पिछले अध्याय में आपने पढ़ा कि जंतु किस प्रकार जनन करते हैं। मानव एवं बहुत से अन्य जंतु एक निश्िचत आयु तक पहँुचने के बाद ही जनन कर सकते हैं। मानव किसी निश्िचत आयु के बाद ही क्यों जनन कर सकते हैं? इस अध्याय में आप मानव के शरीर में होने वाले उन परिवतर्नों के विषय में पढ़ेंगे जिनके उपरान्त वह जनन हेतु सक्षम हो पाता है। अध्याय 9 में आप मानव जननांगों के विषय में पढ़ चुके हैं। इस अध्याय में हम उन हामोर्नों के विषय में चचार् करेंगे जो श्िाशु ;बच्चेद्ध में होने वाले उन परिवतर्नों में महत्वपूणर् भूमिका निभाते हैं जिनके कारण बच्चा बड़ा होकर वयस्क हो जाता है। 10.1 किशोरावस्था एवं यौवनारम्भ बूझो अपना 12वाँ जन्मदिन मना रहा था। मित्रों के चले जाने के पश्चात् बूझो और पहेली अपने माता - पिता के साथ बातें करने लगे। पहेली एक कन्या विद्यालय में पढ़ती है। वह हँसने लगी। उसने टिप्पणी की कि बूझो के कइर् मित्रों जिनसे वह एक वषर् बाद मिली थी, की लंबाइर् एकाएक कितनी बढ़ गइर् है। उनमें से वुफछ तो मूँछें आने से जोकर ;काटूर्नद्ध नशर आ रहे थे। उसकी माँ ने समझाया कि लड़के बड़े हो गए हैं। वृि जन्म के समय से ही होने लगती है। परन्तु 10 या 11 वषर् की आयु के बाद वृि में एकाएक तीव्रता आती है और वृि साप़फ दिखाइर् देने लगती है। शरीर में होने वाले परिवतर्न वृि प्रिया का एक भाग हैं। यह इस बात का संकेत है कि अब आप बच्चे नहीं रहे तथा युवावस्था में कदम रख रहे हैं। जीवन का यह ऐसा अजीब काल है विफ इसमें आप न तो बच्चे रहते हैं और न ही बड़े। मैं जिज्ञासु हूँ कि क्या बाल्यकाल एवं युवावस्था के मध्य की इस अविा का कोइर् विशेष नाम है। वृि एक प्रावृफतिक प्रव्रफम है। जीवन काल की वह अविा जब शरीर में ऐसे परिवतर्न होते हैं जिसके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था ;।कवसमेबमदबमद्ध कहलाती है। किशोरावस्था लगभग 11 वषर् की आयु से प्रारम्भ होकर 18 अथवा 19 वषर् की आयु तक रहती है। यह अविा क्योंकि अंग्रेजी के ष्जममदेष् ;ज्ीपतजममद से म्पहीजममद या छपदमजममद वषर् की आयुद्ध तक होती है, किशोरों को ‘टीनेजसर्’ ;ज्ममदंहमतेद्ध भी कहा जाता है। लड़कियों में यह अवस्था लड़कों की अपेक्षा एक या दो वषर् पूवर् प्रारम्भ हो जाती है। किशोरावस्था की अविा व्यक्ितयों में भ्िान्न - भ्िान्न होती है। किशोरावस्था के दौरान मनुष्य के शरीर में अनेक परिवतर्न आते हैं। यह परिवतर्न यौवनारम्भ का संकेत हैं। इनमें से सबसे महत्वपूणर् परिवतर्न है, लड़के एवं लड़कियों की जनन क्षमता का विकास। किशोर की जनन परिपक्वता के साथ ही यौवनारम्भ समाप्त हो जाता है। पहेली और बूझो को अहसास होता है कि लंबाइर् में एकाएक वृि एवं लड़कों में हलकी दाढ़ी - मूँछों का आना किशोरावस्था के लक्षण हैं। वे यौवनारम्भ में होने वाले अन्य परिवतर्नों के विषय में जानना चाहते हैं। 10.2 यौवनारम्भ में होने वाले परिवतर्न लंबाइर् में वृि लंबाइर् में एकाएक वृि यौवनारम्भ के दौरान होने वाला सबसे अिाक दृष्िटगोचर परिवतर्न है। इस समय शरीर की लंबी अस्िथयों की, अथार्त् हाथ एवं पैरों की अस्िथयों ;हडि्डयोंद्ध की, लंबाइर् में वृि होती है और व्यक्ित लंबा हो जाता है। वि्रफयाकलाप 10.1 निम्न चाटर् में लड़के व लड़कियों की आयु के साथ लंबाइर् में वृि की औसत दर को दशार्या गया है। काॅलम 2 और 3 में किसी व्यक्ित की लंबाइर् को प्रतिशत में दशार्या गया है जो किसी आयु पर पहुँचने पर होती है। आयु को काॅलम 1 में दशार्या गया है। उदाहरणतः 11 वषर् की आयु तक एक लड़का अपनी पूणर् लंबाइर् का 81» लक्ष्य प्राप्त करता है, जबकि एक लड़की अपनी पूणर् लंबाइर् की 88» तक पहुँच जाती है। यह आँकड़े प्रतिनििात्व मात्रा हैं जो व्यक्ितयों में भ्िान्न हो सकते हैं। अपने मित्रों के लिए सारणी का