अध्याय 6 रेखाएँ और कोण 6ण्1 भूमिका अध्याय 5 में, आप पढ़ चुके हैं कि एक रेखा को खींचने के लिए न्यूनतम दो बिंदुओं की आवश्यकता होती है। आपने वुफछ अभ्िागृहीतों ;ंगपवउेद्ध का भी अध्ययन किया है और उनकी सहायता से वुफछ अन्य कथनों को सि( किया है। इस अध्याय में, आप कोणों के उन गुणों का अध्ययन करेंगे जब दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं और कोणों के उन गुणों का भी अध्ययन करेंगे जब एक रेखा दो या अध्िक समांतर रेखाओं को भ्िान्न - भ्िान्न बिंदुओं पर काटती है। साथ ही, आप इन गुणों का निगमनिक तवर्फण ;कमकनबजपअम तमंेवदपदहद्ध द्वारा वुफछ कथनों को सि( करने में भी प्रयोग करेंगे ;देख्िाए परिश्िाष्ट 1द्ध। आप पिछली कक्षाओं में इन कथनों की वुफछ ियाकलापों द्वारा जाँच ;पुष्िटद्ध कर चुके हैं। आप अपने दैनिक जीवन में समतल पृष्ठों के किनारों ;मकहमेद्ध के बीच बने अनेक प्रकार के कोण देखते हैं। समतल पृष्ठों का प्रयोग करके, एक ही प्रकार के माॅडल बनाने के लिए, आपको कोणों के बारे में विस्तृत जानकारी की आवश्यकता होती है। उदाहरणाथर्, आप अपने विद्यालय की प्रदश्िार्नी के लिए बाँसों का प्रयोग करके एक झोंपड़ी का माॅडल बनाना चाहते हैं। सोचिए, आप इसे वैफसे बनाएँगे। वुफछ बाँसों को आप परस्पर समांतर रखेंगे और वुफछ को तिरछा रखेंगे। जब एक आविर्फटेक्ट ;ंतबीपजमबजद्ध एक बहुतलीय भवन के लिए एक रेखाचित्रा खींचता है, तो उसे विभ्िान्न कोणों पर प्रतिच्छेदी और समांतर रेखाएँ खींचनी पड़ती हैं। क्या आप सोचते हैं कि वह रेखाओं और कोणों के ज्ञान के बिना इस भवन की रूपरेखा खींच सकता है? विज्ञान में, आप प्रकाश के गुणों का किरण आरेख ;तंल कपंहतंउेद्ध खींच कर अध्ययन करते हैं। उदाहरणाथर्, प्रकाश के अपवतर्न ;तमतिंबजपवदद्ध गुण का अध्ययन करने के लिए, जब प्रकाश की किरणें एक माध्यम ;उमकपनउद्ध से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, आप प्रतिच्छेदी रेखाओं और समांतर रेखाओं के गुणों का प्रयोग करते हैं। जब एक पिंड पर दो या अध्िक बल कायर् कर रहे हों, तो आप इन बलों का उस पिंड पर परिणामी बल ज्ञात करने के लिए, एक ऐसा आरेख खींचते हैं जिसमें बलों को दिष्ट रेखाखंडों ;कपतमबजमक सपदम ेमहउमदजेद्ध द्वारा निरूपित किया जाता है। उस समय, आपको उन कोणों के बीच संबंध् जानने की आवश्यकता होगी जिनकी किरणें ;अथवा रेखाखंडद्ध परस्पर समांतर या प्रतिच्छेदी होंगी। एक मीनार कीऊँचाइर् ज्ञात करने अथवा किसी जहाज की एक प्रकाश पुंज ;सपहीज ीवनेमद्ध से दूरी ज्ञात करने के लिए, हमें क्षैतिज और दृष्िट रेखा ;सपदम व िेपहीजद्ध के बीच बने कोण की जानकारी की आवश्यकता होगी। प्रचुर मात्रा में ऐसे उदाहरण दिए जा सकते हैं जहाँ रेखाओं और कोणों का प्रयोग किया जाता है।ज्यामिति के आने वाले अध्यायों में, आप रेखाओं और कोणों के इन गुणों का अन्य उपयोगी गुणों को निगमित ;निकालनेद्ध करने में प्रयोग करेंगे। आइए पहले हम पिछली कक्षाओं में रेखाओं और कोणों से संबंध्ित पढ़े गए पदों और परिभाषाओं का पुनविर्लोकन करें। 6ण्2 आधरभूत पद और परिभाषाएँ याद कीजिए कि एक रेखा का वह भाग जिसके दो अंत बिंदु हों एक रेखाखंड कहलाता है और रेखा का वह भाग जिसका एक अंत बिंदु हो एक किरण कहलाता है। ध्यान दीजिए कि रेखाखंड ।ठ को ।ठ से व्यक्त किया जाता है और उसकी लंबाइर् को ।ठ से व्यक्त किया जाता है। किरण।ठ को ।ठ से और रेखा ।ठ को ।ठ से व्यक्त किया जाता है।परन्तु हम इन संकेतनों का प्रयोग नहीं करेंगे तथा रेखा ।ठए किरण ।ठ, रेखाखंड ।ठ और उसकी लंबाइर् को एक ही संकेत ।ठ से व्यक्त करेंगे। इनका अथर् संदभर् से स्पष्ट हो जाएगा। कभी - कभी छोटे अक्षर जैसे सए उए द इत्यादि का प्रयोग रेखाओं को व्यक्त करने में किया जाएगा। यदि तीन या अध्िक बिंदु एक ही रेखा पर स्िथत हों, तो वे संरेख बिंदु ;बवससपदमंत चवपदजेद्ध कहलाते हैं, अन्यथा वे असंरेख बिंदु ;दवद.