घषर्ण आपने ट्रैपिफक सिग्नल पर कार अथवा ट्रक चालक को अपने वाहन को मंद करते देखा होगा। जब भी आवश्यक होता है आप भी ब्रेक लगाकर अपनी साइकिल को मंद करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि बे्रक लगाने पर वाहन मंद क्यों हो जाते हैं? केवल वाहन ही नहीं, कोइर् भी वस्तु जो किसी अन्य वस्तु के पृष्ठ पर गति कर रही होती है, उस स्िथति में भी मंद हो जाती है जब उस पर कोइर् बाहरी बल न लगाया हो। अन्ततः वह रुक जाती है। क्या आपने पफशर् पर लुढ़कती गेंद को कुछ समय पश्चात् रुकते देखा है? केले के छिलके पर कदम पड़ते ही हम क्यों पिफसल जाते हैं ;चित्रा 12.1द्ध? किसी चिकने तथा गीले पफशर् पर चलना क्यों कठिन होता है? इस अध्याय में आप इसी प्रकार के प्रश्नों के उत्तर पाएँगे। 12.1 घषर्ण बल ियाकलाप 12.1 आपने देखा कि यदि आप बाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घषर्ण दाईं दिशा में कायर् करता है। यदि आप दाईं दिशा में बल लगाते हैं तो घषर्ण बाईं दिशा में कायर् करता है। दोनों स्िथतियों में घषर्ण पुस्तक की गति का विरोध करता है। घषर्ण बल सदैव ही लगाए गए बल का विरोध करता है। उपरोक्त ियाकलाप में घषर्ण बल पुस्तक तथा मेश के पृष्ठों के बीच कायर् करता है। क्या सभी पृष्ठों पर समान घषर्ण बल लगता है? क्या यह पृष्ठों के चिकनेपन पर निभर्र करता है? आइए पता लगाएँ। 12.2 घषर्ण को प्रभावित करने वाले कारक ियाकलाप 12.2 कमानीदार तुला कमानीदार तुला वह युक्ित है जिसके द्वारा किसी वस्तु पर लगने वाले बल को मापा जाता है। इसमें एक कुण्डलित कमानी होती है जिसमें बल लगाने पर प्रसार हो जाता है। कमानी के इस प्रसार की माप इसके अंशांकित पैमाने पर चलने वाले संकेतक द्वारा की जाती है। पैमाने के पाठ्यांक द्वारा बल का परिमाण प्राप्त होता है। क्या सेल द्वारा चली दूरी जिस पृष्ठ पर वह चलता है, उसकी प्रकृति पर निभर्र करती है? क्या पेंसिल सेल के पृष्ठ का चिकनापन भी चली गइर् दूरी को प्रभावित करता है? घषर्ण सम्पवर्फ में आने वाले दो पृष्ठों की अनियमितताओं के कारण होता है। ऐसे पृष्ठ जो देखने में बहुत चिकने लगते हैं, उनमें भी बहुत सारी सूक्ष्म अनियमितताएँ होती हैं ;चित्रा 12.5द्ध। दो पृष्ठों की अनियमितताएँ एक - दूसरे के भीतर धँस जाती हैं। जब हम एक पृष्ठ पर दूसरे पृष्ठ को गति कराने का प्रयास करते हैं तो हमें इस अन्तः - बंधन ;पदजमतसवबापदहद्ध पर पार पाने के लिए कुछ बल लगाना पड़ता है। खुरदरे ;रूक्षद्ध पृष्ठों पर ये अनियमितताएँ अिाक संख्या में होती हैं। अतः यदि पृष्ठ रूक्ष हो तो घषर्ण बल अिाक होता है। हमने यह सीखा कि दो पृष्ठों के बीच अनियमितताओं के अन्तःबंधन के कारण घषर्ण होता है। स्पष्ट है कि यदि पृष्ठों को बलपूवर्क दबाएँ तो घषर्ण में वृि हो जाएगी। इसका अनुभव आप किसी चटाइर् को उस समय खींचकर कर सकते हैं जब चित्रा 12.6: बाॅक्स को गतिमान रखने के लिए लगातार धकेलना पड़ता है। अपने उस अनुभव को याद कीजिए जब पिछली बार आपने किसी भारी बाॅक्स को एक स्थान से दूसरे स्थान पर सरकाया था ;चित्रा 12.6द्ध। यदि आपको इस प्रकार का कोइर् अनुभव नहीं है तो अब इस प्रकार का अनुभव कीजिए। कौन - सा कायर् आसान है μ विराम अवस्था से किसी बाॅक्स को गतिशील कराना अथवा किसी गतिशील बाॅक्स को उसी दिशा