अध्याय 4 अध्याय 3 में हम पढ़ चुके हैं कि पदाथर्, परमाणुओं और अणुओं से मिलकर बने हैं। विभ्िान्न प्रकार के पदाथोंर् का अस्ितत्व उन परमाणुओं के कारण होता है, जिनसे वे बने हैं। अब प्रश्न उठता है कि: ;पद्ध किसी एक तत्व का परमाणु दूसरे तत्व के परमाणुओं से भ्िान्न क्यों होता है? और ;पपद्ध क्या परमाणु वास्तव में अविभाज्य होते हैं, जैसा कि डाल्टन ने प्रतिपादित किया था या परमाणुओं के भीतर छोटे अन्य घटक भी विद्यमान होते हैं? इस अध्याय में हमें इस प्रश्नका उत्तर मिलेगा। हम अवपरमाणुक कणों और परमाणु के विभ्िान्न प्रकार के माॅडलों के बारे में पढ़ेंगे, जिनसे यह पता चलता है कि ये कण परमाणु के भीतर किस प्रकार व्यवस्िथत होते हैं। 19वीं शताब्दी के अंत में वैज्ञानिकों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती थी, परमाणु की संरचना और उसके गुणों के बारे में पता लगाना। परमाणुओं की संरचना को अनेक प्रयोगों के आधर पर समझाया गया है। परमाणुओं के अविभाज्य न होने के संकेतों में से एक संकेत स्िथर - विद्युत तथा विभ्िान्न पदाथोर्ं द्वारा विद्युत चालन की परिस्िथतियों के अध्ययन से मिला। 4ण्1 पदाथोर्ं में आवेश्िात कण पदाथोंर्ं में आवेश्िात कणों की प्रकृति को जानने के लिए, आइए हम निम्न ियाकलाप करें। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 4ण्1 ।ण् सूखे बालों पर वंफघी कीजिए। क्या वंफघी कागश के छोटे - छोटे टुकड़ांे को आकष्िार्त करती है? परमाणु की संरचना ;ैजतनबजनतम व िजीम ।जवउद्ध ठण् काँच की एक छड़ को सिल्क के कपड़े पर रगडि़ए और इस छड़ को हवा से भरे गुब्बारे के पास लाइए। क्या होता है, ध्यान से देख्िाए। इन ियाकलापों से क्या हम यह निष्कषर् निकाल सकते हैं कि दो वस्तुओं को आपस में रगड़ने से उनमें विद्युत आवेश आ जाता है? यह आवेश कहाँ से आता है? इसका उत्तर तब मिला जब यह पता चला कि परमाणु विभाज्य है और आवेश्िात कणों से बना है। परमाणु में उपस्िथत आवेश्िात कणों का पता लगाने में कइर् वैज्ञानिकों ने योगदान दिया। 19वीं शताब्दी तक यह जान लिया गया था कि परमाणु साधरण और अविभाज्य कण नहीं है, बल्िक इसमें कम से कम एक अवपरमाणुक कण इलेक्ट्राॅन विद्यमान होता है, जिसका पता जे. जे. टाॅमसन ने लगाया था। इलेक्ट्राॅन के संबंध् में जानकारी प्राप्त होने के पहले, इर्. गोल्डस्टीन ने 1886 में एक नए विकिरण की खोज की, जिसे उन्होंने ‘केनाल रे’ का नाम दिया। ये किरणें ध्नावेश्िात विकिरण थीं, जिसके द्वारा अंततः दूसरे अवपरमाणुक कणों की खोज हुइर्। इन कणों का आवेश इलेक्ट्राॅन के आवेश के बराबर, विंफतु विपरीत था। इनका द्रव्यमान इलेक्टॅªानों की अपेक्षा लगभग 2000 गुणा अध्िक होता है। उनको प्रोटाॅन नाम दिया गया। सामान्यतः इलेक्ट्रॅान को मदृ के द्वारा और प्रोटाॅन को च़ के द्वारा दशार्या जाता है। प्रोटाॅन का द्रव्यमान 1 इकाइर् और इसका आवेश ़1 लिया जाता है। इलेक्ट्रॅान का द्रव्यमान नगण्य और आवेश .1 माना जाता है। ऐसा माना गया कि परमाणु प्रोटाॅन और इलेक्टॅªान से बने हैं, जो परस्पर आवेशों को संतुलित करते हैं। यह भी प्रतीत हुआ कि प्रोटाॅन परमाणु के सबसे भीतरी भाग में होते हैं। इलेक्ट्रॅानों को आसानी से निकाला जा सकता है लेकिन प्रोटॅानों को नहीं। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह था कि ये कण परमाणु कीसंरचना किस प्रकार करते हैं? हमें इस प्रश्न का उत्तर नीचे मिलेगा। श्न 1. केनाल किरणें क्या हैं? 