अध्याय 10 वृत्त 10ण्1 भूमिका आप अपने दैनिक जीवन में, बहुत सी ऐसी वस्तुओं के संपवर्फ में अवश्य आए होंगे जिनके आकार गोल होंः जैसे किसी गाड़ी का पहिया, चूडि़याँ, कइर् घडि़यों के डायल, 50पैसे, एक रुपया और पाँच रुपए मूल्य के सिक्के, चाबी के गुच्छे, कमीज के बटन आदि ;देख्िाएआवृफति 10.1द्ध। घड़ी में आपने ध्यान दिया होगा कि सेवेंफड की सुइर् घड़ी के डायल के ऊपर जल्दी - जल्दी चक्कर लगाती है तथा इसका एक सिरा एक गोल पथ में चलता है। सेवेंफड की सुइर् के सिरे से बनता हुआ पथ एक वृत्त ;बपतबसमद्ध कहलाता है। इस अध्याय में, आप वृत्त,इससे संबंध्ित अन्य पदों तथा वृत्त के वुफछ गुणों के बारे में अध्ययन करेंगे। आवृफति 10ण्1 10ण्2 वृत्त और इससे संबंध्ित पद: एक पुनरावलोकन एक परकार लीजिए तथा इसमें एक पेंसिल लगाइए। इसका नुकीला सिरा एक कागज के पृष्ठ के एक बिन्दु पर रख्िाए। दूसरी भुजा को वुफछ दूरी तक खोलिए। नुकीले सिरे को उसी बिन्दु पर स्िथर कर दूसरी भुजा को एक चक्कर घुमाइए। पेंसिल से कागज पर बनी आवृफतिक्या है? जैसा कि आप जानते हैं कि यह एक वृत्त है;देख्िाए आवृफति 10.2द्ध। आपने वृत्त वैफसे प्राप्त किया? आपने एक बिन्दु । को स्िथर रखा तथा वे सभी बिन्दु बनाए जो । से एक स्िथर दूरी पर हैं। इस प्रकार, हमें निम्न परिभाषा प्राप्त हुइर्: एक तल पर उन सभी बिन्दुओं का समूह, जो तल के एक स्िथर बिन्दु से एक स्िथर दूरी पर स्िथत हों, एकवृत्त कहलाता है। स्िथर बिन्दु को वृत्त का केन्द्र ;बमदजतमद्ध कहते हैंतथा स्िथर दूरी को वृत्त की त्रिाज्या ;तंकपनेद्ध कहते हैं। आवृफति 10ण्3 में, व् वृत्त का केन्द्र तथा लम्बाइर् व्च् वृत्त की त्रिाज्या है। टिप्पणीरू ध्यान दीजिए कि केन्द्र को वृत्त के किसी बिन्दुसे मिलाने वाला रेखाखंड भी वृत्त की त्रिाज्या कहलाता है। अथार्त् ‘त्रिाज्या’ को दो अथो± में प्रयोग किया जाता है - रेखाखंड के रूप में तथा इसकी लम्बाइर् के रूप में। आपको कक्षा 6 से निम्न में से वुफछ अवधरणाओं आवृफति 10ण्2 आवृफति 10ण्3 का ज्ञान है। हम केवल उनका पुनः स्मरण करते हैं। एक वृत्त उस तल को, जिस पर वह स्िथत है, तीन भागों में विभाजित करता है। ये हैं: ;पद्ध वृत्त के अन्दर का भाग, जिसे अभ्यंतर ;पदजमतपवतद्ध भी कहते हैं, ;पपद्ध वृत्त एवं ;पपपद्ध वृत्त के बाहर का भाग, जिसे बहिभार्ग ;मगजमतपवतद्ध भी आवृफति 10ण्4कहते हैं ;देख्िाए आवृफति 10.4द्ध। वृत्त तथा इसका अभ्यंतर मिलकर वृत्तीय क्षेत्रा ;बपतबनसंत तमहपवदद्ध बनाते हैं। यदि एक वृत्त पर दो बिन्दु च् तथा फ लें, तो रेखाखंड च्फ वृत्त की एक जीवा कहलाता है। ;देख्िाए आवृफति10.5द्ध। उस जीवा को जो वृत्त के केन्द्र से होकर जातीहै, वृत्त का व्यास कहते हैं। त्रिाज्या के समान शब्द ‘व्यास’ को भी दो अथो± में प्रयुक्त किया जाता है, अथार्त् एक रेखाखंड के रूप में तथा इसकी लम्बाइर् के रूप में। क्याआवृफति 10ण्5 आपको वृत्त में व्यास से बड़ी कोइर् और जीवा प्राप्त होसकती है? नहीं। आप देख सकते हैं कि व्यास वृत्त की सबसे लम्बी जीवा होती है तथा सभी व्यासों की लम्बाइर् समान होती है जो त्रिाज्या की दो गुनी होती है। आवृफति 10.5 में, ।व्ठ वृत्त का एक व्यास है। एक वृत्त मेंकितने व्यास हो सकते हैं? एक वृत्त खींचिए और देख्िाए कि आप कितने व्यास बना सकते हैं?दो बिन्दुओं के बीच के वृत्त के भाग को एक चाप ;ंतबद्ध कहते हैं। आवृफति 10.6 में, बिन्दुओं च् तथा फ केआवृफति 10ण्6 बीच के वृत्त के भागों को देख्िाए। आप पाएँगे कि दोनों भागों में से एक बड़ा है तथा एक छोटा है ;देख्िाए आवृफति 10.7द्ध। बड़े भाग को दीघर् चाप ;उंरवत ंतबद्ध च्फ कहते हैं तथा छोटे भाग को लघु चाप ;उपदवत ंतबद्ध कहते हैं। लघु चाप च्फ को च्फ से व्यक्त करते हैं तथा दीघर् चाप च्फ को च्त्फ से, जहाँ त् चाप पर च् तथाफ के बीच में कोइर् बिन्दु है। जब तक अन्यथा कहा न जाए, चापच्फ या च्फ लघु चाप को प्रद£शत करता है। जबच् और फ एक व्यास के सिरे हों, तो दोनों चाप बराबर हो जाते हैं आवृफति 10ण्7और प्रत्येक चाप को अध्र्वृत्त ;ेमउपबपतबसमद्ध कहते हैं। संपूणर् वृत्त की लम्बाइर् को उसकी परिध्ि ;बपतबनउमितमदबमद्ध कहते हैं। जीवा तथा प्रत्येक चाप केमध्य क्षेत्रा को वृत्तीय क्षेत्रा का खंड या सरल शब्दों में वृत्तखंड कहते हैं। आप पाएँगे कि दो प्रकार केवृत्तखंड होते हैं। ये हैंः दीघर् वृत्तखंड ;उंरवत ेमहउमदजद्ध तथा लघु वृत्तखंड ;उपदवत ेमहउमदजद्ध ;देख्िाए आवृफति 10.8द्ध। केन्द्र को एक चाप के सिरों से मिलाने वाली त्रिाज्याओं एवं चाप के बीच के क्षेत्रा को त्रिाज्यखंड ;ेमबजवतद्ध कहते हैं। वृत्तखंड की तरह, आप पाते हैं कि लघु चाप लघु त्रिाज्यखंड के तथा दीघर् चाप दीघर् त्रिाज्यखंड