प्रयोग करके उनकी पूणर् लंबाइर् का अनुमान लगाइए। पता लगाइए कि आपकी कक्षा में कौन सबसे लंबा और कौन सबसे बौना हो सकता है। आयु ;वषो± मेंद्ध पूणर् लंबाइर् का » लड़के लड़कियाँ 8 72ः 77ः 9 75ः 81ः 10 78ः 84ः 11 81ः 88ः 12 84ः 91ः 13 88ः 95ः 14 92ः 98ः 15 95ः 99ः 16 98ः 99ण्5ः 17 99ः 100ः 18 100ः 100ः पूणर् लंबाइर् के लिए गणना ;बउ मेंद्धः वतर्मान लंबाइर् ;बउद्ध मान आÕाु मं पण×100 वतर्ेूर्लम्बाइर् का» ;चाटर् में दिए गए मान के अनुसारद्ध उदाहरण - एक लड़का जिसकी आयु 9 वषर् है तथा लंबाइर् 120 बउ है। वृि काल की समाप्ित पर उसकी अनुमानित लंबाइर् होगी - 120 ◊ 100बउ त्र 160बउ 75 वि्रफयाकलाप 10.2 वि्रफयाकलाप 10.1 मंे दिए गए आंकड़ों का उपयोग करके एक ग्रापफ बनाइए। आयु को ‘ग् - अक्ष’ पर तथा लंबाइर् में वृि का प्रतिशत ‘ल् - अक्ष’ पर लीजिए। अपनी आयु को ग्रापफ पर विश्िाष्ट रूप सेचिित कीजिए। आप लंबाइर् के जिस प्रतिशत को प्राप्त कर चुके हैं उसका पता लगाइए। आप अन्ततः जिस लंबाइर् को प्राप्त कर सकेंगे उसका परिकलन कीजिए। आप अपने ग्रापफ की तुलना निम्न ग्रापफ से कीजिए ;चित्रा 10.1द्ध। चित्रा 10.1: आयु के साथ बढ़ती ऊँचाइर् का प्रतिशत प्रदश्िार्त करने वाला ग्रा.पफ। प्रारंभ में लड़कियाँ लड़कों की अपेक्षा अिाक तीव्रता से बढ़ती हैं। परन्तु लगभग 18 वषर् की आयु तक दोनों अपनी अिाकतम लंबाइर् प्राप्त कर लेते हैं। अलग - अलग व्यक्ितयों की लंबाइर् में वृि की दर भी भ्िान्न - भ्िान्न होती है। वुफछ यौवनारम्भ में तीव्र गति से बढ़ते हैं तथा बाद में यह गति धीमी हो जाती है, जबकि वुफछ धीरे - धीरे वृि करते हैं। मैं चिंतित हँू। यद्यपि मैं लंबी हो गइर् हूँ, परन्तु शरीर की तुलना में मेरा चेहरा छोटा है। पहेली को चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। शरीर के सभी अंग समान दर से वृि नहीं करते। कभी - कभी किशोर के हाथ अथवा पैर शरीर के अन्य अंगों की अपेक्षा बड़े दिखाइर् देते हैं। परन्तु शीघ्र ही दूसरे भाग भी वृि कर शारीरिक अनुपात को संतुलित कर देते हैं पफलतः शरीर सुडौल हो जाता है। आपने ध्यान दिया होगा कि किसी व्यक्ित की लंबाइर् उसके परिवार के किसी न किसी सदस्य के लगभग समान होती है। इसका कारण यह है कि लंबाइर् माता - पिता से प्राप्त जीन पर निभर्र करती है। परन्तु, वृि के इन वषो± में उचित प्रकार का संतुलित आहार आवश्यक है। यह अस्िथयों, पेश्िायों एवं शरीर के अन्य भागों को सही ढंग से वृि करने हेतु पयार्प्त पोषण करने में सहायता करता है। आप किशोर की पोषक आवश्यकताओं के विषय में इस अध्याय में आगे पढ़ेंगे। शारीरिक आकृति में परिवतर्न क्या आपने ध्यान दिया है कि आपकी कक्षा के छात्रों के कंधे एवं सीना निचली कक्षा के छात्रों की अपेक्षा अिाक चैड़े होते हैं? इसका कारण यह है कि वे यौवनारम्भ में प्रवेश कर चुके हैं जब वृि के कारण कंधे पफैल कर चैड़े हो जाते हैं। लड़कियों में कमर का निचला भाग चैड़ा हो जाता है। वृि के कारण लड़कों में शारीरिक पेश्िायाँ लड़कियों की अपेक्षा सुस्पष्ट एवं गठी दिखाइर् देती हैं। अतः किशोरावस्था के दौरान लड़कों एवं लड़कियों में होने वाले परिवतर्न अलग - अलग हैं। स्वर में परिवतर्न क्या आपने ध्यान दिया है कि कभी - कभी आपकी कक्षा के वुफछ लड़कों की आवाज़्ा पफटने लगती है? यौवनारम्भ में स्वरयंत्रा अथवा लैरिन्क्स में वृि का प्रारंभ होता है। लड़कों का स्वरयंत्रा विकसित होकर अपेक्षावृफत बड़ा हो जाता है। लड़कों में बढ़ता हुआ ‘स्वरयंत्रा’ गले के सामने की ओर सुस्पष्ट उभरे भाग के रूप में दिखाइर् देता है जिसे ऐडॅम्स ऐपॅल ;वंफठमण्िाद्ध कहते हैं ;चित्रा 10.2द्ध।