आपके अभ्िाभावकों ने संभवतः आपको यह चेतावनी दी होगी कि गीले हाथों से किसी भी वैद्युत सािात्रा को न छुएँ। परंतु क्या आप जानते हैं कि गीले हाथों से किसी वैद्युत सािात्रा को छूना क्यों खतरनाक है? हम पहले ही सीख चुके हैं कि जो पदाथर् अपने से होकर विद्युत धारा को प्रवाहित होने देते हैं, वे विद्युत के सुचालक ;अच्छे चालकद्ध होते हैं। इसके विपरीत जो पदाथर् अपने से होकर विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, वे विद्युत के हीन चालक होते हैं। कक्षा टप् में यह जाँच करने के लिए कि कोइर् पदाथर् अपने से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है या नहीं हमने एक संपरीक्ष्िात्रा ;जमेजमतद्ध बनाया था ;चित्रा 14.1द्ध। क्या आपको याद है कि इसे सुनिश्िचत करने में संपरीक्ष्िात्रा ने हमारी किस प्रकार सहायता की थी? हमने देखा था कि धातुएँ जैसे ताँबा तथा ऐलुमिनियम विद्युत का चालन करते हैं जबकि वुफछ पदाथर् जैसे रबड़, प्लास्िटक तथा लकड़ी विद्युत का चालन नहीं करते। तथापि, अभी तक हमने अपने संपरीक्ष्िात्रा ;टेस्टरद्ध से केवल उन पदाथो± की जाँच की थी जो ठोस अवस्था में थे। लेकिन द्रवों के प्रकरण में क्या होता है? क्या द्रव भी विद्युत चालन करते हैं? आइए ज्ञात करें। टप् में बनाया था। तथापि, अब हम सेल के स्थान पर बैटरी का उपयोग करेंगे। संपरीक्ष्िात्रा का उपयोग करने से पहले हम यह भी परीक्षण करेंगे कि वह कायर् कर रहा है या नहीं। ियाकलाप 14.1 संपरीक्ष्िात्रा के सिरों को क्षण भर के लिए एक दूसरे से स्पशर् कराइए। ऐसा करते ही संपरीक्ष्िात्रा का परिपथ पूरा हो जाता है और बल्व दीप्त हो जाना चाहिए। तथापि, यदि बल्व दीप्त नहीं होता तो इसका अथर् है कि संपरिक्ष्िात्रा कायर् नहीं कर रहा है। क्या आप इसके संभावित कारण बता सकते हैं? क्या यह संभव है कि तारों के संयोजन श्िाथ्िालहों या बल्व फ्रयूज हो गया हो, अथवा आपके सेल बेकार हो गए हों? जाँच कीजिए कि सभी संयोजन कसे हुए हैं या नहीं। यदि संयोेजन पहले से ही कसे हुए हैं तो बल्व को बदल दीजिए। अब पिफर जाँच कीजिए कि संपरीक्ष्िात्रा कायर् कर रहा है या नहीं। यदि यह अब भी कायर् नहीं कर रहा है तो सेलों को बदल दीजिए। इस प्रकार जब संपरीक्ष्िात्रा भलीभांति कायर् करने लगे तो इसका उपयोग विभ्िान्न द्रवों का परीक्षण करने के लिए कर सकते हैं। ;चेतावनीः - अपने संपरीक्ष्िात्रा की जाँच करते समय इसके तारों के स्वतंत्रा सिरों को केवल वुफछ क्षणांे से अिाक स्पशर् न कराएँ अन्यथा बैटरी के सेल अत्यंत शीघ्रता से समाप्त हो जाएँगे।द्ध ियाकलाप 14.2 बेकार पेंफकी गइर् बोतलों के प्लास्िटक या रबड़ के वुफछ ढक्कन एकत्रा करके उन्हें सापफ करिए। एक ढक्कन में एक चाय के चम्मच के बराबर नींबू का रस या सिरका उड़ेलिए। अपने संपरीक्ष्िात्रा को इस ढक्कन के समीप लाकर उसके सिरों को नींबू के रस या सिरके में ;चित्रा 14.2द्ध डुबोइए। ध्यान रख्िाए कि दोनों सिरे परस्पर 1 बउ से अिाक दूरी पर न हों लेकिन इसी के साथ - साथ वे एक दूसरे को स्पशर् भी न करें। क्या संपरीक्ष्िात्रा का बल्ब दीप्त होता है? क्या नींबू का रस या सिरका विद्युत का चालन करता है? नींबू के रस या सिरके को आप सुचालक या हीन चालक में से किस वगर् चित्रा 14.2: नीबू के रस अथवा सिरके में विद्युत चालन का परीक्षण करना। जब संपरीक्ष्िात्रा के दोनों सिरों के बीच का द्रव अपने से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है तो संपरीक्ष्िात्रा का परिपथ पूरा हो जाता है। परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तथा बल्ब दीप्त हो जाता है। जब कोइर् द्रव विद्युत धारा को अपने से प्रवाहित होने नहीं देता तो संपरीक्ष्िात्रा का परिपथ पूरा नहीं होता तथा बल्व दीप्त नहीं होता। वुफछ स्िथतियों में द्रव के चालक होने पर भी संभव हो सकता है कि बल्ब दीप्त न हो। ऐसा ियाकलाप 14.2 में भी हो सकता है। इसका क्या कारण हो सकता है? क्या आपको याद है कि बल्ब से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर वह दीप्त क्यों होता है? विद्युत धारा केऊष्मीय प्रभाव के कारण बल्ब का तंतु उच्च ताप तक गमर् होकर दीप्त हो जाता है। तथापि, यदि परिपथ में विद्युत धारा दुबर्ल है तो तंतु पयार्प्त गमर् न हो पाने के कारण दीप्त नहीं हो पाता। अब आप यह जानना चाहेंगे कि किसी परिपथ में विद्युत धारा दुबर्ल कब होती है? यद्यपि कोइर् पदाथर् विद्युत का चालन कर सकता है, परंतु यह संभव है कि वह धातु की भाँति आसानी से विद्युत का चालन न कर पाता हो। जिसके कारण संपरीक्ष्िात्रा का परिपथ तो पूरा हो जाता है लेकिन पिफर भी इसमें प्रवाहित विद्युत धारा बल्ब को दीप्त करने के लिए दुबर्ल हो सकती है। क्या हम कोइर् ऐसा अन्य संपरीक्ष्िात्रा बना सकते हैं जो दुबर्ल धारा को भी संसूचित कर सके? आप चित्रा 14.2 के संपरीक्ष्िात्रा में विद्युत बल्ब के स्थान पर स्म्क् ;प्रकाश उत्सजर्क डायोडद्ध ;चित्रा 14.3द्ध का उपयोग कर सकते हैं। स्म्क् दुबर्ल विद्युत धारा प्रवाहित होने पर भी दीप्त होता है। स्म्क् के साथ दो तार जुड़े होते हैं। इन तारों को लीड्स कहते हैं। एक तार दूसरे की अपेक्षा थोड़ा लंबा होता है। याद रख्िाए कि स्म्क् को किसी परिपथ में जोड़ते समय इसके लंबे तार को सदैव बैटरी के धन टमिर्नल सेतथा छोटे तार को बैटरी के ट्टण टमिर्नल से एक अन्य संपरीक्ष्िात्रा बनाने के लिए आप विद्युत धारा के किसी अन्य प्रभाव का उपयोग कर सकते हैं। क्या आपको याद है कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है? जब किसी तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके पास रखी चुंबकीय सुइर् पर क्या प्रभाव पड़ता है? विद्युत धारा के बहुत दुबर्ल होने पर भी चुंबकीय सुइर् में विक्षेप देखा जा सकता है। क्या हम विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग करके कोइर् संपरीक्ष्िात्रा बना सकते