ध्वनि अपने विद्यालय में आपको वैफसे ज्ञात होता है कि कालांश ;पीरियडद्ध समाप्त हो गया है? दरवाशे की घंटी की ध्वनि अथवा खटखटाने ;दस्तकद्ध की आवाश सुनकर आपको तुरन्त पता चल जाता है कि आपके दरवाशे पर कोइर् आया है। प्रायः पदचाप सुन कर ही आप जान लेते हैं कि कोइर् आपकी ओर आ रहा है। आपने लुका - छिपी का खेल खेला होगा। इस खेल में एक ख्िालाड़ी की आँखों पर पटðी बाँध दी जाती है और उसे अन्य ख्िालाडि़यों को पकड़ना होता है। आँखों पर पटðी बँधे होने पर भी उस ख्िालाड़ी को वैफसे पता चल जाता है कि उसके सबसे समीप कोइर् ख्िालाड़ी है? ध्वनि का हमारे जीवन में एक महत्त्वपूणर् स्थान है। एक दूसरे से सम्पवर्फ करने में यह हमारी सहायता करती है। अपने चारों ओर हमें विभ्िान्न प्रकार की ध्वनियाँ सुनाइर् पड़ती हैं। अपने आस - पास सुनाइर् देने वाली ध्वनियों की एक सूची बनाइए। अपने विद्यालय के संगीत कक्ष में आप बाँसुरी, तबला, हारमोनियम आदि वाद्य यंत्रों की ध्वनियाँ सुनते हैं ;चित्रा 13.1द्ध। ध्वनि वैफसे उत्पन्न होती है? यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक किस प्रकार पहुँचती है? ध्वनि को हम वैफसे सुन पाते हैं? वुफछ ध्वनियाँ दूसरों की अपेक्षा प्रबल क्यों होती हैं? इस अध्याय में हम ऐसे ही वुफछ प्रश्नों पर विचार - विमशर् करेंगे। चित्रा 13.1: वुफछ वाद्य यंत्रा। 13.1 ध्वनि वंफपित वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है विद्यालय की घंटी को, जब बज न रही हो, छूकर देख्िाए। आप वैफसा अनुभव करते हैं? जब वह ध्वनि उत्पन्न कर रही हो तो इसे पुनः छूकर देख्िाए। क्या आप इसे वंफपित होता हुआ अनुभव कर सकते हैं? ियाकलाप 13.1 ियाकलाप 13.2 कक्षा सात में आप अध्ययन कर चुके हैं कि किसी वस्तु की अपनी माध्य स्िथति के इधर - उधर या आगे पीछे होने वाली गति को वंफपन कहते हैं। जब कस कर तानित एक रबड़ के छल्ले को कष्िार्त ;चसनबाद्ध करते हैं या बीच से खींच कर छोड़ते हैं तो यह वंफपन करता है और ध्वनि उत्पन्न करता है। जब यह वंफपन करना बंद कर देता है तो ध्वनि बंद हो जाती है। ियाकलाप 13.3 धातु की एक थाली लीजिए। इसमें वुफछ जल डालिए। एक चम्मच से इसके किनारे पर आघात कीजिए ;चित्रा 13.4द्ध। क्या आप ध्वनि सुन पाते हैं? थाली पर पुनः आघात कीजिए और तब इसे छूकर देख्िाए। क्या आप थाली का वंफपित होता अनुभव करते हैं? थाली पर पुनः आघात कीजिए। जल की सतह को देख्िाए। क्या आप वहाँ पर कोइर् तरंगें देख पाते हैं? अब थाली को पकडि़ए। आप जल की सतह पर क्या परिवतर्न देखते हैं? क्या आप इस परिवतर्न की व्याख्या कर सकते हैं? क्या इससे वस्तु के वंफपनों को ध्वनि के साथ जोड़ने का कोइर् संकेत मिलता है? इस प्रकार हमने देखा कि वंफपायमान वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं। वुफछ स्िथतियों में ये वंफपन हमें आसानी से दिखाइर् दे जाते हैं। लेकिन अिाकांश स्िथतियों में उनका आयाम ;ंउचसपजनकमद्ध इतना कम होता है कि हम उन्हें देख नहीं पाते। तथापि, हम इन वंफपनों का अनुभव कर सकते हैं। ियाकलाप 13.4 क्रम संख्या वाद्ययंत्रा ध्वनि उत्पन्न करने वाला वंफपमान भाग 1 वीणा तानित डोरी/तार 2 तबला तानित झिल्ली 3 बाँसुरी वायु - स्तंभ 4 .......... ......................... 5 .......... ......................... 6 .......... ......................... 7 .......... ......................... सम्भवतः आपने मंजीरा ;झाँझद्ध, घटम तथा नूट ;मिटðी के बतर्नद्ध तथा करताल देखे होंगे। ये वाद्ययंत्रा सामान्यतः हमारे देश के अनेक भागों में बजाए जाते हैं। इन वाद्ययंत्रों को केवल पीटा या आघात किया जाता है। क्या आप इस प्रकार के वुफछ अन्य वाद्ययंत्रों के नाम बता सकते हैं? आप भी एक वाद्ययंत्रा बना सकते हैं। घटम ियाकलाप 13.5 जब हम किसी वाद्ययंत्रा, जैसे सितार, के तार को कष्िार्त करते हैं तो हमें केवल तार की ही ध्वनि सुनाइर् नहीं देती है। वास्तव में सम्पूणर् यंत्रा वंफपन करता है और इस पूरे यंत्रा के वंफपन से उत्पन्न ध्वनि को हम सुनते हैं। इसी प्रकार जब हम किसी मृदंगम की झिल्ली पर आघात करते हैं तो हम केवल झिल्ली की आवाश ही नहीं सुनते बल्िक सम्पूणर् यंत्रा की आवाश सुनते हैं। 13.2 मनुष्यों ;मानवोंद्ध द्वारा उत्पन्न ध्वनि वुफछ समय तक जोर से बोलिए या गाना गाइए अथवा भौंरे की तरह गुंजन कीजिए। चित्रानुसार ;13.7द्ध अपने हाथ को अपने वंफठ पर रख्िाए। क्या आपको वुफछ वंफपनों का अनुभव होता है? मानवों में ध्वनि वाकयंत्रा अथवा वंफठ ;संतलदगद्ध द्वारा उत्पन्न होती है। अपनी अंगुलियों को वंफठ पर रख्िाए तथा एक कठोर उभार को खोजिए जो निगलते समय चलता हुआ प्रतीत होता है। शरीर का यह भागवाकयंत्रा कहलाता है। यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर होता है। वाकयंत्रा या वंफठ के आर - पार दो वाव्फ - तंतु इस प्रकार तानित होते हैं कि उनके बीच में वायु के निकलने के लिए एक संकीणर् झिरी बनी होती है ;चित्रा 13.8द्ध। चित्रा 13.8: मानवों में वाकयंत्रा। जब पेफपफड़े वायु को बलपूवर्क झिरी से बाहर निकालते हैं तो वाव्फ - तंतु वंफपित होते हैं जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है। वाव्फ - तंतुओं से जुड़ी मांसपेश्िायाँ तंतुओं को तना हुआ या ढीला कर सकती हैं। जब वाव्फ - तंतु तने हुए और पतले होते हैं तब वाव्फ ध्वनि का प्रकार या अपने मित्रा को पिफर से टेलीपफोन करने के लिए संकेत दीजिए। गिलास में से वायु को मुँह द्वारा खींचते हुए घंटी की आवाश को सुनिए। क्या गिलास में से वायु बाहर खींचने पर घंटी की ध्वनि धीमी हो जाती है? गिलास को अपने मुँह से हटाइए। क्या ध्वनि पिफर से प्रबल हो जाती है? क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा क्यों हुआ? क्या यह संभव है कि गिलास में वायु की मात्रा कम होने और घंटी की प्रबलता कम होने में कोइर् संबंध है? वास्तव में, यदि आप गिलास में से सारी वायु बाहर खींच पाते तो ध्वनि पूरी तरह सुनाइर् देना बंद हो जाती। इसका कारण यह है कि ध्वनि को संचरण ;एक जगह से दूसरी जगह जानेद्ध के लिए कोइर् माध्यम चाहिए। जब किसी बतर्न में से वायु पूरी तरह निकाल दी जाती है तो कहा जाता है कि बतर्न में निवार्त है? ध्वनि निवार्त में संचरित नहीं हो सकती। क्या ध्वनि द्रवों में संचरित होती है। आइए ज्ञात करें। ियाकलाप 13.8 एक बाल्टी अथवा स्नान - टब लीजिए। इसे स्वच्छ जल से भरिए। एक हाथ में एक छोटी घंटी लीजिए। ध्वनि उत्पन्न करने के लिए इस घंटी को जल में हिलाइए। ध्यान रख्िाए कि घंटी बाल्टी या टब की दीवारों को न छुए। अपने कान को जल की सतह पर चित्रा 13.11: ध्वनि जल में संचरित होते हुए। सावधानीपूवर्क रख्िाए ;चित्रा 13.11द्ध। ;सतवर्फ रहेंः जल आपके कान में प्रवेश न करेद्ध। क्या आप घंटी की ध्वनि सुन पाते हैं? क्या इससे पता चलता है कि ध्वनि का संचरण द्रवों में हो सकता है? आइए ज्ञात करें कि क्या ध्वनि ठोसों में भी गमन कर सकती है। ियाकलाप 13.9 आप अपने कान को लकड़ी या धातु की किसी लंबी मेश के एक सिरे पर रखकर तथा अपने मित्रा को दूसरे सिरे को खरोंचने के लिए कह कर भी उपरोक्त ियाकलाप कर सकते हैं ;चित्रा 13.13द्ध। चित्रा 13.13: ध्वनि ठोस पदाथो± में संचरण कर सकती है। हमने देखा कि ध्वनि लकड़ी या धातु में चल सकती है। वास्तव में, ध्वनि किसी भी ठोस में संचरण कर सकती है। आप एक मनोरंजक ियाकलाप द्वारा यह दशार् सकते हैं कि ध्वनि डोरियों में भी चल सकती है। अपने बनाए हुए ख्िालौना टेलीपफोन को याद कीजिए ;चित्रा 13.14द्ध। क्या आप कह सकते हैं कि ध्वनि डोरियों में भी गमन कर सकती है? चित्रा 13.14: ख्िालौना टेलीपफोन। अब तक हमने सीखा कि वंफपायमान वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न कर सकती हैं तथा यह किसी माध्यम में सभी दिशाओं में संचरित हो सकती है। इस ध्वनि को हम सुनते वैफसे हैं? 