बवससपदमंत चवपदजेद्ध कहलाते हैं। याद कीजिए कि जब दो किरणें एक ही अंत बिंदु से प्रारम्भ होती हैं, तो एक कोण ;ंदहसमद्ध बनता है। कोण को बनाने वाली दोनों किरणें कोण की भुजाएँ ;ंतउे या ेपकमेद्ध कहलाती हैं और वह उभयनिष्ठ अंत बिंदु कोण का शीषर् ;अमतजमगद्ध कहलाता है। आप पिछली कक्षाओं में, विभ्िान्न प्रकार के कोणों जैसे न्यून कोण ;ंबनजम ंदहसमद्धए समकोण ;तपहीज ंदहसमद्धए अध्िक कोण ;वइजनेम ंदहसमद्धए ट्टजु कोण ;ेजतंपहीज ंदहसमद्ध और प्रतिवतीर् कोण ;तमसिमग ंदहसमद्ध के बारे में पढ़ चुके हैं ;देख्िाए आकृति 6.1द्ध। ;पद्ध न्यून कोणरू 0° ढ ग ढ 90° ;पपद्ध समकोणरू ल त्र 90° ;पपपद्ध अध्िक कोणरू 90° ढ ्र ढ 180° ;पअद्ध ट्टजु कोणरू े त्र 180° ;अद्ध प्रतिवतीर् कोण रू 180° ढ ज ढ 360° आकृति 6ण्1 रू कोणों के प्रकार एक न्यून कोण का माप 0ह् और 90ह् के बीच होता है, जबकि एक समकोण का माप ठीक 90ह् होता है। 90ह् से अध्िक परन्तु 180ह् से कम माप वाला कोण अध्िक कोण कहलाता है। साथ ही, याद कीजिए कि एक ट्टजु कोण 180ह् के बराबर होता है। वह कोण जो 180ह् से अध्िक, परन्तु 360ह् से कम माप का होता है एक प्रतिवतीर् कोण कहलाता है। इसके अतिरिक्त, यदि दो कोणों का योग एक समकोण के बराबर हो, तो ऐसे कोण पूरक कोण ;बवउचसमउमदजंतल ंदहसमेद्ध कहलाते हैं और वे दो कोण, जिनका योग 180ह् हो, संपूरक कोण ;ेनचचसमउमदजंतल ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। आप पिछली कक्षाओं में आसन्न कोणों ;ंकरंबमदज ंदहसमेद्ध के बारे में भी पढ़ चुके हैं;देख्िाए आकृति 6ण्2द्ध। दो कोण आसन्न कोण ;ंकरंबमदज ंदहसमेद्ध कहलाते हैं, यदि उनमें एक उभयनिष्ठ शीषर् हो, एक उभयनिष्ठ भुजा हो और उनकी वे भुजाएँ जो उभयनिष्ठ नहीं हैं, उभयनिष्ठभुजा के विपरीत ओर स्िथत हों। आकृति 6.2 में, ∠ ।ठक् और ∠ क्ठब् आसन्न कोण हैं। किरण ठक् आकृति 6ण्2 रू आसन्न कोणइनकी उभयनिष्ठ भुजा है और ठ इनका उभयनिष्ठ शीषर् है। किरण ठ। और किरण ठब् वे भुजाएँ हैं जो उभयनिष्ठ नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, जब दो कोण आसन्न कोण होते हैं, तो उनका योग उस कोण के बराबर होता है जो इनकी उन भुजाओं से बनता है, जो उभयनिष्ठ नहीं हैं। अतः हम लिख सकते हैं कि ∠ ।ठब् त्र ∠ ।ठक् ़ ∠ क्ठब् है। ध्यान दीजिए कि ∠ ।ठब् और ∠ ।ठक् आसन्न कोण नहीं हैं। क्यों? इसका कारण यह है कि अउभयनिष्ठ भुजाएँ ;अथार्त् वे भुजाएँ जो उभयनिष्ठ नहीं हैंद्ध ठक् और ठब् उभयनिष्ठ भुजा ठ। के एक ही ओर स्िथत है। यदि आकृति 6.2 में, अउभयनिष्ठ भुजाएँ ठ। आकृति 6ण्3 रू कोणों का रैख्िाक युग्मऔर ठब् एक रेखा बनाएँ, तो यह आकृति 6.3 जैसा लगेगा। इस स्िथति में, ∠ ।ठक् और∠ क्ठब् कोणों का एक रैख्िाक युग्म ;सपदमंत चंपत व िंदहसमेद्ध बनाते हैं। आप शीषार्भ्िामुख कोणों ;अमतजपबंससल वचचवेपजम ंदहसमेद्ध को भी याद कर सकते हैं, जो दो रेखाओं, मान लीजिए, ।ठ और ब्क् को परस्पर बिंदु व् पर प्रतिच्छेद करने पर बनते हैं ;देख्िाए आकृति 6.4द्ध। आकृति 6ण्4 रू शीषार्भ्िामुख कोणयहाँ शीषार्भ्िामुख कोणों के दो युग्म हैं। इनमें से एक युग्म ∠ ।व्क् और ∠ ठव्ब् का है। क्या आप दूसरा युग्म ज्ञात कर सकते हैं? 6ण्3 प्रतिच्छेदी रेखाएँ और अप्रतिच्छेदी रेखाएँ एक कागश पर दो भ्िान्न रेखाएँ च्फ और त्ै खींचिए।आप देखेंगे कि आप इन रेखाओं को दो प्रकार से खींच सकते हैं, जैसा कि आकृति 6ण्5 ;पद्ध और आकृति 6ण्5 ;पपद्ध में दशार्या गया है। ;पद्ध प्रतिच्छेदी रेखाएँ ;पपद्ध अप्रतिच्छेदी ;समांतरद्ध रेखाएँ आकृति 6ण्5 रू दो रेखाएँ खींचने के विभ्िान्न प्रकार रेखा की इस अवधरणा को भी याद कीजिए कि वह दोनों दिशाओं में अनिश्िचत रूप से विस्तृत होती है। रेखाएँ च्फ और त्ै आकृति 6ण्5 ;पद्ध में प्रतिच्छेदी रेखाएँ हैं औरआकृति6ण्5 ;पपद्ध में ये समांतर रेखाएँ हैं। ध्यान दीजिए कि इन दोनों समांतर रेखाओं के विभ्िान्न बिंदुओं पर उनके उभयनिष्ठ लम्बों की लंबाइयाँ समान रहेंगी। यह समान लंबाइर् दोनों समांतर रेखाओं के बीच की दूरी कहलाती है। 6ण्4 कोणों के युग्म अनुच्छेद 6.2 में, आप कोणों के वुफछ युग्मों जैसे पूरक कोण, संपूरक कोण, आसन्न कोण, कोणों का रैख्िाक युग्म, इत्यादि की परिभाषाओं के बारे में पढ़ चुके हैं। क्या आप इन कोणों में किसी संबंध् के बारे में सोच सकते हैं? आइए अब उन कोणों में संबंध् पर विचार करें जिन्हें कोइर् किरण किसी रेखापर स्िथत होकर बनाती है, जैसा कि आकृति 6.6 में दशार्या गया है। रेखा को ।ठ और किरण को व्ब् आकृति 6ण्6 रू कोणों का रैख्िाक युग्मकहिए। बिंदु व् पर बनने वाले कोण क्या हैं? ये ∠ ।व्ब्ए ∠ ठव्ब् और ∠ ।