दहन और ज्वाला हम घर पर, उद्योगों में और वाहनों को चलाने के लिए विभ्िान्न प्रकार के ईंधनों का उपयोग विविध प्रयोजन के लिए करते हैं। क्या आप अपने घरों में प्रयुक्त होने वाले वुफछ ईंधनों के नाम बता सकते हैं? व्यापार और उद्योगों में उपयोग होने वाले वुफछ ईंधनों के नाम बताइए। मोटर - गाडि़याँ चलाने में कौन से ईंधन काम में आते हैं? आपकी सूची में सम्िमलित ईंधन होंगे - गोबर, लकड़ी, कोयला, काष्ठ - कोयला, पेट्रोल, डीजल, संपीडित प्रावृफतिक गैस ;ब्छळद्ध आदि। आप मोमबत्ती के जलने से परिचित हैं। मोमबत्ती के जलने और कोयले जैसे ईंधन के जलने में क्या अंतर है?शायद आपका अनुमान सही था। मोमबत्ती ज्वाला के साथ जलती है जबकि कोयला नहीं। इसी प्रकार, आप अनेक ऐसे पदाथर् पाएँगे जो बिना ज्वाला के जलते हैं। आइए, जलने के रासायनिक प्रक्रम और इस प्रक्रम में उत्पन्न ज्वाला के प्ररूपों का अध्ययन करें। 6.1 दहन क्या है? कक्षा टप्प् में मैग्नीश्िायम दहन के वि्रफयाकलाप का स्मरण करिए। हमने देखा था कि मैग्नीश्िायम जलकरमैग्नीश्िायम आॅक्साइड बनाता है और ऊष्मा तथा प्रकाश उत्पन्न करता है ;चित्रा 6.1द्ध। इसी प्रकार का वि्रफयाकलाप हम एक काष्ठ - कोयले का टुकड़ा लेकर कर सकते हैं। काष्ठ - कोयले केटुकड़े को संडासी से पकडि़ए और एक मोमबत्ती अथवा बुंसेन बनर्र की ज्वाला के निकट लाइए। आप क्या देखते हैं? हम पाते हैं कि काष्ठ - कोयला वायु में जलता है। हम जानते हैं कि काष्ठ - कोयला वायु में जलकर काबर्नडाइआॅक्साइड, ऊष्मा और प्रकाश देता है। चित्रा 6.1: मैग्नीश्िायम का दहन। रासायनिक प्रक्रम जिसमें पदाथर् आॅक्सीजन सेअभ्िािया कर ऊष्मा देता है, दहन कहलाता है। जिस पदाथर् का दहन होता है, वह दाह्य कहलाता है। इसे ईंधन भी कहते हैं। ईंधन ठोस, द्रव या गैस हो सकता है। कभी - कभी, दहन के समय ज्वाला के रूप में अथवा एक लौ के रूप में प्रकाश भी उत्पन्न होता है।ऊपर दी गइर् अभ्िाियाओं में मैग्नीश्िायम और काष्ठ - कोयला दाह्य पदाथर् हैं। वि्रफयाकलाप 6.2 वि्रफयाकलाप 6.1 स्ट्रा, माचिस की तीलियाँ, मिट्टी का तेल, कागश, लोहे की कीलें, पत्थर के टुकड़े, शीशा, आदि वुफछ पदाथर् इकट्ठे करिए। अपने श्िाक्षक की देख - रेख में, इन पदाथोर्ं को एक - एक कर जलाइए। यदि पदाथर् जलता है तो इसे दाह्य दिखाइए, अन्यथा उसे अदाह्य दिखाइए ;सारणी 6.1द्ध। सारणी 6.1: दाह्य और अदाह्य पदाथर् पदाथर् दाह्य अदाह्य लकड़ी कागश लोहे की कीलें मिट्टी का तेल पत्थर का टुकड़ा स्ट्रा काष्ठ - कोयला माचिस की तीलियाँ काँच क्या आप वुफछ और पदाथोर्ं के नाम बता सकते हैं जो दाह्य हैं? आप इन्हें सारणी 6.1 में जोड़ सकते हैं। आइए, उन परिस्िथतियों का पता लगाएँ जिनमें दहन होता है। सूयर् में ऊष्मा और प्रकाश नाभ्िाकीय अभ्िाियाओं द्वारा उत्पन्न होते