13.4 हम ध्वनि को अपने कानों द्वारा सुनते हैं कान के बाहरी भाग की आकृति कीप ;पफनलद्ध जैसी होती है। जब ध्वनि इसमें प्रवेश करती है तो यह एक नलिका से गुजरती है जिसके सिरे पर एक पतली झिल्ली दृढ़ता से तानित होती है। इसे कणर् पटह ;मंतकतनउद्ध कहते हैं। यह एक महत्वपूणर् कायर् करता है। यह जानने के लिए कि कणर् पटह क्या कायर् करता है, आइए टिन के डिब्बे का एक कणर् पटह बनाएँ। ियाकलाप 13.10 एक प्लास्िटक अथवा टिन का डिब्बा लीजिए। इसके दोनों सिरे काटिए। डिब्बे के एक सिरे पर एक रबड़ के गुब्बारे को तानिए और इसे एक रबड़के छल्ले से कस दीजिए। तानित रबड़ के ऊपर सूखे अन्न या थमोर्कोल के चार या पाँच दाने रख्िाए। अब अपने मित्रा से डिब्बे के खुले सिरे पर ‘‘हुरेर्, हुरेर्’’ बोलने के लिए कहिए ;चित्रा 13.14द्ध। देख्िाए कि अन्न के दानों का क्या होता है। अन्नके दाने ऊपर और नीचे क्यों उछलते हैं? कणर् पटह एक तानित रबड़ की शीट के समान होता है। ध्वनि के कम्पन कणर् पटह को वंफपित करते हैं ;चित्रा 13.16द्ध। कणर् पटह वंफपनों को आंतर कणर् ;पददमत मंतद्ध तक भेज देता है। वहाँ से संकेतों को मस्ितष्क तक भेज दिया जाता है। इस प्रकार हम ध्वनि को सुनते हैं। 13.5 वंफपन का आयाम, आवतर्काल तथाआवृिा हम जानते हैं कि किसी वस्तु का बार - बार इधर - उधर गति करना वंफपन कहलाता है। इस गति को दोलन गति भी कहते हैं। आप पिछली कक्षाओं में दोलन गति तथा इसके आवतर्काल के बारे में पढ़ चुके हैं। प्रति सेवंफड होने वाले दोलनों की संख्या को दोलन की आवृिा कहते हैं। आवृिा को हट्र्श में मापा जाता है। इसका संकेत भ््र है। 1 भ््र आवृिा एक दोलन प्रति सेवंफड के बराबर होती है। यदि कोइर् वस्तु एकसेवंफड में 20 दोलन पूरे करती है तो इसकी आवृिा क्या होगी? ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु को देखे बगैर भी आप अनेक सुपरिचित ध्वनियों को पहचान सकते हैं। यह वैफसे सम्भव हो पाता है? इसके लिए यह आवश्यक है कि ये ध्वनियाँ भ्िान्न प्रकार की हों। क्या आपने कभी सोचा कि कौन से कारक इन्हें भ्िान्न बनाते हैं।आयाम तथा आवृिा किसी ध्वनि के दो महत्वपूणर् गुणहैं। क्या हम ध्वनियों में उनके आयामों तथा आवृिायों के आधार पर अन्तर कर सकते हैं? प्रबलता तथा तारत्व ियाकलाप 13.11 तथा पिफर से उत्पन्न ध्वनि को सुनिए। क्या गिलास पर जोर से आघात करने पर ध्वनि अिाक प्रबल हो जाती है? अब गिलास के किनारे को छूते हुए थमोर्कोल की एक छोटी सी गेंद लटकाइए ;चित्रा 13.17द्ध। गिलास को वफम्िपत कराइए। देख्िाए कि गेंद कितनी दूर विस्थापित होती है। गेंद का विस्थापन गिलास के वंफपन के आयाम की माप है। ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निभर्र करती है। जब किसी वंफपित वस्तु का आयाम अिाक होता है तो इसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रबल होती है। जब आयाम कम होता है तो उत्पन्न ध्वनि मंद होती है। अब गिलास को पहले ध्ीमे तथा बाद में अिाक बल से आघात कीजिए। अब, दोनों स्िथतियों में गिलास के वंफपनों के आयामों की तुलना कीजिए। किस स्िथति में आयाम अिाक है? ध्वनि की प्रबलता ध्वनि उत्पन्न करने वाले वंफपनों के आयाम के वगर् के समानुपातिक है। उदाहरण के लिए, यदि आयाम दुगुना हो जाए तो प्रबलता 4 के गुणक में बढ़ जाती है। प्रबलता को डेसिबेल ;कठद्ध मात्राक में व्यक्त करते हैं। निम्न सारणी विभ्िान्न स्रोतों से आने वाली ध्वनि की प्रबलता का वुफछ बोध कराती है। किसी बच्चे की ध्वनि की तुलना एक वयस्क से कीजिए। क्या इनमें वुफछ अन्तर है? चाहे दोनों ध्वनियाँ समान रूप से प्रबल हों, पिफर भी उनमें वुफछ भ्िान्नता है। आइए देखें ये किस प्रकार भ्िान्न हैं। मैं चकित हूँ कि मेरी आवाश मेरे अध्यापक से भ्िान्न क्यों है। आवृिा ध्वनि की तीक्ष्णता या तारत्व को निधार्रितकरती है। यदि वंफपन की आवृिा अिाक है तो हमकहते हैं कि ध्वनि तीखी है। यदि वंफपन की आवृिा कम है तो हम कहते हैं कि ध्वनि का तारत्व कम है। सामान्य श्वास 10 कठ मंद पुफसपुफसाहट 30 कठ सामान्य बातचीत/वातार्लाप 60 कठ व्यस्त यातायात 70 कठ औसत पैफक्टरी 80 कठ 80 कठ से अध्िक प्रबल शोर शरीर के लिए कष्टदायक होता है। ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निभर्र करती है। जब किसी वंफपित वस्तु का आयाम अध्िक होता है तो इसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रबल होती है। जब आयाम छोटा होता है तो उत्पन्न ध्वनि मंद होती है। चित्रा 13.18: आवृिा ध्वनि का तारत्व निधार्रित करती है। उदाहरण के लिए, ढोल मंद आवृिा से वंफपित होता है। इसलिए यह कम तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करता है।दूसरी ओर, सीटी की आवृिा अिाक होती है और इसलिए अिाक तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करती है ;चित्रा 13.18द्ध। पक्षी उच्च तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करता है जबकि शेर की दहाड़ का तारत्व मंद होता है। तथापि, शेर की दहाड़ अत्यिाक प्रबल है जबकि पक्षी की ध्वनि दुबर्ल होती है। आप प्रतिदिन बच्चों तथा वयस्कों की आवाशें सुनते हैं। क्या आप उनकी आवाशों में कोइर् अन्तर पाते हैं? क्या आप कह सकते हैं कि बच्चे की आवाश कीआवृिा वयस्क की आवाश की आवृिा से अिाक है? सामान्यतः एक महिला की आवाश किसी पुरुष की अपेक्षा अिाक आवृिा की तथा अिाक तीखी होती है। 13.6 श्रव्य तथा अश्रव्य ध्वनियाँ हम जानते हैं कि ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हमें एक वंफपायमान वस्तु की आवश्यकता होती है। क्या हम सभी वंफपायमान वस्तुओं की ध्वनियाँ सुन सकते हैं? तथ्य यह है कि लगभग 20 वंफपन प्रति सेवंफड ;20 भ््रद्ध से कम आवृिा की ध्वनियाँ मानव कान सुन नहीं सकता। यह कह सकते हैं कि 20 भ््र से कम आवृिा की ध्वनियाँ मानव कान द्वारा संसूचित नहीं की जा सकतीं। ऐसी ध्वनियों को अश्रव्य कहते हैं। उधर लगभग 20,000 वंफपन प्रति सेवंफड ;20 ा भ््रद्ध से अिाक आवृिा की ध्वनियाँ भी मानव कान द्वारा संसूचित नहीं वुफछ जंतु 20,000 भ््र से अिाक की आवृिा की ध्वनियों को भी सुन सकते हैं। वुफत्तों में यह क्षमता है।पुलिसकमीर् उच्च आवृिा की ध्वनि उत्पन्न करने वालीसीटियों का उपयोग करते हैं जिसे वुफत्ते सुन सकते हैं लेकिन मानव नहीं सुन पाते। जाने माने पराश्रव्य ध्वनि ;नसजतंेवनदकद्ध उपकरण जो चिकित्सा के क्षेत्रा में अनेक समस्याओं के अनुसंधान एवं निदान के लिए प्रयोग होते हैं, 20,000 भ््र से अिाक की आवृिा पर कायर् करते हैं। होतीं। अतः मानव कानों के लिए श्रव्य की आवृिा का परास ;त्ंदहमद्ध लगभग 20 भ््र से 20,000 भ््र तक है। इसका अथर् यह है कि हम केवल 20 भ््र दृ 20 ा भ््र के बीच की आवृिा वाली ध्वनियाँ ही सुन सकते हैं। 