जंतुओं में जनन आपने पाचन, परिसंचरण एवं श्वसन प्रक्रम के बारे में पिछली कक्षा में पढ़ा था। क्या आपको इनके विषय में याद है? ये प्रक्रम प्रत्येक जीव की उत्तरजीविता के लिए आवश्यक हैं। आप पौधों में जनन के प्रक्रम के विषय में भी पढ़ चुके हैं। जनन जाति ;स्पीशीजद्ध की निरंतरता बनाने के लिए आवश्यक है। कल्पना कीजिए कि यदि जीव प्रजनन नहीं करते तो क्या होता? आप इस बात कोमानेंगे कि जीवों में जनन का विशेष महत्त्व है क्योंकि यह एक जैसे जीवों में पीढ़ी दर पीढ़ी निरंतरता बनाए रखना सुनिश्िचत करता है। आप पिछली कक्षा में पौधों में जनन के विषय में पढ़ ही चुके हैं। इस अध्याय में हम जानेंगे कि जंतु किस प्रकार जनन करते हैं। 9.1 जनन की वििायाँ क्या आपने विभ्िान्न जंतुओं के बच्चों को देखा है? वुफछ जंतुओं के बच्चों के नाम सारणी 9.1 में भरने का प्रयास कीजिए जैसा कि क्रम संख्या 1 एवं 5 में उदाहरण देकर दशार्या गया है। आपने विभ्िान्न जंतुओं के बच्चों का जन्म होते हुए भी देखा होगा। क्या आप बता सकते हैं कि चूशे और इल्ली ;केटरपिलरद्ध किस प्रकार जन्म लेते हैं? बिलौटे और पिल्ले का जन्म किस प्रकार होता है? क्या आप सोचते हैं कि जन्म से पूवर् ये जीव वैसे ही दिखाइर् देते थे जैसे कि वह अब दिखाइर् देते हैं? आइए पता लगाते हैं? पौधों की ही तरह जंतुओं में भी जनन की दो वििायाँ होती हैं। यह हैंः ;पद्ध लैंगिक जनन और ;पपद्ध अलैंगिक जनन। सारणी 9.1 क्र.सं जंतु संतति ;बच्चेद्ध 1 मनुष्य श्िाशु 2 बिल्ली 3 वुफत्ता 4 तितली 5 मुगीर् ;वुफक्वुफटद्ध चूशा 6 गाय 7 मेंढक 9.2 लैंगिक जनन कक्षा टप्प् में आपने पौधें में जनन के विषय में पढ़ा था। इसे स्मरण करने का प्रयास कीजिए। आपको याद होगा कि लैंगिक जनन करने वाले पौधों में नर और मादा जननंाग ;भागद्ध होते हैं। क्या आप इन भागों के नाम बता सकते हैं? जंतुओं में भी नर एवं मादा में विभ्िान्न जनन भाग अथवा अंग होते हैं। पौधों की ही तरह जंतु भी नर एवं मादा युग्मक बनाते हैं जो संलयित होकर युग्मनज बनाते हैं। यह युग्मनज विकसित होकर एक नया जीव बनाता है। इस प्रकार का जनन जिसमें नर तथा मादा युग्मक का संलयन होता है, लैंगिक जनन कहलाता है। आइए हम मनुष्य में जनन भागों का पता लगाएँ तथा जनन प्रक्रम का अध्ययन करें। नर जनन अंग नर जनन अंगों में एक जोड़ा वृषण, दो शुक्राणु नलिका तथा एक श्िाश्न ;लिंगद्ध होते हैं ;चित्रा 9.1द्ध। वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते हैं जिन्हें शुक्राणु कहते हैं। वृषण लाखों शुक्राणु उत्पन्न करते हैं। चित्रा 9.2 को देख्िाए जिसमें शुक्राणु का चित्रा दिखाया गया है। शुक्राणु यद्यपि बहुत सूक्ष्म होते हैं, पर प्रत्येक में एक सिर, एक मध्य भाग एवं एक पूँछ होती है। क्या शुक्राणु एकल कोश्िाका जैसे प्रतीत होते हैं? वास्तव में हर शुक्राणु में कोश्िाका के चित्रा 9.3: