अध्याय 7 त्रिाभुज 7ण्1 भूमिका आप पिछली कक्षाओं में, त्रिाभुजों और उनके विभ्िान्न गुणों के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। आप जानते हैं कि तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनाइर् गइर् एक बंद आवृफति ;बसवेमक पिहनतमद्ध एक त्रिाभुज ;जतपंदहसमद्ध कहलाती है ;‘त्रिा’ का अथर् है ‘तीन’द्ध। एक त्रिाभुज की तीन भुजाएँ, तीन कोण और तीन शीषर् होते हैं। उदाहरणाथर्, आवृफति 7ण्1 में दिए त्रिाभुज ।ठब्ए जिसे Δ ।ठब् से व्यक्त करते हैं, की तीन भुजाएँ ।ठए ठब् और ब्। हैं, ∠ ।ए ∠ ठ और∠ ब् इसके तीन कोण हैं तथा ।ए ठ और ब् इसके तीन शीषर् हैं। अध्याय 6 में, आप त्रिाभुजों के वुफछ गुणों का भी अध्ययन कर चुके हैं। इस अध्याय में, आप त्रिाभुजों की सवा±गसमता ;बवदहतनमदबमद्धए सवा±गसमता के नियमों, त्रिाभुजों के वुफछ अन्य गुणों और त्रिाभुजों में असमिकाओं ;पदमुनंसपजपमेद्ध के बारे में विस्तृत रूप से अध्ययन करंेगे। आप पिछली कक्षाओं के इन गुणों में से अध्िकतर गुणों की सत्यता की जाँच ियाकलापों द्वारा कर चुके हैं। यहाँ आवृफति 7ण्1हम इनमें से वुफछ गुणों को सि( भी करेंगे। 7ण्2 त्रिाभुजों की सवा±गसमता आपने यह अवश्य ही देखा होगा कि आपकी पफोटो की एक ही साइज की दो प्रतियाँ सवर्सम ;पकमदजपबंसद्ध होती हैं। इसी प्रकार, एक ही माप की दो चूडि़याँ और एक ही बैंक द्वारा जारी किए गए दो एटीएम ;।ज्डद्ध काडर् सवर्सम होते हैं। आपने देखा होगा कि यदि एक ही वषर् में ढले ;बनेद्ध दो एक रुपए के सिक्कों में से एक को दूसरे पर रखें, तो वे एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेते हैं। क्या आपको याद है कि ऐसी आवृफतियों को वैफसी आवृफतियाँ कहते हैं? निःसंदेह ये सवा±गसम आवृफतियाँ ;बवदहतनमदज पिहनतमेद्ध कहलाती हैं ;‘सवा±गसम’ का अथर् है ‘सभी प्रकार से बराबर’, अथार्त् वे आवृफतियाँ जिनके समान आकार और समान माप हैंद्ध। अब एक ही त्रिाज्या के दो वृत्त खींचिए और एक को दूसरे पर रख्िाए। आप क्या देखते हैं? ये एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेते हैं और हम इन्हें सवा±गसम वृत्त कहते हैं। इसी ियाकलाप की एक ही माप की भुजाओं वाले दो वगो± को खींच कर और पिफर एक वगर् को दूसरे वगर् पर रखकर ;देख्िाए आवृफति 7.2द्ध अथवा बराबर भुजाओं वाले दो समबाहु त्रिाभुजों को एक दूसरे पर रखकर, पुनरावृिा कीजिए। आप देखेंगे कि वगर् सवा±गसम हैं और समबाहु त्रिाभुज भी आवृफति 7ण्2 सवा±गसम हैं। आप सोच सकते हैं कि हम सवा±गसमता का अध्ययन क्यों कर रहे हैं। आपने अपने रेप्रफीजरेटर में बपर्फ की ट्रे ;पबम जतंलद्ध अवश्य ही देखी होगी। ध्यान दीजिए कि बपर्फ जमाने के लिए बने सभी खाँचे सवा±गसम हैं। ट्रे में ;खाँचों के लिए प्रयोग किए गए साँचों की गहराइयाँ भी सवा±गसम होती हैं ;ये सभी आयताकार या सभी वृत्ताकार या सभी त्रिाभुजाकार हो सकते हैंद्ध। अतः, जब भी सवर्सम ;एक जैसीद्ध वस्तुएँ बनानी होती हैं, तो साँचे बनाने के लिए सवा±गसमता की संकल्पना का प्रयोग किया जाता है। कभी - कभी आपको अपने पेन के रिपिफल ;तमपिससद्ध बदलने में भी कठिनाइर् हो सकती है, यदि नया रिपिफल आपके पेन के साइज का न हो। स्पष्टतः रिपिफल तभी पेन में लग पाएगा, जबकि पुरानी रिपिफल और नया रिपिफल सवा±गसम होंगे। इस प्रकार, आप दैनिक जीवन की स्िथतियों में ऐसे अनेक उदाहरण ज्ञात कर सकते हैं, जहाँ वस्तुओं की सवा±गसमता का उपयोग होता है। क्या आप सवा±गसम आवृफतियों के वुफछ और उदाहरण सोच सकते हैं? अब, निम्न में से कौन - कौन सी आवृफतियाँ आवृफति 7.3 ;पद्ध में दिए वगर् के सवा±गसम नहीं हैं? आवृफति 7ण्3 ;पपद्ध और आवृफति 7.3 ;पपपद्ध में दिए बड़े वगर् स्पष्टतः आवृफति 7ण्3 ;पद्ध के वगर् के सवा±गसम नहीं हैं। परन्तु आवृफति 7ण्3 ;पअद्ध में दिया हुआ वगर् आवृफति7ण्3 ;पद्ध में दिए वगर् के सवा±गसम है। आवृफति 7ण्3 आइए अब दो त्रिाभुजों की सवा±गसमता की चचार् करें। आप पहले से यह जानते हैं कि दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं, यदि एक त्रिाभुज की भुजाएँ और कोण दूसरे त्रिाभुज की संगत भुजाओं और कोणों के बराबर हों। अब, निम्न में से कौन - कौन से त्रिाभुज आवृफति 7ण्4 ;पद्ध में दिए त्रिाभुज।ठब् के सवा±गसम आवृफति 7ण्4 आवृफति 7ण्4 ;पपद्ध से आवृफति 7ण्4 ;अद्ध तक के प्रत्येक त्रिाभुज को काट कर उसे पलट कर Δ ।ठब् पर रखने का प्रयत्न कीजिए। देख्िाए कि आवृफतियों 7ण्4 ;पपद्धए ;पपपद्ध और ;पअद्ध में दिए त्रिाभुज Δ ।ठब् के सवा±गसम हैं, जबकि 7ण्4 ;अद्ध का Δ ज्ैन्ए Δ ।ठब् के सवा±गसम नहीं है। यदि Δ च्फत्ए Δ ।ठब् के सवा±गसम है, तो हम Δ च्फत् ≅Δ ।ठब् लिखते हैं। ध्यान दीजिए कि जब Δ च्फत् ≅ Δ ।ठब् हो, तो Δ च्फत् की भुजाएँ Δ ।ठब् की संगत बराबर भुजाओं पर पड़ेंगी और ऐसा ही कोणों के लिए भी होगा। अथार्त् भुजा च्फ भुजा ।ठ को ढकती है, भुजा फत् भुजा ठब् को ढकती है और भुजा त्च् भुजा ब्। को ढकती हैऋ कोणच् कोण । को ढकता है, कोण फ कोण ठ को ढकता है और कोण त् कोण ब् को ढकता है। साथ ही, दोनों त्रिाभुजों के शीषो± में एक - एक संगतता ;वदमवदम बवततमेचवदकमदबमद्ध है। अथार्त् शीषर् च् शीषर् । के संगत है, शीषर् फ शीषर् ठ के संगत है और शीषर् त् शीषर् ब् के संगत है। इसे निम्न रूप में लिखा जाता है: च् ↔ ।ए फ ↔ ठए त् ↔ ब् ध्यान दीजिए कि इस संगतता के अंतगर्त, Δ च्फत् ≅ Δ ।ठब् है। परन्तु इसे Δफत्च् ≅ Δ ।ठब् लिखना गलत होगा। इसी प्रकार, आवृफति 7ण्4 ;पपपद्ध के लिए, थ्क् ↔ ।ठए क्म् ↔ ठब् और म्थ् ↔ ब्। तथा थ् ↔ ।ए क् ↔ ठ और म् ↔ ब् है। इसलिए, Δ थ्क्म् ≅ Δ ।ठब् लिखना सही है, परन्तु Δ क्म्थ् ≅ Δ ।ठब् लिखना गलत होगा। आवृफति 7ण्4 ;पअद्ध के त्रिाभुज और Δ ।ठब् के बीच संगतता लिख्िाए। अतः, त्रिाभुजों की सवा±गसमता को सांकेतिक रूप में लिखने के लिए, उनके शीषो± की संगतता को सही प्रकार से लिखना आवश्यक है। ध्यान दीजिए कि सवा±गसम त्रिाभुजों में संगत भाग बराबर होते हैं और ‘सवा±गसम त्रिाभुजों के संगत भागों के लिए’ हम संक्षेप में ष्ब्च्ब्ज्ष् लिखते हैं। 7ण्3 त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए कसौटियाँ पिछली कक्षाओं में, आप त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए चार कसौटियाँ ;बतपजमतपंद्ध या नियम ;तनसमेद्ध पढ़ चुके हैं। आइए इनका पुन£वलोकन करें। एक भुजा 3 बउ लेकर दो त्रिाभुज खींचिए;देख्िाए आवृफति7ण्5द्ध। क्या ये त्रिाभुज सवा±गसम हैं? ध्यान दीजिए कि ये त्रिाभुज सवा±गसम नहीं हैं। आवृफति 7ण्5 अब दो त्रिाभुज खींचिए जिनमें एक भुजा 4 बउ है और एक कोण 50° है ;देख्िाए आवृफति7ण्6द्ध । क्या ये त्रिाभुज सवा±गसम हैं? आवृफति 7ण्6 देख्िाए कि ये दोनों त्रिाभुज सवा±गसम नहीं हैं। इस ियाकलाप को त्रिाभुजों के वुफछ और युग्म खींच कर दोहराइए। अतः, भुजाओं के एक युग्म की समता अथवा भुजाओं के एक युग्म और कोणों के एक युग्म की समता हमें सवा±गसम त्रिाभुज देने के लिए पयार्प्त नहीं है। उस स्िथति में क्या होगा जब बराबर कोणों की भुजाओं का अन्य युग्म भी बराबर हो जाए? आवृफति 7ण्7 में ठब् त्र फत्ए ∠ ठ त्र ∠ फ और साथ ही।ठ त्र च्फ है। अब आप Δ ।ठब् और Δ च्फत् की सवा±गसमता के बारे में क्या कह सकते हैं? पिछली कक्षाओं से याद कीजिए कि इस स्िथति में, दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। आप इसका सत्यापन, Δ।ठब् को काट कर और उसे Δच्फत् पर रख कर कर सकते हैं। इस ियाकलाप को त्रिाभुजों के अन्य युग्म लेकर दोहराइए। क्या आप देखते हैं कि दो भुजाओं और अंतगर्त कोण की समता त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए पयार्प्त है? हाँ, यह पयार्प्त है। आवृफति 7ण्7 यह त्रिाभुजों की सवा±गसमता की पहली कसौटी ;बतपजमतपवदद्ध है। अभ्िागृहीत 7ण्1 ;ै।ै सवा±गसमता नियमद्ध रू दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं, यदि एक त्रिाभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतगर्त कोण दूसरे त्रिाभुज की दो भुजाओं और उनके अंतगर्त कोण के बराबर हों। इस परिणाम को इससे पहले ज्ञात परिणामों की सहायता से सि( नहीं किया जा सकता है और इसीलिए इसे एक अभ्िागृहीत के रूप में सत्य मान लिया गया है ;देख्िाए परिश्िाष्ट 1द्ध। आइए अब वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 1 रू आवृफति 7ण्8 में व्। त्र व्ठ और व्क् त्र व्ब् है। दशार्इए कि ;पद्ध Δ।व्क् ≅Δ ठव्ब् और ;पपद्ध ।क् द्यद्य ठब् है। हल रू ;पद्ध Δ।व्क् और Δठव्ब् में, व्। त्र व्ठ व्क् त्र व्ब् ⎫⎪⎬⎪⎭ ;दिया हैद्ध आवृफति 7ण्8 साथ ही, क्योंकि ∠।व्क् और ∠ठव्ब् शीषार्भ्िामुख कोणों का एक युग्म है, अतः ∠।व्क् त्र ∠ठव्ब् इसलिए, Δ।व्क् ≅Δठव्ब् ;ै।ै सवा±गसमता नियम द्वाराद्ध ;पपद्ध सवा±गसम त्रिाभुजों ।व्क् और ठव्ब् में, अन्य संगत भाग भी बराबर होंगे। अतः, ∠ व्।क् त्र ∠ व्ठब् है। परन्तु ये रेखाखंडों ।क् और ठब् के लिए एकांतर कोणों का एक युग्म बनाते हैं। अतः, ।क् द्यद्य ठब् है। उदाहरण 2 रू ।ठ एक रेखाखंड है और रेखा स इसका लम्ब समद्विभाजक है। यदि स पर स्िथत च् कोइर् बिंदु है, तो दशार्इए कि च् बिंदुओं । और ठ से समदूरस्थ ;मुनपकपेजंदजद्ध है। हल रू स ⊥ ।ठ है और ।ठ के मध्य - बिंदु ब् से होकर जाती है ;देख्िाए आवृफति 7ण्9द्ध। आपको दशार्ना है कि च्। त्र च्ठ है। इसके लिए Δ च्ब्। और Δ च्ब्ठ पर विचार कीजिए। हमें प्राप्त है: ।ब् त्रठब् ;ब्ए ।ठ का मध्य - बिंदु हैद्ध ∠ च्ब्। त्र ∠ च्ब्ठ त्र 90° ;दिया हैद्ध च्ब् त्र च्ब् ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δ च्ब्। ≅Δ च्ब्ठ ;ै।ै नियमद्ध इसलिए, च्। त्र च्ठ ;सवा±गसम त्रिाभुजों की संगत भुजाएँद्ध आइए अब दो त्रिाभुजों की रचना करें जिनकी दो भुजाएँ 4 बउ कोण 50° है तथा साथ ही यह कोण बराबर भुजाओं के बीच अंतगर्त कोण नहीं है ;देख्िाए आवृफति 7ण्10द्ध। क्या ये त्रिाभुज सवा±गसम हैं? आवृफति 7ण्10 ध्यान दीजिए कि ये दोनों त्रिाभुज सवा±गसम नहीं हैं। त्रिाभुजों के वुफछ अन्य युग्म लेकर इस ियाकलाप को दोहराइए। आप देखेंगे कि दोनों त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए यह आवश्यक है कि बराबर कोण बराबर भुजाओं के अंतगर्त कोण हो। अतः, ै।