हैं। आइए पता लगाएँ। ियाकलाप 14.3 माचिस की खाली डिबिया से टेª निकालिए। टेª पर चित्रा में दशार्ए अनुसार एक विद्युत - तार के वुफछ पेफरे लपेटिए। ट्रे के भीतर एक छोटी चुंबकीय सुइर् रख्िाए। अब तार के एक स्वतंत्रा सिरे को बैटरी के एक टमिर्नल से जोडि़ए। तार के दूसरे सिरे को स्वतंत्रा छोड़ दीजिए। तार का एक दूसरा टुकड़ा लेकर बैटरी के दूसरे टमिर्नल से जोडि़ए ;चित्रा 14.4द्ध। दोनों तारों के स्वतंत्रा सिरों को क्षणमात्रा के लिए एक दूसरे से स्पशर् कराइए। चुंबकीय सुइर् को तुरंत विक्षेप दिखाना चाहिए। आपका, तार के दो स्वतंत्रा सिरों वाला संपरीक्ष्िात्रा तैयार है। अब इस संपरीक्ष्िात्रा का उपयोग करके ियाकलाप 14.2 को दोहराइए। क्या संपरीक्ष्िात्रा के स्वतंत्रा सिरों को नींबू के रस में डुबोते ही आपको चुंबकीय सुइर् में विक्षेप दिखाइर् देता है? संपरीक्ष्िात्रा के सिरों को नींबू के रस से बाहर निकालिए। उन्हें पानी में डुबोइए और पोंछकर सुखाइए। इस ियाकलाप को अन्य द्रवों जैसे टोंटी का पानी, वनस्पति तेल, दूध, शहद आदि के साथ दोहराइए ;प्रत्येक द्रव का परीक्षण करने के पश्चात संपरीक्ष्िात्रा के सिरों को जल में धोकर तथा पोंछकर सुखाना अवश्य याद रख्िाएद्ध। प्रत्येक स्िथति में देख्िाए कि चुंबकीय सुइर् विक्षेप दशार्ती है अथवा नहीं। अपने प्रेक्षणों को सारणी 14.1 में अंकित कीजिए। सारणी 14.1 सुचालक/हीन चालक द्रव क्रम संख्या पदाथर् चुंबकीय सुइर् विक्षेप दशार्ती है हाँ/नहीं सुचालक/हीन चालक 1 नींबू का रस हाँ अच्छा चालक 2 सिरका 3 टांेटी का पानी 4 वनस्पति तेल 5 दूध् 6 शहद 7 8 9 10 सारणी 14.1 से हम देखते हैं कि वुफछ द्रव विद्युत हमने टोंटी के पानी द्वारा विद्युत चालन का परीक्षण के सुचालक हैं तथा वुफछ हीन चालक हैं। किया है। आइए अब आसुत जल द्वारा विद्युत चालन का परीक्षण करते हैं। वि्रफयाकलाप 14.4घुले हो सकते हैं। खनिज लवणों की थोड़ी मात्रा इसमें प्रावृफतिक रूप से विद्यमान होती है। इसीलिए यह जल विद्युत का सुचालक होता है। इसके विपरीत, आसुत जल लवणों से मुक्त होने के कारण हीन चालक होता है। जल में थोड़ी मात्रा में प्रावृफतिक रूप से विद्यमान खनिज लवण मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। परंतु, ये लवण जल को चालक बना देते हैं। इसीलिए हमें वैद्युत सािात्रों का ;उपयोगद्ध कभी भी गीले हाथों से अथवा गीले पफशर् पर खड़े होकर नहीं करना चाहिए। हमने देखा कि जब साधारण लवण को आसुत जल में घोला जाता है तो यह उसे अच्छा चालक बना देता है। वे कौन से अन्य पदाथर् हैं जो आसुत जल में घुलने पर इसे चालक बना देते हैं? आइए पता लगाएँ। चेतावनी: अगले वि्रफयाकलाप को केवल अपने अध्यापक, माता - पिता/अभ्िाभावक अथवा किसी वयस्क व्यक्ित की देख रेख में करिए, क्योंकि इसमें अम्ल का प्रयोग सम्िमलित है। वि्रफयाकलाप 14.5 बोतलों के प्लास्िटक या रबड़ के तीन स्वच्छ ढक्कन लीजिए। प्रत्येक में लगभग दो चाय के चम्मच के बराबर आसुत जल भरिए। एक ढक्कन के आसुत जल में वुफछ बूंदें नींबू के रस या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मिलाइए। अब दूसरे ढक्कन के आसुत जल में कास्िटक सोडा या पोटेश्िायम आयोडाइड जैसे क्षारक की वुफछ बंूदें मिलाइए। तीसरे ढक्कन के आसुत जल में थोड़ी सी चीनी डाल कर घोलिए। परीक्षण कीजिए, इन विलयनों में से कौन सा विलयन विद्युत का चालन करता है और कौन सा नहीं। आपको क्या परिणाम प्राप्त होते हैं? विद्युत चालन करने वाले अिाकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं। जब विद्युत धारा किसी चालक - विलयन से प्रवाहित होती है तो क्या वह उस विलयन में कोइर् प्रभाव उत्पन्न करती है? 14.2 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव कक्षा टप्प् में हमनें विद्युत धारा के वुफछ प्रभावों के बारे में सीखा था। क्या आप इन प्रभावों की सूची बना सकते हैं? जब विद्युत धारा किसी चालक - विलयन से प्रवाहित होती है तो यह क्या प्रभाव उत्पन्न करती है? अइए पता लगाएँ। वि्रफयाकलाप 14.6 दो बेकार सेलों से सावधानीपूवर्क काबर्न की छड़ें निकालिए। उनकी धातु की टोपियों को रेगमाल से साप़फ करके इन पर ताँबें के तार लपेटिए और उन्हें एक बैटरी से जोडि़ए ;चित्रा 14.5द्ध। इन दो छड़ों को हम इलेक्ट्रोड कहते हैं। ;काबर्न की छड़ों के स्थान पर आप लगभग 6 बउ लम्बी लोहे की कीलें भी ले सकते हैंद्ध। किसी काँच के गिलास या प्लास्िटक के कटोरे में एक प्याला जल भरिए। जल को और अिाक चालक बनाने के लिए, इसमें एक छोटा चम्मच भरकर साधारण नमक या नींबू के रस की वुफछ बूंदें मिलाइए। अब इस विलयन में इलेक्ट्रोडों को डुबोइए। यह सुनिश्िचत कीजिए कि काबर्न की छड़ों की धातु की टोपियाँ जल से बाहर रहें। 3 - 4 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए। इलेक्ट्रोडों को ध्यानपूवर्क देख्िाए। क्या आप इलेक्ट्रोडों के समीप किसी गैस के बुलबुले देख पाते हैं? क्या हम विलयन में हो रहे परिवतर्नों को रासायनिक परिवतर्न कह सकते हैं? कक्षा टप्प् में पढ़ी गइर् रासायनिक परिवतर्न की परिभाषा का स्मरण कीजिए। सन् 1800 में एक बि्रटिश रसायनज्ञ, विलियम निकलसन ;1753 - 1815द्ध ने यह दशार्या कि यदि इलेक्ट्रोड जल में डूबे हों तथा उनके द्वारा विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो आॅक्सीजन तथा हाइड्रोजन के बुलबुले उत्पन्न होते हैं। आॅक्सीजन के बुलबुले बैटरी के धन टमिर्नल से जुड़े इलेक्ट्रोड पर तथा हाइड्रोजन के बुलबुले दूसरे इलेक्ट्रोड पर बनते हैं। किसी चालक विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभ्िावि्रफयाएँ होती हैं। इसके पफलस्वरूप इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बन सकते हैं। इलेक्ट्रोडों पर धातु के निक्षेप देखे जा सकते हैं। विलयनों के रंग में परिवतर्न हो सकते हैं। यह रासायनिक अभ्िावि्रफया उपयोग किए जाने वाले विलयन तथा इलेक्ट्रोडों पर निभर्र करती है। ये विद्युत धारा के वुफछ रासायनिक प्रभाव हैं। उसने पाया कि विद्युत धारा आलू में एक रासायनिक प्रभाव उत्पन्न करती है। उसके लिए यह अत्यंतउत्तेजक खोज थी। वास्तव में विज्ञान में कभी - कभी ऐसे भी होता है कि आप खोज किसी चीज को रहे होते हैं और आप वुफछ अन्य खोज कर लेते हैं। अनेक महत्वपूणर् खोजें इसी प्रकार से हुइर् हैं। 