मानव में मादा जननांग। सिर पूँछ चित्रा 9.2: मानव शुव्रफाणु। मादा जनन अंग मादा जननांगों में एक जोड़ी अंडाशय, अंडवाहिनी ;डिंब वाहिनीद्ध तथा गभार्शय होता है ;चित्रा 9.3द्ध। अंडाशय अंडवाहिनी चित्रा 9.1: मानव में नर जननांग। मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे अंडाणु ;डिंबद्ध कहते हैं ;चित्रा 9.4द्ध। मानव ;स्ित्रायोंद्ध में प्रति मास दोनों अंडाशयों में से किसी एक अंडाशय से एक विकसित अंडाणु अथवा डिंब का निमोर्चन अंडवाहिनी में होता है। गभार्शय वह भाग है जहाँ श्िाशु का विकास होता है। शुक्राणु की तरह अंडाणु भी एकल कोश्िाका है। केन्द्रक चित्रा 9.4: मानव अंडाणु। निषेचन जनन प्रक्रम का पहला चरण शुक्राणु और अंडाणु का संलयन है। जब शुव्रफाणु, अंडाणु के संपकर् में आते हैं तो इनमें से एक शुक्राणु अंडाणु के साथ संलयित हो जाता है। शुक्राणु और अंडाणु का यह संलयन निषेचन कहलाता है ;चित्रा 9.5द्ध। निषेचन के समय शुक्राणु और अंडाणु संलयित होकर एक हो जाते हैं। निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज का निमार्ण होता है ;चित्रा 9.6द्ध। संलयित केन्द्रक क्या आपको जानकारी थी कि एक युग्मनज नए व्यष्िट का प्रारम्भ है? निषेचन के प्रक्रम में स्त्राी ;माँद्ध के अंडाणु और नर ;पिताद्ध के शुक्राणु का संयोजन होता है। अतः नयी संतति में वुफछ लक्षण अपनी माता से तथा वुफछ लक्षण अपने पिता से वंशानुगत होते हैं। अपने भाइर् अथवा बहन को देख्िाए। यह पहचानने का प्रयास कीजिए कि उनमें कौन से लक्षण माता से और कौन से लक्षण पिताजी से प्राप्त हुए हैं। वह निषेचन जो मादा के शरीर के अंदर होता है आंतरिक निषेचन कहलाता है। मनुष्य, गाय, वुफत्ते, तथा मुगीर् इत्यादि अनेक जंतुओं में आंतरिक निषेचन होता है। क्या आपने परखनली श्िाशु के विषय में सुना है? बूझो और पहेली के अध्यापक ने एक बार कक्षा में बताया था कि वुफछ स्ित्रायों की अंडवाहिनी अवरु( होती है। ऐसी स्ित्रायाँ श्िाशु उत्पन्न करने में असमथर् होती हैं क्योंकि निषेचन के लिए शुक्राणु, मागर् अवरु( होने के कारण, अंडाणु तक नहीं पहँुच पाते। ऐसी स्िथति में डाॅक्टर ;चिकित्सकद्ध ताशा अंडाणु एवं शुक्राणु एकत्रा करके उचित माध्यम में वुफछ घंटों के लिए एक साथ रखते हैं जिससे प्टथ् अथवा इनविट्रो निषेचन ;शरीर से बाहर कृत्रिाम निषेचनद्ध हो सके। अगर निषेचन हो जाता है तो युग्मनज को लगभग एक सप्ताह तक विकसित किया जाता है जिसके पश्चात् उसे माता के गभार्शय में स्थापित किया जाता है। माता के गभार्शय में पूणर् विकास होता है, तथा श्िाशु का जन्म सामान्य श्िाशु की तरह ही होता है। इस तकनीक द्वारा जन्मे श्िाशु को परखनली श्िाशु कहते हैं। यह एक मिथ्या नाम है क्योंकि श्िाशु का विकास परखनली में नहीं होता। आपको यह जानकर आश्चयर् होगा कि अनेक जंतुओं में निषेचन की िया मादा जंतु