2. यदि किसी परमाणु में एक इलेक्ट्रॅानप्र और एक प्रोटॅान है, तो इसमें कोइर् आवेश होगा या नहीं? 4ण्2 परमाणु की संरचना हमने अध्याय 3 में डाल्टन के परमाणु सि(ांत के बारे में पढ़ा है, जिसके अनुसार परमाणु अविभाज्य और अविनाशी था। लेकिन परमाणु के भीतर दो मूल कणों, इलेक्ट्राॅन और प्रोटाॅन की खोज ने डाल्टन के परमाणु सि(ांत की इस धरणा को गलत साबित कर दिया। अब यह जानना आवश्यक था कि इलेक्ट्रॅान और प्रोटाॅन परमाणु के भीतर किस तरह व्यवस्िथत हैं। इसको समझाने के लिए बहुत से वैज्ञानिकों ने भ्िान्न - भ्िान्न प्रकार के माॅडलों को प्रस्तुत किया। जे. जे. टाॅमसन पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने परमाणुओं की संरचना से संबंध्ित पहला माॅडल प्रस्तुत किया। 4ण्2ण्1 टाॅमसन का परमाणु मॅाडल टाॅमसन ने परमाणुओं की संरचना से संबंध्ित एक माॅडल प्रस्तुत किया, जो िसमस केक की तरह था। इनके अनुसार परमाणु एक ध्नावेश्िात गोला था, जिसमें इलेक्ट्राॅन िसमस केक में लगे सूखे मेवों की तरह थे। तरबूज का उदाहरण भी ले सकते हैं, जिसके अनुसार परमाणु में ध्न आवेश तरबूज के खाने वाले परमाणु की संरचना लाल भाग की तरह बिखरा है, जबकि इलेक्ट्रॅान ध्नावेश्िात गोले में तरबूज के बीज की भांति ध्ँसे हैं ;चित्रा 4.1द्ध। चित्रा 4ण्1रू टाॅमसन का परमाणु माॅडल बि्रटिश भौतिकशास्त्राी, जे. जे.टाॅमसन ;1856 - 1940द्ध, का जन्म 18 दिसंबर, 1856 में मैनचेस्टर के कीचम हिल क्षेत्रा में हुआ था। इलेक्ट्राॅन की खोज के कारण 1906 में उनको भौतिकशास्त्रा में नोबेल पुरस्कार मिला। 35 वषर् तक वे वैफम्िब्रज में वैफवेन्िडश प्रयोगशाला के निदेशक थे और उनके शोध् के सात सहयोगियों को भी आगे चलकर नोबेल पुरस्कार मिला। टाॅमसन ने प्रस्तावित किया किः ;पद्ध परमाणु ध्न आवेश्िात गोले का बना होता है और इलेक्ट्रॅान उसमें ध्ँसे होते हैं। ;पपद्ध ट्टणात्मक और ध्नात्मक आवेश परिमाण में समान होते हैं। इसलिए परमाणु वैद्युतीय रूप से उदासीन होते हैं। यद्यपि टाॅमसन के माॅडल से परमाणु के उदासीन होेने की व्याख्या हो गइर् विंफतु दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोगों के परिणामों को इस माॅडल के द्वारा समझाया नहीं जा सका, जैसा कि हम आगे देखेंगे। 4ण्2ण्2 रदरप़फोडर् का परमाणु माॅडल अरनेस्ट रदरप़फोडर् यह जानने के इच्छुक थे कि इलेक्ट्रॅान परमाणु के भीतर वैफसे व्यवस्िथत हैं। उन्होंने एक प्रयोग किया। इस प्रयोग में, तेश गति से चल रहे अल्प़फा कणों को सोने की पन्नी पर टकराया गया। ऽ इन्होंने सोने की पन्नी इसलिए चुनी क्योंकि वे बहुत पतली परत चाहते थे। सोने की यह पन्नी 1000 परमाणुओं के बराबर मोटी थी। ऽ अल्प़फा कण द्विआवेश्िात हिलीयम कण होते हैं अतः ये ध्नावेश्िात होते हैं। चँूकि इनका द्रव्यमान 4 न होता है इसलिए तीव्र गति से चल रहे इन अल्प़फा कणों में पयार्प्त ऊजार् होती है। ऽ यह अनुमान था कि अल्प़फा कण सोने के परमाणुओं में विद्यमान अवपरमाणुक कणों के द्वारा विक्षेपित होंगे। चूँकि अल्प़फा कण प्रोटाॅन से बहुत अध्िक भारी थे, इसलिए उन्होंने इनके अध्िक विक्षेपण की आशा नहीं की थी। ;पपद्ध वुफछ अल्प़फा कण पन्नी के द्वारा बहुत छोटे कोण से विक्षेपित हुए। ;पपपद्ध आश्चयर्जनक रूप से प्रत्येक 12000 कणों में से एक कण वापस आ गया। रदरप़फोर्ड के अनुसार, ‘‘यह परिणाम उसी प्रकार अविश्वसनीय था, जैसे अगर आप एक 15 इंच के तोप के गोले को टिशू पेपर के टुकड़े पर मारते हैं और वह लौटकर आपको ही चोट पहुँचाता है।’’ इर्. रदरप़फोडर् ;1871 - 1937द्ध का जन्म 30 अगस्त, 1871 में स्िप्रंग ग्रोव में हुआ था। उनको नाभ्िाकीय भौतिकी का जनक माना जाता था। रेडियोध्मिर्ता पर अपने योगदान और सोने की पन्नी के द्वारा परमाणु के नाभ्िाक की खोज के लिए वे बहुत प्रसि( हुए। 1908 में उनको नोबेल पुरस्कार मिला। इस प्रयोग के निष्कषर् को समझने के लिए खुले मैदान में एक ियाकलाप करते हैं। मान लें कि एक बच्चा अपनी आँखों को बंद किए हुए एक दीवार के सामने खड़ा है। उसे दीवार पर वुफछ दूरी से पत्थर पेंफकने को कहें। प्रत्येक पत्थर के दीवार से टकराने के साथ ही वह एक आवाश सुनेगा। अगर वह इसे दस बार दोहराएगा तो वह दस बार आवाश सुनेगा। लेकिन जब आँख बंद किया हुआ बच्चा तार से घ्िारी हुइर् चारदिवारी पर पत्थर पेंफकेगा तो अध्िकतर पत्थर उस घेरे पर नहीं टकराएँगे और कोइर् आवाश सुनाइर् नहीं पड़ेगी। क्योंकि घेरे के बीच में बहुत सारे खाली स्थान हैं, जिनके बीच से पत्थर निकल जाता है। इसी तवर्फ के अनुसार, अल्प़फा कण - प्रकीणर्न प्रयोग के आधर पर रदरप़फोडर् ने निम्न परिणाम निकाले - ;पद्ध परमाणु के भीतर का अध्िकतर भाग खाली है क्योंकि अध्िकतर अल्प़फा कण बिना विक्षेपित हुए सोने की पन्नी से बाहर निकल जाते हैं। ;पपद्ध बहुत कम कण अपने मागर् से विक्षेपित होते हैं जिससे यह ज्ञात होता है कि परमाणु में ध्नावेश्िात भाग बहुत कम है। ;पपपद्ध बहुत कम अल्पफा कण 180़° पर विक्षेपित हुए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि सोने के परमाणु का पूणर् ध्नावेश्िात भाग और द्रव्यमान, परमाणु के भीतर बहुत कम आयतन में सीमित है। प्राप्त आँकड़ों के आधर पर उन्होंने यह निष्कषर् निकाला कि नाभ्िाक की त्रिाज्या परमाणु की त्रिाज्या से 105 गुणा छोटी है। अपने प्रयोगों के आधर पर रदरप़फोडर् ने परमाणु का नाभ्िाकीय - माॅडल प्रस्तुत किया, जिसके निम्नलिख्िात लक्षण थेः ;पद्ध परमाणु का केंद्र ध्नावेश्िात होता है जिसे नाभ्िाक कहा जाता है। एक परमाणु का लगभग संपूणर् द्रव्यमान नाभ्िाक में होता है। ;पपद्ध इलेक्ट्राॅन नाभ्िाक के चारों ओर वतुर्लाकार मागर् में चक्कर लगाते हैं। ;पपपद्ध नाभ्िाक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में काप़फी कम होता है। रदरप़फोडर् के परमाणु माॅडल की कमियाँ वतुर्लाकार मागर् में चक्रण करते हुए इलेक्ट्राॅन का स्थायी हो पाना संभावित नहीं है। कोइर् भी आवेश्िात कण गोलाकार कक्ष में त्वरित होगा। त्वरण के दौरानआवेश्िात कणों से ऊजार् का विकिरण होगा। इस प्रकार स्थायी कक्ष में घूमता हुआ इलेक्ट्रॅान अपनी ऊजार् विकिरित करेगा और नाभ्िाक से टकरा जाएगा। अगर ऐसा होता, तो परमाणु अस्िथर होता जबकि हम जानते हैं कि परमाणु स्थायी होते हैं। 4ण्2ण्3 बोर का परमाण्िवक माॅडल ़रदरपफोडर् के माॅडल पर उठी आपिायों को दूर करने के लिए, नील्स बोर ने परमाणु की संरचना के बारे में परमाणु की संरचना निम्नलिख्िात अवधरणाएँ प्रस्तुत कीं - ;पद्ध इलेक्ट्राॅन केवल वुफछ निश्िचत कक्षाओं में ही चक्कर लगा सकते हैं, जिन्हंे इलेक्ट्रॅान की विविक्त कक्षा कहते हैं। ;पपद्ध जब इलेक्ट्रॅान इस विविक्त कक्षा में चक्कर लगाते हैं, तो उनकी उफजार् का विकिरण नहीं होता है। नील्स बोर ;1885 - 1962द्ध का जन्म 7 अक्टूबर, 1885 में कोपेनहेगन में हुआ था। 