अध्याय 9 समांतर चतुभुर्जों और त्रिाभुजों के क्षेत्रापफल 9ण्1 भूमिका अध्याय 5 में, आप देख चुके हैं कि ज्यामिति के अध्ययन का उद्गम खेतों की परिसीमाओं को पुनःनि£मत करने और उन्हें उपयुक्त भागों में बाँटने की प्रिया में निहित भूमि मापनों के साथ हुआ। उदाहरणाथर्, एक किसान बुध्िया के पास एक त्रिाभुजाकार खेत था और वह उसको अपनी दो पुत्रिायों और एक पुत्रा को बराबर - बराबर बाँटना चाहती थी। उसने त्रिाभुजाकार खेत का क्षेत्रापफल परिकलित किए बिना, केवल एक भुजा को तीन बराबर भागों में बाँट लिया और इस भुजा को विभाजित करने वाले दोनों ¯बदुओं को सम्मुख शीषर् ¯बदु से मिला दिया। इस प्रकार, खेत तीन बराबर भागों में विभाजित हो गया और उसने अपने प्रत्येक बच्चे को एक - एक भाग दे दिया। क्या आप सोचते हैं कि इस प्रकार जो उसने तीन भाग प्राप्त किए थे वे वास्तव में क्षेत्रापफल में बराबर थे? इस प्रकार के प्रश्नों और अन्य संबंध्ित समस्याओंके उत्तर प्राप्त करने के लिए, यह आवश्यक है कि समतल आवृफतियों के क्षेत्रापफलों पर पुन£वचार किया जाए, जिन्हें आप पिछली कक्षाओं में पहले ही पढ़ चुके हैं। आपको याद होगा कि एक सरल बंद आवृफति ;ेपउचसम बसवेमक पिहनतमद्ध द्वारा तल का घेरा हुआ भाग उस आवृफति का संगत तलीय क्षेत्रा ;चसंदंत तमहपवदद्ध कहलाता है। इस तलीय क्षेत्रा का परिमाण ;उंहदपजनकमद्ध या माप ;उमंेनतमद्ध उस आवृफति का क्षेत्रापफल ;ंतमंद्ध कहलाता है। इस परिमाण या माप को सदैव एक संख्या ख्किसी मात्राक ;नदपजद्ध में , की सहायता से व्यक्त किया जाता है, जैसे 5 बउ2ए 8 उ2ए 3 हेक्टेयर, इत्यादि। अतः, हम कह सकते हैं आवृफति 9ण्1 कि किसी आवृफति का क्षेत्रापफल ;किसी मात्राक मेंद्ध एक संख्या है जो उस आवृफति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संब( ;जुड़ीद्ध होती है। हम पिछली कक्षाओं और अध्याय7 के अध्ययन द्वारा सवा±गसम आवृफतियों की अवधरणा से परिचित हैं। ‘दो आवृफतियाँ सवा±गसम कही जाती हैं, यदि उनके आकार और माप समान हों।’ दूसरे शब्दों में, यदि दो आवृफतियाँ । और ठ सवा±गसम हों ;देख्िाए आवृफति 9.1द्ध, तो आप एक अक्स कागश ;जतंबपदह चंचमतद्ध का प्रयोग करके, एक आवृफति को दूसरी आवृफति पर इस प्रकार रख सकते हैं कि एक आवृफति दूसरी को पूरा - पूरा ढक ले। अतः, यदि दो आवृफतियाँ । और ठ सवा±गसम हैं, तो उनके क्षेत्रापफल अवश्य ही बराबर ;समानद्ध होने चाहिए। परन्तु इस कथन का विलोम सत्य नहीं है । दूसरे शब्दों में, बराबर क्षेत्रापफलों वाली दो आवृफतियों का सवा±गसम होना आवश्यक नहीं है। उदाहरणाथर्, आवृफति9ण्2 में, आयतों।ठब्क् और म्थ्ळभ् के क्षेत्रापफल ;9 × 4 बउ2 और 6 × 6 बउ2द्ध बराबर हैं, परन्तु स्पष्टतः ये सवा±गसम नहीं हैं। ;क्योंद्ध? आवृफति 9ण्2 आइए अब नीचे दी आवृफति 9ण्3 को देखें: आवृफति 9ण्3 आप देख सकते हैं कि आवृफति ज् द्वारा नि£मत तलीय क्षेत्रा आवृफतियों च् औरफ द्वारा नि£मत दो तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है। आप सरलता से देख सकते हैं कि आवृफति ज् का क्षेत्रापफल त्र आवृफति च् का क्षेत्रापफल ़ आवृफति फ का क्षेत्रापफल आप आवृफति। के क्षेत्रापफल को ंत;।द्धए आवृफति ठ के क्षेत्रापफल को ंत;ठद्धए आवृफति ज् के क्षेत्रापफल को ंत;ज्द्धए इत्यादि से व्यक्त कर सकते हैं। अब आप कह सकते हैं कि किसी आवृफति का क्षेत्रापफल उस आवृफति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संब( ;किसी मात्राक मेंद्ध नीचे दिए दो गुणों के साथ एक संख्या है: ;1द्ध यदि । और ठ दो सवा±गसम आवृफतियाँ हैं, तो ंत ;।द्ध त्र ंत ;ठद्ध है तथा ;2द्ध यदि एक आवृफति ज् द्वारा नि£मत क्षेत्रा दो आवृफतियों च् औरफ द्वारा नि£मत अनातिव्यापी ;दवद.वअमतसंचचपदहद्ध तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है, तो ंत ;ज्द्ध त्र ंत ;च्द्ध ़ ंत ;फद्ध होगा। आप अपनी पिछली कक्षाओं से विभ्िान्न आवृफतियों, जैसे आयत, वगर्, समांतर चतुभुर्ज, त्रिाभुज, इत्यादि के क्षेत्रापफलों को ज्ञात करने वाले वुफछ सूत्रों के बारे में भी जानते हैं। इस अध्याय में, इन ज्यामितीय आवृफतियों के क्षेत्रापफलों के बीच संबंध् का उस प्रतिबंध् के अंतगर्त अध्ययन करके जब ये एक ही आधर पर स्िथत हों और एक ही समांतर रेखाओं के बीच में हों उपरोक्त सूत्रों के ज्ञान को अध्िक प्रबल बनाने का प्रयत्न किया जाएगा। यह अध्ययन त्रिाभुजों की समरूपता के वुफछ परिणामों को समझने में भी बहुत उपयोगी रहेगा। 9ण्2 एक ही आधर पर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच आवृफतियाँ नीचे दी हुइर् आवृफतियों को देख्िाए: आवृफति 9ण्4 आवृफति 9ण्4;पद्ध में, समलंब ।ठब्क् और समांतर चतुभुर्ज म्थ्ब्क् में एक भुजा क्ब् उभयनिष्ठ है। हम कहते हेैं कि समलंब ।ठब्क् और समांतर चतुभुर्ज म्थ्ब्क् एक ही आधर ;ेंउम इंेमद्ध क्ब् पर स्िथत हैं। इसी प्रकार, आवृफति 9ण्4 ;पपद्ध में, समांतर चतुभुर्ज च्फत्ै और डछत्ै एक ही आधर ैत् पर स्िथत हैंऋ आवृफति 9ण्4;पपपद्ध में, त्रिाभुज ।ठब् औरक्ठब् एक ही आधर ठब् पर स्िथत हैं तथा आवृफति 9ण्4;पअद्ध में, समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और त्रिाभुज च्क्ब् एक ही आधर क्ब् पर स्िथत हैं। अब नीचे दी गइर् आवृफतियों को देख्िाए: आवृफति 9ण्5 आवृफति 9ण्5;पद्ध में, स्पष्टतः समलंब ।ठब्क् और समांतर चतुभुर्ज म्थ्ब्क् एक ही आधर क्ब् पर स्िथत हैं। उपरोक्त के अतिरिक्त, ;समलंब ।ठब्क् केद्ध आधर क्ब् के सम्मुख शीषर् । और ठ तथा ;समांतर चतुभुर्ज म्थ्ब्क् केद्ध आधर क्ब् के सम्मुख शीषर् म् और थ्ए क्ब् के समांतर एक रेखा ।थ् पर स्िथत हैं। हम कहते हैं कि समलंब ।ठब्क् और समांतर चतुभुर्ज म्थ्ब्क् एक ही आधर क्ब् तथा एक ही समांतर रेखाओं ।थ् और क्ब् के बीच स्िथत हैं। इसी प्रकार, समांतर चतुभुर्ज च्फत्ै और डछत्ै एक ही आधर ैत् तथा एक ही समांतर रेखाओं च्छ और ैत् के बीच स्िथत हैं ख्देख्िाए आवृफति 9ण्5 ;पपद्ध,ए जिसमें च्फत्ै के शीषर् च् और फ तथा डछत्ै के शीषर् ड और छ आधर ैत् के समांतर रेखा च्छ पर स्िथत हैं। इसी प्रकार, त्रिाभुज ।ठब् और क्ठब् एक ही आधर ठब् और एक ही समांतर रेखाओं ।क् और ठब् के बीच स्िथत हैं ख्देख्िाए आवृफति 9ण्5 ;पपपद्ध, तथा समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और त्रिाभुज च्ब्क् एक ही आधर क्ब् और एक ही समांतर रेखाओं ।च् और क्ब् के बीच स्िथत हैं ख्देख्िाए आवृफति 9ण्5;पअद्ध,। इसीलिए, दो आवृफतियाँ एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत कही जाती हैं, यदि उनका एक उभयनिष्ठ आधर ;भुजाद्ध हो तथा उभयनिष्ठ आधर के सम्मुख प्रत्येक आवृफति के शीषर् ;या का शीषर्द्ध उस आधर के समांतर किसी रेखा पर स्िथत हों। उपरोक्त कथन को दृष्िटगत रखते हुए, आप यह नहीं कह सकते कि आवृफति 9ण्6 ;पद्ध के  च्फत् और  क्फत् एक ही समांतर रेखाओं स और फत् के बीच स्िथत हैं। इसी प्रकार, आप यह नहीं कह सकते कि आवृफति 9ण्6 ;पपद्ध के समांतर चतुभुर्ज म्थ्ळभ् और डछळभ् आवृफति 9ण्6 एक ही समांतर रेखाओं म्थ् और भ्ळ के बीच स्िथत हैं तथा यह कि आवृफति 9ण्6 ;पपपद्ध के समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और म्थ्ब्क् एक ही समांतर रेखाओं ।ठ और क्ब् के बीच स्िथत हैं ;यद्यपि इनमें एक उभयनिष्ठ आधर क्ब् है आवृफति 9ण्7 और ये समांतर रेखाओं ।क् औरठब् के बीच स्िथत हैंद्ध। अतः, यह स्पष्ट रूप से ध्यान रखना चाहिए कि दोनों समांतर रेखाओं में से एक उभयनिष्ठ आधर को अंत£वष्ट करने वाली रेखा होनी चाहिए। ध्यान दीजिए कि आवृफति 9ण्7;पद्ध के Δ।ठब् और Δक्ठम् उभयनिष्ठ आधर पर स्िथत नहीं हंै। इसी प्रकार, आवृफति 9ण्7;पपद्ध के Δ।