अध्याय 8 चतुभुर्ज 8ण्1 भूमिका आप अध्यायों 6 और 7 में त्रिाभुजों के अनेक गुणों के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। आपयह भी जानते हैं कि तीन असंरेख बिंदुओं को युग्मों में जोड़ने पर जो आकृति प्राप्त होती है, त्रिाभुज कहलाती है। अब, आइए चार बिंदु अंकित करें और देखें कि क्रमानुसार युग्मोंमें इनको जोड़ने पर क्या आकृति प्राप्त होती है। आकृति 8ण्1 ध्यान दीजिए कि यदि सभी बिंदु संरेख हों ;एक ही रेखा में होंद्ध, तो हमें एक रेखाखंड प्राप्त होता है ख् देख्िाए आकृति 8ण्1 ;पद्ध,। यदि चार बिंदुओं में से तीन संरेख हों, तो हमें एक त्रिाभुज प्राप्त होता है ख्देख्िाए आकृति 8ण्1 ;पपद्ध, और यदि चार में से कोइर् तीन बिंदु संरेख नहों, तो हमें चार भुजाओं वाली एक आकृति प्राप्त होती है ख् देख्िाए आकृति 8ण्1 ;पपपद्ध और ;पअद्ध,। चारों बिन्दुओं को एक क्रम में जोड़ने से इस प्रकार प्राप्त आकृति चतुभर्ुज ;ुनंकतपसंजमतंसद्ध कहलाती है। इस पुस्तक में हम केवल आकृति 8ण्1 ;पपपद्ध में दिए गए जैसे चतुभुर्जों का हीअध्ययन करेंगे और आकृति 8ण्1 ;पअद्ध में दिए गए जैसे चतुभर्ुजों का नहीं। एक चतुभर्ुज की चार भुजाएँ, चार कोण और चार शीषर् होते हैं ख् देख्िाएआकृति 8ण्2 ;पद्ध,। आकृति 8ण्2 चतुभर्ुज ।ठब्क् मेंए ।ठए ठब्ए ब्क् और क्। चार भुजाएँ हैंय ।ए ठए ब् और क् चार शीषर् हैं तथा ∠ ।ए ∠ ठए ∠ ब् और ∠ क् शीषो± पर बने चार कोण हैं। अब सम्मुख शीषो± । और ब् तथा ठ और क् को जोडि़ए ख्देख्िाए आकृति 8ण्2 ;पपद्ध,। ।ब् और ठक् चतुभर्ुज ।ठब्क् के दो विकणर् ;कपंहवदंसेद्ध कहलाते हैं। इस अध्याय में, हम विभ्िान्न प्रकार के चतुभुर्जों और उनके गुणों के बारे में अध्ययन करेंगे। विशेष तौर पर हम समांतर चतुभर्ुजों के बारे में पढ़ेंगे। आप सोच सकते हैं कि हम चतुभुर्जों ;या समांतर चतुभर्ुजोंद्ध का क्यों अध्ययन करें। अपने परिवेश में देख्िाए। आप अपने आस - पास चतुभुर्ज के आकार की अनेक वस्तुएँ देख सकते हैं, जैसे - आपकी कक्षा का पफशर्, दीवार, छत, ख्िाड़कियाँ, श्यामपट्ट, डस्टर ;कनेजमतद्ध का प्रत्येक पफलक, आपकी पुस्तक का प्रत्येक पृष्ठ, पढ़ने की मेज का ऊपरी पृष्ठ, इत्यादि।इनमें से वुफछ को नीचे दिखाया गया है ;देख्िाए आकृति 8ण्3द्ध। श्यामपट्ट पुस्तक मेज आकृति 8ण्3 यद्यपि हमारे आस - पास दिखने वाली अध्िकांश वस्तुएँ आयत के आकार की हैं, पिफर भी हम चतुभर्ुजों और विशेषकर समांतर चतुभुर्जों के बारे में और अध्िक अध्ययन करेंगे, क्योंकि एक आयत एक समांतर चतुभुर्ज ही है और समांतर चतुभर्ुज के सभी गुण आयत के लिए भी सत्य होते हैं। 8ण्2 चतुभुर्ज का कोण योग गुण अब, आइए एक चतुभर्ुज के कोण योग गुण का पुनविर्लोकन करें। चतुभर्ुज के कोणों का योग 3600 होता है। हम इसकी जाँच चतुभर्ुज का एक विकणर् खींच कर उसे दो त्रिाभुजों में विभाजित करके कर सकते हैं। मान लीजिए ।ठब्क् एक चतुभुर्ज है और ।ब् उसका आकृति 8ण्4 एक विकणर् है ;देख्िाए आकृति 8ण्4द्ध। Δ ।क्ब् के कोणों का क्या योग है? हम जानते हैं कि ∠ क्।ब् ़ ∠ ।ब्क् ़ ∠ क् त्र 180° ;1द्ध इसी प्रकार, Δ ।ठब् में, ∠ ब्।ठ ़ ∠ ।ब्ठ ़ ∠ ठ त्र 180° ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को जोड़ने पर, हमें प्राप्त होता है: ∠ क्।ब् ़ ∠ ।ब्क् ़ ∠ क् ़ ∠ ब्।ठ ़ ∠ ।ब्ठ ़ ∠ ठ त्र 180° ़ 180° त्र 360° साथ ही, ∠ क्।ब् ़ ∠ ब्।ठ त्र ∠ । और ∠ ।ब्क् ़ ∠ ।ब्ठ त्र ∠ ब् अतः, ∠ । ़ ∠ क् ़ ∠ ठ ़ ∠ ब् त्र 360° है। अथार्त् चतुभुर्ज के कोणों का योग 360° होता है। 8ण्3 चतुभर्ुज के प्रकार नीचे दिए गए विभ्िान्न चतुभर्ुजों को देख्िाए रू आकृति 8ण्5 ध्यान दीजिए कि रू ऽ आकृति 8ण्5 ;पद्ध में, चतुभर्ुज ।