लड़कियों में ‘स्वरयंत्रा’ अपेक्षाकृत छोटा होता है अतः बाहर से सामान्यतः दिखाइर् नहीं देता। सामान्यतः लड़कियों का स्वर उच्चतारत्व वाला होता है जबकि लड़कों का स्वर गहरा होता है। किशोर लड़कों में कभी - कभी स्वरयंत्रा की पेश्िायों में अनियंत्रिात वृि हो जाती है और आवाश पफटने या भरार्ने लगती है। यह स्िथति वुफछ दिनों अथवा वुफछ सप्ताह तक बनी रह सकती है जिसके बाद स्वर सामान्य हो जाता है। चित्रा 10.2: किशोर लड़के का स्वरयंत्रा ‘ऐडॅम्स ऐपॅल’। स्वेद एवं तैलग्रंथ्िायों की ियाशीलता में वृि किशोरावस्था में स्वेद एवं तैलग्रंथ्िायों का स्राव बढ़ जाता है। इन ग्रंथ्िायों की अिाक ियाशीलता के कारण वुफछ स्वेदग्रंथ्िा, तैलग्रंथ्िा तथा लारग्रंथ्िा जैसी वुफछ ग्रंथ्िायाँअपना ड्डाव वाहियों द्वारा ड्डावित करती हैं। अंतःड्डावी ग्रंथ्िायाँ हामोर्नों को सीधे रुिार प्रवाह में निमोर्चित करती हैं। इसलिए इन्हें नलिका - विहीन गं्रथ्िायाँ भी कहते हैं। व्यक्ितयों के चेहरे पर पंुफसियाँ और मुँहासे आदि हो जाते हैं। जनन अंगों का विकास पिछले अध्याय में चित्रा 9.1 एवं 9.3 में दशार्ए गए मानव जननांगों का पुनरावलोकन कीजिए। यौवनारम्भ में नर जननांग, जैसे कि वृषण एवं श्िाश्न, पूणर्तः विकसित हो जाते हैं। वृषण से शुव्रफाणुओं का उत्पादन भी प्रारंभ हो जाता है। लड़कियों में अंडाशय साइश में वृि हो जाती है तथा अंड परिपक्व होने लगते हैं। अंडाशय से अंडाणुओं का निमोर्चन भी प्रारंभ हो जाता है। मानसिक, बौिक एवं संवेदनात्मक परिपक्वता प्राप्त होना किशोरावस्था व्यक्ित के सोचने के ढंग में परिवतर्न की अवध्ि भी है। पहले की अपेक्षा किशोर अिाक स्वतंत्रा एवं अपने प्रति अिाक सचेत होता है। उनमें बौिक विकास भी होता है तथा वे सोचने - विचारने में कापफी समय लेते हैं। वास्तव में किसी व्यक्ित के जीवन में यह वह समय है जब उसके मस्ितष्क की सीखने की क्षमता सवार्िाक होती है। कभी - कभी, यद्यपि, किशोर शारीरिक एवं मानसिक परिवतर्नों के प्रति अपने आपको ढालने हेतु प्रयास करता हुआ स्वयं को असुरक्ष्िात महसूस करता है। परन्तु किशोर होने के नाते आपको समझना चाहिए कि असुरक्ष्िात महसूस करने का कोइर् कारण नहीं है। ये परिवतर्नप्राकृतिक हैं जो शारीरिक वृि के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। 10.3 गौण लैंगिक लक्षण आप अध्याय 9 में पढ़ चुके हैं कि वृषण एवं अंडाशय जनन अंग हैं। वे युग्मक अथार्त शुव्रफाणु एवं अंडाणु उत्पन्न करते हैं। युवावस्था में लड़कियों में स्तनों का विकास होने लगता है तथा लड़कों के चेहरे पर बाल उगने लगते हैं अथार्त् दाढ़ी - मूँछ आने लगती है। ये लक्षण क्योंकि लड़कियों को लड़कों से पहचानने में सहायता करते हैं अतः इन्हें गौण लैंगिक लक्षण कहते हैं। लड़कों के सीने पर भी बाल आ जाते हैं। लड़कों एवं लड़कियों दोनों में ही बगल एवं जाँघ के उफपरी भाग अथवा प्यूबिक क्षेत्रा में भी बाल आ जाते हैं। बूझो और पहेली दोनों ही जानना चाहते हैं कि यौवनारम्भ में होने वाले इन परिवतर्नों का प्रारंभ कौन करता है। किशोरावस्था में होने वाले परिवतर्न हामोर्न द्वारा नियंत्रिात होते हैं। हामोर्न रासायनिक पदाथर् हैं। यहअंतःड्डावी ग्रंथ्िायों अथवा अंतःड्डावी तंत्रा द्वारा ड्डावित किए जाते हैं। यौवनारम्भ के साथ ही वृषण पौरुष हामोर्न अथवा टेस्टोस्टेराॅन का ड्डवण प्रारम्भ कर देता है। यह लड़कों में परिवतर्नों का कारक है जिनके बारे में आपने अभी - अभी पढ़ा है। उदाहरण के लिए चेहरे पर बालों का आना। लड़कियों में यौवनारम्भ के साथ ही अंडाशय स्त्राी हामोर्न अथवा एस्ट्रोजन उत्पादित करना प्रारम्भ कर देता है जिससे स्तन विकसित हो जाते हैं। दुग्धस्रावी ग्रंथ्िायाँ अथवा दुग्ध ग्रंथ्िायाँ स्तन के अंदर विकसित होती हैं। इन हामोर्नों के उत्पादन का नियंत्राण एक अन्य हामोर्न द्वारा किया जाता है जो पीयूष ग्रंथ्िा अथवा पिट्यूटरी ग्रंथ्िा द्वारा ड्डावित किया जाता है। 