उन्नीसवाँ पाठ आह्नान कस ली है कमर अब तो, वुफछ करके दिखाएँगे, आजाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।़हटने के नहीं पीछे, डर कर कभी शुल्मों से, तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे। बेशस्त्रा नहीं है हम, बल है हमें चरखे का, चरखे से शमीं को हम, ता चखर् गुँजा देंगे। परवा नहीं वुफछ दम की, गम की नहीं, मातम की, है जान हथेली पर, एक दम में गवाँ देंगे। ़उपफ तक भी जुबां से हम हरगिश न निकालेंगे, तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे। सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका, चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे। दिलवाओ हमें पफाँसी, ऐलान से कहते हैं, खूं से ही हम शहीदों के, प्.ाफौज बना देंगे। मुसाप्ि.ाफर जो अंडमान के तूने बनाए शालिम, आज़्ााद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे। μअशप़्ाफाक उल्ला खाँ टिप्पणी टिप्पणी दूवार्ध्121 टिप्पणी

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