गमिर्यों की छुटिðयों में पहेली तथा बूझो अपने दादा - दादी के गाँव गए। रात्रिा का भोजन करने के पश्चात् वे घर की छत पर गए। उस दिन आकाश स्वच्छ था, बादल नहीं थे। वे आकाश में अत्यिाक संख्या में चमकीले तारे देखकर आश्चयर्चकित हो उठे। अपने शहर में उन्होंने ऐसा सुन्दर दृश्य कभी नहीं देखा था ;चित्रा 17.1द्ध। सकता है जहाँ वातावरण स्वच्छ हो तथा चमकीला प्रकाश न हो। किसी स्वच्छ अंधेरी रात्रिा में आकाश की ओर दृष्िट डालिए। आपको समस्त आकाश में बिंदुओं के समान असंख्य तारे दिखाइर् देंगे जिनमें वुफछ बहुत चमकीले और वुफछ अपेक्षावृफत मंद होंगे। इनका सावधानीपूवर्क प्रेक्षण कीजिए। क्या ये सभी टिमटिमाते प्रतीत होते हैं? क्या चित्रा 17.1: रात्रिा का आकाश। पहेली यह जानना चाहती थी कि बड़े शहरों के आकाश से गाँव का आकाश इतना भ्िान्न क्यों है। उसके दादा जी ने यह स्पष्ट किया कि चमकीले प्रकाश, धुएँ तथा धूल के कारण, बड़े शहरों में तो स्वच्छ आकाश विरले ही दिखाइर् देते हैं। रात्रिा केआकाश का अवलोकन करना चित्ताकषर्क वहीं हो आपको तारे जैसा कोइर् ऐसा पिंड दिखाइर् देता है जो टिमटिमा न रहा हो? इनमें जो पिंड टिमटिमाते नहीं दिखते, वे ग्रह हैं। रात्रिा के आकाश में सबसे अिाक प्रदीप्त पिंड चन्द्रमा है। तारे, ग्रह, चन्द्रमा तथा आकाश के बहुत से अन्य पिंड खगोलीय पिंड कहलाते हैं। क्या सभी आकाशीय पिंड समान होते हैं? आइए पता लगाएँ। 17.1 चन्द्रमा ियाकलाप 17.1 रात्रिा में चन्द्रमा का प्रतिदिन प्रेक्षण कीजिए। यदि सम्भव हो तो एक पूण्िार्मा से दूसरी पूण्िार्मा तक अपनी नोटबुक में हर रात्रिा को चन्द्रमा की रूपरेखा खींचिए तथा पूण्िार्मा के दिन से व्यतीत दिनों की संख्या को भी नोट कीजिए। प्रतिदिन यह भी नोट कीजिए कि आकाश के किस भाग ;पूवर् अथवा पश्िचमद्ध में चन्द्रमा दिखाइर् दिया है। क्या चन्द्रमा की आवृफति में प्रतिदिन परिवतर्न होता है? क्या ऐसे भी दिन है जब चन्द्रमा की आवृफति पूणर्तः गोल प्रतीत होती है? क्या ऐसे भी दिन हैं जब स्वच्छ आकाश होने पर भी चन्द्रमा को नहीं देखा जा सकता? उस दिन को जब चन्द्रमा की पूणर् चिका दिखाइर् देती है, पूण्िार्मा कहते हैं। इसके पश्चात् प्रत्येक रात्रिा को चन्द्रमा का चमकीला भाग घटता चला जाता है। पंद्रहवें दिन चन्द्रमा दिखाइर् नहीं पड़ता। इस दिन को अमावस्या कहते हैं। अगले दिन, चन्द्रमा का एक छोटा भाग आकाश में दिखाइर् देता है। इसे बालचन्द्र कहते हैं। इसके पश्चात पिफर प्रतिदिन चन्द्रमा बड़ा होता जाता है। पंद्रहवें दिन एक बार पिफर से हम चन्द्रमा का पूरा दृश्य देखते हैं। पूरे माह तक दिखाइर् देने वाली चन्द्रमा की प्रदीप्त भाग की विभ्िान्न आवृफतियों को चन्द्रमा की कलाएँ कहते हैं ;चित्रा 17.2द्ध। एक पूण्िार्मा से दूसरी पूण्िार्मा तक की अविा 29 दिन से वुफछ अिाक होती है। बहुत से वैफलेण्डरों में इस अविा को एक माह कहते हैं। चन्द्रमा अपनी आवृफति में प्रतिदिन परिवतर्न क्यों करता है? चित्रा 17.2: चन्द्रमा की कलाएँ। आइए यह जानने का प्रयास करें कि चन्द्रमा की कलाएँ क्यों दिखाइर् देती हैं। अध्याय 16 में आपने यह पढ़ा है कि चन्द्रमा, सूयर् तथा अन्य तारों की भांति अपना प्रकाश उत्पन्न नहीं करता। हमें चन्द्रमा इसलिए दिखाइर् देता है क्योंकि यह अपने पर पड़ने वाले सूयर् के प्रकाश को हमारी ओर परावतिर्त कर देता है ;चित्रा 17.3द्ध। इसीलिए, हम चन्द्रमा के उसी भाग को देख पाते हैं जिस भाग से सूयर् का परावतिर्त प्रकाश हम तक पहुँचता है। ियाकलाप 17.2 एक बड़ी गेंद अथवा घड़ा लीजिए। इसके आधे भाग को सपफेद तथा आधे भाग को काले पेंट से पोतिए। अपने दो मित्रों के साथ खेल के मैदान में जाइए। मैदान में लगभग 2 उ त्रिाज्या का वृत्त खींचिए।चित्रा 17.4 में दशार्ए अनुसार इस वृत्त को आठ बराबर भागों में बाँटिए।