हैं। आप इस प्रक्रम के बारे में आगे चलकर पढ़ेंगे। वि्रफयाकलाप 6.3 आपने सुना होगा कि जब किसी व्यक्ित के वस्त्रा आग पकड़ लेते हैं तो आग बुझाने के लिए व्यक्ित को कम्बल से ढक देते हैं ;चित्रा 6.3द्ध। क्या आप बता सकते हैं कि ऐसा क्यों करते हैं? अब अपने वुफछ अनुभवों को स्मरण करिए। क्या एक माचिस की तीली अपने आप जल उठती है? यह किस प्रकार जलाइर् जाती है? आपको कागश के टुकड़े को जलाने का अनुभव अवश्य होगा। जब जलती हुइर् माचिस की तीली इसके पास लाते हैं तो क्या यह जल उठता है? क्या आप लकड़ी के एक टुकड़े को, जलती माचिस की तीली उसके पास ला कर जला सकते हैं? लकड़ी या कोयले को जलाने के लिए आपको कागश अथवा मिट्टी के तेल का उपयोग क्यों करना पड़ता है? क्या आपने जंगल में लगने वाली आग के बारे में सुना है? क्या ये अनुभव आपको बताते हैं कि विभ्िान्न पदाथर् विभ्िान्न ताप पर आग पकड़ते हैं? वह न्यूनतम ताप जिस पर कोइर् पदाथर् जलने लगता है, उसका ज्वलन - ताप कहलाता है। क्या अब आप बता सकते हैं कि कमरे के ताप पर माचिस की तीली अपने आप आग क्यों नहीं पकड़ लेती? माचिस की तीली, माचिस की डिबिया के बगल में रगड़ने पर क्यों जल जाती है? माचिस का इतिहास बहुत पुराना है। पाँच हशार से अिाक वषर् पूवर् प्राचीन मिश्र में गंधक में डुबोए गए चीड़ की लकड़ी के छोटे टुकड़े माचिस की तरह उपयोग किए जाते थे। आधुनिक निरापद माचिस का विकास लगभग दो सौ वषर् पूवर् हुआ था। ऐन्िटमनी ट्राइसल्पफाइड, पोटैश्िायम क्लोरेट और श्वेत पफॅास्पफोरस का मिश्रण, वुफछ गोंद और स्टाचर् के साथ मिला कर उचित लकड़ी से बनी माचिस की तीली के सिरे पर लगाया जाता था। जब इसे किसी खुरदरी सतह से रगड़ा जाता था तो घषर्णकी ऊष्मा के कारण श्वेत पफॅास्पफोरस प्रज्वलित हो उठता था। इससे माचिस की तीली का दहन प्रारम्भ हो जाता था। परंतु, श्वेत पफॅास्पफोरस माचिस उद्योग में काम करने वालों और माचिस का उपयोग करने वालों, दोनों के लिए खतरनाक सि( हुआ। आजकल निरापद माचिस के सिरे पर केवल ऐन्िटमनी ट्राइसल्पफाइड और पोटैश्िायम क्लोरेट लगा रहता है। रगड़ने वाली सतह पर चूण्िार्त काँच और थोड़ा सा लाल पफॅास्पफोरस लगाते हैं जो कम खतरनाक होता है। जब माचिस की तीली को खुरदरी सतह पर रगड़ा जाता है तो वुफछ लाल पफॅास्पफोरस, श्वेत पफाॅस्पफोरस में परिवतिर्त हो जाता है। यह तुरन्त माचिस की तीली के सिरे पर लगेपोटैश्िायम क्लोरेट से अभ्िािया कर पयार्प्त ऊष्मा उत्पन्न कर देता है जिससे ऐन्िटमनी ट्राइसल्पफाइड का दहन प्रारम्भ हो जाता है। हमने पाया कि दाह्य पदाथर् तब तक आग नहीं पकड़ सकता या जल नहीं सकता जब तक उसका ताप उसके ज्वलन - ताप से कम रहता है। क्या आपने कभी भोजन पकाने वाले तेल को आग पकड़ते देखा है, जब तलने वाला बतर्न लम्बे समय तक जलते हुए स्टोव पर रखा