14.3 विद्युतलेपन स्मरण कीजिए, बिलवुफल नयी साइकिल का हैन्िडल तथा पटिðयों के रिम कितने चमकदार होते हैं। तथापि यदि दुघर्टनावश इनमंे खरोंच पड़ जाए तो चमकदार परत उतर जाती है और उसके नीचे की सतह इतनी चमकदार नहीं होती। आपने वुफछ महिलाओं को ऐसे आभूषण पहने हुए भी देखा होगा जो देखने में सोने के प्रतीत होते हैं। तथापि, लगातार उपयोग से इनकी सोने की परत उतर जाती है और नीचे की चाँदी या किसी अन्य धातु की सतह दिखाइर् देने लगती है। इन दोनों ही परिस्िथतियों में एक धातु के उफपर दूसरी धातु की परत चढ़ी होती है। क्या आप जानते हैं कि एक धातु की सतह के उफपर दूसरी धातु की परत किस प्रकार निक्षेपित कर दी जाती है? आइए इसे स्वयं करके देखें। वि्रफयाकलाप 14.7 इस वि्रफयाकलाप के लिए हमें काॅपर सल्पेफट तथा लगभग 10 बउ × 4 बउ साइश की ताँबे की दो प्लेट चाहिए। किसी स्वच्छ तथा सूखे बीकर में 250 उस् आसुत जल लीजिए। इसमें चाय की दो चम्मच भरकर काॅपर सल्पेफट घोलिए। अिाक चालक बनाने के लिए काॅपर सल्पेफट विलयन मेंवुफछ बूँदें तनु सल्फ्रयूरिक अम्ल की डालिए। ताँबे की प्लेटों को रेगमाल से साप़फ कीजिए। इन्हें पानी में धोकर सुखाइए। ताँबे की प्लेटों को एक बैटरी के टमिर्नलों से संयोजित कीजिए और उन्हें काॅपर सल्पेफट के विलयन में डुबोइए ;चित्रा 14.7द्ध। परिपथ में लगभग 15 मिनट तक विद्युत धारा प्रवाहित होने दीजिए। अब विलयन में से इलेक्ट्रोडों को हटाइए तथा उन्हें ध्यानपूवर्क देख्िाए। क्या उनमें से किसी एक में वुफछ अन्तर पाते हैं? क्या आप इस पर कोइर् परत चढ़ी देखतेे हैं? इस परत का रंग वैफसा है? बैटरी के उस टमिर्नल को नोट कीजिए जिससे ये इलेक्ट्रोड संयोजित हैं। जब काॅपर सल्पेफट विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो काॅपर सल्पेफट, काॅपर तथा सल्पेफट में वियोजित हो जाता है। स्वतंत्रा काॅपर ;ताँबाद्ध बैटरी के )ण टमिर्नल से संयोजित इलेक्ट्रोड की ओर आकष्िार्त होता है तथा उस पर निक्षेपित हो जाता है। लेकिन विलयन से काॅपर के क्षय की पूतिर् वैफसे होती है? दूसरे इलेक्ट्रोड से जो ताँबे की प्लेट से बना है, समान मात्रा का काॅपर विलयन में घुल जाता है। इस प्रकार विलयन से जो काॅपर कम हुआ, वह विलयन में पुनः स्थापित हो जाता है और यह प्रवि्रफया चलती रहती है। इसका अथर् हुआ कि इस विद्युतलेपन प्रिया में एक इलेक्ट्रोड से काॅपर दूसरे इलेक्ट्रोड को स्थानांतरित होता जाता है। बूझो को ताँबे की केवल एक प्लेट ही मिल पाइर्। इसलिए उसने वि्रफयाकलाप 14.7 को ताँबे की प्लेट के स्थान पर काबर्न की छड़ को बैटरी के )ण टमिर्नल से संयोजित करके किया। उसे काबर्न की छड़ पर ताँबे की परत चढ़ाने में सपफलता प्राप्त हो गइर्। विद्युत द्वारा किसी पदाथर् पर किसी वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रवि्रफया को विद्युतलेपन कहते हैं। यह विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का एक सवार्िाक सामान्य उपयोग है। विद्युतलेपन अत्यंत उपयोगी प्रव्रफम है। उद्योगों में धातु की वस्तुओं पर किसी दूसरी धातु की पतली परत विलेपित करने के लिए इसका व्यापक रूप में उपयोग किया जाता है ;चित्रा 14.8द्ध। विलेपित किए जाने वाली धातु की परत में वुफछ ऐसे वांछित गुण होते हैं जो उस वस्तु की धातु में नहीं होते जिस पर निक्षेपण किया जाता है। उदाहरण के लिए, अनेक वस्तुओं जैसे कार के वुफछ भागों, स्नान गृह की टोंटी, गैस बनर्र, साइकिल का हैन्िडल, पहियों के रिम आदि पर व्रफोमियम का लेपन किया जाता है। व्रफोमियम चमकदार दिखाइर् देता है। यह संक्षारित नहीं होता। यह खरोंचों का प्रतिरोध करता है। तथापि, व्रफोमियम मँहगा है तथा किसी पूरी वस्तु को व्रफोमियम से बनाना आथ्िार्क दृष्िट से व्यावहारिक नहीं होता। इसलिए वस्तु को किसी सस्ती धातु से बनाया जाता है और इस पर केवल व्रफोमियम की परत ही निक्षेपित कर दी जाती है। आभूषण बनाने वाले सस्ती धातुओं पर चाँदी तथा सोने का विद्युतलेपन करते हैं। ये आभूषण देखने में चाँदी चित्रा 14.8: वुफछ विद्युतलेपित वस्तुएँ। या सोने के प्रतीत होते हैं लेकिन वास्तव में अपेक्षाकृत बहुत सस्ते होते हैं। खाद्य पदाथो± के भंडारण के लिए उपयोग किए जाने वाले टिन के डिब्बांे में लोहे के उफपर टिन का विद्युतलेपन किया जाता है। टिन लोहे से कम ियाशील होता है। इस प्रकार खाद्य पदाथर् लोहे के सम्पवर्फ में नहीं आते और खराब होने से बच जाते हैं। पुलों तथा स्वचालित वाहनों को प्रबल बनाने के लिए लोहे का उपयोग किया जाता है। तथापि, लोहे में संक्षारितहोने तथा जंग लगने की प्रवृिा होती है। अतः इसे संक्षारण तथा जंग लगने से बचाने के लिए लोहे पर जिंक की परत निक्षेपित कर दी जाती है। विद्युतलेपन कारखानों में उपयोग किए जा चुके विलयनों का निपटारा किया जाना भी एक मुख्य समस्या है। यह एक प्रदूषणकारी अपश्िाष्ट है तथा पयार्वरण संरक्षण के लिए इस प्रकार के प्रदूषकों के निपटारे के लिए विश्िाष्ट दिशा निदेर्श दिए गए हैं। आपने क्या सीखा ऽ वुफछ द्रव विद्युत के सुचालक हैं तथा वुफछ हीन चालक हैं। ऽ विद्युत चालन करने वाले अिाकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं। ऽ किसी चालक द्रव में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभ्िावि्रफयाएँ होती हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं। ऽ विद्युत धारा द्वारा किसी पदाथर् पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रवि्रफया को विद्युतलेपन कहते हैं। अभ्यास