के संगत है। आवृफति 10.9 में, क्षेत्राव्च्फ लघु त्रिाज्यखंड ;उपदवत ेमबजवतद्ध तथा शेष वृत्तीय क्षेत्रा दीघर् त्रिाज्यखंड ;उंरवत ेमबजवतद्ध है। जब दोनों चाप बराबर हो जाते हैं,अथार्त् प्रत्येक अध्र्वृत्त होता है, तो दोनों वृत्तखंड तथा दोनों त्रिाज्यखंड एक समान हो जाते हैं और प्रत्येक को अध्र्वृत्तीय क्षेत्रा ;ेमउप बपतबनसंत तमहपवदद्ध कहते हैं। आवृफति10ण्8 आवृफति10ण्9 1ण् खा;पद्ध ली स्थान भरिए: वृत्त का केन्द्र वृत्त के प्रश्नावली 10ण्1 में स्िथत है ;बहिभार्ग/अभ्यंतरद्ध। ;पपद्ध एक बिन्दु, जिसकी वृत्त के केन्द्र से दूरी त्रिाज्या से अध्िक हो, वृत्त के में स्िथत होता है ;बहिभार्ग/अभ्यंतरद्ध। ;पपपद्ध वृत्त की सबसे बड़ी जीवा वृत्त का होता है। ;पअद्ध एक चाप होता है, जब इसके सिरे एक व्यास के सिरे हों। ;अद्ध वृत्तखंड एक चाप तथा के बीच का भाग होता है। ;अपद्ध एक वृत्त, जिस तल पर स्िथत है, उसे भागों में विभाजित करता है। 2ण् लिख्िाए, सत्य या असत्य। अपने उत्तर के कारण दीजिए। ;पद्ध केन्द्र को वृत्त पर किसी बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखंड वृत्त की त्रिाज्या होती है। ;पपद्ध एक वृत्त में समान लंबाइर् की परिमित जीवाएँ होती हैं। ;पपपद्ध यदि एक वृत्त को तीन बराबर चापों में बाँट दिया जाए, तो प्रत्येक भाग दीघर् चाप होता है। ;पअद्ध वृत्त की एक जीवा, जिसकी लम्बाइर् त्रिाज्या से दो गुनी हो, वृत्त का व्यास है। ;अद्ध त्रिाज्यखंड, जीवा एवं संगत चाप के बीच का क्षेत्रा होता है। ;अपद्ध वृत्त एक समतल आवृफति है। 10ण्3 जीवा द्वारा एक बिन्दु पर अंतरित कोण एक रेखाखंड च्फ तथा एक बिन्दु त्ए जो रेखा च्फ पर स्िथत न हो, लीजिए। च्त् तथा फत् को मिलाइए ;देख्िाए आवृफति 10.10द्ध। तब कोण च्त्फए रेखाखंड च्फ द्वारा बिन्दु त् पर अंतरति कोण कहलाता है। आवृफति 10.11 में कोण च्व्फए च्त्फ तथा च्ैफ क्या कहलाते हैं? ∠ च्व्फ जीवा च्फ द्वारा केन्द्र व् पर अंतरित कोण है, ∠ च्त्फ तथा ∠ च्ैफ क्रमशः च्फ द्वारा दीघर् चाप च्फ तथा लघु चाप च्फ पर स्िथत बिन्दुओं त् और ै पर अंतरित कोण हैं। आवृफति 10ण्10 आवृफति 10ण्11 आइए हम जीवा की माप तथा उसके द्वारा केन्द्र परअंतरित कोण में संबंध् की जाँच करें। आप एक वृत्त में विभ्िान्न जीवाएँ खींचकर तथा उनके द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोणों को बनाकर देख सकते हैं कि जीवा यदि बड़ी होगी, तो उसके द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण भी बड़ा होगा। क्या होगा यदि आप दो बराबर जीवाएँ लेंगे? क्या केन्द्र पर अंतरित कोण समान होंगे या नहीं? एक वृत्त की दो या अध्िक बराबर जीवाएँ खींचिए तथा केन्द्र पर उनके द्वारा अंतरित कोणों को मापिए ;देख्िाए आवृफति 10ण्12 आवृफति 10.12द्ध। आप पाएँगे कि उनके द्वारा केन्द्र परअंतरित कोण बराबर हैं। आइए इस तथ्य की हम उपपिा दें। प्रमेय 10ण्1 रू वृत्त की बराबर जीवाएँ केन्द्र पर बराबर कोण अंतरित करती हैं। उपपिा रू आपको एक वृत्त, जिसका केन्द्र व् है, की दो बराबर जीवाएँ ।ठ और ब्क् दी हुइर् हैं ;देख्िाए आवृफति 10.13द्ध तथा आप सि( करना चाहते हैं कि ∠ ।व्ठ त्र ∠ ब्व्क् है। त्रिाभुजों।व्ठ तथा ब्व्क् में, व्। त्र व्ब् ;एक वृत्त की त्रिाज्याएँद्ध व्ठ त्र व्क् ;एक वृत्त की त्रिाज्याएँद्ध ।ठ त्र ब्क् ;दिया हैद्ध आवृफति 10ण्13 अतः, Δ।व्ठ ≅Δब्व्क् ;ैैै नियमद्ध इस प्रकार, हम पाते हैं कि ∠।व्ठ त्र ∠ब्व्क् ;सवा±गसम त्रिाभुजों के संगत भागद्ध ऽ टिप्पणी रू सुविध के लिए ‘सवा±गसम त्रिाभुजों के संगत भाग’ के स्थान पर संक्षेप में ब्च्ब्ज् का प्रयोग किया जाएगा, क्योंकि जैसा कि आप देखेंगे कि इसका हम बहुध प्रयोग करते हैं। अब यदि एक वृत्त की दो जीवाएँ केन्द्र पर बराबर कोण अंतरित करें, तो उन जीवाओें के बारे में आप क्या कह सकते हैं? क्या वे बराबर हैं अथवा नहीं? आइए हम इसकी निम्न ियाकलाप द्वारा जाँच करें। एक अक्स कागश ;जतंबपदह चंचमतद्ध लीजिए और इसपर एक वृत्त खींचिए। इसे वृत्त के अनुदिश काटकर एक चकती ;कपेबद्ध प्राप्त कीजिए। इसके केन्द्र व् पर एक कोण ।व्ठ बनाइए, जहाँ ।ए ठ वृत्त पर स्िथत बिन्दु हैं। केन्द्र पर, एक दूसरा कोण च्व्फ कोण ।व्ठ के बराबर बनाइए। चकती को इन कोणों के सिरों को मिलाने वाली जीवाओं के अनुदिश काटें ;देख्िाए आवृफति 10.14द्ध।आप दो वृत्तखंड ।ब्ठ तथा च्त्फ प्राप्त करेंगे। यदि आपआवृफति 10ण्14एक को दूसरे के ऊपर रखेंगे, तो आप क्या अनुभव करेंगे? वे एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेंगे, अथार्त् वे सवा±गसम होंगे। इसलिए ।