ँआठवापाठ ;छु‘ी के घंटे की आवाश, आठ - दस बच्चे एक दूसरे को ध्क्का देते हँसते, चिढ़ाते बैग लिए भागते हुए चले जाते हैं। बीच - बीच में स्टेज के अंदर से पेफरीवालों की मशेदार लटके भरी आवाशें - चने वुफरमुरे चटखारेदार, येइर् तरावटी आइसक्रीम, ख‘ी गोलियाँ, ठंडा शरबत, नीबू - संतरे का...अजय और नरेंद्र आते हैंμउम्र नौ - दस वषर् अजय दुबला, नरेंद्र तगड़ा...लगातार चटर - मटर की आवाश करता नरेंद्र चूरन खा रहा है।द्ध नरेंद्र: अरे अजय! तू तो इस समय ;नकल करकेद्ध रोश लेफ्रट - राइट, पाजामा ढीला टोपी टाइट - करता रहता है न! आज अभी वैफसे? डंडी मार दी न बच्चू - वैफसा पकड़ा? और ड्रामे से भी निकाल दिया क्या टीचर ने? ऐ? अजय: नहीं, आज मम्मी की तबियत वुफछ खराब थी, मैंने टीचर से कहा तो उन्होंने मुझे छु‘ी दे दी। मेरा पाटर् मुझे याद भी था न! मैंने सोचा मम्मी तो रोश मुझे चाय - नाश्ताकराती हैं, आज मैं घर जल्दी पहुँचकर उन्हें चाय बनाकर पिलाऊँ तो किती खुश होगी वह! नरेंद्र: ;बिना सुनेद्ध वाह! ले इसी बात पर चूरन खाμबड़ा मशेदार है। लेकिन एक बात बता यार! आख्िार तू सारे दिन इतनी पढ़ाइर् - लिखाइर्, ड्रामा - डिबेट की मशक्कत आख्िार काहे को करता है? ऐं मुझे देख - क्या मौश भरी ¯जदगी हैμसैर सपाटा, खेल तमाशा। ;इसके साथ ही एक आदमी थोड़े से लाली पाॅप बेचता हुआ आता है - पचास पैसे में तीन लाली पाॅप, पचास पैसे में तीन...द्ध नरेंद्र: ;चैंककरद्ध अरे सुना है तूने? पचास पैसे में तीन यानी एक रुपये में छह लाली पाॅप! मशा आ गया...पर मेरे तो सारे पैसे ही खत्म हो गए, चूरन, चुस्की, आइसक्रीम ले ली - सुन, तेरे पास होंगे वुफछ पैसे? अजय: एक भी नहीं। नरेंद्र: अरे उधर दे दे, उधरμकल पाँच पैसे श्यादा लौटा दूँगा। समझ क्या रखा है ;रुक करद्ध सुन रिक्शे के तो होंगे? अजय: हाँ हंै तोμपर रिक्शे के पैसों के लाली पाॅप खरीद लूँ मैं? यह तो ची¯टग होगी। नरेंद्र: अरे बाप रे! तू तो हरिशचंद्र जी का भी पड़दादा निकला। माँगे पैसे, देने लगा सीख! शुरू कर दी अपनी महाबोर स्पीच, मत दे, मत दे, ठीकμमैंने पफीस नहीं दी। आज उसके पैसे तो हैं ही। अजय: ;समझाते हुएद्ध देख नरेंद्र! तू हमेशा बिना सोचे समझे काम कर डालता है। मेरी बात मान, इस आदमी से लाली पाॅप लेना बिल्वुफल ठीक नहींμमुझे लगता है या तो यह कहीं से चुराकर लाया है या कहीं से नुकसानदेह खराब माल उठा लाया हैμमेरी मम्मी कहती है...नरेंद्र: ;बात काटकरद्ध अरे! पिफर तुझे तेरी मम्मी याद आ गइर्μमेरी बात मानेगा? तू शरा अपने दूसरे कान से भी तो वुफछ काम लिया कर..अजय: क्या मतलब? नरेंद्र: ;हँसकरद्ध एक कान से सुनी, दूसरे कान से निकाल दीμसमझा? अजय: समझा! अब से तेरी बात के लिए ही यह दूसरा कान काम में लाऊँगा.. ;दोनों शोर से हँसते हैंद्ध नरेंद्र: सचमुच तू शरूरत से श्यादा सोचता हैμइसी से ;उँगली दिखाकरद्ध दुबला सीकिया हैμमुझे देख - ह‘ा - क‘ा दारा ¯सह का पऋा - रुस्तमे¯हद ;हँसता हैद्ध अरे देख लाली पाॅप वाला निकल गया तेरी बातों में अरे वो..