दिये जल उठे मधुकर उपाध्याय रास के बूढ़े बरगद ने वह दृश्य देखा था। दांडी वूफच की तैयारी के सिलसिले में वल्लभभाइर् पटेल सात माचर् को रास पहुँचे थे। उन्हें वहाँ भाषण नहीं देना था लेकिन पटेल ने लोगों के आग्रह पर ‘दो शब्द’ कहना स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा, फ्भाइयो और बहनो, क्या आप सत्याग्रह के लिए तैयार हैं?य् इसी बीच मजिस्ट्रेट ने निषेधाज्ञा1 लागू कर दी और पटेल को गिरफ्ऱ तार कर लिया गया। यह गिरफ्ऱ तारी स्थानीय कलेक्टर श्िालिडी के आदेश पर हुइर्, जिसे पटेल ने पिछले आंदोलन के समय अहमदाबाद से भगा दिया था। वल्लभभाइर् को पुलिस पहरे में बोरसद की अदालत में लाया गया जहाँ उन्होंने अपना अपराध कबूल2 कर लिया। जज को समझ में नहीं आ रहा था कि वह उन्हें किस धारा के तहत और कितनी सशा दे। आठ लाइन का अपना प़ैफसला लिखने में उसे डेढ़ घंटा लगा। पटेल को 500 रफपये जुरमाने के साथ तीन महीने की जेल हुइर्। इसके लिए उन्हें अहमदाबाद में साबरमती जेल ले जाया गया। साबरमती आश्रम में गांधी को पटेल कीगिरफ्ऱ तारी, उनकी सशा और उन्हें साबरमती जेल लाए जाने की सूचना दी गइर्। गांधी इसगिरफ्ऱ तारी से बहुत क्षुब्ध3 थे। उन्होंने कहा कि अब दांडी वूफच की तारीख बदल सकती है। वह अपने अभ्िायान पर 12 माचर् से पहले ही रवाना हो सकते हैं। 1. मनाही का आदेश 2. स्वीकार 3. अशांत, नाराश दिये जल उठेध्43 आश्रम में एक - एक आदमी यह हिसाब लगा रहा था कि मोटरकार से बोरसद से साबरमती जेल पहंँुचने में कितना समय लगेगा। जेल का रास्ता आश्रम के सामने से ही होकर जाता था। आश्रमवासी पटेल की एक झलक पाना चाहते थे। समय का अनुमान लगाकर गांधी स्वयं आश्रम से बाहर निकल आए। पीछे - पीछे सब आश्रमवासी आकर सड़क के किनारे खड़े हो गए। लोगों का खयाल था कि पटेलको गिरफ्ऱतार करके ले जाने वाली मोटर वहाँ किसी हाल में नहीं रफकेगी लेकिन मोटर रफकी। लगता है पटेल का रोब ही था कि पुलिसवालों को मोटर रोकनी पड़ी। गांधी और पटेल सड़क पर ही मिले। एक संक्ष्िाप्त मुलाकात। पटेल ने कार में बैठते हुए आश्रमवासियों और गांधी से कहा, फ्मैं चलता हँू। अब आपकी बारी है।य्पटेल की गिरफ्ऱ तारी पर देशभर में प्रतिवि्रफया1 हुइर्। दिल्ली में मदन मोहन मालवीय ने वेंफद्रीय एसेंबली में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें बिना मुकदमा चलाए पटेल को जेल भेजने के सरकारी कदम की भत्सर्ना2 की गइर् थी। प्रस्ताव पारित3 नहीं हो सका। इस प्रस्ताव पर कइर् नेताओं ने अपनी राय सदन में रखी। मोहम्मदअली जिन्ना ने कहा, फ्सरदार वल्लभभाइर् पटेल की गिरफ्ऱतारी अभ्िाव्यक्ित की स्वतंत्राता के सि(ांत पर हमला है। भारत सरकार एक ऐसी नशीर4 पेश कर रही है जिसके गंभीर परिणाम होंगे।