अध्याय 2 क्या हमारे आस - पास के पदाथर् शु( हैं ;प्े डंजजमत ।तवनदक न्े च्नतमद्ध हम वैफसे जान सकते हैं कि बाशार से खरीदा हुआ दूध्, घी, मक्खन, नमक, मसाला, मिनरल जल या जूस शु( हैं? चित्रा2ण्1रूरसोइर् में उपयोग की जाने वाली वुफछ वस्तुएँ क्या आपने कभी इन खाने वाले पदाथो± के डिब्बोंके ऊपर लिखे ‘शुु(’ शब्द पर ध्यान दिया है? एक साधरण व्यक्ित के लिए शुु( का अथर् होता है कि पदाथर् में कोइर् मिलावट न हो लेकिन, वैज्ञानिकों के लिए ये सभी वस्तुएँ विभ्िान्न पदाथो± के मिश्रण हैं, अतः शु( नहीं हैं। उदाहरण के लिए दूध् जल, वसा, प्रोटीन आदि का मिश्रण है। जब एक वैज्ञानिक किसी पदाथर् को शुु( कहता है तो इसका तात्पयर् है कि उस पदाथर् में मौजूद सभी कण समान रासायनिक प्रवृफति के हैं। एक शुु( पदाथर् एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं तो पाते हैं कि सभी पदाथर् दो या दो से अध्िक शुु( अवयवों के मिलने से बने हैं, उदाहरण के लिए, समुद्र का जल, खनिज, मिट्टðी आदि सभी मिश्रण हैं। 2ण्1मिश्रण क्या है? मिश्रण, जिसे पदाथर् कहा जाता है, एक या एक से अध्िक शुु( तत्वों या यौगिकों से मिलकर बना होता है। किसी पदाथर् को अन्य प्रकार के तत्वों में भौतिक प्रक्रम द्वारा पृथव्फ नहीं किया जा सकता है। हम जानते हैं कि जल में घुले हुए सोडियम क्लोराइड को वाष्पीकरण या आसवन विध्ि द्वारा जल से पृथव्फ किया जा सकता है। यद्यपि, सोडियम क्लोराइड अपने आप में एक पदाथर् है और इसे भौतिक विध्ि के द्वारा इसके रासायनिक अवयवों में पृथव्फ नहीं किया जा सकता है। इसी प्रकार चीनी एक पदाथर् है क्योंकि यह एक ही प्रकार का शुु( अवयव रखता है और इसका यौगिक समान रहता है। पेय पदाथर् और मिट्टðी में एकसमान कण नहीं हैं। किसी भी स्रोत से प्राप्त होने वाले किसी एक पदाथर् के अभ्िालाक्षण्िाक गुण एकसमान होंगे। इस प्रकार हम कह सकतें हैं कि मिश्रण में एक से अध्िक पदाथर् होते हैं। 2ण्1ण्1मिश्रण के प्रकार अवयवों की प्रवृफति के अनुसार विभ्िान्न प्रकार के मिश्रणों का निमार्ण होता है। इस तरह मिश्रण के कइर् प्रकार होते हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्1 ऽ कक्षा को अ, ब, स और द समूहों में बाँटें। ऽ एक बीकर जिसमें 50 उस् जल और एक चम्मच काॅपर सल्प़ेफट चूणर् हो, समूह ‘अ’ को दें। ऽ समूह ‘ब’ को एक बीकर में 50 उस् जल तथा दो चम्मच काॅपर सल्प़ेफट चूणर् दें। ऽ काॅपर सल्प़ेफट और पोटैश्िायम परमैंगनेट या साधारण नमक ;सोडियम क्लोराइडद्ध समूह ‘स’ और ‘द’ को दें। ;दोनों को अवयवों की पृथव्फ - पृथव्फ मात्रा देंद्ध। ऽ अब पृथव्फ - पृथव्फ समूह के उन अवयवों को मिलाकर मिश्रण तैयार करेें। ऽ उनके रंग और बनावट के आधर पर एक रिपोर्ट तैयार करें। ऽ समूह ‘अ’ और ‘ब’ को एक मिश्रण प्राप्त होता है जिसकी बनावट समान होती है। इस तरह के मिश्रण को हम समंागी मिश्रण अथवा विलयन कहते हैं। इस तरह के मिश्रणों के वुफछ अन्य उदाहरण हैं, जल में नमक और जल में चीनी। दोनों समूहों से प्राप्त घोल के रंगों की तुलना करें। यद्यपि दोनों समूह के पास काॅपर सल्प़ेफट का घोल है, लेकिन उन दोनों घोल के रंगों की तीव्रता पृथव्फ - पृथव्फ है। यह दिखलाता है कि समंागी मिश्रण पृथव्फ - पृथव्फ संघटन रख सकते हैं। ऽ समूह ‘स’ और ‘द’ ने जो मिश्रण प्राप्त किया है, उनके अंश भौतिक दृष्िट से पृथव्फ हैं। इस तरह के मिश्रण को विषमांगी मिश्रण कहते हैं। सोडियम क्लोराइड और लोहे की छीलन, नमक और सल्प़ फर एवं जल और तेल विषमांगी मिश्रण के अन्य उदाहरण हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्2 ऽ आइए पुनः कक्षा को चार समूहों अ, ब, स और द में बाँटें। ऽ प्रत्येक समूह को नीचे दिए हुए नमूने में से एक देंः − समूह ‘अ’ को काॅपर सल्प़ेफट के वुफछ िस्टल दें। − समूह ‘ब’ को एक चम्मच काॅपर सल्प़फट दें।े− समूह ‘स’ को चाॅक का चूणर् या गेहूँ का आटा दें। − समूह ‘द’ को दूध् या स्याही की वुफछ बदँू ंे द।ंे ऽ छात्रों को काँच की छड़ की सहायता से नमूनों को जल में मिलाने को कहें। क्या कण जल में दिखाइर् देते हैं? ऽ अब टाॅचर् से प्रकाश की किरण को बीकर पर डालें और इसको सामने से देखें। क्या प्रकाश की किरण का मागर् दिखाइर् देता है? ऽ अब मिश्रण को वुफछ समय तक शांत छोड़ दें। इस बीच मिश्रण छानने वाले उपकरण को तैयार कर लें। क्या मिश्रण स्िथर है या वुफछ समय के बाद कण नीचे बैठना शुरू करते हैं? ऽ मिश्रण को छान लें। क्या छानक पत्रा पर वुफछ शेष बचा है? ऽ कक्षा में परिणामों पर चचार् कर इस िया पर एक मत बनाने का प्रयत्न करें। ऽ समूह ‘अ’ और ‘ब’ एक विलयन पाते हैं। ऽ समूह ‘स’ एक निलंबन पाता है। ऽ समूह ‘द’ एक कोलाइड विलयन पाता है। कँाच की छड़ छानक पत्रा के साथ संलग्न कीप में निथरा हुआ द्रवछानक पत्रा कीप परखनलीमुड़ा हुआ छानक पत्रा छानक पत्रा का शंवुफ छना हुआ द्रव चित्रा 2ण्2रू निस्यंदन ;छानने की प्रियाद्ध अब हम विलयनों, निलंबनों और कोलाइड विलयनों के बारे में पढ़ेंगे। श्न 1ण् पदाथर् से आप क्या समझते हैं? 2ण् समांगी और विषमांगी मिश्रणों में अंतर बताएँ।