ठब्क् की सम्मुख भुजाओं।ठ और ब्क् का एक युग्म समांतर है। आप जानते हैं कि यह एक समलंब ;जतंचम्रपनउद्ध कहलाता है। ऽ आकृतियों 8ण्5 ;पपद्धए ;पपपद्ध ए ;पअद्ध और ;अद्ध में दिए सभी चतुभुर्जों में सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं। ये चतुभुर्ज समांतर चतुभुर्ज ; चंतंससमसवहतंउेद्ध कहलाते हैं। अतः, आकृति 8ण्5 ;पपद्ध का चतुभर्ुज च्फत्ै एक समांतर चतुभर्ुज है। इसी प्रकार, आकृतियों 8ण्5 ;पपपद्धए ;पअद्ध और ;अद्ध में दिए सभी चतुभर्ुज समांतर चतुभर्ुज हैं। ऽ ध्यान दीजिए कि आकृति 8ण्5 ;पपपद्ध के समांतर चतुभर्ुज डछत्ै में एक कोण ड समकोण है। यह विशेष समांतर चतुभुर्ज क्या कहलाता है? याद कीजिए, यह एक आयत ;तमबजंदहसमद्ध कहलाता है। ऽ आकृति 8ण्5 ;पअद्ध में दिए समांतर चतुभुर्ज क्म्थ्ळ की सभी भुजाएँ बराबर हैं और हम जानते हैं कि यह एक समचतुभर्ुज ;तीवउइनेद्ध कहलाता है। ऽ आकृति 8ण्5 ;अद्ध के समांतर चतुभर्ुज ।ठब्क् में, ∠ । त्र 90° और सभी भुजाएँ बराबर हैं। यह एक वगर् ;ेुनंतमद्ध कहलाता है। ऽ आकृति 8ण्5 ;अपद्ध के चतुभर्ुज ।ठब्क् में, ।क् त्र ब्क् और ।ठ त्र ब्ठ है, अथार्त् आसन्न भुजाओं के दो युग्म बराबर हैं। यह एक समांतर चतुभुर्ज नहीं है। यह एक पतंग ;ापजमद्ध कहलाता है। ध्यान दीजिए कि वगर्, आयत और समचतुभर्ुज में से प्रत्येक एक समांतर चतुभर्ुज होता है। ऽ एक वगर् एक आयत है और एक समचतुभर्ुज भी है। ऽ एक समांतर चतुभुर्ज एक समलंब है। ऽ पतंग एक समांतर चतुभर्ुज नहीं है। ऽ समलंब एक समांतर चतुभर्ुज नहीं है ;क्योंकि इसमें सम्मुख भुजाओं का एक युग्म ही समांतर है और समांतर चतुभुर्ज के लिए सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर होने चाहिएद्ध। ऽ एक आयत अथवा एक समचतुभर्ुज एक वगर् नहीं है। आकृति 8ण्6 को देख्िाए। इसमें समान परिमाप 14 बउ वाला एक आयत और एक समांतर चतुभर्ुज दिया है। आकृति 8ण्6 यहाँ समांतर चतुभर्ुज का क्षेत्रापफल क्च् × ।ठ है और यह आयत के क्षेत्रापफल ।ठ × ।क् से कम है, क्योंकि क्च् ढ ।क् है।सामान्यतः, मिठाइर् के दुकानदार ‘बरपफी’ को समांतर चतुभर्ुज के आकार में काटते हैं, ताकि एक ही ट्रे ;परातद्ध में बरपफी के अध्िक टुकड़े आ सवेंफ ;अगली बार जब आप बरपफी खाएँ, तो उसका आकार देख लेंद्ध। आइए अब पिछली कक्षाओं में पढ़े हुए समांतर चतुभुर्जों के वुफछ गुणों का पुनविर्लोकन करें। 8ण्4 समांतर चतुभर्ुज के गुण आइए एक ियाकलाप करें। कागज पर एक समांतर चतुभुर्ज खींच कर उसे काट लीजिए। अब इसे विकणर् के अनुदिश काट लीजिए ;देख्िाएआकृति 8ण्7द्ध। आप दो त्रिाभुज प्राप्त करते हैं। इन त्रिाभुजों के बारे में आप क्या कह सकते हैं? एक त्रिाभुज को दूसरे त्रिाभुज पर रख्िाए। यदि आवश्यक हो, तो त्रिाभुज को घुमाइए भी। आप क्या देखते हैं? देख्िाए कि दोनों त्रिाभुज परस्पर सवा±गसम हैं। आकृति 8ण्7 वुफछ और समांतर चतुभुर्ज खींच कर इस ियाकलाप को दोहराइए। प्रत्येक बार आप पाएँगे कि समांतर चतुभुर्ज का एक विकणर् उसे दो सवा±गसम त्रिाभुजों में विभाजित करता है। अब आइए इस परिणाम को सि( करें। प्रमेय 8ण्1 रू किसी समांतर चतुभर्ुज का एक विकणर् उसे दो सवा±गसम त्रिाभुजों में विभाजित करता है। उपपिारू मान लीजिए।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है और।ब् उसका एक विकणर् है ;देख्िाएआकृति 8ण्8द्ध। देख्िाए कि विकणर्।ब् समांतर चतुभर्ुज।ठब्क् को दो त्रिाभुजों।ठब् और ब्क्। में विभाजित करता है। हमें सि( करना है कि ये दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं। Δ ।ठब् और Δ ब्क्। के लिए ध्यान दीजिए कि ठब् द्यद्य ।क् है और ।ब् एक तियर्क रेखा है। इसलिए,∠ ठब्। त्र ∠ क्।