ै नियम तो सत्य है, परन्तु ।ैै या ैै। नियम सत्य नहीं है। अब, ऐसे दो त्रिाभुजों की रचना करने का प्रयत्न करिए, जिनमें दो कोण 60° और 45° हों तथा इन कोणों की अंतगर्त भुजा 4 बउ हो ;देख्िाए आवृफति 7ण्11द्ध। आवृफति 7ण्11 इन दोनों त्रिाभुजों को काटिए और एक त्रिाभुज को दूसरे के ऊपर रख्िाए। आप क्या देखते हैं? देख्िाए कि एक त्रिाभुज दूसरे त्रिाभुज को पूणर्तया ढक लेता है, अथार्त् दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं। वुफछ और त्रिाभुजों को लेकर इस ियाकलाप को दोहराइए। आप देखेंगे कि त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए, दो कोणों और उनकी अंतगर्त भुजा की समता पयार्प्त है। यह परिणाम कोण - भुजा - कोण ;।दहसम.ैपकम.।दहसमद्ध कसौटी है और इसे ।ै। सवा±गसमता कसौटी लिखा जाता है। आप पिछली कक्षाओं में, इसकी सत्यता की जाँच कर चुके ़़़हैं। आइए इस परिणाम को सि( करें। चूँकि इस परिणाम को सि( किया जा सकता है, इसलिए इसे एक प्रमेय ;जीमवतमउद्ध कहा जाता है। इसे सि( करने के लिए, हम ै।ै सवा±गसमता नियम का प्रयोग करेंगे। प्रमेय 7ण्1 ;।ै। सवा±गसमता नियमद्ध रू दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं, यदि एक त्रिाभुज के दो कोण और उनकी अंतगर्त भुजा दूसरे त्रिाभुज के दो कोणों और उनकी अंतगर्त भुजा के बराबर हों। उपपिा रू हमें दो त्रिाभुज ।ठब् और क्म्थ् दिए हैं, जिनमें ∠ ठ त्र ∠ म्ए ∠ ब् त्र ∠ थ् और ठब् त्र म्थ् है।हमें Δ ।ठब् ≅Δ क्म्थ् सि( करना है। दोनों त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए देख्िाए कि यहाँ तीन स्िथतियाँ संभव हैं। स्िथति ;पद्ध रू मान लीजिए ।ठ त्र क्म् है;देख्िाए आकृति 7.12द्ध। अब आप क्या देखते हैं? आप देख सकते हैं कि ।ठ त्र क्म् ;कल्पना की हैद्ध ∠ठ त्र ∠म् ;दिया हैद्ध ठब् त्र म्थ् ;दिया हैद्ध अतः, Δ।ठब् ≅Δक्म्थ् ;ै।ै नियम द्वाराद्ध आवृफति 7ण्12 स्िथति ;पपद्ध रू मान लीजिए, यदि संभव है तो, ।ठ झ क्म् है। इसलिए, हम ।ठ पर एक बिंदु च् ऐसा ले सकते हैं कि च्ठ त्र क्म् हो ;देख्िाए आवृफति 7ण्13द्ध। आवृफति 7ण्13 अब Δच्ठब् और Δक्म्थ् में, च्ठ त्र क्म् ;रचना सेद्ध ∠ठ त्र ∠म् ;दिया हैद्ध ठब् त्र म्थ् ;दिया हैद्ध अतः, हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि Δच्ठब् ≅Δक्म्थ् ;ै।ै सवा±गसमता अभ्िागृहीत द्वाराद्ध चूँकि दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं, इसलिए इनके संगत भाग बराबर होने चाहिए। अतः, ∠च्ब्ठ त्र ∠क्थ्म् परन्तु हमें दिया है कि ∠।ब्ठ त्र ∠क्थ्म् अतः, ∠।ब्ठ त्र ∠च्ब्ठ परन्तु क्या यह संभव है? यह तभी संभव है, जब च् बिंदु । के साथ संपाती हो। या ठ। त्र म्क् अतः, Δ।ठब् ≅Δक्म्थ् ;ै।ै अभ्िागृहीत द्वाराद्ध स्िथति ;पपपद्ध रू यदि।ठ ढ क्म् हो, तो हम क्म् पर एक बिंदु ड इस प्रकार ले सकते हैं कि डम् त्र ।ठ हो। अब स्िथति ;पपद्ध वाले तवर्फण को दोहराते हुए, हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि।ठ त्र क्म् है और इसीलिए Δ।ठब् ≅Δ क्म्थ् है। ऽ अब मान लीजिए कि दो त्रिाभुजों में दो कोणों के युग्म और संगत भुजाओं का एक युग्म बराबर हैं, परन्तु ये भुजाएँ बराबर कोणों के युग्मों की अंतगर्त भुजाएँ नहीं हैं। क्या ये त्रिाभुज अभी भी सवा±गसम हैं? आप देखेंगे कि ये त्रिाभुज सवा±गसम हैं। क्या आप इसका कारण बता सकते हैं? आप जानते हैं कि त्रिाभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। अतः त्रिाभुजों के कोणों के दो युग्म बराबर होने पर उनके तीसरे कोण भी बराबर होंगे ;180° दृ दोनों बराबर कोणों का योगद्ध। अतः, दो त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं, यदि इन त्रिाभुजों के दो कोणों के युग्म बराबर हों और संगत भुजाओं का एक युग्म बराबर हो। हम इसे ।।ै सवा±गसमता नियम कह सकते हैं। आइए अब निम्नलिख्िात ियाकलाप करें: 40°ए 50° और 90° वाले वुफछ त्रिाभुज खींचिए। आप ऐसे कितने त्रिाभुज खींच सकते हें? वास्तव में, भुजाओं की विभ्िान्न लंबाइयाँ लेकर हम ऐसे जितने चाहे उतने त्रिाभुज खींच सकते हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्14द्ध। आवृफति 7ण्14 देख्िाए कि ये त्रिाभुज सवा±गसम हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं। अतः, तीन कोणों की समता त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए पयार्प्त नहीं है। इसलिए, त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए, तीन बराबर भागों में से एक बराबर भाग भुजा अवश्य होना चाहिए। आइए अब वुफछ और उदाहरण लें। उदाहरण 3 रू रेखाखंड।ठ एक अन्य रेखाखंड ब्क् के समांतर है और व् रेखाखंड ।क् का मध्य - बिंदु है ;देख्िाए आवृफति 7ण्15द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ।व्ठ ≅ Δक्व्ब् ;पपद्ध व् रेखाखंड ठब् का भी मध्य - बिंदु है। हल रू ;पद्ध Δ ।व्ठ और Δ क्व्ब् पर विचार कीजिए। ∠ ।ठव् त्र ∠ क्ब्व् ;एकांतर कोण और तियर्क रेखा ठब् के साथ ।ठ द्यद्य ब्क्द्ध ∠ ।व्ठ त्र ∠ क्व्ब् ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध व्। त्र व्क् ;दिया हैद्ध अतः, Δ ।व्ठ ≅Δ क्व्ब् ;।।ै नियमद्ध ;पपद्ध व्ठ त्र व्ब् ;ब्च्ब्ज्द्ध अथार्त् व्ए रेखाखंड ठब् का भी मध्य - बिंदु है। आवृफति 7ण्15 प्रश्नावली 7ण्1 1ण् चतुभुर्ज ।ब्ठक् में, ।ब् त्र ।क् है और ।ठ कोण । को समद्विभाजित करता है ;देख्िाए आवृफति 7.16द्ध। दशार्इए कि Δ ।ठब् ≅ Δ ।ठक् है। ठब् और ठक् के बारे में आप क्या कह सकते हैं? 2ण् ।ठब्क् एक चतुभुर्ज है, जिसमें ।क् त्र ठब् और ∠ क्।ठ त्र ∠ ब्ठ। है ;देख्िाए आवृफति 7ण्17द्ध। सि( कीजिए कि ;पद्ध Δ ।ठक् ≅Δ ठ।ब् ;पपद्ध ठक् त्र।ब् ;पपपद्ध ∠ ।ठक् त्र ∠ ठ।ब् आवृफति 7ण्16 आवृफति 7ण्17 3ण् एक रेखाखंड ।ठ पर।क् और ठब् दो बराबर लंब रेखाखंड हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्18द्ध। दशार्इए कि ब्क्ए रेखाखंड ।ठ को समद्विभाजित करता है। आवृफति 7ण्18 4ण् स और उ दो समांतर रेखाएँ हैं जिन्हें समांतर रेखाओं च औरु का एक अन्य युग्म प्रतिच्छेदित करता है ;देख्िाए आवृफति7ण्19द्ध। दशार्इए किΔ ।ठब् ≅Δ ब्क्। है। आवृफति 7ण्19 5ण् रेखास कोण । को समद्विभाजित करती है और ठ रेखा स पर स्िथत कोइर् बिंदु है। ठच् और ठफ कोण । की भुजाओं पर ठ से डाले गए लम्ब हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्20द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।च्ठ ≅Δ ।फठ ;पपद्ध ठच् त्र ठफ है, अथार्त् बिंदु ठ कोण की भुजाओं से समदूरस्थ है आवृफति 7ण्20 6ण् आवृफति 7ण्21 में, ।ब् त्र ।म्ए।ठ त्र ।क् और ∠ ठ।क् त्र∠ म्।ब् है। दशार्इए कि ठब् त्र क्म् है। आवृफति 7ण्21 7ण् ।ठ एक रेखाखंड है और च् इसका मध्य - बिंदु है। क् और म् रेखाखंड।ठ के एक ही ओर स्िथत दो बिंदु इस प्रकार हैं कि ∠ ठ।क् त्र ∠ ।ठम् और ∠ म्च्। त्र ∠ क्च्ठ है। ;देख्िाए आवृफति 7ण्22द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ क्।च् ≅Δ म्ठच् आवृफति 7ण्22 ;पपद्ध ।क् त्र ठम् 8ण् एक समकोण त्रिाभुज ।ठब् में, जिसमें कोण ब् समकोण है, ड कणर् ।ठ का मध्य - बिंदु है। ब् को ड से मिलाकर क् तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि क्ड त्र ब्ड है। बिंदु क् को बिंदु ठ से मिला दिया जाता है ;देख्िाए आवृफति7ण्23द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।डब् ≅Δ ठडक् ;पपद्ध ∠ क्ठब् एक समकोण है आवृफति 7ण्23 ;पपपद्ध Δ क्ठब् ≅Δ ।ब्ठ 1;पअद्धब्ड त्र ।ठ27ण्4 एक त्रिाभुज के वुफछ गुण पिछले अनुच्छेद में, आपने त्रिाभुजों की सवा±गसमता की दो कसौटियों का अध्ययन किया है। आइए इन परिणामों का एक ऐसे त्रिाभुज के वुफछ गुणों का अध्ययन करने में प्रयोग करें जिसकी दो भुजाएँ बराबर होती हैं। नीचे दिया गया ियाकलाप कीजिएः एक त्रिाभुज की रचना कीजिए जिसकी दो भुजाएँ बराबर हों। मान लीजिए दो भुजाएँ 3ण्5 बउ लंबाइर् की हैं और एक भुजा 5 बउ लंबाइर् की है ;देख्िाए आवृफति 7ण्24द्ध। आप पिछली कक्षाओं में, ऐसी रचनाएँ कर चुके हैं। आवृफति 7ण्24 क्या आपको याद है कि इस त्रिाभुज को क्या कहते हैं? एक त्रिाभुज जिसकी दो भुजाएँ बराबर हों समद्विबाहु त्रिाभुज ;पेवेबमसमे जतपंदहसमद्ध कहलाता है। अतः, आवृफति 7ण्24 का Δ ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। अब ∠ ठ और ∠ ब् को मापिए। आप क्या देखते हैं? विभ्िान्न भुजाओं वाले अन्य समद्विबाहु त्रिाभुज लेकर इस ियाकलाप को दोहराइए। आप देख सकते हैं कि ऐसे प्रत्येक त्रिाभुज में बराबर भुजाओं के सम्मुख ;सामने केद्ध कोण बराबर हैं। यह एक अति महत्वपूणर् परिणाम है और प्रत्येक समद्विबाहु त्रिाभुज के लिए सत्य है। इसे नीचे दशाइर् विध्ि के अनुसार सि( किया जा सकता हैः प्रमेय 7ण्2 रू एक समद्विबाहु त्रिाभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं। इस परिणाम को कइर् विध्ियों से सि( किया जा सकता है। इनमें से एक उपपिा नीचे दी जा रही है। उपपिारू हमें एक समद्विबाहु Δ।ठब् दिया है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। हमें ∠ठ त्र ∠ब् सि( करना है। आइए ∠। का समद्विभाजक खींचे। मान लीजिए यह ठब् से क् पर मिलता है ;देख्िाए आवृफति 7ण्25द्ध। आवृफति 7ण्25अब, Δठ।क् और Δब्।क् में, ।ठ त्र ।ब् ;दिया हैद्ध ∠ठ।क् त्र ∠ब्।क् ;रचना सेद्ध ।क् त्र।क् ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δठ।क् ≅Δब्।क् ;ै।ै नियम द्वाराद्ध इसलिए, ∠।ठक् त्र ∠।ब्क् ;ब्च्ब्ज्द्ध अथार्त् ∠ठ त्र ∠ब् ऽ क्या इसका विलोम भी सत्य है? अथार्त् यदि किसी त्रिाभुज के दो कोण बराबर हों, तो क्या हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि उनकी सम्मुख भुजाएँ भी बराबर होंगी? नीचे दिया ियाकलाप कीजिए: एक Δ।ठब् की रचना कीजिए जिसमें ठब् किसी भी लंबाइर् वाली एक भुजा है और ∠ठ त्र ∠ब् त्र 50ह् है।