य् गांधी के रास पहँुचने के समय वह कानून लागू था जिसके तहत पटेल कोगिरफ्ऱतार किया गया था। सत्याग्रहियों ने अपनी ओर से तैयारी पूरी कर ली थी। अब्बासतैयबजी वहाँ पहँुच चुके थे कि गांधी की गिरफ्ऱतारी की स्िथति में वूफच की अगुवाइर् कर सवंेफ। बोरसद से निकलने के बाद लगभग सभी आश्वस्त थे कि अब गांधी को जलालपुर पहँुचने तक नहीं पकड़ा जाएगा लेकिन तैयारी में कोइर् कमी नहीं थी। रास में गांधी का भव्य5 स्वागत हुआ। दरबार समुदाय के लोग इसमें सबसे आगे थे। दरबार गोपालदास और रविशंकर महाराज वहाँ मौजूद थे। गांधी ने अपने भाषण में दरबारों का खासतौर पर उल्लेख किया। वुफछ दरबार रास में रहते हैं पर उनकी मुख्य बस्ती कनकापुरा और उससे सटे गाँव देवण में है। दरबार लोग 1. किसी कायर् के परिणामस्वरूप होने वाला कायर् 2. निंदा 3. पास करना 4. उदाहरण 5. शानदार 44ध्संचयन रियासतदार1 होते थे। उनकी साहबी थी, ऐशो - आराम की ¯शदगी थी, एक तरह का राजपाट था। दरबार सब वुफछ छोड़कर यहाँ आकर बस गए। गांधी ने कहा, फ्इनसे आप त्याग और हिम्मत सीखें।य् अख्िाल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक 21 माचर् को साबरमती के तट पर होने वाली थी। जवाहरलाल नेहरू इस बैठक से पहले गांधी से मिलना चाहते थे। उन्होंने संदेश भ्िाजवाया जिसके जवाब में गांधी ने रास में अपनी जनसभा से पहले एक पत्रा लिखा और कहा कि उन तक पहँुचना कठिन है: तुमको पूरी एक रात का जागरण करना पड़ेगा। अगर कल रात से पहले वापस लौटना चाहते हो तो इससे बचा भी नहीं जा सकता। मैं उस समय जहाँ भी रहँूगा, संदेशवाहक तुमको वहाँ तक ले आएगा। इस प्रयाण2 की कठिनतम घड़ी में तुम मुझसे मिल रहे हो। तुमको रात के लगभग दो बजे जाने - परखे मछुआरों के कंधों पर बैठकर एक धारा पार करनी पड़ेगी। मैं राष्ट्र के प्रमुख सेवक के लिए भी प्रयाण में शरा भी विराम नहीं दे सकता।वल्लभभाइर् की गिरफ्ऱ तारी के कारण रास में आम लोगों के बीच सरकार के ख्िालापफ.प्रतिवि्रफया स्वाभाविक थी। गांधी की जनसभा से पहले ही गाँव के सभी पुश्तैनी3 मुख्िाया और पटेल उन्हें अपना इस्तीपफ.ा सौंप गए। गांधी ने दांडी वूफच शुरू होने से पहले ही यह निश्चय कर लिया था कि वह अपनी यात्रा बि्रटिश आिापत्य4 वाले भूभाग से ही करेंगे। किसी राजघराने के इलाके में नहीं जाएँगे लेकिन इस यात्रा में उन्हें थोड़ी देर के लिए बड़ौदा रियासत से गुशरना पड़ा। ऐसा न करने पर यात्रा करीब बीस किलोमीटर लंबी हो जाती और इसका असर यात्रा कायर्व्रफम पर पड़ता। सत्याग्रही गाजेμबाजे के साथ रास में दाख्िाल हुए। वहाँ गांधी को एक धमर्शाला में ठहराया गया जबकि बाकी सत्याग्रही तंबुओं में रफके। रास की आबादी करीब तीन हशार थी लेकिन उनकी जनसभा में बीस हशारसे श्यादा लोग थे। अपने भाषण में गांधी ने पटेल की गिरफ्ऱ तारी का िाव्रफ करते हुए कहा, फ्सरदार को यह सशा आपकी सेवा के पुरस्कार के रूप में मिली है। उन्होंने 1. रियासत या इलाके का मालिक 2. यात्रा 3. पीढि़यों से चला आ रहा 4. प्रभुत्व दिये जल उठेध्45 सरकारी नौकरियों से इस्तीपेफ.का उल्लेख किया और कहा कि वुफछ मुखी और तलाटी ‘गंदगी पर मक्खी की तरह’ चिपके हुए हैं। उन्हें भी अपने निजी तुच्छ1 स्वाथर् भूलकर इस्ती.