1916 में कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में उनको भौतिकशास्त्रा का प्रोपेफसऱनियुक्त किया गया। 1922 में उनको परमाणु की संरचना पर अपने योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार मिला। प्रोप़ेफसर बोर के विविध् लेखों पर आधरित तीन पुस्तवेंफ प्रकाश्िात हुइर्ं - ;पद्ध दि थ्योरी आॅप़फ स्पेक्ट्रा एंड एटाॅमिक काॅन्स्टीट्यूशन ;पपद्ध एटाॅमिक थ्योरी, और ;पपपद्ध दि डिस्िक्रप्शन आॅप़फ नेचर। इन कक्षाओं ;या कोशोंद्ध को ऊजार् - स्तर कहतेहैं। चित्रा 4.3 में एक परमाणु के ऊजार् स्तरों को दिखाया गया है। ये कक्षाएँ ;या कोशद्ध ज्ञएस्एडएछ३३ण्या संख्याओं, 1, 2, 3, 4ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् के द्वारा दिखाइर् जाती हैं। प्रश्न 1ण् परमाणु उदासीन है, इस तथ्य को टाॅमसन के माॅडल के आधर पर स्पष्ट कीजिए। 2ण् रदरप़फोडर् के परमाणु माॅडल के अनुसार, परमाणु के नाभ्िाक में कौन सा अवपरमाणुक कण विद्यमान है? 3ण् तीन कक्षाओं वाले बोर के परमाणु माॅडल का चित्रा बनाइए। 4ण् क्या अल्प़फा कणों का प्रकीणर्न प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धतु वफी पन्नी से संभव होगा? 4ण्2ण्4 न्यूट्राॅन 1932 में जे. चैडविक ने एक और अवपरमाणुक कण को खोज निकाला, जो अनावेश्िात और द्रव्यमान में प्रोटाॅन के बराबर था। अंततः इसका नाम न्यूट्राॅन पड़ा। हाइड्रोजन को छोड़कर ये सभी परमाणुओं के नाभ्िाक में होते हैं। समान्यतः, न्यूट्राॅन को ष्दश् से दशार्या जाता है। परमाणु का द्रव्यमान नाभ्िाक में उपस्िथत प्रोटाॅन और न्यूटॅªान के द्रव्यमान के योग के द्वारा प्रकट किया जाता है। प्रश्न 1ण् परमाणु के तीन अवपरमाणुक कणों के नाम लिखें। 2ण् हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4 न है और उसके नाभ्िाक में दो प्रोटाॅन होते हैं। इसमें कितने न्यूट्राॅन होंगे? 4ण्3 विभ्िान्न कक्षाओं में इलेक्ट्रॅान वैफसे वितरित होते हैं? परमाणुओं वफी विभ्िान्न कक्षाओं में इलेक्ट्राॅनों के वितरण के लिए बोर और बरी ने वुफछ नियम प्रस्तुत किए। ;पद्ध इन नियमों के अनुसार किसी कक्षा में उपस्िथत अध्िकतम इलेक्ट्राॅनों की संख्या को सूत्रा 2द2 से दशार्या जाता है, जहाँ ‘द’ कक्षा की संख्याया ऊजार् स्तर है। इसलिए इलेक्ट्राॅनों की अध्िकतम संख्या पहले कक्ष या ज्ञ कोश में होगी त्र 2 × 12 त्र 2ए दूसरे कक्ष या स् कोश में होगी त्र 2 × 22 त्र 8, तीसरे कक्ष या ड कोश में होगी त्र 2 × 32 त्र 18, चैथे कक्ष या छ कोश में होगी त्र 2 × 42 त्र 32। चित्रा 4ण्4रू पहले अठारह तत्वों की परमाण्िवक संरचना का व्यवस्था चित्रा ;पपद्ध सबसे बाहरी वफोश में इलेक्ट्राॅनों की अिाकतम संख्या 8 हो सकती है। ;पपपद्ध किसी परमाणु के दिए गए कोश में इलेक्ट्राॅन तब तक स्थान नहीं लेते हैं जब तक कि उससे पहले वाले भीतरी कक्ष पूणर् रूप से भर नहीं जाते। इससे स्पष्ट होता है कि कक्षाएँ क्रमानुसार भरती हैं। पहले 18 तत्वों की परमाणु संरचना के व्यवस्था चित्रा को चित्रा 4.4 में दिखाया गया है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 4ण्2 ऽ स्थायी परमाण्िवक माॅडल तैयार करें तथा पहले अठारह तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास को दिखाएँ। प्रऽ पहले अठारह तत्वों के परमाणुओं की संयोजन सारणी 4.1 में दी गइर् है। श्न 1ण् काबर्न और सोडियम के परमाणुओं के लिए इलेक्ट्रान - वितरण लिख्िाए। 