वृत्त के केन्द्र पर खड़े होइए। अपने मित्रा से गेंदको पकड़कर वृत्त के विभ्िान्न बिन्दुओं पर खड़े होने को कहिए। उससे कहिए कि वह घड़े के सपफेद भाग को सदैव सूयर् के सामने रखे। यदि आप इस ियाकलाप को प्रातःकाल के समय कर चित्रा 17.3: सूयर् के परातवतिर्त प्रकाश के कारण चन्द्रमा दिखाइर् देता है। रहे हैं तो गेंद के सपफेद भाग को पूवर् दिशा में रखना चाहिए। यदि आप इस ियाकलाप को सायं काल के समय कर रहे है तो गेंद के सपफेद भाग को पश्िचम दिशा में रखना चाहिए। प्रत्येक प्रकरण में सपफेद तथा काले भागों को विभाजित करनेवाली रेखा ऊध्वार्धर होनी चाहिए।वृत्त के केन्द्र पर खड़े रहकर गेंद के सपफेद दृश्य भाग का प्रेक्षण कीजिए तथा इसकी आवृफति अपनी नोटबुक में खींचिए। इन आवृफतियों की तुलना चित्रा 17.5 में दशार्यी गइर् चन्द्रमा की कलाओं से कीजिए। चित्रा 17.4: अपनी कक्षा में विभ्िान्न स्िथतियों पर चन्द्रमा भ्िान्न - भ्िान्न प्रतीत होता है। चित्रा 17.5: अपनी कक्षा में चन्द्रमा की स्िथतियाँ एवं संबंध्ित कलाएँ। कीजिए। पूणर् चन्द्रमा देखने के लिए आप आकाश के किस भाग में देखेंगे? बालचन्द्र के पश्चात पृथ्वी से देखने पर प्रतिदिन चन्द्रमा के प्रदीप्त भाग में वृि होती जाती है। पूण्िार्मा के पश्चात पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा का सूयर् द्वारा प्रदीप्त भाग प्रतिदिन आकार में घटता जाता है। ियाकलाप 17.3 क्या अब आप पूण्िार्मा तथा अमावस्या के दिन सूयर्, चन्द्रमा तथा पृथ्वी की सापेक्ष स्िथतियों का अनुमान लगा सकते हैं? इनकी स्िथतियों को अपनी नोटबुक में आरेख्िात सभी तारों का रंग एक जैसा है? वास्तव में, तारे अपना प्रकाश उत्सजिर्त करते हैं। सूयर् भी एक तारा है। अन्य तारों की तुलना में सूयर् इतना अिाक बड़ा क्यों दिखाइर् देता है? आपके पास रखी पफुटबाल अथवा 100 उ दूरी पर रखी पफुटबाल में से कौन बड़ी प्रतीत होती है? तारे सूयर् की तुलना में लाखों गुना अिाक दूर हैं। इसीलिए तारे हमें बिन्दु जैसे प्रतीत होते हैं। सूयर् पृथ्वी से लगभग 150,000,000 किलोमीटर ;15 करोड़ किलोमीटरद्ध दूर है। सूयर् के पश्चात दूसरा निकटतम तारा ऐल्पफा सेन्टाॅरी है। इसकी दूरी पृथ्वी से लगभग 40,000,000,000,000 ाउ है। क्या आप इस दूरी को आसानी से पढ़ सकते हैं? वुफछ तारे तो इससे भी कहीं अिाक दूर हैं। इतनी अिाक दूरियों को लम्बाइर् के अन्य मात्राक प्रकाश वषर् में व्यक्त करते हैं। यह प्रकाश द्वारा एक वषर् में चली गइर् दूरी है। याद कीजिए, प्रकाश की चाल 300,000 किलोमीटर प्रति सेवंफड है। इस प्रकार सूयर् की पृथ्वी से दूरी लगभग 8 प्रकाश मिनट है। ऐल्पफा सेन्टाॅरी लगभग 4.3 प्रकाश वषर् दूर है। यदि तारों का प्रकाश हमारे पास तक पहुँचने में वषोर्ं का समय लेता है तो तारों को देखते समय क्या हम अपने अतीत को देख रहे होते हैं? वास्तव में, दिन के समय भी आकाश में तारे होते हैं। तथापि, उस समय सूयर् के तीव्र प्रकाश के कारण वे हमें दिखाइर् नहीं देते। वुफछ प्रमुख तारों अथवा तारों के समूह का आकाश में लगभग दो घंटे अथवा अिाक समय तक प्रेक्षण कीजिए। आपको क्या पता चलता है? क्या आप आकाश में तारों की स्िथतियों में कोइर् परिवतर्न होता हुआ पाते हैं? आप यह पाएँगे कि तारे पूवर् से पश्िचम की ओर गति करते प्रतीत होते हैं। कोइर् तारा जो सूयार्स्त होते ही पूवर् में उदय होता है सामान्यतः सूयोर्दय से पहले ही पश्िचम में अस्त हो जाता है। तारे पूवर् से पश्िचम की ओर गति करते क्यों प्रतीत होते हैं? आइए पता लगाएँ। ियाकलाप 17.4 किसी बड़े कमरे के बीच में खड़े होकर घूणर्न कीजिए। कमरे में रखी वस्तुएँ किस दिशा में गति करती प्रतीत होती हैं? क्या आप इन वस्तुओं को अपनी गति के विपरीत दिशा में गतिमान पाते हैं? पहेली याद करती है, जब वह किसी चलती रेलगाड़ी में होती है तो निकट के वृक्ष तथा भवन पीछे की दिशा में जाते प्रतीत होते हैं। यदि हमें तारे पूवर् से पश्िचम की ओर गमन करते प्रतीत होते हैं तो क्या इसका अथर् है कि पृथ्वी पश्िचम से पूवर् दिशा में घूणर्न करती है? अब मैं समझा कि हमें सूयर् पूवर् में उदय होता तथा पश्िचम में अस्त होता क्यों प्रतीत होता है। ऐसा पृथ्वी के अपने अक्ष पर पश्िचम से पूवर् दिशा में घूणर्न करने के कारण होता है। ियाकलाप 17.5 वास्तव में ध्रुव तारा एक ऐसा ही तारा है जो पृथ्वी के अक्ष की दिशा में स्िथत है। यह गति करता प्रतीत नहीं होता ;चित्रा 17.10द्ध। ध््रुव तारा चित्रा 17.10: ध्रुव तारा पृथ्वी के घूणर्न अक्ष के निकट स्िथत है। 