अध्याय 2 बहुपद 2ण्1 भूमिका पिछली कक्षाओं में, आप बीजीय व्यंजकों और उनके जोड़, घटाना, गुणा और भाग का अध्ययन कर चुके हैं। वहाँ आप यह भी अध्ययन कर चुके हैं कि किस प्रकार वुफछ बीजीय व्यंजकों का गुणनखंडन किया जाता है। आप निम्न बीजीय सवर्समिकाओं और उनका गुणनखंडन में उपयोग का पुनःस्मरण कर सकते हैंः ;ग ़ लद्ध2 त्र ग2 ़ 2गल ़ ल2 ;ग दृ लद्ध2 त्र ग2 दृ 2गल ़ ल2 और, ग2 दृ ल2 त्र;ग ़ लद्ध ;ग दृ लद्ध इस अध्याय में, सबसे पहले एक विशेष प्रकार के बीजीय व्यंजक का, जिसे बहुपद ;चवसलदवउपंसद्ध कहा जाता है, और उससे संब( शब्दावली ;जमतउपदवसवहलद्ध का अध्ययन करेंगे। यहाँ हम शेषपफल प्रमेय ;त्मउंपदकमत ज्ीमवतमउद्धए गुणनखंड प्रमेय ;थ्ंबजवत ज्ीमवतमउद्ध और बहुपदों के गुणनखंडन में इनके उपयोग का भी अध्ययन करेंगे। इनके अतिरिक्त, हम वुफछ और बीजीय सवर्समिकाओं का और वुफछ दिए हुए व्यंजकों का गुणनखंडन करने तथा मान निकालने के बारे में भी अध्ययन करेंगे। 2ण्2 एक चर वाले बहुपद सबसे पहले हम याद करेंगे कि चर को एक प्रतीक से प्रकट किया जाता है जो कोइर् भी वास्तविक मान धरण कर सकता है। हम चरों को अक्षरों गए लए ्रए आदि से प्रकट करते हैं। ध्यान रहे कि 2गए 3गए दृ गए दृ1 ग बीजीय व्यंजक हैं। ये सभी व्यंजक, ;एक अचरद्ध × ग के रूप के2 हैं। अब मान लीजिए कि हम एक ऐसा व्यंजक लिखना चाहते हैं जो कि ;एक अचरद्ध × ;एक चरद्ध है और हम यह नहीं जानते कि अचर क्या है। ऐसी स्िथतियों में, हम अचर को ंए इए ब आदि से प्रकट करते हैं। अतः व्यंजक, मान लीजिए, ंग होगा। पिफर भी, अचर को प्रकट करने वाले अक्षर और चर को प्रकट करने वाले अक्षर में अंतर होता है। एक विशेष स्िथति में अचरों के मान सदा समान बने रहते हैं। अथार्त् एक दी हुइर् समस्या में अचर के मान में कोइर् परिवतर्न नहीं होता। परन्तु चर के मान में परिवतर्न होता रहता है। अब 3 एकक की भुजा वाला एक वगर् लीजिए ;देख्िाए 3 आवृफति 2.1द्ध। इसका परिमाप ;चमतपउमजमतद्ध क्या है? आप जानते हैं कि वगर् का परिमाप चारों भुजाओं की लंबाइयों का जोड़ होता 3 3 है। यहाँ प्रत्येक भुजा की लंबाइर् 3 एकक है। अतः इसका परिमाप 4 × 3 अथार्त् 12 एकक है। यदि वगर् की प्रत्येक भुजा 10 एकक 3 हो, तो परिमाप क्या होगा? परिमाप 4 × 10 अथार्त् 40 एकक आकृति 2.1 होगा। यदि प्रत्येक भुजा की लंबाइर् ग एकक हो ;देख्िाए आवृफति 2.2द्ध, तो परिमाप 4ग एकक होता है। अतः हम यह पाते हैं कि ग त्ै भुजा की लंबाइर् में परिवतर्न होने पर परिमाप बदल जाता है। गक्या आप वगर् च्फत्ै का क्षेत्रापफल ज्ञात कर सकते हैं? यह ग × ग त्र ग2 वगर् एकक ;मात्राकद्ध है। ग2 एक बीजीय व्यंजक है। फआप 2गए ग2 ़ 2गए ग3 दृ ग2 ़ 4ग ़ 7 जैसे अन्य बीजीय व्यंजकों से च् ग भी परिचित हैं। ध्यान दीजिए कि अभी तक लिए गए सभी बीजीय आकृति 2.2 व्यंजकों में चर के घातांक पूणर् संख्या ही रहे हैं। इस रूप के व्यंजकों को एक चर वाला बहुपद ;चवसलदवउपंसे पद वदम अंतपंइसमद्ध कहा जाता है। ऊपर दिए गए उदाहरणों में चरग है। उदाहरण के लिए, ग3 दृ ग2 ़ 4ग ़ 7ए चर ग में एक बहुपद है। इसी प्रकार 3ल2 ़ 5लए चर ल में एक बहुपद है और ज2 ़ 4ए चर ज में एक बहुपद है। बहुपद ग2 ़ 2ग में व्यंजक ग2 और 2ग बहुपद के पद ;जमतउेद्ध कहे जाते हैं। इसी प्रकार, बहुपद 3ल2 ़ 5ल ़ 7 में तीन पद अथार्त् 3ल2ए 5ल और 7 हैं। क्या आप बहुपद दृग3 ़ 4ग2 ़ 7ग दृ 2 के पद लिख सकते हैं? इस बहुपद के चार पद अथार्त् दृग3ए 4ग2ए 7ग और दृ2 हैं। बहुपद के प्रत्येक पद का एक गुणांक ;बवमपििबपमदजद्ध होता है। अतः, दृग3 ़ 4ग2 ़ 7ग दृ 2 में ग3 का गुणांक दृ1 है, ग2 का गुणांक 4 है, ग का गुणांक 7 है और ग0 का गुणांक - 2 है ;स्मरण रहे कि ग0 त्र 1 हैद्ध। क्या आप जानते हैं कि ग2 दृ ग ़ 7 में ग का गुणांक क्या है? ग का गुणांक दृ1 है। ध्यान रहे कि 2 भी एक बहुपद है। वस्तुतः 2, दृ5, 7 आदि अचर बहुपदों ;बवदेजंदज चवसलदवउपंसेद्ध के उदाहरण हैं। अचर बहुपद 0 को शून्य बहुपद कहा जाता है। साथ ही, जैसा कि उच्च कक्षाओं मंे आप देखेंगे, सभी बहुपदों के संग्रह में शून्य बहुपद एक अति महत्वपूणर् भूमिका निभाता है। 3एअब आप ग ़ 1 ग ़ 3 और ल ़ ल2 जैसे बीजीय व्यंजक लीजिए। क्या आप जानतेग हैं कि आप ग ़ 1 त्र ग ़ गदृ1 लिख सकते हैं? यहाँ दूसरे पद अथार्त् गदृ1 का घातांक दृ1 हैगजो एक पूणर् संख्या नहीं है। अतः यह बीजीय व्यंजक एक बहुपद नहीं है। साथ ही, ग ़ 3 2को ग 1 ़ 3 के रूप में लिखा जा सकता है। यहाँग का घातांक 1 है, जो कि एक पूणर् संख्या2 नहीं है। तो क्या आप यह समझते हैं कि ग ़ 3 एक बहुपद है? नहीं, यह एक बहुपद नहीं है। क्या 3 ल ़ ल2 एक बहुपद है? यह भी एक बहुपद नहीं है। ;क्यों?द्ध यदि एक बहुपद में चर ग हो, तो हम बहुपद को च;गद्ध या ु;गद्ध या त;गद्धए आदि से प्रकट कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, हम यह लिख सकते हैंः च;गद्ध त्र2ग2 ़ 5ग दृ 3 ु;गद्ध त्र ग3 दृ1 त;लद्ध त्र ल3 ़ ल ़ 1 े;नद्ध त्र2दृ न दृ न2 ़ 6न5 बहुपद में परिमित संख्या में कितने भी पद हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ग150 ़ ग149 ़ ण्ण्ण् ़ ग2 ़ ग ़ 1 एक बहुपद है, जिसमें 151 पद हैं। अब बहुपद 2गए 2ए 5ग3ए दृ5ग2ए ल और न4 लीजिए। क्या आप देखते हैं कि इन बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद वफा केवल एक पद है। केवल एक पद वाले बहुपद को एकपदी ;उवदवउपंसद्ध कहा जाता है। ;अंग्रेजी शब्द श्उवदवश् का अथर् है श्एकश्द्ध। अब नीचे दिए गए बहुपदों में से प्रत्येक पर ध्यान दीजिएः च;गद्ध त्र ग ़ 1ए ु;गद्ध त्र ग2 दृ गए त;लद्ध त्र ल30 ़ 1ए ज;नद्ध त्र न43 दृ न2 यहाँ प्रत्येक बहुपद में कितने पद हैं? इनमें से प्रत्येक बहुपद में केवल दो पद हैं। केवल दो पदों वाले बहुपदों को द्विपद ;इपदवउपंसेद्ध कहा जाता है। ;अंग्रेजी शब्द ष्इपष् का अथर् है श्दोश्द्ध। इसी प्रकार, केवल तीन पदों वाले बहुपदों को त्रिापद ;जतपदवउपंसेद्ध कहा जाता है। ;अंग्रेजी शब्द ष्जतपष् का अथर् है श्तीनश्द्ध। त्रिापद के वुफछ उदाहरण ये हैंः च;गद्ध त्र ग ़ ग2 ़ πए ु;गद्ध त्र 2 ़ ग दृ ग2ए त;नद्ध त्र न ़ न2 दृ 2ए ज;लद्ध त्र ल4 ़ ल ़ 5 अब बहुपद च;गद्ध त्र 3ग7 दृ 4ग6 ़ ग ़ 9 को देख्िाए। इसमेंग की अध्िकतम घात वाला पद कौन - सा है? यह पद 3ग7 है। इस पद में ग का घातांक 7 है। इसी प्रकार, बहुपद ु;लद्ध त्र 5ल6 दृ 4ल2 दृ 6 में ल वफी अध्िकतम घात वाला पद 5ल6 है और इस पद में ल का घातांक 6 है। एक बहुपद में चर की अध्िकतम घात वाले पद के घातांक को बहुपद की घात ;कमहतमम व िजीम चवसलदवउपंसद्ध कहा जाता है। अतः बहुपद 3ग7 दृ 4ग6 ़ ग ़ 9 की घात 7 है और बहुपद 5ल6 दृ 4ल2 दृ 6 की घात 6 है। एक शून्येतर अचर बहुपद की घात शून्य होती है। उदाहरण 1 रू नीचे दिए गए प्रत्येक बहुपद की घात ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग5 दृ ग4 ़ 3 ;पपद्ध 2 दृ ल2 दृ ल3 ़ 2ल8 ;पपपद्ध 2 हल रू ;पद्ध चर का अध्िकतम घातांक 5 है। अतः बहुपद की घात 5 है। ;पपद्ध चर का अध्िकतम घातांक 8 है। अतः बहुपद की घात 8 है। ;पपपद्ध यहाँ केवल एक पद 2 है जिसे2ग0 के रूप में लिखा जा सकता है। अतः ग का घातांक 0 है। इसलिए, बहुपद की घात 0 है। अब बहुपदोंच;गद्ध त्र 4ग ़ 5ए ु;लद्ध त्र 2लए त;जद्ध त्र ज ़ 2 और े;नद्ध त्र 3 दृ न को लीजिए। क्या इनमें कोइर् सवर्निष्ठ तथ्य देखने को मिलता है? इनमें प्रत्येक बहुपद की घात एक है। एक घात वाले बहुपद को रैख्िाक बहुपद ;सपदमंत चवसलदवउपंसद्ध कहा जाता है। एक चर में वुफछ और रैख्िाक बहुपद 2ग दृ 1ए 2 ल ़ 1 और 2 दृ न हैं। अब क्या ग में तीन पदों वाला एक रैख्िाक बहुपद हम ज्ञात कर सकते हैं? हम एक ऐसा रैख्िाक बहुपद ज्ञात नहीं कर सकते, क्योंकि ग में एक रैख्िाक बहुपद में अध्िक से अध्िक दो पद हो सकते हैं। अतःग मेंकोइर् भी रैख्िाक बहुपद ंग ़ इ के रूप का होगा, जहाँ ं और इ अचर हैं और ं ≠ 0 है। ;क्यों?द्ध इसी प्रकार ंल ़ इए ल में एक रैख्िाक बहुपद है। अब आप निम्नलिख्िात बहुपदों को लीजिएः 22ग2 ़ 5ए 5ग2 ़ 3ग ़ πए ग2 और ग2 ़ 5 ग क्या आप इस बात से सहमत हैं कि ऊपर दिए गए सभी बहुपद घात 2 वाले हैं? घात 2 वाले बहुपद को द्विघाती या द्विघात बहुपद ;ुनंकतंजपब चवसलदवउपंसद्ध कहा जाता है। द्विघाती बहुपद के वुफछ उदाहरण 5 दृ ल2ए 4ल ़ 5ल2 और 6 दृ ल दृ ल2 हैं। क्या आप एक चर में चार अलग - अलग पदों वाले एक द्विघाती बहुपद को लिख सकते हैं? आप देखेंगे कि एक चर में एक द्विघाती बहुपद के अध्िक से अध्िक 3 पद होेंगे। यदि आप वुफछ और द्विघाती पद बना सवेंफ तो आप पाएँगे कि ग में कोइर् भी द्विघाती बहुपद ंग2 ़ इग ़ ब के रूप का होगा, जहाँ ं ≠ 0 और ंए इए ब अचर हैं। इसी प्रकार, ल में द्विघाती बहुपद ंल2 ़ इल ़ ब के रूप का होगा, जबकि ं ≠ 0 और ंए इए ब अचर हों। तीन घात वाले बहुपद को त्रिाघाती बहुपद ;बनइपब चवसलदवउपंसद्ध कहा जाता है। ग में एक त्रिाघाती बहुपद के वुफछ उदाहरण 4ग3ए 2ग3 ़ 1ए 5ग3 ़ ग2ए 6ग3 दृ गए 6 दृ ग3 और 2ग3 ़ 4ग2 ़ 6ग ़ 7 हैं। आपके विचार से एक चर में त्रिाघाती बहुपद में कितने पद हो सकते हैं? अिाक से अध्िक 4 पद हो सकते हैं। इन्हें ंग3 ़ इग2 ़ बग ़ क के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ ं ≠ 0 और ंए इए ब और क अचर हैं। अभी आपने देखा है कि घात 1, घात 2 या घात 3 वाले बहुपद देखने में लगभग समान ही लगते हैं, तो क्या आप एक चर में, घात द वाला एक बहुपद लिख सकते हैं, जहाँ द कोइर् प्रावृफत संख्या है? एक चरग में, घातद वाला बहुपद निम्न रूप का एक व्यंजक होता हैः ं गद ़ ं गददृ1 ़ ण् ण् ण् ़ ंग ़ ंदददृ1 10 जहाँ ं0ए ं1ए ं2ए ण् ण् ण्ए ंअचर हैं और ंद ≠ 0 है।द विशेष रूप में, यदि ं0 त्र ं1 त्र ं2 त्र ं3 त्र ण् ण् ण् त्र ं त्र 0 हो ;सभी अचर शून्य होंद्ध, तो दहमें शून्य बहुपद ;्रमतव चवसलदवउपंसद्ध प्राप्त होता है, जिसे 0 से प्रकट किया जाता है। शून्य बहुपद की घात क्या होती है? शून्य बहुपद की घात परिभाष्िात नहीं है। अभी तक हमने केवल एक चर वाले बहुपदों के बारे में अध्ययन किया है। हम एक से अध्िक चरों वाले बहुपद भी प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, ग2 ़ ल2 ़ गल्र ;जहाँ चर गए ल और ्र हैंद्ध तीन चरों में एक बहुपद है। इसी प्रकार, च2 ़ ु10 ़ त ;जहाँ चर चए ु और त हैंद्ध, न3 ़ अ2 ;जहाँ चर न और अ हैंद्ध क्रमशः तीन चरों और दो चरों में ;वालेद्ध बहुपद हैं। इस प्रकार के बहुपदों का विस्तार से अध्ययन हम बाद में करेंगे। प्रश्नावली 2ण्1 1ण् निम्नलिख्िात व्यंजकों में कौन - कौन एक चर में बहुपद हैं और कौन - कौन नहीं हैं? कारण केसाथ अपने उत्तर दीजिए: ;पद्ध 4ग2 दृ 3ग ़ 7 ;पपद्ध ल2 ़ 2 ;पपपद्ध3 ज ़ ज 2 2;पअद्ध ल ़ ;अद्ध ग10 ़ ल3 ़ ज50 ल 2ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक में ग2 का गुणांक लिख्िाएः ;पद्ध 2 ़ ग2 ़ ग ;पपद्ध 2 दृ ग2 ़ ग3 ;पपपद्ध π ग2 ़ ग ;पअद्ध 2 ग − 12 3ण् 35 घात के द्विपद का और 100 घात के एकपदी का एक - एक उदाहरण दीजिए। 