं। 5ण्2ण्5 ;अपद्ध रसधनियाँ रसधनियाँ ठोस अथवा तरल पदाथो± की संग्राहक थैलियाँ हंै। जंतु कोश्िाकाओं में रसधनियाँ छोटी होती हैं जबकि पादप कोश्िाकाओं में रसधनियाँ बहुत बड़ी होती हैं। वुफछ पौधें की कोश्िाकाओं की वेंफद्रीय रसधनी की माप कोश्िाका के आयतन का 50ः से 90ः तक होता है। पादप कोश्िाकाओं की रसधनियों में कोश्िाका द्रव्य भरा रहता है और ये कोश्िाकाओं को स्पफीति तथा कठोरता प्रदान करती हैं। पौधें के लिए आवश्यक बहुत से पदाथर् रसधनी में स्िथत होते हैं। ये अमीनो अम्ल, शवर्फरा, विभ्िान्न काबर्निक अम्ल तथा वुफछ प्रोटीन हैं। एककोश्िाक जीवों, जैसे अमीबा, की खाद्य रसधनी में उनके द्वारा उपभोग में लाए गए खाद्य पदाथर् होते हंै। वुफछ एककोश्िाक जीवों में विश्िाष्ट रसधानियाँ अतिरिक्त जल तथा वुफछ अपश्िाष्ट पदाथो± को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूणर् भूमिकाएँनिभाती हैं। 5ण्2ण्5 ;अद्ध प्लैस्िटड प्लैस्िटड केवल पादप कोश्िाकाओं में स्िथत होते हैं। प्लैस्िटड दो प्रकार के होते हैंः क्रोमोप्लास्ट ;रंगीन प्लैस्िटडद्ध तथा ल्यूकोप्लास्ट ;श्वेत तथा रंगहीन प्लैस्िटडद्ध। जिस प्लैस्िटड में क्लोरोपिफल वणर्क होता है उसे क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। पौधें में क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण के लिए बहुत आवश्यक है। क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोपिफल के अतिरिक्त विभ्िान्न पीले अथवा नारंगी रंग के वणर्क भी होते हैं। ल्यूकोप्लास्ट प्राथमिक रूप से अंगक है जिसमें स्टाचर्, तेल तथा प्रोटीन जैसे पदाथर् संचित होते हैं। प्लैस्िटड की भीतरी रचना में बहुत - सी झिल्ली वाली परतें होती हैं जो स्ट्रोमा में स्िथत होती हैं। प्लैस्िटड बाह्य रचना में माइटोकाॅन्िड्रया की तरह होते हैं। माइटोकाॅन्िड्रया की तरह प्लैस्िटड में भी अपना क्छ। तथा राइबोसोम होते हैं। प्रश्न 1ण् क्या आप दो ऐसे अंगकों का नाम बता सकते हैं जिनमें अपना आनुवंश्िाक पदाथर् होता है? 2ण् यदि किसी कोश्िाका का संगठन किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है, तो क्या होगा? 3ण् लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं? 4ण् कोश्िाका के अंदर प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है? प्रत्येक कोश्िाका की अपनी एक संरचना होती है, जिसके द्वारा वे विश्िाष्ट कायर् जैसे श्वसन, पोषण तथा अपश्िाष्ट पदाथो± का उत्सजर्न अथवा नइर् प्रोटीन बनाने में सहायता करते हैं। ऐसा उनकी झिल्ली तथा अंगकों की विश्िाष्ट संरचना के कारण संभव हो पाता है। अतः कोश्िाका सजीवों की एक मूलभूत संरचनात्मक इकाइर् है। यह जीवन की एक मूलभूत वि्रफयात्मक इकाइर् भी है। ऽ कोश्िाका जीवन की मूलभूत संरचनात्मक इकाइर् है। ऽ कोश्िाका के चारों ओर प्लैज्मा झिल्ली होती है। ये झिल्िलयाँ लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती हैं। ऽ कोश्िाका झिल्ली कोश्िाका का सिय भाग है। यह पदाथो± की गति को कोश्िाका के भीतर तथा बाहरी वातावरण से नियमित करती है। ऽ पादप कोश्िाका में कोश्िाका झिल्ली के चारों ओर एक कोश्िाका भ्िािा होतीहै। कोश्िाका भ्िािा सेल्यूलोज की बनी होती है। ऽ पादप की कोश्िाकाओं में स्िथत कोश्िाका भ्िािा पंफजाइर् तथा बैक्टीरिया को अल्प परासरण दाबी घोल ;माध्यमद्ध में बिना पफटे जीवित रहने देती है। ऽ यूवैफरियोट में वेंफद्रक दोहरी झिल्ली द्वारा कोश्िाकाद्रव्य से अलग होता है। यह कोश्िाका की जीवन प्रियाओं को निदेर्श्िात करता है। ऽ म्त् अंतःकोश्िाकीय परिवहन तथा उत्पादक सतह के रूप में कायर् करता है। ऽ गाॅल्जी उपकरण झिल्ली युक्त पुटिकाओं का स्तंभ है। यह कोश्िाका में बने पदाथो± का संचयन, रूपांतरण तथा पैके¯जग करता है। ऽ अध्िकांश पादप कोश्िाकाओं में झिल्ली युक्त अंगक जैसे प्लैस्िटड होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं - क्रोमोप्लास्ट तथा ल्यूकोप्लास्ट। ऽ क्रोमोप्लास्ट जिसमें क्लोरोपिफल होता है उन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं। ऽ ल्यूकोप्लास्ट का प्राथमिक कायर् संचय करना है। ऽ अध्िकांश परिपक्व पादप कोश्िाकाओं में एक बड़ी वेंफद्रीय रसधनी होती है। यह कोश्िाका की स्पफीति को बनाए रखती है और यह अपश्िाष्ट पदाथो± सहित महत्वपूणर् पदाथो± का संचय करती है। ऽ प्रोवैफरियोटी कोश्िाकाओं में कोइर् भी झिल्ली युक्त अंगक नहीं होता। उनके क्रोमोसोम के स्थान पर न्यूकलीक अम्ल होता है और उनमें केवल छोटे राइबोसोम अंगक के रूप में होते हैं। अभ्यास 1ण् पादप कोश्िाकाओं तथा जंतु कोश्िाकाओं में तुलना करो। 2ण् प्रोवैफरियोटी कोश्िाकाएँ यूवैफरियोटी कोश्िाकाओं से किस प्रकार भ्िान्न होती हैं? 3ण् यदि प्लैज्मा झिल्ली पफट जाए अथवा टूट जाए तो क्या होगा? 4ण् यदि गाॅल्जी उपकरण न हो तो कोश्िाका के जीवन में क्या होगा? 5ण् कोश्िाका का कौन - सा अंगक बिजलीघर है? और क्यों? 6ण् कोश्िाका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है? 7ण् अमीबा अपना भोजन वैफसे प्राप्त करता है? 8ण् परासरण क्या है? 9ण् निम्नलिख्िात परासरण प्रयोग करें: छिले हुए आध्े - आध्े आलू के चार टुकड़े लो, इन चारों को खोखला करो जिससे कि आलू के कप बन जाएँ। इनमें से एक कप को उबले आलू में बनाना है। आलू के प्रत्येक कप को जल वाले बतर्न में रखो। अब ;ंद्ध कप ‘।’ को खाली रखो, ;इद्ध कप ‘ठ’ में एक चम्मच चीनी डालो, ;बद्ध कप ‘ब्’ में एक चम्मच नमक डालो तथा ;कद्ध उबले आलू से बनाए गए कप ‘क्’ में एक चम्मच चीनी डालो। आलू के इन चारों कपों को दो घंटे तक रखने के पश्चात् उनका अवलोकनकरो तथा निम्न प्रश्नों का उत्तर दो: ;पद्ध ‘ठ’ तथा ‘ब्’ के खाली भाग में जल क्यों एकत्रा हो गया? इसका वणर्न करो। ;पपद्ध ‘।’ आलू इस प्रयोग के लिए क्यों महत्वपूणर् है? ;पपपद्ध ‘।’ तथा ‘क्’ आलू के खाली भाग में जल एकत्रा क्यों नहीं हुआ? इसका वणर्न करो।