ब् ;एकांतर कोणों का युग्मद्ध साथ ही, ।ठ द्यद्य क्ब् और ।ब् एक तियर्क रेखा है। इसलिए,∠ ठ।ब् त्र ∠ क्ब्। ;एकांतर कोणों का युग्मद्ध और ।ब् त्र ब्। ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δ ।ठब् ≅Δ ब्क्। ;।ै। नियमद्ध आकृति 8ण्8 अथार्त् विकणर् ।ब् समांतर चतुभर्ुज ।ठब्क् को दो सवा±गसम त्रिाभुजों ।ठब् और ब्क्। में विभाजित करता है। ऽ अब समांतर चतुभर्ुज ।ठब्क् की सम्मुख भुजाओं को मापिए। आप क्या देखते हैं? आप पाएँगे कि।ठ त्र क्ब् और ।क् त्र ठब् है। यह समांतर चतुभर्ुज का एक अन्य गुण है, जिसे नीचे दिया जा रहा है: प्रमेय 8ण्2 रू एक समांतर चतुभर्ुज में सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। आप पहले ही सि( कर चुके हैं कि समांतर चतुभर्ुज का विकणर् उसे दो सवा±गसम त्रिाभुजों में विभाजित करता है। अतः, आप इनके संगत भागों, मान लीजिए भुजाओं, के बारे में क्या कह सकते हैं? ये बराबर हैं। इसलिए, ।ठ त्र क्ब् और ।क् त्र ठब् है। अब इस परिणाम का विलोम क्या है? आप जानते हैं कि जो प्रमेय ;किसी कथनद्ध में दिया हो, तो उसके विलोम में उसे सि( करना होता है और जो प्रमेय में दिया गया है उसे विलोम में दिया हुआ माना जाता है। ध्यान दीजिए कि प्रमेय 8ण्2 को निम्न रूप में भी लिखा जा सकता है: यदि एक चतुभर्ुज एक समांतर चतुभर्ुज है, तो उसकी सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर होता है। इसलिए, इसका विलोम निम्न होगा: प्रमेय 8ण्3 रू यदि एक चतुभर्ुज की सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह एक समांतर चतुभर्ुज होता है। क्या आप इसके कारण दे सकते हैं? मान लीजिए चतुभर्ुज ।ठब्क् की भुजाएँ ।ठ और ब्क् बराबर हैं और साथ ही ।क् त्र ठब् है ;देख्िाए आकृति8ण्9द्ध।विकणर् ।ब् खींचिए। स्पष्टतः, Δ ।ठब् ≅ Δ ब्क्। ;क्यों?द्ध अतः, ∠ ठ।ब् त्र ∠ क्ब्। आकृति 8ण्9 और ∠ ठब्। त्र ∠ क्।ब् ;क्यों?द्ध क्या अब आप कह सकते हैं कि।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है? ;क्यों?द्ध आपने अभी देखा है कि एक समांतर चतुभर्ुज में सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर होता है और विलोमतः यदि किसी चतुभर्ुज मंे सम्मुख भुजाओं का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह एक समांतर चतुभर्ुज होता है। क्या हम यही परिणाम सम्मुख कोणों के युग्मों के बारे में भी निकाल सकते हैं? एक समांतर चतुभर्ुज खींचिए और उसके कोणों को मापिए। आप क्या देखते हैं? सम्मुख कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर है। इसे वुफछ और समांतर चतुभर्ुज लेकर दोहराइए। इससे हम एक अन्य परिणाम पर पहुँचते हैं, जो निम्न है: प्रमेय 8ण्4 रू एक समांतर चतुभर्ुज में सम्मुख कोण बराबर होते हैं। अब, क्या इस परिणाम का विलोम भी सत्य है? हाँ, ऐसा ही है। चतुभर्ुज के कोण योग गुण और तियर्क रेखा द्वारा प्रतिच्छेदित समांतर रेखाओं के गुणों का प्रयोग करके, हम देख सकते हैं कि उपरोक्त का विलोम भी सत्य है। इस प्रकार, हमें निम्न प्रमेय प्राप्त होती हैः प्रमेय 8ण्5 रू यदि एक चतुभर्ुज में सम्मुख कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर हो, तो वह एक समांतर चतुभर्ुज होता है। समांतर चतुभर्ुज का एक गुण और भी है। आइए इसका अध्ययन करें। एक समांतर चतुभर्ुज ।ठब्क् खींचिए और उसके दोनों विकणर्।ब् और ठक् खींचिए, जो परस्पर व् पर प्रतिच्छेद करते हैं ; देख्िाए आकृति 8ण्10द्ध। व्।