17.3 तारामण्डल वुफछ समय तक आकाश का प्रेक्षण कीजिए। क्या वुफछ तारे चित्रा 17.11 में दशार्ए अनुसार आवृफतियों के समूह बनाए हुए हैं। पहचाने जाने योग्य आवृफतियों वाले तारों के समूह को तारामण्डल कहते हैं। प्राचीन काल में मनुष्यों ने आकाश में तारों को पहचानने के लिए तारामण्डलों की अभ्िाकल्पना की। तारामण्डलों की आवृफतियाँ उन व्यक्ितयों की सुपरिचित वस्तुओं के सदृश थीं। रात्रिा के आकाश में वुफछ तारामण्डलों की आप आसानी से पहचान कर सकते हैं। इसके लिए आपको यह जानना होगा कि कोइर् विश्िाष्ट तारामण्डल वैफसा दिखाइर् देता है और रात्रिा के आकाश में उसे कहाँ देखना होगा। ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध ;ंद्ध ग्रेट बियर ;इद्ध ओराॅयन ;बद्ध वैफसियोपिया ;कद्ध लिओ मेजर चित्रा 17.11: रात्रिा के आकाश में वुफछ तारामण्डल। सवर्विख्यात तारामण्डलों में से एक विख्यात तारामण्डल असार्मेजर ख्;चित्रा 17.11;ंद्ध, है जिसे आप गमिर्यों में रात्रिा के प्रथम प्रहर में देख सकते हैं। इस तारामण्डल को ‘बिग डिपर,’ ‘ग्रेट बीयर’ अथवा सप्तष्िार् भी कहते हैं। इस तारामण्डल में सातसुस्पष्ट तारे होते हैं। यह बड़ी कलछी अथवा प्रश्नचिÉ जैसा प्रतीत होता है। इस कलछी की हत्थी में तीन तथा कटोरी में चार तारे होते हैं ;चित्रा 17.12द्ध। ियाकलाप 17.6 वुफछ घंटों तक इस तारामण्डल का पे्रक्षण कीजिए। क्या आप इसकी आवृफति में कोइर् परिवतर्न देखते हैं? क्या आप इसकी स्िथति में कोइर् परिवतर्न देखते हैं? आप यह प्रेक्षण करेंगे कि इस तारामण्डल की आवृफति समान रहती है। आप यह भी पाएँगे कि यह तारामण्डल पूवर् से पश्िचम की ओर गति करता प्रतीत होता है। ियाकलाप 17.7 इस ियाकलाप को गमिर्यों में रात्रिा के समय लगभग 9.00 बजे उस दिन कीजिए जब आकाशमें चन्द्रमा न हो। आकाश के उत्तरी भाग का प्रेक्षण करके सप्तष्िार् को पहचानिए। इस कायर् में आप अपने परिवार के बड़ों की सहायता ले सकते हैं। ियाकलाप 17.8 वास्तव में सभी तारे ध्रुव तारे की परिक्रमा करते प्रतीत होते हैं। ध्यान दीजिए, ध्रुव तारा दक्ष्िाणी गोलाधर् से नहींदिखाइर् देता। सप्तष्िार् जैसे उत्तरी गोलाधर् के वुफछ तारामण्डल भी दक्ष्िाणी गोलाधर् के वुफछ स्थानों से नहीं दिखाइर् देते। ओराॅयन एक अन्य विख्यात तारामण्डल है जिसे हम सदिर्यों में मध्यरात्रिा में देख सकते हैं। यह आकाश में सवार्िाक भव्य तारामण्डलों में गिना जाता है। इसमें भी सात अथवा आठ चमकीले तारे हैं ;चित्रा 17.11 ;इद्ध। ओराॅयन को श्िाकारी भी कहते हैं। इसके तीन मध्य के तारे श्िाकारी की बेल्ट ;पेटीद्ध को निरूपित करते हैं। चार चमकीले तारे चतुभुर्ज के रूप में व्यवस्िथत दिखाइर् देते हैं। आकाश में सबसे अिाक चमकीला तारा, सीरियस ;लुब्धकद्ध, ओराॅयन के निकट दिखाइर् देता है। सीरियस को ढूँढ़ने के लिए ओराॅयन के मध्य के तीन तारों से गुजरने वाली रेखा की कल्पना कीजिए तथा इसके अनुदिश पूवर् दिशा की ओर देख्िाए। इस रेखा के अनुदिश आपको एक अत्यंत चमकीला तारा दिखाइर् देगा। यह सीरियस है ;चित्रा 17.15द्ध। सीरियस चित्रा 17.15: सीरियस की स्िथति ज्ञात करना। उत्तरी आकाश में एक अन्य प्रमुख तारामण्डल वैफसियोपिया है। यह सदिर्यों में रात्रिा के प्रथम प्रहर में दिखाइर् देता है। यह अग्रेजी के अक्षर ॅ अथवा ड के बिगड़े ;विवृफतद्ध रूप जैसा दिखाइर् देता है चित्रा 17.11;बद्ध। क्या आप जानते हैं? किसी तारामण्डल में केवल 5 - 10 तारे ही नहीं होते। इसमें बहुत सारे तारे होते हैं ;चित्रा 17.16द्ध। तथापि, हम अपनी नंगी आँखों से किसी तारामण्डल के केवल चमकीले तारों को ही देख पाते हैं। जिन तारों से मिलकर कोइर् तारामण्डल बनता है, वे सब हमसे समान दूरी पर नहीं हैं। वे आकाश में केवल एक ही दृश्य रेखा में हैं। 