>CHAP_5>

Vigyan  Chapter-5

अध्याय 5

जीवन की मौलिक इकाई 

(The Fundamental Unit of Life)

कार्क की पतली काट के अवलोकन पर राबर्ट हुक ने पाया कि इनमें अनेक छोटे-छोटे प्रकोष्ठ हैं, जिसकी सरंचना मधुमक्खी के छत्ते जैसी प्रतीत होती है। कार्क एक पदार्थ है जो वृक्ष की छाल से प्राप्त होता है। सन् 1665 में हुक ने इसे स्वनिर्मित सूक्ष्मदर्शी से देखा था। राबर्ट हुक ने इन प्रकोष्ठकों को कोशिका कहा। Cell (कोशिका) लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है "छोटा कमरा"।

उपरोक्त घटना छोटी तथा अर्थहीन लगती हो लेकिन विज्ञान के इतिहास में यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटना है। इस प्रकार सबसे पहले हुक ने देखा कि सजीवों में अलग-अलग एकक होते हैं। इन एककों का वर्णन करने के लिए जीव विज्ञान में कोशिका शब्द का उपयोग आज तक किया जाता है।

आओ, कोशिका के विषय में और जानकारी प्राप्त करें।

5.1 सजीव किससे बने होते हैं?

क्रियाकलाप 5.1

प्याज का एक छोटा टुकड़ा लो। चिमटी की सहायता से हम प्याज की अवतल सतह की ओर (भीतरी सतह) से झिल्ली उतार सकते हैं। इस झिल्ली को तुरंत पानी वाले वॉच ग्लास में रख लेते हैं। इससे झिल्ली मुड़ने अथवा सूखने से बच जाएगी। हम इस झिल्ली से क्या करें?

एक काँच की स्लाइड लो। इस पर पानी की एक बूँद डालो। अब वॉच ग्लास में रखी झिल्ली के इस छोटे टुकड़े को इस स्लाइड पर रख दो। यह ध्यान रखें कि झिल्ली बिलकुल सीधी हो। एक पतला पेंट ब्रुश इस झिल्ली को स्लाइड पर रखने में आपकी सहायता कर सकता है। अब इस पर एक बूँद सेफ्रामाइन की डालो और इसे कवर स्लिप से ढक दो। कवर स्लिप को सुई की सहायता से इस प्रकार रखें जिससे कि इसमें वायु के बुलबुले न आने पाएँ। अपने अध्यापक से सहायता लें। हमने प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बनाई है। अब हम इसे पहले कम शक्ति वाले तथा उसके बाद उच्च शक्ति वाले संयुक्त सूक्ष्मदर्शी से देखते हैं।

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चित्र 5.1: संयुक्त सूक्ष्मदर्शी

आपने क्या देखा? क्या आप जो संरचना सूक्ष्मदर्शी के द्वारा देखते हैं उसे कागज पर खींच सकते हैं? क्या यह चित्र 5.2 जैसी दिखाई देती है?

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चित्र 5.2: प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ

अब हम विभिन्न आकार वाली प्याज की झिल्लियों से अस्थायी स्लाइड बनाएँगे। हम क्या देखते हैं? क्या हम एकसमान संरचनाओं को देखते हैं अथवा भिन्न-भिन्न?

ये संरचनाएँ क्या हैं?

ये सभी संरचनाएँ एक जैसी दिखाई देती हैं। ये सभी मिलकर एक बड़ी संरचना (शल्क कंद) बनाते हैं जैसे प्याज। इस क्रियाकलाप से हमें पता चलता है कि विभिन्न आकार के प्याज में सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर एक जैसी संरचनाएँ दिखाई देती हैं। प्याज की झिल्ली की कोशिकाएँ एकसमान हैं। प्याज के आकार से इसका कोई संबंध नहीं है।

ये छोटी-छोटी संरचनाएँ जो हम देख रहे हैं शल्क कंद प्याज की मूलभूत इकाई है। इन संरचनाओं को कोशिका कहते हैं। न केवल प्याज बल्कि जितने भी जीव-जंतु हम अपने आस-पास देखते हैं वे सभी कोशिकाओं से बनते हैं। यद्यपि, कुछ जीव एककोशिक भी होते हैं।

आवर्धक लेंस की खोज के बाद सूक्ष्मदर्शी का आविष्कार संभव हो सका। यह पता चला है कि एक मात्र कोशिका स्वयं में ही एक संपूर्ण जीव जैसे अमीबा, क्लैमिडोमोनास, पैरामीशियम तथा बैक्टीरिया हो सकती है। इन सजीवों को एककोशिक जीव कहते हैं। इसके अतिरिक्त बहुकोशिक जीवों में अनेक कोशिकाएँ समाहित होकर विभिन्न कार्यों को सम्पन्न करने हेतु विभिन्न अंगों का निर्माण करती हैं। इसके कुछ उदाहरण हैं फंजाई (कवक), पादप तथा जंतु। क्या हम कुछ और एककोशिक जीवों के विषय में पता कर सकते हैं?