ठब् और समांतर चतुभुर्ज च्फत्ै एक ही आधर पर स्िथत नहीं हंै। प्रश्नावली 9ण्1 1ण् निम्नलिख्िात आवृफतियों में से कौन - सी आवृफतियाँ एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत हैं? ऐसी स्िथति में, उभयनिष्ठ आधर और दोनों समांतर रेखाएँ लिख्िाए। आवृफति 9ण्8 9ण्3 एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच समांतर चतुभुर्ज आइए अब एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत दो समांतर चतुभुर्जों के क्षेत्रापफलों के मध्य एक संबंध्, यदि कोइर् है तो, ज्ञात करने का प्रयत्न करें। इसके लिए, आइए निम्नलिख्िात ियाकलाप करें: ियाकलाप 1 रू आइए एक आलेख ;हतंचीद्ध कागज लें और उस पर आवृफति 9ण्9 में दशार्ए अनुसार दो समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और च्फब्क् खींचें। आवृफति 9ण्9 उपरोक्त दोनों समांतर चतुभुर्ज एक ही आधर क्ब् और एक ही समांतर रेखाओं च्ठ और क्ब् के बीच स्िथत हैं। आपको याद होगा कि इन समांतर चतुभुर्जों का क्षेत्रापफल वगो± को गिनकर किस प्रकार ज्ञात किया जा सकता है। इस विध्ि में, दी हुइर् आवृफति द्वारा घेरे गए पूणर् वगो± की संख्या, उन वगो± की संख्या जिसका आध्े से अध्िक भाग इस आवृफति से घ्िारा हुआ है तथा उन वगो± की संख्या जिनका आध भाग इस आवृफति से घ्िारा हुआ है गिनकर इस दी हुइर् आवृफति का क्षेत्रापफल ज्ञात किया जा सकता है। उन वगो± को छोड़ दिया जाता है जिनका आध्े से कम भाग इस आवृफति से घ्िारा हुआ है। आप पाएँगे कि इन दोनों समांतर चतुभुर्जों का क्षेत्रापफल लगभग 15 वगर् मात्राक है। आलेख कागश पर वुफछ और समांतर चतुभुर्ज खींचकर इस ियाकलाप’ को दोहराइए। आप क्या देखते हैं? क्या दोनों समांतर चतुभुर्जों के क्षेत्रापफल भ्िान्न - भ्िान्न हैं या बराबर हैं? वास्तव में, ये बराबर हैं। इसलिए, इससे आप इस निष्कषर् पर पहुँच सकते हैं कि एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने समांतर चतुभुर्ज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। परन्तु, ध्यान रख्िाए यह केवल एक सत्यापन ही है। ियाकलाप 2 रू कागश की एक मोटी शीट या गत्ते पर एक समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् खींचिए। अब, एक रेखाखंड क्म् आवृफति 9ण्10 में दशार्ए अनुसार खींचिए। अब एक अलग शीट या गत्ते पर एक अक्स कागज की सहायता से त्रिाभुज ।′ क्′ म्′ त्रिाभुज आवृफति 9ण्10 ’इस ियाकलाप को एक जियोबोडर् ;हमवइवंतकद्ध का प्रयोग करके भी किया जा सकता है। ।क्म् के सवा±गसम खींचिए और शीट में से इसे काट लीजिए। अब  ।′क्′म्′ को इस प्रकार रख्िाए कि ।′क्′भुजाठब् के संपाती हो, जैसा कि आवृफति 9ण्11 में दशार्या गया है। ध्यान दीजिए कि यहाँ दो समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और म्म्′ब्क् हैं, जो एक ही आधर क्ब् और एक ही समांतर आवृफति 9ण्11 रेखाओं ।म्′ और क्ब् के बीच स्िथत हैं। इनके क्षेत्रापफलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं? चूंकि Δ।क्म् ≅Δ।′क्′म्′ अतः, ंत ;।क्म्द्ध त्र ंत ;।′क्′म्′द्ध साथ ही, ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;।क्म्द्ध ़ ंत ;म्ठब्क्द्ध त्र ंत ;।′क्′म्′द्ध ़ ंत ;म्ठब्क्द्ध त्र ंत ;म्म्′ब्क्द्ध अतः, दोनों समांतर चतुभुर्ज क्षेत्रापफल में बराबर हैं। आइए अब ऐसे दो समांतर चतुभुर्जों के बीच में इस संबंध् को सि( करने का प्रयत्न करें। प्रमेय 9ण्1 रू एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत समांतर चतुभुर्ज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। उपपिा रू दो समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और म्थ्ब्क् दिए हुए हैं, जो एक ही आधर क्ब् और एक ही समांतर रेखाओं ।थ् और क्ब् के बीच स्िथत हैं ;देख्िाए आवृफति 9ण्12द्ध। हमें ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;म्थ्ब्क्द्ध सि( करना है। आवृफति 9ण्12  ।क्म् और  ठब्थ् मेें,  क्।म् त्र  ब्ठथ् ;।क् द्यद्य ठब् और तियर्क रेखा ।थ् से संगत कोणद्ध ;1द्ध  ।म्क् त्र  ठथ्ब् ;म्क् द्यद्य थ्ब् और तियर्क रेखा ।थ् से संगत कोणद्ध ;2द्ध इसलिएए  ।क्म् त्र  ठब्थ् ;त्रिाभुज का कोण योग गुणद्ध ;3द्ध साथ ही, ।क् त्र ठब् ;समांतर चतुभुर्ज की सम्मुख भुजाएँद्ध ;4द्ध अतः,  ।क्म्  ठब्थ् ख्।ै। नियम तथा ;1द्धए ;3द्ध और ;4द्ध द्वारा, इसलिए, ंत ;।क्म्द्ध त्र ंत ;ठब्थ्द्ध ;सवा±गसम आवृफतियों के क्षेत्रापफल बराबर होते हैंद्ध ;5द्ध अब, ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;।क्म्द्ध ़ ंत ;म्क्ब्ठद्ध त्र ंत ;ठब्थ्द्ध ़ ंत ;म्क्ब्ठद्ध ख्;5द्ध से , त्र ंत ;म्थ्ब्क्द्ध अतः, समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और म्थ्ब्क् क्षेत्रापफल में बराबर हैं। ऽ आइए अब इस प्रमेय का उपयोग दशार्ने के लिए वुफछ उदाहरण लें: उदाहरण 1 रू आवृफति 9ण्13 में, ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है और म्थ्ब्क् एक आयत है। साथ ही, ।स्  क्ब् है। सि( कीजिए कि ;पद्धंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;म्थ्ब्क्द्ध ;पपद्धंत ;।ठब्क्द्ध त्र क्ब् × ।स् आवृफति 9ण्13 हल रू ;पद्ध चूँकि आयत एक समांतर चतुभुर्ज भी होता है, इसलिए ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;म्थ्ब्क्द्ध ;प्रमेय 9ण्1द्ध ;पपद्ध उपरोक्त परिणाम से, ंत ;।ठब्क्द्ध त्र क्ब् × थ्ब् ;आयत का क्षेत्रापफल त्र लम्बाइर् × चैड़ाइर् द्ध ;1द्ध चूँकि ।स्  क्ब् है, इसलिए ।थ्ब्स् एक आयत है। अतः, ।स् त्र थ्ब् ;2द्ध इसलिए, ंत ;।ठब्क्द्ध त्र क्ब् × ।स् ख्;1द्ध और ;2द्ध से, क्या आप उपरोक्त परिणाम ;पपद्ध से यह देख सकते हैं कि एक समांतर चतुभुर्ज का क्षेत्रापफल उसकी एक भुजा और संगत शीषर्लम्ब का गुणनपफल होता है? क्या आपको याद है कि समांतर चतुभुर्ज के क्षेत्रापफल के इस सूत्रा को आप कक्षा टप्प् में पढ़ चुके ह? इस सै ूफंत्रा वेआधर पर, प्रमेय 9ण्1 को इस रूप में लिखा जा सकता है: एक ही आधर या बराबर आधरों और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने समांतर चतुभुर्ज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। क्या आप उपरोक्त कथन का विलोम लिख सकते हैं? यह इस प्रकार है: एक ही आधर ;या बराबर आधरोंद्ध और बराबर क्षेत्रापफलों वाले समांतर चतुभुर्ज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत होते हैं। क्या यह विलोम सत्य है? समांतर चतुभुर्ज के क्षेत्रापफल के सूत्रा का प्रयोग करके, इस विलोम को सि( कीजिए। उदाहरण 2 रू यदि एक त्रिाभुज और एक समांतर चतुभुर्ज एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत हों, तो सि( कीजिए कि त्रिाभुज का क्षेत्रापफल समांतर चतुभुर्ज के क्षेत्रापफल का आध होता है। हलरू मान लीजिए  ।ठच् और समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् एक ही आधर ।ठ और एक ही समांतर रेखाओं ।ठ और च्ब् के बीच स्िथत हैं ;देख्िाए आवृफति 9ण्14द्ध। आप सि( करना चाहते हैं कि ंत ;च्।ठद्ध त्र 1 ंत ;।ठब्क्द्ध है। आवृफति 9ण्142 एक अन्य समांतर चतुभुर्ज ।ठफच् प्राप्त करने के लिए, ठफ द्यद्य ।च् खींचिए। अब समांतर चतुभुर्ज ।ठफच् और ।ठब्क् एक ही आधर ।ठ और एक ही समांतर रेखाओं ।ठ और च्ब् के बीच स्िथत हैं। अतः, ंत ;।ठफच्द्ध त्र ंत ;।ठब्क्द्ध ;प्रमेय 9ण्1 द्वाराद्ध ;1द्ध परन्तु  च्।ठ  ठफच् ;विकणर् च्ठ समांतर चतुभुर्ज।ठफच् को दो सवा±गसम त्रिाभुजों में बाँटता है द्ध अतः, ंत ;च्।ठद्ध त्र ंत ;ठफच्द्ध ;2द्ध इसलिए, ंत ;च्।ठद्ध त्र 1 2 ंत ;।ठफच्द्ध ख्;2द्ध से, ;3द्ध इससे प्राप्त होता है ंत ;च्।ठद्ध त्र 1 2 ंत ;।ठब्क्द्ध ख्;1द्ध और ;3द्ध से, प्रश्नावली 9ण्2 1ण् आवृफति 9ण्15 में, ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है, ।म्  क्ब् और ब्थ्  ।क् है। यदि ।ठ त्र 16 बउए ।म् त्र 8 बउ और ब्थ् त्र 10 बउ है, तो ।क् ज्ञात कीजिए। 