17.4 सौर परिवार सूयर् तथा इसकी परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंडों से मिलकर सौर परिवार बना है। इस परिवार में बहुत से पिंड हैं, जैसेμग्रह, धूमकेतु, क्षुद्रग्रह तथा उल्काएँ। सूयर् तथा इन पिंडों के बीच गुरुत्वाकषर्ण बल के कारण ये पिंड सूयर् की परिक्रमा करते रहते हैं। जैसा आप जानते ही हैं, पृथ्वी भी सूयर् की परिक्रमा करती है। यह सौर परिवार की एक सदस्य है। यह एक ग्रह है। इसके अतिरिक्त सात अन्य ग्रह हैं जो सूयर् की परिक्रमा करते रहते है। सूयर् से दूरी के अनुसार इनके क्रम इस प्रकार हैः बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेप्ट्यून। चित्रा 17.17: सौर परिवार ;पैमाने के अनुसार नहीं हैद्ध। चित्रा 17.17 सौर परिवार का योजनावत दृश्य दशार्ता है। क्या आप जानते हैं? सन् 2006 तक सौर परिवार में नौ ग्रह थे। प्लूटो सौर परिवार का सूयर् से दूरतम ग्रह था। सन् 2006 में अन्तरार्ष्ट्रीय खगोलीय संघ ने ग्रह की नयी परिभाषा को अपनाया जिसके अनुसार प्लूटो, ग्रहों की श्रेणी में नहीं आता। अब यह सौर परिवार का ग्रह नहीं है। आइए सौर परिवार के वुफछ सदस्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। सूयर् सूयर् हमसे निकटतम तारा है। यह निरंतर विशाल मात्रा मेंऊष्मा तथा प्रकाश उत्सजिर्त कर रहा है। पृथ्वी की लगभग समस्त ऊजार् का स्रोत सूयर् है। वास्तव में, सभीग्रहों की ऊष्मा तथा प्रकाश की ऊजार् का प्रमुख स्रोत सूयर् ही है। ग्रह ग्रह तारों की भांति प्रतीत होते हैं परन्तु ग्रहों में अपनाप्रकाश नहीं होता। वे केवल अपने ऊपर पड़ने वाले सूयर् के प्रकाश को परावतिर्त करते हैं। क्या आप तारों तथा ग्रहों में भेद कर सकते हैं? ग्रहों तथा तारों में अन्तर करने की सरलतम वििा यह है कि तारे टिमटिमाते हैं जबकि ग्रह ऐसा नहीं करते। तारों के सापेक्ष सभी ग्रहों की स्िथति भी बदलती रहती है। प्रत्येक ग्रह एक निश्िचत पथ पर सूयर् की परिक्रमा करता है। इस पथ को कक्षा कहते हैं। किसी भी ग्रह द्वारा सूयर् की एक परिक्रमा पूरी करने में लगे समय को उस ग्रह का परिक्रमण काल कहते हैं। ग्रहों की सूयर् से दूरी बढ़ने पर उनके परिक्रमण काल में भी वृि हो जाती है। ियाकलाप 17.9 सूयर् की परिक्रमा करने के साथ - साथ ग्रह लट्टू की भांति अपने अक्ष पर घूणर्न गति भी करते हैं। किसी ग्रह द्वारा एक घूणर्न पूरा करने में लगने वाले समय को उसका घूणर्न काल कहते हैं। चित्रा 17.19: ग्रह लट्टू की भांति अपने अक्ष पर घूणर्न करता है। वुफछ ग्रहों के ज्ञात उपग्रह ;चन्द्रमाद्ध हैं जो उनकी परिक्रमा करते हैं। किसी खगोलीय पिंड की परिक्रमा करने वाले अन्य खगोलीय पिंड को पहले खगोलीय पिंड का उपग्रह कहते हैं। पृथ्वी को सूयर् का उपग्रह कहा जा सकता है, यद्यपि, सामान्यतः हम इसे सूयर् का ग्रह कहते हैं। ग्रहों की परिक्रमा करने वाले पिंडों के लिए ही उपग्रह शब्द का उपयोग करते हैं। चन्द्रमा पृथ्वी का उपग्रह है। बहुत से मानव - निमिर्त उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। इन्हें वृफत्रिाम उपग्रह कहते हैं। बुध बुध ग्रह सूयर् से निकटतम ग्रह है। यह हमारे सौर परिवार का लघुतम ग्रह है। क्योंकि बुध सूयर् के अत्यिाक निकट है, अतः अिाकांश समय तक सूयर् की चकाचैंध में छिपा रहने के कारण इसका प्रेक्षण करना अत्यंत कठिन है। तथापि, सूयोर्दय से तुरन्त पूवर् अथवा सूयार्स्त के तुरंत पश्चात इसे क्ष्िातिज