प्रत्येक बहुकोशिक जीव एक कोशिका से ही विकसित हुआ है। कैसे? कोशिकाएँ विभाजित होकर अपनी ही जैसी कोशिकाएँ बनाती हैं। इस प्रकार सभी कोशिकाएँ अपनी पूर्ववर्ती कोशिकाओं से उत्पन्न होती हैं।


इसे भी जानें 

कोशिका का सबसे पहले पता रॉबर्ट हुक ने 1665 में लगाया था। उसने कोशिका को कार्क की पतली काट में अनगढ़ सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा। ल्यूवेनहक (1674) ने सबसे पहले उन्नत सूक्ष्मदर्शी से तालाब के जल में स्वतंत्र रूप से जीवित कोशिकाओं का पता लगाया। रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में कोशिका में केंद्रक का पता लगाया। जे. ई. पुरोकंज ने 1839में कोशिका में स्थित तरल जैविक पदार्थ को जीवद्रव्य का नाम दिया। दो जीव वैज्ञानिक - एम. स्लीडन (1838) तथा टी. स्वान (1839) ने कोशिका सिद्धांत के विषय में बताया। इस सिद्धांत के अनुसार सभी पौधे तथा जंतु कोशिकाओं से बने हैं और वे जीवन की मूलभूत इकाई हैं। विरचो (1855) ने कोशिका सिद्धांत को और आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि सभी कोशिकाएँ पूर्ववर्ती कोशिकाओं से बनती हैं। 1940 में इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की खोज के बाद कोशिका की जटिल संरचना तथा बहुत से अंगकों को समझना संभव हो सका।


क्रियाकलाप 5.2

हम पत्ती की झिल्ली, प्याज की मूलाग्र अथवा विभिन्न आकार के प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बना सकते हैं।

उपरोक्त क्रियाकलाप करने के बाद निम्नलिखित प्रप्रश्नों के उत्तर दीजिए ः

(i) क्या सभी कोशिकाएँ आकार तथा आकृति की दृष्टि से एक जैसी दिखाई देती हैं?

(ii) क्या सभी कोशिकाओं की संरचना एक जैसी दिखाई देती है?

(iii) क्या पादप के विभिन्न भागों में पायी जाने वाली कोशिकाओं में कोई अंतर है?

(iv) हमें कोशिकाओं में क्या समानता दिखाई देती है?

कुछ जीवों में विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ भी हो सकती हैं। निम्नलिखित तस्वीर को देखो। ये मानव शरीर की कुछ कोशिकाएँ हैं।

Screenshot-2018-5-29 CHAP 5 pmd - Chap 5 pdf(2)

चित्र 5.3: मानव शरीर की विभिन्न कोशिकाएँ

कोशिकाओं की आकृति तथा आकार उनके विशिष्ट कार्यों के अनुरूप होते हैं। कुछ कोशिकाएँ अपना आकार बदलती रहती हैं जैसे एककोशिक अमीबा । कुछ जीवों में कोशिका का आकार लगभग स्थिर रहता है और प्रत्येक प्रकार की कोशिका के लिए विशिष्ट होता है; उदाहरण के लिए तंत्रिका कोशिका।

प्रत्येक जीवित कोशिका में कुछ मूलभूत कार्य करने की क्षमता होती है, जो सभी सजीवों का गुण है। एक जीवित कोशिका ये मूलभूत कार्य कैसे करती है? हम जानते हैं कि बहुकोशिक जीवों में श्रम विभाजन होता है जैसा कि मनुष्यों में। इसका अर्थ यह है कि शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न कार्य करते हैं। जैसे मनुष्य के शरीर में हृदय रुधिर को पम्प करता है तथा आमाशय भोजन का पाचन आदि। इसी प्रकार एककोशिक में भी श्रम विभाजन होता है। वास्तव में एेसी प्रत्येक कोशिका में कुछ विशिष्ट घटक होते हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं। प्रत्येक कोशिकांग एक विशिष्ट कार्य करता है जैसे कोशिका में नए पदार्थ का निर्माण, अपशिष्ट पदार्थों का निष्कासन आदि। इन कोशिकांगों के कारण ही एक कोशिका जीवित रहती है और अपने सभी कार्य करती है। ये कोशिकांग मिलकर एक मूलभूत इकाई बनाते हैं जिसे कोशिका कहते हैं। यह बड़ा रुचिकर है कि सभी कोशिकाओं में एक ही प्रकार के कोशिकांग होते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उसके कार्य क्या हैं अथवा वे किस जीव में पाई जाती हैं।

प्रश्न

1. कोशिका की खोज किसने और कैसे की?

2. कोशिका को जीवन की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई क्यों कहते हैं?

5.2 कोशिका किससे बनी होती है? कोशिका का संरचनात्मक संगठन क्या है?

हमने देखा कि कोशिका में विशिष्ट घटक होते हैं जिन्हें कोशिकांग कहते हैं। कोशिका कैसे संगठित होती है?

यदि हम कोशिका का अध्ययन सूक्ष्मदर्शी से करें तो हमें लगभग प्रत्येक कोशिकाओं में तीन गुण दिखाई देंगे; प्लैज्मा झिल्ली, केंद्रक तथा कोशिकाद्रव्य। कोशिका के अंदर होने वाले समस्त क्रियाकलाप तथा उसकी बाह्य पर्यावरण से पारस्परिक क्रियाएँ इन्हीं गुणों के कारण संभव हैं। आओ देखें कैसे?

5.2.1 प्लैज्मा झिल्ली अथवा कोशिका झिल्ली

यह कोशिका की सबसे बाहरी परत है जो कोशिका के घटकों को बाहरी पर्यावरण से अलग करती है। प्लैज्मा झिल्ली कुछ पदार्थों को अंदर अथवा बाहर आने-जाने देती है। यह अन्य पदार्थों की गति को भी रोकती है। कोशिका झिल्ली को इसलिए वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली कहते हैं।

कोशिका में पदार्थों की गति कैसे होती है? पदार्थ कोशिका से बाहर कैसे आते हैं?

कुछ पदार्थ जैसे कार्बन डाइअॉक्साइड अथवा अॉक्सीजन कोशिका झिल्ली के आर-पार विसरण प्रक्रिया द्वारा आ-जा सकते हैं। हम पिछले अध्यायों में विसरण की प्रक्रिया के विषय में पढ़ चुके हैं। हमने देखा है कि पदार्थों की गति उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर होती है।

कुछ इसी प्रकार की प्रक्रिया कोशिका में होती है, उदाहरण के लिए, जब कुछ पदार्थ जैसे CO2 (जो एक कोशिकीय अपशिष्ट है और जिसका निष्कासन आवश्यक है) कोशिका में एकत्र हो जाती है तो उसकी सांद्रता बढ़ जाती है। कोशिका के बाह्य पर्यावरण में CO2 की सांद्रता कोशिका में स्थित CO2 की सांद्रता की अपेक्षा कम होती है। जैसे ही कोशिका के अंदर और बाहर CO2 की सांद्रता में अंतर आता है उसी समय उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर विसरण द्वारा कोशिका से CO2 बाहर निकल जाती है। इसी प्रकार जब कोशिका में अॉक्सीजन की सांद्रता कम हो जाती है तो O2 बाहर से कोशिका में विसरण द्वारा अंदर चली जाती है। अतः कोशिका तथा बाह्य पर्यावरण में गैसों के आदान-प्रदान में विसरण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

जल भी विसरण के नियमों के अनुकूल व्यवहार करता है। जल के अणुओं की गति जब वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा हो तो उसे परासरण कहते हैं। प्लैज्मा झिल्ली से जल की गति जल में घुले पदार्थों की मात्रा के कारण भी प्रभावित होती है। इस प्रकार परासरण में जल के अणु वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली द्वारा उच्च जल की सांद्रता से निम्न जल की सांद्रता की ओर जाते हैं।

यदि हम किसी जंतु कोशिका अथवा पादप कोशिका को शक्कर अथवा नमक के विलयन में रखें तो क्याहोगा?