2ण् यदि म्एथ्एळ और भ् क्रमशः समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् की भुजाओं के मध्य - बिन्दु हैं, तो दशार्इए कि 1ंत ;म्थ्ळभ्द्ध त्र 2 ंत ;।ठब्क्द्ध है। आवृफति 9ण्15 3ण् च् और फ क्रमशः समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् की भुजाओं क्ब् और ।क् पर स्िथत बिन्दु हैं। दशार्इए कि ंत ;।च्ठद्ध त्र ंत ;ठफब्द्ध है। 4ण् आवृफति 9ण्16 में, च् समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् के अभ्यंतर में स्िथत कोइर् बिन्दु है। दशार्इए कि 1;पद्ध ंत ;।च्ठद्ध ़ ंत ;च्ब्क्द्ध त्र ंत ;।ठब्क्द्ध ;पपद्ध ंत ;।च्क्द्ध ़ ंत ;च्ठब्द्ध त्र ंत ;।च्ठद्ध ़ ंत ;च्ब्क्द्ध 2 ख्संकेत रू च् से होकर ।ठ के समांतर एक रेखा खींचिए। , 5ण् आवृफति 9ण्17 में,च्फत्ै और ।ठत्ै समांतर चतुभुर्ज हैं तथा ग् भुजा ठत् पर स्िथत कोइर् बिन्दु है। दशार्इए कि ;पद्धंत ;च्फत्ैद्ध त्र ंत ;।ठत्ैद्ध ;पपद्धंत ;।ग् ैद्ध त्र ंत ;च्फत्ैद्ध 12 आवृफति 9ण्16 आवृफति 9ण्17 6ण् एक किसान के पास समांतर चतुभुर्ज च्फत्ै के रूप का एक खेत था। उसने त्ै पर स्िथत कोइर् बिन्दु । लिया और उसे च् और फ से मिला दिया। खेत कितने भागों में विभाजित हो गया है? इन भागों के आकार क्या हैं? वह किसान खेत में गेहूँ और दालें बराबर - बराबर भागों में अलग - अलग बोना चाहती है। वह ऐसा वैफसे करे? 9ण्4 एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत त्रिाभुज आइए आवृफति 9ण्18 को देखें। इसमें आप दो त्रिाभुज ।ठब् और च्ठब् ऐसे देखेंगे जो एक ही आधर ठब् और एक ही समांतर रेखाओं ठब् और ।च् के बीच स्िथत हैं। ऐसे त्रिाभुजों के क्षेत्रापफलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, आप एक आलेख कागज पर एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच आवृफति 9ण्18 त्रिाभुजों के कइर् युग्म बनाकर और वगो± को गिनकर उनके क्षेत्रापफलों को ज्ञात करने का ियाकलाप कर सकते हैं। प्रत्येक बार आप पाएँगे कि ऐसे दोनों त्रिाभुजों के क्षेत्रापफल ;लगभगद्ध बराबर हैं। इस ियाकलाप को एक जियोबोडर् लेकर भी किया जा सकता है।आप पुनः पाएँगे कि दोनो क्षेत्रापफल ;लगभगद्ध बराबर हैं। इस प्रश्न का एक तवर्फसंगत उत्तर प्राप्त करने के लिए, आप निम्न प्रकार आगे बढ़ सकते हैं: आवृफति 9ण्18 में, ब्क् द्यद्य ठ। और ब्त् द्यद्य ठच् इस प्रकार खींचिए कि क् और त् रेखा ।च् पर स्िथत हों ;देख्िाए आवृफति 9ण्19द्ध। इससे आप दो समांतर चतुभुर्ज च्ठब्त् और ।ठब्क् प्राप्त करते हैं, जो एक ही आधर ठब् और एक ही आवृफति 9ण्19 समांतर रेखाओं ठब् और ।त् के बीच स्िथत हैं। अतः, ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;च्ठब्त्द्ध ;क्यों?द्ध अब,  ।ठब्  ब्क्। और  च्ठब्  ब्त्च् ;क्यों?द्ध अतः, ंत ;।ठब्द्ध त्र 1 ंत ;।ठब्क्द्ध और ंत ;च्ठब्द्ध त्र 1 ंत ;च्ठब्त्द्ध ;क्यों?द्ध22 इसलिए, ंत ;।ठब्द्ध त्र ंत ;च्ठब्द्ध इस प्रकार, आप निम्न प्रमेय पर पहुँच गए हैं: प्रमेय 9ण्2 रू एक ही आधर ;या बराबर आधरों द्ध और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत त्रिाभुज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। अब, मान लीजिए ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है जिसका एक विकणर् ।ब् है ;देख्िाए आवृफति 9ण्20द्ध। आइए मान लें कि ।छ  क्ब् है। ध्यान दीजिए कि  ।क्ब्  ब्ठ। ;क्यों?द्ध अतः, ंत ;।क्ब्द्ध त्र ंत ;ब्ठ।द्ध ;क्यों?द्ध 1इसलिए, ंत ;।क्ब्द्ध त्र 2 ंत ;।ठब्क्द्ध त्र 1 2 ;क्ब् ।छद्ध  ;क्यों?द्ध आवृफति 9ण्20 1 अतः,  ।क्ब् का क्षेत्रापफल त्र 2 × आधर क्ब् × संगत शीषर्लम्ब ।छ दूसरे शब्दों में, किसी त्रिाभुज का क्षेत्रापफल उसके आधर ;एक भुजाद्ध और संगत शीषर्लम्ब ;या ऊँचाइर्द्ध के गुणनपफल के आध्े के बराबर होता है। क्या आपको याद है कि आप त्रिाभुज के क्षेत्रापफल के इस सूत्रा के बारे में कक्षा टप्प् में पढ़ चुके हैं? इस सूत्रा से, आप देख सकते हैं कि एक ही आधर ;या बराबर आधरों द्ध वाले और बराबर क्षेत्रापफलों वाले त्रिाभुज बराबर संगत शीषर्लम्बों वाले होंगे। बराबर संगत शीषर्लंब होने के लिए, त्रिाभुजों को एक ही समांतर भुजाओं के बीच स्िथत होना चाहिए। इससे आप प्रमेय 9ण्2 के निम्न विलोम पर पहुँच जाएँगे: प्रमेय 9ण्3 रू एक ही आधर ;या बराबर आधरों द्ध वाले और बराबर क्षेत्रापफलों वाले त्रिाभुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत होते हैं। आइए अब इन परिणामों का प्रयोग दशार्ने के लिए वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 3 रू दशार्इए कि त्रिाभुज की एक माियका उसे बराबर क्षेत्रापफलों वाले दो त्रिाभुजों में विभाजित करती है। हल रू मान लीजिए ।ठब् एक त्रिाभुज है और ।क् उसकी एक माियका है ;देख्िाए आवृफति9ण्21द्ध। अब, ंत;।ठक्द्ध त्र 1 × आधर × शीषर्लम्ब ;  ।ठक् काद्ध2आवृफति 9ण्21 आप यह दशार्ना चाहते हैं कि ंत ;।ठक्द्ध त्र ंत ;।ब्क्द्ध चूँकि त्रिाभुज के क्षेत्रापफल में शीषर्लम्ब समब( होता है, इसलिए आइए ।छ  ठब् खींचें। 1 त्र  ठक्।छ 2 1 त्र2  ब्क्।छ ;चूँकि ठक् त्र ब्क्द्ध 1 त्र2 × आधर × शीषर्लम्ब ;  ।ब्क् काद्ध त्र ंत;।ब्क्द्ध उदाहरण 4 रू आवृफति 9ण्22 में, ।ठब्क् एक चतुभुर्ज है और ठम् द्यद्य ।ब् इस प्रकार है कि ठम् बढ़ाइर् गइर्क्ब् को म् पर मिलती है। दशार्इए कि त्रिाभुज ।क्म् का क्षेत्रापफल चतुभुर्ज ।ठब्क् के क्षेत्रापफल के बराबर है। हल रू आवृफति को ध्यानपूवर्क देख्िाए। आवृफति 9ण्22  ठ।ब् और  म्।ब् एक ही आधर ।ब् और एक ही समांतर रेखाओं ।ब् और ठम् के बीच स्िथत हैं। अतः, ंत ;ठ।ब्द्ध त्र ंत ;म्।ब्द्ध ;प्रमेय 9ण्2 द्वाराद्ध इसलिए, ंत ;ठ।ब्द्ध ़ ंत ;।क्ब्द्ध त्र ंत ;म्।ब्द्ध ़ ंत ;।क्ब्द्ध ;एक ही क्षेत्रापफल दोनों पक्षों में जोड़ने परद्ध या ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;।क्म्द्ध प्रश्नावली 9ण्3 1ण् आवृफति 9ण्23 में,  ।ठब् की एक माियका ।क् पर स्िथत म् कोइर् बिन्दु है। दशार्इए कि ंत ;।ठम्द्ध त्र ंत ;।ब्म्द्ध है। 2ण् Δ ।ठब् में, म् माियका ।क् का मध्य - बिन्दु है। दशार्इए कि ंत ;ठम्क्द्ध त्र 1 ंत;।ठब्द्ध है।4 आवृफति 9ण्233ण् दशार्इए कि समांतर चतुभुर्ज के दोनों विकणर् उसे बराबर क्षेत्रापफलों वाले चार त्रिाभुजों में बाँटते हैं। 4ण् आवृफति 9ण्24 में, ।ठब् और ।ठक् एक ही आधर ।ठ पर बने दो त्रिाभुज हैं। यदि रेखाखंड ब्क् रेखाखंड ।ठ से बिन्दु व् पर समद्विभाजित होता है, तो दशार्इए कि ंत ;।ठब्द्ध त्र ंत ;।ठक्द्ध है। 5ण् क्ए म् औरथ् क्रमशः त्रिाभुज ।ठब् की भुजाओं ठब्ए ब्। और ।ठ के मध्य - बिन्दु हैं। दशार्इए कि ;पद्ध ठक्म्थ् एक समांतर चतुभुर्ज है ;पपद्ध ंत ;क्म्थ्द्ध त्र 4 ंत ;।ठब्द्ध ;पपपद्ध ंत ;ठक्म्थ्द्ध त्र ंत ;।ठब्द्ध6ण् आवृफति 9ण्25 में, चतुभुर्ज ।ठब्क् के विकणर् ।ब् और ठक् परस्पर बिन्दु व् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि व्ठ त्र व्क् है। यदि ।ठ त्र ब्क् है, तो दशार्इए कि 112;पद्ध ंत ;क्व्ब्द्ध त्र ंत ;।व्ठद्ध ;पपद्ध ंत ;क्ब्ठद्ध त्र ंत ;।ब्ठद्ध ;पपपद्ध क्। द्यद्य ब्ठ या ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है। आवृफति 9ण्25 ख्संकेतरू क् और ठ से ।ब् पर लम्ब खींचिए।, 7ण् बिन्दु क् और म् क्रमशः  ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ।ब् पर इस प्रकार स्िथत हैं कि ंत ;क्ठब्द्ध त्र ंत ;म्ठब्द्ध है। दशार्इए कि क्म् द्यद्य ठब् है। 8ण् ग्ल् त्रिाभुज ।ठब् की भुजा ठब् के समांतर एक रेखा है। यदि ठम् द्यद्य ।ब् और ब्थ् द्यद्य ।ठ रेखा ग्ल् से क्रमशः म् और थ् पर मिलती हैं, तो दशार्इए किः ंत ;।ठम्द्ध त्र ंत ;।ब्थ्द्ध 9ण् समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् की एक भुजा ।