10.4 जनन प्रकायर् प्रारम्भ करने में हामोर्न की भूमिका अंतःड्डावी ग्रंथ्िायाँ हामोर्न रुिारप्रवाह में ड्डावित करती हैं जिससे वह शरीर के विश्िाष्ट भाग अथवा लक्ष्य - स्थल तक पहुँच सवेंफ। लक्ष्य - स्थल हामोर्न केप्रति अनुिया करता है। हमारे शरीर में अनेक अंतःड्डावी ग्रंथ्िायाँ हैं। वृषण एवं अंडाशय लैंगिक हामोर्न ड्डावित करते हैं। आपने अभी - अभी पढ़ा है कि यह हामोर्नगौण लैंगिक लक्षणों के लिए उत्तरदायी हैं। लैंगिकहामोर्न भी पीयूष ग्रंथ्िा द्वारा ड्डावित हामोर्न के नियंत्राणमें हैं ;चित्रा 10.3द्ध। पीयूष ग्रंथ्िा अनेक हामोर्न ड्डावित करती है। उनमें से एक हामोर्न अंडाशय में अंडाणु एवं वृषण में शुक्राणु के परिपक्व होने को नियंत्रिात करता है। पहेली और बूझो अब समझ गए हैं कि यौवनारम्भ व्यक्ित में जनन अविा का प्रारम्भ है जब व्यक्ित जनन की क्षमता प्राप्त करता है। परन्तु, वे जानना चाहते हैं कि क्या जनन - काल एक बार प्रारंभ होने के बाद जीवन पयर्न्त तक चलता रहता है या कभी समाप्त होता है। 10.5 मानव में जनन - काल की अवध्ि जब किशोरों के वृषण तथा अंडाशय युग्मक उत्पादित करने लगते हैं तब वे जनन के योग्य हो जाते हैं। युग्मक की परिपक्वता एवं उत्पादन की क्षमता पुरुषों में स्ित्रायों की अपेक्षा अिाक अविा तक रहती है। स्ित्रायों में जननावस्था का प्रारम्भ यौवनारम्भ ;10 से 12 वषर् की आयुद्ध से हो जाता है तथा सामान्यतः 45 से 50 वषर् की आयु तक चलता रहता है। यौवनारम्भ पर अंडाणु परिपक्व होने लगते हैं। अंडाशयों में एक अंडाणु परिपक्व होता है तथा लगभग 28 से 30 दिनों के अंतराल पर किसी एक अंडाशय द्वारा निमोर्चित होता है। इस अविा में गभार्शय की दीवार मोटी हो जाती है जिससे वह अंडाणु के निषेचन के पश्चात्् युग्मनज को ग्रहण कर सके। जिसके पफलस्वरूप गभर्धारण होता है। यदि अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता तब उस स्िथति में अंडाणु तथा गभार्शय का मोटा स्तर उसकी रुिार वाहिकाओं सहित निस्तारित होजाता है। इससे स्ित्रायों में रक्तड्डाव होता है जिसे)तुड्डाव अथवा रजोधमर् कहते हैं। ट्टतुड्डाव लगभग28 से 30 दिन में एक बार होता है। पहला ट्टतुड्डाव यौवनारम्भ में होता है जिसे रजोदशर्न कहते हैं।लगभग 45 से 50 वषर् की आयु में ट्टतुड्डाव होनारुक जाता है। ट्टतुड्डाव के रुक जाने को रजोनिवृिाकहते हैं। प्रारंभ में ट्टतुड्डाव चव्रफ अनियमित हो सकता है तथा उसके नियमित होने में वुफछ समय लग सकता है। पहेली कहती है कि स्ित्रायों में जनन - काल की अविारजोदशर्न से रजोनिवृिा तक होती है। क्या वह सही है? ट्टतुड्डाव चक्र का नियंत्राण हामोर्न द्वारा होता है। इस चक्र में अंडाणु का परिपक्व होना, इसका निमोर्चन, गभार्शय की दीवार का मोटा होना एवं निषेचन न होने की स्िथति में उसका टूटना शामिल है। यदि अंडाणु का निषेचन हो जाता है तो वह विभाजन करता है तथा गभार्शय में विकास के लिए स्थापित हो जाता है जैसा कि आप पिछले अध्याय में पढ़ चुके हैं ;चित्रा 9.8द्ध। 10.6 संतति का लिंग - निधार्रण किस प्रकार होता है? मैंने अपनी माँ और चाची को बातें करते सुना कि मेरी चचेरी बहन का होने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की। मुझे यह जानने की उत्सुकता है कि इस बात का निधार्रण वैफसे होता है कि निषेचित अंडाणु लड़के में अथवा लड़की में विकसित होगा। लड़का अथवा लड़की? निषेचित अंडाणु अथवा युग्मनज में, जन्म लेने वाले श्िाशु के लिंग निधार्रण का संदेश होता है। यह संदेश निषेचित अंडाणु में धागे - सी संरचना अथार्त गुणसूत्रों में निहित होता है। अध्याय 8 का स्मरण कीजिए कि गुणसूत्रा प्रत्येक कोश्िाका के वेंफद्रक में उपस्िथत होते हैं। सभी मनुष्यों की कोश्िाकाओं के केन्द्रक में 23 जोड़े