के शरीर के बाहर होती है। इन जंतुओं में निषेचन जल में होता है। आइए, पता लगाएँ कि यह किस प्रकार संपन्न होता है। ियाकलाप 9.1 वसंत अथवा वषार् )तु के समय किसी तलाब अथवा मंदगति से बहते झरने का भ्रमण कीजिए। जल पर तैरते हुए मेंढक के अंडों को ढूँढि़ए। अंडों के रंग तथा साइश को नोट कीजिए। वसंत अथवा वषार् )तु में मेंढक तथा टोड पोखर, तलाब और मंद गति से बहते झरने की ओर जाते हैं। जब नर तथा मादा एक साथ पानी में आते हैं तो मादा सैकड़ों अंडे देती है। मुगीर् के अंडे की तरह मेंढक के अंडे कवच से ढके नहीं होते तथा यह अपेक्षाकृत बहुत कोमल होते हैं। जेली की एक परत अंडों को एक साथ रखती है तथा इनकी सुरक्षा भी करती है। ;चित्रा 9.7द्ध। मादा जैसे ही अंडे देती है, नर उस पर शुक्राणु छोड़ देता है। प्रत्येक शुक्राणु अपनी लंबी पूँछ की सहायता से जल में इध्र - उध्र तैरते रहते हैं। शुक्राणु अंडकोश्िाका के संपकर् में आते हैं जिसके पफलस्वरूप निषेचन होता है। इस प्रकार का निषेचन जिसमें नर एवं मादा युग्मक का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है, बाह्य निषेचन कहलाता है। यह मछली, स्टारपिफश जैसे जलीय प्राण्िायों में होता है। मछली और मेंढक एक साथ सैकड़ों अंडे क्यों देते हैं जबकि मुगीर् एक समय में केवल एक अंडा ही देती है। भ्रूण का परिवधर्न निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है जो विकसित होकर भ्रूण में परिविार्त होता है ख्;चित्रा 9.8;ंद्ध,। युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोश्िाकाओं के गोले में बदल जाता है ख्;चित्रा 9.8;इद्ध,। तत्पश्चात् कोश्िाकाएँसमूहीकृत होने लगती हैं तथा विभ्िान्न ऊतकों और अंगों में परिविार्त हो जाती हैं। इस विकसित होती हुइर् संरचना को भू्रण कहते हैं। भ्रूण गभार्शय की दीवार में रोपित होकर विकसित होता रहता है ख्;चित्रा 9.8;बद्ध,। गभार्शय में भ्रूण का निरन्तर विकास होता रहता है। धीरे - धीरे विभ्िान्न शारीरिक अंग जैसे कि हाथ, पैर, ;इद्ध गभार्शय भ्िािा सिर, आँखें, कान इत्यादि विकसित हो जाते हैं। भू्रण की वह अवस्था जिसमें सभी शारीरिक भागों की पहचान हो सके गभर् कहलाता है। जब गभर् का विकास पूरा हो जाता है तो माँ नवजात श्िाशु को जन्म देती है। चित्रा 9.9: गभार्शय में भ्रूण। मुगीर् में भी आंतरिक निषेचन होता है। परन्तु क्या मनुष्य और गाय की तरह मुगीर् भी बच्चों को जन्म देती है? आप जानते ही हैं कि मुगीर् बच्चों को जन्म नहीं देती। तब, चूशे वैफसे जन्म लेते हैं? आइए पता लगाएँ। निषेचन के पफौरन बाद ही युग्मनज लगातार विभाजित होता रहता है और अंडवाहिनी में नीचे की ओर बढ़ता रहता है। इसके नीचे बढ़ने के साथ - साथ इस पर सुरक्ष्िात परत चढ़ती जाती है। मुगीर् के अंडे पर दिखाइर् देने वाला कठोर कवच भी ऐसी ही सुरक्ष्िात परत है। कठोर कवच के पूणर् रूप से बन जाने के बाद मुगीर् अंडे का निमोर्चन करती है। मुगीर् के अंडे को चूशा बनने में लगभग 3 सप्ताह का समय लगता है।