ठ को एक बिन्दु च् तक बढ़ाया गया है। । से होकर ब्च् के समांतर खींची गइर् रेखा बढ़ाइर् गइर् ब्ठ को फ पर मिलती है और पिफर समांतर चतुभुर्ज च्ठफत् को पूरा किया गया है ;देख्िाए आवृफति 9ण्26द्ध। दशार्इए कि ंत ;।ठब्क्द्ध त्र ंत ;च्ठफत्द्ध है। ख्संकेत रू ।ब् और च्फ को मिलाइए। अबंत ;।ब्फद्ध आवृफति 9ण्26 और ंत ;।च्फद्ध की तुलना कीजिए।, करते हैं। दशार्इए कि ंत ;।व्क्द्ध त्र ंत ;ठव्ब्द्ध है। 11ण् आवृफति 9ण्27 में, ।ठब्क्म् एक पंचभुज है। ठ से होकर ।ब् के समांतर खींची गइर् रेखा बढ़ाइर् गइर् क्ब् को थ् पर मिलती है। दशार्इए कि ;पद्धंत ;।ब्ठद्ध त्र ंत ;।ब्थ्द्ध ;पपद्धंत ;।म्क्थ्द्ध त्र ंत ;।ठब्क्म्द्ध आवृफति 9ण्27 12ण् गाँव के एक निवासी इतवारी के पास एक चतुभुर्जाकार भूखंड था। उस गाँव की ग्राम पंचायत ने उसके भूखंड के एक कोने से उसका वुफछ भाग लेने का निणर्य लिया ताकि वहाँ एक स्वास्थ्य केन्द्र का निमार्ण कराया जा सके। इतवारी इस प्रस्ताव को इस प्रतिबन्ध् के साथ स्वीकार कर लेता है कि उसे इस भाग के बदले उसी भूखंड के संलग्न एक भाग ऐसा दे दिया जाए कि उसका भूखंड त्रिाभुजाकार हो जाए। स्पष्ट कीजिए कि इस प्रस्ताव को किस प्रकार कायार्न्िवत किया जा सकता है। 13ण् ।ठब्क् एक समलंब है, जिसमें ।ठ द्यद्य क्ब् है।।ब् के समांतर एक रेखा ।ठ को ग् पर और ठब् को ल् पर प्रतिच्छेद करती है। सि( कीजिए कि ंत ;।क्ग्द्ध त्र ंत ;।ब्ल्द्ध है। ख्संकेतरू ब्ग् को मिलाइए।, 14ण् आवृफति 9ण्28 में, ।च् द्यद्य ठफ द्यद्य ब्त् है। सि( कीजिए कि ंत ;।फब्द्ध त्र ंत ;च्ठत्द्ध है। 15ण् चतुभुर्ज ।ठब्क् के विकणर् ।ब् और ठक् परस्पर बिन्दु व् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि आवृफति 9ण्28 ंत ;।व्क्द्ध त्र ंत ;ठव्ब्द्ध है। सि( कीजिए कि ।ठब्क् एक समलंब है। 16ण् आवृफति 9ण्29 में,ंत ;क्त्ब्द्ध त्र ंत ;क्च्ब्द्ध है और ंत ;ठक्च्द्ध त्र ंत ;।त्ब्द्ध है। दशार्इए कि दोनों चतुभुर्ज ।ठब्क् और क्ब्च्त् समलंब हैं। आवृफति 9ण्29 प्रश्नावली 9ण्4 ;ऐच्िछकद्ध’ 1ण् समांतर चतुभुर्ज ।ठब्क् और आयत ।ठम्थ् एक ही आधर पर स्िथत हैं और उनके क्षेत्रापफल बराबर हैं। दशार्इए कि समांतर चतुभुर्ज का परिमाप आयत के परिमाप से अध्िक है। 2ण् आवृफति 9ण्30 में, भुजा ठब् पर दो बिन्दु क् और म् इस प्रकार स्िथत हैं कि ठक् त्र क्म् त्र म्ब् है। दशार्इए कि ंत ;।ठक्द्ध त्र ंत ;।क्म्द्ध त्र ंत ;।म्ब्द्ध है। क्या आप अब उस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं, जो आपने इस अध्याय की ‘भूमिका’ में छोड़ दिया था कि फ्क्या बुध्िया का खेत वास्तव में बराबर क्षेत्रापफलों आवृफति 9ण्30 वाले तीन भागों में विभाजित हो गया हैय्? ख्टिप्पणीरू ध्यान दीजिए कि ठक् त्र क्म् त्र म्ब् लेने से Δ।ठब् तीन त्रिाभुजों ।ठक्ए ।क्म् और ।म्ब् में विभाजित हो जाता है जिनके क्षेत्रापफल बराबर हैं। इसी प्रकार, ठब् को द बराबर भागों में विभाजित करके और इस भुजा को विभाजित करने वाले बिन्दुओं को सम्मुख शीषर्। से मिला कर आप इस त्रिाभुज को बराबर क्षेत्रापफलों वाले द त्रिाभुजों में विभाजित कर सकते हैं। 3ण् आवृफति 9ण्31 में, ।ठब्क्ए क्ब्थ्म् और ।ठथ्म् समांतर चतुभुर्ज हैं। दशार्इए कि ंत ;।क्म्द्ध त्र ंत ;ठब्थ्द्ध है। 4ण् आवृफति 9ण्32 में, ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है और ठब् को एक बिन्दु फ तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि ।क् त्र ब्फ है। यदि ।फ भुजा क्ब् को च् पर प्रतिच्छेद करती है, तो दशार्इए कि ंत ;ठच्ब्द्ध त्र ंत ;क्च्फद्ध है। ख्संकेतरू ।ब् को मिलाइए।, ’यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्िट से नहीं दी गइर् है। आवृफति 9ण्31 आवृफति 9ण्32 5ण् आवृफति9ण्33 में, ।ठब् और ठक्म् दो समबाहु त्रिाभुज इस प्रकार हैं कि क् भुजा ठब् का मध्य - बिन्दु है। यदि।म् भुजा ठब् को थ् पर प्रतिच्छेद करती है, तो दशार्इए कि 1;पद्ध ंत ;ठक्म्द्ध त्र ंत ;।ठब्द्ध;पपद्ध ंत ;ठक्म्द्ध त्र ंत ;ठ।म्द्ध412;पपपद्ध ंत ;।ठब्द्ध त्र 2 ंत ;ठम्ब्द्ध ;पअद्ध ंत ;ठथ्म्द्ध त्र ंत ;।थ्क्द्ध ;अद्ध ंत ;ठथ्म्द्ध त्र 2 ंत ;थ्म्क्द्ध ;अपद्ध ंत ;थ्म्क्द्ध त्र ंत ;।थ्ब्द्ध1 8 आवृफति 9ण्33 ख्संकेतरू म्ब् और ।क् को मिलाइए। दशार्इए कि ठम् द्यद्य ।ब् और क्म् द्यद्य ।ठ है, इत्यादि।, 6ण् चतुभुर्ज।ठब्क् के विकणर् ।ब् और ठक् परस्पर बिन्दु च् पर प्रतिच्छेद करते हैं। दशार्इए कि ंत ;।च्ठद्ध × ंत ;ब्च्क्द्ध त्र ंत ;।च्क्द्ध × ंत ;ठच्ब्द्ध है। ख्संकेतरू। और ब् से ठक् पर लम्ब खींचिए।, 7ण् च् और फ क्रमशः त्रिाभुज ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ठब् के मध्य - बिन्दु हैं तथा त् रेखाखंड ।च् का मध्य - बिन्दु है। दशार्इए किः 1 3 ;पद्ध ंत ;च्त्फद्ध त्र ंत ;।त्ब्द्ध ;पपद्ध ंत ;त्फब्द्ध त्र ंत ;।ठब्द्ध2 8;पपपद्ध ंत ;च्ठफद्ध त्र ंत ;।त्ब्द्ध 8ण् आवृफति 9ण्34 मंे, ।ठब् एक समकोण त्रिाभुज है जिसका कोण । समकोण है। ठब्म्क्ए ।ब्थ्ळ और ।ठडछ क्रमशः भुजाओं ठब्ए ब्। और ।ठ पर बने वगर् हैं। रेखाखंड ।ग्  क्म् भुजा ठब् को बिन्दु ल् पर मिलता है। दशार्इए किः आवृफति 9ण्34 ;पद्ध  डठब्  ।ठक् ;पपद्ध ंत ;ठल्ग्क्द्ध त्र 2 ंत ;डठब्द्ध ;पपपद्ध ंत ;ठल्ग्क्द्ध त्र ंत ;।ठडछद्ध ;पअद्ध  थ्ब्ठ  ।ब्म् ;अद्ध ंत ;ब्ल्ग्म्द्ध त्र 2 ंत ;थ्ब्ठद्ध ;अपद्ध ंत ;ब्ल्ग्म्द्ध त्र ंत ;।ब्थ्ळद्ध ;अपपद्ध ंत ;ठब्म्क्द्ध त्र ंत ;।ठडछद्ध ़ ंत ;।ब्थ्ळद्ध टिप्पणीरू परिणाम ;अपपद्ध प्रसि( ;सुपरिचितद्ध पाइथागोरस प्रमेय है। इस प्रमेय की एक सरलतम उपपिा आप कक्षा ग् में पढें़गे। 9ण्5 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात बिन्दुओं का अध्ययन किया है: 1ण् एक आवृफति का क्षेत्रापफल उस आवृफति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संब( ;किसी मात्राक मेंद्ध एक संख्या होती है। 2ण् दो सवा±गसम आवृफतियों के क्षेत्रापफल बराबर होते हैं, परन्तु इसका विलोम आवश्यक रूप से सत्य नहीं है। 3ण् यदि एक आवृफति ज् द्वारा नि£मत कोइर् तलीय क्षेत्रा किन्हीं दो आवृफतियों च् और फ द्वारा नि£मत दो अनातिव्यापी तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है, तो ंत ;ज्द्ध त्र ंत ;च्द्ध ़ ंत ;फद्ध हैए जहाँ ंत ;ग्द्ध आवृफतिग् का क्षेत्रापफल व्यक्त करता है। 4ण् दो आवृफतियाँ एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत कही जाती हैं, यदि उनमें एक उभयनिष्ठ आधर ;एक भुजाद्ध हो तथा उभयनिष्ठ आधर के सम्मुख प्रत्येक आवृफति के शीषर् ;का शीषर्द्ध उस आधर के समांतर किसी रेखा पर स्िथत हों। 5ण् एक ही आधर ;या बराबर आधरोंद्ध वाले और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत समांतर चतुभुर्ज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। 6ण् समांतर चतुभुर्ज का क्षेत्रापफल उसके आधर और संगत शीषर्लम्ब का गुणनपफल होता है। 7ण् एक ही आधर ;या बराबर आधरोंद्ध वाले और बराबर क्षेत्रापफलों वाले समांतर चतुभुर्ज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत होते हैं। 8ण् यदि एक त्रिाभुज और एक समांतर चतुभुर्ज एक ही आधर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत हों, तो त्रिाभुज का क्षेत्रापफल समांतर चतुभुर्ज के क्षेत्रापफल का आध होता है। 9ण् एक ही आधर ;या बराबर आधरोंद्ध वाले और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत त्रिाभुज क्षेत्रापफल में बराबर होते हैं। 10ण् त्रिाभुज का क्षेत्रापफल उसके आधर और संगत शीषर्लम्ब के गुणनपफल का आध होता है। 11ण् एक ही आधर ;या बराबर आधरोंद्ध वाले और बराबर क्षेत्रापफलों वाले त्रिाभुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्िथत होते हैं। 12ण् त्रिाभुज की एक माियका उसे बराबर क्षेत्रापफलों वाले दो त्रिाभुजों में विभाजित करती है।

