आपने अपने आस - पास के स्थानों पर पौधों एवं जंतुओं सहित अनेक सजीव देखे हैं। परन्तु वुफछ जीव ऐसे भी हैं जिन्हें हम बिना यंत्रा की सहायता से केवल आँखों से नहीं देख सकते। इन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं। उदाहरण के लिए, आपने देखा होगा कि वषार् )तु में नम ब्रेड/रोटी सड़ने लगती है तथा इसकी सतह सपेफद - काले धब्बों से ढक जाती है। इन धब्बों को आवधर्क लेंस की सहायता से देख्िाए। आपको काले रंग की गोल सूक्ष्म संरचनाएँ दिखाइर् देंगी। क्या आप जानते हैं कि यह संरचनाएँ क्या हैं? यह कहाँ से आइर् हैं? 2.1 सूक्ष्मजीव ियाकलाप 2.1 बगीचे अथवा मैदान से एक बीकर में थोड़ी सी गीली मिटðी लीजिए तथा इसमें जल डालिए। मिटðी के कण बैठ जाने के पश्चात् जल की एक बूँद स्लाइड पर लेकर सूक्ष्मदशीर् की सहायता से इसका प्रेक्षण कीजिए। आप क्या देखते हैं? ियाकलाप 2.2 एक तालाब/पोखर से जल की वुफछ बूँदें लीजिए। काँच की स्लाइड पर पैफला कर सूक्ष्मदशीर् की सहायता से इनका प्रेक्षण कीजिए। क्या आपको सूक्ष्मजीव गति करते हुए दिखाइर् दे रहे हैं। इन प्रेक्षणों से पता चलता है कि मिटðी एवं पानी में अनेक छोटे - छोटे ;सूक्ष्मद्ध जीव उपस्िथत रहते हैं। सूक्ष्मजीव इतने छोटे होते हैं कि उन्हें बिना यंत्रा की सहायता से नहीं देखा जा सकता। इनमें से वुफछ, जैसे कि ब्रेड पर उगने वाले कवक, को आवधर्क लेंस की सहायता से देखा जा सकता है जबकि अन्य बिना सूक्ष्मदशीर् की सहायता से दिखाइर् नहीं देते। यही कारण है कि इन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं। सूक्ष्मजीवों को चार मुख्य वगो± में बाँटा गया है। यह वगर् हैं, जीवाणु, कवक, प्रोटोशोआ एवं वुफछ शैवाल। जीवाणु, शैवाल, प्रोटोशोआ एवं कवक के वुफछ सामान्य सूक्ष्मजीव चित्रा 2.1 से 2.4 में दशार्ए गए हैं। विषाणु ;वायरसद्ध भी सूक्ष्म होते हैं परन्तु वे अन्य सूक्ष्मजीवों से भ्िान्न हैं। वे केवल परपोषी में ही गुणन करते हैं अथार्त् जीवाणु, पौधे अथवा जंतु कोश्िाका में गुणन करते हैं। विषाणु चित्रा 2.5 में दशार्ए गए हैं। वुफछ सामान्य रोग जैसे कि जुकाम, इन्फ्रलुएंजा ;फ्रलूद्ध एवं अिाकतर खाँसी विषाणु द्वारा होते हैं। वुफछ विशेष रोग जैसे कि पोलियो एवं खसरा भी विषाणु ;वाइरसद्ध द्वारा होते हैं। अतिसार एवं मलेरिया प्रोटोशोआ द्वारा होते हैं। टायपफाइड एवं क्षयरोग ;ज्ठद्ध जीवाणु द्वारा होने वाले रोग हैं। इनमें से वुफछ सूक्ष्मजीवों के विषय में आप कक्षा टप् एवं टप्प् में पढ़ चुके हैं। स्पाइरल जीवाणु छड़नुमा जीवाणु चित्रा 2.1: जीवाणु। अमीबा क्लेमाइडोमोनास स्पाइरोगाइरा पैरामीश्िायम चित्रा 2.2: शैवाल। चित्रा 2.3: प्रोटोशोआ। राइजोपस ;ब्रेड मोल्डद्ध पेनिसीलिएम एसपरजिलस चित्रा 2.4: कवक। 18 विज्ञान 2.2 सूक्ष्मजीव कहाँ रहते हैं? सूक्ष्मजीव एककोश्िाक हो सकते हैं जैसे कि जीवाणु, वुफछ शैवाल एवं प्रोटोशोआ, अथवा बहुकोश्िाक जैसे किशैवाल एवं कवक। यह बपफीर्ली शीत से ऊष्ण ;गमर्द्ध स्रोतों तक हर प्रकार की परिस्िथति में जीवित रह सकते हैं। यह मरुस्थल एवं दलदल में भी पाए जाते हैं। यह मनुष्य सहित सभी जंतुओं के शरीर के अंदर भी पाए जाते हैं। वुफछ सूक्ष्मजीव दूसरे सजीवों पर आश्रित होते हैं जबकि वुफछ अन्य स्वतंत्रा रूप से पाए जाते हैं। अमीबा जैसा सूक्ष्मजीव अकेले रह सकता है, जबकि कवक एवं जीवाणु समूह में रहते हैं। 2.3 सूक्ष्मजीव और हम सूक्ष्मजीवों की हमारे जीवन में महत्त्वपूणर् भूमिका है। इनमें से वुफछ हमारे लिए लाभदायक हैं तथा वुफछ अन्य हानिकारक तथा जीवों में रोग के कारक हैं। आइए हम विस्तार से इसका अध्ययन करें। मित्रावत सूक्ष्मजीव सूक्ष्मजीव विभ्िान्न कायो± में उपयोग किए जाते हैं। इनका उपयोग दही, ब्रेड एवं केक बनाने में किया जाता है। प्राचीन काल से ही सूक्ष्मजीवों का उपयोग एल्कोहल बनाने में किया जाता रहा है। पयार्वरण को स्वच्छ रखने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, काबर्निक अवश्िाष्ट ;सब्िशयों के छिलके, जंतु अवशेष, विष्ठा इत्यादिद्ध का अपघटन जीवाणुओं द्वारा किया जाता है तथा हानिरहित पदाथर् बनते हैं। स्मरण कीजिए, जीवाणुओं काउपयोग औषिा उत्पादन एवं कृष्िा में मृदा की उवर्रता में वृि करने में किया जाता है जिससे नाइट्रोजन स्िथरीकरण होता है। दही एवं ब्रेड का बनाना आप कक्षा टप्प् में पढ़ चुके हैं कि जीवाणु दूध को दही में परिवतिर्त कर देते हैं। हमने अपनी माँ को गमर् ;गुनगुनेद्ध दूध में थोड़ा सा दही मिलाते हुए देखा है जिससे दही जम जाता है। हमें आश्चयर् हुआ ऐसा क्यों? दही में अनेक सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं जिनमें लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु प्रमुख है जो दूध को दही में परिवतिर्त कर देता है। वह दूध में जनन कर उसे दही में परिवतिर्त कर देते हैं। जीवाणु पनीर ;चीशद्ध, अचार एवं अनेक खाद्य पदाथो± के उत्पादन में सहायक हैं। रवा ;सूजीद्ध, इडली एवंभटूरे का एक महत्त्वपूणर् संघटक दही है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि ऐसा क्यों है? ियाकलाप 2.3 एक बतर्न में ) कि.ग्रा. आटा अथवा मैदा लेकर उसमें थोड़ी सी चीनी डालकर गमर् जल से मिलाइए। इसमें थोड़ी मात्रा ;एक चुटकीद्ध यीस्ट पाउडर मिलाकर गूँथ लीजिए। आप दो घंटे बाद क्या देखते हैं? क्या आपने गुँथे हुए मैदे को उठा हुआ ;पुफला हुआद्ध पाया? यीस्ट पाउडर के साथ मैदा खमीर द्वारा उठी हुइर् मैदा चित्रा 2.6 यीस्ट तीव्रता से जनन करके श्वसन के दौरान काबर्न डाइआॅक्साइड उत्पादित करते हैं। गैस के बुलबुले खमीर वाले मैदे का आयतन बढ़ा देते हैं ;चित्रा 2.6द्ध। यह बेकिंग उद्योग में यीस्ट के उपयोग का आधार है जिसमें ब्रेड, पेस्ट्री एवं केक बनाए जाते हैं। सूक्ष्मजीवों का वाण्िाज्ियक उपयोग बड़े स्तर पर एल्कोहल, शराब एवं एसिटिक एसिड के उत्पादन में सूक्ष्मजीवों का उपयोग किया जाता है। जौ,गेहूँ, चावल एवं पफलों के रस में उपस्िथत प्राकृतिक शवर्फरा में यीस्ट द्वारा एल्कोहल एवं शराब का उत्पादन किया जाता है। ियाकलाप 2.4 500 उस् का बीकर लेकर इसमें 3/4 भाग तक जल भरिए। इसमें 2 - 3 चम्मच चीनी घोलिए। इसमें ) चम्मच यीस्ट पाउडर डालिए। इसे 4 - 5घंटों के लिए ऊष्ण स्थान पर ढक कर रख्िाए। अब विलयन को सूँघ कर देख्िाए। यह गंध एल्कोहल की है जो चीनी के एल्कोहल में परिवतिर्त होने के कारण बना है। चीनी के एल्कोहल में परिवतर्न की यह प्रिया किण्वन अथवा पफमे±टेशन कहलाता है। लुइ पाश्चर ने किण्वन की खोज 1857 में की। सूक्ष्मजीवों के औषधीय उपयोग जब कभी आप बीमार पड़ते हैं तो डाॅक्टर आपको पेनिसिलिन का इंजेक्शन देते हैं अथवा कोइर् अन्य प्रतिजैविक की गोली अथवा वैफप्सूल देते हैं। इन औषिायों का स्रोत सूक्ष्मजीव हैं। ये बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती हैं अथवा उनकी वृि को रोक देती हैं। इस प्रकार की औषिा को प्रतिजैविक अथवा