वो जा रहा है, रुकना भाइर्। हाँ अजय, तू ठहर मैं अभी ले के आया। और हाँ मैंने अपने रिक्शे के पैसों की तो चूरन - चुसकी खा ली। प्लीज अपने साथ ही रिक्शे से लेते चलना मुझेμबस अभी आता हूँ..;जाता हैद्ध ;अजय इध्र - उध्र टहलता बेसब्री से इंतजार करता हैद्ध अजय: इस नरेंद्र को कभी अक्ल नहीं आयेगी। सब सड़ी - गली चीशें खाएगा और वाष्िार्क परीक्षाओं में बीमार पड़ेगा...आँटी डाँटती हैं तो पफट झूठ बोल जाएगाμबेचारी आँटीμदेख..अभी तक नहीं आया ..;दो - तीन बच्चे आते हैंद्ध पहला लड़का: अरे अजय! तू तो कब का टीचर से छु‘ी लेकर आया था, यहाँ क्या कर रहा है? अजय: क्या करूँ, मुझे खुद इतनी देर हो रही हैμनरेंद्र कब जाना है। दूसरा लड़का: कौन नरेंद्र? उसे तो मैंने कापफी देर पहले एक आदमी के साथ पीछे वाले आम के बगीचे में जाते देखा थाμमैंने पूछा भी तो बोला इसके पास छु‘े पैसे नहीं, वही लेने जा रहा हूँ..तीसरा लड़का: अरे तू घर जा...नरेंद्र को जानता नहीं? उसके पेफर में पड़ा तो अपनी भी शामत आइर् समझ। आता है तो आ जा मेरे साथ तुझे तेरे घर छोड़ दूँगा। अजय: ;सोचते हुएद्ध नहीं सुभाष! मुझे डर है कहीं वह आदमी कोइर् बदमाश तो नहीं...;लड़कों सेद्ध तुम लोग शरा आओ नμदेखा जाए कहीं नरेंद्र..पहला: ना बाबा ना, यह जासूसी हमें नहीं करनी वैसे ही देर हो गइर् है, मेरी मम्मी मानने वाली नहीμअपन तो चले, नरेंद्र की नरेंद्र जानें, जैसा करेगा वैसा भरेगा, हम क्यों अपनी जान खतरे में डालें। दूसरा: ;तीसरे सेद्ध चल हम भी जल्दी चलें, नरेंद्र के पेफर में कहीं भी आपफत में पँफसे तो खैर नहीं...बाॅय अजय..;जाते हैंद्ध अजय: ;थका, उदास - परेशान होकर इध्रμउध्र टहलता हैद्ध कहाँ गया नरेंद्र आख्िार? अब तो बहुत देर हो गइर्, रास्ता भी सुनसान हो गया..स्वूफल में भी कोइर् नहीं! किससे पूछूँ? ;तभीद्ध अरे! यह सरसराहट वैफसी? आम के बगीचे से ही आ रही है। छुपकर बगीचे की ओर चलता हूँ आख्िार नरेंद्र गया किधर? ;जाता हैद्ध ;नरंेद्र की मम्मी रेखा, अजय की मम्मी मिसेज मेहता के घर आती हैंद्ध मिसेज मेहता: कौन रेखा जी? नमस्ते, आइए बैठिए। आपका अजय आ गया? मेरा नरेंद्र अभी तक स्वूफल से नहीं लौटा..मिसेज मेहता: आया तो अजय भी नहीं, पर उसे सालाना जलसे की प्रैक्िटस में देर हो जाया करती है, लेकिन आज मेरी तबियत भी ठीक नहीं थी। सुबह...अजय कह गया था टीचर से जल्दी छु‘ी माँग लूँगा...शायद टीचर ने छु‘ी नहीं दी और नरंेद्र भी उसके साथ रुक गया हो। रेखा: नहीं बहन... नरेंद्र शरा शरारती है न। इसी से डर लग रहा है... देख्िाए एक बजे छु‘ी होती है, ढाइर् बज रहे हैं..मिसेज मेहता: क्या सचमुच? मुझे तो दवा खाकर नींद आ गइर् थी, समय का पता ही नहीं चला, इतनी देर तो अजय को भी नहीं होनी चाहिए। रेखा: ;रोने के स्वर मेंद्ध वुफछ कीजिए जल्दी, मिसेज मेहता! हाय मेरा नरेंद्र..मिसेज मेहता: घबराइए नहीं, रेखा जी - देख्िाए मेरा बेटा भी तो है लेकिन अजय पर तो मुझे पूरा विश्वास है...ठहरिए...रिक्शा लेकर चलते हैं...देर सचमुच कापफी हो गइर् है। ़रेखा: ;जल्दी सेद्ध आप आइए, तब तक मैं रिक्शा बुलाती हूँ। ;रेखा रिक्शा बुलाने के लिए पीछे की ओर मुड़ती है, तब तक सामने देखकर खुशी से चीख पड़ती है।द्ध रेखा: आ गए! आ गए! बहन बच्चे, देख्िाए..