>Chapter-9>

अध्याय 9

समांतर चतुर्भुजों और त्रि
भुजों के क्षेत्रफल


9.1
भूमिका

अध्याय 5 में, आप देख चुके हैं कि ज्यामिति के अध्ययन का उद्गम खेतों की परिसीमाओं को पुन:निर्मित करने और उन्हें उपयुक्त भागों में बाँटने की प्रक्रिया में निहित भूमि मापनों के साथ हुआ। उदाहरणार्थ, एक किसान बुधिया के पास एक त्रिभुजाकार खेत था और वह उसको अपनी दो पुत्रियों और एक पुत्र को बराबर-बराबर बाँटना चाहती थी। उसने त्रिभुजाकार खेत का क्षेत्रफल परिकलित किए बिना, केवल एक भुजा को तीन बराबर भागों में बाँट लिया और इस भुजा को विभाजित करने वाले दोनों बिंदुओं को सम्मुख शीर्ष बिंदु से मिला दिया। इस प्रकार, खेत तीन बराबर भागों में विभाजित हो गया और उसने अपने प्रत्येक बच्चे को एक-एक भाग दे दिया। क्या आप सोचते हैं कि इस प्रकार जो उसने तीन भाग प्राप्त किए थे वे वास्तव में क्षेत्रफल में बराबर थे? इस प्रकार के प्रश्नों और अन्य संबंधित समस्याओं के उत्तर प्राप्त करने के लिए, यह आवश्यक है कि समतल आकृतियों के क्षेत्रफलों पर पुनर्विचार किया जाए, जिन्हें आप पिछली कक्षाओं में पहले ही पढ़ चुके हैं।

आपको याद होगा कि एक सरल बंद आकृति (simple closed figure) द्वारा तल का घेरा हुआ भाग उस आकृति का संगत तलीय क्षेत्र (planar region) कहलाता है। इस तलीय क्षेत्र का परिमाण (magnitude) या माप (measure) उस आकृति का क्षेत्रफल (area) कहलाता है। इस परिमाण या माप को सदैव एक संख्या [किसी मात्रक (unit) में ] की सहायता से व्यक्त किया जाता है, जैसे 5 cm2, 8 m2, 3 हेक्टेयर, इत्यादि। अत:, हम कह सकते हैं कि किसी आकृति का क्षेत्रफल (किसी मात्रक में) एक संख्या है जो उस आकृति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संबद्ध (जुड़ी) होती है।

आकृति 9.1

हम पिछली कक्षाओं और अध्याय 7 के अध्ययन द्वारा सर्वांगसम आकृतियों की अवधारणा से परिचित हैं। ‘दो आकृतियाँ सर्वांगसम कही जाती हैं, यदि उनके आकार और माप समान हों।’ दूसरे शब्दों में, यदि दो आकृतियाँ A और B सर्वांगसम हों (देखिए आकृति 9.1), तो आप एक अक्स काग(tracing paper) का प्रयोग करके, एक आकृति को दूसरी आकृति पर इस प्रकार रख सकते हैं कि एक आकृति दूसरी को पूरा-पूरा ढक ले। अत:, यदि दो आकृतियाँ A और B सर्वांगसम हैं, तो उनके क्षेत्रफल अवश्य ही बराबर (समान) होने चाहिए। परन्तु इस कथन का विलोम सत्य नहीं है । दूसरे शब्दों में, बराबर क्षेत्रफलों वाली दो आकृतियों का सर्वांगसम होना आवश्यक नहीं है। उदाहरणार्थ, आकृति 9.2 में, आयतों ABCD और EFGH के क्षेत्रफल (9 × 4 cm2 और 6 × 6 cm2) बराबर हैं, परन्तु स्पष्टत: ये सर्वांगसम नहीं हैं। (क्यों)?

आकृति 9.2

आइए अब नीचे दी आकृति 9.3 को देखें :


आकृति 9.3

आप देख सकते हैं कि आकृति T द्वारा निर्मित तलीय क्षेत्र आकृतियों P और Q द्वारा निर्मित दो तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है। आप सरलता से देख सकते हैं कि

आकृति T का क्षेत्रफल = आकृति P का क्षेत्रफल + आकृति Q का क्षेत्रफल

आप आकृति A के क्षेत्रफल को ar(A), आकृति B के क्षेत्रफल को ar(B), आकृति T के क्षेत्रफल को ar(T), इत्यादि से व्यक्त कर सकते हैं। अब आप कह सकते हैं कि किसी आकृति का क्षेत्रफल उस आकृति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संबद्ध (किसी मात्रक में) नीचे दिए दो गुणों के साथ एक संख्या है :

(1) यदि A और B दो सर्वांगसम आकृतियाँ हैं, तो ar (A) = ar (B) है तथा

(2) यदि एक आकृति T द्वारा निर्मित क्षेत्र दो आकृतियों P और Q द्वारा निर्मित अनातिव्यापी (non-overlapping) तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है, तो ar (T) = ar (P) + ar (Q) होगा।

आप अपनी पिछली कक्षाओं से विभिन्न आकृतियों, जैसे आयत, वर्ग, समांतर चतुर्भुज, त्रिभुज, इत्यादि के क्षेत्रफलों को ज्ञात करने वाले कुछ सूत्रों के बारे में भी जानते हैं। इस अध्याय में, इन ज्यामितीय आकृतियों के क्षेत्रफलों के बीच संबंध का उस प्रतिबंध के अंतर्गत अध्ययन करके जब ये एक ही आधार पर स्थित हों और एक ही समांतर रेखाओं के बीच में हों उपरोक्त सूत्रों के ज्ञान को अधिक प्रबल बनाने का प्रयत्न किया जाएगा। यह अध्ययन त्रिभुजों की समरूपता के कुछ परिणामों को समझने में भी बहुत उपयोगी रहेगा।


