घषर्ण आपने ट्रैपिफक सिग्नल पर कार अथवा ट्रक चालक को अपने वाहन को मंद करते देखा होगा। जब भी आवश्यक होता है आप भी ब्रेक लगाकर अपनी साइकिल को मंद करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि बे्रक लगाने पर वाहन मंद क्यों हो जाते हैं? केवल वाहन ही नहीं, कोइर् भी वस्तु जो किसी अन्य वस्तु के पृष्ठ पर गति कर रही होती है, उस स्िथति में भी मंद हो जाती है जब उस पर कोइर् बाहरी बल न लगाया हो। अन्ततः वह रुक जाती है। क्या आपने पफशर् पर लुढ़कती गेंद को कुछ समय पश्चात् रुकते देखा है? केले के छिलके पर कदम पड़ते ही हम क्यों पिफसल जाते हैं ;चित्रा 12.1द्ध? किसी चिकने तथा गीले पफशर् पर चलना क्यों कठिन होता है? इस अध्याय में आप इसी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर पाएँगे। 12.1 घषर्ण बल ियाकलाप 12.1 आपने देखा कि यदि आप बाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घषर्ण दाईं दिशा में कायर् करता है। यदि आप दाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घषर्ण बाईं दिशा में कायर् करता है। दोनों स्िथतियों में घषर्ण पुस्तक की गति का विरोध करता है। घषर्ण बल सदैव ही लगाए गए बल का विरोध करता है। उपरोक्त ियाकलाप में घषर्ण बल पुस्तक तथा मेश के पृष्ठों के बीच कायर् करता है। क्या सभी पृष्ठों पर समान घषर्ण बल लगता है? क्या यह पृष्ठों के चिकनेपन पर निभर्र करता है? आइए पता लगाएँ। 12.2 घषर्ण को प्रभावित करने वाले कारक ियाकलाप 12.2 कमानीदार तुला कमानीदार तुला वह युक्ित है जिसके द्वारा किसी वस्तु पर लगने वाले बल को मापा जाता है। इसमें एक कुण्डलित कमानी होती है जिसमें बल लगाने पर प्रसार हो जाता है। कमानी के इस प्रसार की माप इसके अंशांकित पैमाने पर चलने वाले संकेतक द्वारा की जाती है। पैमाने के पाठ्यांक द्वारा बल का परिमाण प्राप्त होता है। क्या सेल द्वारा चली दूरी जिस पृष्ठ पर वह चलता है, उसकी प्रकृति पर निभर्र करती है? क्या पेंसिल सेल के पृष्ठ का चिकनापन भी चली गइर् दूरी को प्रभावित करता है? घषर्ण सम्पवर्फ में आने वाले दो पृष्ठों की अनियमितताओं के कारण होता है। ऐसे पृष्ठ जो देखने में बहुत चिकने लगते हैं, उनमें भी बहुत सारी सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं ;चित्रा 12.5द्ध। दो पृष्ठों की अनियमितताएँ एक - दूसरे के भीतर धँस जाती हैं। जब हम एक पृष्ठ पर दूसरे पृष्ठ को गति कराने का प्रयास करते हैं तो हमें इस अन्तः - बंधन ;पदजमतसवबापदहद्ध पर पार पाने के लिए कुछ बल लगाना पड़ता है। खुरदरे ;रूक्षद्ध पृष्ठों पर ये अनियमितताएँ अिाक संख्या में होती हैं। अतः यदि पृष्ठ रूक्ष हो तो घषर्ण बल अिाक होता है। हमने यह सीखा कि दो पृष्ठों के बीच अनियमितताओं के अन्तःबंधन के कारण घषर्ण होता है। स्पष्ट है कि यदि पृष्ठों को बलपूवर्क दबाएँ तो घषर्ण में वृि हो जाएगी। इसका अनुभव आप किसी चटाइर् को उस समय खींचकर कर सकते हैं जब चित्रा 12.6: बाॅक्स को गतिमान रखने के लिए लगातार धकेलना पड़ता है। अपने उस अनुभव को याद कीजिए जब पिछली बार आपने किसी भारी बाॅक्स को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरकाया था ;चित्रा 12.6द्ध। यदि आपको इस प्रकार का कोइर् अनुभव नहीं है तो अब इस प्रकार का अनुभव कीजिए। कौन - सा कायर् आसान है μ विराम अवस्था से किसी बाॅक्स को गतिशील कराना अथवा किसी गतिशील बाॅक्स को उसी दिशा में सरकाना। किसी रुकी हुइर् वस्तु को विराम से गति प्रारम्भ करने की स्िथति में घषर्ण पर पार पाने के लिए वस्तु पर लगाया जाने वाला बल स्थैतिक घषर्ण की माप होती है। इसके विपरीत, किसी वस्तु को उसी चाल से गतिशील रखने के लिए आवश्यक बल उसके सपीर् घषर्ण की माप होती है। जब बाॅक्स सरकना आरम्भ कर देता है, तो उसके पृष्ठ के सम्पवर्फ बिन्दुओं को उतना समय नहीं मिल पाता कि वे पफशर् के संपवर्फ बिन्दुओं में धँस सवेंफ। अतः सपीर् घषर्ण स्थैतिक घषर्ण से कुछ कम होता है। इसीलिए किसी बाॅक्स में गति आरम्भ करने की अपेक्षा पहले से ही गतिमान बाॅक्स की गति बनाए रखना सरल होता है। 