>Chapter-14>

Vigyan Chapter-14

अध्याय 14

विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

आपके अभिभावकों ने संभवतः आपको यह चेतावनी दी होगी कि गीले हाथों से किसी भी वैद्युत साधित्र को न छुएँ। परंतु क्या आप जानते हैं कि गीले हाथों से किसी वैद्युत साधित्र को छूना क्यों खतरनाक है?

हम पहले ही सीख चुके हैं कि जो पदार्थ अपने से होकर विद्युत धारा को प्रवाहित होने देते हैं, वे विद्युत के सुचालक (अच्छे चालक) होते हैं। इसके विपरीत जो पदार्थ अपने से होकर विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित नहीं होने देते, वे विद्युत के हीन चालक होते हैं।

कक्षा VI में यह जाँच करने के लिए कि कोई पदार्थ अपने से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है या नहीं हमने एक संपरीक्षित्र (tester) बनाया था। क्या आपको याद है कि इसे सुनिश्चित करने में संपरीक्षित्र ने हमारी किस प्रकार सहायता की थी?

हमने देखा था कि धातुएँ जैसे ताँबा तथा एेलुमिनियम विद्युत का चालन करते हैं जबकि कुछ पदार्थ जैसे रबड़, प्लास्टिक तथा लकड़ी विद्युत का चालन नहीं करते। तथापि, अभी तक हमने अपने संपरीक्षित्र (टेस्टर) से केवल उन पदार्थों की जाँच की थी जो ठोस अवस्था में थे। लेकिन द्रवों के प्रकरण में क्या होता है? क्या द्रव भी विद्युत चालन करते हैं? आइए ज्ञात करें।



1651.pngपहेली तथा बूझो आपको स्मरण कराना चाहते हैं कि हमें प्रयोग करते समय कभी भी मुख्य तारों (मेन्स) अथवा जनित्र या प्रतीपक (इन्वर्टर) से विद्युत आपूर्ति नहीं करनी चाहिए। यहाँ  सुझाए सभी क्रियाकलापों में  केवल विद्युत सेल का ही उपयोग  करना चाहिए।


14.1 क्या द्रव विद्युत चालन करते हैं?

यह जाँच करने के लिए कि द्रव अपने से होकर विद्युत धारा को प्रवाहित होने देतेे हैं या नहीं हम उसी संपरीक्षित्र (चित्र 14.1) का प्रयोग कर सकते हैं। तथापि, अब हम सेल के स्थान पर बैटरी का उपयोग करेंगे। संपरीक्षित्र का उपयोग करने से पहले हम यह भी परीक्षण करेंगे कि वह कार्य कर रहा है या नहीं।

1


क्रियाकलाप 14.1

संपरीक्षित्र के सिरों को क्षण भर के लिए एक दूसरे से स्पर्श कराइए। एेसा करते ही संपरीक्षित्र का परिपथ पूरा हो जाता है और बल्व दीप्त हो जाना चाहिए। तथापि, यदि बल्व दीप्त नहीं होता तो इसका अर्थ है कि संपरिक्षित्र कार्य नहीं कर रहा है। क्या आप इसके संभावित कारण बता सकते हैं? क्या यह संभव है कि तारों के संयोजन शिथिल हों या बल्व फ्यूज हो गया हो, अथवा आपके सेल बेकार हो गए हों? जाँच कीजिए कि सभी संयोजन कसे हुए हैं या नहीं। यदि संयोेजन पहले से ही कसे हुए हैं तो बल्व को बदल दीजिए। अब फिर जाँच कीजिए कि संपरीक्षित्र कार्य कर रहा है या नहीं। यदि यह अब भी कार्य नहीं कर रहा है तो सेलों को बदल दीजिए।

इस प्रकार जब संपरीक्षित्र भलीभांति कार्य करने लगे तो इसका उपयोग विभिन्न द्रवों का परीक्षण करने के लिए कर सकते हैं।

(चेतावनीः-अपने संपरीक्षित्र की जाँच करते समय इसके तारों के स्वतंत्र सिरों को केवल कुछ क्षणाें से अधिक स्पर्श न कराएँ अन्यथा बैटरी के सेल अत्यंत शीघ्रता से समाप्त हो जाएँगे।)

क्रियाकलाप 14.2

बेकार फेंकी गई बोतलों के प्लास्टिक या रबड़ के कुछ ढक्कन एकत्र करके उन्हें साफ करिए। एक ढक्कन में एक चाय के चम्मच के बराबर नींबू का रस या सिरका उड़ेलिए। अपने संपरीक्षित्र को इस ढक्कन के समीप लाकर उसके सिरों को नींबू के रस या सिरके में (चित्र 14.2) डुबोइए। ध्यान रखिए कि दोनों सिरे परस्पर 1 cm से अधिक दूरी पर न हों लेकिन इसी के साथ-साथ वे एक दूसरे को स्पर्श भी न करें। क्या संपरीक्षित्र का बल्ब दीप्त होता है? क्या नींबू का रस या सिरका विद्युत का चालन करता है? नींबू के रस या सिरके को आप सुचालक या हीन चालक में से किस वर्ग में रखेेंगे?


चित्र 14.2: नीबू के रस अथवा सिरके में विद्युत चालन का परीक्षण करना।

जब संपरीक्षित्र के दोनों सिरों के बीच का द्रव अपने से विद्युत धारा को प्रवाहित होने देता है तो संपरीक्षित्र का परिपथ पूरा हो जाता है। परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तथा बल्ब दीप्त हो जाता है। जब कोई द्रव विद्युत धारा को अपने से प्रवाहित होने नहीं देता तो संपरीक्षित्र का परिपथ पूरा नहीं होता तथा बल्व दीप्त नहीं होता।

कुछ स्थितियों में द्रव के चालक होने पर भी संभव हो सकता है कि बल्ब दीप्त न हो। एेसा क्रियाकलाप 14.2 में भी हो सकता है। इसका क्या कारण हो  सकता है?