गुणसूत्रा पाए जाते हैं। इनमें से 2 गुणसूत्रा ;1 जोड़ीद्ध लिंग - सूत्रा हैं जिन्हें ग् एवं ल् कहते हैं। स्त्राी में दो ग् गुणसूत्रा होते हैं जबकि पुरुष में एक ग् तथा एक ल् गुणसूत्रा होता है। युग्मक ;अंडाणु तथा शुव्रफाणुद्ध में गुणसूत्रों का एक जोड़ा होता है। अनिषेचित अंडाणु में सदा एक ग् गुणसूत्रा होता है। परन्तु शुव्रफाणु दो प्रकार के होते हैं जिनमें एक प्रकार में ग् गुणसूत्रा एवं दूसरे प्रकार में ल् गुणसूत्रा होता है। चित्रा 10.4 को देख्िाए। जब ग् गुणसूत्रा वाला शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है तो युग्मनज में दो ग् गुणसूत्रा होंगे तथा वह मादा श्िाशु में विकसित होगा। यदि अंडाणु को निषेचित करने वाले शुक्राणु में ल् गुणसूत्रा है तो युग्मनज नर श्िाशु में विकसित होगा। शुक्राणु अंडाणु नर ;लड़काद्ध मादा ;लड़कीद्ध चित्रा 10.4: मनुष्य में लिंग निधार्रण। अब आप जान गये हैं कि जन्म से पूवर् श्िाशु के लिंग का निधार्रण उसके पिता के लिंग गुणसूत्रों द्वारा किया जाता है। यह धारणा कि बच्चे के लिंग केलिए उसकी माँ उत्तरदायी है, पूणर्तः निराधार है एवं अन्यायसंगत है। 10.7 लिंग हामोर्न के अतिरिक्त अन्य हामोर्न चित्रा 10.3 का पुनः अवलोकन कीजिए। पीयूष ग्रंथ्िाद्वारा ड्डावित हामोर्न जननांगों को उनके हामोर्न उत्पन्न करने के लिए उद्दीपित करते हैं। आप पढ़ ही चुकेहैं कि पीयूष ग्रंथ्िा एक अंतःड्डावित ग्रंथ्िा है जो मस्ितष्क से जुड़ी होती है। पीयूष ग्रंथ्िा, वृषण एवं अंडाशय के अतिरिक्त हमारे शरीर में थायराॅइड, अग्न्याशय एवं एडिªनल;अिावृक्कद्ध जैसी वुफछ अन्य अंतःड्डावी ग्रंथ्िायाँ भी हैं ;चित्रा 10.5द्ध। पीयूष ग्रंथ्िा थायराॅइड ग्रंथ्िा एडिªनल ग्रंथ्िा अग्न्याशय स्ित्रायों में अंडाशय की स्िथति वृषण चित्रा 10.5: मनुष्य के शरीर में अंतःड्डावी ग्रंथ्िायों की स्िथति। बूझो और पहेली को याद है कि एक बार जब वह अपनी डाॅक्टर बुआ के यहाँ गए थे तब उन्होंने वहाँ काका नाम के एक लड़के को देखा था जिसका गला बहुत पफूला हुआ एवं उभरा हुआ था। उनकी बुआ ने उन्हें बताया कि काका ‘गाॅयटर’ नामक व्यािा से ग्रस्त है जो थायराॅइड ग्रंथ्िा का रोग है। काका की थायराॅइड ग्रंथ्िा थायराॅक्िसन हामोर्न का उत्पादन नहीं कर रही थी। उनकी बुआ ने यह भी बताया कि उनके पफूपफाजी मध्ुमेह से पीडि़त हैं क्योंकि उनका अग्न्याशय इन्सूलिन हामोर्न का उत्पादन पयार्प्त मात्रा में नहीं कर रहा है। बूझो एवं पहेली ने उनके दवाखाने में टँगे चाटर् में दशार्ए गये एडिªनल ग्रंथ्िा के विषय में पूछा। उनकी बुआ ने उन्हें बताया किएडिªनल ग्रंथ्िा ऐसे हामोर्न ड्डावित करती है जो रुिार में नमक की मात्रा को संतुलित करता है। एडिªनल एडिªनेलिन नामक हामोर्न का ड्डवण भी करती हैं।एडिªनेलिन क्रोध, चिंता एवं उत्तेजना की अवस्था में तनाव के संयोजन का कायर् करता है। थायराॅइड एवं एडिªनल ग्रंथ्िा पीयूष ग्रंथ्िा द्वाराड्डावित हामोर्न के माध्यम से प्राप्त आदेश के अनुसारही अपने हामोर्न का ड्डवण करती है। पीयूष ग्रंथ्िा वृि हामोर्न भी ड्डावित करती है जो व्यक्ित की सामान्य वृि के लिए आवश्यक है। क्या अन्य जंतुओं में भी हामोर्नड्डावित होते हैं? क्या जनन प्रिया में उनका कोइर् योगदान है? 