ग्यारहवाँ पाठ ¯हदी ने जिनकी ¯शदगी बदल दीμमारिया नेज्यैशी वह दिल्ली के सदर् जाड़ों की कोइर् आम सुबह ही थी जब जनपथ स्िथत हंगेरियन सूचना एवं सांस्वृफतिक वेंफद्र की जनसंपवर्फ अिाकारी हरलीन अहलूवालिया का पफोन आया। हरलीन मुझे हंगरी की एक अंग्रेश ¯हदी महिला विद्वान से मिलवाना चाहती थीं, जिन्हें ¯हदी में किए गए उनके काम के चलते न केवल दुनिया भर में पहचान मिली थी, बल्िक अपने राष्ट्रपति अब्दुल पाकिर जैनुल आबिद्दीन अब्दुल कलाम ने उन्हें सम्मानित भी किया था। वह विदुषी तब चंद दिनों के लिए ही भारत में थीं और उसी शाम उन्हें दिल्ली से बाहर जाना था। लिहाशा सुबह 10 बजे का समय मुलाकात के लिए तय हुआ। भले ही वह महिला ¯हदी के चलते जानी - पहचानी जा रही थीं लेकिन थीं तो अंग्रेश लिहाशा उनसे पूछे जाने वाले सवालों की पेफहरिस्त तैयार करते वक्त ¯हदी के साथ - साथ अंग्रेजी का भी ध्यान रखा कि क्या पता कब संवाद के लिए इसकी शरूरत आ पड़े। आश्चयर्, अंग्रेजी के सवालों की शरूरत ही नहीं पड़ी। सुबह 10 बजे जब अपने पफोटोग्रापफर के साथ मैं हंगेरियन सूचना वेंफद्र पहुँचा तो हरलीन अपने कायार्लयी काम में व्यस्त थीं, हमें स्वागत कक्ष में बैठने को कहा गया। हम बैठकर अभी गरमा - गरम काॅपफी की चुसकियाँ ले ही रहे थे कि एक भद्र अंग्रेश महिला आ पहुँची। उन्होंने अभ्िावादन की शुरुआत हाथ जोड़कर ‘नमस्ते’ से की। पिफर क्षमायाचना की कि दिल्ली के व्यस्त यातायात के चलते वह समय से नहीं पहुँच सकीं। हरलीन के आने के चंद मिनट बाद ही हम बातचीत में इतने मशगूल हो चुके थे कि औपचारिक परिचय की शरूरत ही नहीं पड़ी। वह डाॅ. मारिया नेज्यैशी थीं। अप्रैल 1953 में हंगरी के बुडापेस्ट में जन्मी नेज्यैशी ने संस्वृफत, लेटिन, प्राचीन यूनानी और भारत विज्ञान जैसे विषयों में एम. ए. कर संस्वृफत व ¯हदी में डाक्टरेट की उपािा हासिल की। यूरोप ¯हदी समिति की उपाध्यक्ष और इयोत्वोस लोरेंड यूनिवसिर्टी में ¯हदी की विभागाध्यक्ष के तौर पर अकादमिक गतिवििायों से जुड़ी नेज्यैशी ने 3 दजर्न से भी अिाक किताबों का ¯हदी से हंगेरियन व हंगेरियन से ¯हदी में अनुवाद किया। हमारी बातचीत के बीच छठे विश्व ¯हदी सम्मेलन व जाजर् गि्रयसर्न सम्मान से सम्मानित नेज्यैशी को भारत, यहाँ की भाषा, यहाँ के लोग, यहाँ के शहर, यहाँ की .िपफल्में, यहाँ का साहित्य, यहाँ की राजनीति और यहाँ की संस्वृफति वैफसी लगती है? उनका खुद का बचपन वैफसा था? उनका ¯हदी से जुड़ाव वैफसे हुआ? जैसे तमाम सवालों से होकर गुजरना पड़ा और सभी के जवाब उन्होंने ¯बदास अंदाज में दिए। लेकिन नेज्यैशी ने बातचीत की शुरुआत श्िाकायतों से की। उनका कहना था कि, फ्भारत बहुत बड़ा देश है। यहाँ की परंपरा बहुत समृ( है पर यहाँ के .िपफल्म वाले इतनी छोटी - छोटी बातों पर झूठ बोलते ही नहीं बल्िक झूठ दिखाते भी हैं कि उन्हें देखकर दुख होता है। आप .िपफल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ को ही लीजिए। इस पूरी .िपफल्म की शू¯टग हंगरी या यों कहिए कि हमारे शहर बुडापेस्ट में हुइर् थी। पर .िपफल्म में उसे इटली का शहर बता दिया गया। इस झूठ की शरूरत क्या थी? यों यह उस धरती के साथ भी नाइंसापफी है जिसके हुस्न को आपने वैफमरे में वैफद कर परदे पर दिखाया, पर जगह दूसरी बता दी।