एंटीबायोटिक कहते हैं। आजकल जीवाणु और कवक से अनेक प्रतिजैविक औषिायों का उत्पादन हो रहा है। स्ट्रेप्टोमाइसिन, टेट्रासाइक्िलन और एरिथ्रोमाइसिन सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली प्रतिजैविक हैं जिन्हें कवक एवं जीवाणु से उत्पादित किया जाता है। किसी विश्िाष्ट प्रकार के सूक्ष्मजीव का संवधर्न करके प्रतिजैविक का उत्पादन किया जाता है जिन्हें अनेक रोगों की चिकित्सा में उपयोग में लाते हैं। सन् 1929 में अलेक्जेंडरफ्रलैमिंग जीवाणु रोगों से बचाव हेतु एक संवध्र्न पर प्रयोग कर रहे थे। अचानक उन्होंने संवध्र्न तश्तरी पर हरे रंग की पफपूँफद के छोटे बीजाणु देखे। उन्होंने पाया कि यह पफपूँफद जीवाणु की वृि को रोकते हैं। यह तथ्य पाया कि बहुत सारे जीवाणु पफपूँफद द्वारा मारे गए। इस प्रकार पफपूँफद से ‘पेनिसिलिन’ बनाइर् गइर्। पशु आहार एवं वुफक्वुफट आहार में भी प्रतिजैविक मिलाए जाते हैं जिसका उपयोग पशुओं में सूक्ष्मजीवों का संचरण रोकना है। प्रतिजैविक का उपयोग वुफछ पौधों के रोग नियंत्राण के लिए भी किया जाता है। ध्यान रखना चाहिए कि डाॅक्टर की सलाह पर ही प्रतिजैविक की दवाएँ लेनी चाहिए तथा उस दवा का कोसर् भी पूरा करना चाहिए। यदि आप प्रतिजैविक उस समय लेंगे जब उसकी आवश्यकता नहीं है तो अगली बार जब आप बीमार होंगे और आपको प्रतिजैविक की आवश्यकता होगी तो वह उतनी प्रभावी नहीं होगी। इसके अतिरिक्त अनावश्यक रूप से ली गइर् प्रतिजैविक शरीर में उपस्िथत उपयोगी जीवाणु भीनष्ट कर देती है। सदीर् - जुकाम एवं फ्रलू में प्रतिजैविक प्रभावशाली नहीं हैं क्योंकि यह रोग विषाणु द्वारा होते हैं। वैक्सीन ;टीकाद्ध श्िाशु एवं बच्चों को टीका क्यों लगाया जाता है? जब रोगकारक सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं तो उनसे लड़ने के लिए हमारा शरीर प्रतिरक्षी उत्पन्न करता है। शरीर को यह भी स्मरण रहता है कि वही सूक्ष्मजीव अगर हमारे शरीर में पुनः प्रवेश करता है तो उससे किस प्रकार लड़ा जाए। अतः यदि मृत अथवा निष्िक्रय सूक्ष्मजीवों को स्वस्थ व्यक्ित के शरीर में प्रविष्ट कराया जाए तो शरीर की कोश्िाकाएँ उसी के अनुसार लड़ने के प्रतिरक्षी उत्पन्न करके रोगकारक को नष्ट कर देती हैं। यह प्रतिरक्षी हमारे शरीर में सदा के लिए बनी रहती हैं तथा रोगकारक सूक्ष्मजीव से हमारी सुरक्षा होती है। इस प्रकार टीका ;वैक्सीनद्ध कायर् करता है। हैजा, क्षय, चेचक तथा हैपेटाइटिस जैसी अनेक बीमारियों को वैक्सीन ;टीकेद्ध द्वारा रोका जा सकता है। एडवडर् जेनर ने चेचक के लिए 1798 में चेचक के टीके की खोज की थी। आपके बचपन में आपको भी अनेक रोगों से रक्षा करने के लिए टीके ;वैक्सीनद्ध दिए गए होंगे। क्या आप इन रोगों की सूची तैयार कर सकते हैं? इसके लिए आप अपने माता - पिता की मदद ले सकते हैं। सभी बच्चों को इन रोगों से सुरक्षा की आवश्यकता है। आवश्यक टीके निकट के अस्पताल में उपलब्ध होते हैं। बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए आपने टेलिविशन एवं समाचार - पत्रों में पोलियो के टीकाकरण के विज्ञापन ;पल्स पोलियोद्ध देखे होंगे। पोलियो - ड्राॅप बच्चों को दिया जाने वाला वास्तव में एक टीका ;वैक्सीनद्ध है। चेचक के विरु( विश्वव्यापी अभ्िायान चलाया गया जिसके परिणामस्वरूप विश्व के अिाकांश भागों से चेचक का उन्मूलन हो गया। आजकल सूक्ष्मजीवों से टीके का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जाता है जिसमें मनुष्य एवं अनेक जंतुओं को अनेक रोगों से बचाया जाता है। मिटðी की उवर्रता में वृि वुफछ जीवाणु एवं नीले - हरे शैवाल ;चित्रा 2.7द्ध वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्िथरीकरण कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन का संवधर्न होता है तथा उसकी उवर्रता में वृृि होती है। इन्हें सामान्यतः जैविक नाइट्रोजन स्िथरीकारक कहते हैं। चित्रा 2.7: नाइट्रोजन स्िथरीकारक नीले - हरे शैवाल। पयार्वरण का शुिकरण अपने विद्यालय के माली को देखने के पश्चात् पहेली,बूझो और दूसरे विद्याथ्िार्यों ने घरों व बगीचों से पिायाँ एवं पफल - सब्िजयों का कचरा एकत्रा करके उसके निपटान के लिए बनाए गए गढ्ढे में डाला। वुफछ समय बाद इसका विघटन होने से यह खाद में परिवतिर्त हो गया। पहेली और बूझो जानना चाहते हैं कि यह किस प्रकार हो सकता है? ियाकलाप 2.5 दो गमले लेकर प्रत्येक को मिटðी से आधा भर दीजिए। इन्हें श्।श् एवं श्ठश् चिित कीजिए। श्। - गमले’ में पौधों का कचरा भर दीजिए तथा दूसरे गमले श्ठश् में पाॅलिथीन की थैली, काँच की खाली बोतलें तथा प्लास्िटक के टूटे ख्िालौने इत्यादि भर दीजिए। उन्हें एक ओर रख दीजिए। 3 - 4 सप्ताह बाद उनका प्रेक्षण कीजिए। क्या आपको दोनों गमलों की वस्तुओं में कोइर् अंतर दिखाइर् देता है? यदि हाँ, तो क्या अंतर परिलक्ष्िात होता है? आप देखेंगे कि ‘गमला - ।’ के पादप अवश्िाष्ट का अपघटन हो गया है? यह वैफसे हुआ? सूक्ष्मजीवों द्वारा पादप अपश्िाष्ट का अपघटन कर उसे खाद में बदल दिया गया। इस प्रिया में बने पोषक, पौधों द्वारा पुनः उपयोग किए जाते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि ‘गमला - ठ’ के पाॅलिथीन की थैली, काँच की खाली बोतलों एवं ख्िालौनों के टूटे हुए टुकड़ों में इस प्रकार का परिवतर्न नहीं हुआ। सूक्ष्मजीव उन पर िया करके खाद में परिवतिर्त नहीं कर सकते। आप अक्सर बड़ी मात्रा में मृत जीवों को, सड़ते हुए पादप व कभी - कभी सड़ते हुए जन्तुओं के रूप में देखते हैं। आप देखते हैं कि वुफछ समय बाद वह विलुप्त हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि सूक्ष्मजीव, मृत जैविक अवश्िाष्ट का अपघटन करके उन्हें सरल पदाथो± में परिवतिर्त कर देते हैं। यह पदाथर् अन्य पौधों एवं जंतुओं द्वारा पुनः उपयोग कर लिए जाते हैं। इस प्रकार हानिकारक एवं दुग±ध्युक्त पदाथो± का निम्नीकरण करने के लिए हम सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके पयार्वरण का शुिकरण कर सकते हैं। 