ए व्ठए व्ब् और व्क् की लम्बाइयाँ मापिए। आप क्या देखते हैं? आप देखेंगे कि व्। त्र व्ब् और व्ठ त्र व्क् है। अथार्त् व् दोनों विकणो± का मध्य - बिंदु है। वुफछ और समांतर चतुभर्ुज लेकर इस ियाकलाप को दोहराइए। प्रत्येक बार, आप प्राप्त करेंगे कि व् दोनों विकणो± का मध्य - बिंदु है। इस प्रकार, हम निम्न प्रमेय प्राप्त करते हैं: प्रमेय 8ण्6 रू समांतर चतुभुर्ज के विकणर् एक दूसरे को ;परस्परद्ध समद्विभाजित करते हैं। अब, यदि एक चतुभर्ुज के विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करें, तो क्या होगा? क्या यह एक समांतर चतुभर्ुज होगा? वास्तव में, यह सत्य है। यह प्रमेय8ण्6 के परिणाम का विलोम है। इसे नीचे दिया जा रहा है: प्रमेय 8ण्7 रू यदि एक चतुभर्ुज के विकणर् एक दूसरे को समद्विभाजित करें, तो वह एक समांतर चतुभर्ुज होता है। आप इस परिणाम के लिए तवर्फ निम्न प्रकार दे सकते हैं: ध्यान दीजिए कि आकृति 8ण्11 में, यह दिया है कि व्। त्र व्ब् और व्ठ त्र व्क् है। अतः, Δ ।व्ठ ≅Δ ब्व्क् ;क्यों?द्ध इसलिए, ∠ ।ठव् त्र ∠ ब्क्व् ;क्यों?द्ध इससे हमें ।ठ द्यद्य ब्क् प्राप्त होता है। इसी प्रकार, ठब् द्यद्य ।क् है। अतः, ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है। आइए अब वुफछ उदाहरण लें। आकृति 8ण्11 उदाहरण 1 रू दशार्इए कि एक आयत का प्रत्येक कोण एक समकोण होता है। हल रू याद कीजिए कि एक आयत क्या होता है। एक आयत वह समांतर चतुभुर्ज होता है जिसका एक कोण समकोण हो। मान लीजिए ।ठब्क् एक आयत है, जिसमें∠ । त्र 90° है। हमें दशार्ना है कि ∠ ठ त्र ∠ ब् त्र ∠ क् त्र 90° है। आकृति 8ण्12 ।क् द्यद्य ठब् और ।ठ एक तियर्क रेखा है ;देख्िाए आकृति 8ण्12द्ध। इसलिए, ∠ । ़ ∠ ठ त्र 180° ;तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणद्ध परन्तु, ∠ । त्र90° है। इसलिए, ∠ ठ त्र180° दृ ∠ । त्र 180° दृ 90° त्र 90° अब ∠ ब् त्र ∠ । और ∠ क् त्र ∠ ठ ;समांतर चतुभर्ुज के सम्मुख कोणद्ध इसलिए, ∠ ब् त्र 90° और ∠ क् त्र 90° अतः, आयत का प्रत्येक कोण 900 है। उदाहरण 2 रू दशार्इए कि एक समचतुभर्ुज के विकणर् परस्पर लम्ब होते हैं। हल रू समचतुभर्ुज ।ठब्क् पर विचार कीजिए ; देख्िाएआकृति 8ण्13द्ध। आप जानते हैं कि ।ठ त्र ठब् त्र ब्क् त्र क्। ;क्यों?द्ध अब, Δ ।व्क् और Δ ब्व्क् में, व्। त्र व्ब् ;समांतर चतुभर्ुज के विकणर् परस्पर समद्विभाजित करते हैंद्ध व्क् त्र व्क् ;उभयनिष्ठद्ध ।क् त्र ब्क् ;दिया हैद्ध अतः, Δ ।व्क् ≅Δ ब्व्क् ;ैैै सवा±गसमता नियमद्ध इसलिए, ∠ ।व्क् त्र ∠ ब्व्क् ;ब्च्ब्ज्द्ध परन्तु, ∠ ।व्क् ़ ∠ ब्व्क् त्र 180° ;रैख्िाक युग्मद्ध इसलिए, 2∠ ।व्क् त्र 180° आकृति 8ण्13 या, ∠ ।व्क् त्र 90° अतः, समचतुर्भुज के विकणर् परस्पर लम्ब हैं। उदाहरण 3 रू ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है।।क् बहिष्कोण च्।ब् को समद्विभाजित करता है और ब्क् द्यद्य ठ। है ;देख्िाए आकृति 8ण्14द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध ∠ क्।ब् त्र ∠ ठब्। और ;पपद्ध ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है। हल रू ;पद्ध ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है।;दिया हैद्ध इसलिए, ∠ ।ठब् त्र∠ ।ब्ठ ;बराबर भुजाओं के सम्मुख कोणद्ध साथ ही, ∠ च्।ब् त्र ∠ ।ठब् ़ ∠ ।ब्ठ ;त्रिाभुज का बहिष्कोणद्ध या, ∠ च्।ब् त्र 2∠ ।ब्ठ ;1द्ध अब, ।क् कोण च्।ब् को समद्विभाजित करती है। इसलिए, ∠ च्।ब् त्र 2∠ क्।ब् ;2द्ध अतः, 2∠ क्।ब् त्र 2∠ ।ब्ठ ख्;1द्ध और ;2द्ध से, या, ∠ क्।ब् त्र ∠ ।ब्ठ ;पपद्ध अब ये दोनों बराबर कोण वे एकांतर कोण हैं जो रेखाखंडों ठब् और।क् को तियर्क रेखा ।ब् द्वारा प्रतिच्छेद करने से बनते हैं। इसलिए, ठब् द्यद्य ।क् साथ ही, ठ। द्यद्य ब्क् है। इस प्रकार, चतुभर्ुज।