क्या आपको याद है कि बल्ब से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर वह दीप्त क्यों होता है? विद्युत धारा के ऊष्मीय प्रभाव के कारण बल्ब का तंतु उच्च ताप तक गर्म होकर दीप्त हो जाता है। तथापि, यदि परिपथ में विद्युत धारा दुर्बल है तो तंतु पर्याप्त गर्म न हो पाने के कारण दीप्त नहीं हो पाता। अब आप यह जानना चाहेंगे कि किसी परिपथ में विद्युत धारा दुर्बल कब होती है? यद्यपि कोई पदार्थ विद्युत का चालन कर सकता है, परंतु यह संभव है कि वह धातु की भाँति आसानी से विद्युत का चालन न कर पाता हो। जिसके कारण संपरीक्षित्र का परिपथ तो पूरा हो जाता है लेकिन फिर भी इसमें प्रवाहित विद्युत धारा बल्ब को दीप्त करने के लिए दुर्बल हो सकती है। क्या हम कोई एेसा अन्य संपरीक्षित्र बना सकते हैं जो दुर्बल धारा को भी संसूचित कर सके?

एक अन्य संपरीक्षित्र बनाने के लिए आप विद्युत धारा के किसी अन्य प्रभाव का उपयोग कर सकते हैं। क्या आपको याद है कि विद्युत धारा चुंबकीय प्रभाव उत्पन्न करती है? जब किसी तार में विद्युत धारा प्रवाहित होती है तो उसके पास रखी चुंबकीय सुई पर क्या प्रभाव पड़ता है? विद्युत धारा के बहुत दुर्बल होने पर भी चुंबकीय सुई में विक्षेप देखा जा सकता है। क्या हम विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव का उपयोग करके कोई संपरीक्षित्र बना सकते हैं। आइए क्रियाकलाप 14.3 द्वारा पता लगाएँ।


आप चित्र 14.2 के संपरीक्षित्र में विद्युत बल्ब के स्थान पर LED (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) (चित्र 14.3) का उपयोग कर सकते हैं। LED दुर्बल विद्युत धारा प्रवाहित होने पर भी दीप्त होता है।

LED के साथ दो तार जुड़े होते हैं। इन तारों को लीड्स कहते हैं। एक तार दूसरे की अपेक्षा थोड़ा लंबा होता है। याद रखिए कि LED को किसी परिपथ में जोड़ते समय इसके लंबे तार को सदैव बैटरी के धन टर्मिनल से 
तथा छोटे तार को बैटरी के ऋण टर्मिनल से जोड़ते हैं।

चित्र 14.3: कुछ LED


क्रियाकलाप 14.3

माचिस की खाली डिबिया से ट्रे निकालिए। ट्रे पर चित्र में दर्शाए अनुसार एक विद्युत-तार के कुछ फेरे लपेटिए। ट्रे के भीतर एक छोटी चुंबकीय सुई रखिए। अब तार के एक स्वतंत्र सिरे को बैटरी के एक टर्मिनल से जोड़िए। तार के दूसरे सिरे को स्वतंत्र छोड़ दीजिए। तार का एक दूसरा टुकड़ा लेकर बैटरी के दूसरे टर्मिनल से जोड़िए (चित्र 14.4)।


चित्र 14.4: एक अन्य संपरीक्षित्र।

दोनों तारों के स्वतंत्र सिरों को क्षणमात्र के लिए एक दूसरे से स्पर्श कराइए। चुंबकीय सुई को तुरंत विक्षेप दिखाना चाहिए। आपका, तार के दो स्वतंत्र सिरों वाला संपरीक्षित्र तैयार है। अब इस संपरीक्षित्र का उपयोग करके क्रियाकलाप 14.2 को दोहराइए। क्या संपरीक्षित्र के स्वतंत्र सिरों को नींबू के रस में डुबोते ही आपको चुंबकीय सुई में विक्षेप दिखाई देता है?

संपरीक्षित्र के सिरों को नींबू के रस से बाहर निकालिए। उन्हें पानी में डुबोइए और पोंछकर सुखाइए। इस क्रियाकलाप को अन्य द्रवों जैसे टोंटी का पानी, वनस्पति तेल, दूध, शहद आदि के साथ दोहराइए (प्रत्येक द्रव का परीक्षण करने के पश्चात संपरीक्षित्र के सिरों को जल में धोकर तथा पोंछकर सुखाना अवश्य याद रखिए)। प्रत्येक स्थिति में देखिए कि चुंबकीय सुई विक्षेप दर्शाती है अथवा नहीं। अपने प्रेक्षणों को सारणी 14.1 में अंकित कीजिए।



1

सारणी 14.1 से हम देखते हैं कि कुछ द्रव विद्युत के सुचालक हैं तथा कुछ हीन चालक हैं।




जब संपरीक्षित्र के स्वतंत्र सिरे एक दूसरे को नहीं छूते हैं संभव है कि उनके बीच में वायु हो, पहेली को ज्ञात है कि वायु विद्युत की हीन चालक है। परंतु उसने यह भी पढ़ा है कि तड़ित के समय वायु से विद्युत धारा प्रवाहित हो जाती है। वह यह जानना चाहती है कि क्या हर अवस्था में वायु विद्युत की हीन चालक होती है। इसी से प्रेरित होकर बूझो भी यह जानना चाहता है कि क्या हीन चालकों की श्रेणी मे रखे अन्य पदार्थ भी विशेष परिस्थितियों में  अपने में से विद्युत को प्रवाहित होने  देते हैं।


वास्तव में विशेष परिस्थितियों में अधिकांश पदार्थ विद्युत धारा का चालन कर सकते हैं। यही कारण है कि पदार्थों को चालकों तथा विद्युतरोधियों के रूप में वर्गीकृत करने की अपेक्षा, अच्छे चालकों (सुचालकों) तथा हीन चालकों के रूप में वर्गीकृत करने को अधिक मान्यता दी जाती है।

हमने टोंटी के पानी द्वारा विद्युत चालन का परीक्षण किया है। आइए अब आसुत जल द्वारा विद्युत चालन का परीक्षण करते हैं।

क्रियाकलाप 14.4

एक स्वच्छ तथा सूखे प्लास्टिक या रबड़ के ढक्कन में लगभग दो चाय के चम्मच के बराबर आसुत जल भरिए। आप आसुत जल को अपने विद्यालय की प्रयोगशाला से प्राप्त कर सकते हैं। (आप किसी दवाई की दुकान या डॉक्टर या नर्स से भी आसुत जल ले सकते हैं)। संपरीक्षित्र का उपयोग करके परीक्षण कीजिए कि आसुत जल विद्युत चालन करता है अथवा नहीं। आप क्या पाते हैं? क्या आसुत जल विद्युत चालन करता है? अब एक चुटकी साधारण नमक लेकर इसे आसुत जल में घोलिए। फिर परीक्षण कीजिए। इस बार आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?