में सरकाना। किसी रुकी हुइर् वस्तु को विराम से गति प्रारम्भ करने की स्िथति में घषर्ण पर पार पाने के लिए वस्तु पर लगाया जाने वाला बल स्थैतिक घषर्ण की माप होती है। इसके विपरीत, किसी वस्तु को उसी चाल से गतिशील रखने के लिए आवश्यक बल उसके सपीर् घषर्ण की माप होती है। जब बाॅक्स सरकना आरम्भ कर देता है, तो उसके पृष्ठ के सम्पवर्फ बिन्दुओं को उतना समय नहीं मिल पाता कि वे पफशर् के संपवर्फ बिन्दुओं में धँस सवेंफ। अतः सपीर् घषर्ण स्थैतिक घषर्ण से कुछ कम होता है। इसीलिए किसी बाॅक्स में गति आरम्भ करने की अपेक्षा पहले से ही गतिमान बाॅक्स की गति बनाए रखना सरल होता है। 12.3 घषर्ण: हानिकारक परंतु अनिवायर् अब अपने वुफछ अनुभवों को याद कीजिए। किसी काँच के गिलास अथवा किसी वुफल्हड़ में से किसे पकड़े रखना आसान है? मान लीजिए किसी गिलास का बाहरी पृष्ठ चिकना है अथवा उस पर पकाने के तेल की परत चढ़ी है तो क्या उसे हाथ में पकड़ना आसान होगा अथवा अिाक कठिन हो जाएगा? शरा सोचिए! यदि घषर्ण न हो तो क्या आपके लिए गिलास को पकड़े रखना संभव हो पाएगा? यह भी याद कीजिए कि मारबल के गीले पफशर् अथवा कीचड़ वाली पगडंडी पर चलना कितना कठिन होता है। क्या आप घषर्ण न होने की स्िथति में चलने की कल्पना कर सकते हैं? यदि घषर्ण न हो तो आप पेन अथवा पेंसिल से नहीं लिख सकते। जब आपके श्िाक्षक चाक से श्यामपट्ट पर लिखते हैं तो श्यामपट्ट का रूक्ष पृष्ठ रगड़ द्वारा चाक के वुफछ कणों को उतार देता है जो चित्रा 12.7: घषर्ण के कारण दीवार में कील गड़ जाती है। श्यामपट्ट से चिपक जाते हैं और इस प्रकार श्यामपट्ट पर आपको लिखावट दिखाइर् देती है। यदि सड़क तथा वाहन के टायरों के बीच घषर्ण न होता तो उन वाहनों की न तो गति आरम्भ की जा सकती थी, न ही उन्हें रोका जा सकता था और न ही दिशा परिवतिर्त की जा सकती थी। यदि कोइर् वस्तु गति आरम्भ कर दे तो वह कभी नहीं रुकेगी, यदि वहाँ घषर्ण न हो। आप दीवार में कील नहीं ठोंक पाते ;चित्रा 12.7द्ध अथवा धगे में गाँठ नहीं बाँध पाते। घषर्ण के बिना कोइर् भवन निमार्ण नहीं हो सकता था। इसके विपरीत घषर्ण हानिकारक भी है। घषर्ण के कारण वस्तुएँ घ्िास जाती हैं चाहे वह पेंच, बाॅल बेयरिंग अथवा जूतों के सोल ही क्यों न हों ;चित्रा 12.8द्ध। आपने रेलवे स्टेशनों पर पैदल - उपरिपुलों की घ्िासीपिटी सीढि़याँ देखी होंगी।घषर्ण से ऊष्मा भी उत्पन्न हो सकती है। वुफछ मिनट तक अपनी हथेलियों को तेशी से एक दूसरे के साथ रगडि़ए ;चित्रा 12.9द्ध। आप क्या अनुभव करते हैं? जब आप माचिस की तीली को किसी रूक्ष पृष्ठ से रगड़ते हैं, तो वह आग पकड़ लेती है ;चित्रा 12.10द्ध। आपने यह देखा होगा कि विद्युत मिक्सर को कुछ मिनट तक चलाने पर उसका जार गरम हो जाता है। आप ऐसे बहुत से उदाहरण दे सकते हैं जिनमें घषर्ण द्वारा चित्रा 12.9: हाथों को रगड़ने पर आप गरमी अनुभव करते हैं। ऊष्मा उत्पन्न होती है। वास्तव में जब हम किसी मशीनका उपयोग करते हैं तो घषर्ण से उत्पन्न ऊष्मा के कारणअत्यिाक ऊजार् नष्ट हो जाती है। निम्नलिख्िात अनुभाग में हम घषर्ण को कम करने के उपायों पर चचार् करेंगे। 