रहता है? कमरे के ताप पर मिट्टी का तेल और लकड़ी अपने आप आग नहीं पकड़ते। परंतु यदि मिट्टी के तेल को थोड़ा गमर् कर दें तो वह आग पकड़ लेता है। क्या इसका ज्वलन - ताप लकड़ी के ज्वलन ताप से कम है? क्या इसका अथर् है कि मिट्टी के तेल के रखने में हमें विशेष सावधानी बरतनी होगी? निम्नलिख्िात वि्रफयाकलाप प्रदश्िार्त करता है कि किसी पदाथर् के दहन के लिए उसका ताप, उसके ज्वलन - ताप तक पहुँचना आवश्यक है। वि्रफयाकलाप 6.4 यदि हम कप को गमर् करना जारी रखें, तो हम कागश के कप में भी जल को उबाल सकते हैं। क्या आप इस परिघटना का कोइर् स्पष्टीकरण सोच सकते हैं? कागश के कप को दी जाने वाली ऊष्मा, चालन द्वारा जल में चली जाती है। अतः जल की उपस्िथति में ताप कागश के ज्वलन - ताप तक नहीं पहुँच पाता। इसलिए वह जलता नहीं। जिन पदाथो± का ज्वलन - ताप बहुत कम होता है और जोे ज्वाला के साथ सरलतापूवर्क आग पकड़ लेते हैं, ज्वलनशील पदाथर् कहलाते हैं। ज्वलनशील पदाथोर्ं के उदाहरण हैं - पेट्रोल, ऐल्कोहल, द्रवित पेट्रोलियम गैस ;स्च्ळद्ध, आदि। क्या आप वुफछ और ज्वलनशील पदाथोर्ं की सूची बना सकते हैं? 6.2 हम आग पर नियंत्राण वैफसे पाते हैं? आपने घरों, दुकानों और कारखानों में आग लगते देखा या सुना होगा। यदि आपने इस प्रकार की कोइर् दुघर्टना देखी है तो उसका संक्ष्िाप्त विवरण अपनी नोटबुक में लिख्िाए। यह अनुभव अपने कक्षा के साथ्िायों के साथ भी बाँटिए। अपने क्षेत्रा की अग्िन सेवा के टेलीपफोन नम्बर का पता लगाइए। यदि आपके या आपके पड़ोसी के घर में आग लग जाए तो सबसे पहले अग्िनशमन सेवा को सूचित करिए। क्या आपके शहर/नगर में पफायर बि्रगेड स्टेशन है? जब पफायर बि्रगेड आती है तो वह क्या करती है? वह आग पर जल डालती है। जल, ज्वलनशील पदाथो± को ठंडा करता है जिससे उनका ताप उनके ज्वलन ताप से कम हो जाता है। ऐसा करने से आग का पैफलना रुक जाता है। जलवाष्प, ज्वलनशील पदाथर् को घेर लेता है जिससे वायु की आपूतिर् बंद हो जाती है और आग बुझ जाती है। आपने पढ़ा है कि आग उत्पन्न करने के लिए तीन आवश्यकताएँ होती हैं। क्या आप इन आवश्यकताओं की सूची बना सकते हैं? ये आवश्यकताएँ हैं μ ईंधन, वायु ;आॅक्सीजनआपूतिर् हेतुद्ध और ऊष्मा ;ईंधन का ताप उसके ज्वलन ताप से अिाक करने हेतुद्ध। इनमें से एक या अिाक आवश्यकताओं को हटाकर आग को नियंत्रिात किया जा सकता है। आग बुझाने वाले का कायर् वायु का प्रवाह काटना या ईंधन का ताप कम करना या दोनों होते हैं। ध्यान दीजिए कि अिाकांश स्िथतियों में ईंधन को हटाया नहीं जा सकता। उदाहरण के लिए, यदि किसी भवन में आग लगती है तो सम्पूणर् भवन ही ईंधन होता है। जल सबसे अिाक प्रचलित अग्िनशामक है। परन्तु जल तभी कायर् कर पाता है जब लकड़ी और कागश जैसी वस्तुओं में आग लगी हो। यदि विद्युत् उपकरणों में आग