10.8 कीट एवं मेंढक में जीवन - चक्र पूणर् करने में हामोर्न का योगदान आप रेशम के कीट एवं मेंढक के जीवन - चक्र के विषय में तो पढ़ ही चुके हैं। इल्ली को वयस्क शलभ बनने तक अनेक चरणों से गुजरना पड़ता है। कक्षा टप्प् में पढ़े रेशम के कीट के जीवन - चक्र का स्मरण कीजिए। इसी प्रकार टैडपोल को भी वयस्क मेंढक बनने के लिए अनेक चरणों से गुजरना पड़ता है ;अध्याय 9द्ध। लारवा से वयस्क बनने के इस परिवतर्न को कायांतरण ;चित्रा 9.10द्ध कहते हैं। कीटों में कायांतरण का नियंत्राण कीट हामोर्न द्वारा होता है। मेंढक में थायराॅइड द्वाराड्डावित हामोर्न थायराॅक्िसन इसका नियमन करता है। थायराॅक्िसन के उत्पादन के लिए जल में आयोडीन की उपस्िथति आवश्यक है। यदि जल में जिसमें टैडपोल वृि कर रहे हैं, पयार्प्त मात्रा में आयोडीन नहीं है तो टैडपोल वयस्क मेंढक में परिविार्त नहीं हो सकते। यदि व्यक्ित के आहार में पयार्प्त आयोडीन न हो तो क्या उन्हें थायराॅक्िसन की कमी के कारण ‘गाॅयटर’ हो जाएगा? ियाकलाप 10.3 किसी पत्रिाका अथवा डाॅक्टर से सूचना एकत्रा कर आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग पर एक नोट तैयार कीजिए। आप इसकी जानकारी इंटरनेट पर भी देख सकते हैं। 10.9 जननात्मक स्वास्थ्य व्यक्ित का कायिक एवं मानसिक विसंगतिमुक्त होना उस व्यक्ित का स्वास्थ्य कहलाता है। किसी भी आयु के व्यक्ित के शरीर को स्वस्थ रखने के लिए उसे संतुलित आहार की आवश्यकता होती है। व्यक्ित को वैयक्ितक स्वच्छता एवं सप़फाइर् का नियमित रूप से पालन एवं पयार्प्त शारीरिक व्यायाम भी करना चाहिए। किशोरावस्था में, जब शरीर वृि करता है तो उपरोक्त बातें और भी अिाक आवश्यक हो जाती हैं। किशोर की पोषण आवश्यकताएँ किशोरावस्था तीव्र वृि एवं विकास की अवस्था है। अतः किसी भी किशोर को आहार नियोजन अत्यंत सावधानीपूवर्क करना चाहिए। आप पढ़ ही चुके हैं कि संतुलित आहार क्या है। स्मरण कीजिए कि संतुलित आहार का अथर् है भोजन में प्रोटीन, काबोर्हाइड्रेट्स, वसा, विटामिन एवं खनिज का पयार्प्त मात्रा में समावेश। हमारा भारतीय भोजन जिसमें रोटी, चावल, दाल एवं सब्िजयाँ होती हैं, एक संतुलित आहार है। दूध अपने आप में संतुलित भोजन है। पफल भी हमें पोषण देते हैं। श्िाशुओं को माँ के दूध से सम्पूणर् पोषण मिलता है जिसकी उन्हें जरूरत है।लोह ;आयरनद्ध तत्त्व रुिार का निमार्ण करता हैतथा लोह - प्रचुर खाद्य जैसे कि पत्तीदार सब्िजयाँ, गुड़, मांस, संतरा, आँवला इत्यादि किशोर के लिए अच्छे खाद्य हैं। अपने दोपहर एवं रात्रिा के भोजन के खाद्य पदाथो± की जाँच कीजिए। क्या भोजन संतुलित एवं पोषक है?क्या इसमें ऐसे खाद्यान्न सम्िमलित हैं जो ऊजार् प्रदान करते हैं तथा क्या इनमें दूध, मांस, नट एवं दालें भी शामिल हैं जो वृि हेतु प्रोटीन प्रदान करते हैं? क्याइसमें वसा एवं शक्कर भी शामिल हैं जो ऊजार् प्रदान करते हैं? पफल एवं सब्िजयों का क्या स्थान है जो रक्षी भोजन हैं? चिप्स तथा पैक किए हुए अथवा डिब्बाबंद खाद्य यद्यपि स्वादिष्ट होते हैं परन्तु उन्हें नियमित भोजन के स्थान पर नहीं खाना चाहिए क्योंकि उनमें पोषक मात्रा पयार्प्त नहीं होती। ियाकलाप 10.4 अपने मित्रों के साथ एक समूह बनाइए। उन खाद्य पदाथो± के नाम लिख्िाए जो आपने पिछले दिन ;कलद्ध नाश्ते, दोपहर के भोजन एवं रात्रिाकालीन भोजन में खाए थे। उन खाद्य पदाथो± की पहचानकीजिए जो समुचित वृि के लिए उत्तरदायी हैं। ‘जंक पूफड’ की भी पहचान कीजिए जो आपने पिछले दिन खाया था। ियाकलाप 10.5 चित्रा 10.6 से प्रेरणा लेकर चाटर् अथवा पोस्टर बनाकर अपनी कक्षा में लगाइए जिससे आप किशोर की आहार संबंधी आवश्यकता के प्रति सचेत रहें। इसके लिए आप अपनी रचनात्मक शक्ित का प्रयोग कर इसे विज्ञापन के रूप में भी प्रदश्िार्त कर सकते हैं। आप इस विषय पर प्रतियोगिता का आयोजन भी कर सकते हैं। मांस सब्िजयाँ पफल खाद्यान्न चित्रा 10.6: भोजन के पोषक पदाथर्। व्यक्ितगत स्वच्छता प्रत्येक व्यक्ित को प्रतिदिन एक बार स्नान करना चाहिए। यह किशोरों के लिए और भी आवश्यक है क्योंकि स्वेद ग्रंथ्िायों की अिाक ियाशीलता के कारण शरीर से गंध आने लगती है। शरीर के सभी भागों को स्नान करते समय भली प्रकार धेकर करना चाहिए। यदि सप़फाइर् नहीं रखी गइर् तो जीवाणु संक्रमण होने का खतरा रहता है।