2.4 हानिकारक सूक्ष्मजीव सूक्ष्मजीव अनेक प्रकार से हानिकारक हैं। वुफछ सूक्ष्मजीव मनुष्य, जंतुओं एवं पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले ऐसे सूक्ष्मजीवों को रोगाणु अथवा रोगजनक कहते हैं। वुफछ सूक्ष्मजीव भोजन, कपड़े एवं चमड़े की वस्तुओं को संदूष्िात कर देते हैं। आइए उनकी हानिकारक गतिवििायों के विषय में और अिाक जानकारी प्राप्त करें। मनुष्य में रोगकारक सूक्ष्मजीव मनुष्य में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव श्वास द्वारा, पेय जल एवं भोजन द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। संक्रमित व्यक्ित अथवा जंतु के सीधे संपवर्फ में आने पर भी रोग का संचरण हो सकता है। सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले ऐसे रोग जो एक संक्रमित व्यक्ित से स्वस्थ व्यक्ित में वायु, जल, भोजन अथवा कायिक संपवर्फ द्वारा पैफलते हैं, संचरणीय रोग कहलाते हैं। इस प्रकार के रोगों के वुफछ उदाहरण हैं μ हैजा, सामान्य सदीर् - जुकाम, चिकनपाॅक्स एवं क्षय रोग। जब जुकाम से पीडि़त कोइर् व्यक्ित छींकता है तो सूक्ष्म बूँदों के साथ हशारों रोगकारक वायरस ;विषाणुद्ध भी वायु में आ जाते हैं। यह वायरस श्वास के साथ ली जाने वाली वायु के साथ शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। वुफछ कीट एवं जंतु ऐसे भी हैं जो रोगकारक सूक्ष्मजीवों के रोग - वाहक का कायर् करते हैं। घरेलू मक्खी इसका एक उदाहरण है। मक्खी वूफड़े एवं जंतु अपश्िाष्ट पर बैठती है। रोगाणु उसके शरीर से चिपक जाते हैं। जब मक्खी बिना ढके भोजन पर बैठती है तो रोगाणु का स्थानान्तरण संभव है। जो भी व्यक्ित ऐसा संदूष्िात भोजन करेगा उसके बीमार पड़ने की संभावना है। अतः यह सलाह दी जाती है कि भोजन को सदा ही ढककर रखा जाए। बिना ढके भोजन कोखाने से बचना चाहिए। मादा एनाॅफ्रलीश ;चित्रा 2.8द्ध मच्छर इसका अन्य उदाहरण है। मच्छर प्लैज्मोडियम ;मलेरिया परजीवीद्ध का वाहक है। मादा एडीस मच्छर डेंगू के वायरस का वाहक है। हम मलेरिया अथवा डेंगू का नियंत्राण किस प्रकार कर सकते हैं। चित्रा 2.8: मादा एनाॅफ्रलीश मच्छर। अध्यापक हमसे ऐसा क्यों कहते हैं कि अपने आस - पास पानी एकत्रिात न होने दें। सभी मच्छर जल में उत्पन्न होते हैं। हमें पानी को कहीं भी रुका नहीं रहने देना चाहिए। वूफलर, टायरों एवं पूफलदानों इत्यादि में कहीं भी जल को एकत्रा न होने दें। अतः अपने आस - पास के स्थानों को स्वच्छ एवं शुष्क रखकर हम मच्छरों को पैदा होने से रोक सकते हैं। ऐसे उपायों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए जिसे अपनाकर मलेरिया को पैफलने से रोका जा सके। सारणी 2.1: मनुष्य में सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले सामान्य रोग मानव रोग रोगकारक सूक्ष्मजीव संचरण का तरीका बचाव के उपाय ;सामान्यद्ध क्षयरोग खसरा ;डमंेसमेद्ध चिकनपाॅक्स पोलियो जीवाणु वायरस वायरस वायरस वायु वायु वायु/सीधे संपवर्फ वायु/जल रोगी व्यक्ित को पूरी तरह से अन्य व्यक्ितयों से अलग रखना। रोगी की व्यक्ितगत वस्तुओं को अलग रखना। उचित समय पर टीकाकरण। हैजा टाइपफायड जीवाणु जीवाणु जल/भोजन जल व्यक्ितगत स्वच्छता एवं अच्छी आदतों को अपनाना। भलीभांति पके भोजन, उबला पेयजल एवं टीकारण। हैपेटाइटिस - ए वायरस जल उबले हुए पेय जल का प्रयोग, टीकाकरण। मलेरिया प्रोटोशोआ मच्छर मच्छरदानियों का प्रयोग, मच्छर भगाने वाले रसायन का प्रयोग, कीटनाशक का छिड़काव एवं मच्छर के प्रजनन रोकने के लिए जल को किसी भी स्थान पर एकत्रा न रहने देना। मनुष्य में होने वाले वुफछ सामान्य रोग, उनके पैफलने तथा रोकने के वुफछ उपाय तालिका 2.1 में दशार्ए गए हैं। जंतुओं में रोगकारक जीवाणु अनेक सूक्ष्मजीव केवल मनुष्य एवं पौधों में ही रोग के कारक नहीं हैं वरन् वे दूसरे जंतुओं में भी रोग राबटर् कोच ने सन् 1876 में बेसीलस एन्थे्रस्िास नामक जीवाणु की खोज की जो एन्थ्रेक्स रोग का कारक है। उत्पन्न करते हैं। उदाहरण के लिए, एंथ्रेक्स, मनुष्य एवं मवेश्िायों में होने वाला भयानक रोग है जो जीवाणु द्वारा होता है। गाय में खुर एवं मुँह का रोग वायरस द्वारा होता है। पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव अनेक सूक्ष्मजीव गेहूँ, चावल, आलू, गन्ना, संतरा, सेब इत्यादि पौधों में रोग के कारक हैं। रोग के कारण पफसल की उपज में कमी आ जाती है। तालिका 2.2 में वुफछ पादप रोग दशार्ए गए हैं। वुफछ रसायनों का प्रयोग करके इन सूक्ष्मजीवों पर नियंत्राण पाया जा सकता है। सारणी 2.2: सूक्ष्मजीवों द्वारा पौधों में होने वाले वुफछ सामान्य रोग पादप रोग सूक्ष्मजीव संचरण का तरीका चित्रा नींबू वैंफकर जीवाणु वायु गेहूँ की रस्ट कवक वायु एवं बीज भ्िांडी की पीत वायरस कीट खाद्य विषाक्तन ;थ्ववक च्वपेवदपदहद्ध बूझो के एक मित्रा ने उसे एक पाटीर् में आमंत्रिात किया। वहाँ उसने अनेक प्रकार के व्यंजन खाए। घर आने पर उसे वमन ;उल्टीद्ध होने लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया। डाॅक्टर ने बताया कि यह खाद्य विषाक्तन के कारण होने वाली स्िथति है। सूक्ष्मजीवों द्वारा संदूष्िात भोजन करने से खाद्य विषाक्तन हो सकता है। हमारे भोजन में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्मजीव कभी - कभी विषैले पदाथर् उत्पन्न करते हैं। यह भोजन को विषाक्त बना देते हैं जिसके सेवन से व्यक्ित भयंकर रूप से रोगी हो सकता है अथवा कभी - कभी उसकी मृत्यु भी हो सकती है। अतः यह आवश्यक है कि हम भोजन को संदूष्िात होने से बचाएँ। 2.5 खाद्य परिरक्षण अध्याय एक में हमने खाद्य बीजों के परिरक्षण एवं भण्डारण के उपायों के विषय में पढ़ा था। हम पके हुए भोजन का घर पर परिरक्षण किस प्रकार कर सकते हैं? आप जानते हैं कि खुले एवं नम स्थान पर रखी ब्रेड पर कवक आक्रमण कर देते हैं। सूक्ष्मजीव हमारे भोजन को संदूष्िात कर देते हैं। संदूष्िात भोजन से दुग±ध आने लगती है, इसका स्वाद भी खराब हो जाता है तथा रंग - रूप में भी परिवतर्न आ सकता है। क्या भोजन का संदूषण एक रासायनिक अभ्िािया है? पहेली ने वुफछ आम खरीदे, परन्तु कइर् दिनों तक वह उन्हें नहीं खा पाइर्। बाद में उसने देखा कि वे सड़ गए हैं। परन्तु वह जानती है कि उसकी दादी द्वारा बनाया गया आम का अचार कापफी समय तक संदूष्िात नहीं होता। वह भ्रमित है। आइए हम खाद्य परिरक्षण के वुफछ सामान्य तरीकों का अध्ययन करें जिनका उपयोग हम अपने घरों में करते हैं। हमें इन्हें सूक्ष्मजीवों से बचाव के उपाय करना चाहिए। रासायनिक उपाय नमक एवं खाद्य तेल का उपयोग सूक्ष्मजीवों की वृि रोकने के लिए सामान्य रूप से किया जाता है। अतः इन्हें परिरक्षक कहते हैं। हम नमक अथवा खाद्य अम्ल का प्रयोग अचार बनाने में करते हैं जिससे सूक्ष्मजीवों की वृि नहीं होती। सोडियम बेंजोएट तथा सोडियम मेटाबाइसल्पफाइट सामान्य परिरक्षक हैं। जैम एवं स्क्वैश बनाने में इन रसायनों का उपयोग उन्हें संदूष्िात होने से बचाता है। नमक द्वारा परिरक्षण सामान्य नमक का उपयोग मांस एवं मछली के परिरक्षण के लिए कापफी लम्बे अरसे से किया जा रहा है। जीवाणु की वृि रोकने के लिए मांस तथा मछली को सूखे नमक से ढक देते हैं। नमक का उपयोग आम, आँवला एवं इमली के परिरक्षण में भी किया जाता है। चीनी द्वारा परिरक्षण जैम, जेली एवं स्क्वैश का परिरक्षण चीनी द्वारा किया जाता है। चीनी के प्रयोग से खाद्य पदाथर् की नमी में कमी आती है जो संदूषण करने वाले जीवाणुओं की वृि को नियंत्रिात करता है। तेल एवं सिरके द्वारा परिरक्षण तेल एवं सिरके का उपयोग अचार को संदूषण से बचाने में किया जाता है क्योंकि इसमें जीवाणु जीवित नहीं रह सकते। सब्िजयाँ, पफल, मछली तथा मांस का परिरक्षण इस वििा द्वारा करते हैं। गमर् एवं ठंडा करना आपने अपनी माँ को दूध उबाल कर रखते हुए देखा होगा। उबालने से अनेक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार हम अपना भोजन रेप्रफीजरेटर में रखते हैं क्योंकि कम ताप सूक्ष्मजीवों की वृि को रोकता है। थैलियों में आने वाला दूध संदूष्िात क्यों नहीं होता? मेरी माँ ने बताया कि यह दूध‘पाॅश्चरीकृत’ है। पाॅश्चरीकरण क्या है? पाॅश्चरीकृत दूध को बिना उबाले इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि यह सूक्ष्मजीवों से मुक्त होता है। इसके लिए दूध को 70ह्ब् पर 15 - 30 सेवंफड के लिए गमर् करते हैं पिफर एकाएक ठंडा कर उसका भण्डारण कर लेते हैं। ऐसा करने से सूक्ष्मजीवों की वृि रुक जाती है। इस प्रिया की खोज लुइर् पाॅश्चर नामक वैज्ञानिक ने की थी, इसीलिए इसे पाॅश्चरीकरण कहते हैं। भण्डारण एवं पैकिंग आजकल मेवे तथा सब्िजयाँ भी वायुरोधी सील किए गए पैकेटों में बेचे जाते हैं। जिससे सूक्ष्मजीवों से सुरक्षा होती है। 