13.7 शोर तथा संगीत हम अपने चारों ओर विभ्िान्न प्रकार की ध्वनियाँ सुनते हैं? क्या ध्वनि सदैव सुखद होती है। क्या ध्वनि कभी - कभी आपको कष्ट पहुँचाती है? वुफछ ध्वनियाँ आपको सुखद लगती हैं जबकि वुफछ अच्छी नहीं लगतीं। मान लीजिए आपके अड़ोस - पड़ोस में निमार्ण कायर् चल रहा है। क्या निमार्ण स्थल से आने वाली ध्वनियाँ सुखद प्रतीत होती हैं? क्या आपको बसों तथा ट्रकों के हाॅनर् ;ीवतदेद्ध की ध्वनियाँ अच्छी लगती हैं? इस प्रकार की अपि्रय ध्वनियों को शोर कहते हैं। कक्षा में यदि सभी विद्याथीर् एक साथ बोलें तो उत्पन्न होने वाली ध्वनि को क्या कहेंगे? दूसरी ओर आप वाद्ययंत्रों की ध्वनियों का आनन्द लेते हैं। सुस्वर ध्वनि वह है जो कानों को सुखद लगती है। हारमोनियम द्वारा उत्पन्न ध्वनि सुस्वर ध्वनि कहलाती है। ;सितार के तार द्वारा उत्पन्न ध्वनि भी सुस्वर ध्वनि कहलाती है।द्ध लेकिन यदि संगीत अत्यंत प्रबल हो जाए, तब भी क्या ये संगीत रहेगा? 13.8 शोर प्रदूषण आप वायु प्रदूषण के बारे में पहले से ही जानते हैं। वायु में अवांछित गैसों तथा कणों की उपस्िथति वायु प्रदूषण कहलाती है। इसी प्रकार, वातावरण में अत्यिाक या अवांछित ध्वनियों को शोर प्रदूषण कहते हैं। क्या आप शोर प्रदूषण के वुफछ स्रोतों की सूची बना सकते हैं? शोर प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं, वाहनों की ध्वनियाँ, विस्पफोट जिसमें पटाखों का पफटना भी सम्िमलित है, मशीनें, लाउडस्पीकर आदि। घर में कौन से स्रोत शोर उत्पन्नकर सकते हैं? ऊँची आवाश में चलाए गए टेलिविशन तथा ट्रांजिस्टर रेडियो, रसोइर्घर के वुफछ उपकरण ;ंचचसपंदबमेद्धए वूफलर ;ब्ववसमतेद्ध, वातानुवूफलक, सभीशोर प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं। शोर प्रदूषण की क्या हानियाँ हैं? क्या आप जानते हैं कि परिवेश में अत्यिाक शोर की उपस्िथति अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। अनिद्रा, अति तनाव ;उच्च रक्त - चापद्ध, चिन्ता तथा अन्य बहुत से स्वास्थ्य संबंधी विकार शोर - प्रदूषण से उत्पन्न हो सकते हैं। लगातार प्रबल ध्वनि के प्रभाव में रहने वाले व्यक्ित की सुनने की क्षमता अस्थायी अथवा स्थायी रूप से कम हो जाती है। शोर प्रदूषण को सीमित रखने के उपाय शोर को नियंत्रिात करने के लिए हमें शोर के स्रोतों पर नियंत्राण करना चाहिए। यह वैफसे किया जा सकता है? इसके लिए वायुयानों के इंजनों, यातायात के वाहनों, औद्योगिक मशीनों तथा घरेलू उपकरणों में रवशामक युक्ितयाँ ;ेपसमदबमतद्ध लगानी चाहिए। आवासीय क्षेत्रों में शोर प्रदूषण को वैफसे नियंत्रिात किया जा सकता है? शोर उत्पन्न करने वाले ियाकलापों को आवासीय क्षेत्रों से दूर संचालित करना चाहिए। शोर उत्पन्न करने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए। स्वचालित वाहनों के हाॅनर् का उपयोग कम से कम करना चाहिए। टेलिविशन तथा संगीत निकायों की ध्वनि प्रबलता कम रखनी चाहिए। शोर प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए सड़कों तथा भवनों के आस - पास पेड़ लगाने चाहिए, जिससे कि ध्वनि आवासों तक न पहुँच पाए। श्रवण क्षति पूणर्तया श्रवण क्षति जो कि विरले ही होती है, प्रायः जन्म से होती है। आंश्िाक अशक्तता ;कपेंइपसपजलद्ध सामान्यतः किसी बीमारी, चोट या उम्र के कारण होती है। कठिन श्रवण शक्ित वाले बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे बच्चे इंगित भाषा ;संकेत भाषाद्ध को सीख कर प्रभावशाली ढंग से सम्पवर्फ कर सकते हैं। क्योंकि वाव्फ शक्ित श्रवण के परिणामस्वरूप विकसित होती है, इसलिए श्रवण अशक्तता से ग्रस्त बच्चे की वाव्फ शक्ित भी दोषपूणर् हो सकती है। औद्योगिकीय/प्रौद्योगिकीय युक्ितयों ने श्रवण क्षतिग्रस्त व्यक्ितयों के जीवन की गुणता में सुधाार को सम्भव बना दिया है। श्रवण क्षतिग्रस्तों के रहन - सहन के वातावरण में सुधार लाने के लिए समाज बहुत वुफछ कर सकता है। आपने क्या सीखा ऽ ध्वनि वंफपन करती हुइर् वस्तु द्वारा उत्पन्न होती है। ऽ मानव वाव्फ - तंतुओं के वंफपन द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं। ऽ ध्वनि किसी माध्यम ;गैस, द्रव या ठोसद्ध में संचरित होती है। यह निवार्त में संचरित नहीं हो सकती। ऽ कणर् पटह ध्वनि के वंफपनों को अनुभव करते हैं। यह इन संकेतों को मस्ितष्क तक भेज देते हैं। इस प्रिया को श्रवण कहते हैं। ऽ प्रति सेवंफड होने वाले दोलनों या वंफपनों की संख्या दोलन की आवृिा कहलाती है। ऽ आवृिा को हट्र्श ;भ््रद्ध में व्यक्त करते हैं। ऽ वंफपन का आयाम जितना अिाक होता है, ध्वनि उतनी ही प्रबल होती है। ऽ वंफपन की आवृिा अिाक होने पर तारत्व अिाक होता है और ध्वनि अिाक तीक्ष्ण होती है। ऽ अपि्रय ध्वनियाँ शोर कहलाती हैं। ऽ अत्यिाक या अवांछित ध्वनियाँ शोर प्रदूषण उत्पन्न करती हैं। शोर प्रदूषण मानवों के लिए स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है। ऽ शोर प्रदूषण को न्यूनतम करने के प्रयास करने चाहिए। ऽ सड़क के किनारे तथा अन्य स्थानों पर पेड़ लगाने से शोर प्रदूषण को कम किया जा सकता है। अभ्यास अ भ् या स2.निम्न में से किस वाव्फ ध्वनि की आवृिा न्यूनतम होने की सम्भावना हैμ ;कद्ध छोटी लड़की की ;खद्ध छोटे लड़के की ;गद्ध पुरुष की ;घद्ध महिला की 3.निम्नलिख्िात कथनों में सही कथन के सामने श्ज्श् तथा गलत कथन के सामने श्थ्श् पर निशान लगाइएμ ;कद्ध ध्वनि निवार्त में संचरित नहीं हो सकती। ;ज्ध्थ्द्ध ;खद्ध किसी वंफपित वस्तु के प्रति सेवंफड होने वाले दोलनों की संख्या को इसका आवतर्काल कहते हैं। ;ज्ध्थ्द्ध ;गद्ध यदि वंफपन का आयाम अिाक है तो ध्वनि मंद होती है। ;ज्ध्थ्द्ध ;घद्ध मानव कानों के लिए श्रव्यता का परास 20 भ््र से 20,000 भ््र है। ;ज्ध्थ्द्ध ;घद्ध वंफपन की आवृिा जितनी कम होगी तारत्व उतना ही अिाक होगा। ;ज्ध्थ्द्ध ;चद्ध अवांछित या अपि्रय ध्वनि को संगीत कहते हैं। ;ज्ध्थ्द्ध ;छद्ध शोर प्रदूषण आंश्िाक श्रवण अशक्तता उत्पन्न कर सकता है। ;ज्ध्थ्द्ध 4.उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएμ ;कद्ध किसी वस्तु द्वारा एक दोलन को पूरा करने में लिए गए समय को कहते हैं। ;खद्ध प्रबलता वफम्पन के से निधार्रित की जाती है। ;गद्ध आवृिा का मात्राक है। ;घद्ध अवांछित ध्वनि को कहते हैं। ;घद्ध ध्वनि की तीक्ष्णता वंफपनों की से निधार्रित होती है। 5.एक दोलक 4 सेवंफड में 40 बार दोलन करता है। इसका आवतर्काल तथा आवृिा ज्ञात कीजिए। 6.एक मच्छर अपने पंखों को 500 वफम्पन प्रति सेवंफड की औसत दर से वंफपित करके ध्वनि उत्पन्न करता है। वंफपन का आवतर्काल कितना है? 7.निम्न वाद्ययंत्रों में उस भाग को पहचानिए जो ध्वनि उत्पन्न करने के लिए वंफपित होता हैμ ;कद्ध ढोलक ;खद्ध सितार ;गद्ध बाँसुरी 8.शोर तथा संगीत में क्या अंतर है? क्या कभी संगीत शोर बन सकता है? 9.अपने वातावरण में शोर प्रदूषण के स्रोतों की सूची बनाइए। 10.वणर्न कीजिए कि शोर प्रदूषण मानव के लिए किस प्रकार से हानिकारक है? 11.आपके माता - पिता एक मकान खरीदना चाहते हैं। उन्हें एक मकान सड़क के किनारे पर तथा दूसरा सड़क से तीन गली छोड़ कर देने का प्रस्ताव किया गया है। आप अपने माता - पिता को कौन - सा मकान खरीदनेका सुझाव देंगे? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए। 12.मानव वाव्फयंत्रा का चित्रा बनाइए तथा इसके कायर् की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए। 13.आकाश में तडि़त तथा मेघगजर्न की घटना एक समय पर तथा हमसे समान दूरी पर घटित होती है। हमें तडि़त पहले दिखाइर् देती है तथा मेघगजर्न बाद में सुनाइर् देता है। क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते हैं?