य् नेज्यैशी की इस श्िाकायत का कोइर् जवाब देते नहीं बना, लिहाजा यह कहकर कि हम आप की बात ‘हम दिल दे चुके सनम’ देखने वाले सभी दशर्कों के पास न भी पहुँचा पाए, तो अपने पाठकोें तक शरूर पहुुँचा देंगे ताकि उन्हें सच्चाइर् का पता चल जाए, क्षमा माँग ली। उसके बाद ¯हदी से उनके जुड़ाव के बारे में मैंने जानना चाहा तो वह जैसे अपने बचपन में लौट गईं। फ्हंगरी मेें संयुक्त परिवार की सोच नहीं है। पति - पत्नी व बच्चे। बच्चे भी केवल 20 साल की उम्र तक माता - पिता के साथ रह सवफते हैं। वुफल मिलाकर एक इकाइर् का छोटा परिवार। तकरीबन 30 साल पहले मेरे माता - पिता का तलाक हो गया था। दोनोें ने दूसरा विवाह किया।य् फ्आज मेरी माँ की उम्र 81 साल है, पर वह अकेले रहती हैं। मेरी मौसी 86 साल की हैं, वहभी अकेली हैं। वे दोनों इस उम्र में भी स्वायत्त हैं। मैंने भी शादी नहीं की। काम व शादी में एक को चुनना था। बच्चे, पति व परिवार के साथ मैं वह नहीं कर पाती जो आज कर रही हूँ। मैंने ¯हदी के लिए अपना जीवन समपिर्त कर दिया।य् फ्दरअसल, मेरी ¯जदगी के शुरुआती 20 साल बहुत छोटी - सी जगह पर बीते। मैं बचपन से ही इंसानी जीवन के शुरुआती दौर को जानने के लिए लालायित थी। इसीलिए मैंने ग्रीक, लेटिन,यूनानी और संस्कृत भाषाएँ पढ़ीं। एम. ए. की पढ़ाइर् के बाद मैं एक प्रकाशन संस्थान से भी जुड़ी। उस दौरान हंगरी में केवल 1 - 2 सज्जन ही ¯हदी जानते थे।य् फ्मेेरे प्रोप़ेफसर ने मेरी रफचियों को देखकर मुझे ¯हदी पढ़ने के लिए प्रेरित किया और एक बार जो मैं इससे जुड़ी तो जुड़ती चली गइर्। 1985 में मैं पढ़ाइर् के सिलसिले में पहली बार भारत आइर् और यहाँ 10 माह तक रुकी। एक लड़की, जिसने घर से काॅलेज की चारदीवारी ही देखी हो, उसने ¯हदी की बदौलत पूरी दुनिया देख ली।य् फ्आज मैं विएना में पढ़ाती हूँ। मेरे एक श्िाष्य इमरे बांगा आक्सपफोडर् विश्वविद्यालय में ¯हदी पढ़ाते हैं।य् फ्इंग्लैंड में ¯हदी के तमाम जानकारों के बीच एक हंगेरियन का ¯हदी पढ़ाने के लिए चुना जाना कम बड़ी बात नहीं है। जहाँ तक हंगरी की बात है तो मेरे समय में वहाँ न तो ¯हदी भाषी लोग थे और न ही किताबें थीं। डाॅ. हुवुफम ¯सह नामक एक गण्िातज्ञ ने ¯हदी सीखने में मेरी कापफी मदद की।य् फ्आज हंगरी में मैंने ¯हदी का पुस्तकालय बना रखा है, जिसकी किताबें भारतीय दूतावास ने उपलब्ध कराइर् हैं। मैं बुडापेस्ट में भारतीय पोशाक ही पहनती हूँ, जिसे देख मेरे छात्रों में भी इसके प्रति ललक बढ़ी है। कड़ाके की ठंड के चलते वहाँ सलवार - सूट ही ठीक है इसलिए साड़ी कम पहनते हैं।य् भारत की कौन - सी चीशें आपको सबसे अच्छी...? वाक्य पूरा होता इससे पहले ही वह बोल पड़ीं, फ्यहाँ के मानवीय संबंध मुझे अच्छे लगते हैं। मेरे खुद के ढेरों रिश्ते यहाँ हैं, जो सालों - साल से बरकरार हैं। पिता, भाइर् व दोस्त की तरह। यहाँ के लेखकों ने मुझे प्रभावित किया। असगर वजाहत के साथ हंगरी में 5 साल तक साथ - साथ काम किया। अशोक वाजपेयी, राजेंद्र यादव, अशोक चव्रफधर व जैनेंद्र वुफमार जैसे लेखकों से मेरा संपवर्फ रहा। भारतीय खाने में पूरी, मटर - पनीर भी मुझे पसंद है।य् यहाँ का कौन - सा शहर व कौन - सी पि़फल्में आप को पसंद हैं? नेज्यैशी का जवाब था, फ्दिल्ली तो अपना शहर है, इसलिए वुफछ कहूँगी नहीं। मैं 7 साल बाद दिल्ली आइर् तो सीएनजी का असर देखा। यहाँ का प्रदूषण कम हुआ है, हरियाली बढ़ी है। पांडिचेरी, मैसूर व उदयपुर भी मुझे कापफी पसंद हैं। सच कहूँ तो जहाँ भीड़ कम है, हवा ज्यादा है, वे शहर मुझे पसंद हैं।य् दूवार्ध्76 फ्रही .िपफल्मों की बात तो भारतीय .िपफल्में हंगरी में बहुत कम पहुँचती हैं। वैसे भी पूरे हंगरी में केवल 500 ¯हदुस्तानी हैं। 