आपने मुगीर् को ऊष्मायन के लिए अंडों पर बैठे देखा होगा। क्या आप जानते हैं कि अंडे के अंदर चूशे का विकास इस अविा में ही होता है? चूशे के पूणर् रूप से विकसित होने के बाद कवच के प्रस्पफुटन के बाद चूशा बाहर आता है। बाह्य निषेचन वाले जंतुओं में भ्रूण का विकास मादा के शरीर के बाहर ही होता है। भू्रण अंडावरण के अंदर विकसित होता रहता है। भ्रूण का विकासपूणर् होने पर अंडजोत्पिा होती है। आपने तलाब अथवा झरने में मेंढक के अनेक टैडपोल तैरते हुए देखे होंगे। जरायुज एवं अंडप्रजक जंतु हमने जाना कि वुफछ जंतु विकसित श्िाशु को जन्म देते हैं, जबकि वुफछ जंतु अंडे देते हैं जो बाद में श्िाशु में विकसित होते हैं। वह जंतु जो सीधे ही श्िाशु को जन्म देते हैं जरायुज जंतु कहलाते हैं। वे जंतु जो अंडे देते हैं अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं। निम्न ियाकलाप की सहायता से आप इस बात को और अच्छी प्रकार से समझ सवेंफगे तथा जरायुज एवं अंडप्रजक में विभेद भी कर सवेंफगे। ियाकलाप 9.2 मेंढक, छिपकली, तितली अथवा शलभ, मुगीर् तथा कौए अथवा किसी अन्य पक्षी के अंडे एकत्रा करने का प्रयास कीजिए। क्या आप इन सभी प्राण्िायों के अंडे एकत्रा कर पाए हैं? जिन अंडों को आपने एकत्रा किया है उनके चित्रा बनाइए। वुफछ जंतुओं के अंडे एकत्रा करना सरल है क्योंकि उनकी माँ शरीर के बाहर अंडे देती हैं। वह जंतु जिनके अंडे एकत्रा करने में आप सपफल रहे हैं, अंडप्रजक जंतुओं के उदाहरण हैं। परन्तु आप गाय,वुफत्ता अथवा बिल्ली के अंडे एकत्रा नहीं कर सकते। यह इसलिए क्योंकि वह अंडे नहीं देते। इनमें माँ पूणर् विकसित श्िाशु को ही जन्म देती हैं। यह जरायुज जंतुओं के उदाहरण हैं। अब क्या आप जरायुज एवं अंडप्रजक जंतुओं के वुफछ अन्य उदाहरण दे सकते हैं? श्िाशु से वयस्क नवजात जन्मे प्राण्िा अथवा अंडे के प्रस्पुफटन से निकले प्राण्िा, तब तक वृि करते रहते हैं जब तक कि वे वयस्क नहीं हो जाते। वुफछ जंतुओं में नवजात जंतु वयस्क से बिलवुफल अलग दिखाइर् पड़ सकते हैं। रेशम कीट के जीवन चक्र का स्मरण कीजिए ;अंडा → लारवा अथवा इल्ली → प्यूपा → वयस्कद्धजिसके विषय में आप कक्षा टप्प् में पढ़ चुके हैं। मेंढक इस प्रकार के जंतुओं का अन्य उदाहरण है ;चित्रा 9.10द्ध। मेंढक में अंडे से प्रारम्भ करके वयस्क बनने की विभ्िान्न अवस्थाओं ;चरणोंद्ध का प्रेक्षण कीजिए। हम तीन स्पष्ट अवस्थाओं अथवा चरणों को देख पाते हैं, अंडा → टैडपोल ;लारवाद्ध → वयस्क। क्या टैडपोल वयस्क मेंढक से भ्िान्न दिखाइर् नहीं देते? क्या आप सोच सकते हैं कि किसी दिन यह टैडपोल वयस्क मेंढक बन जाएँगे? उसी प्रकार रेशम कीट की इल्ली या प्यूपा वयस्क रेशम कीट से बहुत अलग दिखाइर् पड़ता है। वयस्क में पाए जाने