12.3 घषर्ण: हानिकारक परंतु अनिवायर् अब अपने वुफछ अनुभवों को याद कीजिए। किसी काँच के गिलास अथवा किसी वुफल्हड़ में से किसे पकड़े रखना आसान है? मान लीजिए किसी गिलास का बाहरी पृष्ठ चिकना है अथवा उस पर पकाने के तेल की परत चढ़ी है तो क्या उसे हाथ में पकड़ना आसान होगा अथवा अिाक कठिन हो जाएगा? शरा सोचिए! यदि घषर्ण न हो तो क्या आपके लिए गिलास को पकड़े रखना संभव हो पाएगा? यह भी याद कीजिए कि मारबल के गीले पफशर् अथवा कीचड़ वाली पगडंडी पर चलना कितना कठिन होता है। क्या आप घषर्ण न होने की स्िथति में चलने की कल्पना कर सकते हैं? यदि घषर्ण न हो तो आप पेन अथवा पेंसिल से नहीं लिख सकते। जब आपके श्िाक्षक चाक से श्यामपट्ट पर लिखते हैं तो श्यामपट्ट का रूक्ष पृष्ठ रगड़ द्वारा चाक के वुफछ कणों को उतार देता है जो चित्रा 12.7: घषर्ण के कारण दीवार में कील गड़ जाती है। श्यामपट्ट से चिपक जाते हैं और इस प्रकार श्यामपट्ट पर आपको लिखावट दिखाइर् देती है। यदि सड़क तथा वाहन के टायरों के बीच घषर्ण न होता तो उन वाहनों की न तो गति आरम्भ की जा सकती थी, न ही उन्हें रोका जा सकता था और न ही दिशा परिवतिर्त की जा सकती थी। यदि कोइर् वस्तु गति आरम्भ कर दे तो वह कभी नहीं रुकेगी, यदि वहाँ घषर्ण न हो। आप दीवार में कील नहीं ठोंक पाते ;चित्रा 12.7द्ध अथवा धगे में गाँठ नहीं बाँध पाते। घषर्ण के बिना कोइर् भवन निमार्ण नहीं हो सकता था। इसके विपरीत घषर्ण हानिकारक भी है। घषर्ण के कारण वस्तुएँ घ्िास जाती हैं चाहे वह पेंच, बाॅल बेयरिंग अथवा जूतों के सोल ही क्यों न हों ;चित्रा 12.8द्ध। आपने रेलवे स्टेशनों पर पैदल - उपरिपुलों की घ्िासीपिटी सीढि़याँ देखी होंगी।घषर्ण से ऊष्मा भी उत्पन्न हो सकती है। वुफछ मिनट तक अपनी हथेलियों को तेशी से एक दूसरे के साथ रगडि़ए ;चित्रा 12.9द्ध। आप क्या अनुभव करते हैं? जब आप माचिस की तीली को किसी रूक्ष पृष्ठ से रगड़ते हैं, तो वह आग पकड़ लेती है ;चित्रा 12.10द्ध। आपने यह देखा होगा कि विद्युत मिक्सर को कुछ मिनट तक चलाने पर उसका जार गरम हो जाता है। आप ऐसे बहुत से उदाहरण दे सकते हैं जिनमें घषर्ण द्वारा चित्रा 12.9: हाथों को रगड़ने पर आप गरमी अनुभव करते हैं। ऊष्मा उत्पन्न होती है। वास्तव में जब हम किसी मशीनका उपयोग करते हैं तो घषर्ण से उत्पन्न ऊष्मा के कारणअत्यिाक ऊजार् नष्ट हो जाती है। निम्नलिख्िात अनुभाग में हम घषर्ण को कम करने के उपायों पर चचार् करेंगे। 12.4 घषर्ण बढ़ाना तथा घटाना पिछले अनुभाग में आपने देखा कि कुछ परिस्िथतियों में घषर्ण वांछनीय होता है। क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके जूतों की तली खाँचेदार क्यों है ख्चित्रा 12.11;ंद्ध,। खाँचे जूतों की पफशर् से पकड़ बनाते हैं जिसके कारण आप चलते समय सुरक्ष्िात रहते हैं। इसी प्रकार कारों, ट्रकों तथा बुलडोशरों के टायर भी खाँचेदार होते हैं जिससे सड़क से उनकी पकड़ अच्छी बनती है। यद्यपि वुफछ अन्य स्िथतियों में घषर्ण अवांछनीय होता है। अतः हम उसे कम करना चाहेंगे। वैफरम बोडर् पर आप महीन पाउडर क्यों छिड़कते हैं ;चित्रा 12.12द्ध? आपने यह नोट किया होगा कि जब हम दरवाशों के कब्शों ;चूलोंद्ध में तेल की कुछ बूँदें डालते हैं, तो दरवाशा सहज ही घूमने लगता है। साइकिल तथा मोटर के मेवैफनिक ;मिस्त्राीद्ध इन मशीनों के गतिशील भागों के बीच ग्रीश लगाते हैं। उपरोक्त सभी परिस्िथतियों में हम दक्षता में वृि के लिए घषर्ण को कम करते हैं। जब तेल, ग्रीश अथवा ग्रेपफाइट को किसी मशीन के ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 12.11: ;ंद्ध जूते तथा ;इद्ध टायरों की तलियों को खाँचेदार बनाकर घषर्ण अिाक किया जाता है। स्वचालित वाहनों तथा साइकिलों की ब्रेक प्रणालियों में ब्रेक पैडों का उपयोग करके हम जानबूझकर घषर्ण में वृि करते हैं। जब आप कोइर् साइकिल चलाते हैं तो उसके ब्रेक पैड पहिए को स्पशर् नहीं करते। परन्तु जब आप ब्रेक लीवर को दबाते हैं तो ये पैड घषर्ण के कारण रिम की गति को रोक देते हैं और पहिया गति करना बन्द कर देता है। आपने यह देखा होगा कि कबड्डी के ख्िालाड़ी अपने हाथों पर मिट्टी रगड़ते हैं ताकि वे अपने प्रतिद्वंदी को और अच्छी तरह पकड़ सकें। व्यायामी ;जिमनैस्टद्ध अपने हाथों पर कोइर् रूक्ष पदाथर् लगा लेते हैं ताकि घषर्ण में वृि करके अच्छी पकड़ बना सकें। चित्रा 12.12: घषर्ण कम करने के लिए वैफरम बोडर् पाउडर छिड़का गया है। गतिशील पुजोर्ं ;भागोंद्ध के बीच लगाते हैं तो वहाँ इनकी एक पतली परत बन जाती है तथा गतिशील पृष्ठ सीधे ही एक - दूसरे को रगड़ नहीं पाते ;चित्रा 12.13द्ध। इस प्रकार अनियमितताओं का अंतःबंधन का अंतःपाशन कापफी सीमा तक दूर हो जाता है। गति सहज बन जाती है। घषर्ण कम करने वाले पदाथोर्ं को स्नेहक कहते हैं। वुफछ मशीनों में स्नेहक के रूप में तेल का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। वहाँ पर घषर्ण कम करने के लिए गतिशील पुजो± के बीच वायु की गद्दी का उपयोग किया जाता है। स्नेहक चित्रा 12.13: स्नेहक का प्रभाव। 