निम्नलिखित तीन घटनाओं में से एक घटना हो सकती हैः

1. यदि कोशिका को तनु विलयन वाले माध्यम अर्थात् जल में शक्कर अथवा नमक की मात्रा कम और जल की मात्रा ज्यादा है, में रखा गया है तो जल परासरण विधि द्वारा कोशिका के अंदर चला जाएगा। एेसे विलयन को अल्पपरासरण दाबी विलयन कहते हैं।

जल के अणु कोशिका झिल्ली के दोनों ओर आवागमन करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, लेकिन कोशिका के अंदर जाने वाले जल की मात्रा कोशिका से बाहर आने वाले जल की मात्रा से अधिक होगी। इस प्रकार शुद्ध परिणाम यह होगा कि जल कोशिका के अंदर गया। इससे कोशिका फूलने लगेगी।

2. यदि कोशिका को एेसे माध्यम विलयन में रखा जाए जिसमें बाह्य जल की सांद्रता कोशिका में स्थित जल की सांद्रता के ठीक बराबर हो तो कोशिका झिल्ली से जल में कोई शुद्ध गति नहीं होगी। एेसे विलयन को समपरासारी विलयन कहते हैं।

जल कोशिका झिल्ली के दोनों ओर आता-जाता है, लेकिन जल की जो मात्रा अंदर गई उतनी ही बाहर आ जाती है। इस प्रकार व्यापक रूप से जल की कोई गति नहीं हुई। इसलिए कोशिका के माप में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।

3. यदि कोशिका के बाहर वाला विलयन अंदर के घोल से अधिक सांद्र है तो जल परासरण द्वारा कोशिका से बाहर आ जाएगा। एेसे विलयन को अतिपरासरणदाबी विलयन कहते हैं।

पुनः जल कोशिका झिल्ली के दोनों ओर आ-जा सकता है, लेकिन इस स्थिति में कोशिका से अधिक जल बाहर आएगा और कम जल अंदर जाएगा। इसलिए कोशिका सिकुड़ जाएगी।

परासरण इस प्रकार विसरण की एक विशिष्ट विधि है जिसमें वर्णात्मक झिल्ली द्वारा गति होती है। आओ, निम्नलिखित क्रियाकलाप करें।

क्रियाकलाप 5.3

अंडे से परासरण

(a) अंडे को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डालकर उसके कवच को हटाओ। इसका कवच अधिकांशतः कैल्सियम कार्बोनेट का बना होता है। एक पतली बाह्य त्वचा (झिल्ली) अब अंडे को घेरे रखती है। अंडे को शुद्ध जल में रखो और 5 मिनट के बाद इसका अवलोकन करो। आप क्या देखते हैं?

अंडा फूल जाता है क्योंकि परासरण द्वारा जल अंडे के अंदर चला जाता है।

(b) इसी प्रकार का एक कवचरहित अंडा नमक के सांद्रित विलयन में रखो और 5 मिनट तक उसका अवलोकन करो। अंडा सिकुड़ जाता है। क्यों? जल अंडे से निकलकर नमक के विलयन में आ जाता है, क्योंकि नमक का घोल अधिक सांद्रित है।

इस प्रकार का क्रियाकलाप हम सूखी किशमिश अथवा खूबानी से भी करने का प्रयत्न कर सकते हैं।

क्रियाकलाप 5.4

सूखी किशमिश अथवा खूबानी को केवल जल में रखो और उसे कुछ समय के लिए छोड़ दो। उसके बाद उसे शक्कर अथवा नमक के सांद्रित विलयन में रखो। आप निम्नलिखित अंतर देखेंगे।

(a) जब उन्हें जल में रखा गया तो वे जल ग्रहण करके फूल गईं।

(b) जब उन्हें सांद्रित घोल में रखा गया तो वे जल को बाहर निकाल कर सिकुड़ गईं।

एककोशिकीय अलवणीय जलीय जीवों तथा अधिकांश पादप कोशिकाएँ परासरण द्वारा जल ग्रहण करते हैं। पौधों के मूल द्वारा जल का अवशोषण परासरण का एक उदाहरण है।

इस प्रकार कोशिका के जीवन में विसरण जल तथा गैसों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अतिरिक्त विसरण, कोशिका को अपने बाहरी पर्यावरण से पोषण ग्रहण करने में सहायता करता है। कोशिका से विभिन्न अणुओं का अंदर आना तथा बाहर निकलना भी विसरण द्वारा ही होता है। इस प्रकार के परिवहन में ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्लैज्मा झिल्ली लचीली होती है और कार्बनिक अणुओं जैसे लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती है। प्लैज्मा झिल्ली की रचना हम केवल इलैक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देख सकते हैं।

कोशिका झिल्ली का लचीलापन एककोशिक जीवों में कोशिका के बाह्य पर्यावरण से अपना भोजन तथा अन्य पदार्थ ग्रहण करने में सहायता करता है। एेसी प्रक्रिया को एन्डोसाइटोसिस कहते हैं। अमीबा अपना भोजन इसी प्रक्रिया द्वारा प्राप्त करता है।

क्रियाकलाप 5.5

विद्यालय के पुस्तकालय अथवा इंटरनेट से इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के विषय में पता करेें। इसके विषय में अपने अध्यापक से चर्चा करें।

प्रश्न

1. CO2 तथा पानी जैसे पदार्थ कोशिका से कैसे अंदर तथा बाहर जाते हैं? इस पर चर्चा करें।

2. प्लैज्मा झिल्ली को वर्णात्मक पारगम्य झिल्ली क्यों कहते हैं?


5.2.2 कोशिका भित्ति

पादप कोशिकाओं में प्लैज्मा झिल्ली के अतिरिक्त कोशिका भित्ति भी होती है। पादप कोशिका भित्ति मुख्यतः सेल्यूलोज की बनी होती है। सेल्यूलोज एक बहुत जटिल पदार्थ है और यह पौधों को संरचनात्मक दृढ़ता प्रदान करता है।

जब किसी पादप कोशिका में परासरण द्वारा पानी की हानि होती है तो कोशिका झिल्ली सहित आंतरिक पदार्थ संकुचित हो जाते हैं। इस घटना को जीवद्रव्य कुंचन कहते हैं। हम इस परिघटना को निम्न क्रियाकलाप द्वारा देख सकते हैं।

क्रियाकलाप 5.6

रिओ की पत्ती की झिल्ली को पानी में रखकर एक स्लाइड बनाओ। इसे उच्च शक्ति वाले सूक्ष्मदर्शी से देखो। छोटे-छोटे हरे कण दिखाई देंगे। इन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। इनमें एक हरा पदार्थ होता है जिसे क्लोरोफिल कहते हैं। इस स्लाइड पर शक्कर अथवा नमक का सांद्र विलयन डालो। एक मिनट प्रतीक्षा करो और इसे सूक्ष्मदर्शी से देखो। हम क्या देखते हैं?