वाले लक्षण नवजात में नहीं पाए जाते। पिफर, टैडपोल अथवा इल्ली का बाद में क्या होता है? आपने एक सुंदर शलभ को कोवूफन से बाहर निकलते देखा होगा। टैडपोल रूपांतरित होकर वयस्क में बदल जाता है जो छलाँग लगा सकता है और तैर सकता है। वुफछ विशेष परिवतर्नों के साथ टैडपोल का वयस्क में रूपांतरण कायांतरण कहलाता है। जैसे - जैसे हम बड़े होते हैं हम शरीर में किस प्रकार के परिवतर्न देखते हैं? क्या आप सोचते हैं कि हमारा भी कायांतरण होता है? मनुष्य में जन्म के समय से ही नवजात श्िाशु में वयस्क समान शारीरिक अंग मौजूद होते हैं। 9.3 अलैंगिक जनन अब तक हमने जनन प्रक्रम का अध्ययन उन जंतुओं में पढ़ा है जिनसे हम परिचित हैं। परन्तु अत्यंत छोटे जंतु जैसे कि हाइड्रा एवं सूक्ष्मदशीर्य जंतु जैसे कि अमीबा में जनन किस प्रकार होता है? क्या आप उनके प्रजनन करने के ढंग के विषय में जानते हैं? आइए इसका पता लगाएँ। ;ंद्ध अंडे चित्रा 9.10: मेंढक का जीवन चक्र। ियाकलाप 9.3 हाइड्रा की स्थायी स्लाइड लीजिए। आवधर्क लेंस अथवा सूक्ष्मदशीर् की सहायता से इस स्लाइड का अध्ययन कीजिए। जनक के शरीर से क्या वुफछ उभरी संरचनाएँ दिखाइर् देती हैं। इन उभरी हुइर् संरचनाओं की संख्या ज्ञात कीजिए। इनका साइश भी ज्ञात कीजिए। हाइड्रा का चित्रा वैसा ही बनाइए जैसा आपको दिखाइर् देता है। इसकी तुलना चित्रा 9.11: हाइड्रा में मुवुफलन।चित्रा 9.11 से कीजिए। प्रत्येक हाइड्रा में एक या अिाक उभार दिखाइर् दे सकते हैं। यह उभार विकसित होते नए जीव हैं जिन्हें मुवुफल कहते हैं। स्मरण कीजिए कि यीस्ट में भी मुवुफल दिखाइर् देते हैं। हाइड्रा में भी एक एकल जनक से निकलने वाले उ(धर् से नए जीव का विकास होता है। इस प्रकार के जनन को जिसमें केवल एक ही जनक नए जीव को जन्म देता है अलैंगिक जनन कहते हैं। हाइड्रा में मुवुफल से नया जीव विकसित होता है इसलिए इस प्रकार के जनन को मुवुफलन कहते हैं। अलैंगिक जनन की अन्य वििा अमीबा में दिखाइर् देती है। आइए देखें यह वैफसे होता है। आप अमीबा की संरचना के विषय में पढ़ चुके हैं। आपको स्मरण होगा कि अमीबा एककोश्िाक होता है। ख्चित्रा 9.12;ंद्ध,। इसमें केन्द्रक के दो भागों में विभाजन से जनन िया प्रारम्भ होती है ख्चित्रा 9.12;इद्ध,। इसके बाद कोश्िाका भी दो भागों ;कोश्िाकाओंद्ध में बँट जाती है जिसके प्रत्येक भाग में केन्द्रक होता है ख्चित्रा 912;बद्ध,। परिणामस्वरूप एक जनक से दो अमीबा बनते हैं ख्चित्रा 9.12;कद्ध,। इस प्रकार के अलैंगिक जनन को जिसमें जीव विभाजित होकर दो संतति उत्पन्न करता है द्विखंडन कहलाता है। मुवुफलन एवं द्विखंडन के अतिरिक्त वुफछ अन्य वििायाँ भी हैं जिनके द्वारा एकल जीव संतति जीवों का जनन करता है। इनके विषय में आप अगली कक्षाओं में पढ़ेंगे। विभाजित केन्द्रक ं इ ब संतति क चित्रा 9.12ः अमीबा में द्विखंडन। डाॅली की कहानी, क्लोन