ठ त्र च्फ है। यद्यपि आपने इसे एक विशेष दशा में ही देखा है, इसे आप अन्य समान कोणों के लिए दोहराइए। निम्न प्रमेय के कारण सभी जीवाएँ बराबर होंगीः प्रमेय 10ण्2 रू यदि एक वृत्त की जीवाओं द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण बराबर हों, तो वे जीवाएँ बराबर होती हैं। उपयुर्क्त प्रमेय, प्रमेय 10.1 का विलोम है। ध्यान दीजिए कि आवृफति 10.13 में यदि आप ∠ ।व्ठ त्र ∠ब्व्क् लें, तो Δ।व्ठ ≅Δब्व्क् ;क्यों?द्ध क्या अब आप देख सकते हैं कि ।ठ त्र ब्क् हैघ् प्रश्नावली 10ण्2 1ण् याद कीजिए कि दो वृत्त सवा±गसम होते हैं, यदि उनकी त्रिाज्याएँ बराबर हों। सि( कीजिए किसवा±गसम वृत्तों की बराबर जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अंतरित करती हैं। 2ण् सि( कीजिए कि यदि सवा±गसम वृत्तों की जीवाएँ उनके केन्द्रों पर बराबर कोण अंतरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं। 10ण्4 केन्द्र से जीवा पर लम्ब ियाकलाप रू एक अक्स कागज पर एक वृत्त खींचिए। माना इसका केन्द्र व् है। एक जीवा ।ठ खींचिए। कागज को व् से जाने वाली एक रेखा के अनुदिश इस प्रकार मोडि़ए कि जीवा का एक भाग दूसरे भाग पर पड़े। मान लीजिए कि मोड़ का निशान ।ठ को ड पर काटता है। तब ∠ व्ड। त्र ∠ व्डठ त्र 90° अथवा व्डए ।ठ पर लम्ब है ;देख्िाए आवृफति 10.15द्ध। क्या बिन्दु ठए । के संपाती होता है? आवृफति 10ण्15 हाँ, यह होगा। इसलिए ड। त्र डठ है। व्। और व्ठ को मिलाकर तथा समकोण त्रिाभुजों व्ड। और व्डठ को सवा±गसम सि( कर इसकी उपपिा स्वयं दीजिए। यह उदाहरण निम्न परिणाम का विशेष दृष्टांत हैः प्रमेय 10ण्3 रू एक वृत्त के केन्द्र से एक जीवा पर डाला गया लम्ब जीवा को समद्विभाजित करता है। इस प्रमेय का विलोम क्या है? इसको लिखने के लिए, सवर्प्रथम हमें स्पष्ट होना है कि प्रमेय 10.3 में क्या दिया गया है और क्या सि( करना है। दिया है कि केन्द्र से जीवा पर लंब खींचा गया है और सि( करना है कि वह जीवा को समद्विभाजित करता है। अतः विलोममें परिकल्पना है ‘यदि एक केन्द्र से जाने वाली रेखा वृत्त की एक जीवा को समद्विभाजित करे’ और सि( करना है ‘रेखा जीवा पर लम्ब है’। इस प्रकार, विलोम है: प्रमेय 10ण्4 रू एक वृत्त के केन्द्र से एक जीवा को समद्विभाजित करने के लिए खींची गइर् रेखा जीवा पर लंब होती है। क्या यह सत्य है? इसको वुफछ स्िथतियों में प्रयत्न करके देख्िाए। आप देखेंगे कि यह इन सभी स्िथतियों में सत्य है। निम्न अभ्यास करके देख्िाए कि क्या यह कथन व्यापक रूप में सत्य है। हम इसके वुफछ कथन देंगे और आप इनके कारण दीजिए। मान लीजिए कि एक वृत्त, जिसका केन्द्र व् है, की ।ठ एक जीवा है और व् को ।ठ के मध्य - बिन्दु ड से मिलाया गया है। आपको सि( करना है कि व्ड ⊥।ठ है। व्। और व्ठ को मिलाइए ;देख्िाए आवृफति 10.16द्ध। त्रिाभुजों व्।ड तथा व्ठड में, व्। त्र व्ठ ;क्यों?द्ध ।ड त्र ठड व्ड त्र व्ड ;क्यों?द्ध ;उभयनिष्ठद्ध आवृफति 10ण्16 अतः, Δव्।ड ≅Δव्ठड ;क्यों?द्ध इससे प्राप्त होता हैः ∠व्ड। त्र ∠व्डठ त्र 90° ;क्यों?द्ध 10ण्5 तीन बिन्दुओं से जाने वाला वृत्त अध्याय 6 में आपने पढ़ा है कि एक रेखा को निधर्रित करने के लिए दो बिन्दु पयार्प्त हैं। अथार्त् दो बिन्दुओं से होकर जाने वाली एक और केवल एक ही रेखा है। एक स्वाभाविकप्रश्न उठता हैः एक वृत्त को बनाने के लिए कितने बिन्दु पयार्प्त हैं? एक बिन्दु च् लीजिए। इस बिन्दु से होकर जाने वाले कितने वृत्त खींचे जा सकते हैं?आप देखते हैं कि इस बिन्दु से होकर जाने वाले जितने चाहें उतने वृत्त खींचे जा सकते हैं ख्देख्िाए आवृफति 10.17;पद्ध,। अब दो बिन्दु च् और फ लीजिए। आप पिफर से देखेंगे कि च् तथा फ से होकर जाने वाले अनगिनत वृत्त खींचे जा सकते हैं ख्आवृफति 10ण्17;पपद्ध,। क्या होगा यदि आप तीन बिन्दु ।ए ठ और ब् लें? क्या आप तीन संरेखी बिन्दुओं से एक वृत्त खींच सकते हैं? नहीं। यदि बिन्दु एक रेखा पर स्िथत हों, तोतीसरा बिन्दु दो बिन्दुओं से होकर जाने वाले वृत्त के अंदर या बाहर होगा ;देख्िाए आवृफति 10.18द्ध। आवृफति 10ण्18 अतः आइए हम तीन बिन्दु ।ए ठ और ब् लें, जो एक रेखा पर स्िथत न हों या दूसरे शब्दों में, वे संरेखी न हों ख्देख्िाए आवृफति 10ण्19;पद्ध,। ।ठ तथा ठब् के क्रमशः लम्ब समद्विभाजक च्फ और त्ै खींचिए। मान लीजिए ये लम्ब समद्विभाजक एक बिन्दु व् पर प्रतिच्छेद करते हैं ;ध्यान दीजिए कि च्फ और त्ै परस्पर प्रतिच्छेद करेंगे, क्योंकि वे समांतर नहीं हैंद्ध ख्देख्िाए आवृफति10ण्19;पपद्ध,। ;पद्ध ;पपद्ध आवृफति 10ण्19 अब क्योंकि व्ए ।ठ के लम्ब समद्विभाजक च्फ पर स्िथत है, इसलिए व्। त्र व्ठ है। ¹ध्यान दीजिए कि अध्याय 7 में सि( किया गया है कि रेखाखंड के लम्ब समद्विभाजक का प्रत्येक बिन्दु उसके अंत बिन्दुओं से बराबर दूरी पर होता है।