9.2
एक ही आधार पर और एक ही समांतर रेखाओं के बीच आकृतियाँ

नीचे दी हुई आकृतियों को देखिए :


आकृति 9.4

आकृति 9.4(i) में, समलंब ABCD और समांतर चतुर्भुज EFCD में एक भुजा DC उभयनिष्ठ है। हम कहते हेैं कि समलं ABCD और समांतर चतुर्भुज EFCD एक ही आधार (same base) DC पर स्थित हैं। इसी प्रकार, आकृति 9.4 (ii) में, समांतर चतुर्भुज PQRS और MNRS एक ही आधार SR पर स्थित हैं; आकृति 9.4(iii) में, त्रिभुज ABC और DBC एक ही आधार BC पर स्थित हैं तथा आकृति 9.4(iv) में, समांतर चतुर्भुज ABCD और त्रिभुज PDC एक ही आधार DC पर स्थित हैं।

अब नीचे दी गई आकृतियों को देखिए :

आकृति 9.5

आकृति 9.5(i) में, स्पष्टत: समलंब ABCD और समांतर चतुर्भुज EFCD क ही आधार DC पर स्थित हैं। उपरोक्त के अतिरिक्त, (समलंब ABCD के) आधार DC के सम्मुख शीर्ष A और B तथा (समांतर चतुर्भुज EFCD के) आधार DC के सम्मुख शीर्ष E और F, DC के समांतर एक रेखा AF पर स्थित हैं। हम कहते हैं कि समलंब ABCD और समांतर चतुर्भुज EFCD एक ही आधार DC तथा एक ही समांतर रेखाओं AF और DC के बीच स्थित हैं। इसी प्रकार, समांतर चतुर्भुज PQRS और MNRS एक ही आधार SR तथा एक ही समांतर रेखाओं PN और SR के बीच स्थित हैं [देखिए आकृति 9.5 (ii)], जिसमें PQRS के शीर्ष P और Q तथा MNRS के शीर्ष M और N आधार SR के समांतर रेखा PN पर स्थित हैं। इसी प्रकार, त्रिभुज ABC DBC एक ही आधार BC और एक ही समांतर रेखाओं AD BC के बीच स्थित हैं [देखिए आकृति 9.5 (iii)] तथा समांतर चतुर्भुज ABCD और त्रिभुज PCD एक ही आधार DC और एक ही समांतर रेखाओं AP और DC के बीच स्थित हैं [देखिए आकृति 9.5(iv)]

इसीलिए, दो आकृतियाँ एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित कही जाती हैं, यदि उनका एक उभयनिष्ठ आधार (भुजा) हो तथा उभयनिष्ठ आधार के सम्मुख प्रत्येक आकृति के शीर्ष (या का शीर्ष) उस आधार के समांतर किसी रेखा पर स्थित हों।

उपरोक्त कथन को दृष्टिगत रखते हुए, आप यह नहीं कह सकते कि आकृति 9.6 (i) के PQR और DQR एक ही समांतर रेखाओं l और QR के बीच स्थित हैं। इसी प्रकार, आप यह नहीं कह सकते कि आकृति 9.6 (ii) के समांतर चतुर्भुज EFGH और MNGH एक ही समांतर रेखाओं EF और HG के बीच स्थित हैं तथा यह कि आकृति 9.6 (iii) के समांतर चतुर्भुज ABCD औरEFCD एक ही समांतर रेखाओं AB  DC के बीच स्थित हैं (यद्यपि इनमें एक उभयनिष्ठ आधार DC है और ये समांतर रेखाओं AD और BC के बीच स्थित हैं)। अत:, यह स्पष्ट रूप से ध्यान रखना चाहिए कि दोनों समांतर रेखाओं में से एक उभयनिष्ठ आधार को अंतर्विष्ट करने वाली रेखा होनी चाहिए। ध्यान दीजिए कि आकृति 9.7(i) के ABCऔर DBE उभयनिष्ठ आधार पर स्थित नहीं हैं। इसी प्रकार, आकृति 9.7(ii) के ABC और समांतर चतुर्भुज PQRS एक ही आधार पर स्थित नहीं हैं।

आकृति 9.6


आकृति 9.7


प्रश्नावली 9.1

1. निम्नलिखित आकृतियों में से कौन-सी आकृतियाँ एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित हैं? एेसी स्थिति में, उभयनिष्ठ आधार और दोनों समांतर रेखाएँ लिखिए।

आकृति 9.8


9.3
एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच समांतर चतुर्भुज

आइए अब एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित दो समांतर चतुर्भुजों के क्षेत्रफलों के मध्य एक संबंध, यदि कोई है तो, ज्ञात करने का प्रयत्न करें। इसके लिए, आइए निम्नलिखित क्रियाकलाप करें :

क्रियाकलाप 1 : आइए एक आलेख (graph) कागज लें और उस पर आकृति 9.9 में दर्शाए अनुसार दो समांतर चतुर्भुज ABCD और PQCD खींचें।


आकृति 9.9

उपरोक्त दोनों समांतर चतुर्भुज एक ही आधार DC और एक ही समांतर रेखाओं PB और DC के बीच स्थित हैं। आपको याद होगा कि इन समांतर चतुर्भुजों का क्षेत्रफल वर्गों को गिनकर किस प्रकार ज्ञात किया जा सकता है।

इस विधि में, दी हुई आकृति द्वारा घेरे गए पूर्ण वर्गों की संख्या, उन वर्गों की संख्या जिसका आधे से अधिक भाग इस आकृति से घिरा हुआ है तथा उन वर्गों की संख्या जिनका आधा भाग इस आकृति से घिरा हुआ है गिनकर इस दी हुई आकृति का क्षेत्रफल ज्ञात किया जा सकता है। उन वर्गों को छोड़ दिया जाता है जिनका आधे से कम भाग इस आकृति से घिरा हुआ है। आप पाएँगे कि इन दोनों समांतर चतुर्भुजों का क्षेत्रफल लगभग 15 वर्ग मात्रक है। आलेख कागज़ पर कुछ और समांतर चतुर्भुज खींचकर इस क्रियाकलाप* को दोहराइए। आप क्या देखते हैं? क्या दोनों समांतर चतुर्भुजों के क्षेत्रफल भिन्न-भिन्न हैं या बराबर हैं? वास्तव में, ये बराबर हैं। इसलिए, इससे आप इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं कि एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने समांतर चतुर्भुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं। परन्तु, ध्यान रखिए यह केवल एक सत्यापन ही है।


*इस क्रियाकलाप को एक जियोबोर्ड (geoboard) का प्रयोग करके भी किया जा सकता है।


क्रियाकलाप 2 : कागज़ की एक मोटी शीट या गत्ते पर एक समांतर चतुर्भुज ABCD खींचिए। अब, एक रेखाखंड DE आकृति 9.10 में दर्शाए अनुसार खींचिए।


आकृति 9.10

अब एक अलग शीट या गत्ते पर एक अक्स कागज की सहायता से त्रिभुज A D E त्रिभुज ADE के सर्वांगसम खींचिए और शीट में से इसे काट लीजिए। अब ADE को इस प्रकार रखिए कि AD भुजा BC के संपाती हो, जैसा कि आकृति 9.11 में दर्शाया गया है। ध्यान दीजिए कि यहाँ दो समांतर चतुर्भुज ABCD और EECD हैं, जो एक ही आधार DC और एक ही समांतर रेखाओं AE और DC के बीच स्थित हैं। इनके क्षेत्रफलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं?


आकृति 9.11

चूंकि ADE ADE

अत:, ar (ADE) = ar (ADE)

साथ ही, ar (ABCD) = ar (ADE) + ar (EBCD)

= ar (ADE) + ar (EBCD)

= ar (EECD)

अत:, दोनों समांतर चतुर्भुज क्षेत्रफल में बराबर हैं।

आइए अब एेसे दो समांतर चतुर्भुजों के बीच में इस संबंध को सिद्ध करने का प्रयत्न करें।

प्रमेय 9.1 : एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित समांतर चतुर्भुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं।

उपपत्ति : दो समांतर चतुर्भुज ABCD और EFCD दिए हुए हैं, जो एक ही आधार DC और एक ही समांतर रेखाओं AF और DC के बीच स्थित हैं (देखिए आकृति 9.12)।


आकृति 9.12


हमें ar (ABCD) = ar (EFCD) सिद्ध करना है।

ADE और BCF मेें,

DAE = CBF (AD || BC और तिर्यक रेखा AF से संगत कोण) (1)

AED = BFC (ED || FC और तिर्यक रेखा AF से संगत कोण) (2)

इसलिए, ADE = BCF (त्रिभुज का कोण योग गुण) (3)

साथ ही, AD = BC (समांतर चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ) (4)

अत:, ADE BCF [ASA नियम तथा (1), (3) और (4) द्वारा]

इसलिए, ar (ADE) = ar (BCF) (सर्वांगसम आकृतियों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं) (5)

अब, ar (ABCD) = ar (ADE) + ar (EDCB)

= ar (BCF) + ar (EDCB) [(5) से ]

= ar (EFCD)

अत:, समांतर चतुर्भुज ABCD और EFCD क्षेत्रफल में बराबर हैं।

आइए अब इस प्रमेय का उपयोग दर्शाने के लिए कुछ उदाहरण लें :

उदाहरण 1 : आकृति 9.13 में, ABCD एक समांतर चतुर्भुज है और EFCD क आयत है।


आकृति 9.13

साथ ही, AL DC है। सिद्ध कीजिए कि

(i) ar (ABCD) = ar (EFCD)

(ii) ar (ABCD) = DC × AL

हल : (i) चूँकि आयत एक समांतर चतुर्भुज भी होता है, इसलिए

ar (ABCD) = ar (EFCD) (प्रमेय 9.1)

(ii) उपरोक्त परिणाम से,

ar (ABCD) = DC × FC (आयत का क्षेत्रफल = लम्बाई × चौड़ाई ) (1) चूँकि AL DC है, इसलिए AFCL एक आयत है।