12.4 घषर्ण बढ़ाना तथा घटाना पिछले अनुभाग में आपने देखा कि कुछ परिस्िथतियों में घषर्ण वांछनीय होता है। क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपके जूतों की तली खाँचेदार क्यों है ख्चित्रा 12.11;ंद्ध,। खाँचे जूतों की पफशर् से पकड़ बनाते हैं जिसके कारण आप चलते समय सुरक्ष्िात रहते हैं। इसी प्रकार कारों, ट्रकों तथा बुलडोशरों के टायर भी खाँचेदार होते हैं जिससे सड़क से उनकी पकड़ अच्छी बनती है। यद्यपि वुफछ अन्य स्िथतियों में घषर्ण अवांछनीय होता है। अतः हम उसे कम करना चाहेंगे। वैफरम बोडर् पर आप महीन पाउडर क्यों छिड़कते हैं ;चित्रा 12.12द्ध? आपने यह नोट किया होगा कि जब हम दरवाशों के कब्शों ;चूलोंद्ध में तेल की कुछ बूँदें डालते हैं, तो दरवाशा सहज ही घूमने लगता है। साइकिल तथा मोटर के मेवैफनिक ;मिस्त्राीद्ध इन मशीनों के गतिशील भागों के बीच ग्रीश लगाते हैं। उपरोक्त सभी परिस्िथतियों में हम दक्षता में वृि के लिए घषर्ण को कम करते हैं। जब तेल, ग्रीश अथवा ग्रेपफाइट को किसी मशीन के ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 12.11: ;ंद्ध जूते तथा ;इद्ध टायरों की तलियों को खाँचेदार बनाकर घषर्ण अिाक किया जाता है। स्वचालित वाहनों तथा साइकिलों की ब्रेक प्रणालियों में ब्रेक पैडों का उपयोग करके हम जानबूझकर घषर्ण में वृि करते हैं। जब आप कोइर् साइकिल चलाते हैं तो उसके ब्रेक पैड पहिए को स्पशर् नहीं करते। परन्तु जब आप ब्रेक लीवर को दबाते हैं तो ये पैड घषर्ण के कारण रिम की गति को रोक देते हैं और पहिया गति करना बन्द कर देता है। आपने यह देखा होगा कि कबड्डी के ख्िालाड़ी अपने हाथों पर मिट्टी रगड़ते हैं ताकि वे अपने प्रतिद्वंदी को और अच्छी तरह पकड़ सकें। व्यायामी ;जिमनैस्टद्ध अपने हाथों पर कोइर् रूक्ष पदाथर् लगा लेते हैं ताकि घषर्ण में वृि करके अच्छी पकड़ बना सकें। चित्रा 12.12: घषर्ण कम करने के लिए वैफरम बोडर् पाउडर छिड़का गया है। गतिशील पुजोर्ं ;भागोंद्ध के बीच लगाते हैं तो वहाँ इनकी एक पतली परत बन जाती है तथा गतिशील पृष्ठ सीधे ही एक - दूसरे को रगड़ नहीं पाते ;चित्रा 12.13द्ध। इस प्रकार अनियमितताओं का अंतःबंधन का अंतःपाशन कापफी सीमा तक दूर हो जाता है। गति सहज बन जाती है। घषर्ण कम करने वाले पदाथोर्ं को स्नेहक कहते हैं। वुफछ मशीनों में स्नेहक के रूप में तेल का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है। वहाँ पर घषर्ण कम करने के लिए गतिशील पुजो± के बीच वायु की गद्दी का उपयोग किया जाता है। स्नेहक चित्रा 12.13: स्नेहक का प्रभाव। 12.5 पहिए घषर्ण कम कर देते हंै आपने अटैचियों तथा अन्य भारी सामानों ;असबाबोंद्ध पर रोलर जड़े देखे होंगे। ऐसे सामानों को कोइर् छोटा बच्चा भी आसानी से खींच सकता है ;चित्रा 12.14द्ध। ऐसा क्यों होता है? आइए पता लगाएँ। चित्रा 12.14: लोटन घषर्ण कम कर देता है। वि्रफयाकलाप 12.4 जब एक वस्तु किसी दूसरी वस्तु के पृष्ठ पर लुढ़कती है तो उसकी गति के प्रतिरोध को लोटनिक घषर्ण कहते हैं। लोटन घषर्ण कम कर देता है। किसी वस्तु को दूसरी वस्तु पर सरकने की तुलना में लोटन करना सदैव आसान होता है। यही कारण है कि रोलर जड़ा सामान खींचना सुविधाजनक होता है। क्या अब आप यह समझ सकते हैं कि पहिए के आविष्कार कोे मानव जाति की महानतम खोजों में क्यों गिना जाता है? क्योंकि लोटनिक घषर्ण सपीर् घषर्ण से कम होता है इसलिए अिाकांश मशीनों में सपर्ण को बाल बेयरिंग के उपयोग द्वारा लोटन में प्रतिस्थापित किया जाता है। छत के पंखों तथा साइकिलों में धुरी तथा नाभ्िा ;हबद्ध के बीच बाल बेयरिंग का उपयोग इसके सामान्य उदाहरण हैं ;चित्रा 12.16द्ध। चित्रा 12.16: बाल बेयरिंग घषर्ण कम कर देते हैं। 