4ण् निम्नलिख्िात बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद वफी घात लिख्िाए: ;पद्ध 5ग3 ़ 4ग2 ़ 7ग ;पपद्ध 4 दृ ल2 ;पपपद्ध 5ज दृ 7 ;पअद्ध 3 5ण् बताइए कि निम्नलिख्िात बहुपदों में कौन - कौन बहुपद रैख्िाक हैं, कौन - कौन द्विघाती हैं और कौन - कौन त्रिाघाती हैंः ;पद्ध ग2 ़ ग ;पपद्ध ग दृ ग3 ;पपपद्ध ल ़ ल2 ़ 4 ;पअद्ध 1 ़ ग ;अद्ध 3ज ;अपद्ध त2 ;अपपद्ध 7ग3 2ण्3 बहुपद के शून्यक निम्नलिख्िात बहुपद लीजिएः च;गद्ध त्र5ग3 दृ 2ग2 ़ 3ग दृ 2 यदि च;गद्ध में सवर्त्रा ग के स्थान पर 1 प्रतिस्थापित करें, तो हमें यह प्राप्त होता हैः च;1द्ध त्र 5 × ;1द्ध3 दृ 2 × ;1द्ध2 ़ 3 × ;1द्ध दृ 2 त्र 5 दृ 2 ़ 3 दृ2 त्र4 अतः, हम यह कह सकते हैं कि ग त्र 1 पर च;गद्ध का मान 4 है। इसी प्रकारए च;0द्ध त्र 5;0द्ध3 दृ 2;0द्ध2 ़ 3;0द्ध दृ2 त्रदृ2 क्या आप च;दृ1द्ध ज्ञात कर सकते हैं? उदाहरण 2 रू चरों के दिए गए मान पर नीचे दिए गए प्रत्येक बहुपद का मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग त्र 1 पर च;गद्ध त्र 5ग2 दृ 3ग ़ 7 का मान ;पपद्ध ल त्र 2 पर ु;लद्ध त्र 3ल3 दृ 4ल ़ 11 का मान ;पपपद्ध ज त्र ं पर च;जद्ध त्र 4ज4 ़ 5ज3 दृ ज2 ़ 6 का मान हल रू ;पद्ध च;गद्ध त्र 5ग2 दृ 3ग ़ 7 ग त्र 1 पर बहुपद च;गद्ध का मान यह होता हैः च;1द्ध त्र 5;1द्ध2 दृ 3;1द्ध ़ 7 त्र5 दृ 3 ़ 7 त्र 9 ;पपद्ध ु;लद्ध त्र 3ल3 दृ 4ल ़ 11 ल त्र 2 पर बहुपद ु;लद्ध का मान यह होता हैः ु;2द्ध त्र3;2द्ध3 दृ 4;2द्ध ़ 11 त्र 24 दृ 8 ़ 11 त्र 16 ़ 11 ;पपपद्ध च;जद्ध त्र 4ज4 ़ 5ज3 दृ ज2 ़ 6 ज त्र ं पर बहुपद च;जद्ध का मान यह होता हैः च;ंद्ध त्र 4ं4 ़ 5ं3 दृ ं2 ़ 6 अब बहुपद च;गद्ध त्र ग दृ 1 लीजिए। च;1द्ध क्या है? ध्यान दीजिए कि च;1द्ध त्र 1 दृ 1 त्र 0 है। क्योंकि च;1द्ध त्र 0 हैए इसलिए हम यह कहते हैं कि 1, बहुपद च;गद्ध का एक शून्यक ;्रमतवद्ध है। इसी प्रकार, आप यह देख सकते हैं कि 2, ु;गद्ध का एक शून्यक है, जहाँ ु;गद्ध त्र ग दृ 2 है। व्यापक रूप में, हम यह कहते हैं कि बहुपद च;गद्ध का शून्यक एक ऐसी संख्या ब है कि च;बद्ध त्र 0 हो। इस बात की ओर आपने अवश्य ध्यान दिया होगा कि बहुपद ;ग दृ 1द्ध का शून्यक इस बहुपद को 0 के समीवृफत करके प्राप्त किया जाता है। अथार्त् ग दृ 1 त्र 0ए जिससे ग त्र 1 प्राप्त होता है। तब हम कहते हैं कि च;गद्ध त्र 0 एक बहुपद समीकरण है और 1 इस बहुपद समीकरण च;गद्ध त्र 0 का एक मूल है। अतः हम यह कहते हैं कि 1, बहुपद ग दृ 1 का शून्यक है या यह बहुपद समीकरण ग दृ 1 त्र 0 का एक मूल ;तववजद्ध है। अब अचर बहुपद 5 लीजिए। क्या आप बता सकते हैं कि इसका शून्यक क्या है? इस बहुपद का कोइर् शून्यक नहीं है, क्योंकि 5ग0 में ग के स्थान पर किसी भी संख्या को प्रतिस्थापित करने पर हमें 5 ही प्राप्त होता है। वस्तुतः, एक शून्येतर अचर बहुपद का कोइर् शून्यक नहीं होता। अब प्रश्न उठता है कि शून्य बहुपद के शून्यकों के बारे में क्या कहा जाए। परंपरा के अनुसार प्रत्येक वास्तविक संख्या शून्य बहुपद का एक शून्यक होती है। उदाहरण 3 रू जाँच कीजिए कि दृ2 और 2 बहुपद ग ़ 2 के शून्यक हैं या नहीं। हल रू मान लीजिए च;गद्ध त्र ग ़ 2 तब च;2द्ध त्र 2 ़ 2 त्र 4ए च;दृ2द्धत्र दृ2 ़ 2 त्र 0 अतः दृ2 बहुपद ग ़ 2 का एक शून्यक है, परन्तु 2 बहुपद ग ़ 2 का शून्यक नहीं है। उदाहरण 4 रू बहुपद च;गद्ध त्र 2ग ़ 1 का एक शून्यक ज्ञात कीजिए। हल रू च;गद्ध का शून्यक ज्ञात करना वैसा ही है जैसा कि समीकरण च;गद्ध त्र0 को हल करना। अब 2ग ़ 1 त्र0 से हमेंग त्र दृ1 प्राप्त होता है।2 अतः, दृ1 बहुपद 2ग ़ 1 का एक शून्यक है।2 अब, यदि च;गद्ध त्र ंग ़ इए ं ≠ 0 एक रैख्िाक बहुपद हो, तो हम इस च;गद्ध का शून्यक किस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं? उदाहरण 4 से आपको इसका वुफछ संकेत मिल सकता है। बहुपद च;गद्ध का शून्यक ज्ञात करने का अथर् है बहुपद समीकरण च;गद्ध त्र 0 को हल करना। अब च;गद्ध त्र 0 का अथर् है ंग ़ इ त्र 0ए ं ≠ 0 अतः, ंग त्रदृ इ इअथार्त् ग त्रदृ ं अतः, ग त्र − इ ही केवल च;गद्ध का शून्यक है, अथार्त् रैख्िाक बहुपद का एक और केवलं एक शून्यक होता है। अब हम यह कह सकते हैं कि 1, ग दृ 1 का केवल एक शून्यक है औरदृ 2ए ग ़ 2 का केवल एक शून्यक है। उदाहरण 5 रू सत्यापित कीजिए कि 2 और 0 बहुपद ग2 दृ 2ग के शून्यक हैं। हल रू मान लीजिए च;गद्ध त्र ग2 दृ 2ग तब च;2द्ध त्र 22 दृ 4 त्र 4 दृ 4 त्र 0 और च;0द्ध त्र 0 दृ 0 त्र 0 अतः, 2 और 0 दोनों ही बहुपद ग2 दृ 2ग के शून्यक हैं। आइए अब हम अपने प्रेक्षणों की सूची बनाएँः 1ण् आवश्यक नहीं है कि बहुपद का शून्यक शून्य ही हो। 2ण् 0, बहुपद का एक शून्यक हो सकता है। 3ण् प्रत्येक रैख्िाक बहुपद का एक और केवल एक शून्यक होता है। 4ण् एक बहुपद के एक से अध्िक शून्यक हो सकते हैं। प्रश्नावली 2ण्2 1ण् निम्नलिख्िात पर बहुपद 5ग दृ 4ग2 ़ 3 के मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग त्र 0 ;पपद्ध ग त्र दृ1 ;पपपद्ध ग त्र 2 2ण् निम्नलिख्िात बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद के लिए च;0द्धए च;1द्ध और च;2द्ध ज्ञात कीजिएः ;पद्ध च;लद्ध त्र ल2 दृ ल ़ 1 ;पपद्ध च;जद्ध त्र 2 ़ ज ़ 2ज2 दृ ज3 ;पपपद्ध च;गद्ध त्र ग3 ;पअद्ध च;गद्ध त्र ;ग दृ 1द्ध ;ग ़ 1द्ध 3ण् सत्यापित कीजिए कि दिखाए गए मान निम्नलिख्िात स्िथतियों में संगत बहुपद के शून्यक हैंः 1 4;पद्ध च;गद्ध त्र 3ग ़ 1य ग त्र दृ ;पपद्ध च;गद्ध त्र 5ग दृ πय ग त्र 3 5 ;पपपद्ध च;गद्ध त्र ग2 दृ 1य ग त्र 1ए दृ1 ;पअद्ध च;गद्ध त्र ;ग ़ 1द्ध ;ग दृ 2द्धय ग त्र दृ 1ए 2 ;अद्ध च;गद्ध त्र ग2य ग त्र 0 ;अपद्ध च;गद्ध त्र सग ़ उय ग त्र दृ उ स 12 1;अपपद्ध च;गद्ध त्र 3ग2 दृ 1य ग त्र − ए ;अपपपद्ध च;गद्ध त्र 2ग ़ 1य गत्र 33 2 4ण् निम्नलिख्िात स्िथतियों में से प्रत्येक स्िथति में बहुपद का शून्यक ज्ञात कीजिए: ;पद्ध च;गद्ध त्र ग ़ 5 ;पपद्ध च;गद्ध त्र ग दृ 5 ;पपपद्ध च;गद्ध त्र 2ग ़ 5 ;पअद्ध च;गद्ध त्र 3ग दृ 2 ;अद्ध च;गद्ध त्र 3ग ;अपद्ध च;गद्ध त्र ंगय ं ≠ 0 ;अपपद्ध च;गद्ध त्र बग ़ कय ब ≠ 0ए बए क वास्तविक संख्याएँ हैं। 2ण्4 शेषपफल प्रमेय आइए हम दो संख्याएँ 15 और 6 लें। आप जानते हैं कि जब हम 15 को 6 से भाग देते हैं, तो हमें भागपफल 2 और शेषपफल 3 प्राप्त होता है। क्या आप जानते हैं कि इस तथ्य को किस प्रकार व्यक्त किया जाता है? हम 15 को इस रूप में लिखते हैंः 15त्र ;2 × 6द्ध ़ 3 हम यहाँ देखते हैं कि शेषपफल 3 भाजक 6 से कम है। इसी प्रकार, यदि हम 12 को 6 से भाग दें, तो हमें प्राप्त होता हैः 12त्र ;2 × 6द्ध ़ 0 यहाँ पर शेषपफल क्या है? यहाँ पर शेषपफल शून्य है। हम यह कहते हैं कि 6, 12 का एक गुणनखंड ;ंिबजवतद्ध है या 12, 6 का एक गुणज ;उनसजपचसमद्ध है। अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग दे सकते हैं? आइए सबसे पहले हम इसे हल करने का प्रयास करें और यह तब करें जबकि भाजक एक एकपदी हो। अतः आइए हम बहुपद 2ग3 ़ ग2 ़ ग को एकपदी ग से भाग दें। 2ग3 ग2 ग;2ग3 ़ ग2 ़ गद्ध झ् ग त्र ़़ ग गग त्र2ग2 ़ ग ़ 1 यहाँ आप यह देख सकते हैं कि 2ग3 ़ ग2 ़ ग के प्रत्येक पद में ग सवर्निष्ठ है। अतः हम 2ग3 ़ ग2 ़ ग को ग;2ग2 ़ ग ़ 1द्ध के रूप में लिख सकते हैं। तब हम यह कहते हैं कि ग और 2ग2 ़ ग ़ 1 बहुपद 2ग3 ़ ग2 ़ ग के गुणनखंड हैं, और 2ग3 ़ ग2 ़ गए ग का एक गुणज है और 2ग2 ़ ग ़ 1 का भी एक गुणज है। बहुपदों 3ग2 ़ ग ़ 1 और ग का एक अन्य युग्म लीजिए। यहाँ ;3ग2 ़ ग ़ 1द्ध झ् ग त्र;3ग2 झ् गद्ध ़ ;ग झ् गद्ध ़ ;1 झ् गद्ध है। हम देखते हैं कि 1 को ग से भाग देने पर हमें एक बहुपद प्राप्त नहीं हो सकता। अतः इस स्िथति में हम रुक जाते हैं और देखते हैं कि शेषपफल 1 है। अतः 3ग2 ़ ग ़ 1 त्र क्ष्;3ग ़ 1द्ध × गद्व ़ 1 यहाँभागपफल 3ग ़ 1 है और शेषपफल 1 है। क्या आप यह सोच सकते हैं कि ग बहुपद 3ग2 ़ ग ़ 1 का एक गुणनखंड है? क्योंकि शेषपफल शून्य नहीं है, इसलिए यह गुणनखंड नहीं है। आइए अब हम एक बहुपद को एक - दूसरे शून्येतर बहुपद से भाग दें। उदाहरण 6 रू च;गद्ध को ह;गद्ध से भाग दीजिए, जहाँ च;गद्ध त्र ग ़ 3ग2 दृ 1 और ह;गद्ध त्र 1 ़ ग है। हल रू हम भाग देने के प्रक्रम को निम्नलिख्िात चरणों में करते हैंः चरण 1 रू भाज्य ग ़ 3ग2 दृ 1 और भाजक ;1 ़ गद्ध को मानक रूप में लिखते हैं, अथार्त् पदों को उनवफी घातों के अवरोही क्रम ;कमेबमदकपदह वतकमतद्ध में लिखते हैं। अतः भाज्यरू 3ग2 ़ ग दृ1ए भाजक रू ग ़ 1 चरण 2 रू हम भाज्य के पहले पद को भाजक के पहले पद से भाग देते हैं, अथार्त् हम 3ग2 को ग से भाग देते हैं और हमें 3ग प्राप्त होता है। यह भागपफल का पहला पद होता है। चरण3 रू हम भाजक को भागपफल के पहले पद से गुणा करते हैं और इस गुणनपफल को भाज्य से घटा देते हैं, अथार्त् हम ग ़ 1 को 3ग से गुणा करते हैं और गुणनपफल 3ग2 ़ 3ग को भाज्य 3ग2 ़ ग दृ 1 से घटाते हैं। इससे हमें शेषपफल दृ2ग दृ 1 प्राप्त होता है। चरण 4 रू हम शेषपफल दृ2ग दृ 1 को नया भाज्य मान लेते हैं। भाजक वही बना रहता है। चरण 2 को पुनः लागू करने पर, हमें भागपफल का अगला पद प्राप्त होता है। अथार्त् ;नएद्ध भाज्य के पहले पद दृ 2ग को भाजक के पहले पद ग से भाग देते हैं और हमेंदृ 2 प्राप्त होता है। इस तरह, भागपफल का दूसरा पद दृ 2 है। चरण 5 रू हम भाजक को भागपफल के दूसरे पद से गुणा करते हैं और इस गुणनपफल को भाज्य से घटाते हैं। अथार्त् हम ग ़ 1 को दृ 2 से गुणा करते हैं और गुणनपफल दृ 2ग दृ 2 को भाज्यदृ 2ग दृ 1 से घटाते हैं। इससे शेषपफल के रूप में हमें 1 प्राप्त होता है। दृ2ग ग3ग2 त्र 3ग त्र भागपफल का पहला पदग ग ़ 1 त्र दृ 2 त्र भागपफल का दूसरा पद ;ग ़ 1द्ध;दृ2द्ध त्र दृ2ग दृ 2 3ग 3ग2 ़ ग दृ1 3ग2 ़ 3ग दृ दृ दृ 2ग दृ 1 नया भागपफल त्र 3ग दृ 2 दृ2ग दृ 1 दृ2ग दृ 2 ़़़ 1 यह प्रक्रम हम तब तक करते रहते हैं जब तक कि नए भाज्य की घात भाजक वफी घात से कम नहीं हो जाती। इस चरण पर, भाज्य शेषपफल हो जाता है और भागपफलों के योगपफल से हमें पूणर् भागपफल प्राप्त हो जाता है। चरण 6 रू इस तरह पूरा भागपफल 3ग दृ 2 है और शेषपफल 1 है। आइए हम देखें कि पूरे प्रक्रम में हमने क्या - क्या किया है।3ग दृ 2 ग ़ 1 3ग2 ़ ग दृ 1 3ग2 ़ 3गदृ दृ दृ2ग दृ 1दृ 2ग दृ 2 ़़ 1 ध्यान दीजिए कि 3ग2 ़ ग दृ 1 त्र ;ग ़ 1द्ध ;3ग दृ 2द्ध ़ 1 अथार्त् भाज्य त्र ;भाजक × भागपफलद्ध ़ शेषपफल व्यापक रूप में, यदि च;गद्ध और ह;गद्ध ऐसे दो बहुपद हों कि च;गद्ध की घात झ ह;गद्ध की घात और ह;गद्ध ≠ 0 हैए तो हम ऐसे बहुपद ु;गद्ध और त;गद्ध प्राप्त कर सकते हैं जिससे कि च;गद्ध त्र ह;गद्धु;गद्ध ़ त;गद्धए जहाँ त;गद्ध त्र 0 या त;गद्ध की घात ढ ह;गद्ध की घात। यहाँ हम कह सकते हैं कि च;गद्ध को ह;गद्ध से भाग देने पर भागपफल ु;गद्ध और शेषपफल त;गद्ध प्राप्त होता है। ऊपर के उदाहरण में, भाजक एक रैख्िाक बहुपद था। ऐसी स्िथति में आइए हम देखें कि शेषपफल और भाज्य के वुफछ मानों में कोइर् संबंध् है या नहीं। च;गद्ध त्र 3ग2 ़ ग दृ 1 में ग के स्थान पर दृ1 प्रतिस्थापित करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः च;दृ1द्ध त्र 3;दृ1द्ध2 ़ ;दृ1द्ध दृ1 त्र 1 अतः च;गद्ध त्र 3ग2 ़ ग दृ 1 को ;ग ़ 1द्ध से भाग देने पर जो शेषपफल प्राप्त होता है, यह वही होता है जो कि बहुपद ;ग ़ 1द्ध के शून्यक, अथार्त् दृ1 पर बहुपद च;गद्ध का मान होता है। आइए हम वुफछ अन्य उदाहरण लें। बहुपद 45 उदाहरण 7 रू 3ग4 दृ 4ग3 दृ 3ग दृ1 को ग दृ 1 से भाग दीजिए। हल रू लंबे भाग से हमें यह प्राप्त होता है: 3ग3 दृ ग2 दृ ग दृ 4 ग दृ 1 3ग4 दृ 4ग3 दृ 3ग दृ 1 3ग4 दृ 3ग3दृ़दृग3 दृ 3ग दृ 1 दृ ग3 ़ ग2 ़दृ दृ ग2 दृ 3ग दृ 1 दृ ग2 ़ ग़ दृ दृ 4ग दृ 1दृ4ग ़ 4़दृदृ 5 यहाँ शेषपफल दृ 5 है। अबग दृ 1 का शून्यक 1 है। अतः च;गद्ध में ग त्र 1 रखने पर हम यह पाते हैं कि च;1द्ध त्र 3;1द्ध4 दृ 4;1द्ध3 दृ 3;1द्ध दृ 1 त्र3 दृ 4 दृ 3 दृ 1 त्र दृ 5ए जो कि शेषपफल है। उदाहरण 8 रू च;गद्ध त्र ग3 ़ 1 को ग ़ 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषपफल ज्ञात कीजिए। हल रू लंबे भाग से, ग2 दृ ग ़ 1 ग ़ 1 ग3 ़ 1 ग3 ़ ग2दृदृ दृग2 ़ 1 दृ ग2 दृ ग़़ ग ़ 1 ग ़ 1दृदृ 0 अतः, हमें शेषपफल 0 प्राप्त होता है। यहाँ च;गद्ध त्र ग3 ़ 1 है और ग ़ 1 त्र 0 का मूल ग त्र दृ1 है। अतः च;दृ1द्ध त्र ;दृ1द्ध3 ़ 1 त्र दृ1 ़ 1 त्र0ए जो वास्तविक रूप से भाग देने पर प्राप्त शेषपफल के बराबर है। क्या यह एक बहुपद को एक रैख्िाक बहुपद से भाग देने पर प्राप्त शेषपफल ज्ञात करने की एक सरल विध्ि नहीं है? अब हम इस तथ्य को निम्नलिख्िात प्रमेय के रूप में प्रस्तुत करेंगे।