12.5 पहिए घषर्ण कम कर देते हंै आपने अटैचियों तथा अन्य भारी सामानों ;असबाबोंद्ध पर रोलर जड़े देखे होंगे। ऐसे सामानों को कोइर् छोटा बच्चा भी आसानी से खींच सकता है ;चित्रा 12.14द्ध। ऐसा क्यों होता है? आइए पता लगाएँ। चित्रा 12.14: लोटन घषर्ण कम कर देता है। वि्रफयाकलाप 12.4 जब एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु के पृष्ठ पर लुढ़कती है तो उसकी गति के प्रतिरोध को लोटनिक घषर्ण कहते हैं। लोटन घषर्ण कम कर देता है। किसी वस्तु को दूसरी वस्तु पर सरकने की तुलना में लोटन करना सदैव आसान होता है। यही कारण है कि रोलर जड़ा सामान खींचना सुविधाजनक होता है। क्या अब आप यह समझ सकते हैं कि पहिए के आविष्कार कोे मानव जाति की महानतम खोजों में क्यों गिना जाता है? क्योंकि लोटनिक घषर्ण सपीर् घषर्ण से कम होता है इसलिए अिाकांश मशीनों में सपर्ण को बाल बेयरिंग के उपयोग द्वारा लोटन में प्रतिस्थापित किया जाता है। छत के पंखों तथा साइकिलों में धुरी तथा नाभ्िा ;हबद्ध के बीच बाल बेयरिंग का उपयोग इसके सामान्य उदाहरण हैं ;चित्रा 12.16द्ध। चित्रा 12.16: बाल बेयरिंग घषर्ण कम कर देते हैं। 12.6 तरल घषर्ण आप जानते हैं कि वायु अत्यन्त हलकी तथा विरल होती है। पिफर भी इससे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर वायु घषर्ण बल लगाती है। इसी प्रकार जल तथा अन्य द्रव भी इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घषर्ण बल लगाते हैं। विज्ञान में गैसों तथा द्रवों को एक ही नाम ‘तरल’ दिया गया है। अतः हम कह सकते हैं कि तरल इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घषर्ण बल लगाते हैं। तरलों द्वारा लगाए गए घषर्ण बल को कषर्ण भी कहते हैं। किसी तरल पर लगने वाला घषर्ण बल उसकी तरल के सापेक्ष गति पर निभर्र करता है। घषर्ण बल वस्तु की आवृफति तथा तरल की प्रवृफति पर भी निभर्र करता है। स्पष्ट है कि जब वस्तुएँ किसी तरल में गति करती हैं तो उन्हें उन पर लगे घषर्ण बल पर पार पानाहोता है। इस प्रवि्रफया में उनकी ऊजार् का क्षय होता है। अतः घषर्ण को कम से कम करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। अतः वस्तुओं को विश्िाष्ट आवृफतियाँ दी जाती हैं। आपके विचार से वैज्ञानिकों को इन विश्िाष्ट आवृफतियांे के बारे में कहाँ से संकेत प्राप्त होते हैं? वास्तव में उन्हें ये संकेत प्रवृफति से मिलते हैं। पक्षी तथा मछलियाँ तरल में गति करते हैं। उनके शरीर का विकास इस प्रकार हुआ होगा कि तरल में गति करतेसमय घषर्ण पर पार पाने में उनकी ऊजार् का क्षय यथासंभव कम हो। आपने इन आवृफतियों के बारे में कक्षा टप् में अध्ययन किया था। वायुयान की आकृति को सावधानीपूवर्क देख्िाए ;चित्रा 12.17द्ध। क्या आपइसकी आकृति तथा किसी पक्षी की आकृति में कोइर् समानता पाते हैं? वास्तव में, सभी वाहनों के डिशाइन इस प्रकार बनाए जाते हैं कि तरल घषर्ण कम हो जाए। चित्रा 12.17: एक हवाइर् जहाज और पक्षी की आकृति में समानता। आपने क्या सीखाऽ घषर्ण सम्पवर्फ में रखे दो पृष्ठों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करता है। यह दोनों पृष्ठों पर कायर् करता है। ऽ घषर्ण सम्पवर्फ के दो पृष्ठों की प्रकृति पर निभर्र करता है। ऽ दिए गए पृष्ठों के युगल के लिए घषर्ण इन पृष्ठों के चिकनेपन की अवस्था पर निभर्र करता है। ऽ घषर्ण इस बात पर निभर्र करता है कि दो पृष्ठ एक दूसरे को कितने बलपूवर्क दबाते हैं। ऽ स्थैतिक घषर्ण तब कायर् करना आरम्भ करता है जब हम किसी वस्तु को उसकी विराम की स्िथति से गति में लाने का प्रयास करते हैं। ऽ सपीर् घषर्ण तब कायर् करना आरम्भ करता है जब कोइर् वस्तु किसी अन्य वस्तु पर सपीर् गति करती है। ऽ सपीर् घषर्ण स्थैतिक घषर्ण से कम होता है। ऽ घषर्ण हमारे बहुत से ियाकलापों के लिए महत्त्वपूणर् होता है। ऽ किसी पृष्ठ को रूक्ष बनाकर घषर्ण बढ़ाया जा सकता है। ऽ जूतों की तली तथा वाहनों के टायर घषर्ण बढ़ाने के लिए खाँचेदार बनाए जाते हैं। ऽ कभी - कभी घषर्ण अवांछनीय होता है। ऽ स्नेहक लगाकर घषर्ण को कम किया जा सकता है। ऽ जब कोइर् वस्तु किसी अन्य वस्तु पर लोटन करती है तो लोटनिक घषर्ण कायर् करना आरम्भ करता है। लोटनिक घषर्ण