पर देेखा जा सकता है। अतः यह वहीं दिखाइर् देता है जहाँ वृक्षों अथवा भवनों द्वारा क्ष्िातिज को देखने में कोइर् बाधा नहीं आती। बुध का अपना कोइर् उपग्रह नहीं है। शुक्र ग्रहों में शुक्र पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी है। रात्रिा के आकाश में यह सबसे अिाक चमकीला ग्रह है। कभी - कभी शुक्र पूवीर् आकाश में सूयोर्दय से पूवर् दिखाइर् देता है। कभी - कभी सूयार्स्त के तुरन्त पश्चात यह पश्िचमी आकाश में दिखाइर् देता है। इसीलिए इसे प्रायः प्रभात तारा ;प्रातःताराद्ध अथवा सांध्यतारा कहते हैं, यद्यपि यह तारा नहीं है। रात्रिा के आकाश में इसे ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए। शुक्र का अपना कोइर् उपग्रह ;चन्द्रमाद्ध नहीं है। इसकी अपने अक्ष पर घूणर्न गति वुफछ असाधारण है। यह पूवर् से पश्िचम की ओर घूणर्न करता है जबकि पृथ्वी पश्िचम से पूवर् की ओर गति करती है। ियाकलाप 17.10 यदि आपको अवसर मिले तो दूरबीन द्वारा शुक्र को देखने का प्रयास कीजिए। आप चन्द्रमा की भांति शुक्र की कलाओं का प्रेक्षण करेंगे ;चित्रा 17.20द्ध। चित्रा 17.20: शुक्र की कलाएँ। पृथ्वी पृथ्वी ही सौर परिवार का एकमात्रा ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन का अस्ितत्व ज्ञात है। पृथ्वी पर जीवन विद्यमान होने तथा उसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए वुफछ विश्िाष्ट पयार्वरणीय अवस्थाएँ उत्तरदायी हैं। इनमें पृथ्वी की सूयर् से उचित दूरी होना भी सम्िमलित है ताकि पृथ्वी पर सही ताप परिसर, जल की उपस्िथति, उपयुक्त वायुमंडल तथा ओजोन का आवरण बना रह सके। अन्तरिक्ष से देखने पर पृथ्वी के पृष्ठ पर जल तथा भूमि से प्रकाश के परावतिर्त होने के कारण वह नीली - हरी प्रतीत होती है। पृृथ्वी का घूणर्न अक्ष इसकी कक्षा के तल के लम्बवत नहीं है। इसका अपने अक्ष पर झुकाव पृथ्वी पर)तु - परिवतर्न के लिए उत्तरदायी है। पृथ्वी का केवल एक ही उपग्रह ;चन्द्रमाद्ध है। मंगल अगला ग्रह जो पृथ्वी की कक्षा के बाहर का पहला ग्रह है, वह मंगल है। यह हलका रक्ताभ प्रतीत होता है इसीलिए इस ग्रह को लाल ग्रह भी कहते हैं। मंगल के चित्रा 17.22: बृहस्पति और उसके चार बड़े उपग्रह। बृहस्पति के बहुत से प्रावृफतिक उपग्रह हैं। इसके चारों ओर धुँधले वलय भी हैं। आकाश में अत्यिाक चमकीला प्रतीत होने के कारण आप इसे आसानी से शनिपहचान सकते हैं। यदि आप इसका प्रेक्षण दूरबीन की बृहस्पति के परे शनि है जो रंग में पीला सा प्रतीत होतासहायता से करें तो आप इसके चार बड़े चन्द्रमा भी देख है। इस ग्रह के रमणीय वलय इसे सौर परिवार मेंसकते हैं ;चित्रा 17.22द्ध। चित्रा 17.23: शनि जल से कम सघन है। अद्वितीय बनाते हैं। यह वलय नंगी आँखों से दिखाइर् नहीं देते। आप छोटे दूरदशर्क द्वारा इनका प्रेक्षण कर सकते हैं। शनि के भी बहुत से प्रावृफतिक उपग्रह हैं। शनि के बारे में एक रोचक बात यह है कि सभी ग्रहों में यह सबसे कम सघन है। इसका घनत्व जल के घनत्व से भी कम है। यूरेनस तथा नेप्ट्यून ये सौर परिवार के बाह्यतम ग्रह हैं। इन्हें केवल बड़े दूरदशर्कों की सहायता से ही देखा जा सकता है। शुक्र की भांति यूरेनस भी पूवर् से पश्िचम दिशा में घूणर्न करता है। इसकी विलक्षण विशेषता इसका अत्यिाक झुका घूणर्न अक्ष है ;चित्रा 17.24द्ध। इसके परिणामस्वरूप यह कक्षीय गति करते समय अपने पृष्ठ पर लुढ़कता सा प्रतीत होता है। सौर परिवार के प्रथम चार ग्रह - बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल अन्य चार ग्रहों की तुलना में सूयर् के अत्यन्त निकट हैं। इन्हें आन्तरिक ग्रह कहते हैं। आन्तरिक ग्रहों के बहुत कम चन्द्रमा होते हैं। वे ग्रह जो मंगल की कक्षा से बाहर हैं, जैसेμ बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेप्ट्यून, आन्तरिक ग्रहों की तुलना में कहीं अिाक दूर हैं। इन्हें बाह्य ग्रह कहते हैं। इनके चारों ओर वलय - निकाय हैं। बाह्य ग्रहों के अिाक संख्या में चन्द्रमा होते हैं। 