किसी समरूप कोश्िाका या किसी अन्य जीवित भाग अथवा संपूणर् जीव को कृत्रिाम रूप से उत्पन्न करने की प्रिया क्लोनिंग कहलाती है। किसी जंतु की सपफलतापूवर्क क्लोनिंग सवर्प्रथम इयान विलमट और उनके सहयोगियों ने एडिनबगर्, स्काॅटलैंड के रोजलिन इंस्टीट्यूट में की। उन्होंने एक भेड़ को क्लोन किया जिसका नाम डाॅली रखा गया ख्;चित्रा 9.13;बद्ध,। डाॅली का जन्म 5 जुलाइर् 1996 को हुआ था। यह क्लोन किया जाने वाला पहला स्तनधारी था। ;ंद्ध पिफन डाॅरसेट भेड़ ;इद्ध स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व ;बद्ध डाॅली चित्रा 9.13 डाॅली की क्लोनिंग करते समय, पिफन डाॅरसेट नामक मादा भेड़ की स्तन ग्रंथ्िा से एक कोश्िाका एकत्रा की गइर् ख्चित्रा 9.13;ंद्ध,। उसी समय स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व से एक अंडकोश्िाका भी एकत्रा की गइर् ख्चित्रा 9.13;इद्ध,। अंडकोश्िाका से केन्द्रक को हटा दिया गया। तत्पश्चात् पिफन डाॅरसेट भेड़ की स्तन - ग्रंथ्िा से ली गइर् कोश्िाका के केन्द्रक को स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व की केन्द्रक विहीन अंडकोश्िाका में स्थापित किया गया। इस प्रकार उत्पन्न अंडकोश्िाका को स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व में रोपित किया गया। अंड कोश्िाका का विकास एवं परिवधर्न सामान्य रूप से हुआ तथा अंततः ‘डाॅली’ का जन्म हुआ। यद्यपि स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व ने डाॅली को जन्म दिया था, परन्तु डाॅली पिफन डाॅरसेट भेड़ के समरूप थी जिससे केन्द्रक लिया गया था। क्योंकि स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व के केन्द्रक को अंडकोश्िाका से हटा दिया गया था, अतः डाॅली में स्काॅटिश ब्लैकपेफस इर्व का कोइर् भी लक्षण परिलक्ष्िात नहीं हुआ। डाॅली एक पिफन डाॅरसेट भेड़ की स्वस्थ क्लोन थी जिसने प्राकृतिक लैंगिक जनन द्वारा अनेक संततियों को जन्म दिया। दुभार्ग्य से पेफपफड़ों के रोग के कारण 14 पफरवरी 2003 को डाॅली की मृत्यु हो गइर्। डाॅली के बाद स्तनधारियों के क्लोन बनाने के अनेक प्रयास किए गए। परन्तु, बहुत तो जन्म से पहले ही मर गए तथावुफछ की जन्म के बाद ही मृत्यु हो गइर्। क्लोन वाले जंतुओं में अक्सर जन्म के समय अनेक विकृतियाँ होती हैं। आपने क्या सीखाऽ जंतु दो वििायों द्वारा प्रजनन करते हैं। यह हैं ;पद्ध लैंगिक जनन तथा ;पपद्ध अलैंगिक जनन ऽ नर युग्मक एवं मादा युग्मक के संलयन द्वारा जनन को लैंगिक जनन कहते हैं। ऽ अंडाशय, अंडवाहिनी एवं गभार्शय मादा के जनन अंग हैं। ऽ नर के जननांग हैंः वृषण, शुक्राणु नली एवं श्िाश्न। ऽ अंडाशय मादा युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे अंडाणु ;अथवा अंडकोश्िाकाद्ध कहते हैं। वृषण नर युग्मक उत्पन्न करते हैं जिसे शुक्राणु कहते हैं। ऽ अंडाणु एवं शुक्राणु का संलयन निषेचन कहलाता है। निषेचित अंडा युग्मनज कहलाता है। ऽ मादा के शरीर के अंदर होने वाले निषेचन को आंतरिक निषेचन कहते हैं। यह मनुष्य एवं अन्य जंतुओं जैसे कि मुगीर्, गाय एवं वुफत्ते इत्यादि में होता है। ऽ वह निषेचन जो मादा के शरीर के बाहर होता है, बाह्य निषेचन कहलाता है। यह मेंढक, मछली, स्टाॅरपिफश इत्यादि में दिखाइर् देता ह।