लड़कियों को ट्टतुड्डाव के समय सप़फाइर् का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें अपने ट्टतुड्डाव चक्र का ध्यान रखतेहुए ट्टतुड्डाव के लिए तैयार रहना चाहिए। शारीरिक व्यायाम ताशी हवा में टहलना एवं खेलना शरीर को चुस्त एवं स्वस्थ रखता है। सभी युवा/किशोर लड़के एवं लड़कियों को टहलना, व्यायाम करना एवं बाहर खेलना चाहिए। भ्रांतियाँ एवं असत्य अवधारणाएँ - करें और न करें अध्याय 9 एवं इस अध्याय में आपने मनुष्य के जनन संबंधी वैज्ञानिक तथ्य एवं सि(ांतों के विषय में पढ़ा। ऐसी बहुत सी असत्य अवधारणाएँ प्रचलित हैं जिन्हें आपको जानकार किशोर होने के नाते छोड़ना चाहिए। उदाहरण के लिए, किशोरों के शारीरिक परिवतर्न संबंधी अनुभवों को लेकर अनेक भ्रांतियाँ एवं असत्य अवधारणाएँ हैं। इनमें से वुफछ को नीचे दिया जा रहा है। अब आप इस संबंध में तकर् प्रस्तुत कर सकते हैं कि यह ‘मिथ’ अथवा असत्य धारणा है जिनका कोइर् आधार नहीं है। 1.ट्टतुड्डाव के समय यदि कोइर् लड़की किसी लड़के को देखती है तो वह गभर्वती हो जाती है। 2.संतान के लिंग के लिए उसकी माँ उत्तरदायी है। 3.ट्टतुड्डाव की अवस्था में लड़की का रसोइर् का काम करना निष्िा( है। आपको ऐसे अन्य अनेक कथन या मिथ मिलेंगे जिनका कोइर् आधार नहीं है। उनको उखाड़ पफेंकिए/छोड़ दीजिए। ियाकलाप 10.6 अपनी कक्षा में उन सहपाठियों के आँकड़े एकत्रा कीजिए जो नियमित रूप से व्यायाम करते हैं तथा उनके आँकड़े भी एकत्रा कीजिए जो व्यायाम नहीं करते। क्या आपको उनकी चुस्ती एवं स्वास्थ्य में कोइर् अंतर दिखाइर् देता है? नियमित व्यायाम के लाभ पर एक रिपोटर् तैयार कीजिए। नशीली दवाओं ;ड्रग्सद्ध का ‘निषेध’ करें किशोरावस्था व्यक्ित के शारीरिक एवं मानसिक रूप से अिाक सियता का समय है जो वृिकाल का एक सामान्य भाग है। अतः भ्रमित अथवा असुरक्ष्िात न महसूस करें। यदि कोइर् व्यक्ित आपको यह बताता है कि किसी ‘ड्रग’ ;नशीली दवाद्ध के सेवन से आप अच्छा अथवा तनावमुक्त महसूस करेंगे, तो आपको इसके लिए ‘न’ ही कहना चाहिए जब तक वह दवा डाॅक्टर द्वारा न दी गइर् हो। ड्रग्स नशीले पदाथर् हैं जिनकी लत पड़ जाती है। यदि आप इन्हें एक बार लेते हैं तो आपको इन्हें बार - बार लेने की इच्छा होती है। परन्तु कालांतर में यह हानिकारक है। यह स्वास्थ्य एवं खुशी दोनों को ही बरबाद कर देते हैं। आपने ।प्क्ै के विषय में तो अवश्य ही सुना होगा जो भ्प्ट नामक खतरनाक विषाणु ;वायरसद्ध द्वारा होता है। यह वायरस एक पीडि़त व्यक्ित से स्वस्थ व्यक्ित में ड्रग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीरिंज द्वारा भी जा सकता है। वायरस का संक्रमण दूसरे माध्यमों जैसे कि पीडि़त ;रोगीद्ध माँ से दूध द्वारा उसके श्िाशु में हो सकता है। भ्प्ट से पीडि़त व्यक्ित के साथ लैंगिक संपकर् स्थापित करने द्वारा भी इस रोेग का संक्रमण हो सकता है। किशोर द्वारा गभर्धारण आप संभवतः जानते होंगे कि हमारे देश में विवाह की वििासंगत ;कानूनीद्ध आयु लड़कियों के लिए 18 वषर् एवं लड़कों के लिए 21 वषर् है। इसका कारण है कि टीन - आयु ;किशोरद्ध लड़कियाँ/माँ शारीरिक एवं मानसिक रूप से मातृत्व के लिए तैयार नहीं होतीं। बाल विवाह ;कम उम्र में विवाहद्ध तथा मातृत्व से माँ एवं संतान दोनों में ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इससे युवा स्ित्रायों के लिए व्यवसाय के अवसरों में भी कमी आती है क्योंकि वे मातृत्व की जिम्मेदारी उठाने के लिए सक्षम नहीं होतीं। अतः वह मानसिक पीड़ा से ग्रस्त रहती हैं। आपने क्या सीखा रू यौवनारम्भ होने पर व्यक्ित जनन के सक्षम हो जाता है। 