अब रिओ की पत्तियों को कुछ मिनट तक जल में उबालो। इससे पत्तियों की सभी कोशिकाएँ मर जाएँगी। अब एक पत्तियों को स्लाइड पर रखो और उसे सूक्ष्मदर्शी से देखो। स्लाइड पर रखी इस पत्ती पर शक्कर अथवा नमक का सांद्र विलयन डालो। एक मिनट प्रतीक्षा करो और पुनः सूक्ष्मदर्शी से देखो। हम क्या देखते हैं? क्या अब जीवद्रव्य कुंचन हुआ?

इस क्रियाकलाप से क्या निष्कर्ष निकलता है? इससे पता लगता है कि केवल जीवित कोशिकाओं में ही परासरण द्वारा जल अवशोषण की क्षमता होती है न कि मृत कोशिकाओं में।

कोशिका भित्ति पौधों, कवक तथा बैक्टीरिया की कोशिकाओं को अपेक्षाकृत कम तनु विलयन (अल्पपरासरण दाबी विलयन) में बिना फटे बनाए रखती है। एेसे माध्यम से कोशिका परासरण विधि द्वारा पानी लेती है। कोशिका फूल जाती है और कोशिका भित्ति के ऊपर दबाव डालती है। कोशिका भित्ति भी फूली हुई कोशिका के प्रति समान रूप से दबाव डालती है। कोशिका भित्ति के कारण पादप कोशिकाएँ परिवर्तनीय माध्यम को जंतु कोशिका की अपेक्षा आसानी से सहन कर सकती है।

5.2.3 केंद्रक

आपको याद होगा कि हमने प्याज की झिल्ली की अस्थायी स्लाइड बनाई थी। हमने इस झिल्ली पर आयोडीन की बूँद डाली थी। क्यों? यदि हम बिना आयोडीन के स्लाइड देखें तो हम क्या देखेंगे? प्रयत्न करो और देखो कि क्या अंतर है। जब हमने आयोडीन का घोल डाला तो क्या प्रत्येक कोशिका समान रूप से रंगीन हो गई?

कोशिका के विभिन्न भाग रासायनिक संघटन के आधार पर विभिन्न रंगों से रँगे जाते हैं। कुछ क्षेत्र अधिक गहरे रंग के प्रतीत होते हैं तथा कुछ कम। कोशिका को रँगने के लिए हम आयोडीन विलयन के अतिरिक्त सैफ्रानिन अथवा मेथलीन ब्लू विलयन का भी उपयोग कर सकते हैं।

हमने प्याज की कोशिका को देखा है; आओ, अब हम अपने शरीर से ली गई कोशिकाओं को देखें।

क्रियाकलाप 5.7

काँच की एक स्लाइड लो और उस पर एक बूँद पानी रखो। आइसक्रीम खाने वाले चम्मच से अपने गाल के अंदर की खाल को धीरे से खुरचो। क्या चम्मच पर कोई वस्तु चिपक गई है? सूई की सहायता से इसे स्लाइड पर समान रूप से फैला कर रखो। इसे रँगने के लिए एक बूँद मेथलीन ब्लू की डालें। सूक्ष्मदर्शी द्वारा अवलोकन के लिए स्लाइड तैयार है। इस पर कवर स्लिप रखना ना भूलें।

हम क्या देखते हैं? कोशिकाओं की आकृति कैसी है? इस आकृति को एक पेपर (कागज) पर बनाएँ।

क्या आप कोशिका के मध्य में एक गहरे रंग वाली गोलाकार अथवा अंडाकार, डॉट की तरह की संरचना देख रहे हैं? इस संरचना को केंद्रक कहते हैं। क्या इसी प्रकार की संरचना प्याज की झिल्ली में भी थी?

केंद्रक के चारों ओर दोहरे परत का एक स्तर होता है जिसे केंद्रक झिल्ली कहते हैं। केंद्रक झिल्ली में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं। इन छिद्रों के द्वारा केंद्रक के अंदर का कोशिकाद्रव्य केंद्रक के बाहर जा पाता है। कोशिकाद्रव्य के विषय में हम अनुभाग 5.2.4 में पढ़ेंगे।

केंद्रक में क्रोमोसोम होते हैं जो कोशिका विभाजन के समय छड़ाकार दिखाई पड़ते हैं। क्रोमोसोम में आनुवांशिक गुणों की जो सूचना होती है वो माता-पिता से DNA (डिअॉक्सी राइबो न्यूक्लीक अम्ल) अणु के रूप में अगली संतति में जाते हैं। क्रोमोसोम DNA तथा प्रोटीन के बने होते हैं। DNA अणु में कोशिका के निर्माण व संगठन की सभी आवश्यक सूचनाएँ होती हैं। DNA के क्रियात्मक खंड को जीन कहते हैं। जो कोशिका विभाजित नहीं हो रही होती है उसमें यह DNA क्रोमैटिन पदार्थ के रूप में विद्यमान रहता है। क्रोमैटिन पदार्थ धागे की तरह की रचनाओं के एक जाल का पिंड होता है। जब कभी भी कोशिका विभाजित होने वाली होती है, तब यह क्रोमोसोम में संगठित हो जाता है।

कुछ जीवों में कोशिकीय जनन में केंद्रक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रक्रिया में एक अकेली कोशिका विभाजित होकर दो नयी कोशिकाएँ बनाती हैं। यह कोशिका के विकास व परिपक्वन को निर्धारित करता है तथा साथ ही सजीव कोशिका की रासायनिक क्रियाओं को भी निर्देशित करता है।

बैक्टीरिया जैसे कुछ जीवों में कोशिका का केंद्रकीय क्षेत्र बहुत कम स्पष्ट होता है क्योंकि इसमें केंद्रक झिल्ली नहीं होती। एेसे अस्पष्ट केंद्रक क्षेत्र में केवल क्रोमैटिन पदार्थ होता है। एेसे क्षेत्र को केंद्रकाय कहते हैं। एेसे जीव जिसकी कोशिकाओं में केंद्रक झिल्ली नहीं होती उन्हें प्रोकैरियोट (प्रो-आदि अथवा पूर्व; कैरियोट = कैरियोन = केंद्रक)। जिन जीवों की कोशिकाओं में केंद्रक झिल्ली होती है उन्हें यूकैरियोट कहते हैं।

प्रोकैरियोटी कोशिकाओं (चित्र 5.4) में और भी अन्य अधिकांश द्रव्य अंगक नहीं होते हैं जो कि यूकैरियोटी कोशिकाओं में होते हैं। एेसे अंगकों के अनेक कार्य भी कोशिका द्रव्य के असंगठित भागों द्वारा ही किए जाते हैं (अनुभाग 5.2.4 पढ़ें)। प्रकाश संश्लेषी बैक्टीरिया में क्लोरोफिल झिल्लीदार पुटिका (थैले की तरह की संरचना) के साथ होता है जबकि यूकैरियोटी कोशिकाओं में क्लोरोफिल प्लैस्टिड में होता है (अनुभाग 5.2.5 देखें)।