∠। का समद्विभाजक खींचिए और मान लीजिए कि यह ठब् को क् पर प्रतिच्छेद करता है ;देख्िाए आवृफति 7ण्26द्ध। आवृफति 7ण्26 त्रिाभुज ।ठब् को कागज में से काट लीजिए और इसे ।क् के अनुदिश मोडि़ए ताकि शीषर् ब् शीषर् ठ पर गिरे ;पड़ेद्ध। ।ब् और ।ठ के बारे में आप क्या कह सकते हैं? देख्िाए कि ।ब्ए ।ठ को पूणर्तया ढक लेती है। अतः, ।ब् त्र ।ठ इसी ियाकलाप को ऐसे ही वुफछ अन्य त्रिाभुज लेकर दोहराइए। प्रत्येक बार आप देखेंगे कि एक त्रिाभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं। अतः, हम निम्न प्रमेय प्राप्त करते हैं: प्रमेय 7ण्3 रू किसी त्रिाभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। यह प्रमेय 7.2 का विलोम है। आप इस प्रमेय को ।ै। सवा±गसमता नियम का प्रयोग करके सि( कर सकते हैं। आइए इन परिणामों को स्पष्ट करने के लिए वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 4 रू Δ।ठब् में,∠। का समद्विभाजक।क् भुजा ठब् पर लम्ब है ;देख्िाए आकृति7ण्27द्ध। दशार्इए कि ।ठ त्र ।ब् है और Δ।ठब् समद्विबाहु है। हल रू Δ।ठक् और Δ।ब्क् में, ∠ठ।क् त्र ∠ब्।क् ;दिया हैद्ध ।क् त्र ।क् ;उभयनिष्ठद्ध ∠।क्ठ त्र ∠।क्ब् त्र 90° ;दिया हैद्ध अतः, Δ।ठक् ≅Δ।ब्क् ;।ै। नियमद्ध इसलिए, ।ठ त्र ।ब् ;ब्च्ब्ज्द्ध आवृफति 7ण्27 इसी कारण Δ।ठब् समद्विबाहु है। उदाहरण 5 रू म् और थ् क्रमशः त्रिाभुज ।ठब् की बराबर भुजाओं ।ठ और ।ब् के मध्य - बिंदु हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्28द्ध। दशार्इए कि ठथ् त्र ब्म् है। हल रू Δ।ठथ् और Δ।ब्म् में, ।ठ त्र ।ब् ;दिया हैद्ध ∠। त्र ∠। ;उभयनिष्ठद्ध ।थ् त्र ।म् ;बराबर भुजाओं के आध्ेद्ध अतः, Δ।ठथ् ≅Δ।ब्म् ;ै।ै नियमद्ध इसलिए, ठथ् त्र ब्म् ;ब्च्ब्ज्द्ध उदाहरण 6 रू एक समद्विबाहु त्रिाभुज ।ठब् जिसमें ।ठ त्र ।ब् है, की भुजा ठब् पर दो बिंदु क् और म् इस प्रकार हैं कि ठम् त्र ब्क् है ;देख्िाए आवृफति 7ण्29द्ध। दशार्इए कि ।क् त्र ।म् है। हल रू Δ।ठक् और Δ।ब्म् में, ।ठ त्र ।ब् ;दिया हैद्ध ;1द्ध ∠ठ त्र ∠ब् ;2द्ध ;बराबर भुजाओं के सम्मुख कोणद्ध साथ ही, ठम् त्र ब्क् ;दिया हैद्ध इसलिए, ठम् दृ क्म् त्र ब्क्दृक्म् आवृफति 7ण्29अथार्त्, ठक् त्रब्म् ;3द्ध अतः, Δ।ठक् ≅Δ।ब्म् ख्;1द्धए ;2द्धए ;3द्ध और ै।ै नियम द्वारा, इससे प्राप्त होता हैः ।क् त्र ।म् ;ब्च्ब्ज्द्ध प्रश्नावली 7ण्2 1ण् एक समद्विबाहु त्रिाभुज ।ठब् में जिसमें ।ठ त्र ।ब् है, ∠ठ और ∠ब् के समद्विभाजक परस्पर बिंदुव् पर प्रतिच्छेद करते हैं। । औरव् को जोडि़ए। दशार्इए कि ;पद्ध व्ठ त्र व्ब् ;पपद्ध ।व् कोण । को समद्विभाजित करता है 2ण् Δ।ठब् में ।क् भुजा ठब् का लम्ब समद्विभाजक है ;देख्िाए आवृफति 7ण्30द्ध। दशार्इए कि Δ।ठब् एक आवृफति 7ण्30समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। 3ण् ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें बराबर भुजाओं ।ब् और।ठ पर क्रमशः शीषर्लम्ब ठम् और ब्थ् खींचे गए हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्31द्ध। दशार्इए कि ये शीषर्लम्ब बराबर हैं। आवृफति 7ण्31 4ण् ।ठब् एक त्रिाभुज है जिसमें ।ब् और ।ठ पर खींचे गए शीषर्लम्ब ठम् औरब्थ् बराबर हैं ;देख्िाए आवृफति7ण्32द्ध। दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।ठम्≅Δ ।ब्थ् ;पपद्ध ।ठ त्र ।ब्ए अथार्त् Δ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है। आवृफति 7ण्32 5ण् ।ठब् और क्ठब् समान आधर ठब् पर स्िथत दो समद्विबाहु त्रिाभुज हैं;देख्िाए आवृफति7ण्33द्ध। दशार्इए कि ∠ ।ठक् त्र ∠ ।ब्क् है। आवृफति 7ण्33 6ण् ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। भुजा ठ। बिंदु क् तक इस प्रकार बढ़ाइर् गइर् है कि ।क् त्र ।ठ है ;देख्िाए आवृफति 7ण्34द्ध। दशार्इए कि ∠ ठब्क् एक समकोण है। आवृफति 7ण्34 7ण् ।ठब् एक समकोण त्रिाभुज है, जिसमें∠ । त्र 90° और ।ठ त्र ।ब् है। ∠ ठ और ∠ ब् ज्ञात कीजिए। 8ण् दशार्इए कि किसी समबाहु त्रिाभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है। 7ण्5 त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए वुफछ और कसौटियाँ आप इस अध्याय में, पहले यह देख चुके हैं कि एक त्रिाभुज के तीनों कोणों के दूसरे त्रिाभुज के तीनों कोणों के बराबर होने पर दोनों त्रिाभुजों का सवा±गसम होना आवश्यक नहीं है। आप सोच सकते हैं कि संभवतः एक त्रिाभुज की तीनों भुजाओं के दूसरे त्रिाभुज की तीनों भुजाओं के बराबर होने पर त्रिाभुज सवा±गसम हो जाएँ। आप यह पिछली कक्षाओं में पढ़ चुके हैं कि ऐसी स्िथति में त्रिाभुज निस्संदेह सवा±गसम होते हैं। इस धरणा को निश्िचत करने के लिए, 4 बउ, 3.5 बउ और 4.5 बउ के दो त्रिाभुज खींचिए ;देख्िाए आवृफति 7ण्35द्ध। इन्हें काटकर, एक दूसरे पर रख्िाए। आप क्या देखते हैं? यदि बराबर भुजाओं को एक दूसरे पर रखा जाए। ये एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेते हैं अतः, दोनों त्रिाभुज सवा±गसम हैं। आवृफति 7ण्35 इस ियाकलाप को वुफछ अन्य त्रिाभुज खींचकर दोहराइए। इस प्रकार, हम सवा±गसमता के एक और नियम पर पहुँच जाते हैंः प्रमेय 7ण्4 ;ैैै सवा±गसमता नियम द्ध रू यदि एक त्रिाभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिाभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। एक उपयुक्त रचना करके, इस प्रमेय को सि( किया जा सकता है। आप ै।ै सवा±गसमता नियम में पहले ही देख चुके हैं कि बराबर कोणों के युग्म संगत बराबर भुजाओं के युग्मों के बीच में ;अंतगर्तद्ध होने चाहिए और यदि ऐसा नहीं हो, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम नहीं भी हो सकते हैं। इस ियाकलाप को कीजिए: दो समकोण त्रिाभुज ऐसे खींचिए जिनमें प्रत्येक का कणर् 5 सेमी और एक भुजा 4 बउ की होेृ;दख्िाए आवफति 7.36द्ध। आवृफति 7ण्36 इन्हें काटिए और एक दूसरे पर इस प्रकार रख्िाए कि इनकी बराबर भुजाएँ एक दूसरे पर आएँ। यदि आवश्यक हो, तो त्रिाभुजों को घुमाइए। आप क्या देखते हैं? आप देखते हैं कि दोनों त्रिाभुज एक दूसरे को पूणर्तया ढक लेते हैं और इसीलिए ये सवा±गसम हैं। यही ियाकलाप समकोण त्रिाभुजों के अन्य युग्म लेकर दोहराइए। आप क्या देखते हैं? आप पाएँगे कि दोनों समकोण त्रिाभुज सवा±गसम होंगे, यदि उनके कणर् बराबर हों और भुजाओं का एक युग्म बराबर हो। आप इस तथ्य की जाँच पिछली कक्षाओं में कर चुके हैं। ध्यान दीजिए कि इस स्िथति में समकोण अंतगर्त कोण नहीं है। इस प्रकार, आप निम्नलिख्िात सवा±गसमता नियम पर पहुँच गए हैंः प्रमेय 7ण्5 ;त्भ्ै सवा±गसमता नियमद्धरू यदि दो समकोण त्रिाभुजों में, एक त्रिाभुज का कणर् और एक भुजा क्रमशः दूसरे त्रिाभुज के कणर् और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं। ध्यान दीजिए कि यहाँ त्भ्ै समकोण ;त्पहीज ंदहसमद्ध .कणर् ;भ्लचवजमदनेमद्ध .भुजा ;ैपकमद्ध को दशार्ता है। आइए अब वुफछ उदाहरण लें। उदाहरण 7 रू ।ठ एक रेखाखंड है तथा बिंदु च् और फ इस रेखाखंड ।ठ के विपरीत ओर इस प्रकार स्िथत हैं कि इनमें से प्रत्येक । और ठ से समदूरस्थ है ;देख्िाए आवृफति 7.37द्ध। दशार्इए कि रेखा च्फ रेखाखंड ।ठ का लम्ब समद्विभाजक है। हल रू आपको च्। त्र च्ठ और फ।त्र फठ दिया हुआ है। आपको दशार्ना है कि च्फ ⊥।ठ है और च्फ रेखाखंड ।ठ को समद्विभाजित करती है। मान लीजिए रेखा च्फ रेखाखंड ।ठ को ब् पर प्रतिच्छेद करती है। क्या आप इस आवृफति में आवृफति 7ण्37 दो सवा±गसम त्रिाभुजों को देख सकते हैं? आइए Δच्।फ और Δच्ठफ लें। इन त्रिाभुजों में, ।च् त्र ठच् ;दिया हैद्ध ।फ त्रठफ ;दिया हैद्ध च्फ त्र च्फ ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δच्।फ ≅Δच्ठफ ;ैैै नियमद्ध इसलिए, ∠।च्फ त्र ∠ठच्फ ;ब्च्ब्ज्द्ध अब Δ च्।ब् और Δ च्ठब् को लीजिए। आपको प्राप्त है: ।च् त्र ठच् ;दिया हैद्ध ∠।च्ब् त्र ∠ठच्ब् ;∠।च्फ त्र ∠ठच्फ ऊपर सि( किया हैद्ध च्ब् त्र च्ब् ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δच्।ब् ≅Δच्ठब् ;ै।ै नियमद्ध इसलिए, ।ब् त्र ठब् ;ब्च्ब्ज्द्ध ;1द्ध और ∠।ब्च् त्र ∠ठब्च् ;ब्च्ब्ज्द्ध साथ ही, ∠।ब्च् ़ ∠ठब्च् त्र 180° ;रैख्िाक युग्मद्ध इसलिए, 2∠।ब्च् त्र 180° या, ∠।ब्च् त्र 90° ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध से, आप निष्कषर् निकाल सकते हैं कि रेखा च्फ रेखाखंड ।ठ का लम्ब समद्विभाजक है। ख्ध्यान दीजिए कि Δ च्।फ और Δ च्ठफ की सवा±गसमता दशार्ए बिना, आप यह नहीं दिखा सकते कि Δ च्।ब् ≅Δ च्ठब् है, यद्यपि ।च् त्र ठच् ;दिया हैद्ध, च्ब् त्रच्ब् ;उभयनिष्ठद्ध और ∠च्।ब् त्र ∠च्ठब् ;Δ।च्ठ में बराबर भुजाओं के सम्मुख कोणद्ध है। यह इस कारण है कि इनसे हमें ैै। नियम प्राप्त होता है, जो त्रिाभुजों की सवा±गसमता के लिए सदैव मान्य नहीं है। साथ ही, कोण बराबर भुजाओं के अंतगर्त नहीं है।, आइए वुफछ और उदाहरण लें। उदाहरण 8 रू बिंदु । पर प्रतिच्छेद करने वाली दो रेखाओं स और उ से समदूरस्थ एक बिंदु च् है ;देख्िाए आकृति 7.38द्ध। दशार्इए कि रेखा ।च् दोनों रेखाओं के बीच के कोण को समद्विभाजित करती है। हल रू आपको दिया है कि रेखाएँ स और उ परस्पर । पर प्रतिच्छेद करती हैं। मान लीजिए च्ठ ⊥स और च्ब् ⊥उ है। यह दिया है कि च्ठ त्र च्ब् है। आपको दशार्ना है कि ∠च्।ठ त्र ∠च्।ब् है। अब, Δच्।ठ और Δच्।ब् में, च्ठ त्रच्ब् ;दिया हैद्ध ∠च्ठ। त्र ∠च्ब्। त्र 90° ;दिया हैद्ध आवृफति 7ण्38 च्। त्र च्। ;उभयनिष्ठद्ध अतः, Δच्।ठ ≅Δच्।ब् ;त्भ्ै नियमद्ध इसलिए, ∠च्।ठ त्र ∠च्।ब् ;ब्च्ब्ज्द्ध ध्यान दीजिए कि यह परिणाम प्रश्नावली 7.1 के प्रश्न 5 में सि( किए गए परिणाम का विलोम है। प्रश्नावली 7ण्3 1ण् Δ ।ठब् औरΔ क्ठब् एक ही आधर ठब् पर बने दो समद्विबाहु त्रिाभुज इस प्रकार हैं कि । औरक् भुजाठब् के एक ही ओर स्िथत हैं ;देख्िाए आकृति 7.39द्ध। यदि ।क् बढ़ाने पर ठब् कोच् पर प्रतिच्छेद करे, तो दशार्इए कि ;पद्ध Δ ।ठक् ≅Δ ।ब्क् आवृफति 7ण्39 ;पपद्ध Δ ।ठच् ≅ Δ ।ब्च् ;पपपद्ध ।च् कोण । और कोणक् दोनों को समद्विभाजित करता है। ;पअद्ध ।च् रेखाखंड ठब् का लम्ब समद्विभाजक है। 