>Chapter-12>


Our Past -3

अध्याय 12

घर्षण

आपने ट्रैफिक सिग्नल पर कार अथवा ट्रक चालक को अपने वाहन को मंद करते देखा होगा। जब भी आवश्यक होता है आप भी ब्रेक लगाकर अपनी साइकिल को मंद करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ब्रेक लगाने पर वाहन मंद क्यों हो जाते हैं? केवल वाहन ही नहीं, कोई भी वस्तु जो किसी अन्य वस्तु के पृष्ठ पर गति कर रही होती है, उस स्थिति में भी मंद हो जाती है जब उस पर कोई बाहरी बल न लगाया हो। अन्ततः वह रुक जाती है। क्या आपने फर्श पर लुढ़कती गेंद को कुछ समय पश्चात् रुकते देखा है? केले के छिलके पर कदम पड़ते ही हम क्यों फिसल जाते हैं (चित्र 12.1)? किसी चिकने तथा गीले फर्श पर चलना क्यों कठिन होता है?

चित्र 12.1 : जब कोई लड़का किसी केले के छिलके पर कदम रखता है तो वह गिर पड़ता है।

इस अध्याय में आप इसी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर पाएँगे।

12.1 घर्षण बल

क्रियाकलाप 12.1

मेज़ पर रखी किसी पुस्तक [चित्र 12.2(a)] को धीरे से धकेलिए। आप यह देखेंगे कि कुछ दूरी चलकर यह रुक जाती है। इसी क्रियाकलाप को विपरीत दिशा में बल लगाकर दोहराइए [चित्र 12.2(b)]। क्या इस बार भी पुस्तक रुक जाती है? क्या आप इसका स्पष्टीकरण सोच सकते हैं? क्या हम यह कह सकते हैं कि पुस्तक की गति का विरोध करने के लिए उस पर कोई बल लगना चाहिए? इस बल को घर्षण बल कहते हैं।


(a)


(b)

चित्र 12.2 (a) तथा (b) : घर्षण पुस्तक तथा फर्श के पृष्ठों की सापेक्ष गति का विरोध करता है।

आपने देखा कि यदि आप बाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घर्षण दाईं दिशा में कार्य करता है। यदि आप दाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घर्षण बाईं दिशा में कार्य करता है। दोनों स्थितियों में घर्षण पुस्तक की गति का विरोध करता है। घर्षण बल सदैव ही लगाए गए बल का विरोध करता है।

उपरोक्त क्रियाकलाप में घर्षण बल पुस्तक तथा मेज़ के पृष्ठों के बीच कार्य करता है।

क्या सभी पृष्ठों पर समान घर्षण बल लगता है? क्या यह पृष्ठों के चिकनेपन पर निर्भर करता है? आइए पता लगाएँ।

12.2 घर्षण को प्रभावित करने वाले कारक

क्रियाकलाप 12.2

किसी ईंट के चारों ओर एक डोरी बाँधिए। ईंट को कमानीदार तुला द्वारा खींचिए (चित्र 12.3)। आपको कुछ बल लगाना पड़ता है। जैसे ही ईंट गति करना आरम्भ करे, कमानीदार तुला का पाठ्यांक लीजिए। इससे आपको उस घर्षण बल की माप प्राप्त होगी जो ईंट तथा फर्श के पृष्ठों के बीच लगता है।


चित्र 12.3 : कमानीदार तुला द्वारा ईंट को खींचा जा रहा है।

अब ईंट पर पॉलिथीन का टुकड़ा लपेटिए और क्रियाकलाप को दोहराइए। क्या आप उपरोक्त दोनों स्थितियों में कमानीदार तुला के पाठ्यांकों में कोई अन्तर पाते हैं? इस अन्तर का क्या कारण हो सकता है? ईंट पर जूट का एक टुकड़ा लपेटकर इस क्रियाकलाप को दोहराइए। आपने क्या पाया?


कमानीदार तुला

कमानीदार तुला वह युक्ति है जिसके द्वारा किसी वस्तु पर लगने वाले बल को मापा जाता है। इसमें एक कुण्डलित कमानी होती है जिसमें बल लगाने पर प्रसार हो जाता है। कमानी के इस प्रसार की माप  इसके अंशांकित पैमाने पर चलने वाले संकेतक द्वारा की जाती है। पैमाने के पाठ्यांक द्वारा बल का परिमाण प्राप्त होता है।


क्रियाकलाप 12.3

किसी चिकने फर्श अथवा किसी मेज़ पर कोई आनत समतल बनाइए। इसके लिए आप ईंटों के सहारे रखा कोई लकड़ी का तख्ता उपयोग कर सकते हैं [चित्र 12.4(a)]। आनत समतल के किसी बिन्दु A पर पेन से कोई चिह्न अंकित कीजिए। अब कोई पेंसिल सेल इस बिन्दु से नीचे लुढ़कने दीजिए। रुकने से पूर्व यह मेज़ पर कितनी दूरी तय करता है? इस दूरी को नोट कीजिए। अब मेज़ पर कोई कपड़ा बिछा दीजिए। यह सुनिश्चित कीजिए कि कपड़े में सिलवट न हों। उपरोक्त क्रियाकलाप को फिर कीजिए [चित्र 12.4(b)]।

Screenshot from 2019-07-05 12-01-39

चित्र 12.4 : पेंसिल सेल विभिन्न पृष्ठों पर भिन्न-भिन्न  दूरियाँ तय करता है।

मेज़ पर रेत की पतली पर्त बिछाकर इस क्रियाकलाप को दोहराइए। समस्त क्रियाकलाप में आनत समतल का ढलान समान रखिए।

किस स्थिति में पेंसिल सेल द्वारा तय की गई दूरी सबसे कम है? सेल द्वारा हर बार तय की गईं दूरियाँ भिन्न-भिन्न क्यों होती हैं? इसका कारण जानने का प्रयास कीजिए। अपने परिणाम पर चर्चा कीजिए।

क्या सेल द्वारा चली दूरी जिस पृष्ठ पर वह चलता है, उसकी प्रकृति पर निर्भर करती है?