12.6 तरल घषर्ण आप जानते हैं कि वायु अत्यन्त हलकी तथा विरल होती है। पिफर भी इससे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर वायु घषर्ण बल लगाती है। इसी प्रकार जल तथा अन्य द्रव भी इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घषर्ण बल लगाते हैं। विज्ञान में गैसों तथा द्रवों को एक ही नाम ‘तरल’ दिया गया है। अतः हम कह सकते हैं कि तरल इनसे होकर गति करने वाली वस्तुओं पर घषर्ण बल लगाते हैं। तरलों द्वारा लगाए गए घषर्ण बल को कषर्ण भी कहते हैं। किसी तरल पर लगने वाला घषर्ण बल उसकी तरल के सापेक्ष गति पर निभर्र करता है। घषर्ण बल वस्तु की आवृफति तथा तरल की प्रवृफति पर भी निभर्र करता है। स्पष्ट है कि जब वस्तुएँ किसी तरल में गति करती हैं तो उन्हें उन पर लगे घषर्ण बल पर पार पानाहोता है। इस प्रवि्रफया में उनकी ऊजार् का क्षय होता है। अतः घषर्ण को कम से कम करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। अतः वस्तुओं को विश्िाष्ट आवृफतियाँ दी जाती हैं। आपके विचार से वैज्ञानिकों को इन विश्िाष्ट आवृफतियांे के बारे में कहाँ से संकेत प्राप्त होते हैं? वास्तव में उन्हें ये संकेत प्रवृफति से मिलते हैं। पक्षी तथा मछलियाँ तरल में गति करते हैं। उनके शरीर का विकास इस प्रकार हुआ होगा कि तरल में गति करतेसमय घषर्ण पर पार पाने में उनकी ऊजार् का क्षय यथासंभव कम हो। आपने इन आवृफतियों के बारे में कक्षा टप् में अध्ययन किया था। वायुयान की आकृति को सावधानीपूवर्क देख्िाए ;चित्रा 12.17द्ध। क्या आपइसकी आकृति तथा किसी पक्षी की आकृति में कोइर् समानता पाते हैं? वास्तव में, सभी वाहनों के डिशाइन इस प्रकार बनाए जाते हैं कि तरल घषर्ण कम हो जाए। चित्रा 12.17: एक हवाइर् जहाज और पक्षी की आकृति में समानता। आपने क्या सीखाऽ घषर्ण सम्पवर्फ में रखे दो पृष्ठों के बीच सापेक्ष गति का विरोध करता है। यह दोनों पृष्ठों पर कायर् करता है। ऽ घषर्ण सम्पवर्फ के दो पृष्ठों की प्रकृति पर निभर्र करता है। ऽ दिए गए पृष्ठों के युगल के लिए घषर्ण इन पृष्ठों के चिकनेपन की अवस्था पर निभर्र करता है। ऽ घषर्ण इस बात पर निभर्र करता है कि दो पृष्ठ एक दूसरे को कितने बलपूवर्क दबाते हैं। ऽ स्थैतिक घषर्ण तब कायर् करना आरम्भ करता है जब हम किसी वस्तु को उसकी विराम की स्िथति से गति में लाने का प्रयास करते हैं। ऽ सपीर् घषर्ण तब कायर् करना आरम्भ करता है जब कोइर् वस्तु किसी अन्य वस्तु पर सपीर् गति करती है। ऽ सपीर् घषर्ण स्थैतिक घषर्ण से कम होता है। ऽ घषर्ण हमारे बहुत से ियाकलापों के लिए महत्त्वपूणर् होता है। ऽ किसी पृष्ठ को रूक्ष बनाकर घषर्ण बढ़ाया जा सकता है। ऽ जूतों की तली तथा वाहनों के टायर घषर्ण बढ़ाने के लिए खाँचेदार बनाए जाते हैं। ऽ कभी - कभी घषर्ण अवांछनीय होता है। ऽ स्नेहक लगाकर घषर्ण को कम किया जा सकता है। ऽ जब कोइर् वस्तु किसी अन्य वस्तु पर लोटन करती है तो लोटनिक घषर्ण कायर् करना आरम्भ करता है। लोटनिक घषर्ण

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