2ण् अगर किसी परमाणु का ज्ञ और स् कोश भरा है, तो उस परमाणु में इलेक्टॅªानों की संख्या क्या होगी? 4ण्4 संयोजकता हम पढ़ चुके हैं कि परमाणुओं की विभ्िान्न कक्षाओं ;या कोशोंद्ध में इलेक्ट्राॅन किस प्रकार व्यवस्िथत होते हैं। किसी परमाणु की सबसे बाहरी कक्षा में उपस्िथत इलेक्ट्रानों को संयोजकता - इलेक्ट्रॅान कहा जाता है। बोर - बरी स्कीम से हम जानते हैं कि किसी परमाणु का बाह्यतम कक्ष अध्िकतम 8 इलेक्ट्राॅन रख सकता है। यह देखा गया था कि जिन तत्वों के परमाणुओं के बाह्यतम कक्ष पूणर् रूप से भरे होते हैं वे रासायनिक रूप से सिय नहीं होते हैं। दूसरे शब्दों में, उनकी संयोजन - शक्ित या संयोजकता शून्य होती है। इन अिय तत्वों में से हीलियम - परमाणु के बाह्यतम कक्ष में दो ;2द्ध इलेक्ट्राॅन होते हैं और अन्य में आठ ;8द्ध होते है। सिय तत्वों के परमाणुओं की संयोजन - शक्ित अथार्त् अपने समान या अन्य किसी तत्व के परमाणुओं से मिलकर अणु बनाने की प्रवृिा, अपने बाह्यतम कक्ष को पूणर् रूप से भरने का प्रयास माना जाता है। आठ इलेक्ट्राॅन वाले सबसे बाहरी ;बाह्यतमद्ध कक्ष को अष्टक माना जाता है। परमाणु अपने अंतिम कक्ष में अष्टक प्राप्त करने के लिए िया करते हैं। यह आपस में इलेक्ट्रॅानों की साझेदारी करने, उनको ग्रहण करने या उनका त्याग करने से होता है। परमाणु के बाह्यतम कक्ष में इलेक्ट्राॅनों के अष्टक बनाने के लिए जितनी संख्या में इलेक्ट्राॅनों की साझेदारी या स्थानांतरण होता है, वही उस तत्व की संयोजकता - शक्ित अथार्त् संयोजकता होती है, जिसकी चचार् पिछले अध्याय में की गइर् है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन, लीथ्िायम या सोडियम प्रत्येक के परमाणुओं के बाह्यतम कक्ष में एक - एक इलेक्ट्रॅान होता है। अतः यह एक इलेक्ट्रॅान का त्याग कर सकते हैं। इसलिए उनकी संयोजकता एक ;1द्ध कही जाती है। क्या आप बता सकते हैं कि मैग्नीश्िायम और एल्युमिनियम की संयोजकता क्या है? यह क्रमशः 2 और 3 है क्योंकि मैग्नीश्िायम के बाह्यतम कक्ष में 2 तथा एलुमिनियम के 3 इलेक्ट्राॅन होते हैं। यदि किसी परमाणु के बाह्यतम कक्ष में इलेक्ट्रॅानों की संख्या उसकी क्षमता के अनुसार लगभग पूरी है तो संयोजकता एक अन्य प्रकार से प्राप्त की जाती है। ़उदाहरण के लिए, फ्रलोरीन परमाणु के बाह्यतम कक्ष में सात ;7द्ध इलेक्ट्रॅान होते हैं और इसकी संयोजकता सात ;7द्ध हो सकती है विंफतु बाह्यतम कक्ष में ़अष्टक बनाने के लिए फ्रलोरीन के लिए 7 इलेक्ट्राॅनों का त्याग करने की अपेक्षा एक ;1द्ध इलेक्ट्रॅान प्राप्त करना अध्िक आसान है। अतः इसकी संयोजकता, अष्टक ;8द्ध में से सात ;7द्ध घटाकर प्राप्त की जातीहै और इस तरह फ्ऱलोरीन की संयोजकता एक ;1द्ध है। आॅक्सीजन की संयोजकता का परिकलन भी इसी प्रकार किया जा सकता है। इस परिकलन से आॅक्सीजन की संयोजकता कितनी होगी? अतः प्रत्येक तत्व के परमाणु की एक निश्िचत संयोजन - शक्ित होती है, जिसे संयोजकता कहते हैं। पहले 18 तत्वों की संयोजकता सारणी 4.1 के अंतिम स्तंभ में दी गइर् है। श्न 1ण् क्लोरीन, सल्प़फर और मैग्नीश्िायम की परमाणु संख्या से आप इनकी संयोजकता वैफसे प्राप्त करेंगे?