क्या पेंसिल सेल के पृष्ठ का चिकनापन भी चली गई दूरी को प्रभावित करता है?

मैं इस क्रियाकलाप को  सेल पर रेगमाल  का टुकड़ा लपेट  कर करूँगा।

घर्षण सम्पर्क में आने वाले दो पृष्ठों की अनियमितताओं के कारण होता है। एेसे पृष्ठ जो देखने में बहुत चिकने लगते हैं, उनमें भी बहुत सारी सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं (चित्र 12.5)। दो पृष्ठों की अनियमितताएँ एक-दूसरे के भीतर धँस जाती हैं। जब हम एक पृष्ठ पर दूसरे पृष्ठ को गति कराने का प्रयास करते हैं तो हमें इस अन्तः- बंधन (interlocking) पर पार पाने के लिए कुछ बल लगाना पड़ता है। खुरदरे (रूक्ष) पृष्ठों पर ये अनियमितताएँ अधिक संख्या में होती हैं। अतः यदि पृष्ठ रूक्ष हो तो घर्षण बल अधिक होता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-09-34

चित्र 12.5 : पृष्ठीय अनियमितताएँ।

हमने यह सीखा कि दो पृष्ठों के बीच अनियमितताओं के अन्तःबंधन के कारण घर्षण होता है। स्पष्ट है कि यदि पृष्ठों को बलपूर्वक दबाएँ तो घर्षण में वृद्धि हो जाएगी। इसका अनुभव आप किसी चटाई को उस समय खींचकर कर सकते हैं जब उस पर कोई व्यक्ति नहीं बैठा है, तथा जब कोई व्यक्ति उस पर बैठा हो।


चित्र 12.6 : बॉक्स को गतिमान रखने के लिए लगातार धकेलना पड़ता है।

अपने उस अनुभव को याद कीजिए जब पिछली बार आपने किसी भारी बॉक्स को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरकाया था (चित्र 12.6)। यदि आपको इस प्रकार का कोई अनुभव नहीं है तो अब इस प्रकार का अनुभव कीजिए। कौन-सा कार्य आसान है – विराम अवस्था से किसी बॉक्स को गतिशील कराना अथवा किसी गतिशील बॉक्स को उसी दिशा में सरकाना।

किसी रुकी हुई वस्तु को विराम से गति प्रारम्भ करने की स्थिति में घर्षण पर पार पाने के लिए वस्तु पर लगाया जाने वाला बल स्थैतिक घर्षण की माप होती है। इसके विपरीत, किसी वस्तु को उसी चाल से गतिशील रखने के लिए आवश्यक बल उसके सर्पी घर्षण की माप होती है।

जब बॉक्स सरकना आरम्भ कर देता है, तो उसके पृष्ठ के सम्पर्क बिन्दुओं को उतना समय नहीं मिल पाता कि वे फर्श के संपर्क बिन्दुओं में धँस सकें। अतः सर्पी घर्षण स्थैतिक घर्षण से कुछ कम होता है। इसीलिए किसी बॉक्स में गति आरम्भ करने की अपेक्षा पहले से ही गतिमान बॉक्स की गति बनाए रखना सरल होता है।

12.3 घर्षण : हानिकारक परंतु अनिवार्य

अब अपने कुछ अनुभवों को याद कीजिए। किसी काँच के गिलास अथवा किसी कुल्हड़ में से किसे पकड़े रखना आसान है? मान लीजिए किसी गिलास का बाहरी पृष्ठ चिकना है अथवा उस पर पकाने के तेल की परत चढ़ी है तो क्या उसे हाथ में पकड़ना आसान होगा अथवा अधिक कठिन हो जाएगा? ज़रा सोचिए! यदि घर्षण न हो तो क्या आपके लिए गिलास को पकड़े रखना संभव हो पाएगा?

यह भी याद कीजिए कि मारबल के गीले फर्श अथवा कीचड़ वाली पगडंडी पर चलना कितना कठिन होता है। क्या आप घर्षण न होने की स्थिति में चलने की कल्पना कर सकते हैं?

यदि घर्षण न हो तो आप पेन अथवा पेंसिल से नहीं लिख सकते। जब आपके शिक्षक चाक से श्यामपट्ट पर लिखते हैं तो श्यामपट्ट का रूक्ष पृष्ठ रगड़ द्वारा चाक के कुछ कणों को उतार देता है जो श्यामपट्ट से चिपक जाते हैं और इस प्रकार श्यामपट्ट पर आपको लिखावट दिखाई देती है। यदि सड़क तथा वाहन के टायरों के बीच घर्षण न होता तो उन वाहनों की न तो गति आरम्भ की जा सकती थी, न ही उन्हें रोका जा सकता था और न ही दिशा परिवर्तित की जा सकती थी।


चित्र 12.7 : घर्षण के कारण दीवार में कील गड़ जाती है।

यदि कोई वस्तु गति आरम्भ कर दे तो वह कभी नहीं रुकेगी, यदि वहाँ घर्षण न हो। आप दीवार में कील नहीं ठोंक पाते (चित्र 12.7) अथवा धागे में गाँठ नहीं बाँध पाते। घर्षण के बिना कोई भवन निर्माण नहीं हो सकता था।

चित्र 12.8 घर्षण के कारण जूतों के तले घिस जाते हैं।

इसके विपरीत घर्षण हानिकारक भी है। घर्षण के कारण वस्तुएँ घिस जाती हैं चाहे वह पेंच, बॉल बेयरिंग अथवा जूतों के सोल ही क्यों न हों (चित्र 12.8)। आपने रेलवे स्टेशनों पर पैदल-उपरिपुलों की घिसीपिटी सीढ़ियाँ देखी होंगी।

घर्षण से ऊष्मा भी उत्पन्न हो सकती है। कुछ मिनट तक अपनी हथेलियों को तेज़ी से एक दूसरे के साथ रगड़िए (चित्र 12.9)। आप क्या अनुभव करते हैं? जब आप माचिस की तीली को किसी रूक्ष पृष्ठ से रगड़ते हैं, तो वह आग पकड़ लेती है (चित्र  12.10)।