लगी हो तो जल विद्युत् का चालन कर सकता है और आग बुझाने वालों को हानि हो सकती है। तेल और पेट्रोल में लगी आग बुझाने हेतु भी जल का उपयोग उचित नहीं होता। क्या आपको याद है किऔर पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदाथोर्ं में लगी आग के लिए काबर्न डाइआॅक्साइड ;ब्व्द्ध सबसे अच्छा अग्िनशामक2है। आॅक्सीजन से भारी होने के कारण ब्व्आग को एक कम्बल की तरह लपेट लेती है। इससे ईंधन और आॅक्सीजन2 के बीच सम्पकर् टूट जाता है, अतः आग पर नियंत्राण हो जाता है। ब्व् का अतिरिक्त लाभ यह है कि सामान्यतः2यह विद्युत उपकरणों को कोइर् हानि नहीं पहँुचाती। हमें काबर्न डाइआॅक्साइड की आपूतिर् कहाँ से मिलती है? उच्च दाब पर यह द्रव के रूप में सि¯लडरों में भरी जा सकती है। एलपीजी किस रूप में सि¯लडरों में रखी जाती है? सि¯लडर से छोड़े जाने पर ब्व् बहुत अिाक2पफैलती है और ठंडी हो जाती है। अतः यह न केवल आग को चारों ओर से घेर लेती है बल्िक ईंधन के ताप कोभी नीचे ले आती है। इसीलिए यह अति उत्तम अग्िनशामक है। ब्व् प्राप्त करने का एक दूसरा तरीका, सोडियम2बाइकाबोर्नेट ;बेकिंग सोडाद्ध या पोटैश्िायम बाइकाबोर्नेट जैसे रसायनों के पाउडर का भारी मात्रा में छिड़काव है। आग के निकट इन पदाथोर्ं से बहुत सी काबर्न डाइआॅक्साइड गैस निकलती है जो आग बुझा देती है। 6.3 दहन के प्रकार एक जलती हुइर् माचिस की तीली अथवा गैस लाइटर को रसोइर् में गैस स्टोव के निकट लाइए। सावधानीः स्वयं गैस स्टोव का प्रयोग न कीजिए। अपने माता - पिता को सहायता के लिए कहिए। गैस स्टोव की घुंडी ;नाॅबद्ध घुमाकर गैस चालू कर दीजिए। आप क्या देखते हैं? हम पाते हैं कि गैस तेशी से जलने लगती है तथाऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करती है। इस प्रकार का दहन तीव्र दहन कहलाता है। पफाॅस्पफोरस जैसे वुफछ पदाथर् हैं जो कमरे के ताप पर वायु में जल उठते हैं। इस प्रकार का दहन जिसमें पदाथर्, बिना किसी प्रत्यक्ष कारण के, अचानक लपटों के साथ जल उठता है, स्वतः दहन कहलाता है। कोयले की खानों में कोयले की धूल के स्वतः दहन से कइर् बार खतरनाक अग्िनकाण्ड हो चुके हैं। जंगल के स्वतः अग्िनकाण्ड कभी अिाक गमीर् के कारण होते हैं, कभी आकाश से बिजली गिरने से होते हैं। परन्तु जंगल मंे आग अिाकतर मनुष्य की लापरवाही से लगती है। जंगल में यदि आप पिकनिक अथवा श्िाविर में जाते हैं और केम्पपफायर का आयोजन करते हैं तो स्थान छोड़ने से पूवर् आग को पूणर्तया बुझाना अवश्य याद रख्िाए। हम त्योहारों पर अक्सर अतिशबाजी करते हैं। जब पटाखे को जलाते हैं तो एक आकस्िमक अभ्िािया होनेसे ऊष्मा, प्रकाश और ध्वनि पैदा होती है। अभ्िािया में बनी गैस बड़ी मात्रा में निकलती है। इस प्रकार की अभ्िािया विस्पफोट कहलाती है। पटाखे पर दाब डालने पर भी विस्पफोट हो सकता है। 