10 साल पहले तो ये केवल 50 थे। जहाँ तक मेरी बात है तो मुझे .िपफल्म ‘उमराव जान’ कापफी अच्छी लगी। नसीरुद्दीन शाह व शबाना आजमी मुझे अच्छे लगते हैं। शायद इसलिए कि ये कला .िपफल्मों से जुड़े कलाकार हैं। मनोरंजन की शरूरत तो इंसान को कभी - कभी पड़ती है पर कला .िपफल्में ¯जदगी का हिस्सा हैं। आप इनसे मुँह वैफसे मोड़ सकते हैं?य् धमर् और राजनीति के बारे में नेज्यैशी के खयाल पूरी तरह से ताविर्फक हैं। उनके मुताबिक, फ्मैं हर तरह के मंदिर, मस्िजद व चचर् गइर् हूँ, पर मैं न इधर की हूँ, न मैं उधर की। मैंने धमर् के बारे में कापफी वुफछ पढ़ा है और मैं इसके हर रूप से परिचित हूँ। लेकिन हर धमर् का आदर करते हुए भी मैं किसी एक धमर् को नहीं मानती।य् फ्रही राजनीति तो चूँकि मैं समाचार - पत्रा, पत्रिाकाएँ पढ़ती हूँ, खबरिया चैनल देखती हूँ, इसलिए इसके बारे में थोड़ी बहुत समझ है। दरअसल, हंगरी में रहकर आप राजनीति के प्रभावों से बच नहीं सकते। वहाँ पिछले 15 सालों में कापफी बदलाव हुए हैं। लेकिन भारत की राजनीति को समझने के लिए पूरी ¯जदगी चाहिए।य् नेज्यैशी से आख्िार में आधुनिकता को लेकर उनके विचारों के बारे में पूछा। अचरज यह कि उन्होंने आधुनिकता से असहजता जताइर्। उनका कहना था, फ्बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभाव इतना अिाक बढ़ गया है कि जगह की, सामान की खासियत और विविधता खत्म हो गइर् है।य् फ्हर जगह पफास्ट पूफड, एक जैसे साबुन, एक जैसा पेय, एक जैसे शैंपू... यह क्या है? यह ठीक है कि भूमंडलीकरण ने हमें जोड़ा है, इससे हम एक - दूसरे से जुड़े हैं और एक - दूसरे को समझ पा रहे हैं। पर लोग यह क्यों नहीं समझते कि पूरी धरती ही हमारी है। अगर हम इसे खराब करेंगे, तो इसका नतीजा सबको भुगतना होगा। वैफटरीना, सुनामी, विल्मा, भूकंप और भी न जाने क्या क्या?य् फ्मैं एक अनुभव से अपनी बात खत्म करना चाहूँगी। एक बार मैं सूरीनाम के घनघोर जंगलों की तर.पफ गइर्, जहाँ से नदी मागर् के अलावा गुजरने का कोइर् दूसरा रास्ता नहीं था। हमने नाव पकड़ी, कापफी अंदर तक गए। यानी उस इलाके तक गए जहाँ आबादी नहीं थी। बस्ितयाँ, कल - कारखाने नहीं थे, उद्योग - धंधे नहीं थे पर वहाँ भी प्लास्िटक से बनी पानी की एक बोतल तैरती हुइर् मिली।य् फ्मैंने सुना है समुद्र में कहीं एक प्लास्िटक का द्वीप बन गया है, जो जल्द ही महाद्वीप बन जाएगा। हमें सोचना होगा कि इन चीजों का पयार्वरण पर क्या असर होगा। हम ऐसी दुनिया में जिएँगे वैफसे? क्या ऐसे ही विश्व की कल्पना की थी हम सबने? क्या यही विश्व हमें मिलेगा?य् μजय प्रकाश पांडेय दूवार्ध्78 2.अपनी - अपनी पसंद नीचे दी गइर् तालिका में मारिया की और तुम अपनी पसंद लिखो? क्र.सं.मारिया की पसंद तुम्हारी पसंद ;कद्ध भारतीय खाना .........................................;खद्ध शहर .........................................;गद्ध पि़फल्म .........................................;घद्ध कलाकार .........................................;घद्ध भाषा .........................................;चद्ध भारतीय पोशाक .........................................;छद्ध कायर्क्रम .........................................3.क्षमायाचना और श्िाकायत ;कद्ध इस भेंटवातार् की शुरफआत में ही मारिया ने क्षमायाचना क्यों की? ;खद्ध उसने भेंटवातार् की शुरुआत किस तरह की श्िाकायतों से की? ;गद्ध तुम भी कभी क्षमायाचना और श्िाकायतों का व्यवहार करते होगे। बताओं वह कौन - कौन से अवसर होते हैं और किन - किन चीशों के बारे में किस - किस से तुम क्षमा याचना और श्िाकायत करते हो? 