आपने यह देखा होगा कि विद्युत मिक्सर को कुछ मिनट तक चलाने पर उसका जार गरम हो जाता है। आप एेसे बहुत से उदाहरण दे सकते हैं जिनमें घर्षण द्वारा ऊष्मा उत्पन्न होती है। वास्तव में जब हम किसी मशीन का उपयोग करते हैं तो घर्षण से उत्पन्न ऊष्मा के कारण अत्यधिक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। निम्नलिखित अनुभाग में हम घर्षण को कम करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

Screenshot from 2019-07-05 12-15-21

चित्र 12.9 : हाथों को रगड़ने पर आप गरमी अनुभव करते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 12-16-14

चित्र 12.10 : घर्षण के कारण माचिस की तीली को रगड़ने पर वह आग पकड़ लेती है।

12.4 घर्षण बढ़ाना तथा घटाना

पिछले अनुभाग में आपने देखा कि कुछ परिस्थितियों में घर्षण वांछनीय होता है।

क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके जूतों की तली खाँचेदार क्यों है [चित्र 12.11(a)]। खाँचे जूतों की फर्श से पकड़ बनाते हैं जिसके कारण आप चलते समय सुरक्षित रहते हैं। इसी प्रकार कारों, ट्रकों तथा बुलडोज़रों के टायर भी खाँचेदार होते हैं जिससे सड़क से उनकी पकड़ अच्छी बनती है।

Screenshot from 2019-07-05 12-17-48

चित्र 12.11 : (a) जूते तथा (b) टायरों की तलियों को खाँचेदार बनाकर घर्षण अधिक किया जाता है।

स्वचालित वाहनों तथा साइकिलों की ब्रेक प्रणालियों में ब्रेक पैडों का उपयोग करके हम जानबूझकर घर्षण में वृद्धि करते हैं। जब आप कोई साइकिल चलाते हैं तो उसके ब्रेक पैड पहिए को स्पर्श नहीं करते। परन्तु जब आप ब्रेक लीवर को दबाते हैं तो ये पैड घर्षण के कारण रिम की गति को रोक देते हैं और पहिया गति करना बन्द कर देता है। आपने यह देखा होगा कि कबड्डी के खिलाड़ी अपने हाथों पर मिट्टी रगड़ते हैं ताकि वे अपने प्रतिद्वंदी को और अच्छी तरह पकड़ सकें। व्यायामी (जिमनैस्ट) अपने हाथों पर कोई रूक्ष पदार्थ लगा लेते हैं ताकि घर्षण में वृद्धि करके अच्छी पकड़ बना सकें।

यद्यपि कुछ अन्य स्थितियों में घर्षण अवांछनीय होता है। अतः हम उसे कम करना चाहेंगे।

कैरम बोर्ड पर आप महीन पाउडर क्यों छिड़कते हैं (चित्र 12.12)? आपने यह नोट किया होगा कि जब हम दरवाज़ों के कब्ज़ों (चूलों) में तेल की कुछ बूँदें डालते हैं, तो दरवाज़ा सहज ही घूमने लगता है। साइकिल तथा मोटर के मेकैनिक (मिस्त्री) इन मशीनों के गतिशील भागों के बीच ग्रीज़ लगाते हैं। उपरोक्त सभी परिस्थितियों में हम दक्षता में वृद्धि के लिए घर्षण को कम करते हैं। जब तेल, ग्रीज़ अथवा ग्रेफाइट को किसी मशीन के गतिशील पुर्जों (भागों) के बीच लगाते हैं तो वहाँ इनकी एक पतली परत बन जाती है तथा गतिशील पृष्ठ सीधे ही एक-दूसरे को रगड़ नहीं पाते (चित्र 12.13)। इस प्रकार अनियमितताओं का अंतःबंधन का अंतःपाशन काफी सीमा तक दूर हो जाता है। गति सहज बन जाती है। घर्षण कम करने वाले पदार्थों को स्नेहक कहते हैं। कुछ मशीनों में स्नेहक के रूप में तेल का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। वहाँ पर घर्षण कम करने के लिए गतिशील पुर्जों के बीच वायु की गद्दी का उपयोग किया जाता है।

चित्र 12.12 : घर्षण कम करने के लिए कैरम बोर्ड  पाउडर छिड़का गया है।


Screenshot from 2019-07-05 12-21-00

चित्र 12.13 : स्नेहक का प्रभाव।

क्या हम पृष्ठों पर पालिश करके अथवा अत्यधिक मात्रा में स्नेहक पदार्थों का उपयोग करके घर्षण को घटाकर शून्य कर सकते हैं?

घर्षण कदापि पूर्णतः समाप्त नहीं हो सकता है। कोई पृष्ठ पूर्णतः चिकना नहीं होता उसमें कुछ अनियमितताएँ  अवश्य होती हैं।

12.5 पहिए घर्षण कम कर देते हैं

आपने अटैचियों तथा अन्य भारी सामानों (असबाबों) पर रोलर जड़े देखे होंगे। एेसे सामानों को कोई छोटा बच्चा भी आसानी से खींच सकता है (चित्र 12.14)। एेसा क्यों होता है? आइए पता लगाएँ।


चित्र 12.14 : लोटन घर्षण कम कर देता है।

क्रियाकलाप 12.4

बेलनाकार आकृति की कुछ पेंसिलें लीजिए। इन्हें मेज़ पर एक-दूसरे के समान्तर रखिए। इनके ऊपर कोई मोटी पुस्तक रखिए (चित्र 12.15)। अब पुस्तक को धकेलिए। आप यह पाएँगे कि पुस्तक के गतिशील होने पर पेंसिल लुढ़कती है। पेंसिल की इस प्रकार की गति को लोटनिक गति कहते हैं। क्या आप यह अनुभव करते हैं कि पुस्तक को सरकाने की तुलना में इस प्रकार गतिशील कराने से घर्षण कम हो गया है? क्या आपने भारी मशीनों को उनके नीचे लकड़ी के लट्ठे रखकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते देखा है?