प्र 2ण्2 विलयन क्या है? विलयन दो या दो से अध्िक पदाथो± का समांगी मिश्रण है। आप प्रतिदिन बहुत प्रकार के विलयनों को देखते होंगे। नींबू जल, सोडा जल आदि विलयन के उदाहरण हैं। प्रायः हम एक विलयन को ऐसे तरल पदाथर् के रूप में विचार करते हैं जिसमें ठोस, द्रव यागैस मिले हों लेकिन प्रकृति में ठोस विलयन ;मिश्र धातुद्ध और गैसीय विलयन ;वायुद्ध भी होते हंै। एक विलयन के कणों में समांगिकता होती है। उदाहरण के लिए नींबू जल का स्वाद सदैव समान रहता है। यह दशार्ता है कि इस विलयन में चीनी और नमक के कण समान रूप से वितरित होते हैं। किसी विलयन को दो भागों विलायक और विलय में बाँटा जाता है। विलयन का वह घटक ;जिनकी मात्रा दूसरे से अध्िक होती हैद्ध जो दूसरे घटक को विलयन में मिलाता है उसे विलायक कहते हंै। विलयन का वह घटक ;प्रायः कम मात्रा में होता हैद्ध जो कि विलायक में घुला होता है उसे विलेय कहते हैं। उदाहरण के लिएः ;पद्ध चीनी और जल का विलयन एक तरल घोल में ठोस का उदाहरण है। इसमें चीनी विलेय है और जल विलायक हैै। ;पपद्ध आयोडिन और ऐल्कोहाॅल का विलयन जिसे टिंक्चर आयोडीन के नाम से जाना जाता है, इसमें आयोडीन विलेय है और ऐल्कोहाॅल विलायक है। ;पपपद्ध वातयुक्त पेय जैसे सोडा जल, कोक इत्यादि तरल विलयन में गैस के रूप मंे हैं। इनमें काबर्न डाइआॅक्साइड गैस विलेय और जल विलायक है। ;पअद्ध वायु गैस मंे गैस का विलयन है। यह मुख्यतः दो घटकों आॅक्सीजन ;21ःद्ध और नाइट्रोजन ;78ःद्ध का समांगी मिश्रण है। नाइट्रोजन को क्या हमारे आस - पास के पदाथर् शु( हैं वायु का विलायक कहा जाता है। वायु में दूसरी गैसें बहुत कम मात्रा में उपलब्ध् होती हैं। विलयन के गुण ऽ विलयन एक समांगी मिश्रण है। ऽ विलयन के कण व्यास में 1 दउ ;10.9 उमजतमद्ध से भी छोटे होते हैं। इसलिए वे आँख से नहीं देखे जा सकते हैं। ऽ अपने छोटे आकार के कारण विलयन के कण,गुजर रही प्रकाश की किरण को फ्रैफलाते नहीं हैं। इसलिए विलयन में प्रकाश का मागर् दिखाइर् नहीं देता। ऽ छानने की विध्ि द्वारा विलेय के कणों को विलयन में से पृथव्फ नहीं किया जा सकता है। विलयन को शांत छोड़ देने पर भी विलेय के कण नीचे नहीं बैठते हैं, अथार्त् विलयन स्थाइर् है। 2ण्2ण्1 विलयन की सांद्रता ियाकलाप 2.2 में हमने देखा कि समूह ‘अ’ और समूह ‘ब’ के पास एक ही पदाथर् के विभ्िान्न आभाओं के रंगों के विलयन हैं। हम लोग जानते हैं कि विलयन में पृथव्फ - पृथव्फ मात्रा में विलायक और विलेय पदाथर् होते हैं। विलयन में मौजूद विलेय पदाथर् की मात्रा के आधर पर इसे तनु, सांद्र या संतृप्त घोल कहा जा सकता है। तनु और सांद्र तुलनात्मक शब्द हंै। ियाकलाप 2.2 में समूह ‘अ’ द्वारा प्राप्त विलयन समूह ‘ब’ की तुलना में तनु है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्3 ऽ दो पृथव्फ - पृथव्फ बीकरों में 50 उस् जल लें। ऽ एक बीकर में नमक और दूसरे में चीनी अथवा बेरियम क्लोराइड मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। ऽ जब विलेय पदाथर् और अध्िक न घुले तब 5व्ब् ताप बढ़ाने के लिए बीकर को गमर् करें। ऽ विलेय पदाथर् को पुनः मिलाना शुरू करें। क्या किसी दिए गए ताप पर चीनी, नमक अथवा बेरियम क्लोराइड की जल में घोली गइर् मात्राएँ बराबर हैं? किसी निश्िचत तापमान पर उतना ही विलेय पदाथर् घुल सकता है जितनी कि विलयन की क्षमता होती है। दूसरे शब्दों में, दिए गए निश्िचत तापमान पर यदि विलयन में विलेय पदाथर् नहीं घुलता है तो उसे संतृप्त विलयन कहते हैं। विलेय पदाथर् की वह मात्रा, जो इस ताप पर संतृप्त विलयन में उपस्िथत है, उसकी घुलनशीलता कहलाती है। यदि एक विलयन में विलेय पदाथर् की मात्रा संतृप्तता से कम है तो इसे असंतृप्त विलयन कहा जाता है। यदि विलयन में विलेय पदाथर् की सांद्रता संतृप्त स्तर से कम हो तो उसे असंतृप्त विलयन कहते हैं। यदि आप किसी विश्िाष्ट ताप पर एक संतृप्त विलयन लें तथा उसे धीरे - धीरे ठंडा करें तो क्या होगा? उपरोक्त किए गए ियाकलाप से हम कह सकते हैं कि दिए हुए एक निश्िचत तापमान पर पृथव्फ - पृथव्फ पदाथो± की विलयन क्षमता भ्िान्न होती है। विलायक की मात्रा ;द्रव्यमान अथवा आयतनद्ध में घुले हुए विलेय पदाथर् की मात्रा को अथवा विलेय पदाथर् की मात्रा जो विलयन के किसी दी गइर् मात्रा अथवा आयतन में उपस्िथत हो, उसे विलयन की सांद्रता कहते हैं। विलये की मात्राविलयन की सादं्रता विलयन की मात्रा विलेय की मात्राया विलायक की मात्रा विलयन की सांद्रता को दशर्ाने की बहुत सी वििायाँ हैं, लेकिन हम यहाँ सिप़र्फ दो विध्ियों के बारे मंे चचार् करेंगे। ;पद्ध द्रव्यमान/विलयन के द्रव्यमान प्रतिशत विलेय पदाथर् का दव््रयमान त्र ×100विलयन का द्रव्यमान ;पपद्ध द्रव्यमान/विलयन के आयतन प्रतिशत विलेय पदाथर् का दव््रयमान त्र ×100विलयन का आयतन उदाहरण 2ण्1 एक विलयन के 320 ह विलायक जल में 40 ह साधरण नमक विलेय है। विलयन की सांद्रता का परिकलन करें। हलरू विलेय पदाथर् ;नमकद्ध का द्रव्यमानत्र 40 ह विलायक ;जलद्ध का द्रव्यमान त्र 320 ह हम जानते हैं, विलयन का