2.6 नाइट्रोजन स्िथरीकरण आपने कक्षा टप् और टप्प् में राइजोबियम जीवाणु के बारे में पढ़ा है जो लैग्यूम पौधें ;दलहनद्ध में नाइट्रोजन स्िथरीकरण में सहायक होते हैं। स्मरण कीजिए, राइजोबियम लैग्यूम पौधों की ग्रंथ्िाकाओं में रहते हैं जैसे सेम और मटर जो एक सहजीवता है। कभी - कभी तडि़त विद्युत द्वारा भी नाइट्रोजन का स्िथरीकरण होता है। परन्तु आप जानते हैं कि नाइट्रोजन की मात्रा वायुमण्डल में स्िथर रहती है। आपको आश्चयर् होगा कि यह वैफसे संभव है? आइए, इसके विषय में अगले भाग में समझते हैं। चित्रा 2.9: लैग्यूम पौध्े की जड़ ग्रंथ्िाकाएँ। 2.7 नाइट्रोजन चक्र हमारे वायुमण्डल में 78ः नाइट्रोजन गैस है। नाइट्रोजन सभी सजीवों का आवश्यक संघटक है जो प्रोटीन, पणर्हरित ;क्लोरोपिफलद्ध न्युक्िलक एसिड एवं विटामिन में उपस्िथत होता है। पौधे एवं जंतु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का उपयोग सीधे नहीं कर सकते। मिट्टðी में उपस्िथत जीवाणु व नीले - हरे शैवाल वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्िथरीकरण करके नाइट्रोजन यौगिकों में परिवतिर्त कर देते हैं। जब नाइट्रोजन इस प्रकार उपयोगी यौगिकों में परिवतिर्त हो जाती है, पौधे इसका उपयोग मिट्टðी में से जड़ तंत्रा द्वारा करते हैं। इसके पश्चात् अवशोष्िात नाइट्रोजन का उपयोग प्रोटीन एवं अन्य यौगिकों के संश्लेषण में करते हैं। पौधों पर निभर्र करने वाले जंतु उनसे प्रोटीन एवं अन्य नाइट्रोजनी यौगिक प्राप्त करते हैं ;चित्रा 2.10द्ध। पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु के बाद, मिट्टðी में उपस्िथत जीवाणु एवं कवक नाइट्रोजनी अपश्िाष्ट को नाइट्रोजनी यौगिकों में परिवतिर्त कर देते हैं जो पौधों द्वारा पुनः उपयोग होता है। वुफछ विश्िाष्ट जीवाणु नाइट्रोजनी यौगिकों को नाइट्रोजन गैस में परिवतिर्त कर देते हैं जो वायुमण्डल में चली जाती है। परिणामतः वायुमण्डल में नाइट्रोजन की मात्रा लगभग स्िथर रहती है। चित्रा 2.10: नाइट्रोजन चक्र। आपने क्या सीखाऽ सूक्ष्मजीव अत्यंत छोटे होते हैं तथा बिना यंत्रा की सहायता से अकेली आँखों से दिखाइर् नहीं देते। ऽ यह बपफीर्ले शीत मौसम से ऊष्ण झरनों तथा मरुस्थल से दलदल तक हर प्रकार के पयार्वरण में जीवित रह सकते हैं। ऽ सूक्ष्मजीव वायु, जल, मिटी, पौधों एवं जंतुओं के शरीर में पाएðजाते हैं। ऽ ये एककोश्िाक एवं बहुकोश्िाक होते हैं। ऽ जीवाणु, कवक, प्रोटोशोआ एवं वुफछ शैवाल सूक्ष्मजीवों के अंतगर्त आते हैं। विषाणु इनसे अलग हैं लेकिन पिफर भी इसी वगर् में सम्िमलित किए जाते हैं। ऽ विषाणु केवल परपोषी जैसे जीवाणु, पादप या जन्तु में गुणन करते हैं। ऽ वुफछ सूक्ष्मजीव औषिा एवं एल्कोहल के वाण्िाज्ियक उत्पादन में उपयोगी हैं। ऽ वुफछ सूक्ष्मजीव जैविक कचरे जैसे कि मृत पौधे एवं जंतु अपश्िाष्ट को अपघटित कर सरल पदाथो± में परिवतिर्त कर देते हैं तथा वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं। ऽ प्रोटोशोआ अतिसार तथा मलेरिया जैसे रोग उत्पन्न करते हैं। ऽ वुफछ सूक्ष्मजीव हमारे भोजन को विषाक्त कर देते हैं। ऽ वुफछ सूक्ष्मजीव लैग्यूम पौधें की जड़ों तथा ग्रंथ्िाकाओं में पाए जाते हैं। ये वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को मिटðी में स्िथरीकृत कर देते हैं जिससे मिटðी की उवर्रता में वृि होती है। ऽ मिटी में उपस्िथत वुफछ जीवाणु और नीले - हरे शैवाल, वायुमंडलीयðनाइट्रोजन को स्िथरीकृत कर, नाइट्रोजनी यौगिकों में परिवतिर्त कर देते हैं। ऽ विशेष जीवाणु, मिटी में उपस्िथत नाइट्रोजनी यौगिकों को नाइट्रोजन गैस ðमें परिवतिर्त कर देते हैं जिसका निमोर्चन वायुमण्डल में होता है। अभ्यास 1. रिक्त स्थानों की पूतिर् कीजिएμ ;कद्ध सूक्ष्मजीवों को की सहायता से देखा जा सकता है। ;खद्ध नीले - हरे शैवाल वायु से का स्िथरीकरण करते हैं जिससे मिटी की उवर्रता में वृिðहोती है। ;गद्ध एल्कोहल का उत्पादन नामक सूक्ष्मजीव की सहायता से किया जाता है। ;घद्ध हैजा के द्वारा होता है। 2.सही शब्द के आगे ;9द्ध का निशान लगाइएμ ;कद्ध यीस्ट का उपयोग निम्न के उत्पादन में होता है: ;पद्धचीनी ;पपद्ध एल्कोहल ;पपपद्ध हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ;पअद्ध आॅक्सीजन ;खद्ध निम्न में से कौन सा प्रतिजैविक है? ;पद्ध सोडियम बाइकाबोर्नेट ;पपद्ध स्ट्रेप्टोमाइसिन ;पपपद्ध एल्कोहल ;पअद्ध यीस्ट ;गद्ध मलेरिया परजीवी का वाहक हैः ;पद्धमादा एनाॅफ्रलीश मच्छर ;पपद्ध काॅकरोच ;पपपद्ध घरेलू मक्खी ;पअद्ध तितली ;घद्ध संचरणीय रोगों का सबसे मुख्य कारक है: ;पद्धचींटी ;पपद्ध घरेलू मक्खी ;पपपद्ध ड्रेगन मक्खी ;पअद्ध मकड़ी ;घद्ध ब्रेड अथवा इडली पूफल जाती है इसका कारण है: ;पद्ध ऊष्णता ;पपद्ध पीसना ;पपपद्ध यीस्ट कोश्िाकाओं की वृि ;पअद्ध माढ़ने के कारण ;चद्ध चीनी को एल्कोहल में परिवतिर्त करने के प्रक्रम का नाम है: ;पद्ध नाइट्रोजन स्िथरीकरण ;पपद्ध मोल्िडंग ;पपपद्ध किण्वन ;पअद्ध संक्रमण 3. काॅलम.प् के जीवों का मिलान काॅलम.प्प् में दिए गए उनके कायर् से कीजिएμ काॅलम.प् काॅलम.प्प् ;कद्धजीवाणु ;पद्ध नाइट्रोजन स्िथरीकरण ;खद्ध राइशोबियम ;पपद्ध दही का जमना ;गद्धलैक्टोबेसिलस ;पपपद्ध ब्रेड की बेकिंग ;घद्ध यीस्ट ;पअद्ध मलेरिया का कारक ;घद्ध एक प्रोटोशोआ ;अद्ध हैजा का कारक ;चद्धएक विषाणु ;अपद्ध ।प्क्ै का कारक ;अपपद्ध प्रतिजैविक उत्पादित करना 4. क्या सूक्ष्मजीव बिना यंत्रा की सहायता से देखे जा सकते हैं। यदि नहीं, तो वे वैफसे देखे जा सकते हैं? 5.सूक्ष्मजीवों के मुख्य वगर् कौन - कौन से हैं? 6.वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का मिटी में स्िथरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीवों के नाम लिख्िाए।ð7.हमारे जीवन में उपयोगी सूक्ष्मजीवों के बारे में 10 पंक्ितयाँ लिख्िाए। 8.सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाली हानियों का विवरण कीजिए। 9.प्रतिजैविक क्या हैं? प्रतिजैविक लेते समय कौन - सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?