पफा दे देना चाहिए।य् उन्होंने कहा, फ्आप लोग कब तक गाँवों को चूसने में अपना योगदान देते रहेंगे। सरकार ने जो लूट मचा रखी है उसकी ओर से क्या अभी तक आपकी आँखें खुली नहीं हैं?य् गांधी ने रास में भी राजद्रोह की बात पर शोर दिया और कहा कि उनकी गिरफ्ऱतारी ‘अच्छी बात’ होगी। सरकार को खुली चुनौती देते हुए उन्होंने कहा: अब पिफर बादल घ्िार आए हैं। या कहो सही मौका सामने है। अगर सरकार मुझेगिरफ्ऱतार करती है तो यह एक अच्छी बात है। मुझे तीन माह की सशा होगी तो सरकार को लज्जा आएगी। राजद्रोही को तो कालापानी, देश निकाला या पफांसी की सशा हो सकती है। मुझ जैसे लोग अगर राजद्रोही होना अपना धमर् मानें तो उन्हें क्या सशा मिलनी चाहिए? सत्याग्रही शाम छह बजे रास से चले और आठ बजे कनकापुरा पहँुचे। उस समय लोग यात्रा से वुफछ थके हुए थे और वुफछ थकान इस आशंका से थी कि मही नदी कब और वैफसे पार करेंगे। नदी के किनारे पहँुचते ही समुद्र की ओर से आने वाली ठंडी बयार2 ने सत्याग्रहियों का स्वागत किया। कनकापुरा में 105 साल की एक बूढ़ी महिला ने गांधी के माथे पर तिलक लगाया और कहा, फ्महात्माजी, स्वराज लेकर जल्दी वापस आना।य् गांधी ने कहा, फ्मैं स्वराज लिए बिना नहीं लौटूँगा।य् गांधी की जनसभा का निधार्रित समय आठ बजे था लेकिन कनकापुरा पहँुचने में हुइर् देरी के कारण उसे एक घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया। जनसभा में गांधी ने बि्रतानी वुफशासन का िाव्रफ किया। उन्होंने कहा, फ्इस राज में रंक से राजा तक सब दुखी हैं। राजेμमहाराजे जैसे सरकार नचाती है, नाचने को तैयार हैं। यह राक्षसी राज है ़ ़ ़ इसका संहार3 करना चाहिए।य् रास्ते में रेतीली सड़कों के कारण यह प्रस्ताव किया गया कि गांधी थोड़ी यात्रा कार से 1. क्षुद्र, निवृफष्ट 2. हवा 3. नाश करना 46ध्संचयन कर लें। गांधी ने इससे सापफ इंकार कर दिया। उनका कहना था कि यह उनके जीवन की आख्िारी यात्रा है और फ्ऐसी यात्रा में निकलने वाला वाहन का प्रयोग नहीं करता। यह पुरानी रीति है। धमर्यात्रा में हवाइर् जहाश, मोटर या बैलगाड़ी में बैठकर जाने वाले को लाभ नहीं मिलता। यात्रा में कष्ट सहें, लोगों का सुख - दुख समझें तभी सच्ची यात्रा होती है।य् बि्रटिश हुक्मरानों1 में एक वगर् ऐसा भी था जिसे लग रहा था कि गांधी और उनके सत्याग्रही मही नदी के किनारे अचानक नमक बनाकर कानून तोड़ देंगे। समुद्री पानी नदी के तट पर कापफ.ी नमक छोड़ जाता है जिसकी रखवाली के लिए सरकारी नमक चैकीदार रखे जाते हैं। गांधी ने भी कहा कि यहाँ नमक बनाया जा सकता है। गांधी को समझने वाले वरिष्ठ अिाकारी इस बात से सहमत नहीं थे कि गांधी कोइर् काम ‘अचानक और चुपके से’ करेंगे। इसके बावजूद उन्होंने नदी के तट से सारे नमक भंडार हटा दिए और उन्हें नष्ट करा दिया ताकि इसका खतरा ही न रहे। नियमों के अनुसार उस दिन की यात्रा कनकापुरा में गांधी के भाषण के बाद समाप्त हो