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चित्र 5.4: प्रोकैरियोटी कोशिका

5.2.4 कोशिका द्रव्य

जब हमने प्याज की झिल्ली तथा मनुष्य के गाल की कोशिकाओं की स्लाइड को देखा, तब हमें प्रत्येक कोशिका में एक बड़ा क्षेत्र दिखा जो कोशिका झिल्ली से घिरा हुआ था। इस क्षेत्र में बहुत हलका धब्बा था। इसे कोशिका द्रव्य कहते हैं। प्लैज्मा झिल्ली के अंदर कोशिका द्रव्य एक तरल पदार्थ है। इसमें बहुत से विशिष्ट कोशिका के घटक होते हैं जिन्हें कोशिक का अंगक कहते हैं। प्रत्येक अंगक कोशिका के लिए विशिष्ट कार्य करते हैं। कोशिका द्रव्य तथा केंद्रक दोनों को मिलाकर जीवद्रव्य कहते हैं।

कोशिका अंगक झिल्ली युक्त होते हैं। प्रोकैरियोटी कोशिकाओं में वास्तविक केंद्रक के अतिरिक्त झिल्ली युक्त अंगक भी नहीं होते। जबकि यूकैरियोटी कोशिकाओं में केंद्रकीय झिल्ली तथा झिल्ली युक्त अंगक होते हैं।

झिल्ली की सार्थकता वाइरस के उदाहरण से स्पष्ट कर सकते हैं। वाइरस में किसी भी प्रकार की झिल्ली नहीं होती और इसलिए इसमें जीवन के गुण तब तक लक्षित नहीं होते जब तक कि यह किसी सजीव के शरीर में प्रविष्ट करके कोशिका की मशीनरी का उपयोग कर अपना बहुगुणन नहीं कर लेता।

प्रश्न

1. क्या अब आप निम्नलिखित तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों को भर सकते हैं, जिससे कि प्रोकैरियोटी तथा यूकैरियोटी कोशिकाओं में अंतर स्पष्ट हो सकेः


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5.2.5 कोशिका अंगक

प्रत्येक कोशिका के चारों ओर अपनी झिल्ली होती है जिससे कि उसमें स्थित पदार्थ बाह्य पर्यावरण से अलग रहे। बड़ी तथा जटिल कोशिकाओं, जिसमें बहुकोशिक जीवों की कोशिकाएँ भी शामिल हैं, को भी उपापचयी क्रियाओं की बहुत आवश्यकता होती है जिससे कि वे जटिल संरचना तथा कार्य को सहारा दे सकें। इन विभिन्न प्रकार की उपापचयी क्रियाओं को अलग-अलग रखने के लिए, ये कोशिकाएँ झिल्लीयुक्त छोटी-छोटी संरचनाओं (अंगक) का उपयोग करती हैं। यह यूकैरियोटी कोशिकाओं का एक एेसा गुण है जो उन्हें प्रोकैरियोटी कोशिकाओं से अलग करता है। इनमें से कुछ अंगक केवल इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से ही देखे जा सकते हैं।

हमने पिछले अनुभाग में केंद्रक के विषय में पढ़ा है। अंतर्द्रव्यी जालिका, गॉल्जी उपकरण, लाइसोसोम, माइटोकॉन्ड्रिया तथा प्लैस्टिड; कोशिका अंगकों के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं जिन पर हम विचार करेंगे। ये इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये कोशिकाओं के बहुत निर्णायक कार्य करते हैं।

5.2.5 (i) अंतर्द्रव्यी जालिका (ER)

अंतर्द्रव्यी जालिका झिल्ली युक्त नलिकाओं तथा शीट का एक बहुत बड़ा तंत्र है। ये लंबी नलिका अथवा गोल या आयताकार थैलाें (पुटिकाओं) की तरह दिखाई देती हैं। अंतर्द्रव्यी जालिका की रचना भी प्लैज्मा झिल्ली के समरूप होती है। अंतर्द्रव्यी जालिका दो प्रकार की होती हैः खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) तथा चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER)। RER सूक्ष्मदर्शी से देखने पर खुरदरी दिखाई पड़ती है क्योंकि इस पर राइबोसोम लगे होते हैं। राइबोसोम पर प्रोटीन संश्लेषित होती है। RER तैयार प्रोटीन को आवश्यकतानुसार ER के द्वारा कोशिका के अन्य भागों में भेज देता है। SER वसा अथवा लिपिड अणुओं के बनाने में सहायता करती है। यह कोशिकीय क्रिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ प्रोटीन तथा वसा कोशिका झिल्ली को बनाने में सहायता करते हैं। इस प्रक्रिया को झिल्ली जीवात्-जनन कहते हैं। कुछ अन्य प्रोटीन तथा वसा, एंजाइम एवं हार्माेन की भाँति कार्य करते हैं। यद्यपि विभिन्न कोशिकाओं में ER भिन्न रूपों में दिखाई देती है परंतु सदैव एक जालिका तंत्र का निर्माण करती है।

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चित्र 5.5 : जंतु कोशिका


इस प्रकार ER का एक कार्य कोशिकाद्रव्य के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य अथवा कोशिकाद्रव्य के विभिन्न क्षेत्रों तथा केंद्रक के मध्य पदार्थों (मुख्यतः प्रोटीन) के परिवहन के लिए नलिका के रूप में कार्य करना है। ER कोशिका की कुछ जैव रासायनिक क्रियाओं के लिए कोशिका द्रव्यी ढाँचे का कार्य भी करती है। एक वर्ग के जंतुओं, जिन्हें कशेरुकी भी कहते हैं (अध्याय-7 देखें), के यकृत की कोशिकाओं में SER विष तथा दवा को निराविषीकरण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

5.2.5 (ii) गॉल्जी उपकरण

कैमिलो गॉल्जी द्वारा वर्णित गॉल्जी उपकरण झिल्ली युक्त चपटी पुटिकाओं का एक तंत्र है जो एक-दूसरे के ऊपर समानांतर रूप से सजी रहती है जिन्हें कुंडिका कहते हैं। इन झिल्लियों का संपर्क ER झिल्लियों से होता है और इसलिए जटिल कोशिकीय झिल्ली तंत्र के दूसरे भाग को बनाती है।

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चित्र 5.6 : पादप कोशिका

ER में संश्लेषित पदार्थ गॉल्जी उपकरण में पैक किए जाते हैं ओर उन्हें कोशिका के बाहर तथा अंदर विभिन्न क्षेत्रों में भेज दिया जाता है। इस कार्य में शामिल हैं पुटिका में पदार्थों का संचयन, रूपांतरण तथा बंद करना। कुछ परिस्थिति में गॉल्जी उपकरण में सामान्य शक्कर से जटिल शक्कर बनती है। गॉल्जी उपकरण के द्वारा लाइसोसोम को भी बनाया जाता है।