द्रव्यमान त्र विलेय पदाथर् का द्रव्यमान ़ विलायक का द्रव्यमान त्र 40 ह ़ 320 ह त्र 360 ह विलयन का द्रव्यमान प्रतिशत विलेय पदाथर् का दव््रयमान त्र ×100विलयन का द्रव्यमान 40 त्र ×100 त्र11ण्1ः 360 2ण्2ण्2 निलंबन क्या है? ियाकलाप 2.2 में समूह ‘स’ के द्वारा पाया गया विषमांगी घोल जो ठोस द्रव में परिक्षेपित हो जाता है, निलंबन कहलाता है। निलंबन एक विषमांगी मिश्रण है, जिसमें विलेय पदाथर् कण घुलते नहीं हैं बल्िक माध्यम की समष्िट में निलंबित रहते हैं। ये निलंबित कण आँखों से देखे जा सकते हैं। निलंबन के गुणध्मर् ऽ यह एक विषमांगी मिश्रण है। ऽ ये कण आँखों से देखे जा सकते हैं। ऽ ये निलंबित कण प्रकाश की किरण को फ्रैफला देते हैं, जिससे उसका मागर् दृष्िटगोचर हो जाता है। ऽ जब इसे शांत छोड़ देते हैं तब ये कण नीचे की ओर बैठ जाते हैं अथार्त निलंबन अस्थायी होता है। छानन विध्ि द्वारा इन कणों को मिश्रण से पृथव्फ किया जा सकता है। जब सभी कण नीचे बैठ जाते हैं तो निलंबन समाप्त हो जाता है तथा विलयन में प्रकाश की किरण का प्रकीणर्न रुक जाता है। 2ण्2ण्3 कोलाइडल विलयन क्या है? ियाकलाप 2.2 में समूह ‘द’ के द्वारा प्राप्त मिश्रण को कोलाइड या कोलाइडल विलयन कहा जाता है।कोलाइड के कण विलयन में समान रूप से फ्रैफले होते हैं। निलंबन की अपेक्षा कणों का आकार छोटा होने के कारण यह मिश्रण समांगी प्रतीत होता है लेकिन वास्तविकता में विलयन विषमांगी मिश्रण है, जैसे दूध। कोलाइडल कणों के छोटे आकार के कारण हम इसे आँख से नहीं देख पाते हैं लेकिन ये कण प्रकाशकी किरण को आसानी से फ्रैफला देते हैं, जैसा कि हमने ियाकलाप 2.2 में देखा है। प्रकाश की किरण काफ्रैफलाना टिनडल प्रभाव ;ज्लदकंसस ममििबजद्ध कहा जाता है। टिनडल नामक वैज्ञानिक ने इसकी खोज की थी। एक कमरे में छोटे छिद्र के द्वारा जब प्रकाश की किरण आती है तब वहाँ पर हम टिनडल प्रभाव को देख सकते ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 2ण्3रू ;ंद्ध काॅपर सल्प़ेफट का विलयन टिनडल प्रभाव नहीं दशार्ता हैऋ;इद्ध दूध् तथा पानी का मिश्रण टिनडल प्रभाव दशार्ता है हंै। यह कमरे में मौजूद ध्ूल और काबर्न के कणों केद्वारा प्रकाश के फ्रैफलने के कारण होता है। जब एक घने जंगल के आच्छादन से सूयर् की किरण गुजरती है वहाँ हम टिनडल प्रभाव को देख सकते हंै। जंगल के वफोहरे में छोटे - छोटे जल के कण होते हैं जो कि कोलाइड कणों के समान व्यवहार करते हैं। कोलाइड के गुणध्मर् ऽ यह एक विषमांगी मिश्रण है। ऽ कोलाइड के कणों का आकार इतना छोटा होता है कि ये पृथव्फ रूप में आँखों से नहीं देखे जा सकते हैं। ऽ ये इतने बड़े होते है कि प्रकाश की किरणंको पैफलाते हैं तथा उसके मागर् को दृश्य बनाते हैं। ऽ जब इनको शांत छोड़ दिया जाता है तब ये कण तल पर बैठते हैं अथार्त् ये स्थायी होते हैं। ऽ ये छानन विध्ि द्वारा मिश्रण से पृथव्फ नहीं किए जा सकते। किंतु एक विशेष विध्ि अपवेंफद्रीकरण तकनीक ;ियाकलाप 2.5द्ध द्वारा पथव्फ किए जा सकते हैं। कोलाइडल विलयन परिक्ष्िाप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम से बनता है। विलेय पदाथर् की तरह का घटक या परिक्ष्िाप्त कण जो कि कोलाइडल रूप में रहता है उसे परिक्ष्िाप्त प्रावस्था ;कपेचमतेमक चींेमद्ध कहते हैं तथा वह घटक जिसमें परिक्ष्िाप्त प्रावस्था निलंबित रहता है, उसे परिक्षेपण माध्यम ;कपेचमतेपदह उमकपनउद्ध कहते हंै। कोलाइडल को परिक्षेपण माध्यम ;ठोस, द्रव या गैसद्ध की अवस्था और परिक्ष्िाप्तप्रावस्था के अनुसार वगीर्कृत किया जाता है। सारणी 2.1 में वुफछ उदाहरण दिए गए हैं। प्रश्न 1ण् उदाहरण के साथ समांगी एवं विषमांगी मिश्रणों में विभेद कीजिए। 2ण् विलयन, निलंबन और कोलाइड एक - दूसरे से किस प्रकार भ्िान्न हैं? 3ण् एक संतृप्त विलयन बनाने के लिए 36 ह सोडियम क्लोराइड को 100 ह जल में 293 ज्ञ पर घोला जाता है। इस तापमान पर इसकी सांद्रता प्राप्त करें। 2ण्3 मिश्रण के घटकों का पृथक्करण हम पढ़ चुके हैं कि प्रायः प्रावृफतिक पदाथर् रासायनिक तौर पर शुु( नहीं होते हैं। मिश्रण से घटकों को पृथव्फ करने के लिए विभ्िान्न प्रकार की विध्ियाँ प्रयोग में लाइर् जाती हैं। पृथव्फ करने से मिश्रण के प्रत्येक घटक के बारे में जानकारी प्राप्त करना और प्रयोग में लाना सुगम हो जाता है। विषमांगी मिश्रण को साधरण भौतिक िया द्वारा पृथव्फ किया जा सकता है, जैसे हाथ से चुनकर, छन्नी से छानकर, जो हम प्रतिदिन व्यवहार में लाते हैं। कभी - कभी मिश्रण से घटकों को पृथव्फ करने के लिए विशेष तकनीकों को प्रयोग में लाया जाता है। 2ण्3ण्1 रंग वाले घटक ;डाइर्द्ध को नीले अथवा काले रंग की स्याही से वैफसे पृथव्फ कर सकते हैं? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्4 ऽ आध बीकर जल लें। ऽ बीकर के मुख पर वाच - ग्लास रखंे ;चित्रा 2.5द्ध। ऽ वुफछ बूँद स्याही वाच - ग्लास पर डाल दें। ऽ अब बीकर को गमर् करना शुरू करें। हम स्याही को प्रत्यक्ष रूप से गमर् नहीं करना चाहते हैं। आप देखेंगे कि वाच - ग्लास से वाष्पीकरण हो रहा है। ऽ वाष्पीकरण होने तक गमर् करना जारी रखते हैं। जब वाच - ग्लास पर कोइर् परिवतर्न नहीं दिखता है तब हम उसे गमर् करना बंद कर देते हैं। ऽ इसे ध्यान से देखें और प्रेक्ष्िात करेें। वाष्प स्याही वाच - ग्लास बीकर जल चित्रा2ण्5रूवाष्पीकरण अब उत्तर दें ऽ आपके विचार में, वाच - ग्लास पर से किसका वाष्पीकरण हुआ? ऽ क्या वाच - ग्लास पर कोइर् अवशेष बचा है? ऽ आप क्या प्रतिपादित करेंगे? क्या स्याही एक शुु( पदाथर् है या मिश्रण है? हम पाते हैं कि स्याही जल में रंग का एक मिश्रण है। इस तरह से हम विलायक से विलेय पदाथर् को वाष्पीकरण की विध्ि के द्वारा पृथव्फ कर सकते हैं। ऽ अपकेंद्रीय यंत्रा ;बमदजतपनिहपदह उंबीपदमद्ध से इसे दो मिनट तक अपवेंफदि्रत करें। अगर स्वूफल में यह यंत्रा उपलब्ध् नहीं है, तो यह प्रयोग आप घर पर रसोइर्ं में प्रयोग होने वाली मथनी या मिक्सी से भी कर सकते हैं। ऽ यदि नशदीक में कोइर् मिल्क डेयरी है तो वहाँ जाएँ और पूछें;पद्ध वे क्रीम को दूध् से वैफसे पृथव्फ करते हैं? ;पपद्ध वे दूध् से पनीर वैफसे बनाते हैं? अब उत्तर दें ऽ दूध् को मथने पर आपने क्या देखा? ऽ दूध् में से क्रीम का पृथक्करण वैफसे करते हैं? कभी - कभी द्रव में मौजूद ठोस कण इतने छोटे होते हैं कि ये छानक पत्रा से बाहर निकल आते हैं। इन कणों को पृथव्फ करने के लिए छानन विध्ि का प्रयोग नहीं किया जाता है। ऐसे मिश्रणों को अपवेंफद्रन के द्वारा पृथव्फ किया जाता है। इस सि(ांत के आधार पर जब इसे तेशी से घुमाया जाता है, तब भारी कण नीचे बैठ जाते हैं और हलके कण उफपर ही रह जाते हैं। अनुप्रयोग ऽ जाच प्रयोगशाला में रक्त और मूत्रा के जाँँचमें। ऽ डेयरी तथा घर में क्रीम से मक्खन निकालने की प्र्रकिया में। 2ण्3ण्2 दूध् से क्रीम को वैफसे पृथव्फ कर सकते हैं? आजकल हम बाशार में संपूणर् ;पुफलद्ध क्रीम, टोंड, डबल टोंड प्रकार के दूध् पोली पैक अथवा टेट्रापैक में पाते हैं। दूध् के इन प्रकारों में भ्िान्न - भ्िान्न मात्रा में वसा होती है। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्5 ऽ एक परखनली में थोड़ी मात्रा में संपूणर् क्रीम युक्त दूध् लें। ऽ कपड़े धेने की मशीन में भीगे हुए कपड़ों से जल निचोड़ने में। 2ण्3ण्3 दो अघुलनशील द्रवों के मिश्रण को वैफसे पृथव्फ कर सकते है? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्6 ऽ आइए कीप के प्रयोग से मिट्टी के तेल ;ामतवेमदमðवपसद्ध को जल से पृथव्फ करने का प्रयास करें। ऽ मिट्टी के तेल और जल के मिश्रण को एकðपृथक्करण कीप में डालें। ऽ वुफछ देर तक इसे शांत छोड़ दें ताकि जल तथा तेल की पृथव्फ - पृथव्फ परत तैयार हो जाएँ। ऽ पृथक्करण कीप के स्टॅाप - कावर्फ को खोलें और सावधानीपूवर्क नीचे वाले जल की परत को निकाल लें। ऽ जैसे ही तेल नीचे पहुँचे स्टाॅप - काकर् को बंद करदें। चित्रा2ण्6रूअघुलनशील द्रवों का पृथक्करण अनुप्रयोग ऽ तेल तथा जल के अघुलनशील मिश्रण को पृथव्फ करने में। ऽ धतुशोध्न के दौरान लोहे को पृथव्फ करने में। इस विध्ि के द्वारा हलके स्लैग ;धतुमलद्ध को उफपर से हटा लिया जाता है तथा भट्टðी की निचली सतह पर पिघला हुआ लोहा शेष रह जाता है। सि(ांत के अनुसार, आपस में नहीं मिलने वाले द्रव अपने घनत्व के अनुसार विभ्िान्न परतों में पृथव्फ हो जाते हैं। 2ण्3ण्4 नमक तथाअमानियम क्लोराइड के मिश्रणेको वैफसे पृथव्फ कर सकतेैं?हपिछले अध्याय में हमने पढ़ा है कि अमोनियम क्लोराइड को गमर् करने पर वह ठोस अवस्था से सीध्े गैस अवस्था में परिवतिर्त हो जाता है। इस प्रकार, उन मिश्रणों, जिनमें उफध्वर्पातित हो सकने वाले अवयव हों, को उफध्वर्पातित न होने योग्य अशुियों ;इस प्रकरण में नमकद्ध से पृथव्फ करने के लिए उफध्वर्पातन ;ेनइसपउंजपवदद्ध की प्रवि्रफया का उपयोग करते हैं।अमोनियम क्लोराइड, कपूर, नेफ्रथालीन और एंथ्रासीन इत्यादि उफध्वर्पातित होने योग्य ठोस पदाथो± के वुफछ उदाहरण हैं। रूइर् का प्लग उलटी रखी कीप अमोनियम क्लोराइड की वाष्प ठोसीकृत अमोनियम क्लोराइड अमोनियम क्लोराइड चीनी मिट्टी कीðतथा नमक का मिश्रण प्याली चित्रा2ण्7रू ऊध्वर्पातन की प्रकिया द्वारा अमोनियम क्लोराइड तथा नमक का पृथक्करण 2ण्3ण्5 क्या काली स्याही में डाइर् एक ही रंग है? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्7 ऽ छानक पत्रा की एक पतली परत लें। ऽ इसके निचले किनारे से 3 बउ ऊपर पेंसिल से एक रेखा खींच लें ख्चित्रा 2ण्8;ंद्ध, ऽ उस रेखा के बीच में जल में घुलनशील काली स्याही की एक बूँद रखें। इसे सूखने दें। ऽ शार, बीकर या परखनली में जल लें, उसमें इस छानक कागज को इस प्रकार रखें कि वह जल की सतह से ठीक उफपर रहे जैसा कि चित्रा 2ण्8 ;ंद्ध में दशार्या गया है। अब इसे शांत छोड़ दें। ऽ जैसे ही जल छानक पत्रा पर उफपर की ओर उठे, सावधानीपूवर्क देखें। अवलोकन को लिखें। काँच की छड़ कागज की क्िलप छानक पत्रा शार छानक पत्रा स्याही का निशानपेंसिल से खींची रेखा जल स्याही का निशान चित्रा2ण्8रू क्रोमैटोग्राप़फी द्वारा काली स्याही में विद्यमान डाइयों का पृथक्करण अब उत्तर दें ऽ जैसे - जैसे जल