अत:, AL = FC (2)

इसलिए, ar (ABCD) = DC × AL [(1) और (2) से]

क्या आप उपरोक्त परिणाम (ii) से यह देख सकते हैं कि एक समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल उसकी एक भुजा और संगत शीर्षलम्ब का गुणनफल होता है? क्या आपको याद है कि समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के इस सूत्र को आप कक्षा VII में पढ़ चुके हैं? इस सूत्र के आधार पर, प्रमेय 9.1 को इस रूप में लिखा जा सकता है : एक ही आधार या बराबर आधारों और एक ही समांतर रेखाओं के बीच बने समांतर चतुर्भुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं।

क्या आप उपरोक्त कथन का विलोम लिख सकते हैं? यह इस प्रकार है : एक ही आधार (या बराबर आधारों) और बराबर क्षेत्रफलों वाले समांतर चतुर्भुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित होते हैं। क्या यह विलोम सत्य है? समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल के सूत्र का प्रयोग करके, इस विलोम को सिद्ध कीजिए।

उदाहरण 2 : यदि एक त्रिभुज और एक समांतर चतुर्भुज एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित हों, तो सिद्ध कीजिए कि त्रिभुज का क्षेत्रफल समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल का आधा होता है।

हल : मान लीजिए ABP और समांतर चतुर्भुज ABCD एक ही आधार AB और एक ही समांतर रेखाओं AB और PC के बीच स्थित हैं (देखिए आकृति 9.14)।

आकृति 9.14

आप सिद्ध करना चाहते हैं कि ar (PAB) =  है।

एक अन्य समांतर चतुर्भुज ABQP प्राप्त करने के लिए, BQ || AP खींचिए। अब समांतर चतुर्भुज ABQP और ABCD एक ही आधार AB और एक ही समांतर रेखाओं AB और PC के बीच स्थित हैं।

अत:, ar (ABQP) = ar (ABCD) (प्रमेय 9.1 द्वारा) (1)

परन्तु PAB BQP (विकर्ण PB समांतर चतुर्भुज ABQP को दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बाँटता है )

अत:, ar (PAB) = ar (BQP) (2)

इसलिए, ar (PAB) = ar (ABQP) [(2) से] (3)

इससे प्राप्त होता है ar (PAB) = [(1) और (3) से]


प्रश्नावली
9.2

1. आकृति 9.15 में, ABCD एक समांतर चतुर्भुज है, AE DC और CF AD है। यदि AB = 16 cm, AE = 8 cm CF = 10 cm है, तो AD ज्ञात कीजिए।


आकृति 9.15

2. यदि E,F,G और H क्रमश: समांतर चतुर्भुज ABCD की भुजाओं के मध्य-बिन्दु हैं, तो दर्शाइए कि
ar (EFGH) =
है।

3. P और Q क्रमश: समांतर चतुर्भुज ABCD की भुजाओं DC और AD पर स्थित बिन्दु हैं। दर्शाइए कि ar (APB) = ar (BQC) है।

4. आकृति 9.16 में, P समांतर चतुर्भुज ABCD के अभ्यंतर में स्थित कोई बिन्दु है। दर्शाइए कि

आकृति 9.16

(i) ar (APB) + ar (PCD) =

(ii) ar (APD) + ar (PBC) = ar (APB) + ar (PCD)

[संकेत : P से होकर AB के समांतर एक रेखा खींचिए। ]

5. आकृति 9.17 में, PQRS और ABRS समांतर चतुर्भुज हैं तथा X भुजा BR पर स्थित कोई बिन्दु है। दर्शाइए कि

(i) ar (PQRS) = ar (ABRS)

(ii) ar (AX S) =


आकृति 9.17

6. एक किसान के पास समांतर चतुर्भुज PQRS के रूप का एक खेत था। उसने RS पर स्थित कोई बिन्दु A लिया और उसे P और Q से मिला दिया। खेत कितने भागों में विभाजित हो गया है? इन भागों के आकार क्या हैं? वह किसान खेत में गेहूँ और दालें बराबर-बराबर भागों में अलग-अलग बोना चाहती है। वह एेसा कैसे करे?

9.4 एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित त्रिभुज

आइए आकृति 9.18 को देखें। इसमें आप दो त्रिभुज ABC और PBC एेसे देखेंगे जो एक ही आधार BC और एक ही समांतर रेखाओं BC और AP के बीच स्थित हैं। एेसे त्रिभुजों के क्षेत्रफलों के बारे में आप क्या कह सकते हैं? इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, आप एक आलेख कागज पर एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच त्रिभुजों के कई युग्म बनाकर और वर्गों को गिनकर उनके क्षेत्रफलों को ज्ञात करने का क्रियाकलाप कर सकते हैं। प्रत्येक बार आप पाएँगे कि एेसे दोनों त्रिभुजों के क्षेत्रफल (लगभग) बराबर हैं। इस क्रियाकलाप को एक जियोबोर्ड लेकर भी किया जा सकता है। प पुन: पाएँगे कि दोनो क्षेत्रफल (लगभग) बराबर हैं।

स प्रश्न का एक तर्कसंगत उत्तर प्राप्त करने के लिए, आप निम्न प्रकार आगे बढ़ सकते हैं :

आकृति 9.18 में, CD || BA और CR || BP इस प्रकार खींचिए कि D और R रेखा AP पर स्थित हों (देखिए आकृति 9.19)।


आकृति 9.18


आकृति 9.19

इससे आप दो समांतर चतुर्भुज PBCR और ABCD प्राप्त करते हैं, जो एक ही आधार BC और एक ही समांतर रेखाओं BC और AR के बीच स्थित हैं।

अत:, ar (ABCD) = ar (PBCR) (क्यों?)

अब, ABC CDA और PBC CRP (क्यों?)

अत:, ar (ABC) = और ar (PBC) = (क्यों?)

इसलिए, ar (ABC) = ar (PBC)

इस प्रकार, आप निम्न प्रमेय पर पहुँच गए हैं :

प्रमेय 9.2 : एक ही आधार (या बराबर आधारों) और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित त्रिभुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं।

अब, मान लीजिए ABCD एक समांतर चतुर्भुज है जिसका एक विकर्ण AC है (देखिए आकृति 9.20)। आइए मान लें कि AN DC है। ध्यान दीजिए कि

आकृति 9.20

ADC CBA (क्यों?)

अत:, ar (ADC) = ar (CBA) (क्यों?)

इसलिए, ar (ADC) =

= (क्यों?)

अत:, ADC का क्षेत्रफल = × आधार DC × संगत शीर्षलम्ब AN

दूसरे शब्दों में, किसी त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार (एक भुजा) और संगत शीर्षलम्ब (या ऊँचाई) के गुणनफल के आधे के बराबर होता है। क्या आपको याद है कि आप त्रिभुज के क्षेत्रफल के इस सूत्र के बारे में कक्षा VII में पढ़ चुके हैं? इस सूत्र से, आप देख सकते हैं कि एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और बराबर क्षेत्रफलों वाले त्रिभुज बराबर संगत शीर्षलम्बों वाले होंगे।

बराबर संगत शीर्षलंब होने के लिए, त्रिभुजों को एक ही समांतर भुजाओं के बीच स्थित होना चाहिए। इससे आप प्रमेय 9.2 के निम्न विलोम पर पहुँच जाएँगे :

प्रमेय 9.3 : एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और बराबर क्षेत्रफलों वाले त्रिभुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित होते हैं।

आइए अब इन परिणामों का प्रयोग दर्शाने के लिए कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 3 : दर्शाइए कि त्रिभुज की एक माध्यिका उसे बराबर क्षेत्रफलों वाले दो त्रिभुजों में विभाजित करती है।

हल : मान लीजिए ABC एक त्रिभुज है और AD उसकी एक माध्यिका है (देखिए आकृति 9.21)


आकृति 9.21


आप यह दर्शाना चाहते हैं कि

ar (ABD) = ar (ACD)

चूँकि त्रिभुज के क्षेत्रफल में शीर्षलम्ब समबद्ध होता है, इसलिए आइए ANBC खींचें।

अब, ar(ABD) = × आधार × शीर्षलम्ब (ABD का)

=

= (चूँकि BD = CD)

= × आधार × शीर्षलम्ब (ACD का)

= ar(ACD)

उदाहरण 4 : आकृति 9.22 में, ABCD एक चतुर्भुज है और BE || AC इस प्रकार है कि BE बढ़ाई गई DC को E पर मिलती है। दर्शाइए कि त्रिभुज ADE का क्षेत्रफल चतुर्भुज ABCD के क्षेत्रफल के बराबर है।


आकृति 9.22


हल : आकृति को ध्यानपूर्वक देखिए।

BAC और EAC एक ही आधार AC और एक ही समांतर रेखाओं AC और BE के बीच स्थित हैं।

अत:, ar (BAC) = ar (EAC) (प्रमेय 9.2 द्वारा)

इसलिए, ar (BAC) + ar (ADC) = ar (EAC) + ar (ADC)

(एक ही क्षेत्रफल दोनों पक्षों में जोड़ने पर)

या ar (ABCD) = ar (ADE)

प्रश्नावली 9.3

1. आकृति 9.23 में, ABC की एक माध्यिका AD पर स्थित E कोई बिन्दु है। दर्शाइए कि ar (ABE) = ar (ACE) है।

आकृति 9.23

2. ABC में, E माध्यिका AD का मध्य-बिंदु है। दर्शाइए कि ar (BED) = है।

3. दर्शाइए कि समांतर चतुर्भुज के दोनों विकर्ण उसे बराबर क्षेत्रफलोें वाले चार त्रिभुजों में बाँटते हैं।

4. आकृति 9.24 में, ABC और ABD एक ही आधार AB पर बने दो त्रिभुज हैं। यदि रेखाखंड CD रेखाखंड AB से बिन्दु O पर समद्विभाजित होता है, तो दर्शाइए कि ar (ABC) = ar (ABD) है।


आकृति 9.24

5. D, E और F क्रमश: त्रिभुज ABC की भुजाओं BC, CA और AB के मध्य-बिन्दु हैं। दर्शाइए कि

(i) BDEF एक समांतर चतुर्भुज है (ii) ar (DEF) = ar (ABC)