4.वुफछ यह भी करो मान लो कि तुम्हारे स्वूफल और किसी अन्य स्वूफल के बीच िकेट मैच हुआ और उसमें तुम्हारे स्वूफल की िकेट टीम की जीत हुइर् हो। मगर, किसी समाचार - पत्रा में खबरें तो सही रूप में तुम्हारे स्वूफल और किसी अन्य स्वूफल के बीच में खेले गए मैचों की छापी गइर् हो और उसके साथ जो तस्वीरें छापी गइर् हों, वह किसी दूसरे मैच में खेलने वाली टीम की हो। इसके लिए तुम श्िाकायत करना चाहो तो क्या - क्या करोगे? 5.झूठ और सच की बात फ्यहाँ के .िपफल्म वाले इतनी छोटी - छोटी बातों पर झूठ बोलते ही नहीं बल्िक झूठ दिखाते भी हंै।य् ऊपर मारिया ने भेंटकतार् से जो बात कही है उसको पढ़ो। अब बताओ कि - ;कद्ध तुम इस बात से कहाँ तक और क्यों सहमत हो? ;खद्ध क्या सिनेमा में झूठ और सच की बातें दिखाना शरूरी होता है? यदि हाँ तो क्यों? 6.साथ - साथ फ्हंगरी मेें संयुक्त परिवार की सोच नहीं है। पति - पत्नी व बच्चे। बच्चे भी केवल 20 साल की उम्र तक माता - पिता के साथ रह सवफते हैं। वुफल मिलाकर एक इकाइर् का छोटा परिवार।य् ऊपर के वाक्यों को पढ़ो और बताओ कि - ;कद्ध भारत में बच्चे कब तक माता - पिता के साथ रह सकते है और क्यों? ;खद्ध तुम्हें अगर हंगरी या किसी अन्य देश में रहने की आवश्यकता हो तो किन - किन चीशों को साथ रखना चाहोगे और क्यों? 7.मातृभाषा नीचे दिए गए शब्दों को अपनी मातृभाषा में लिखो और उन पर अपने मित्रों से चचार् करो - ;कद्ध नमस्ते - ....................;खद्ध घर - ....................;गद्ध सड़क - ...................;घद्ध समाचार - पत्रा - ....................;घद्ध पानी - ....................;चद्ध साबुन - ....................;छद्ध ध्रती - ....................;जद्ध जंगल - ....................;झद्ध सुबह - ....................8.सा.पफ - स.पफाइर् ;कद्ध मारिया को समुद्र में प्लास्िटक के द्वीप और ध्रती को खराब करने वाली चीशों से ¯चता हुइर् है। क्या तुम्हें भी अपने आस - पास में पैफली गंदगी, वूफड़े - कचरे के ढेर और तुम्हारे वातावरण को खराब करने वाली चीशों को देखकर ¯चता होती है? कारण सहित उत्तर दो। ;खद्ध तुम अगर अपने आस - पास, घर, स्वूफल व अपने परिवेश की सा.पफ - स.पफाइर् करना चाहो तो क्या - क्या स्वयं कर सकते हो और क्या - क्या करने में तुम्हें अपने मित्रों, संबंध्ियांे, श्िाक्षकों और अन्य लोगों की सहायता लेनी पड़ सकती है? दूवार्ध्80 9.दो - दो समान अथर् नीचे एक शब्द के दो समान अथर् दिए गए हैं। जैसे - μ ध्रती - पृथ्वी, ध्रा अब तुम भी इन शब्दों के दो - दो समान अथर् लिखो ;कद्ध दोस्त - ................ , ...............;खद्ध माँ- ................ , ...............;गद्ध पानी - ................ , ............... ;घद्ध नारी - ................ , ................ 10.का.पफी या काॅ.पफी? ‘का.पफी’ शब्द का अथर् है - पयार्प्त और ‘काॅ.पफी’ का अथर् होता है एक पेय पदाथर्। दोनों शब्दों की वतर्नी में केवल थोड़ा - सा अंतर होने से अथर् बदल गया है। तुम दिए गए शब्दों को पढ़ो और वाक्य बनाओ। ;कद्ध बाल, बाॅल ;खद्ध हाल, हाॅल ;गद्ध चाक, चाॅक ;घद्ध का.पफी, काॅ.पफी 11.नीचे दिए गए वाक्यों को सही शब्दों से पूरा करो ;कद्ध रमा ने कमरे में पूफल.............. दिए ;सशा/सजाद्ध ;खद्ध माँ दही .............. भूल गइर्। ;शमाना/जमानाद्ध