मिसेज मेहता: सच? अरे हाँ, पर दोनों के साथ ये पुलिस इंस्पेक्टर! ;भारी बूट की आवाश के साथ इंस्पेक्टर आता हैद्ध इंस्पेक्टर: ;भारी आवाश मेंद्ध मिस्टर मेहता का घर है यह? मिसेज मेहता: जी - जी हाँ... कहिए! ये बच्चे आपको कहाँ मिले? इंस्पेक्टर ;अजय की ओर संकेत करद्ध - बच्चा आपका है? मिसेज मेहता: जी हाँ - अजय है इसका नाम... क्या किया इसने? इंस्पेक्टर: आज तो इसने वो शाबाशी का काम किया है कि आप सुनेंगी तो गवर् से झूम उठेंगी..मिसेज मेहता: क्या? मैं तो इस पर नाराश हो रही थी कि समय से घर नहीं लौटा। इंस्पेक्टर: ;हँसकरद्ध आज अजय ने अपने इस दोस्तμक्या नाम है इसकाμ नरेंद्र की जान बचाइर् है और एक बड़े गिरोह के सरदार को पकड़वाया है। मिसेज मेहता: ओह! वो वैफसे इंस्पेक्टर साहब? इंस्पेक्टर: अब ये सब तो आप खुद अजय से सुनिएμहाँ सुना दो बेटे...? अजय: मम्मी! आज मैंने टीचर से जल्दी छु‘ी माँग ली कि तुम्हारी तबियत खराब है, पर बाहर आया तो नरेंद्र मिल गया। पफाटक पर एक आदमी पचास पैसे में तीन लाली पाॅप बेच रहा था। मैंने नरेंद्र को मना किया, पर यह इतने सस्ते लाली पाॅप सुनकर अपने को रोक नहीं पाया...चला गया...;साँस लेने को रफकता हैद्ध रेखा: पिफर? अजय: पिफर आंटी, मैं बहुत देर तक खड़ा रहा। सब ओर सुनसान हो गयाμतब दूर पर मुझे कुछ सरसराहट मालूम हुइर्। इसके पहले मेरे एक दोस्त ने बताया था कि नरेंद्र आम के बगीचे की तरप़्ाफ लाली पाॅप वाले से छु‘े पैसे लेने गया है। रेखा: तो ... पिफर तूने क्या किया बेटे? अजय: मैं छुपते - छुपते दबे पाँव बगीचे में गया तो नरेंद्र का बैग पड़ा मिला, देखकर मैं हैरान रह गया। मुझे शक हुआμतभी देखा तो दूर पर वही आदमी एक बड़ा - सा थैला पीठ पर रखे काली - भूरी चैक की चादर ओढ़े चला जा रहा था...मम्मी मुझे तुम्हारी सुनाइर् उन बदमाशों की कहानियाँ याद हो आईं जो बच्चों को उठाकर ले जाते हैं...रास्ता सूना था, इसलिए मैं चुपचाप उसके कापफी पीछे बिना आवाश किए चलता रहा। मिसेज मेहता: पिफर? अजय: चलते - चलते मेरे पैर बिलवुफल थक गए...तभी वह आदमी अचानक एक सुनसान पतली सड़क पर मुड़ गया.. मेरी समझ में नहीं आया क्या करूँ..तभी देखा तो सीध्ी सड़क पर वुफछ दूर पर पुलिस स्टेशन की लाल इमारत दिखाइर् दी। मैं समझ गया कि तभी यह आदमी सँकरी सड़क पर मुड़ गया...मेरा शक पक्का हो गया। मैं पूरी तेशी से दौड़ा और...और इंस्पेक्टर साहब को...;हाँपफने लगता हैद्ध इंस्पेक्टर: वाह अजय बेटे वाह! सुना आपने मिसेस मेहता..रेखा: अजय मेरे बेटे, आज तू न होता तो नरेंद्र का क्या हाल होता? ;सिसकीद्ध मिसेज मेहता: ;हँसकरद्ध अरे तो दोस्त होकर इतना भी न करता रेखा बहन, पिफर दोस्ती का मतलब ही क्या रहा, अगर मुसीबत में दोस्त दोस्त के काम न आए। रेखा : नहीं, आज मैं अपने साथ बाजार ले जाउँफगी अजय को। और इसे इसके मन का शानदार इनाम खरीदूँगी। इंस्पेक्टर : शानदार इनाम तो अजय को प्रधनमंत्राी से मिलेगा। सब ;एक साथद्ध: क्या? इंस्पेक्टर : जी हाँ, हर साल हमारी सरकार देश के बहादुर बच्चों को उनके साहसिक कायर् के लिए पुरस्कार देती हैμइस बार अजय का नाम उनमें होगा। अच्छा तो आज्ञा दीजिए...आओ अजय बेटे, एक बार पिफर पीठ ठोंक दूँ तुम्हारी! अजय : थैंक्यू इंस्पेक्टर साहब...