उफपर की ओर उठता है, आपने छानक पत्रा पर क्या देखा? ऽ क्या आपने छानक पत्रा के टुकड़े पर विभ्िान्न रंगों का अवलोकन किया। ऽ आपके मतानुसार, रंग के स्थान का छानक पत्रा उफपर की ओर उठने का क्या कारण है? जो स्याही हमने प्रयोग की उसमें जल विलायक के रूप में है तथा डाइर् विलेय के रूप में। जैसे ही जल छानक पत्रा पर उफपर की दिशा की ओर अग्रसर होता है, यह डाइर् के कणों को भी अपने साथ ले लेता है। प्रायः डाइर् दो या दो से अध्िक रंगों का मिश्रण होता है। रंग वाला घटक जो कि जल में अिाक घुलनशील है, तेजी से उफपर उठता है और इस प्रकार, रंगों का पृथक्करण संभव हो जाता है। मिश्रण से घटकों को पृथव्फ करने की इस विध्ि को क्रोमैटोग्राप़फी ;ब्ीतवउंजवहतंचीलद्ध कहते हैं। ग्रीक में क्रोमा ;ज्ञतवउंद्ध का अथर् रंग होता है। इस विध्ि को सबसे पहले रंगों को पृथव्फ करने में प्रयोग किया गया था इसलिए इसका नाम क्रोमैटोग्राप़फीपड़ा। क्या हमारे आस - पास के पदाथर् शु( हैं यह एक ऐसी विध्ि है जिसका प्रयोग उन विलेय पदाथो± को पृथव्फ करने में होता है जो एक ही प्रकार के विलायक में घुले होते हैं। तकनीकी में विकास के साथ ही क्रोमैटोग्राप़फी में नइर् तकनीकों का विकास हुआ है, जिसके बारे में आप उच्च कक्षाओं में पढ़ेंगे। अनुप्रयोग ऽ डाइर् में रंगों को पृथव्फ करने में। ऽ प्राकृतिक रंगों से पिग्मेंट को पृथव्फ करने में। ऽ रक्त से नशीले पद्राथो± ;कतनहेद्ध को पृथव्फ करने में। 2ण्3ण्6 दो घुलनशील द्रवों के मिश्रण को वैफसे पृथव्फ कर सकते हंै? ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ 2ण्8 ऽ आइए हम एसीटोन और जल को उनके मिश्रण से पृथव्फ करने का प्रयास करें। ऽ मिश्रण को आसवन फ्ऱलास्क में लें। इसमें एक थमार्मीटर लगाएँ। ऽ उपकरण को दिए गए चित्रा 2.9 के अनुसार व्यवस्िथत करें। थमार्मीटरक्लैंप जल निगर्तआसवन ़क्लैंपफ्रलास्क जल संघनक जल तथा एसीटोन का विलयन शीतल जल निवेश एसीटोन चित्रा2ण्9रूदो घुलनशील द्रवों का आसवन वििा से पृथक्करण ऽ मिश्रण को ध्ीरे - ध्ीरे गमर् करें और सावधनीपूवर्क थमार्मीटर का अवलोकन करें। ऽ एसीटोन वाष्पीकृत होता है तथा संघनित होकर संघनक द्वारा बाहर निकालने पर इसे बतर्न में एकत्रिात किया जा सकता है। ऽ जल आसवन फ्ऱलास्क में शेष रह जाता है। अब उत्तर दें ऽ जब आप मिश्रण को गमर् करना शुरू करते हैं तब आप क्या अवलोकित करते हैं? ऽ वुफछ समय के लिए किस तापमान पर थमार्मीटर का पाठ्यांक स्िथर हो जाता है? ऽ एसीटोन का क्वथनांक क्या है? ऽ दोनों घटकों को हम पृथव्फ कर पाते हैं, क्यों? इस विध्ि को आसवन कहा जाता है। इसका उपयोग वैसे मिश्रण को पृथव्फ करने में किया जाता है जो विघटित हुए बिना उबलते हैं तथा जिनके घटकों के क्वथनांकों के मध्य अिाक अंतराल होता है। दो या दो से अिाक घुलनशील द्रवों जिनके क्वथनांक का अंतर 25 ज्ञ से कम होता है, के मिश्रण को पृथव्फ करने के लिए प्रभाजी आसवन विध्ि का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, वायु से विभ्िान्न गैसों का पृथक्करण तथा पेट्रोलियम उत्पादों से उनके विभ्िान्न घटकों का पृथक्करण। इसका उपकरण साधरण आसवन विध्ि के समान ही होता है। केवल आसवन ़फ्रलास्क और संघनक के बीच एक प्रभाजी स्तंभ वफा प्रयोग किया जाता है। साधरण प्रभाजी स्तंभ एक नली होती है जो कि शीशे के गुटवफों से भरी होती है। ये गुटके वाष्प को ठंडा और संघनित होने के लिए सतह प्रदान करते हैं, जैसा कि चित्रा 2.10 में दशार्या गया है। थमार्मीटर कॅावर्फ शु( द्रव घटक क्लैंप जल निगर्त जल संघनक प्रभाजी कॅालम कॅावर्फ आसवन फ्ऱ लास्क शीतल जल निवेश मिश्रण चित्रा2ण्10रूप्रभाजी आसवन 2ण्3ण्7 वायु से गैसों को वैफसे प्राप्त कर सकते हंै? वायु एक समांगी मिश्रण है तथाइसके घटकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथव्फ किया जा सकता है। प्रवाह चित्रा ;2ण्11द्ध इस विध्ि के विभ्िान्न चरणों को दशार्ता है। दाब बढ़ाकर तथा तापमान कम करके वायु कोसंपीडन तथा ठंडा करना प्रभाजी आसवन काॅलम में वायु को धीरे - धीरे गमर्करना विभ्िान्न ऊँचाइयों पर गैसों का पृथक्करण चित्रा2ण्11रू वायु से गैसों को प्राप्त करने के लिए प्रवाह चित्रा जल निगर्तगमर् वायु शीतल संपीडित वायु दबाव में वायु पृथव्फ करने वाला प्रभाजी आसवन काॅलम शुष्क बपर्फ के रूप में काबर्न द्रवीय वायु नाइट्रोजन निगर्त आॅगर्न निगर्त द्रवीय आॅक्सीजन वायु निवेश छानक डाइआॅक्साइड निगर्त जमा हुआ शीतल जल निवेश विस्तारक जैट चित्रा2ण्12रूवायु के घटकों का पृथक्करण यदि हम वायु से आॅक्सीजन गैस ;चित्रा 2ण्12द्ध को प्राप्त करना चाहते हैं तो हमें वायु में उपस्िथत दूसरी गैसों को पृथव्फ करना होगा। द्रव वायु प्राप्त करने के लिए पहले वायु पर दबाव बढ़ाया जाता हैऔर िफर ताप को घटाकर उसे ठंडा कर संपीडित किया जाता है। इस द्रवित गैस को प्रभाजी आसवन स्तंभ में धीरे - ध्ीरे गमर् किया जाता है, जहा सभी गैसें ँऽ जब वायु को ठंडा किया जाता है तो कौन सा घटक पहले द्रव में परिवतिर्त होता है? 