5.2.5 (iii) लाइसोसोम

संरचनात्मक दृष्टि से, लाइसोसोम में झिल्ली से घिरी हुई संरचना होती है जिनमें पाचक एंजाइम होते हैं। RER इन एंजाइमों को बनाते हैं।

लाइसोसोम कोशिका का अपशिष्ट निपटाने वाला तंत्र है। ये बाहरी पदार्थ एवं कोशिका अंगकों के टूटे-फूटे भागों को पाचित करके कोशिका को साफ करते हैं। कोशिका के अंदर आने वाले बाहरी पदार्थ जैसे बैक्टीरिया अथवा भोजन तथा पुराने अंगक लाइसोसोम में चले जाते हैं जो उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देते हैं। लाइसोसोम में बहुत शक्तिशाली पाचनकारी एंजाइम होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं। कोशिकीय चयापचय (metabolism) में व्यवधान के कारण जब कोशिका क्षतिग्रस्त या मृत हो जाती है, तो लाइसोसोम फट जाते हैं और एंजाइम अपनी ही कोशिकाओं को पाचित कर देते हैं इसलिए लाइसोसोम को कोशिका की ‘आत्मघाती थैली’ भी कहते हैं।


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कैमिलो गॉल्जी का जन्म 7जुलाई, 1843 को ब्रेसिका के समीप कोरटनो में हुआ था। उन्होंने पाविआ विश्वविद्यालय से मेडिसिन का अध्ययन किया। 1865 में स्नातक के बाद उन्होंने पाविआ के सेंट मेटिओ के अस्पताल में अध्ययन जारी रखा। उस समय उनकी सारी खोज तंत्रिका तंत्र से संबंधित थी। 1872 में उन्होंने एबियाटेग्रेसो के एक दीर्घकालिक रोग के अस्पताल में मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने सबसे पहले अपनी खोज इस अस्पताल के किचन में तंत्रिका तंत्र पर की। उन्होंने इस छोटी-सी किचन को प्रयोगशाला बना लिया था। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह था कि उन्होंने अकेली तंत्रिका तथा कोशिका संरचनाओं को अभिरंगित करने की क्रांतिकारी विधि प्रदान की। इस विधि को "ब्लैक रिएक्शन" के नाम से जाना गया। इस विधि में उन्होंने सिल्वर नाइट्रेट के तनु घोल का उपयोग किया था और विशेषतः यह कोशिकाओं की कोमल शाखाओं की प्रक्रियाओं का मार्ग पता लगाने में महत्वपूर्ण था। सारा जीवन वे इसी दिशा में कार्य करते रहे और इस विधि में सुधार करते रहे। गॉल्जी ने अपने शोध के लिए उच्चतम उपाधि तथा पुरस्कार प्राप्त किए। सन् 1906 में इन्हें सैंटियागो रैमोनी कजाल के साथ संयुक्त रूप से तंत्रिका तंत्र की संरचना कार्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।


5.2.5 (iv) माइटोकॉन्ड्रिया

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का बिजलीघर है। माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी झिल्ली की बनी होती है। बाहरी झिल्ली छिद्रित होती है। भीतरी झिल्ली बहुत अधिक वलित होती है। ये वलय ATP-बनाने वाली रासायनिक क्रियाओं के क्षेत्र को बड़ा बनाती हैं। जीवन के लिए आवश्यक विभिन्न रासायनिक क्रियाओं को करने के लिए माइटोकॉन्ड्रिया ATP (एेडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के रूप में ऊर्जा प्रदान करते हैं। ATP कोशिका की ऊर्जा है। शरीर नए रासायनिक यौगिकों को बनाने तथा यांत्रिक कार्य के लिए ATP में संचित ऊर्जा का उपयोग करता है।

माइटोकॉन्ड्रिया बहुत अद्भुत अंगक है क्योंकि इसमें उसका अपना DNA तथा राइबोसोम होते हैं। अतः माइटोकॉन्ड्रिया अपना कुछ प्रोटीन स्वयं बनाते हैं।

5.2.5 (v) प्लैस्टिड


प्लैस्टिड केवल पादप कोशिकाओं में स्थित होते हैं। प्लैस्टिड दो प्रकार के होते हैंः क्रोमोप्लास्ट (रंगीन प्लैस्टिड) तथा ल्यूकोप्लास्ट (श्वेत तथा रंगहीन प्लैस्टिड)। जिस क्रोमोप्लास्ट में क्लोरोफिल वर्णक होता है उसे क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। पौधों में क्लोरोप्लास्ट प्रकाश संश्लेषण के लिए बहुत आवश्यक है। क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल के अतिरिक्त विभिन्न पीले अथवा नारंगी रंग के वर्णक भी होते हैं। ल्यूकोप्लास्ट प्राथमिक रूप से अंगक है जिसमें स्टार्च, तेल तथा प्रोटीन जैसे पदार्थ संचित होते हैं।

क्लोरोप्लास्ट की भीतरी रचना में बहुत-सी झिल्ली वाली परतें होती हैं जो स्ट्रोमा में स्थित होती हैं। प्लैस्टिड बाह्य रचना में माइटोकॉन्ड्रिया की तरह होते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की तरह प्लैस्टिड में भी अपना DNA तथा राइबोसोम होते हैं।

5.2.5 (vi) रसधानियाँ

रसधानियाँ ठोस अथवा तरल पदार्थों की संग्राहक थैलियाँ हैं। जंतु कोशिकाओं में रसधानियाँ छोटी होती हैं जबकि पादप कोशिकाओं में रसधानियाँ बहुत बड़ी होती हैं। कुछ पौधों की कोशिकाओं की केंद्रीय रसधानी की माप कोशिका के आयतन का 50% से 90% तक होता है।

पादप कोशिकाओं की रसधानियों में कोशिका द्रव्य भरा रहता है और ये कोशिकाओं को स्फीति तथा कठोरता प्रदान करती हैं। पौधों के लिए आवश्यक बहुत से पदार्थ रसधानी में स्थित होते हैं। ये अमीनो अम्ल, शर्करा, विभिन्न कार्बनिक अम्ल तथा कुछ प्रोटीन हैं। एककोशिक जीवों, जैसे अमीबा, की खाद्य रसधानी में उनके द्वारा उपभोग में लाए गए खाद्य पदार्थ होते हैं। कुछ एककोशिक जीवों में विशिष्ट रसधानियाँ अतिरिक्त जल तथा कुछ अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती हैं।

प्रश्न

1. क्या आप दो एेसे अंगकों का नाम बता सकते हैं जिनमें अपना आनुवंशिक पदार्थ होता है?

2. यदि किसी कोशिका का संगठन किसी भौतिक अथवा रासायनिक प्रभाव के कारण नष्ट हो जाता है, तो क्या होगा?

3. लाइसोसोम को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं?

4. कोशिका के अंदर प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?