2ण् ।क् एक समद्विबाहु त्रिाभुज।ठब् का एक शीषर्लम्ब है, जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। दशार्इए कि ;पद्ध ।क् रेखाखंड ठब् को समद्विभाजित करता है। ;पपद्ध ।क् कोण ।को समद्विभाजित करता हैै। 3ण् एक त्रिाभुज ।ठब् की दो भुजाएँ ।ठ और ठब् तथा माियका ।ड क्रमशः एक दूसरे त्रिाभुज की भुजाओं च्फ औरफत् तथा माियका च्छ के बराबर हैं ;देख्िाए आकृति 7.40द्ध। दशार्इए कि आवृफति 7ण्40;पद्ध Δ ।ठड ≅Δ च्फछ ;पपद्ध Δ ।ठब् ≅ Δ च्फत् 4ण् ठम् औरब्थ् एक त्रिाभुज।ठब् के दो बराबर शीषर्लम्ब हैं।त्भ्ै सवा±गसमता नियम का प्रयोग करके सि( कीजिए कि Δ ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है। 5ण् ।ठब् एक समद्विबाहु त्रिाभुज है जिसमें ।ठ त्र ।ब् है। ।च् ⊥ ठब् खींच कर दशार्इए कि ∠ ठ त्र ∠ ब् है। 7ण्6 एक त्रिाभुज में असमिकाएँ अभी तक, आपने मुख्यतः एक त्रिाभुज ;अथवा त्रिाभुजोंद्ध की भुजाओं और कोणों की समताओं ;समिकाओंद्ध के बारे में ही पढ़ा है। कभी - कभी हमारे सम्मुख असमान ;जो बराबर नहीं हैंद्ध वस्तुएँ भी आती हैं और हमें इनकी तुलना भी करनी पड़ती है। उदाहरणाथर्, आकृति 7.41 ;पद्ध में, रेखाखंड ।ठ रेखाखंड ब्क् से बड़ा है और आकृति 7ण्41 ;पपद्ध में, ∠ ।ए ∠ ठ से बड़ा है। आवृफति 7ण्41 आइए अब इसकी जाँच करें कि क्या किसी त्रिाभुज में असमान भुजाओं और असमान कोणों में वुफछ सम्बन्ध् होता है। इसके लिए, आइए निम्न ियाकलाप करें: ियाकलाप रू एक ड्राइंग बोडर् पर दो स्थानों ;बिंदुओंद्ध ठ और ब् पर दो पिन लगाइए और उनको एक धगे से बाँध् कर त्रिाभुज की भुजा ठब् बनाइए। एक अन्य धगे के एक सिरे को ब् पर लगाइए और दूसरे ;मुक्तद्ध सिरे पर एक पेंसिल बाँध् लीजिए। पेंसिल से एक बिंदु । अंकित कीजिए और Δ ।ठब् खींचिए ;देख्िाए आकृति 7.42द्ध। अब पेंसिल को हटा कर ब्। पर । के आगे एक अन्य बिंदु ।′ ;। की नइर् स्िथतिद्ध अंकित कीजिए। अतः, ।′ब् झ ।ब् ;लम्बाइयों की तुलना करने परद्ध आवृफति 7ण्42।′ को ठ से मिलाकर Δ ।′ठब् पूरा कीजिए। आप ∠ ।′ठब् और ∠ ।ठब् के बारे में क्या कह सकते हैं? इनकी तुलना कीजिए। आप क्या देखते हैं? स्पष्टतः, ∠ ।′ठब् झ ∠ ।ठब् है। ब्। ;बढ़ाइर् हुइर्द्ध पर और अध्िक बिंदु अंकित करते रहिए, तथा अंकित बिंदुओं और भुजा ठब् के साथ त्रिाभुज खींचते रहिए। आप देखेंगे कि जैसे - जैसे ।ब् बढ़ती जाती है ;। की विभ्िान्न स्िथतियों को अंकित करने परद्ध, वैसे - वैसे इसका सम्मुख कोण, अथार्त् ∠ ठ भी बढ़ता जाता है। आइए अब एक अन्य ियाकलाप करें रू ियाकलापरू एक विषमबाहु त्रिाभुज खींचिए ;अथार्त् ऐसा त्रिाभुज जिसमें सभी भुजाओं की लम्बाइयाँ भ्िान्न - भ्िान्न होंद्ध। इस त्रिाभुज की भुजाओं की लम्बाइयाँ मापिए और इसके कोण भी मापिए। आप क्या देखते हैं? आकृति 7.43 के Δ ।ठब् में, ठब् सबसे लम्बी भुजा है और।ब् सबसे छोटी भुजा है। साथ ही, ∠ । सबसे बड़ा है और∠ ठ सबसे छोटा है। आवृफति 7ण्43 वुफछ और त्रिाभुज खींच कर इस ियाकलाप को दोहराइए। हम त्रिाभुजों की असमिकाओं के एक अति महत्वपूणर् गुण पर पहुँच जाते हैं। इसे एक प्रमेय के रूप में नीचे व्यक्त किया जा रहा है रू प्रमेय 7ण्6 रू यदि किसी त्रिाभुज की दो भुजाएँ असमान हों, तो लम्बी भुजा के सामने का सम्मुख कोण बड़ा होता है। आप आकृति 7.43 में, ठब् पर एक बिंदु च् इस प्रकार लेकर कि ब्। त्र ब्च् हो, इस प्रमेय को सि( कर सकते हैं। आइए अब एक और ियाकलाप करें: ियाकलाप रू एक रेखाखंड ।ठ खींचिए। । को केन्द्र मानकर और कोइर् त्रिाज्या लेकर एक चाप लगाइए। इस आवृफति 7ण्44 चाप पर विभ्िान्न बिंदु च्ए फए त्ए ैए ज् अंकित कीजिए। इन बिंदुओं को । और ठ दोनों से जोडि़ए ;देख्िाए आकृति 7.44द्ध। ध्यान दीजिए कि जैसे - जैसे हम च् से ज् की ओर चलते हैं, वैसे - वैसे ∠ । बढ़ता जाता है।इसकी सम्मुख भुजाओं की लम्बाइयों को क्या होता जा रहा है। ध्यान दीजिए कि सम्मुख भुजाओं की लम्बाइयाँ भी बढ़ती जा रही हैं। अथार्त् ∠ ज्।ठ झ ∠ ै।ठ झ ∠ त्।ठ झ ∠ फ।ठ झ ∠ च्।ठ और ज्ठ झ ैठ झ त्ठ झ फठ झ च्ठ है। अब कोइर् ऐसा त्रिाभुज खींचिए जिसके सभी कोण असमान हों। इस त्रिाभुज की भुजाओं को मापिए ;देख्िाए आकृति 7.45द्ध। देख्िाए कि सबसे बड़े कोण की सम्मुख भुजा सबसेलम्बी है। आकृति 7.45 में,∠ ठ सबसे बड़ा कोण है और ।ब् सबसे लम्बी भुजा है। आवृफति 7ण्45 वुफछ और त्रिाभुज खींच कर इस ियाकलाप को दोहराइए और देख्िाए कि प्रमेय 7.6 का विलोम भी सत्य है। इस प्रकार, हम निम्न प्रमेय पर पहुँचते हैं: प्रमेय 7ण्7 रू किसी त्रिाभुज में, बड़े कोण की सम्मुख भुजा बड़ी ;लम्बीद्ध होती है। इस प्रमेय को विरोधभास की विध्ि ;उमजीवक व िबवदजतंकपबजपवदद्ध से सि( किया जा सकता है। अब एक त्रिाभुज ।ठब् खींचिए और इसमें ।ठ ़ ठब्ए ठब् ़ ।ब् और ।ब् ़ ।ठ ज्ञात कीजिए। आप क्या देखते हैं? आप देखेंगे कि।ठ ़ ठब् झ ।ब्ए ठब् ़ ।ब् झ ।ठ और ।ब् ़ ।ठ झ ठब् है। वुफछ अन्य त्रिाभुज लेकर, इस ियाकलाप को दोहराइए और निम्न प्रमेय पर पहुँचिए: प्रमेय 7ण्8 रू त्रिाभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है। आवृफति 7ण्46 में, देख्िाए कि Δ ।ठब् की भुजा ठ। को एक बिंदु क् तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि ।क् त्र ।ब् है। क्या आप दशार् सकते हैं कि ∠ ठब्क् झ ∠ ठक्ब् है और ठ।़।ब् झ ठब् है? क्या आप उपरोक्त प्रमेय की उत्पिा पर पहुँच गए हैं? आइए इन परिणामों पर आधरित वुफछ उदाहरण लें। आवृफति 7ण्46 उदाहरण 9 रू Δ।ठब् की भुजा ठब् पर क् एक ऐसा बिंदु है कि ।क् त्र ।ब् है ;देख्िाए आवृफति7ण्47द्ध। दशार्इए कि ।ठ झ ।क् है। हल रू Δ क्।ब् में, ।क् त्र ।ब् ;दिया हैद्ध इसलिए, ∠ ।क्ब् त्र ∠ ।ब्क् ;बराबर भुजाओं के सम्मुख कोणद्ध अब, ∠ ।क्ब् त्रिाभुज ।ठक् का एक बहिष्कोण है। इसलिए, ∠ ।क्ब् झ ∠ ।ठक् या, ∠ ।ब्क् झ ∠ ।ठक् आवृफति 7ण्47 या, ∠ ।ब्ठ झ ∠ ।ठब् अतः, ।ठ झ ।ब् ;Δ।ठब् में बड़े कोण की सम्मुख भुजाद्ध या, ।ठ झ।क् ;।क् त्र ।ब्द्ध प्रश्नावली 7ण्4 1ण् दशार्इए कि समकोण त्रिाभुज में कणर् सबसे लंबी भुजा होती है। 2ण् आवृफति 7ण्48 में, Δ ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ।ब् को क्रमशः बिंदुओंच् औरफ तक बढ़ाया गया है। साथ ही, ∠ च्ठब् ढ ∠ फब्ठहै। दशार्इए कि ।ब् झ ।ठ है। आवृफति 7ण्48 3ण् आवृफति 7ण्49 में ∠ ठ ढ ∠ । और ∠ ब् ढ ∠ क् है। दशार्इए कि ।क् ढ ठब्है। आवृफति 7ण्49 4ण् ।ठ और ब्क् क्रमशः एक चतुभुर्ज ।ठब्क् की सबसे छोटी और सबसे बड़ी भुजाएँ हैं ;देख्िाए आवृफति 7ण्50द्ध। दशार्इए कि∠ । झ ∠ ब् और ∠ ठ झ ∠ क् है। आवृफति 7ण्50 5ण् आवृफति 7ण्51 में, च्त् झ च्फ है और च्ै कोण फच्त् को समद्विभाजित करता है। सि( कीजिए कि ∠ च्ैत् झ ∠ च्ैफ है। आवृफति 7ण्51 6ण् दशार्इए कि एक रेखा पर एक दिए हुए बिंदु से, जो उस रेखा पर स्िथत नहीं है, जितने रेखाखंड खींचे जा सकते हैं उनमें लम्ब रेखाखंड सबसे छोटा होता है। प्रश्नावली 7ण्5 ;ऐच्िछकद्ध’ 1ण् ।ठब् एक त्रिाभुज है। इसके अभ्यंतर में एक ऐसा बिंदु ज्ञात कीजिए जो Δ ।ठब् के तीनों शीषो± से समदूरस्थ है। 2ण् किसी त्रिाभुज के अभ्यंतर में एक ऐसा बिंदु ज्ञात कीजिए जो त्रिाभुज की सभी भुजाओं से समदूरस्थ है। 3ण् एक बड़े पावर्फ में, लोग तीन बिंदुओं ;स्थानोंद्ध पर केन्िद्रत हैं ;देख्िाए आवृफति 7ण्52द्धरू । रू जहाँ बच्चों के लिए पिफसल पट्टी और झूले हैं। ठ रू जिसके पास मानव - नि£मत एक झील है। ’ यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्िट से नहीं दी गइर् है। आवृफति 7ण्52 ब् रू जो एक बड़े पा²कग स्थल और बाहर निकलने के रास्ते के निकट है। एक आइसक्रीम का स्टाॅल कहाँ लगाना चाहिए ताकि वहाँ लोगों की अध्िकतम संख्या पहुँच सके? ;संकेतरू स्टाॅल को ।ए ठ और ब् से समदूरस्थ होना चाहिए।द्ध 4ण् षडभुजीय और तारे के आकार की रंगोलियों ख्देख्िाए आवृफति7ण्53 ;पद्ध और;पपद्ध, को 1 बउ भुजा वाले समबाहु त्रिाभुजों से भर कर पूरा कीजिए। प्रत्येक स्िथति में, त्रिाभुजों की संख्या गिनिए। किसमें अध्िक त्रिाभुज हैं? आवृफति 7ण्53 7ण्7 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्न बिंदुओं का अध्ययन किया हैः 1ण् दो आवृफतियाँ सवा±गसम होती हैं, यदि उनका एक ही आकार हो और एक ही माप हो। 2ण् समान त्रिाज्याओं वाले दो वृत्त सवा±गसम होते हैं। 3ण् समान भुजाओं वाले दो वगर् सवा±गसम होते हैं। 4ण् यदि त्रिाभुज।ठब् औरच्फत् संगतता। ↔ च्ए ठ ↔ फ और ब् ↔ त्ए के अंतगर्त सवा±गसम हों, तो उन्हें सांकेतिक रूप में Δ ।ठब् ≅Δ च्फत् लिखते हैं। 5ण् यदि एक त्रिाभुज की दो भुजाएँ और अंतगर्त कोण दूसरे त्रिाभुज की दो भुजाओं और अंतगर्त कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं;ै।ै सवा±गसमता नियमद्ध। 6ण् यदि एक त्रिाभुज के दो कोण और अंतगर्त भुजा दूसरे त्रिाभुज के दो कोणों और अंतगर्त भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं;।ै। सवा±गसमता नियमद्ध। 7ण् यदि एक त्रिाभुज के दो कोण और एक भुजा दूसरे त्रिाभुज के दो कोणों और संगत भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं;।।ै सवा±गसमता नियमद्ध। 8ण् त्रिाभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं। 9ण् त्रिाभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। 10ण् किसी समबाहु त्रिाभुज का प्रत्येक कोण 60ह् का होता है। 11ण् यदि एक त्रिाभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिाभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं ;ैैै सवा±गसमता नियमद्ध। 12ण् यदि दो समकोण त्रिाभुजों में, एक त्रिाभुज का कणर् और एक भुजा क्रमशः दूसरे त्रिाभुज के कणर् और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिाभुज सवा±गसम होते हैं ;त्भ्ै सवा±गसमता नियमद्ध। 13ण् किसी त्रिाभुज में, लंबी ;बड़ीद्ध भुजा का सम्मुख कोण बड़ा होता है। 14ण् किसी त्रिाभुज में, बड़े कोण की सम्मुख भुजा लंबी ;बड़ीद्ध होती है। 15ण् किसी त्रिाभुज में, दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता हैै।

