वाली द्रवीवृफत पेट्रोलियम गैस ;स्च्ळद्ध या अस्पतालों गैसीय अवस्था में कणों की गति अनियमित और में दिए जाने वाले आॅक्सीजन सि¯लडर में संपीडित अत्यिाक तीव्र होती है। इस अनियमित गति के कारण गैस होती है। आजकल वाहनों में ईंधन के रूप में ये कण आपस में एवं बतर्न की दीवारों से टकराते हैं। संपीडित प्रावृफतिक गैस ;ब्छळद्ध का उपयोग होता हैं। संपीड्यता काप़फी अिाक होने के कारण गैस के अत्यिाक आयतन को एक कम आयतन वाले सि¯लडर में संपीडित किया जा सकता है एवं आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजा जा सकता है। हमारी नाक तक पहुँचने वाली गंध से बिना रसोइर्ं में प्रवेश किए ही हम जान सकते हैं कि क्या पकाया जा रहा है? ये गंध हम तक वैफसे पहुँचती है? खाने की गंध के कण वायु में मिल जाते हैं और रसोइर् से पैफलकर हम तक पहुँच जाते हैं। यह गंध के कण और दूर भी जा सकते हैं। पके हुए गमर् खाने की महक हमारे पास तक वुफछ ही क्षणों में पहुँच जाती है, इसकी तुलना ठोस एवं द्रवों के विसरण से करें। कणों की तेश बतर्न की दीवार पर गैस कणों द्वारा प्रति इकाइर् क्षेत्रा पर लगे बल के कारण गैस का दबाव बनता है। श्न 1ण् किसी तत्व के द्रव्यमान प्रति इकाइर् आयतन को घनत्व कहते हैं। ;घनत्व त्र द्रव्यमान/आयतनद्ध बढ़ते हुए घनत्व के क्रम में निम्नलिख्िात को व्यवस्िथत करें - वायु, चिमनी का धुअँा, शहद, जल, चाॅक, रुइर् और लोहा। प्र 2ण् ;ंद्ध पदाथर् की विभ्िान्न अवस्थाओं के गुणों में होने वाले अंतर को सारणीब( कीजिए। ;इद्ध निम्नलिख्िात पर टिप्पणी कीजिए - दढ़ता,ृगति और अत्यिाक रिक्त स्थानों के कारण गैसों का अन्य गैसों में विसरण बहुत तीव्रता से होता है। ठोस द्रव गैस चित्रा 1ण्5रू ंए इ तथा ब पदाथर् की तीनों अवस्थाओं के कणों का योजनाब( आविार्त चित्राण है। तीनों अवस्थाओं में कणों की गति को देखा जा सकता है और उनकी तुलना की जा सकती है। यता, तरलता, बतर्न में गैस का्संपीडभरना, आकार, गतिज ऊजार् एवं घनत्व। 3ण् कारण बताएँ - ;ंद्ध गैस पूरी तरह उस बतर्न को भर देती है, जिसमें इसे रखते हैं। ;इद्ध गैस बतर्न की दीवारों पर दबाव डालती है। ;बद्ध लकड़ी की मेश ठोस कहलाती है। ;कद्ध हवा में हम आसानी से अपना हाथ चला सकते हैं, लेकिन एक ठोस लकड़ी के टुकड़े में हाथ चलाने के लिए हमें कराटे में दक्ष होना पड़ेगा। 4ण् सामान्यतया ठोस पदाथो± की अपेक्षा द्रवों का घनत्व कम होता है। लेकिन आपने बप़र्फ के टुकड़े को जल में तैरते हुए देखा होगा। पता लगाइए, ऐसा क्यों होता है? 