प्रत्येक कोशिका की अपनी एक संरचना होती है, जिसके द्वारा वे विशिष्ट कार्य जैसे श्वसन, पोषण तथा अपशिष्ट पदार्थों का उत्सर्जन अथवा नई प्रोटीन बनाने में सहायता करते हैं। एेसा उनकी झिल्ली तथा अंगकों की विशिष्ट संरचना के कारण संभव हो पाता है।

अतः कोशिका सजीवों की एक मूलभूत संरचनात्मक इकाई है। यह जीवन की एक मूलभूत क्रियात्मक इकाई भी है।

कोशिका विभाजन

जीवधारियों में वद्धि हेतु नई कोशिकाएं बनती हैं जिससे पुरानी मृत एवं क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का प्रतिस्थापन और प्रजनन हेतु युग्मक बनते हैं। नई कोशिकाओं के बनने की प्रक्रिया को कोशिका विभाजन कहते हैं। सूत्री विभाजन और अर्ध सूत्री विभाजन नामक दो मुख्य प्रकार की कोशिका विभाजन की प्रक्रिया है।

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चित्र 5.7 : समसूत्री विभाजन


कोशिका विभाजन की प्रक्रिया जिससे अधिकतर कोशिकाएं वृद्धि हेतु विभाजित होती हैं उसे सूत्री विभाजन कहते हैं। इस प्रक्रिया में प्रत्येक कोशिका जिसे मातृ कोशिका भी कह सकते हैं, विभाजित होकर दो समरूप संतति कोशिकाएं बनाती हैं
(चित्र 5.7)। संतति कोशिकाओं में गुणसुत्रों की संख्या मातृकोशिका के समान होती है। यह जीवों में वृद्धि एवं ऊतकों के मरम्मत में सहायता करती है।

जंतुओं और पौधों के प्रजनन अंगों अथवा ऊतकों की विशेष कोशिकाएं विभाजित होकर युग्मक बनाती है जो निषेचन के पश्चात् संतति निर्माण करती है। यह एक अलग प्रकार का विभाजन है जिसे अर्धसूत्रण कहते हैं जिसमें क्रमशः दो विभाजन होते हैं। जब कोशिका अर्ध सूत्रण द्वारा विभाजित होती है तो इससे दो की जगह चार नई कोशिकाएं बनती हैं (चित्र 5.8)। नई कोशिकाओं में मातृ कोशिकाओं की तुलना में गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है। क्या आप सोच सकते हैं कि संतति कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या क्यों आधी हो गई है?

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चित्र 5.8 : अर्धसूत्री विभाजन

आपने क्या सीखा

कोशिका जीवन की मूलभूत संरचनात्मक इकाई है।

कोशिका के चारों ओर प्लैज्मा झिल्ली होती है। ये झिल्लियाँ लिपिड तथा प्रोटीन की बनी होती हैं।

कोशिका झिल्ली कोशिका का सक्रिय भाग है। यह पदार्थों की गति को कोशिका के भीतर तथा बाहरी वातावरण से नियमित करती है।

पादप कोशिका में कोशिका झिल्ली के चारों ओर एक कोशिका भित्ति होती है। कोशिका भित्ति सेल्यूलोज की बनी होती है।

पादप की कोशिकाओं में स्थित कोशिका भित्ति फंजाई तथा बैक्टीरिया को अल्प परासरण दाबी घोल (माध्यम) में बिना फटे जीवित रहने देती है।

यूकैरियोट में केंद्रक दोहरी झिल्ली द्वारा कोशिकाद्रव्य से अलग होता है। यह कोशिका की जीवन प्रक्रियाओं को निर्देशित करता है।

ER अंतःकोशिकीय परिवहन तथा उत्पादक सतह के रूप में कार्य करता है।

गॉल्जी उपकरण झिल्ली युक्त पुटिकाओं का स्तंभ है। यह कोशिका में बने पदार्थों का संचयन, रूपांतरण तथा पैकेजिंग करता है।

अधिकांश पादप कोशिकाओं में झिल्ली युक्त अंगक जैसे प्लैस्टिड होते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं - क्रोमोप्लास्ट तथा ल्यूकोप्लास्ट।

क्रोमोप्लास्ट जिसमें क्लोरोफिल होता है उन्हें क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। ये प्रकाश संश्लेषण करते हैं।

ल्यूकोप्लास्ट का प्राथमिक कार्य संचय करना है।

• अधिकांश परिपक्व पादप कोशिकाओं में एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है। यह कोशिका की स्फीति को बनाए रखती है और यह अपशिष्ट पदार्थों सहित महत्वपूर्ण पदार्थों का संचय करती है।

प्रोकैरियोटी कोशिकाओं में कोई भी झिल्ली युक्त अंगक नहीं होता। उनके क्रोमोसोम के स्थान पर न्यूकलीक अम्ल होता है और उनमें केवल छोटे राइबोसोम अंगक के रूप में होते हैं।

जीवधाारियों में कायिक वृद्धि हेतु कोशिकाएं विभाजित होती हैं।

अभ्यास

1. पादप कोशिकाओं तथा जंतु कोशिकाओं में तुलना करो।

2. प्रोकैरियोटी कोशिकाएँ यूकैरियोटी कोशिकाओं से किस प्रकार भिन्न होती हैं?

3. यदि प्लैज्मा झिल्ली फट जाए अथवा टूट जाए तो क्या होगा?

4. यदि गॉल्जी उपकरण न हो तो कोशिका के जीवन में क्या होगा?

5. कोशिका का कौन-सा अंगक बिजलीघर है? और क्यों?

6. कोशिका झिल्ली को बनाने वाले लिपिड तथा प्रोटीन का संश्लेषण कहाँ होता है?

7. अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है?

8. परासरण क्या है?

9. निम्नलिखित परासरण प्रयोग करें ः

छिले हुए आधे-आधे आलू के चार टुकड़े लो, इन चारों को खोखला करो जिससे कि आलू के कप बन जाएँ। इनमें से एक कप को उबले आलू में बनाना है। आलू के प्रत्येक कप को जल वाले बर्तन में रखो। अब

(a) कप ‘A’ को खाली रखो,

(b) कप ‘B’ में एक चम्मच चीनी डालो,

(c) कप ‘C’ में एक चम्मच नमक डालो तथा

(d) उबले आलू से बनाए गए कप ‘D’ में एक चम्मच चीनी डालो।

आलू के इन चारों कपों को दो घंटे तक रखने के पश्चात् उनका अवलोकन करो तथा निम्न प्रप्रश्नों का उत्तर दो ः

(i)B’ तथा ‘C’ के खाली भाग में जल क्यों एकत्र हो गया? इसका वर्णन करो।

(ii)A’ आलू इस प्रयोग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

(iii)A’ तथा ‘D’ आलू के खाली भाग में जल एकत्र क्यों नहीं हुआ? इसका वर्णन करो।

10. कायिक वृद्धि एवं मरम्मत हेतु किस प्रकार के कोशिका विभाजन की आवश्यकता होती है तथा इसका औचित्य बताएं?

11. युग्मकों के बनने के लिए किस प्रकार का कोशिका विभाजन होता है? इस विभाजन का महत्व बताएं।


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