जब हम आसुत जल में नमक घोलते हैं तो हमें नमक का घोल प्राप्त होता है। यह विद्युत का अच्छा चालक है।

जो जल हमें नलों, हैन्ड पम्पों, कुओं, तालों आदि से प्राप्त होता है वह शुद्ध नहीं होता। इसमें अनेक लवण घुले हो सकते हैं। खनिज लवणों की थोड़ी मात्रा इसमें प्राकृतिक रूप से विद्यमान होती है। इसीलिए यह जल विद्युत का सुचालक होता है। इसके विपरीत, आसुत जल लवणों से मुक्त होने के कारण हीन चालक होता है।




जल में थोड़ी मात्रा में प्राकृतिक रूप से विद्यमान खनिज लवण मानव स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होते हैं। परंतु, ये लवण जल को चालक बना देते हैं। इसीलिए हमें वैद्युत साधित्रों का (उपयोग) कभी भी गीले हाथों से अथवा गीले फर्श पर खड़े होकर नहीं करना चाहिए।

हमने देखा कि जब साधारण लवण को आसुत जल में घोला जाता है तो यह उसे अच्छा चालक बना देता है। वे कौन से अन्य पदार्थ हैं जो आसुत जल में घुलने पर इसे चालक बना देते हैं? आइए पता लगाएँ।

चेतावनी: अगले क्रियाकलाप को केवल अपने अध्यापक, माता-पिता/अभिभावक अथवा किसी वयस्क व्यक्ति की देख रेख में करिए, क्योंकि इसमें अम्ल का प्रयोग सम्मिलित है।

क्रियाकलाप 14.5

बोतलों के प्लास्टिक या रबड़ के तीन स्वच्छ ढक्कन लीजिए। प्रत्येक में लगभग दो चाय के चम्मच के बराबर आसुत जल भरिए। एक ढक्कन के आसुत जल में कुछ बूंदें नींबू के रस या तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मिलाइए। अब दूसरे ढक्कन के आसुत जल में कास्टिक सोडा या पोटेशियम आयोडाइड जैसे क्षारक की कुछ बूंदें मिलाइए। तीसरे ढक्कन के आसुत जल में थोड़ी सी चीनी डाल कर घोलिए। परीक्षण कीजिए, इन विलयनों में से कौन सा विलयन विद्युत का चालन करता है और कौन सा नहीं। आपको क्या परिणाम प्राप्त होते हैं?


विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं।

जब विद्युत धारा किसी चालक-विलयन से प्रवाहित होती है तो क्या वह उस विलयन में कोई प्रभाव उत्पन्न करती है?

14.2 विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव

कक्षा VII में हमनें विद्युत धारा के कुछ प्रभावों के बारे में सीखा था। क्या आप इन प्रभावों की सूची बना सकते हैं? जब विद्युत धारा किसी चालक-विलयन से प्रवाहित होती है तो यह क्या प्रभाव उत्पन्न करती है? अइए पता लगाएँ।

क्रियाकलाप 14.6

दो बेकार सेलों से सावधानीपूर्वक कार्बन की छड़ें निकालिए। उनकी धातु की टोपियों को रेगमाल से साफ़ करके इन पर ताँबें के तार लपेटिए और उन्हें एक बैटरी से जोड़िए (चित्र 14.5)। इन दो छड़ों को हम इलेक्ट्रोड कहते हैं। (कार्बन की छड़ों के स्थान पर आप लगभग 6 cm लम्बी लोहे की कीलें भी ले सकते हैं)।


चित्र 14.5: जल से विद्युत धारा प्रवाहित करना।




स्थान पर आप लगभग 6 cm लम्बी लोहे की कीलें भी ले सकते हैं)।

किसी काँच के गिलास या प्लास्टिक के कटोरे में एक प्याला जल भरिए। जल को और अधिक चालक बनाने के लिए, इसमें एक छोटा चम्मच भरकर साधारण नमक या नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाइए। अब इस विलयन में इलेक्ट्रोडों को डुबोइए। यह सुनिश्चित कीजिए कि कार्बन की छड़ों की धातु की टोपियाँ जल से बाहर रहें। 3-4 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए। इलेक्ट्रोडों को ध्यानपूर्वक देखिए। क्या आप इलेक्ट्रोडों के समीप किसी गैस के बुलबुले देख पाते हैं? क्या हम विलयन में हो रहे परिवर्तनों को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं? कक्षा VII में पढ़ी गई रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा का स्मरण कीजिए।


सन् 1800 में एक ब्रिटिश रसायनज्ञ, विलियम निकलसन (1753-1815) ने यह दर्शाया कि यदि इलेक्ट्रोड जल में डूबे हों तथा उनके द्वारा विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो अॉक्सीजन तथा हाइड्रोजन के बुलबुले उत्पन्न होते हैं। अॉक्सीजन के बुलबुले बैटरी के धन टर्मिनल से जुड़े इलेक्ट्रोड पर तथा हाइड्रोजन के बुलबुले दूसरे इलेक्ट्रोड पर  बनते हैं। 

किसी चालक विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसके फलस्वरूप इलेक्ट्रोडों पर गैस के बुलबुले बन सकते हैं। इलेक्ट्रोडों पर धातु के निक्षेप देखे जा सकते हैं। विलयनों के रंग में परिवर्तन हो सकते हैं। यह रासायनिक अभिक्रिया उपयोग किए जाने वाले विलयन तथा इलेक्ट्रोडों पर निर्भर करती है। ये विद्युत धारा के कुछ रासायनिक प्रभाव हैं।



बूझो ने यह परीक्षण करने का निश्चय किया कि क्या कुछ फल एवं वनस्पतियाँ भी विद्युत चालन करती हैं या नहीं। उसने एक आलू को दो बराबर भागों में काटा तथा संपरीक्षित्र के ताँबे के तारों को इसमें निर्विष्ट कर दिया। तभी उसकी माँ ने उसे बुला लिया और वह आलू में निर्विष्ट किए गए संपरीक्षित्र के तारों को बाहर निकालना भूल गया। लगभग आधे घंटे के पश्चात जब वह वापस आया तो उसने देखा कि आलू में एक तार के चारों ओर नीला हरा सा धब्बा बन गया है जबकि दूसरे तार के चारों ओर एेसा कोई धब्बा नहीं है (चित्र 14.6)।


चित्र 14.6: आलू की चालकता का परीक्षण करना।

उसे इस प्रेक्षण पर बड़ा आश्चर्य हुआ और उसने पहेली के साथ इस क्रियाकलाप को कई बार दोहराया। उन्होंने पाया कि हर बार धन टर्मिनल से संयोजित तार के चारों ओर ही नीला हरा धब्बा बनता है। उन्होंने अनुभव किया कि यह खोज अत्यंत लाभप्रद है क्योंकि इसका उपयोग किसी बॉक्स में छिपी बैटरी या सेल के धन टर्मिनल की पहचान करने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने अपनी इस खोज को बच्चों की एक पत्रिका में छपवाने का निश्चय किया।

याद रखिए कि बूझो ने इस परीक्षण से प्रारम्भ किया था कि आलू विद्युत चालन करता है या नहीं। उसने पाया कि विद्युत धारा आलू में एक रासायनिक प्रभाव उत्पन्न करती है। उसके लिए यह अत्यंत उत्तेजक खोज थी। वास्तव में विज्ञान में कभी-कभी एेसे भी होता है कि आप खोज किसी चीज को रहे होते हैं और आप कुछ अन्य खोज कर लेते हैं। अनेक महत्वपूर्ण खोजें इसी प्रकार से हुई हैं।



किसी काँच के गिलास या प्लास्टिक के कटोरे में एक प्याला जल भरिए। जल को और अधिक चालक बनाने के लिए, इसमें एक छोटा चम्मच भरकर साधारण नमक या नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाइए। अब इस विलयन में इलेक्ट्रोडों को डुबोइए। यह सुनिश्चित कीजिए कि कार्बन की छड़ों की धातु की टोपियाँ जल से बाहर रहें। 3-4 मिनट तक प्रतीक्षा कीजिए। इलेक्ट्रोडों को ध्यानपूर्वक देखिए। क्या आप इलेक्ट्रोडों के समीप किसी गैस के बुलबुले देख पाते हैं? क्या हम विलयन में हो रहे परिवर्तनों को रासायनिक परिवर्तन कह सकते हैं? कक्षा VII में पढ़ी गई रासायनिक परिवर्तन की परिभाषा का स्मरण कीजिए।