ैऽ युग्मनज में अनेक विभाजन होते हैं तथा भू्रण बनता है। ऽ भ्रूण गभार्शय की दीवार में स्थापित होता है जहाँ उसकी वृि एवं परिवधर्न होता है। ऽ भ्रूण की वह अवस्था जिसमें उसके सभी शारीरिक भाग विकसित होकर पहचान योग्य हो जाते हैं तो उसे गभर् कहते हैं। ऽ मनुष्य, गाय एवं वुफत्ते जैसे जंतु जो श्िाशु को जन्म देते हैं, उन्हें जरायुज जंतु कहते हैं। ऽ मुगीर्, मेंढक, छिपकली, तितली जैसे जंतु जो अंडे देते हैं, अंडप्रजक जंतु कहलाते हैं। ऽ लारवा का वुफछ उग्र - परिवतर्नों द्वारा वयस्क जंतु में बदलने की प्रिया कायांतरण कहलाती है। ऽ जनन का वह प्रकार जिसमें केवल एक ही जीव भाग लेता है, अलैंगिक जनन कहलाता है। ऽ हाइड्रा में मुवुफल द्वारा नए जीव का विकास होता है। इस प्रकार के अलैंगिक जनन को मुवुफलन कहते हैं। ऽ अमीबा स्वयं दो भागों में विभाजित होकर संतति उत्पन्न करता है। इस प्रकार के अलैंगिक प्रजनन को द्विखंडन कहते हैं। अभ्यास 1.सजीवों के लिए जनन क्यों महत्वपूणर् है? समझाइए। 2.मनुष्य में निषेचन प्रक्रम को समझाइए। 3.सवोर्चित उत्तर चुनिएμ ;कद्ध आंतरिक निषेचन होता है: ;पद्ध मादा के शरीर में ;पपद्ध मादा के शरीर से बाहर ;पपपद्ध नर के शरीर में ;पअद्ध नर के शरीर से बाहर ;खद्ध एक टैडपोल जिस प्रक्रम द्वारा वयस्क में विकसित होता है, वह है: ;पद्ध निषेचन ;पपद्ध कायांतरण ;पपपद्ध रोपण ;पअद्ध मुवुफलन ;गद्ध एक युग्मनज में पाए जाने वाले केन्द्रकों की संख्या होती है: ;पद्ध कोइर् नहीं ;पपद्ध एक ;पपपद्ध दो ;पअद्ध चार 4.निम्न कथन सत्य ;ज्द्ध है अथवा असत्य ;थ्द्ध। संकेतिक कीजिएμ ;कद्ध अंडप्रजक जंतु विकसित श्िाशु को जन्म देते हैं। ; द्ध ;खद्ध प्रत्येक शुक्राणु एक एकल कोश्िाका है। ; द्ध ;गद्ध मेंढक में बाह्य निषेचन होता है। ; द्ध ;घद्ध वह कोश्िाका जो मनुष्य में नए जीवन का प्रारंभ है, युग्मक कहलाती है। ; द्ध ;घद्ध निषेचन के पश्चात् दिया गया अंडा एक एकल कोश्िाका है। ; द्ध ;चद्ध अमीबा मुवुफलन द्वारा जनन करता है। ; द्ध ;छद्ध अलैंगिक जनन में भी निषेचन आवश्यक है। ; द्ध ;जद्ध द्विखंडन अलैंगिक जनन की एक वििा है। ; द्ध ;झद्ध निषेचन के परिणामस्वरूप युग्मनज बनता है। ; द्ध ;Û; द्ध ाद्ध भ्रूण एक एकल कोश्िाका का बना होता है। 5.युग्मनज और गभर् में दो भ्िान्नताएँ दीजिए। 6.अलैंगिक जनन की परिभाषा लिख्िाए। जंतुओं में अलैंगिक जनन की दो वििायों का वणर्न कीजिए।

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