पर अभी तो आपकी पहली बार की ठोंकी हुइर् ही मेरी पीठ ददर् कर रही है.. मिसेज मेहता : ;प्यार सेद्ध चुप ;सब हँसते हैंद्ध! μ सूयर्बाला 1.पाठ से ;कद्ध नरंेद्र के सारे पैसे क्यांे खत्म हो गए? ;खद्ध अजय ने नरेंद्र को क्या और क्यों समझाया? ;गद्ध अजय के अन्य दोस्तों ने नरेंद्र के बारे में क्या कहा और क्यों? 2.क्या होता? ;कद्ध अगर नरंेद्र के पास .पफीस के पैसे न होते? ;खद्ध अगर नरेंद्र अजय की यह बात मान लेता कि इस आदमी से लाली पाॅप लेना बिल्वुफल ठीक नहीं। ;गद्ध अगर अजय तीसरे लड़के की यह बात मान लेता कि फ्अरे तू घर जा नरेंद्र को जानता नहीं?य् ;घद्ध अगर नरेंद्र की मुलाकात छु‘ी के बाद अजय से नहीं होती? 3.विश्वास और डर फ्नरेंद्र शरा शरारती है न इसी से डर लग रहा है।य् ;कद्ध नरेंद्र की माँ रेखा अजय की माँ से ऐसा क्यों कहती है? ;खद्ध नरेंद्र में ऐसा कौन - सा गुण होता जिससे उसकी माँ नहीं डरती और अजय की माँ से यह नहीं कहती कि नरेंद्र शरा शरारती है। फ्घबराइए नहीं, रेखा जी - देख्िाए मेरा बेटा भी तो है लेकिन अजय पर तो मुझे पूरा विश्वास हैय् ;गद्ध अजय की माँ नरेंद्र की माँ से ऐसा क्यांे कहती है? 4.सैर - सपाटा, खेल - तमाशा बनाओ। 5.बनाना फ्मैंने सोचा मम्मी तो रोश मुझे चाय - नाश्ता कराती है, आज मैं घर जल्दी पहँुचकर उसे चाय बनाकर पिलाऊँ।य् उफपर के वाक्य को पढ़ो और बताओ कि - ;कद्ध क्या तुम चाय बनाना जानते हो? और क्या - क्या बनाना जानते हो? ;खद्ध अगर तुम अपने खाने - पीने की कोइर् भी चीश बनाना नहीं जानते तो तुम्हें जो चीश सबसे अध्िक पसंद हो, उसको बनाना सीखो और उसकी विध्ि को लिखकर बताओ। 6.पता करो नीचे तालिका दी गइर् है। पता करो कि खाने की उन चीशों में कौन से पोषक तत्व होते हैं। उसे तालिका में लिखो। क्रम सं खाने की चीशों पोषक तत्व ;कद्ध पालक ......................................... ;खद्ध गाजर ......................................... ;गद्ध दूध् ......................................... ;घद्ध संतरा ......................................... ;घद्ध दालें ......................................... 7.मुहावरे की बात नीचे वुफछ वाक्य दिए गए हैं जिनमें उपयुक्त मुहावरे भरने से ही वह पूरा हो सकता है। उन्हें पूरा करने के लिए मुहावरे भी दिए गए हैं। तुम सही मुहावरे से वाक्य पूरे करो। आग बबूला होना, सकपकाना, दबे पाँव, शामत आना, पीठ ठोकना ;कद्ध चोर ............... घर में घुस आया। ;खद्ध देर से आने पर मम्मी ............... गईं। ;गद्ध सरसराहट की आवाश सुनकर अजय ............... । ;घद्ध ऊध्म मचाने पर बच्चों की ............... । ;घद्ध नरेंद्र की जान बचाने पर उसकी मम्मी ने अजय की ...............। 8. तुम्हारा स्वूफल ;पद्ध तुम्हारे स्वूफल में जो गतिविध्ि कराइर् जाती हो और वह इस तालिका में हो तो उसके सामने ;3द्ध या ;×द्ध का निशान लगाओ। क्रम सं गतिविध्ि ऽया × ;कद्ध ;खद्ध ;गद्ध ;घद्ध ;घद्ध नाटक खेल - वूफद गीत - संगीत नृत्य चित्राकला ..............................................................................