14.3 विद्युतलेपन

स्मरण कीजिए, बिलकुल नयी साइकिल का हैन्डिल तथा पट्टियों के रिम कितने चमकदार होते हैं। तथापि यदि दुर्घटनावश इनमें खरोंच पड़ जाए तो चमकदार परत उतर जाती है और उसके नीचे की सतह इतनी चमकदार नहीं होती। आपने कुछ महिलाओं को एेसे आभूषण पहने हुए भी देखा होगा जो देखने में सोने के प्रतीत होते हैं। तथापि, लगातार उपयोग से इनकी सोने की परत उतर जाती है और नीचे की चाँदी या किसी अन्य धातु की सतह दिखाई देने लगती है।

इन दोनों ही परिस्थितियों में एक धातु के ऊपर दूसरी धातु की परत चढ़ी होती है। क्या आप जानते हैं कि एक धातु की सतह के ऊपर दूसरी धातु की परत किस प्रकार निक्षेपित कर दी जाती है? आइए इसे स्वयं करके देखें।

क्रियाकलाप 14.7

इस क्रियाकलाप के लिए हमें कॉपर सल्फेट तथा लगभग 10 cm × 4 cm साइज़ की ताँबे की दो प्लेट चाहिए। किसी स्वच्छ तथा सूखे बीकर में 250 mL आसुत जल लीजिए। इसमें चाय की दो चम्मच भरकर कॉपर सल्फेट घोलिए। अधिक चालक बनाने के लिए कॉपर सल्फेट विलयन में कुछ बूँदें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की डालिए। ताँबे की प्लेटों को रेगमाल से साफ़ कीजिए। इन्हें पानी में धोकर सुखाइए। ताँबे की प्लेटों को एक बैटरी के टर्मिनलों से संयोजित कीजिए और उन्हें कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोइए (चित्र 14.7)।



चित्र 14.7: विद्युतलेपन दर्शाता सरल परिपथ।

परिपथ में लगभग 15 मिनट तक विद्युत धारा प्रवाहित होने दीजिए। अब विलयन में से इलेक्ट्रोडों को हटाइए तथा उन्हें ध्यानपूर्वक देखिए। क्या उनमें से किसी एक में कुछ अन्तर पाते हैं? क्या आप इस पर कोई परत चढ़ी देखतेे हैं? इस परत का रंग कैसा है? बैटरी के उस टर्मिनल को नोट कीजिए जिससे ये इलेक्ट्रोड संयोजित हैं।





विद्युतलेपन के क्रियाकलाप को करने के पश्चात पहेली ने इलेक्ट्रोडों को आपस में बदल कर क्रियाकलाप को दोहराया। आपके विचार से इस बार वह क्या प्रेक्षण करेगी?

जब कॉपर सल्फेट विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो कॉपर सल्फेट, कॉपर तथा सल्फेट में वियोजित हो जाता है। स्वतंत्र कॉपर (ताँबा) बैटरी के ऋण टर्मिनल से संयोजित इलेक्ट्रोड की ओर आकर्षित होता है तथा उस पर निक्षेपित हो जाता है। लेकिन विलयन से कॉपर के क्षय की पूर्ति कैसे होती है?

दूसरे इलेक्ट्रोड से जो ताँबे की प्लेट से बना है, समान मात्रा का कॉपर विलयन में घुल जाता है। इस प्रकार विलयन से जो कॉपर कम हुआ, वह विलयन में पुनः स्थापित हो जाता है और यह प्रक्रिया चलती रहती है। इसका अर्थ हुआ कि इस विद्युतलेपन प्रक्रिया में एक इलेक्ट्रोड से कॉपर दूसरे इलेक्ट्रोड को स्थानांतरित होता जाता है।

बूझो को ताँबे की केवल एक प्लेट ही मिल पाई। इसलिए उसने क्रियाकलाप 14.7 को ताँबे की प्लेट के स्थान पर कार्बन की छड़ को बैटरी के ऋण टर्मिनल से संयोजित करके किया। उसे कार्बन की छड़ पर ताँबे की परत चढ़ाने में सफलता प्राप्त हो गई।


विद्युत द्वारा किसी पदार्थ पर किसी वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहते हैं। यह विद्युत धारा के रासायनिक प्रभाव का एक सर्वाधिक सामान्य उपयोग है।

विद्युतलेपन अत्यंत उपयोगी प्रक्रम है। उद्योगों में धातु की वस्तुओं पर किसी दूसरी धातु की पतली परत विलेपित करने के लिए इसका व्यापक रूप में उपयोग किया जाता है (चित्र 14.8)। विलेपित किए जाने वाली धातु की परत में कुछ एेसे वांछित गुण होते हैं जो उस वस्तु की धातु में नहीं होते जिस पर निक्षेपण किया जाता है। उदाहरण के लिए, अनेक वस्तुओं जैसे कार के कुछ भागों, स्नान गृह की टोंटी, गैस बर्नर, साइकिल का हैन्डिल, पहियों के रिम आदि पर क्रोमियम का लेपन किया जाता है।

क्रोमियम चमकदार दिखाई देता है। यह संक्षारित नहीं होता। यह खरोंचों का प्रतिरोध करता है। तथापि, क्रोमियम मँहगा है तथा किसी पूरी वस्तु को क्रोमियम से बनाना आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक नहीं होता। इसलिए वस्तु को किसी सस्ती धातु से बनाया जाता है और इस पर केवल क्रोमियम की परत ही निक्षेपित कर दी जाती है।

आभूषण बनाने वाले सस्ती धातुओं पर चाँदी तथा सोने का विद्युतलेपन करते हैं। ये आभूषण देखने में चाँदी या सोने के प्रतीत होते हैं लेकिन वास्तव में अपेक्षाकृत बहुत सस्ते होते हैं।



चित्र 14.8: कुछ विद्युतलेपित वस्तुएँ।

खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग किए जाने वाले टिन के डिब्बाें में लोहे के ऊपर टिन का विद्युतलेपन किया जाता है। टिन लोहे से कम क्रियाशील होता है। इस प्रकार खाद्य पदार्थ लोहे के सम्पर्क में नहीं आते और खराब होने से बच जाते हैं।

पुलों तथा स्वचालित वाहनों को प्रबल बनाने के लिए लोहे का उपयोग किया जाता है। तथापि, लोहे में संक्षारित होने तथा जंग लगने की प्रवृत्ति होती है। अतः इसे संक्षारण तथा जंग लगने से बचाने के लिए लोहे पर जिंक की परत निक्षेपित कर दी जाती है।

विद्युतलेपन कारखानों में उपयोग किए जा चुके विलयनों का निपटारा किया जाना भी एक मुख्य समस्या है। यह एक प्रदूषणकारी अपशिष्ट है तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार के प्रदूषकों के निपटारे के लिए विशिष्ट दिशा निर्देश दिए गए हैं।



प्रमुख शब्द

इलेक्ट्रोड


विद्युतलेपन


सुचालक


एल.ई.डी.