2ण्3ण्8 किसी अशुु( नमूने में से शुु( काॅपर सल्पेफट वैफसे प्राप्त कर सकते हैं? ियाकलाप 2ण्9 विभ्िान्न उफँचाइयों पर अपने क्वथनांक के अनुसार पृथव्फ हो जाती हैं, जैसा कि चित्रा 2ण्12 में दशार्या गया है। निम्नलिख्िात के उत्तर देंः ऽ वायु में उपस्िथत गैसों को उनके बढ़ते हुए क्वथनांक के अनुसार व्यवस्िथत करें। ठोस पदाथो± को नीचे निलंबित अशुियों के बैठने के लिए तलहट के लिएजल भंडार तलहट टैंक भार ;स्वंकपदहद्ध टैंक ऽ एक चीनी मिट्टी की प्याली में लगभग 5 हðअशुु( काॅपर सल्प़ेफट लें। ऽ जल की न्यूनतम मात्रा में इसे घोल दें। ऽ अशुियों को छान लें। ऽ संतृप्त विलयन प्राप्त करने के लिए जल को ़काॅपर सल्पेफट के घोल से वाष्पीकृत करें। बारीक बालू जल वंफकड़ मोटे वंफकड़ छानक टैंक घरों को बैक्टीरिया मारने के लिए क्लोरीनीकरण चित्रा2ण्13रूजलघर में जल शुि निकाय ऽ विलयन को छानक पत्रा से ढक दें तथा कमरे के तापमान पर इसे दिन भर ठंडा होने के लिए शांत छोड़ दें। ऽ आप काॅपर सल्पेफट के िस्टलों को चीनी मिट्टीðकी प्याली में प्राप्त करेंगे। ऽ इस प्रक्रम को िस्टलीकरण कहा जाता है। अब उत्तर दें ऽ चीनी मिट्टी की प्याली में आप क्या अवलोकनðकरते हैं? ऽ क्या िस्टल एकसमान दिखाइर् देता है? ऽ चीनी मिट्टी की प्याली में रखे द्रव से िस्टलðको वैफसे पृथव्फ करेंगे? िस्टलीकरण विध्ि का प्रयोग ठोस पदाथो± को शुु( करने में किया जाता है। उदाहरण के लिए, समुद्री जल से जो नमक हम प्राप्त करते हैं उसमें बहुत सी अशुियाँ हो सकती हैं। इन अशुियों को दूर करने के लिए िस्टलीकरण विध्ि का उपयोग किया जाता है। िस्टलीकरण वह विध्ि है जिसके द्वारा िस्टल के रूप में शुु( ठोस को विलयन से पृथव्फ किया जाता है। िस्टलीकरण विध्ि साधरणवाष्पीकरण विध्ि से निम्न कारणों से उत्तम होती हैः ऽ वुफछ ठोस विघटित हो जाते हैं या वुफछ चीनी के समान गमर् करने पर झुलस जाते हैं। ऽ छानने पेफ पश्चात् भी अशु( विलेय पदाथर् को विलायक में घोलने पर विलयन में वुफछ अशुियाँ रह सकती हैं। वाष्पीकरण होने पर ये अशुियाँ ठोस को दूष्िात कर सकती हैं। अनुप्रयोग ऽ समुद्री जल द्वारा प्राप्त नमक को शुु( करने में। ऽ अशुु( नमूने से ि़फटकरी को पृथव्फ करने में। इस प्रकार मिश्रण की प्रकृति के अनुसार उफपर दी गइर् विध्ियों में से किसी का प्रयोग कर हम शुु( पदाथर् प्राप्त कर सकते हैं। तकनीकियों में विकास के साथ कइर् और पृथव्फ करने वाली विध्ियों का आविष्कार हो चुका है। शहरों में जलघर से पीने योग्य जल की आपूतिर् की जाती है। जलघर का एक रेखा चित्रा 2.13 में दशार्या गया है। जलघर से अपने घर में प्राप्त होने वाले पेय जल के विभ्िान्न चरणों पर अपनी कक्षा में चचार् करें। श्न 1ण् पेट्रोल और मिट्टी का तेल ;ामतवेमदम वपसद्धðजो कि आपस में घुलनशील हंै, के मिश्रणप्र को आप वैफसे पृथव्फ करेंगे। पेट्रोल तथा मिट्टðी के तेल के क्वथनांकों में 25 °ब् से अिाक का अंतराल है। 2ण् पृथव्फ करने की सामान्य वििायों के नाम देंः ;पद्ध दही से मक्खन, ;पपद्ध समुद्री जल से नमक, ;पपपद्ध नमक से कपूर। 3ण् िस्टलीकरण विध्ि से किस प्रकार के मिश्रणों को पृथव्फ किया जा सकता है? 2ण्4 भौतिक एवं रासायनिक परिवतर्न शुु( पदाथर् और मिश्रण में अंतर को समझने के लिए आइए सबसे पहले भौतिक एवं रासायनिक परिवतर्नों के बीच के अंतर को जानें। पिछले अध्याय में हमने पदाथर् के भौतिक गुणों के बारे में अध्ययन किया है। ऐसे गुण जिनका हम अवलोकन एवं वणर्न कर सकते हैं, जैसे कि रंग, कठोरता, दृढ़ता, बहाव, घनत्व, द्रवनांक तथा क्वथनांक इत्यादि को भौतिक गुण कहा जाता है। अवस्थाओं का अंतःरूपांतरण एक भौतिक परिवतर्न है क्योंकि ये परिवतर्न पदाथो± के संघटन में बिना परिवतर्न किए होते हैं और उनकी रासायनिक प्रवृफति में भी कोइर् परिवतर्न नहीं होता है। यद्यपि बप़र्फ जल और वाष्प अलग - अलग दिखते हैं और ये भ्िान्न - भ्िान्न भौतिक गुणों को दशार्ते हैं लेकिन ये रासायनिक रूप 2ण्5ण्1 तत्व से समान होते हैं। जल तथा खाना पकाने वाले तेल दोनों द्रव हैं, लेकिन इनके रासायनिक गुणध्मर् भ्िान्न हैं। इनकी गंध् और ज्वलनशीलता में अंतर है। हम जानते हैं कि तेल हवा में जलता है, जबकि जल आग को बुझाता है। तेल का यह रासायनिक गुण जल से इसे अलग करता है। जलना एक रासायनिक परिवतर्न है। जलने की प्रिया में एक पदाथर् दूसरे से िया करके अपने रासायनिक संघटन में परिवतर्न लाता है। रासायनिक परिवतर्न पदाथर् के रासायनिक गुणध्मो± में परिवतर्न लाता है तथा हम नया पदाथर् पाते हैं। रासायनिक परिवतर्न को रासायनिक प्रतििया भी कहा जाता है।मोमबत्ती के जलने की प्रिया में भौतिक एवं रासायनिक दोनों परिवतर्न होते हैं। क्या आप इनकी पहचान कर सकते हैं? श्न 1ण् निम्न को रासायनिक और भौतिक परिवतर्नों में वगीर्वृफत करें:प्र ऽ पेड़ों को काटना, ऽ मक्खन का एक बतर्न में पिघलनाए ऽ अलमारी में जंग लगनाए ऽ जल का उबलकर वाष्प बननाए ऽ विद्युत तरंग का जल में प्रवाहित होना तथा उसका हाइड्रोजन और आॅक्सीजन गैसों में विघटित होनाए ऽ जल में साधरण नमक का घुलनाए ऽ फ्रफलों से सलाद बनाना तथा ऽ लकड़ी और कागश का जलना। 