हम यहाँ इस प्रमेय की उपपिा देकर यह भी दिखाएंँगे कि यह प्रमेय सत्य क्यों है। शेषपफल प्रमेयरू मान लीजिए च;गद्ध एक से अध्िक या एक के बराबर घात वाला एक बहुपद है और मान लीजिए ं कोइर् वास्तविक संख्या है। यदि च;गद्ध को रैख्िाक बहुपद ग दृ ं से भाग दिया जाए, तो शेषपफल च;ंद्ध होता है। उपपिा रू मान लीजिए च;गद्ध एक या एक से अध्िक घात वाला एक बहुपद है और मान लीजिए कि जब च;गद्ध को ग दृ ं से भाग दिया जाता है, तो भागपफल ु;गद्ध होता है और शेषपफल त;गद्ध होता है। अथार्त् च;गद्ध त्र;ग दृ ंद्ध ु;गद्ध ़ त;गद्ध क्योंकि ग दृ ं की घात 1 है और त;गद्ध की घात ग दृ ं वफी घात से कम है, इसलिए त;गद्ध की घात त्र 0 है। इसका अथर् यह है कि त;गद्ध एक अचर है। मान लीजिए यह अचर त है। अतः, ग के प्रत्येक मान के लिए त;गद्ध त्र त है। इसलिएए च;गद्ध त्र;ग दृ ंद्ध ु;गद्ध ़ त विशेष रूप से, यदि ग त्र ंए तो इस समीकरण से हमें यह प्राप्त होता हैः च;ंद्ध त्र;ं दृ ंद्ध ु;ंद्ध ़ त त्र त इस तरह प्रमेय सि( हो जाती है। आइए हम इस परिणाम को एक अन्य उदाहरण पर लागू करें। उदाहरण 9 रू ग4 ़ ग3 दृ 2ग2 ़ ग ़ 1 को ग दृ 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषपफल ज्ञात कीजिए। हल रू यहाँए च;गद्ध त्र ग4 ़ ग3 दृ 2ग2 ़ ग ़ 1 है और ग दृ 1 का शून्यक 1 है। च;1द्ध त्र ;1द्ध4 ़ ;1द्ध3 दृ 2;1द्ध2 ़ 1 ़ 1 त्र 2 अतः शेषपफल प्रमेय के अनुसार ग4 ़ ग3 दृ 2ग2 ़ ग ़ 1 को ;ग दृ 1द्ध से भाग देने पर शेषपफल 2 प्राप्त होता है। उदाहरण 10 रू जाँच कीजिए कि बहुपदु;जद्ध त्र 4ज3 ़ 4ज2 दृ ज दृ 1ए 2ज ़ 1 का एक गुणज है। हल रू जैसा कि आप जानते हैं कि ु;जद्ध बहुपद 2ज ़ 1 का गुणज केवल तब होगा जबकि 2ज ़ 1 से ु;जद्ध को भाग देने पर कोइर् शेष न बचता हो। अब 2ज ़ 1 त्र 0 लेने पर हमें यह प्राप्त होता हैः 1 ज त्रदृ 2 1 13 21⎛⎞ 1⎛⎞ ⎛⎞⎛⎞ दृ4औरए ु ⎜⎟त्र4 − ़− −−− 1⎜⎟ ⎜⎟⎜⎟ ⎝⎠⎝⎠ 2 11 22 ⎝⎠⎝⎠ 2 त्र −़़− 11 22 त्र0 अतः, ु;जद्ध को 2ज ़ 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषपफल 0 है। अतः, 2ज ़ 1 दिए हुए बहुपद ु;जद्ध का एक गुणनखंड है अथार्त् ु;जद्धए 2ज ़ 1 का एक गुणज है। प्रश्नावली 2ण्3 1ण् ग3 ़ 3ग2 ़ 3ग ़ 1 को निम्नलिख्िात से भाग देने पर शेषपफल ज्ञात कीजिएः 1;पद्ध ग ़ 1 ;पपद्ध ग दृ ;पपपद्ध ग ;पअद्ध ग ़ π ;अद्ध 5 ़ 2ग2 2ण् ग3 दृ ंग2 ़ 6ग दृ ं को ग दृ ं से भाग देने पर शेषपफल ज्ञात कीजिए। 3ण् जाँच कीजिए कि 7 ़ 3गए 3ग3 ़ 7ग का एक गुणनखंड है या नहीं। 2ण्5 बहुपदों का गुणनखंडन आइए अब हम ऊपर के उदाहरण 10 की स्िथति पर ध्यानपूवर्क विचार करें। इसके अनुसार, 1⎛⎞ु −क्योंकि शेषपफल ⎜⎟त्र 0 हैए इसलिए 2ज ़ 1ए ु;जद्ध का एक गुणनखंड है। अथार्त् किसी2⎝⎠बहुपद ह;जद्ध के लिए, ु;जद्ध त्र ;2ज ़ 1द्ध ह;जद्ध होता है। यह नीचे दिए हुए प्रमेय की एक विशेष स्िथति हैः गुणनखंड प्रमेयरू यदि च;गद्ध घात द झ 1 वाला एक बहुपद हो और ं कोइर् वास्तविक संख्या हो, तो ;पद्ध ग दृ ंए च;गद्ध का एक गुणनखंड होता है, यदि च;ंद्ध त्र 0 होए और ;पपद्ध च;ंद्ध त्र 0 होता हैए यदि ग दृ ंए च;गद्ध का एक गुणनखंड हो। यह वस्तुतः शेषपफल प्रमेय से तुरन्त प्राप्त हो जाती है। परंतु यहाँ हम इसे सि( नहीं करेंगे। पिफर भी इसका हम यदा - कदा प्रयोग करते रहेंगे, जैसा कि आगे के उदाहरणों में दिखाया गया है। उदाहरण 11 रू जाँच कीजिए कि ग ़ 2 बहुपदों ग3 ़ 3ग2 ़ 5ग ़ 6 और 2ग ़ 4 का एक गुणनखंड है या नहीं। हल रू ग ़ 2 का शून्यकदृ2 है। मान लीजिए च;गद्धत्र ग3 ़ 3ग2 ़ 5ग ़ 6 और े;गद्ध त्र 2ग ़ 4 तब, च;दृ2द्ध त्र ;दृ 2द्ध3 ़ 3;दृ 2द्ध2 ़ 5;दृ 2द्ध ़ 6 त्र दृ8 ़ 12 दृ 10 ़ 6 त्र 0 अतः गुणनखंड प्रमेय ;थ्ंबजवत ज्ीमवतमउद्ध के अनुसार ग ़ 2ए ग3 ़ 3ग2 ़ 5ग ़ 6 का एक गुणनखंड है। पुनः, े;दृ2द्ध त्र 2;दृ 2द्ध ़ 4 त्र 0 अतः ग ़ 2ए 2ग ़ 4 का एक गुणनखंड है। वास्तव में, गुणनखंड प्रमेय लागू किए बिना ही आप इसकी जाँच कर सकते हैं, क्योंकि 2ग ़ 4 त्र 2;ग ़ 2द्ध है। उदाहरण 12 रू यदि ग दृ 1ए 4ग3 ़ 3ग2 दृ 4ग ़ ा का एक गुणनखंड है, तो ा का मान ज्ञात कीजिए। हल रू क्योंकि ग दृ 1ए च;गद्ध त्र 4ग3 ़ 3ग2 दृ 4ग ़ ा का एक गुणनखंड है, इसलिए च;1द्ध त्र 0 होगा। अब, च;1द्ध त्र 4;1द्ध3 ़ 3;1द्ध2 दृ 4;1द्ध ़ ा इसलिए 4 ़ 3 दृ 4 ़ ा त्र0 अथार्त् ा त्रदृ3 अब हम घात 2 और घात 3 के वुफछ बहुपदों के गुणनखंड ज्ञात करने के लिए गुणनखंड प्रमेय का प्रयोग करेंगे। आप ग2 ़ सग ़ उ जैसे द्विघाती बहुपद के गुणनखंडन से परिचित हैं। आपने मध्य पद सग को ंग ़ इग में इस प्रकार विभक्त करके कि ंइ त्र उ हो, गुणनखंडन किया था। तब ग2 ़ सग ़ उ त्र ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध प्राप्त हुआ था। अब हम ंग2 ़ इग ़ बए जहाँ ं ≠ 0 और ंए इए ब अचर हैं, के प्रकार के द्विघाती बहुपदों का गुणनखंडन करने का प्रयास करेंगे। मध्य पद को विभक्त करके बहुपद ंग2 ़ इग ़ ब का गुणनखंडन निम्न प्रकार से होता हैः मान लीजिए इसके गुणनखंड ;चग ़ ुद्ध और ;तग ़ ेद्ध हैं। तब, ंग2 ़ इग ़ ब त्र ;चग ़ ुद्ध ;तग ़ ेद्ध त्र चत ग2 ़ ;चे ़ ुतद्ध ग ़ ुे ग2 के गुणांकों की तुलना करने पर, हमें ं त्र चत प्राप्त होता है। इसी प्रकार, ग के गुणांकों की तुलना करने पर, हमें इ त्र चे ़ ुत प्राप्त होता है। साथ ही, अचर पदों की तुलना करने पर, हमें ब त्र ुे प्राप्त होता है। इससे यह पता चलता है कि इ दो संख्याओंचे औरुत का योगपफल है, जिनका गुणनपफल ;चेद्ध;ुतद्ध त्र ;चतद्ध;ुेद्ध त्र ंब है। अतः ंग2 ़ इग ़ ब का गुणनखंडन करने के लिए, हम इ को ऐसी दो संख्याओं के योगपफल के रूप में लिखते हैं जिनका गुणनपफल ंब हो। यह तथ्य नीचे दिए गए उदाहरण 13 से स्पष्ट हो जाएगा। उदाहरण 13 रू मध्य पद को विभक्त करके तथा गुणनखंड प्रमेय का प्रयोग करके 6ग2 ़ 17ग ़ 5 का गुणनखंडन कीजिए। हल 1 रू ;मध्य पद को विभक्त करकेद्ध: यदि हम ऐसी दो संख्याएँ च और ु ज्ञात कर सकते हों जिससे कि च ़ ु त्र 17 और चु त्र 6 × 5 त्र 30 होए तो हम गुणनखंड प्राप्त कर सकते हैं। अतः आइए हम 30 के गुणनखंड - युग्मों को ढूढ़ें। वुफछ युग्म 1 और 30, 2 और 15, 3 और 10, 5 और 6 हैं। इन युग्मों में, हमें 2 और 15 के युग्म से च ़ ु त्र 17 प्राप्त होगा। अतः 6ग2 ़ 17ग ़ 5त्र 6ग2 ़ ;2 ़ 15द्धग ़ 5 त्र6ग2 ़ 2ग ़ 15ग ़ 5 त्र2ग;3ग ़ 1द्ध ़ 5;3ग ़ 1द्ध त्र;3ग ़ 1द्ध ;2ग ़ 5द्ध हल 2 रू ;गुणनखंड प्रमेय की सहायता सेद्धः ⎛217 5 ⎞6ग2 ़ 17ग ़ 5 त्र 6⎜ग ़ ग ़⎟त्र 6 च;गद्धए मान लीजिए। यदि ं और इए च;गद्ध⎝ 66 ⎠5के शून्यक हों, तो 6ग2 ़ 17ग ़ 5 त्र 6;ग दृ ंद्ध ;ग दृ इद्ध है।अतः ंइ त्र होगा। आइए हम6 11 5 5 एएए ए23 3 2 ं और इ के लिए कुछ संभावनाएँ देखें। ये ±±±±± 1 हो सकते हैं। अबए ⎛⎞ 1⎛⎞1 117 ⎛⎞15 −1 ⎛⎞ च ⎜⎟त्र ़ ⎜⎟़ ≠ 0 है। परन्तु च ⎜⎟त्र 0 है। अतः ⎜ग ़⎟ए च;गद्ध का एक3 ⎝ 3 ⎠⎝⎠2 46 ⎝⎠26 ⎝⎠⎛ 5⎞गुणनखंड है। इसी प्रकार, जाँच करके आप यह ज्ञात कर सकते हैं कि ⎜ग ़⎟ए च;गद्ध का एक⎝ 2⎠गुणनखंड है। ⎛ 1 ⎞⎛ 5 ⎞अतः, 6ग2 ़ 17ग ़ 5 त्र6 ⎜ग ़⎟⎜ग ़⎟⎝ 3 ⎠⎝ 2 ⎠ ⎛3ग ़1⎞⎛2ग ़5 ⎞ त्र6⎜⎟⎜ ⎟⎝ 3 ⎠⎝ 2 ⎠ त्र;3ग ़ 1द्ध ;2ग ़ 5द्ध इस उदाहरण के लिए, विभक्त करने की विध्ि का प्रयोग अध्िक प्रभावशाली है। पिफर भी, आइए हम एक और उदाहरण लें। उदाहरण 14 रू गुणनखंड प्रमेय की सहायता से ल2 दृ 5ल ़ 6 का गुणनखंडन कीजिए। हलरू मान लीजिए च;लद्ध त्र ल2 दृ 5ल ़ 6 है। अब, यदि च;लद्ध त्र ;ल दृ ंद्ध ;ल दृ इद्ध होए तो हम जानते हैं कि इसका अचर पद ंइ होगा। अतः ंइ त्र 6 है। इसलिए, च;लद्ध के गुणनखंड प्राप्त करने के लिए हम 6 के गुणनखंड ज्ञात करते हैं। 6 के गुणनखंड 1, 2 और 3 हैं। अब, च;2द्ध त्र 22 दृ ;5 × 2द्ध ़ 6 त्र 0 इसलिए ल दृ 2ए च;लद्ध का एक गुणनखंड है। साथ ही, च;3द्ध त्र 32 दृ ;5 × 3द्ध ़ 6 त्र 0 इसलिए, ल दृ 3 भी ल2 दृ 5ल ़ 6 का एक गुणनखंड है। अतः, ल2 दृ 5ल ़ 6 त्र ;ल दृ 2द्ध ;ल दृ 3द्ध ध्यान दीजिए कि मध्य पद दृ5ल को विभक्त करके भी ल2 दृ 5ल ़ 6 का गुणनखंडन किया जा सकता है। आइए अब हम त्रिाघाती बहुपदों का गुणनखंडन करें। यहाँ प्रारंभ में विभक्त - विध्ि अध्िक उपयोगी सि( नहीं होगी। हमें पहले कम से कम एक गुणनखंड ज्ञात करना आवश्यक होता है, जैसा कि आप नीचे के उदाहरण में देखेंगे। उदाहरण 15 रू ग3 दृ 23ग2 ़ 142ग दृ 120 का गुणनखंडन कीजिए। हल रू मान लीजिए च;गद्ध त्र ग3 दृ 23ग2 ़ 142ग दृ 120 है। अब हम दृ120 के सभी गुणनखंडों का पता लगाएँगे। इनमें वुफछ गुणनखंड हैंः ±1ए ±2ए ±3ए ±4ए ±5ए ±6ए ±8ए ±10ए ±12ए ±15ए ±20ए ±24ए ±30ए ±60 जाँच करने पर, हम यह पाते हैं कि च;1द्ध त्र 0 है। अतः ;ग दृ 1द्धए च;गद्ध का एक गुणनखंड है। अब हम देखते हैं कि ग3 दृ 23ग2 ़ 142ग दृ 120 त्र ग3 दृ ग2 दृ 22ग2 ़ 22ग ़ 120ग दृ 120त्र ग2;ग दृ1द्ध दृ 22ग;ग दृ 1द्ध ़ 120;ग दृ 1द्ध ;क्यों?द्ध त्र;ग दृ 1द्ध ;ग2 दृ 22ग ़ 120द्ध ख्;ग दृ 1द्ध को सवर्निष्ठ लेकर, इसे च;गद्ध को ;ग दृ 1द्ध से भाग देकर भी प्राप्त किया जा सकता था। अब ग2 दृ 22ग ़ 120 का गुणनखंडन या तो मध्य पद को विभक्त करके या गुणनखंड प्रमेय की सहायता से किया जा सकता है। मध्य पद को विभक्त करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ग2 दृ 22ग ़ 120 त्र ग2 दृ 12ग दृ 10ग ़ 120 त्र ग;ग दृ 12द्ध दृ 10;ग दृ 12द्ध त्र;ग दृ 12द्ध ;ग दृ 10द्ध अतः, ग3 दृ 23ग2 दृ 142ग दृ 120 त्र ;ग दृ 1द्ध;ग दृ 10द्ध;ग दृ 12द्ध प्रश्नावली 2ण्4 1ण् बताइए कि निम्नलिख्िात बहुपदों में से किस बहुपद का एक गुणनखंड ग ़ 1 है। ;पद्ध ग3 ़ ग2 ़ग ़ 1 ;पपद्ध ग4 ़ ग3 ़ ग2 ़ ग ़ 1 ;पपपद्ध ग4 ़ 3ग3 ़ 3 ग2 ़ ग ़ 1 ;पअद्ध ग3 दृ ग2 दृ ;2 ़ 2द्ध ग ़ 2 2ण् गुणनखंड प्रमेय लागू करके बताइए कि निम्नलिख्िात स्िथतियों में से प्रत्येक स्िथति में ह;गद्धए च;गद्ध का एक गुणनखंड है या नहींः ;पद्ध च;गद्ध त्र 2ग3 ़ ग2 दृ 2ग दृ 1ए ह;गद्ध त्र ग ़ 1 ;पपद्ध च;गद्ध त्र ग3 ़ 3ग2 ़ 3ग ़ 1ए ह;गद्ध त्र ग ़ 2 ;पपपद्ध च;गद्ध त्र ग3 दृ 4ग2 ़ ग ़ 6ए ह;गद्ध त्र ग दृ 3 3ण् ा का मान ज्ञात कीजिए जबकि निम्नलिख्िात स्िथतियों में से प्रत्येक स्िथति में ;ग दृ 1द्धए च;गद्ध का एक गुणनखंड हो: ;पद्ध च;गद्ध त्र ग2 ़ग ़ ा ;पपद्ध च;गद्ध त्र 2ग2 ़ ाग ़ 2 ;पपपद्ध च;गद्ध त्र ाग2 दृ 2 ग ़ 1 ;पअद्ध च;गद्ध त्र ाग2 दृ 3ग ़ ा 4ण् गुणनखंड ज्ञात कीजिएः ;पद्ध 12ग2 दृ 7ग ़ 1 ;पपद्ध 2ग2 ़ 7ग ़ 3 ;पपपद्ध 6ग2 ़ 5ग दृ 6 ;पअद्ध 3ग2 दृ ग दृ 4 5ण् गुणनखंड ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ग3 दृ 2ग2 दृ ग ़ 2 ;पपद्ध ग3 दृ 3ग2 दृ 9ग दृ 5 ;पपपद्ध ग3 ़ 13ग2़ 32ग ़ 20 ;पअद्ध 2ल3 ़ ल2 दृ 2ल दृ 1 2ण्6 बीजीय सवर्समिकाएँ पिछली कक्षाओं में, आप यह पढ़ चुके हैं कि बीजीय सवर्समिका ;ंसहमइतंपब पकमदजपजलद्ध एक बीजीय समीकरण होती है जो कि चरों के सभी मानों के लिए सत्य होती है। पिछली कक्षाओं में, आप निम्नलिख्िात बीजीय सवर्समिकाओं का अध्ययन कर चुके हैंः सवर्समिका प्रू ;ग ़ लद्ध2 त्र ग2 ़ 2गल ़ ल2 सवर्समिका प्प् रू ;ग दृ लद्ध2 त्र ग2 दृ 2गल ़ ल2 सवर्समिका प्प्प् रू ग2 दृ ल2 त्र ;ग ़ लद्ध ;ग दृ लद्ध सवर्समिका प्ट रू ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्धग ़ ंइ इन बीजीय सवर्समिकाओं में से वुफछ का प्रयोग आपने बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड ज्ञात करने में अवश्य किया होगा। आप इनकी उपयोगिता अभ्िाकलनों ;बवउचनजंजपवदेद्ध में भी देख सकते हैं। उदाहरण 16 रू उपयुक्त सवर्समिकाओं का उपयोग करके निम्नलिख्िात गुणनपफल ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;ग ़ 3द्ध;ग ़ 3द्ध ;पपद्ध ;ग दृ 3द्ध ;ग ़ 5द्ध हल रू ;पद्ध यहाँ हम सवर्समिका प् ;ग ़ लद्ध2 त्र ग2 ़ 2गल ़ ल2 का प्रयोग कर सकते हैं। इस सवर्समिका में ल त्र 3 रखने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;ग ़ 3द्ध ;ग ़ 3द्ध त्र ;ग ़ 3द्ध2 त्र ग2 ़ 2;गद्ध;3द्ध ़ ;3द्ध2 त्र ग2 ़ 6ग ़ 9 ;पपद्ध सवर्समिका प्ट अथार्त् ;ग ़ ंद्ध ;ग ़ इद्ध त्र ग2 ़ ;ं ़ इद्धग ़ ंइ को लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;ग दृ 3द्ध ;ग ़ 5द्ध त्र ग2 ़ ;दृ3 ़ 5द्धग ़ ;दृ3द्ध;5द्ध त्र ग2 ़ 2ग दृ 15 उदाहरण 17 रू सीध्े गुणा न करके 105 × 106 का मान ज्ञात कीजिए। हल रू 105 × 106 त्र ;100 ़ 5द्ध × ;100 ़ 6द्ध त्र ;100द्ध2 ़ ;5 ़ 6द्ध ;100द्ध ़ ;5 × 6द्ध ;सवर्समिका प्ट लागू करकेद्ध त्र 10000 ़ 1100 ़ 30 त्र 11130 वुफछ दिए हुए