>Chapter-2>

अध्याय 2         सूक्ष्मजीव: मित्र एवं शत्रु




आपने अपने आस-पास के स्थानों पर पौधों एवं जंतुओं सहित अनेक सजीव देखे हैं। परन्तु कुछ जीव एेसे भी हैं जिन्हें हम बिना यंत्र की सहायता से केवल आँखों से नहीं देख सकते। इन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं। उदाहरण के लिए, आपने देखा होगा कि वर्षा ऋतु में नम ब्रेड/रोटी सड़ने लगती है तथा इसकी सतह सफेद-काले धब्बों से ढक जाती है। इन धब्बों को आवर्धक लेंस की सहायता से देखिए। आपको काले रंग की गोल सूक्ष्म संरचनाएँ दिखाई देंगी। क्या आप जानते हैं कि यह संरचनाएँ क्या हैं? यह कहाँ से आई हैं?

2.1 सूक्ष्मजीव

क्रियाकलाप  2.1

बगीचे अथवा मैदान से एक बीकर में थोड़ी सी गीली मिट्टी लीजिए तथा इसमें जल डालिए। मिट्टी के कण बैठ जाने के पश्चात् जल की एक बूँद स्लाइड पर लेकर सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इसका प्रेक्षण कीजिए। आप क्या देखते हैं?


क्रियाकलाप 2.2

एक तालाब/पोखर से जल की कुछ बूँदें लीजिए। काँच की स्लाइड पर फैला कर सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इनका प्रेक्षण कीजिए।


क्या आपको सूक्ष्मजीव गति करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

इन प्रेक्षणों से पता चलता है कि मिट्टी एवं पानी में अनेक छोटे-छोटे (सूक्ष्म) जीव उपस्थित रहते हैं।

सूक्ष्मजीव इतने छोटे होते हैं कि उन्हें बिना यंत्र की सहायता से नहीं देखा जा सकता। इनमें से कुछ, जैसे कि ब्रेड पर उगने वाले कवक, को आवर्धक लेंस की सहायता से देखा जा सकता है जबकि अन्य बिना सूक्ष्मदर्शी की सहायता से दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि इन्हें सूक्ष्मजीव कहते हैं।

सूक्ष्मजीवों को चार मुख्य वर्गों में बाँटा गया है। यह वर्ग हैं, जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ एवं कुछ शैवाल। जीवाणु, शैवाल, प्रोटोज़ोआ एवं कवक के कुछ सामान्य सूक्ष्मजीव चित्र 2.1 से 2.4 में दर्शाए गए हैं।

विषाणु (वायरस) भी सूक्ष्म होते हैं परन्तु वे अन्य सूक्ष्मजीवों से भिन्न हैं। वे केवल परपोषी में ही गुणन करते हैं अर्थात् जीवाणु, पौधे अथवा जंतु कोशिका में गुणन करते हैं। विषाणु चित्र 2.5 में दर्शाए गए हैं। कुछ सामान्य रोग जैसे कि जुकाम, इन्फ्लुएंजा (फ्लू) एवं अधिकतर खाँसी विषाणु द्वारा होते हैं। कुछ विशेष रोग जैसे कि पोलियो एवं खसरा भी विषाणु (वाइरस) द्वारा होते हैं।

अतिसार एवं मलेरिया प्रोटोज़ोआ द्वारा होते हैं। टायफाइड एवं क्षयरोग (TB) जीवाणु द्वारा होने वाले रोग हैं।

इनमें से कुछ सूक्ष्मजीवों के विषय में आप कक्षा VI एवं VII में पढ़ चुके हैं।

2.4


c_2.4


2.2 सूक्ष्मजीव कहाँ रहते हैं?

सूक्ष्मजीव एककोशिक हो सकते हैं जैसे कि जीवाणु, कुछ शैवाल एवं प्रोटोज़ोआ, अथवा बहुकोशिक जैसे कि कई शैवाल एवं कवक। यह बर्फीली शीत से ऊष्ण (गर्म) स्रोतों तक हर प्रकार की परिस्थिति में जीवित रहे हैं। यह मरुस्थल एवं दलदल में भी पाए जाते हैं। यह मनुष्य सहित सभी जंतुओं के शरीर के अंदर भी पाए जाते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव दूसरे सजीवों पर आश्रित होते हैं जबकि कुछ अन्य स्वतंत्र रूप से पाए जाते हैं। अमीबा जैसा सूक्ष्मजीव अकेले रह सकता है, जबकि कवक एवं जीवाणु समूह में रहते हैं।

2.3 सूक्ष्मजीव और हम

सूक्ष्मजीवों की हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इनमें से कुछ हमारे लिए लाभदायक हैं तथा कुछ अन्य हानिकारक तथा जीवों में रोग के कारक हैं। आइए हम विस्तार से इसका अध्ययन करें।

मित्रवत सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीव विभिन्न कार्यों में उपयोग किए जाते हैं।  इनका उपयोग दही, ब्रेड एवं केक बनाने में किया
जाता है।

प्राचीन काल से ही सूक्ष्मजीवों का उपयोग एल्कोहल बनाने में किया जाता रहा है।


पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए भी इनका उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, कार्बनिक अवशिष्ट (सब्ज़ियों के छिलके, जंतु अवशेष, विष्ठा इत्यादि) का अपघटन जीवाणुओं द्वारा किया जाता है तथा हानिरहित पदार्थ बनते हैं। स्मरण कीजिए, जीवाणुओं का उपयोग औषधि उत्पादन एवं कृषि में मृदा की उर्वरता में वृद्धि करने में किया जाता है जिससे नाइट्रोजन स्थिरीकरण होता है।

दही एवं ब्रेड का बनाना

आप कक्षा VII में पढ़ चुके हैं कि जीवाणु दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं। 


हमने अपनी माँ को गर्म (गुनगुने) दूध में थोड़ा सा दही मिलाते हुए देखा है जिससे दही जम जाता है। हमें आश्चर्य हुआ ऐसा क्यों?

दही में अनेक सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं जिनमें लैक्टोबैसिलस नामक जीवाणु प्रमुख है जो दूध को दही में परिवर्तित कर देता है। वह दूध में जनन कर उसे दही में परिवर्तित कर देते हैं। जीवाणु पनीर (चीज़), अचार एवं अनेक खाद्य पदार्थों के उत्पादन में सहायक हैं। रवा (सूजी), इडली एवं भटूरे का एक महत्त्वपूर्ण संघटक दही है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि एेसा क्यों है? जीवाणु एवं यीस्ट चावल के आटे के किण्वण में सहायक होते हैं जिससे इडली एवं डोसा बनता है।

क्रियाकलाप 2.3


एक बर्तन में ½ कि.ग्रा. आटा अथवा मैदा लेकर उसमें थोड़ी सी चीनी डालकर गर्म जल से मिलाइए। इसमें थोड़ी मात्रा (एक चुटकी) यीस्ट पाउडर मिलाकर गूँथ लीजिए। आप दो घंटे बाद क्या देखते हैं? क्या आपने गुँथे हुए मैदे को उठा हुआ (फुला हुआ) पाया?

यीस्ट पाउडर के साथ मैदा

खमीर द्वारा उठी हुई मैदा
चित्र 2-6


यीस्ट तीव्रता से जनन करके श्वसन के दौरान कार्बन डाइअॉक्साइड उत्पादित करते हैं। गैस के बुलबुले खमीर वाले मैदे का आयतन बढ़ा देते हैं (चित्र 2.6)। यह बेकिंग उद्योग में यीस्ट के उपयोग का आधार है जिसमें ब्रेड, पेस्ट्री एवं केक बनाए जाते हैं।


सूक्ष्मजीवों का वाणिज्यिक उपयोग

बड़े स्तर पर एल्कोहल, शराब एवं एसिटिक एसिड के उत्पादन में सूक्ष्मजीवों का उपयोग किया जाता है। जौ, गेहूँ, चावल एवं फलों के रस में उपस्थित प्राकृतिक शर्करा में यीस्ट द्वारा एल्कोहल एवं शराब का उत्पादन किया जाता है।

क्रियाकलाप 2.4

500 mL का बीकर लेकर इसमें 3/4 भाग तक जल भरिए। इसमें 2-3 चम्मच चीनी घोलिए। इसमें ½ चम्मच यीस्टपाउडर डालिए। इसे 4-5 घंटों के लिए ऊष्ण स्थान पर ढक कर रखिए। अब विलयन को सूँघ कर देखिए।

यह गंध एल्कोहल की है जो चीनी के एल्कोहल में परिवर्तित होने के कारण बना है। चीनी के एल्कोहल में परिवर्तन की यह प्रक्रिया किण्वन अथवा फर्मेंटेशन कहलाता है।

लुइ पाश्चर ने किण्वन की खोज 1857 में की।


सूक्ष्मजीवों के औषधीय उपयोग

जब कभी आप बीमार पड़ते हैं तो डॉक्टर आपको पेनिसिलिन का इंजेक्शन देते हैं अथवा कोई अन्य प्रतिजैविक की गोली अथवा कैप्सूल देते हैं। इन औषधियों का स्रोत सूक्ष्मजीव हैं। ये बीमारी पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देती हैं अथवा उनकी वृद्धि को रोक देती हैं। इस प्रकार की औषधि को प्रतिजैविक अथवा एंटीबायोटिक कहते हैं। आजकल जीवाणु और कवक से अनेक प्रतिजैविक औषधियों का उत्पादन हो रहा है। स्ट्रेप्टोमाइसिन, टेट्रासाइक्लिन और एरिथ्रोमाइसिन सामान्य रूप से उपयोग की जाने वाली प्रतिजैविक हैं जिन्हें कवक एवं जीवाणु से उत्पादित किया जाता है। किसी विशिष्ट प्रकार के सूक्ष्मजीव का संवर्धन करके प्रतिजैविक का उत्पादन किया जाता है जिन्हें अनेक रोगों की चिकित्सा में उपयोग में लाते हैं।