चित्र 12.15 : रोलरों पर पुस्तक की गति।

जब एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु के पृष्ठ पर लुढ़कती है तो उसकी गति के प्रतिरोध को लोटनिक घर्षण कहते हैं। लोटन घर्षण कम कर देता है। किसी वस्तु को दूसरी वस्तु पर सरकने की तुलना में लोटन करना सदैव आसान होता है। यही कारण है कि रोलर जड़ा सामान खींचना सुविधाजनक होता है। क्या अब आप यह समझ सकते हैं कि पहिए के आविष्कार कोे मानव जाति की महानतम खोजों में क्यों गिना जाता है?

क्योंकि लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण से कम होता है इसलिए अधिकांश मशीनों में सर्पण को बाल बेयरिंग के उपयोग द्वारा लोटन में प्रतिस्थापित किया जाता है। छत के पंखों तथा साइकिलों में धुरी तथा नाभि (हब) के बीच बाल बेयरिंग का उपयोग इसके सामान्य उदाहरण हैं (चित्र 12.16)।



चित्र 12.16 : बाल बेयरिंग घर्षण कम कर देते हैं।

12.6 तरल घर्षण

आप जानते हैं कि वायु अत्यन्त हलकी तथा विरल होती है। फिर भी इससे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर वायु घर्षण बल लगाती है। इसी प्रकार जल तथा अन्य द्रव भी इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घर्षण बल लगाते हैं। विज्ञान में गैसों तथा द्रवों को एक ही नाम ‘तरल’ दिया गया है। अतः हम कह सकते हैं कि तरल इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घर्षण बल लगाते हैं।

तरलों द्वारा लगाए गए घर्षण बल को कर्षण भी  कहते हैं।

किसी तरल पर लगने वाला घर्षण बल उसकी तरल के सापेक्ष गति पर निर्भर करता है। घर्षण बल वस्तु की आकृति तथा तरल की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।

स्पष्ट है कि जब वस्तुएँ किसी तरल में गति करती हैं तो उन्हें उन पर लगे घर्षण बल पर पार पाना होता है। इस प्रक्रिया में उनकी ऊर्जा का क्षय होता है। अतः घर्षण को कम से कम करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। अतः वस्तुओं को विशिष्ट आकृतियाँ दी जाती हैं। आपके विचार से वैज्ञानिकों को इन विशिष्ट आकृतियाें के बारे में कहाँ से संकेत प्राप्त होते हैं? वास्तव में उन्हें ये संकेत प्रकृति से मिलते हैं। पक्षी तथा मछलियाँ तरल में गति करते हैं। उनके शरीर का विकास इस प्रकार हुआ होगा कि तरल में गति करते समय घर्षण पर पार पाने में उनकी ऊर्जा का क्षय यथासंभव कम हो। आपने इन आकृतियों के बारे में कक्षा VI में अध्ययन किया था। वायुयान की आकृति को सावधानीपूर्वक देखिए (चित्र 12.17)। क्या आप इसकी आकृति तथा किसी पक्षी की आकृति में कोई समानता पाते हैं? वास्तव में, सभी वाहनों के डिज़ाइन इस प्रकार बनाए जाते हैं कि तरल घर्षण कम हो जाए।
Screenshot from 2019-07-05 12-33-47

चित्र 12.17 : एक हवाई जहाज और पक्षी की आकृति में समानता।

प्रमुख शब्द

बाल बेयरिंग

कर्षण

तरल घर्षण

घर्षण

अन्तःबंधन

स्नेहक

लोटनिक घर्षण

सर्पी घर्षण

स्थैतिक घर्षण


आपके लिए एक पहेली

कुछ स्थितियों में, मैं गति का विरोध करता हूँ

यद्यपि मैं गति को संभव बनाता हूँ

परन्तु मैं सापेक्ष गति का सदा विरोध करता हूँ

दो गतिमान पृष्ठों के बीच

लगाइए वहाँ कुछ स्नेहक

वहाँ बन जाता हूँ मैं छोटा

बनाइए गतिमान पृष्ठों को रूक्ष

बना देता हूँ मैं गति को कठिन

मैं हो सकता हूँ - स्थैतिक, सर्पी अथवा लोटनिक

परन्तु जब भी होते हैं दो पृष्ठ गतिमय,

होता मैं हूूँ सदैव वहाँ, बताओं मैं हूँ कौन!


आपने क्या सीखा

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32 घर्षण सम्पर्क में रखे दो पृष्ठों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करता है। यह दोनों पृष्ठों पर कार्य करता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  घर्षण सम्पर्क के दो पृष्ठों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32 दिए गए पृष्ठों के युगल के लिए घर्षण इन पृष्ठों के चिकनेपन की अवस्था पर निर्भर करता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  घर्षण इस बात पर निर्भर करता है कि दो पृष्ठ एक दूसरे को कितने बलपूर्वक दबाते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  स्थैतिक घर्षण तब कार्य करना आरम्भ करता है जब हम किसी वस्तु को उसकी विराम की स्थिति से गति में लाने का प्रयास करते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  सर्पी घर्षण तब कार्य करना आरम्भ करता है जब कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु पर सर्पी गति करती है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  सर्पी घर्षण स्थैतिक घर्षण से कम होता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  घर्षण हमारे बहुत से क्रियाकलापों के लिए महत्त्वपूर्ण होता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  किसी पृष्ठ को रूक्ष बनाकर घर्षण बढ़ाया जा सकता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  जूतों की तली तथा वाहनों के टायर घर्षण बढ़ाने के लिए खाँचेदार बनाए जाते हैं।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  कभी-कभी घर्षण अवांछनीय होता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  स्नेहक लगाकर घर्षण को कम किया जा सकता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  जब कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु पर लोटन करती है तो लोटनिक घर्षण कार्य करना आरम्भ करता है। लोटनिक घर्षण सर्पी घर्षण की अपेक्षा कम होता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  कई मशीनों में बाल बेयरिंग का उपयोग करके घर्षण को कम किया जाता है।