व्ठ हैं। क्या हम ∠ ।व्ब् ़ ∠ ठव्ब् त्र ∠ ।व्ठ लिख सकते हैं? ;1द्ध हाँ! ;क्यों? अनुच्छेद 6.2 में दिए आसन्न कोणों को देख्िाए।द्ध ∠ ।व्ठ का माप क्या है? यह 180° है। ;क्यों?द्ध ;2द्ध क्या ;1द्ध ओर ;2द्ध से, आप कह सकते हैं कि∠ ।व्ब् ़ ∠ ठव्ब् त्र 180° है? हाँ! ;क्यों?द्ध उपरोक्त चचार् के आधर पर, हम निम्न अभ्िागृहीत को लिख सकते हैंः अभ्िागृहीत 6ण्1 रू यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग 180ह् होता है। याद कीजिए कि जब दो आसन्न कोणों का योग 180ह् हो, तो वे कोणों का एक रैख्िाक युग्म बनाते हैं। अभ्िागृहीत 6.1 में यह दिया है कि ‘एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो’। इस दिए हुए से, हमने निष्कषर् निकाला कि इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग 180ह् होता है। क्या हम अभ्िागृहीत 6.1 को एक विपरीत प्रकार से लिख सकते हैं? अथार्त् अभ्िागृहीत 6.1 के निष्कषर् को दिया हुआ मानें और उसके दिए हुए को निष्कषर् मानें। तब हमें यह प्राप्त होगाः ;।द्ध यदि दो आसन्न कोणों का योग 180ह् है, तो एक किरण एक रेखा पर खड़ी होती है ;अथार्त् अउभयनिष्ठ भुजाएँ एक ही रेखा में हैंद्ध। अब आप देखते हैं कि अभ्िागृहीत 6ण्1 और कथन;।द्ध एक दूसरे के विपरीत हैं। हम इनमें से प्रत्येक को दूसरे का विलोम ;बवदअमतेमद्ध कहते हैं। हम यह नहीं जानते कि कथन ;।द्ध सत्य है या नहीं। आइए इसकी जाँच करें। विभ्िान्न मापों के, आकृति 6.7 में दशार्ए अनुसार, आसन्न कोण खींचिए। प्रत्येक स्िथति में, अउभयनिष्ठ भुजाओं में से एक भुजा के अनुदिश एक पटरी ;तनसमतद्ध रख्िाए। क्या दूसरी भुजा भी इस पटरी के अनुदिश स्िथत है? आप पाएँगे कि केवल आकृति 6ण्7 ;पपपद्ध में ही दोनों अउभयनिष्ठ भुजाएँ पटरी के अनुदिश हैं, अथार्त् ।ए व् और ठ एक ही रेखा पर स्िथत हैं और किरण व्ब् इस रेखा पर खड़ी है। साथ ही, यह भी देख्िाए कि ∠ ।व्ब् ़ ∠ ब्व्ठ त्र 125ह् ़ 55ह् त्र 180ह् है।इससे आप निष्कषर् निकाल सकते हैं कि कथन ;।द्ध सत्य है। अतः, आप इसे एक अभ्िागृहीत के रूप में निम्न प्रकार लिख सकते हैं: अभ्िागृहीत 6ण्2 रू यदि दो आसन्न कोणों का योग 180ह् है, तो उनकी अउभयनिष्ठ भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं। स्पष्ट कारणों से, उपरोक्त दोनों अभ्िागृहीतों को मिला कर रैख्िाक युग्म अभ्िागृहीत ;स्पदमंत च्ंपत ।गपवउद्ध कहते हैं। आइए अब उस स्िथति की जाँच करें जब दो रेखाएँ प्रतिच्छेद करती हैं। पिछली कक्षाओं से आपको याद होगा कि यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करें, तोशीषर्ाभ्िामुख कोण बराबर होते हैं। आइए अब इस परिणाम को सि( करें। एक उपपिा ;चतववद्धि में निहित अवयवों के लिए, परिश्िाष्ट 1 को देख्िाए और नीचे दी हुइर् उपपिा को पढ़ते समय इन्हें ध्यान में रख्िाए। प्रमेय 6ण्1 रू यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं, तो शीषार्भ्िामुख कोण बराबर होते हैं। उपपिा रू उपरोक्त कथन में यह दिया है कि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करती हैं। अतः मान लीजिए कि ।ठ और ब्क् दो रेखाएँ हैं जो परस्पर बिंदु व् पर प्रतिच्छेदकरती हैं, जैसा कि आकृति 6.8 में दशार्या गया है। इससे हमें शीषार्भ्िामुख कोणों के निम्न दो युग्म प्राप्त होते हैंः ;पद्ध ∠ ।व्ब् और ∠ ठव्क् ;पपद्ध ∠ ।व्क् और ∠ ठव्ब् हमें सि( करना है कि ∠ ।व्ब् त्र ∠ ठव्क् है और ∠ ।व्क् त्र ∠ ठव्ब् है। अब किरण व्। रेखा ब्क् पर खड़ी है। अतः, ∠ ।व्ब् ़ ∠ ।व्क् त्र 180ह् ;रैख्िाक युग्म अभ्िागृहीतद्ध ;1द्ध क्या हम ∠ ।व्क् ़ ∠ ठव्क् त्र 180ह् लिख सकते हैं? हाँ। ;क्यों?द्ध ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध से, हम लिख सकते हैं किः∠ ।व्ब् ़ ∠ ।व्क् त्र ∠ ।व्क् ़ ∠ ठव्क् इससे निष्कषर् निकलता है कि∠ ।व्ब् त्र ∠ ठव्क् ;अनुच्छेद 5.2 का अभ्िागृहीत 3 देख्िाएद्ध इसी प्रकार, सि( किया जा सकता है कि ∠।