6.4 ज्वाला एलपीजी ज्वाला का प्रेक्षण करिए। क्या आप ज्वाला कारंग बता सकते हैं? एक मोमबत्ती की ज्वाला का रंग वैफसा होता है? कक्षा टप्प् के मैग्नीश्िायम रिबन को जलाने के अपने अनुभव को याद करिए। यदि आपको सारणी 6.2 की शेष वस्तुओं को जलाने का अनुभव नहीं है तो आप उन्हें अब कर सकते हैं। अपने प्रेक्षण रिकाडर् करिए और सारणी में लिख्िाए कि पदाथर् ज्वाला देता है या नहीं। चित्रा 6.8: मोमबत्ती और रसोइर्घर के स्टोव की 6.5 ज्वाला की संरचना वि्रफयाकलाप 6.5 एक मोमबत्ती जलाइए ;सावधानी बरतिएद्ध। एक काँच की नली को संडासी द्वारा पकडि़ए औरउसका एक सिरा मोमबत्ती की अकम्िपत ज्वाला के अदीप्त क्षेत्रा ;जोनद्ध में प्रवेश करा दीजिए ;चित्रा 6.10द्ध। काँच की नली के दूसरे सिरे के निकट एक जलती हुइर् माचिस की तीली लाइए। क्या वहाँ ज्वाला उत्पन्न होती है? यदि ऐसा है, तो वह क्या है जो ज्वाला उत्पन्न करता है? ध्यानदीजिए कि गमर् बत्ती के पास का मोम जल्द पिघल जाता है। सारणी 6.2: दहन पर ज्वाला देने वाले पदाथर् क्र.सं पदाथर् ज्वाला देता है ज्वाला नहीं देता 1 मोमबत्ती 2 मैग्नीश्िायम 3 कपूर 4 मिट्टी के तेल वाला स्टोव 5 लकड़ी का कोयला दहन के समय जो पदाथर् वाष्िपत होते हैं वे ज्वाला का निमार्ण करते हैं। उदाहरण के लिए, मिट्टी का तेलऔर पिघली हुइर् मोमबत्ती के साथ - साथ ऊपर उठते हैं और दहन के समय वाष्िपत होकर ज्वाला का निमार्ण करते हैं। इसके विपरीत लकड़ी का कोयला वाष्िपत नहीं होता और कोइर् ज्वाला नहीं देता। वि्रफयाकलाप 6.5 में, क्या काँच की नली से बाहर निकलने वाला मोम का वाष्प क्या ज्वाला उत्पन्न होने का कारण हो सकता है? जब मोमबत्ती की ज्वाला स्िथर हो तो ज्वाला के दीप्त क्षेत्रा में एक स्वच्छ काँच की प्लेट/स्लाइड प्रविष्ट करिए ;आवृफति 6.11द्ध। उसे संडासी से लगभग 10 सेवंफड तक पकड़े रख्िाए। पिफर उसे हटा लीजिए। आप क्या देखते हैं? चित्रा 6.11 काँच की प्लेट/स्लाइड पर एक गोल काला वलय बन गया है। यह ज्वाला के दीप्त क्षेत्रा में उपस्िथत बिना जले काबर्न कणों के जमाव को दशार्ता है। एक पतले लम्बे ताँबे के तार को लगभग 30 सेवंफड तक ज्वाला में पकड़ कर रख्िाए ;आवृफति 6.12द्ध। चित्रा 6.12 ध्यान दीजिए कि तार का भाग जो ज्वाला के वुफछ ही बाहर है, रक्त तप्त हो जाता है। क्या यह दशार्ता है कि ज्वाला के अदीप्त क्षेत्रा का ताप बहुत अध्िक है? वास्तव में ज्वाला का यह भाग सबसे अिाक गमर् होता है ;चित्रा 6.13द्ध। सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए सुनार धातु की पुफकनी से ज्वाला के सबसे बाहरी भाग को उस पर पूणर् दहन का बाह्य क्षेत्रासबसे गमर् ;नीलाद्धभाग कम गमर् आंश्िाक दहन वाला मध्य भागसबसे कम ;पीलाद्धगमर् बिना जली मोमबत्ती कामोमबत्ती सबसे आंतरिक