ठब्क् की सम्मुख भुजाओं के दोनों युग्म समांतर हैं। अतः, ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है। उदाहरण 4 रू दो समांतर रेखाओं स और उ को एक तियर्क रेखा च प्रतिच्छेद करती है ;देख्िाएआकृति 8ण्15द्ध। दशार्इए कि अंतः कोणों के समद्विभाजकों से बना चतुभर्ुज एक आयत है। हलरू यह दिया है किस द्यद्य उ है और तियर्क रेखा च इन्हें क्रमशः बिंदुओं । और ब् पर प्रतिच्छेद करती है। ∠ च्।ब् और ∠ ।ब्फ के समद्विभाजक ठ पर प्रतिच्छेद करते हैं और ∠ ।ब्त् और ∠ ै।ब् के समद्विभाजक क् पर प्रतिच्छेद करते हैं। हमें दशार्ना है कि चतुभर्ुज ।ठब्क् एक आयत है। अब, ∠ च्।ब् त्र ∠ ।ब्त् ;स द्यद्य उ और तियर्क रेखा च से बने एकांतर कोणद्ध इसलिए, 1 ∠ च्।ब् त्र 1 ∠ ।ब्त्22 अथार्त्, ∠ ठ।ब् त्र ∠ ।ब्क् ये बराबर कोण रेखाओं ।ठ और क्ब् के तियर्क रेखा ।ब् द्वारा प्रतिच्छेदित करने से बनते हैं और ये एकांतर कोण हैं। इसलिए, ।ठ द्यद्य क्ब् इसी प्रकार, ठब् द्यद्य ।क् ;∠ ।ब्ठ और ∠ ब्।क् लेने परद्ध अतः, ।ठब्क् एक समांतर चतुभुर्ज है। साथ ही, ∠ च्।ब् ़ ∠ ब्।ै त्र 180° ;रैख्िाक युग्मद्ध 11 1इसलिए, ∠ च्।ब् ़ ∠ ब्।ै त्र × 180° त्र 90°22 2या, ∠ ठ।ब् ़ ∠ ब्।क् त्र 90° या, ∠ ठ।क् त्र 90° इसलिए, ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है जिसका एक कोण समकोण है। अतः ।ठब्क् एक आयत है। उदाहरण 5 रू दशार्इए कि एक समांतर चतुभर्ुज के कोणों के समद्विभाजक एक आयत बनाते हैं। हल रू मान लीजिए च्ए फए त् और ै क्रमशः समांतर चतुभर्ुज ।ठब्क् के ∠ । और ∠ ठए ∠ ठ और∠ ब्ए ∠ ब् और ∠ क् तथा ∠ क् और ∠ । के समद्विभाजकों के प्रतिच्छेद बिंदु हैं ;देख्िाए आकृति 8ण्16द्ध। Δ ।ैक् में आप क्या देख सकते हैं? आकृति 8ण्16 चूँकि क्ै कोण क् को और।ै कोण । को समद्विभाजित करते हैं, इसलिए 11 ∠ क्।ै ़ ∠ ।क्ै त्र ∠ । ़ ∠ क्22 1 त्र ;∠ । ़ ∠ क्द्ध21 त्र × 180°2;∠ । और ∠ क् तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोण हैंद्ध त्र 90° साथ ही,∠ क्।ै ़ ∠ ।क्ै ़ ∠ क्ै। त्र 180° ;त्रिाभुज का कोण योग गुणद्ध या, 90° ़ ∠ क्ै। त्र 180° या, ∠ क्ै। त्र 90° अतः, ∠ च्ैत् त्र 90° ;∠ क्ै। का शीषार्भ्िामुख कोणद्ध इसी प्रकार, यह दशार्या जा सकता है कि ∠ ।च्ठ त्र 90° या ∠ ैच्फ त्र 90° ;जैसा कि ∠ क्ै। के लिए किया थाद्ध।इसी प्रकार, ∠ च्फत् त्र 90° और ∠ ैत्फ त्र 90° है। इसलिए, च्फत्ै एक ऐसा चतुभर्ुज है जिसके सभी कोण समकोण हैं। क्या हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि यह एक आयत है? आइए इसकी जाँच करें। हम दशार् चुके हैं कि∠ च्ैत् त्र ∠ च्फत् त्र 90° और ∠ ैच्फ त्र ∠ ैत्फ त्र 90° है, अथार्त् सम्मुख कोणों के दोनों युग्म बराबर हैं। अतः च्फत्ै एक समांतर चतुभुर्ज है, जिसमें एक कोण ;वास्तव में सभी कोणद्ध समकोण हैं। इसलिए, च्फत्ै एक आयत है। 8ण्5 चतुभर्ुज के समांतर चतुभर्ुज होने के लिए एक अन्य प्रतिबन्ध् इस अध्याय मंे, आपने समांतर चतुभर्ुजों के अनेक गुणों का अध्ययन किया है और आपने यह भी जाँच की है कि यदि एक चतुभर्ुज इन गुणों में से किसी एक गुण को भी संतुष्ट करे, तो वह एक समांतर चतुभर्ुज होता है। अब हम एक और प्रतिबन्ध् का अध्ययन करेंगे, जो एक चतुभर्ुज के समांतर चतुभर्ुज होने के लिए न्यूनतम प्रतिबन्ध् है। इसे एक प्रमेय के रूप में नीचे दिया जा रहा है: प्रमेय 8ण्8 रू कोइर् चतुभर्ुज एक समांतर चतुभर्ुज होता है, यदि उसकी सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर हो और समांतर हो। आकृति 8ण्17 को देख्िाए, जिसमें ।ठ त्र ब्क् और ।ठ द्यद्य ब्क् है। आइए एक विकणर् ।ब् खींचें। आप ै।ै सवा±गसमता नियम से दशार् सकते हैं कि Δ ।ठब् ≅ Δ ब्क्। है। इसलिए, ठब् द्यद्य ।क् है। ;क्यों?