Screenshot from 2019-07-05 12-43-32  तरल में गति करने वाली वस्तुओं को उचित आकृति प्रदान करके घर्षण बल को कम किया जा सकता है।

अभ्यास

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए–

(क) घर्षण एक दूसरे के सम्पर्क में रखी दो वस्तुओं के पृष्ठों के बीच का विरोध करता है।

(ख) घर्षण पृष्ठों के पर निर्भर करता है।

(ग) घर्षण से उत्पन्न होती है।

(घ) कैरम बोर्ड पर पाउडर छिड़कने से घर्षण हो जाता है।

(ङ) सर्पी घर्षण स्थैतिक घर्षण से होता है।

2. चार बच्चों को लोटनिक, स्थैतिक तथा सर्पी घर्षण के कारण बलों को घटते क्रम में व्यवस्थित करने के लिए कहा गया । उनकी व्यवस्था नीचे दी गयी है। सही व्यवस्था का चयन कीजिए–

(क) लोटनिक, स्थैतिक, सर्पी

(ख) लोटनिक, सर्पी, स्थैतिक

(ग) स्थैतिक, सर्पी, लोटनिक

(घ) सर्पी, स्थैतिक, लोटनिक

3. आलिदा अपनी खिलौना कार को संगमरमर के सूखे फर्श, संगमरमर के गीले फर्श, फर्श पर बिछे समाचार पत्र तथा तौलिए पर चलाती है। कार पर विभिन्न पृष्ठों द्वारा लगे घर्षण बल का बढ़ता क्रम होगा–

(क) संगमरमर का गीला फर्श, संगमरमर का सूखा फर्श, समाचारपत्र, तौलिया

(ख) समाचारपत्र, तौलिया, संगमरमर का सूखा फर्श, संगमरमर का गीला फर्श

(ग) तौलिया, समाचारपत्र, संगमरमर का सूखा फर्श, संगमरमर का गीला फर्श

(घ) संगमरमर का गीला फर्श, संगमरमर का सूखा फर्श, तौलिया, समाचारपत्र

4. मान लीजिए आप अपने डेस्क को थोड़ा झुकाते हैं। उस पर रखी कोई पुस्तक नीचे की ओर सरकना आरम्भ कर देती है। इस पर लगे घर्षण बल की दिशा दर्शाइए।

5. मान लीजिए दुर्घटनावश साबुन के पानी से भरी बाल्टी संगमरमर के किसी फर्श पर उलट जाए। इस गीले फर्श पर आपके लिए चलना आसान होगा या कठिन। अपने उत्तर का कारण बताइए।

6. खिलाड़ी कीलदार जूते (स्पाइक्स) क्यों पहनते हैं? व्याख्या कीजिए।

7. इकबाल को हलकी पेटिका धकेलनी है तथा सीमा को उसी फर्श पर भारी पेटिका धकेलनी है। कौन अधिक घर्षण बल अनुभव करेगा और क्यों?

8. व्याख्या कीजिए, सर्पी घर्षण स्थैतिक घर्षण से कम क्यों होता है।

9. वर्णन कीजिए, घर्षण किस प्रकार शत्रु एवं मित्र दोनों है।

10. वर्णन कीजिए, तरल में गति करने वाली वस्तुओं की आकृति विशेष प्रकार की क्यों बनाते हैं।

विस्तारित अधिगम - क्रियाकलाप एवं परियोजनाएँ

1. आपकी रुचि के खेल में घर्षण की क्या भूमिका है? इस खेल के कुछ एेसे चित्र एकत्र कीजिए जिसमें खेलते समय घर्षण या तो सहायता कर रहा है अथवा विरोध कर रहा है। अपनी कक्षा के बुलेटिन बोर्ड पर इन चित्रों को उचित शीर्षक सहित प्रदर्शित कीजिए।

2. कल्पना कीजिए कि घर्षण यकायक समाप्त हो जाए। इससे जीवन किस प्रकार प्रभावित होगा। एेसी दस परिस्थितियों की सूची बनाइए।

3. किसी एेसी दुकान पर जाइए जहाँ खेलों के जूते मिलते हैं। विभिन्न खेलों के जूतों की तलियों का प्रेक्षण कीजिए। अपने प्रेक्षणों का वर्णन कीजिए।

4. एक खिलौना बनाइए- माचिस की एक खाली डिब्बी लीजिए। इसकी ट्रे निकालिए। चित्र में दर्शाए अनुसार किसी बाल पेन की अनुपयोगी रिफिल लेकर उसे ट्रे की चौड़ाई के बराबर काटिए। रिफिल को चित्र 12.18 में दर्शाए अनुसार दो पिनों की सहायता से ट्रे के ऊपरी भाग में जड़िए। ट्रे के सम्मुख फलकों पर छिद्र बनाइए। यह सुनिश्चित कीजिए कि छिद्र इतने बड़े हों कि धागे को छिद्रों से आसानी से गुजारा जा सके। एक मीटर लम्बा धागा लेकर उसे चित्र में दर्शाए अनुसार छिद्रों से गुजारिए। धागे के दोनों सिरों पर मनके बाँध दीजिए ताकि वह ट्रे के छिद्रों से बाहर न निकल सके। अब ट्रे में माचिस की डिब्बी का ढक्कन लगा दीजिए।

माचिस की डिब्बी को धागे से लटकाइए। धागा ढीला छोड़ दीजिए।

माचिस की डिब्बी गुरुत्व बल के कारण नीचे गिरना आरम्भ कर देगी।

अब धागे को कस दीजिए और प्रेक्षण कीजिए क्या होता है।

अपने प्रेक्षण की व्याख्या कीजिए। क्या आप इस घटना का घर्षण से संबंध स्थापित कर सकते हैं?

Screenshot from 2019-07-05 12-53-10

चित्र 12.18 

नीचे दी गई वेबसाइट पर आप संबंधित विषय पर और अधिक अध्ययन कर सकते हैंः

• http://www.school-for-champions.com/science/friction.htm

• http//hyperphysics.phy-astr.gsu.edu/hbase/firct2.html

RELOAD if chapter isn't visible.