ह् इसी प्रकार, क्योंकि व्ए ठब् के लम्ब समद्विभाजक त्ै पर स्िथत हैं, इसलिए आप पाते हैं कि व्ठ त्र व्ब् इसीलिए व्। त्र व्ठ त्र व्ब् हैए जिसका अथर् है कि बिन्दु ।ए ठ और ब् बिन्दु व् से समान दूरी पर हैं। अतः यदि आप व् को केन्द्र तथा व्। त्रिाज्या लेकर एक वृत्त खींचे, तो वह ठ और ब् से भी होकर जाएगा। यह दशार्ता है कि तीन बिन्दुओं ।ए ठ और ब् से होकर जानेवाला एक वृत्त है। आप जानते हैं कि दो रेखाएँ ;लम्ब समद्विभाजकद्ध केवल एक बिन्दु पर प्रतिच्छेद कर सकती हैं। दूसरे शब्दों में, ।ए ठ और ब् से होकर जाने वाला एक अद्वितीयवृत्त है। आपने अब निम्न प्रमेय को सि( कर लिया हैः प्रमेय 10ण्5 रू तीन दिए हुए असंरेखी बिन्दुओं द्वारा होकर जाने वाला एक और केवल एकवृत्त है। टिप्पणी रू यदि ।ठब् एक त्रिाभुज हो, तो प्रमेय 10.5 से शीषो± ।ए ठ और ब् से होकर एकअद्वितीय वृत्त खींचा जा सकता है। इस वृत्त को Δ ।ठब् का परिवृत्त कहते हैं। इसका केन्द्र तथा त्रिाज्या क्रमशः त्रिाभुज के परिकेन्द्र तथा परित्रिाज्या कहलाते हैं। उदाहरण 1 रू एक वृत्त का चाप दिया हुआ है। इस वृत्त को पूरा कीजिए। हल रू मान लीजिए एक वृत्त का चाप च्फ दिया हुआ है।हमें वृत्त को पूरा करना है। इसका अथर् है कि हमें इसका केन्द्र एवं त्रिाज्या ज्ञात करनी है। चाप पर एक बिन्दु त् लीजिए। च्त् तथा त्फ को मिलाइए। प्रमेय 10.5 को सि( करने के लिए की गइर् रचना का उपयोग करके केन्द्र तथा त्रिाज्या ज्ञात कीजिए। इन्हीं केन्द्र तथा त्रिाज्या को लेकर वृत्त को पूरा आवृफति 10ण्20कीजिए ;देख्िाए आवृफति 10.20द्ध। प्रश्नावली 10ण्3 1ण् वृत्तों के कइर् जोड़े ;युग्मद्ध खींचिए। प्रत्येक जोड़े में कितने बिन्दु उभयनिष्ठ हैं? उभयनिष्ठ बिन्दुओं की अध्िकतम संख्या क्या है? 2ण् मान लीजिए आपको एक वृत्त दिया है। एक रचना इसके केन्द्र को ज्ञात करने के लिए दीजिए। 3ण् यदि दो वृत्त परस्पर दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करें, तो सि( कीजिए कि उनके केन्द्र उभयनिष्ठ जीवा के लम्ब समद्विभाजक पर स्िथत हैं। 10ण्6 समान जीवाएँ और उनकी केन्द्र से दूरियाँ मान लीजिए ।ठ एक रेखा है और च् कोइर् बिन्दु है। क्योंकि एक रेखा पर असंख्य बिन्दु होते हैं, इसलिए यदि आप इन सभी को च् से मिलाएँ तो आपको असंख्य रेखाखंड च्स्ए च्स्ए च्डए च्स्ए च्स्4ए आदि मिलेंगे। इनमंे से1 23कौन सी बिन्दु च् से ।ठ की दूरी है? आप थोड़ा सोचकर आवृफति 10ण्21 इसका उत्तर प्राप्त कर सकते हैं। इन रेखाखंडों, में से च् से ।ठ पर लम्ब रेखाखंड अथार्त् आवृफति 10.21 में च्ड सबसे छोटा होगा। गण्िात में इस सबसे छोटी लम्बाइर् च्ड को च् से ।ठ की दूरी के रूप में परिभाष्िात करते हैं। अतः, आप कह सकते हैं कि: एक बिन्दु से एक रेखा पर लम्ब की लम्बाइर् रेखा की बिन्दु से दूरी होती है। ध्यान दीजिए कि यदि बिन्दु रेखा पर स्िथत है, तो रेखा की इससे दूरी शून्य है। एक वृत्त में असंख्य जीवाएँ हो सकती हैं। आप एक वृत्त में जीवाएँ खींचकर जाँच कर सकते हैं कि लंबी जीवा, छोटी जीवा की तुलना में केन्द्र के निकट होती है। इसकी आप विभ्िान्न लम्बाइर् की कइर् जीवाएँ की खींचकर तथा उनकी केन्द्र से दूरियाँ मापकर जाँच करसकते हैं। व्यास, जो वृत्त की सबसे बड़ी जीवा है, की केन्द्र से क्या दूरी है? क्योंकि केन्द्र इस पर स्िथत है, अतः इसकी दूरी शून्य है। क्या आप सोचते हैं कि जीवा की लम्बाइर् और उसकी केन्द्र से दूरी में कोइर् संबंध् है? आइए देखें कि क्या ऐसा है। ियाकलाप रू किसी त्रिाज्या का अक्स कागज पर एक वृत्त खींचिए। इसकी दो बराबर जीवाएँ ।ठ तथा ब्क् खींचिए तथा इन पर केन्द्र व् से लम्ब व्ड तथा व्छ भी बनाइए। आवृफति को इस प्रकार मोडि़ए कि क्ए ठ पर तथा ब्ए । पर पड़े ख्देख्िाए आवृफति 10.22 ;पद्ध,। आप पाएँगे कि व् मोड़ के निशान पर पड़ता है और छए ड पर पड़ता है। अतः, व्ड त्र व्छ है। इस ियाकलाप को केन्द्रों व् तथा व्′ के सवा±गसम वृत्त खींचकर और अलग - अलग बराबर जीवाएँ ।ठ तथा ब्क् लेकर दोहराएँ। उन पर लम्ब व्ड तथा व्′छ खींचिए ख्देख्िाए आवृफति 10.22 10ण्22;पपद्ध,। इनमें से एक वृत्ताकार चकती को काटकर दूसरे वृत्त पर इस प्रकार रखें कि ।