द्ध आइए अब समांतर चतुभुर्ज के इस गुण के प्रयोग के लिए, एक उदाहरण लें। उदाहरण 6 रू ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ुज है, जिसमें च् और फ क्रमशः सम्मुख भुजाओं।ठ और ब्क् के मध्य - बिंदु हैं ;देख्िाए आकृति 8ण्18द्ध। यदि ।फए क्च् कोै पर प्रतिच्छेद करे और ठफए ब्च् को त् पर प्रतिच्छेद करे, तो दशार्इए किः ;पद्ध ।च्ब्फ एक समांतर चतुभर्ुज है। ;पपद्ध क्च्ठफ एक समांतर चतुभर्ुज है। ;पपपद्ध च्ैफत् एक समांतर चतुभर्ुज है। हल रू ;पद्ध चतुभर्ुज ।च्ब्फ में, ।च्द्यद्य फब् ;चूँकि।ठ द्यद्य ब्क्द्ध ;1द्ध 11 ।च् त्र ।ठए ब्फ त्र ब्क् ;दिया हैद्ध22साथ ही, ।ठ त्र ब्क् ;क्यों?द्ध इसलिए, ।च् त्र फब् ;2द्ध अतः, ।च्ब्फ एक समांतर चतुभर्ुज है। ख् ;1द्ध और ;2द्ध तथा प्रमेय 8ण्8 से, ;पपद्ध इसी प्रकार, क्च्ठफ एक समांतर चतुभुर्ज है, क्योंकि क्फ द्यद्य च्ठ और क्फ त्र च्ठ है। ;पपपद्ध चतुभर्ुज च्ैफत् में, ैच् द्यद्य फत् ;ैच्ए क्च् का एक भाग है और फत्ए फठ का एक भाग हैद्ध इसी प्रकार, ैफ द्यद्य च्त् है। अतः, च्ैफत् एक समांतर चतुभर्ुज है। प्रश्नावली 8ण्1 1ण् एक चतुभर्ुज के कोण 3 रू 5 रू 9 रू 13के अनुपात में हैं। इस चतुभर्ुज के सभी कोण ज्ञात कीजिए। 2ण् यदि एक समांतर चतुभर्ुज के विकणर् बराबर हों, तो दशार्इए कि वह एक आयत है। 3ण् दशार्इए कि यदि एक चतुभर्ुज के विकणर् परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करें, तो वह एक समचतुभर्ुज होता है। 4ण् दशार्इए कि एक वगर् के विकणर् बराबर होते हैं और परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। 5ण् दशार्इए कि यदि एक चतुभर्ुज के विकणर् बराबर हों और परस्पर समद्विभाजित करें, तो वह एक वगर् होता है। 6ण् समांतर चतुभर्ुज।ठब्क् का विकणर् ।ब् कोण । को समद्विभाजित करता है ;देख्िाएआकृति8ण्19द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध यह ∠ ब् को भी समद्विभाजित करता है। ;पपद्ध ।ठब्क् एक समचतुभर्ुज है। आकृति 8ण्19 7ण् ।ठब्क् एक समचतुभर्ुज है। दशार्इए कि विकणर्।ब् कोणों ।और ब् दोनों को समद्विभाजित करता है तथा विकणर् ठक् कोणों ठ और क् दोनों को समद्विभाजित करता है। 8ण् ।ठब्क् एक आयत है जिसमें विकणर् ।ब् दोनों कोणों। और ब् को समद्विभाजित करता है। दशार्इए कि ;पद्ध ।ठब्क् एक वगर् है;पपद्ध विकणर्ठक् दोनों कोणों ठ औरक् को समद्विभाजित करता है 9ण् समांतर चतुभर्ुज।ठब्क् के विकणर्ठक् पर दो बिंदु च् और फ इस प्रकार स्िथत हैं कि क्च् त्र ठफ है ;देख्िाएआकृति8ण्20द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।च्क् ≅Δ ब्फठ ;पपद्ध ।च् त्र ब्फ ;पपपद्ध Δ ।फठ≅Δ ब्च्क् आकृति 8ण्20;पअद्ध ।फ त्र ब्च् ;अद्ध ।च्ब्फ एक समांतर चतुभर्ुज है। 10ण् ।ठब्क् एक समांतर चतुभर्ज है तथा।च् औरब्फ शीषो±। औरब् से विकणर्ठक् पर क्रमशः लम्ब हैं ;देख्िाएआकृति8ण्21द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।च्ठ ≅Δ ब्फक् ;पपद्ध ।च् त्र ब्फ आकृति 8ण्21 11ण् Δ ।ठब् औरΔक्म्थ् में, ।ठ त्र क्म्ए ।ठ द्यद्य क्म्ए ठब् त्र म्थ् औरठब् द्यद्य म्थ् है।शीषो± ।ए ठ औरब् को क्रमशः शीषो± क्ए म् और थ् से जोड़ा जाता है ;देख्िाए आकृति 8ण्22द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध चतुभर्ुज।ठम्क् एक समांतर चतुभर्ुज है। ;पपद्ध चतुभर्ुजठम्थ्ब् एक समांतर चतुभर्ुज है। आकृति 8ण्22 ;पपपद्ध ।क् द्यद्य ब्थ् और।क् त्र ब्थ् है। ;पअद्ध चतुभर्ुज।ब्थ्क्एक समांतर चतुभर्ुज है। ;अद्ध ।ब् त्र क्थ् है। ;अपद्ध Δ ।ठब् ≅Δ क्म्थ् है। 12ण् ।ठब्क् एक समलंब है, जिसमें ।ठ द्यद्य क्ब् और ।