17.5 सौर परिवार के वुफछ अन्य सदस्य ग्रहों के अतिरिक्त सूयर् की परिक्रमा करने वाले वुफछ अन्य पिंड भी हैं। ये भी सौर परिवार के सदस्य हैं। आइए, इनमें से वुफछ के विषय में जानकारी प्राप्त करें। क्षुद्रग्रह मंगल तथा बृहस्पति की कक्षाओं के बीच कापफी बड़ा अंतराल है ;चित्रा 17.25द्ध। इस अन्तराल को बहुत सारे ऐसे छोटे - छोटे पिंडों ने घेर रखा है जो सूयर् की परिक्रमा करते हैं। इन्हें क्षुद्रग्रह कहते हैं। क्षुद्रग्रहों को केवल बड़े दूरदशर्कों द्वारा ही देखा जा सकता है। चित्रा 17.25: क्षुद्रग्रह पटी। ðधूमकेतु धूमकेतु भी हमारे सौर परिवार के सदस्य हैं। ये अत्यन्त परवलीय कक्षाओं में सूयर् की परिक्रमा करते हैं। परन्तु, इनका सूयर् का परिक्रमण काल सामान्यतः कापफी अिाक होता है। सामान्यतः धूमकेतु चमकीले सिर तथा लम्बी पूँछ वाले होते हैं। जैसे - जैसे कोइर् धूमकेतु सूयर् के समीप आता जाता है इसकी पूँछ आकार में बढ़ती जाती है। किसी धूमकेतु की पूँछ सदैव ही सूयर् से परे होती है ;चित्रा 17.26द्ध। ऐसे बहुत से धूमकेतु ज्ञात हैं जो समय - समय पर एक निश्िचत काल - अंतराल पर दृष्िटगोचर होते हैं। हैलेका धूमकेतु एक ऐसा ही धूूमकेतु है जो लगभग हर 76 वषर् के अंतराल में दिखाइर् देता है। इसे सन् 1986 में पिछली बार देखा गया था। क्या आप बता सकते हैं कि अगली बार हैलेका धूमकेतु कब दिखाइर् देगा? की एक चमकीली धारी - सी देख सकते हैं ;चित्रा 1727द्ध। इसे शूटिंग स्टार - सा टूटता तारा कहते हैं यद्यपि यह तारा नहीं है। इन्हें उल्का कहते हैं। उल्का सामान्यतः छोटे पिंड होते हैं जो यदा - कदा पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश कर जाते हैं। उस समय इनकी अति उच्च चाल होती है। वायुमण्डलीय घषर्ण के कारण ये तप्त होकर जल उठते हैं और चमक के साथ शीघ्र ही वाष्िपत हो जाते हैं। यही कारण है कि प्रकाश की चमकीली धारी अति अल्प समय के लिए ही दृष्िटगोचर होती है। वुफछ उल्का आकार में इतनी बड़ी होती हैं कि पूणर्तः वाष्िपत होने से पूवर् ही वे पृथ्वी पर पहँुच जाती हैं। वह पिंड जो पृथ्वी पर पहुँचता है उसे उल्का पिंड कहते हैं। उल्का पिंड वैज्ञानिकों को उस पदाथर् की प्रवृफति की खोज करने में सहायता करते हैं जिससे सौर परिवार बना है। धूमकेतुओं के विषय में अंधविश्वासवुफछ व्यक्ित ऐसा सोचते हैं कि धूमकेतु घोर विपिायों, जैसेμ यु(, महामारी, बाढ़ आदि के दूत ;संदेशवाहकद्ध हैं। परन्तु ये सब मिथक ;कल्िपत मान्यताएँद्ध तथा अंधविश्वास हैं। धूमकेतु का दृष्िटगोचर होना एक प्रावृफतिक परिघटना है। इनसे भयभीत होने का कोइर् औचित्य नहीं है। उल्काएँ तथा उल्कापिंड रात्रिा के समय जब आकाश सापफ हो तथा चन्द्रमा भी न दिखाइर् दे रहा हो तो आप कभी - कभी आकाश में प्रकाश उल्कावृष्िट जब पृथ्वी किसी धूमकेतु की पूँछ को पार करती है तो उल्काओं के झुँड दिखाइर् देते हैं। इन्हें उल्कावृष्िट कहते हैं। वुफछ उल्कावृष्िट नियमित समय अंतराल पर हर वषर् होती हैं। आप किसी वैज्ञानिक पत्रिाका या इन्टरनैट से उनके दिखाइर् देने के समय का पता लगा सकते हैं। वृफत्रिाम उपग्रह आपने यह सुना होगा कि ऐसे बहुत से वृफत्रिाम उपग्रह हैं जो पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। आप यह जानना चाहेंगे कि वृफत्रिाम उपग्रह प्रावृफतिक उपग्रहों से किस प्रकार भ्िान्न हैं। वृफत्रिाम उपग्रह मानव - निमिर्त हैं। इनका प्रमोचन पृथ्वी से किया गया है। ये पृथ्वी के प्रावृफतिक उपग्रह अथार्त् चन्द्रमा की तुलना में कहीं अिाक निकट रहकर पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। भारत ने बहुत से वृफत्रिाम उपग्रहों का निमार्ण तथा प्रमोचन किया है। आयर्भटð भारत का प्रथम उपग्रह था। वुफछ अन्य भारतीय उपग्रह इन्सैट ;प्छै।