>Chap-7>

अध्याय 7

त्रिभुज


7.1
भूमिका

आप पिछली कक्षाओं में, त्रिभुजों और उनके विभिन्न गुणों के बारे में अध्ययन कर चुके हैं। आप जानते हैं कि तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं द्वारा बनाई गई एक बंद आकृति (closed figure) एक त्रिभुज (triangle) कहलाती है (‘त्रि’ का अर्थ है ‘तीन’)। एक त्रिभुज की तीन भुजाएँ, तीन कोण और तीन शीर्ष होते हैं। उदाहरणार्थ, आकृति 7.1 में दिए त्रिभुज ABC, जिसे ABC से व्यक्त करते हैं, की तीन भुजाएँ AB, BC और CA हैं, A, B और C इसके तीन कोण हैं तथा A, B और C इसके तीन शीर्ष हैं।


आकृति 7.1

अध्याय 6 में, आप त्रिभुजों के कुछ गुणों का भी अध्ययन कर चुके हैं। इस अध्याय में, आप त्रिभुजों की सर्वांगसमता (congruence), सर्वांगसमता के नियमों, त्रिभुजों के कुछ अन्य गुणों और त्रिभुजों में असमिकाओं (inequalities) के बारे में विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे। आप पिछली कक्षाओं के इन गुणों में से अधिकतर गुणों की सत्यता की जाँच क्रियाकलापों द्वारा कर चुक हैं। यहाँ हम इनमें से कुछ गुणों को सिद्ध भी करेंगे।


7.2
त्रिभुजों की सर्वांगसमता

आपने यह अवश्य ही देखा होगा कि आपकी फोटो की एक ही साइज की दो प्रतियाँ सर्वसम (identical) होती हैं। इसी प्रकार, एक ही माप की दो चूड़ियाँ और एक ही बैंक द्वारा जारी किए गए दो एटीएम (ATM) कार्ड सर्वसम होते हैं। आपने देखा होगा कि यदि एक ही वर्ष में ढले (बने) दो एक रुपए के सिक्कों में से एक को दूसरे पर रखें, तो वे एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं।

क्या आपको याद है कि एेसी आकृतियों को कैसी आकृतियाँ कहते हैं? नि:संदेह ये सर्वांगसम आकृतियाँ (congruent figures) कहलाती हैं (‘सर्वांगसम’ का अर्थ है ‘सभी प्रकार से बराबर’, अर्थात् वे आकृतियाँ जिनके समान आकार और समान माप हैं)।

अब एक ही त्रिज्या के दो वृत्त खींचिए और एक को दूसरे पर रखिए। आप क्या देखते हैं? ये एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं और हम इन्हें सर्वांगसम वृत्त कहते हैं।


आकृति 7.2

इसी क्रियाकलाप की एक ही माप की भुजाओं वाले दो वर्गों को खींच कर और फिर एक वर्ग को दूसरे वर्ग पर रखकर (देखिए आकृति 7.2) अथवा बराबर भुजाओं वाले दो समबाहु त्रिभुजों को एक दूसरे पर रखकर, पुनरावृत्ति कीजिए। आप देखेंगे कि वर्ग सर्वांगसम हैं और समबाहु त्रिभुज भी सर्वांगसम हैं।

आप सोच सकते हैं कि हम सर्वांगसमता का अध्ययन क्यों कर रहे हैं। आपने अपने रेफ्रीजरेटर में बर्फ की ट्रे (ice tray) अवश्य ही देखी होगी। ध्यान दीजिए कि बर्फ जमाने के लिए बने सभी खाँचे सर्वांगसम हैं। ट्रे में (खाँचों के लिए प्रयोग किए गए साँचों की गहराइयाँ भी सर्वांगसम होती हैं (ये सभी आयताकार या सभी वृत्ताकार या सभी त्रिभुजाकार हो सकते हैं)। अत:, जब भी सर्वसम (एक जैसी) वस्तुएँ बनानी होती हैं, तो साँचे बनाने के लिए सर्वांगसमता की संकल्पना का प्रयोग किया जाता है।

कभी-कभी आपको अपने पेन के रिफिल (refill) दलने में भी कठिनाई हो सकती है, यदि नया रिफिल आपके पेन के साइज का न हो। स्पष्टत: रिफिल तभी पेन में लग पाएगा, जबकि पुरानी रिफिल और नया रिफिल सर्वांगसम होंगे। इस प्रकार, आप दैनिक जीवन की स्थितियों में एेसे अनेक उदाहरण ज्ञात कर सकते हैं, जहाँ वस्तुओं की सर्वांगसमता का उपयोग होता है।

क्या आप सर्वांगसम आकृतियों के कुछ और उदाहरण सोच सकते हैं?

अब, निम्न में से कौन-कौन सी आकृतियाँ आकृति 7.3 (i) में दिए वर्ग के सर्वांगसम नहीं हैं?

आकृति 7.3 (ii) और आकृति 7.3 (iii) में दिए बड़े वर्ग स्पष्टत: आकृति 7.3 (i) के वर्ग के सर्वांगसम नहीं हैं। परन्तु आकृति 7.3 (iv) में दिया हुआ वर्ग आकृति 7.3 (i) में दिए वर्ग के सर्वांगसम है।


आकृति 7.3

आइए अब दो त्रिभुजों की सर्वांगसमता की चर्चा करें।

आप पहले से यह जानते हैं कि दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की भुजाएँ और कोण दूसरे त्रिभुज की संगत भुजाओं और कोणों के बराबर हों।

अब, निम्न में से कौन-कौन से त्रिभुज आकृति 7.4 (i) में दिए त्रिभुज ABC के सर्वांगसम हैं?


आकृति 7.4

आकृति 7.4 (ii) से आकृति 7.4 (v) तक के प्रत्येक त्रिभुज को काट कर उसे पलट कर ABC पर रखने का प्रयत्न कीजिए। देखिए कि आकृतियों 7.4 (ii), (iii) और (iv) में दिए त्रिभुज ABC के सर्वांगसम हैं, जबकि 7.4 (v) का TSU, ABC के सर्वांगसम नहीं है।

यदि PQR, ABC के सर्वांगसम है, तो हम PQR ABC लिखते हैं।

ध्यान दीजिए कि जब PQR ≅ ∆ ABC हो, तो PQR की भुजाएँ ABC की संगत बराबर भुजाओं पर पड़ेंगी और एेसा ही कोणों के लिए भी होगा।

र्थात् भुजा PQ भुजा AB को ढकती है, भुजा QR भुजा BC को ढकती है और भुजा RP भुजा CA को ढकती है; कोण P कोण A को ढकता है, कोण Q कोण B को ढकता है और कोण R कोण C को ढकता है। साथ ही, दोनों त्रिभुजों के शीर्षों में एक-एक संगतता (one-one correspondence) है। अर्थात् शीर्ष P शीर्ष A के संगत है, शीर्ष Q शीर्ष B के संगत है और शीर्ष R शीर्ष C के संगत है। इसे निम्न रूप में लिखा जाता है :

P A, Q B, R C

ध्यान दीजिए कि इस संगतता के अंतर्गत, PQR ≅ ∆ ABC है। परन्तु इसे QRP ≅ ∆ ABC लिखना गलत होगा।

इसी प्रकार, आकृति 7.4 (iii) के लिए,

FD AB, DE BC और EF CA

तथा F A, D B और E C है।

इसलिए, FDE ≅ ∆ ABC लिखना सही है, परन्तु DEF ≅ ∆ ABC लिखना गलत होगा।

आकृति 7.4 (iv) के त्रिभुज और ABC के बीच संगतता लिखिए।

अत:, त्रिभुजों की सर्वांगसमता को सांकेतिक रूप में लिखने के लिए, उनके शीर्षों की संगतता को सही प्रकार से लिखना आवश्यक है।

ध्यान दीजिए कि सर्वांगसम त्रिभुजों में संगत भाग बराबर होते हैं और ‘सर्वांगसम त्रिभुजों के संगत भागों के लिए’ हम संक्षेप में ‘CPCT’ लिखते हैं।

7.3 त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए कसौटियाँ

पिछली कक्षाओं में, आप त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए चार कसौटियाँ (criteria) या नियम (rules) पढ़ चुके हैं। आइए इनका पुनर्विलोकन करें।

एक भुजा 3 cm लेकर दो त्रिभुज खींचिए (देखिए आकृति 7.5)। क्या ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं? ध्यान दीजिए कि ये त्रिभुज सर्वांगसम नहीं हैं।


आकृति 7.5

अब दो त्रिभुज खींचिए जिनमें एक भुजा 4 cm है और एक कोण 50° है (देखिए आकृति 7.6) । क्या ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं?