व्क् त्र ∠ठव्ब् है। ऽ आइए अब रैख्िाक युग्म अभ्िागृहीत और प्रमेय 6.1 पर आधरित वुफछ उदाहरण हल करें। उदाहरण 1 रू आकृति 6.9 में, रेखाएँ च्फ और त्ै परस्पर बिंदु व् पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि ∠ च्व्त् रू ∠ त्व्फ त्र 5 रू 7 है, तो सभी कोण ज्ञात कीजिए। हल रू ∠ च्व्त् ़∠ त्व्फ त्र 180ह् ;रैख्िाक युग्म के कोणद्ध परन्तु, ∠ च्व्त् रू ∠ त्व्फ त्र 5 रू 7 ;दिया हैद्ध 5अतः, ∠ च्व्त् त्र 12 × 180° त्र 75° इसी प्रकार, ∠ त्व्फ त्र 7 × 180° त्र 105°12अब ∠ च्व्ै त्र ∠त्व्फ त्र 105° ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध और ∠ ैव्फ त्र ∠च्व्त् त्र 75° ;शीषार्भ्िामुख कोणद्ध उदाहरण 2 रू आकृति 6.10 में, किरण व्ै रेखा च्व्फ पर खड़ी है। किरण व्त् और व्ज् क्रमशः ∠ च्व्ै और ∠ ैव्फ के समद्विभाजक हैं। यदि ∠ च्व्ै त्र ग है, तो ∠ त्व्ज् ज्ञात कीजिए। हल रू किरण व्ै रेखा च्व्फ पर खड़ी है। अतःए ∠ च्व्ै ़ ∠ ैव्फ त्र 180ह् परन्तु, ∠ च्व्ै त्र ग अतः, ग ़ ∠ ैव्फ त्र 180ह् आवृफति 6ण्10 इसलिए, ∠ ैव्फ त्र 180ह् दृ ग अब किरण व्त्ए ∠ च्व्ै को समद्विभाजित करती है। 1इसलिए, ∠ त्व्ै त्र 2 × ∠ च्व्ै 1 ग त्र × ग त्र 22 इसी प्रकार, ∠ ैव्ज् त्र 1 2 × ∠ ैव्फ त्र 1 2 × ;180° दृ गद्ध त्र 90 2 ग अब, ∠ त्व्ज् त्र ∠ त्व्ै ़ ∠ ैव्ज् त्र 90 दृ 2 2 ग ग  त्र 90° उदाहरण 3 रू आकृति 6.11 में, व्च्ए व्फए व्त् और व्ै चार किरणें हैं। सि( कीजिए कि ∠ च्व्फ ़ ∠ फव्त् ़ ∠ ैव्त् ़ ∠ च्व्ै त्र 360° है। हल रू आकृति 6ण्11 में, आपको किरणों व्च्ए व्फए व्त् और व्ै में से किसी एक को पीछे एक बिंदु तक बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। आइए किरण व्फ को एक बिंदु ज् तक पीछे बढ़ा दें ताकि ज्व्फ एक रेखाहो ;देख्िाए आकृति 6.12द्ध। अब किरण व्च् रेखा ज्व्फ पर खड़ी है। आवृफति 6ण्11 अतः, ∠ ज्व्च् ़ ∠ च्व्फ त्र 180° ;1द्ध ;रैख्िाक युग्म अभ्िागृहीतद्ध इसी प्रकार, किरण व्ै रेखा ज्व्फ पर खड़ी है। अतः, ∠ ज्व्ै ़ ∠ ैव्फ त्र 180° ;2द्ध परन्तु ∠ ैव्फ त्र ∠ ैव्त् ़ ∠ फव्त् है। अतः, ;2द्ध निम्न हो जाती है: ∠ ज्व्ै ़ ∠ ैव्त् ़ ∠ फव्त् त्र 180° आवृफति 6ण्12 ;3द्ध अब, ;1द्ध और ;3द्ध को जोड़ने पर, आपको प्राप्त होगाः ∠ ज्व्च् ़ ∠ च्व्फ ़ ∠ ज्व्ै ़ ∠ ैव्त् ़ ∠ फव्त् त्र 360° ;4द्ध परन्तु ∠ ज्व्च् ़ ∠ ज्व्ै त्र ∠ च्व्ै है। अतः, ;4द्ध निम्न हो जाती है: ∠ च्व्फ ़ ∠ फव्त् ़ ∠ ैव्त् ़ ∠ च्व्ै त्र 360° प्रश्नावली 6ण्1 1ण् आकृति6ण्13 मेंए रेखाएँ।ठ औरब्क् बिंदुव् पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि ∠ ।व्ब् ़ ∠ ठव्म् त्र 70° है और ∠ ठव्क् त्र 40° है, तो∠ ठव्म् और प्रतिवतीर्∠ ब्व्म् ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्13 2ण् आकृति 6.14 में, रेखाएँ ग्ल् और डछ बिंदु व् पर प्रतिच्छेद करती हैं। यदि ∠ च्व्ल् त्र 90° और ं रू इ त्र 2 रू 3 हैए तोब ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्14 3ण् आकृति6ण्15 में,यदि ∠ च्फत् त्र ∠ च्त्फ है, तो सि( कीजिए कि ∠ च्फै त्र ∠ च्त्ज् है। आवृफति 6ण्15 4ण् आकृति6ण्16 मेंए यदिग ़ ल त्र ू ़ ्र हैए तो सि( कीजिए कि ।व्ठ एक रेखा है। आकृति 6ण्16 5ण् आकृति 6ण्17 मेंए च्व्फ एक रेखा है। किरण व्त् रेखा च्फ पर लम्ब है। किरणों व्च् और व्त् के बीच में व्ै एक अन्य किरण है। सि( कीजिएः 1∠ त्व्ै त्र ;∠ फव्ै दृ ∠ च्व्ैद्ध2आकृति 6ण्17 6ण् यह दिया है कि∠ ग्ल्र् त्र 64° है और ग्ल् को बिंदु च् तक बढ़ाया गया है। दी हुइर् सूचना सेएक आकृति खींचिए। यदि किरण ल्फए ∠ र्ल्च् को समद्विभाजित करती है, तो ∠ ग्ल्फ और प्रतिवतीर्∠ फल्च् के मान ज्ञात कीजिए। 6ण्5 समांतर रेखाएँ और तियर्क रेखा आपको याद होगा कि वह रेखा जो दो या अध्िक रेखाओं को भ्िान्न बिंदुओं पर प्रतिच्छेद करती है एक तियर्क रेखा ;जतंदेअमतेंसद्ध कहलाती है ;देख्िाए आकृति 6.18द्ध। रेखा स रेखाओं उ और द को क्रमशः बिंदुओं च् और फ पर प्रतिच्छेद करती है। अतः रेखा स रेखाओं उ और द के लिए एक तियर्क रेखा है। देख्िाए कि प्रत्येक बिंदु च् और फ पर चार कोण बन रहे हैं। आइए इन कोणों को आकृति 6.18 में दशार्ए अनुसार ∠ 1ए ∠ 2ए ण् ण् ण्ए ∠8 से नामांकित करें। ∠ 1ए ∠ 2ए ∠ 7 और ∠ 8 बाह्यः कोण;मगजमतपवत ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। ∠ 3ए ∠ 4ए ∠ 5 और ∠ 6 अंतः कोण ;पदजमतपवत ंदहसमेद्ध कहलाते हैं। याद कीजिए कि पिछली कक्षाओं में, आपने वुफछ कोणों के युग्मों का नामांकन किया था, जो एक तियर्क रेखा द्वारा दो रेखाओं को प्रतिच्छेद करने से बनते हैं। ये युग्म निम्न हैंः ;ंद्ध संगत कोण ;ब्वततमेचवदकपदह ंदहसमेद्ध रू ;पद्ध ∠ 1 और ∠ 5 ;पपद्ध ∠ 2 और ∠ 6 ;पपपद्ध ∠ 4 और∠ 8 ;पअद्ध ∠ 3 और ∠ 7 ;इद्ध एकांतर अंतः कोण ;।