>Chapter-13>

Our Past -3

अध्याय 13

ध्वनि

अपने विद्यालय में आपको कैसे ज्ञात होता है कि कालांश (पीरियड) समाप्त हो गया है? दरवाज़े की घंटी की ध्वनि अथवा खटखटाने (दस्तक) की आवाज़ सुनकर आपको तुरन्त पता चल जाता है कि आपके दरवाज़े पर कोई आया है। प्रायः पदचाप सुन कर ही आप जान लेते हैं कि कोई आपकी ओर आ रहा है।

आपने लुका-छिपी का खेल खेला होगा। इस खेल में एक खिलाड़ी की आँखों पर पट्टी बाँध दी जाती है और उसे अन्य खिलाड़ियों को पकड़ना होता है। आँखों पर पट्टी बँधे होने पर भी उस खिलाड़ी को कैसे पता चल जाता है कि उसके सबसे समीप कोई खिलाड़ी है?

ध्वनि का हमारे जीवन में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। एक दूसरे से सम्पर्क करने में यह हमारी सहायता करती है। अपने चारों ओर हमें विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई पड़ती हैं।

अपने आस-पास सुनाई देने वाली ध्वनियों की एक सूची बनाइए।

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चित्र 13.1 : कुछ वाद्य यंत्र।

अपने विद्यालय के संगीत कक्ष में आप बाँसुरी, तबला, हारमोनियम आदि वाद्य यंत्रों की ध्वनियाँ सुनते हैं (चित्र 13.1)।

ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है? यह एक स्थान से दूसरे स्थान तक किस प्रकार पहुँचती है? ध्वनि को हम कैसे सुन पाते हैं? कुछ ध्वनियाँ दूसरों की अपेक्षा प्रबल क्यों होती हैं? इस अध्याय में हम एेसे ही कुछ प्रश्नों पर विचार-विमर्श करेंगे।

13.1 ध्वनि कंपित वस्तुओं द्वारा उत्पन्न होती है

विद्यालय की घंटी को, जब बज न रही हो, छूकर देखिए। आप कैसा अनुभव करते हैं? जब वह ध्वनि उत्पन्न कर रही हो तो इसे पुनः छूकर देखिए। क्या आप इसे कंपित होता हुआ अनुभव कर सकते हैं?

क्रियाकलाप 13.1

धातु की एक प्लेट (अथवा एक कड़ाही) लीजिए। इसे किसी सुविधाजनक स्थान पर इस प्रकार लटकाइए कि यह किसी दीवार को न छुए। अब इस पर किसी छड़ी से चोट मारिए (चित्र 13.2)। क्या आपको कोई ध्वनि सुनाई पड़ती है? प्लेट अथवा कड़ाही को धीमे से अपनी अँगुली से छूकर देखिए। क्या आप कंपनों का अनुभव करते हैं?

प्लेट पर फिर से छड़ी से चोट मारिए तथा चोट मारने के तुरंत बाद इसे अपने हाथों से कस कर पकड़ लीजिए। क्या आप अब भी ध्वनि सुन पाते हैं? जब प्लेट ध्वनि उत्पन्न करना बंद कर दे तब इसे फिर से छूकर देखिए। क्या अब आप कंपनों का अनुभव कर पाते हैं?

चित्र 13.2 : एक उथली कड़ाही पर चोट मारते हुए।


क्रियाकलाप 13.2

बड़ का एक छल्ला लीजिए। इसे चित्र 13.3 में दिखाए अनुसार एक पेंसिल बॉक्स पर चढ़ाइए। बॉक्स तथा तानित रबड़ के बीच में दो पेंसिलें लगाइए। अब रबड़ के छल्ले को लगभ बीच में से खींच कर छोड़ दीजिए। क्या आपको कोई ध्वनि सुनाई देती है? क्या रबड़ का छल्ला कंपन करता है?


चित्र 13.3 : रबड़ के छल्ले को कर्षित (pluck) करना।


कक्षा सात में आप अध्ययन कर चुके हैं कि किसी वस्तु की अपनी माध्य स्थिति के इधर-उधर या आगे पीछे होने वाली गति को कंपन कहते हैं। जब कस कर तानित एक रबड़ के छल्ले को कर्षित (pluck) करते हैं या बीच से खींच कर छोड़ते हैं तो यह कंपन करता है और ध्वनि उत्पन्न करता है। जब यह कंपन करना बंद कर देता है तो ध्वनि बंद हो जाती है।

क्रियाकलाप 13.3

धातु की एक थाली लीजिए। इसमें कुछ जल डालिए। एक चम्मच से इसके किनारे पर आघात कीजिए (चित्र 13.4)। क्या आप ध्वनि सुन पाते हैं? थाली पर पुनः आघात कीजिए और तब इसे छूकर देखिए। क्या आप थाली का कंपित होता अनुभव करते हैं? थाली पर पुनः आघात कीजिए। जल की सतह को देखिए। क्या आप वहाँ पर कोई तरंगें देख पाते हैं? अब थाली को पकड़िए। आप जल की सतह पर क्या परिवर्तन देखते हैं? क्या आप इस परिवर्तन की व्याख्या कर सकते हैं? क्या इससे वस्तु के कंपनों को ध्वनि के साथ जोड़ने का कोई संकेत मिलता है?