(iii) ar (BDEF) = ar (ABC)

6. आकृति 9.25 में, चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु O पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि OB = OD है। यदि AB = CD है, तो दर्शाइए कि


आकृति 9.25

(i) ar (DOC) = ar (AOB)

(ii) ar (DCB) = ar (ACB)

(iii) DA || CB या ABCD एक समांतर चतुर्भुज है।

[संकेत : D और B से AC पर लम्ब खींचिए।]

7. बिन्दु D और E क्रमश: ABC की भुजाओं AB और AC पर इस प्रकार स्थित हैं कि ar (DBC) = ar (EBC) है। दर्शाइए कि DE || BC है।

8. XY त्रिभुज ABC की भुजा BC के समांतर एक रेखा है। यदि BE || AC और CF || AB रेखा XY से क्रमश: E और F पर मिलती हैं, तो दर्शाइए कि:

ar (ABE) = ar (ACF)

9. समांतर चतुर्भुज ABCD की एक भुजा AB को एक बिन्दु P तक बढ़ाया गया है। A से होकर CP के समांतर खींची गई रेखा बढ़ाई गई CB को Q पर मिलती है और फिर समांतर चतुर्भुज PBQR को पूरा किया गया है (देखिए आकृति 9.26) दर्शाइए कि ar (ABCD) = ar (PBQR) है।


आकृति 9.26


[संकेत : AC और PQ को मिलाइए। अब ar (ACQ) और ar (APQ) की तुलना कीजिए।]

10. एक समलं ABCD, जिसमें AB || DC है, के विकर्ण AC और BD परस्पर O पर प्रतिच्छेद करते हैं। दर्शाइए कि ar (AOD) = ar (BOC) है।

11. आकृति 9.27 में, ABCDE एक पंचभुज है। B से होकर AC के समांतर खींची गई रेखा बढ़ाई गई DC को F पर मिलती है। दर्शाइए कि


आकृति 9.27

(i) ar (ACB) = ar (ACF)

(ii) ar (AEDF) = ar (ABCDE)

12. गाँव के एक निवासी इतवारी के पास एक चतुर्भुजाकार भूखंड था। उस गाँव की ग्राम पंचायत ने उसके भूखंड के एक कोने से उसका कुछ भाग लेने का निर्णय लिया ताकि वहाँ एक स्वास्थ्य केन्द्र का निर्माण कराया जा सके। इतवारी इस प्रस्ताव को इस प्रतिबन्ध के साथ स्वीकार कर लेता है कि उसे इस भाग के बदले उसी भूखंड के संलग्न एक भाग एेसा दे दिया जाए कि उसका भूखंड त्रिभुजाकार हो जाए। स्पष्ट कीजिए कि इस प्रस्ताव को किस प्रकार कार्यान्वित किया जा सकता है।

13. ABCD एक समलंब है, जिसमें AB || DC है। AC के समांतर एक रेखा AB को X पर और BC को Y पर प्रतिच्छेद करती है। सिद्ध कीजिए कि ar (ADX) = ar (ACY) है।

[संकेत : CX को मिलाइए।]

14. आकृति 9.28 में, AP || BQ || CR है। सिद्ध कीजिए कि

ar (AQC) = ar (PBR) है।

आकृति 9.28

15. चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC और BD परस्पर बिन्दु O पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करते हैं कि ar (AOD) = ar (BOC) है। सिद्ध कीजिए कि ABCD एक समलंब है।

16. आकृति 9.29 में, ar (DRC) = ar (DPC) है और ar (BDP) = ar (ARC) है। दर्शाइए कि दोनों चतुर्भुज ABCD और DCPR समलंब हैं।


आकृति 9.29


प्रश्नावली 9.4 (एेच्छिक)*

1. मांतर चतुर्भुज ABCD और आयत ABEF एक ही आधार पर स्थित हैं और उनके क्षेत्रफल बराबर हैं। दर्शाइए कि समांतर चतुर्भुज का परिमाप आयत के परिमाप से अधिक है।

2. आकृति 9.30 में, भुजा BC पर दो बिन्दु D और E इस प्रकार स्थित हैं कि BD = DE = EC है। दर्शाइए कि ar (ABD) = ar (ADE) = ar (AEC) है।


आकृति 
9.30

क्या आप अब उस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं, जो आपने इस अध्याय की ‘भूमिका’ में छोड़ दिया था कि "क्या बुधिया का खेत वास्तव में बराबर क्षेत्रफलों वाले तीन भागों में विभाजित हो गया है"?

[टिप्पणी: ध्यान दीजिए कि BD = DE = EC लेने से ABC तीन त्रिभुजों ABD, ADE और AEC में विभाजित हो जाता है जिनके क्षेत्रफल बराबर हैं। इसी प्रकार, BC को n बराबर भागों में विभाजित करके और इस भुजा को विभाजित करने वाले बिन्दुओं को सम्मुख शीर्ष A से मिला कर आप इस त्रिभुज को बराबर क्षेत्रफलों वाले n त्रिभुजों में विभाजित कर सकते हैं।

3. आकृति 9.31 में, ABCD, DCFE और ABFE समांतर चतुर्भुज हैं। दर्शाइए कि ar (ADE) = ar (BCF) है।

4. आकृति 9.32 में, ABCD एक समांतर चतुर्भुज है और BC को एक बिन्दु Q तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि AD = CQ है। यदि AQ भुजा DC को P पर प्रतिच्छेद करती है, तो दर्शाइए कि ar (BPC) = ar (DPQ) है।

[संकेत : AC को मिलाइए]

*यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्टि से नहीं दी गई है।

 

आकृति 9.31


आकृति 9.32

5. आकृति 9.33 में, ABC और BDE दो समबाहु त्रिभुज इस प्रकार हैं कि भुजा BC का मध्य-बिन्दु है। यदि AE भुजा BC को F पर प्रतिच्छेद करती है, तो दर्शाइए कि


आकृति 9.33


(i) ar (BDE) =  1/4 ar (ABC)

(ii) ar (BDE) = ar (BAE)

(iii) ar (ABC) = 2 ar (BEC)

(iv) ar (BFE) = ar (AFD)

(v) ar (BFE) = 2 ar (FED)

(vi) ar (FED) =  ar (AFC)

[संकेत : EC और AD को मिलाइए। दर्शाइए कि BE || AC और DE || AB है, इत्यादि।]

6. चतुर्भुज ABCD के विकर्ण AC BD परस्पर बिन्दु P पर प्रतिच्छेद करते हैं। दर्शाइए कि ar (APB) × ar (CPD) = ar (APD) × ar (BPC) है।

[संकेत : A और C से BD पर लम्ब खींचिए।]

7. P और Q क्रमश: त्रिभुज ABC की भुजाओं AB और BC के मध्य-बिन्दु हैं तथा R रेखाखंड AP का मध्य-बिन्दु है। दर्शाइए कि:

(i) ar (PRQ) = ar (ARC) (ii) ar (RQC) =  ar (ABC)

(iii) ar (PBQ) = ar (ARC)

8. आकृति 9.34 में, ABC एक समकोण त्रिभुज है जिसका कोण A समकोण है। BCED, ACFG और ABMN क्रमश: भुजाओं BC, CA और AB पर बने वर्ग हैं। रेखाखंड AXDE भुजा BC को बिन्दु Y पर मिलता है। दर्शाइए कि:


आकृति 9.34

(i) MBC  ABD (ii) ar (BYXD) = 2 ar (MBC)

(iii) ar (BYXD) = ar (ABMN) (iv) FCB  ACE

(v) ar (CYXE) = 2 ar (FCB) (vi) ar (CYXE) = ar (ACFG)

(vii) ar (BCED) = ar (ABMN) + ar (ACFG)

टिप्पणी : परिणाम (vii) प्रसिद्ध (सुपरिचित) पाइथागोरस प्रमेय है। इस प्रमेय की एक सरलतम उपपत्ति आप कक्षा X में पढें़गे।

9.5 सारांश

इस अध्याय में, आपने निम्नलिखित बिन्दुओं का अध्ययन किया है :

1. एक आकृति का क्षेत्रफल उस आकृति द्वारा घेरे गए तल के भाग से संबद्ध (किसी मात्रक में) एक संख्या होती है।

2. दो सर्वांगसम आकृतियों के क्षेत्रफल बराबर होते हैं, परन्तु इसका विलोम आवश्यक रूप से सत्य नहीं है।

3. यदि एक आकृति T द्वारा निर्मित कोई तलीय क्षेत्र किन्हीं दो आकृतियों P और Q द्वारा निर्मित दो अनातिव्यापी तलीय क्षेत्रों से मिल कर बना है, तो ar (T) = ar (P) + ar (Q) है, जहाँ ar (X) कृति X का क्षेत्रफल व्यक्त करता है।

4. दो आकृतियाँ एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित कही जाती हैं, यदि उनमें एक उभयनिष्ठ आधार (एक भुजा) हो तथा उभयनिष्ठ आधार के सम्मुख प्रत्येक आकृति के शीर्ष (का शीर्ष) उस आधार के समांतर किसी रेखा पर स्थित हों।

5. एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित समांतर चतुर्भुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं।

6. समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल उसके आधार और संगत शीर्षलम्ब का गुणनफल होता है।

7. एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और बराबर क्षेत्रफलों वाले समांतर चतुर्भुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित होते हैं।

8. यदि एक त्रिभुज और एक समांतर चतुर्भुज एक ही आधार और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित हों, तो त्रिभुज का क्षेत्रफल समांतर चतुर्भुज के क्षेत्रफल का आधा होता है।

9. एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित त्रिभुज क्षेत्रफल में बराबर होते हैं।

10. त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार और संगत शीर्षलम्ब के गुणनफल का आधा होता है।

11. एक ही आधार (या बराबर आधारों) वाले और बराबर क्षेत्रफलों वाले त्रिभुज एक ही समांतर रेखाओं के बीच स्थित होते हैं।

12. त्रिभुज की एक माध्यिका उसे बराबर क्षेत्रफलों वाले दो त्रिभुजों में विभाजित करती है।

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