ज्द्धए आइर्.आरएस.;प्त्ैद्धए कल्पना - 1, म्क्न्ै।ज्, आदि हैं ;चित्रा 17.28द्ध। वृफत्रिाम उपग्रहों के बहुत से व्यावहारिक अनुप्रयोग हैं। इनका उपयोग मौसम की भविष्यवाणी, रेडियो तथा टेलीविजन संकेतों के प्रेषण में किया जाता है। इनका उपयोग दूरसंचार तथा सुदूर संवेदन के लिए भी होता है। प्ैत्व् चित्रा 17.28: वुफछ भारतीय उपग्रह। आपने क्या सीखाऽ चन्द्रमा की कलाओं की घटना का कारण यह है कि हम चन्द्रमा का केवल वह भाग ही देख सकते हैं जो सूयर् के प्रकाश को हमारी ओर परावतिर्त करता है। ऽ तारे अपना प्रकाश उत्सजिर्त करने वाले खगोलीय पिंड हैं। हमारा सूयर् भी एक तारा है। ऽ तारों की दूरियों को प्रकाश वषर् में व्यक्त किया जाता है। ऽ तारे पूवर् से पश्िचम की ओर गति करते प्रतीत होते हैं। ऽ पृथ्वी से देखने पर ध्रुव तारा स्िथर प्रतीत होता है क्योंकि यह पृथ्वी की घूणर्न अक्ष की दिशा के निकट स्िथत है। ऽ तारामण्डल तारों के ऐसे समूह हैं जो पहचानने योग्य आवृफतियाँ बनाते प्रतीत होते हैं। ऽ सौर परिवार आठ ग्रहों तथा क्षुद्रग्रहों, धूमकेतुओं एवं उल्काओं के झुँड से मिलकर बना है। ऽ किसी ऐसे पिंड को जो किसी अन्य पिंड की परिक्रमा करता है, ‘उपग्रह’ कहते हैं। ऽ चन्द्रमा पृथ्वी का प्रावृफतिक उपग्रह है। ;वुफछ ग्रहों के प्राकृतिक उपग्रह होते हैं।द्ध ऽ शुक्र ग्रह रात्रिा के आकाश में दिखाइर् देने वाला सबसे चमकीला ग्रह है। ऽ सौर परिवार का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति है। ऽ वृफत्रिाम उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। ये चन्द्रमा की तुलना में पृथ्वी के बहुत निकट हैं। ऽ वृफत्रिाम उपग्रहों का उपयोग मौसम की भविष्यवाणी, दूरसंचार तथा सुदूर संवेदन में किया जाता है। अभ्यास प्रश्न 1 - 3 में सही उत्तर का चयन कीजिएμ 1.निम्नलिख्िात में से कौन सौर परिवार का सदस्य नहीं है? ;कद्ध क्षुद्रग्रह ;खद्ध उपग्रह ;गद्ध तारामण्डल ;घद्ध ध्ूमकेतु 2.निम्नलिख्िात में से कौन सूयर् का ग्रह नहीं है? ;कद्ध सीरियस ;खद्ध बुध ;गद्ध शनि ;घद्ध पृथ्वी 3.चन्द्रमा की कलाओं के घटने का कारण यह है कि ;कद्ध हम चन्द्रमा का केवल वह भाग ही देख सकते हैं जो हमारी ओर प्रकाश को परावतिर्त करता है। ;खद्ध हमारी चन्द्रमा से दूरी परिवतिर्त होती रहती है। ;गद्ध पृथ्वी की छाया चन्द्रमा के पृष्ठ के केवल वुफछ भाग को ही ढकती है। ;घद्ध चन्द्रमा के वायुमण्डल की मोटाइर् नियत नहीं है। 4 रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएμ ;कद्ध सूयर् से सबसे अिाक दूरी वाला ग्रह है। ;खद्ध वणर् में रक्ताभ प्रतीत होने वाला ग्रह है। ;गद्ध तारों के ऐसे समूह को जो कोइर् पैटनर् बनाता है कहते हैं। ;घद्ध ग्रह की परिक्रमा करने वाले खगोलीय पिंड को कहते हैं। ;घद्ध शूटिंग स्टार वास्तव में नहीं हैं। ;चद्ध क्षुद्रग्रह तथा की कक्षाओं के बीच पाए जाते है। 5.निम्नलिख्िात कथनों पर सत्य ;ज्द्ध अथवा असत्य ;थ्द्ध अंकित कीजिएμ ;कद्ध ध्रुव तारा सौर परिवार का सदस्य है। ; द्ध ;खद्ध बुध सौर परिवार का सबसे छोटा ग्रह है। ; द्ध ;गद्ध यूरेनस सौर परिवार का दूरतम ग्रह है। ; द्ध ;घद्ध प्छै।ज् एक वृफत्रिाम उपग्रह है। ; द्ध ;घद्ध हमारे सौर परिवार में नौ ग्रह हैं। ; द्ध ;चद्ध ‘ओराॅयन’ तारामण्डल केवल दूरदशर्क द्वारा देखा जा सकता है। ; द्ध 1.यदि संभव हो तो किसी वृफत्रिाम नभोमण्डल ;च्संदमजंतपनउद्ध का भ्रमण कीजिए। हमारे देश के कइर् शहरों में वृफत्रिाम नभोमण्डल हैं। इन नभोमण्डलों में आप तारों, तारामण्डलों तथा ग्रहों की गतियों का विशाल गुम्बद पर अवलोकन कर सकते हैं। 2.रात्रिा में वुफछ घंटे तक आकाश का प्रेक्षण कीजिए। उस रात्रिा को आकाश में चन्द्रमा नहीं होना चाहिए। देखते समय आप उल्का का संसूचन कर सकते हैं। इस कायर् के लिए सितम्बर - नवम्बर तक की अविा अिाक उपयुक्त है। 3.