क्षेत्रा ;कालाद्ध चित्रा 6.13: मोमबत्ती की ज्वाला के विभ्िान्न क्षेत्रा। पूँफकते हैं ;चित्रा 6.14द्ध। वे ज्वाला के सबसे बाहरी भाग का उपयोग क्यों करते हैं? पेट्रोल, मिट्टी का तेल, आदि हैं। ये पदाथर् ईंधन कहलाते हैं। अच्छा ईंधन वह है जो सहज उपलब्ध हो जाता है। यह सस्ता होता है और वायु में सामान्य दरसे सुगमतापूवर्क जलता है। यह अिाक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न करता है। यह जलने के उपरांत कोइर् अवांछनीय पदाथर् नहीं छोड़ता। सम्भवतः ऐसा कोइर् भी ईंधन नहीं है जिसे एक आदशर् ईंधन माना जा सके। हमें ऐसा ईंधन ढूँढ़ना चाहिए जो किसी विश्िाष्ट उपयोग की अिाकांश आवश्यकताएँ पूरी करता हो। ईंधन के मूल्यों में भ्िान्नता होती है। वुफछ ईंधन अन्य ईंधनों की अपेक्षा सस्ते होते हैं। जिन ईंधनों से आप परिचित हैं, उनकी सूची बनाइए। सारणी 6.3 की भांति इन्हें ठोस, द्रव और गैसीय ईंधनों में वगीर्वृफत करिए। 6.7 ईंधन दक्षता यदि आपसे कहा जाए कि गोबर के उपले, कोयला और एलपीजी को जला कर पानी की एक निश्िचत मात्रा को उबालें, तो आप कौन से ईंधन को चुनेंगे? इसका कारण बताइए। आप अपने माता - पिता की मदद ले सकते हैं। क्या ये ईंधन बराबर मात्रा मेंऊष्मा उत्पन्न करते हैं? किसी ईंधन के 1 किलोग्रामके पूणर् दहन से प्राप्त ऊष्मा ऊजार् की मात्रा, उसका उफष्मीय मान कहलाती है। ईंधन के उष्मीय मान को किलोजूल प्रति किलोग्राम ;ाश्रधहद्ध मात्राक द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है। वुफछ ईंधनों के उफष्मीय मान सारणी 6.4 में दिए गए हैं। सारणी 6.3: ईंधनों के प्ररूप क्र.सं. ठोस ईंधन द्रव इर्धन गैसीय ईंधन 1 कोयला मिट्टी का तेल प्रावृफतिक गैस 2 3 सारणी 6.4: विभ्िान्न ईंधनों के ऊष्मीय मान ईंधन उफष्मीय मान ;ाश्रधहद्ध गोबर के उपले 6,000 - 8,000 लकड़ी 17,000 - 22,000 कोयला 25,000 - 33,000 पेट्रोल 45,000 मिट्टी का तेल 45,000 डीजल 45,000 मेथेन 50,000 सीएनजी 50,000 एलपीजी 55,000 जैव गैस 35,000 - 40,000 हाइड्रोजन 1,50,000 ईंधन के दहन से हानिकारक उत्पाद प्राप्त होते हैं ईंधन का बढ़ता हुआ उपभोग पयार्वरण पर हानिकारक प्रभाव डालता है। 1.लकड़ी, कोयले और पेट्रोल जैसे काबर्न ईंधन, बिना जले काबर्न कण छोड़ते हैं। ये सूक्ष्म कण खतरनाक प्रदूषक होते हैं जो दमा जैसे श्वास रोग उत्पन्न करते हैं। सदियों से लकड़ी का उपयोग घरेलू तथा औद्योगिक ईंधन के रूप में हो रहा था। परंतु अब इसका स्थान कोयले और एलपीजी जैसे ईंधनों ने ले लिया है। अभी भी हमारे देश के बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग हो रहा है क्योंकि यह आसानी से उपलब्ध और सस्ती है। परंतु लकड़ी को जलाने से बड़ी मात्रा में धुआँ उत्पन्न होता है जो मनुष्यों के लिए हानिकारक है और श्वसन - कष्ट उत्पन्न करता है। साथ ही, वृक्ष हमें बहुत सी उपयोगी वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं जो ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग करने पर हमें प्राप्त नहीं हो पातीं। इसके अतिरिक्त, वृक्षों की कटाइर् वनोन्मूलन का कारण बनती है जो पयार्वरण के लिए हानिप्रद है, जैसा कि आपने कक्षा टप्प् में पढ़ा है। 