11 वषर् की आयु से 19 वषर् तक की अविा किशोरावस्था कहलाती है। रू यौवनारम्भ का प्रारम्भ होने पर जनन अंगों में वृि होती है तथा शरीर के विभ्िान्न स्थानों पर बाल आने लगते हैं। लड़कियों में स्तन विकसित हो जाते हैं तथा लड़कों के चेहरे पर दाढ़ी - मूँछें आ जाती हैं। किशोरावस्था में स्वरयंत्रा की वृि होने के कारण लड़कों की आवाश पफटने लगती है। रू किशोरावस्था में लंबाइर् में वृि होती है। रू यौवनारम्भ एवं जनन अंगों का परिपक्व होना हामोर्नों द्वारा नियंत्रिात होता है। रू हामोर्न अंतःड्डावी ग्रंथ्िायों द्वारा ड्डावित पदाथर् हैं जो रुिार में सीधे पहुँचते हैं। रू पीयूष ग्रंथ्िा हामोर्न स्रावित करते हैं जैसे कि वृि हामोर्न, तथा अन्य ग्रंथ्िायों - वृषण, अंडाशय, थायराॅइड तथा एडिªनेल को हामोर्न स्रावित करने के लिए उद्दीपित करते हैं। अग्न्याशय इन्सुलिन का, थायराॅइड थाइराॅक्िसन का तथा एडिªनल एडिªनेलिन हामोर्न का उत्पादन करते हैं। रू टेस्टोस्टेराॅन नर हामोर्न है तथा एस्ट्रोजन मादा हामोर्न है। गभार्शय की दीवार निषेचित अंडाणु ;युग्मनजद्ध को ग्रहण के लिए अपने आपको तैयार करती है। निषेचन न होने की स्िथति में गभार्शय की दीवार की आंतरिक सतह निस्तारित होकर शरीर से बाहर रक्त के साथ प्रवाहित हो जाती है। इसे ट्टतुड्डाव अथवा रजोधमर् कहते हैं। रू अजन्मे श्िाशु का लिंग निधार्रण इस बात पर निभर्र करता है कि युग्मनज में ग्ग् गुणसूत्रा हैं अथवा ग्ल् गुणसूत्रा। रू किशोरावस्था में संतुलित आहार करना तथा व्यक्ितगत स्वच्छता का पालन करना महत्त्वपूणर् है। अभ्यास 1.शरीर में होने वाले परिवतर्नों के लिए उत्तरदायी अंतःड्डावी ग्रंथ्िायों द्वारा ड्डावित पदाथर् का क्या नाम है? 2.किशोरावस्था को परिभाष्िात कीजिए। 3.ट्टतुड्डाव क्या है? वणर्न कीजिए। 4.यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवतर्नों की सूची बनाइए। 5.दो काॅलम वाली एक सारणी बनाइए जिसमें अंतःड्डावी ग्रंथ्िायों के नाम तथा उनके द्वारा ड्डावित हामोर्न के नाम दशार्ए गए हों। 6.लिंग हामोर्न क्या हैं? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके प्रकायर् बताइए। 7.सही विकल्प चुनिए - ;कद्ध किशोर को सचेत रहना चाहिए कि वह क्या खा रहे हैं, क्योंकि ;पद्ध उचित भोजन से उनके मस्ितष्क का विकास होता है। ;पपद्ध शरीर में तीव्रगति से होने वाली वृि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है। ;पपपद्ध किशोर को हर समय भूख लगती रहती है। ;पअद्ध किशोर में स्वाद कलिकाएँ ;ग्रंथ्िायाँद्ध भलीभाँति विकसित होती हैं। ;खद्ध स्ित्रायों में जनन आयु ;कालद्ध का प्रारम्भ उस समय होता है जब उनके: ;पद्ध ट्टतुड्डाव प्रारम्भ होता है। ;पपद्ध स्तन विकसित होना प्रारम्भ करते हैं। ;पपपद्ध शारीरिक भार में वृि होने लगती है। ;पअद्ध शरीर की लंबाइर् बढ़ती है। ;गद्ध निम्न में से कौन सा आहार किशोर के लिए सवोर्चित है: ;पद्ध चिप्स, नूडल्स, कोक ;पपद्ध रोटी, दाल, सब्िजयाँ ;पपपद्ध चावल, नूडल्स, बगर्र ;पअद्ध शाकाहारी टिक्की, चिप्स तथा लेमन पेय 8.निम्न पर टिप्पणी लिख्िाए - ;पद्ध ऐडॅम्स ऐपॅल ;पपद्ध गौण लैंगिक लक्षण ;पपपद्ध गभर्स्थ श्िाशु में लिंग निधार्रण अ भ् या स9.शब्द पहेली: शब्द बनाने के लिए संकेत संदेश का प्रयोग कीजिए - बाईं से दाईं ओर 3.एडिªनल ग्रंथ्िा से स्रावित हामोर्न 4.मेंढक में लारवा से वयस्क तक होने वाला परिवतर्न 5.अंतःस्रावी ग्रंथ्िायों द्वारा स्रावित पदाथर् 6.किशोरावस्था को कहा जाता है ऊपर से नीचे की ओर 1.अंतःस्रावी गं्रथ्िायों का दूसरा नाम 2.स्वर पैदा करने वाला अंग 3.स्त्राी हामोर्न 10.नीचे दी गइर् सारणी में आयु वृि के अनुपात में लड़कों एवं लड़कियों की अनुमानित लंबाइर् के आँकड़े दशार्ए गए हैं। लड़के एवं लड़कियों दोनों की लंबाइर् एवं आयु को प्रदश्िार्त करते हुए एक ही ग्रापफ कागज़्ा पर ग्रापफ खींचिए। इस ग्रापफ से आप क्या निष्कषर् निकाल सकते हैं?

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