2ण् अपने आस - पास की चीशों को शुु( पदाथा±े या मिश्रण से अलग करने का प्रयत्न करें। 2ण्5 शुु( पदाथो± के क्या प्रकार हैं? पदाथो± को उनके रासायनिक संघटन के आधर परतत्वों या यौगिकों में वगीर्कृत किया जा सकता है। क्या हमारे आस - पास के पदाथर् शु( हैं राॅबटर् बायल पहले वैज्ञानिक थे, जिन्होंने सन् 1661 में सवर्प्रथम तत्व शब्द का प्रयोग किया। प्रफंास के रसायनज्ञ एंटोनी लाॅरेंट लवाइजिए ;सन् 1743 - सन् 1794द्ध ने सबसे पहले तत्व की परिभाषा को प्रयोग द्वारा प्रतिपादित किया। उनके अनुसार तत्व पदाथर् का वह मूल रूप है जिसे रासायनिक प्रतििया द्वारा अन्य सरल पदाथो± में विभाजित नहीं किया जा सकता। तत्वों को साधरणतया धतु, अधतु तथा उपधातुमें वगीर्कृत किया जा सकता है। धतुएँ प्रायः दिए हुए निम्न गुणध्मो± में से सभी को या वुफछ को प्रदश्िार्त करती हैं। ऽ ये चमकीली होती हैं। ऽ ये चाँदी जैसी सप़ेफद या सोने की तरह पीले रंग की होती हैं। ऽ ये ताप तथा विद्युत की सुचालक होती हैं। ऽ ये तन्य होती हैं ;और इनको तार के रूप में खींचा जा सकता हैद्ध। ऽ ये आघातवध्यर् होती हैं। इनको पीटकर महीन चादरों में ढाला जा सकता है। ऽ ये प्रतिध्वनिपूणर् होती हैं। सोना, चाँदी, ताँबा, लोहा, सोडियम, पोटैश्िायम इत्यादि धतु के उदाहरण हैं। पारा धतु होते हुए भी कमरे के तापमान पर द्रव है। अधतुएँ दिए गए निम्न गुणों में से प्रायः वुफछ को या सभी को प्रदश्िार्त करती हैंः ऽ ये विभ्िान्न रंगों की होती हैं। ऽ ये ताप और विद्युत की वुफचालक होती हैं। ऽ ये चमकीली, प्रतिध्वनिपूणर् और आघातवध्यर् नहीं होती हैं। हाइड्रोजन, आॅक्सीजन, आयोडीन, काबर्न, ;कोल, कोकद्ध, ब्रोमीन, क्लोरीन इत्यादि अधतुओं के उदाहरण हैं। वुफछ तत्व धतु और अधतु के बीच के गुणों को दशार्ते हैं, जिन्हें उपधतु ;उमजंससवपकद्ध कहा जाता है, जैसे बोरान, सिलिकन, जमेर्नियम इत्यादि। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ2ण्10 ऽ कक्षा को दो समूहों में विभक्त करें। दोनों समूहों को 50 ह लोहे का चूणर् और 3 ह सल्प़फर, एक चीनी मिट्टðी की प्याली में दें। समूह प् ऽ लोहे के चूणर् और सल्प़फर पाउडर को पीसकर मिलाएँ। समूह प्प् ऽ लोहे के चूणर् और सल्प़फर पाउडर को पीसकर मिलाएँ। मिश्रण को तीव्र ताप पर लाल होने तक गमर् करें। अब ज्वाला को हटा दें तथा मिश्रण को ठंडा होने दें। समूह प् और प्प् ऽ प्राप्त सामग्री में चुंबकीय गुण की जाँच करें। सामाग्री के निकट एक चुंबक को लाएँ। जाँच करें कि क्या सामग्री चुंबक की ओर आक£षत होती है? ऽ दोनों समूहों द्वारा प्राप्त सामग्री के रंग और बनावट की तुलना करें। ऽ प्राप्त सामग्री के एक भाग में काबर्न डाइसल्प़फाइड मिलाएँ। मिश्रण अच्छी तरह मिलाएँ तथा छान लें। ऽ प्राप्त पदाथर् के दूसरे भाग में तनु सल्फ्ऱयूरिक अम्ल या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को मिलाएँ। ;इस ियाकलाप के लिए अध्यापक का निदेर्शन आवश्यक है।द्ध ऽ इस वि्रफयाकलाप को लोहा तथा सल्प़फर तत्वों के साथ अलग - अलग दोहराएँ। अवलोकनों को नोट करें। अब उत्तर दें ऽ क्या दोनों समूहों द्वारा प्राप्त सामग्री दिखने में समान है? ऽ किस समूह द्वारा प्राप्त सामग्री में चुंबकीय गुण विद्यमान है? ऽ क्या प्राप्त सामग्री के घटकों को हम पृथव्फ करने में सक्षम हैं। ऽ क्या तनु सल्फ्ऱयूरिक अम्ल या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सामग्री पर डालने से दोनों समूहों को गैस प्राप्त होती है? क्या दोनों स्िथतियों मंे प्राप्त गैस की गंध् समान है या अलग - अलग है? समूह प् द्वारा प्राप्त गैस हाइड्रोजन है। यह रंगहीन, गंध्हीन और ज्वलनशील है। इसकी ज्वलनशीलता की जाँच कक्षा में न करें। समूह प्प् द्वारा प्राप्त गैस हाइड्रोजन सल्प़फाइड है। यह रंगहीन गैस है और इसकी गंध सड़े हुए अंडे जैसी ह।ैआपने पाया कि दोनों समूहों द्वारा प्राप्त पदाथर् भ्िान्न गुणों को दशार्ते हैं। यद्यपि प्रारंभ में दिए गए पदाथर् समान थे, समूह प् की िया के पफलस्वरूप भौतिक परिवतर्न हुआ जबकि समूह प्प् की िया के पफलस्वरूप पदाथो± में रासायनिक परिवतर्न हुआ। ऽ समूह प् द्वारा प्राप्त सामग्री दो पदाथो± का मिश्रण है। दिए गए पदाथर् लोहा तथा सल्प़फर हैं। ऽ मिश्रण का गुण उन दोनों मिले हुए तत्वों के गुण के समान है। ऽ समूह प्प् द्वारा प्राप्त सामग्री यौगिक है। ऽ दोनों तत्वों को तीव्रता से गमर् करने पर हमने यौगिक पाया, जिसका गुण मिले हुए तत्वों से पूरी तरह भ्िान्न है। ऽ यौगिक का संघटन पूरे पदाथर् में समान है। हम यह भी देख सकते हैं कि यौगिक की बनावट और रंग भी सभी स्थानों पर समान है। इस प्रकार संक्षेप में हम पदाथर् की भौतिक औररासायनिक प्रकृति को निम्न आरेख द्वारा व्यवस्िथत कर सकते हैं। आपने क्या सीखा ऽ मिश्रण में एक से अध्िक पदाथर् ;तत्व तथा/अथवा यौगिकद्ध किसी भी अनुपात में मिले होते हैं। ऽ मिश्रणों को पृथव्फ करने के लिए उचित विध्ियों से शुु( पदाथो± में पृथक्करण किया जा सकता है। ऽ विलयन दो या दो से अध्िक पदाथो± का समांगी मिश्रण है। विलयन