सन् 1929 में अलेक्ज़ेंडर फ्लैमिंग जीवाणु रोगों से बचाव हेतु एक संवर्धन पर प्रयोग कर रहे थे। अचानक उन्होंने संवर्धन तश्तरी पर हरे रंग की फफूँद के छोटे बीजाणु देखे। उन्होंने पाया कि यह फफूँद जीवाणु की वृद्धि को रोकते हैं। यह तथ्य पाया कि बहुत सारे जीवाणु फफूँद द्वारा मारे गए। इस प्रकार फफूँद से ‘पेनिसिलिन’ बनाई गई।


पशु आहार एवं कुक्कुट आहार में भी प्रतिजैविक मिलाए जाते हैं जिसका उपयोग पशुओं में सूक्ष्मजीवों का संचरण रोकना है। प्रतिजैविक का उपयोग कुछ पौधों के रोग नियंत्रण के लिए भी किया जाता है।


ध्यान रखना चाहिए कि डॉक्टर की सलाह पर ही प्रतिजैविक की दवाएँ लेनी चाहिए तथा उस दवा का कोर्स भी पूरा करना चाहिए। यदि आप प्रतिजैविक उस समय लेंगे जब उसकी आवश्यकता नहीं है तो अगली बार जब आप बीमार होंगे और आपको प्रतिजैविक की आवश्यकता होगी तो वह उतनी प्रभावी नहीं होगी। इसके अतिरिक्त अनावश्यक रूप से ली गई प्रतिजैविक शरीर में उपस्थित उपयोगी जीवाणु भी नष्ट कर देती है। सर्दी-जुकाम एवं फ्लू में प्रतिजैविक प्रभावशाली नहीं हैं क्योंकि यह रोग विषाणु द्वारा होते हैं।


वैक्सीन (टीका)


शिशु एवं बच्चों को टीका क्यों लगाया जाता है?


जब रोगकारक सूक्ष्मजीव हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं तो उनसे लड़ने के लिए हमारा शरीर प्रतिरक्षी उत्पन्न करता है। शरीर को यह भी स्मरण रहता है कि वही सूक्ष्मजीव अगर हमारे शरीर में पुनः प्रवेश करता है तो उससे किस प्रकार लड़ा जाए। अतः यदि मृत अथवा निष्क्रिय सूक्ष्मजीवों को स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रविष्ट कराया जाए तो शरीर की कोशिकाएँ उसी के अनुसार लड़ने के प्रतिरक्षी उत्पन्न करके रोगकारक को नष्ट कर देती हैं। यह प्रतिरक्षी हमारे शरीर में सदा के लिए बनी रहती हैं तथा रोगकारक सूक्ष्मजीव से हमारी सदा के लिए सुरक्षा होती है। इस प्रकार टीका (वैक्सीन) कार्य करता है। हैजा, क्षय, चेचक तथा हैपेटाइटिस जैसी अनेक बीमारियों को वैक्सीन (टीके) द्वारा रोका जा सकता है।

एडवर्ड जेनर ने चेचक के लिए 1798 में चेचक के टीके की खोज की थी।

आपके बचपन में आपको भी अनेक रोगों से रक्षा करने के लिए टीके (वैक्सीन) दिए गए होंगे। क्या आप इन रोगों की सूची तैयार कर सकते हैं? इसके लिए आप अपने माता-पिता की मदद ले सकते हैं।

सभी बच्चों को इन रोगों से सुरक्षा की आवश्यकता है। आवश्यक टीके निकट के अस्पताल में उपलब्ध होते हैं। बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए आपने टेलिविज़न एवं समाचार-पत्रों में पोलियो के टीकाकरण के विज्ञापन (पल्स पोलियो) देखे होंगे। पोलियो-ड्रॉप बच्चों को दिया जाने वाला वास्तव में एक टीका (वैक्सीन) है।

चेचक के विरुद्ध विश्वव्यापी अभियान चलाया गया जिसके परिणामस्वरूप विश्व के अधिकांश भागों से चेचक का उन्मूलन हो गया।

आजकल सूक्ष्मजीवों से टीके का उत्पादन बड़े स्तर पर किया जाता है जिसमें मनुष्य एवं अनेक जंतुओं को अनेक रोगों से बचाया जाता है।

मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि

कुछ जीवाणु एवं नीले-हरे शैवाल (चित्र 2.7) वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर सकते हैं। इस प्रकार मृदा में नाइट्रोजन का संवर्धन होता है तथा उसकी उर्वरता में वृृद्धि होती है। इन्हें सामान्यतः जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकारक कहते हैं।


चित्र 2.7:  नाइट्रोजन स्थिरीकारक सायनो बैक्टीरियाः एक नीले-हरे शैवाल।


पर्यावरण का शुद्धिकरण

अपने विद्यालय के माली को देखने के पश्चात् पहेली, बूझो और दूसरे विद्यार्थियों ने घरों व बगीचों से पत्तियाँ एवं फल-सब्जियों का कचरा एकत्र करके उसके निपटान के लिए बनाए गए गढ्ढे में डाला। कुछ समय बाद इसका विघटन होने से यह खाद में परिवर्तित हो गया। पहेली और बूझो जानना चाहते हैं कि यह किस प्रकार हो सकता है?

क्रियाकलाप 2.5

दो गमले लेकर प्रत्येक को मिट्टी से आधा भर दीजिए। इन्हें 'A' एवं 'B' चिह्रित कीजिए। 'A-गमले’ में पौधों का कचरा भर दीजिए तथा दूसरे गमले 'B' में पॉलिथीन की थैली, काँच की खाली बोतलें तथा प्लास्टिक के टूटे खिलौने इत्यादि भर दीजिए। उन्हें एक ओर रख दीजिए। 3-4 सप्ताह बाद उनका प्रेक्षण कीजिए।

क्या आपको दोनों गमलों की वस्तुओं में कोई अंतर दिखाई देता है? यदि हाँ, तो क्या अंतर परिलक्षित होता है? आप देखेंगे कि ‘गमला-A’ के पादप अवशिष्ट का अपघटन हो गया है? यह कैसे हुआ? सूक्ष्मजीवों द्वारा पादप अपशिष्ट का अपघटन कर उसे खाद में बदल दिया गया। इस प्रक्रिया में बने पोषक, पौधों द्वारा पुनः उपयोग किए जाते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि ‘गमला-B’ के पॉलिथीन की थैली, काँच की खाली बोतलों एवं खिलौनों के टूटे हुए टुकड़ों में इस प्रकार का परिवर्तन नहीं हुआ। सूक्ष्मजीव उन पर क्रिया करके खाद में परिवर्तित नहीं कर सकते।

आप अक्सर बड़ी मात्रा में मृत जीवों को, सड़ते हुए पादप व कभी-कभी सड़ते हुए जन्तुओं के रूप में देखते हैं। आप देखते हैं कि कुछ समय बाद वह विलुप्त हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण है कि सूक्ष्मजीव, मृत जैविक अवशिष्ट का अपघटन करके उन्हें सरल पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं। यह पदार्थ अन्य पौधों एवं जंतुओं द्वारा पुनः उपयोग कर लिए जाते हैं।

इस प्रकार हानिकारक एवं दुर्गंधयुक्त पदार्थों का निम्नीकरण करने के लिए हम सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके पर्यावरण का शुद्धिकरण कर सकते हैं।

2.4 हानिकारक सूक्ष्मजीव

सूक्ष्मजीव अनेक प्रकार से हानिकारक हैं। कुछ सूक्ष्मजीव मनुष्य, जंतुओं एवं पौधों में रोग उत्पन्न करते हैं। रोग उत्पन्न करने वाले एेसे सूक्ष्मजीवों को रोगाणु अथवा रोगजनक कहते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव भोजन, कपड़े एवं चमड़े की वस्तुओं को संदूषित कर देते हैं। आइए उनकी हानिकारक गतिविधियों के विषय में और अधिक जानकारी प्राप्त करें।

मनुष्य में रोगकारक सूक्ष्मजीव

मनुष्य में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव श्वास द्वारा, पेय जल एवं भोजन द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं। संक्रमित व्यक्ति अथवा जंतु के सीधे संपर्क में आने पर भी रोग का संचरण हो सकता
है। सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले एेसे रोग जो एक संक्रमित व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति में वायु, जल, भोजन अथवा कायिक संपर्क द्वारा फैलते हैं,
संचरणीय रोग कहलाते हैं। इस प्रकार के रोगों के कुछ उदाहरण हैं – हैजा, सामान्य सर्दी-जुकाम, चिकनपॉक्स एवं क्षय रोग।

जब जुकाम से पीड़ित कोई व्यक्ति छींकता है तो सूक्ष्म बूँदों के साथ हज़ारों रोगकारक वायरस (विषाणु) भी वायु में आ जाते हैं। यह वायरस श्वास के साथ ली जाने वाली वायु के साथ शरीर में प्रवेश कर
जाते हैं।

तब आप संचरणीय रोगोंका फैलना किस प्रकार रोकते हैं?