सजमतदंजम पदजमतपवत ंदहसमेद्ध रू ;पद्ध ∠ 4 और ∠ 6 ;पपद्ध ∠ 3 और ∠ 5 ;बद्ध एकांतर बाह्यः कोण ;।सजमतदंजम मगजमतपवत ंदहसमेद्ध रू ;पद्ध ∠ 1 और ∠ 7 ;पपद्ध ∠ 2 और ∠ 8 ;कद्ध तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणः ;पद्ध ∠ 4 और ∠ 5 ;पपद्ध ∠ 3 और ∠ 6 तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों को क्रमागत अंतः कोण ;बवदेमबनजपअम पदजमतपवत ंदहसमेद्ध या संबंध्ित कोण ;ंससपमक ंदहसमेद्ध या सह - अंतः कोण ;बव.पदजमतपवत ंदहसमेद्ध भी कहा जाता है। साथ ही, अनेक बार हम एकांतर अंतः कोणों के लिए केवल शब्दों एकांतर कोणों का प्रयोग करते हैं। आइए अब इन कोणों में संबंध् ज्ञात करें जब रेखाएँ उ और द समांतर हैं। आप जानते हैं कि आपकी अभ्यास - पुस्ितका पर बनी सीध्ी लकीरें ;तनसमक सपदमेद्ध परस्पर समांतर होती हैं। इसलिए, इन लकीरों के अनुदिश पटरी और पेंसिल की सहायता से दो समांतर रेखाएँ भी खींचिए, जैसा कि आकृति 6.19 में दशार्या गया है। आकृति 6ण्19 अब संगत कोणों के किसी भी युग्म को मापिए और उनके बीच में संबंध् ज्ञात कीजिए। आप ज्ञात कर सकते हैं कि ∠ 1 त्र ∠ 5ए ∠ 2 त्र ∠ 6ए ∠ 4 त्र ∠ 8 और ∠ 3 त्र ∠ 7 है। इससेआप निम्न अभ्िागृहीत को स्वीकृत कर सकते हैंः अभ्िागृहीत 6ण्3 रू यदि एक तियर्क रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है। अभ्िागृहीत 6.3 को संगत कोण अभ्िागृहीत भी कहा जाता है। आइए अब इस अभ्िागृहीत के विलोम ;बवदअमतेमद्ध की चचार् करें, जो निम्न हैः ‘यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि संगत कोणों का एक युग्म बराबर हो, तो दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं’। क्या यह कथन सत्य है? इसकी जाँच निम्न प्रकार की जा सकती है: एक रेखा ।क् खींचिए और उस पर दो बिंदु ठ और ब् अंकित कीजए। ठ और ब् पर क्रमशः ∠ ।ठफ और ∠ ठब्ै की रचना कीजिए जो परस्पर बराबर हों, जैसा कि आकृति 6ण्20 ;पद्ध में दशार्या गया है। आकृति 6ण्20 फठ और ैब् को ।क् के दूसरी ओर बढ़ाकर रेखाएँ च्फ और त्ै प्राप्त कीजिए, जैसा किआकृति 6.20 ;पपद्ध में दशार्या गया है। आप देख सकते हैं कि ये रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करतीं। आप दोनों रेखाओं च्फ और त्ै के विभ्िान्न बिंदुओं पर उभयनिष्ठ लम्ब खींच कर और उनकी लम्बाइयाँ माप कर देख सकते हैं कि ये लंबाइयाँ प्रत्येक स्थान पर बराबर हैं। अतः आप निष्कषर् निकाल सकते हैं कि ये रेखाएँ समांतर हैं। अथार्त् संगत कोण अभ्िागृहीत का विलोम भी सत्य है। इस प्रकार, हम निम्न अभ्िागृहीत प्राप्त करते हैं: अभ्िागृहीत 6ण्4 रू यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि संगत कोणों का एक युग्म बराबर है, तो दोनों रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं। क्या हम एक तियर्क रेखा द्वारा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करने से बने एकांतर अंतः कोणों के बीच कोइर् संबंध् ज्ञात करने के लिए संगत कोण अभ्िागृहीत काप्रयोग कर सकते हैं? आकृति 6.21 में, तियर्क रेखा च्ै समांतर रेखाओं ।ठ और ब्क् को क्रमशः बिंदुओं फ और त् पर प्रतिच्छेद करती है। क्या ∠ ठफत् त्र ∠ फत्ब् और ∠ ।फत् त्र ∠ फत्क् हैं? आप जानते हैं कि ∠ च्फ। त्र ∠ फत्ब् ;1द्ध ;संगत कोण अभ्िागृहीतद्ध क्या ∠ च्फ। त्र ∠ ठफत् है? हाँ! ;क्यों?द्ध ;2द्ध इसलिए ;1द्ध और ;2द्ध से, हम निष्कषर् निकाल सकते हैं कि ∠ ठफत् त्र ∠ फत्ब् इसी प्रकार, ∠ ।फत् त्र ∠ फत्क् उपरोक्त परिणाम को एक प्रमेय ;जीमवतमउद्ध के रूप में निम्न प्रकार से लिखा जा सकता हैः प्रमेय6ण्2 रू यदि एक तियर्क रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है। अब, संगत कोण अभ्िागृहीत के विलोम का प्रयोग करके क्या हम एकांतर अंतः कोणों केएक युग्म के बराबर होने पर दोनों रेखाओं को समांतर दशार् सकते हैं? आकृति 6.22 में, तियर्क रेखा च्ै रेखाओं ।ठ और ब्क् को क्रमशः बिंदुओं फ और त् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करती है कि ∠ ठफत् त्र ∠ फत्ब् है। क्या ।