2.इन ईंधनों का अपूणर् दहन, काबर्न मोनोक्साइड गैस देता है। यह अत्यंत विषैली गैस है। बंद कमरे में कोयला जलाना खतरनाक होता है। उत्पन्न काबर्न मोनोक्साइड गैस से कमरे में सो रहे व्यक्ितयों की मृत्यु भी हो सकती है। 3.अिाकांश ईंधनों के दहन से पयार्वरण में काबर्न डाइआॅक्साइउ गैस निकलती है। वायु में काबर्न डाइआॅक्साइड गैस की अिाक मात्रा सम्भवतः विश्व ऊष्णन ;ग्लोबल वामिर्ंगद्ध का कारण बनती है। पृथ्वी के वातावरण के तापमान में वृि विश्व ऊष्णन कहलाती है। अन्य बातों के साथ - साथ इससे हिमनद पिघलने लगते हैं, जिससे समुद्र में जल - स्तर बढ़ जाता है और तटीय क्षेत्रा बाढ़ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसा भी सम्भव है कि निचले स्तर वाले तटीय क्षेत्रा स्थायी रूप से जलमग्न हो जाएँ। 4.कोयले और डीजल के दहन से सल्पफर डाइआॅक्साइड गैस निकलती है। यह अत्यंत दमघोंटू और संक्षारक गैस है। इसके अतिरिक्त पेट्रोल इंजन नाइट्रोजन के गैसीय आॅक्साइड छोड़ते हैं। सल्पफर और नाइट्रोजन के आॅक्साइड वषार् जल में घुल जाते हैं तथा अम्ल बनाते हैं। ऐसी वषार् अम्ल वषार् कहलाती है जो पफसलों, भवनों और मृदा के लिए बहुत हानिकारक होती है। इसके विषय में आप कक्षा टप्प् में पहले ही पढ़ चुके हैं। मोटर वाहनों में ईंधन के रूप में डीजल और पेट्रोल का स्थान अब सीएनजी ;संपीडित प्रावृफतिक गैसद्ध ले रही है क्योंकि सीएनजी सल्पफर और नाइट्रोजन के आॅक्साइडों का उत्पादन अल्प मात्रा में करती है। सीएनजी एक अिाक स्वच्छ ईंधन है। आपने क्या सीखाऽ जो पदाथर् वायु में जलते हैं, दाह्य कहलाते हैं। ऽ दहन के लिए आॅक्सीजन ;वायु मेंद्ध आवश्यक है। ऽ दहन के प्रक्रम में उफष्मा और प्रकाश उत्पन्न होते हैं। ऽ ज्वलन - ताप वह निम्नतम ताप है जिस पर दाह्य पदाथर् आग पकड़ लेता है। ऽ ज्वलनशील पदाथो± का ज्वलन ताप बहुत कम होता है। ऽ आग उत्पन्न करने हेतु आवश्यकताओं में से एक या अिाक को हटा कर आग पर नियंत्राण पाया जा सकता है। ऽ आग पर नियंत्राण पाने हेतु सामान्यतः जल का प्रयोग किया जाता है। ऽ विद्युत उपकरणों और तेलों में लगी आग को नियंत्रिात करने के लिए जल का उपयोग नहीं किया जाता। ऽ दहन विभ्िान्न प्रकार के हैं, जैसे - तीव्र दहन, स्वतः दहन, विस्पफोट, आदि। ऽ ज्वाला के तीन भ्िान्न क्षेत्रा होते हैं - अदीप्त क्षेत्रा, दीप्त क्षेत्रा और ज्योतिहीन क्षेत्रा। ऽ आदशर् ईंधन