ठए ब्क् को पूणर् रूप से ढक ले। तब आप पाएँगे कि व्ए व्′ पर पड़ता है तथा डए छ पर पड़ता है। इस प्रकार, आपने निम्न को सत्यापित किया हैः प्रमेय 10ण्6 रू एक वृत्त की ;या सवा±गसम वृत्तों कीद्ध बराबर जीवाएँ केन्द्र से ;या केन्द्रों सेद्ध समान दूरी पर होती है। अब यह देखा जाए कि क्या इसका विलोम सत्य है अथवा नहीं। इसके लिए केन्द्र व् वालाएक वृत्त खींचिए। केन्द्र व् से वृत्त के भीतर रहने वाले दो बराबर लम्बाइर् के रेखाखंड व्स् तथा व्ड खींचिए ख्देख्िाए आवृफति 10.23 ;पद्ध,। अब क्रमशः दो जीवाएँ च्फ और त्ै खींचिए जो व्स् और व्ड पर लम्ब हों ख्देख्िाए आवृफति 10ण्23;पपद्ध,। च्फ और त्ै की लम्बाइयाँ मापिए। क्या ये असमान हैं? नहीं, दोनों बराबर हैं। ियाकलाप को और अध्िक समान रेखाखंडों तथा उन पर लम्ब जीवाएँ खींचकर दोहराइए। इस प्रकार, प्रमेय 10.6 का विलोम सत्यापित हो जाता है, जिसका कथन नीचे दिया गया हैः प्रमेय 10ण्7 रू एक वृत्त के केन्द्र से समदूरस्थ जीवाएँ लम्बाइर् में समान होती हैं। अब हम उपयुर्क्त परिणामों पर आधरित एक उदाहरण लेते हैं। उदाहरण 2 रू यदि एक वृत्त की दो प्रतिच्छेदी जीवाएँ प्रतिच्छेद बिन्दु से जाने वाले व्यास से समान कोण बनाएँ, तो सि( कीजिए कि वे जीवाएँ बराबर हैं। हल रू दिया है कि एक वृत्त, जिसका केन्द्र व् है, की दो जीवाएँ ।ठ और ब्क् बिन्दु म् पर प्रतिच्छेद करती हैं। म् से जाने वाला च्फ एक ऐसा व्यास है कि ∠ ।म्फ त्र ∠ क्म्फ है ;देख्िाए आवृफति 10.24द्ध। आपको सि( करना है कि ।ठ त्र ब्क् है। जीवाओं ।ठ और ब्क् पर क्रमशः व्स् तथा व्ड लम्ब खींचिए। अब, आवृफति 10ण्24 ∠स्व्म् त्र 180° दृ 90° दृ ∠स्म्व् त्र 90° दृ ∠स्म्व् ;त्रिाभुज के कोणों के योग का गुणद्ध त्र 90° दृ ∠।म्फ त्र 90° दृ ∠क्म्फ त्र 90° दृ ∠डम्व् त्र ∠डव्म् त्रिाभुजों व्स्म् तथा व्डम् में, ∠स्म्व् त्र ∠डम्व् ;दिया हैद्ध ∠स्व्म् त्र ∠डव्म् ;ऊपर सि( किया हैद्ध म्व् त्र म्व् ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δव्स्म् ≅Δव्डम् ;क्यों?द्ध इससे प्राप्त होता हैः व्स् त्र व्ड ;ब्च्ब्ज्द्ध इसलिए, ।ठ त्र ब्क् ;क्यों?द्ध प्रश्नावली 10ण्4 1ण् 5 बउ तथा 3 बउ त्रिाज्या वाले दो वृत्त दो बिन्दुओं पर प्रतिच्छेद करते हैं तथा उनके केन्द्रों के बीच की दूरी 4 बउ है। उभयनिष्ठ जीवा की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। 2ण् यदि एक वृत्त की दो समान जीवाएँ वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सि( कीजिए कि एक जीवा के खंड दूसरी जीवा के संगत खंडों के बराबर हैं। 3ण् यदि एक वृत्त की दो समान जीवाएँ वृत्त के अन्दर प्रतिच्छेद करें, तो सि( कीजिए कि प्रतिच्छेद बिन्दु को केन्द्र से मिलाने वाली रेखा जीवाओं से बराबर कोण बनाती है। 4ण् यदि एक रेखा दो संकेन्द्री वृत्तों ;एक ही केन्द्र वालेवृत्तद्ध को, जिनका केन्द्र व् है, ।ए ठए ब् और क् पर प्रतिच्छेद करे, तो सि( कीजिए ।ठ त्र ब्क् है ;देख्िाए आवृफति 10.25द्ध। 5ण् एक पावर्फ में बने 5 उ त्रिाज्या वाले वृत्त पर खड़ी तीन लड़कियाँ रेशमा, सलमा एवं मनदीप खेल रही हैं। रेशमा एक गेंद को सलमा के पास, सलमा मनदीप के पास तथा मनदीप रेशमा के पास पेंफकती है। यदि रेशमा तथा सलमा के बीच और सलमा तथा मनदीप के बीच की प्रत्येक दूरी 6 उ हो, तो रेशमा और मनदीप के बीच की दूरी क्या है? 6ण् 20 उ त्रिाज्या का एक गोल पावर्फ ;वृत्ताकारद्ध एक कालोनी में स्िथत है। तीन लड़केअंवुफर, सैÕयद तथा डेविड इसकी परिसीमा पर बराबर दूरी पर बैठे हैं और प्रत्येक के हाथ में एक ख्िालौना टेलीपफोन आपस में बात करने के लिए है। प्रत्येक पफोन की डोरी की लम्बाइर् ज्ञात कीजिए। 10ण्7 एक वृत्त के चाप द्वारा अंतरित कोण आपने देखा है कि एक जीवा के अंत बिन्दु ;व्यास के अतिरिक्तद्ध वृत्त को दो चापों में एक ;दीघर् तथा दूसरा लघुद्ध विभाजित करते हैं। यदि आप बराबर जीवाएँ लें, तो आप उन चापों की मापों के बारे में क्या कह सकते हैं? क्या एक जीवा द्वारा बना चाप दूसरी जीवा के द्वारा बने चाप के बराबर है? वास्तव में, ये बराबर लम्बाइर् से भी वुफछ अध्िक है। यह इस अथर्में, कि यदि एक चाप को दूसरे चाप के ऊपर रखा जाए, तो बिना ऐंठे या मोड़े वे एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेंगे। इस तथ्य को आप जीवा ब्क् के संगत चाप को वृत्त से ब्क् के अनुदिश काटकर तथा उसे बराबर जीवा ।ठ के संगत चाप पर रखकर सत्यापित कर सकते हैं। आप पाएँगे कि चाप ब्क्ए चाप ।ठ को पूणर्रूप से ढक लेता है ;देख्िाए आवृफति 10.26द्ध। यह दशार्ता है कि बराबर जीवाएँ सवा±गसम चाप बनाती हैं तथा विलोमतः सवा±गसमचाप वृत्त की बराबर जीवाएँ बनाते हैं। इसका निम्न प्रकार आवृफति 10ण्26 से कथन दे सकते हैंः यदि किसी वृत्त की दो जीवाएँ बराबर हों, तो उनके संगत चाप सवा±गसम होते हैं तथा विलोमतः यदि दो चाप सवा±गसम हों, तो उनके संगत जीवाएँ बराबर होती हैं। चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण भी संगत जीवा द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण से इस अथर् में परिभाष्िात किया जाता है कि लघु चाप कोण को अंतरित करता है और दीघर् चाप संगत प्रतिवतीर् कोण अंतरित करता