क् त्र ठब् है;देख्िाएआकृति8ण्23द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध ∠ । त्र ∠ ठ ;पपद्ध ∠ ब् त्र∠ क् ;पपपद्ध Δ ।ठब् ≅Δ ठ।क् ;पअद्ध विकणर् ।ब् त्र विकणर्ठक् है। आकृति 8ण्23 ख्संकेतरू ।ठ को बढ़ाइए और ब्से होकर क्। के समांतर एक रेखा खींचिए जो बढ़ी हुइर् भुजा ।ठ कोम् पर प्रतिच्छेद करे।, 8ण्6 मध्य - बिंदु प्रमेय आप एक त्रिाभुज और एक चतुभर्ुज के अनेक गुणों का अध्ययन कर चुके हैं। आइए त्रिाभुज के एक अन्य गुण का अध्ययन करें, जो एक त्रिाभुज की भुजाओं के मध्य - बिंदुओं से संबंध्ित है। इसके लिए, निम्नलिख्िात ियाकलाप कीजिए: एक त्रिाभुज ।ठब् खींचिए और उसकी दो भुजाओं ।ठ और।ब् के मध्य - ¯बदु म् और थ् अंकित कीजिए। म् और थ् को मिलाइए ;देख्िाए आकृति 8ण्24द्ध। म्थ् और ठब् को मापिए। साथ ही, ∠ ।म्थ् और ∠ ।ठब् को भी मापिए। आप क्या देखते हैं? आप पाएँगे कि 1म्थ् त्र 2 ठब् और ∠।म्थ् त्र ∠।ठब् है। अतः, म्थ् द्यद्य ठब् है। वुफछ अन्य त्रिाभुज लेकर, इस ियाकलाप को दोहराइए। आकृति 8ण्24 इस प्रकार, आप सरलता से निम्न प्रमेय पर पहुँच सकते हैंः प्रमेय 8ण्9 रू किसी त्रिाभुज की किन्ही दो भुजाओं के मध्य - बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड तीसरी भुजा के समांतर होता है। आप इस प्रमेय को निम्नलिख्िात संकेत की सहायता से सि( कर सकते हैं। आकृति 8ण्25 को देख्िाए, जिसमें म् और थ् क्रमशः Δ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ।ब् के मध्य - बिंदु हैं तथा ब्क् द्यद्य ठ। है। Δ।म्थ् ≅Δब्क्थ् ;।ै। नियमद्ध इसलिए, म्थ् त्र क्थ् और ठम् त्र ।म् त्र क्ब् ;क्यों?द्ध अतः, ठब्क्म् एक समांतर चतुभर्ुज है। ;क्यों?द्ध आकृति 8ण्25 इससे म्थ् द्यद्य ठब् प्राप्त होता है। ध्यान दीजिए कि म्थ् त्र 1 म्क्त्र 1ठब् है।22 क्या आप प्रमेय 8ण्9 का विलोम लिख सकते हैं? क्या यह विलोम सत्य है? आप देखेंगे कि ऊपर दिए गए प्रमेय का विलोम भी सत्य है। इसे नीचे दिया जा रहा है: रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है। आकृति 8ण्26 में देख्िाए कि भुजा।ठ का मध्य - बिंदु म् है और म् से होकर जाने वाली रेखा स भुजा ठब् के समांतर है। साथ ही, ब्ड द्यद्य ठ। है। Δ।म्थ् और Δब्क्थ् की सवा±गसमता का प्रयोग करके, ।थ् त्र ब्थ् सि( कीजिए। आकृति 8ण्26 उदाहरण 7 रू Δ।ठब् में,क्ए म् और थ् क्रमशः भुजाओं ।ठए ठब् और ब्। के मध्य - बिंदु हैं ;देख्िाए आकृति 8ण्27द्ध। दशार्इए कि बिन्दुओं क्ए म् और थ् को मिलाने पर Δ।ठब् चार सवा±गसम त्रिाभुजों में विभाजित हो जाता है। हल रू चूँकि क् और म् क्रमशः भुजाओं ।ठ और ठब् के आकृति 8ण्27 मध्य - बिंदु हैं, इसलिए प्रमेय 8.9 द्वारा क्म् द्यद्य ।ब् इसी प्रकार, क्थ् द्यद्य ठब् और म्थ् द्यद्य ।ठ है। इसलिए, ।क्म्थ्ए ठक्थ्म् और क्थ्ब्म् में से प्रत्येक एक समांतर चतुभर्ुज है। अब, क्म् समांतर चतुभुर्ज ठक्थ्म् का एक विकणर् है। इसलिए, Δठक्म् ≅Δथ्म्क् इसी प्रकार, Δक्।थ् ≅Δथ्म्क् और Δम्थ्ब् ≅Δथ्म्क् अतः, चारों त्रिाभुज सवा±गसम हैं। उदाहरण 8 रू सए उ और द तीन समांतर रेखाएँ हैं, जो तियर्क रेखाओं च और ु द्वारा इस प्रकार प्रतिच्छेदित हैं कि सए उ और द रेखाच पर समान अंतः खंड ।ठ और ठब् काटती हैं;देख्िाए आकृति 8ण्28द्ध।दशार्इए कि सए उ और द रेखा ु पर भी समान अंतः खंड क्म् और म्थ् काटती हैं। हलरू हमें।ठ त्र ठब् दिया है और हमें क्म् त्र म्थ् सि( करना है। आइए । को थ् से मिलाएँ और इससे ।थ् रेखा उ को आकृति8ण्28 ळ पर प्रतिच्छेद करती है। समलंब।ब्थ्क् दो त्रिाभुजों ।ब्थ्और।थ्क् में विभाजित हो जाता है। Δ ।ब्थ् में यह दिया है कि ठए भुजा ।ब् का मध्य - बिंदु है। ;।ठ त्र ठब्द्ध साथ ही, ठळ द्यद्य ब्थ् ; चूँकिउ द्यद्य द हैद्ध अतः, ळ भुजा।