ठ द्यद्य ब्क् हैघ् ∠ ठफत् त्र ∠ च्फ। ;क्योंघ्द्ध ;1द्ध परन्तु, ∠ ठफत् त्र ∠ फत्ब् ;दिया हैद्ध ;2द्ध अतः, ;1द्ध और ;2द्ध से आप निष्कषर् निकाल सकते हैं कि ∠ च्फ। त्र ∠ फत्ब् परन्तु ये संगत कोण हैं। अतः,।ठ द्यद्य ब्क् है। ;संगत कोण अभ्िागृहीत का विलोमद्ध इस कथन को एक प्रमेय के रूप में निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता हैः प्रमेय 6ण्3 रू यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि एकांतर अंतःकोणों का एक युग्म बराबर है, तो दोनों रेखाएँ परस्पर समांतर होती हैं। इसी प्रकार, आप तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों से संबंध्ित निम्नलिख्िातदो प्रमेय प्राप्त कर सकते हैंः प्रमेय 6ण्4 रू यदि एक तियर्क रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो तियर्क रेखा केएक ही ओर के अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है। प्रमेय 6ण्5 रू यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि तियर्क रेखाके एक ही ओर के अंतः कोणों का एक युग्म संपूरक है, तो दोनों रेखाएँ परस्पर समांतर होतीहैं। आपको याद होगा कि इन सभी अभ्िागृहीतों और प्रमेयों की जाँच पिछली कक्षाओं में आपवुफछ ियाकलापों के द्वारा कर चुके हैं। आप इन ियाकलापों को यहाँ दोहरा सकते हैं। 6ण्6 एक ही रेखा के समांतर रेखाएँ यदि दो रेखाएँ एक ही रेखा के समांतर हों, तो क्या वे परस्पर समांतर होंगी? आइए इसकी जाँच करें।आकृति 6.23 को देख्िाए, जिसमें उ द्यद्य स है और द द्यद्य स है। आइए रेखाओं सए उ और द के लिए एक तियर्क रेखा ज खींचें। यह दिया है कि उ द्यद्य स है और द द्यद्य स है। अतः, ∠ 1 त्र ∠ 2 और ∠ 1 त्र ∠ 3 है। ;संगत कोण अभ्िागृहीतद्ध इसलिए, ∠ 2 त्र ∠ 3 ;क्यों?द्ध परन्तु ∠ 2 और ∠ 3 संगत कोण हैं और बराबर हैं। अतः, आप कह सकते हैं कि उ द्यद्य द ;संगत कोण अभ्िागृहीत का विलोमद्ध इस परिणाम को एक प्रमेय के रूप में निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता हैः प्रमेय 6ण्6 रू वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समांतर हों, परस्पर समांतर होती हैं। टिप्पणी रू उपरोक्त गुण को दो से अध्िक रेखाओं के लिए भी लागू किया जा सकता है। आइए अब समांतर रेखाओं से संबंध्ित वुफछ प्रश्न हल करेंः उदाहरण 4 रू आकृति 6ण्24 मेंए यदि च्फ द्यद्य त्ैए ∠ डग्फ त्र 135° और ∠ डल्त् त्र 40° हैए तो ∠ ग्डल् ज्ञात कीजिए। आकृति 6ण्24 आकृति 6ण्25 हल रू यहाँ हमें उ से होकर, रेखा च्फ के समांतर एक रेखा ।ठ खींचने की आवश्यकता है,जैसा कि आकृति 6.25 में दिखाया गया है। अब, ।ठ द्यद्य च्फ और च्फ द्यद्य त्ै है। अतः, ।ठ द्यद्य त्ै है। ;क्यों?द्ध अब, ∠ फग्ड ़ ∠ ग्डठ त्र 180° ;।ठ द्यद्य च्फए तियर्क रेखा ग्ड के एक ही ओर के अंतः कोणद्ध परन्तु, ∠ फग्ड त्र 135° है। इसलिए, 135° ़ ∠ ग्डठ त्र 180° अतः, ∠ ग्डठ त्र 45° ;1द्ध अब, ∠ ठडल् त्र ∠ डल्त् ;।ठ द्यद्य त्ैए एकांतर कोणद्ध अतः, ∠ ठडल् त्र 40° ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को जोड़ने पर, आपको प्राप्त होगा: ∠ ग्डठ ़ ∠ ठडल् त्र 45° ़ 40° अथार्त, ∠ ग्डल् त्र 85° उदाहरण 5 रू यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि संगत कोणों के एक युग्म के समद्विभाजक परस्पर समांतर हों, तो सि( कीजिए कि दोनों रेखाएँ भी परस्पर समांतर होती हैं। हल रू आकृति 6.26 में, एक तियर्क रेखा।क् दो रेखाओं च्फ और त्ै को क्रमशः बिंदुओं ठ और ब् पर प्रतिच्छेद करती है। किरण ठम्ए ∠ ।ठफ की समद्विभाजक है और किरण ब्ळए ∠ ठब्ै की समद्विभाजक है तथा ठम् द्यद्य ब्ळ है। हमंे सि( करना है कि च्फ द्यद्य त्ै है। यह दिया है कि किरण ठम्ए ∠ ।ठफ की समद्विभाजक है। 1अतः, ∠ ।ठम् त्र 2 ∠ ।ठफ ;1द्ध इसी प्रकार किरण ब्ळए ∠ ठब्ै की समद्विभाजक है। 1अतः, ∠ ठब्ळ त्र 2 ∠ ठब्ै ;2द्ध परन्तु, ठम् द्यद्य ब्ळ है और ।क् एक तियर्क रेखा है। अतः, ∠ ।ठम् त्र ∠ ठब्ळ ;संगत कोण अभ्िागृहीतद्ध ;3द्ध ;3द्ध में, ;1द्ध और ;2द्ध को प्रतिस्थापित करने पर, आपको प्राप्त होगाः 11∠ ।ठफ त्र ∠ ठब्ै22 अथार्त्, ∠ ।ठफ त्र ∠ ठब्ै परन्तु, ये तियर्क रेखा ।