है। अतः आवृफति 10.27 में, लघु चाप च्फ द्वारा व् पर अंतरित कोण च्व्फ है तथा दीघर् चाप च्फ द्वारा व् पर अंतरित संगत प्रतिवतीर् कोण च्व्फ है। आवृफति 10ण्27 उपरोक्त गुण एवं प्रमेय 10.1 के संदभर् में निम्न परिणाम सत्य है: किसी वृत्त के सवा±गसम चाप ;या बराबर चापद्ध केन्द्र पर बराबर कोण अंतरित करते हैं। अतः, किसी वृत्त की जीवा द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण संगत ;लघुद्ध चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण के बराबर होता है। निम्न प्रमेय एक चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण तथावृत्त के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण में संबंध् देती है। प्रमेय 10ण्8 रू एक चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण वृत्त के शेष भाग के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण का दुगुना होता है। उपपिा रू एक वृत्त का चाप च्फ दिया है, जो केन्द्र व् पर ∠च्व्फ तथा वृत्त के शेष भाग के एक बिन्दु । पर ∠ च्।फ अंतरित करता है। हमें सि( करना है कि आवृफति 10ण्28 आवृफति 10.28 में दी गइर् तीन विभ्िान्न स्िथतियों पर विचार कीजिए। ;पद्ध में चाप च्फ लघु है, ;पपद्ध में चाप च्फ अध्र्वृत्त है तथा ;पपपद्ध में चाप च्फ दीघर् है। आइए हम ।व् को मिलाकर एक बिन्दु ठ तक बढ़ाएँ। सभी स्िथतियों में, ∠ ठव्फ त्र ∠ व्।फ ़ ∠ ।फव् ;क्योंकि त्रिाभुज का बहिष्कोण उसके दो अभ्िामुख अंतः कोणों के योग के बराबर होता है।द्ध साथ ही Δ व्।फ में, व्। त्र व्फ ;एक वृत्त की त्रिाज्याएँद्ध अतः, ∠ व्।फ त्र ∠ ।फव् ;प्रमेय 7.5द्ध इससे प्राप्त होता हैः ∠ ठव्फ त्र 2 ∠ व्।फ ;1द्ध इसी प्रकार, ∠ ठव्च् त्र 2 ∠ व्।च् ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध से, ∠ ठव्च् ़ ∠ ठव्फ त्र 2;∠ व्।च् ़ ∠ व्।फद्ध अथार्त्, ∠ च्व्फ त्र 2 ∠ च्।फ ;3द्ध स्िथति ;पपपद्ध के लिए, जहाँ च्फ दीघर् चाप है, ;3द्ध के स्थान पर प्रतिवतीर् कोण च्व्फ त्र 2 ∠ च्।फ होगा। ऽ टिप्पणी रू मान लीजिए कि उपयुर्क्त आवृफतियों में हम च् और फ को मिलाकर जीवा च्फ बनाते हैं। तब, ∠ च्।फ को वृत्तखंड च्।फच् में बना कोण भी कहते हैं। प्रमेय 10.8 में वृत्त के शेष भाग पर कोइर् भी बिन्दु । हो सकता है। इसलिए यदि आप वृत्त के शेष भाग पर एक और बिन्दु ब् लें आवृफति 10ण्29;देख्िाए आवृफति 10.29द्ध, तो आप पाएँगेः ∠ च्व्फ त्र 2 ∠ च्ब्फ त्र 2 ∠ च्।फ अतः, ∠ च्ब्फ त्र ∠ च्।फ यह निम्न को सि( करता है: प्रमेय 10ण्9 रू एक ही वृत्तखंड के कोण बराबर होते हैं। आइए अब प्रमेय 10.8 की स्िथति ;पपद्ध की अलग से विवेचना करें। यहाँ ∠च्।फ उस वृत्तखंड में एक कोण है जो अध्र्वृत्त है। साथ ही, ∠ च्।फ त्र 1 ∠ च्व्फ त्र 1 ×180° त्र 90° 22 है। यदि आप कोइर् और बिन्दु ब् अध्र्वृत्त पर लें, तो भी आप पाते हैं कि ∠ च्ब्फ त्र 90° इस प्रकार, आप वृत्त का एक और गुण पाते हैं जो निम्न हैः अध्र्वृत्त का कोण समकोण होता है। प्रमेय 10.9 का विलोम भी सत्य है, जिसका इस प्रकार कथन दिया जा सकता हैः प्रमेय 10ण्10 रू यदि दो बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखंड, उसको अंत£वष्ट करने वाली रेखा के एक ही ओर स्िथत दो अन्य बिन्दुओं पर समान कोण अंतरित करे, तो चारों बिन्दु एकवृत्त पर स्िथत होते हैं ;अथार्त् वे चक्रीय होते हैं द्ध। आप इस कथन की सत्यता निम्न प्रकार से देख सकते हैं: आवृफति 10.30 में ।ठ एक रेखाखंड है, जो दो बिन्दुओं ब् और क् पर समान कोण अंतरित करता है। अथार्त् ∠ ।ब्ठ त्र ∠ ।क्ठ यह दशार्ने के लिए कि बिन्दु ।ए ठए ब् औरक् एक वृत्त पर स्िथत हैं, बिन्दुओं ।ए ब् और ठ से जाने वाला एक वृत्त खींचिए। मान लीजिए कि वह क् से होकर नहीं जाता है। तब, वह ।क् ;अथवा बढ़ी हुइर् ।क्द्ध को एक बिन्दु म् ;अथवा म्′द्ध पर काटेगा। यदि बिन्दु ।ए ब्ए म् और ठ एक वृत्त पर स्िथत हैं, तो ∠ ।ब्ठ त्र ∠ ।म्ठ ;क्यों?द्ध आवृफति 10ण्30 परन्तु दिया है कि ∠ ।ब्ठ त्र ∠ ।क्ठ अतः, ∠ ।म्ठ त्र ∠ ।क्ठ यह तब तक संभव नहीं है जब तक म्ए क् के संपाती न हो। ;क्यों?द्ध इसी प्रकार, म्′ भी क् के संपाती होना चाहिए। 10ण्8 चक्रीय चतुभुर्ज एक चतुभुर्ज ।ठब्क् चक्रीय कहलाता है, यदि इसके चारोंशीषर् एक वृत्त पर स्िथत होते हैं ;देख्िाए आवृफति 10.31द्ध। इन चतुभुर्जों में आप एक विशेष गुण पाएँगे। अलग - अलग भुजाओं वाले कइर् चक्रीय चतुभुर्ज खींचिए और प्रत्येक का नाम ।