व्यंजकों का गुणनपफल ज्ञात करने के लिए, हमने ऊपर बतायी गइर् वुफछ सवर्समिकाओं का प्रयोग किया है। ये सवर्समिकाएँ बीजीय व्यंजकों का गुणनखंडन करने में भी उपयोगी होती हैं, जैसा कि आप नीचे दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं। उदाहरण 18 रू गुणनखंड ज्ञात कीजिएः 25 2 ल2 ;पद्ध 49ं2 ़ 70ंइ ़ 25इ2 ;पपद्ध ग − 49 हल रू ;पद्ध यहाँ आप यह देख सकते हैं कि 49ं2 त्र;7ंद्ध2ए 25इ2 त्र ;5इद्ध2ए 70ंइ त्र 2;7ंद्ध ;5इद्ध ग2 ़ 2गल ़ ल2 के साथ दिए हुए व्यंजक की तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि ग त्र 7ं और ल त्र 5इ है। सवर्समिका प् लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः 49ं2 ़ 70ंइ ़ 25इ2 त्र;7ं ़ 5इद्ध2 त्र ;7ं ़ 5इद्ध ;7ं ़ 5इद्ध 225 2 ल ⎛ 5 ⎞2 ⎛ ल ⎞2 ;पपद्ध यहाँ ग दृ त्र⎜ ग⎟ दृ ⎜⎟49 ⎝ 2 ⎠⎝ 3 ⎠ सवर्समिका प्प्प् के साथ इसकी तुलना करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः 25 2 ल2 ⎛ 5 ⎞2 ⎛ ल ⎞2 गदृ त्र ग दृ⎜⎟ ⎜⎟49 ⎝ 2 ⎠⎝ 3 ⎠ ⎛ 5 ल ⎞⎛ 5 ल ⎞ त्र ग ़ ग −⎜ ⎟⎜ ⎟⎝ 23 ⎠⎝ 23 ⎠ अभी तक हमारी सभी सवर्समिकाएँ द्विपदों के गुणनपफलों से संबंध्ित रही हैं। आइए अब हम सवर्समिका प् को त्रिापदग ़ ल ़ ्र पर लागू करें। हम सवर्समिका प् लागू करके, ;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 का अभ्िाकलन करेंगे। मान लीजिए ग ़ ल त्र ज है। तब, ;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 त्र;ज ़ ्रद्ध2 त्र ज2 ़ 2ज्र ़ ज2;सवर्समिका प् लागू करने परद्ध त्र;ग ़ लद्ध2 ़ 2;ग ़ लद्ध्र ़ ्र2 ;ज का मान प्रतिस्थापित करने परद्ध त्र ग2 ़ 2गल ़ ल2 ़ 2ग्र ़ 2ल्र ़ ्र2;सवर्समिका प् लागू करने परद्ध त्र ग2 ़ ल2 ़ ्र2 ़ 2गल ़ 2ल्र ़ 2्रग ;पदों को विन्यासित करने परद्ध अतः हमंे निम्नलिख्िात सवर्समिका प्राप्त होती हैः सवर्समिका ट रू ;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 त्र ग2 ़ ल2 ़ ्र2 ़ 2गल ़ 2ल्र ़ 2्रग टिप्पणी रू हम दाएँ पक्ष के व्यंजक को बाएँ पक्ष के व्यंजक का प्रसारित रूप मानते हैं। ध्यान दीजिए कि ;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 के प्रसार मेें तीन वगर् पद और तीन गुणनपफल पद हैं। उदाहरण 19 रू ;3ं ़ 4इ ़ 5बद्ध2 को प्रसारित रूप में लिख्िाए। हल रू दिए हुए व्यंजक की;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 के साथ तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि ग त्र 3ंए ल त्र 4इ और ्र त्र 5ब अतः सवर्समिका ट लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;3ं ़ 4इ ़ 5बद्ध2 त्र;3ंद्ध2 ़ ;4इद्ध2 ़ ;5बद्ध2 ़ 2;3ंद्ध;4इद्ध ़ 2;4इद्ध;5बद्ध ़ 2;5बद्ध;3ंद्ध त्र9ं2 ़ 16इ2 ़ 25ब2 ़ 24ंइ ़ 40इब ़ 30ंब उदाहरण 20 रू ;4ं दृ 2इ दृ 3बद्ध2 का प्रसार कीजिए। हल रू सवर्समिका ट लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;4ं दृ 2इ दृ 3बद्ध2 त्रख्4ं ़ ;दृ2इद्ध ़ ;दृ3बद्ध,2 त्र;4ंद्ध2 ़ ;दृ2इद्ध2 ़ ;दृ3बद्ध2 ़ 2;4ंद्ध;दृ2इद्ध ़ 2;दृ2इद्ध;दृ3बद्ध ़ 2;दृ3बद्ध;4ंद्ध त्र16ं2 ़ 4इ2 ़ 9ब2 दृ 16ंइ ़ 12इब दृ 24ंब उदाहरण 21 रू 4ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ 4गल दृ 2ल्र ़ 4ग्र का गुणनखंडन कीजिए। हल रू यहाँ 4ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ 4गल दृ 2ल्र ़ 4ग्र त्र ;2गद्ध2 ़ ;दृलद्ध2 ़ ;्रद्ध2 ़ 2;2गद्ध;दृलद्ध ़ 2;दृलद्ध;्रद्ध ़ 2;2गद्ध;्रद्ध त्रख्2ग ़ ;दृलद्ध ़ ्र,2 ;सवर्समिका ट लागू करने परद्ध त्र;2ग दृ ल ़ ्रद्ध2 त्र ;2ग दृ ल ़ ्रद्ध ;2ग दृ ल ़ ्रद्ध अभी तक हमने द्विघात पदों से संबंध्ित सवर्समिकाओं का ही अध्ययन किया है। आइए अब हम सवर्समिका प् को ;ग ़ लद्ध3 अभ्िाकलित करने में लागू करें। यहाँ, ;ग ़ लद्ध3 त्र;ग ़ लद्ध ;ग ़ लद्ध2 त्र;ग ़ लद्ध;ग2 ़ 2गल ़ ल2द्ध त्र ग;ग2 ़ 2गल ़ ल2द्ध ़ ल;ग2 ़ 2गल ़ ल2द्ध त्र ग3 ़ 2ग2ल ़ गल2 ़ ग2ल ़ 2गल2 ़ ल3 त्र ग3 ़ 3ग2ल ़ 3गल2 ़ ल3 त्र ग3 ़ ल3 ़ 3गल;ग ़ लद्ध अतः, हमें निम्नलिख्िात सवर्समिका प्राप्त होती हैः सवर्समिका टप् रू ;ग ़ लद्ध3 त्र ग3 ़ ल3 ़ 3गल ;ग ़ लद्ध सवर्समिका टप् मेें ल के स्थान पर दृ ल रखने पर, हमें प्राप्त होता हैः सवर्समिका टप्प् रू;ग दृ लद्ध3 त्र ग3 दृ ल3 दृ 3गल;ग दृ लद्ध त्र ग3 दृ 3ग2ल ़ 3गल2 दृ ल3 उदाहरण 22 रू निम्नलिख्िात घनों को प्रसारित रूप में लिख्िाएः ;पद्ध ;3ं ़ 4इद्ध3 ;पपद्ध ;5च दृ 3ुद्ध3 हल रू ;पद्ध ;ग ़ लद्ध3 के साथ दिए गए व्यंजक की तुलना करने पर हम, यह पाते हैं कि ग त्र3ं और ल त्र 4इ अतः सवर्समिका टप् का प्रयोग करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;3ं ़ 4इद्ध3 त्र;3ंद्ध3 ़ ;4इद्ध3 ़ 3;3ंद्ध;4इद्ध;3ं ़ 4इद्ध त्र27ं3 ़ 64इ3 ़ 108ं2 इ ़ 144ंइ2 ;पपद्ध ;ग दृ लद्ध3 के साथ दिए हुए व्यंजक की तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि ग त्र5च और ल त्र 3ु सवर्समिका टप्प् लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः ;5च दृ 3ुद्ध3 त्र;5चद्ध3 दृ ;3ुद्ध3 दृ 3;5चद्ध;3ुद्ध;5च दृ 3ुद्ध त्र 125च3 दृ 27ु3 दृ 225च2ु ़ 135चु2 उदाहरण 23 रू उपयुक्त सवर्समिकाएँ प्रयोग करके, निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;104द्ध3 ;पपद्ध ;999द्ध3 हल रू ;पद्ध यहाँ ;104द्ध3 त्र ;100 ़ 4द्ध3 त्र ;100द्ध3 ़ ;4द्ध3 ़ 3;100द्ध;4द्ध;100 ़ 4द्ध ;सवर्समिका टप् का प्रयोग करने परद्ध त्र 1000000 ़ 64 ़ 124800 त्र 1124864 ;पपद्ध यहाँ ;999द्ध3 त्र ;1000 दृ 1द्ध3 त्र ;1000द्ध3 दृ ;1द्ध3 दृ 3;1000द्ध;1द्ध;1000 दृ 1द्ध ;सवर्समिका टप्प् का प्रयोग करने परद्ध त्र 1000000000 दृ 1 दृ 2997000 त्र 997002999 उदाहरण 24 रू 8ग3 ़ 27ल3 ़ 36ग2ल ़ 54गल2 का गुणनखंडन कीजिए। हल रू दिए हुए व्यंजक को इस प्रकार लिखा जा सकता हैः ;2गद्ध3 ़ ;3लद्ध3 ़ 3;4ग2द्ध;3लद्ध ़ 3;2गद्ध;9ल2द्ध त्र;2गद्ध3 ़ ;3लद्ध3 ़ 3;2गद्ध2;3लद्ध ़ 3;2गद्ध;3लद्ध2 त्र;2ग ़ 3लद्ध3 ;सवर्समिका टप् का प्रयोग करने परद्ध त्र;2ग ़ 3लद्ध ;2ग ़ 3लद्ध ;2ग ़ 3लद्ध अब ;ग ़ ल ़ ्रद्ध ;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध का प्रसार करने पर, हमें गुणनपफल इस रूप में प्राप्त होता हैः ग;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध ़ ल;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध ़ ्र;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध त्र ग3 ़ गल2 ़ ग्र2 दृ ग2ल दृ गल्र दृ ्रग2 ़ ग2ल ़ ल3 ़ ल्र2 दृ गल2 दृ ल2 ्र दृ गल्र ़ ग2्र ़ ल2्र ़ ्र3 दृ गल्र दृ ल्र2 दृ ग्र2 त्र ग3 ़ ल3 ़ ्र3 दृ 3गल्र ;सरल करने परद्ध अतः, हमें निम्नलिख्िात सवर्समिका प्राप्त होती हैः सवर्समिका टप्प्प् रू ग3 ़ ल3 ़ ्र3 दृ 3गल्र त्र ;ग ़ ल ़ ्रद्ध ;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध उदाहरण 25 रू 8ग3 ़ ल3 ़ 27्र3 दृ 18गल्र का गुणनखंडन कीजिए। हल रू यहाँ, 8ग3 ़ ल3 ़ 27्र3 दृ 18गल्र त्र ;2गद्ध3 ़ ल3 ़ ;3्रद्ध3 दृ 3;2गद्ध;लद्ध;3्रद्ध त्र;2ग ़ ल ़ 3्रद्धख्;2गद्ध2 ़ ल2 ़ ;3्रद्ध2 दृ ;2गद्ध;लद्ध दृ ;लद्ध;3्रद्ध दृ ;2गद्ध;3्रद्ध, त्र;2ग ़ ल ़ 3्रद्ध ;4ग2 ़ ल2 ़ 9्र2 दृ 2गल दृ 3ल्र दृ 6ग्रद्ध प्रश्नावली 2ण्5 1ण् उपयुक्त सवर्समिकाओं को प्रयोग करके निम्नलिख्िात गुणनपफल ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;ग ़ 4द्ध ;ग ़ 10द्ध ;पपद्ध ;ग ़ 8द्ध ;ग दृ 10द्ध ;पपपद्ध ;3ग ़ 4द्ध ;3ग दृ 5द्ध 33;पअद्ध ;ल2 ़ द्ध ;ल2 दृ द्ध ;अद्ध ;3 दृ 2गद्ध ;3 ़ 2गद्ध22 2ण् सीध्े गुणा किए बिना निम्नलिख्िात गुणनपफलों के मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध 103 × 107 ;पपद्ध 95 × 96 ;पपपद्ध 104 × 96 3ण् उपयुक्त सवर्समिकाएँ प्रयोग करके निम्नलिख्िात का गुणनखंडन कीजिएः 2ल;पद्ध 9ग2 ़ 6गल ़ ल2 ;पपद्ध 4ल2 दृ 4ल ़ 1 ;पपपद्ध ग2 दृ 100 4ण् उपयुक्त सवर्समिकाओं का प्रयोग करके निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का प्रसार कीजिएः ;पद्ध ;ग ़ 2ल ़ 4्रद्ध2 ;पपद्ध ;2ग दृल ़ ्रद्ध2 ;पपपद्ध ;दृ2ग ़ 3ल ़ 2्रद्ध2 ⎡ 11 ⎤2 ;पअद्ध ;3ं दृ 7इ दृ बद्ध2 ;अद्ध ;दृ2ग ़ 5ल दृ 3्रद्ध2 ;अपद्ध ं − इ ़ 1⎢⎥⎣ 42 ⎦ 5ण् गुणनखंडन कीजिएः ;पद्ध 4ग2 ़ 9ल2 ़ 16्र2 ़ 12गलदृ 24ल्र दृ 16ग्र ;पपद्ध 2ग2 ़ ल2 ़ 8्र2 दृ 2 2 गल ़ 4 2 ल्र दृ 8ग्र 6ण् निम्नलिख्िात घनों को प्रसारित रूप में लिख्िाएः ;पद्ध ;2ग़ 1द्ध3 ;पपद्ध ;2ं दृ 3इद्ध3 ⎡3 ⎤3 ⎡ 2 ⎤ 3 ;पपपद्ध ग ़ 1 ;पअद्ध ग − ल⎢⎥ ⎢⎥⎣2 ⎦ ⎣ 3 ⎦ 7ण् उपयुक्त सवर्समिकाएँ प्रयोग करके निम्नलिख्िात के मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;99द्ध3 ;पपद्ध ;102द्ध3 ;पपपद्ध ;998द्ध3 8ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का गुणनखंडन कीजिएः ;पद्ध 8ं3 ़ इ3 ़ 12ं2इ ़ 6ंइ2 ;पपद्ध 8ं3 दृ इ3 दृ 12ं2इ ़ 6ंइ2 ;पपपद्ध 27 दृ 125ं3 दृ 135ं ़ 225ं2 ;पअद्ध 64ं3 दृ 27इ3 दृ 144ं2इ ़ 108ंइ2 19 1;अद्ध 27च3 दृ दृ च2 ़ च2162 4 9ण् सत्यापित कीजिएः ;पद्ध ग3 ़ ल3 त्र ;ग ़ लद्ध ;ग2 दृ गल ़ ल2द्ध ;पपद्ध ग3 दृ ल3 त्र ;ग दृ लद्ध ;ग2 ़ गल ़ ल2द्ध 10ण् निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का गुणनखंडन कीजिएः;पद्ध 27ल3 ़ 125्र3 ;पपद्ध 64उ3 दृ 343द3 ख्संकेतरू देख्िाए प्रश्न9, 11ण् गुणनखंडन कीजिएः 27ग3 ़ ल3 ़ ्र3 दृ 9गल्र 2 2212ण् सत्यापित कीजिएः ग3 ़ ल3 ़ ्र3 दृ 3गल्रत्र 1;ग ़ ल ़ ्रद्ध ⎡;ग − लद्ध ़ ;ल − ्रद्ध ़ ;्र − गद्ध ⎤⎣ ⎦2 13ण् यदि ग ़ ल ़ ्र त्र 0 होए तो दिखाइए कि ग3 ़ ल3 ़ ्र3 त्र 3गल्र है। 14ण् वास्तव में घनों का परिकलन किए बिना निम्नलिख्िात में से प्रत्येक का मान ज्ञात कीजिएः ;पद्ध ;दृ12द्ध3 ़ ;7द्ध3 ़ ;5द्ध3 ;पपद्ध ;28द्ध3 ़ ;दृ15द्ध3 ़ ;दृ13द्ध3 15ण् नीचे दिए गए आयतों, जिनमें उनके क्षेत्रापफल दिए गए हैं, में से प्रत्येक की लंबाइर् और चैड़ाइर् के लिए संभव व्यंजक दीजिएः ;पद्ध ;पपद्ध 16ण् घनाभों ;बनइवपकेद्धए जिनके आयतन नीचे दिए गए हैं कि, विमाओं के लिए संभव व्यंजक क्या हैं? ;पद्ध ;पपद्ध 2ण्7 सारांश इस अध्याय में, आपने निम्नलिख्िात बिंदुओं का अध्ययन किया हैः 1ण् एक चर वाला बहुपद च;गद्ध निम्न रूप का ग में एक बीजीय व्यंजक हैः च;गद्ध त्र ंदगद ़ ंददृ1गद दृ 1 ़ ण् ण् ण् ़ ं2ग2 ़ ं1ग ़ ं0ए जहाँ ंए ंए ंए ण् ण् ण्ए ं अचर हैं और ं ≠ 0 है।ंए ंए ंए ण् ण् ण्ए ं क्रमशः ग0ए गए ग2ए ण् ण् ण्ए गद के012दद 012दगुणांक हैं और द को बहुपद की घात कहा जाता है। प्रत्येक ंगद ए ंददृ1 गददृ1ए ण्ण्ण्ए ं0ए जहाँदं ≠ 0ए को बहुपद च;गद्ध का पद कहा जाता है।द 2ण् एक पद वाले बहुपद को एकपदी कहा जाता है। 3ण् दो पदों वाले बहुपद को द्विपद कहा जाता है। 4ण् तीन पदों वाले बहुपद को त्रिापद कहा जाता है। 5ण् एक घात वाले बहुपद को रैख्िाक बहुपद कहा जाता है। 6ण् दो घात वाले बहुपद को द्विघाती बहुपद कहा जाता है। 7ण् तीन घात वाले बहुपद को त्रिाघाती बहुपद कहा जाता है। 8ण् वास्तविक संख्या ष्ंष्ए बहुपद च;गद्ध का एक शून्यक होती है, यदि च;ंद्ध त्र 0 हो। 9ण् एक चर में प्रत्येक रैख्िाक बहुपद का एक अद्वितीय शून्यक होता है। एक शून्येतर अचर बहुपद का कोइर् शून्यक नहीं है और प्रत्येक वास्तविक संख्या शून्य बहुपद का एक शून्यक होती है। 10ण् शेषपफल प्रमेयरू यदि च;गद्धएएक से अध्िक या एक के बराबर घात वाला एक बहुपद हो, और च;गद्ध को रैख्िाक बहुपद ग दृ ं से भाग दिया गया हो, तो शेषपफल च;ंद्ध होता है। 11ण् यदि च;ंद्ध त्र 0 हो, तो ग दृ ं बहुपद च;गद्ध का एक गुणनखंड होता है और यदि ग दृ ंए च;गद्ध का एक गुणनखंड हो, तो च;ंद्ध त्र 0 होता है। 12ण् ;ग ़ ल ़ ्रद्ध2 त्र ग2 ़ ल2 ़ ्र2 ़ 2गल ़ 2ल्र ़ 2्रग 13ण् ;ग ़ लद्ध3 त्र ग3 ़ ल3 ़ 3गल;ग़ लद्ध 14ण् ;ग दृ लद्ध3 त्र ग3 दृ ल3 दृ 3गल;ग दृ लद्ध 15ण् ग3 ़ ल3 ़ ्र3 दृ 3गल्र त्र ;ग ़ ल ़ ्रद्ध ;ग2 ़ ल2 ़ ्र2 दृ गल दृ ल्र दृ ्रगद्ध थ्पसम छंउम रू ब्रू?ब्वउचनजमत ैजंजपवद?डंजी.प्ग् ;भ्पदकपद्ध?ब्ींचजमत?ब्ींच.1?ब्ींच.1ण्च्ड65