के बड़े अवयव को विलायक कहते हैं तथा अवयव को विलेय कहते हैं। ऽ विलयन की सांद्रता उसके इकाइर् आयतन या विलायक के इकाइर् द्रव्यमान में उपस्िथत विलेय की मात्रा है। ऽ वह पदाथर् जो विलायक में अघुलनशील तथा आँखों से देखा जा सकता है, निलंबन कहलाता है। निलंबन एक विषमांगी मिश्रण होता है। ऽ कोलाइड एक विषमांगी मिश्रण है, जिसके कणों का आकार इतना छोटा है कि उन्हें सरलता से देखा नहीं जा सकता, किंतु इतना बड़ा है कि ये प्रकाश का पैफलाव कर सकने में सक्षम होते हैं। कोलाइड उद्योगों में तथा दैनिक जीवन में महत्वपूणर् है। विलेय कणों को परिक्ष्िाप्त प्रावस्था कहते हैं और विलायक जिसमें ये पूरी तरह से वितरित रहते हैं, उसे परिक्षेपण माध्यम कहते हैं। ऽ शु( पदाथर् तत्व या यौगिक हो सकते हैं। तत्व पदाथर् का मूल रूप होता है, जिसे रासायनिक िया द्वारा सरल पदाथो± में विभाजित नहीं किया जा सकता है। यौगिक वह पदाथर् है जो दो या दो से अध्िक तत्वों के स्िथर अनुपात में रासायनिक रूप में संयोजन से नि£मत होता है। ऽ यौगिकों के गुण उसमें निहित तत्वों के गुणों से भ्िान्न होते हंैे, जबकि मिश्रण में उपस्िथत तत्व और यौगिक अपने - अपने गुणों को दशार्ते हैं। अभ्यास 1ण् निम्नलिख्िात को पृथव्फ करने के लिए आप किन विध्ियों को अपनाएँगे? ;ंद्ध सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथव्फ करने में। ;इद्ध अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथव्फ करने में। ;बद्ध धतु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन आयॅल से पृथव्फ करने में। ;कद्ध दही से मक्खन निकालने के लिए। ;मद्ध जल से तेल निकालने के लिए। ;द्धि चाय से चाय की पिायों को पृथव्फ करने में। ;हद्ध बालू से लोहे की पिनों को पृथव्फ करने में। ;ीद्ध भूसे से गेहूँ के दानों को पृथव्फ करने में। ;पद्ध पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए। ð;रद्ध पुष्प की पंखुडि़यों के निचोड़ से विभ्िान्न रंजकों को पृथव्फ करने में। 2ण् चाय तैयार करने के लिए आप किन - किन चरणों का प्रयोग करेंगे। विलयन, विलायक, विलेय, घुलना, घुलनशील, अघुलनशील, घुलेय ;पि़फल्ट्रेटद्ध तथा अवशेष शब्दों का प्रयोग करें। 3ण् प्रज्ञा ने तीन अलग - अलग पदाथो± की घुलनशीलताओं को विभ्िान्न तापमान पर जाँचा तथा नीचे दिए गए आँकड़ों को प्राप्त किया। प्राप्त हुए परिणामों को 100 ह जल में विलेय पदाथर् की मात्रा, जो संतृप्त विलयन बनाने हेतु पयार्प्त है, निम्नलिख्िात तालिका में दशार्या गया है। ;ंद्ध 50 ह जल में 313 ज्ञ पर पोटैश्िायम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैश्िायम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी? ;इद्ध प्रज्ञा 353 ज्ञ पर पोटैश्िायम क्लोराइड का एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठंडा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठंडा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी? स्पष्ट करें। ;बद्ध 293 ज्ञ पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें। इस तापमान पर कौन - सा लवण सबसे अध्िक घुलनशील होगा? ;कद्ध तापमान में परिवतर्न से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है? 4ण् निम्न की उदाहरण सहित व्याख्या करेंः ;ंद्ध संतृप्त विलयन ;इद्ध शुु( पदाथर् 5ण् 6ण् 7ण् 8ण् 9ण् 10ण् ;बद्ध कोलाइड ;कद्ध निलंबन निम्नलिख्िात में से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वगीर्कृत करेंः सोडा जल, लकड़ी, बप़र्फ, वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुइर् चाय। ðआप किस प्रकार पुष्िट करेंगे कि दिया हुआ रंगहीन द्रव शुु( जल है? निम्नलिख्िात में से कौन - सी वस्तुएँ शु( पदाथर् हैं? ;ंद्ध बप़र्फ ;इद्ध दूध् ;बद्ध लोहा ;कद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ;मद्ध वैफल्िसयम आॅक्साइड ;द्धि पारा ;हद्ध ईंट ;ीद्ध लकड़ी ;पद्ध वायु निम्नलिख्िात मिश्रणों में से विलयन की पहचान करें। ;ंद्ध मिट्टðी ;इद्ध समुद्री जल ;बद्ध वायु ;कद्ध कोयला ;मद्ध सोडा जल निम्नलिख्िात में से कौन टिनडल प्रभाव को प्रदश्िार्त करेगा? ;ंद्ध नमक का घोल ;इद्ध दूध् ;बद्ध काॅपर सल्प़ेफट का विलयन ;कद्ध स्टाचर् विलयन निम्नलिख्िात को तत्व, यौगिक तथा मिश्रण में वगीर्वृफत करेंः ;ंद्ध सोडियम ;इद्ध मिट्टीð;बद्ध चीनी का घोल ;कद्ध चाँदी ;मद्ध वैफल्िसयम काबोर्नेट ;द्धि टिन ;हद्ध सिलिकन ;ीद्ध कोयला ;पद्ध वायु ;रद्ध साबुन ;ाद्ध मीथेन ;सद्ध काबर्न डाइआॅक्साइड ;उद्ध रक्त 11ण् निम्नलिख्िात में से कौन - कौन से परिवतर्न रासायनिक हंै? ;ंद्ध पौधंे की वृि ;इद्ध लोहे में जंग लगना ;बद्ध लोहे के चूणर् तथा बालू को मिलाना ;कद्ध खाना पकाना ;मद्ध भोजन का पाचन ;द्धि जल से बप़र्फ बनना ;हद्ध मोमबत्ती का जलना समूह वि्रफयाकलाप एक मिट्टð़ी का मटका, बालू तथा वुफछ वंफकड़ लें। मटमैले जल को सापफ करने हेतु छोटे स्तर पर एक छानक युिाफ ;थ्पसजमतंजपवद चसंदजद्ध की डिशाइन बनाएँ।

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