आकृति 7.6

देखिए कि ये दोनों त्रिभुज सर्वांगसम नहीं हैं।

इस क्रियाकलाप को त्रिभुजों के कुछ और युग्म खींच कर दोहराइए।

अत:, भुजाओं के एक युग्म की समता अथवा भुजाओं के एक युग्म और कोणों के एक युग्म की समता हमें सर्वांगसम त्रिभुज देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

उस स्थिति में क्या होगा जब बराबर कोणों की भुजाओं का अन्य युग्म भी बराबर हो जाए?

आकृति 7.7 में BC = QR, B = Q और साथ ही AB = PQ है। अब आप ABC और PQR की सर्वांगसमता के बारे में क्या कह सकते हैं?

पिछली कक्षाओं से याद कीजिए कि इस स्थिति में, दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं। आप इसका सत्यापन, ABC को काट कर और उसे PQR पर रख कर कर सकते हैं। इस क्रियाकलाप को त्रिभुजों के अन्य युग्म लेकर दोहराइए। क्या आप देखते हैं कि दो भुजाओं और अंतर्गत कोण की समता त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए पर्याप्त है? हाँ, यह पर्याप्त है।


आकृति 7.7

यह त्रिभुजों की सर्वांगसमता की पहली कसौटी (criterion) है।

अभिगृहीत 7.1 (SAS सर्वांगसमता नियम) : दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और उनका अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और उनके अंतर्गत कोण के बराबर हों।

इस परिणाम को इससे पहले ज्ञात परिणामों की सहायता से सिद्ध नहीं किया जा सकता है और इसीलिए इसे एक अभिगृहीत के रूप में सत्य मान लिया गया है
(देखिए परिशिष्ट
1)।

आइए अब कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 1 : आकृति 7.8 में OA = OB और OD = OC है। दर्शाइए कि

(i) AOD BOC और (ii) AD || BC है।

हल : (i) AOD और BOC में,

OA = OB (दिया है)

OD = OC


आकृति 7.8


साथ ही, क्योंकि AOD और BOC शीर्षाभिमुख कोणों का एक युग्म है, अत:

AOD = BOC

इसलिए, AOD ≅ ∆ BOC (SAS सर्वांगसमता नियम द्वारा)

(ii) सर्वांगसम त्रिभुजों AOD और BOC में, अन्य संगत भाग भी बराबर होंगे।

अत:, OAD = OBC है। परन्तु ये रेखाखंडों AD और BC के लिए एकांतर कोणों का एक युग्म बनाते हैं।

अत:, AD || BC है।

उदाहरण 2 : AB एक रेखाखंड है और रेखा l इसका लम्ब समद्विभाजक है। यदि l पर स्थित P कोई बिंदु है, तो दर्शाइए कि P बिंदुओं A और B से समदूरस्थ (equidistant) है।

हल : l AB है और AB के मध्य-बिंदु C से होकर जाती है (देखिए आकृति 7.9)। आपको दर्शाना है कि PA = PB है। इसके लिए PCA और PCB पर विचार कीजिए। हमें प्राप्त है :


आकृति 7.9

AC = BC (C, AB का मध्य-बिंदु है)

PCA = PCB = 90° (दिया है)

PC = PC (उभयनिष्ठ)

अत:, PCA PCB (SAS नियम)

इसलिए, PA = PB (सर्वांगसम त्रिभुजों की संगत भुजाएँ)

आइए अब दो त्रिभुजों की रचना करें जिनकी दो भुजाएँ 4 cm और 5 cm हैं और एक कोण 50° है तथा साथ ही यह कोण बराबर भुजाओं के बीच अंतर्गत कोण नहीं है
(देखिए आकृति
7.10)। क्या ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं?


आकृति 7.10

ध्यान दीजिए कि ये दोनों त्रिभुज सर्वांगसम नहीं हैं।

त्रिभुजों के कुछ अन्य युग्म लेकर इस क्रियाकलाप को दोहराइए। आप देखेंगे कि दोनों त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए यह आवश्यक है कि बराबर कोण बराबर भुजाओं के अंतर्गत कोण हो।

अत:, SAS नियम तो सत्य है, परन्तु ASS या SSA नियम सत्य नहीं है।

अब, एेसे दो त्रिभुजों की रचना करने का प्रयत्न करिए, जिनमें दो कोण 60° और 45° हों तथा इन कोणों की अंतर्गत भुजा 4 cm हो (देखिए आकृति 7.11)


आकृति 7.11

इन दोनों त्रिभुजों को काटिए और एक त्रिभुज को दूसरे के ऊपर रखिए। आप क्या देखते हैं? देखिए कि एक त्रिभुज दूसरे त्रिभुज को पूर्णतया ढक लेता है, अर्थात् दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं। कुछ और त्रिभुजों को लेकर इस क्रियाकलाप को दोहराइए। आप देखेंगे कि त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए, दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा की समता पर्याप्त है।

यह परिणाम कोण-भुजा-कोण (Angle-Side-Angle) कसौटी है और इसे ASA सर्वांगसमता कसौटी लिखा जाता है। आप पिछली कक्षाओं में, इसकी सत्यता की जाँच कर चुके हैं। आइए इस परिणाम को सिद्ध करें।

चूँकि इस परिणाम को सिद्ध किया जा सकता है, इसलिए इसे एक प्रमेय (theorem) कहा जाता है। इसे सिद्ध करने के लिए, हम SAS सर्वांगसमता नियम का प्रयोग करेंगे।

प्रमेय 7.1 (ASA सर्वांगसमता नियम) : दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि एक त्रिभुज के दो कोण और उनकी अंतर्गत भुजा दूसरे त्रिभुज के दो कोणों और उनकी अंतर्गत भुजा के बराबर हों।

उपपत्ति : हमें दो त्रिभुज ABC और DEF दिए हैं, जिनमें B = E, C = F और BC = EF है। हमें ABC DEF सिद्ध करना है।

दोनों त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए देखिए कि यहाँ तीन स्थितियाँ संभव हैं।

स्थिति (i) : मान लीजिए AB = DE है(देखिए आकृति 7.12)।

अब आप क्या देखते हैं? आप देख सकते हैं कि

AB = DE (कल्पना की है)

B = E (दिया है)

BC = EF (दिया है)

अत:, ABC DEF (SAS नियम द्वारा)


आकृति 7.12

स्थिति (ii) : मान लीजिए, यदि संभव है तो, AB > DE है। इसलिए, हम AB पर एक बिंदु P एेसा ले सकते हैं कि PB = DE हो (देखिए आकृति 7.13)


आकृति 7.13

अब PBC और DEF में,

PB = DE (रचना से)

B = E (दिया है)

BC = EF (दिया है)

अत:, हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि

PBC ≅ ∆ DEF (SAS सर्वांगसमता अभिगृहीत द्वारा)

चूँकि दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं, इसलिए इनके संगत भाग बराबर होने चाहिए।

अत:, PCB = DFE

परन्तु हमें दिया है कि

ACB = DFE

अत:, ACB = PCB

परन्तु क्या यह संभव है?

यह तभी संभव है, जब P बिंदु A के साथ संपाती हो।

या BA = ED

अत:, ABC DEF (SAS अभिगृहीत द्वारा)

स्थिति (iii) : यदि AB < DE हो, तो हम DE पर एक बिंदु M इस प्रकार ले सकते हैं कि
ME = AB
हो। अब स्थिति (ii) वाले तर्कण को दोहराते हुए, हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि AB = DE है और इसीलिए ABC DEF है।

अब मान लीजिए कि दो त्रिभुजों में दो कोणों के युग्म और संगत भुजाओं का एक युग्म बराबर हैं, परन्तु ये भुजाएँ बराबर कोणों के युग्मों की अंतर्गत भुजाएँ नहीं हैं। क्या ये त्रिभुज अभी भी सर्वांगसम हैं? आप देखेंगे कि ये त्रिभुज सर्वांगसम हैं। क्या आप इसका कारण बता सकते हैं?

आप जानते हैं कि त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है। अत: त्रिभुजों के कोणों के दो युग्म बराबर होने पर उनके तीसरे कोण भी बराबर होंगे (180° – दोनों बराबर कोणों का योग)

अत:, दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं, यदि इन त्रिभुजों के दो कोणों के युग्म बराबर हों और संगत भुजाओं का एक युग्म बराबर हो। हम इसे AAS सर्वांगसमता नियम कह सकते हैं।

आइए अब निम्नलिखित क्रियाकलाप करें :

40°, 50° और 90° वाले कुछ त्रिभुज खींचिए।

आप एेसे कितने त्रिभुज खींच सकते हें? वास्तव में, भुजाओं की विभिन्न लंबाइयाँ लेकर हम एेसे जितने चाहे उतने त्रिभुज खींच सकते हैं (देखिए आकृति 7.14)


आकृति 7.14

देखिए कि ये त्रिभुज सर्वांगसम हो भी सकते हैं और नहीं भी हो सकते हैं।

अत:, तीन कोणों की समता त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए, त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए, तीन बराबर भागों में से एक बराबर भाग भुजा अवश्य होना चाहिए।

आइए अब कुछ और उदाहरण लें।

उदाहरण 3 : रेखाखं AB एक अन्य रेखाखंड CD के समांतर है और O रेखाखंड AD का मध्य-बिंदु है (देखिए आकृति 7.15)। दर्शाइए कि (i) AOB ≅ ∆DOC (ii) O रेखाखंड BC का भी मध्य-बिंदु है।

आकृति 7.15

हल : (i) AOB और DOC पर विचार कीजिए।

ABO = DCO (एकांतर कोण और तिर्यक रेखा BC के साथ AB || CD)

AOB = DOC (शीर्षाभिमुख कोण)

OA = OD (दिया है)

अत:, AOB DOC (AAS नियम)

(ii) OB = OC (CPCT)

अर्थात् O, रेखाखंड BC का भी मध्य-बिंदु है।


प्रश्नावली
7.1

1. चतुर्भुज ACBD में, AC = AD है और AB कोण A को समद्विभाजित करता है (देखिए आकृति 7.16)। दर्शाइए कि
ABC ≅ ∆ ABD है।


आकृति 7.16


BC और BD के बारे में आप क्या कह सकते हैं?


2. ABCD एक चतुर्भुज है, जिसमें AD = BC और DAB = CBA है (देखिए आकृति 7.17)। सिद्ध कीजिए कि


आकृति 7.17


(i) ABD BAC

(ii) BD = AC

(iii) ABD = BAC

3. एक रेखाखंड AB पर AD और BC दो बराबर लंब रेखाखंड हैं (देखिए आकृति 7.18)। दर्शाइए कि CD, रेखाखंड AB को समद्विभाजित करता है।

आकृति 7.18

4. l और m दो समांतर रेखाएँ हैं जिन्हें समांतर रेखाओं p और q का एक अन्य युग्म प्रतिच्छेदित करता है (देखिए आकृति 7.19)। दर्शाइए कि ABC CDA है।

आकृति 7.19

5. रेखा l कोण A को समद्विभाजित करती है और B रेखा l पर स्थित कोई बिंदु है। BP और BQ कोण A की भुजाओं पर B से डाले गए लम्ब हैं (देखिए आकृति 7.20)। दर्शाइए कि


आकृति 7.20


(i) APB AQB

(ii) BP = BQ है, अर्थात् बिंदु B कोण की भुजाओं से समदूरस्थ है

6. आकृति 7.21 में, AC = AE, AB = AD और BAD = EAC है। दर्शाइए कि BC = DE है।

आकृति 7.21

7. AB एक रेखाखंड है और P इसका मध्य-बिंदु है। D और E रेखाखंड AB के एक ही ओर स्थित दो बिंदु इस प्रकार हैं कि BAD = ABE और EPA = DPB है। (देखिए आकृति 7.22)। दर्शाइए कि

आकृति 7.22

(i) DAP EBP

(ii) AD = BE

8. एक समकोण त्रिभुज ABC में, जिसमें कोण C समकोण है, M कर्ण AB का मध्य-बिंदु है। C को M से मिलाकर D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि DM = CM है। बिंदु D को बिंदु B से मिला दिया जाता है (देखिए आकृति 7.23)। दर्शाइए कि


आकृति 7.23


(i) AMC BMD

(ii) DBC एक समकोण है

(iii) DBC ACB

(iv) CM = AB

7.4 एक त्रिभुज के कुछ गुण

पिछले अनुच्छेद में, आपने त्रिभुजों की सर्वांगसमता की दो कसौटियों का अध्ययन किया है। आइए इन परिणामों का एक एेसे त्रिभुज के कुछ गुणों का अध्ययन करने में प्रयोग करें जिसकी दो भुजाएँ बराबर होती हैं।

नीचे दिया गया क्रियाकलाप कीजिए:

क त्रिभुज की रचना कीजिए जिसकी दो भुजाएँ बराबर हों। मान लीजिए दो भुजाएँ 3.5 cm लंबाई की हैं और एक भुजा 5 cm लंबाई की है (देखिए आकृति 7.24)। आप पिछली कक्षाओं में, एेसी रचनाएँ कर चुके हैं।

क्या आपको याद है कि इस त्रिभुज को क्या कहते हैं?