1ण्4 क्या पदाथर् अपनी अवस्था को बदल सकता है? अपने प्रेक्षण से हम जानते हैं कि जल पदाथर् की तीनों अवस्थाओं में रह सकता हैः विज्ञान ऽ ठोस, जैसे बप़र्फ, ऽ द्रव, जैसे जल, एवं ऽ गैस, जैसे जलवाष्प। अवस्था बदलने के दौरान पदाथर् के अंदर क्या होता है? अवस्था के परिवतर्न से पदाथर् के कणों परक्या प्रभाव पड़ता है? क्या हमें इन प्रश्नों का उत्तर नहीं खोजना चाहिए? 1ण्4ण्1 तापमान परिवतर्न का प्रभाव ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ1ण्12 ऽ एक बीकर में 150 ग्राम बप़र्फ का टुकड़ा लें एवं चित्रा 1.6 के अनुसार उसमें प्र्रयोगशाला में प्रयुक्त थमार्मीटर को इस प्रकार लटका दें कि थमार्मीटर का बल्ब बप़र्फ को छू रहा हो। ऽ ध्ीमी आँच पर बीकर को गमर् करना शुरू करें। ऽ जब बप़र्फ पिघलने लगे, तो तापमान नोट कर लें। ऽ जब संपूणर् बप़र्फ जल में परिवतिर्त हो जाए, तो पुनः तापमान नोट करें। ऽ ठोस से द्रव अवस्था में होने वाले परिवतर्न में प्रेक्षण को नोट करें। ऽ अब बीकर में एक काँच की छड़ डालें और हिलाते हुए गमर् करें, जब तक जल उबलने न लगे। ऽ थमार्मीटर की माप पर बराबर नशर रखे रहें, जब तक कि अिाकतर जलवाष्प न बन जाए। ऽ जल के द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में परिवतर्न में प्रेक्षण को नोट करें। ठोस के तापमान को बढ़ाने पर उसके कणों कीगतिज ऊजार् बढ़ जाती है। गतिज ऊजार् में वृि होने के कारण कण अिाक तेशी से कंपन करने लगते हैं।ऊष्मा के द्वारा प्रदत्त की गइर् ऊजार् कणों के बीच के आकषर्ण बल को पार कर लेती है। इस कारण कण अपने नियत स्थान को छोड़कर अिाक स्वतंत्रा होकर गति करने लगते हैं। एक अवस्था ऐसी आती है, जब ठोस पिघलकर द्रव में परिवतिर्त हो जाता है। जिस लोहे का थमार्मीटरस्टैंड काँच की छड़ बीकर बप़ र्फ बनर्र ;ंद्ध लोहे का थमार्मीटरस्टैंड काँच की छड़ बीकर जल बनर्र ;इद्ध चित्रा 1ण्6रू ;ंद्ध बप़र्फ का जल बदलने वफी प्रियाए ;इद्ध जल से जलवाष्प में बदलने की प्रिया तापमान पर ठोस पिघलकर द्रव बन जाता है, वह इसका गलनांक कहलाता है। किसी ठोस का गलनांक उसके कणों के बीच के आकषर्ण बल के सामथ्यर् को दशार्ता है। बप़र्फ का गलनांक 273ण्16 ज्ञ’ है। गलने की प्रिया यानी ठोस से द्रव अवस्था में परिवतर्न को संगलन ’नोट: तापमान की अंतरार्ष्ट्रीय ;ैप्द्ध मात्राककेल्िवन ;ज्ञद्ध है, 0 °ब् त्र 273ण्16 ज्ञ होता है। सुविधा के लिए हम दशमलव का पूणा±क बनाकर 00 ब् त्र 273 ज्ञ ही मानते हैं। तापमान की माप केल्िवन से सेल्िसयस में बदलने के लिए दिए हुए तापमान से 273 घटाना चाहिए और सेल्िसयस से केल्िवन में बदलने के लिए दिए हुए तापमान में 273 जोड़ देना चाहिए। हमारे आस - पास के पदाथर् भी कहते हैं। किसी ठोस के गलने की प्रिया मंेतापमान समान रहता है, ऐसे में ऊष्मीय ऊजार् कहाँ जाती है? गलने के प्रयोग की प्रिया के दौरान आपने ध्यान दिया होगा कि गलनांक पर पहुँचने के बाद, जब तक संपूणर् बप़र्फ पिघल नहीं जाती, तापमान नहींबदलता है। बीकर को ऊष्मा प्रदान करने के बावजूद भी ऐसा ही होता है। कणों के पारस्परिक आकषर्ण बल को वशीभूत करके पदाथर् की अवस्था कोबदलने