इस प्रकार हमने देखा कि कंपायमान वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न करती हैं। कुछ स्थितियों में ये कंपन हमें आसानी से दिखाई दे जाते हैं। लेकिन अधिकांश स्थितियों में उनका आयाम (amplitude) इतना कम होता है कि हम उन्हें देख नहीं पाते। तथापि, हम इन कंपनों का अनुभव कर सकते हैं।


चित्र 13.4 : कंपित थाली जल में तरंगें उत्पन्न करती है।


क्रियाकलाप 13.4

नारियल का एक खोखला खोल लीजिए और उससे एक वाद्ययंत्र ‘एकतारा’ बनाइए। इसे आप किसी मिट्टी के बर्तन से भी बना सकते हैं (चित्र 13.5)। इस वाद्ययंत्र को बजाइए और इसके कंपायमान भाग को पहचानिए।


चित्र 13.5 : एकतारा।


सुपरिचित वाद्ययंत्रों की एक सूची बनाइए और उनके कंपायमान भागों को पहचानिए। कुछ उदाहरण सारणी 

13.1 में दिए गए हैं। शेष सारणी को पूरा कीजिए।

सारणी 13.1 : वाद्ययंत्र तथा उनके  कंपायमान भाग

क्रम संख्या
वाद्ययंत्र
ध्वनि उत्पन्न करने वाला कंपमान भाग
1 वीणा
तानित डोरी/तार
2 तबला
तानित झिल्ली
3 ........... ..........................
4 ........... ..........................
5 ........... ..........................
6 ........... ..........................
7 ........... ..........................

सम्भवतः आपने मंजीरा (झाँझ), घटम तथा नूट (मिट्टी के बर्तन) तथा करताल देखे होंगे। ये वाद्ययंत्र सामान्यतः हमारे देश के अनेक भागों में बजाए जाते हैं। इन वाद्ययंत्रों को केवल पीटा या आघात किया जाता है (चित्र 13.6)। क्या आप इस प्रकार के कुछ अन्य वाद्ययंत्रों के नाम बता सकते हैं?

आप भी एक वाद्ययंत्र बना सकते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 15-05-21

चित्र 13.6 : कुछ अन्य वाद्ययंत्र।

क्रियाकलाप 13.5

धातु के 6-8 कटोरे या गिलास लीजिए। इन्हें एक सिरे से दूसरे सिरे तक क्रमशः जल के बढ़ते स्तर तक भरिए। अब एक पेंसिल लेकर कटोरों पर धीमे से एक के बाद एक पर आघात कीजिए। आप एक सुखद ध्वनि सुनेंगे। यह आपका जल तरंग है (चित्र 13.7)।


चित्र 13.7 : जल तरंग।


जब हम किसी वाद्ययंत्र, जैसे सितार, के तार को कर्षित करते हैं तो हमें केवल तार की ही ध्वनि सुनाई नहीं देती है। वास्तव में सम्पूर्ण यंत्र कंपन करता है और इस पूरे यंत्र के कंपन से उत्पन्न ध्वनि को हम सुनते हैं। इसी प्रकार जब हम किसी मृदंगम की झिल्ली पर आघात करते हैं तो हम केवल झिल्ली की आवाज़ ही नहीं सुनते बल्कि सम्पूर्ण यंत्र की आवाज़ सुनते हैं।

जब हम बोलते हैं तो क्या हमारे शरीर का कोई भाग कंपित  होता है?

13.2 मनुष्यों (मानवों) द्वारा उत्पन्न ध्वनि

कुछ समय तक जोर से बोलिए या गाना गाइए अथवा भौंरे की तरह गुंजन कीजिए। चित्रानुसार (13.7) अपने हाथ को अपने कंठ पर रखिए। क्या आपको कुछ कंपनों का अनुभव होता है?

मानवों में ध्वनि वाकयंत्र अथवा कंठ (larynx) द्वारा उत्पन्न होती है। अपनी अंगुलियों को कंठ पर रखिए तथा एक कठोर उभार को खोजिए जो निगलते समय चलता हुआ प्रतीत होता है। शरीर का यह भाग वाकयंत्र कहलाता है। यह श्वासनली के ऊपरी सिरे पर होता है। वाकयंत्र या कंठ के आर-पार दो वाक्-तंतु इस प्रकार तानित होते हैं कि उनके बीच में वायु के निकलने के लिए एक संकीर्ण झिरी बनी होती है  (चित्र 13.8)।

चित्र 13.8 : मानवों में वाकयंत्र।

जब फेफड़े वायु को बलपूर्वक झिरी से बाहर निकालते हैं तो वाक्-तंतु कंपित होते हैं जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है। वाक्-तंतुओं से जुड़ी मांसपेशियाँ तंतुओं को तना हुआ या ढीला कर सकती हैं। जब वाक्-तंतु तने हुए और पतले होते हैं तब वाक् ध्वनि का प्रकार या उसकी गुणता उस वाक् ध्वनि से भिन्न होती है जब वाक्-तंतु ढीले और मोटे होते हैं। आइए देखें कि वाक्-तंतु किस प्रकार कार्य करते हैं।

क्रियाकलाप 13.6

समान साइज़ की रबड़ की दो पट्टियाँ लीजिए। इन दोनों को एक दूसरे के ऊपर रख कर कस कर तानिए। अब इनके बीच के अन्तराल (दरार) में हवा फूँकिए [चित्र 13.9(a)]। जब तानित रबड़ की पट्टियों के बीच से हवा फूँकी जाती है तो ध्वनि उत्पन्न होती है।

एक कागज़ के टुकड़े जिसमें एक पतली झिरी बनी हो, की सहायता से भी आप इस क्रियाकलाप को कर सकते हैं। कागज़ को अपनी अँगुलियों के बीच चित्र 13.9(b) की भांति पकड़िए। अब झिरी के बीच से हवा फूँकिए और ध्वनि सुनिए। हमारे वाक्-तंतु भी ठीक इसी प्रकार ध्वनि उत्पन्न करते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 15-20-43

चित्र 13.9 (a) तथा (b) : वाक्-तंतुओं की कार्य विधि।


पुरुषों के वाक्-तंतुओं की लंबाई लगभग 20 mm होती है। महिलाओं में इसकी लंबाई लगभग 15 mm होती है। बच्चों के वाक्-तंतु बहुत छोटे होते हैं। यही कारण है कि पुरुषों, महिलाओं तथा बच्चों की वाक् ध्वनियाँ भिन्न-भिन्न होती हैं।

13.3 ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है

जब आप कुछ दूरी पर खड़ी अपनी सहेली को पुकारती हैं तो आपकी सहेली आपकी आवाज़ को सुन पाती है। उसके पास तक आपकी ध्वनि कैसे पहुँचती है?

क्रियाकलाप 13.7

धातु अथवा काँच का एक गिलास लीजिए। सुनिश्चित कीजिए कि यह सूखा हो। इसमें एक ‘सेल फोन’ रखिए। याद रखिए कि सेल फोन पानी में न रखा जाए। अपने किसी मित्र से इस ‘सेल फोन’ पर किसी दूसरे ‘सेल फोन’ से टेलीफोन करने के लिए कहिए। घंटी की ध्वनि ध्यानपूर्वक सुनिए। अब गिलास के किनारों को अपने हाथों से सटा कर पकड़िए। अब अपने मुँह को हाथों के बीच की खाली जगह पर सटा कर रखिए (चित्र 13.10)। 

अपने मित्र को फिर से टेलीफोन करने के लिए संकेत दीजिए। गिलास में से वायु को मुँह द्वारा खींचते हुए घंटी की आवाज़ को सुनिए।

क्या गिलास में से वायु बाहर खींचने पर घंटी की ध्वनि धीमी हो जाती है?

गिलास को अपने मुँह से हटाइए। क्या ध्वनि फिर से प्रबल हो जाती है?

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चित्र 13.10 : ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है।

क्या आप सोच सकते हैं कि एेसा क्यों हुआ? क्या यह संभव है कि गिलास में वायु की मात्रा कम होने और घंटी की प्रबलता कम होने में कोई संबंध है?

वास्तव में, यदि आप गिलास में से सारी वायु बाहर खींच पाते तो ध्वनि पूरी तरह सुनाई देना बंद हो जाती। इसका कारण यह है कि ध्वनि को संचरण (एक जगह से दूसरी जगह जाने) के लिए कोई माध्यम चाहिए। जब किसी बर्तन में से वायु पूरी तरह निकाल दी जाती है तो कहा जाता है कि बर्तन में निर्वात है? ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।

क्या ध्वनि द्रवों में संचरित होती है। आइए ज्ञात करें।

क्रियाकलाप 13.8

एक बाल्टी अथवा स्नान-टब लीजिए। इसे स्वच्छ जल से भरिए। एक हाथ में एक छोटी घंटी लीजिए। ध्वनि उत्पन्न करने के लिए इस घंटी को जल में हिलाइए। ध्यान रखिए कि घंटी बाल्टी या टब की दीवारों को न छुए। अपने कान को जल की सतह पर सावधानीपूर्वक रखिए (चित्र 13.11)। (सतर्क रहेंः जल आपके कान में प्रवेश न करे)। क्या आप घंटी की ध्वनि सुन पाते हैं? क्या इससे पता चलता है कि ध्वनि का संचरण द्रवों में हो सकता है?