हमें छींकते समय अपने मुँह एवं नाक पर एक रूमाल  रखना चाहिए। अच्छा  तो यही है कि संक्रमित व्यक्ति से पर्याप्त दूरी  बनाए रखी जाए।



कुछ कीट एवं जंतु एेसे भी हैं जो रोगकारक सूक्ष्मजीवों के रोग-वाहक का कार्य करते हैं। घरेलू मक्खी इसका एक उदाहरण है। मक्खी कूड़े एवं जंतु अपशिष्ट पर बैठती है। रोगाणु उसके शरीर से चिपक जाते हैं। जब मक्खी बिना ढके भोजन पर बैठती है तो रोगाणु का स्थानान्तरण संभव है। जो भी व्यक्ति एेसा संदूषित भोजन करेगा उसके बीमार पड़ने की संभावना है। अतः यह सलाह दी जाती है कि भोजन को सदा ही ढककर रखा जाए। बिना ढके भोजन को खाने से बचना चाहिए। मादा एनॉफ्लीज़ (चित्र 2.8) मच्छर इसका अन्य उदाहरण है। मच्छर प्लैज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) का वाहक है। मादा एडीस मच्छर डेंगू के वायरस का वाहक है। हम मलेरिया अथवा डेंगू का नियंत्रण किस प्रकार कर सकते हैं।

चित्र 2.8 :  मादा एनॉफ्लीज़ मच्छर।



अध्यापक हमसे एेसा क्यों कहते हैं कि अपने आस-पास पानी एकत्रित न होने दें।



सभी मच्छर जल में उत्पन्न होते हैं। हमें पानी को कहीं भी रुका नहीं रहने देना चाहिए। कूलर, टायरों एवं फूलदानों इत्यादि में कहीं भी जल को एकत्र न होने दें। अतः अपने आस-पास के स्थानों को स्वच्छ एवं शुष्क रखकर हम मच्छरों को पैदा होने से रोक सकते हैं। एेसे उपायों की सूची बनाने का प्रयास कीजिए जिसे अपनाकर मलेरिया को फैलने से रोका जा सके।

सारणी 2-1: मनुष्य में सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले सामान्य रोग

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मनुष्य में होने वाले कुछ सामान्य रोग, उनके फैलने तथा रोकने के कुछ उपाय तालिका 2.1 में दर्शाए गए हैं।

जंतुओं में रोगकारक जीवाणु

अनेक सूक्ष्मजीव केवल मनुष्य एवं पौधों में ही रोग के कारक नहीं हैं वरन् वे दूसरे जंतुओं में भी रोग उत्पन्न करते हैं।


राबर्ट कोच ने सन् 1876 में बेसीलस एन्थ्रेसिस नामक जीवाणु की  खोज की जो एन्थ्रेक्स रोग का कारक है।

 उदाहरण के लिए, एंथ्रेक्स, मनुष्य एवं मवेशियों में होने वाला भयानक रोग है जो जीवाणु द्वारा होता है। गाय में खुर एवं मुँह का रोग वायरस द्वारा होता है।

पौधों में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव

अनेक सूक्ष्मजीव गेहूँ, चावल, आलू, गन्ना, संतरा, सेब इत्यादि पौधों में रोग के कारक हैं। रोग के
कारण फसल की उपज में कमी आ जाती है। तालिका 2.2 में कुछ पादप रोग दर्शाए गए हैं। कुछ रसायनों का प्रयोग करके इन सूक्ष्मजीवों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

सारणी 2-2: सूक्ष्मजीवों द्वारा पौधों में होने वाले कुछ सामान्य रोग

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खाद्य विषाक्तन (Food Poisoning)

बूझो के एक मित्र ने उसे एक पार्टी में आमंत्रित किया। वहाँ उसने अनेक प्रकार के व्यंजन खाए। घर आने पर उसे वमन (उल्टी) होने लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर ने बताया कि यह खाद्य विषाक्तन के कारण होने वाली स्थिति है।


पहेली को आश्चर्य होता है कि भोजन ‘विष’ कैसे बन सकता है?



सूक्ष्मजीवों द्वारा संदूषित भोजन करने से खाद्य विषाक्तन हो सकता है। हमारे भोजन में उत्पन्न होने वाले सूक्ष्मजीव कभी-कभी विषैले पदार्थ उत्पन्न करते हैं। यह भोजन को विषाक्त बना देते हैं जिसके सेवन से व्यक्ति भयंकर रूप से रोगी हो सकता है अथवा कभी-कभी उसकी मृत्यु भी हो सकती है। अतः यह आवश्यक है कि हम भोजन को संदूषित होने से बचाएँ।

2.5 खाद्य परिरक्षण

अध्याय एक में हमने खाद्य बीजों के परिरक्षण एवं भण्डारण के उपायों के विषय में पढ़ा था। हम पके हुए भोजन का घर पर परिरक्षण किस प्रकार कर सकते हैं? आप जानते हैं कि खुले एवं नम स्थान पर रखी ब्रेड पर कवक आक्रमण कर देते हैं। सूक्ष्मजीव हमारे भोजन को संदूषित कर देते हैं। संदूषित भोजन से दुर्गंध आने लगती है, इसका स्वाद भी खराब हो जाता है तथा रंग-रूप में भी परिवर्तन आ सकता है। क्या भोजन का संदूषण एक रासायनिक अभिक्रिया है?

पहेली ने कुछ आम खरीदे, परन्तु कई दिनों तक वह उन्हें नहीं खा पाई। बाद में उसने देखा कि वे सड़ गए हैं। परन्तु वह जानती है कि उसकी दादी द्वारा बनाया गया आम का अचार काफी समय तक संदूषित नहीं होता। वह भ्रमित है। आइए हम खाद्य परिरक्षण के कुछ सामान्य तरीकों का अध्ययन करें जिनका उपयोग हम अपने घरों में करते हैं। हमें इन्हें सूक्ष्मजीवों से बचाव के उपाय करना चाहिए।

रासायनिक उपाय

नमक एवं खाद्य तेल का उपयोग सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकने के लिए सामान्य रूप से किया जाता है। अतः इन्हें परिरक्षक कहते हैं। हम नमक अथवा खाद्य अम्ल का प्रयोग अचार बनाने में करते हैं जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि नहीं होती। सोडियम बेंजोएट तथा सोडियम मेटाबाइसल्फाइट सामान्य परिरक्षक हैं। जैम एवं स्क्वैश बनाने में इन रसायनों का उपयोग उन्हें संदूषित होने से बचाता है।

नमक द्वारा परिरक्षण

सामान्य नमक का उपयोग मांस एवं मछली के परिरक्षण के लिए काफी लम्बे अरसे से किया जा रहा है। जीवाणु की वृद्धि रोकने के लिए मांस तथा मछली को सूखे नमक से ढक देते हैं। नमक का उपयोग आम, आँवला एवं इमली के परिरक्षण में भी किया जाता है।

चीनी द्वारा परिरक्षण

जैम, जेली एवं स्क्वैश का परिरक्षण चीनी द्वारा किया जाता है। चीनी के प्रयोग से खाद्य पदार्थ की नमी में कमी आती है जो संदूषण करने वाले जीवाणुओं की वृद्धि को नियंत्रित करता है।

तेल एवं सिरके द्वारा परिरक्षण

तेल एवं सिरके का उपयोग अचार को संदूषण से बचाने में किया जाता है क्योंकि इसमें जीवाणु जीवित नहीं रह सकते। सब्जियाँ, फल, मछली तथा मांस का परिरक्षण इस विधि द्वारा करते हैं।

गर्म एवं ठंडा करना

आपने अपनी माँ को दूध उबाल कर रखते हुए देखा होगा। उबालने से अनेक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। इसी प्रकार हम अपना भोजन रेफ्रीजरेटर में रखते हैं क्योंकि कम ताप सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकता है।

थैलियों में आने वाला दूध संदूषित क्यों नहीं होता? मेरी माँ ने बताया कि यह दूध ‘पॉश्चरीकृत’ है। पॉश्चरीकरण क्या है?

पॉश्चरीकृत दूध को बिना उबाले इस्तेमाल किया जा सकता है क्योंकि यह सूक्ष्मजीवों से मुक्त होता है। इसके लिए दूध को 70ºC पर 15-30 सेकंड के लिए गर्म करते हैं फिर एकाएक ठंडा कर उसका भण्डारण कर लेते हैं। एेसा करने से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है। इस प्रक्रिया की खोज लुई पॉश्चर नामक वैज्ञानिक ने की थी, इसीलिए इसे पॉश्चरीकरण कहते हैं।

भण्डारण एवं पैकिंग

आजकल मेवे तथा सब्जियाँ भी वायुरोधी सील किए गए पैकेटों में बेचे जाते हैं। जिससे सूक्ष्मजीवों से सुरक्षा होती है।

2.6 नाइट्रोजन स्थिरीकरण

आपने कक्षा VI और VII में राइजोबियम जीवाणु के बारे में पढ़ा है जो लैग्यूम पौधों (दलहन) में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक होते हैं। स्मरण कीजिए, राइजोबियम लैग्यूम पौधों की ग्रंथिकाओं में रहते हैं जैसे सेम और मटर जो एक सहजीवता है। कभी-कभी तड़ित विद्युत द्वारा भी नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होता है। परन्तु आप जानते हैं कि नाइट्रोजन की मात्रा वायुमण्डल में स्थिर रहती है। आपको आश्चर्य होगा कि यह कैसे संभव है? आइए, इसके विषय में अगले भाग में समझते हैं।


चित्र 2-9: लैग्यूम पौधे की जड़ ग्रंथिकाएँ।


2.7 नाइट्रोजन चक्र

हमारे वायुमण्डल में 78% नाइट्रोजन गैस है। नाइट्रोजन सभी सजीवों का आवश्यक संघटक है जो प्रोटीन, पर्णहरित (क्लोरोफिल) न्युक्लिक एसिड एवं विटामिन में उपस्थित होता है। पौधे एवं जंतु वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का उपयोग सीधे नहीं कर सकते। मिट्टी में उपस्थित जीवाणु व नीले-हरे शैवाल वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तित कर देते हैं। जब नाइट्रोजन इस प्रकार उपयोगी यौगिकों में परिवर्तित हो जाती है, पौधे इसका उपयोग मिट्टी में से जड़ तंत्र द्वारा करते हैं। इसके पश्चात् अवशोषित नाइट्रोजन का उपयोग प्रोटीन एवं अन्य यौगिकों के संश्लेषण में करते हैं। पौधों पर निर्भर करने वाले जंतु उनसे प्रोटीन एवं अन्य नाइट्रोजनी यौगिक प्राप्त करते हैं (चित्र 2.10)।