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1- ikB ls

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([k) vt; us ujsanz dks D;k vkSj D;ksa le>k;k\

(x) vt; osQ vU; nksLrksa us ujsanz osQ ckjs esa D;k dgk vkSj D;ksa\

2- D;k gksrk\

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(?k) vxj ujsanz dh eqykdkr Nqêðh osQ ckn vt; ls ugha gksrh\

3- fo'okl vkSj Mj

¶ujsanz ”kjk 'kjkjrh gS u blh ls Mj yx jgk gSA¸

(d) ujsanz dh ek¡ js[kk vt; dh ek¡ ls ,slk D;ksa dgrh gS\

([k) ujsanz esa ,slk dkSu&lk xq.k gksrk ftlls mldh ek¡ ugha Mjrh vkSj vt; dh ek¡ ls ;g ugha dgrh fd ujsanz ”kjk 'kjkjrh gSA

¶?kcjkb, ugha] js[kk th&nsf[k, esjk csVk Hkh rks gS ysfdu vt; ij rks eq>s iwjk fo'okl gS¸

(x) vt; dh ek¡ ujsanz dh ek¡ ls ,slk D;kas dgrh gS\

4- lSj&likVk] [ksy&rek'kkthings

i<+us&fy[kus ;k vU; dke djus osQ fy, Hkh vPNs LokLF; dk gksuk ”k:jh gSA blfy, yksx lSj&likVk vkSj [ksy&rek'ks ij Hkh è;ku nsrs gSaA vc rqe crkvks fd

(d) rqe ;k rqEgkjs nksLr lSj&likVs osQ fy, D;k&D;k djrs gSa\

([k) rqeus vc rd ftu&ftu [ksy&rek'kksa esa Hkkx fy;k gS ;k mls ns[kk gS] mldh lwph cukvksA

5- cukuk

¶eSaus lkspk eEeh rks jks”k eq>s pk;&uk'rk djkrh gS] vkt eSa ?kj tYnh ig¡qpdj mls pk; cukdj fiykÅ¡A¸

mQij osQ okD; dks i<+ks vkSj crkvks fd&

(d) D;k rqe pk; cukuk tkurs gks\ vkSj D;k&D;k cukuk tkurs gks\

([k) vxj rqe vius [kkus&ihus dh dksbZ Hkh ph”k cukuk ugha tkurs rks rqEgsa tks ph”k lcls vf/d ilan gks] mldks cukuk lh[kks vkSj mldh fof/ dks fy[kdj crkvksA

6- irk djks

uhps rkfydk nh xbZ gSA irk djks fd [kkus dh mu ph”kksa esa dkSu ls iks"kd rRo gksrs gSaA mls rkfydk esa fy[kksA

8.1

7- eqgkojs dh ckr

uhps oqQN okD; fn, x, gSa ftuesa mi;qDr eqgkojs Hkjus ls gh og iwjk gks ldrk gSA mUgsa iwjk djus osQ fy, eqgkojs Hkh fn, x, gSaA rqe lgh eqgkojs ls okD; iwjs djksA

vkx ccwyk gksuk] ldidkuk] ncs ik¡o] 'kker vkuk] ihB Bksduk

(d) pksj --------------- ?kj esa ?kql vk;kA

([k) nsj ls vkus ij eEeh --------------- xb±A

(x) ljljkgV dh vkok”k lqudj vt; --------------- A

(?k) Å/e epkus ij cPpksa dh --------------- A

(Ä) ujsanz dh tku cpkus ij mldh eEeh us vt; dh --------------- A

8- rqEgkjk LowQy

(i) rqEgkjs LowQy esa tks xfrfof/ djkbZ tkrh gks vkSj og bl rkfydk esa gks rks mlosQ lkeus () ;k () dk fu'kku yxkvksA

8.2



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