नंगी आँखों से आकाश में दिखाइर् देने वाले वुफछ ग्रहों तथा सप्तष्िार् और ओराॅयन जैसे प्रमुख तारामण्डलों की पहचान करना सीख्िाए। ध्रुव तारे तथा सीरियस तारे की अवस्िथति ज्ञात करने का प्रयास कीजिए। 4.अपने घर की छत पर अथवा किसी खेल के मैदान में कोइर् ऐसा सुगम स्थान चुनिए जहाँ से सूयोर्दय का आसानी से प्रेक्षण किया जा सके। याद रख्िाए आपको यह ियाकलाप वुफछ महीनों तक करना होगा। अतः स्थान का चयन सावधानीपूवर्क कीजिए। किसी चाटर् पेपर पर पूवीर् क्ष्िातिज की रूपरेखा खींचिए जिसमें बड़े वृक्षों, खम्बों आदि को दशार्या गया हो। इस चाटर् पेपर की रूपरेखा चिित कीजिए ताकि हर बार आप इसे एक ही स्िथति में रख सकें। हर दो सप्ताह के पश्चात अपने चाटर् पर उस स्थान को अंकित कीजिए जहाँ से सूयोर्दय हुआ हो। अपने प्रेक्षण की तारीख भी नोट कीजिए। ऐसा वुफछ महीनों तक दोहराइए। ;चित्रा 17.30द्ध। आपको यह परामशर् दिया जाता है कि आप अपने प्रेक्षण नवम्बर अथवा मइर् से आरम्भ करें। चित्रा 17.30: विभ्िान्न तिथ्िायों में सूयोर्दय की स्िथति क्या सूयर् सदैव एक ही दिशा से उदय होता है? अपने प्रेक्षणों पर अपने श्िाक्षक, माता पिता तथा अपन घर - परिवार अथवा पास पड़ोस के प्रौढ़ व्यक्ितयों से चचार् कीजिए। एक वषर् में केवल दो दिन, 21 माचर् एवं 23 सितम्बर, ऐसे हैं जब सूयोर्दय ठीकपूवर् दिशा में उदय होता है। अन्य सभी दिनों में सूयोर्दय या तो उत्तर - पूवर् अथवा दक्ष्िाण - पूवर् दिशाओं में होता है।उत्तर अयनांत ;लगभग 21 जूनद्ध से सूयोर्दय का बिन्दु ;की दिशाद्ध धीरे - धीरे दक्ष्िाण की ओर स्थानान्तरित होता जाता है। तब सूयर् को दक्ष्िाणायन ;दक्ष्िाण दिशा में गतिमानद्ध कहते हैं। यह दक्ष्िाण दिशा में दक्ष्िाण अयनांत ;लगभग 22 दिसम्बरद्ध तक गतिमान रहता है। इसके पश्चात, सूयोर्दय का बिन्दु दिशा परिवतर्न करता हैतथा उत्तर की ओर गति करना आरम्भ कर देता है। तब सूयर् को उत्तरायन ;उत्तर दिशा में गतिमानद्ध कहते हैं। 5.ग्रहों तथा उनके आपेक्ष्िाक साइश को दशार्ने वाला सौर परिवार का माॅडल ;प्रतिरूपद्ध बनाइए। इसके लिए बड़ा चाटर् पेपर लीजिए। विभ्िान्न ग्रहों को निरूपित करने के लिए उनके आपेक्ष्िाक साइश के अनुसार ;सारणी 17.1 का उपयोग करकेद्ध गोले बनाइए। गोले बनाने के लिए आप समाचार पत्रों, चिकनी मिट्टी, अथवा प्लास्टीसीन का उपयोग कर सकते हैं। इन गोलों को आप विभ्िान्न वणोर्ं के कागश से ढक सकते हैं। कक्षा में अपने माॅडल को प्रदश्िार्त कीजिए। सारणी 17.1 ग्रह का नाम सन्िनकट त्रिाज्या ;पृथ्वी को 1 मात्राक मान करद्ध सूयर् के सन्िनकट दूरी ;पृथ्वी की दूरी 1 मात्राक मानकर परिभ्रमण काल घूणर्न काल बुध् शुक्र पृथ्वी मंगल बृहस्पति शनि यूरेनस नेप्ट्यून 0ण्40 0ण्95 1ण्00 0ण्55 11ण्00 9ण्00 4ण्00 3ण्90 0ण्39 0ण्72 1ण्00 1ण्50 5ण्20 9ण्50 19ण्20 30ण्00 88 दिन 225 दिन 365ण्25 दिन 687 दिन 12 वषर् 29ण्46 वषर् 84 वषर् 165 लमंते 59 दिन 243 दिन 24 घंटे 24 घंटे37 मिनट 9 घंटे 55 मिनट 10ण्66 घंटे 17ण्2 घंटे 16ण्1 घंटे 6.सूयर् से ग्रहों की दूरी को दशार्ते हुए ;सारणी 17.1 का उपयोग करकेद्ध पैमाने के अनुसार सौर परिवार का माॅडल बनाने का प्रयास कीजिए। क्या आपको कोइर् कठिनाइर् हुइर्? व्याख्या कीजिए। 7.निम्नलिख्िात पहेली को हल कीजिए तथा इसी प्रकार की पहेलियाँ स्वयं बनाने का प्रयास कीजिए। मेरा पहला अक्षर शुभ में है पर लाभ में नहीं है मेरा अंतिम अक्षर व्रफम में है पर भ्रम में नहीं है।। मैं हूँ एक ग्रह जो दिखता सबसे चमकीला। नाम बताओ मेरा मैं हूँ न लाल और न नीला।। इस विषय पर अध्िक जानकारी के लिए निम्न वेबसाइट देख्िाएμ ऽ ीजजचरूध्ध्ूूूण्दपदमचसंदमजेण्वतह ऽ ीजजचरूध्ध्ूूूणपकेंजतवदवउलण्बवउ ऽ ीजजचरूध्ध्ूूूण्ेवसंतेलेजमउण्दंेंण्हवअध्चसंदमजे ऽ ीजजचरूध्ध्ंण्नेदवण्दंअलण्उपसध्ंि्र्रध्कवमेध्उववद.चींेमेण्ीजउस

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