जानी चाहिए थी लेकिन इसमें परिवतर्न कर दिया गया। यह तय पाया गया कि नदी को आधी रात के समय समुद्र का पानी चढ़ने पर पार किया जाए ताकि कीचड़ और दलदल में कम - से - कम चलना पड़े। रात साढ़े दस बजे भोजन के बाद सत्याग्रही नदी की ओर चले। अँधेरी रात में गांधी को करीब चार किलोमीटर दलदली शमीन पर चलना पड़ा। वुफछ लोगों ने गांधी को वंफधे पर उठाने की सलाह दी पर उन्होंने मना कर दिया। कहा, फ्यह धमर्यात्रा है। चलकर पूरी करूँगा।य् तट पर पहँुचकर गांधी ने पैर धोए और एक झोपड़ी में आराम किया। आधी रात का इंतशार करते हुए। मही के तट पर उस घुप, अँधेरी रात में भी मेला - जैसा लगा हुआ था। भजन मंडलियाँ थीं। दांडिया रास में निपुण दरबार थे। उनके गीत के बोल थे: देखो गांधी का दांडिया रास देखो वल्लभ का दांडिया रास 1. शासक दिये जल उठेध्47 दांडिया रास, सरकार का नास ़ ़ ़ देखो विऋल का दांडिया रास देखो भगवान का दांडिया रास ़ ़ ़ गांधी को नदी पार कराने की िाम्मेदारी रघुनाथ काका को सौंपी गइर् थी। उन्होंने इसके लिए एक नयी नाव खरीदी और उसे लेकर कनकापुरा पहँुच गए। बदलपुर के रघुनाथ काका को सत्याग्रहियों ने निषादराज कहना शुरू कर दिया। उनके पास बदलपुर में कापफ.ी शमीन थी और नावें भी चलती थीं। जब समुद्र का पानी चढ़ना शुरू हुआ तब तक अँधेरा इतना घना हो गया था कि छोटे - मोटे दिये उसे भेद नहीं पा रहे थे। थोड़ी ही देर में कइर् हशार लोग नदी तट पर पहँुच गए। उन सबके हाथों में दिये थे। यही नशारा1 नदी के दूसरी ओर भी था। पूरा गाँव और आस - पास से आए लोग दिये की रोशनी लिए गांधी और उनके सत्याग्रहियों का इंतशार कर रहे थे। रात बारह बजे महिसागर नदी का किनारा भर गया। पानी चढ़ आया था। गांधी झोपड़ी से बाहर निकले और घुटनों तक पानी में चलकर नाव तक पहुँचे। ‘महात्मा गांधी की जय’, ‘सरदार पटेल की जय’ और ‘जवाहरलाल नेहरू की जय’ के नारों के बीच नाव रवाना हुइर् जिसे रघुनाथ काका चला रहे थे। वुफछ ही देर में नारों की आवाश नदी के दूसरे तट से भी आने लगी। ऐसा लगा जैसे वह नदी का किनारा नहीं बल्िक पहाड़ की घाटी हो, जहाँ प्रतिध्वनि2 सुनाइर् दे। महिसागर के दूसरे तट पर भी स्िथति कोइर् भ्िान्न नहीं थी। उसी तरह का कीचड़ और दलदली शमीन। यह पूरी यात्रा का संभवतः सबसे कठिन हिस्सा था। डेढ़ किलोमीटर तक पानी और कीचड़ में चलकर गांधी रात एक बजे उस पार पहँुचे और सीधे विश्राम करने चले गए। गाँव के बाहर, नदी के तट पर ही उनके लिए झोपड़ी पहले ही तैयार कर दी गइर् थी। गांधी के पार उतरने के बाद भी तट पर दिये लेकर लोग खड़े रहे। अभी सत्याग्रहियों को भी उस पार जाना था। शायद उन्हें पता था कि रात में वुफछ और लोग आएँगे जिन्हें नदी पार करानी होगी। 1. दृश्य 2. किसी शब्द के उपरांत सुनाइर् पड़ने वाला उसी से उत्पन्न शब्द, गूँज, अनुगूँज 48ध्संचयन बोध - अभ्यास 1.किस कारण से प्रेरित हो स्थानीय कलेक्टर ने पटेल को गिरफ्ऱतार करने का आदेश दिया? 2.