प्र 4ण्5 परमाणु संख्या तथा द्रव्यमान संख्या 4ण्5ण्1 परमाणु संख्या हम जानते हैं कि परमाणु के नाभ्िाक में प्रोटाॅन विद्यमान होते हैं। एक परमाणु में उपस्िथत प्रोटाॅनों की संख्या उसकी परमाणु संख्या को बताती है। इसे र् के द्वारा दशार्या जाता है। किसी तत्व के सभी अणुओं की परमाणु संख्या ;र्द्ध समान होती है। वास्तव में तत्वों को उनके परमाणु में विद्यमान प्रोटाॅनों की संख्या से परिभाष्िात किया जाता है। हाइड्रोजन के लिए र् त्र 1ए क्योंकि हाइड्रोजन परमाणु के नाभ्िाक में केवल एक प्रोटाॅन होता है। इसी प्रकार, काबर्न के लिए र् त्र 6ण् इस प्रकार, एक परमाणु के नाभ्िाक में उपस्िथत प्रोटाॅनों की वुफल संख्या को परमाणु संख्या कहते हैं। 4ण्5ण्2 द्रव्यमान संख्या एक परमाणु के अवपरमाणुक कणों के अध्ययन के बाद हम इस निष्कषर् पर पहुँच सकते हैं कि व्यावहारिक रूप में परमाणु का द्रव्यमान उसमें विद्यमान प्रोटाॅनों और न्यूट्रॅानों के द्रव्यमान के कारण होता है। ये परमाणु के नाभ्िाक में विद्यमान होते हैं इसलिए इन्हें न्यूक्िलयाॅन भी कहते हैं। परमाणु का लगभग संपूणर् द्रव्यमान उसके नाभ्िाक में होता है। उदाहरण के लिए, काबर्न का द्रव्यमान 12न है क्योंकि इसमंे 6 प्रोट्रॅान और 6 न्यूटॅªान होते हैं, 6 न ़ 6 न त्र 12। इसी प्रकार, ऐलुमिनियम का द्रव्यमान 27 न है ;13 प्रोटॅान ़ 14 न्यूट्राॅनद्ध। एक परमाणु के नाभ्िाक में उपस्िथत प्रोटाॅनों और न्यूट्रॅानों की वुफल संख्या के योग को द्रव्यमान संख्या कहा जाता है। किसी परमाणु को दशार्ने के लिए परमाणुक संख्या, द्रव्यमान - संख्या और तत्व का प्रतीक इस प्रकार से लिखा जाता है। द्रव्यमान संख्या तत्व का प्रतीक परमाणु संख्या उदाहरण के लिए, नाइट्रोजन को इस प्रकार लिखा जाता है, 14 छ ।7 श्न 1ण् यदि किसी परमाणु में इलेक्ट्रॅानों की संख्या 8 है और प्रोटाॅनों की संख्या भी 8 है तब, ;ंद्ध परमाणु की परमाणुक संख्या क्या है?प्र ;इद्ध परमाणु का क्या आवेश है? 2ण् सारणी 4ण्1 की सहायता से आॅक्सीजन और सल्प़फर - परमाणु की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए। 4ण्6 समस्थानिक ष् प्रकृति में, वुफछ तत्वों के परमाणुओं की पहचान की गइर् है, जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग - अलग होती है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन परमाणु को लें। इसके तीन परमाण्िवक स्पीशीश होते हैंः प्रोटियम 1 भ्, ड्यूटीरियम ;2 भ् या क्द्ध, ट्राइटियम1 1 ;3 1भ् या ज्द्ध, प्रत्येक की परमाणु संख्या समान है। लेकिन द्रव्यमान संख्या क्रमशः 1, 2 और 3 है। इस तरह के अन्य उदाहरण हैंः ;1द्ध काबर्न, 126 ब् और 14 37ब्य ;2द्ध क्लोरीन, 35 ब्स और ब्स।6 17 17 इन उदाहरणों के आधर पर समस्थानिकों को इस प्रकार परिभाष्िात किया जा सकता है, ‘‘एक ही तत्व के परमाणु जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या भ्िान्न होती है।’’ इस तरह हम कह सकते हैं कि हाइड्रोजन परमाणु के तीन समस्थानिक प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम होते हैं। बहुत से तत्वों में समस्थानिक का मिश्रण भी होता है। किसी तत्व का प्रत्येक समस्थानिक शु( पदाथर् होता है। समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान लेकिन भौतिक गुण अलग - अलग होते हैं।प्रकृति में क्लोरीन दो समस्थानिक रूपों में पाया जाता है, जिसका द्रव्यमान 35न और 37नए जो 3ः 1 के अनुपात में होते हैं। अब यह प्रश्न उठता है कि किस द्रव्यमान को क्लोरीन परमाणु का द्रव्यमान मानना चाहिए? आइए इसका पता लगाएँ।