ठब्क् रख्िाए ;इसको विभ्िान्न त्रिाज्याओं के कइर् वृत्त खींचकर तथा प्रत्येक पर चार बिन्दु लेकर किया जा सकता हैद्ध। सम्मुख कोणों को मापिए और आप अपने पे्रक्षण आगे दी गइर् सारणी में लिख्िाए: आवृफति 10ण्31 चतुभुर्ज की क्रम संख्या ∠ । ∠ ठ ∠ ब् ∠ क् ∠ । ़∠ ब् ∠ ठ ़∠ क् 1ण् 2ण् 3ण् 4ण् 5ण् 6ण् इस सारणी से आप क्या निष्कषर् निकालते हैं? यदि मापने में कोइर् त्राुटि न हुइर् हो, तो यह निम्न को सत्यापित करता हैः प्रमेय 10ण्11 रू चक्रीय चतुभुर्ज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग 180ह् होता है। वास्तव में इस प्रमेय का विलोम, जिसका कथन निम्न प्रकार से है, भी सत्य हैः प्रमेय 10ण्12 रू यदि किसी चतुभुर्ज के सम्मुख कोणों के एक युग्म का योग 180ह् हो, तो चतुभुर्ज चक्रीय होता है। इस प्रमेय की सत्यता आप प्रमेय 10.10 में दी गइर् विध्ि की तरह से जाँच सकते हैं। उदाहरण 3 रू आवृफति 10.32 में, ।ठ वृत्त का एक व्यास है और ब्क् त्रिाज्या के बराबर एक जीवा है। ।ब् और ठक् बढ़ाए जाने पर एक बिन्दु म् पर मिलती हैं। सि( कीजिए कि ∠ ।म्ठ त्र 60° है। हल रू व्ब्ए व्क् और ठब् को मिलाइए। त्रिाभुज व्क्ब् एक समबाहु त्रिाभुज है। ;क्यों?द्ध अतः, ∠ ब्व्क् त्र 60° 1अब, ∠ ब्ठक् त्र 2 ∠ ब्व्क्;प्रमेय 10.8द्ध इससे प्राप्त होता हैः ∠ ब्ठक् त्र 30° पुनः, ∠ ।ब्ठ त्र 90° ;क्यों?द्ध इसलिए, ∠ ठब्म् त्र 180° दृ ∠ ।ब्ठ त्र 90° आवृफति 10ण्32 जिससे ∠ ब्म्ठ त्र90° दृ 30° त्र 60°ए अथार्त् ∠ ।म्ठ त्र 60° प्राप्त होता है। उदाहरण 4 रू आवृफति 10.33 में, ।ठब्क् एक चक्रीय चतुभुर्ज है, जिसमें ।ब् और ठक् विकणर् हैं। यदि ∠ क्ठब् त्र 55° तथा ∠ ठ।ब् त्र 45° हो, तो ∠ ठब्क् ज्ञात कीजिए। हल रू ∠ ब्।क् त्र ∠ क्ठब् त्र 55° ;एक वृत्तखंड के कोणद्ध अतः, ∠ क्।ठ त्र ∠ ब्।क् ़ ∠ ठ।ब् त्र 55° ़ 45° त्र 100° आवृफति 10ण्33 परन्तु, ∠ क्।ठ ़ ∠ ठब्क् त्र 180° ;चक्रीय चतुभुर्ज के सम्मुख कोणद्ध इसलिए, ∠ ठब्क् त्र 180° दृ 100° त्र 80° उदाहरण 5 रू दो वृत्त दो बिन्दुओं । और ठ पर प्रतिच्छेद करते हैं। ।क् और ।ब् दोनों वृत्तों के व्यास हैं ;देख्िाए आवृफति 10.34द्ध। सि( कीजिए कि ठ रेखाखंड क्ब् पर स्िथत हैं। हल रू ।ठ को मिलाइए। अब, ∠ ।ठक् त्र 90° ;अध्र्वृत्त का कोणद्ध आवृफति 10ण्34∠ ।ठब् त्र 90° ;अध्र्वृत्त का कोणद्ध इसलिए, ∠ ।ठक् ़ ∠ ।ठब् त्र 90° ़ 90° त्र 180° अतः, क्ठब् एक रेखा है। अथार्त् ठ रेखाखंड क्ब् पर स्िथत है। उदाहरण 6 रू सि( कीजिए कि किसी चतुभुर्ज के अंतः कोणों के समद्विभाजकों से बना चतुभुर्ज ;यदि संभव होद्ध चक्रीय होता है। हल रू आवृफति 10.35 में, ।ठब्क् एक चतुभुर्ज है जिसके अंतःकोणों ।ए ठए ब् और क् के क्रमशः कोण समद्विभाजक ।भ्ए ठथ्ए ब्थ् और क्भ् एक चतुभुर्ज म्थ्ळभ् बनाते हैं। अब, ∠ थ्म्भ् त्र ∠ ।म्ठ त्र 180° दृ ∠ म्।ठ दृ ∠ म्ठ। ;क्यों?द्ध आवृफति 10ण्35 1त्र 180° दृ ;∠ । ़ ∠ ठद्ध2तथा ∠ थ्ळभ् त्र ∠ ब्ळक् त्र 180° दृ ∠ ळब्क् दृ ∠ ळक्ब् ;क्यों?द्ध1त्र 180° दृ ;∠ ब् ़ ∠ क्द्ध211अतः, ∠ थ्म्भ् ़ ∠ थ्ळभ् त्र 180° दृ 2 ;∠ । ़ ∠ ठद्ध ़ 180° दृ 2 ;∠ ब् ़ ∠ क्द्ध1 1त्र 360° दृ ;∠ ।़ ∠ ठ ़∠ ब् ़∠ क्द्ध त्र 360° दृ × 360°2 2त्र 360° दृ 180° त्र 180° इसलिए, प्रमेय 10.12 से चतुभुर्ज म्थ्ळभ् चक्रीय है। प्रश्नावली 10ण्5 1ण् आवृफति 10.36 में, केन्द्र व् वाले एक वृत्त पर तीन बिन्दु ।एठ और ब् इस प्रकार हैं कि ∠ ठव्ब् त्र 30° तथा ∠ ।व्ठ त्र 60° है। यदि चाप ।ठब् के अतिरिक्त वृत्त पर क् एक बिन्दु है, तो ∠।क्ब् ज्ञात कीजिए। 2ण् किसी वृत्त की एक जीवा वृत्त की त्रिाज्या के बराबर है। जीवा द्वारा लघु चाप के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण ज्ञात कीजिए तथा दीघर् चाप के किसी बिन्दु पर भी अंतरित कोण ज्ञात कीजिए। 3ण् आवृफति 10.37 में, ∠ च्फत् त्र 100° हैए जहाँ च्ए फ तथात्ए केन्द्र व् वाले एक वृत्त पर स्िथत बिन्दु हैं। ∠ व्च्त् ज्ञात कीजिए। 4ण् आवृफति 10.38 में, ∠ ।ठब् त्र 69° और ∠ ।ब्ठ त्र 31° हो,तो ∠ ठक्ब् ज्ञात कीजिए। 5ण् आवृफति 10.39 में, एक वृत्त पर ।ए ठए ब् और क् चार बिन्दु हैं। ।ब् और ठक् एक बिन्दु म् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि ∠ ठम्ब् त्र 130° तथा ∠ म्ब्क् त्र 20° है। ∠ ठ।ब् ज्ञात कीजिए। 6ण् ।ठब्क् एक चक्रीय चतुभुर्ज है जिसके विकणर् एक बिन्दु म् पर प्रतिच्छेद करते हैं। यदि ∠ क्ठब् त्र 70° और ∠ ठ।ब् त्र 30° होए तो ∠ ठब्क् ज्ञात कीजिए। पुनः यदि ।ठ त्र ठब् होए तो ∠ म्ब्क् ज्ञात कीजिए। 7ण् यदि एक चक्रीय चतुभुर्ज के विकणर् उसके शीषो± से जाने वाले वृत्त के व्यास हों, तो सि( कीजिए कि वह एक आयत है। 8ण् यदि एक समलंब की असमांतर भुजाएँ बराबर हों, तो सि( कीजिए कि वह चक्रीय है। 9ण् दो वृत्त दो बिन्दुओं ठ और ब् पर प्रतिच्छेद करते हैं। ठ से जाने वाले दो रेखाखंड ।ठक् और च्ठफ वृत्तों को ।