जज को पटेल की सशा के लिए आठ लाइन के पैफसले को लिखने में डेढ़ घंटा क्यों लगा?़स्पष्ट करें। 3.फ्मैं चलता हूँ। अब आपकी बारी है।य्μयहाँ पटेल के कथन का आशय उ(ृत पाठ के संदभर् में स्पष्ट कीजिए। 4.फ्इनसे आप लोग त्याग और हिम्मत सीखेंय्μगांधीजी ने यह किसके लिए और किस संदभर् में कहा? 5.पाठ द्वारा यह वैफसे सि( होता है किμ‘वैफसी भी कठिन परिस्िथति हो उसका सामना तात्कालिक सूझबूझ और आपसी मेलजोल से किया जा सकता है।’ अपने शब्दों में लिख्िाए। 6.महिसागर नदी के दोनों किनारों पर वैफसा दृश्य उपस्िथत था? अपने शब्दों में वणर्न कीजिए। 7.फ्यह धमर्यात्रा है। चलकर पूरी करूँगा।य्μगांधीजी के इस कथन द्वारा उनके किस चारित्रिाक गुण का परिचय प्राप्त होता है? 8.गांधी को समझने वाले वरिष्ठ अिाकारी इस बात से सहमत नहीं थे कि गंाधी कोइर् काम अचानक और चुपके से करेंगे। पिफर भी उन्होंने किस डर से और क्या एहतियाती कदम उठाए? 9.गांधीजी के पार उतरने पर भी लोग नदी तट पर क्यों खड़े रहे? लेखक परिचय महादेवी वमार् ;1907 - 1987द्ध ¯हदी के महत्त्वपूणर् काव्ययुग - छायावाद के कवि - चतुष्ट्य मेें से एक। प्रेम और करफणा से ओत - प्रोत काव्य गीतों एवं संस्मरणात्मक रेखाचित्रों के लिए बहुप्रशंसित। भारत सरकार द्वारा पप्रभूषण से सम्मानित। उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया और वे साहित्य अकादमी की पैफलो भी रहीं। प्रमुख वृफतियाँ: नीहार, रश्िम, नीरजा, यामा, दीपश्िाखा ;कविता संग्रहद्धऋ शृंखला की कडि़याँ ;निबंध्द्धऋ स्मृति की रेखाएँ, अतीत के चलचित्रा ;संस्मरणद्ध। श्रीराम शमार् ;1896 - 1967द्ध प्रारंभ में अध्यापन कायर् करने के बाद लंबे समय तक स्वतंत्रा रूप से राष्ट्र और साहित्य सेवा में जुटे रहे। ‘विशाल भारत’ के संपादक के रूप में विशेष ख्याति प्राप्त की। ¯हदी में ‘श्िाकार साहित्य’ के अग्रणी लेखक माने गए। प्रमुख रचनाएँ: श्िाकार, बोलती प्रतिमा तथा जंगल के जीव ;श्िाकार संबंध्ी पुस्तवेंफद्ध, सेवाग्राम की डायरी एवं सन्् बयालीस के संस्मरण इत्यादि। के. विव्रफम ¯सह ;1938 - 2013द्ध अध्यापन कायर् से प्रारंभ कर सरकारी नौकरी में विभ्िान्न महकमों में उच्च पदों पर कायर्रत रहे। सूचना और प्रसारण मंत्रालय में निदेशक ;पिफल्म नीतिद्ध के पद पर 50ध्संचयन कायर् करते हुए समय से पहले ही नौकरी को विदा कह अपनी विशेष दिलचस्पी के कारण सिनेमा और टेलिविशन के क्षेत्रा में सवि्रफय हो गए। विकास, पयार्वरण और देशाटन की ओर विशेष झुकाव रखने वाले के. विव्रफम ¯सह ने ‘अंध्ी गली’ ;1984द्ध, ‘न्यू डेल्ही टाइम्स’ ;1985द्ध के निमार्ण में सहयोग करने के साथ - साथ तपर्ण ;1994द्ध का भी निमार्ण किया। उन्होंने टेलिविशन के लिए पिफल्म सृजन ;1994द्ध का निदेर्शन तथा कवि और कविता शृंखला का निमार्ण एवं निदर्ेशन भी किया। साठसे अध्िक वृत्तचित्रा भी बनाए।