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1- ikB ls

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2- viuh&viuh ilan

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11.1

3- {kek;kpuk vkSj f'kdk;r

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4- oqQN ;g Hkh djks

eku yks fd rqEgkjs LowQy vkSj fdlh vU; LowQy osQ chp fØosQV eSp gqvk vkSj mlesa rqEgkjs LowQy dh fØosQV Vhe dh thr gqbZ gksA exj] fdlh lekpkj&i=k esa [kcjsa rks lgh :i esa rqEgkjs LowQy vkSj fdlh vU; LowQy osQ chp esa [ksys x, eSpksa dh Nkih xbZ gks vkSj mlosQ lkFk tks rLohjsa Nkih xbZ gksa] og fdlh nwljs eSp esa [ksyus okyh Vhe dh gksA blosQ fy, rqe f'kdk;r djuk pkgks rks D;k&D;k djksxs\

5- >wB vkSj lp dh ckr

¶;gk¡ osQ f-IkQYe okys bruh NksVh&NksVh ckrksa ij >wB cksyrs gh ugha cfYd >wB fn[kkrs Hkh gaSA¸

Åij ekfj;k us HksaVdrkZ ls tks ckr dgh gS mldks i<+ksA vc crkvks fd&

(d) rqe bl ckr ls dgk¡ rd vkSj D;ksa lger gks\

([k) D;k flusek esa >wB vkSj lp dh ckrsa fn[kkuk ”k:jh gksrk gS\ ;fn gk¡ rks D;ksa\