ए क् और च्ए फ पर क्रमशः प्रतिच्छेद करते हुए खींचे गए हैं ;देख्िाए आवृफति 10.40द्ध। सि( कीजिए कि∠ ।ब्च् त्र ∠ फब्क् है। आवृफति 10ण्40 10ण् यदि किसी त्रिाभुज की दो भुजाओं को व्यास मानकर वृत्त खींचे जाएँ, तो सि( कीजिए किइन वृत्तों का प्रतिच्छेद बिन्दु तीसरी भुजा पर स्िथत है। 11ण् उभयनिष्ठ कणर् ।ब् वाले दो समकोण त्रिाभुज ।ठब् और ।क्ब् हैं। सि( कीजिए कि ∠ ब्।क् त्र ∠ ब्ठक् है। 12ण् सि( कीजिए कि चक्रीय समांतर चतुभुर्ज आयत होता है। प्रश्नावली 10ण्6 ;ऐच्िछकद्ध’ 1ण् सि( कीजिए कि दो प्रतिच्छेद करते हुए वृत्तों की केन्द्रों की रेखा दोनांे प्रतिच्छेद बिन्दुओं पर समान कोण अंतरित करती है। 2ण् एक वृत्त की 5 बउ तथा 11 बउ लम्बी दो जीवाएँ ।ठ और ब्क् समांतर हैं और केन्द्र की विपरीत दिशा में स्िथत हैं। यदि ।ठ और ब्क् के बीच की दूरी 6 बउ हो, तो वृत्त की त्रिाज्या ज्ञात कीजिए। 3ण् किसी वृत्त की दो समांतर जीवाओं की लम्बाइयाँ 6 बउ और 8 बउ हैं। यदि छोटी जीवा केन्द्र से 4 बउ की दूरी पर हो, तो दूसरी जीवा केन्द्र से कितनी दूर है? 4ण् मान लीजिए कि कोण ।ठब् का शीषर् एक वृत्त के बाहर स्िथत है और कोण की भुजाएँ वृत्त से बराबर जीवाएँ ।क् और ब्म् काटती हैं। सि( कीजिए कि ∠।ठब् जीवाओं ।ब् तथा क्म् द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोणों के अंतर का आध है। 5ण् सि( कीजिए कि किसी समचतुभुर्ज की किसी भुजा को व्यास मानकर खींचा गया वृत्त उसके विकणो± के प्रतिच्छेद बिन्दु से होकर जाता है। 6ण् ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है। ।ए ठ और ब् से जाने वाला वृत्त ब्क् ;यदि आवश्यक हो तो बढ़ाकरद्ध को म् पर प्रतिच्छेद करता है। सि( कीजिए कि ।म् त्र ।क् है। 7ण् ।ब् और ठक् एक वृत्त की जीवाएँ हैं जो परस्पर समद्विभाजित करती हैं। सि( कीजिए ;पद्ध ।ब् और ठक् व्यास हैं, ;पपद्ध ।ठब्क् एक आयत है। 8ण् एक त्रिाभुज ।ठब् के कोणों ।ए ठ और ब् के समद्विभाजक इसके परिवृत्त को क्रमशः1क्ए म् और थ् पर प्रतिच्छेद करते हैं। सि( कीजिए कि त्रिाभुज क्म्थ् के कोण 90° दृ 2।ए 90° दृ 1ठ तथा 90° दृ 1ब् हैं।22 9ण् दो सवा±गसम वृत्त परस्पर बिन्दुओं । और ठ पर प्रतिच्छेद करते हैं। । से होकर कोइर् रेखाखंड ’यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्िट से नहीं दी गइर् है। च्।फ इस प्रकार खींचा गया है कि च् और फ दोनों वृत्तों पर स्िथत हैं। सि( कीजिए कि ठच् त्र ठफ है। 10ण् किसी त्रिाभुज ।ठब् में, यदि ∠। का समद्विभाजक तथा ठब् का लम्ब समद्विभाजक प्रतिच्छेद करें, तो सि( कीजिए कि वे Δ ।ठब् के परिवृत्त पर प्रतिच्छेद करेंगे। 10ण्9 सारांश इस अध्याय मंे, आपने निम्न बिन्दुओं का अध्ययन किया है: 1ण् एक वृत्त किसी तल के उन सभी बिन्दुओं का समूह होता है, जो तल के एक स्िथर बिन्दु से समान दूरी पर हों। 2ण् एक वृत्त की ;या सवा±गसम वृत्तों कीद्ध बराबर जीवाएँ केन्द्र ;या संगत केन्द्रोंद्ध पर बराबर कोण अंतरित करती हैं। 3ण् यदि किसी वृत्त की ;या सवा±गसम वृत्तों कीद्ध दो जीवाएँ केन्द्र पर ;या संगत केन्द्रों परद्ध बराबर कोण अंतरित करें, तो जीवाएँ बराबर होती हैं। 4ण् किसी वृत्त के केन्द्र से किसी जीवा पर डाला गया लम्ब उसे समद्विभाजित करता है। 5ण् केन्द्र से होकर जाने वाली और किसी जीवा को समद्विभाजित करने वाली रेखा जीवा पर लम्ब होती है। 6ण् तीन असंरेखीय बिन्दुओं से जाने वाला एक और केवल एक वृत्त होता है। 7ण् एक वृत्त की ;या सवा±गसम वृत्तों कीद्ध बराबर जीवाएँ केन्द्र से ;या संगत केन्द्रों सेद्ध समान दूरी पर होती हैं। 8ण् एक वृत्त के केन्द्र ;या सवा±गसम वृत्तों के केन्द्रोंद्ध से समान दूरी पर स्िथत जीवाएं बराबर होती हैं। 9ण् यदि किसी वृत्त के दो चाप सवा±गसम हों, तो उनकी संगत जीवाएँ बराबर होती हैं और विलोमतःयदि किसी वृत्त की दो जीवाएँ बराबर हों, तो उनके संगत चाप ;लघु, दीघर्द्ध सवा±गसम होते हैं। 10ण् किसी वृत्त की सवा±गसम चाप केन्द्र पर बराबर कोण अंतरित करते हैं। 11ण् किसी चाप द्वारा केन्द्र पर अंतरित कोण उसके द्वारा वृत्त के शेष भाग के किसी बिन्दु पर अंतरित कोण का दुगुना होता है। 12ण् एक वृत्तखंड में बने कोण बराबर होते हैं। 13ण् अध्र्वृत्त का कोण समकोण होता है। 14ण् यदि दो बिन्दुओं को मिलाने वाला रेखाखंड उसको अंत£वष्ट करने वाली रेखा के एक ही ओरस्िथत दो अन्य बिन्दुओं पर समान कोण अंतरित करे, तो चारों बिन्दु एक वृत्त पर स्िथत होते हैं। 15ण् चक्रीय चतुभुर्ज के सम्मुख कोणों के प्रत्येक युग्म का योग 1800 होता है। 16ण् यदि किसी चतुभुर्ज के सम्मुख कोणों के किसी एक युग्म का योग 1800 हो, तो चतुभुर्ज चक्रीय होता है।

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