एक त्रिभुज जिसकी दो भुजाएँ बराबर हों समद्विबाहु त्रिभुज (isosceles triangle) कहलाता है। अत:, आकृति 7.24 का ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है।

आकृति 7.24

अब B और C को मापिए। आप क्या देखते हैं?

विभिन्न भुजाओं वाले अन्य समद्विबाहु त्रिभुज लेकर इस क्रियाकलाप को दोहराइए। आप देख सकते हैं कि एेसे प्रत्येक त्रिभुज में बराबर भुजाओं के सम्मुख (सामने के) कोण बराबर हैं।

यह एक अति महत्वपूर्ण परिणाम है और प्रत्येक समद्विबाहु त्रिभुज के लिए सत्य है।

इसे नीचे दशाई विधि के अनुसार सिद्ध किया जा सकता है:

प्रमेय 7.2 : एक समद्विबाहु त्रिभुज की बराबर भुजाओें के सम्मुख कोण बराबर होते हैं। इस परिणाम को कई विधियों से सिद्ध किया जा सकता है। इनमें से एक उपपत्ति नीचे दी जा रही है।

उपपत्ति : हमें एक समद्विबाहु ABC दिया है, जिसमें
AB = AC
है। हमें B = C सिद्ध करना है।

आइए A का समद्विभाजक खींचे। मान लीजिए यह BC से D पर मिलता है (देखिए आकृति 7.25)

आकृति 7.25

अब, BAD और CAD में,

AB = AC (दिया है)

BAD = CAD (रचना से)

AD = AD (उभयनिष्ठ)

अत:, BAD CAD (SAS नियम द्वारा)

इसलिए, ABD = ACD (CPCT)

अर्थात् B = C

क्या इसका विलोम भी सत्य है? अर्थात्

यदि किसी त्रिभुज के दो कोण बराबर हों, तो क्या हम निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि उनकी सम्मुख भुजाएँ भी बराबर होंगी?

नीचे दिया क्रियाकलाप कीजिए :

एक ABC की रचना कीजिए जिसमें BC किसी भी लंबाई वाली एक भुजा है और  B = C = 50º है। A का समद्विभाजक खींचिए और मान लीजिए कि यह BC को D पर प्रतिच्छेद करता है (देखिए आकृति 7.26)


आकृति 7.26


त्रिभुज ABC को कागज में से काट लीजिए और इसे AD के अनुदिश मोड़िए ताकि शीर्ष C शीर्ष B पर गिरे (पड़े)।

AC और AB के बारे में आप क्या कह सकते हैं?

देखिए कि AC, AB को पूर्णतया ढक लेती है।

अत:, AC = AB

इसी क्रियाकलाप को एेसे ही कुछ अन्य त्रिभुज लेकर दोहराइए। प्रत्येक बार आप देखेंगे कि एक त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं। अत:, हम निम्न प्रमेय प्राप्त करते हैं :

प्रमेय 7.3 : किसी त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं। यह प्रमेय 7.2 का विलोम है। आप इस प्रमेय को ASA सर्वांगसमता नियम का प्रयोग करके सिद्ध कर सकते हैं। आइए इन परिणामों को स्पष्ट करने के लिए कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 4 : ABC में, A का समद्विभाजक AD भुजा BC पर लम्ब है (देखिए आकृति 7.27) दर्शाइए कि AB = AC है और ABC समद्विबाहु है।


आकृति 7.27


हल : ABD और ACD में,

BAD = CAD (दिया है)

AD = AD (उभयनिष्ठ)

ADB = ADC = 90° (दिया है)

अत:, ABD ACD (ASA निय)

इसलिए, AB = AC (CPCT)

इसी कारण ABC समद्विबाहु है।

उदाहरण 5 : E और F क्रमश: त्रिभुज ABC की बराबर भुजाओं AB और AC के मध्य-बिंदु हैं (देखिए आकृति 7.28)। दर्शाइए कि BF = CE है।

आकृति 7.28

हल : ABF और ACE में,

AB = AC (दिया है)

A = A (उभयनिष्ठ)

AF = AE (बराबर भुजाओं के आधे)

अत:, ABF ACE (SAS नियम)

इसलिए, BF = CE (CPCT)

उदाहरण 6 : एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC जिसमें AB = AC है, की भुजा BC पर दो बिंदु D और E इस प्रकार हैं कि BE = CD है (देखिए आकृति 7.29)। दर्शाइए कि AD = AE है।


आकृति 7.29


हल : ABD और ACE में,

AB = AC (दिया है) (1)

B = C (2)

(बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण)

साथ ही, BE = CD (दिया है)

इसलिए, BE – DE = CD – DE

अर्थात्, BD = CE (3)

अत:, ABD ACE [ (1), (2), (3) और SAS नियम द्वारा]

इससे प्राप्त होता है: AD = AE (CPCT)


प्रश्नावली
7.2

1. एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC में जिसमें AB = AC है, B और C के समद्विभाजक परस्पर बिंदु O पर प्रतिच्छेद करते हैं। A और O को जोड़िए। दर्शाइए कि

(i) OB = OC

(ii) AO कोण A को समद्विभाजित करता है

2. ABC में AD भुजा BC का लम्ब समद्विभाजक है (देखिए आकृति 7.30)। दर्शाइए कि ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है।


आकृति 7.30


3. ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें बराबर भुजाओं AC और AB पर क्रमश: शीर्षलम्ब BE और CF खींचे गए हैं (देखिए आकृति 7.31)। दर्शाइए कि ये शीर्षलम्ब बराबर हैं।


आकृति 7.31


4. ABC एक त्रिभुज है जिसमें AC और AB पर खींचे गए शीर्षलम्ब BE और CF बराबर हैं (देखिए आकृति 7.32)। दर्शाइए कि

(i) ABE ACF

(ii) AB = AC, अर्थात् ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।


आकृति 7.32


5. ABC और DBC समान आधार BC पर स्थित दो समद्विबाहु त्रिभुज है (देखिए आकृति 7.33)। दर्शाइए कि
ABD = ACD है।


आकृति 7.33


6. ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है, जिसमें AB = AC है। भुजा BA बिंदु D तक इस प्रकार बढ़ाई गई है कि AD = AB है (देखिए आकृति 7.34)। दर्शाइए कि BCD एक समकोण है।


आकृति 7.34


7. ABC एक समकोण त्रिभुज है, जिसमें A = 90° और AB = AC है। B और C ज्ञात कीजिए।

8. दर्शाइए कि किसी समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° होता है।


7.5
त्रिभुजोें की सर्वांगसमता के लिए कुछ और कसौटियाँ

आप इस अध्याय में, पहले यह देख चुके हैं कि एक त्रिभुज के तीनों कोणों के दूसरे त्रिभुज के तीनों कोणों के बराबर होने पर दोनों त्रिभुजों का सर्वांगसम होना आवश्यक नहीं है। आप सोच सकते हैं कि संभवत: एक त्रिभुज की तीनों भुजाओं के दूसरे त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर होने पर त्रिभुज सर्वांगसम हो जाएँ। आप यह पिछली कक्षाओं में पढ़ चुके हैं कि एेसी स्थिति में त्रिभुज नि:संदेह सर्वांगसम होते हैं।

इस धारणा को निश्चित करने के लिए, 4cm, 3.5cm और 4.5cm के दो त्रिभुज खींचिए (देखिए आकृति 7.35)। इन्हें काटकर, एक दूसरे पर रखिए। आप क्या देखते हैं? यदि बराबर भुजाओं को एक दूसरे पर रखा जाए। ये एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं अत:, दोनों त्रिभुज सर्वांगसम हैं।

आकृति 7.35


इस क्रि
याकलाप को कुछ अन्य त्रिभुज खींचकर दोहराइए। इस प्रकार, हम सर्वांगसमता के एक और नियम पर पहुँच जाते हैं:

प्रमेय 7.4 (SSS सर्वांगसमता नियम ) : यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ एक अन्य त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।

एक उपयुक्त रचना करके, इस प्रमेय को सिद्ध किया जा सकता है।

आप SAS सर्वांगसमता नियम में पहले ही देख चुके हैं कि बराबर कोणों के युग्म संगत बराबर भुजाओं के युग्मों के बीच में (अंतर्गत) होने चाहिए और यदि एेसा नहीं हो, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम नहीं भी हो सकते हैं।

इस क्रियाकलाप को कीजिए :

दो समकोण त्रिभुज एेसे खींचिए जिनमें प्रत्येक का कर्ण 5 सेमी और एक भुजा 4 cm की हो (देखिए आकृति 7.36)।

आकृति 7.36

इन्हें काटिए और एक दूसरे पर इस प्रकार रखिए कि इनकी बराबर भुजाएँ एक दूसरे पर आएँ। यदि आवश्यक हो, तो त्रिभुजों को घुमाइए। आप क्या देखते हैं?

आप देखते हैं कि दोनों त्रिभुज एक दूसरे को पूर्णतया ढक लेते हैं और इसीलिए ये सर्वांगसम हैं। यही क्रियाकलाप समकोण त्रिभुजों के अन्य युग्म लेकर दोहराइए। आप क्या देखते हैं?

आप पाएँगे कि दोनों समकोण त्रिभुज सर्वांगसम होंगे, यदि उनके कर्ण बराबर हों और भुजाओं का एक युग्म बराबर हो। आप इस तथ्य की जाँच पिछली कक्षाओं में कर चुके हैं।

ध्यान दीजिए कि इस स्थिति में समकोण अंतर्गत कोण नहीं है।

इस प्रकार, आप निम्नलिखित सर्वांगसमता नियम पर पहुँच गए हैं:

प्रमेय 7.5 (RHS सर्वांगसमता नियम) : यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा क्रमश: दूसरे त्रिभुज के कर्ण और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।

ध्यान दीजिए कि यहाँ RHS समकोण (Right angle) - कर्ण (Hypotenuse) - भुजा (Side) को दर्शाता है।

आइए अब कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 7 : AB एक रेखाखंड है तथा बिंदु P और Q इस रेखाखंड AB के विपरीत ओर इस प्रकार स्थित हैं कि इनमें से प्रत्येक A और B से समदूरस्थ है (देखिए आकृति 7.37)। दर्शाइए कि रेखा PQ रेखाखंड AB का लम्ब समद्विभाजक है।


आकृति 7.37

हल : पको PA = PB और QA = QB दिया हुआ है। आपको दर्शाना है कि PQ AB है और PQ रेखाखंड AB को समद्विभाजित करती है। मान लीजिए रेखा PQ रेखाखंड AB को C पर प्रतिच्छेद करती है। क्या आप इस आकृति में दो सर्वांगसम त्रिभुजों को देख सकते हैं?

आइए PAQ और PBQ लें।

इन त्रिभुजों में,

AP = BP (दिया है)

AQ = BQ (दिया है)

PQ = PQ (उभयनिष्ठ)

अत:, PAQ ≅ ∆ PBQ (SSS नियम)

इसलिए, APQ = BPQ (CPCT)

अब PAC और PBC को लीजिए। आपको प्राप्त है :

AP = BP (दिया है)

APC = BPC (APQ = BPQ ऊपर सिद्ध किया है)

PC = PC (उभयनिष्ठ)

अत:, PAC ≅ ∆ PBC (SAS नियम)

इसलिए, AC = BC (CPCT) (1)

और ACP = BCP (CPCT)

साथ ही, ACP + BCP = 180° (रैखिक युग्म)

इसलिए, 2ACP = 180°

या, ACP = 90° (2)

(1) और (2) से, आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि रेखा PQ रेखाखंड AB का लम्ब समद्विभाजक है।

[ध्यान दीजिए कि PAQ और PBQ की सर्वांगसमता दर्शाए बिना, आप यह नहीं दिखा सकते कि PAC PBC है, यद्यपि AP = BP (दिया है), PC = PC (उभयनिष्ठ) और PAC = PBC (APB में बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण) है। यह इस कारण है कि इनसे हमें SSA नियम प्राप्त होता है, जो त्रिभुजों की सर्वांगसमता के लिए सदैव मान्य नहीं है। साथ ही, कोण बराबर भुजाओं के अंतर्गत नहीं है।]

इए कुछ और उदाहरण लें।

उदाहरण 8 : बिंदु A पर प्रतिच्छेद करने वाली दो रेखाओं l और m से समदूरस्थ एक बिंदु P है (देखिए आकृति 7.38)। दर्शाइए कि रेखा AP दोनों रेखाओं के बीच के कोण को समद्विभाजित करती है।


आकृति 7.38


हल : आपको दिया है कि रेखाएँ l और m परस्पर A पर प्रतिच्छेद करती हैं। मान लीजिए PB l और PC m है। यह दिया है कि PB = PC है।

आपको दर्शाना है कि PAB = PAC है।

अब, PAB और PAC में,

PB = PC (दिया है)

PBA = PCA = 90° (दिया है)

PA = PA (उभयनिष्ठ)

अत:, PAB PAC (RHS नियम)

इसलिए, PAB = PAC (CPCT)

ध्यान दीजिए कि यह परिणाम प्रश्नावली 7.1 के प्रश्न 5 में सिद्ध किए गए परिणाम का विलोम है।