क् द्वारा रेखाओं च्फ और त्ै के साथ बनाए गए संगत कोण हैं और ये बराबर हैं। अतः, च्फ द्यद्य त्ै ;संगत कोण अभ्िागृहीत का विलोमद्ध उदाहरण6 रू आकृति6ण्27 मेंए ।ठ द्यद्य ब्क् औरब्क् द्यद्य म्थ् है। साथ ही, म्। ⊥ ।ठ है।यदि∠ ठम्थ् त्र 55° है, तो गए ल और ्र के मान ज्ञात कीजिए। हल रू ल ़ 55° त्र 180° ;ब्क् द्यद्य म्थ्ए तियर्क रेखा म्क् के एक ही ओर के अंतः कोणद्ध अतः, ल त्र 180° दृ 55° त्र 125° पुनः, ग त्र ल ;।ठ द्यद्य ब्क्ए संगत कोण अभ्िागृहीतद्ध इसलिए, ग त्र 125° अब चूंँकि ।ठ द्यद्य ब्क् और ब्क् द्यद्य म्थ् हैए इसलिए ।ठ द्यद्य म्थ् है। अतः, ∠ म्।ठ ़ ∠ थ्म्। त्र 180° ;तियर्क रेखा म्। के एक ही ओर के अंतः कोणद्ध इसलिए, 90° ़ ्र ़ 55° त्र 180° जिससे, ्र त्र 35° प्राप्त होता है। प्रश्नावली 6ण्2 1ण् आकृति6ण्28 मेंए ग और ल के मान ज्ञात कीजिए और पिफर दशार्इए कि ।ठ द्यद्य ब्क् है। आकृति 6ण्28 2ण् आकृति 6ण्29 में, यदि ।ठ द्यद्य ब्क्ए ब्क् द्यद्य म्थ् और ल रू ्र त्र 3 रू 7 हैए तोग का मान ज्ञात कीजिए। आकृति 6ण्29 3ण् आकृति 6ण्30 में, यदि ।ठ द्यद्य ब्क्ए म्थ् ⊥ ब्क् और ∠ ळम्क् त्र 126° है, तो ∠ ।ळम्ए ∠ ळम्थ् और∠ थ्ळम् ज्ञात कीजिए। आकृति 6ण्30 4ण् आकृति 6ण्31मेंए यदि च्फ द्यद्य ैज्ए ∠ च्फत् त्र 110° और ∠ त्ैज् त्र 130° है, तो∠ फत्ै ज्ञात कीजिए। ख्संकेत: बिंदु त् से होकर ैज् के समांतर एक रेखा खींचिए।, आकृति 6ण्31 5ण् आकृति 6ण्32 मेंए यदि।ठ द्यद्य ब्क्ए ∠ ।च्फ त्र 50° और ∠ च्त्क् त्र 127° है, तो ग औरल ज्ञात कीजिए। आकृति 6ण्32 6ण् आकृति6ण्33 में,च्फ औरत्ै दो दपर्ण हैं जो एक दूसरे के समांतर रखे गए हैं। एक आपतन किरण ;पदबपकमदज तंलद्ध ।ठए दपर्णच्फ सेठ परटकराती है और परावतिर्त किरण ;तमसिमबजमक तंलद्ध पथठब् पर चलकर दपर्ण त्ै सेब् पर टकराती है तथा पुनःब्क् के अनुदिश परावतिर्त हो जाती है।सि( कीजिए कि ।ठ द्यद्य ब्क् है। आकृति 6ण्33 6ण्7 त्रिाभुज का कोण योग गुण पिछली कक्षाओं में आप ियाकलापों द्वारा यह सीख चुके हैं कि एक त्रिाभुज के सभी कोणों का योग 180° होता है। हम इस कथन को समांतर रेखाओं से संबंध्ित अभ्िागृहीतों और प्रमेयों का प्रयोग करके सि( कर सकते हैं। प्रमेय 6ण्7 रू किसी त्रिाभुज के कोणों का योग 180° होता है। उपपिा रू आइए देखें कि हमें उपरोक्त कथन में क्या दिया है, अथार्त् हमारी परकिल्पना ;ीलचवजीमेपेद्ध क्या है और हमें क्या सि( करना है। हमें एक त्रिाभुज च्फत् दिया है तथा ∠ 1ए ∠ 2 और ∠ 3 इस त्रिाभुज के कोण हैं ;देख्िाए आकृति 6.34द्ध। आवृफति 6ण्34 हमें,∠ 1 ़ ∠ 2 ़ ∠ 3 त्र 180° सि( करना है।आइए भुजाफत् के समांतर उसके सम्मुख शीषर् च् से होकर एक रेखा ग्च्ल् खींचें, जैसा कि आकृति 6.35 में दशार्या गया है। इससे हम समांतर रेखाओं से संबंिात गुणों का प्रयोग कर सकते हैं। अब, ग्च्ल् एक रेखा है। अतः, ∠ 4 ़ ∠ 1 ़ ∠ 5 त्र 180° है। ;1द्ध आवृफति 6ण्35 परन्तु ग्च्ल् द्यद्य फत् तथा च्फ और च्त् तियर्क रेखाएँ हैं। इसलिए, ∠ 4 त्र ∠ 2 और ∠ 5 त्र ∠ 3 ;एकांतर कोणों के युग्मद्ध ∠ 4 और∠ 5 के ये मान ;1द्ध में, रखने पर हमें प्राप्त होता हैः ∠ 2 ़ ∠ 1 ़ ∠ 3 त्र 180° आवृफति 6ण्36अथार्त्, ∠ 1 ़ ∠ 2 ़ ∠ 3 त्र 180° है। ऽ याद कीजिए कि आपने पिछली कक्षाओं में, एक त्रिाभुज के बहिष्कोणों ;मगजमतपवत ंदहसमेद्ध के बारे में अध्ययन किया था ;देख्िाए आकृति 6.36द्ध। भुजा फत् को बिंदु ै तक बढ़ाया गया है। ∠ च्त्ै त्रिाभुज च्फत् का एक बहिष्कोण ;मगजमतपवत ंदहसमद्ध है। क्या ∠ 3 ़ ∠ 4 त्र180° है? ;क्यों?द्ध ;1द्ध साथ ही, यह भी देख्िाए कि ∠ 1 ़ ∠ 2 ़ ∠ 3 त्र 180° है। ;क्यों?द्ध ;2द्ध ;1द्ध और ;2द्ध से, आप देख सकते हैं कि ∠ 4 त्र∠ 1 ़ ∠ 2 है। इस परिणाम को एक प्रमेय के रूप में निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता हैः प्रमेय 6ण्8 रू यदि एक त्रिाभुज की एक भुजा बढ़ाइर् जाए, तो इस प्रकार बना बहिष्कोण दोनों अंतः अभ्िामुख ;विपरीतद्ध कोणों ;पदजमतपवत वचचवेपजम ंदहसमेद्ध के योग के बराबर होता है। उपरोक्त प्रमेय से यह स्पष्ट है कि किसी त्रिाभुज का एक बहिष्कोण अपने दोनों अंतः अभ्िामुख कोणों में से प्रत्येक से बड़ा होता है। आइए इन प्रमेयों का प्रयोग करके वुफछ उदाहरण हल करें। उदाहरण 7 रू आकृति 6ण्37 में, यदि फज् ⊥ च्त्ए ∠ ज्फत् त्र 40° और ∠ ैच्त् त्र 30° है, तो ग और ल ज्ञात कीजिए। हल: Δ ज्फत् में, 90° ़ 40° ़ ग त्र 180° ;त्रिाभुज का कोण योग गुणद्ध अतः, ग त्र 50° अब, ल त्र ∠ ैच्त् ़ ग ;प्रमेय 6.8द्ध अतः, ल त्र 30° ़ 50° त्र 80° आवृफति 6ण्37 उदाहरण 8 रू आकृति 6ण्38 में, Δ।