>Chapter-2>

अध्याय 2

बहुपद

2.1 भूमिका

पिछली कक्षाओं में, आप बीजीय व्यंजकों और उनके जोड़, घटाना, गुणा और भाग का अध्ययन कर चुके हैं। वहाँ आप यह भी अध्ययन कर चुके हैं कि किस प्रकार कुछ बीजीय व्यंजकों का गुणनखंडन किया जाता है। आप निम्न बीजीय सर्वसमिकाओं और उनका गुणनखंडन में उपयोग का पुनःस्मरण कर सकते हैंः

(x + y)2 = x2 + 2xy + y2

(xy)2 = x2 – 2xy + y2

और, x2y2 = (x + y) (xy)

इस अध्याय में, सबसे पहले एक विशेष प्रकार के बीजीय व्यंजक का, जिसे बहुपद (polynomial) कहा जाता है, और उससे संबद्ध शब्दावली (terminology) का अध्ययन करेंगे। यहाँ हम शेषफल प्रमेय (Remainder Theorem), गुणनखंड प्रमेय (Factor Theorem) और बहुपदों के गुणनखंडन में इनके उपयोग का भी अध्ययन करेंगे। इनके अतिरिक्त, हम कुछ और बीजीय सर्वसमिकाओं का और कुछ दिए हुए व्यंजकों का गुणनखंडन करने तथा मान निकालने के बारे में भी अध्ययन करेंगे।

2.2 एक चर वाले बहुपद

सबसे पहले हम याद करेंगे कि चर को एक प्रतीक से प्रकट किया जाता है जो कोई भी वास्तविक मान धारण कर सकता है। हम चरों को अक्षरों x, y, z, आदि से प्रकट करते हैं। ध्यान रहे कि 2x, 3x, – x, –x बीजीय व्यंजक हैं। ये सभी व्यंजक, (एक अचर) × x के रूप के हैं। अब मान लीजिए कि हम एक एेसा व्यंजक लिखना चाहते हैं जो कि (एक अचर) × (एक चर) है और हम यह नहीं जानते कि अचर क्या है। एेसी स्थितियों में, हम अचर को a, b, c आदि से प्रकट करते हैं। अतः व्यंजक, मान लीजिए, ax होगा।

फिर भी, अचर को प्रकट करने वाले अक्षर और चर को प्रकट करने वाले अक्षर में अंतर होता है। एक विशेष स्थिति में अचरों के मान सदा समान बने रहते हैं। अर्थात् एक दी हुई समस्या में अचर के मान में कोई परिवर्तन नहीं होता। परन्तु चर के मान में परिवर्तन होता रहता है।

अब 3 एकक की भुजा वाला एक वर्ग लीजिए (देखिए आकृति 2.1)। इसका परिमाप (perimeter) क्या है? आप जानते हैं कि वर्ग का परिमाप चारों भुजाओं की लंबाइयों का जोड़ होता है। यहाँ प्रत्येक भुजा की लंबाई 3 एकक है। अतः इसका परिमाप 4 × 3 अर्थात् 12 एकक है। यदि वर्ग की प्रत्येक भुजा 10 एकक हो, तो परिमाप क्या होगा? परिमाप 4 × 10 अर्थात् 40 एकक होगा। यदि प्रत्येक भुजा की लंबाई x एकक हो (देखिए आकृति 2.2), तो परिमाप 4x एकक होता है। अतः हम यह पाते हैं कि भुजा की लंबाई में परिवर्तन होने पर परिमाप बदल जाता है।

a1

आकृति 2.1

a2

आकृति 2.2


क्या आप वर्ग PQRS का क्षेत्रफल ज्ञात कर सकते हैं? यह x × x = x2 वर्ग एकक (मात्रक) है। x2 क बीजीय व्यंजक है। आप 2x, x2 + 2x, x3x2 + 4x + 7 जैसे अन्य बीजीय व्यंजकों से भी परिचित हैं। ध्यान दीजिए कि अभी तक लिए गए सभी बीजीय व्यंजकों में चर के घातांक पूर्ण संख्या ही रहे हैं। इस रूप के व्यंजकों को एक चर वाला बहुपद (polynomials in one variable) कहा जाता है। ऊपर दिए गए उदाहरणों में चर x है। उदाहरण के लिए, x3x2 + 4x + 7, चर x में एक बहुपद है। इसी प्रकार 3y2 + 5y, चर y में एक बहुपद है और t2 + 4, चर t में एक बहुपद है।

बहुपद x2 + 2x में व्यंजक x2 और 2x बहुपद के पद (terms) कहे जाते हैं। इसी प्रकार, बहुपद 3y2 + 5y + 7 में तीन पद अर्थात् 3y2, 5y और 7 हैं। क्या आप बहुपद x3 + 4x2 + 7x – 2 के पद लिख सकते हैं? इस बहुपद के चार पद अर्थात् x3, 4x2, 7x और –2 हैं।

बहुपद के प्रत्येक पद का एक गुणांक (coefficient) होता है। अतः, x3 + 4x2 + 7x – 2 में x3 का गुणांक –1 है, x2 का गुणांक 4 है, x का गुणांक 7 है और x0 का गुणांक -2 है (स्मरण रहे कि x0 = 1 है)। क्या आप जानते हैं कि x2x + 7 में x का गुणांक क्या है? x का गुणांक –1 है।

ध्यान रहे कि 2 भी एक बहुपद है। वस्तुतः 2, 5, 7 आदि अचर बहुपदों (constant polynomials) के उदाहरण हैं। अचर बहुपद 0 को शून्य बहुपद कहा जाता है। साथ ही, जैसा कि उच्च कक्षाओं में आप देखेंगे, सभी बहुपदों के संग्रह में शून्य बहुपद एक अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अब आप Screenshot_2018-12-26 Chapter-2 pmd - ihmh102 pdf जैसे बीजीय व्यंजक लीजिए। क्या आप जानते हैं कि आप x + = x + x–1 लिख सकते हैं? यहाँ दूसरे पद अर्थात् x–1 का घातांक –1 है जो एक पूर्ण संख्या नहीं है। अतः यह बीजीय व्यंजक एक बहुपद नहीं है। साथ ही, को के रूप में लिखा जा सकता है। यहाँ x का घातांक है, जो कि एक पूर्ण संख्या नहीं है। तो क्या आप यह समझते हैं कि एक बहुपद है? नहीं, यह एक बहुपद नहीं है। क्या + y2 एक बहुपद है? यह भी एक बहुपद नहीं है। (क्यों?)