में इस ऊष्मा का उपयोग होता है। चूँकि तापमान में बिना किसी तरह की वृि दशार्ए इस़ऊष्मीय ऊजार् को बपर्फ अवशोष्िात कर लेती है, यह माना जाता है कि यह बीकर में ली गइर् सामग्री मेंछुपी रहती है, जिसे गुुप्त ऊष्मा कहते हैं। यहाँ गुप्त का अभ्िाप्राय छुपी हुइर् से है। वायुमंडलीय दाब पर 1 ाह ठोस को उसके गलनांक पर द्रव में बदलने केलिए जितनी ऊष्मीय ऊजार् की आवश्यकता होती है,उसे संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा कहते हैं, अथार्त् 0 0ब् ;273 ज्ञद्ध पर जल के कणों की ऊजार् उसी तापमान पर बप़र्फ के कणों की ऊजार् से अिाक होती है।जब हम जल में ऊष्मीय ऊजार् देते हैं, तो कण अिाक तेशी से गति करते हैं। एक निश्िचत तापमानपर पहुँचकर कणों में इतनी ऊजार् आ जाती है कि वे परस्पर आकषर्ण बल को तोड़कर स्वतंत्रा हो जाते हैं। इस तापमान पर द्रव गैस में बदलना शुरू हो जाता है। वायुमंडलीय दाब पर वह तापमान जिस पर द्रव उबलने लगता है, उसे इसका क्वथनांक कहते हैं। क्वथनांक समष्िट गुण है। द्रव के सभी कणों को इतनीऊजार् मिल जाती है कि वे वाष्प में बदल जाते हैं। जल के लिए यह तापमान 373 ज्ञ ;100 0ब् त्र 273 ़ 100 त्र 373 ज्ञद्ध क्या आप वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा को परिभाष्िात कर सकते हैं? इसे उसी तरह परिभाष्िात कीजिए, जैसेहमने संगलन की प्रसुप्त ऊष्मा को परिभाष्िात किया है। 373 ज्ञ ;100 0ब्द्धतापमान पर भाप अथार्त वाष्प के कणों में उसी तापमान पर पानी के कणों कीअपेक्षा अिाक ऊजार् होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकिभाप के कणों ने वाष्पीकरण की गुप्त ऊष्मा के रूपमें अतिरिक्त ऊष्मा अवशोष्िात कर ली है। ऊष्मा ऊष्मा ठोस अवस्था द्रव अवस्था गैसीय अवस्था शीतलता शीतलता अतः हम यह कह सकते हैं कि तापमान बदलकर हम पदाथर् को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदल सकते हैं। हमने सीखा कि गमर् करने पर पदाथर् की अवस्था बदल जाती है। गमर् होने पर ये ठोस से द्रव और द्रव से गैस बन जाते हैं। लेकिन वुफछ ऐसे पदाथर् हैं, जो द्रव अवस्था में परिवतिर्त हुए बिना, ठोस अवस्था से सीधे गैस में और वापस ठोस में बदल जाते हैं। ियाकलाप ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ1ण्13 ऽ थोड़ा सा कपूर या अमोनियम क्लोराइड लें और इसे चूणर् करके चीनी की प्याली ;ब्ीपदं कपेीद्ध में डाल दें। ऽ एक कीप को उल्टा करके इस प्याली के ऊपर रख दें। ऽ इस कीप के एक सिरे पर रुइर् का एक टुकड़ा रख दें, जैसा चित्रा 1.7 में दशार्या गया है। रुइर् का टुकड़ा उल्टा रखा हुआ कीप वाष्प बना अमोनियम क्लोराइड ठोस बना अमोनियम क्लोराइड चीनी मिट्टðाी की प्यली बनर्र चित्रा 1ण्7रूअमोनियम क्लोराइड का ऊध्वर्पातन विज्ञान

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