चित्र 13.11 : ध्वनि जल में संचरित होते हुए।

आहा! तो ह्वेल तथा डॉलफ़िन जल के अंदर इसी प्रकार संदेशों का आदान-प्रदान पाते होंगे।

आइए ज्ञात करें कि क्या ध्वनि ठोसों में भी गमन कर सकती है।

क्रियाकलाप 13.9

धातु का एक मीटर स्केल या धातु की एक लम्बी छड़ लीजिए। इसके एक सिरे को अपने कान से सटा कर रखिए। अपने मित्र से स्केल के दूसरे सिरे को धीरे से खरोंचने या खटखटाने को कहिए  (चित्र 13.12)।

क्या आप खरोंचने की ध्वनि सुन पाते हैं? अपने आस-पास खड़े हुए मित्रों से पूछिए कि क्या वे भी इस ध्वनि को सुन पाए?


चित्र 13.12 : ध्वनि मीटर स्केल में गमन करती हुई।

आप अपने कान को लकड़ी या धातु की किसी लंबी मेज़ के एक सिरे पर रखकर तथा अपने मित्र को दूसरे सिरे को खरोंचने के लिए कह कर भी उपरोक्त क्रियाकलाप कर सकते हैं (चित्र 13.13)।


चित्र 13.13 : ध्वनि ठोस पदार्थों में संचरण कर सकती है।

हमने देखा कि ध्वनि लकड़ी या धातु में चल सकती है। वास्तव में, ध्वनि किसी भी ठोस में संचरण कर सकती है। आप एक मनोरंजक क्रियाकलाप द्वारा यह दर्शा सकते हैं कि ध्वनि डोरियों में भी चल सकती है। अपने बनाए हुए खिलौना टेलीफोन को याद कीजिए (चित्र 13.14)। क्या आप कह सकते हैं कि ध्वनि डोरियों में भी गमन कर सकती है?

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चित्र 13.14 : खिलौना टेलीफोन।

अब तक हमने सीखा कि कंपायमान वस्तुएँ ध्वनि उत्पन्न कर सकती हैं तथा यह किसी माध्यम में सभी दिशाओं में संचरित हो सकती है। यह माध्यम गैस, द्रव या ठोस कोई भी हो सकता है। इस ध्वनि को हम सुनते कैसे हैं?

13.4 हम ध्वनि को अपने कानों द्वारा सुनते हैं

कान के बाहरी भाग की आकृति कीप (फनल) जैसी होती है। जब ध्वनि इसमें प्रवेश करती है तो यह एक नलिका से गुजरती है जिसके सिरे पर एक पतली तानित झिल्ली होती है। इसे कर्ण पटह (eardrum) कहते हैं। यह एक महत्वपूर्ण कार्य करता है। यह जानने के लिए कि कर्ण पटह क्या कार्य करता है, आइए टिन के डिब्बे का एक कर्ण पटह बनाएँ।

क्रियाकलाप 13.10

एक प्लास्टिक अथवा टिन का डिब्बा लीजिए। इसके दोनों सिरे काटिए। डिब्बे के एक सिरे पर एक रबड़ के गुब्बारे को तानिए और इसे एक रबड़ के छल्ले से कस दीजिए। तानित रबड़ के ऊपर सूखे अन्न या थर्मोकोल के चार या पाँच दाने रखिए। अब अपने मित्र से डिब्बे के खुले सिरे पर ‘‘हुर्रे, हुर्रे’’ बोलने के लिए कहिए (चित्र 13.14)। देखिए कि अन्न के दानों का क्या होता है। अन्न के दाने ऊपर और नीचे क्यों उछलते हैं?
Screenshot from 2019-07-05 15-42-43

चित्र 13.15 : कर्ण पटह के कार्य को समझना।



कर्ण पटह एक तानित रबड़ की शीट के समान होता है। ध्वनि के कम्पन कर्ण पटह को कंपित करते हैं (चित्र 13.16)। कर्ण पटह कंपनों को आंतर कर्ण (inner ear) तक भेज देता है। वहाँ से संकेतों को मस्तिष्क तक भेज दिया जाता है। इस प्रकार हम ध्वनि को सुनते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 15-46-52

चित्र 13.16 : मानव कान (कर्ण)।

हमें कभी भी अपने कानों में कोई तीखी, नुकीली या कठोर वस्तु नहीं डालनी चाहिए। यह कर्ण पटह को क्षति पहुँचा सकती है जिससे सुनने की शक्ति कम हो सकती है।

13.5 कंपन का आयाम, आवर्तकाल तथा आवृत्ति

हम जानते हैं कि किसी वस्तु का बार-बार इधर-उधर गति करना कंपन कहलाता है। इस गति को दोलन गति भी कहते हैं। आप पिछली कक्षाओं में दोलन गति तथा इसके आवर्तकाल के बारे में पढ़ चुके हैं।

प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को दोलन की आवृत्ति कहते हैं। आवृत्ति को हर्टज़ में मापा जाता है। इसका संकेत Hz है। 1 Hz आवृत्ति एक दोलन प्रति सेकंड के बराबर होती है। यदि कोई वस्तु एक सेकंड में 20 दोलन पूरे करती है तो इसकी आवृत्ति क्या होगी?

ध्वनि उत्पन्न करने वाली वस्तु को देखे बगैर भी आप अनेक सुपरिचित ध्वनियों को पहचान सकते हैं। यह कैसे सम्भव हो पाता है? इसके लिए यह आवश्यक है कि ये ध्वनियाँ भिन्न प्रकार की हों। क्या आपने कभी सोचा कि कौन से कारक इन्हें भिन्न बनाते हैं। आयाम तथा आवृत्ति किसी ध्वनि के दो महत्वपूर्ण गुण हैं। क्या हम ध्वनियों में उनके आयामों तथा आवृत्तियों के आधार पर अन्तर कर सकते हैं?

प्रबलता तथा तारत्व

क्रियाकलाप 13.11

एक धातु का गिलास और एक चाय का चम्मच लीजिए। चम्मच को धीमे से गिलास के किनारे से टकराइए। उत्पन्न हुई ध्वनि को सुनिए। अब गिलास पर चम्मच से जोर से आघात कीजिए तथा फिर से उत्पन्न ध्वनि को सुनिए। क्या गिलास पर जोर से आघात करने पर ध्वनि अधिक प्रबल हो जाती है?

अब गिलास के किनारे को छूते हुए थर्मोकोल की एक छोटी सी गेंद लटकाइए (चित्र 13.17)। गिलास को कम्पित कराइए। देखिए कि गेंद कितनी दूर विस्थापित होती है। गेंद का विस्थापन गिलास के कंपन के आयाम की माप है।

ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निर्भर करती है। जब किसी कंपित वस्तु का आयाम अधिक होता है तो इसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रबल होती है। जब आयाम कम होता है तो उत्पन्न ध्वनि मंद होती है।

अब गिलास को पहले धीमे तथा बाद में अधिक बल से आघात कीजिए। अब, दोनों स्थितियों में गिलास के कंपनों के आयामों की तुलना कीजिए। किस स्थिति में आयाम अधिक है?


चित्र 13.17 : थर्मोकोल की गेंद कंपायमान गिलास  को स्पर्श करते हुए।


ध्वनि की प्रबलता ध्वनि उत्पन्न करने वाले कंपनों के आयाम के वर्ग के समानुपातिक है। उदाहरण के  लिए, यदि आयाम दुगुना हो जाए तो प्रबलता 4 के गुणक में बढ़ जाती है। प्रबलता को डेसिबेल (dB) मात्रक में व्यक्त करते हैं। निम्न सारणी विभिन्न स्रोतों से आने वाली ध्वनि की प्रबलता का कुछ बोध कराती है।

सामान्य श्वास
मंद फुसफुसाहट
सामान्य बातचीत/वार्तालाप
व्यस्त यातायात
औसत फैक्टरी
10 dB
30 dB
60 dB
70 dB
80 dB

80 dB से अधिक प्रबल शोर शरीर के लिए कष्टदायक  होता है।

ध्वनि की प्रबलता इसके आयाम पर निर्भर करती है। जब किसी कंपित वस्तु का आयाम अधिक होता है तो इसके द्वारा उत्पन्न ध्वनि प्रबल होती है। जब आयाम छोटा होता है तो उत्पन्न ध्वनि मंद होती है।

किसी बच्चे की ध्वनि की तुलना एक वयस्क से कीजिए। क्या इनमें कुछ अन्तर है? चाहे दोनों ध्वनियाँ समान रूप से प्रबल हों, फिर भी उनमें कुछ भिन्नता है। आइए देखें ये किस प्रकार भिन्न हैं।