यदि एक बहुपद में चर x हो, तो हम बहुपद को p(x) या q(x) या r(x), आदि से प्रकट कर सकते हैं, उदाहरण के लिए, हम यह लिख सकते हैंः

p(x) = 2x2 + 5x – 3

q(x) = x3 –1

r(y) = y3 + y + 1

s(u) = 2 – uu2 + 6u5

बहुपद में परिमित संख्या में कितने भी पद हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, x150 + x149 + ... + x2 + x + 1 एक बहुपद है, जिसमें 151 पद हैं।

अब बहुपद 2x, 2, 5x3, –5x2, y और u4 लीजिए। क्या आप देखते हैं कि इन बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद का केवल एक पद है। केवल एक पद वाले बहुपद को एकपदी (monomial) कहा जाता है। (अंग्रेजी शब्द 'mono' का अर्थ है एक)।

अब नीचे दिए गए बहुपदों में से प्रत्येक पर ध्यान दीजिएः

p(x) = x + 1, q(x) = x2x, r(y) = y30 + 1, t(u) = u43u2

यहाँ प्रत्येक बहुपद में कितने पद हैं? इनमें से प्रत्येक बहुपद में केवल दो पद हैं। केवल दो पदोें वाले बहुपदों को द्विपद (binomials) कहा जाता है। (अंग्रेजी शब्द ‘bi’ का अर्थ है दो)।

इसी प्रकार, केवल तीन पदों वाले बहुपदों को त्रिपद (trinomials) कहा जाता है। (अंग्रेजी शब्द ‘tri’ का अर्थ है तीन)। त्रिपद के कुछ उदाहरण ये हैंः

p(x) = x + x2 +pi, q(x) = + xx2,

r(u) = u + u2 – 2, t(y) = y4 + y + 5

अब बहुपद p(x) = 3x7 – 4x6 + x + 9 को देखिए। इसमें x की अधिकतम घात वाला पद कौन-सा है? यह पद 3x7 है। इस पद में x का घातांक 7 है। इसी प्रकार, बहुपद
q(y) = 5y6 – 4y2 – 6 में y की अधिकतम घात वाला पद 5y6 है और इस पद में y का घातांक 6 है। एक बहुपद में चर की अधिकतम घात वाले पद के घातांक को बहुपद की घात (degree of the polynomial) कहा जाता है। अतः बहुपद 3x7 – 4x6 + x + 9 की घात 7 है और बहुपद 5y6 – 4y2 – 6 की घात 6 है। एक शून्येतर अचर बहुपद की घात शून्य होती है

उदाहरण 1 : नीचे दिए गए प्रत्येक बहुपद की घात ज्ञात कीजिएः

(i) x5x4 + 3 (ii) 2 – y2 y3 + 2y8 (iii) 2

हल : (i) चर का अधिकतम घातांक 5 है। अतः बहुपद की घात 5 है।

(ii) चर का अधिकतम घातांक 8 है। अतः बहुपद की घात 8 है।

(iii) यहाँ केवल एक पद 2 है जिसे 2x0 के रूप में लिखा जा सकता है। अतः x का घातांक 0 है। इसलिए, बहुपद की घात 0 है।

अब बहुपदों p(x) = 4x + 5, q(y) = 2y, r(t) = t + और s(u) = 3 – u को लीजिए। क्या इनमें कोई सर्वनिष्ठ तथ्य देखने को मिलता है? इनमें प्रत्येक बहुपद की घात एक है। एक घात वाले बहुपद को रैखिक बहुपद (linear polynomial) कहा जाता है। एक चर में कुछ और रैखिक बहुपद 2x – 1, y + 1 और 2 – u हैं। अब क्या x में तीन पदों वाला एक रैखिक बहुपद हम ज्ञात कर सकते हैं? हम एक एेसा रैखिक बहुपद ज्ञात नहीं कर सकते, क्योंकि x में एक रैखिक बहुपद में अधिक से अधिक दो पद हो सकते हैं। अतः x में कोई भी रैखिक बहुपद ax + b के रूप का होगा, जहाँ a और b अचर हैं और a 0 है। (क्यों?) इसी प्रकार ay + b, y में एक रैखिक बहुपद है।

अब आप निम्नलिखित बहुपदों को लीजिएः

2x2 + 5, 5x2 + 3x + pi, x2 और x2 + x

क्या आप इस बात से सहमत हैं कि ऊपर दिए गए सभी बहुपद घात 2 वाले हैं? घात 2 वाले बहुपद को द्विघाती या द्विघात बहुपद (quadratic polynomial) कहा जाता है। द्विघाती बहुपद के कुछ उदाहरण 5 – y2, 4y + 5y2 और 6 – yy2 हैं। क्या आप एक चर में चार अलग-अलग पदों वाले एक द्विघाती बहुपद को लिख सकते हैं? आप देखेंगे कि एक चर में एक द्विघाती बहुपद के अधिक से अधिक 3 पद होेंगे। यदि आप कुछ और द्विघाती पद बना सकें तो आप पाएँगे कि x में कोई भी द्विघाती बहुपद ax2 + bx + c के रूप का होगा, जहाँ a 0 और a, b, c अचर हैं। इसी प्रकार, y में द्विघाती बहुपद ay2 + by + c के रूप का होगा, जबकि a 0 और a, b, c अचर हों।

तीन घात वाले बहुपद को त्रिघाती बहुपद (cubic polynomial) कहा जाता है। x में एक त्रिघाती बहुपद के कुछ उदाहरण 4x3, 2x3 + 1, 5x3 + x2, 6x3x, 6 – x3 और 2x3 + 4x2 + 6x + 7 हैं। आपके विचार से एक चर में त्रिघाती बहुपद में कितने पद हो सकते हैं? अधिक से अधिक 4 पद हो सकते हैं। इन्हें ax3 + bx2 + cx + d के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ a 0 और a, b, c और d अचर हैं।

अभी आपने देखा है कि घात 1, घात 2 या घात 3 वाले बहुपद देखने में लगभग समान ही लगते हैं, तो क्या आप एक चर में, घात n वाला एक बहुपद लिख सकते हैं, जहाँ n कोई प्राकृत संख्या है? एक चर x में, घात n वाला बहुपद निम्न रूप का एक व्यंजक होता हैः

anxn + an–1xn–1 + . . . + a1x + a0

जहाँ a0, a1, a2, . . ., an अचर हैं और an 0 है।

विशेष रूप में, यदि a0 = a1 = a2 = a3 = . . . = an = 0 हो (सभी अचर शून्य हों), तो हमें शून्य बहुपद (zero polynomial) प्राप्त होता है, जिसे 0 से प्रकट किया जाता है। शून्य बहुपद की घात क्या होती है? शून्य बहुपद की घात परिभाषित नहीं है।

अभी तक हमने केवल एक चर वाले बहुपदों के बारे में अध्ययन किया है। हम एक से अधिक चरों वाले बहुपद भी प्राप्त कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, x2 + y2 + xyz (जहाँ चर x, y और z हैं) तीन चरों में एक बहुपद है। इसी प्रकार, p2 + q10 + r (जहाँ चर p, q और r हैं), u3 + v2 (जहाँ चर u और v हैं) क्रमशः तीन चरों और दो चरों में (वाले) बहुपद हैं। इस प्रकार के बहुपदों का विस्तार से अध्ययन हम बाद में करेंगे।


प्रश्नावली 2.1

1. निम्नलिखित व्यंजकों में कौन-कौन एक चर में बहुपद हैं और कौन-कौन नहीं हैं? कारण के साथ अपने उत्तर दीजिए :

(i) 4x2 – 3x + 7 (ii) y2 + (iii)

(iv) y + (v) x10 + y3 + t50

2. निम्नलिखित में से प्रत्येक में x2 का गुणांक लिखिएः

(i) 2 + x2 + x (ii) 2 – x2 + x3 (iii) (iv)

3. 35 घात के द्विपद का और 100 घात के एकपदी का एक-एक उदाहरण दीजिए।

4. निम्नलिखित बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद की घात लिखिए :

(i) 5x3 + 4x2 + 7x (ii) 4 – y2

(iii) 5t (iv) 3

5. बताइए कि निम्नलिखित बहुपदों में कौन-कौन बहुपद रैखिक हैं, कौन-कौन द्विघाती हैं और कौन-कौन त्रिघाती हैंः

(i) x2 + x (ii) xx3 (iii) y + y2 + 4 (iv) 1 + x

(v) 3t (vi) r2 (vii) 7x3

2.3 बहुपद के शून्यक

निम्नलिखित बहुपद लीजिएः

p(x) = 5x3 – 2x2 + 3x – 2

यदि p(x) में सर्वत्र x के स्थान पर 1 प्रतिस्थापित करें, तो हमें यह प्राप्त होता हैः

p(1) = 5 × (1)3 – 2 × (1)2 + 3 × (1) – 2

= 5 – 2 + 3 –2

= 4

अतः, हम यह कह सकते हैं कि x = 1 पर p(x) का मान 4 है।

इसी प्रकार, p(0) = 5(0)3 – 2(0)2 + 3(0) –2

= –2

क्या आप p(–1) ज्ञात कर सकते हैं?

उदाहरण 2 : चरों के दिए गए मान पर नीचे दिए गए प्रत्येक बहुपद का मान ज्ञात कीजिएः

(i) x = 1 पर p(x) = 5x2 – 3x + 7 का मान

(ii) y = 2 पर q(y) = 3y3 – 4y + का मान

(iii) t = a पर p(t) = 4t4 + 5t3t2 + 6 का मान

हल : (i) p(x) = 5x2 – 3x + 7

x = 1 पर बहुपद p(x) का मान यह होता हैः

p(1) = 5(1)2 – 3(1) + 7

= 5 – 3 + 7 = 9

(ii) q(y) = 3y3 – 4y +

y = 2 पर बहुपद q(y) का मान यह होता हैः

q(2) = 3(2)3 – 4(2) + = 24 – 8 + = 16 +

(iii) p(t) = 4t4 + 5t3t2 + 6

t = a पर बहुपद p(t) का मान यह होता हैः

p(a) = 4a4 + 5a3a2 + 6

अब बहुपद p(x) = x – 1 लीजिए

p(1) क्या है? ध्यान दीजिए कि p(1) = 1 – 1 = 0 है।

क्योंकि p(1) = 0 है, इसलिए हम यह कहते हैं कि 1, बहुपद p(x) का एक शून्यक (zero) है।

इसी प्रकार, आप यह देख सकते हैं कि 2, q(x) का एक शून्यक है, जहाँ
q(x) = x – 2 है।

व्यापक रूप में, हम यह कहते हैं कि बहुपद p(x) का शून्यक एक एेसी संख्या c है कि p(c) = 0 हो।

इस बात की ओर आपने अवश्य ध्यान दिया होगा कि बहुपद (x – 1) का शून्यक इस बहुपद को 0 के समीकृत करके प्राप्त किया जाता है। अर्थात् x – 1 = 0, जिससे x = 1 प्राप्त होता है। तब हम कहते हैं कि p(x) = 0 एक बहुपद समीकरण है और 1 इस बहुपद समीकरण p(x) = 0 का एक मूल है। अतः हम यह कहते हैं कि 1, बहुपद x – 1 का शून्यक है या यह बहुपद समीकरण x – 1 = 0 का एक मूल (root) है।

अब अचर बहुपद 5 लीजिए। क्या आप बता सकते हैं कि इसका शून्यक क्या है? इस बहुपद का कोई शून्यक नहीं है, क्योंकि 5x0 में x के स्थान पर किसी भी संख्या को प्रतिस्थापित करने पर हमें 5 ही प्राप्त होता है। वस्तुतः, एक शून्येतर अचर बहुपद का कोई शून्यक नहीं होता। अब प्रश्न उठता है कि शून्य बहुपद के शून्यकों के बारे में क्या कहा जाए। परंपरा के अनुसार प्रत्येक वास्तविक संख्या शून्य बहुपद का एक शून्यक होती है।

उदाहरण 3 : जाँच कीजिए कि –2 और 2 बहुपद x + 2 के शून्यक हैं या नहीं।

हल : मान लीजिए p(x) = x + 2

तब p(2) = 2 + 2 = 4, p(–2) = –2 + 2 = 0

अतः –2 बहुपद x + 2 का एक शून्यक है, परन्तु 2 बहुपद x + 2 का शून्यक नहीं है।

उदाहरण 4 : बहुपद p(x) = 2x + 1 का एक शून्यक ज्ञात कीजिए।

हल : p(x) का शून्यक ज्ञात करना वैसा ही है जैसा कि समीकरण

p(x) = 0

को हल करना।

अब 2x + 1 = 0 से हमें x = प्राप्त होता है।

अतः, बहुपद 2x + 1 का एक शून्यक है।

अब, यदि p(x) = ax + b, a 0 एक रैखिक बहुपद हो, तो हम इस p(x) का शून्यक किस प्रकार ज्ञात कर सकते हैं? उदाहरण 4 से आपको इसका कुछ संकेत मिल सकता है। बहुपद p(x) का शून्यक ज्ञात करने का अर्थ है बहुपद समीकरण p(x) = 0 को हल करना।

अब p(x) = 0 का अर्थ है ax + b = 0, a 0

अतः, ax = –b

अर्थात् x =

अतः, x = ही केवल p(x) का शून्यक है, अर्थात् रैखिक बहुपद का एक और केवल एक शून्यक होता है।

अब हम यह कह सकते हैं कि 1, x – 1 का केवल एक शून्यक है और –2, x + 2 का केवल एक शून्यक है।

उदाहरण 5 : सत्यापित कीजिए कि 2 और 0 बहुपद x2 – 2x के शून्यक हैं।

हल : मान लीजिए p(x) = x2 – 2x

तब p(2) = 22 – 4 = 4 – 4 = 0

और p(0) = 0 – 0 = 0

अतः, 2 और 0 दोनों ही बहुपद x2 – 2x के शून्यक हैं।

आइए अब हम अपने प्रेक्षणों की सूची बनाएँः

1. आवश्यक नहीं है कि बहुपद का शून्यक शून्य ही हो।

2. 0, बहुपद का एक शून्यक हो सकता है।

3. प्रत्येक रैखिक बहुपद का एक और केवल एक शून्यक होता है।

4. एक बहुपद के एक से अधिक शून्यक हो सकते हैं।


प्रश्नावली 2.2

1. निम्नलिखित पर बहुपद 5x – 4x2 + 3 के मान ज्ञात कीजिएः

(i) x = 0 (ii) x = –1 (iii) x = 2

2. निम्नलिखित बहुपदों में से प्रत्येक बहुपद के लिए p(0), p(1) और p(2) ज्ञात कीजिएः

(i) p(y) = y2y + 1 (ii) p(t) = 2 + t + 2t2t3

(iii) p(x) = x3 (iv) p(x) = (x – 1) (x + 1)

3. सत्यापित कीजिए कि दिखाए गए मान निम्नलिखित स्थितियों में संगत बहुपद के शून्यक हैंः

(i) p(x) = 3x + 1; x = (ii) p(x) = 5xpi; x =

(iii) p(x) = x2 – 1; x = 1, –1 (iv) p(x) = (x + 1) (x – 2); x = – 1, 2

(v) p(x) = x2; x = 0 (vi) p(x) = lx + m; x =

(vii) p(x) = 3x2 – 1; x = (viii) p(x) = 2x + 1; x =

4. निम्नलिखित स्थितियों में से प्रत्येक स्थिति में बहुपद का शून्यक ज्ञात कीजिए:

(i) p(x) = x + 5 (ii) p(x) = x – 5 (iii) p(x) = 2x + 5

(iv) p(x) = 3x – 2 (v) p(x) = 3x (vi) p(x) = ax; a 0

(vii) p(x) = cx + d; c 0, c, d वास्तविक संख्याएँ हैं।


2.4
शेषफल प्रमेय

आइए हम दो संख्याएँ 15 और 6 लें। आप जानते हैं कि जब हम 15 को 6 से भाग देते हैं, तो हमें भागफल 2 और शेषफल 3 प्राप्त होता है। क्या आप जानते हैं कि इस तथ्य को किस प्रकार व्यक्त किया जाता है? हम 15 को इस रूप में लिखते हैंः

15 = (2 × 6) + 3

हम यहाँ देखते हैं कि शेषफल 3 भाजक 6 से कम है। इसी प्रकार, यदि हम 12 को 6 से भाग दें, तो हमें प्राप्त होता हैः

12 = (2 × 6) + 0

यहाँ पर शेषफल क्या है? यहाँ पर शेषफल शून्य है। हम यह कहते हैं कि 6, 12 का एक गुणनखंड (factor) है या 12, 6 का एक गुणज (multiple) है।

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या हम एक बहुपद को दूसरे बहुपद से भाग दे सकते हैं? आइए सबसे पहले हम इसे हल करने का प्रयास करें और यह तब करें जबकि भाजक एक एकपदी हो।

अतः आइए हम बहुपद 2x3 + x2 + x को एकपदी x से भाग दें।

(2x3 + x2 + x) ÷ x =

= 2x2 + x + 1

यहाँ आप यह देख सकते हैं कि 2x3 + x2 + x के प्रत्येक पद में x सर्वनिष्ठ है। अतः हम 2x3 + x2 + x को x(2x2 + x + 1) के रूप में लिख सकते हैं।

तब हम यह कहते हैं कि x और 2x2 + x + 1 बहुपद 2x3 + x2 + x के गुणनखंड हैं, और

2x3 + x2 + x, x का एक गुणज है और 2x2 + x + 1 का भी एक गुणज है।

बहुपदों 3x2 + x + 1 और x का एक अन्य युग्म लीजिए

यहाँ (3x2 + x + 1) ÷ x = (3x2 ÷ x) + (x ÷ x) + (1 ÷ x) है।

हम देखते हैं कि 1 को x से भाग देने पर हमें एक बहुपद प्राप्त नहीं हो सकता। अतः इस स्थिति में हम रुक जाते हैं और देखते हैं कि शेषफल 1 है। अतः

3x2 + x + 1 = {(3x + 1) × x} + 1

यहाँ भागफल 3x + 1 है और शेषफल 1 है। क्या आप यह सोच सकते हैं कि x बहुपद 3x2 + x + 1 का एक गुणनखंड है? क्योंकि शेषफल शून्य नहीं है, इसलिए यह गुणनखंड नहीं है।

आइए अब हम एक बहुपद को एक-दूसरे शून्येतर बहुपद से भाग दें।

उदाहरण 6 : p(x) को g(x) से भाग दीजिए, जहाँ p(x) = x + 3x2 – 1 और g(x) = 1 + x है।