प्रश्नावली
7.3

1. ABC और DBC एक ही आधार BC पर बने दो समद्विबाहु त्रिभुज इस प्रकार हैं कि A और D भुजा BC के एक ही ओर स्थित हैं (देखिए आकृति 7.39)। यदि AD बढ़ाने पर BC को P पर प्रतिच्छेद करे, तो दर्शाइए कि

आकृति 7.39

(i) ABD ACD

(ii) ABP ≅ ∆ ACP

(iii) AP कोण A और कोण D दोनों को समद्विभाजित करता है।

(iv) AP रेखाखंड BC का लम्ब समद्विभाजक है।

2. AD एक समद्विबाहु त्रिभुज ABC का एक शीर्षलम्ब है, जिसमें AB = AC है। दर्शाइए कि

(i) AD रेखाखंड BC को समद्विभाजित करता है। (ii) AD कोण A को समद्विभाजित करता हैै।

3. एक त्रिभुज ABC की दो भुजाएँ AB और BC तथा माध्यिका AM क्रमश: एक दूसरे त्रिभुज की भुजाओं PQ और QR तथा माध्यिका PN के बराबर हैं (देखिए आकृति 7.40)। दर्शाइए कि

आकृति 7.40

(i) ABM PQN

(ii) ABC ≅ ∆ PQR

4. BE और CF एक त्रिभुज ABC के दो बराबर शीर्षलम्ब हैं। RHS सर्वांगसमता नियम का प्रयोग करके सिद्ध कीजिए कि ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है।

5. ABC एक समद्विबाहु त्रिभुज है जिसमें AB = AC है। AP BC खींच कर दर्शाइए कि B = C है।


7.6
एक त्रिभुज में असमिकाएँ

अभी तक, आपने मुख्यत: एक त्रिभुज (अथवा त्रिभुजों) की भुजाओं और कोणों की समताओं (समिकाओं) के बारे में ही पढ़ा है। कभी-कभी हमारे सम्मुख असमान (जो बराबर नहीं हैं) वस्तुएँ भी आती हैं और हमें इनकी तुलना भी करनी पड़ती है। उदाहरणार्थ, आकृति 7.41 (i) में, रेखाखंड AB रेखाखंड CD से बड़ा है और आकृति 7.41 (ii) में, A, B से बड़ा है।

आकृति 7.41

आइए अब इसकी जाँच करें कि क्या किसी त्रिभुज में असमान भुजाओं और असमान कोणों में कुछ सम्बन्ध होता है। इसके लिए, आइए निम्न क्रियाकलाप करें :

क्रियाकलाप : एक ड्राइंग बोर्ड पर दो स्थानों (बिंदुओं) B और C पर दो पिन लगाइए और उनको एक धागे से बाँध कर त्रिभुज की भुजा BC बनाइए।

एक अन्य धागे के एक सिरे को C पर लगाइए और दूसरे (मुक्त) सिरे पर एक पेंसिल बाँध लीजिए। पेंसिल से एक बिंदु A अंकित कीजिए औ ABC खींचिए (देखिए आकृति 7.42)। अब पेंसिल को हटा कर CA पर A के आगे एक अन्य बिंदु A (A की नई स्थिति) अंकित कीजिए।


आकृति 7.42


अत:, AC > AC (लम्बाइयों की तुलना करने पर)

A को B से मिलाकर ABC पूरा कीजिए। आप ABC और ABC के बारे में क्या कह सकते हैं?

इनकी तुलना कीजिए। आप क्या देखते हैं?

स्पष्टत:, ABC > ABC है।

CA (बढ़ाई हुई) पर और अधिक बिंदु अंकित करते रहिए, तथा अंकित बिंदुओं और भुजा BC के साथ त्रिभुज खींचते रहिए।

आप देखेंगे कि जैसे-जैसे AC बढ़ती जाती है (A की विभिन्न स्थितियों को अंकित करने पर), वैसे-वैसे इसका सम्मुख कोण, अर्थात् B भी बढ़ता जाता है।

आइए अब एक अन्य क्रियाकलाप करें :

क्रियाकलाप : एक विषमबाहु त्रिभुज खींचिए (अर्थात् एेसा त्रिभुज जिसमें सभी भुजाओं की लम्बाइयाँ भिन्न-भिन्न हों)।

इस त्रिभुज की भुजाओं की लम्बाइयाँ मापिए और इसके कोण भी मापिए। आप क्या देखते हैं?

आकृति 7.43 के ABC में, BC सबसे लम्बी भुजा है और AC सबसे छोटी भुजा है।

आकृति 7.43

साथ ही, A सबसे बड़ा है और B सबसे छोटा है।

कुछ और त्रिभुज खींच कर इस क्रियाकलाप को दोहराइए।

हम त्रिभुजों की असमिकाओं के एक अति महत्वपूर्ण गुण पर पहुँच जाते हैं। इसे एक प्रमेय के रूप में नीचे व्यक्त किया जा रहा है :

प्रमेय 7.6 : यदि किसी त्रिभुज की दो भुजाऍं असमान हों, तो लम्बी भुजा के सामने का सम्मुख कोण बड़ा होता है।

आप आकृति 7.43 में, BC पर एक बिंदु P इस प्रकार लेकर कि CA = CP हो, इस प्रमेय को सिद्ध कर सकते हैं।

आइए अब एक और क्रियाकलाप करें :

क्रियाकलाप : एक रेखाखंड AB खींचिए। A को केन्द्र मानकर और कोई त्रिज्या लेकर एक चाप लगाइए। इस चाप पर विभिन्न बिंदु P, Q, R, S, T अंकित कीजिए।

इन बिंदुओं को A और B दोनों से जोड़िए (देखिए आकृति 7.44)। ध्यान दीजिए कि जैसे-जैसे हम P से T की ओर चलते हैं, वैसे-वैसे A बढ़ता जाता है। इसकी सम्मुख भुजाओं की लम्बाइयों को क्या होता जा रहा है। ध्यान दीजिए कि सम्मुख भुजाओं की लम्बाइयाँ भी बढ़ती जा रही हैं। अर्थात् TAB > SAB > RAB >QAB > PAB और
TB > SB > RB > QB > PB
है।

आकृति 7.44

अब कोई एेसा त्रिभुज खींचिए जिसके सभी कोण असमान हों। इस त्रिभुज की भुजाओं को मापिए (देखिए आकृति 7.45)।

देखिए कि सबसे बड़े कोण की सम्मुख भुजा सबसे लम्बी है। आकृति 7.45 में, B सबसे बड़ा कोण है और AC सबसे लम्बी भुजा है।

आकृति 7.45

कुछ और त्रिभुज खींच कर इस क्रियाकलाप को दोहराइए और देखिए कि प्रमेय 7.6 का विलोम भी सत्य है। इस प्रकार, हम निम्न प्रमेय पर पहुँचते हैं :

प्रमेय 7.7 : किसी त्रिभुज में, बड़े कोण की सम्मुख भुजा बड़ी (लम्बी) होती है।

इस प्रमेय को विरोधाभास की विधि (method of contradiction) से सिद्ध किया जा सकता है।

अब एक त्रिभुज ABC खींचिए और इसमें AB + BC, BC + AC और AC + AB ज्ञात कीजिए। आप क्या देखते हैं?

आप देखेंगे कि AB + BC > AC, BC + AC > AB और AC + AB > BC है।

कुछ अन्य त्रिभुज लेकर, इस क्रियाकलाप को दोहराइए और निम्न प्रमेय पर पहुँचिए :

प्रमेय 7.8 : त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता है।


आकृति 7.46


आकृति 7.46 में, देखिए कि ABC की भुजा BA को एक बिंदु D तक इस प्रकार बढ़ाया गया है कि AD = AC है। क्या आप दर्शा सकते हैं कि  BCD > BDC है और BA + AC > BC है?

क्या आप उपरोक्त प्रमेय की उत्पत्ति पर पहुँच गए हैं?

आइए इन परिणामों पर आधारित कुछ उदाहरण लें।

उदाहरण 9 : की भुजा BC पर D एक एेसा बिंदु है कि AD = AC है (देखिए आकृति 7.47)। दर्शाइए कि AB > AD है।


आकृति 7.47


हल : DAC में,

AD = AC (दिया है)

इसलिए, ADC = ACD

(बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण)

अब, ADC त्रिभुज ABD का एक बहिष्कोण है।

इसलिए, ADC > ABD

या, ACD > ABD

या, ACB > ABC

अत:, AB > AC (ABC में बड़े कोण की सम्मुख भुजा)

या, AB > AD (AD = AC)


प्रश्नावली
7.4

1. दर्शाइए कि समकोण त्रिभुज में कर्ण सबसे लंबी भुजा होती है।

2. आकृति 7.48 में, ABC की भुजाओं AB और AC को क्रमश: बिंदुओं P और Q तक बढ़ाया गया है। साथ ही,
PBC < QCB है। दर्शाइए कि AC > AB है।


आकृति 7.48


3. आकृति 7.49 मेंB < A और C < D है। दर्शाइए कि AD < BC है।


आकृति 7.49


4. AB और CD क्रमश: एक चतुर्भुज ABCD की सबसे छोटी और सबसे बड़ी भुजाएँ हैं (देखिए आकृति 7.50)। दर्शाइए कि A > C और B > D है।


आकृति 7.50


5. आकृति 7.51 में, PR > PQ है और PS कोण QPR को समद्विभाजित करता है। सिद्ध कीजिए कि PSR > PSQ है।

आकृति 7.51

6. दर्शाइए कि एक रेखा पर एक दिए हुए बिंदु से, जो उस रेखा पर स्थित नहीं है, जितने रेखाखंड खींचे जा सकते हैं उनमें लम्ब रेखाखंड सबसे छोटा होता है।


प्रश्नावली
7.5 (एेच्छिक)*

1. ABC एक त्रिभुज है। इसके अभ्यंतर में एक एेसा बिंदु ज्ञात कीजिए जो ABC के तीनों शीर्षों से समदूरस्थ है।

2. किसी त्रिभुज के अभ्यंतर में एक एेसा बिंदु ज्ञात कीजिए जो त्रिभुज की सभी भुजाओं से समदूरस्थ है।

3. एक बड़े पार्क में, लोग तीन बिंदुओं (स्थानों) पर केन्द्रित हैं (देखिए आकृति 7.52):


आकृति 7.52


A : जहाँ बच्चों के लिए फिसल पट्टी और झूले हैं।

B : जिसके पास मानव-निर्मित एक झील है।

C : जो एक बड़े पार्किंग स्थल और बाहर निकलने के रास्ते के निकट है।

एक आइसक्रीम का स्टॉल कहाँ लगाना चाहिए ताकि वहाँ लोगों की अधिकतम संख्या पहुँच सके?

(संकेत : स्टॉल को A, B और C से समदूरस्थ होना चाहिए।)


* यह प्रश्नावली परीक्षा की दृष्टि से नहीं दी गई है।


4. षडभुजीय और तारे के आकार की रंगोलियों [देखिए आकृति 7.53 (i) और (ii)] को 1 cm भुजा वाले समबाहु त्रिभुजों से भर कर पूरा कीजिए। प्रत्येक स्थिति में, त्रिभुजों की संख्या गिनिए। किसमें अधिक त्रिभुज हैं?

आकृति 7.53


7.7
सारांश

इस अध्याय में, आपने निम्न बिंदुओं का अध्ययन किया है:

1. दो आकृतियाँ सर्वांगसम होती हैं, यदि उनका एक ही आकार हो और एक ही माप हो।

2. समान त्रिज्याओें वाले दो वृत्त सर्वांगसम होते हैं।

3. समान भुजाओं वाले दो वर्ग सर्वांगसम होते हैं।

4. दि त्रिभुज ABC और PQR संगतता A P, B Q और C R, के अंतर्गत सर्वांगसम हों, तो उन्हें सांकेतिक रूप में ABC PQR लिखते हैं।

5. यदि एक त्रिभुज की दो भुजाएँ और अंतर्गत कोण दूसरे त्रिभुज की दो भुजाओं और अंतर्गत कोण के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं (SAS सर्वांगसमता नियम)

6. यदि एक त्रिभुज के दो कोण और अंतर्गत भुजा दूसरे त्रिभुज के दो कोणों और अंतर्गत भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं (ASA सर्वांगसमता नियम)

7. यदि एक त्रिभुज के दो कोण और एक भुजा दूसरे त्रिभुज के दो कोणों और संगत भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं (AAS सर्वांगसमता नियम)

8. त्रिभुज की बराबर भुजाओं के सम्मुख कोण बराबर होते हैं।

9. त्रिभुज के बराबर कोणों की सम्मुख भुजाएँ बराबर होती हैं।

10. किसी समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण 60° का होता है।

11. यदि एक त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दूसरे त्रिभुज की तीनों भुजाओं के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं (SSS सर्वांगसमता नियम)

12. यदि दो समकोण त्रिभुजों में, एक त्रिभुज का कर्ण और एक भुजा क्रमश: दूसरे त्रिभुज के कर्ण और एक भुजा के बराबर हों, तो दोनों त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं (RHS सर्वांगसमता नियम)

13. किसी त्रिभुज में, लंबी (बड़ी) भुजा का सम्मुख कोण बड़ा होता है।

14. किसी त्रिभुज में, बड़े कोण की सम्मुख भुजा लंबी (बड़ी) होती है।

15. किसी त्रिभुज में, दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से बड़ा होता हैै।

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