थ् का मध्य - बिंदु है। ;प्रमेय 8ण्10 द्वाराद्ध अब, Δ ।थ्क् में भी हम इसी तवर्फ का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि ळ भुजा ।थ् का मध्य - बिंदु है और ळम् द्यद्य ।क् है, इसलिए प्रमेय 8ण्10 से म् भुजा क्थ् का मध्य - बिंदु है। अथार्त् क्म् त्र म्थ् है। दूसरे शब्दों में, सए उ और द तियर्क रेखा ु पर भी बराबर अंतः खंड काटती हंै। प्रश्नावली 8ण्2 1ण् ।ठब्क् एक चतुभुर्ज है जिसमें च्ए फए त् औरै क्रमशः भुजाओं ।ठए ठब्ए ब्क् और क्। के मध्य - बिंदु हैं ;देख्िाए आवृफति 8ण्29द्ध।।ब् उसका एक विकणर् है। दशार्इए कि 1;पद्ध ैत् द्यद्य ।ब् और ैत् त्र 2 ।ब् है। ;पपद्ध च्फ त्र ैत् है। आकृति 8ण्29 ;पपपद्ध च्फत्ै एक समांतर चतुभर्ुज है। 2ण् ।ठब्क् एक समचतुभर्ुज हैऔर च्ए फए त् और ै क्रमशः भुजाओं ।ठए ठब्ए ब्क् और क्। के मध्य - बिंदु है। दशार्इए कि चतुभर्ुज च्फत्ै एक आयत है। 3ण् ।ठब्क् एक आयत है, जिसमें च्ए फए त् और ै क्रमशः भुजाओं ।ठए ठब्ए ब्क् और क्। के मध्य - बिंदु हैं।दशार्इए कि चतुभर्ुजच्फत्ै एक समचतुभर्ुज है। 4ण् ।ठब्क् एक समलंब है, जिसमें ।ठ द्यद्य क्ब् है। साथ ही, ठक्एक विकणर् हैऔरम् भुजा।क् का मध्य - बिंदु है।म् से होकर एक रेखा।ठ के समांतर खींची गइर् है, जो ठब् कोथ् पर प्रतिच्छेद करती है ;देख्िाएआकृति8ण्30द्ध। दशार्इए कि थ् भुजा ठब् का मध्य - बिंदु है। आकृति 8ण्30 5ण् एक समांतर चतुभर्ुज।ठब्क् में म् औरथ् क्रमशः भुजाओं ।ठ और ब्क् के मध्य - बिंदु हैं ;देख्िाएआकृति 8ण्31द्ध। दशार्इए कि रेखाखंड ।थ् और म्ब् विकणर् ठक् को समत्रिाभाजित करते हैं। आकृति 8ण्31 6ण् दशार्इए कि किसी चतुभर्ुज की सम्मुख भुजाओं के मध्य - बिंदुओं को मिलाने वाले रेखाखंड परस्पर समद्विभाजित करते हैं। 7ण् ।ठब् एक त्रिाभुज है जिसका कोण ब् समकोण है। कणर् ।ठ के मध्य - बिंदु ड से होकर ठब् के समांतर खींची गइर् रेखा ।ब् को क् पर प्रतिच्छेद करती है। दशार्इए कि ;पद्ध क् भुजा।ब् का मध्य - बिंदु है। ;पपद्ध डक् ⊥ ।ब्है। 1;पपपद्ध ब्ड त्र ड। त्र 2।ठ है। 8ण्7 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात बिंदुओं का अध्ययन किया है: 1ण् किसी चतुभर्ुज के कोणों का योग360° होता है। 2ण् समांतर चतुभर्ुज का एक विकणर् उसे दो सवा±गसम त्रिाभुजों में विभाजित करता है। 3ण् एक समांतर चतुभर्ुज में, ;पद्ध सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। ;पपद्ध सम्मुख कोण बराबर होते हैं। ;पपपद्ध विकणर् परस्पर समद्विभाजित करते हैं। 4ण् एक चतुभर्ुज समांतर चतुभर्ुज होता है, यदि ;पद्ध सम्मुख भुजाएँ बराबर होंऋ या ;पपद्ध सम्मुख कोण बराबर होंऋ या ;पपपद्ध विकणर् परस्पर समद्विभाजित करते होंऋ या ;पअद्ध सम्मुख भुजाओं का एक युग्म बराबर हो और समांतर हो। 5ण् आयत के विकणर् परस्पर समद्विभाजित करते हैं और बराबर होते हैं। इसका विलोम भी सत्य है। 6ण् समचतुभर्ुज के विकणर् परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं। इसका विलोम भी सत्य है। 7ण् वगर् के विकणर् परस्पर समकोण पर समद्विभाजित करते हैं और बराबर होते हैं। इसका विलोम भी सत्य है। 8ण् किसी त्रिाभुज की किन्हीं दो भुजाओं के मध्य - बिंदुओं को मिलाने वाला रेखाखंड तीसरी भुजा के समांतर होता है और उसका आध होता है। 9ण् किसी त्रिाभुज की एक भुजा के मध्य - बिंदु से दूसरी भुजा के समांतर खींची गइर् रेखा तीसरी भुजा को समद्विभाजित करती है। 10ण् किसी चतुभर्ुज की भुजाओं के मध्य - बिंदुओं को एक क्रम से मिलाने वाले रेखाखंडों द्वारा बना चतुभुर्ज एक समांतर चतुभुर्ज होता है।

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