हल : हम भाग देने के प्रक्रम को निम्नलिखित चरणों में करते हैंः

चरण 1 : भाज्य x + 3x2 – 1 और भाजक (1 + x) को मानक रूप में लिखते हैं, अर्थात् पदों को उनकी घातों के अवरोही क्रम (descending order) में लिखते हैं।

अतः भाज्य : 3x2 + x –1, भाजक : x + 1

चरण 2 : हम भाज्य के पहले पद को भाजक के पहले पद से भाग देते हैं, अर्थात् हम 3x2 को x से भाग देते हैं और हमें 3x प्राप्त होता है। यह भागफल का पहला पद होता है।

3x = भागफल का पहला पद

चरण 3 : हम भाजक को भागफल के पहले पद से गुणा करते हैं और इस गुणनफल को भाज्य से घटा देते हैं, अर्थात् हम x + 1 को 3x से गुणा करते हैं और गुणनफल 3x2 + 3x को भाज्य 3x2 + x – 1 से घटाते हैं। इससे हमें शेषफल –2x – 1 प्राप्त होता है।

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf

चरण 4 : हम शेषफ –2x – 1 को नया भाज्य मान लेते हैं। भाजक वही बना रहता है। चरण 2 को पुनः लागू करने पर, हमें भागफल का अगला पद प्राप्त होता है। अर्थात् (नए) भाज्य के पहले पद – 2x को भाजक के पहले पद x से भाग देते हैं और हमें – 2 प्राप्त होता है। इस तरह, भागफल का दूसरा पद – 2 है।

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(1)

चरण 5 : हम भाजक को भागफल के दूसरे पद से गुणा करते हैं और इस गुणनफल को भाज्य से घटाते हैं। अर्थात् हम x + 1 को – 2 से गुणा करते हैं और गुणनफल – 2x – 2 को भाज्य – 2x – 1 से घटाते हैं। इससे शेषफल के रूप में हमें 1 प्राप्त होता है।

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(3)

यह प्रक्रम हम तब तक करते रहते हैं जब तक कि नए भाज्य की घात भाजक की घात से कम नहीं हो जाती। इस चरण पर, भाज्य शेषफल हो जाता है और भागफलों के योगफल से हमें पूर्ण भागफल प्राप्त हो जाता है।

चरण 6 : इस तरह पूरा भागफल 3x – 2 है और शेषफल 1 है।

आइए हम देखें कि पूरे प्रक्रम में हमने क्या-क्या किया है।

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(4)

ध्यान दीजिए कि 3x2 + x – 1 = (x + 1) (3x – 2) + 1

अर्थात् भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल

व्यापक रूप में, यदि p(x) और g(x) एेसे दो बहुपद हों कि p(x) की घात > g(x) की घात और g(x) 0 है, तो हम एेसे बहुपद q(x) और r(x) प्राप्त कर सकते हैं जिससे कि

p(x) = g(x)q(x) + r(x),

जहाँ r(x) = 0 या r(x) की घात < g(x) की घात। यहाँ हम कह सकते हैं कि p(x) को g(x) से भाग देने पर भागफल q(x) और शेषफल r(xप्राप्त होता है।

ऊपर के उदाहरण में, भाजक एक रैखिक बहुपद था। एेसी स्थिति में आइए हम देखें कि शेषफल और भाज्य के कुछ मानों में कोई संबंध है या नहीं।

p(x) = 3x2 + x – 1 में x के स्थान पर –1 प्रतिस्थापित करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

p(–1) = 3(–1)2 + (–1) –1 = 1

अतः p(x) = 3x2 + x – 1 को (x + 1) से भाग देने पर जो शेषफल प्राप्त होता है, यह वही होता है जो कि बहुपद (x + 1) के शून्यक, अर्थात् –1 पर बहुपद p(x) का मान होता है।

आइए हम कुछ अन्य उदाहरण लें।

उदाहरण 7 : 3x4 – 4x3 – 3x –1 को x – 1 से भाग दीजिए।

हल : लंबे भाग से हमें यह प्राप्त होता है:

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(5)

यहाँ शेषफल – 5 है। अब x – 1 का शून्यक 1 है। अतः p(x) में x = 1 रखने पर हम यह पाते हैं कि

p(1) = 3(1)4 – 4(1)3 – 3(1) – 1

= 3 – 4 – 3 – 1

= – 5, जो कि शेषफल है।

उदाहरण 8 : p(x) = x3 + 1 को x + 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषफल ज्ञात कीजिए।

हल : लंबे भाग से,

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(6)

अतः, हमें शेषफल 0 प्राप्त होता है।

यहाँ p(x) = x3 + 1 है और x + 1 = 0 का मूल x = –1 है। अतः

p(–1) = (–1)3 + 1

= –1 + 1

= 0,

जो वास्तविक रूप से भाग देने पर प्राप्त शेषफल के बराबर है।

क्या यह एक बहुपद को एक रैखिक बहुपद से भाग देने पर प्राप्त शेषफल ज्ञात करने की एक सरल विधि नहीं है? अब हम इस तथ्य को निम्नलिखित प्रमेय के रूप में प्रस्तुत करेंगे। हम यहाँ इस प्रमेय की उपपत्ति देकर यह भी दिखाएंँगे कि यह प्रमेय सत्य क्यों है।

शेषफल प्रमेय : मान लीजिए p(x) एक से अधिक या एक के बराबर घात वाला एक बहुपद है और मान लीजिए a कोई वास्तविक संख्या है। यदि p(x) को रैखिक बहुपद x – a से भाग दिया जाए, तो शेषफल p(a) होता है।

उपपत्ति : मान लीजिए p(x) एक या एक से अधिक घात वाला एक बहुपद है और मान लीजिए कि जब p(x) को xa से भाग दिया जाता है, तो भागफल q(x) होता है और शेषफल r(x) होता है। अर्थात्

p(x) = (xa) q(x) + r(x)

क्योंकि xa की घात 1 है और r(x) की घात x a की घात से कम है, इसलिए r(x) की घात = 0 है। इसका अर्थ यह है कि r(x) एक अचर है। मान लीजिए यह अचर r है।

अतः, x के प्रत्येक मान के लिए r(x) = r है।

इसलिए, p(x) = (xa) q(x) + r

विशेष रूप से, यदि x = a, तो इस समीकरण से हमें यह प्राप्त होता हैः

p(a) = (aa) q(a) + r

= r

इस तरह प्रमेय सिद्ध हो जाती है।

आइए हम इस परिणाम को एक अन्य उदाहरण पर लागू करें।

उदाहरण 9 : x4 + x3 – 2x2 + x + 1 को x – 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषफल ज्ञात कीजिए

हल : यहाँ, p(x) = x4 + x3 – 2x2 + x + 1 है और x – 1 का शून्यक 1 है।

p(1) = (1)4 + (1)3 – 2(1)2 + 1 + 1 = 2

अतः शेषफल प्रमेय के अनुसार x4 + x3 – 2x2 + x + 1 को (x – 1) से भाग देने पर शेषफल 2 प्राप्त होता है।

उदाहरण 10 : जाँच कीजिए कि बहुपद q(t) = 4t3 + 4t2t – 1, 2t + 1 का एक गुणज है।

हल : जैसा कि आप जानते हैं कि q(t) बहुपद 2t + 1 का गुणज केवल तब होगा जबकि
2t + 1 से q(t) को भाग देने पर कोई शेष न बचता हो। अब 2t + 1 = 0 लेने पर हमें यह प्राप्त होता हैः

t =

और, q =

=

= 0

अतः, q(t) को 2t + 1 से भाग देने पर प्राप्त शेषफल 0 है।

अतः, 2t + 1 दिए हुए बहुपद q(t) का एक गुणनखंड है अर्थात् q(t), 2t + 1 का एक गुणज है।


प्रश्नावली 2.3

1. x3 + 3x2 + 3x + 1 को निम्नलिखित से भाग देने पर शेषफल ज्ञात कीजिएः

(i) x + 1 (ii) x (iii) x (iv) x + pi (v) 5 + 2x

2. x3ax2 + 6xa को xa से भाग देने पर शेषफल ज्ञात कीजिए।

3. जाँच कीजिए कि 7 + 3x, 3x3 + 7x का एक गुणनखंड है या नहीं।


2.5
बहुपदों का गुणनखंडन

आइए अब हम ऊपर के उदाहरण 10 की स्थिति पर ध्यानपूर्वक विचार करें। इसके अनुसार, क्योंकि शेषफल = 0 है, इसलिए 2t + 1, q(t) का एक गुणनखंड है। अर्थात् किसी बहुपद g(t) के लिए,

q(t) = (2t + 1) g(t) होता है।

यह नीचे दिए हुए प्रमेय की एक विशेष स्थिति हैः

गुणनखंड प्रमेय : यदि p(x) घात n > 1 वाला एक बहुपद हो और a कोई वास्तविक संख्या हो, तो

(i) xa, p(x) का एक गुणनखंड होता है, यदि p(a) = 0 हो, और

(ii) p(a) = 0 होता है, यदि xa, p(x) का एक गुणनखंड हो।

उपपत्ति : शेषफल प्रमेय द्वारा, p(x) = (x – a) q(x) + p(a).

(i) यदि p(a) = 0, तब p(x) = (x – a) q(x), जो दर्शाता है कि x a, p(x) का एक
गुणनखंड है।

(ii) चूंकि xa, p(x) का एक गुण x a, p(x) का एक गुणनखंड है, तो किसी बहुपद
g
(x) के लिए p(x) = (xa) g(x) होगा। इस स्थिति में, p(a) = (aa) g(a) = 0.

उदाहरण 11 : जाँच कीजिए कि x + 2 बहुपदों x3 + 3x2 + 5x + 6 और 2x + 4 का एक गुणनखंड है या नहीं।

हल : x + 2 का शून्यक –2 है। मान लीजिए

p(x) = x3 + 3x2 + 5x + 6 और s(x) = 2x + 4

तब, p(–2) = (–2)3 + 3(–2)2 + 5(–2) + 6

= –8 + 12 – 10 + 6

= 0

अतः गुणनखंड प्रमे(Factor Theorem) के अनुसार x + 2, x3 + 3x2 + 5x + 6 का एक गुणनखंड है।

पुनः, s(–2) = 2(–2) + 4 = 0

अतः x + 2, 2x + 4 का एक गुणनखंड है। वास्तव में, गुणनखंड प्रमेय लागू किए बिना ही आप इसकी जाँच कर सकते हैं, क्योंकि 2x + 4 = 2(x + 2) है।

उदाहरण 12 : यदि x – 1, 4x3 + 3x2 – 4x + k का एक गुणनखंड है, तो k का मान ज्ञात कीजिए।

हल : क्योंकि x – 1, p(x) = 4x3 + 3x2 – 4x + k का एक गुणनखंड है, इसलिए

p(1) = 0 होगा।

अब, p(1) = 4(1)3 + 3(1)2 – 4(1) + k

इसलिए 4 + 3 – 4 + k = 0

अर्थात् k = –3

अब हम घात 2 और घात 3 के कुछ बहुपदों के गुणनखंड ज्ञात करने के लिए गुणनखंड प्रमेय का प्रयोग करेंगे।

आप x2 + lx + m जैसे द्विघाती बहुपद के गुणनखंडन से परिचित हैं। आपने मध्य पद lx को ax + bx में इस प्रकार विभक्त करके कि ab = m हो, गुणनखंडन किया था। तब
x2 + lx + m = (x + a) (x + b) प्राप्त हुआ था। अब हम ax2 + bx + c, जहाँ a 0 और a, b, c अचर हैं, के प्रकार के द्विघाती बहुपदों का गुणनखंडन करने का प्रयास करेंगे।

मध्य पद को विभक्त करके बहुपद ax2 + bx + c का गुणनखंडन निम्न प्रकार से होता हैः

मान लीजिए इसके गुणनखंड (px + q) और (rx + s) हैं। तब,

ax2 + bx + c = (px + q) (rx + s) = pr x2 + (ps + qr) x + qs

x2 के गुणांकों की तुलना करने पर, हमें a = pr प्राप्त होता है।

इसी प्रकार, x के गुणांकों की तुलना करने पर, हमें b = ps + qr प्राप्त होता है।

साथ ही, अचर पदों की तुलना करने पर, हमेें c = qs प्राप्त होता है।

इससे यह पता चलता है कि b दो संख्याओं ps और qr का योगफल है, जिनका गुणनफल (ps)(qr) = (pr)(qs) = ac है। अतः ax2 + bx + c का गुणनखंडन करने के लिए, हम b को एेसी दो संख्याओं के योगफल के रूप में लिखते हैं जिनका गुणनफल ac हो। यह तथ्य नीचे दिए गए उदाहरण 13 से स्पष्ट हो जाएगा।

उदाहरण 13 : मध्य पद को विभक्त करके तथा गुणनखंड प्रमेय का प्रयोग करके 6x2 + 17x + 5 का गुणनखंडन कीजिए।

हल 1 : (मध्य पद को विभक्त करके): यदि हम एेसी दो संख्याएँ p और q ज्ञात कर सकते हों जिससे कि

p + q = 17 और pq = 6 × 5 = 30 हो, तो हम गुणनखंड प्राप्त कर सकते हैं।

अतः आइए हम 30 के गुणनखंड-युग्मों को ढूढ़ें। कुछ युग्म 1 और 30, 2 और 15, 3 और 10, 5 और 6 हैं।

इन युग्मों में, हमें 2 और 15 के युग्म से p + q = 17 प्राप्त होगा।

अतः 6x2 + 17x + 5 = 6x2 + (2 + 15)x + 5

= 6x2 + 2x + 15x + 5

= 2x(3x + 1) + 5(3x + 1)

= (3x + 1) (2x + 5)

हल 2 : (गुणनखंड प्रमेय की सहायता से)ः

6x2 + 17x + 5 = = 6 p(x), मान लीजिए। यदि a और b, p(xके शून्यक हों, तो 6x2 + 17x + 5 = 6(xa) (xb) है। अतः ab = होगा। आइए हम a और b के लिए कुछ संभावनाएँ देखें। ये हो सकते हैं। अब, 0 है। परन्तु = 0 है। अतः , p(x) का एक गुणनखंड है। इसी प्रकार, जाँच करके आप यह ज्ञात कर सकते हैं कि , p(x) का एक गुणनखंड है।

अतः, 6x2 + 17x + 5 = 6

=

= (3x + 1) (2x + 5)

इस उदाहरण के लिए, विभक्त करने की विधि का प्रयोग अधिक प्रभावशाली है। फिर भी, आइए हम एक और उदाहरण लें।

उदाहरण 14 : गुणनखंड प्रमेय की सहायता से y2 – 5y + 6 का गुणनखंडन कीजिए।

हल : मान लीजिए p(y) = y2 – 5y + 6 है। अब, यदि p(y) = (ya) (yb) हो, तो हम जानते हैं कि इसका अचर पद ab होगा। अतः ab = 6 है। इसलिए, p(y) के गुणनखंड प्राप्त करने के लिए हम 6 के गुणनखंड ज्ञात करते हैं।

6 के गुणनखंड 1, 2 और 3 हैं।

अब, p(2) = 22 – (5 × 2) + 6 = 0

इसलिए y – 2, p(y) का एक गुणनखंड है।

साथ ही, p(3) = 32 – (5 × 3) + 6 = 0

इसलिए, y – 3 भी y2 – 5y + 6 का एक गुणनखंड है।

अतः, y2 – 5y + 6 = (y – 2) (y – 3)

ध्यान दीजिए कि मध्य पद –5y को विभक्त करके भी y2 – 5y + 6 का गुणनखंडन किया जा सकता है।

आइए अब हम त्रिघाती बहुपदों का गुणनखंडन करें। यहाँ प्रारंभ में विभक्त-विधि अधिक उपयोगी सिद्ध नहीं होगी। हमेें पहले कम से कम एक गुणनखंड ज्ञात करना आवश्यक होता है, जैसा कि आप नीचे के उदाहरण में देखेंगे।

उदाहरण 15 : x3 – 23x2 + 142x – 120 का गुणनखंडन कीजिए।

हल : मान लीजिए p(x) = x3 – 23x2 + 142x – 120 है।

अब हम –120 के सभी गुणनखंडों का पता लगाएँगे। इनमें कुछ गुणनखंड हैंः

±1, ±2, ±3, ±4, ±5, ±6, ±8, ±10, ±12, ±15, ±20, ±24, ±30, ±60

जाँच करने पर, हम यह पाते हैं कि p(1) = 0 है। अतः (x – 1), p(x) का एक गुणनखंड है।

अब हम देखते हैं कि x3 – 23x2 + 142x – 120 = x3x2 – 22x2 + 22x + 120x – 120

= x2(x –1) – 22x(x – 1) + 120(x – 1) (क्यों?)