सस्ता, आसानी से उपलब्ध, आसानी से जलने वाला और आसानी से वहन योग्य होता है। इसका उफष्मीय मान उच्च होता है। यह ऐसी गैसें या अवशेष नहीं छोड़ता जो पयार्वरण को प्रदूष्िात करते हों। ऽ ईंधनों की दक्षता और मूल्य परस्पर भ्िान्न हो सकते हैं। ऽ ईंधन दक्षता को उफष्मीय मान द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है जिसका मात्राक फ्किलोजूल प्रति किलोग्रामय् होता है। ऽ वायु में बिना जले काबर्न कण खतरनाक प्रदूषक होते हैं और श्सवन कष्टों को उत्पन्न करते हैं। ऽ ईंध्न के अपूणर् दहन से विषैली काबर्न मोनोक्साइड गैस बनती है। ऽ वायु में काबर्न डाइआॅक्साइड की बड़ी हुइर् मात्रा को विश्व ऊष्णन का कारण बताया जाता है। ऽ कोयले, डीजल और पेट्रोल के दहन से उत्पन्न सल्पफर और नाइट्रोजन के आॅक्साइड, अम्ल वषार् उत्पन्न करते हैं जो पफसलों, भवनों और मृदा के लिए हानिकारक होती है। अभ्यास 1.दहन की परिस्िथतियों की सूची बनाइए। 2.रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएμ ;कद्ध लकड़ी और कोयला जलने से वायु का होता है। ;खद्ध घरों में काम आने वाला एक द्रव ईंधन है। ;गद्ध जलना प्रारम्भ होने से पहले ईंधन को उसके तक गमर् करना आवश्यक है। ;घद्ध तेल द्वारा उत्पन्न आग को द्वारा नियंत्रिात नहीं किया जा सकता। 3.समझाइए कि मोटर वाहनों में सीएनजी के उपयोग से हमारे शहरों का प्रदूषण किस प्रकार कम हुआ है। 4.ईंधन के रूप से एलपीजी और लकड़ी की तुलना कीजिए। 5.कारण बताइएμ ;कद्ध विद्युत उपकरण से संब( आग पर नियंत्राण पाने हेतु जल का उपयोग नहीं किया जाता। ;खद्ध एलपीजी लकड़ी से अच्छा घरेलू ईंधन है। ;गद्ध कागश स्वयं सरलता से आग पकड़ लेता है जबकि ऐलुमिनियम पाइप के चारों ओर लपेटा गया कागश का टुकड़ा आग नहीं पकड़ता। 6.मोमबत्ती की ज्वाला का चिित चित्रा बनाइए। 7.ईंधन के उफष्मीय मान को किस मात्राक द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है? 8.समझाइए कि ब्व् किस प्रकार आग को नियंत्रिात करती है।29.हरी पिायों के ढेर को जलाना कठिन होता है परन्तु सूखी पिायों में आग आसानी से लग जाती है, समझाइए। 10.सोने और चाँदी को पिघलाने के लिए स्वणर्कार ज्वाला के किस क्षेत्रा का उपयोग करते हैं और क्यों? 11.एक प्रयोग में 4.5 ाह ईंधन का पूणर्तया दहन किया गया। उत्पन्न उफष्मा का माप 180,000 ाश्र था। ईंधन का उफष्मीय मान परिकलित कीजिए। 12.क्या जंग लगने के प्रक्रम को दहन कहा जा सकता है? विवेचना कीजिए। 13.आबिदा और रमेश ने एक प्रयोग किया जिसमें बीकर में रखे जल को गमर् किया गया। आबिदा ने बीकरको मोमबत्ती ज्वाला के पीले भाग के पास रखा। रमेश ने बीकर को ज्वाला के सबसे बाहरी भाग के पास रखा। किसका पानी कम समय में गमर् हो जाएगा?

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