अनेक वृत्तचित्रा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पिफल्म समारोहों में प्रदश्िार्त हुए। पिफल्मकायर् के साथ - साथ जीवन, समाज और कलाओं से संबंध्ित विषयों पर जनसत्ता में नियमित रूप से स्तम्भ लेखन किया। ध्मर्वीर भारती ;1926 - 1997द्ध बहुचचिर्त लेखक एवं संपादक। कइर् पत्रिाकाओं से जुड़े पर अंत में ‘ध्मर्युग’ के संपादक के रूप में गंभीर पत्राकारिता का एक मानक निधर्रित किया। बहुमुखी प्रतिभा के ध्नी ध्मर्वीर भारती की लेखनी ने कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध्, आलोचना, अनुवाद, रिपोतार्ज आदि अनेक विधओं द्वारा ¯हदी साहित्य को समृ( किया। उनकी प्रसि( रचनाएँ हैं: साँस की कलम से, मेरी वाणी गैरिक वसना, कनुपि्रया, सात गीत - वषर्, ठंडा लोहा, सपना अभी भी, सूरज का सातवाँ घोड़ा, बंद गली का आख्िारी मकान, पश्यंती, कहनी अनकहनी, शब्िदता, अंध युग, मानव - मूल्य और साहित्य तथा गुनाहों का देवता।ध्मर्वीर भारती पप्रश्री की उपाध्ि के साथ ही व्यास सम्मान एवं अन्य कइर् राष्ट्रीय पुरस्कारों से अलंवृफत हुए। एस. के. पो‘ेकाट ;1913 - 1982द्ध मलयालम के प्रसि( कथाकार एस. के. पो‘ेकाट का पूरा नाम शंकरन वुफ‘ी पो‘ेकाट था। उनका जन्म केरल के कोष्िाकोड ;कालीकटद्ध में हुआ था। इंटरमीडिएट की पढ़ाइर् पूरी करके वे साहित्य - सृजन में लग गए। लेखक परिचयध्51 पो‘ेकाट की कहानियों में किसान और मशदूरों की आह और वेदना का सजीव चित्राण हुआ है। जाति, ध्मर् और संप्रदाय से परे मानवीय सौहादर् को उभारने में पो‘ेकाट को पूरी सपफलता मिली है। उनकी कहानियों से विश्वबंध्ुत्व और भाइर्चारे का संदेश मिलता है। कथाकार पो‘ेकाट को साहित्य अकादमी तथा ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी कहानियों का विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उनकी प्रमुख वृफतियाँ हैं: प्रेम श्िाशु, विषकन्या और मूडुपडम्। मध्ुकर उपाध्याय ;1956द्ध मध्ुकर उपाध्याय ने अपनी प्रारंभ्िाक श्िाक्षा अयोध्या से प्राप्त की। अवध् विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक होने के बाद भारतीय जनसंचार संस्थान, नयी दिल्ली से उन्होंनेपत्राकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया। इतिहास और खासतौर पर बि्रतानी शासनकाल में उनकी दिलचस्पी ने उन्हेंमहात्मा गांध्ी के चचिर्त दांडी माचर् की पुनरावृिा के लिए प्रेरित किया और उन्होंने 400 किलोमीटर से अध्िक की पैदल यात्रा की। आशादी की पचासवीं वषर्गाँठ पर उनकी पुस्तक पचास दिन, पचास साल पहले खासी चचिर्त रही। उनकी एक अन्य पुस्तक किस्सा पांडे सीताराम सूबेदार को भी काप़्ाफी सराहा गया। ¯हदी और अंगे्रशी में समान अध्िकार से लिखने वाले मध्ुकर उपाध्याय की तीन पुस्तवेंफ अंग्रेशी और बारह ¯हदी में प्रकाश्िात हो चुकी हैं। पत्राकारिता और साहित्य के साथ - साथ उनकी गहरी दिलचस्पी काटूर्न विध और रेखांकन में भी है। मध्ुकर उपाध्याय आजकल दैनिक ‘लोकमत समाचार’ के प्रधन संपादक हैं।

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