= (x – 1) (x2 – 22x + 120) [(x – 1) को सर्वनिष्ठ लेकर]

इसे p(x) को (x – 1) से भाग देकर भी प्राप्त किया जा सकता था।

अब x2 – 22x + 120 का गुणनखंडन या तो मध्य पद को विभक्त करके या गुणनखंड प्रमेय की सहायता से किया जा सकता है। मध्य पद को विभक्त करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

x2 – 22x + 120 = x2 – 12x – 10x + 120

= x(x – 12) – 10(x – 12)

= (x – 12) (x – 10)

अतः, x3 – 23x2 – 142x – 120 = (x – 1)(x – 10)(x – 12)


प्रश्नावली 2.4

1. बताइए कि निम्नलिखित बहुपदों में से किस बहुपद का एक गुणनखंड x + 1 है।

(i) x3 + x2 + x + 1 (ii) x4 + x3 + x2 + x + 1

(iii) x4 + 3x3 + 3x2 + x + 1 (iv) x3x2

2. गुणनखंड प्रमेय लागू करके बताइए कि निम्नलिखित स्थितियों में से प्रत्येक स्थिति में g(x), p(x) का एक गुणनखंड है या नहींः

(i) p(x) = 2x3 + x2 – 2x – 1, g(x) = x + 1

(ii) p(x) = x3 + 3x2 + 3x + 1, g(x) = x + 2

(iii) p(x) = x3 – 4x2 + x + 6, g(x) = x – 3

3. k का मान ज्ञात कीजिए जबकि निम्नलिखित स्थितियों में से प्रत्येक स्थिति में (x – 1), p(x) का एक गुणनखंड हो:

(i) p(x) = x2 + x + k (ii) p(x) = 2x2 + kx +

(iii) p(x) = kx2x + 1 (iv) p(x) = kx2 – 3x + k

4. गुणनखंड ज्ञात कीजिएः

(i) 12x2 – 7x + 1 (ii) 2x2 + 7x + 3

(iii) 6x2 + 5x – 6 (iv) 3x2 x – 4

5. गुणनखंड ज्ञात कीजिएः

(i) x3 – 2x2x + 2 (ii) x3 – 3x2 – 9x – 5

(iii) x3 + 13x2 + 32x + 20 (iv) 2y3 + y2 – 2y – 1


2.6 बीजीय सर्वसमिकाएँ

पिछली कक्षाओं में, आप यह पढ़ चुके हैं कि बीजीय सर्वसमिका (algebraic identity) एक बीजीय समीकरण होती है जो कि चरों के सभी मानों के लिए सत्य होती है। पिछली कक्षाओं में, आप निम्नलिखित बीजीय सर्वसमिकाओं का अध्ययन कर चुके हैंः

सर्वसमिका I : (x + y)2 = x2 + 2xy + y2

सर्वसमिका II : (xy)2 = x2 – 2xy + y2

सर्वसमिका III : x2y2 = (x + y) (xy)

सर्वसमिका IV : (x + a) (x + b) = x2 + (a + b)x + ab

इन बीजीय सर्वसमिकाओं में से कुछ का प्रयोग आपने बीजीय व्यंजकों के गुणनखंड ज्ञात करने में अवश्य किया होगा। आप इनकी उपयोगिता अभिकलनों (computations) में भी देख सकते हैं।

उदाहरण 16 : उपयुक्त सर्वसमिकाओं का उपयोग करके निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिएः

(i) (x + 3) (x + 3) (ii) (x – 3) (x + 5)

हल : (i) यहाँ हम सर्वसमिका I (x + y)2 = x2 + 2xy + y2 का प्रयोग कर सकते हैं। इस सर्वसमिका में y = 3 रखने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(x + 3) (x + 3) = (x + 3)2 = x2 + 2(x)(3) + (3)2

= x2 + 6x + 9

(ii) सर्वसमिका IV अर्थात् (x + a) (x + b) = x2 + (a + b)x + ab को लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(x – 3) (x + 5) = x2 + (–3 + 5)x + (–3)(5)

= x2 + 2x – 15

उदाहरण 17 : सीधे गुणा न करके 105 × 106 का मान ज्ञात कीजिए।

हल : 105 × 106 = (100 + 5) × (100 + 6)

= (100)2 + (5 + 6) (100) + (5 × 6) (सर्वसमिका IV लागू करके)

= 10000 + 1100 + 30

= 11130

कुछ दिए हुए व्यंजकों का गुणनफल ज्ञात करने के लिए, हमने ऊपर बतायी गई कुछ सर्वसमिकाओं का प्रयोग किया है। ये सर्वसमिकाएँ बीजीय व्यंजकों का गुणनखंडन करने में भी उपयोगी होती हैं, जैसा कि आप नीचे दिए गए उदाहरण में देख सकते हैं।

उदाहरण 18 : गुणनखंड ज्ञात कीजिएः

(i) 49a2 + 70ab + 25b2 (ii)

हल : (i) यहाँ आप यह देख सकते हैं कि

49a2 = (7a)2, 25b2 = (5b)2, 70ab = 2(7a) (5b)

x2 + 2xy + y2 के साथ दिए हुए व्यंजक की तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि x = 7a और y = 5b है।

सर्वसमिका I लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

49a2 + 70ab + 25b2 = (7a + 5b)2 = (7a + 5b) (7a + 5b)

(ii) यहाँ

सर्वसमिका III के साथ इसकी तुलना करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

=

=

अभी तक हमारी सभी सर्वसमिकाएँ द्विपदों के गुणनफलों से संबंधित रही हैं। आइए अब हम सर्वसमिका I को त्रिपद x + y + z पर लागू करें। हम सर्वसमिका I लागू करके, (x + y + z)2 का अभिकलन करेंगे।

मान लीजिए x + y = t है। तब,

(x + y + z)2 = (t + z)2

= t2 + 2tz + t2 (सर्वसमिका I लागू करने पर)

= (x + y)2 + 2(x + y)z + z2 (t का मान प्रतिस्थापित करने पर)

= x2 + 2xy + y2 + 2xz + 2yz + z2 (सर्वसमिका I लागू करने पर)

= x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx (पदों को विन्यासित करने पर)

अतः हमें निम्नलिखित सर्वसमिका प्राप्त होती हैः

सर्वसमिका V : (x + y + z)2 = x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx

टिप्पणी : हम दाएँ पक्ष के व्यंजक को बाएँ पक्ष के व्यंजक का प्रसारित रूप मानते हैं। ध्यान दीजिए कि (x + y + z)2 के प्रसार मेें तीन वर्ग पद और तीन गुणनफल पद हैं।

उदाहरण 19 : (3a + 4b + 5c)2 को प्रसारित रूप में लिखिए।

हल : दिए हुए व्यंजक की (x + y + z)2 के साथ तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि

x = 3a, y = 4b और z = 5c

अतः सर्वसमिका V लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(3a + 4b + 5c)2 = (3a)2 + (4b)2 + (5c)2 + 2(3a)(4b) + 2(4b)(5c) + 2(5c)(3a)

= 9a2 + 16b2 + 25c2 + 24ab + 40bc + 30ac

उदाहरण 20 : (4a – 2b – 3c)2 का प्रसार कीजिए।

हल : सर्वसमिका V लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(4a – 2b – 3c)2 = [4a + (–2b) + (–3c)]2

= (4a)2 + (–2b)2 + (–3c)2 + 2(4a)(–2b) + 2(–2b)(–3c) + 2(–3c)(4a)

= 16a2 + 4b2 + 9c2 – 16ab + 12bc – 24ac

उदाहरण 21 : 4x2 + y2 + z2 – 4xy – 2yz + 4xz का गुणनखंडन कीजिए।

हल : यहाँ 4x2 + y2 + z2 – 4xy – 2yz + 4xz = (2x)2 + (–y)2 + (z)2 + 2(2x)(–y)

+ 2(–y)(z) + 2(2x)(z)

= [2x + (–y) + z]2 (सर्वसमिका V लागू करने पर)

= (2xy + z)2 = (2xy + z) (2xy + z)

अभी तक हमने द्विघात पदों से संबंधित सर्वसमिकाओं का ही अध्ययन किया है। आइए अब हम सर्वसमिका I को (x + y)3 अभिकलित करने में लागू करें। यहाँ,

(x + y)3 = (x + y) (x + y)2

= (x + y)(x2 + 2xy + y2)

= x(x2 + 2xy + y2) + y(x2 + 2xy + y2)

= x3 + 2x2y + xy2 + x2y + 2xy2 + y3

= x3 + 3x2y + 3xy2 + y3

= x3 + y3 + 3xy(x + y)

अतः, हमें निम्नलिखित सर्वसमिका प्राप्त होती हैः

सर्वसमिका VI : (x + y)3 = x3 + y3 + 3xy (x + y)

सर्वसमिका VI मेें y के स्थान पर y रखने पर, हमें प्राप्त होता हैः

सर्वसमिका VII : (xy)3 = x3y3 – 3xy(xy)

= x3 – 3x2y + 3xy2 y3

उदाहरण 22 : निम्नलिखित घनों को प्रसारित रूप में लिखिएः

(i) (3a + 4b)3 (ii) (5p – 3q)3

हल : (i) (x + y)3 के साथ दिए गए व्यंजक की तुलना करने पर हम, यह पाते हैं कि

x = 3a और y = 4b

अतः सर्वसमिका VI का प्रयोग करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(3a + 4b)3 = (3a)3 + (4b)3 + 3(3a)(4b)(3a + 4b)

= 27a3 + 64b3 + 108a2b + 144ab2

(ii) (xy)3 के साथ दिए हुए व्यंजक की तुलना करने पर, हम यह पाते हैं कि

x = 5p और y = 3q

सर्वसमिका VII लागू करने पर, हमें यह प्राप्त होता हैः

(5p – 3q)3 = (5p)3 – (3q)3 – 3(5p)(3q)(5p – 3q)

= 125p3 – 27q3 – 225p2q + 135pq2

उदाहरण 23 : उपयुक्त सर्वसमिकाएँ प्रयोग करके, निम्नलिखित में से प्रत्येक का मान ज्ञात कीजिएः

(i) (104)3 (ii) (999)3

हल : (i) यहाँ

(104)3 = (100 + 4)3

= (100)3 + (4)3 + 3(100)(4)(100 + 4)

(सर्वसमिका VI का प्रयोग करने पर)

= 1000000 + 64 + 124800

= 1124864

(ii) यहाँ

(999)3 = (1000 – 1)3

= (1000)3 – (1)3 – 3(1000)(1)(1000 – 1)

(सर्वसमिका VII का प्रयोग करने पर)

= 1000000000 – 1 – 2997000

= 997002999

उदाहरण 24 : 8x3 + 27y3 + 36x2y + 54xy2 का गुणनखंडन कीजिए।

हल : दिए हुए व्यंजक को इस प्रकार लिखा जा सकता हैः

(2x)3 + (3y)3 + 3(4x2)(3y) + 3(2x)(9y2)

= (2x)3 + (3y)3 + 3(2x)2(3y) + 3(2x)(3y)2

= (2x + 3y)3 (सर्वसमिका VI का प्रयोग करने पर)

= (2x + 3y) (2x + 3y) (2x + 3y)

अब (x + y + z) (x2 + y2 + z2xyyzzx) का प्रसार करने पर, हमें गुणनफल इस रूप में प्राप्त होता हैः

x(x2 + y2 + z2xyyzzx) + y(x2 + y2 + z2xyyzzx)

+ z(x2 + y2 + z2xyyzzx)

= x3 + xy2 + xz2x2yxyzzx2 + x2y + y3 + yz2xy2y2zxyz

+ x2z + y2z + z3xyzyz2xz2

= x3 + y3 + z3 – 3xyz (सरल करने पर)

अतः, हमें निम्नलिखित सर्वसमिका प्राप्त होती हैः

सर्वसमिका VIII : x3 + y3 + z3 – 3xyz = (x + y + z) (x2 + y2 + z2xyyzzx)

उदाहरण 25 : 8x3 + y3 + 27z3 – 18xyz का गुणनखंडन कीजिए।

हल : यहाँ,

8x3 + y3 + 27z3 – 18xyz

= (2x)3 + y3 + (3z)3 – 3(2x)(y)(3z)

= (2x + y + 3z)[(2x)2 + y2 + (3z)2 – (2x)(y) – (y)(3z) – (2x)(3z)]

= (2x + y + 3z) (4x2 + y2 + 9z2 – 2xy – 3yz – 6xz)


प्रश्नावली 2.5

1. उपयुक्त सर्वसमिकाओं को प्रयोग करके निम्नलिखित गुणनफल ज्ञात कीजिएः

(i) (x + 4) (x + 10) (ii) (x + 8) (x – 10) (iii) (3x + 4) (3x – 5)

(iv) (y2 + ) (y2) (v) (3 – 2x) (3 + 2x)

2. सीधे गुणा किए बिना निम्नलिखित गुणनफलों के मान ज्ञात कीजिएः

(i) 103 × 107 (ii) 95 × 96 (iii) 104 × 96

3. उपयुक्त सर्वसमिकाएँ प्रयोग करके निम्नलिखित का गुणनखंडन कीजिएः

(i) 9x2 + 6xy + y2 (ii) 4y2 – 4y + 1 (iii) x2

4. उपयुक्त सर्वसमिकाओं का प्रयोग करके निम्नलिखित में से प्रत्येक का प्रसार कीजिएः

(i) (x + 2y + 4z)2 (ii) (2xy + z)2 (iii) (–2x + 3y + 2z)2

(iv) (3a – 7bc)2 (v) (–2x + 5y – 3z)2 (vi)

5. गुणनखंडन कीजिएः

(i) 4x2 + 9y2 + 16z2 + 12xy – 24yz – 16xz

(ii) 2x2 + y2 + 8z2xy + yz – 8xz

6. निम्नलिखित घनों को प्रसारित रूप में लिखिएः

(i) (2x + 1)3 (ii) (2a – 3b)3

(iii) (iv)

7. उपयुक्त सर्वसमिकाएँ प्रयोग करके निम्नलिखित के मान ज्ञात कीजिएः

(i) (99)3 (ii) (102)3 (iii) (998)3

8. निम्नलिखित में से प्रत्येक का गुणनखंडन कीजिएः

(i) 8a3 + b3 + 12a2b + 6ab2 (ii) 8a3b3 – 12a2b + 6ab2

(iii) 27 – 125a3 – 135a + 225a2 (iv) 64a3 – 27b3 – 144a2b + 108ab2

(v) 27p3

9. सत्यापित कीजिएः (i) x3 + y3 = (x + y) (x2xy + y2) (ii) x3y3 = (xy) (x2 + xy + y2)

10. निम्नलिखित में से प्रत्येक का गुणनखंडन कीजिएः

(i) 27y3 + 125z3 (ii) 64m3 – 343n3

[संकेत: देखिए प्रश्न 9]

11. गुणनखंडन कीजिएः 27x3 + y3 + z3 – 9xyz

12. सत्यापित कीजिएः x3 + y3 + z3 – 3xyz =

13. यदि x + y + z = 0 हो, तो दिखाइए कि x3 + y3 + z3 = 3xyz ै।

14. वास्तव में घनों का परिकलन किए बिना निम्नलिखित में से प्रत्येक का मान ज्ञात कीजिएः

(i) (–12)3 + (7)3 + (5)3 (ii) (28)3 + (–15)3 + (–13)3

15. नीचे दिए गए आयतों, जिनमें उनके क्षेत्रफल दिए गए हैं, में से प्रत्येक की लंबाई और चौड़ाई के लिए संभव व्यंजक दीजिएः

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(7)

16. घनाभों (cuboids), जिनके आयतन नीचे दिए गए हैं कि, विमाओं के लिए संभव व्यंजक क्या हैं?

Screenshot_2018-12-28 Chapter-2 pmd - Chapter 2 pdf(8)


2.7
सारांश

इस अध्याय में, आपने निम्नलिखित बिंदुओं का अध्ययन किया हैः

1. एक चर वाला बहुपद p(x) निम्न रूप का x में एक बीजीय व्यंजक हैः

p(x) = anxn + an–1xn – 1 + . . . + a2x2 + a1x + a0,

जहाँ a0, a1, a2, . . ., an अचर हैं और an 0 है। a0, a1, a2, . . ., an क्रमशः x0, x, x2, . . ., xn के गुणांक हैं और n को बहुपद की घात कहा जाता है। प्रत्येक anxn, an–1 xn–1, ..., a0, जहाँ an 0, को बहुपद p(x) का पद कहा जाता है।

2. एक पद वाले बहुपद को एकपदी कहा जाता है।

3. दो पदों वाले बहुपद को द्विपद कहा जाता है।

4. तीन पदों वाले बहुपद को त्रिपद कहा जाता है।

5. एक घात वाले बहुपद को रैखिक बहुपद कहा जाता है।

6. दो घात वाले बहुपद को द्विघाती बहुपद कहा जाता है।

7. तीन घात वाले बहुपद को त्रिघाती बहुपद कहा जाता है।

8. वास्तविक संख्या a’, बहुपद p(x) का एक शून्यक होती है, यदि p(a) = 0 हो।

9. एक चर में प्रत्येक रैखिक बहुपद का एक अद्वितीय शून्यक होता है। एक शून्येतर अचर बहुपद का कोई शून्यक नहीं है और प्रत्येक वास्तविक संख्या शून्य बहुपद का एक शून्यक होती है।

10. शेषफल प्रमेय : यदि p(x), एक से अधिक या एक के बराबर घात वाला एक बहुपद हो, और p(x) को रैखिक बहुपद xa से भाग दिया गया हो, तो शेषफल p(a) होता है।

11. यदि p(a) = 0 हो, तो xa बहुपद p(x) का एक गुणनखंड होता है और यदि xa, p(x) का एक गुणनखंड हो, तो p(a) = 0 होता है।

12. (x + y + z)2 = x2 + y2 + z2 + 2xy + 2yz + 2zx

13. (x + y)3 = x3 + y3 + 3xy(x + y)

14. (xy)3 = x3y3 – 3xy(xy)

15. x3 + y3 + z3 – 3xyz = (x + y + z) (x2 + y2 + z2xyyzzx)

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