मैं चकित हूँ कि मेरी आवाज़  मेरे अध्यापक से भिन्न  क्यों है।

आवृत्ति ध्वनि की तीक्ष्णता या तारत्व को निर्धारित करती है। यदि कंपन की आवृत्ति अधिक है तो हम कहते हैं कि ध्वनि तीखी है। यदि कंपन की आवृत्ति कम है तो हम कहते हैं कि ध्वनि का तारत्व कम है। उदाहरण के लिए, ढोल मंद आवृत्ति से कंपित होता है। इसलिए यह कम तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करता है। दूसरी ओर, सीटी की आवृत्ति अधिक होती है और इसलिए अधिक तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करती है (चित्र 13.18)। पक्षी उच्च तारत्व की ध्वनि उत्पन्न करता है जबकि शेर की दहाड़ का तारत्व मंद होता है। तथापि, शेर की दहाड़ अत्यधिक प्रबल है जबकि पक्षी की ध्वनि दुर्बल होती है।

आप प्रतिदिन बच्चों तथा वयस्कों की आवाज़ें सुनते हैं। क्या आप उनकी आवाज़ों में कोई अन्तर पाते हैं? क्या आप कह सकते हैं कि बच्चे की आवाज़ की आवृत्ति वयस्क की आवाज़ की आवृत्ति से अधिक है? सामान्यतः एक महिला की आवाज़ किसी पुरुष की अपेक्षा अधिक आवृत्ति की तथा अधिक तीखी होती है।

Screenshot from 2019-07-05 16-42-58

चित्र 13.18 : आवृत्ति ध्वनि का तारत्व निर्धारित करती है।

13.6 श्रव्य तथा अश्रव्य ध्वनियाँ

हम जानते हैं कि ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हमें एक कंपायमान वस्तु की आवश्यकता होती है। क्या हम सभी कंपायमान वस्तुओं की ध्वनियाँ सुन सकते हैं?

तथ्य यह है कि लगभग 20 कंपन प्रति सेकंड (20 Hz) से कम आवृत्ति की ध्वनियाँ मानव कान सुन नहीं सकता। यह कह सकते हैं कि 20 Hz से कम आवृत्ति की ध्वनियाँ मानव कान द्वारा संसूचित नहीं की जा सकतीं। एेसी ध्वनियों को अश्रव्य कहते हैं। उधर लगभग 20,000 कंपन प्रति सेकंड (20 k Hz) से अधिक आवृत्ति की ध्वनियाँ भी मानव कान द्वारा संसूचित नहीं होतीं। अतः मानव कानों के लिए श्रव्य की आवृत्ति का परास (Range) लगभग 20 Hz से 20,000 Hz तक है। इसका अर्थ यह है कि हम केवल 20 Hz – 20 k Hz के बीच की आवृत्ति वाली ध्वनियाँ ही सुन सकते हैं।

कुछ जंतु 20,000 Hz से अधिक की आवृत्ति की ध्वनियों को भी सुन सकते हैं। कुत्तों में यह क्षमता है। पुलिसकर्मी उच्च आवृत्ति की ध्वनि उत्पन्न करने वाली सीटियों का उपयोग करते हैं जिसे कुत्ते सुन सकते हैं लेकिन मानव नहीं सुन पाते।

जाने माने पराश्रव्य ध्वनि (ultrasound) उपकरण जो चिकित्सा के क्षेत्र में अनेक समस्याओं के अनुसंधान एवं निदान के लिए प्रयोग होते हैं, 20,000 Hz से अधिक की आवृत्ति पर कार्य करते हैं।

13.7 शोर तथा संगीत

हम अपने चारों ओर विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ सुनते हैं? क्या ध्वनि सदैव सुखद होती है। क्या ध्वनि कभी-कभी आपको कष्ट पहुँचाती है? कुछ ध्वनियाँ आपको सुखद लगती हैं जबकि कुछ अच्छी नहीं लगतीं।

मान लीजिए आपके अड़ोस-पड़ोस में निर्माण कार्य चल रहा है। क्या निर्माण स्थल से आने वाली ध्वनियाँ सुखद प्रतीत होती हैं? क्या आपको बसों तथा ट्रकों के हॉर्न (horns) की ध्वनियाँ अच्छी लगती हैं? इस प्रकार की अप्रिय ध्वनियों को शोर कहते हैं। कक्षा में यदि सभी विद्यार्थी एक साथ बोलें तो उत्पन्न होने वाली ध्वनि को क्या कहेंगे?

दूसरी ओर आप वाद्ययंत्रों की ध्वनियों का आनन्द लेते हैं। सुस्वर ध्वनि वह है जो कानों को सुखद लगती है। हारमोनियम द्वारा उत्पन्न ध्वनि सुस्वर ध्वनि कहलाती है। (सितार के तार द्वारा उत्पन्न ध्वनि भी सुस्वर ध्वनि कहलाती है।) लेकिन यदि संगीत अत्यंत प्रबल हो जाए, तब भी क्या ये संगीत रहेगा?

13.8 ध्वनि प्रदूषण

आप वायु प्रदूषण के बारे में पहले से ही जानते हैं। वायु में अवांछित गैसों तथा कणों की उपस्थिति वायु प्रदूषण कहलाती है। इसी प्रकार, वातावरण में अत्यधिक या अवांछित ध्वनियों को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं। क्या आप ध्वनि प्रदूषण के कुछ स्रोतों की सूची बना सकते हैं? ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं, वाहनों की ध्वनियाँ, विस्फोट जिसमें पटाखों का फटना भी सम्मिलित है, मशीनें, लाउडस्पीकर आदि। घर में कौन से स्रोत ध्वनि उत्पन्न कर सकते हैं? ऊँची आवाज़ में चलाए गए टेलिविज़न तथा ट्रांजिस्टर रेडियो, रसोईघर के कुछ उपकरण (appliances), कूलर (Coolers), वातानुकूलक, सभी ध्वनि प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं।

ध्वनि प्रदूषण की क्या हानियाँ हैं?

क्या आप जानते हैं कि परिवेश में अत्यधिक शोर की उपस्थिति अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। अनिद्रा, अति तनाव (उच्च रक्त-चाप), चिन्ता तथा अन्य बहुत से स्वास्थ्य संबंधी विकार ध्वनि-प्रदूषण से उत्पन्न हो सकते हैं। लगातार प्रबल ध्वनि के प्रभाव में रहने वाले व्यक्ति की सुनने की क्षमता अस्थायी अथवा स्थायी रूप से कम हो जाती है।

ध्वनि प्रदूषण को सीमित रखने के उपाय

ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए हमें ध्वनि के स्रोतों पर नियंत्रण करना चाहिए। यह कैसे किया जा सकता है? इसके लिए वायुयानों के इंजनों, यातायात के वाहनों, औद्योगिक मशीनों तथा घरेलू उपकरणों में रवशामक युक्तियाँ (silencer) लगानी चाहिए।

आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

ध्वनि उत्पन्न करने वाले क्रियाकलापों को आवासीय क्षेत्रों से दूर संचालित करना चाहिए। ध्वनि उत्पन्न करने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से दूर स्थापित करना चाहिए। स्वचालित वाहनों के हॉर्न का उपयोग कम से कम करना चाहिए। टेलिविज़न तथा संगीत निकायों की ध्वनि प्रबलता कम रखनी चाहिए। ध्वनि प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए सड़कों तथा भवनों के आस-पास पेड़ लगाने चाहिए, जिससे कि ध्वनि आवासों तक न पहुँच पाए।

श्रवण क्षति

पूर्णतया श्रवण क्षति जो कि विरले ही होती है, प्रायः जन्म से होती है। आंशिक अशक्तता (disability) सामान्यतः किसी बीमारी, चोट या उम्र के कारण होती है। कठिन श्रवण शक्ति वाले बच्चों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। एेसे बच्चे इंगित भाषा (संकेत भाषा) को सीख कर प्रभावशाली ढंग से सम्पर्क कर सकते हैं। क्योंकि वाक् शक्ति श्रवण के परिणामस्वरूप विकसित होती है, इसलिए श्रवण अशक्तता से ग्रस्त बच्चे की वाक् शक्ति भी दोषपूर्ण हो सकती है। औद्योगिकीय/प्रौद्योगिकीय युक्तियों ने श्रवण क्षतिग्रस्त व्यक्तियों के जीवन की गुणता में सुधाार को सम्भव बना दिया है। श्रवण क्षतिग्रस्तों के रहन-सहन के वातावरण में सुधार लाने के लिए समाज बहुत कुछ कर सकता है।

प्रमुख शब्द

आयाम

कर्ण पटह

आवृत्ति

हर्टज़ (Hz)