किसी प्राकृतिक तत्व के एक परमाणु का द्रव्यमानउस तत्व में विद्यमान सभी प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले परमाणुओं के औसत द्रव्यमान के बराबर होता है। अगर किसी एक तत्व का कोइर् समस्थानिक नहीं है तो परमाणु का द्रव्यमान उसमें उपस्िथत प्रोटॅान और न्यूट्रॅानों के द्रव्यमान का योग होता है लेकिन अगर एक तत्व समस्थानिक रूप में उपस्िथत होता है तो हमें प्रत्येक समस्थानिक रूप का प्रतिशत जानना होगा और औसत द्रव्यमान की गणना करनी होगी। क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान होगा, 35 75 37 25 100 100 105 37 142 35ण्5 न 4 4 4 इसका मतलब यह नहीं है कि क्लोरीन के परमाणु का द्रव्यमान एक भ्िान्नात्मक संख्या 35ण्5न है। इसका तात्पयर् यह हुआ कि अगर आप क्लोरीन की वुफछ मात्रा लेते हैं तो इसमंे क्लोरीन के समस्थनिक होंगे और औसत द्रव्यमान 35ण्5 न होगा। समस्थानिकों के अनुप्रयोग वुफछ समस्थानिकों के विशेष गुण होते हैं, जिनका उपयोग हम विभ्िान्न क्षेत्रों में करते हैं। उनमें से वुफछ आपने क्या सीखा निम्नलिख्िात हैंः ;पद्ध यूरेनियम के एक समस्थानिक का उपयोग परमाणु भट्टीð;ंजवउपब तमंबजवतद्ध में इर्ंध्न के रूप में होता है। ;पपद्ध वैफंसर के उपचार में कोबाल्ट के समस्थानिक का उपयोग होता है। ;पपपद्ध घेंघा रोग के इलाज में आयोडीन के समस्थानिक का उपयोग होता है। 4ण्6ण्1 समभारिक दो तत्वों - वैफल्िशयम, परमाणु संख्या 20 और आगर्न परमाणु संख्या 18 के बारे में विचार कीजिए। परमाणुओं में इलेक्टॅªानों की संख्या भ्िान्न - भ्िान्न है, दोनों तत्वों की द्रव्यमान संख्या 40 है। यानी, तत्वों के इस जोड़े के अणुओं में वुफल न्यूक्िलयॅानों की संख्या समान है। अलग - अलग परमाणु संख्या वाले तत्वों को जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है, समभारिक कहा जाता है। श्न 1ण् चिÉ भ्ए क् और ज् के लिए प्रत्येक में पाए जाने वाले तीन अवपरमाणुक कणों कोप्र सारणीब( कीजिए। 2ण् समस्थानिक और समभारिक के किसी एक युग्म का इलेक्ट्रॅानिक विन्यास लिख्िाए। ऽ इलेक्ट्राॅन और प्रोटॅान की खोज क्रमशः जे. जे. टाॅमसन और इर्. गोल्डस्टीन ने की। ऽ जे. जे. टाॅमसन ने यह प्रस्तावित किया था कि इलेक्ट्रॅान ध्नात्मक गोले में धँसे होते हैं। ऽ रदरप़फोडर् के अल्प़फा कणों के प्रकीणर्न प्रयोग ने परमाणु वेंफद्रक की खोज की। ऽ रदरप़फोडर् के परमाणु माॅडल ने प्रस्तावित किया कि परमाणु के अंदर बहुत छोटा वेंफद्रक होता है और इलेक्ट्रॅान वेंफद्रक के चारों ओर घूमते हैं। परमाणु की स्िथरता की इस माॅडल से व्याख्या नहीं की जा सकी है। ऽ नील बोर द्वारा दिया गया परमाणु का माॅडल अध्िक सफ्रफल था। उन्होंने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॅान वेंफद्रक के चारों ओर निश्िचत उफजार् के साथ अलग - अलग कक्षाओं में वितरित हैं। अगर परमाणु की सबसे बाहरी कक्षाएँ भर जाती हैं, तो परमाणु स्िथर होगा और कम ियाशील होगा। ऽ जे. चैडविक ने परमाणु के अंदर न्यूट्रॅान की उपस्िथति को खोजा। इस प्रकार परमाणु के तीन अवपरमाणुक कण हैं - इलेक्ट्रॅान, प्रोटाॅन और न्यूट्राॅन। इलेक्ट्रॅानट्टण आवेश्िात होते हैं, प्रोटॅान ध्नावेश्िात होते हैं और न्यूट्रॅान अनावेश्िात होते हंै। इलेक्ट्रॅान का द्रव्यमान हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के 1ध्2000 गुणा होता है। प्रोटाॅन और न्यूूट्राॅन में प्रत्येक का द्रव्यमान एक इकाइर् लिया जाता है। ऽ परमाणु के कक्षों को ज्ञए स्ए डए छ३३ नाम दिया गया है। ऽ संयोजकता परमाणु की संयोजन शक्ित है। ऽ एक तत्व की परमाणु संख्या