ठब् की भुजाओं ।ठ और ।ब् को क्रमशः म् और क् तक बढ़ाया गया है। यदि ∠ ब्ठम् और ∠ ठब्क् के समद्विभाजक क्रमशः ठव् और ब्व् बिंदु व् पर मिलते हैं, तो सि( कीजिए कि 1∠ ठव्ब् त्र 90° दृ 2 ∠ठ।ब् है। हल रू किरण ठव् कोण ब्ठम् की समद्विभाजक है। अतः, ∠ ब्ठव् त्र 1 ∠ ब्ठम्2 1 त्र ;180° दृ लद्ध आवृफति 6ण्382लत्र 90° दृ ;1द्ध2 इसी प्रकार, किरण ब्व् कोण ठब्क् की समद्विभाजक है। अतः, ∠ ठब्व् त्र 1 ∠ ठब्क्2 1 ्रत्र ;180° दृ ्रद्ध त्र 90° दृ ;2द्ध2 2 Δ ठव्ब् में, ∠ ठव्ब् ़ ∠ ठब्व् ़ ∠ ब्ठव् त्र 180° है। ;3द्ध ;1द्ध और ;2द्ध को ;3द्ध में रखने पर, आपको प्राप्त होगा: ्रल∠ ठव्ब् ़ 90° दृ ़ 90° दृ त्र 180°22 इसलिए, ∠ ठव्ब् त्र ्र ़ ल 22 1या, ∠ ठव्ब् त्र 2 ;ल ़ ्रद्ध ;4द्ध परन्तु, ग ़ ल ़ ्र त्र 180° ;त्रिाभुज का कोण योग गुणद्ध अतः, ल ़ ्र त्र 180° दृ ग इससे ;4द्ध निम्न हो जाता है: 1∠ ठव्ब् त्र ;180° दृ गद्ध2ग त्र 90° दृ 2 1 त्र 90° दृ ∠ ठ।ब्2 प्रश्नावली 6ण्3 1ण् आकृति6ण्39 में,Δ च्फत् की भुजाओं फच् और त्फ को क्रमशः बिंदुओं ै और ज् तक बढ़ाया गया है। यदि ∠ ैच्त् त्र 135° है और ∠ च्फज् त्र 110° है, तो∠ च्त्फ ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्39 2ण् आकृति6ण्40 में, ∠ ग् त्र 62° और∠ ग्ल्र् त्र 54° है। यदि ल्व् और र्व् क्रमशः Δ ग्ल्र् के ∠ ग्ल्र् और ∠ ग्र्ल् के समद्विभाजक हैं, तो ∠ व्र्ल् और ∠ ल्व्र् ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्40 3ण् आकृति 6ण्41में,यदि ।ठ द्यद्य क्म्ए ∠ ठ।ब् त्र 35° और ∠ ब्क्म् त्र 53° है, तो∠ क्ब्म् ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्41 4ण् आकृति6ण्42 में,यदि रेखाएँच्फ औरत्ै बिंदु ज् पर इस प्रकार प्रतिच्छेद करती हैं कि ∠ च्त्ज् त्र 40°ए ∠ त्च्ज् त्र 95° और∠ ज्ैफ त्र 75° है,तो∠ ैफज् ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्42 5ण् आकृति 6ण्43 में, यदि च्फ ⊥ च्ैए च्फ द्यद्य ैत्ए ∠ ैफत् त्र 28° और∠ फत्ज् त्र 65° है, तो ग और ल के मान ज्ञात कीजिए। आवृफति 6ण्43 6ण् आकृति 6.44 में, Δ च्फत् की भुजा फत् को बिंदु ै तक बढ़ाया गया है। यदि∠ च्फत् और ∠ च्त्ै के समद्विभाजक बिंदुज् पर मिलते हैं, तो सि( कीजिए कि ∠ फज्त् त्र 1 2 ∠ फच्त् है। आवृफति 6ण्44 6ण्8 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्न बिंदुओं का अध्ययन किया हैः 1ण् यदि एक किरण एक रेखा पर खड़ी हो, तो इस प्रकार बने दोनों आसन्न कोणों का योग 180ह् होता है और विलोमतः यदि दो आसन्न कोणों का योग 180ह् है, तो उनकी अउभयनिष्ठ भुजाएँ एक रेखा बनाती हैं। इन गुणों को मिलाकर रैख्िाक युग्म अभ्िागृहीत कहते हैं। 2ण् यदि दो रेखाएँ परस्पर प्रतिच्छेद करें, तो शीषार्भ्िामुख कोण बराबर होते हैं। 3ण् यदि एक तियर्क रेखा दो समांतर रेखाओं को प्रतिच्छेद करे, तो ;पद्ध संगत कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है। ;पपद्ध एकांतर अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म बराबर होता है। ;पपपद्ध तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का प्रत्येक युग्म संपूरक होता है। 4ण् यदि एक तियर्क रेखा दो रेखाओं को इस प्रकार प्रतिच्छेद करे कि या तो ;पद्ध संगत कोणों का कोइर् एक युग्म बराबर हो या ;पपद्ध एकांतर अंतः कोणों का कोइर् एक युग्म बराबर हो या ;पपपद्ध तियर्क रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का कोइर् एक युग्म संपूरक हो, तो ये दोनों रेखाएँ समांतर होती हैं। 5ण् वे रेखाएँ जो एक ही रेखा के समांतर होती हैं परस्पर समांतर होती हैं। 6ण् एक त्रिाभुज के तीनों कोणों का योग 1800 होता है। 7ण् यदि किसी त्रिाभुज की एक भुजा को बढ़ाया जाए, तो इस प्रकार बना बहिष्कोण अपने दोनों अंतः अभ्िामुख कोणों के योग के बराबर होता है।

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