पौधों एवं जंतुओं की मृत्यु के बाद, मिट्टी में उपस्थित जीवाणु एवं कवक नाइट्रोजनी अपशिष्ट को नाइट्रोजनी यौगिकों में परिवर्तित कर देते हैं जो पौधों द्वारा पुनः उपयोग होता है। कुछ विशिष्ट जीवाणु नाइट्रोजनी यौगिकों को नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं जो वायुमण्डल में चली जाती है। परिणामतः वायुमण्डल में नाइट्रोजन की मात्रा लगभग स्थिर रहती है।

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प्रमुख शब्द

शैवाल

प्रतिजैवि

प्रतिरक्षी

जीवाणु

वाहक

संक्रामक रोग

किण्वन

कवक

लैक्टोबैसिलस

सूक्ष्मजीव

नाइट्रोजन चक्र

नाइट्रोजन स्थिरीकरण

पाश्चरीकरण

रोगजनक

परिरक्षण

प्रोटोज़ोआ

राइजोबियम

टीका (वैक्सीन)

विषाणु

यीस्ट (खमीर)



आपने क्या सीखा

 सूक्ष्मजीव अत्यंत छोटे होते हैं तथा बिना यंत्र की सहायता से अकेली आँखों से दिखाई नहीं देते।

 यह बर्फीले शीत मौसम से ऊष्ण झरनों तथा मरुस्थल से दलदल तक हर प्रकार के पर्यावरण में जीवित रह सकते हैं।

 सूक्ष्मजीव वायु, जल, मिट्टी, पौधों एवं जंतुओं के शरीर में पाए जाते हैं।

 ये एककोशिक एवं बहुकोशिक होते हैं।

 जीवाणु, कवक, प्रोटोज़ोआ एवं कुछ शैवाल सूक्ष्मजीवों के अंतर्गत आते हैं। विषाणु इनसे अलग हैं लेकिन फिर भी इसी वर्ग में सम्मिलित किए जाते हैं।

 विषाणु केवल परपोषी जैसे जीवाणु, पादप या जन्तु में गुणन 
करते हैं।

 कुछ सूक्ष्मजीव औषधि एवं एल्कोहल के वाणिज्यिक उत्पादन में उपयोगी हैं।

 कुछ सूक्ष्मजीव जैविक कचरे जैसे कि मृत पौधे एवं जंतु अपशिष्ट को अपघटित कर सरल पदार्थों में परिवर्तित कर देतेहैं तथा वातावरण को स्वच्छ बनाते हैं।

 प्रोटोज़ोआ अतिसार तथा मलेरिया जैसे रोग उत्पन्न करते हैं।

 कुछ सूक्ष्मजीव हमारे भोजन को विषाक्त कर देते हैं।

 कुछ सूक्ष्मजीव लैग्यूम पौधों की जड़ों तथा ग्रंथिकाओं में पाए जाते हैं। ये वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिरीकृत कर देते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है।

 मिट्टी में उपस्थित कुछ जीवाणु और नीले-हरे शैवाल, वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर, नाइट्रोजनी यौगिकों में परिवर्तित कर देते हैं।

 विशेष जीवाणु, मिट्टी में उपस्थित नाइट्रोजनी यौगिकों को नाइट्रोजन गैस में परिवर्तित कर देते हैं जिसका निर्मोचन वायुमण्डल में होता है।


अभ्यास

1. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए–

(क) सूक्ष्मजीवों को  की सहायता से देखा जा सकता है।

(ख) नीले-हरे शैवाल वायु से  का स्थिरीकरण करते हैं जिससे मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि होती है।

(ग) एल्कोहल का उत्पादन  नामक सूक्ष्मजीव की सहायता से किया जाता है।

(घ) हैजा  के द्वारा होता है।

2. सही शब्द के आगे () का निशान लगाइए–

(क) यीस्ट का उपयोग निम्न के उत्पादन में होता है :

(i) चीनी (ii) एल्कोहल (iii) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (iv) अॉक्सीजन

(ख) निम्न में से कौन सा प्रतिजैविक है?

(i) सोडियम बाइकार्बोनेट (ii) स्ट्रेप्टोमाइसिन (iii) एल्कोहल (iv) यीस्ट

(ग) मलेरिया परजीवी का वाहक हैः

(i) मादा एनॉफ्लीज़ मच्छर (ii) कॉकरोच (iii) घरेलू मक्खी (iv) तितली

(घ) संचरणीय रोगों का सबसे मुख्य कारक है:

(i) चींटी (ii) घरेलू मक्खी (iii) ड्रेगन मक्खी (iv) मकड़ी

(ङ) ब्रेड अथवा इडली फूल जाती है इसका कारण है:

(i) ऊष्णता (ii) पीसना (iii) यीस्ट कोशिकाओं की वृद्धि (iv) माढ़ने के कारण

(च) चीनी को एल्कोहल में परिवर्तित करने के प्रक्रम का नाम है:

(i) नाइट्रोजन स्थिरीकरण (ii) मोल्डिंग (iii) किण्वन (iv) संक्रमण

3. कॉलम-I के जीवों का मिलान कॉलम-II में दिए गए उनके कार्य से कीजिए–

कॉलम-I कॉलम-II

(क) जीवाणु (i) नाइट्रोजन स्थिरीकरण

(ख) राइज़ोबियम (ii) दही का जमना

(ग) लैक्टोबेसिलस (iii) ब्रेड की बेकिंग

(घ) यीस्ट (iv) मलेरिया का कारक

(ङ) एक प्रोटोज़ोआ (v) हैजा का कारक

(च) एक विषाणु (vi) AIDS का कारक

(vii) प्रतिजैविक उत्पादित करना

4. क्या सूक्ष्मजीव बिना यंत्र की सहायता से देखे जा सकते हैं। यदि नहीं, तो वे कैसे देखे जा 
सकते हैं?

5. सूक्ष्मजीवों के मुख्य वर्ग कौन-कौन से हैं?

6. वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का मिट्टी में स्थिरीकरण करने वाले सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए।

7. हमारे जीवन में उपयोगी सूक्ष्मजीवों के बारे में 10 पंक्तियाँ लिखिए।

8. सूक्ष्मजीवों द्वारा होने वाले हानिकारक प्रभावों का संक्षिप्त विवरण कीजिए।

9. प्रतिजैविक क्या हैं? प्रतिजैविक लेते समय कौन-सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?





विस्तारित अधिगम - क्रियाकलाप एवं परियोजनाएँ

1. खेत में चने अथवा सेम का एक पौधा समूल उखाड़िए। इसकी जड़ों का प्रेक्षण कीजिए। आपको कुछ जड़ों में कुछ गोल उभार दिखाई देंगे। यह जड़ों की ग्रंथिकाएँ हैं। एक जड़ का चित्र बनाकर ग्रंथिका दर्शाइए।

2. जैम तथा जेली के लेबल एकत्र कीजिए। इसके ऊपर छपे संघटकों के नामों की सूची बनाइए।

3. एक डॉक्टर से संपर्क कर पता लगाइए कि किसी प्रतिजैविक का बहुत अधिक प्रयोग क्यों नहीं करना चाहिए। इसकी संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार कीजिए।

4. प्रोजेक्ट– आवश्यक सामग्री: 2 परखनली, मार्कर पेन, चीनी, यीस्ट पाउडर, 2 गुब्बारे एवं चूने का पानी।

दो परखनली लेकर इन पर 'A' तथा 'B' निशान लगाइए। परखनलियों को एक स्टैंड में लगा दीजिए तथा ऊपर का थोड़ा-सा स्थान छोड़ कर इन्हें पानी से भर दीजिए। प्रत्येक परखनली में 2 चम्मच चीनी डालिए। परखनली 'B' में एक चम्मच यीस्ट पाउडर डाल दीजिए। दो गुब्बारों को थोड़ा सा फुला कर प्रत्येक परखनली के मुख पर लगा दीजिए। इन्हें एक ऊष्ण स्थान एवं सूर्य के प्रकाश से दूर के स्थान पर रख दीजिए। तीन-चार दिन तक प्रतिदिन इसका प्रेक्षण कीजिए। अपने प्रेक्षण नोटबुक में रिकार्ड कीजिए तथा इनकी व्याख्या के लिए सोचिए।


अब एक अन्य परखनली लीजिए तथा इसमें 1/4 भाग तक चूने का पानी भरिए। परखनली B से गुब्बारा इस प्रकार हटाइए कि गुब्बारे के अंदर की गैस बाहर न निकल पाए। अब इसे चूने के पानी वाली परखनली पर लगा कर भलीभांति हिलाइए। अपने प्रेक्षण की व्याख्या कीजिए।


क्या आप जानते हैं?

जीवाणु पृथ्वी पर मनुष्य के बहुत पहले से रह रहे थे। ये बहुत सख्त जीव हैं इसलिए वे कठिन परिस्थिति में रह सकते हैं। वे मिट्टी के बर्तन में उबलते तथा ठंडे ब.र्फीले पानी में जीवित पाये गए हैं। वे कास्टिक सोडा की झील और सांद्र सलफ्यूरिक एसिड के पोखरे में पाये गए हैं। वे अनेक किलोमीटर की गहराई में जीवित रह सकते हैं। वे संभवतः अंतरिक्ष में भी रह सकते हैं। एक प्रकार का जीवाणु कैमरे पर देखा गया जो चन्द्रमा पर दो वर्षों से था। संभवतः कोईपर्यावरण एेसा नहीं है जिसमें जीवाणु जीवित न रह सकें।



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