वेंफद्रक में विद्यमान प्रोटाॅनों की संख्या के बराबर होती है। ऽ परमाणु की द्रव्यमान संख्या वेंफद्रक में विद्यमान न्यूक्िलयानों की संख्या के बराबर होती है। ऽ समस्थानिक एक ही तत्व के परमाणु हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या भ्िान्न - भ्िान्न होती है। ऽ समभारिक वे परमाणु हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या समान लेकिन परमाणु संख्या भ्िान्न - भ्िान्न होती है। ऽ तत्वों को उनके प्रोटाॅनों की संख्या के आधर पर परिभाष्िात किया जा सकता है। अभ्यास 1ण् इलेक्ट्रॅान, प्रोटाॅन और न्यूट्रॅान के गुणों की तुलना कीजिए। 2ण् जे. जे. टाॅमसन के परमाणु माॅडल की क्या सीमाएँ हैं? 3ण् रदरप़फोडर् के परमाणु माॅडल की क्या सीमाएँ हैं? 4ण् बोर के परमाणु माॅडल की व्याख्या कीजिए। 5ण् इस अध्याय में दिए गए सभी परमाणु माॅडलों की तुलना कीजिए। 6ण् पहले अठारह तत्वों के विभ्िान्न कक्षों में इलेक्ट्राॅन वितरण के नियम को लिख्िाए। 7ण् सिलिकाॅन और आॅक्सीजन का उदाहरण लेते हुए संयोजकता की परिभाषा दीजिए। 8ण् उदाहरण के साथ व्याख्या कीजिए - परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और समभारिवफ समस्थानिकों के कोइर् दो उपयोग लिख्िाए। 9ण् छं़ के पूरी तरह से भरे हुए ज्ञ व स् कोश होते हैं - व्याख्या कीजिए। 8110ण् अगर ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकांे ख् 79 ठत ;49ण्7ःद्ध तथा ठत35 35 ;50ण्3ःद्ध, के रूप में है, तो ब्रोमीन परमाणु के औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए। 11ण् एक तत्व ग् का परमाणु द्रव्यमान 16.2 न है तो इसके किसी एक नमूनें में समस्थानिक 16 ग् और 18 ग् का प्रतिशत क्या होगा?88 12ण् यदि तत्व का र् त्र 3 हो तो तत्व की संयोजकता क्या होगी? तत्व का नाम भी लिख्िाए। 13ण् दो परमाणु स्पीशीश के वेंफद्रकों का संघटन नीचे दिया गया है ग् ल् प्रोटॅान 6 6 न्यूट्रॅान 6 8 ग् और ल् की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए। इन दोनों स्पीशीश में क्या संबंध् है? 14ण् निम्नलिख्िात वक्तव्यों में गलत के लिए थ् और सही के लिए ज् लिखें। ;ंद्ध जे. जे. टाॅमसन ने यह प्रस्तावित किया था कि परमाणु के वेंफद्रक में केवल न्यूक्लीयाॅन्स होते हैं। ;इद्ध एक इलेक्ट्रॅान और प्रोटॅान मिलकर न्यूट्रॅान का निमार्ण करते हैं इसलिए यह अनावेश्िात होता है। ;बद्ध इलेक्ट्रॅान का द्रव्यमान प्रोटॅान से लगभग 1 गुणा होता है।2000;कद्ध आयोडीन के समस्थानिक का इस्तेमाल टिंक्चर आयोडीन बनाने में होता है। इसका उपयोग दवा के रूप में होता है। प्रश्न संख्या 15, 16 और 17 में सही के सामने ;9द्ध का चिÉ और गलत के सामने ;×द्ध का चिÉ लगाइए। ़15ण् रदरपफोडर् का अल्प़फा कण प्रकीणर्न प्रयोग किसकी खोज के लिए उत्तरदायी था - ;ंद्ध परमाणु वेंफद्रक ;इद्ध इलेक्ट्रॅान ;बद्ध प्रोटॅान ;कद्ध न्यूट्रॅान 16ण् एक तत्व के समस्थानिक में होते हैं - ;ंद्ध समान भौतिक गुण ;इद्ध भ्िान्न रासायनिक गुण ;बद्ध न्यूट्रॅानों की अलग - अलग संख्या ;कद्ध भ्िान्न परमाणु संख्या 17ण् ब्सदृ आयन में संयोजकता - इलेक्ट्राॅनों की संख्या है - ;ंद्ध16 ;इद्ध 8 ;बद्ध 17 ;कद्ध 18 18ण् सोडियम का सही इलेक्ट्राॅनिक विन्यास निम्न में कौन सा है? ;ंद्ध 2ए8 ;इद्ध 8ए2ए1 ;बद्ध 2ए1ए8 ;कद्ध 2ए8ए1 19ण् निम्नलिख्िात सारणी को पूरा कीजिए -

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