कंठ

प्रबलता

शोर

दोलन

तारत्व

आवर्तकाल

कंपन

वाक्यंत्र

श्वास नली


आपने क्या सीखा

Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 ध्वनि कंपन करती हुई वस्तु द्वारा उत्पन्न होती है।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 मानव वाक्-तंतुओं के कंपन द्वारा ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 ध्वनि किसी माध्यम (गैस, द्रव या ठोस) में संचरित होती है। यह निर्वात में संचरित नहीं हो सकती।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 कर्ण पटह ध्वनि के कंपनों को अनुभव करते हैं। यह इन संकेतों को मस्तिष्क तक भेज देते हैं। इस प्रक्रिया को श्रवण कहते हैं।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 प्रति सेकंड होने वाले दोलनों या कंपनों की संख्या दोलन की आवृत्ति कहलाती है।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 आवृत्ति को हर्टज़ (Hz) में व्यक्त करते हैं।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 कंपन का आयाम जितना अधिक होता है, ध्वनि उतनी ही प्रबल होती है।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 कंपन की आवृत्ति अधिक होने पर तारत्व अधिक होता है और ध्वनि अधिक तीक्ष्ण होती है।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 अप्रिय ध्वनियाँ शोर कहलाती हैं।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 अत्यधिक या अवांछित ध्वनियाँ ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करती हैं। ध्वनि प्रदूषण मानवों के लिए स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकता है।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 ध्वनि प्रदूषण को न्यूनतम करने के प्रयास करने चाहिए।
Screenshot from 2019-07-08 09-36-59 सड़क के किनारे तथा अन्य स्थानों पर पेड़ लगाने से ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

अभ्यास

1. सही उत्तर चुनिए–

ध्वनि संचरित हो सकती हैः

(क) केवल वायु या गैसों में

(ख) केवल ठोसों में

(ग) केवल द्रवों में

(घ) ठोसों, द्रवों तथा गैसों में

2. निम्न में से किस वाक् ध्वनि की आवृत्ति न्यूनतम होने की सम्भावना है–

(क) छोटी लड़की की

(ख) छोटे लड़के की

(ग) पुरुष की

(घ) महिला की

3. निम्नलिखित कथनों में सही कथन के सामने 'T' तथा गलत कथन के सामने 'F' पर निशान लगाइए–

(क) ध्वनि निर्वात में संचरित नहीं हो सकती। (T/F)

(ख) किसी कंपित वस्तु के प्रति सेकंड होने वाले दोलनों की संख्या को इसका आवर्तकाल  कहते हैं। (T/F)

(ग) यदि कंपन का आयाम अधिक है तो ध्वनि मंद होती है। (T/F)

(घ) मानव कानों के लिए श्रव्यता का परास 20 Hz से 20,000 Hz है। (T/F)

(ङ) कंपन की आवृत्ति जितनी कम होगी तारत्व उतना ही अधिक होगा। (T/F)

(च) अवांछित या अप्रिय ध्वनि को संगीत कहते हैं। (T/F)

(छ) ध्वनि प्रदूषण आंशिक श्रवण अशक्तता उत्पन्न कर सकता है। (T/F)

4. उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए–

(क) किसी वस्तु द्वारा एक दोलन को पूरा करने में लिए गए समय को  कहते हैं।

(ख) प्रबलता कम्पन के  से निर्धारित की जाती है।

(ग) आवृत्ति का मात्रक  है।

(घ) अवांछित ध्वनि को  कहते हैं।

(ङ) ध्वनि की तीक्ष्णता कंपनों की  से निर्धारित होती है।

5. एक दोलक 4 सेकंड में 40 बार दोलन करता है। इसका आवर्तकाल तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

6. एक मच्छर अपने पंखों को 500 कम्पन प्रति सेकंड की औसत दर से कंपित करके ध्वनि उत्पन्न करता है। कंपन का आवर्तकाल कितना है?

7. निम्न वाद्ययंत्रों में उस भाग को पहचानिए जो ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपित होता है–

(क) ढोलक

(ख) सितार

(ग) बाँसुरी

8. शोर तथा संगीत में क्या अंतर है? क्या कभी संगीत शोर बन सकता है?

9. अपने वातावरण में ध्वनि प्रदूषण के स्रोतों की सूची बनाइए।

10. वर्णन कीजिए कि ध्वनि प्रदूषण मानव के लिए किस प्रकार से हानिकारक है?

11. आपके माता-पिता एक मकान खरीदना चाहते हैं। उन्हें एक मकान सड़क के किनारे पर तथा दूसरा सड़क से तीन गली छोड़ कर देने का प्रस्ताव किया गया है। आप अपने माता-पिता को कौन-सा मकान खरीदने का सुझाव देंगे? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

12. मानव वाक्यंत्र का चित्र बनाइए तथा इसके कार्य की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

13. आकाश में तड़ित तथा मेघगर्जन की घटना एक समय पर तथा हमसे समान दूरी पर घटित होती है। हमें तड़ित पहले दिखाई देती है तथा मेघगर्जन बाद में सुनाई देता है। क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते हैं?

विस्तारित अधिगम - क्रियाकलाप एवं परियोजनाएँ

1. अपने विद्यालय के संगीत कक्ष को देखिए। आप अपने क्षेत्र के संगीतज्ञों से भी मुलाकात कर सकते हैं। वाद्ययंत्रों की एक सूची बनाइए। इन यंत्रों के उन भागों के नाम लिखिए जो ध्वनि उत्पन्न करते समय कंपित होते हैं।

2. यदि आप कोई वाद्य यंत्र बजाते हैं तो उसे कक्षा में लाइए और दिखलाइए कि आप इसे कैसे बजाते हैं।

3. प्रसिद्ध भारतीय संगीतज्ञों तथा उनके द्वारा बजाए जाने वाले वाद्ययंत्रों की सूची बनाइए।

4. एक लम्बा धागा लीजिए तथा उसके एक सिरे पर एक लूप बनाइए। अपने हाथों को अपने कानों पर रखिए और अपने किसी मित्र से इस धागे के लूप को आपके सिर तथा हाथों के चारों ओर रखने के लिए कहिए। उससे कहिए कि धागे के दूसरे सिरे को कस करके हाथ में पकड़े। अब उससे अपनी अँगुली तथा अँगूठे को धागे के अनुदिश कस कर चलाने के लिए कहिए (चित्र 13.19)। क्या आप गर्जन जैसी गड़गड़ाहट की ध्वनि सुन पाते हैं? अब इस क्रियाकलाप को तब दोहराइए जब कोई अन्य मित्र आप दोनों के पास खड़ा हो। क्या उसे कोई ध्वनि सुनाई देती है?


चित्र 13.19

5. दो खिलौना टेलीफोन बनाइए। उन्हें चित्र 13.20 की भांति प्रयोग कीजिए। सुनिश्चित कीजिए कि दोनों धागे कसे हुए हों तथा एक दूसरे को छूते रहें। आप में से किसी एक को बोलने दीजिए। क्या अन्य तीनों व्यक्ति उसे सुन पाते हैं? देखिए कि कितने अन्य मित्रों को आप इस क्रियाकलाप में एक साथ जोड़ सकते हैं। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।


चित्र 13.20

6. अपने अड़ोस-पड़ोस में शोर प्रदूषण के स्रोतों को पहचानिए। अपने माता-पिता, मित्रों तथा पड़ोसियों से विचार विमर्श कीजिए। सुझाइए कि शोर प्रदूषण को कैसे नियंत्रित करें। एक संक्षिप्त रिपोर्ट बनाइए तथा इसे कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

आप निम्न वेबसाइट पर संबंधित विषयों पर और अधिक अध्ययन कर सकते हैं :

• www.physicsclassroom.com/Class/sound/soundtoc.html

• health.howstuffworks.com/hearing.htm



क्या आप जानते हैं?

भारत में हैदराबाद के निकट गोलकुण्डा नामक एक भव्य किला है। यह बहुत से इंजीनियरी (अभियांत्रिकी) तथा वास्तु (अॉर्किटैक्चरल) अजूबों के लिए प्रसिद्ध है। जल प्रदाय व्यवस्था उनमें से एक अजूबा है। परंतु, कदाचित, सबसे अधिक आश्चर्यजनक अजूबा किले के निकास द्वार के पास स्थित एक गुम्बद है। इस गुम्बद के नीचे एक निश्चित बिन्दु पर हाथों की तालियों से उत्पन्न ध्वनि अनुरणित (गूँजती) होती है जिसे लगभग एक किलोमीटर दूर किले के शीर्ष बिन्दु पर स्थित किसी स्थान पर सुना जा सकता है। इसकी रचना एक चेतावनी प्रणाली के रूप में की गयी थी। यदि कोई सुरक्षाकर्मी किले के बाहर कोई रहस्यमय हलचल देखता था, तो गुम्बद के अंदर एक निश्चित बिन्दु पर तालियाँ बजाता था तथा किले के भीतर की फौज संभावित खतरे से सतर्क हो जाती थी।


गोलकुण्डा किला

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