6- lkFk&lkFk

¶gaxjh essa la;qDr ifjokj dh lksp ugha gSA ifr&iRuh o cPpsA cPps Hkh osQoy 20 lky dh mez rd ekrk&firk osQ lkFk jg loQrs gSaA oqQy feykdj ,d bdkbZ dk NksVk ifjokjA¸

Åij osQ okD;ksa dks i<+ks vkSj crkvks fd&

(d) Hkkjr esa cPps dc rd ekrk&firk osQ lkFk jg ldrs gS vkSj D;ksa\

([k) rqEgsa vxj gaxjh ;k fdlh vU; ns'k esa jgus dh vko';drk gks rks fdu&fdu ph”kksa dks lkFk j[kuk pkgksxs vkSj D;ksa\

7- ekr`Hkk"kk

uhps fn, x, 'kCnksa dks viuh ekr`Hkk"kk esa fy[kks vkSj mu ij vius fe=kksa ls ppkZ djks&

(d) ueLrs        &    ---------------------

([k) ?kj          &    ---------------------

(x) lM+d        &    --------------------

(?k) lekpkj&i=k   &    ---------------------

(Ä) ikuh         &    ---------------------

(p) lkcqu        &    ---------------------

(N) /jrh        &    ---------------------

(t) taxy        &    ---------------------

(>) lqcg        &   ---------------------

8- lk-IkQ&l-IkQkbZ

(d) ekfj;k dks leqnz esa IykfLVd osQ }hi vkSj /jrh dks [kjkc djus okyh ph”kksa ls ¯prk gqbZ gSA D;k rqEgsa Hkh vius vkl&ikl esa iSQyh xanxh] owQM+s&dpjs osQ <sj vkSj rqEgkjs okrkoj.k dks [kjkc djus okyh ph”kksa dks ns[kdj ¯prk gksrh gS\ dkj.k lfgr mÙkj nksA

([k) rqe vxj vius vkl&ikl] ?kj] LowQy o vius ifjos'k dh
lk-IkQ&l-IkQkbZ djuk pkgks rks D;k&D;k Lo;a dj ldrs gks vkSj D;k&D;k djus esa rqEgsa vius fe=kksa] lacaf/;kas] f'k{kdksa vkSj vU; yksxksa dh lgk;rk ysuh iM+ ldrh gS\

9- nks&nks leku vFkZ

uhps ,d 'kCn osQ nks leku vFkZ fn, x, gSaA tSls&

11.2

vc rqe Hkh bu 'kCnksa osQ nks&nks leku vFkZ fy[kks

(d) nksLr & ---------------- ] ----------------

([k) ek¡ & ---------------- ] ----------------

(x) ikuh & ---------------- ] ----------------

(?k) ukjh & ---------------- ] ----------------

10- dk-IkQh ;k dkW-IkQh\

^dk-IkQh* 'kCn dk vFkZ gS & i;kZIr vkSj ^dkW-IkQh* dk vFkZ gksrk gS ,d is; inkFkZA nksuksa 'kCnksa dh orZuh esa osQoy FkksM+k&lk varj gksus ls vFkZ cny x;k gSA

rqe fn, x, 'kCnksa dks i<+ks vkSj okD; cukvksA

(d) cky] ckWy

([k) gky] gkWy

(x) pkd] pkWd

(?k) dk-IkQh] dkW-IkQh

11- uhps fn, x, okD;ksa dks lgh 'kCnksa ls iwjk djks

(d) jek us dejs esa iwQy -------------- fn, (l”kk@ltk)

([k) ek¡ ngh -------------- Hkwy xbZA (”kekuk@tekuk)

(x) ?kksM+k -------------- nkSM+rk gSA (rs”k@rst)

(?k) 'khyk us eq>s ,d ------------ dh ckr crkbZA (jkt@jk”k)

(Ä) mfnr flrkj ctkus osQ ------------ esa ekfgj gSA (-IkQu@iQu)

(p) di esa ------------ lh pk; cph FkhA (tjk@”kjk)

12- lapkj ekè;eksa dh nqfu;k

(d) rqe i<+us&fy[kus esa fdu&fdu lapkj ekè;eksa dk mi;ksx djrs gks\

([k) muesa ls rqEgsa lcls mi;qDr D;k vkSj D;ksa yxrk gS\


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