हीन चालक



आपने क्या सीखा

  • कुछ द्रव विद्युत के सुचालक हैं तथा कुछ हीन चालक हैं।

     विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव अम्लों, क्षारकों तथा लवणों के विलयन होते हैं।

     किसी चालक द्रव में विद्युत धारा प्रवाहित होने पर रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं। इसे विद्युत धारा का रासायनिक प्रभाव कहते हैं।

     विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को विद्युतलेपन कहते हैं।

अभ्यास



1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए–

(a) विद्युत चालन करने वाले अधिकांश द्रव  तथा  के विलयन होते हैं।

(b) किसी विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित होने पर  प्रभाव उत्पन्न होता है।

(c) यदि कॉपर सल्फेट विलयन से विद्युत धारा प्रवाहित की जाए तो कॉपर बैटरी के  टर्मिनल से संयोजित प्लेट पर निक्षेपित होता है।

(d) विद्युत धारा द्वारा किसी पदार्थ पर वांछित धातु की परत निक्षेपित करने की प्रक्रिया को  कहते हैं।

2. जब किसी संपरीक्षित्र के स्वतंत्र सिरों को किसी विलयन में डुबोते हैं तो चुंबकीय सुई विक्षेपित होती है। क्या आप एेसा होने के कारण की व्याख्या कर सकते हैं?

3. एेसे तीन द्रवों के नाम लिखिए जिनका परीक्षण चित्र 14.9 में दर्शाए अनुसार करने पर चुंबकीय सुई विक्षेपित हो सके।

चित्र 14.9



4. चित्र 14.10 में दर्शायी गई व्यवस्था में बल्ब नहीं जलता। क्या आप सम्भावित कारणों की सूची बना सकते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।



चित्र 14.10

5. दो द्रवों A तथा B, के विद्युत चालन की जाँच करने के लिए एक संपरीक्षित्र का प्रयोग किया गया। यह देखा गया कि संपरीक्षित्र का बल्ब द्रव A के लिए चमकीला दीप्त हुआ जबकि द्रव B के लिए अत्यंत धीमा दीप्त हुआ। आप निष्कर्ष निकाल सकते हैं किः

(i) द्रव A, द्रव B से अच्छा चालक है।

(ii) द्रव B, द्रव A से अच्छा चालक है।

(iii) दोनों द्रवों की चालकता समान है।

(iv) द्रवों की चालकता के गुणों की तुलना इस प्रकार नहीं की जा सकती।

6. क्या शुद्ध जल विद्युत का चालन करता है? यदि नहीं, तो इसे चालक बनाने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

7. आग लगने के समय, .फायरमैन पानी के हौज़ (पाइपों) का उपयोग करने से पहले उस क्षेत्र की मुख्य विद्युत आपूर्ति को बन्द कर देते हैं। व्याख्या कीजिए कि वे एेसा क्यों करते हैं।

8. तटीय क्षेत्र में रहने वाला एक बालक अपने संपरीक्षित्र से पीने के पानी तथा समुद्र के पानी का परीक्षण करता है। वह देखता है कि समुद्र के पानी के लिए चुंबकीय सुई अधिक विक्षेप दर्शाती है। क्या आप इसके कारण की व्याख्या कर सकते हैं?

9. क्या तेज़ वर्षा के समय किसी लाइनमैन के लिए बाहरी मुख्य लाइन के विद्युत तारों की मरम्मत करना सुरक्षित होता है? व्याख्या कीजिए।

10. पहेली ने सुना था कि वर्षा का जल उतना ही शुद्ध है जितना कि आसुत जल। इसलिए उसने एक स्वच्छ काँच के बर्तन में कुछ वर्षा का जल एकत्रित करके संपरीक्षित्र से उसका परीक्षण किया। उसे यह देखकर आश्चर्य हुआ कि चुंबकीय सुई विक्षेप दर्शाती है। इसका क्या कारण हो सकता है?

11. अपने आस-पास उपलब्ध विद्युतलेपित वस्तुओं की सूची बनाइए।

12. जो प्रक्रिया आपने क्रियाकलाप 14.7 में देखी वह कॉपर के शोधन में उपयोग होती है। एक पतली शुद्ध कॉपर छड़ एवं एक अशुद्ध कॉपर की छड़ इलेक्ट्रोड के रूप में उपयोग की जाती है। कौन-सा इलेक्ट्रोड बैटरी के धन टर्मिनल से संयोजित किया जाए। कारण भी लिखिए?


विस्तारित अधिगम - क्रियाकलाप एवं परियोजनाएँ

1. विभिन्न फलों तथा सब्जियों से होकर विद्युत चालन का परीक्षण कीजिए। अपने परिणामों को सारणीबद्ध करके प्रदर्शित कीजिए।

2. क्रियाकलाप 14.7 को बैटरी के ऋण टर्मिनल से ताँबे की प्लेट के स्थान पर जिंक की प्लेट संयोजित करके दोहराइए। अब जिंक की प्लेट के स्थान पर कोई अन्य धात्विक वस्तु लीजिए तथा क्रियाकलाप को पुनः दोहराइए। अपनी उपलब्धियों की अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए।

3. ज्ञात कीजिए कि क्या आपके शहर में कोई विद्युतलेपन की व्यापारिक इकाई है। वहाँ पर किन वस्तुओं का तथा किस प्रयोजन से, विद्युतलेपन किया जाता है? (व्यापारिक इकाई में विद्युतलेपन की प्रक्रिया हमारे क्रियाकलाप 14.7 में किए गए विद्युतलेपन से अत्यंत जटिल है)। ज्ञात कीजिए कि प्रयोग में आ चुके अपशिष्ट रसायनों का वे किस प्रकार निपटान करते हैं।

4. मान लीजिए, आप एक उद्योग-उपक्रमी हैं तथा आपको एक छोटी विद्युतलेपन की इकाई स्थापित करने के लिए बैंक से ऋण दिया गया है। आप किन वस्तुओं का तथा किस प्रयोजन से विद्युतलेपन करना चाहेंगे?

5. क्रोमियम विद्युतलेपन से संबंधित स्वास्थ्य चिन्ताओं का पता लगाइए। इनको हल करने के लिए क्या प्रयत्न किए जा रहे हैं?

6. आप अपने लिए एक रोचक पेन बना सकते हैं। धातु की एक चालक प्लेट लीजिए और इस पर पोटेशियम आयोडाइड तथा स्टॉर्च का गीला पेस्ट फैलाइए। चित्र 14.11 में दर्शाए अनुसार प्लेट को एक बैटरी से संयोजित कीजिए। अब तार के स्वतन्त्र सिरे का उपयोग करते हुए पेस्ट पर कुछ अक्षर लिखिए। आप क्या देखते हैं?


चित्र 14.11

इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए निम्न वेबसाइट देखिए–

electronics.howstuffworks.com/led.htm


क्या आप जानते हैं?

LEDs (प्रकाश उत्सर्जक डायोड) अनेक रंगों जैसे लाल, हरे, पीले, नीले, सफेद में उपलब्ध हैं तथा अनेक अनुप्रयोगों में इनका उपयोग बढ़ता जा रहा है जैसे ट्रैफिक सिग्नल लाइट में प्रकाश के लिए LEDs का प्रयोग बढ़ता जा रहा है। श्वेत LEDs का एक गुच्छा एक साथ लगाने पर LED का एक प्रकाश स्रोत बनता है। LED प्रकाश स्रोत ऊर्जा की कम खपत करते हैं। ये प्रकाश बल्ब तथा प्रतिदीप्त नलिकाओं (ट्यूब लाइट) से अधिक अवधि तक कार्य करते हैं। इसीलिए ये धीरे-धीरे पसंदीदा प्रकाश स्रोत बन रहे हैं।


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